UP Board Solutions Class 12 Sahityik Hindi Padya Chapter 11 Vividha

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Detailed Chapter 11 विविधा UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi

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Class 12 Sahityik Hindi Chapter 11 विविधा UP Board Solutions PDF

(नरेन्द्र शर्मा, भवानीप्रसाद मिश्र, गजानन माधव मुक्तिबोध', गिरिजाकुमार माथुर, धर्मवीर भारती)

प्रश्न-पत्र में संकलित पाठों में से चार कवियों के जीवन परिचय, कृतियाँ तथा भाषा-शैली से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। जिनमें से एक का उत्तर देना होता है। इस प्रश्न के लिए 4 अंक निर्धारित हैं।

(क) नरेन्द्र शर्मा

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ

छायावादोत्तर काल में अपने प्रणय-गीतों, सामाजिक भावना एवं क्रान्तिवादी कविताओं से जनमत को गहराई से प्रभावित करने वाले कवियों में अग्रगण्य नरेन्द्र शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के जहाँगीरपुर नामक गाँव में 28 फरवरी, 1913 में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री पूरनलाल शर्मा तथा माता का नाम श्रीमती गंगा देवी था। नरेन्द्र शर्मा चार वर्ष के ही थे, तभी इनके पिता का स्वर्गवास हो गया।

अपने गाँव में प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से 1936 में एम. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान जेल जाने के बाद वर्ष 1940 में काशी विद्यापीठ में इन्होंने अध्यापन कार्य भी किया। इन्होंने वर्ष 1934 में प्रयाग में 'अभ्युदय' पत्रिका का सम्पादन किया। वर्ष 1943 में बम्बई (अब मुम्बई) की चित्रपट की दुनिया में प्रवेश किया तथा उसे अनेक साहित्यिक एवं मधुर गीत प्रदान किए। बाद में आकाशवाणी से जुड़कर विविध भारती के कार्यक्रमों का संचालन भी किया। वर्ष 1989 में इनका देहान्त हो गया।

साहित्यिक गतिविधियाँ

छायावादोत्तर युग के प्रमुख व्यक्तिवादी गीतिकाव्य के रचयिता कवियों में नरेन्द्र शर्मा का विशिष्ट स्थान है। नरेन्द्र शर्मा ने साहित्य और लोकमंच कवि सम्मेलनों के माध्यम से जनजीवन को प्रभावित एवं प्रेरित कर साहित्यकार के दायित्व का पूर्ण निर्वाह किया है। इन्होंने कवि सम्मेलनों एवं गोष्ठियों में अपने गीतों को प्रस्तुत करके लोगों के मन-मस्तिष्क को मोह लिया था। वे विशेष रूप से छोटी भावनाओं को सरसता से व्यक्त करने वाले सफल कवि थे। इनके कुछ गीत फिल्मों में भी रिकॉर्ड किए गए हैं।

कृतियाँ

काव्य संग्रह शूल-फूल, कर्ण फूल, प्रवासी के गीत, पलाशवन, मिट्टी और फूल, रक्त चन्दन, प्रभात फेरी, प्यासा, निर्झर आदि । खण्ड काव्य द्रौपदी, उत्तर-जय, सुवर्णा ।

काव्यगत विशेषताएँ

भाव पक्ष

1. चित्रात्मकता, सजीवता एवं आत्मीयता के भाव भावात्मक अनुभूति की तीव्रता एवं सहजता की दृष्टि से नरेन्द्र शर्मा के गीतों की अपनी विशिष्टता है। उनके गीतों में चित्रात्मकता, सजीवता एवं आत्मीयता के भाव हैं। 2. क्रान्तिकारी दृष्टिकोण छायावादौत्तरकाल में अपने प्रणय गीतों, सामाजिक भावना एवं क्रान्तिवाहक कविताओं से जनमत को बहुत गहराई से प्रभावित करने वाले कवियों में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। 3. विद्रोही स्वर शर्मा जी ने आक्रोश-भरे विद्रोही स्वर में विशाल जनमानस की विवशता, विद्रोह की भावना एवं नव निर्माण की चेतना को मुखरित किया है। 4. प्रकृति चित्रण इनके प्रकृति चित्रण में सरलता से हृदय को आकर्षित कर लेने की क्षमता है। इनमें प्रकृति को आकर्षक रूप देने में अत्यधिक कुशलता है।

कला पक्ष

1. भाषा नरेन्द्र शर्मा ने अपने साहित्य में शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया है, किन्तु उसके उपरान्त भी उनकी भाषा सरल, सुबोध और प्रभावशाली बन पड़ी है। 2. शैली इनकी रचनाओं में लाक्षणिकता, चित्रोपमता एवं प्रतीकात्मकता प्रचुरता से उपलब्ध हैं। 3. अलंकार एवं छन्द शर्मा जी के काव्य में अलंकारों एवं छन्दों का बड़ा ही। स्वाभाविक, सजीव और सुन्दर प्रयोग हुआ है।

हिन्दी साहित्य में स्थान

अपने प्रणय गीतों, सामाजिक भावना एवं क्रान्तिकारी कविताओं से लोगों को प्रभावित करने वाले कवियों में नरेन्द्र शर्मा प्रमुख हैं। एक उत्कृष्ट गीतकार के रूप में नरेन्द्र शर्मा का हिन्दी साहित्य में सदैव विशिष्ट स्थान रहेगा।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्म भाग से दो पट्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक 2 अंक) के उत्तर देने होंगे ।

मधु की एक बूंद

Question 1. मधु की एक बूंद के पीछे मानव ने क्या क्या दुःख देखे । मधु की एक बूंद धूमिल घन दर्शन और बुद्धि के लेखे ! सृष्टि अविद्या का कोल्हू यदि, विज्ञानी विद्या के अन्धे; मधु की एक बूंद बिन कैसे जीव करे जीने के धन्धे !
उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत पट्यांश किस कविता से उदधृत है तथा उसके रचनाकार कौन हैं?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश 'मधु की एक बूंद' कविता से उद्धृत है तथा इसके रचनाकार ‘नरेन्द्र शर्मा जी हैं।
In simple words: यह पद्यांश 'मधु की एक बूंद' नामक कविता से लिया गया है और इसके रचयिता नरेन्द्र शर्मा जी हैं।

🎯 Exam Tip: कविता और कवि का नाम सही से पहचानना उत्तर के लिए महत्वपूर्ण है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि सृष्टि में प्रत्येक प्राणी के क्रियाकलाप आनन्द की खोज के लिए ही होते हैं। मनुष्य आनन्द का अभिलाषी है और इस क्षण को प्राप्त करने हेतु वह सदैव प्रयत्नशील रहता है।
In simple words: कवि समझाना चाहते हैं कि हर जीव आनंद की तलाश में है और उसे पाने के लिए हमेशा प्रयास करता रहता है।

