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Detailed Chapter 9 किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक उपकरण UP Board Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 9 किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक उपकरण UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 9 Ray Optics And Optical Instruments (किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. 2.5 cm साइज़ की कोई छोटी मोमबत्ती 36 cm वक्रता त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 27 cm दूरी पर रखी है। दर्पण से किसी परदे को कितनी दूरी पर रखा जाए कि उसका सुस्पष्ट प्रतिबिम्ब परदे पर बने । प्रतिबिम्ब की प्रकृति और साइज़ का वर्णन कीजिए। यदि मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाएँ, तो परदे को किस ओर हटाना पड़ेगा?
Answer: हल-
दिया है, \( u = -27 \) सेमी, \( O = 2.5 \) सेमी
\( |r| = |2f| = 36 \) सेमी \( \implies |f| = \frac{36}{2} = 18 \) सेमी
चिह्न परिपाटी से, \( f = -18 \) सेमी
दर्पण सूत्र \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से,
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u} = \frac{1}{-18} - \frac{1}{(-27)} = -\frac{1}{18} + \frac{1}{27} \)
\( \implies \frac{1}{v} = \frac{-3+2}{54} = \frac{-1}{54} \)
\( v = -54 \) सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने दर्पण से 54 सेमी की दूरी पर बनेगा, अतः पर्दा दर्पण के सामने 54 सेमी की दूरी पर रखना होगा।
प्रतिबिम्ब का आकार, \( \frac{I}{O} = -\frac{v}{u} \implies I = -(\frac{-54 \text{ सेमी}}{-27 \text{ सेमी}}) \times 2.5 \text{ सेमी} = -2 \times 2.5 \text{ सेमी} = -5 \) सेमी
अतः प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा तथा 5 सेमी ऊँचा है। यदि मोमबत्ती को पर्दे की ओर ले जायें, तो पर्दे को दर्पण से दूर ले जाना होगा। यदि मोमबत्ती को 18 सेमी से कम दूरी तक खिसकायें, तो प्रतिबिम्ब आभासी बनेगा तथा पर्दे पर प्राप्त नहीं होगा।
In simple words: The candle is placed at 27 cm from a concave mirror with a focal length of 18 cm. A real, inverted image of 5 cm height will form at 54 cm in front of the mirror. Moving the candle towards the mirror beyond the focal point will shift the image further away.
🎯 Exam Tip: Remember to use the correct sign conventions for object distance (u), image distance (v), and focal length (f) for mirrors and lenses. This is crucial for accurate calculations.
Question 2. 4.5 cm साइज़ की कोई सुई 15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से 12 cm दूर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा आवर्धन लिखिए। क्या होता है जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं? वर्णन कीजिए ।
Answer: हल-
यहाँ सुई का आकार \( O = 4.5 \) सेमी; उत्तल दर्पण की फोकस दूरी \( f = 15 \) सेमी । दर्पण से वस्तु (सुई) की दूरी \( u = -12 \) सेमी
अतः दर्पण के सूत्र \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) में ज्ञात मान रखने पर,
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u} = \frac{1}{15} - \frac{1}{(-12)} = \frac{1}{15} + \frac{1}{12} = \frac{4+5}{60} = \frac{9}{60} \)
\( \implies v = \frac{60}{9} = \frac{20}{3} \) सेमी \( = 6.67 \) सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे दर्पण से 6.67 सेमी दूरी पर बनेगा।
दर्पण के आवर्धन सूत्र \( m = \frac{I}{O} = -(\frac{v}{u}) \) से,
प्रतिबिम्ब का आकार \( I = -(\frac{v}{u}) O = -(\frac{20/3}{-12}) \times 4.5 \text{ सेमी} = -(\frac{20}{-36}) \times 4.5 \text{ सेमी} = \frac{5}{9} \times 4.5 \text{ सेमी} = 2.5 \) सेमी
सीधा (आभासी) तथा 2.5 सेमी लम्बा (ऊँचा) बनेगा। जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं तो इसका प्रतिबिम्ब दर्पण से दूर फोकस की ओर खिसकेगा तथा इसका आकार घटता जायेगा ।
In simple words: For a needle placed 12 cm from a convex mirror with a 15 cm focal length, a virtual, upright image of 2.5 cm height will form 6.67 cm behind the mirror. As the needle moves away, the image moves towards the focal point and decreases in size.
🎯 Exam Tip: For convex mirrors, the image is always virtual, upright, and diminished, formed behind the mirror. Remember that object distance (u) is always negative for real objects, and focal length (f) is positive for convex mirrors.
Question 3. कोई टैंक 12.5 cm ऊँचाई तक जल से भरा है। किसी सूक्ष्मदर्शी द्वारा बीकर की तली पर पड़ी किसी सुई की आभासी गहराई 9.4 cm मापी जाती है। जल का अपवर्तनांक क्या है? बीकर में उसी ऊँचाई तक जल के स्थान पर किसी 1.63 अपवर्तनांक के अन्य द्रव से प्रतिस्थापन करने पर सुई को पुनः फोकसित करने के लिए सूक्ष्मदर्शी को कितना ऊपर/नीचे ले जाना होगा?
Answer: हल-
सुई की वास्तविक गहराई \( h = 12.5 \) सेमी
आभासी गहराई \( h' = 9.4 \) सेमी
जल का अपवर्तनांक \( a^{n}_{w} = \frac{\text{वास्तविक गहराई}}{\text{आभासी गहराई}} = \frac{h}{h'} = \frac{12.5 \text{ सेमी}}{9.4 \text{ सेमी}} = 1.329 \approx 1.33 \)
द्रव का अपवर्तनांक \( a^{n}_{l} = 1.63 \implies \frac{h}{h'} = a^{n}_{l} \) से,
\( h' = \frac{h}{a^{n}_{l}} = \frac{12.5 \text{ सेमी}}{1.63} = 7.67 \text{ सेमी} \approx 7.7 \) सेमी
पहले सूक्ष्मदर्शी 9.4 सेमी पर फोकस था अतः इसका नीचे की ओर विस्थापन \( = (9.4 - 7.7) \text{ सेमी} = 1.7 \) सेमी
In simple words: Given the real depth (12.5 cm) and apparent depth (9.4 cm) of a needle in water, the refractive index of water is calculated as 1.33. If the water is replaced by a liquid with a refractive index of 1.63, the microscope would need to be lowered by 1.7 cm to refocus on the needle.
🎯 Exam Tip: Understand the relationship between real depth, apparent depth, and refractive index. Calculations involving changes in refractive media require determining the new apparent depth to find the required shift for refocusing.
Question 4. चित्र 9.1
(a) तथा
(b) में किसी आपतित किरण का अपवर्तन दर्शाया गया है जो वायु में क्रमशः काँच-वायु तथा जल-वायु अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 60° का कोण बनाती है। उस आपतित किरण का अपवर्तन कोण ज्ञात कीजिए, जो जल में जल-काँच अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 45° का कोण बनाती है [चित्र 9.1 (c)]
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 9.1 (a) और (b) हवा से काँच और हवा से जल में प्रकाश के अपवर्तन को दर्शाते हैं। दोनों ही मामलों में आपतन कोण 60° है, और संबंधित अपवर्तन कोण 35° और 41° हैं। चित्र 9.1 (c) जल से काँच में प्रवेश करती एक किरण को दर्शाता है जिसका जल-काँच अन्तरापृष्ठ पर आपतन कोण 45° है, और हमें अपवर्तन कोण ज्ञात करना है। हल - स्नेल के नियम \( \frac{\sin i}{\sin r} = n \) का प्रयोग करते हुए,
चित्र 9.1 (a) से, \( a^{n}_{g} = \frac{\sin 60^\circ}{\sin 35^\circ} = \frac{0.8660}{0.5736} = 1.51 \)
चित्र 9.1 (b) से, \( a^{n}_{w} = \frac{\sin 60^\circ}{\sin 41^\circ} = \frac{0.8660}{0.6561} = 1.32 \)
परन्तु \( a^{n}_{w} \times w^{n}_{g} = a^{n}_{g} \)
\( \implies w^{n}_{g} = \frac{a^{n}_{g}}{a^{n}_{w}} = \frac{1.51}{1.32} \)
परन्तु चित्र 9.1 (c) से \( w^{n}_{g} = \frac{\sin 45^\circ}{\sin r} \)
अतः \( \frac{1.51}{1.32} = \frac{\sin 45^\circ}{\sin r} \)
\( \implies \sin r = \frac{1.32}{1.51} \sin 45^\circ = \frac{1.32}{1.51} \times 0.7071 = 0.6181 \)
कोण \( r = \sin^{-1} (0.6181) = 38^\circ \)
In simple words: Using Snell's law and the given angles of incidence and refraction for air-glass and air-water interfaces, the refractive index of glass with respect to water is calculated. Then, for light incident from water to glass at 45°, the angle of refraction is found to be 38°.
🎯 Exam Tip: Snell's Law (n1 sin i = n2 sin r) is fundamental for solving problems involving refraction. Remember that the refractive index of medium 2 with respect to medium 1 (n12) is n2/n1.
Question 5. जल से भरे 80 cm गहराई के किसी टैंक की तली पर कोई छोटा बल्ब रखा गया है। जल के पृष्ठ का वह क्षेत्र ज्ञात कीजिए जिससे बल्ब का प्रकाश निर्गत हो सकता है। जल का अपवर्तनांक 1.33 है। (बल्ब को बिन्दु प्रकाश स्रोत मानिए)
Answer: हल-
टैंक की तली में रखे बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें जल के पृष्ठ से तभी निर्गत होंगी, जबकि आपतन कोण जल-वायु अन्तरापृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण C से कम अथवा उसके बराबर हो । यदि उसे पृष्ठ के क्षेत्रफल की त्रिज्या हो जिससे बल्ब का प्रकाश निकल रहा है, तो यह स्थिति चित्र 9.2 की भाँति होगी जहाँ \( h \) बल्ब की जल के तल से गहराई है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक टैंक में डूबे हुए प्रकाश स्रोत (बल्ब) को दर्शाता है। बल्ब से निकली किरणें जल की सतह पर क्रान्तिक कोण (C) पर आपतित हो रही हैं, जिससे प्रकाश जल से बाहर निकल सके। यह चित्र दर्शाता है कि किस प्रकार प्रकाश जल-पृष्ठ पर एक वृत्ताकार क्षेत्र से बाहर निकलता है, जिसकी त्रिज्या (r) और जल की गहराई (h) क्रान्तिक कोण से संबंधित हैं। \( a^{n}_{w} = \frac{1}{\sin C} \)
परन्तु यहाँ \( a^{n}_{w} = 1.33 \)
अतः \( \sin C = \frac{1}{a^{n}_{w}} = \frac{1}{1.33} = \frac{100}{133} \approx \frac{3}{4} \)
परन्तु चित्र से, \( \frac{r}{h} = \tan C \)
\( \tan C = \frac{\sin C}{\cos C} = \frac{\sin C}{\sqrt{1-\sin^2 C}} = \frac{3/4}{\sqrt{1-(3/4)^2}} = \frac{3/4}{\sqrt{1-9/16}} = \frac{3/4}{\sqrt{7/16}} = \frac{3/4}{\sqrt{7}/4} = \frac{3}{\sqrt{7}} \)
\( r = h \tan C \); परन्तु यहाँ \( h = 80 \) सेमी
अतः \( r = 80 \text{ सेमी} \times \frac{3}{\sqrt{7}} = \frac{240}{\sqrt{7}} \text{ सेमी} \approx \frac{240}{2.645} \text{ सेमी} = 90.74 \text{ सेमी} \)
\( = 0.9074 \text{ मी} \approx 0.907 \text{ मी} \)
क्षेत्रफल \( = \pi r^2 = 3.14 \times (0.907 \text{ मी})^2 = 3.14 \times 0.822649 \text{ मी}^2 = 2.58 \text{ मी}^2 \approx 2.6 \text{ मी}^2 \)
In simple words: For a bulb placed 80 cm deep in water with a refractive index of 1.33, light will emerge from the surface within a circular area determined by the critical angle. The radius of this circle is found to be approximately 90.74 cm, resulting in an emergence area of about 2.6 square meters.
