Get the most accurate UP Board Solutions for Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 12 Sociology. Our expert-created answers for Class 12 Sociology are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार UP Board Solutions for Class 12 Sociology
For Class 12 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Sociology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार solutions will improve your exam performance.
Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Sociology Chapter 22 Poverty: Causes And Remedies (निर्धनता : कारण तथा उपचार)
विस्तृत उत्तीय प्रश्न (6 अंक)
Question 1. निर्धनता की परिभाषा दीजिए। भारत में निर्धनता के कारणों का वर्णन कीजिए।
या
ग्रामीण गरीबी से क्या आशय है? भारतीय संदर्भ में गरीबी के परिणामों की व्याख्या कीजिए।
या
निर्धनता की परिभाषा दीजिए। भारत में निर्धनता के दुष्परिणामों का वर्णन कीजिए। या निर्धनता क्या है ? भारत में इसकी वृद्धि के कारणों पर प्रकाश डालिए।
या
निर्धनता के दो सामाजिक कारण बताइए।
या
भारत में निर्धनता के कारणों का वर्णन कीजिए।
या
बेरोजगारी निर्धनता का आधारभूत कारण है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer: निर्धनता अथवा गरीबी एक सामाजिक समस्या है, जो आज भारत तथा अन्य विकासशील देशों में ही चिन्ता का विषय नहीं है, अपितु विकसित देशों में भी यह एक समस्या के रूप में विद्यमाने है। निर्धनता का सम्बन्ध निम्न जीवन-स्तर से है तथा जिसके पास अपनी मूल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी धन नहीं है, उसे निर्धन कहा जा सकता है।
निर्धनता का अर्थ एवं परिभाषाएँ निर्धनता वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी तथा अपने पर आश्रित सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति धनाभाव के कारण नहीं कर पाता है। इसके कारण व्यक्तियों के जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएँ भी उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इसे प्रमुख विद्वानों ने निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है गिलिन तथा गिलिन के अनुसार, “निर्धनता वह दशा है जिसमें एक व्यक्ति अपर्याप्त आय या विचारहीन व्यय के कारण अपने जीवन-स्तर को इतना ऊँचा नहीं रख पाता, जिससे उसकी शारीरिक व मानसिक कुशलता बनी रहे और वह तथा उसके आश्रित समाज के स्तर के अनुसार जीवन व्यतीत कर सकें । | गोडार्ड के अनुसार, “निर्धनता उन वस्तुओं का अभाव या अपर्याप्त पूर्ति है जो एक व्यक्ति तथा उसके आश्रितों के स्वास्थ्य और कुशलता को बनाये रखने के लिए आवश्यक है।”
अतः निर्धनता वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी तथा अपने आश्रितों की आवश्यकताओं की पूर्ति, स्वास्थ्य तथा शारीरिक व मानसिक क्षमता को बनाये रखने में धनाभाव के कारण असमर्थ है। निर्धनता के दो प्रकार हैं – प्राथमिक निर्धनता तथा द्वितीयक निर्धनता । प्राथमिक निर्धनता में धनाभाव के कारण व्यक्ति अपना तथा अपने आश्रितों का जीवन-स्तर बनाये नहीं रख पाता, जब कि द्वितीयक निर्धनता में व्यक्ति अपव्यय के कारण अपना जीवन-स्तर बनाये नहीं रख पाता है।
भारत में निर्धनता की वृद्धि के कारण
भारत में निर्धनता के अनेक कारण हैं। इन कारणों की विवेचना अग्रलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत की जा सकती है
(अ) सामाजिक कारण (वैयक्तिक कारण) ऐसा कहा जाता है कि निर्धनता का कारण स्वयं भारतीय समाज में विद्यमान है। निर्धनता को निम्नलिखित सामाजिक कारण प्रोत्साहन देते हैं
1. जाति-प्रथा - जाति - प्रथा भारतीय समाज में निर्धनता का प्रमुख कारण रही है। निम्न जातियों में व्यक्तियों को योग्यतानुसार अपना व्यवसाय चुनने का अधिकार नहीं था। उच्च जाति वाले उनका सामाजिक व आर्थिक रूप से शोषण भी करते थे। अतः जाति-प्रथा प्रगति में सदैव एक बाधा रही है।
2. संयुक्त परिवार प्रणाली - संयुक्त परिवार प्रणाली के दोष भी पर्याप्त सीमा तक निर्धनता के लिए उत्तरदायी रहे हैं। बाल-विवाह, बच्चे पैदा करने की होड़, व्यावसायिक गतिशीलता का अभाव तथा आलसी सदस्यों की संख्या में वृद्धि जैसे दोष निर्धनता के कारण माने जा सकते हैं।
3. दोषपूर्ण शिक्षा - पहले तो अशिक्षा और अज्ञानता ही निर्धनता का कारण है। दूसरे, जो शिक्षा-पद्धति हमारे देश में प्रचलित है वह दोषपूर्ण है तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण व स्व रोजगार हेतु सहायक नहीं है।
4. सामाजिक बुराइयाँ - सामाजिक बुराइयाँ भी निर्धनता की जड़ हैं। दहेज-प्रथा, जाति-प्रथा, बाल-विवाह, महिलाओं का अशिक्षित होना तथा घर से बाहर नौकरी न करना आदि निर्धनता को बनाये रखने वाली बुराइयाँ हैं।
5. अज्ञानता व अन्धविश्वास - निर्धनता का एक अन्य कारण अज्ञानता वे अन्धविश्वास है। व्यक्ति गरीबी को भगवान का दिया हुआ अभिशाप समझ लेता है और इसे दूर करने का प्रयास ही नहीं करता। धार्मिक कर्मकाण्डों में होने वाला अपव्यय भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को निम्न बनाये रखता है।
6. अत्यधिक जनसंख्या - भारत में निर्धनता का एक अन्य कारण जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होना है। उत्पादन के अनुपात में जनसंख्या की वृद्धिदर कहीं अधिक है, जब कि रोजगार के उतने अधिक अवसर नहीं बढ़ पा रहे हैं, जिससे निर्धनता बनी हुई है।
(ब) आर्थिक कारण
निर्धनता के अनेक आर्थिक कारण भी हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं
1. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता - भारतीय समाज कृषि-प्रधान समाज है। ग्रामीण जनता कृषि तथा इससे सम्बन्धित व्यवसायों पर ही आश्रित रही है। कृषि प्राकृतिक साधनों पर आधारित है। संयुक्त परिवार प्रणाली के कारण सभी सदस्य कृषि पर निर्भर रहते हैं तथा यदि सूखा पड़ जाता है, बाढ़ आ जाती है या कोई प्राकृतिक प्रकोप हो जाता है तो उत्पादन वैसे भी कम होता है। ऊपर से देखने पर तो वे कृषक हैं, परन्तु उत्पादन उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
2. अपर्याप्त उत्पादन - कृषि के पिछड़ेपन के कारण तथा प्रकृति पर निर्भरता के कारण उत्पादन कम होता है। भारत में दो-तिहाई जनसंख्या कृषि करती है, फिर भी अनाज की कमी