🎯 Exam Tip: कवि के मूल संदेश को संक्षेप में स्पष्ट करना सीखें।

(iii) कवि के अनुसार किसकी अभिव्यक्ति असम्भव है?
Answer: कवि कहता है कि मनुष्य जीवन-पर्यन्त आनन्द की प्राप्ति हेतु प्रयासों में लगा रहता है और उसे आनन्द के ये क्षण अनेक दुःखों का सामना करने के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं, जिन्हें अभिव्यक्त करना असम्भव है।
In simple words: कवि के अनुसार, जीवन भर आनंद पाने के लिए किए गए प्रयासों और दुखों से प्राप्त आनंद के क्षणों को शब्दों में व्यक्त करना असंभव है।

🎯 Exam Tip: भावनात्मक विचारों को व्यक्त करने में कवि की असमर्थता को पहचानें और समझाएं।

(iv) कवि के अनुसार पृथ्वीवासी को सुख की प्राप्ति क्यों नहीं हो पाई है?
Answer: कवि के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि आनन्द या सुख की प्राप्ति हेतु कोल्हू के बैल की भाँति चारों ओर चक्कर लगा रही है अर्थात् सम्पूर्ण पृथ्वीवासी अपनी अज्ञानता के कारण ही आनन्द या सुख की प्राप्ति नहीं कर पा रहे हैं, व्यर्थ ही आनन्द के मार्ग में निरन्तर क्रियाशीलता का अनुसरण कर रहे हैं।
In simple words: पृथ्वीवासी अपनी अज्ञानता के कारण आनंद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, वे बिना सही दिशा के लगातार प्रयास कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा दिए गए उपमा (कोल्हू का बैल) का उपयोग करके कारण स्पष्ट करें।

(v) प्रस्तुत पद्यांश में कौन-सा अलंकार है?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश में रूपक, उपमा एवं अनुप्रास अलंकार हैं।
In simple words: इस पद्यांश में रूपक, उपमा और अनुप्रास जैसे अलंकारों का प्रयोग किया गया है जो काव्य की सुंदरता बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: अलंकारों की पहचान और उनका सही उल्लेख महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. मधु की एक बूंद बिन, रीते पाँचों कोश और पाँचों जन; मधु की एक बूंद बिन, हम से सभी योजनाएँ सौ योजन! मधु की एक बूंद बिन, ईश्वर शक्तिमान भी शक्तिहीन है! मधु की एक बूंद सागर हैं हर जीवात्मा मधुर मीन है। मधु की एक बूंद पृथ्वी में, मधु की एक बूंद शशि-रवि में मधु की एक बूंद कविता में, मधु की एक बूंद कवि में। मधु की एक बूंद के पीछे, मैंने अब तक कष्ट सहे शत, मधु की एक बूंद मिथ्या है, कोई ऐसी बात कहे मत!
उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि ने आनन्द के महत्व को प्रतिपादित किया है। तथा स्पष्ट किया है कि आनन्द ही मनुष्य जीवन का आधार है तथा इसको प्राप्त करने के लिए सभी चेतन पदार्थ प्रयत्नशील रहते हैं।
In simple words: कवि इस पद्यांश में आनंद के परम महत्व को दर्शाते हैं, बताते हैं कि आनंद ही जीवन का मूल आधार है और सभी जीव इसे पाने का प्रयास करते हैं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय विचार को संक्षेप में स्पष्ट करें।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश में आनन्द के अभाव में किसको महत्त्वहीन बताया गया है?
Answer: प्रस्तुत पट्यांश में आनन्द के अभाव में पंचकोश तथा पंचजन सभी शून्य व निष्प्रभ हैं अर्थात् मनुष्य को यदि आनन्द के क्षण ही प्राप्त न हों, तो उसके शरीर को संगठित करने वाले पाँच कोश अर्थात् पंचकोश तथा पंचजन का अस्तित्वव्यर्थ है, उनका कोई महत्व नहीं रह जाएगा।
In simple words: कवि के अनुसार आनंद के बिना मनुष्य के पंचकोश (शरीर के पांच आवरण) और पंचजन (पांचों इंद्रियाँ) महत्वहीन हो जाते हैं, उनका अस्तित्व निरर्थक हो जाता है।

🎯 Exam Tip: कविता में प्रयुक्त विशिष्ट शब्दों (पंचकोश, पंचजन) का अर्थ समझाना आवश्यक है।

(iii) कवि ने आनन्द के क्षण के महत्व को किस प्रकार प्रकट किया है?
Answer: कवि ने आनन्द के एक क्षण के महत्व को प्रकट करते हुए कहा है कि आनन्द की एक वृंद मनुष्य के लिए सागर के समान है और प्रत्येक जीवात्मा उसकी मनोहर मछली है।
In simple words: कवि ने आनंद के एक क्षण को सागर और हर जीव को उसकी मछली के रूप में दर्शाकर उसके असीमित महत्व को समझाया है।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा उपयोग की गई तुलनाओं को पहचानें और व्याख्या करें।

(iv) “मधु की एक बूंद मिथ्या है, कोई ऐसी बात कहे मत।” इस पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
Answer: इस पंक्ति से कवि का आशय यह है कि जीवन में आनन्द की प्राप्ति के लिए सभी चेतन पदार्थ प्रयत्नशील रहते हैं अर्थात् मनुष्य जीवन-पर्यन्त आनन्द की प्राप्ति के लिए प्रयासरत् रहता है, इसलिए आनन्द को मिथ्या मानना सर्वथा गलत है।
In simple words: इस पंक्ति से कवि यह कहना चाहते हैं कि जीवन में आनंद की खोज और प्राप्ति एक महत्वपूर्ण प्रयास है, इसलिए आनंद को व्यर्थ या झूठा नहीं मानना चाहिए।

🎯 Exam Tip: दी गई पंक्ति के गहरे अर्थ और कवि के दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।

(v) 'शक्तिहीन' में कौन-सा समास है? विग्रह करके स्पष्ट कीजिए।
Answer: शक्तिहीन-शक्ति से हीन (तत्पुरुष समास)।
In simple words: 'शक्तिहीन' शब्द में तत्पुरुष समास है, जिसका अर्थ है 'शक्ति से रहित'।