🎯 Exam Tip: This problem combines concepts of total internal reflection, critical angle, and geometry. Ensure you correctly apply the formula for critical angle \( \sin C = 1/n \) and the trigonometric relationship \( r = h \tan C \) to find the radius of the illuminated circle.
Question 6. कोई प्रिज्म अज्ञात अपवर्तनांक के काँच का बना है। कोई समान्तर प्रकाश-पुंज इस प्रिज्म के किसी फलक पर आपतित होता है। प्रिज्म का न्यूनतम विचलन कोण 40° मापा गया। प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक क्या है? प्रिज्म का अपवर्तन कोण 60° है। यदि प्रिज्म को जल (अपवर्तनांक 1.33) में रख दिया जाए तो प्रकाश के समान्तर पुंज के लिए नए न्यूनतम विचलन कोण का परिकलन कीजिए।
Answer: हल-दिया है, प्रिज्म के लिए \( A = 60^\circ \), वायु में \( D_m = 40^\circ \)
वायु के सापेक्ष प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक \( a^{n}_{g} = \frac{\sin (\frac{A+D_m}{2})}{\sin (\frac{A}{2})} = \frac{\sin (\frac{60^\circ+40^\circ}{2})}{\sin (\frac{60^\circ}{2})} = \frac{\sin 50^\circ}{\sin 30^\circ} = \frac{0.7660}{0.5000} = 1.53 \)
वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक \( a^{n}_{w} = 1.33 \)
जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक \( w^{n}_{g} = \frac{a^{n}_{g}}{a^{n}_{w}} = \frac{1.53}{1.33} = 1.15 \)
यदि जल में डुबाने पर न्यूनतम विचलन कोण \( D_m' \) है तो
\( w^{n}_{g} = \frac{\sin (\frac{A+D_m'}{2})}{\sin (\frac{A}{2})} \)
\( 1.15 = \frac{\sin (\frac{60^\circ+D_m'}{2})}{\sin 30^\circ} \)
या \( \sin (\frac{60^\circ+D_m'}{2}) = 1.15 \times \sin 30^\circ = 1.15 \times 0.5 = 0.575 \)
\( \implies \frac{60^\circ+D_m'}{2} = \sin^{-1} (0.575) = 35.1^\circ \)
\( 60^\circ+D_m' = 2 \times 35.1^\circ = 70.2^\circ \)
न्यूनतम विचलन कोण \( D_m' = 70.2^\circ - 60^\circ = 10.2^\circ \approx 10^\circ \)
In simple words: For a prism with a 60° angle, the refractive index is 1.53 when the minimum deviation is 40° in air. When immersed in water (refractive index 1.33), the new minimum deviation for a parallel beam of light is approximately 10°.
🎯 Exam Tip: The prism formula (n = sin((A+Dm)/2) / sin(A/2)) is key for these calculations. Remember that the refractive index of the prism's material changes when it is immersed in a different medium, affecting the minimum deviation angle.
Question 7. अपवर्तनांक 1.55 के काँच से दोनों फलकों की समान वक्रता त्रिज्या के उभयोत्तल लेन्स निर्मित करने हैं। यदि 20 cm फोकस दूरी के लेन्स निर्मित करने हैं तो अपेक्षित वक्रता त्रिज्या क्या होगी?
Answer: हल – दिया है, \( n = 1.55 \), लेन्स की फोकस दूरी \( f = + 20 \) cm
माना अभीष्ट वक्रता त्रिज्या \( = R \)
तब उत्तल लेन्स हेतु \( R_1 = +R, R_2 = -R \)
\( \frac{1}{f} = (n-1) (\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}) \) से,
\( \frac{1}{20} = (1.55-1) (\frac{1}{R} - \frac{1}{-R}) = 0.55 (\frac{1}{R} + \frac{1}{R}) = 0.55 \times \frac{2}{R} \)
\( \implies R = 2 \times 0.55 \times 20 = 22 \) cm
अतः प्रत्येक पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या 22 cm होनी चाहिए।
In simple words: To create a biconvex lens with a focal length of 20 cm from glass with a refractive index of 1.55, where both surfaces have equal radii of curvature, each surface must have a radius of curvature of 22 cm.
🎯 Exam Tip: The lens maker's formula \( \frac{1}{f} = (n-1) (\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}) \) is essential. For a biconvex lens, R1 is positive and R2 is negative. For equal radii, set \( R_1 = R \) and \( R_2 = -R \).
Question 8. कोई प्रकाश-पुंज किसी बिन्दु P पर अभिसरित होता है। कोई लेन्स इस अभिसारी पुंज के पथ में बिन्दु P से 12 cm दूर रखा जाता है। यदि यह
(a) 20 cm फोकस दूरी का उत्तल लेन्स है,
Answer: हल - (a) स्पष्ट है कि इस स्थिति में बिन्दु P लेन्स के लिए आभासी वस्तु (बिम्ब) है।
\( u = +12 \) cm (लेन्स के दायीं ओर है)
\( f = +20 \) cm
लेन्स के सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से,
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{20} + \frac{1}{12} = \frac{3+5}{60} = \frac{8}{60} \)
\( v = \frac{60}{8} = 7.5 \) cm
अतः प्रकाश पुंज लेन्स के पीछे (दाहिनी ओर) लेन्स से 7.5 cm दूरी पर अभिसरित होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 9.3 दो स्थितियाँ दिखाता है जहाँ एक अभिसारी प्रकाश पुंज बिंदु P पर मिलता है। (a) में, एक उत्तल लेंस को P से पहले रखा जाता है, जिससे पुंज लेंस के बाद एक नए बिंदु पर अभिसरित होता है। (b) में, एक अवतल लेंस को P से पहले रखा जाता है, जिससे पुंज लेंस के बाद एक और बिंदु पर अभिसरित होता है, लेकिन पहले की तुलना में दूर। (b) इस स्थिति में, \( f = -16 \) cm
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{-16} + \frac{1}{12} = \frac{-3+4}{48} = \frac{1}{48} \)
\( v = +48 \) cm
अतः प्रकाश पुंज लेन्स के दाहिनी ओर लेन्स से 48 cm दूरी पर अभिसरित होगा।
In simple words: When a converging light beam aims at point P and a lens is placed 12 cm before P, a 20 cm focal length convex lens will cause the beam to converge 7.5 cm behind the lens. A 16 cm focal length concave lens will make the beam converge 48 cm behind the lens.
🎯 Exam Tip: Remember that for a converging beam, the point of convergence (P) acts as a virtual object for any lens placed before it. Therefore, the object distance (u) for the lens will be positive.
Question 9. 3.0 cm ऊँची कोई बिम्ब 21 cm फोकस दूरी के अवतल लेन्स के सामने 14 cm दूरी पर रखी है। लेन्स द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब का वर्णन कीजिए। क्या होता है जब बिम्ब लेन्स से दूर हटती जाती है?
Answer: हल-दिया है, \( u = -14 \) cm, \( f = -21 \) cm, \( h = 3.0 \) cm
लेन्स के सूत्र से, \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{-21} + \frac{1}{(-14)} = -\frac{1}{21} - \frac{1}{14} = \frac{-2-3}{42} = \frac{-5}{42} \)
\( v = -\frac{42}{5} = -8.4 \) cm
अतः प्रतिबिम्ब \( -8.4 \) cm की दूरी पर बनेगा।
तथा लेन्स के लिए \( m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u} \) से,
\( h' = (\frac{v}{u}) h = (\frac{-8.4}{-14}) \times 3.0 = 0.6 \times 3.0 = 1.8 \) cm
1.8 cm लम्बा आभासी तथा सीधा होगा, जो लेन्स के बायीं ओर उससे 8.4 cm की दूरी पर बनेगा। जैसे-जैसे बिम्ब लेन्स से दूर हटती है, (\( u \to \infty \)) वैसे-वैसे प्रतिबिम्ब फोकस के समीप खिसकता जाता है (\( v \to f \))।
In simple words: For a 3.0 cm tall object placed 14 cm from a concave lens with a 21 cm focal length, a virtual, upright image 1.8 cm tall will form 8.4 cm on the same side as the object. As the object moves further away, the image moves closer to the focal point and diminishes in size.
🎯 Exam Tip: Remember that for concave lenses, the image is always virtual, upright, and diminished, formed on the same side as the object. Also, object distance (u) is always negative for real objects, and focal length (f) is negative for concave lenses.
Question 10. किसी 30 cm फोकस दूरी के उत्तल लेन्स के सम्पर्क में रखे 20 cm फोकस दूरी के अवतल लेन्स के संयोजन से बने संयुक्त लेन्स (निकाय) की फोकस दूरी क्या है? यह तन्त्र अभिसारी लेन्स है अथवा अपसारी? लेन्सों की मोटाई की उपेक्षा कीजिए ।
Answer: हल-दिया है, \( f_1 = +30 \) cm, \( f_2 = -20 \) cm
\( \therefore \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} = \frac{1}{30} + \frac{1}{-20} = \frac{2-3}{60} = -\frac{1}{60} \)
संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी \( F = -60 \) cm
यह लेन्स अपसारी है।
In simple words: When a convex lens of 30 cm focal length is combined with a concave lens of 20 cm focal length, the resulting combination has a focal length of -60 cm. This means the system behaves as a diverging lens.
🎯 Exam Tip: For lenses in contact, the reciprocal of the equivalent focal length (1/F) is the sum of the reciprocals of individual focal lengths (1/f1 + 1/f2). A negative F indicates a diverging system, while a positive F indicates a converging system.
Question 11. किसी संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में 2.0 cm फोकस दूरी का अभिदृश्यक लेन्स तथा 6.25 cm फोकस दूरी का नेत्रिका लेन्स एक-दूसरे से 15 cm दूरी पर लगे हैं। किसी बिम्ब को अभिदृश्यक से कितनी दूरी पर रखा जाए कि अन्तिम प्रतिबिम्ब
(a) स्पष्ट दृष्टि की अल्पतम दूरी (25 cm), तथा
(b) अनन्त पर बने? दोनों स्थितियों में सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी \( f_o = 2.0 \) सेमी
नेत्रिका लेन्स की फोकस दूरी \( f_e = 6.25 \) सेमी ।
दोनों लेन्सों के बीच की दूरी \( L = 15 \) सेमी
स्पष्ट दृष्टि की अल्पतम दूरी \( D = 25 \) सेमी
(a) नेत्रिका लेन्स के लिये \( v_e = -25 \) सेमी
अतः सूत्र \( \frac{1}{f_e} = \frac{1}{v_e} - \frac{1}{u_e} \) में \( v_e \) तथा \( f_e \) के मान रखने पर
\( \frac{1}{6.25} = \frac{1}{-25} - \frac{1}{u_e} \)
अथवा \( \frac{1}{u_e} = \frac{1}{-25} - \frac{1}{6.25} = \frac{-1-4}{25} = \frac{-5}{25} \)
\( u_e = -5 \) सेमी
अब \( L = v_o + |u_e| \)
\( 15 = v_o + 5 \)
\( \therefore v_o = 15 - 5 = 10 \) सेमी
अभिदृश्यक लेन्स के लिये,
सूत्र \( \frac{1}{f_o} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{u_o} \) में \( v_o \) तथा \( f_o \) के मान रखने पर,
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की किरण आरेख को दर्शाता है। इसमें दो उत्तल लेंस, एक अभिदृश्यक लेंस (objective lens) और एक नेत्रिका लेंस (eyepiece lens) होते हैं। अभिदृश्यक लेंस वस्तु का एक वास्तविक, उल्टा और बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है, जिसे नेत्रिका लेंस एक आभासी, सीधा और भी बड़ा अंतिम प्रतिबिम्ब बनाता है। \( \frac{1}{u_o} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{f_o} = \frac{1}{10} - \frac{1}{2.0} = \frac{1-5}{10} = \frac{-4}{10} \)
\( u_o = -\frac{10}{4} = -2.5 \) सेमी
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता
\( M = -\frac{v_o}{u_o} (1 + \frac{D}{f_e}) = -(\frac{10}{-2.5}) (1 + \frac{25}{6.25}) = 4 (1 + 4) = 4 \times 5 = 20 \)
(b) यदि अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त \( (v = \infty) \) पर बनता है, अतः सूत्र \( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \) से
नेत्रिका के लिए,
\( \frac{1}{6.25} = \frac{1}{\infty} - \frac{1}{u_e} \)
अथवा \( u_e = -6.25 \) सेमी
\( \therefore L = v_o + |u_e| \)
\( 15 = v_o + 6.25 \)
अथवा \( v_o = 15 - 6.25 = 8.75 \) सेमी
अभिदृश्यक लेन्स के लिये सूत्र \( \frac{1}{f_o} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{u_o} \) में \( v_o \) तथा \( f_o \) के मान रखने पर
\( \frac{1}{u_o} = \frac{1}{v_o} - \frac{1}{f_o} = \frac{1}{8.75} - \frac{1}{2.0} = \frac{1}{8.75} - \frac{1}{2} = \frac{2-8.75}{17.5} = \frac{-6.75}{17.5} = \frac{-27}{70} \)
\( u_o = -\frac{70}{27} = -2.59 \) सेमी
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता \( M = -\frac{v_o}{u_o} \times \frac{D}{f_e} \)
इसमें \( v_o, u_o, D \) तथा \( f_e \) के मान रखने पर
\( M = -\frac{8.75}{-2.59} \times \frac{25}{6.25} = 3.378 \times 4 = 13.51 \)
In simple words: For a compound microscope with given focal lengths and lens separation, when the final image is formed at the least distance of distinct vision (25 cm), the object must be placed 2.5 cm from the objective lens, and the magnification is 20. When the final image is formed at infinity, the object must be placed 2.59 cm from the objective, and the magnification is 13.51.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the two cases for image formation in compound microscopes: image at the least distance of distinct vision (D) and image at infinity. The formulas for \( u_o \) and magnification (M) differ for these cases, and using the correct one is essential.
