Official UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi: आर्थिक निबंध
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Chapter-wise Solutions for Sahityik Hindi: आर्थिक निबंध
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Question 1. ग्रामीण रोजगार योजनाएँ
संकेत विन्दु भूमिका, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा बनाई गई नवीन योजनाएँ, उपसंहार ।
Answer: भूमिका स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत के सामने एक बड़ी चुनौती थीप्रामीणों की दशा सुधारने के लिए उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना, क्योंकि किसानों को समृद्ध किए बिना देश की पूर्ण समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती थी। देश के प्रथम प्रधानमन्त्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने भी कहा है-"जब तक देश के किसान खुशहाल नहीं होंगे तब तक राष्ट्र एवं समाज का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।” उस समय देश के लिए अन्न उपजाने वाले किसान कृषि कार्यों के लिए पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर थे। सूखा, अतिवृष्टि, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएँ आने पर किसानों की दशा अति दयनीय हो जाती थी और उनके रोजगार ठप पड़ जाते थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा बनाई गई नवीन योजनाएँ स्वतन्त्र भारत में किसानों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर कई रोजगार योजनाओं व कार्यक्रमों को मूर्त रूप दिया गया, जिनमें ग्रामीण मज़दूर रोजगार कार्यक्रम, मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, काम के बदले अनाज कार्यक्रम, स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना आदि प्रमुख हैं। इन विकासोन्मुख योजनाओं व कार्यक्रमों के कारण देश के किसानों की दशा में पहले से बहुत सुधार आया है, परन्तु अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी अधिक बेरोजगारी है, जिसका प्रमुख कारण है-देश की जनसंख्या का दिनों-दिन अत्यधिक तेज गति से बढ़ना।
प्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए गए महत्त्वपूर्ण प्रयास इस प्रकार है
(i) ग्रामीण मजदूरी रोजगार कार्यक्रम केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम के रूप में इस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। उसके बाद वर्ष 1971-72 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराए जाने हेतु ग्रामीण रोजगार क्रैश स्कौम, कृषि श्रमिक स्कीम, लघु कृषक विकास एजेन्सी, सूखा संवेदी क्षेत्र कार्यक्रम की आधारशिला रखी गई। वर्ष 1980 में इन सबको सम्मिलित रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम और प्रामीण भूमिहीन रोजगार गारण्टी कार्यक्रम में और वर्ष 1993 में इन्हें पुनः विस्तारित कर जवाहर रोजगार योजना में परिवर्तित कर दिया गया। वर्ष 1999-2000 में जवाहर रोजगार योजना को जवाहर ग्राम समृद्धि योजना में शामिल कर लिया गया। वर्ष 2001-02 में इसे सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम एवं वर्ष 2005 में काम के बदले अनाज कार्यक्रम में विलय किया गया। केन्द्र सरकार द्वारा किए गए इन प्रयासों का ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान हैं।
(ii) मनरेगा महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम अर्थात् मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का एक अधिकार सम्बद्ध कार्यक्रम है। इसका कार्यान्वयन वर्ष 2006 में देश के अत्यन्त पिछड़े 200 जिलों में किया गया। वर्ष 2007 एवं पुनः वर्ष 2008 में इसे विस्तारित कर देश के समस्त जिलों में प्रभावी कर दिया गया। मनरेगा का उद्देश्य इच्छुक बेरोजगार वयस्कों को वर्षभर में कम-से-कम 100 दिनों का निश्चित रोजगार प्रदान करना रखा गया। ग्रामीणों को जीविका प्रदान करने के साथ-साथ इसका उद्देश्य पंचायती राज व्यवस्था को प्रभावी बनाना भी हैं। इस कार्यक्रम के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति श्रम दिवस औसत मजदूरी में 81% की वृद्धि हुई है।
(iii) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ग्रामीण विकास मन्त्रालय का एक अति महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2021-22 तक देश के ग्रामीण क्षेत्रों के आठ से दस करोड़ निर्धन परिवारों को लाभ पहुँचाना है। पंचायती राज संस्थाओं को विशेष महत्त्व देने वाले इस मिशन को मार्च, 2014 तक देश के 27 राज्यों सहित पुदुचेरी संघ राज्य क्षेत्र में कार्यान्वित कर दिया गया। इस मिशन की सहायता से अब तक देश के डेढ़ लाख महिला श्रमिकों को लाभान्वित किया जा चुका है। (NRLM) के द्वारा वर्ष 2013-14 के दौरान लगभग तीन लाख स्व सहायता समूहों को मदद पहुँचाई गई और कुल 1,300 से भी अधिक ब्लॉकों को इसके अन्तर्गत लाया गया।