🎯 Exam Tip: समास के प्रकार और उसके विग्रह को सही ढंग से प्रस्तुत करें।

(ख) भवानीप्रसाद मिश्र

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ

प्रयोगशील एवं नई कविता के सशक्त कवि भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 23 मार्च, 1914 को होशंगाबाद जिले के 'रेखा' तट पर बसे 'टिगरिया' नामक ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री सीताराम मिश्र तथा माता का नाम श्रीमती देवी था। जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से बी.ए. करने के बाद ये वर्ष 1942 के आन्दोलन में तीन वर्ष के लिए जेल गए। जेल में ही इन्होंने बांग्ला भाषा का अध्ययन किया। आकाशवाणी के मुम्बई केन्द्र में हिन्दी विभाग के प्रधान पद से अवकाश प्राप्त करने के पश्चात् इन्होंने 'सम्पूर्ण गाँधी वाङ्मय' का सम्पादन किया। वर्ष 1985 में इन्होंने इस संसार से विदा ली।

साहित्यिक गतिविधियाँ

इनकी रचनाओं पर गाँधी-दर्शन को स्पष्ट प्रभाव है। चिन्तनशीलता इनकी रचनाओं की एक प्रमुख विशिष्टता है। इन्होंने जीवन से जुड़ी गहरी विडम्बनाओं एवं विसंगतियों को सरल शैली में चित्रित किया है। प्रकृति सौन्दर्य चित्रण में इनका मन बहुत रमता था। इनकी कविताओं में वैयक्तिता एवं आत्मानुभूति के स्वर भी मुखरित हुए हैं।

कृतियाँ

अज्ञेय जी द्वारा सम्पादित 'दूसरा सप्तक' में शमिल होने से इनकी रचनाओं से पहली बार पाठक परिचित हुए। इसके अतिरिक्त इनकी प्रमुख रचनाएँ-गीत-फरोश, चकित हैं दुःख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख, त्रिकाल सन्ध्या, मानसरोवर दिन, कालजयी आदि हैं।

काव्यगत विशेषताएँ

भाव पक्ष

1. प्रेम की एक पक्षीयता के दर्शन मिश्र जी की कविता में प्रेम की एक पदीयता के दर्शन होते हैं। उसमें आकुलता, आँसू और अभाव की चर्चा अधिक 2. मानववादी कलाकार मिश्र जी एक मानववादी कलाकार हैं। मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा उनका अभीष्ठ है। मानववादी भावना उनके काव्य में सर्वत्र समाहित है, चाहे कवि प्रकृति की दृश्यावली में डूबा हो या विशेष मनःस्थिति में आत्मरथ हो गया है। 3. प्रगतिशील चेतना मिश्र जी के काव्य में प्रगतिशील चेतना के भी दर्शन होते हैं। कवि ने अपनी प्रगतिशील चेतना से पूँजीपतियों, सामन्तों और शासकों के अत्याचारों का सजीव वर्णन किया है। 4. प्रकृति चित्रण मिश्र जी प्रकृति के कवि हैं। इन्होंने प्रकृति सौन्दर्य के चित्र इतनी गहराई से और सजीवता से उभारे हैं कि उनमें प्रकृति, मोहक और यथार्थ रूप में साकार हो उठी है।। 5. गाँधीवादी विचारधारा गाँधी दर्शन अनुभूति के स्तर पर उनके विचारों में घुलमिल कर उनके काव्य में प्रकट हुआ है। उन्होंने अपने 'गाँधी पंचशती' कविता संग्रह में अपनी गाँधीवादी विचारधारा का सुन्दर परिचय दिया है।

कला पक्ष

1. भाषा मिश्र जी की भाषा सहज, सरल, बोधगम्य और स्वाभाविक बन पड़ी है। इन्होंने स्वयं को संस्कृत की तत्सम शब्दावली से बचाकर सामान्य भाषा के शब्दों का प्रयोग किया है। 2. शैली मिश्र जी की भाषा की तरह ही शैली भी सरल, सहज और प्रवाहमय है। 3. बिम्ब एवं प्रतीक योजना मिश्र जी ने अपनी व्यक्तित्त्व अनुभूति और आस्था के सन्दर्भ में प्रतीकों का प्रयोग किया है, इसके साथ ही अपनी कविता में विविध प्रकार के बिम्बों को भी अपनाया है। 4. अलंकार एवं छन्द मिश्र जी ने अपने काव्य में अलंकारों का सरल, सहज और स्वाभाविक प्रयोग किया है। अलंकारों का छलीप मिश्र जी को मोहित नहीं कर सका प्रयोगवादी प्रवृत्ति के कारण इन्होंने अधिकांश रूप से छन्द मुक्त कविताएँ लिखी हैं, परन्तु उनमें लय और ध्वन्यात्मकता का पूर्ण ध्यान रखा है।

हिन्दी साहित्य में स्थान

प्रयोगवादी कवियों में भवानीप्रसाद मिश्र एक प्रख्यात कवि के रूप में जाने जाते हैं। प्रयोगवादी एवं नई कविता की काव्यधारा के प्रतिष्ठित कवि के रूप में इन्हें अत्यधिक सम्मान प्राप्त है।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्म भाग से दो पद्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक 2 अंक) के उत्तर देने होंगे।

बूंद टपकी एक नभ से

Question 1. बूंद टपकी एक नभ से, किसी ने झुककर झरोखे से कि जैसे हँस दिया हो, हँस रही-सी आँख ने जैसे किसी को कस दिया हो, ठगा-सा कोई किसी की आँख देखे रह गया हो, उस बहुत से रूप को, रोमांच रोके सह गया हो। बूंद टपकी एक नभ से, और जैसे पथिक छ मुस्कान, चौंके और घूमे आँख उसकी, जिस तरह हँसती हुई-सी आँख चूमे, उस तरह मैंने उठाई आँख : बादल फट गया था, चन्द्र पर आता हुआ-सा अभ्र थोड़ा हट गया था।
उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत पद्यांश किस कविता से उदधृत हैं तथा उसके रचनाकार कौन हैं?
Answer: प्रस्तुत पशि 'दूसरा सप्तक' काव्य संग्रह में संकलित कविता 'बूंद टपकी एक नब से 'से उदधृत हैं तथा इसके रचनकार भवानीप्रसाद मिश्र ' जी हैं।
In simple words: यह पद्यांश भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित 'बूंद टपकी एक नभ से' कविता से लिया गया है, जो 'दूसरा सप्तक' संग्रह में संकलित है।

🎯 Exam Tip: कविता के स्रोत और कवि के नाम का सटीक उल्लेख करना आवश्यक है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बूंद के माध्यम से प्रेमिका के द्वारा चित्त को आकर्षित करने के लिए किए जाने वाले भावों की अभिव्यक्ति की है। कवि ने इसके साथ ही आकाश में बूंद के टपकने जैसी सामान्य-सी प्राकृतिक घटना को अनेक उपमानों से व्यक्त किया है।
In simple words: कवि ने एक बूंद के टपकने को प्रेमिका के आकर्षण और उससे जुड़े भावनात्मक अनुभवों के रूप में वर्णित किया है, जिसमें प्राकृतिक घटना को मानवीय भावनाओं से जोड़ा गया है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय भाव और कवि की उपमाओं के प्रयोग को स्पष्ट करें।

