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Chapter Solutions: Class 12 Sahityik Hindi (UP Board) - समास
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समास Answers & Solutions for Class 12 Sahityik Hindi (UP Board)
परिभाषा
जब दो या दो से अधिक शब्द अपने बीच की विभक्ति को छोड़कर आपस में मिल जाएँ तो उसे समास कहते हैं, जैसे-'सूर्यस्य उदयः' (सूर्य का उदय) से नया शब्द 'सूर्योदयः' बनता है, जिसमें षष्ठी विभक्ति लुप्त हो जाती है। शब्दों के ऐसे मेल से जो एक स्वतन्त्र शब्द बनता है उसे सामासिक पद अथवा समस्त पद कहते हैं। सामासिक पद को अनुसार विभक्तियों सहित तोड़ना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे-सामासिक पद श्वेताम्बरम् का विग्रह होगा श्वेतम् अम्बरम् । यहाँ 'श्वेतम्' पूर्व पद एवं 'अम्बरम्' उत्तर पद हैं।
समास के भेद
समास के छ: भेद हैं।
1. तत्पुरुष
2. कर्मधारय
3. अव्ययीभाव
4. द्विगु
5. बहुव्रीहि
6. द्वन्द्व
आइए, पाठयक्र में सम्मिलित तीन समास कर्मधारय, अव्ययीभाव एवं बहुप्रीहि के वारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।
1. कर्मधारय समास
विशेषण विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय वाले समास को कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें दोनों शब्द (पूर्व पद एवं उत्तर पद) प्रथमा विभक्ति में होते हैं तथा दोनों ही पदों की प्रधानता होती है; जैसे-'कृष्णाश्वः' में प्रथम पद 'कृ:' अर्थात् काला विशेषण, जबकि अन्तिम पद 'अश्वः' अर्थात् घोड़ा विशेष्य है। इसका विग्रह होगा 'कृष्णः अश्वः' अर्थात् काला घोड़ा। उदाहरण-
| सामासिक पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| क्षुद्रहृदयः | क्षुद्रं च तत् हृदय | क्षुद्र हृदय |
| पीतवस्त्रम् | पीतम् वस्त्रम् | पीला वस्त्र |
| नीलोत्पलम् | नीलम् उत्पलम् | नील उत्पल (कमल) |
| घनश्यामः | घन इव श्यामः | काले बादलों के समान |
| कृष्णसर्पः | कृष्णः सर्पः | काला साँप |
| नीलाम्बुजम् | नीलम् अम्बुजम् | नीला कमल |
| महाजनः | महान् चासौ जनः | महान् है जो जन |
| नीलाश्वः | नीलं चासौ अश्वः | नीला घोड़ा |
| कुपुत्रः | कुत्सितः पुत्रः | बुरा पुत्र |
| नीलकमलम् | नीलं कमलम् | नीला कमल |
| महात्मा | महान् चासौ आत्मा | महान् आत्मा वाला |
| सज्जनः | सत् जनः | सदाचारी पुरुष |
| रक्तवस्त्रम् | रक्तं वस्त्रम् | लाल वस्त्र |
| महारथी | महान् चासौ रथी | महान् है जो रथी |
| रक्ताम्बरम् | रक्तम् अम्बरम् | लाल वस्त्र |
| कुमाता | कुत्सिता माता | बुरी माता |
| महादेवः | महान् चासौ देवः | महान् है जो देव |
| पीतवसनम् | पीतं वसनम् | पीला वस्त्र |
| पीताम्बरम् | पीतम् अम्बरम् | पीला वस्त्र |
| विद्याधनम् | विद्या एवं धनम् | विद्यारूपी धन |
| मुखकमलम् | मुखेव कमलम् | मुखरूपी कमल |
| पीतकमलम् | पीतं कमलम् | पीला कमल |
| श्वेताम्बरम् | श्वेतम् अम्बरम् | श्वेत वस्त्र |
| महापुरुषः | महान् चासौ पुरुषः | महान् है जो पुरुष |
| महाधनः | महत् चासौ धनम् | महान् है जो धन |
| श्रेष्ठपुरुषः | श्रेष्ठ चासौ पुरुषः | श्रेष्ठ है जो पुरुष |