(iv) सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना देश में पूर्व से प्रभावी जवाहर ग्राम समृद्धि योजना और रोजगार आश्वासन योजना को सम्मिलित कर वर्ष 2001 में केन्द्र सरकार द्वारा सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना को कार्यरूप दिया गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में खाद्य सुरक्षा प्रदान करना तथा स्थायी परिसम्पत्तियों के माध्यम से रोजगार के अवसर का विस्तार करना है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे लोगों को इस योजना में प्राथमिकता दी गई है। इस योजना में व्यय की जाने वाली राशि को केन्द्र व राज्य सरकारों में 75; 25 में बाँटा गया हैं। वहीं जिला पंचायत, मध्यवर्ती पंचायत एवं ग्राम पंचायतों के मध्य संसाधनों का वितरण 20 : 30 : 50 के आधार पर किया गया है। वर्ष 2004 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के द्वारा उपलब्ध किए जाने वाले संसाधनों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से काम के बदले अनाज कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। योजना आयोग द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का लक्ष्य देश के सर्वाधिक पिछड़े 150 जिलों में खाद्य सुरक्षा व पूरक दैनिक मजदूरी रोजगार के क्षेत्र को विस्तार देना है।
(v) स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले निर्धन लोगों को स्वरोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से इस योजना को वर्ष 1999 में प्रारम्भ किया गया। इस योजना के अन्तर्गत गैर-सरकारी संस्थाओं को सुविधा प्रदाता के रूप में सम्मिलित कर स्वयंसेवी सहायता समूहों के विकास एवं पोषण पर ध्यान दिया जाता है। इस योजना द्वारा सरकारी सब्सिडी एवं बैंक ऋण के माध्यम से ग्रामीणों तक सहायता पहुंचाई जाती हैं। कुल परियोजना लागत की 30% दर से दी जाने वाली सब्सिडी की अधिकतम सीमा Rs. 7,500 तक निर्धारित की गई है। सामान्यतः 10-20 सदस्यों के द्वारा स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा सकता है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक लगभग 22 लाख से भी अधिक स्वयं सहायता समूहों को गठित किया गया है। लाभान्वित होने वाले स्वरोजगारियों में लगभग 45% अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के लोग एवं लगभग 48% महिलाएँ हैं।
उपसंहार निश्चय ही देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के तमाम साधन उपलब्ध हैं और केन्द्र व राज्य की सरकारों द्वारा समय-समय पर चलाए गए विभिन्न रोजगार सम्बद्ध कार्यक्रमों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को लाभ प्राप्त हुआ है, पर आज भी रोजगार के क्षेत्र में गाँवों की स्थिति दयनीय ही है। सरकारी स्तर पर और प्रभावी एवं लाभप्रद योजनाओं को मूर्त रूप देकर ग्रामीणों की दशा सुधारी जा सकती है, पर इसके लिए प्रामीणों में शिक्षा का विस्तार किया जाना अत्यन्त आवश्यक है, क्योंकि बिना लोगों को जागरूक किए काम के प्रति लगन पैदा नहीं की जा सकती। सरकारी सुविधाओं का पूर्ण लाभ प्राप्त करने हेतु भी ग्रामीणों का शिक्षित होना अत्यन्त आवश्यक है। इसके लिए गाँवों में रोजगारमूलक शिक्षा का प्रचार प्रसार खूब जोर-शोर से करना चाहिए।
In simple words: यह निबंध ग्रामीण रोजगार योजनाओं पर प्रकाश डालता है, जिनमें मनरेगा और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी कई सरकारी पहलें शामिल हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबी कम करना और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण रोजगार योजनाओं का वर्णन करते समय, प्रमुख योजनाओं के नाम और उनके उद्देश्यों को सटीक रूप से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है, साथ ही ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका को भी उजागर करें।
Question 2. बेकारी/बेरोजगारी की समस्या एवं समाधान
अन्य शीर्षक भारत में बेरोजगारी की समस्या, शिक्षित बेरोजगारी की समस्या
संकेत बिन्दु बेरोजगारी का तात्पर्य, बेरोजगार युवा वर्ग, अनेक समस्याओं की जड़ बेरोजगारी, बेरोजगारी के कारण, बेरोजगारी दूर करने के उपाय, उपसंहार ।
Answer: बेरोजगारी का तात्पर्य बेरोजगारी से अभिप्राय उस स्थिति से है, जब कोई योग्य तथा काम करने का इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी की दरों पर काम करने के लिए तैयार हो । बालक, वृद्ध, रोगी, अक्षम एवं अपंग व्यक्तियों को बेरोजगारों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। भारत में बेरोजगारी एक आर्थिक समस्या है।