(iii) “हँस रही-सी आँख ने जैसे, किसी को कस दिया हो ।” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत क्ति का आशय यह है कि आकाश से टपकी बूंद प्रेयसी के रूप में जब प्रेमी पर गिरती है, तो उसे लगता है जैसे उसने उसे अपनी ओर आकर्षित कर अपने बहुपाश में बाँध दिया हो ।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि जब आसमान से गिरी बूंद प्रेमी पर पड़ती है, तो उसे महसूस होता है जैसे प्रेमिका ने उसे प्यार से अपनी ओर खींच लिया है।

🎯 Exam Tip: पंक्ति के प्रतीकात्मक अर्थ को प्रेमिका के आकर्षण से जोड़कर समझाएं।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने जब नायिका की ओर देखा तब क्या हुआ था?
Answer: कवि ने जब अपनी आँखें उठाई और आकाश की ओर देखा, तो बादल फट गया था अर्थात् जब उन्होंने नायिका की ओर देखा तो उसके मुख पर पड़ा हुआ पूँघट हट गया था और ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानों चन्द्रमा के ऊपर से बादल हट गए हों। यहाँ चन्द्रमा को नायिका के तथा पूँघट को बादल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
In simple words: कवि जब नायिका को देखता है, तो उसे ऐसा लगता है जैसे उसका घूंघट हट गया हो, ठीक वैसे ही जैसे चांद से बादल हट जाते हैं, जिससे नायिका का सौंदर्य स्पष्ट हो जाता है।

🎯 Exam Tip: कवि की कल्पना और उपमाओं का उपयोग करके स्थिति का वर्णन करें।

(v) प्रस्तुत पद्यांश में कौन-सा अलंकार है?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश में उपमा, उत्प्रेक्ष एवं अनुप्रास अलंकार हैं।
In simple words: इस पद्यांश में उपमा, उत्प्रेक्षा और अनुप्रास जैसे अलंकारों का प्रभावी प्रयोग किया गया है, जो इसकी काव्य सुंदरता को बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रयुक्त अलंकारों की सही पहचान और उनका उल्लेख करें।

(ग) गजानन माधव मुक्तिबोध

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ

नई कविता के प्रतिनिधि कवि गजानन माधव मुक्तिबोध' का जन्म 13 नवम्बर, 1917 को श्योपुर, जिला ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। इनके पिता माधव मुक्तिबोध पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर थे। इनकी माता का नाम पार्वती बाई था। इन्दौर के होल्कर कॉलेज से बी.ए. करने के बाद इन्होंने मित्रों के सहयोग से एम.ए. किया और राजनान्दगाँव के दिग्विजय कॉलेज में प्राध्यापक नियुक्त हो गए। इन्होंने शान्ताबाई नामक एक विपन्न लड़की से प्रेम विवाह किया। विभिन्न परिस्थितियों से जूझते हुए मुक्तिबोध को अपना सम्पूर्ण जीवन अभाव, संघर्ष और विपन्नता में ही व्यतीत करना पड़ा। सितम्बर, 1964 में इनका देहावसान हो गया।

साहित्यिक गतिविधियाँ

आधुनिक जीवन मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति के लिए इन्होंने नए विषयों को नवीन सन्दर्भों से युक्त करके प्रस्तुत किया। जन-जीवन के यान्त्रिक स्वरूप को पहचानकर उसकी व्याख्या करने वाले आधुनिक हिन्दी कविता में मुक्तिबोध सम्भवतः पहले कवि हैं। मुक्तिबोध बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार थे। वे आम आदमी की वकालत करने वाले कवि थे। उनका व्यक्तित्व अपनी पूरी पीढी में विशिष्ट रहा है। इन्होंने 'हल' तथा 'नया खून' पत्रिकाओं का सम्पादन किया।

कृतियाँ

काव्य रचनाएँ चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी-भूरी खाक धूल तथा तार सप्तक में प्रकाशित रचनाएँ।
कहानी संग्रह काठ का सपना ।
उपन्यास विपात्र ।।
आत्माख्यान एक साहित्यिक की डायरी।।
निबन्ध संग्रह नई कविता का आत्म-संघर्ष तथा अन्य निबन्ध ।
पुस्तक समीक्षा उर्वशीः दर्शन और काव्य, कामायनी : एक पुनर्विचार ।

काव्यगत विशेषताएँ

भाव पक्ष

1. यायावरी वृति मुक्तिबोध की कविता में यायावरी वृति के दर्शन होते हैं। ये जीवन की सच्चाई की खोज के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते रहे। 2. आधुनिक जीवन की विभीषिकाओं का चित्रण गजानन जी की कविता में आधुनिक जीवन की विभीषिकाओं को जितनी सूक्ष्म दृष्टि से चित्रित किया गया है, उतनी किसी अन्य कवि के काव्य में प्राप्त नहीं होती हैं। 3. सन्त्रास और कुण्ठा इनकी कविता में सन्त्रास एवं कुण्ठा की भी व्यंजना हुई है। 4. विद्रोह या क्रान्ति सामाजिक अव्यवस्था, कुरीतियों के प्रति विद्रोह या क्रान्ति का स्वर इनकी कविता का प्राण है। 5. सत्-चित् वेदना मुक्तिबोध जी सत्-चित्-वेदना के कवि हैं। इनका दुःख का बोध जितना गहरा है उतना ही व्यापक है।

कला पक्ष

1. भाषा मुक्तिबोध के काव्य की भाषा कृत्रिमता के आडम्बर से मुक्त है। इनकी भाषा इनके विचारों का सफल प्रतिनिधित्व करने में समर्थ है। इन्होंने अपनी भाषा को सरल, सहज एवं सम्प्रेषणीय बनाने के लिए उर्दू, अंग्रेजी और देशज भाषा के शब्दों को अपनाया है। 2. शैली गजानन जी ने अपनी लम्बी कविताओं में फैन्टेसी (कल्पना) शैली का आश्रय लिया है। 3. बिम्ब एवं प्रतीक मुक्तिबोध जी ने काल्पनिक एवं जादुई प्रतीकों के माध्यम से बिम्बों का निर्माण किया है, जो संवेदनात्मक अनुभूति की तीव्रता को तो प्रदर्शित करते हैं, परन्तु मस्तिष्क में किसी स्पष्ट चित्र का निर्माण नहीं करते। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपनी कविताओं में प्रतीकों के माध्यम से मिथिकों की भी सृष्टि की है।

