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अलंकार का अर्थ एवं परिभाषा
प्रसिद्ध संस्कृत आचार्य दण्डी ने अपनी रचना 'काव्यादर्श' में अलंकार को परिभाषित करते हुए लिखा है-'अलंकरोतीति अलंकारः' अर्थात् शोभाकारक पदार्थ को अलंकार कहते हैं। हिन्दी में रीतिकालीन कवि आचार्य केशवदास ने 'कविमिया' रचना में अलंकार की विशेषताओं का विवेचन प्रस्तुत किया है। वस्तुतः भाषा को शब्द एवं शब्द के अर्थ से सुसज्जित एवं सुन्दर बनाने की मनोरंजक प्रक्रिया को 'अलंकार” कहा जाता है। 'अलंकार' काव्य भाषा के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। यह भाव की अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावी बनाते हैं।अलंकार के भेद
अलंकार को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है- शब्दालंकार एवं अर्थालंकार)1. शब्दालंकार
शब्द निर्माण की प्रक्रिया में 'ध्वनि' तथा 'अर्थ' का महत्वपूर्ण समन्वय होता है। ध्वनि के आधार पर काव्य में उत्पन्न विशिष्टता अथवा साज-सwण। ‘शब्दालंकार' की सृष्टि करते हैं। इस अलंकार में वर्ण या शब्दों की लयात्मकता अथवा संगीतात्मकता उपस्थित होती है। 'शब्दालंकार' वर्णगत, शब्दगत तथा वाक्यगत होते हैं। अनुमास, यमक, श्लेष इत्यादि प्रमुख शब्दालंकार हैं।2. अर्थालंकार
जब शब्द, वाक्य में प्रयुक्त होकर उसके अर्थ को चमत्कृत या अलंकृत करने वाला स्वरूप प्रदान करे तो वहाँ 'अर्थालंकार' की सृष्टि होती है। *अर्थालंकार' की एक विशेषता यह है कि यदि वाक्य से किसी शब्द को हटाकर उसकी जगह उसके पर्याय शब्द को रखा जाए, तब भी अलंकार की प्रवृत्ति में कोई अन्तर नहीं आता। वस्तुतः 'अर्थालंकार” की निर्भरता शब्द पर न होकर शब्द के अर्थ पर होती है। उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, दृष्टान्त, मानवीकरण इत्यादि प्रमुख अर्थालंकार हैं।शब्दालंकार
1. अनुप्रास अलंकार
अनुप्रास वर्णनीय रस की अनुकूलता के अनुसार समान वर्गों का बार-बार प्रयोग है। यह एक प्रचलित अलंकार है, जिसका प्रयोग, छेकानुप्रास, वृत्यानुप्रास, लाटानुप्रास आदि के रूप में होता है। उदाहरण सम सुबरनं सुखाकर सुजस न थोर। इस वाक्यांश (काव्यांश) में 'स' वर्ण की आवृत्ति दिखती है। यह आवृत्ति 'अनुप्रास अलंकार' के रूप में जानी जाती हैं। अनुप्रास अलंकार के भेद इसके पाँच भेद हैं।• श्रुत्यानुप्रास एक ही स्थान से उच्चारित होने वाले वर्षों की आवृत्ति।
• वृत्यानुप्रास समान वर्ण की अनेक बार आवृत्ति।
• छेकानुप्रास जब कोई वर्ण मात्र दो बार ही आए।
• लाटानुप्रास शब्द व अर्थ की आवृत्ति के बाद भी अन्य के उपरान्त भिन्न अर्थ मिले।
• अन्त्यानुप्रास शब्दों के अन्त में समान ध्वनि की आवृत्ति।
2. यमक अलंकार
'यमक' एक शब्दालंकार है। यमक का अर्थ होता है- 'युग्म्' अर्थात् 'जोड़ा। इसमें भिन्न अर्थ के साथ किसी वर्ण अथवा शब्द की आवृत्ति होती हैं। उदाहरण "कहै कवि बेनी ब्याल की चुराय लीनी बेनी” इस काव्यांश में 'बेनी' की आवृत्ति है। प्रथम 'बेनी' का अर्थ है-'कवि बेनीप्रसाद' तथा दूसरे 'बेनी' का अर्थ है- 'चोटी' ।।3. श्लेष अलंकार
जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर दो-या-दो से अधिक भिन्न-भिन्न अर्थ दे तो वहीं 'श्लेष अलंकार' होता है। इस अलंकार के अन्तर्गत एक शब्द एक से अधिक अर्थों का बोध कराकर पूरे काव्य को विशिष्ट अर्थ प्रदान करने में सक्षम होता है। उदाहरण “सुबरन को इँदै फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर ।” इस काव्य पंक्ति में 'सुबरन' के कई अर्थ ध्वनित हो रहे हैं। 'सुबरम्' का अर्थ यहाँ | कवि, व्यभिचारी और चोर से सम्बन्धित है। यथा- कवि 'सुबरन' अर्थात् सुवर्ण (अच्छे शब्द) को ढूंढता है। व्यभिचारी 'सुबरन' अर्थात् 'गौरी' को ढूँढता है। चोर 'सुबरन' अर्थात् 'स्वर्ण' को ढूंढता है। अतः यहाँ श्लेष अलंकार हैं।अर्थालंकार
1. उपमा अलंकार
जब काव्य में समान धर्म के आधार पर एक वस्तु की समानता अथवा तुलना अन्य वस्तु से की जाए, तब वह उपमा अलंकार होता है, जिसकी उपमा दी जाए उसे उपमेय तथा जिसके द्वारा उपमा यानी तुलना की जाए उसे उपमान कहते हैं। उपमेय और उपमान की समानता प्रदर्शित करने के लिए सादृश्यवाचक शब्द प्रयोग किए जाते हैं। उदाहरण "मुख मयंक सम मंजु मनोहर ।” इस काव्य पंक्ति में 'मुख' उपमेय है, 'चन्द्रमा' उपमान है, 'मनो५' समान धर्म है। तथा 'सम' सादृश्य वाचक शब्द होने से उपमा अलंकार परिपुष्ट हो रहा है।2. रूपक अलंकार
रूपक का अर्थ होता है- एकता। रूपक अलंकार में पूर्ण साम्य होने के कारण प्रस्तुत में प्रस्तुत का आरोप कर अभेद की स्थिति को स्पष्ट किया जाता है। इस प्रकार जहाँ 'उपमेय' और 'उपमान' की अत्यधिक समानता को प्रकट करने के लिए 'उपमेय' में 'उपमान' का आरोप होता है, वहाँ 'रूपक अलंकार' उपस्थित होता है। उदाहरण "चरण कमल बन्द हरिराई।” इस काव्य पंक्ति में उपमेय 'धरण' पर उपमान 'कमल' का आरोप कर दिया गया है। दोनों में अभिन्नता है, पर दोनों साथ-साथ हैं। इस अभेदता के कारण यहाँ रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार के भेद रूपक के विभिन्न भेदों में से तीन मुख्य भेद नीचे दिए गए हैं।• सांगरूपक इसमें अवयवों के साथ उपमेय पर उपमान आरोपित किए जाते