रहती है। इससे निर्धनता बनी रहती है।
3. उद्योगों को असन्तुलित विकास - निर्धनता का एक अन्य कारण उद्योगों का असन्तुलित विकास है। एक तो उद्योगों पर केवल 10-15 प्रतिशत जनसंख्या ही निर्भर है और दूसरे उद्योगों का संकेन्द्रण कुछ बड़े-बड़े नगरों में ही होता जा रहा है। यह असन्तुलित विकास ग्रामीणों को रोजगार देने में सहायक नहीं है।
4. धन का कुछ ही हाथों में संचय - निर्धनता का एक कारण धन का दोषपूर्ण संचय भी है। भारत में अमीर तो और अमीर होते जा रहे हैं, जब कि गरीब और अधिक गरीब । पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक घरानों की पूंजी में अत्यधिक वृद्धि हुई है। कुछ लोग धन होते हुए भी जेवरों इत्यादि की खरीद में इसे व्यय कर देते हैं, जिससे व्यापार या उद्योग में उस पैसे का उपयोग नहीं हो पाता।
5. प्राकृतिक प्रकोप - भारत में प्राकृतिक प्रकोप भी निर्धनता का कारण है। एक वर्ष सूखा पड़ता है तो दूसरे वर्ष बाढ़ जा जाती है। इससे निर्धनों का संचित धन इन प्रकोपों का सामना करने में ही व्यय हो जाता है।
6. प्राकृतिक साधनों का अपूर्ण दोहन - भारत में विशाल प्राकृतिक सम्पदा है, परन्तु उसका पूरी तरह से दोहन न हो पाने के कारण लाखों-करोड़ों लोग रोजगार से वंचित रह जाते हैं। इससे भी निर्धनता बढ़ती है।
7. कालाबाजारी - भारत में निर्धनता का कारण कालाबाजारी भी है। इस कालाबाजारी के कारण निर्धनता को दूर करने के सरकारी उपाय सफल नहीं हो पाते हैं। निम्न वर्ग के लोगों पर कालाबाजारी का असर अधिक पड़ता है।
(स) व्यक्तिगत कारण
निर्धनता के कुछ व्यक्तिगत कारण भी हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं
1. आलस्य - जो व्यक्ति आलसी होते हैं तथा आलस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करने के आदी हैं, वे प्रायः निर्धन ही होते हैं; क्योंकि ऐसे व्यक्ति कार्य करना ही नहीं चाहते।
2. मद्यपान - कुछ लोग मद्यपान में अपनी सारी आय खर्च कर देते हैं। उनकी तथा उनके आश्रितों की कोई मूल आवश्यकता पूरी हो या न हो, वे मद्यपान पर पैसा जरूर खर्च करते हैं। इससे व्यक्तिगत और पारिवारिक विघटन होने लगता है। अन्ततः मद्यपान भी निर्धनता का कारण बन जाता है।
3. बेरोजगारी - बेरोजगारी भी निर्धनती का व्यक्तिगत कारण है। व्यक्ति किसी काम को करने । के योग्य है, परन्तु उसे काम मिल ही नहीं पाता, जिससे वह निर्धन ही रहता है।
4. शारीरिक दोष व बीमारियाँ - शारीरिक व मानसिक दोष तथा बीमारी भी निर्धनता का कारण है। इन दोषों के कारण जीविकोपार्जन में बड़ी कठिनाई पैदा हो जाती है। अगर एक व्यक्ति परिवार में कमाने वाला हो और वह लम्बी अवधि के लिए बीमार हो जाता है तो भी निर्धनता का सामना करना पड़ता है।
(द) प्राकृतिक व भौगोलिक कारण
निर्धनता के लिए कुछ प्राकृतिक व भौगोलिक कारण भी उत्तरदायी हैं। इनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं
1. प्रतिकूल जलवायु - प्रतिकूल जलवायु भी निर्धनता का एक कारण है। जिन प्रदेशों में सदैव बर्फ पड़ी रहती है तथा रेगिस्तान या पहाड़ होते हैं, वहाँ पर निर्धनता अधिक पायी जाती है, क्योंकि वहाँ उत्पादन और रोजगार के अवसर कम होते हैं।
2. प्राकृतिक विपत्तियाँ - प्राकृतिक विपत्तियाँ; जैसे – भूकम्प, तूफान, बाढ़, सूखा, विस्फोट या महामारी इत्यादि; भी निर्धनता के कारण हो सकती हैं, क्योंकि ऐसे समय में बचाया हुआ पैसा तो खर्च हो जाता है और आगे कुछ धन इत्यादि मिलता ही नहीं है।
3. प्राकृतिक साधनों की कमी - प्रतिकूल जलवायु की तरह प्राकृतिक साधनों की कमी निर्धनता का एक कारण हो सकती है। जिन स्थानों पर प्राकृतिक साधनों की कमी होती है, वहाँ निर्धनता बहुत अधिक होती है, क्योंकि उत्पादन कम होता है। निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि निर्धनता किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, अपितु इसे लाने तथा इसे बनाये रखने में अनेक कारक सहायता प्रदान करते हैं।
निर्धनता के दुष्परिणाम
1. निर्धनता अपराध को प्रोत्साहन देती है। निर्धन व्यक्ति अपनी तथा अपने आश्रितों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गैर-कानूनी काम करने लगता है और इस प्रकार वह अपराध की ओर प्रवृत्त हो जाता है।
2. निर्धनता बाल-अपराध का भी कारण है। जिन परिवारों के बालक निर्धनता के कारण अपनी आवश्यकताएँ पूरी नहीं कर पाते, वह बाल-अपराध की ओर प्रवृत्त होने लगते हैं और बाल अपराधी बन जाते हैं। बचपन से अवैध ढंग से धन कमाने में लग जाने के कारण बाल अपराधों को बढ़ावा मिलता है।
3. निर्धनता अनेक दुर्व्यसनों की जननी है। मद्यपान, जुआ, सट्टा, वेश्यावृत्ति जैसे दुर्व्यसन भी निर्धनता के परिणाम हैं।
4. निर्धनता व्यक्ति को अथवा उसके आश्रितों को अनैतिक कार्य करने पर विवश कर देती है, जिससे व्यक्ति के चरित्र का पतन होता है।
5. निर्धनता भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहन देती है, क्योंकि जब व्यक्ति अत्यन्त मजबूर हो जाता है तो वह भिक्षावृत्ति द्वारा अपना तथा अपने आश्रितों का पेट पालने लगता है।
6. निर्धनता से वैयक्तिक विघटन को प्रोत्साहन मिलता है तथा निराशा के कारण व्यक्ति मानसिक रोगी हो जाता है अथवा कई बार आत्महत्या तक कर लेता है।
7. निर्धनता के कारण पारिवारिक विघटन होते हैं, क्योंकि सदस्यों में अनैतिकता तथा अविश्वास की वृद्धि होती है तथा वातावरण कलहपूर्ण एवं दूषित बन जाता है।
8. वैयक्तिक तथा पारिवारिक विघटन का प्रभाव पूरे समुदाय पर पड़ता है और निर्धनता अन्ततः सामुदायिक विघटन को प्रोत्साहन देती है। समुदाय को बनाये रखने वाले आदर्श प्रभावहीन हो जाते हैं।
9. निर्धनता के कारण व्यक्ति में ग्लानि का बोध होता है। वह स्वयं को समाज पर भार मानकर आत्महत्या तक कर डालता है।
10. निर्धनता बेरोजगारी को जन्म देती है। साधनविहीन व्यक्ति आजीविका कमाने में असमर्थ रहकर बेरोजगार बना रहता है।
11. निर्धनता के कारण समाज में अनैतिकता और व्यभिचार का बोलबाला हो जाता है। अनेक महिलाएँ निर्धनता से तंग आकर अपने भरण-पोषण के लिए वेश्यावृत्ति तक करने पर विवश हो जाती हैं।
12. निर्धनता के कारण व्यक्ति को भरपेट भोजन ही नहीं मिल पाता । सन्तुलित भोजन के अभाव में उसे कुपोषण का शिकार होना पड़ता है तथा उसका शरीर अनेक रोगों का शिकार बन जाता है।
