UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 21 Effect of Environment on Indian Social Life

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Class 12 Sociology Chapter 21 भारतीय सामाजिक जीवन पर पर्यावरण का प्रभाव UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions Class 12 Sociology Chapter 21 Effect of Environment on Indian Social Life

UP Board Solutions For Class 12 Sociology Chapter 21 Effect Of Environment On Indian Social Life (पर्यावरण का भारतीय सामाजिक जीवन पर प्रभाव)

विस्तृत उत्तीय प्रश्न (6 अंक)

Question 1. 'पर्यावरण की परिभाषा दीजिए। भारतीय जीवन पर भौगोलिक पर्यावरण के प्रत्यक्ष प्रभावों का विवेचन कीजिए ।
या
भौगोलिक पर्यावरण किस प्रकार से सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है?
या
पर्यावरण की परिभाषा दीजिए । भौगोलिक पर्यावरण के प्रत्यक्ष प्रभावों की विवेचना कीजिए।
या
पर्यावरण को परिभाषित कीजिए।
या
पर्यावरण क्या है? सामाजिक जीवन पर पर्यावरण का प्रभाव बताइए।

Answer: 'पर्यावरण' एक विस्तृत अवधारणा है, इसे अंग्रेजी में 'एनवायरनमेण्ट' (Environment) कहते हैं। पर्यावरण का हमारे जीवन से इतना घनिष्ठ सम्बन्ध है कि पर्यावरण को स्वयं से पृथक् करना एक असम्भव-सी बात लगती है। सामाजिक मानव के विषय में पूर्ण अध्ययन करने के लिए यह आवश्यक है कि उसके पर्यावरण का अध्ययन किया जाये। यही कारण है कि समाजशास्त्र विषय के अन्तर्गत मनुष्य का अध्ययन पर्यावरण के सन्दर्भ में ही किया जाता है।
पर्यावरण का अर्थ एवं परिभाषाएँ
'पर्यावरण' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। ये शब्द हैं-'परि' और आवरण। ‘परि' का अर्थ है 'चारों ओर' तथा 'आवरण' का अर्थ है 'घिरे हुए' अथवा 'ढके हुए'। इस प्रकार पर्यावरण का अर्थ हुआ – 'चारों ओर से घिरे हुए' अथवा 'ढके हुए'। दूसरे शब्दों में, 'पर्यावरण' शब्द का अर्थ उन वस्तुओं से है जो मनुष्य से अलग होने पर भी उसे चारों ओर से ढके या घेरे रहती है। संक्षेप में, वे सभी परिस्थितियाँ जो एक प्राणी के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं तथा उसको चारों ओर से घेरे हुए अथवा ढके हुए हैं, उसका पर्यावरण कहलाती हैं। पर्यावरण को विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न प्रकार से परिभाषित किया है। कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नवत् हैं
इलियट के मतानुसार, “चेतन पदार्थ की इकाई से प्रभावकारी उद्दीपन और अन्तक्रिया के क्षेत्र को पर्यावरण कहते हैं।” रॉस के अनुसार, “कोई भी बाहरी शक्ति, जो हमें प्रभावित करती है, पर्यावरण होती है।” प्रो० गिलबर्ट के शब्दों में, “वह वस्तु जो किसी वस्तु को चारों ओर से घेरती एवं उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालती है, पर्यावरण है।
उपर्युक्त परिभाषाओं द्वारा यह तथ्य स्पष्ट हो जाता है कि पर्यावरण से तात्पर्य उस 'सब कुछ' से होता है जिसका अनुभव सामाजिक मनुष्य करता है तथा जिससे वह प्रभावित भी होता है।
भारतीय सामाजिक जीवन पर भौगोलिक पर्यावरण के प्रभाव
भौगोलिक पर्यावरण को 'प्राकृतिक पर्यावरण' (Natural Environment) अथवा 'अनियन्त्रित पर्यावरण' (Uncontrolled Environment) भी कहते हैं। इस प्रकार के पर्यावरण से तात्पर्य हमारे चारों ओर के प्राकृतिक वातावरण से है। मैकाइवर तथा पेज के अनुसार, “भौगोलिक पर्यावरण उन दशाओं से मिलकर बनता है जिन्हें प्रकृति ने मनुष्य के लिए प्रदान किया।” लैण्डिस ने कहा है कि, “इसमें वे समस्त प्रभाव सम्मिलित होते हैं जो यदि मनुष्य द्वारा पृथ्वी से पूर्ण रूप से हटा दिये जाएँ, तब भी उनका अस्तित्व बनी रहे।” भौगोलिक पर्यावरण का मानव-जीवन पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से प्रभाव पड़ता है। भारतीय सामाजिक जीवन भी इस नियम का अपवाद नहीं है। भौगोलिक विभिन्नताओं के कारण ही हमारे देशवासियों की जीवन-शैली, प्रथाओं, परम्पराओं, खान-पान, वेशभूषा आदि में भी भिन्नता है। भौगोलिक पर्यावरण के भारतीय सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभावों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है
(क) प्रत्यक्ष प्रभाव
1. जनसंख्या पर प्रभाव - मनुष्य उन्हीं स्थानों पर रहना अधिक पसन्द करता है, जहाँ की जलवायु ऋतुएँ, भूमि की बनावट व जल इत्यादि की सुविधाएँ उत्तम हैं। बहुत अधिक गर्म और बहुत अधिक ठण्डे तथा अत्यधिक वर्षा वाले भागों में लोग रहना पसन्द नहीं करते। कहने का तात्पर्य यह है कि जहाँ भौगोलिक पर्यावरण अनुकूल होता है वहाँ जनसंख्या का घनत्व भी अधिक होता है तथा प्रतिकूल पर्यावरण वाले स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व बहुत कम पाया जाता है। यही कारण है कि हमारे देश में गंगा-यमुना वाले क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है और उसकी अपेक्षाकृत रेगिस्तान और हिमालय आदि क्षेत्रों में जनसंख्या कम पायी जाती है।
2. "आवास की प्रकृति अथवा मानव निवास पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण का 'आवास' की प्रकृति अथवा मनुष्य के निवास पर भी प्रभाव पड़ता है। बहुत अधिक गर्म प्रदेशों के लोग हवादार मकान बनवाते हैं; जैसे - भारत में बिहार, राजस्थान आदि प्रदेशों में। इसके विपरीत ठण्डे प्रदेशों में मकान ऐसे बनवाये जाते हैं जिनमें ठण्ड से बचाव किया जा सके। भारत के मैदानी प्रदेशों में गारा-मिट्टी और ईंटों के मकान बनाये जाते हैं, जब कि पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थरों और लकड़ी के मकान बनाये जाते हैं।