| पुरुषव्याघ्रः | पुरुष एवं व्याघ्रः | पुरुषरूपी व्याघ्र |
| महावीरः | महान् चासौ वीरः | महान् है जो वीर |
| दानपात्रम | दानाय पात्रम | दान के लिए पात्र |
2. अव्ययीभाव समास
जिस समास में प्रथम पद अव्यय तथा अन्तिम पद संज्ञा हो तथा प्रथम पद अर्थात् अव्यय के ही अर्थ की प्रधानता हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इस समास के शब्द हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन में ही रहते हैं। इस समास को अपने पदों में विग्रह नहीं होता; जैसे-'निर्धनः' का विग्रह होगा 'धनानां अभावः'
उदाहरण-
| सामासिक पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| अनुदिनम् | दिनस्य पश्चात् | दिन के बाद |
| प्रत्यक्षं | अक्षं प्रति | आँखों के सामने |
| अनुरूपम् | रूपस्य योग्यम् | रूप के योग्य |
| प्रतिदिनम् | दिनं दिनं प्रति | प्रतिदिन |
| यथाशक्तिः | शक्तिम् अनतिक्रम्य | शक्ति के अनुसार |
| उपगङ्गम् | गङ्गायाः समीपे | गंगा के समीप |
| उपतटम् | तटस्य समीपे | तट के समीप |
| प्रत्यहम् | अहनं अहनं प्रति | प्रतिदिन |
| प्रत्येकः/प्रत्येकं | एकं एकं प्रति | हर एक |
| प्रतिगृहम् | गृहं गृहं प्रति | प्रत्येक घर |
| आसमुद्रम् | समुद्रस्य पर्यन्तम् | समुद्रपर्यन्त |
| उपकृष्णम् | कृष्णस्य समीपे | कृष्ण के समीप |
| यथाकामम् | कामम् अनतिक्रम्य | इच्छानुसार |
| अधिहरि | हरौ इति | हरि के विषय में |
| आजन्मम् | जन्म पर्यन्तम् | जन्मपर्यन्त |
| उपतीर्थम् | तीर्थस्य समीपे | तीर्थ के समीप |
| उपगंगम्ः | गंगायाः समीपम् उपगंगम् | गंगा के समीप |
| सहरि | हरेः सदृशम् | हरि के सदृश |
| अनुविष्णु | विष्णोः पश्चात् | विष्णु के बाद |
| उपरामम् | रामस्य समीपे | राम के समीप |
| प्रत्यक्षरम् | अक्षरं प्रति | प्रत्येक अक्षर |
| उपनगरम् | नगरस्य समीपे | नगर के समीप |
| निर्मक्षिकम् | मक्षिकाणाम् अभावः | मक्खियों से रहित |
| निर्जनम् | जनानों अभावः | लोगों का अभाव |
| यथाविधि | विधिम् अनतिक्रम्य | विधि के अनुसार |
3. बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पद (पूर्व पद एवं उत्तर पद) को छोड़कर कोई अन्य पद प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। इस प्रकार इसमें सामासिक अर्थ दोनों पदों से भिन्न होता है; जैसे-'त्रीनेत्र' का विग्रह 'त्रीणि नेत्राणि यस्य सः' (तीन हैं नेत्र जिसके) है, जिससे 'शंकर' का बोध होता है।
उदाहरण
| सामासिक पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| श्वेताम्बरा | श्वेतानि अम्बरानि यस्याः सा (सरस्वती)। | श्वेत अम्बर (वस्त्र) हैं जिसके |
| महात्मा | महान् आत्मा यस्य सः | महान् है आत्मा जिसकी |
| चक्रपाणिः | चक्र पाणौ यस्य सः | चक्र है हाथ में जिसके |
| वीणापाणिः | वीणा पाणौ यस्या सा | वीणा है हाथ में जिसके |
| पीताम्बरः | पीतम् अम्बरं यस्य सः | पीले हैं वस्त्र जिसके |
| दशाननः | दश आननानि यस्य सः | दश हैं मुख जिसके |
| चन्द्रशेखरः | चन्द्रः शिखरे यस्य सः | चन्द्रमा है सिर पर जिसके |
| त्रिनेत्रः | त्रीणि नेत्राणि यस्य सः | तीन हैं नेत्र जिसके |