In simple words: Poverty is a state where individuals cannot meet basic needs due to lack of money, impacting physical and mental well-being. It arises from social factors like caste system and large families, economic factors like agricultural dependence and imbalanced industrial growth, personal factors like laziness and alcoholism, and natural factors like climate and disasters. Poverty leads to crime, child delinquency, addiction, moral degradation, and family breakdown.
🎯 Exam Tip: When defining poverty and its causes/consequences, ensure you cover social, economic, personal, and environmental factors. Providing a clear definition and categorizing the causes and effects will fetch higher marks.
Question 2. “निर्धनता सभी बुराइयों की जड़ है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
या
निर्धनता के सामाजिक दुष्परिणामों की विवेचना कीजिए।
Answer: निर्धनता एक सामाजिक-आर्थिक समस्या है और निर्धनता के दुष्परिणामों के फलस्वरूप समाज में विभिन्न बुराइयाँ जन्म लेती हैं। इन बुराइयों का विवरण निम्नवत् है
1. अपराधों में वृद्धि - निर्धनता से समाज में तरह-तरह के अपराधों में वृद्धि हुई है। साधारणतया कोई व्यक्ति जब ईमानदारी से पर्याप्त साधन प्राप्त नहीं कर पाता तो वह चोरी, डकैती तथा हत्या आदि के द्वारा अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयत्न करता है। अपने बच्चों व आश्रितों को भूखे देखकर अच्छे-से-अच्छा व्यक्ति इन समाज-विरोधी कार्यों की ओर प्रवृत्त हो सकता है। निर्धनता मानसिक तनावों को बढ़ाकर भी व्यक्ति में अपराध की भावना पैदा करती है।
2. बाल-अपराधों में वृद्धि - निर्धन परिवारों में माता-पिता अपने बच्चों की प्रमुख आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते । साधारणतया ऐसे बच्चे शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन से वंचित रह जाते हैं। अक्सर निर्धन परिवारों में बच्चों से कम आयु में ही नौकरी करवायी जाने लगती हैं। इसके फलस्वरूप बच्चे आरम्भ से ही अनुशासनहीन हो जाते हैं, उनकी संगति बिगड़ जाती है और इस प्रकार उन्हें अपराधी कार्य करने का प्रोत्साहन मिलता है। एक बार अपराधियों के गिरोह में फँस जाने के बाद ऐसे बच्चे कठिनता से उस वातावरण से बाहर निकल पाते हैं।
3. दुर्व्यसनों में वृद्धि - निर्धनता की समस्या ने व्यक्ति में अनेक प्रकार के दुर्व्यसन उत्पन्न किये हैं। निर्धनता के कारण व्यक्ति जब अनेक प्रकार के तनावों और चिन्ताओं में फंस जाता है तो वह अक्सर मद्यपान करने लगता है। बहुत-से व्यक्ति जुआ खेलना प्रारम्भ कर देते हैं अथवा सट्टा लगाने लगते हैं, जिससे वे जल्दी ही अधिक धन प्राप्त कर सकें, यद्यपि ऐसे लोभ से उनकी स्थिति पहले से भी अधिक दयनीय हो जाती है। निर्धनता से उत्पन्न तनाव वेश्यावृत्ति को भी प्रोत्साहन देते हैं, क्योंकि इन तनावों के कारण व्यक्ति उचित और अनुचित को ध्यान ही नहीं रख पाता।।
4. परिवार का विघटन - निर्धनता का एक बड़ा दुष्परिणाम परिवारों का विघटन होना है। निर्धनता की स्थिति में परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे पर अविश्वास करने लगते हैं। घर में कलह का वातावरण बना रहता है और कभी-कभी परिवार अनैतिकता का भी केन्द्र बन जाता है। ऐसी स्थिति में सदस्यों में पारस्परिक प्रेम समाप्त हो जाता है और सभी लोग अपने-अपने स्वार्थों को पूरा करने में लग जाते हैं। परिवार में निर्धनता के कारण पति-पत्नी के बीच विवाह-विच्छेद हो जाने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।
5. चरित्र का पतन - निर्धनता चरित्र को गिराने वाला सबसे प्रमुख कारण है। निर्धनता के कारण जब परिवार की आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पातीं, तो साधारणतया स्त्रियों को भी जीविका की खोज में घर से बाहर निकलना पड़ता है। बहुत-से व्यक्ति उनकी असमर्थता का लाभ उठाकर अथवा उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर अनैतिक कार्यों में लगा देते हैं। इस प्रकार समाज में अप्रत्यक्ष रूप से वेश्यावृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है। वेश्यावृत्ति में लगी अधिकांश स्त्रियाँ भी आर्थिक कठिनाइयों के कारण ही यह व्यवसाय आरम्भ करती हैं।
6. भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहन - भिक्षावृत्ति निर्धनता का एक गम्भीर दुष्परिणाम है। कोई व्यक्ति जब किसी भी साधन से जीविका उपार्जित करने में असफल हो जाता है तो उसके सामने भीख माँगने के अतिरिक्त कोई दूसरा मार्ग नहीं रह जाता। अक्सर ऐसे परिवारों में बच्चों को भीख माँगने के लिए बाध्य किया जाता है। एक बार जो व्यक्ति भीख माँगने लगता है, वह भविष्य में भी कोई दूसरा कार्य करने योग्य नहीं रह जाता। इस प्रकार उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व ही विघटित हो जाता है।
7. निर्धनता की संस्कृति का विकास - आधुनिक समाजशास्त्रियों का मानना है कि निर्धनता का सबसे बड़ा दुष्परिणाम समाज में निर्धनता की संस्कृति (Culture of poverty) का विकसित हो जाना है। यह एक विशेष संस्कृति है, जिसमें व्यक्ति अपने आपको अभाव की दशा में रहने के अनुकूल बना लेता है। ऑस्कर लेविस (Oscar Lewis) ने मैक्सिको के अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष दिया कि निर्धनता की संस्कृति में व्यक्ति केवल वर्तमान के बारे में ही सोचने लगता है, वह भाग्यवादी हो जाता है, उसमें हीनता की भावना प्रबल बन जाती है तथा बच्चों को भी इन दशाओं में रहने का प्रशिक्षण दिया जाने लगता है। सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में इस संस्कृति के लोगों का कोई सहभाग नहीं होता। फलस्वरूप निर्धनता की समस्या एक स्थायी रूप ले लेती है।
8. आन्दोलन और वर्ग-संघर्ष - निर्धनता का एक बड़ा दुष्परिणाम समाज में बढ़ते हुए आन्दोलन और वर्ग-संघर्ष हैं। निर्धनता के कारण अधिकांश आन्दोलन किसानों, मजदूरों और जनजातियों द्वारा ही चलाये जाते हैं। भारत में नक्सलवादी आन्दोलन वर्ग-संघर्ष का परिणाम है, जिसने आज हिंसक रूप ले लिया है।