Question 12. 25 cm के सामान्य निकट बिन्दु को कोई व्यक्ति ऐसे संयुक्त सूक्ष्मदर्शी जिसका अभिदृश्यक 8.0 mm फोकस दूरी तथा नेत्रिका 2.5 cm फोकस दूरी की है, का उपयोग करके अभिदृश्यक से 9.0 mm दूरी पर रखे बिम्ब को सुस्पष्ट फोकसित कर लेता है। दोनों लेन्सों के बीच पृथक्कन दूरी क्या है? सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता क्या है?
Answer: हल - यहाँ \( f_o = 8 \) मिमी, \( f_e = 2.5 \) सेमी \( = 25 \) मिमी, \( u_o = 9.0 \) मिमी
अभिदृश्यक के लिए \( \frac{1}{v_o} - \frac{1}{u_o} = \frac{1}{f_o} \) से
\( \frac{1}{v_o} = \frac{1}{f_o} + \frac{1}{u_o} = \frac{1}{8} + \frac{1}{(-9.0)} = \frac{1}{8} - \frac{1}{9} = \frac{9-8}{72} = \frac{1}{72} \)
\( \implies v_o = 72 \) मिमी
नेत्रिका के लिए जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की दूरी पर बन रहा हो, तो \( v_e = -D = -25 \) सेमी \( = -250 \) मिमी
\( \therefore \frac{1}{f_e} = \frac{1}{v_e} - \frac{1}{u_e} \) से,
\( \frac{1}{u_e} = \frac{1}{v_e} - \frac{1}{f_e} = \frac{1}{-250} - \frac{1}{25} = \frac{-1-10}{250} = \frac{-11}{250} \)
\( u_e = -\frac{250}{11} \approx -22.7 \) मिमी
दोनों लेन्सों के बीच पृथक्कन दूरी \( L = |v_o| + |u_e| = 72 \) मिमी \( + 22.7 \) मिमी \( = 94.7 \) मिमी \( = 9.47 \) सेमी
आवर्धन क्षमता \( M = -\frac{v_o}{u_o} (1 + \frac{D}{f_e}) = -(\frac{72}{-9}) (1 + \frac{25 \text{ सेमी}}{2.5 \text{ सेमी}}) = 8 (1 + 10) = 8 \times 11 = 88 \)
यहां पर \( f_e \) 2.5 सेमी है, तो \( D/f_e \) होगा \( 25/2.5 = 10 \).
इसलिए, \( M = -\frac{v_o}{u_o}(1+\frac{D}{f_e}) = -(\frac{72}{-9})(1+\frac{25}{2.5}) = 8(1+10) = 88 \)
In simple words: For a compound microscope with given objective and eyepiece focal lengths, an object placed 9.0 mm from the objective forms an image 72 mm away. For the final image to be at 25 cm (least distance of distinct vision), the separation between the lenses is 9.47 cm, and the microscope's magnifying power is 88.
🎯 Exam Tip: To calculate the separation between lenses, sum the absolute values of the objective's image distance and the eyepiece's object distance. For magnification, use the formula \( M = -\frac{v_o}{u_o} (1 + \frac{D}{f_e}) \), paying attention to signs for virtual images.
Question 13. किसी छोटी दूरबीन के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 144 cm तथा नेत्रिका की फोकस दूरी 6.0 cm है। दूरबीन की आवर्धन क्षमता कितनी है? अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के बीच पृथक्कन दूरी क्या है?
Answer: हल-दिया है, \( f_o = 144 \) सेमी, \( f_e = 6.0 \) सेमी
दूरबीन की आवर्धन क्षमता, \( M = -\frac{f_o}{f_e} = -\frac{144}{6.0} = -24 \)
ऋणात्मक चिह्न यह प्रकट करता है कि अन्तिम प्रतिबिम्ब उल्टा है।
अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के बीच दूरी, \( d = f_o + f_e = 144 + 6.0 = 150 \) सेमी
In simple words: A small telescope with an objective focal length of 144 cm and an eyepiece focal length of 6.0 cm has a magnifying power of -24, indicating an inverted final image. The separation between the objective and eyepiece lenses in normal adjustment is 150 cm.
🎯 Exam Tip: For a telescope in normal adjustment (final image at infinity), the magnifying power is \( M = -f_o/f_e \) and the length of the telescope is \( L = f_o + f_e \). Ensure consistent units (cm in this case).
Question 14. (a) किसी वेधशाला की विशाल दूरबीन के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 15m है। यदि 1.0 cm फोकस दूरी की नेत्रिका प्रयुक्त की गयी है तो दूरबीन का कोणीय आवर्धन क्या है?
(b) यदि इस दूरबीन का उपयोग चन्द्रमा का अवलोकन करने में किया जाए तो अभिदृश्यक लेन्स द्वारा निर्मित चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब का व्यास क्या है? चन्द्रमा का व्यास 3.48 x 10⁶ m तथा चन्द्रमा की कक्षा की त्रिज्या 3.8 x 10⁸ m है।
Answer: हल-
दिया है, दूरबीन के अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी \( f_o = 15 \) मीटर
नेत्रिका की फोकस दूरी \( f_e = 1.0 \) सेमी \( = 1.0 \times 10^{-2} \) मीटर
(a) कोणीय आवर्धन \( M = -\frac{f_o}{f_e} = -\frac{15}{1.0 \times 10^{-2}} = -1500 \)
(b) यदि अभिदृश्यक लेन्स द्वारा बने चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब का व्यास \( d \) हो, तो
प्रतिबिम्ब द्वारा बनाया गया कोण \( \theta = \frac{d}{f_o} = \frac{d}{15} \).....(1)
लेकिन चन्द्रमा के व्यास द्वारा दूरदर्शी पर बनाया गया कोण \( \theta = \frac{\text{चन्द्रमा का व्यास}}{\text{दूरदर्शी से चन्द्रमा की दूरी}} = \frac{\text{चन्द्रमा का व्यास}}{\text{चन्द्रमा की कक्षा की त्रिज्या}} = \frac{3.48 \times 10^6}{3.8 \times 10^8} \).....(2)
अतः समीकरण (1) व (2) से,
\( \frac{d}{15} = \frac{3.48 \times 10^6}{3.8 \times 10^8} \)
अथवा \( d = \frac{15 \times 3.48 \times 10^6}{3.8 \times 10^8} = \frac{52.2 \times 10^6}{3.8 \times 10^8} = 13.73 \times 10^{-2} \) मीटर \( = 13.73 \) सेमी
In simple words: For an observatory telescope with a 15m objective focal length and 1.0 cm eyepiece focal length, the angular magnification is -1500. When observing the Moon, whose diameter is 3.48 x 10⁶ m and orbital radius is 3.8 x 10⁸ m, the objective lens forms a Moon image with a diameter of 13.73 cm.
🎯 Exam Tip: Ensure consistent units (meters vs. centimeters) throughout the calculations. For angular magnification, \( M = -f_o/f_e \). For the apparent size of a distant object, use the small angle approximation \( \theta \approx \text{diameter/distance} \).
Question 15. दर्पण-सूत्र का उपयोग यह व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए कि
(a) किसी अवतल दर्पण के हैं तथा 2f के बीच रखे बिम्ब का वास्तविक प्रतिबिम्ब 2f से दूर बनता है।
(b) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आभासी प्रतिबिम्ब बनता है जो बिम्ब की स्थिति पर निर्भर नहीं करता।
(c) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आकार में छोटा प्रतिबिम्ब, दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच बनता
(d) अवतल दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच रखे बिम्ब का आभासी तथा बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है।
[नोट: यह अभ्यास आपकी बीजगणितीय विधि द्वारा उन प्रतिबिंबों के गुण व्युत्पन्न करने में सहायता करेगा जिन्हें हम किरण आरेखों द्वारा प्राप्त करते हैं ।]
Answer: हल- (a) दर्पण के सूत्र से, \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से,
\( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u} = \frac{u-f}{uf} \)
\( \implies v = \frac{uf}{u-f} \)
अवतल दर्पण के लिए \( f \) ऋणात्मक होता है जबकि \( u \) सभी दर्पणों के लिए ऋणात्मक है; अतः उक्त सूत्र से \( u \) व \( f \) को चिह्न सहित रखने पर,
\( v = \frac{(-u)(-f)}{(-u)-(-f)} = \frac{uf}{f-u} \)
दिया है, \( f < u < 2f \)
\( \implies f-u < 0 \) या \( u-f > 0 \)
\( \therefore v = \frac{uf}{u-f} \implies v = -\frac{uf}{u-f} \)
इससे स्पष्ट है कि \( v \) का मान ऋणात्मक है अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने बनता है; अतः वास्तविक है।
पुनः \( v = \frac{uf}{u-f} \) से, \( v = \frac{f}{1-\frac{f}{u}} \) (आंकिक मान, \( u \) से अंश व हर को भाग देने पर)
\( u < 2f \implies \frac{1}{u} > \frac{1}{2f} \implies \frac{f}{u} > \frac{1}{2} \)
या \( 1-\frac{f}{u} < 1-\frac{1}{2} = \frac{1}{2} \)
\( \implies \frac{1}{1-\frac{f}{u}} > 2 \)
दोनों ओर \( f \) से गुणा करने पर,
\( \frac{f}{1-\frac{f}{u}} > 2f \)
अर्थात् प्रतिबिम्ब \( 2f \) से दूर बनेगा।
(b) भाग (a) से,
\( v = \frac{uf}{u-f} \)
उत्तल दर्पण के लिए \( f \) धनात्मक होता है जबकि \( u \) प्रत्येक दर्पण के लिए ऋणात्मक होता है; अतः चिह्न सहित मान रखने पर,
\( v = \frac{(-u)f}{(-u)-f} = \frac{-uf}{-u-f} = \frac{uf}{u+f} \)
इससे स्पष्ट है कि \( v \) धनात्मक है अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे की ओर बनता है; अतः आभासी है।
इस प्रकार उत्तल दर्पण सदैव आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है, जो बिम्ब की स्थिति पर निर्भर नहीं करता।
(c) पुनः भाग (b) के परिणाम से,
\( v = \frac{uf}{u+f} \)
\( \therefore \) प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन \( m = \frac{v}{u} = \frac{f}{u+f} \)
\( m = \frac{f}{u+f} = \frac{1}{1+\frac{u}{f}} \)
स्पष्ट है कि \( u > 0 \implies 1+\frac{u}{f} > 1 \implies m < 1 \)
\( \therefore \) रेखीय आवर्धन 1 से कम है; अतः स्पष्ट है कि प्रतिबिम्ब का आकार सदैव बिम्ब के आकार से छोटा है।
पुनः \( v = \frac{uf}{u+f} = \frac{f}{1+\frac{f}{u}} \) (u से अंश व हर को भाग देने पर)
स्पष्ट है कि \( \frac{f}{u} > 0 \implies 1+\frac{f}{u} > 1 \implies v < f \)
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच बनता है।
(d) पुनः भाग (a) से,
\( v = \frac{uf}{u-f} \)
अवतल दर्पण के लिए चिह्न सहित मान रखने पर,
\( v = \frac{(-u)(-f)}{(-u)-(-f)} \implies v = \frac{uf}{f-u} \)
\( \therefore \) बिम्ब ध्रुव तथा फोकस के बीच स्थित है; अतः \( 0 < u < f \)
\( \implies f-u > 0 \)
\( \therefore v = \frac{uf}{f-u} \) धनात्मक है।
इसका अर्थ यह है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे तथा सीधा बनता है; अतः आभासी है।
प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन \( m = \frac{v}{u} \implies m = \frac{f}{f-u} \)
\( f-u < f \implies \frac{f}{f-u} > 1 \implies m > 1 \)
\( \therefore \) आवर्धन 1 से अधिक है, अर्थात् प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार से बड़ा है।
In simple words: This question uses the mirror formula to derive properties of images formed by concave and convex mirrors. It proves that a concave mirror forms a real image beyond 2f for objects between f and 2f, while a convex mirror always forms a virtual, upright, and diminished image between its pole and focus. For a concave mirror, an object between the pole and focus creates a virtual, upright, and magnified image.