• निरंग रूपक इसमें अवयवों के बिना ही उपमेय पर उपमान आरोपित किए जाते हैं।
• परम्परित रूपक इसमें उपमेय पर प्रयुक्त आरोप ही दूसरे आरोप का कारण बनता है।
3. उत्प्रेक्षा अलंकार
'उत्प्रेक्षा' का अर्थ है- किसी वस्तु के सम्भावित रूप की उपेक्षा करना। उपमेय अर्थात् प्रस्तुत में उपमान अर्थात् अप्रस्तुत की सम्भावना को 'उत्प्रेक्षा अलंकार' कहते हैं। 'उत्प्रेक्षा अलंकार' में मानों, जानों, जनु, मनु, ज्यों इत्यादि शब्दों का प्रयोग होता है। उदाहरण “सोहत ओढ़ पीत-पट, श्याम सलोने गात ।। मनहुँ नीलमणि सैल पर, आतपु परयौ प्रभात ।” इस काव्यांश में श्रीकृष्ण के श्यामल शरीर पर नीलमणि पर्वत की तथा पीत-पट पर प्रातःकालीन धूप की सम्भावना व्यक्त की गई है। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।4. भ्रान्तिमान्
जब उपमेय को भ्रम के कारण उपमान समझ लिया जाता है तब वहीं ‘भ्रान्तिमान अलंकार' होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस अलंकार में उपमेय में उपमान का धोखा हो जाता है। उदाहरण “नाक का मोती अधर की कान्ति से, बीज दाड़िम का समझकर भ्रान्ति से। देख उसको ही हुआ शुक मौन है, सोचता है अन्य शुक यह कौन हैं?”5. सन्देह अलंकार
जब किसी वस्तु में उसी के सदृश अन्य वस्तुओं का सन्देह हों और सदृशता के कारण अनिश्चित की मनोदशा हो तब वहाँ सन्देह अलंकार होता है। उदाहरण “सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है, सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।”6. अतिशयोक्ति अलंकार
जब किसी वस्तु, व्यक्ति अथवा स्थिति की प्रशंसा करते हुए कोई बात बहुत बढ़ा-चढ़ा कर अथवा लोक सीमा का उल्लंघन करके कहीं जाए, तब वहाँ 'अतिशयोक्ति अलंकार' उपस्थित होता है। उदाहरण “आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा उतरे कैसे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार ।। इस काव्यांश में राणा अभी नदी पार करने की सोच ही रहे थे कि उनका घोड़ा चेतक नदी के पार भी हो गया। यहाँ वेग (गति) के विषय में बहुत बढ़ा चढ़ा कर कहने से अतिशयोक्ति अलंकार परिपुष्ट हुआ है।7. अनन्वय अलंकार
काव्य में जहाँ उपमान के अभाव के कारण उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए वहाँ 'अनन्वय अलंकार' होता है। उदाहरण “राम-से राम, सिया-सी सिया, सिरमौरे बिरंचि बिचारि सँवारे।”8. प्रतीप अलंकार
जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया गया हो तो यह ‘प्रतीप अलंकार' होता है। प्रतीप अलंकार में उपमा अलंकार की विपरीत स्थिति होती है। उदाहरण “उसी तपस्वी से लम्बे थे देवदारु दो चार खड़े ।”9. दृष्टान्त अलंकार
उपमेय एवं उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होने पर भी बिम्ब-प्रतिबिम्य भाव से कथन करने को 'दृष्टान्त अलंकार' कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दृष्टान्त अलंकार के अन्तर्गत पहले एक बात कहकर उसको स्पष्ट करने के लिए उससे मिलती-जुलती अन्य बात कही जाती है। उदाहरण 'परी प्रेम नन्दलाल के मोहि न भावत जोग। मधुप राजपद पाइकै भीखन माँगत लोग।।”बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. “चरन धरत चिन्ता करत, चितवत चारित्र ओर ।। सुबरन को खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर ।।” में अलंकार है। (क) उपमा (ख) यमक (ग) रूपक (घ) श्लेष
Answer: (घ) श्लेष
In simple words: इस पद्यांश में 'सुबरन' शब्द के अनेक अर्थ हैं: कवि के लिए अच्छे शब्द, व्यभिचारी के लिए सुन्दर स्त्री, और चोर के लिए सोना। जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हैं, तो श्लेष अलंकार होता है।
🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार की पहचान किसी एक शब्द के कई अर्थों से होती है, जो प्रसंग के अनुसार बदलते रहते हैं।
Question 2. जहाँ एक शब्द अथवा शब्द-समूह का एक से अधिक बार प्रयोग हो, किन्तु उसका अर्थ प्रत्येक बार भिन्न हो, वहाँ कौन-सा अलंकार होता (क) अनुप्रास (ख) श्लेष (ग) यमक (घ) भ्रान्तिमान्
Answer: (ग) यमके
In simple words: यह यमक अलंकार की परिभाषा है, जहाँ एक ही शब्द बार-बार आता है लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग होता है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में शब्दों की आवृत्ति और उनके भिन्न अर्थों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. जहाँ उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप हो, वहाँ अलंकार होता है। अथवा जहाँ उपमेय (प्रस्तुत) पर उपमान (अप्रस्तुत) का अभेद आरोप किया जाए, वहाँ अलंकार होता है। (क) उपमा (ख) रूपक (ग) उत्प्रेक्षा (घ) प्रतीप
Answer: (ख) रूपक