In simple words: Poverty acts as a root cause for many societal ills, driving individuals towards crime, child delinquency, and various addictions like gambling and alcohol abuse. It can lead to family disintegration, moral decline, and even foster a "culture of poverty" where individuals accept their fate, hindering societal progress and leading to class conflicts.
🎯 Exam Tip: When discussing the social consequences of poverty, focus on specific examples like crime, child labor, and family breakdown. Highlighting the "culture of poverty" concept demonstrates a deeper understanding of the sociological impact.
Question 3. भारत में निर्धनता उन्मूलन के उपाय सुझाइए।
या
भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए किये गये उपायों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए ।
Answer: निर्धनता एक सामाजिक और आर्थिक समस्या है। यह व्यक्ति और राष्ट्र दोनों के लिए घातक है। अतः इस समस्या का निश्चित समाधान खोजना आवश्यक है। निर्धनता के उन्मूलन के लिए अग्रलिखित सुझाव दिये जा सकते हैं
1. निर्धनता का मूल कारण बेरोजगारी है; अतः सरकार को बेरोजगारी दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए तथा बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए जिससे ऐसे संकट के दिनों में भी व्यक्तियों की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी हो सकें ।
2. जनसंख्या पर नियन्त्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावशाली बनाना होगा। बिना जनसंख्या पर नियन्त्रण के निर्धनता दूर नहीं हो सकती। गाँवों में इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जनसंख्या निर्धनता का प्रमुख कारण है।
3. भारत गाँवों को देश है तथा निर्धनता अधिकतर गाँवों में ही पायी जाती है। ग्रामीणों का मुख्य पेशा कृषि है। अतः कृषि में सुधार किया जाना चाहिए। उच्च उत्पादन वाले बीज, खाद, उपकरण तथा अन्य साधन इस प्रकार से उपलब्ध कराये जाने चाहिए कि छोटे कृषकों को भी इसका लाभ मिले । हरित क्रान्ति कार्यक्रम को सफल बनाकर यह लक्ष्य सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।
4. रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए प्राकृतिक साधनों का पूर्ण दोहन अनिवार्य है। इससे अनेक स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होने से निर्धनता स्वतः समाप्त हो जाएगी ।
5. सरकार को उद्योगों के विकास की व्यावहारिक व सन्तुलित नीति बनानी होगी। इनका केन्द्रीकरण रोकना होगी और गाँवों में उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष प्रोत्साहन देना होगा, जिससे स्थानीय जनता को निकट ही रोजगार मिल जाएँ और वे नगरों की ओर जाने तथा समस्याओं का सामना करने से बच जाएँ।
6. निर्धनता के व्यक्तिगत कारणों को सामाजिक दुर्व्यसनों पर नियन्त्रण द्वारा दूर किया जा सकता है। वेश्यावृत्ति, जुआखोरी के मद्यपान पर नियन्त्रण किये जाने की आवश्यकता है।
7. निर्धनता को दूर करने के लिए इसमें बाधक सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन करना होगा। आज भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक उच्च जातियों के लोग कृषि करना अपमान समझते हैं। ऐसी मान्यताएँ बदलनी होंगी। दहेज-प्रथा, पर्दा-प्रथा तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों को सदैव के लिए दूर करना होगा।
8. निर्धनता निवारण के लिए भ्रष्टाचार तथा चोरबाजारी बन्द करनी होगी जिससे धन कुछ लोगों के हाथों में ही केन्द्रित न हो जाए। इस दिशा में प्रभावकारी कदम उठाये जाने चाहिए। समाज में धन का समान वितरण होने से निर्धनता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
9. गन्दी बस्तियों के विकास पर रोक लगानी चाहिए जिससे अनैतिकता के वातावरण पर नियन्त्रण लगाया जा सके तथा अपराध व बाल-अपराध पर नियन्त्रण रखा जा सके।
10. ग्रामीण विकास से सम्बन्धित सभी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली ढंग से लागू किया जाए। वास्तव में, सरकारी नीतियों में कोई दोष नहीं है, इन्हें लागू करने की प्रणाली दोषपूर्ण है, जिससे उसका लाभ निर्धन व्यक्तियों को नहीं मिल पाता। अतः इन कार्यक्रमों को और अधिक व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है।
11. निर्धनता दूर करने का एक प्रभावी उपाय है-बचत को बढ़ावा देना। लोगों के पास जैसे-जैसे बचत बढ़ेगी वे निर्धनता की रेखा से ऊपर उठ जाएँगे। बचत का परिणाम होता है निवेश और निवेश से पूँजी का निर्माण होता है।
12. कुटीर उद्योग-धन्धों का समुचित विकास करके भी निर्धनता का उन्मूलन किया जा सकता है।
13. शिक्षा का प्रसार, रोजगारपरक शिक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा भी निर्धनता उन्मूलन में प्रमुख भूमिका निभा सकती है।
14. तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या निर्धनता का मुख्य कारण है। देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पाते; इससे बेरोजगारी बढ़ती है। बेरोजगारी निर्धनता की जननी है। अतः तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या पर नियन्त्रण आवश्यक है।
15. देश में साख-सुविधाओं में वृद्धि करके भी निर्धनता का उन्मूलन किया जा सकता है। बैंक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा लोगों को कम ब्याज पर ऋण बँटवाकर देश में उद्योग-धन्धों का विकास किया जा सकता है। उद्योग-धन्धे के विकसित होते ही निर्धनता स्वतः दुम दबाकर भाग जाएगी। भारत में निर्धनता की समस्या विकट है। राष्ट्र के आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए इस समस्या का निश्चित समाधान खोजा जाना आवश्यक है।
In simple words: To eradicate poverty, comprehensive strategies are needed, including creating employment opportunities, controlling population growth, improving agricultural productivity, promoting balanced industrial development, curbing social evils, ensuring equitable wealth distribution, and enhancing rural development programs. Additionally, promoting education, small-scale industries, and savings can empower individuals to rise above poverty.