| प्राप्तोदकः | प्राप्तम् उदकं येन सः | प्राप्त हो गया है जल जिसको |
| गजाननः | गजः इव आननम्ः यस्य सः | गज के समान मुख है जिसका |
| चतुराननः | चत्वारिः आननानि यस्य सः | चार हैं मुख जिसके |
| जितेन्द्रियः | जितानि इन्द्रियाणि येनः सः | जीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने |
| लम्बोदरः | लम्बम् उदरं यस्य सः | लम्बा है उदर जिसका |
| लब्ध प्रतिष्ठः | लब्धा प्रतिष्ठा येन सः | जिसके द्वारा प्रतिष्ठा लब्ध हो |
| चन्द्रमुखी | चन्द्र इव मुखं यस्यः सा | चन्द्रमा के समान मुख है जिसका |
| चन्द्रमुखः | चन्द्र इव मुखं यस्य सः | चन्द्रमा के समान मुख है जिसका |
| दामोदरः | दाम उदरे यस्य सः | रस्सी है उदर पर जिसके |
| लब्धकीर्तिः | लब्ध कीर्तिः येन सः | जिसके द्वारा कीर्ति लब्ध हो |
| महाबाहुः | महान्तौ बाहू यस्य सः | महान् है बाहु जिसकी |
| यशपाणिः | यशः पाणौ यस्य सः | यश है हाथ में जिसके |
| गदाहस्तः | गदा हस्ते यस्य सः | गदा है हाथ में जिसके |
| लम्बकेशी | लम्बानि केशानि यस्या सा | लम्बे हैं केश जिसके |
| यशोधनः | यशं धनं यस्य सः | यश है धन जिसका |
| मीनाक्षीः | मीन इव अक्षिणी यस्या सा | मीन के समान आँख है जिसकी |
| नीलकण्ठः | नीलः कण्ठः यस्य सः | नीला है कण्ठ जिसका |
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. रामस्य पुत्रः का समस्तपद होगा
(क) रामपुत्रः
(ख) रामेपुत्रः
(ग) रामायपुत्रः
(घ) राममपुत्रः
Answer: (क) रामपुत्रः
In simple words: 'रामस्य पुत्रः' का अर्थ है 'राम का पुत्र', और इसका समस्तपद 'रामपुत्रः' बनता है, जो तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय विभक्ति को पहचानना और समस्तपद बनाते समय उसका लोप करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. 'नीलोत्पलम' में विग्रह है।
(क) नीलम् उत्पलम्
(ख) निलमुत्पलम्
(ग) नलमोत्पलम्
(घ) नलस्योत्पलम्
Answer: (क) नीलम् उत्पलम्
In simple words: 'नीलोत्पलम' कर्मधारय समास का उदाहरण है, जहाँ 'नीलम्' विशेषण है और 'उत्पलम्' (कमल) विशेष्य है, जिसका अर्थ 'नीला कमल' है।
🎯 Exam Tip: कर्मधारय समास में अक्सर विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है, और विग्रह में दोनों पद प्रथमा विभक्ति में होते हैं।
Question 3. 'यथाशक्ति' में समास है।
(क) कर्मधारय
(ख) तत्पुरुष
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु
Answer: (ग) अव्ययीभाव
In simple words: 'यथाशक्ति' अव्ययीभाव समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें पहला पद 'यथा' एक अव्यय है और प्रधान है, जिसका अर्थ 'शक्ति के अनुसार' है।
🎯 Exam Tip: अव्ययीभाव समास में पहला पद अक्सर कोई अव्यय (जैसे यथा, प्रति, उप, अनु) होता है और वही पद प्रधान होता है।
Question 4. एकं एकं प्रति का सामासिक पद होगा
(क) प्रत्येक
(ख) हरेक
(ग) द्विरेकं
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) प्रत्येक
In simple words: 'एकं एकं प्रति' का अर्थ है 'प्रत्येक', जिसका समस्तपद 'प्रत्येक' होता है और यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: अव्ययीभाव समास में पुनरावृत्ति वाले पदों का विग्रह 'प्रति' के साथ किया जाता है, जैसे 'दिनं दिनं प्रति' - 'प्रतिदिनम्'।