In simple words: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान में कोई भेद नहीं दिखाया जाता, बल्कि उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है, जैसे वे एक ही हों।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार की पहचान उपमेय और उपमान के बीच अभेद दर्शाने वाले प्रयोगों से की जाती है।
Question 4. “ऊधौ जोग जोग हम नाहीं।” इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? (क) अनुप्रास (ख) यमक (ग) श्लेष (घ) उत्प्रेक्षा
Answer: (ख) यमक
In simple words: इस पंक्ति में 'जोग' शब्द दो बार आया है, पहले 'योग साधना' के अर्थ में और दूसरे 'योग्य' के अर्थ में, जिससे यह यमक अलंकार का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में शब्दों की पुनरावृत्ति और प्रत्येक बार उनके भिन्न अर्थों को समझना आवश्यक है।
Question 5. जहाँ उपमेय और उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होते हुए भी बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव से कथन किया जाए, वहाँ अलंकार होता है। (क) उपमा (ख) अनन्वय (ग) उत्प्रेक्षा (घ) दृष्टान्त
Answer: (घ) दृष्टान्त
In simple words: दृष्टान्त अलंकार में दो बातों को बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव से प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ एक बात दूसरी बात का उदाहरण या समर्थन करती है।
🎯 Exam Tip: दृष्टान्त अलंकार में दो वाक्यों का सामान्य धर्म भले ही भिन्न हो, पर उनमें एकरूपता बिम्ब-प्रतिबिम्ब के रूप में दिखती है।
Question 6. “अर्जी तरयौना ही रह्यौ श्रुति सेवत इक रंग। नाक बास बेसरि लह्यौ, बसि मुकतनु के संग।।” इस दोहे में अलंकार है। (क) यमक (ख) श्लेष (ग) उत्प्रेक्षा (घ) उपमा
Answer: (ख) श्लेष
In simple words: यहाँ 'तरयौना' और 'बेसरि' जैसे शब्दों के दोहरे अर्थ निकलते हैं - एक अर्थ सामान्य और दूसरा भक्ति या आध्यात्म से संबंधित, जो श्लेष अलंकार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार को पहचानने के लिए एक ही शब्द के अलग-अलग संदर्भों में भिन्न अर्थों को खोजना पड़ता है।
Question 7. “अम्बर पनघट में डुबो रही, तरा-घट ऊषा-नागरी।” उपरोक्त पद में अलंकार है। (क) रूपक (ख) श्लेष (ग) उत्प्रेक्षा (घ) उपमा
Answer: (क) रूपक
In simple words: यहाँ अम्बर (आकाश) पर पनघट का, तारा (तारे) पर घट (घड़े) का और ऊषा (सुबह) पर नागरी (स्त्री) का अभेद आरोप किया गया है, इसलिए यह रूपक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच कोई भिन्नता नहीं दिखाई जाती, उन्हें एक ही मान लिया जाता है।
Question 8. “अब जीवन की कपि आस न कोय। कनगुरिया की मुदरी कँगना होय ।।” पद में निहित अलंकार का नाम निम्नांकित विकल्पों में से लिखिए। (क) दृष्टान्त (ख) उत्प्रेक्षा (ग) उपमा (घ) अतिशयोक्ति
Answer: (घ) अतिशयोक्ति
In simple words: यहाँ छोटी अँगुली की अंगूठी को कंगन बन जाने की बात कही गई है, जो अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन है, इसलिए यह अतिशयोक्ति अलंकार है।
🎯 Exam Tip: अतिशयोक्ति अलंकार में किसी बात का वर्णन लोक-सीमा से बढ़कर या असंभव तरीके से किया जाता है।
Question 9. “पापी मनुज भी आज मुख से राम-राम निकालते। देखो भयंकर भेड़िये भी, आज आँसू ढालते ।।” इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? (क) सन्देह (ख) भ्रान्तिमान् (ग) दृष्टान्त (घ) अतिशयोक्ति
Answer: (ग) दृष्टान्त
In simple words: यहाँ पापी मनुष्यों द्वारा राम-नाम जपने की बात का समर्थन भेड़िये के आँसू बहाने के उदाहरण से किया गया है, जो दृष्टान्त अलंकार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: दृष्टान्त अलंकार में एक बात कहकर उसी से मिलती-जुलती दूसरी बात उदाहरण के रूप में कही जाती है।
Question 10. जहाँ किसी वस्तु की इतनी प्रशंसा की जाए कि लोक-मर्यादा का अतिक्रमण हो जाए, वहाँ अलंकार होता है। अथवा जहाँ किसी वस्तु का इतना बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन किया जाए कि सामान्य लोक सीमा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता (क) रूपक (ख) भ्रान्तिमान् (ग) सन्देह (घ) अतिशयोक्ति
Answer: (घ) अतिशयोक्ति
In simple words: यह अतिशयोक्ति अलंकार की सीधी परिभाषा है, जिसमें किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: अतिशयोक्ति अलंकार में वर्णन की अतिरंजना या असम्भव लगने वाली बातों पर ध्यान दें।
Question 11. जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? अथवा जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय बना दिया जाए अथवा उसकी व्यर्थता प्रदर्शित की जाए, वहाँ अलंकार होता है (क) रूपक (ख) प्रतीप (ग) अनन्वय (घ) उत्प्रेक्षा
Answer: (ख) प्रतीप
In simple words: प्रतीप अलंकार उपमा का उल्टा होता है, जहाँ उपमान को कमतर या उपमेय के समान दिखाया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतीप अलंकार में उपमान की हीनता या उपमेय से तुलना पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून ।।” में अलंकार है। (क) उपमा (ख) यमक (ग) श्लेष (घ) रूपक