3. वेशभूषा एवं खानपान पर प्रभाव - ठण्डी जलवायु वाले स्थानों के लोग अधिकांशतः मांसाहारी होते हैं तथा ऊनी वस्त्र धारण करते हैं, जब कि गर्म स्थानों के लोग अधिकांशतः शाकाहारी होते हैं और वर्ष में अधिक समय वे सूती वस्त्र धारण करते हैं। उदाहरण के लिए, कश्मीर में रहने वाले लोग मांस, मछली, अण्डा और इसी प्रकार के अन्य गर्म खाद्य-पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं तथा चमड़े, खाल और ऊन से बने वस्त्रों का अधिक प्रयोग करते हैं। इसके विपरीत गर्म प्रदेशों; जैसे-राजस्थान, बिहार आदि के लोग सूती, हल्के व ढीले वस्त्रों का अधिक प्रयोग करते हैं तथा ठण्डे व शीघ्र पचने वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन करते हैं।
4. व्यवसाय पर प्रभाव - मनुष्य के मूल व्यवसाय भी भौगोलिक पर्यावरण पर आधारित होते हैं। उदाहरणार्थ-भारत के हर प्रदेश में हर प्रकार की फसल उगाना जलवायु की विभिन्नता के कारण सम्भव नहीं है। अतः जिस प्रदेश में जो फसल पैदा नहीं होती, उस प्रदेश से वह कृषि-उपज जहाँ वह खूब पैदा करती हैं मँगाकर अपनी जरूरत पूरी करता है और इस प्रकार विनिमय व्यापार (Exchange Trade) का जन्म होता है।
5. आवागमन के साधनों पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव आवागमन के साधनों पर भी पड़ता है। जिन स्थानों पर अति शीत के कारण भूमि तथा समुद्र बर्फ से ढके रहते हैं। वहाँ पर किसी भी प्रकार के आने-जाने के रास्ते बनाना सम्भव नहीं है। अधिक वर्षा वाले भागों में भी रेलवे ट्रैक या सड़कें नहीं बनायी जा सकतीं। मरुस्थलों में भी रेतीली भूमि होने के कारण सड़कें बनाना बहुत कठिन होता है। कुहरायुक्त वातावरण में वायुयान की उड़ान असम्भव है। इसीलिए समतल भूमि पर जहाँ वर्षा सामान्य होती है, मार्ग (सड़कें, रेलवे ट्रैक) बनाना बहुत आसान होता है। यही कारण है कि भारत के अनेक भागों में (जो कि अधिकांशतः मैदानी क्षेत्र हैं) आवागमन के साधन अधिक हैं। परन्तु पर्वतीय प्रदेशों में ऐसा नहीं है।
(ख) अप्रत्यक्ष प्रभाव
1. उद्योग-धन्धों पर प्रभाव - अर्थशास्त्रीय उद्योगों के स्थानीयकरण का सिद्धान्त यही स्पष्ट करता है कि किसी भी विशेष उद्योग की स्थापना के लिए विशेष भौगोलिक पर्यावरण की आवश्यकता पड़ती है। लोहे के कारखानों का बिहार में अधिक मात्रा में होने का मुख्य कारण वहाँ कोयले की खानों का अधिक होना है। अहमदाबाद और मुम्बई में कपास की खेती अधिक होने के कारण वहाँ कपड़ा मिलों की अधिकता है। इसी प्रकार फिल्म उद्योग के लिए साफ आसमान, प्रकाश और स्वच्छ मौसम की आवश्यकता होती है। इसीलिए यह उद्योग मुम्बई में सबसे अधिक विकसित है।
2. धर्म, साहित्य व कला पर प्रभाव - जिन वस्तुओं से मनुष्य अपने जीवन का निर्वाह करता है उसके प्रति उसके मन में श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है वह उनकी पूजा करने लगता है। उदाहरण के लिए, भारत के लोगों द्वारा गंगा, यमुना, सूर्य आदि की पूजा की जाती है। साहित्य पर भी पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है। उदाहरणार्थ-रेगिस्तानी क्षेत्र में रहने वाला साहित्यकार अपने साहित्य में 'ऊँट' या खजूर के पेड़ों का वर्णन करते हुए मिलता है। इसी प्रकार समुद्री तट के निकटतम प्रदेश में रहने वाला चित्रकार जितनी अच्छी तरह समुद्र का चित्र चित्रित कर सकता है, उतना पहाड़ी इलाके में रहने वाला नहीं। रामायण, महाभारत आदि रचनाओं पर भी पर्यावरण का ही प्रभाव देखने को मिलता है।
3. समाज-जीवन पर प्रभाव - विभिन्न प्राकृतिक या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ही भिन्न-भिन्न रीति-रिवाजों का जन्म होता है। हमारे देश के विभिन्न प्रदेशों के रीति-रिवाजों, प्रथाओं, भोजन, साहित्य, कला आदि में जो विभिन्नताएँ विद्यमान हैं, उनके पीछे मूल कारण भौगोलिक अथवा प्राकृतिक पर्यावरण की विभिन्नता ही है।
4. सामाजिक संगठन पर प्रभाव - भौगोलिक पर्यावरण का सर्वाधिक प्रभाव सामाजिक संगठन पर पड़ता है। लीप्ले ने लिखा है कि “ऐसे पर्वतीय प्रदेशों में जहाँ खाद्यान्न की कमी होती है। वहाँ जनसंख्या की वृद्धि अभिशाप मानी जाती है और ऐसी विवाह संस्थाएँ स्थापित की जाती हैं जिनसे जनसंख्या न बढ़ पाये।” यही कारण है कि भारत में जौनसार बाबर में बहुत-से “भाइयों की केवल एक ही पत्नी होती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि भौगोलिक पर्यावरण का भारतीय सामाजिक जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
In simple words: पर्यावरण वह सब कुछ है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और हमारे जीवन को प्रभावित करता है। भारतीय सामाजिक जीवन पर भौगोलिक पर्यावरण का सीधा असर होता है, जो जनसंख्या घनत्व, आवास, खान-पान, वेशभूषा, व्यवसाय और आवागमन के साधनों को निर्धारित करता है। अप्रत्यक्ष रूप से, यह उद्योग, धर्म, कला और सामाजिक संगठन को भी प्रभावित करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में जीवनशैली में विविधता आती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में पर्यावरण की सटीक परिभाषा और भारतीय सामाजिक जीवन पर इसके प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभावों का विस्तृत वर्णन महत्वपूर्ण है। उदाहरणों सहित प्रत्येक प्रभाव को समझाना अच्छे अंक दिलाएगा।