🎯 Exam Tip: Master the mirror formula \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) and magnification formula \( m = -\frac{v}{u} \). Always use correct sign conventions: real objects and images in front of the mirror have negative u and v, while virtual images behind have positive v. Concave mirror focal length is negative, convex is positive.
Question 16. किसी मेज के ऊपरी पृष्ठ पर जड़ी एक छोटी पिन को 50 cm ऊँचाई से देखा जाता है। 15 cm मोटे आयताकार काँच के गुटके को मेज के पृष्ठ के समान्तर पिन व नेत्र के बीच रखकर उसी बिन्दु से देखने पर पिन नेत्र से कितनी दूर दिखाई देगी? काँच की अपवर्तनांक 1.5 है। क्या उत्तर गुटके की अवस्थिति पर निर्भर करता है?
Answer: हल-
काँच का अपवर्तनांक \( a^{n}_{g} = 1.5 \)
गुटके की वास्तविक मोटाई \( H = 15 \) सेमी
गुटके की आभासी मोटाई \( h = \frac{H}{a^{n}_{g}} = \frac{15 \text{ सेमी}}{1.5} = 10 \) सेमी
अतः पिन का विस्थापन \( x = H - h = 15 \text{ सेमी} - 10 \text{ सेमी} = 5 \) सेमी अर्थात् पिन 5 सेमी उठी प्रतीत होगी। उत्तर गुटके की अक्ष की स्थिति पर निर्भर नहीं करता।
In simple words: A pin initially viewed from 50 cm will appear 5 cm closer when a 15 cm thick glass slab (refractive index 1.5) is placed between the pin and the eye. This apparent shift is independent of the slab's position.
🎯 Exam Tip: Remember that apparent depth (h') is calculated as real depth (H) divided by the refractive index (n) of the medium: \( h' = H/n \). The shift is then \( H - h' \). This shift is independent of the lateral position of the slab.
Question 17. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(a) चित्र 9.5 में अपवर्तनांक 1.68 के तन्तु काँच से बनी किसी प्रकाश नलिका (लाइट पाइप) का अनुप्रस्थ परिच्छेद दर्शाया गया है। नलिका का बाह्य आवरण 1.44 अपवर्तनांक के 'पदार्थ का बना है। नलिका के अक्ष से आपतित किरणों के कोणों का परिसर, जिनके लिए चित्र में दर्शाए अनुसार नलिका के भीतर पूर्ण परावर्तन होते हैं, ज्ञात कीजिए ।
(b) यदि पाइप पर बाह्य आवरण न हो तो क्या उत्तर होगा?
Answer: हल - (a) दिया है, वायु के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक \( a^{n}_{g} = 1.68 \)
तथा वायु के सापेक्ष आवरण के पदार्थ का अपवर्तनांक \( a^{n}_{c} = 1.44 \)
अतः आवरण के पदार्थ के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक \( c^{n}_{g} = \frac{a^{n}_{g}}{a^{n}_{c}} = \frac{1.68}{1.44} = 1.167 \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 9.5 एक ऑप्टिकल फाइबर के क्रॉस-सेक्शन को दर्शाता है। इसमें एक आंतरिक कोर (काँच) और एक बाहरी आवरण (क्लैडिंग) होता है। प्रकाश किरणें कोर के भीतर आपतन कोण के अनुसार क्लैडिंग से पूर्ण आंतरिक परावर्तन दर्शाती हैं, जिससे प्रकाश फाइबर के माध्यम से यात्रा कर सके। यदि काँच-आवरण अन्तरापृष्ठ का क्रान्तिक कोण C हो, तो
\( \sin C = \frac{1}{c^{n}_{g}} = \frac{1}{1.167} = 0.8569 \)
\( C = \sin^{-1} (0.8569) = 58.97^\circ \)
जब \( i > C \) अर्थात् \( i < 58.97^\circ \), तब पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होगा।
अतः पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिये चित्र 9.5 से,
\( r + i' = 90^\circ \)
\( r = 90^\circ - i' = 90^\circ - 58.97^\circ = 31.03^\circ \)
सूत्र \( a^{n}_{g} = \frac{\sin i}{\sin r} \) से,
\( 1.68 = \frac{\sin i}{\sin 31.03^\circ} \)
\( \sin i = 1.68 \times \sin 31.03^\circ = 1.68 \times 0.5155 = 0.8660 \)
\( i = \sin^{-1} (0.8660) \approx 60^\circ \)
अतः \( 0 < i < 60^\circ \) परास में आपतित सभी किरणों का तन्तु में पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होगा।
(b) तन्तु पर आवरण की अनुपस्थिति में तन्तु के बाहर का माध्यम वायु होगा।
\( \sin C' = \frac{1}{a^{n}_{g}} = \frac{1}{1.68} = 0.5952 \)
\( C' = 36.5^\circ \)
\( r' = 90^\circ - C' = 90^\circ - 36.5^\circ = 53.5^\circ \)
अब \( a^{n}_{g} = \frac{\sin i}{\sin r'} \) से,
\( \sin i = a^{n}_{g} \times \sin r' = 1.68 \times \sin 53.5^\circ = 1.68 \times 0.8039 \approx 1.35 \)
चूँकि यह 1 से अधिक है, अतः ऐसी स्थिति में प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन संभव नहीं होगा, क्योंकि आपतन कोण (i) के लिए \( \sin i \) का मान 1 से अधिक नहीं हो सकता।
अतः अक्ष से 0° से 90° के परास में आपतित सभी किरणों का तन्तु में पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होगा।
In simple words: For an optical fiber with core refractive index 1.68 and cladding refractive index 1.44, total internal reflection occurs for incidence angles up to 60°. Without cladding, if the fiber were exposed to air, total internal reflection would not occur because the required angle of incidence would be too high.
🎯 Exam Tip: Total Internal Reflection (TIR) requires light to travel from a denser to a rarer medium, and the angle of incidence must exceed the critical angle. The critical angle is determined by the refractive indices of the two media at the interface. Always check if \( \sin i \) calculation exceeds 1, indicating TIR is not possible.
Question 18.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(a) आपने सीखा है कि समतल तथा उत्तल दर्पण सदैव आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं। क्या ये दर्पण किन्हीं परिस्थितियों में वास्तविक प्रतिबिम्ब बना सकते हैं? स्पष्ट कीजिए।
(b) हम सदैव कहते हैं कि आभासी प्रतिबिम्ब को परदे पर केन्द्रित नहीं किया जा सकता। यद्यपि जब हम किसी आभासी प्रतिबिम्ब को देखते हैं तो हम इसे स्वाभाविक रूप में अपनी आँख की स्क्रीन (अर्थात् रेटिना) पर लेते हैं। क्या इसमें कोई विरोधाभास है?
(c) किसी झील के तट पर खड़ा मछुआरा झील के भीतर किसी गोताखोर द्वारा तिरछा देखने पर अपनी वास्तविक लम्बाई की तुलना में कैसा प्रतीत होगा-छोटा अथवा लम्बा?
(d) क्या तिरछा देखने पर किसी जल के टैंक की आभासी गहराई परिवर्तित हो जाती है? यदि हाँ, तो आभासी गहराई घटती है अथवा बढ़ जाती है।
(e) सामान्य काँच की तुलना में हीरे का अपवर्तनांक काफी अधिक होता है? क्या हीरे को तराशने वालों के लिए इस तथ्य का कोई उपयोग होता है?
Answer:
(a) यह सही है कि समतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण अपने सामने स्थित बिम्ब का आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं। परन्तु ये दर्पण अपने पीछे स्थित किसी बिन्दु (आभासी बिम्ब) की ओर अभिसरित किरण पुंज को परावर्तित करके अपने सामने स्थित किसी बिन्दु पर अभिसरित कर सकते हैं अर्थात् आभासी बिम्ब का वास्तविक प्रतिबिम्ब बना सकते हैं (देखें चित्र)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र समतल और उत्तल दर्पणों द्वारा वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्बों के निर्माण को दर्शाता है। चित्र (a) में, एक उत्तल दर्पण के सामने रखी वस्तु का आभासी प्रतिबिम्ब बनता है, जबकि अभिसरित किरण पुंज के परावर्तन से वास्तविक प्रतिबिम्ब बन सकता है। चित्र (b) में, एक समतल दर्पण के पीछे किसी बिंदु से अभिसरित किरणें परावर्तन के बाद वास्तविक प्रतिबिम्ब बना सकती हैं, जैसा कि अवतल दर्पण के मामले में होता है।
(b) जब किसी दर्पण से परावर्तन अथवा लेन्स से अपवर्तन के पश्चात् किरणें अपसरित होती हैं तो प्रतिबिम्ब को आभासी कहा जाता है। इस प्रतिबिम्ब को परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि इन अपसारी किरणों के मार्ग में कोई अन्य दर्पण अथवा लेन्स रखकर इन्हें किसी बिन्दु पर अभिसरित किया जा सकता तो वहाँ वास्तविक प्रतिबिम्ब बनेगा जिसे परदे पर प्राप्त किया जा सकता है। नेत्र लेन्स वास्तव में यही कार्य करता है। यह आभासी प्रतिबिम्ब बनाने वाली अपसारी किरणों को रेटिना पर अभिसरित कर देता है, जहाँ वास्तविक प्रतिबिम्ब बन जाता है। अतः इसमें कोई विरोधाभास नहीं है।
(c) चूंकि इस दशा में अपवर्तन वायु (विरल माध्यम) से पानी (सघन माध्यम) में होता है। अतः झील में डूबे हुए गोताखोर को मछुआरे की लम्बाई अधिक प्रतीत होगी ।
(d) हाँ, परिवर्तित हो जाती है। आभासी गहराई घट जाती है।
(e) वायु के सापेक्ष हीरे का अपवर्तनांक 2.42 (काफी अधिक) है तथा क्रान्तिक कोण 24° (बहुत कम) है। हीरा तराशने में दक्ष कारीगर इस तथ्य का उपयोग करते हुए हीरे को इस प्रकार तराशता है, कि एक बार हीरे में प्रवेश करने वाली प्रकाश किरण हीरे के विभिन्न फलकों पर बार-बार परावर्तित होने के बाद ही किसी फलक से बाहर निकल पाए। इसके लिए हीरे की आन्तरिक सतह पर आपतन कोण 24° से अधिक होना चाहिए। इससे हीरा अत्यधिक चमकीला दिखाई पड़ता है।In simple words: आभासी प्रतिबिम्ब को वास्तविक बनाया जा सकता है यदि अपसारी किरणों को किसी अन्य ऑप्टिकल उपकरण द्वारा फिर से अभिसरित किया जाए। आँख की रेटिना पर यही प्रक्रिया होती है। झील में मछुआरे की लम्बाई अधिक प्रतीत होगी और आभासी गहराई कम हो जाएगी। हीरे का उच्च अपवर्तनांक उसे अधिक चमकीला बनाता है क्योंकि प्रकाश आंतरिक रूप से बार-बार परावर्तित होता है।
🎯 Exam Tip: आभासी प्रतिबिम्ब, वास्तविक प्रतिबिम्ब, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और उनके अनुप्रयोगों से संबंधित सैद्धांतिक प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये कॉन्सेप्ट-आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 19. किसी कमरे की एक दीवार पर लगे विद्युत बल्ब का किसी बड़े आकार के उत्तल लेन्स द्वारा3 m दूरी पर स्थित सामने की दीवार पर प्रतिबिम्ब प्राप्त करना है। इसके लिए उत्तल लेन्स की अधिकतम फोकस दूरी क्या होनी चाहिए?