Answer: (ग) श्लेष
In simple words: इस दोहे में 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं- चमक (मोती के संदर्भ में), सम्मान (मनुष्य के संदर्भ में) और जल (चून के संदर्भ में), जो श्लेष अलंकार का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार में एक शब्द के अनेक अर्थ प्रसंगानुसार बदलते हैं।
Question 13. “उस काल मारे क्रोध के तनु काँपने उनका लगा। मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा ।।” में निहित अलंकार है (क) भ्रान्तिमान् (ख) दृष्टान्त (ग) उत्प्रेक्षा (घ) सन्देह
Answer: (ग) उत्प्रेक्षा
In simple words: यहाँ 'मानो' शब्द का प्रयोग किया गया है, जो शरीर के काँपने में सागर के जगने की संभावना व्यक्त करता है, अतः यह उत्प्रेक्षा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार की पहचान 'मनु, जनु, मानों, जानों' जैसे वाचक शब्दों से होती है, जो संभावना व्यक्त करते हैं।
Question 14. जहाँ उपमान के अभाव में उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है, वहाँ अलंकार होता है। अथवा “वयं विषय को बहुत उत्कृष्ट दिखाने के क्रम में, उसके समान कोई अन्य है ही नहीं, सूचित करने के लिए उपमेय को ही उपमान बना देना,” किस अलंकार का लक्षण हैं? (क) उपमा (ख) रूपक (ग) अनन्वय (घ) सन्देह
Answer: (ग) अनन्वय
In simple words: अनन्वय अलंकार तब होता है जब उपमेय इतना अद्वितीय होता है कि उसकी तुलना किसी और से न करके उसे स्वयं ही उपमान मान लिया जाता है।
🎯 Exam Tip: अनन्वय अलंकार में उपमेय और उपमान एक ही होते हैं, क्योंकि उपमेय की कोई अन्य उपमा नहीं मिल पाती।
Question 15. जहाँ रूप-रंग आदि के सादृश्य से उपमेय में उपमान का संशय बना रहे, वहाँ अलंकार होता है। (क) सन्देह (ख) भ्रान्तिमान् (ग) दृष्टान्त (घ) प्रतीप
Answer: (ख) भ्रान्तिमान्
In simple words: भ्रान्तिमान् अलंकार में समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी वस्तु समझ लिया जाता है, और यह भ्रम वास्तविक होता है।
🎯 Exam Tip: भ्रान्तिमान् अलंकार में भ्रम वास्तविक होता है, जबकि सन्देह अलंकार में अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है।
Question 16. उपमेय में उपमान की सम्भावना (या कल्पना) किस अलंकार में होती है? अथवा जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाए, वहाँ अलंकार होता है। (क) सन्देह (ख) उत्प्रेक्षा (ग) भ्रान्तिमान् (घ) अतिशयोक्ति
Answer: (ख) उत्प्रेक्षा
In simple words: उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाती है, अक्सर 'मानो', 'जानो' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार की पहचान उसके वाचक शब्दों (मनु, जनु, मानों, जानों) और संभावना के भाव से करें।
Question 17. 'कैर्धी ब्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु, वीररस बीर तरवारि-सी उघारी है।' उपरोक्त पद में कौन-सा अलंकार है? (क) अनन्वय (ख) भ्रान्तिमान् (ग) सन्देह (घ) दृष्टान्त
Answer: (ग) सन्देह
In simple words: यहाँ ब्योमबीथिका में धूमकेतु भरे हैं या वीररस की तलवार खुली है, इसमें संदेह की स्थिति बनी हुई है, जिससे यह सन्देह अलंकार है।
🎯 Exam Tip: सन्देह अलंकार में समानता के कारण निर्णय न हो पाने की स्थिति बनी रहती है, 'यह है या वह है' जैसी दुविधा।
Question 18. 'रहिमन अँसुआ नयन ढरि, जिय दुख प्रगट करे। जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देड़ ।।” उक्त पंक्तियों में अलंकार हैं। (क) अनन्वय (ख) रूपक (ग) सन्देह (घ) दृष्टान्त
Answer: (घ) दृष्टान्त
In simple words: यहाँ आँसुओं द्वारा मन का भेद प्रकट करने की बात को घर से निकाले गए व्यक्ति द्वारा भेद बताने के उदाहरण से पुष्ट किया गया है, जो दृष्टान्त अलंकार है।
🎯 Exam Tip: दृष्टान्त अलंकार में एक बात के समर्थन में दूसरी बात को बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव से प्रस्तुत किया जाता है।
Question 19. “बंदउँ कोमल कमल से, जग जननी के पाँय” उक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? (क) उत्प्रेक्षा (ख) रूपक (ग) दृष्टान्त (घ) उपमा
Answer: (घ) उपमा
In simple words: इस पंक्ति में 'से' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो पैरों की कोमलता की तुलना कमल से कर रहा है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: उपमा अलंकार में 'सा, सी, से, सम, सरिस' जैसे वाचक शब्द तुलना का भाव प्रकट करते हैं।
Question 20. “विदग्ध होके कण धूलि राशि का, तपे हुए लौह कणों समान था।” उक्त पद में अलंकार है। (क) अनुप्रास (ख) यमक (ग) श्लेष (घ) उपमा
Answer: (घ) उपमा
In simple words: यहाँ 'समान' शब्द के प्रयोग से कणों की तुलना तपे हुए लौह कणों से की गई है, जो उपमा अलंकार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: उपमा अलंकार में वाचक शब्दों (समान, सा, सी, से) का प्रयोग उपमेय और उपमान की तुलना के लिए होता है।