 

Question 2. भौगोलिक कारकों का मानव के सामाजिक जीवन पर कैसे प्रभाव पड़ता है.?
Answer: कई भूगोलविदों ने भौगोलिक कारकों एवं सामाजिक संस्थाओं का सम्बन्ध प्रकट किया है। उदाहरण के लिए, जिन स्थानों पर खाने-पीने एवं रहने की सुविधाएँ होती हैं, वहाँ संयुक्त परिवार पाये जाते हैं और जाँ-इनका अभाव होता है, वहाँ एकाकी परिबार । जहाँ प्रकृति से संघर्ष करना होता है, वहाँ पुरुषप्रधान समाज होते हैं। इसी प्रकार से जहाँ जीविकोपार्जन की सुविधाएँ सरलता से मिल जाती हैं और कृषि की प्रधानता होती है, वहाँ बहुपत्नी प्रथा तथा जहाँ जीवन-यापन कठिन होता है, वहाँ बत्तिाप्रथा अथवा एक विवाह की प्रथा पायी जाती है। इसका कारण यह है कि संघर्षपूर्ण पर्यावरण में स्त्रियों का भरण-पोषण सम्भव न होने से कन्या-वध आदि की प्रथा पायी जाती है, जिससे उनकी संख्या घट जाती है। जिन स्थानों पर जीवन-यापन के लिए कठोर श्रम एवं सामूहिक प्रयास करना होता है, वहाँ सामाजिक संगठन सुदृढ़ होता है।
भारत के भौगोलिक पर्यावरण ने यहाँ के सामाजिक जीवन को प्रभावित किया है। खस एवं टोडा जनजातियाँ पहाड़ी भागों में निवास करती हैं, जहाँ परिवार को आर्थिक भरण-पोषण कठिनाई से होता है। उन्हें जीवन-यापन के लिए प्रकृति से घोर संघर्ष करना पड़ता है। इस संघर्ष में स्त्रियाँ और भी कमजोर होती हैं। अतः वहाँ जन्म के समय ही लड़कियों को मार देने की प्रथा पायी जाती है, जिसके कारण इन समाजों में पुरुषों की अधिकता एवं स्त्रियों की कमी पायी जाती है। इस विषम लिंग अनुपात के कारण यहाँ बहुपति विवाह की प्रथा विकसित हुई। दूसरी ओर उत्तरी भारत के मैदानी भागों में जीवन-यापन सरल है; इससे वहाँ लिंग-अनुपात लगभग समान है, अतः वहाँ एक विवाह प्रथा विकसित हुई और सम्पन्न लोग एकाधिक पत्नियाँ भी रखने लगे, जिनसे बहुपत्नी प्रथा का जन्म हुआ।
दक्षिणी भारत के पठारी क्षेत्र होने के कारण लोगों को दूर क्षेत्र तक गमन कठिन था। अतः उनका विवाह एवं नातेदारी का क्षेत्र अपने गाँवों या निकटवर्ती गाँवों तक ही सीमित रहा, जब कि उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों में विवाह एवं नातेदारी का विस्तार दूर-दराज के क्षेत्रों तक पाया जाता है। मैदानी क्षेत्रों में पुरुष का दबदबा अधिक होने से पितृसत्तात्मक परिवार व्यवस्था ने जन्म लिया। गारो, खासी और जयन्तिया जनजातियाँ जो कि मातृसत्तात्मक हैं, पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती हैं। इनमें पुरुष जीवन-यापन की सुविधाएँ जुटाने, शिकार करने एवं जंगलों से कन्द-मूल-फल एकत्रित करने एवं कृषि के लिए अधिकांश समय तक घर से बाहर ही रहता है। ऐसी स्थिति में परिवार एवं बच्चों के पालन-पोषण का दायित्व महिलाओं पर आ जाता है, इससे परिवार में महिलाओं को प्रभुत्व स्थापित हुआ एवं मातृसत्तात्मक परिवार पनपे ।
In simple words: भौगोलिक कारक मानव के सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। जहाँ जीवन आसान होता है, वहाँ संयुक्त परिवार और एकपत्नी प्रथा जैसी सामाजिक संस्थाएँ विकसित होती हैं, जबकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में पुरुषप्रधान समाज, बहुपति विवाह और यहां तक कि कन्या-वध जैसी प्रथाएं भी देखी जा सकती हैं। यह निवास स्थान, परिवार की संरचना और महिलाओं की स्थिति को भी प्रभावित करता है, जिससे क्षेत्रों के बीच रीति-रिवाजों और सामाजिक संगठनों में भिन्नता आती है।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक कारकों के सामाजिक जीवन पर प्रभावों को स्पष्ट करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट उदाहरण जैसे पहाड़ी जनजातियों और मैदानी क्षेत्रों की तुलना करना महत्वपूर्ण है। लिंग अनुपात और विवाह प्रथाओं पर भौगोलिक प्रभाव को हाइलाइट करें।

 