Answer:हल-
माना किसी उत्तल लेन्स की फोकस दूरी \(f\) है तथा यह बल्ब का प्रतिबिम्ब दूसरी दीवार पर बनाता है।
माना बल्ब की लेन्स से दूरी \(u\) (आंकिक मान) तथा दूसरी दीवार की लेन्स से दूरी \(v\) है, तब
\(u + v = 3 \implies u = 3-v\)
लेन्स के सूत्र में चिह्न सहित मान रखने पर,
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{v} + \frac{1}{(3-v)} = \frac{1}{f}\)
या \(\frac{3-v+v}{v(3-v)} = \frac{1}{f}\)
या \(3f = v(3-v)\)
\( \implies v^2 - 3v + 3f = 0\)
उक्त समीकरण \(v\) के वास्तविक मान देगा यदि
\(B^2 \ge 4AC\)
या \((-3)^2 \ge 4 \times 3f\)
या \(9 \ge 12f\)
\( \implies f \le \frac{9}{12} \implies f \le \frac{3}{4}\)
.. लेन्स की अधिकतम फोकस दूरी \(f_{max}\) = \(\frac{3}{4}\) m = 75 cmIn simple words: उत्तल लेंस का उपयोग करके एक बल्ब का प्रतिबिम्ब एक दीवार पर बनाने के लिए, बल्ब और दीवार के बीच की दूरी 3m है। लेंस के सूत्र और द्विघात समीकरण के वास्तविक हल की शर्त का उपयोग करके, लेंस की अधिकतम फोकस दूरी 75 cm आती है।
🎯 Exam Tip: लेंस सूत्र और वास्तविक प्रतिबिम्ब बनने की शर्तों पर आधारित प्रश्नों में चिन्ह परिपाटी का सही उपयोग महत्वपूर्ण है। अधिकतम या न्यूनतम मान ज्ञात करने के लिए गणितीय शर्तों को याद रखें।
Question 20. किसी परदे को बिम्ब से 90 cm दूर रखा गया है। परदे पर किसी उत्तल लेन्स द्वारा उसे एक-दूसरे से 20 cm दूर स्थितियों पर रखकर, दो प्रतिबिम्ब बनाए जाते हैं। लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer:हल-
माना बिम्ब की लेन्स से दूरी \(u\) (आंकिक मान) है तथा प्रतिबिम्ब (परदे) की लेन्स से दूरी \(v\) है।
\(u + v = 90 \implies v = 90 – u\)
लेन्स के सूत्र में चिह्न सहित मान रखने पर,
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{(90-u)} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
या \(\frac{u+90-u}{u(90-u)} = \frac{1}{f}\)
\( \implies 90f = (90 - u)u\)
या \(u^2 - 90u + 90f = 0\) ...(1)
चूँकि लेन्स दो स्थितियों में वस्तु का प्रतिबिम्ब परदे पर बनाता है तथा दो स्थितियों के बीच की दूरी 20 cm है; अतः समीकरण (1) में \(u\) में दो मूल (माना \(u_1\) व \(u_2\)) होंगे जिनका अन्तर 20 cm होगा।
अर्थात् \((u_1 - u_2)^2 = (20)^2 = 400\)
समीकरण (1) से, \(u_1 + u_2 = 90\)
\((u_1 - u_2)^2 = (u_1 + u_2)^2 - 4u_1u_2\)
\( \implies 400 = (90)^2 - 4 \times 90f\)
\( \implies 360f = 8100 - 400 = 7700\)
.. फोकस दूरी \(f = \frac{7700}{360}\) = 21.38 \(\approx\) 21.4 cm
अन्य विधि- विस्थापन विधि के सूत्र से,
\(f = \frac{a^2-d^2}{4a}\)
यहाँ \(a\) = बिम्ब तथा प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी = 90 cm
\(d\) = लेन्स की दो स्थितियों के बीच की दूरी = 20 cm
.. फोकस दूरी \(f = \frac{(90)^2-(20)^2}{4 \times 90}\) = \(\frac{8100-400}{360}\) = \(\frac{7700}{360}\) = 21.4 cmIn simple words: जब एक लेंस द्वारा वस्तु का प्रतिबिम्ब पर्दे पर दो अलग-अलग स्थितियों में बनता है, तो विस्थापन विधि का उपयोग करके लेंस की फोकस दूरी ज्ञात की जा सकती है। वस्तु और पर्दे के बीच की दूरी (a) और लेंस की दो स्थितियों के बीच की दूरी (d) का उपयोग करके सूत्र \(f = \frac{a^2-d^2}{4a}\) से फोकस दूरी 21.4 cm प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन विधि लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करने का एक महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक तरीका है। इस विधि से संबंधित सूत्रों और उनके अनुप्रयोगों को ध्यान से समझें।
Question 21.
(a) प्रश्न 10 के दो लेन्सों के संयोजन की प्रभावी फोकस दरी उस स्थिति में ज्ञात कीजिए जब उनके मुख्य अक्ष संपाती हैं तथा ये एक-दूसरे से 8 cm दूरी पर रखे हैं। क्या उत्तर आपतित समान्तर प्रकाश पुंज की दिशा पर निर्भर करेगा? क्या इस तन्त्र के लिए प्रभावी फोकस दूरी किसी भी रूप में उपयोगी है ?
(b) उपर्युक्त व्यवस्था (a) में 1.5 cm ऊँचा कोई बिम्ब उत्तल लेन्स की ओर रखा है। बिम्ब की उत्तल लेन्स से दूरी 40 cm है। दो लेन्सों के तन्त्र द्वारा उत्पन्न आवर्धन तथा प्रतिबिम्ब का आकार ज्ञात कीजिए।
Answer:हल-
(a) लेन्सों की फोकस दूरियाँ
\(f_1 = +30\) cm, \(f_2 = -20\) cm
कल्पना करें कि एक समान्तर किरण पुंज बाईं ओर से उत्तल लेन्स पर आपतित होता है, तब उत्तल लेन्स हेतु
\(u = -\infty\)
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1}\)
\( \implies \frac{1}{v} - \frac{1}{-\infty} = \frac{1}{30}\)
\( \implies v = f_1 = +30\) cm
अर्थात् उत्तल लेन्स इन किरणों को 30 cm की दूरी पर बिन्दु \(I_1\) पर मिलाता है।
बिन्दु \(I_1\) अवतल लेन्स के लिए आभासी बिम्ब है।
अवतल लेन्स हेतु, \(u = (30-8) = +22\) cm
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{-20} + \frac{1}{22} = \frac{-11+10}{220} = \frac{-1}{220}\)
\( \implies v = -220\) cm
अर्थात् अन्तिम प्रतिबिम्ब, अवतल लेन्स के बाईं ओर इससे 220 cm दूर बनता है।
इस प्रतिबिम्ब की लेन्सों के केन्द्र से दूरी \(220 - \frac{8}{2}\) = 216 cm है।
अर्थात् अवतल लेन्स की ओर से देखने पर यह किरण पुंज लेन्सों के केन्द्र से 216 cm बाईं ओर स्थित बिन्दु से अपसरित प्रतीत होता है।
इस प्रकार यदि इस युग्म की फोकस दूरी अर्थपूर्ण है तो यह फोकस दूरी - 216 cm होनी चाहिए।
दूसरी दशा में कल्पना कीजिए कि समान्तर किरण पुंज दाईं ओर से चलता हुआ पहले अवतल लेन्स पर आपतित होता है।
अवतल लेन्स हेतु \(u = -\infty\)
.. \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
\( \implies \frac{1}{v} - \frac{1}{-\infty} = \frac{1}{-20}\)
\( \implies v = -20\) cm
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक उत्तल लेन्स और एक अवतल लेन्स के संयोजन को दर्शाता है, जो 8 cm की दूरी पर रखे गए हैं। उत्तल लेन्स पर बाईं ओर से आने वाली समानांतर प्रकाश किरणें 30 cm की दूरी पर बिंदु I1 पर अभिसरित होती हैं, जो अवतल लेन्स के लिए आभासी वस्तु का काम करती है। यह संयोजन प्रकाश के अपवर्तन के बाद अंतिम प्रतिबिम्ब बनाता है।
अर्थात् अवतल लेन्स से अपवर्तन के कारण ये किरणें उसके पीछे 20 cm दूरी पर स्थित बिन्दु से आती प्रतीत होती हैं। यह बिन्दु उत्तल लेन्स हेतु आभासी बिम्ब का कार्य करेगा।
उत्तल लेन्स हेतु \(u = -(20+8) = -28\)
.. \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
\( \implies \frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{30} + \frac{1}{-28} = \frac{14-15}{420} = \frac{-1}{420}\)
\( \implies v = -420\) cm
अर्थात् उत्तल लेन्स की ओर से देखने पर किरणें इससे पीछे की ओर 420 cm दूरी पर स्थित बिन्दु से आती प्रतीत होती हैं।
इस बिन्दु की निकाय के केन्द्र से दूरी \(420 - \frac{8}{2}\) = 416 cm है।
निकाय की फोकस दूरी - 416 cm होनी चाहिए।
इस प्रकार हम देखते हैं कि इस निकाय की फोकस दूरी आपतित किरण पुंज की दिशा पर निर्भर करती हैं; अतः यह फोकस दूरी किसी भी रूप में उपयोगी नहीं है।
(b)
उत्तल लेन्स हेतु \(u_1 = -40\) cm, \(f_1 = +30\) cm, \(h = 1.5\) cm
.. \(\frac{1}{v_1} - \frac{1}{u_1} = \frac{1}{f_1}\)
\( \implies \frac{1}{v_1} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{u_1} = \frac{1}{30} + \frac{1}{-40} = \frac{4-3}{120} = \frac{1}{120}\)
\( \implies v_1 = +120\) cm
.. अवतल लेन्स हेतु \(u_2 = +(v_1-8) = +112\) cm
जबकि \(f_2 = -20\) cm
\(\frac{1}{v_2} - \frac{1}{u_2} = \frac{1}{f_2}\)
\( \implies \frac{1}{v_2} = \frac{1}{f_2} + \frac{1}{u_2} = \frac{1}{-20} + \frac{1}{112} = \frac{-28+5}{560} = \frac{-23}{560}\)
\( \implies v_2 = -\frac{560}{23}\) cm
.. तन्त्र द्वारा उत्पन्न आवर्धन
\(m = m_1 \times m_2 = (\frac{v_1}{u_1}) \times (\frac{v_2}{u_2}) = (\frac{+120}{-40}) \times (\frac{-560/23}{+112})\)
\( \implies m = \frac{15}{23} = 0.652\)
.. \(\frac{h'}{h} = m\)
\( \implies h' = h \times m = 1.5 \times 0.652 = 0.98\) cm
अतः प्रतिबिम्ब का आकार = 0.98 cmIn simple words: दो लेंसों के संयोजन की प्रभावी फोकस दूरी उनकी सापेक्ष स्थिति और प्रकाश किरण के प्रवेश की दिशा पर निर्भर करती है। यदि एक बिम्ब को ऐसे संयोजन के सामने रखा जाता है, तो लेंस सूत्रों का उपयोग करके अंतिम प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति और आकार का निर्धारण किया जा सकता है, जिसमें प्रत्येक लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब को अगले लेंस के लिए वस्तु के रूप में माना जाता है।
🎯 Exam Tip: लेंस संयोजन वाले प्रश्नों में प्रत्येक लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति को अगले लेंस के लिए वस्तु की स्थिति के रूप में मानने का अभ्यास करें। चिन्ह परिपाटी और आवर्धन सूत्र का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।