Question 21. “ओ चिन्ता की पहली रेखा, अरे विश्व वन की व्याली ।” में अलंकार है। (क) यमक (ख) रूपक (ग) श्लेष (घ) प्रतीप
Answer: (ख) रूपक
In simple words: इस पंक्ति में 'चिंता' पर 'विश्व वन की व्याली' (जंगल की नागिन) का अभेद आरोप किया गया है, जिससे यह रूपक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान को एक ही मानकर उनमें अभेद दर्शाया जाता है।
Question 22. “जनक बचन छुट बिरवा लजाऊ के से, वीर रहे सकल सकुचि सिर नाय के ।” उपरोक्त पद में अलंकार हैं। (क) अनुप्रास (ख) यमक (ग) श्लेष (घ) उपमा
Answer: (घ) उपमा
In simple words: यहाँ 'के से' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो जनक के वचनों की तुलना बिरवा (छोड़ दिए गए वृक्ष) से कर रहा है, अतः यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: 'सा, सी, से, सरिस' जैसे शब्दों का प्रयोग उपमा अलंकार की मुख्य पहचान है।
Question 23. मंजु मेचक मृदुल तनु, अनुहरत भूवन भरनि । मनहूँ सुभग सिंगार सिमु-तरु फरयौ अद्भुत फरनि ।। उपरोक्त पंक्तियों में अलंकार है। (क) उपमा (ख) उत्प्रेक्षा (ग) यमक (घ) श्लेष
Answer: (ख) उत्प्रेक्षा
In simple words: यहाँ 'मनहूँ' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो सुंदर श्रृंगार को अद्भुत फलने वाले वृक्ष के समान संभावना व्यक्त कर रहा है, जिससे यह उत्प्रेक्षा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार में 'मनु, जनु, मनहुँ, जनहुँ, मानों, जानों' जैसे वाचक शब्द संभावना दर्शाते हैं।
Question 24. “कनक कनक तै सौ गुनी, मादकता अधिकाइ । उहिं खाएँ बौराई जग, इहिं पाएँ बौराई ।।” उपरोक्त पद में अलंकार है (क) रूपक (ख) उत्प्रेक्षा (ग) यमक (घ) श्ले ष
Answer: (ग) यमक
In simple words: इस दोहे में 'कनक' शब्द दो बार आया है, एक का अर्थ सोना है और दूसरे का अर्थ धतूरा, दोनों के अर्थ भिन्न होने के कारण यह यमक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में एक ही शब्द का बार-बार प्रयोग होता है, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग होता है।
Question 25. 'हरि पद कोमल कमल-से' पद में अलंकार है। (क) अनुप्रास (ख) उपमा (ग) उत्प्रेक्षा । (घ) यमक
Answer: (ख) उपमा
In simple words: इस पंक्ति में 'से' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो हरि के पैरों की तुलना कमल से कर रहा है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: 'सा, सी, से, सम' जैसे वाचक शब्द उपमा अलंकार की मुख्य पहचान होते हैं।
Question 26. जहाँ रूप-रंग आदि के सादृश्य से उपमेय में उपमान का संशय बना रहे, वहाँ अलंकार होता है (क) उत्प्रेक्ष (ख) भ्रान्तिमान् (ग) उपमा (घ) सन्देह
Answer: (घ) सन्देह
In simple words: सन्देह अलंकार में समानता के कारण उपमेय और उपमान के बीच अनिश्चितता बनी रहती है, व्यक्ति निर्णय नहीं कर पाता कि वास्तव में वह क्या है।
🎯 Exam Tip: सन्देह अलंकार में 'यह है या वह है' जैसी अनिर्णय की स्थिति पर ध्यान दें।
Question 27. सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है। कि सारी ही की नारी है कि नारी ही सारी है।। उपरोक्त पद में अलंकार है। (क) भ्रान्तिमान् (ख) दृष्टान्त (ग) सन्देह (घ) अतिशयोक्ति
Answer: (ग) सन्देह
In simple words: इस पंक्ति में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि साड़ी के बीच नारी है या नारी के बीच साड़ी, जिससे संदेह की स्थिति बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: सन्देह अलंकार में समानता के कारण निर्णय की अनिश्चितता बनी रहती है।
Question 28. जहाँ काव्य की शोभा का कारण शब्द होता है, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? (क) अर्थालंकार (ख) शब्दालंकार (ग) उपमा (घ) सन्देह
Answer: (ख) शब्दालंकार
In simple words: शब्दालंकार में शब्दों के विशेष प्रयोग या उनके ध्वनिगत चमत्कार के कारण काव्य की सुंदरता बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: शब्दालंकार की पहचान शब्दों की पुनरावृत्ति, ध्वनि या वर्णों की समानता से होती है।
Question 29. रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम । उक्त पंक्तियों में अलंकार है। (क) यमक (ख) श्लेष (ग) अनुप्रास (घ) उपमा
Answer: (ग) अनुप्रास
In simple words: इन पंक्तियों में 'र' वर्ण की आवृत्ति कई बार हुई है ('रघुपति', 'राघव', 'राजा', 'राम'), जो अनुप्रास अलंकार का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार में किसी एक वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है।
Question 30. जहाँ उपमेय की उपमान के रूप में सम्भावना की जाए, वहाँ अलंकार होता है। (क) उपमा (ख) उत्प्रेक्षा (ग) रूपक (घ) यमक
Answer: (ख) उत्प्रेक्षा
In simple words: उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाती है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा को उसके वाचक शब्दों (मनु, जनु, मानों, जानों) से जोड़कर याद रखें।