Question 3. सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण का भारतीय सामाजिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: सामाजिक जीवन केवल भौगोलिक पर्यावरण से ही प्रभावित नहीं होता, वरन् सामाजिकसांस्कृतिक पर्यावरण भी उसे प्रभावित करता है। सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण स्वयं मानव द्वारा निर्मित होता है। उसमें मानव द्वारा निर्मित भौतिक वस्तुएँ; जैसे-पेन, घड़ी, रेडियो, मकान, सड़क, मशीनें, कलाकृतियाँ, धार्मिक स्थल और हजारों-लाखों वस्तुएँ सम्मिलित हैं। अभौतिक वस्तुओं में सामाजिक संस्थाएँ, कला, विज्ञान, धर्म, विश्वास, परम्पराएँ, कानून और मानव का ज्ञान आदि आते हैं। भारत इन भौतिक एवं अभौतिक तथ्यों से निर्मित सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण की भूमि रहा है। यहाँ समय-समय पर आक्रमणकारियों के रूप में विभिन्न प्रजातियों, धर्मों एवं संस्कृतियों से सम्बन्धित लोग भी आते रहे हैं, जिन्होंने यहाँ के निवासियों की जीवन-विधि को प्रभावित किया है।
भारतीयों का खान-पान, रहन-सहन, परिवार, विवाह, नातेदारी की प्रथाएँ, आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन सदैव एक-से नहीं रहे हैं, वरन् समय के साथ-साथ बदलते रहे हैं। वैदिक काल, धर्मशास्त्र काल, मुगलकाल, अंग्रेजों के शासन के समय एवं स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद के सामाजिक जीवन में भिन्नताएँ पायी जाती हैं। वैदिक युग में वर्ण एवं आश्रम-व्यवस्था ने भारतीयों के जीवन को प्रभावित किया। उस समय धर्मशास्त्र काल में विभिन्न धर्म-ग्रन्थों की रचना की गयी। जिनमें परिवार, विवाह, शिक्षा, आर्थिक जीवन से सम्बन्धित विभिन्न नियमों का भी उल्लेख किया गया। इसी समय वर्णव्यवस्था ने कठोर जाति-व्यवस्था का रूप ले लिया और जाति ने भारतीय जीवन के प्रत्येक पक्ष को निर्धारित किया। स्त्रियों को भी अनेक अधिकारों से वंचित कर दिया गया।
मुगलकाल में विवाह व सती-प्रथा का प्रचलन बढ़ा तथा विधवा विवाहों पर रोक लगा दी गयी । अन्तर्जातीय एवं अन्तर्वर्गीय विवाहों पर भी रोक लगी। इस्लाम ने भारतीयों के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन, खान-पान एवं पहनावे में कई परिवर्तन किये। अंग्रेजी काल में भारतीयों का जीवन पश्चिमी सभ्यता एवं संस्कृति से प्रभावित हुआ। उनके समय में सम्पूर्ण भारत एक राजनीतिक सत्ता के अधीन शासित हुआ, औद्योगीकरण की नींव रखी गयी, अनेक नवीन आविष्कार जो पश्चिम में हुए, उनसे भारतीय भी परिचित हुए । कृषि एवं उत्पादन के नये तरीके अपनाये गये। मशीनों का प्रचलन बढ़ा। अंग्रेजी शिक्षा-प्रणाली प्रचलित हुई, खान-पान एवं पहनावे में परिवर्तन आया। चुकन्दर, शलगम, मांस-मदिरा का प्रयोग बढ़ा । टेबल-कुर्सी पर बैठकर, काँटे-छुरी एवं क्रॉकरी के माध्यम से भोजन किया जाने लगा। पैण्ट, शर्ट, टाई एवं कोट का प्रचलन हुआ ।
आजादी के बाद भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण में एक बार फिर परिवर्तन हुआ। एकाकी परिवार, अन्तर्जातीय विवाह, विलम्ब विवाह का प्रचलन बढ़ा, विधवा पुनर्विवाह होने लगे, नातेदारी का महत्त्व घटने लगा, धर्मनिरपेक्ष मूल्य पनपे । सार्वभौमिक शिक्षा प्रदान की जाने लगी। प्रजातान्त्रिक मूल्य स्थापित हुए । विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं एवं सामुदायिक विकास योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण भारत एवं सम्पूर्ण भारत के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक जीवन को उन्नत करने का प्रयास किया गया, जिसके फलस्वरूप वर्तमान में भारतीयों का जो सामाजिक जीवन है वह वैदिक काल एवं मध्यकाल से एकदम भिन्न दिशा की ओर अग्रसर हुआ। फिर भी धर्म एवं अध्यात्मवाद की प्रधानता, कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धान्त, संयुक्त परिवार प्रणाली और जाति-प्रथा आज भी भारतीयों के सामाजिक जीवन का मूलाधार बने हुए हैं। स्पष्ट है कि भारतीयों के सामाजिक जीवन को प्रभावित करने में भौगोलिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण ने पर्याप्त योगदान दिया।
In simple words: सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण, जिसमें मानव द्वारा निर्मित भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ (जैसे कला, धर्म, संस्थाएँ) शामिल हैं, भारतीय सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित करता है। विभिन्न ऐतिहासिक कालों (वैदिक, मुगल, ब्रिटिश और स्वतंत्रता के बाद) में खान-पान, रहन-सहन, परिवार, विवाह और आर्थिक-राजनीतिक जीवन में बदलाव आए हैं, जो दर्शाता है कि सांस्कृतिक तत्व भारतीय समाज को लगातार आकार देते रहे हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण को विभिन्न ऐतिहासिक कालों के साथ जोड़कर समझाना चाहिए। प्रत्येक कालखंड में हुए प्रमुख परिवर्तनों और उनके सामाजिक जीवन पर प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

 