Question 22. 60° अपवर्तन कोण के प्रिज्म के फलक पर किसी प्रकाशकिरण को किस कोण पर आपतित कराया जाए कि इसका दूसरे फलक से केवल पूर्ण आन्तरिक परावर्तन ही हो? प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक 1.524 है।
Answer:हल-A = 60°, \(a^{n_g} = 1.524\)
चित्र से, \(90^\circ - r + 90^\circ - \theta + 60^\circ = 180^\circ\) (\(\triangle\)ABC में)
\(r = 60^\circ - \theta\)
यदि \(\theta = i_c\) हो तो \(r = 60^\circ - i_c\)
जबकि \(\sin i_c = \frac{1}{a^{n_g}} = \frac{1}{1.524} = 0.656\)
\( \implies i_c = \sin^{-1} (0.656) = 41^\circ\)
अतः \(r = 60^\circ - 41^\circ = 19^\circ\)
अतः बिन्दु B पर अपवर्तन हेतु \(\frac{\sin i}{\sin r} = a^{n_g}\)
या \(\sin i = a^{n_g} \times \sin r = 1.524 \times \sin 19^\circ = 0.5 = \frac{1}{2} = \sin 30^\circ\)
अतः \(i = 30^\circ\)
दूसरे फलक से पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए आवश्यक है कि किरण इस फलक पर क्रान्तिक कोण \(i_c\) से बड़े कोण पर गिरे।
\(r = 60^\circ - \theta\)
तथा \(\theta = i_c\) के लिए \(r = 19^\circ\), \(i = 30^\circ\)
\(\delta > i_c\) के लिए \(r < 19^\circ\)
\( \implies i < 30^\circ\)
अतः दूसरे फलक से पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हेतु आपतन कोण \(i \le 30^\circ\)।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रिज्म से प्रकाश के अपवर्तन और पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की प्रक्रिया को दर्शाता है। प्रकाश किरण वायु से प्रिज्म में बिंदु B पर प्रवेश करती है, अभिलंब की ओर मुड़ती है, और फिर प्रिज्म के दूसरे फलक से बाहर निकलती है या पूर्ण आंतरिक रूप से परावर्तित होती है, यह आपतन कोण और क्रांतिक कोण पर निर्भर करता है।In simple words: एक प्रिज्म में पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए, प्रकाश को प्रिज्म के अंदर क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर आपतित होना चाहिए। स्नेल के नियम का उपयोग करके, आपतन कोण को इस तरह समायोजित किया जाता है कि दूसरे फलक पर प्रकाश क्रांतिक कोण से बड़े कोण पर आपतित हो, जिससे पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो सके।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के लिए क्रांतिक कोण और पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तों को याद रखें। स्नेल के नियम का उपयोग करके गणना करते समय, कोणों और अपवर्तनांकों के बीच संबंधों पर ध्यान दें।
Question 23.आपको विविध कोणों के क्राउन काँच व फ्लिंट काँच के प्रिज्म दिए गए हैं। प्रिज्मों का कोई ऐसा संयोजन सुझाइए जो
(a) श्वेत प्रकाश के संकीर्ण पुंज को बिना अधिक परिक्षेपित किए विचलित कर दे।
(b) श्वेत प्रकाश के संकीर्ण पुंज को अधिक विचलित किए बिना परिक्षेपित (तथा विस्थापित)। कर दे।
Answer:उत्तर- हम जानते हैं कि फ्लिण्ट काँच, क्राउन काँच की तुलना में अधिक विक्षेपण उत्पन्न करता है।
(a) बिना विक्षेपण के विचलन उत्पन्न करने हेतु क्राउन काँच का एक प्रिज्म लीजिए तथा एक फ्लिण्टे काँच का प्रिज्म लीजिए जिसका अपवर्तक कोण अपेक्षाकृत कम हो। अब इन्हें एक-दूसरे के सापेक्ष उल्टा रखते हुए सम्पर्क में रखिए। इस प्रकार बना संयोजन श्वेत प्रकाश को बिना अधिक परिक्षेपित किए विचलित कर देगा।
(b) पुराने संयोजन में लिए गए फ्लिण्ट काँच के प्रिज्म के अपवर्तक कोण में वृद्धि कीजिए (परन्तु अभी भी यह कोण दूसरे प्रिज्म की तुलना में कम ही रहेगा)। यह व्यवस्था पुंज को बिना अधिक विचलित किए परिक्षेपण उत्पन्न करेगी।In simple words: प्रिज्मों के संयोजन का उपयोग करके प्रकाश के विचलन और परिक्षेपण को नियंत्रित किया जा सकता है। बिना परिक्षेपण के विचलन के लिए, क्राउन और फ्लिंट प्रिज्मों को विपरीत दिशा में जोड़ें। परिक्षेपण के साथ विचलन के लिए, फ्लिंट प्रिज्म के अपवर्तक कोण को बढ़ाएँ।
🎯 Exam Tip: प्रिज्मों के संयोजन द्वारा वर्ण-विक्षेपण और विचलन को कैसे नियंत्रित किया जाता है, इसे समझें। क्राउन और फ्लिंट काँच के गुणों और उनके अनुप्रयोगों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 24. सामान्य नेत्र के लिए दूर बिन्दु अनन्त पर तथा स्पष्ट दर्शन का निकट बिन्दु नेत्र के सामने लगभग 25 cm पर होता है। नेत्र का स्वच्छ मण्डल (कॉर्निया) लगभग 40 डायोप्टर की अभिसरण क्षमता प्रदान करता है तथा स्वच्छ मण्डल के पीछे नेत्र लेन्स की अल्पतम अभिसरण क्षमता लगभग 20 डायोप्टर होती है। इस स्थूल आँकड़े से सामान्य नेत्र के परास (अर्थात नेत्र लेन्स की अभिसरण क्षमता का परिसर) का अनुमान लगाइए ।
Answer:हल-
दिया है, कॉर्निया की अभिसरण क्षमता = +40 D
नेत्र लेन्स की अभिसरण क्षमता = +20 D
अतः कॉर्निया तथा नेत्र लेन्स की कुल अभिसरण क्षमता
\(P = (40 + 20)\) D = 60 D
अनन्त पर स्थित वस्तुओं के लिए नेत्र न्यूनतम अभिसरण क्षमता का प्रयोग करता है।
अतः उपर्युक्त क्षमता न्यूनतम अभिसरण क्षमता होगी। इसलिए नेत्र लेन्स की अधिकतम फोकस दूरी
श्रांत अवस्था में
\(f = \frac{1}{P} = \frac{1}{60}\) मीटर = \(\frac{5}{3}\) सेमी
निकट बिन्दु पर स्थित वस्तु को फोकस करने के लिए \(u = -25\) सेमी, \(v = 5/3\) सेमी
.. \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{f} = \frac{1}{5/3} - \frac{1}{-25} = \frac{3}{5} + \frac{1}{25} = \frac{15+1}{25} = \frac{16}{25}\)
\( \implies f = \frac{25}{16}\) सेमी
.. इसकी संगत अभिसारी क्षमता \(P = \frac{100}{f} = \frac{100}{(25/16)}\) = + 64 D
.. नेत्र लेन्स की क्षमता = 64 D - 40 D = 24 D
अतः नेत्र लेन्स का अनुमानित परास = 20 D से 24 DIn simple words: सामान्य नेत्र के लिए, कॉर्निया और नेत्र लेंस मिलकर कुल अभिसरण क्षमता प्रदान करते हैं। आँख की न्यूनतम और अधिकतम समंजन क्षमता का निर्धारण वस्तु को अनंत और निकट बिंदु (25 cm) पर रखकर किया जाता है, जिससे नेत्र लेंस की फोकस दूरी और क्षमता का परिसर ज्ञात होता है।
🎯 Exam Tip: नेत्र के समंजन क्षमता, कॉर्निया और नेत्र लेंस की क्षमताओं का विश्लेषण करते समय लेंस सूत्र और क्षमता के सूत्रों का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। दूर बिंदु और निकट बिंदु की अवधारणाओं को याद रखें।
Question 25. क्या निकट दृष्टिदोष अथवा दीर्घ दृष्टिदोष आवश्यक रूप से यह ध्वनित होता है कि नेत्र ने अपनी समंजन क्षमता आंशिक रूप से खो दी है? यदि नहीं, तो इन दृष्टिदोषों का क्या कारण हो सकता है?
Answer:हल- यह आवश्यक नहीं है कि निकट दृष्टिदोष अथवा दूर दृष्टिदोष केवल नेत्र के आंशिक रूप से अपनी समंजन क्षमता खो देने के कारण ही उत्पन्न होता है। यह नेत्र गोलक के सामान्य आकार से बड़ा अथवा छोटा होने के कारण भी उत्पन्न हो सकता है।In simple words: निकट और दूर दृष्टिदोष हमेशा आँख की समंजन क्षमता खोने के कारण नहीं होते। ये दोष नेत्र गोलक के आकार (बड़ा या छोटा होने) में बदलाव के कारण भी हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: दृष्टिदोषों के कारणों और उनके सुधार के तरीकों को अच्छी तरह समझें। नेत्रगोलक के आकार और लेंस की वक्रता में परिवर्तन जैसे कारकों पर ध्यान दें।
Question 26. निकट दृष्टिदोष का कोई व्यक्ति दूर दृष्टि के लिए -1.0 D क्षमता का चश्मा उपयोग कर रहा है। अधिक आयु होने पर उसे पुस्तक पढ़ने के लिए अलग से +2.0 D क्षमता के चश्मे की आवश्यकता होती है। स्पष्ट कीजिए ऐसा क्यों हुआ?
Answer:हल-
– 1.0 D क्षमता के संगत फोकस दूरी
\(f = \frac{1}{-1.0}\) मीटर = - 1.0 मीटर
अतः प्रारम्भ में नेत्र की स्वस्थ अवस्था में व्यक्ति 1.00 मीटर दूरी तक की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है।
अधिक आयु होने पर नेत्र की समंजन क्षमता कम हो जाने के कारण नेत्र लेन्स का निकट बिन्दु और दूर विस्थापित हो जाता है। अतः व्यक्ति में जरा दृष्टि दोष है। इस दशा में प्रयुक्त उत्तल लेन्स की क्षमता
P = +2D
अतः फोकस दूरी \(f = 1/P = (1/2)\) मीटर = 50 सेमी, \(u = -25\) सेमी
.. \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} = \frac{1}{50} + \frac{1}{-25} = \frac{1-2}{50} = \frac{-1}{50}\)
\( \implies v = -50\) सेमी
चूँकि निकट बिन्दु 25 सेमी से 50 सेमी पर विस्थापित हो गया है, अतः जरी दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति 50 सेमी से 100 सेमी तक के बीच की वस्तु देख सकता है।In simple words: व्यक्ति को पहले दूरदृष्टि के लिए अवतल लेंस की आवश्यकता थी। बढ़ती उम्र के साथ, उनकी समंजन क्षमता कम हो गई, जिसके परिणामस्वरूप जरा दृष्टि दोष हुआ और उन्हें निकट की वस्तुओं को देखने के लिए उत्तल लेंस की आवश्यकता पड़ी।
🎯 Exam Tip: जरा दृष्टि दोष और निकट/दूर दृष्टि दोष के बीच के अंतर को समझें। उम्र बढ़ने के साथ नेत्र लेंस की समंजन क्षमता में परिवर्तन और इसके सुधार के लिए आवश्यक लेंसों पर ध्यान दें।
Question 27. कोई व्यक्ति ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज धारियों की कमीज पहने किसी दूसरे व्यक्ति को देखता है। वह क्षैतिज धारियों की तुलना में ऊर्ध्वाधर धारियों को अधिक स्पष्ट देख पाता है। ऐसा किस दृष्टिदोष के कारण होता है? इस दृष्टिदोष का संशोधन कैसे किया जाता है?