🎯 Exam Tip: When suggesting remedies for poverty, ensure a multi-faceted approach, covering economic, social, and governmental policy aspects. Providing specific examples of programs or sectors for improvement strengthens the answer.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भारत में निर्धनता के चार कारण बताइए।
Answer: भारत में निर्धनता के चार कारण निम्नलिखित हैं
1. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता - भारतीय समाज कृषि-प्रधान समाज है। ग्रामीण जनता कृषि तथा इससे सम्बन्धित व्यवसायों पर ही आश्रित रही है। कृषि प्राकृतिक साधनों पर आधारित है। संयुक्त परिवार प्रणाली के कारण सभी सदस्य कृषि पर निर्भर रहते हैं तथा यदि सूखा पड़ जाता है, बाढ़ आ जाती है या कोई प्राकृतिक प्रकोप हो जाता है तो उत्पादन वैसे भी कम होता है ऊपर से देखने पर वे कृषक हैं, परन्तु उत्पादन उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
2. संयुक्त परिवार प्रणाली - संयुक्त परिवार प्रणाली के दोष भी पर्याप्त सीमा तक निर्धनता के लिए उत्तरदायी रहे हैं। बाल-विवाह, बच्चे पैदा करने की होड़, व्यावसायिक गतिशीलता का अभाव तथा आलसी सदस्यों की संख्या में वृद्धि जैसे दोष निर्धनता के कारण माने जा सकते हैं।
3. उद्योगों का असन्तुलित विकास - निर्धनता का एक अन्य कारण उद्योगों का असन्तुलित विकास है। एक तो उद्योगों पर केवल 10-15 प्रतिशत जनसंख्या ही निर्भर है और दूसरे उद्योगों का संकेन्द्रण कुछ बड़े-बड़े नगरों में ही होता जा रहा है। यह असन्तुलित विकास ग्रामीणों को रोजगार देने में सहायक नहीं है।
4. प्राकृतिक साधनों की कमी - भारत में प्राकृतिक साधनों की कमी निर्धनता का एक बड़ा कारण है। जिन स्थानों पर प्राकृतिक साधनों की कमी होती है, वहाँ उत्पादन कम होने के कारण निर्धनता अधिक होती है।
In simple words: Four main reasons for poverty in India are over-reliance on agriculture (which is susceptible to natural disasters), the flaws in the joint family system (leading to increased dependents and lack of mobility), imbalanced industrial development (concentrated in cities, failing to provide rural employment), and scarcity of natural resources in certain regions affecting productivity.
🎯 Exam Tip: Listing specific, distinct reasons for poverty, such as agricultural dependence and industrial imbalance, demonstrates analytical clarity. Briefly elaborating on each point is crucial for full marks.
Question 2. सरकार द्वारा निर्धनता को कम करने के लिए किये गये दो प्रयत्नों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत सरकार ने निर्धनता को समाप्त करने के लिए विशेष प्रयत्न किये हैं, जिनमें से दो प्रमुख निम्नलिखित हैं
1. पंचवर्षीय योजना - देश में अब तक दस पंचवर्षीय योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं। इन योजनाओं में मुद्रास्फीति को रोकने, खाद्य-सामग्री के अभाव को दूर करने, जीवन-स्तर को उन्नत करने, कृषि में सुधार करने, औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने, कुटीर एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देने एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने से सम्बन्धित अनेक प्रयास किये गये हैं।
2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम - गरीबी समाप्त करने के लिए सरकार ने काम के बदले अनाजे योजना हाथ में ली, लेकिन अक्टूबर, 1980 ई० से काम के बदले अनाज योजना का स्थान राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम ने ले लिया है। बाद में इस योजना को जवाहर रोजगार योजना में सम्मिलित कर दिया गया। अब जवाहर रोजगार योजना के स्थान पर 1 अप्रैल, 1999 से 'जवाहर ग्राम समृद्धि योजना चल रही है।
In simple words: The Indian government has made significant efforts to alleviate poverty through initiatives like the Five-Year Plans, which aimed at controlling inflation, improving living standards, boosting agriculture and industrial production, and creating employment. Another key effort was the National Rural Employment Program (later Jawahar Rozgar Yojana and Jawahar Gram Samriddhi Yojana), providing employment opportunities in rural areas.
🎯 Exam Tip: When asked about government efforts, mentioning specific programs or policy frameworks like the Five-Year Plans or major rural employment schemes shows good recall and understanding of historical interventions.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. भारत में निर्धनता के जनसंख्यात्मक कारण के विषय में बताइए।
Answer: भारत में बढ़ती जनसंख्या ने गरीबी को जन्म दिया। सन् 1901 में देश की जनसंख्या 23.83 करोड़ थी, जो 2011 ई० में बढ़कर 1 अरब 21 करोड़ 2 लाख हो गयी है। तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या ने भी निर्धनता को बढ़ाने में योगदान दिया है। इसका कारण यह है कि देश में प्राप्त आय का पर्याप्त भाग उत्पादन कार्यों में लगने के स्थान पर लोगों के भरण-पोषण पर खर्च करना पड़ता है। जनसंख्या बढ़ने से प्रति वर्ष 20 लाख श्रमिकों की संख्या बढ़ जाती है, प्रति व्यक्ति आय घट जाती है, भूमि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ जाता है और देश की आर्थिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। वास्तव में, अति जनसंख्या ही भारत में निर्धनता का प्रमुख कारण है।
In simple words: Rapid population growth is a major demographic cause of poverty in India, as it diverts a large portion of national income from productive investments to basic sustenance, reduces per capita income, increases pressure on land, and generates a large number of new laborers annually without adequate employment opportunities, thus hindering economic development.