यह एक ऐसी बुराई है, जिसके कारण केवल उत्पादक मानव शक्ति ही नष्ट नहीं होती, बल्कि देश का भावी विकास भी अवरुद्ध हो जाता है, जो श्रमिक अपने कार्य द्वारा देश के आर्थिक विकास में सक्रिय सहयोग दे सकते थे, ये कार्य के अभाव में बेरोजगार रह जाते हैं। यह स्थिति हमारे आर्थिक विकास में बाधक है।
बेरोजगार युवा वर्ग आज हमारे समाज में बेरोजगारी की समस्या में वृद्धि होती जा रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज का युवा वर्ग है। आज का नवयुवक जो विश्वविद्यालय से अच्छे अंक व डिग्री प्राप्त करके निकलता है, परन्तु वह रोजगार की तलाश में भटकता रहता है। बेरोजगारी के कारण नवयुवक प्रतिदिन रोजगार पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं तथा अखबारों, इण्टरनेट आदि में दिए गए विज्ञापनों के द्वारा अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी की खोज में लगे रहते हैं, परन्तु उन्हें रोजगार की प्राप्ति नहीं हो पाती, उन्हें केवल निराशा ही मिलती है।
अनेक समस्याओं की जड़ बेरोजगारी रोजगार न मिलने के कारण युवा वर्ग निराशावादी बन जाता है और आँसुओं के खारेपन को पीकर समाज को अपनी मौनव्यथा सुनाता है। बेरोजगारी किसी भी देश अथवा समाज के लिए अभिशाप है। इससे एक ओर निर्धनता, भुखमरी और मानसिक अशान्ति फैलती है, तो दूसरी ओर युवकों में आक्रोश तथा अनुशासनहीनता को भी प्रोत्साहन मिलता है। चोरी, डकैती, हिंसा, अपराघवृत्ति एवं आत्महत्या आदि समस्याओं के मूल में एक बड़ी सौमा तक बेरोजगारी ही विद्यमान है। बेरोजगारी एक ऐसा भयंकर विष है, जो सम्पूर्ण देश के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन को दूषित कर देता है।
बेरोजगारी के कारण हमारे देश में बेरोजगारी के निम्न कारण हैं-दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली, जनसंख्या में वृद्धि, कुटीर उद्योगों की उपेक्षा, औद्योगीकरण की उपेक्षा, औद्योगीकरण की मन्द प्रक्रिया, कृषि का पिछड़ापन, कुशल एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी। इसके अतिरिक्त मानसून की अनियमितता, भारी संख्या में शरणार्थियों का आगमन, अत्यधिक मशीनीकरण के फलस्वरूप होने वाली श्रमिकों की छंटनी, श्रम और माँग की पूर्ति में असन्तुलन, स्वरोजगार के साधनों की कमी इत्यादि इन कारणों से भी बेरोजगारी में वृद्धि हुई हैं। देश को बेरोजगारी से उभारने के लिए इसका समुचित समाधान नितान्त आवश्यक है।
बेरोजगारी दूर करने के उपाय बेरोजगारी को दूर करने के लिए हमें जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण, शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन, कुटीर उद्योगों का विकास, औद्योगीकरण, सहकारी खेती, सहायक उद्योगों का विकास, राष्ट्र-निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य आदि का विस्तार करना चाहिए। बेरोजगारी की समस्या का समाधान तब ही सम्भव है, जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम और व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
उपसंहार हमारी सरकार बेरोजगारी उन्मूलन के प्रति जागरूक है और इस दिशा में उसने महत्त्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं। परिवार नियोजन, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, कच्चे मालों को एक स्थान-से-दूसरे स्थान पर ले जाने की सुविधा, कृषि-भूमि की चकबन्दी, नए-नए उद्योगों की स्थापना, अप्रेण्टिस (शिनु) योजना, प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना आदि अनेकानेक कार्य ऐसे हैं, जो बेरोजगारी दूर करने में एक सीमा तक सहायक सिद्ध हुए हैं, परन्तु वर्तमान स्थिति को देखते हुए इनको और अधिक विस्तृत एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
In simple words: यह निबंध भारत में बेरोजगारी की समस्या और उसके समाधान पर केंद्रित है। इसमें बेरोजगारी के कारणों जैसे दोषपूर्ण शिक्षा, जनसंख्या वृद्धि और औद्योगीकरण की धीमी गति पर चर्चा की गई है, साथ ही रोजगार-उन्मुखी शिक्षा, कुटीर उद्योगों के विकास और जनसंख्या नियंत्रण जैसे समाधान भी सुझाए गए हैं।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी पर निबंध लिखते समय, समस्या के मूल कारणों, इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए। प्रभावी समाधानों को भी विस्तार से बताना महत्वपूर्ण है।
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UP Board Solutions for Class 12 Sahityik Hindi आर्थिक निबंध
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