Question 1. भौगालिक पर्यावरण मानव के अपराधी व्यवहारों को कैसे प्रभावित करता है ?
Answer: अनेक अपराधशास्त्रियों का मत है कि भौगोलिक पर्यावरण का अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है। गर्मियों में व्यक्ति के विरुद्ध एवं सर्दियों में सम्पत्ति के विरुद्ध अपराध अधिक होते हैं। उपजाऊ भूमि, अनुकूल वर्षा एवं प्राकृतिक साधनों की अधिकता होने पर अपराध कम होंगे और इसके विपरीत स्थितियों में अधिक । उत्तरी भारत के आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होने के कारण यहाँ जनाधिक्य है। जनसंख्या के दबाव के कारण यहाँ चोरी, डकैती, बलात्कार, हत्या आदि अपराधों की घटनाएँ अधिक पायी जाती हैं। इनकी तुलना में दक्षिणी भारत शान्त क्षेत्र है। इसी प्रकार जब भारत में अकाल पड़ता है तब भी अपराधों की दर में वृद्धि होती है तथा जब वर्षा पर्याप्त होती है, फसलों की पैदावार अच्छी होती है तो आर्थिक प्रवृत्ति के अपराध घट जाते हैं।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण मानव के अपराधी व्यवहार को प्रभावित करता है। गर्मियों में व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध बढ़ते हैं, जबकि सर्दियों में सम्पत्ति के विरुद्ध अपराध अधिक होते हैं। जहाँ प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त होते हैं, अपराध कम होते हैं, जबकि घनी आबादी या अकाल जैसी विपरीत परिस्थितियाँ अपराध दर को बढ़ाती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में भौगोलिक कारकों (मौसम, संसाधन, जनसंख्या घनत्व) और अपराध के बीच सम्बन्ध को उदाहरणों सहित स्पष्ट करना आवश्यक है। विशेष रूप से भारत के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों की तुलना करके समझाना प्रभावी रहेगा।

 

Question 2. भौगोलिक पर्यावरण किस प्रकार से सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है ?
Answer: भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक जीवन को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों रूपों में प्रभावित करता है। कुछ भौगोलिकविदों का कहना है कि भौगोलिक दशाएँ ही मनुष्य के सम्पूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन, विभिन्न संस्थाओं, मानवीय व्यवहारों एवं सभ्यता के स्वरूप का निर्धारण करती हैं। भौगोलिकविदों के मतानुसार
1. जनसंख्या की रचना एवं घनत्व,
2. व्यवसाय,
3. सामाजिक व्यवहार,
4. मकान-निर्माण,
5. भोजन,
6. वेशभूषा,
7. सामाजिक संस्थाओं (अर्थात् विवाह, अधिकार, विश्वास आदि),
8. उद्योग-धन्धों,
9. आवागमन के साधन,
10. कला व साहित्य इत्यादि पर भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है।
इतना ही नहीं; कुछ विद्वानों (हंटिंग्टन, बकल, मॉण्टेस्क्यू, डेक्सटर आदि) ने तो यहाँ तक कहा है कि सभी मानवीय व्यवहारों; जैसे - मनुष्य की कार्यकुशलता, आत्महत्या, सम्पत्ति एवं व्यक्ति के विरुद्ध अपराध, मानसिक सन्तुलन, जन्म एवं मृत्यु-दर इत्यादि पर जलवायु तथा ऋतुओं का प्रभाव पड़ता है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक जीवन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से प्रभावित करता है। यह जनसंख्या, व्यवसाय, सामाजिक व्यवहार, आवास, खान-पान, वेशभूषा, सामाजिक संस्थाएँ, उद्योग और कला जैसे विभिन्न पहलुओं को निर्धारित करता है। जलवायु और मौसम भी मानवीय कार्यकुशलता, मानसिक स्वास्थ्य और जन्म-मृत्यु दर जैसे व्यवहारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक पर्यावरण के प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रभावों को सूचीबद्ध करना और प्रत्येक बिन्दु का संक्षिप्त स्पष्टीकरण देना महत्वपूर्ण है। विभिन्न विद्वानों के विचारों का उल्लेख उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाता है।

 

Question 3. पर्यावरण के प्रकार अथवा भेद बताइए।
Answer: पर्यावरण के प्रकारों अथवा भेदों के विषय में विद्वानों ने विभिन्न प्रकार के मत व्यक्त किये हैं; जैसे
(क) लैण्डिस (Landis) के अनुसार, पर्यावरण के तीन प्रकार हैं
(i) प्राकृतिक,
(ii) सामाजिक तथा
(iii) सांस्कृतिक ।
(ख) ऑगबर्न एवं निमकॉफ के अनुसार पर्यावरण के दो प्रकार हैं
(i) प्राकृतिक तथा
(ii) मनुष्यकृत ।।
(ग) गिलिन तथा गिलिन के अनुसार भी पर्यावरण के दो भेद हैं
(i) प्राकृतिक पर्यावरण तथा
(ii) सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण ।
सामान्य आधार पर पर्यावरण को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है
1. भौगोलिक या प्राकृतिक पर्यावरण - इसमें प्रकृति प्रदत्त वस्तुएँ आती हैं; जैसे-स्थलमण्डल, जलमण्डल, वायुमण्डल इत्यादि । ये सभी अपनी-अपनी शक्तियों से अनेक क्रियाएँ करते हैं। जिससे पृथ्वी पर अनेक भौगोलिक दशाओं की उत्पत्ति होती है तथा ये सभी दशाएँ मानव के जीवन पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालती हैं।
2. सामाजिक पर्यावरण - सभी सामाजिक रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, लोकाचार आदि सामाजिक पर्यावरण के अन्तर्गत आती हैं।
3. सांस्कृतिक पर्यावरण - किसी समाज का सांस्कृतिक पक्ष सांस्कृतिक पर्यावरण कहलाता है। इसके अन्तर्गत उन समस्त वस्तुओं का समावेश होता है जिनको निर्माण स्वयं मनुष्य ने किया है; जैसे-धर्म, नैतिकता, भाषा, साहित्य, प्रथाएँ, लोकाचार, कानून, व्यवहार-प्रतिमान इत्यादि । इस प्रकार के पर्यावरण को 'सामाजिक विरासत' या 'संस्कृति' (Culture) भी कहते हैं।
In simple words: पर्यावरण को विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग प्रकार से वर्गीकृत किया है, लेकिन सामान्यतः इसे तीन मुख्य भागों में बांटा जा सकता है: प्राकृतिक (प्रकृति द्वारा प्रदत्त जैसे भूमि, जल, वायु), सामाजिक (सामाजिक रीति-रिवाज, परम्पराएँ) और सांस्कृतिक (मानव निर्मित वस्तुएँ जैसे धर्म, भाषा, कला)। ये सभी प्रकार मिलकर मानव जीवन को प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण के विभिन्न वर्गीकरणों को विद्वानों के नाम के साथ स्पष्ट रूप से उल्लेख करें। सामान्य वर्गीकरण के तीनों भागों- प्राकृतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक- को उदाहरणों सहित समझाना महत्वपूर्ण है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