Question 31. 'नील घन-शावक से सुकुमार, सुधा भरने को विधु के पास । उक्त पंक्तियों में अलंकार है। (क) उपमा (ख) रूपक (ग) दृष्टान्त
Answer: (क) उपमा
In simple words: यहाँ 'से' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो किसी की तुलना 'नील घन-शावक' (नीले बादल के बच्चे) की सुकुमारता से कर रहा है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: 'से' जैसे तुलनात्मक शब्द उपमा अलंकार की सीधी पहचान हैं।
Question 32. 'रण-कमल बन्द हरिराई ।' में अलंकार हैं। (क) उपेक्षा (ख) अनुपास (ग) रूपक (घ) उपमा
Answer: (ग) रूपक
In simple words: यहाँ 'रण' (युद्ध) पर 'कमल' का अभेद आरोप किया गया है, जिससे यह रूपक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच कोई भेद नहीं किया जाता, उन्हें एक समान माना जाता है।
Question 33. रूपक अलंकार के भेद हैं। (क) 4 (ख) 2 (ग) 5 (घ) 3
Answer: (घ) 3
In simple words: रूपक अलंकार के मुख्य तीन भेद होते हैं- सांगरूपक, निरंग रूपक और परम्परित रूपक।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार के भेदों (सांगरूपक, निरंग रूपक, परम्परित रूपक) को याद रखें।
Question 34. जहाँ समान वर्गों की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अलंकार होता है। (क) अनुप्रास (ख) यमक (ग) भ्रान्तिमान (घ) उपमा
Answer: (क) अनुप्रास
In simple words: यह अनुप्रास अलंकार की परिभाषा है, जिसमें एक ही वर्ण या अक्षर की आवृत्ति कई बार होती है।
🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार में वर्णों की आवृत्ति पर ध्यान दें।
Question 35. उपमा अलंकार का विपरीत अलंकार होता है। (क) दृष्टान्त (ख) श्लेष (ग) प्रतीप (घ) सन्देह
Answer: (ग) प्रतीप
In simple words: प्रतीप अलंकार उपमा का विपरीत होता है, जहाँ उपमेय को उपमान से श्रेष्ठ या उपमान को उपमेय जैसा बताया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतीप अलंकार में उपमा के विपरीत उपमान को हीन या उपमेय जैसा दिखाने की विशेषता होती है।
Question 36. उपमेय और उपमान के साधारण धर्म में भिन्नता होने पर अलंकार होता (क) भ्रान्तिमान (ख) सन्देह (ग) उपमान (घ) दृष्टान्त
Answer: (घ) दृष्टान्त
In simple words: दृष्टान्त अलंकार में दो बातों के साधारण धर्म अलग होते हुए भी उनमें बिम्ब-प्रतिबिम्ब का संबंध होता है, जहाँ एक बात दूसरी का उदाहरण बनती है।
🎯 Exam Tip: दृष्टान्त अलंकार में दो वाक्यों के भिन्न साधारण धर्मों के बावजूद बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव पर जोर दें।
Question 37. जहाँ उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है? (क) प्रतीप (ख) अनन्वय (ग) उत्प्रेक्षा (घ) भ्रान्तिमान
Answer: (ख) अनन्वये
In simple words: अनन्वय अलंकार तब होता है जब उपमेय इतना अद्वितीय होता है कि उसकी तुलना करने के लिए कोई अन्य उपमान नहीं मिलता और उसे स्वयं ही उपमान मान लिया जाता है।
🎯 Exam Tip: अनन्वय अलंकार में उपमेय की अनुपम विशेषता को ध्यान में रखें, जिससे वह स्वयं ही अपना उपमान बन जाता है।
Question 38. प्रस्तुत में अप्रस्तुत की सम्भावना को कौन-सा अलंकार कहते हैं? (क) उपमा (ख) उत्प्रेक्षा । (ग) रूपक (घ) भ्रान्तिमान
Answer: (ख) उत्प्रेक्षा
In simple words: उत्प्रेक्षा अलंकार में प्रस्तुत वस्तु (उपमेय) में अप्रस्तुत वस्तु (उपमान) की संभावना या कल्पना की जाती है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार में संभावना व्यक्त करने वाले शब्दों जैसे 'मानो', 'जनु', 'जानो', 'मनु' आदि का प्रयोग होता है।
Question 39. 'तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए ।' उक्त काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार हैं? (क) यमक (ख) श्लेष (ग) उपमा (घ) अनुप्रास
Answer: (घ) अनुप्रास
In simple words: इस पंक्ति में 'त' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है ('तरनि', 'तनूजा', 'तट', 'तमाल', 'तरुवर'), जो अनुप्रास अलंकार का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार में एक ही वर्ण की आवृत्ति को पहचानना सबसे सरल होता है।
Question 40. माला फेरत जुग भया, फिरा न मनका फेर। करका मनका हारि दे मनका-मनका फेर ।। उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है? (क) श्लेष (ख) यमक (ग) अनुप्रास (घ) रूपक
Answer: (ख) यमके ।
In simple words: यहाँ 'मनका' शब्द दो बार आया है, एक का अर्थ माला के दाने हैं और दूसरे का अर्थ मन की भावना। उनके भिन्न अर्थ होने के कारण यह यमक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में समान शब्दों के अलग-अलग अर्थों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों में अलंकार का नाम और उसका लक्षण लिखिए। सोहत ओढे पीत पट स्याम सलोने गात । मनुहुँ नीलमणि शैल पर आतप परयो प्रभात।।