हिन्दी साहित्य में स्थान

गजानन माधव मुक्तिबोध' कवि, कथाकार, समीक्षक, विचारक एवं श्रेष्ठ पत्रकार के रूप में प्रतिष्ठित हुए । अनेक विद्वान् सच्चे अर्थों में उन्हें ही 'प्रयोगवादी' कविता का अग्रगण्य कवि मानते हैं।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्म भाग से दो पट्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक 2 अंक) के उत्तर देने होंगे ।

मुझे कदम-कदम पर

Question 1. मुझे कदम-कदम पर, चौराहे मिलते हैं बाँहें फैलाए। एक पैर रखता हूँ कि सौ राहें फूटतीं व मैं उन सब पर से गुजरना चाहता हूँ; बहुत अच्छे लगते हैं। उनके तजुर्बे और अपने सपने..... सब सच्चे लगते हैं; अजीब सी अकुलाहट दिल में उभरती है, में कुछ गहरे में उतरना चाहता हूँ, जाने क्या मिल जाए।
उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत पद्यांश किस रचना से उदधृत है तथा उसके कवि कौन हैं?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' हिन्दी पाठयपुस्तक में संकलित कविता 'मुझे कदम-कदम पर से उधृत हैं तथा इसके कवि गजानन माधव 'मुक्तिबोध जी हैं।
In simple words: यह पद्यांश मुक्तिबोध की कविता 'मुझे कदम-कदम पर' से लिया गया है, जो उनके काव्य संग्रह 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' में संकलित है।

🎯 Exam Tip: कविता और कवि के नाम का सही उल्लेख महत्वपूर्ण है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पद्मांश का भाव यह है कि जीवन विकल्पों से परिपूर्ण है। किसी भी खोज के समय व्यक्ति के सामने अनन्त मार्ग खुल जाते हैं और व्यक्ति इन सबका आनन्द प्राप्त करना चाहता है।
In simple words: कवि इस पद्यांश में जीवन को विकल्पों और संभावनाओं से भरा हुआ मानते हैं, जहाँ हर कदम पर नए रास्ते खुलते हैं और व्यक्ति उन सभी का अनुभव करना चाहता है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय भाव को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

(iii) प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि ने क्या सन्देश दिया है?
Answer: कवि को बहिर्जगत में इतने मनोरम, प्रभावपूर्ण और इतने सुन्दर दृश्य अपने चारों ओर देखने को मिलते हैं, वह उससे प्रेरणा ग्रहण करने का सन्देश इस पद्यांश के माध्यम से देता है।
In simple words: कवि संदेश देते हैं कि हमें अपने आस-पास के सुंदर और प्रेरक दृश्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए और जीवन के अनुभवों को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कवि के संदेश को स्पष्ट रूप से पहचानें और लिखें।

(iv) कवि सदैव प्रयत्नशील अवस्था में विद्यमान क्यों रहता हैं?
Answer: कवि के मन में सदैव जिज्ञासा बनी रहती है कि अनुभवों से अलग कोई और विचित्र अनुभव भी उसे कभी-न-कभी किसी-न-किसी रूप में प्राप्त हो सकता है। इन अनुभवों की प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील होना अति आवश्यक है, इसलिए कवि सदैव प्रयत्नशील अवस्था में विद्यमान रहता है।
In simple words: कवि हमेशा कुछ नया जानने और अनुभव करने की जिज्ञासा में रहता है, इसलिए वह सदैव सक्रिय और प्रयत्नशील रहता है।

🎯 Exam Tip: कवि की जिज्ञासा और उसके निरंतर प्रयत्नशील रहने के कारण को बताएं।

(v) प्रस्तुत पद्मांश में प्रयुक्त अलंकारों के नाम बताइए।
Answer: प्रस्तुत पद्यांश में उपमा व पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार हैं।
In simple words: इस पद्यांश में उपमा और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकारों का प्रयोग हुआ है, जो इसकी काव्य सुंदरता को बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में प्रयुक्त मुख्य अलंकारों की पहचान सही होनी चाहिए।

 

Question 2. कहानियाँ लेकर और मुझको कुछ देकर ये चौराहे फैलते जहाँ जरा खड़ा होकर बातें कुछ करता हैं..... उपन्यास मिल जाते । दुःख की कथाएँ, तरह-तरह की शिकायतें, अहंकार-विश्लेषण, चारित्रिक आख्यान, जमाने के जानदान सूरे व आयतें सुनने को मिलती हैं। कविताएँ मुस्करा लाग-डॉट करती हैं, प्यार बात करती हैं। मरने और जीने की जलती हुई सीढ़ियाँ श्रद्धाएँ चढ़ती हैं!! घबराएँ प्रतीक और मुस्काते रूप-चित्र लेकर मैं घर पर जब लौटता....... उपमाएँ, द्वार पर आते ही कहती हैं कि सौ बरस और तुम्हें जीना ही चाहिए ।
उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) कवि के सामने उचित चयन की समस्या कब उत्पन्न हो जाती है?
Answer: कवि के अनुसार हमारा जीवन विविधतापूर्ण है। जीवनरूपी मार्ग में कवि को कदम-कदम पर अनेक चौराहे मिलते हैं। इन चौराहों के प्रत्येक कोण में अनेकानेक कहानियों के कथानक छिपे रहते हैं, जिसके फलस्वरूप कवि के सम्मुख उचित चयन की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं कि मैं किस कथानक को चुनाव करके अपने जीवन को गति प्रदान करूँ ।।
In simple words: जीवन के अनेक रास्तों और अनुभवों के बीच कवि के सामने यह चुनौती आती है कि वह किस पथ का चुनाव करे जो उसके जीवन को सही दिशा दे।

🎯 Exam Tip: जीवन की विविधता को चयन की समस्या से जोड़कर समझाएं।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने संसार की गति को विचित्र क्यों कहा है?
Answer: कवि ने संसार की गति को विचित्र इसलिए कहा है, क्योंकि वह किसी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं करतीं, अपितु उचित के चयन में प्रोत्साहित तथा अनुचित के चयन में फटकार लगाने की अपेक्षा यह उलझन ही पैदा करती है, क्योंकि यह संसार अनुचित का चयन करके मृत्यु का वरण करने वाले तथा उचित का चयन करके जीवन को सार्थक बनाने वाले के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं।
In simple words: कवि संसार की गति को विचित्र कहते हैं क्योंकि यह सही और गलत के चुनाव में मदद नहीं करती, बल्कि उलझन पैदा करती है, फिर भी दोनों ही रास्तों पर जीवन के प्रति अपनी श्रद्धा रखती है।

🎯 Exam Tip: कवि के विचारों को संसार की गति के विरोधाभास के संदर्भ में स्पष्ट करें।