🎯 Exam Tip: When explaining demographic causes, quantify the impact with statistics (even if approximate) on population growth, its effect on per capita income, and pressure on resources to demonstrate a clear understanding.
Question 2. निर्धनता के शारीरिक एवं मानसिक प्रभावों की चर्चा कीजिए।
Answer: गरीबी में जी रहे लोगों को सन्तुलित आहार तो दूर रहा पेट भर भोजन भी नहीं मिल पाता है। विटामिनयुक्त भोजन के अभाव में अनेक बीमारियाँ आ घेरती हैं, शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति की कार्यक्षमता घट जाती है। क्षयरोग (टीबी) को गरीबों की बीमारी माना गया है। धन के अभाव में व्यक्ति पूरा इलाज भी नहीं करा पाता। इससे मृत्यु-दर में भी वृद्धि होती है। इस प्रकार गरीबी कुपोषण के लिए भी उत्तरदायी है। गरीबी के कारण उचित शिक्षा-दीक्षा न होने पर बौद्धिक विकास भी प्रभावित होता है, जिससे हीनता की भावना पैदा होती है।
In simple words: Poverty severely impacts both physical and mental health. Physically, it leads to malnutrition, increased susceptibility to diseases like tuberculosis, and higher mortality rates due to lack of access to nutritious food and proper medical care. Mentally, inadequate education and persistent struggle for survival can hinder intellectual development and foster feelings of inferiority.
🎯 Exam Tip: When discussing impacts, differentiate clearly between physical effects (malnutrition, disease) and mental/intellectual effects (lack of education, inferiority complex). Specific health conditions can be mentioned.
Question 3. निर्धनता के प्रभाव के रूप में अपराध की चर्चा कीजिए।
Answer: गरीबी के कारण लोग अपराध भी करते हैं। अपराध और बाल-अपराध के अनेक अध्ययनों ने उक्त तथ्य को स्पष्ट किया है। जब लोगों के पास खाने को भोजन, पहनने को वस्त्र, रहने को मकान और चिकित्सा के लिए पैसा नहीं होता है तो वे चोरी, डकैती, सेंधमारी, रिश्वत, गबन, मिलावट, वेश्यावृत्ति, आत्महत्या आदि अपराध करते हैं।
In simple words: Poverty is a significant driver of crime, as individuals lacking basic necessities like food, clothing, shelter, and medical care often resort to illegal activities such as theft, robbery, fraud, bribery, and even prostitution or suicide to survive. Studies on both adult and juvenile delinquency confirm this direct link between deprivation and criminal behavior.
🎯 Exam Tip: Emphasize the direct link between unmet basic needs and criminal activities. Listing specific types of crimes provides concrete evidence for the argument.
Question 4. निर्धनता किस प्रकार पारिवारिक विघटन की समस्या उत्पन्न करती है ?
Answer: गरीबी की अवस्था में परिवार के सभी लोगों को काम करना पड़ता है। माता-पिता एवं बच्चे पृथक् पृथक् काम पर जाते हैं। ऐसे में बच्चों पर परिवार का नियन्त्रण शिथिल हो जाता है। गरीबी से मुक्ति पाने के लिए कभी-कभी स्त्रियाँ वेश्यावृत्ति भी अपना लेती हैं। गरीब परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा भी गिर जाती है, बच्चे आवारा एवं भगोड़े हो जाते हैं। गरीबी के कारण हीनता एवं निराशा पैदा होती है, जिससे कई परिवार टूट जाते हैं।
In simple words: Poverty leads to family disintegration as all members, including children, are forced to work separately, weakening parental control. Desperation can drive women into prostitution, reducing the family's social standing, while children may become wayward or runaways. The constant struggle fosters feelings of inferiority and despair, ultimately leading to family breakdowns.
🎯 Exam Tip: Focus on the loss of parental control, economic pressures leading to desperate measures, and the resulting social stigma and emotional distress as key aspects of family disintegration due to poverty.
Question 5. निर्धनता दूर करने के उपाय के रूप में कुटीर उद्योगों के विकास की चर्चा कीजिए।
Answer: निर्धनता को समाप्त करने के लिए जहाँ सरकार ने एक और बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना की है, वहीं दूसरी ओर कुटीर एवं ग्राम उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया है। इन उद्योगों से लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।
In simple words: Developing cottage and village industries is a crucial strategy for poverty alleviation. While large-scale industries are important, supporting small-scale, decentralized production creates employment opportunities for millions, especially in rural areas, thus directly addressing unemployment and increasing income among the poor.
🎯 Exam Tip: Highlight the role of cottage industries in job creation, particularly in rural settings, as a direct and effective means of poverty reduction, complementing large-scale industrialization efforts.
Question 6. साधनों का उचित वितरण निर्धनता को कैसे समाप्त कर सकता है ? बताइए।
Answer: केवल उत्पादन बढ़ाने से ही निर्धनता की समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक कि उत्पादन के साधनों और लाभों का समाज के सभी लोगों में उचित वितरण न किया जाए। वर्तमान व्यवस्था में मुनाफा और उत्पादन के साधन कुछ ही लोगों के हाथ में केन्द्रित हैं। ऐसी व्यवस्था उत्पन्न की जाए जिससे पूँजी एवं सम्पत्ति का समान रूप से वितरण हो तथा किसानों को सस्ते दामों पर वस्तुएँ उपलब्ध करायी जाएँ। सरकार व्यक्ति की कम-से-कम आय निर्धारित करे और जिनकी आय इस स्तर से कम हो, उन्हें सहायता करे ।
In simple words: Equitable distribution of resources and profits is essential for poverty eradication, as merely increasing production doesn't solve the problem if wealth remains concentrated. Implementing policies that ensure a more even spread of capital and assets, providing affordable goods to farmers, and establishing minimum income guarantees with assistance for those below it, can significantly reduce economic disparities and poverty.
🎯 Exam Tip: Emphasize that equitable distribution is as vital as increased production. Mentioning concepts like minimum income and accessible resources for all stakeholders, especially farmers, strengthens the answer.