Answer: यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है। जहाँ प्रस्तुत में अप्रस्तुत की सम्भावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसके वाचक शब्द, मनु, जनु, मनहु, जनहु, मानो, जानों आदि हैं।
In simple words: इस उदाहरण में कृष्ण के श्याम शरीर पर नीले पर्वत की और पीले वस्त्रों पर सुबह की धूप की संभावना की गई है, और 'मनुहुँ' शब्द संभावना को व्यक्त करता है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार में वाचक शब्दों और संभावना के भाव पर ध्यान दें।
Question 2. रूपक अलंकार के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए।
Answer: रूपक अलंकार के तीन भेद होते हैं, जो निम्न प्रकार हैं।
(क) सांग रूपक
(ख) निरंग रूपक
(ग) परम्परित रूपक
In simple words: रूपक अलंकार के मुख्य तीन प्रकार हैं: सांगरूपक (जहाँ उपमेय के सभी अंगों पर उपमान का आरोप हो), निरंग रूपक (जहाँ केवल उपमेय पर उपमान का आरोप हो) और परम्परित रूपक (जहाँ एक रूपक दूसरे का कारण हो)।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार के तीनों भेदों को उनके लक्षणों के साथ याद रखें।
Question 3. निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए। 'कमल-नैन को छाँड़ि महातम, और देव को ध्यानँ।'
Answer: यहाँ रूपक अलंकार हैं। जहाँ उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप हो, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
In simple words: इस पंक्ति में 'कमल' और 'नैन' (आँखें) में कोई भेद नहीं दिखाया गया है, अर्थात आँखों को ही कमल मान लिया गया है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार की पहचान उपमेय और उपमान के बीच पूर्ण अभेद के आरोप से होती है।
Question 4. 'पूत सपूत तो क्यों धन संचे ।' पूत कपूत तो क्यों धन संचे।।
Answer: यहाँ अनुप्रास का एक भेद लाटानुप्रास है। जहाँ शब्द और अर्थ की आवृत्ति हो अर्थात् जहाँ एकार्थक शब्दों की आवृत्ति तो हो, परन्तु अन्वय करने पर अर्थ भिन्न हो जाए, वहाँ लाटानुप्रास अलंकार होता है।
In simple words: इस उदाहरण में एक ही पंक्ति दो बार आई है, शब्द और उनका अर्थ भी समान है, लेकिन विराम चिह्न के कारण उनका भाव बदल जाता है कि सपूत के लिए धन संचय की आवश्यकता नहीं और कपूत के लिए भी नहीं।
🎯 Exam Tip: लाटानुप्रास में शब्दों की पुनरावृत्ति के बावजूद अन्वय (जोड़) बदलने से अर्थ में भिन्नता आती है।
Question 5. कहत नटत रीझत खीझत मिलत खिलत लजियात । भरे भौन में करत हैं, नैननु हीं सौं बात ।। उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
Answer: यहाँ अनुप्रास का एक भेद अन्त्यानुप्रास' है। जब छन्द के शब्दों के अन्त में समान स्वर या व्यंजन की आवृत्ति हो, वहाँ ‘अन्त्यानुप्रास' अलंकार होता है।
In simple words: इस दोहे की हर पंक्ति के अंत में समान स्वर या व्यंजन की ध्वनि आ रही है (जैसे 'लजियात', 'बात'), जो अंत्यानुप्रास का एक स्पष्ट उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: अन्त्यानुप्रास में कविता की पंक्तियों के अंत में ध्वनि की समानता पर ध्यान दें।
Question 6. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चुन ।।। उक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
Answer: यहाँ श्लेष अलंकार है। जहाँ एक शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं, वहाँ श्लेष अलंकार होता हैं।
In simple words: इस दोहे में 'पानी' शब्द के अनेक अर्थ हैं, जैसे मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए सम्मान और आटे के लिए जल, जो एक ही शब्द के विभिन्न संदर्भों में अलग-अलग अर्थों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार में एक शब्द के प्रसंगानुसार अनेक अर्थों को समझना आवश्यक है।
Question 7. अनुप्रास अलंकार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए।
Answer: जहाँ समान वर्षे की आवृत्ति बार-बार होती है अर्थात् कोई वर्ण एक से अधिक बार आता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है; जैसे उदाहरण रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम ।। ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान ।
In simple words: अनुप्रास अलंकार में एक ही व्यंजन वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, जिससे काव्य में सुंदरता आती है।
🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार में वर्णों की आवृत्ति को आसानी से पहचाना जा सकता है।
Question 8. मकराकृति गोपाल के, सोहत कुण्डल कान। धयो मनौ हिय धर समरु, इयौढी लसत निसान ।। उक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? उसका लक्षण लिखिए।
Answer: यहाँ रूपक अलंकार है। जहाँ उपमेय और उपमान में अभिन्नता प्रकट की जाए अर्थात् उन्हें एक ही रूप में प्रकट किया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
In simple words: इन पंक्तियों में कुण्डलों को कामदेव के हृदय में धारण किए जाने वाले निशान के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ उपमेय और उपमान में कोई भेद नहीं है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान को एक ही वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