Answer:हल- यह घटना अबिन्दुकता नामक दृष्टिदोष के कारण होती है। सामान्य नेत्र पूर्णतः गोलीय होता है। तथा इसके विभिन्न तलों की वक्रता सर्वत्र समान होती है। परन्तु अबिन्दुकता दोष में कॉर्निया पूर्णतः गोलीय नहीं रह जाता तथा इसके विभिन्न तलों की वक्रताएँ समान नहीं रह पातीं। प्रश्नानुसार व्यक्ति ऊध्वाधर धारियों को स्पष्ट देख पाता है परन्तु क्षैतिज धारियों को नहीं। इससे स्पष्ट है कि नेत्र में ऊर्ध्वाधर तल में पर्याप्त वक्रता है जिसके कारण ऊर्ध्वाधर रेखाएँ दृष्टि पटल पर स्पष्ट फोकस हो रही हैं। परन्तु क्षैतिज तल की वक्रता पर्याप्त नहीं है। इस दोष को सिलिण्डरी लेन्स की सहायता से दूर किया जा सकता है।In simple words: अबिन्दुकता एक दृष्टिदोष है जहाँ कॉर्निया की वक्रता विभिन्न दिशाओं में असमान होती है, जिससे कुछ दिशाओं में वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं। इसका सुधार बेलनाकार लेंसों का उपयोग करके किया जाता है, जो विशिष्ट दिशाओं में फोकस को सही करते हैं।
🎯 Exam Tip: अबिन्दुकता के कारणों (कॉर्निया की असमान वक्रता) और उसके सुधार (बेलनाकार लेंस) को समझें। विभिन्न दृष्टिदोषों के लिए लेंसों के प्रकारों को याद रखें।
Question 28.कोई सामान्य निकट बिन्दु (25 cm) का व्यक्ति छोटे अक्षरों में छपी वस्तु को 5 cm फोकस दूरी के पतले उत्तल लेन्स के आवर्धक लेन्स का उपयोग करके पढ़ता है।
(a) वह निकटतम तथा अधिकतम दूरियाँ ज्ञात कीजिए जहाँ वह उस पुस्तक को आवर्धक लेन्स द्वारा पढ़ सकता है।
(b) उपर्युक्त सरल सूक्ष्मदर्शी के उपयोग द्वारा संभावित अधिकतम तथा न्यूनतम कोणीय आवर्धन (आवर्धन क्षमता) क्या है?
Answer:हल-
(a) वस्तु को निकटतम दूरी से देखने के लिए वस्तु का प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी अर्थात् निकट बिन्दु पर बनना चाहिए। अतः \(v = -25\) सेमी
यहाँ \(f = 5\) सेमी
.. सूत्र \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\)
\( \implies \frac{1}{u_{min}} = \frac{1}{v} - \frac{1}{f} = \frac{1}{-25} - \frac{1}{5} = \frac{-1-5}{25} = \frac{-6}{25}\)
.. \(u_{min} = -\frac{25}{6}\) सेमी \(= -4.2\) सेमी
अधिकतम दूरी के लिए \(v = \infty\)
अतः पुनः लेन्स सूत्र से, \(\frac{1}{u_{max}} = \frac{1}{v} - \frac{1}{f} = \frac{1}{\infty} - \frac{1}{5} = -\frac{1}{5}\)
\( \implies u_{max} = -5\) सेमी
(b) कोंणीय आवर्धन \(M = \frac{D}{|u|}\)
.. \(M_{max} = \frac{D}{|u_{min}|} = \frac{25}{(25/6)} = 6\)
तथा \(M_{min} = \frac{D}{|u_{max}|} = \frac{25}{5} = 5\)In simple words: एक आवर्धक लेंस का उपयोग करते समय, पुस्तक को लेंस के निकटतम बिंदु पर तब रखा जाता है जब प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, और अधिकतम दूरी पर तब रखा जाता है जब प्रतिबिंब अनंत पर बनता है। इन स्थितियों में लेंस का कोणीय आवर्धन \(M = \frac{D}{|u|}\) सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सरल सूक्ष्मदर्शी (आवर्धक लेंस) के लिए वस्तु की स्थिति (निकटतम और अधिकतम) और उसके कोणीय आवर्धन के सूत्रों को याद रखें। \(D\) (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी) का मान 25 cm होता है।
Question 36. किसी कैसेग्रेन दूरबीन में चित्र 9.9 में दर्शाए अनुसार दो दर्पणों का प्रयोग किया। द्वतीयक गया है। इस दूरबीन में दोनों दर्पण एक-दूसरे से 20 mm दूर रखे गए हैं। यदि बड़े दर्पण की वक्रता त्रिज्या 220 mm हो तथा छोटे दर्पण की वक्रता त्रिज्या 140 mm हो तो अनन्त पर रखे चित्र 9.9 किसी बिम्ब का अन्तिम प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
Answer: हल-दिया है, बड़े दर्पण की वक्रता त्रिज्या \(R_1 = -22\) सेमी
छोटे दर्पण की वक्रता त्रिज्या \(R_2 = 14\) सेमी
अतः बड़े दर्पण (अभिदृश्यक) की फोकस दूरी \(f_1 = \frac{R_1}{2} = - \frac{22}{2} = -11\) सेमी
तथा छोटे दर्पण की फोकस दूरी \(f_2 = \frac{R_2}{2} = \frac{14}{2} = 7\) सेमी
दर्पणों के बीच की दूरी \(d = 20\) मिमी \( = 2\) सेमी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक कैसेग्रेन दूरबीन की संरचना को दर्शाता है जिसमें दो दर्पणों (एक बड़ा अभिदृश्यक और एक छोटा द्वितीयक) और एक नेत्रिका का उपयोग किया गया है। प्रकाश की किरणें अभिदृश्यक दर्पण से टकराकर परावर्तित होती हैं, फिर द्वितीयक दर्पण से, और अंत में नेत्रिका से निकलती हैं, जिससे अंतिम प्रतिबिम्ब बनता है।
चूँकि वस्तु अनन्त पर है, अतः \(u = \infty\)
जैसा कि रेखाचित्र में प्रदर्शित है, वस्तु का अन्तिम प्रतिबिम्ब अभिदृश्यक दर्पण के पीछे बनता है जिसे नेत्रिका में से देखते हैं।
अनन्त पर स्थित वस्तु से आती किरणें अभिदृश्यक के मुख्य फोकस पर मिलने को होती हैं, परन्तु इससे पहले ही कम फोकस दूरी का अवतल दर्पण बीच में आ जाता है।
अभिदृश्यक के लिए \(-u = \infty, f = f_1 = 11\) सेमी \(v = ?\)
गोलीय दर्पण के सूत्र \(\frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\) से,
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{11} - \frac{1}{\infty} = \frac{1}{11}\)
अथवा
\(v = -11\) सेमी
= अभिदृश्यक से दूरी
अतः उत्तल दर्पण से दूरी \(x = - (v + d) = - (-11 + 2) = +9\) सेमी
यह उत्तल दर्पण के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है।
\(f' = f_2 = 7\) सेमी
\(u' = 9\) सेमी
पुनः गोलीय दर्पण के सूत्र \(\frac{1}{v'} + \frac{1}{u'} = \frac{1}{f'}\) से,
\(\frac{1}{v'} = \frac{1}{f'} - \frac{1}{u'}\)
\(\frac{1}{v'} = \frac{1}{7} - \frac{1}{9} = \frac{9-7}{63} = \frac{2}{63}\)
अथवा
\(v' = \frac{63}{2} = 31.5\) सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब छोटे (उत्तल) दर्पण के सामने दर्पण से \(31.5\) सेमी दूर बनता है।
अतः इस प्रतिबिम्ब की अभिदृश्यक से दूरी \( = 31.5 - 2 = 29.5\) सेमी होगी।
In simple words: अंतिम प्रतिबिम्ब छोटे (उत्तल) दर्पण के सामने \(31.5\) सेमी पर बनेगा, जो अभिदृश्यक से \(29.5\) सेमी की दूरी पर होगा। यह दो-दर्पण प्रणाली, कैसेग्रेन दूरबीन में दूर की वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप दर्पणों की फोकस दूरी और उनके बीच की दूरी को सही चिह्न परिपाटी के साथ उपयोग करते हैं। विशेष रूप से, आभासी वस्तु और अंतिम प्रतिबिम्ब की स्थिति का ध्यान रखें।
Question 37. किसी गैल्वेनोमीटर की कुण्डली से जुड़े समतल दर्पण पर लम्बवत आपतित प्रकाश (चित्र 9.11) दर्पण से टकराकर अपना पथ पुनः अनुरेखित करता है। गैल्वेनोमीटर की कुण्डली में प्रवाहित कोई धारा दर्पण में 3.5° का परिक्षेपण उत्पन्न करती है। दर्पण के सामने 1.5 m की दूरी पर रखे परदे पर प्रकाश के परावर्ती चिह्न में कितना विस्थापन होगा?
Answer: हल-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक गैल्वेनोमीटर से जुड़े समतल दर्पण को दर्शाया गया है, जिस पर प्रकाश की किरण लंबवत आपतित होती है। जब दर्पण में थोड़ा सा परिक्षेपण होता है, तो परावर्तित किरण में विस्थापन होता है जिसे पास रखे परदे पर देखा जा सकता है।
जब दर्पण में \(\theta = 3.5^\circ\) का विक्षेप उत्पन्न होता है, तब प्रकाश किरण दुगने कोण (अर्थात् \(2\theta = 2 \times 3.5^\circ = 7^\circ\)) से घूमती हैः
अतः
\(R = 1.5\) m दूरी पर रखे परदे पर प्रकाश चिह्न का विस्थापन
\(d = R \times 2\theta\) (चाप = कोण x त्रिज्या)
\(d = 1.5 \times \frac{7^\circ \times \pi}{180^\circ} = 0.184\) m \( = 18.4\) cm
In simple words: जब गैल्वेनोमीटर का दर्पण 3.5° घूमता है, तो परावर्तित प्रकाश किरण \(7^\circ\) से घूम जाती है। परदे पर, यह घूर्णन \(18.4\) सेमी का विस्थापन उत्पन्न करेगा।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि यदि एक दर्पण \(\theta\) कोण से घूमता है, तो परावर्तित किरण \(2\theta\) कोण से घूमती है। इस सिद्धांत का उपयोग विस्थापन की गणना के लिए किया जाता है।
Question 38. चित्र 9.12 में कोई समोत्तल लेन्स (अपवर्तनांक 1.50) किसी समतल दर्पण के फलक पर किसी द्रव की परत के सम्पर्क में दर्शाया गया है। कोई छोटी सुई जिसकी नोक मुख्य अक्ष पर है, अक्ष के अनुदिश ऊपर-नीचे गति कराकर इस प्रकार समायोजित की जाती है कि सुई की नोक का उल्टा प्रतिबिम्ब सुई की स्थिति पर ही बने। इस स्थिति में सुई की लेन्स से दूरी 45.0 cm है। द्रव को हटाकर प्रयोग को दोहराया जाता है। नयी दूरी 30.0 cm मापी जाती है। द्रव का काम अपवर्तनांक क्या है?