Question 7. गरीबी (निर्धनता) दूर करने के दो उपाय लिखिए।
Answer:
1. शिक्षा - प्रणाली को अधिक उपयुक्त बनाया जाए - सर्वप्रथम देश से अशिक्षा को दूर करने का प्रयत्न करना होगा। साथ ही प्रचलित शिक्षा-प्रणाली में इस प्रकार का सुधार करना होगा, जिससे कि विद्यार्थी व्यावहारिक जगत में उपयोगी हो सके।
2. कृषि में सुधार किये जाएँ - भारत एक कृषिप्रधान देश है। इस कारण इस देश से गरीबी को दूर करने के लिए कृषि-व्यवस्था में सुधार किये जाने चाहिए। इसके लिए भूमि की दशा में सुधार करना, सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध कराना, कृषि औजारों को जुटाना, उत्तम बीज व खाद का प्रबन्ध करना, चकबन्दी, सहकारिता आदि को प्रोत्साहन देना आदि आवश्यक उपाय हैं।
In simple words: Two key measures to combat poverty are reforming the education system to make it more practical and skill-oriented, thus improving employability, and enhancing the agricultural sector through land reform, better irrigation, modern tools, and quality inputs to boost productivity for the predominantly agrarian population.
🎯 Exam Tip: When asked for specific measures, focus on fundamental sectors like education and agriculture, providing concrete steps for improvement within each to demonstrate actionable solutions.
Question 8. अन्त्योदय योजना पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: अन्त्योदय योजना के अन्तर्गत प्रत्येक गाँव में से पाँच निर्धनतम परिवारों का चयन कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने एवं व्यवसाय करने के लिए ऋण आदि की सहायता दी जाती है। इस योजना का प्रारम्भ 2 अक्टूबर, 1978 में राजस्थान सरकार द्वारा किया गया। इसे उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश एवं अन्य राज्यों ने भी अपनाया। इस योजना का उद्देश्य समाज के आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों; जैसे – हरिजनों, भूमिहीनों एवं अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लोगों का आर्थिक स्तर उन्नत करना एवं उन्हें गरीबी से मुक्ति दिलाना है।
In simple words: The Antyodaya Yojana, launched in Rajasthan on October 2, 1978, is a government scheme aimed at uplifting the poorest five families in each village by providing financial assistance, such as loans, to help them become self-reliant and establish businesses. Its core objective is to improve the economic status and free from poverty the economically weaker sections of society, including Harijans, landless individuals, Scheduled Castes, and Scheduled Tribes.
🎯 Exam Tip: For scheme-based questions, accurately state the launch date, target beneficiaries (poorest families, weaker sections), and the core objective (self-reliance through financial aid). Mentioning states where it was adopted adds value.
Question 9. गरीबी के चार मुख्य कारण लिखिए।
या
निर्धनता के दो सामाजिक कारण बताइए ।
Answer: आर्थिक कारण निर्धनता के आर्थिक कारण निम्नलिखित हैं
1. उद्योग-धन्धों की कमी एवं अपर्याप्त उत्पादन के कारण निर्धनता व्याप्त है।
2. भारत में निर्धनता के लिए रोजगार के कम अवसरों को उत्तरदायी माना जाता है।
सामाजिक कारण निर्धनता के सामाजिक कारण निम्नलिखित हैं।
1. अशिक्षा के कारण व्यक्ति कार्यकुशलता का विकास नहीं कर पाता है।
2. धर्म, सामाजिक कुप्रथाओं एवं जाति व्यवस्था का प्रभाव निर्धनता का कारण बनता है।
In simple words: The four main causes of poverty include economic factors such as a lack of industries, insufficient production, and limited employment opportunities. Social factors contributing to poverty are illiteracy, which hinders skill development, and the impact of religious beliefs, social customs, and the caste system that restrict economic mobility and perpetuate disadvantage.
🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between economic and social causes. For economic, focus on production and employment. For social, highlight institutional barriers like illiteracy, caste, and social norms.
निश्चित उत्तीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. निर्धनता के निर्धारण में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथ्य क्या है ?
Answer: निर्धनता के निर्धारण में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथ्य आय है।
In simple words: The most critical factor in determining poverty is income, as it directly influences a person's ability to meet their basic needs and access essential resources.
🎯 Exam Tip: For single-word/short answers, ensure directness and accuracy. 'Income' is the primary indicator, so state it clearly.
Question 2. जीवन-स्तर को तय करने वाला मुख्य कारक क्या है ?
Answer: जीवन-स्तर को तय करने वाला मुख्य कारक आय है।।
In simple words: The primary determinant of one's standard of living is income, as it dictates purchasing power for goods, services, and overall quality of life.
🎯 Exam Tip: Like poverty determination, income is also the fundamental factor for the standard of living. Consistency in identifying core economic indicators is important.
Question 3. कम आय निर्धनता को कब जन्म देती है ?
Answer: जब कमाने वाले कम और उन पर निर्भर व्यक्तियों की संख्या अधिक होती है, तो कम आय निर्धनता को जन्म देती है।
In simple words: Low income leads to poverty when the number of earning members in a household is small compared to the number of dependents, making it impossible to adequately support everyone's needs.
🎯 Exam Tip: Focus on the dependency ratio – when fewer earners support more dependents, even moderate income can result in poverty per individual. This context is key.
Question 4. भारत में सबसे अधिक निर्धन प्रदेश कौन-सा है ?
Answer: भारत में सबसे अधिक निर्धन प्रदेश उड़ीसा (वर्तमान में ओडिशा) है।
In simple words: The state with the highest incidence of poverty in India is Odisha (formerly Orissa).
🎯 Exam Tip: For factual questions, recall the correct, updated name of the state. Precision is important for such specific knowledge points.
Question 5. विश्व विकास रिपोर्ट 2002 के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति आय क्या है ? जापान में प्रति व्यक्ति आय क्या है ?
Answer: विश्व विकास रिपोर्ट 2002 के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति आय 460 अमेरिकी डॉलर है। जापान में प्रति व्यक्ति आय 2,350 अमेरिकी डॉलर है।।
In simple words: According to the 2002 World Development Report, India's per capita income was 460 US dollars, significantly lower than Japan's per capita income of 2,350 US dollars, highlighting the vast economic disparity between developed and developing nations.
🎯 Exam Tip: For comparative data questions, ensure both figures are correctly stated along with their respective countries. The context (World Development Report 2002) is also important.
Question 6. निर्धनता का उन्मूलन करने के लिए 20-सूत्री कार्यक्रम की घोषणा किसके द्वारा की गयी थी ?
Answer: निर्धनता का उन्मूलन करने के लिए 20-सूत्री कार्यक्रम की घोषणा श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा की गयी थी।
In simple words: The 20-Point Programme, aimed at alleviating poverty and boosting economic growth, was announced by Smt. Indira Gandhi.