Question 9. 'तेरी बरछी ने बरछीने हैं खलन के ।' उक्त काव्य पंक्ति में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए।
Answer: यहाँ यमक अलंकार है। जहाँ कोई शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त होता है और प्रत्येक बार उसके अर्थ अलग होते हैं। वहाँ यमक अलंकार होता है।
In simple words: इस पंक्ति में 'बरछी' शब्द दो बार आया है, पहले का अर्थ हथियार 'बरछी' है और दूसरे का अर्थ 'बल छीन लिया', जिससे यह यमक अलंकार है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में समान शब्दों के भिन्न अर्थों को पकड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 10. 'पछताने की परछाहीं-सी, तुम उदास छाई हो कौन?' इस पंक्ति में अलंकार का नाम और उसका लक्षण लिखिए।
Answer: यहाँ उपमा अलंकार है। जहाँ उपमेय (संज्ञा) की उपमान (विशेषण) से समानता बताई जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। इसके वाचक शब्द हैं, सी, सा, से, सम, सरिस आदि ।
In simple words: इस पंक्ति में 'सी' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो उदासी की तुलना 'पछताने की परछाहीं' से कर रहा है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: उपमा अलंकार की पहचान 'सा, सी, से, सरिस' जैसे तुलनात्मक वाचक शब्दों से होती है।
Question 11. निम्नलिखित पंक्तियों में अलंकार का नाम तथा उसका लक्षण लिखिए। ‘चरण-कमल बन्द हरिराई।'
Answer: उक्त रूपक अलंकार है। जहाँ उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप हो, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
In simple words: यहाँ 'चरण' (उपमेय) पर 'कमल' (उपमान) का अभेद आरोप किया गया है, यानी चरणों को ही कमल मान लिया गया है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान को एक ही रूप में प्रस्तुत किया जाता है, उनके बीच कोई भेद नहीं होता।
Question 12. निम्नलिखित दोहे में अलंकार का नाम तथा लक्षण लिखिए । चिरजीव जोरी जुरै, क्यों न सनेह गम्भीर को घटि ए वृषभानुजा, वे हलधर के वीर ।।
Answer: यहाँ श्लेष अलंकार है। जहाँ एक शब्द एक ही स्थान पर प्रयुक्त हो और उसके एक से अधिक अर्थ हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
In simple words: इस दोहे में 'वृषभानुजा' (वृषभानु की पुत्री राधा और वृषभ की अनुजा गाय) और 'हलधर' (बलराम और बैल) शब्दों के दोहरे अर्थ निकलते हैं, जो श्लेष अलंकार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: श्लेष अलंकार में एक शब्द के कई अर्थ होते हैं, जो प्रसंग के अनुसार बदलते हैं।
Question 13. निम्नलिखित में कौन-सा अलंकार है? मुख मयंक सम मंजु मनोहर । ।
Answer: यहाँ उपमा अलंकार है, क्योंकि मुख की समानता चन्द्रमा से की गई है। तथा मंजु और मनोहर साधारण धर्म हैं साथ में वाचक शब्द सा भी प्रयुक्त है।
In simple words: इस पंक्ति में 'सम' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो मुख की सुंदरता की तुलना चन्द्रमा से कर रहा है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
🎯 Exam Tip: उपमा अलंकार की पहचान 'सा, सी, से, सम' जैसे तुलनात्मक वाचक शब्दों से होती है।
Question 14. निम्नलिखित में कौन-सा अलंकार है? ओ चिन्ता की पहली रेखा, अरे विश्व वन की व्याली।
Answer: इस पंक्ति में रूपक अलंकार है, क्योंकि चिन्ता उपमेय में विश्व वन की व्याली में उपमान का आरोप किया गया है।
In simple words: यहाँ 'चिंता' पर 'विश्व वन की व्याली' (संसार रूपी जंगल की नागिन) का अभेद आरोप किया गया है, यानी चिंता को ही जंगल की नागिन मान लिया गया है।
🎯 Exam Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच कोई भेद नहीं किया जाता, उन्हें एक ही मान लिया जाता है।
Question 15. निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है? नाक का मोती अधर की कान्ति से, बीज़ दाडिम का समझकर भ्रान्ति से। देख उसको ही हुआ शुक मौन है, सोचता है अन्य शुक यह कौन है?
Answer: इन पंक्तियों में भ्रान्तिमान अलंकार है। जहाँ समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी समझ लिया जाता है। वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार होता है। इसमें तोता उर्मिला की नाक के मोती को भ्रमवश अनार का दाना और उसकी नाक को दूसरा तोता समझकर भ्रमित हो जाता है। इस कारण यहाँ पर भ्रान्तिमान अलंकार है।
In simple words: इस उदाहरण में तोता नाक के मोती को अनार का बीज समझ लेता है और नायिका की नाक को दूसरा तोता मान लेता है, जो वास्तविक भ्रम को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: भ्रान्तिमान अलंकार में भ्रम वास्तविक होता है और एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लिया जाता है।
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