Question 1. भौगोलिक पर्यावरण का सामाजिक संगठन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: भौगोलिक पर्यावरण विविध प्रकार से सामाजिक संगठन को प्रभावित करता है। इसके प्रभाव प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में पड़ते हैं। सामाजिक संगठन पर पड़ने वाले इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं
1. भौगोलिक पर्यावरण जनसंख्या के घनत्व का निर्धारण करता है। अधिक जनसंख्या अथवा कम जनसंख्या सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है।
2. भौगोलिक पर्यावरण का खान-पान पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि भौगोलिक पर्यावरण अनुकूल होता है तो आर्थिक समृद्धि के कारण व्यक्तियों का खान-पान उच्च स्तर को होता है।
3. भौगोलिक पर्यावरण धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करता है। उदाहरणार्थ कृषि प्रधान देश होने के कारण यहाँ इन्द्र अर्थात् वर्षा के देवता की पूजा का विशेष महत्त्व होता है।
4. भौगोलिक पर्यावरण मानव व्यवहार को प्रभावित करता है। भारत के विभिन्न राज्यों के रीति-रिवाज, खान-पान तथा साहित्य आदि में अन्तर पाए जाने का मूल कारण भौगोलिक पर्यावरण की विभिन्नता ही है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक संगठन को गहराई से प्रभावित करता है। यह जनसंख्या घनत्व, खान-पान की आदतें, धार्मिक विश्वासों (जैसे वर्षा के देवता की पूजा) और मानव व्यवहारों को निर्धारित करता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भौगोलिक भिन्नता के कारण रीति-रिवाजों, खान-पान और साहित्य में भी विविधता देखी जाती है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक संगठन पर भौगोलिक पर्यावरण के चार-पाँच प्रमुख प्रभावों को बिन्दुवार समझाएँ। जनसंख्या घनत्व, खान-पान और धार्मिक विश्वास जैसे पहलुओं पर जोर दें।

 

Question 2. सांस्कृतिक पर्यावरण का मानव जीवन के आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: सांस्कृतिक पर्यावरण व्यक्तियों के आर्थिक जीवन को भी प्रभावित करता है। यदि सांस्कृतिक मूल्य आर्थिक विकास में सहायता देने वाले हैं तो वहाँ व्यक्तियों को आर्थिक जीवन अधिक उन्नत होगा। मैक्स वेबर के अनुसार, प्रोटेस्टेण्ट ईसाइयों की धार्मिक मान्यताएँ पूँजीवादी प्रवृत्ति के विकास में सहायक हुई हैं। इसीलिए प्रोटेस्टेण्ट ईसाइयों के बहुमत वाले देशों में पूँजीवाद अधिक है। यदि सांस्कृतिक मूल्य आर्थिक विकास में बाधक हैं तो व्यक्तियों के आर्थिक जीवन पर इनका कुप्रभाव पड़ता है तथा वे आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए रहते हैं।
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण मानव के आर्थिक जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। यदि किसी संस्कृति के मूल्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, तो आर्थिक जीवन उन्नत होता है (जैसे प्रोटेस्टेण्ट धर्म और पूँजीवाद का सम्बन्ध)। इसके विपरीत, यदि सांस्कृतिक मान्यताएँ विकास में बाधा डालती हैं, तो आर्थिक पिछड़ापन देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक मूल्यों और आर्थिक विकास के बीच सीधा सम्बन्ध समझाएँ। मैक्स वेबर के प्रोटेस्टेण्ट नैतिकता और पूँजीवाद के सिद्धांत का उल्लेख करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाएगा।

 

Question 3. भौगोलिक पर्यावरण का मानसिक क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: भौगोलिक पर्यावरण का मानसिक क्षमता पर प्रभाव के सन्दर्भ में हंटिंग्टन का मत है कि जब तापमान बहुत गिर जाता है तो मानसिक योग्यता की अधिक हानि होती है और जलवायु में शीघ्र पुनः परिवर्तन न हो तो इसमें निरन्तर कमी आती जाती है। यदि हवा में कुछ गर्मी आ जाए तो इसमें कुछ सुधार होता है, लेकिन हवी अधिक गर्म हो जाने पर मानसिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक गर्मी में शीत ऋतु की तुलना में भारतीयों की मानसिक क्षमता कम हो जाती है।
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण, विशेष रूप से तापमान, मानसिक क्षमता को प्रभावित करता है। हंटिंग्टन के अनुसार, अत्यधिक ठण्ड या अत्यधिक गर्मी दोनों ही मानसिक योग्यता को कम करते हैं। जलवायु में तेजी से बदलाव भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। भारतीयों में अत्यधिक गर्मी में मानसिक क्षमता शीत ऋतु की तुलना में कम होती है।