🎯 Exam Tip: Identify the key figure associated with significant national programs like the 20-Point Programme. Historical context and correct attribution are crucial.
Question 7. अन्त्योदय योजना का प्रारम्भ कब और कौन-सी राज्य सरकार द्वारा किया गया ?
Answer: अन्त्योदय योजना का प्रारम्भ 2 अक्टूबर, 1978 में राजस्थान सरकार द्वारा किया गया।
In simple words: The Antyodaya Yojana was launched on October 2, 1978, by the Government of Rajasthan.
🎯 Exam Tip: For program launch details, accurately state the exact date and the initiating state government to secure full marks.
बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
Question 1. किसी समाज में निर्धनता के मूल्यांकन के लिए कौन-सी कसौटी सही है ?
(क) प्रति व्यक्ति आय
(ख) वस्तुओं का बाजार-भाव ।
(ग) उद्योगों की संख्या
(घ) समाज के रहन-सहन का स्तर
Answer: (क) प्रति व्यक्ति आय
In simple words: Per capita income is the most accurate criterion for assessing poverty in a society as it reflects the average income available to each person, directly indicating their potential to meet basic needs.
🎯 Exam Tip: Understand that while other factors are related, per capita income is a direct and widely used economic indicator for poverty assessment.
Question 2. भारत एक धनी देश है, जब कि इसके निवासी निर्धन हैं, यह कथन किसका है ?
(क) श्रीमती वीरा एन्स्टे का
(ख) वीवर का
(ग) गोडार्ड का
(घ) स्टुअर्ट राइस का
Answer: (क) श्रीमती वीरा एन्स्टे का
In simple words: The statement "India is a rich country, but its inhabitants are poor" is attributed to Mrs. Vera Anstey, highlighting the paradox of India's abundant resources contrasted with widespread poverty.
🎯 Exam Tip: Memorize important quotes and their authors related to economic and social issues, especially those from well-known scholars or reports.
Question 3. निम्नलिखित में से कौन-सी एक दशा भारत में निर्धनता का प्रमुख कारण है ?
(क) औद्योगिक विवाद
(ख) भाषायी विवाद
(ग) मन्त्रियों और सांसदों पर अत्यधिक व्यय
(घ) जनसंख्या विस्फोट
Answer: (घ) जनसंख्या विस्फोट
In simple words: Population explosion is a major cause of poverty in India because rapid growth outpaces resource availability and job creation, leading to increased competition for scarce resources and a lower per capita share of wealth.
🎯 Exam Tip: Recognize that among the given options, rapid population growth (जनसंख्या विस्फोट) has the most profound and direct impact on poverty across the nation.
Question 4. भारत में निर्धनता का कारण बताइए
(क) भाषा सम्बन्धी संघर्ष
(ख) क्षेत्रीय विवाद
(ग) मुकदमों की देर से सुनवाई
(घ) खेती का पिछड़ापन
Answer: (घ) खेती का पिछड़ापन
In simple words: The backwardness of agriculture is a significant cause of poverty in India because a large portion of the population depends on it, and its underdeveloped state leads to low productivity, low income, and food insecurity.
🎯 Exam Tip: Understand that for an agrarian economy like India, the state of agriculture is a fundamental determinant of poverty levels. Industrial backwardness or lack of infrastructure are also relevant but agricultural inefficiency is often primary.
Question 5. निम्नलिखित में से निर्धनता के परिणाम का चयन कीजिए
(क) सती – प्रथा
(ख) दहेज-प्रथा
(ग) बाल-विवाह
(घ) अपराध
Answer: (घ) अपराध
In simple words: Poverty often leads to an increase in crime rates, as individuals facing extreme deprivation may resort to illegal activities to meet their basic needs or to escape their desperate circumstances.
🎯 Exam Tip: Differentiate between social customs (sati, dowry, child marriage) which can be causes or perpetuators of poverty, and crime, which is a direct consequence of the economic hardship and desperation induced by poverty.
Question 6. भारत में गरीबी दूर करने का उपाय छाँटिए
(क) शिक्षा
(ख) नौकरी
(ग) आर्थिक सहायता
(घ) सरकारी भरण-पोषण
Answer: (ख) नौकरी
In simple words: Providing employment opportunities (नौकरी) is a direct and sustainable way to alleviate poverty in India, as it enables individuals to earn a regular income and become self-sufficient, unlike temporary aid.
🎯 Exam Tip: While education and financial aid are important, 'employment' directly addresses the lack of income, which is the core definition of poverty. Focus on direct solutions.
Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सी दशा निर्धनता-निवारण में बाधक है?
(क) शक्ति के साधनों का अधिकतम उपयोग
(ख) सामाजिक दुर्व्यसनों पर प्रतिबन्ध
(ग) साख-सुविधाओं में वृद्धि
(घ) परिवार नियोजन के प्रति उदासीनता
Answer: (घ) परिवार नियोजन के प्रति उदासीनता
In simple words: Indifference towards family planning hinders poverty alleviation because unchecked population growth strains resources, reduces per capita income, and exacerbates unemployment, making it harder for families to escape poverty.
🎯 Exam Tip: Understand that apathy towards family planning directly contributes to increased dependency ratios and resource scarcity, acting as a significant barrier to poverty reduction efforts.
Question 8. भारत में निर्धनता की समस्या को कम करने के लिए सरकार द्वारा समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम का आरम्भ किया गया।
(क) 1972 ई० से
(ख) 1978 ई० से
(ग) 1981 ई० से
(घ) 1986 ई० से
Answer: (ख) 1978 ई० से
In simple words: The Integrated Rural Development Programme (IRDP) was launched by the government in 1978 to address the problem of poverty in rural India.
🎯 Exam Tip: For government schemes, knowing the launch year is a critical factual detail. Associating the correct year with the Integrated Rural Development Programme (IRDP) is important.
Question 9. 'गरीबी हटाओ' नारा किस पंचवर्षीय योजना की विशेषता थी ?
या
“गरीबी हटाओ' नारा सर्वप्रथम कौन-सी पंचवर्षीय योजना में दिया गया था?
(क) दूसरी
(ख) पाँचवीं
(ग) सातवीं
(घ) नवीं
Answer: (ख) पाँचवीं
In simple words: The iconic slogan "Garibi Hatao" (Remove Poverty) was a central theme and key objective of India's Fifth Five-Year Plan.
🎯 Exam Tip: This is a historically significant slogan. Accurately linking it to the correct Five-Year Plan is a common and important factual question in sociology and economics.
Free study material for Sociology
UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Sociology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Sociology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Sociology Class 12 Solved Papers
Using our Sociology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sociology are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sociology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sociology. You can access UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 22 गरीबी के कारण और उपचार in printable PDF format for offline study on any device.