Question 5. 'त्रिलोकी में समास है।
(क) द्वन्ट्स
(ख) द्विगु
(ग) तत्पुरुष
(घ) बहुव्रीहि
Answer: (ख) द्विगु
In simple words: 'त्रिलोकी' द्विगु समास का उदाहरण है क्योंकि इसका पहला पद 'त्रि' (तीन) एक संख्यावाचक विशेषण है और यह समूह का बोध कराता है (तीन लोकों का समूह)।
🎯 Exam Tip: द्विगु समास में प्रथम पद संख्यावाचक होता है और वह किसी समूह या समाहार का बोध कराता है।
Question 6. 'प्राप्तोदकः' में समास है।
(क) तत्पुरुष
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु
Answer: (ख) बहुव्रीहि
In simple words: 'प्राप्तोदकः' बहुव्रीहि समास है क्योंकि इसका अर्थ है 'जिसे प्राप्त हुआ है जल', जो किसी तीसरे पद (जैसे कुआँ या तालाब) का बोध कराता है, न कि केवल 'प्राप्त' और 'उदक' का।
🎯 Exam Tip: बहुव्रीहि समास में दोनों पदों का अर्थ प्रधान न होकर कोई तीसरा पद प्रधान होता है, जो समासिक पद से सूचित होता है।
Question 7. 'घनश्यामः' में समास है।
(क) द्विगु
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुव्रीहि
Answer: (ग) कर्मधारय
In simple words: 'घनश्यामः' कर्मधारय समास है क्योंकि इसका विग्रह 'घन इव श्यामः' (बादल के समान काला) होता है, जहाँ 'घन' उपमान और 'श्याम' उपमेय है।
🎯 Exam Tip: उपमान-उपमेय संबंध वाले पद कर्मधारय समास के अंतर्गत आते हैं, जहाँ एक वस्तु की तुलना दूसरी से की जाती है।
Question 8. 'रामस्य समीपे' का सामासिक पद होगा।
(क) उपरामम्
(ख) उपारामम्
(ग) उपेरामम्
(घ) उपोरामम्
Answer: (क) उपरामम्
In simple words: 'रामस्य समीपे' का अर्थ है 'राम के समीप', जिसका समस्तपद 'उपरामम्' होता है और यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: 'समीप' अर्थ में 'उप' अव्यय का प्रयोग अव्ययीभाव समास में होता है, जैसे 'उपगंगम्' (गंगा के समीप)।
Question 9. 'चन्द्रशेखरः' में समास है।
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुव्रीहि
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) बहुव्रीहि
In simple words: 'चन्द्रशेखरः' का विग्रह 'चन्द्रः शिखरे यस्य सः' (जिसके शिखर पर चन्द्रमा है, अर्थात् शिव) है, जो किसी तीसरे व्यक्ति (शिव) का बोध कराता है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।
🎯 Exam Tip: बहुव्रीहि समास में समस्तपद किसी तीसरे संज्ञा पद का विशेषण बन जाता है, जिससे एक विशिष्ट अर्थ निकलता है।
Question 10. 'महान् च असौ देवः' का सामासिक पद होगा।
(क) महादेव
(ख) महादेवी
(ग) शिवः
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) महादेव
In simple words: 'महान् च असौ देवः' का अर्थ है 'जो महान् है ऐसा देव', जिसका समस्तपद 'महादेव' होता है, जो कर्मधारय समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: कर्मधारय समास में 'च असौ' या 'च तत्' जैसे पदों का प्रयोग विशेषण और विशेष्य के संबंध को दर्शाने के लिए होता है।
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