🎯 Exam Tip: हंटिंग्टन के मत का उल्लेख करें और तापमान (ठण्ड व गर्मी) के मानसिक क्षमता पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को स्पष्ट करें। भारतीयों के संदर्भ में उदाहरण देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. प्रदूषण के प्रमुख दो सामाजिक प्रभावों को लिखिए।
Answer: प्रदूषण मानव तथा अन्य जीवों के जीवन-चक्र पर हानिकारक प्रभाव डालता है। अतः यह मानव तथा समाज दोनों के लिए हानिकारक है। प्रदूषण के दो प्रमुख हानिकारक प्रभाव निम्नलिखित हैं
1. मानव के जीवन-स्तर पर प्रभाव - मानव-जीवन पर प्राकृतिक सम्पदाओं का प्रभाव पड़ता है। यह प्राकृतिक सम्पदाएँ भूमि, पेड़-पौधे, खनिज-पदार्थ, जल, वायु आदि के रूप में मनुष्य को उपलब्ध हैं। प्रदूषण के कारण इन सभी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण के कारण फसलों, फलों, सब्जियों आदि पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जलीय जीव (मछलियाँ आदि) नष्ट हो जाते हैं। इससे वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि हो जाती है तथा लोगों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।
2. प्राणियों के खाद्य-पदार्थों में कमी - वनों की अन्धाधुन्ध कटाई के परिणामस्वरूप जीव जन्तुओं को चारा तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिस कारण हमें पशुओं से जो पदार्थ प्राप्त होते हैं, वे नष्ट होते जा रहे हैं।
In simple words: प्रदूषण के दो मुख्य सामाजिक प्रभाव हैं: पहला, यह मानव के जीवन-स्तर को प्रभावित करता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों जैसे फसलों और जलीय जीवों को नुकसान होता है, जिससे आर्थिक संकट पैदा होता है। दूसरा, यह प्राणियों के खाद्य-पदार्थों की कमी करता है, क्योंकि वनों की कटाई से चारागाह नष्ट हो जाते हैं, जिससे पशुधन उत्पादों की उपलब्धता घट जाती है।

🎯 Exam Tip: प्रदूषण के दो प्रमुख सामाजिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से बिन्दुवार लिखें। प्रत्येक प्रभाव का संक्षिप्त स्पष्टीकरण दें और दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़ें, जैसे आर्थिक संकट या खाद्य पदार्थों की कमी।

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. नगरीकरण से पर्यावरण प्रभावित होता है। (हाँ/नहीं) या जनसंख्या से पर्यावरण प्रभावित है। (हाँ/नहीं)
Answer: हाँ।
In simple words: नगरीकरण और जनसंख्या वृद्धि दोनों ही पर्यावरण को प्रभावित करते हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में सीधा और स्पष्ट उत्तर देना ही पर्याप्त होता है।

 

Question 2. भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव प्रत्यक्ष भी होता है और .......... भी।
Answer: अप्रत्यक्ष
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण मानव जीवन पर सीधा (प्रत्यक्ष) और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से प्रभाव डालता है, जो हमारे दैनिक जीवन और सामाजिक संरचना को आकार देता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के फिल-इन-द-ब्लैंक प्रश्नों में, सही शब्द का सटीक चयन महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 3. सभ्यता की वृद्धि के साथ भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव भी .......... जाता है।
Answer: घटता।
In simple words: जैसे-जैसे सभ्यता विकसित होती है और मनुष्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है, भौगोलिक पर्यावरण का सीधा प्रभाव कम होता जाता है क्योंकि हम पर्यावरण को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बदलने में सक्षम हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: सभ्यता के विकास और पर्यावरण के प्रभाव के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से पहचानें, कि तकनीकी प्रगति से प्राकृतिक कारकों पर निर्भरता घटती है।

 

Question 4. उस बाह्य शक्ति को क्या कहते हैं जो हमें प्रभावित करती है?
Answer: पर्यावरण।
In simple words: वह बाहरी शक्ति जो हमें प्रभावित करती है, उसे पर्यावरण कहते हैं, जिसमें हमारे चारों ओर की प्राकृतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण की बुनियादी परिभाषा को याद रखना ऐसे प्रश्नों के लिए आवश्यक है।

 

Question 5. किस विद्वान ने प्राकृतिक परिस्थितियों को धार्मिक व्यवहार से जोड़ने का प्रयास किया है।
Answer: मैक्स मूलर ।।
In simple words: मैक्स मूलर ने प्राकृतिक परिस्थितियों और धार्मिक व्यवहार के बीच संबंध को उजागर करने का प्रयास किया, यह सुझाव देते हुए कि धार्मिक मान्यताएँ अक्सर प्राकृतिक घटनाओं से प्रभावित होती हैं।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण समाजशास्त्रीय या दार्शनिक विचारों को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखना उपयोगी होता है।

 

Question 6. 'भौगोलिक निर्णायकवाद' की संकल्पना को किसने विकसित किया?
Answer: बकल ने ।
In simple words: 'भौगोलिक निर्णायकवाद' का सिद्धांत, जिसके अनुसार भौगोलिक परिस्थितियाँ मानव समाज और संस्कृति को निर्धारित करती हैं, बकल ने विकसित किया था।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र और भूगोल में प्रमुख अवधारणाओं और उनके जनक को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. “संस्कृति पर्यावरण का मानव निर्मित भाग है।” यह कथन किसका है?
Answer: हर्सकोविट्स का।।
In simple words: यह कथन हर्सकोविट्स ने दिया था, जो इस बात पर जोर देता है कि संस्कृति प्राकृतिक पर्यावरण से भिन्न है और यह मानव के प्रयासों और रचनात्मकता का परिणाम है।

🎯 Exam Tip: परिभाषाओं और कथनों को उनके संबंधित विद्वानों के साथ याद रखें, विशेषकर 'संस्कृति' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों के लिए।

 

Question 8. चिपको आन्दोलन किसने चलाया?
Answer: सुन्दरलाल बहुगुणा ने ।
In simple words: चिपको आंदोलन सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य पेड़ों को कटने से बचाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था।

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों और उनके नेताओं के नाम याद रखें।

 

Question 9. प्रदूषण की एक परिभाषा दीजिए।
Answer: प्रदूषण हमारी वायु, मृदा एवं जल के भौतिक, रासायनिक तथा जैविके लक्षणों में अवांछनीय परिवर्तन है जो मानव जीवन तथा अन्य जीवों पर हानिकारक प्रभाव डालता है।
In simple words: प्रदूषण वायु, मिट्टी और पानी में अवांछित बदलाव है, जो मानव और अन्य जीवों के लिए हानिकारक होता है।