(iii) व्यक्ति के जीवन में सदैव कैसी समस्या का प्रश्न विद्यमान रहेगा?
Answer: व्यक्ति अपने जीवन में सदैव उचित मार्ग का चयन करने में असमर्थ रहता है, यदि उसे सौ साल जीवित रहने का भी अवसर मिल जाए तब भी उसके हित में उचित चयन का प्रश्न विद्यमान रहेगा।
In simple words: व्यक्ति के जीवन में हमेशा सही मार्ग चुनने की समस्या रहती है, चाहे उसे कितना भी लंबा जीवन मिले, यह चुनाव करना कठिन ही रहता है।

🎯 Exam Tip: व्यक्ति के सामने हमेशा रहने वाली मूलभूत समस्या को उजागर करें।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पद्मांश के माध्यम से कवि ने यह भाव स्पष्ट करना चाहकि जीवन में समस्या केवल अभावों की ही नहीं है, वरन् उपयुक्त चुनाव की भी है। यहाँ जीवन की विविधता और उसमें उचित के चयन की समस्या को जीवन की विकटतम समस्या के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
In simple words: कवि इस पद्यांश में यह बताते हैं कि जीवन केवल कमियों से नहीं, बल्कि सही चुनाव करने की जटिलता से भी भरा है, जिसे एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय विचार को स्पष्ट करें, जिसमें चुनाव की समस्या पर जोर दिया गया है।

(v) अहंकार का सन्धि विच्छेद कीजिए ।
Answer: अहंकार – अहम् + कार (अनुस्वार सन्धि)
In simple words: 'अहंकार' शब्द का संधि विच्छेद 'अहम् + कार' है, जो अनुस्वार संधि का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: संधि विच्छेद और उसके प्रकार को सही ढंग से प्रस्तुत करें।

(घ) गिरिजाकुमार माथुर

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ

प्रयोगशील कवियों में विशिष्ट स्थान रखने वाले गिरिजाकुमार माथुर का जन्म गाय प्रदेश के अशोक नगर नामक स्थान पर वर्ष 1919 में हुआ था। इनके पिता का नाम भी देगी चरण था। लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. तथा एल.एल.बी. करने के बाद कई जगह नौकरी करते हुए अन्त में वर्ष 1953 में आकाशवाणी लखनऊ में उ-निदेशक के रूप में इनकी पुनः नियुक्ति हुई। इन्होंने साहित्य सृजन के साथ ‘गगनांचल' नामक पत्रिका का सम्पादन भी किया। वर्ष 1994 में भौतिक संसार को छोड़कर सदा के लिए प्रस्थान कर गए ।

साहित्यिक गतिविधियाँ

गिरिजाकुमार माथुर प्रयोगवादी कवियों में अपना विशेष स्थान रखते हैं। ये तार सप्तक के कवि हैं। इनके काव्य में प्रयोग तथा समन्वय का सुन्दर सामंजस्य दिखाई देता है। ये रोमाण्टिक अनुभूति सम्पन्न प्रणय-भाव और सौन्दर्य के प्रति नवीन दृष्टि को अभिव्यक्ति देने के लिए सुप्रसिद्ध है।

इन्होंने आधुनिक जीवन की कुण्ठाओं के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी अपने काव्य में स्थान दिया है। कविता के अतिरिक्त, इन्होंने एकांकी नाटक आलोचना आदि भी लिखी हैं।

कृतियाँ

प्रमुख काव्य संकलन मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले, जो बन्ध न सका, छाया मत छूना, साक्षी रहे वर्तमान, पृथ्वीकल्प आदि हैं।

काव्यगत विशेषताएँ

भाव पक्ष

1. अनुभूतियों एवं संवेदनाओं की सूक्ष्म अभिव्यक्ति इनके काव्य में अनुभूतियों एवं संवेदनाओं की सूक्ष्म अभिव्यक्ति हुई है। इन्होंने विभिन्न अनुभवों को विभिन्न रूपों में व्यक्त किया है। 2. पूँजीवादी तथा साम्राज्यवादी भावनाओं का विरोध इन्होंने पूँजीवादी तथा साम्राज्यवादी भावनाओं के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई और समाजवादी भावनाओं की अभिव्यक्ति की है। 3. प्रकृति के सौन्दर्य का वर्णन इन्होंने प्रकृति के सौन्दर्य, उसकी उदासी, आदि का वर्णन अपने काव्य में किया है। प्रकृति चित्रण का प्रायः उद्दीपनकारी रूप इनके काव्य में मिलता है।

कला पक्ष

1. भाषा इनकी भाषा प्रौद्ध, प्रांजल तथा परिनिष्ठित खड़ी बोली है। जिसमें संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू आदि भाषाओं के साथ-साथ बोलचाल के शब्दों का भी बहुत प्रयोग हुआ है। 2. प्रतीक इन्होंने अपने काव्य में विविध प्रतीकों; जैसे-परम्परागते, व्यक्तिगत, प्राकृतिक, देशगत, ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक आदि का प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया है। 3. बिम्ब इनके काव्य में वस्तुपरक, ऐन्द्रिय, आध्यात्मिक तथा भाव बिम्बों का प्रयोग हुआ है। इनकी बिम्ब योजना सुन्दर है। 4. अलंकार एवं छन्द इन्होंने प्राचीन अलंकार के साथ नवीन अलंकारों का प्रयोग भी अपने काव्य में किया है। इनके काव्य में विविध छन्दों का प्रयोग हुआ है, परन्तु फिर भी इनका विशेष झुकाव मुक्त छन्द की ओर है। इन्होंने अनेक सुन्दर, छन्दबद्ध तथा तुकबन्दी से परिपूर्ण गीत भी लिखे हैं।

हिन्दी साहित्य में स्थान

गिरिजाकुमार माथुर प्रयोगवादी कवियों में ख्यातिप्राप्त कवि माने जाते हैं। प्रयोगवादी कवि के रूप में ये इस नई काव्यधारा के अग्रदूत हैं। ये तार सप्तक के सात कवियों में से एक हैं।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्म भाग से दो पद्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक 2 अंक) के उत्तर देने होंगे ।

चित्रमय धरती

Question 1. ये धूसर, साँवर, मटियाली, काली धरती फैली है। कोसों आसमान के घेरे में रूखों छाए नालों के हैं। तिरछे ढलान फिर हरे-भरे लम्बे चढ़ाव झरबेरी, ढाक, कास से पुरित टीलों तक जिनके पीछे छिप जाती है। गढ़बाटों की रेखा गहरी ये सोंधी घास बँकी रूदे हैं। धूप बुझी हारे भूरी सूनी सूनी उन चरगाहों के पार कहीं धुंधली छाया बन चली गई है पाँत दूर के पेड़ों की उन ताल वृक्ष के झौरों के आगे दिखती नीली पहाड़ियों की झाँई जो लटे पसारे हुए ।
जंगलों से मिलकर है एक हुई
उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ किस कविता से उद्धृत हैं तथा उसके रचनाकार कौन हैं?
Answer: प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ 'लैण्डस्केपः धूप के धान' काव्य संग्रह में संकलित कविता 'चित्रमय धरती' से उद्धृत हैं तथा इसके रचनाकार गिरिजाकुमार माथुर' हैं।
In simple words: ये पंक्तियाँ गिरिजाकुमार माथुर की 'चित्रमय धरती' कविता से ली गई हैं, जो उनके 'लैण्डस्केप: धूप के धान' संग्रह में है।

🎯 Exam Tip: कविता और कवि का नाम सही से पहचानना महत्वपूर्ण है।

(ii) कवि ने धरती के सौन्दर्य का वर्णन किस रूप में किया है?
Answer: कवि धरती के सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि ये धूल से भरी हुई मटमैली, सवली, काली धरती आसमान के घेरे में बहुत दूर तक फैली हुई है। अर्थात् यह धरती बहुत विशाल है। इस धरती पर कहीं सुगन्धित घास से भरपूर मैदान हैं तो कहीं पर केवल जंगल ही जंगल दिखाई दे रहे हैं।
In simple words: कवि ने धरती के विशाल और विविध सौंदर्य का वर्णन किया है, जिसमें धूल भरी मटमैली भूमि, हरे-भरे मैदान और जंगल शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा वर्णित धरती के विभिन्न सौंदर्य रूपों को विस्तार से बताएं।

(iii) कवि ने धरती के भव्य रूप का वर्णन कैसे किया है?
Answer: धरती के दृश्य को दूर से देखने पर पहाड़ियों और जंगल दोनों एक ही रूप तथा आकार के दिखाई दे रहे हैं, वे अलग-अलग नहीं लगते। इस प्रकार कवि ने धरती के भव्य रूप का वर्णन किया हैं।
In simple words: कवि ने दूर से दिखने वाली पहाड़ियों और जंगलों को एक ही विशाल रूप में दर्शाकर धरती के भव्य सौंदर्य का चित्रण किया है।

🎯 Exam Tip: कवि के चित्रण की विशेषता को उजागर करें, जिसमें दूर से दिखने वाले दृश्यों का वर्णन है।

(iv) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत काव्य पतियों में कवि ने इस विराट धरती के अब तक देखें अनदेखें सभी प्रकार के सौन्दर्य का चित्रण किया है। कवि की दृष्टि धूसर, सॉवर, मटियाली, काली धरती के शोभामय स्वरूपों की ओर भी गई है। अतः इन काव्य पंक्तियों के माध्यम से कवि ने धरती के सौन्दर्य का चित्रण किया है।
In simple words: इन पंक्तियों में कवि ने धरती के व्यापक और विविध सौंदर्य का वर्णन किया है, जिसमें उसके विभिन्न रंग और स्वरूप शामिल हैं, जिन्हें कवि अपनी सूक्ष्म दृष्टि से देखते हैं।

🎯 Exam Tip: पंक्तियों के मूल भाव को स्पष्ट करें और कवि के अवलोकन की गहराई को दर्शाएं।

(v) “सूनी-सुनी उन चरगाहों के पार कहीं प्रस्तुत पंक्ति में कौन-सा अलंकार
Answer: “सूनी-सुनी उन चरगाहों के पार कहीं” इस पंक्ति में सूनी शब्द की पुनरावृत्ति होने के कारण यहाँ पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
In simple words: "सूनी-सूनी" शब्द की पुनरावृत्ति के कारण इस पंक्ति में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार का प्रयोग किया गया है।

🎯 Exam Tip: पुनरावृत्ति वाले शब्दों को पहचानकर अलंकार का सही नाम बताएं।

(ङ) धर्मवीर भारती

जीवन परिचय एवं साहित्यिक उपलब्धियाँ

हिन्दी काव्य में अपनी तीक्ष्ण आधुनिक दृष्टि, स्वच्छन्द प्रवृत्ति एवं व्यक्तिवादी चेतना के लिए प्रख्यात धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसम्बर, 1926 में इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. करने के बाद ये इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही हिन्दी के प्राध्यापक नियुक्त हुए ।

वर्ष 1959 में बम्बई से प्रकाशित होने वाले हिन्दी के प्रतिष्ठित साप्ताहिक 'धर्मयुग' के सम्पादन का भार भी इनके कन्धों पर आया। इन्होंने धर्मयुग को व्यावसायिक स्तर से ऊँचा उठाकर उसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, लोकप्रिय एवं कलात्मक विषयों को समाविष्ट कर उसे एक उच्च आदर्श पर पहुँचाया । 'भारत-भारती', 'व्यास सम्मान', 'पद्मश्री' आदि सम्मानों से सम्मानित इस महान् साहित्यकार का 5 सितम्बर, 1997 को निधन हो गया ।

साहित्यिक गतिविधियाँ

धर्मवीर भारती के जीवन पर साहित्यिक वातावरण का प्रभाव बाल्यकाल से ही पउने लगा था। निराला, पन्त, महादेवी वर्मा और डॉ. रामकुमार वर्मा जैसे महान साहित्यकारों के सम्पर्क से उन्हें साहित्य-सृजन की प्रेरणा प्राप्त हुई और उनकी प्रतिभा में भी निखार आया। मैं एक प्रतिभाशाली कवि, विचारक, नाटककार, अद्वितीय कथाकार, निबन्धकार, एकांकीकार, आलोचक और नीर-क्षीर विवेकी सम्पादक थे। उन्होंने रेखाचित्र, यात्रावृत्त, संस्मरण आदि अन्य विधाओं पर अपनी लेखनी चलाकर अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया।

कृतियाँ

काव्य रचनाएँ ठण्डा लोहा, सात गीत वर्ष, अन्धा युग, कनुप्रिया आदि ।
उपन्यास गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा ।
कहानी संग्रह चाँद और टूटे हुए लोग ।
निबन्ध संग्रह कहनी- अनकनी, पश्यन्ती, ठेले पर हिमालय
नाटक नदी प्यासी थी।
एकांकी संग्रह नीली झील ।
आलोचना ग्रन्थ साहित्य, मानव-मूल्या