🎯 Exam Tip: प्रदूषण की परिभाषा में इसके प्रकार (भौतिक, रासायनिक, जैविक) और जीवों पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 10. संस्कृति मानव..........वातावरण है।
Answer: निर्मित ।
In simple words: संस्कृति वह वातावरण है जिसे मानव ने अपनी आवश्यकताओं और विचारों के अनुसार बनाया है, जिसमें कला, विज्ञान, धर्म और सामाजिक संरचनाएँ शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृति की प्रकृति को मानव निर्मित वातावरण के रूप में पहचानना इसकी मौलिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. संस्कृति के दो प्रकार लिखिए ।
Answer: भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति ।
In simple words: संस्कृति के मुख्य दो प्रकार हैं: भौतिक संस्कृति (जैसे इमारतें, उपकरण) जो मूर्त होती हैं, और अभौतिक संस्कृति (जैसे विचार, मूल्य, नियम) जो अमूर्त होती हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृति के दो मुख्य प्रकार- भौतिक और अभौतिक- को स्पष्ट रूप से पहचानें और उन्हें याद रखें।

 

Question 12. सांस्कृतिक पर्यावरण की एक परिभाषा लिखिए।
Answer: हर्सकोविट्स के अनुसार, “सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत वे सभी भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ सम्मिलित हैं जिनका निर्माण मानव ने किया है।
In simple words: सांस्कृतिक पर्यावरण मानव द्वारा निर्मित सभी भौतिक और अभौतिक चीजों का कुल योग है, जिसमें इमारतें, उपकरण, भाषा, रीति-रिवाज, मूल्य और विश्वास शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: हर्सकोविट्स द्वारा दी गई सांस्कृतिक पर्यावरण की परिभाषा को verbatim याद रखें, जिसमें भौतिक और अभौतिक दोनों पहलुओं का समावेश होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. “पर्यावरण किसी भी उस बाह्य शक्ति को कहते हैं जो हमें प्रभावित करती है।” यह परिभाषा किस विद्वान ने प्रस्तुत की है?
(क) जिसबर्ट
(ख) रॉस
(ग) मैकाइवर
(घ) डेविस
Answer: (ख) रॉस
In simple words: रॉस ने पर्यावरण को एक ऐसी बाहरी शक्ति के रूप में परिभाषित किया जो हमें प्रभावित करती है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख परिभाषाओं को उनके संबंधित विद्वानों के साथ याद रखना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदत्त दशाओं से निर्मित पर्यावरण को क्या कहा जाता है?
(क) भौगोलिक
(ख) सामाजिक
(ग) सांस्कृतिक
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) भौगोलिक
In simple words: प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी दशाएँ, जैसे भूभाग, जलवायु और संसाधन, भौगोलिक पर्यावरण का हिस्सा हैं।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक पर्यावरण के लिए 'भौगोलिक' शब्द का उपयोग करें जो प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी दशाओं को संदर्भित करता है।

 

Question 3. निम्नलिखित में से किस विद्वान ने भौगोलिक निश्चयवाद का समर्थन किया है?
(क) बकल
(ख) लीप्ले
(ग) हटिंग्टन
(घ) ये सभी
Answer: (घ) ये सभी
In simple words: बकल, लीप्ले और हटिंग्टन सभी ने भौगोलिक निश्चयवाद का समर्थन किया, जो यह मानता है कि भौगोलिक कारक मानव समाज और संस्कृति को निर्धारित करते हैं।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक निश्चयवाद से जुड़े प्रमुख विद्वानों के नामों को याद रखें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

 

Question 4. भौगोलिक पर्यावरण किन तत्त्वों से बनता है?
(क) मनुष्य
(ख) प्राकृतिक दशाएँ
(ग) धार्मिक विश्वास
(घ) प्रथाएँ
Answer: (ख) प्राकृतिक दशाएँ
In simple words: भौगोलिक पर्यावरण मुख्य रूप से प्राकृतिक दशाओं जैसे भू-आकृति, जलवायु, जल और वनस्पति से मिलकर बनता है।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक पर्यावरण के मूल घटकों को प्राकृतिक दशाओं के रूप में पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. वह कौन-सा सिद्धान्त है जो सम्पूर्ण मानवीय क्रियाओं को भौगोलिक पर्यावरण के आधार पर स्पष्ट करने का प्रयास करता है?
(क) भौगोलिक निर्णायकवाद
(ख) तकनीकी निर्णायकवाद
(ग) सांस्कृतिक निर्णायकवाद
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) भौगोलिक निर्णायकवाद
In simple words: भौगोलिक निर्णायकवाद वह सिद्धांत है जो यह तर्क देता है कि मानव की सभी क्रियाएँ और समाज का विकास भौगोलिक पर्यावरण द्वारा निर्धारित होता है।

🎯 Exam Tip: 'भौगोलिक निर्णायकवाद' की अवधारणा को उसकी परिभाषा और मुख्य उद्देश्य के साथ समझें।

 

Question 6. हंटिंग्टन किस सम्प्रदाय का समर्थक है?
(क) भौगोलिक निर्णायकवाद
(ख) तकनीकी निर्णायकवाद
(ग) सांस्कृतिक निर्णायकवाद
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) भौगोलिक निर्णायकवाद
In simple words: हंटिंग्टन भौगोलिक निर्णायकवाद के समर्थक थे, उनका मानना था कि पर्यावरण मानव व्यवहार और समाज को आकार देता है।

🎯 Exam Tip: हंटिंग्टन जैसे विद्वानों को उनके द्वारा समर्थित प्रमुख सिद्धांतों या सम्प्रदायों के साथ जोड़कर याद रखें।

 

Question 7. भारतीय सरकार ने गंगा विकास प्राधिकरण' की स्थापना किस सन में की थी?
(क) सन् 1984 में
(ख) सन् 1985 में
(ग) सन् 1986 में
(घ) सन् 1987 में
Answer: (ख) सन् 1985 में
In simple words: भारतीय सरकार ने गंगा नदी के संरक्षण और विकास के लिए 'गंगा विकास प्राधिकरण' की स्थापना सन् 1985 में की थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सरकारी पहलों और उनकी स्थापना के वर्षों को याद रखें, विशेषकर पर्यावरण से संबंधित।

 

Question 8. पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
(क) 5 जून को
(ख) 24 जून को
(ग) 6 जून को
(घ) 20 जून को
Answer: (क) 5 जून को
In simple words: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण दिनों और उनकी तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

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