काव्यगत विशेषताएँ

भाव पक्ष

1. स्वच्छन्दता भारती जी ने अपने काव्य में भावों को बड़ी सरलता एवं स्पष्टता के साथ व्यक्त किया है। इन्होंने भाव-चित्रण एवं दृश्य-चित्रण में नवीन उद्भावनाओं का परिचय दिया है। उनकी प्रारम्भिक कृति 'ठण्डा लोहा से लेकर 'कनुप्रिया' तथा सभी में स्वच्छन्दता की प्रवृति' विद्यमान है। 2. मांसलता का पुट प्रयोगवादी भारती जी की कविताओं में प्रणय भाव में मांसलता का पुट विद्यमान है। 3. प्रकृति चित्रण भारती जी की कविताओं में प्रकृति चित्रण का विनियोजन मानवीय भावनाओं को उद्दीप्त करने तथा आलंकारिक रूप में हुआ है।

कला पक्ष

1. भाषा भारती जी की भाषा साहित्यिक होते हुए भी सहज और सरल खड़ी बोली है। इन्होंने अपनी भाषा में तद्भव और विदेशी शब्दावली का उन्मुक्त रूप से प्रयोग किया है। 2. अप्रस्तुत योजना अप्रस्तुत योजना की दृष्टि से भारती जी ने परम्परागत और नवीन दोनों ही प्रकार के उपमानों की योजना की है। 3. प्रतीक योजना प्रतीक योजना की दृष्टि से भारती जी की कविताएँ पर्याप्त समृद्ध हैं, पौराणिक प्रतीकों की योजना में भारती जी सिद्धहस्त हैं। 4. बिम्ब और मिथक भारती जी के काव्य में बिम्बों और मिथकों का बड़ा ही सार्थक प्रयोग देखने को मिलता है। उनके गीत नाटय 'अन्धा युग' मिथक की दृष्टि से छायावादोत्तर काल की सबलतम कृति है । बिम्ब निर्माता में भारती जी की अभिरुचि प्राकृतिक उपादानों के प्रयोग की और अधिक रही है। 5. अलंकार भारती जी के अलंकार प्रयोग में भी नवीनता के दर्शन होते हैं। हिन्दी साहित्य में स्थान धर्मवीर भारती बहुमुखी प्रतिभा से सम्पन्न साहित्यकार हैं। इनकी रचनाओं में मन और सामूहिक चेतना दोनों की ही अभिव्यक्ति हुई हैं। इन्हें आधुनिक युग के विशिष्ट रचनाकार ' के रूप में सम्मान प्राप्त है।

पद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पत्र में पद्म भाग से दो पट्यांश दिए जाएँगे, जिनमें से किसी एक पर आधारित 5 प्रश्नों (प्रत्येक ४ अंक) के उत्तर देने होंगे ।

साँझ के बादल

Question 1. ये अनजान नदी की नावे जादू के-से पाल उड़ाती आतीं मन्थर चाल! नीलम पर किरनों की साँझी एक न डोरी एक न माँझी फिर भी लाद निरन्तर लातीं सेन्दुर और प्रवाल! कुछ समीप की कुछ सुदूर की कुछ चन्दन की कुछ कपूर की कुछ में गेरु, कुछ में रेशम कुछ में केवल जाल! ये अनजान नदी की नावे जादू के-से पाल उड़ाती आतीं मन्थर चाल!
उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) प्रस्तुत काव्यांश के केन्द्रीय भाव पर प्रकाश डालिए ।
Answer: प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने प्रकृति के गत्यात्मक रूप के चित्रण के साथ ही अपनी वर्णन-शक्ति की सजीवता को प्रदर्शित करते हुए 'साँवा के बादलों को पालों वाली नावों जैसा चित्रित किया है, जिसमें बहुत-सी रंगीन छवियाँ एवं आकृतियाँ बनती-बिगड़ती रहती हैं।
In simple words: कवि ने इस काव्यांश में गतिशील प्रकृति का वर्णन किया है, विशेषकर बादलों को रंगीन नावों के रूप में चित्रित किया है, जो लगातार बदलती आकृतियाँ बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा प्रकृति के चित्रण की मौलिकता और कल्पनाशीलता को उजागर करें।

(ii) कवि ने सन्ध्याकालीन बादलों के सौंदर्य किस रूप में किया है?
Answer: कवि ने सन्ध्याकालीन बादलों के सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहता है कि ये बादल अनजान नदी की नावों हैं, जो धीमी गति से जादू के पालों को अड़ाती हुई चती जा रही है अर्थात् जिस प्रकार नदी में पानी के बहाव के साथ सबकुछ बहकर चला जाता है उसी प्रकार बादलरूपी अनजान नदी की नार्वे अपने साथ सभी कुछ बहाती हुई चलती हैं।
In simple words: कवि ने शाम के बादलों को ऐसी अनजान नदी की नावों के रूप में चित्रित किया है जो धीरे-धीरे सब कुछ अपने साथ बहा ले जाती हैं, जैसे नदी का बहाव सब कुछ ले जाता है।

🎯 Exam Tip: बादलों के सौंदर्य को नदी की नावों से तुलना करते हुए कवि की कल्पना को स्पष्ट करें।

(iii) कवि ने बादलरूपी नावों के किन-किन रूपों का वर्णन किया हैं?
Answer: कवि के अनुसार बादलरूपी नावों में विभिन्न प्रकार की नावें हैं, कुछ नावें हैं, तो कुछ दूर की, कुछ चन्दन की तो कुछ कपूर की, कुछ गेरू तो कुछ रेशम की और कुछ केवल जाल की जो दृष्टि को भ्रमित कर बाँधने का कार्य करती है।
In simple words: कवि ने बादलों को चंदन, कपूर, गेरू, रेशम और जाल जैसी विभिन्न प्रकार की नावों के रूप में वर्णित किया है, जो मन को मोहित करती हैं।

🎯 Exam Tip: बादलों के विभिन्न रूपों को कवि द्वारा दी गई उपमाओं के साथ सूचीबद्ध करें।

(iv) 'प्रवाल' और 'सुद्र' शब्दों में से उपसर्ग अँटकर लिखिए।
Answer: प्रवाल में 'प्र' उपसर्ग और सुदूर में 'सु' उपसर्ग है।
In simple words: 'प्रवाल' में 'प्र' और 'सुदूर' में 'सु' उपसर्ग लगे हुए हैं, जो इन शब्दों के अर्थ में विशेषता जोड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: दिए गए शब्दों में से उपसर्ग को सही ढंग से पहचानना और अलग करना सीखें।

(v) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के रचनाकार एवं रचना का नाम लिखिए।
Answer: प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ ‘धर्मवीर भारती' द्वारा रचित 'सात गति-वर्ष' काव्य संग्रह में संगलित कविता 'साँझ के बादल' से अवतरित है।
In simple words: ये काव्य पंक्तियाँ धर्मवीर भारती की कविता 'साँझ के बादल' से ली गई हैं, जो उनके 'सात गीत-वर्ष' काव्य संग्रह का हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: कविता और कवि के नाम का सटीक उल्लेख करना आवश्यक है।

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