Answer: हल-
द्रव को हटाकर प्रयोग करते समय इस स्थिति में सुई से चलने वाली किरणें काँच के लेन्स से अपवर्तित होकर समतल दर्पण पर अभिलम्बवत् आपतित होती हैं। दर्पण इन किरणों को वापस उन्हीं के मार्ग पर लौटा देता है जिससे किरणें वापस सुई की स्थिति में ही प्रतिबिम्ब बनाती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक समोत्तल लेंस को एक समतल दर्पण पर एक द्रव की परत के साथ दिखाता है। एक सुई को मुख्य अक्ष पर रखा जाता है। जब सुई का उल्टा प्रतिबिम्ब सुई की स्थिति पर ही बनता है, तो इसका मतलब है कि किरणें लेंस और दर्पण से परावर्तन/अपवर्तन के बाद अपने मूल पथ पर वापस लौट रही हैं।
यह स्पष्ट है कि दर्पण की अनुपस्थिति में लेन्स से अपवर्तित किरणें अनन्त पर मिलती हैं।
अतः काँच के लेन्स हेतु, \(u = -30\) cm, \(v = \infty\)
माना फोकस दूरी \( = f_1\)
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1}\) से,
\(\frac{1}{\infty} - \frac{1}{-30} = \frac{1}{f_1}\)
\(\frac{1}{f_1} = \frac{1}{30}\)
लेन्स की फोकस दूरी \(f_1 = 30\) cm
यदि इसके प्रत्येक तल की वक्रता त्रिज्या R है, तब
\(R_1 = +R, R_2 = -R, n = 1.5\)
\(\frac{1}{f_1} = (n - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)\)
\(\frac{1}{30} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{R} - \frac{1}{-R} \right) = 0.5 \left( \frac{2}{R} \right) = \frac{1}{R}\)
\(R = 30\) cm
द्रव के साथ प्रयोग करते समय
इस स्थिति में काँच के लेन्स तथा समतल दर्पण के बीच एक द्रव का लेन्स भी बना है। माना इस द्रव लेन्स की फोकस दूरी \(f_2\) है, तब
संयुक्त लेन्स हेतु, \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}\) ...(1)
परन्तु संयुक्त लेन्स हेतु, \(u = -45.0\) cm, \(v = \infty\)
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{F}\) से,
\(\frac{1}{\infty} - \frac{1}{-45} = \frac{1}{F}\)
\(F = 45\) cm
समीकरण (1) से,
\(\frac{1}{45} = \frac{1}{30} + \frac{1}{f_2}\)
\(\frac{1}{f_2} = \frac{1}{45} - \frac{1}{30} = \frac{2-3}{90} = - \frac{1}{90}\)
\(f_2 = -90\) cm
स्पष्ट है कि द्रव लेन्स के प्रथम तल की वक्रता त्रिज्या काँच लेन्स के वक्र तल की वक्रता-त्रिज्या के बराबर है।
द्रव लेन्स हेतु \(R_1 = -30\) cm, \(R_2 = \infty\)
माना द्रव का अपवर्तनांक n है, तब
\(\frac{1}{f_2} = (n - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)\)
\(\frac{1}{-90} = (n - 1) \left( \frac{1}{-30} - \frac{1}{\infty} \right)\)
\(\frac{1}{-90} = (n - 1) \left( \frac{1}{-30} \right)\)
\(n - 1 = \frac{30}{90} = 0.33\)
द्रव का अपवर्तनांक \(n = 1.33\)
In simple words: काँच के लेंस के अपवर्तनांक और द्रव के अपवर्तनांक का उपयोग करके लेंस सूत्र और लेंस-मेकर सूत्र लागू किए गए। प्रयोग की दो स्थितियों से, हमने संयुक्त लेंस और द्रव लेंस की फोकस दूरी की गणना की, जिससे द्रव का अपवर्तनांक \(1.33\) प्राप्त हुआ।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को हल करते समय चिह्न परिपाटी का सही उपयोग महत्वपूर्ण है। वस्तु और प्रतिबिम्ब की दूरी तथा वक्रता त्रिज्या के लिए सही चिह्न लागू करें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. अपवर्तन की घटना में निम्न में से कौन-सी राशि अपरिवर्तित रहती है?
(i) प्रकाश की चाल
(ii) प्रकाश की तीव्रता
(iii) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य
(iv) प्रकाश की आवृत्ति
Answer: (iv) प्रकाश की आवृत्ति
In simple words: अपवर्तन के दौरान, प्रकाश की चाल, तीव्रता और तरंगदैर्ध्य बदल जाती हैं, लेकिन उसकी आवृत्ति स्थिर रहती है क्योंकि यह स्रोत पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रकाश की आवृत्ति एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर अपरिवर्तित रहती है, जबकि उसकी गति और तरंगदैर्ध्य बदल जाती है।
Question 2. एक प्रकाश की किरण काँच \( \left( \mu = \frac{3}{2} \right) \) से पानी \( \left( \mu = \frac{4}{3} \right) \) में संचरित होती है। क्रान्तिक कोण का मान होगा
(i) \(\sin^{-1}\left(\frac{1}{2}\right)\)
(ii) \(\sin^{-1}\left(\frac{8}{9}\right)\)
(iii) \(\sin^{-1}\left(\frac{8}{9}\right)\)
(iv) \(\sin^{-1}\left(\frac{5}{7}\right)\)
Answer: (iii) \(\sin^{-1}\left(\frac{8}{9}\right)\)
In simple words: क्रांतिक कोण की गणना स्नेल के नियम का उपयोग करके की जाती है, जहाँ प्रकाश सघन माध्यम (काँच) से विरल माध्यम (पानी) में जाता है। यहाँ, क्रांतिक कोण का मान \(\sin^{-1}\left(\frac{8}{9}\right)\) होगा।
🎯 Exam Tip: क्रांतिक कोण की गणना करते समय, हमेशा \(\sin C = \frac{\mu_{\text{विरल}}}{\mu_{\text{सघन}}}\) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \(\mu_{\text{विरल}}\) विरल माध्यम का अपवर्तनांक और \(\mu_{\text{सघन}}\) सघन माध्यम का अपवर्तनांक है।
Question 3. आकाश नीला दिखाई देता है-
(i) प्रकीर्णन के कारण
(ii) परावर्तन के कारण
(iii) अपवर्तन के कारण
(iv) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण
Answer: (i) प्रकीर्णन के कारण
In simple words: आकाश का नीला रंग सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन (फैलाव) के कारण होता है, जहाँ वायुमंडल में छोटे कण नीली रोशनी को अधिक फैलाते हैं।
🎯 Exam Tip: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश का लाल रंग भी प्रकीर्णन के कारण होता है, क्योंकि नीली रोशनी बिखर जाती है और लंबी तरंगदैर्ध्य (लाल) सीधे आंखों तक पहुँचती है।
Question 4. निरपेक्ष अपवर्तनांक का मान है-
(i) \(n < 1\)
(ii) \(n > 1\)
(iii) \(1 > n > 0\)
(iv) \(\infty > n > 0\)
Answer: (ii) \(n > 1\)
In simple words: निरपेक्ष अपवर्तनांक हमेशा 1 से बड़ा होता है क्योंकि प्रकाश की गति किसी भी माध्यम में निर्वात की तुलना में धीमी होती है, और यह माध्यम के प्रकाशीय घनत्व को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: निर्वात के लिए निरपेक्ष अपवर्तनांक 1 है। अन्य सभी पदार्थों के लिए यह 1 से अधिक होता है।
Question 5. एक उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 20 सेमी है। एक वस्तु दर्पण के सामने ध्रुव से 20 सेमी की दूरी पर रखे जाने पर प्रतिबिम्ब की दूरी ध्रुव से होती है-
(i) 40 सेमी
(ii) 10 सेमी
(iii) 20 सेमी
(iv) अनन्त पर
Answer: (ii) 10 सेमी
In simple words: उत्तल दर्पण में वस्तु 20 सेमी की दूरी पर होने पर, दर्पण सूत्र \(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\) का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की दूरी \(10\) सेमी आती है। उत्तल दर्पण हमेशा आभासी और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी हमेशा धनात्मक होती है। वस्तु की दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है। इन मानों को दर्पण सूत्र में सही चिह्न के साथ रखें।
Question 6. यदि किसी माध्यम से निर्वात में सम्पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए क्रान्तिक कोण 30° है, तो माध्यम में प्रकाश का वेग है-
(i) \(3 \times 10^8\) मी/से
(ii) \(1.5 \times 10^8\) मी/से
(iii) \(6 \times 10^8\) मी/से
(iv) \(4.5 \times 10^8\) मी/से
Answer: (ii) \(1.5 \times 10^8\) मी/से
In simple words: क्रांतिक कोण 30° होने पर, माध्यम का अपवर्तनांक 2 आता है। प्रकाश के वेग का सूत्र \(v = c/n\) लगाने पर माध्यम में प्रकाश का वेग \(1.5 \times 10^8\) मी/से होगा।
🎯 Exam Tip: क्रांतिक कोण (\(C\)) और अपवर्तनांक (\(n\)) के बीच संबंध \(\sin C = \frac{1}{n}\) का उपयोग करें। फिर माध्यम में प्रकाश के वेग (\(v\)) की गणना के लिए \(v = \frac{c}{n}\) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \(c\) निर्वात में प्रकाश का वेग है।
Question 7. यदि सघन माध्यम में आपतन कोण, क्रान्तिक कोण के बराबर हो, तो अपवर्तन कोण होगा-
(i) 0°
(ii) 45°
(iii) 90°
(iv) 180°
Answer: (iii) 90°
In simple words: जब सघन माध्यम में आपतन कोण क्रांतिक कोण के बराबर होता है, तो प्रकाश विरल माध्यम में 90° के कोण पर अपवर्तित होता है, यानी वह सतह के समानांतर चलता है।
🎯 Exam Tip: क्रांतिक कोण वह विशेष आपतन कोण है जिसके लिए अपवर्तन कोण 90° होता है। यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाए, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है।
Question 8. यदि विरल तथा सघन माध्यम में प्रकाश की चाल क्रमशः \(V_1\) तथा \(V_2\) हों तथा सघन माध्यम में क्रांतिक कोण \(C\) है, तब
(i) \(V_1 = V_2 \sin C\)
(ii) \(V_1 = V_2 \cos C\)
(iii) \(V_1 = V_2 \tan C\)
(iv) \(V_1 = V_2 \text{cosec } C\)
Answer: (iv) \(V_1 = V_2 \text{cosec } C\)
In simple words: क्रांतिक कोण का संबंध माध्यमों में प्रकाश की चाल से होता है। सघन से विरल माध्यम के लिए \(\sin C = \frac{V_2}{V_1}\) होता है, जिससे \(V_1 = V_2 \frac{1}{\sin C} = V_2 \text{cosec } C\) प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: \(\sin C = \frac{\mu_{\text{विरल}}}{\mu_{\text{सघन}}} = \frac{V_{\text{सघन}}}{V_{\text{विरल}}}\) सूत्र को याद रखें, जहाँ \(V_{\text{विरल}}\) और \(V_{\text{सघन}}\) क्रमशः विरल और सघन माध्यम में प्रकाश की चाल हैं।
Question 9. वायु के सापेक्ष जल और काँच के अपवर्तनांक क्रमशः एवं हैं। काँच का जल के सापेक्ष अपवर्तनांक होगा-
(i)
(ii)
(iii)
(iv)
Answer: (iii)
In simple words: वायु के सापेक्ष जल और काँच के अपवर्तनांक दिए गए हैं। काँच का जल के सापेक्ष अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए, काँच के वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक को जल के वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: \(^a\mu_g = \frac{^a\mu_g}{^a\mu_w}\) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \(^a\mu_g\) वायु के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक और \(^a\mu_w\) वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक है।
Question 10. वायु में प्रकाश की चाल \(3.0 \times 10^8\) मीटर/सेकण्ड है। 1.5 अपवर्तनांक वाले काँच में प्रकाश की चाल होगी-
(i) \(1.5 \times 10^8\) मी/से।
(ii) \(2.0 \times 10^8\) मी/से
(iii) \(1.8 \times 10^8\) मी/से
(iv) \(2.5 \times 10^8\) मी/से
Answer: (ii) \(2.0 \times 10^8\) मी/से
In simple words: प्रकाश की चाल एक माध्यम में उसके अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। काँच में प्रकाश की चाल \(2.0 \times 10^8\) मी/से होगी, जो निर्वात में चाल को अपवर्तनांक से विभाजित करके प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: \(v = c/n\) सूत्र को याद रखें, जहाँ \(v\) माध्यम में प्रकाश की चाल, \(c\) निर्वात में प्रकाश की चाल (\(3 \times 10^8\) m/s) और \(n\) माध्यम का अपवर्तनांक है।
Question 11. किसी गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (\(f\)) एवं वक्रता त्रिज्या (\(R\)) में सम्बन्ध है-
(i) \(R =\)
(ii) \(f = 3R\)
(iii) \(f =\)
(iv) \(f =\)
Answer: (iii) \(f =\)
In simple words: गोलीय दर्पण में फोकस दूरी उसकी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है, यानी प्रकाश की किरणें फोकस बिंदु पर अभिसरित या अपसरित होती हैं, जो वक्रता केंद्र और ध्रुव के ठीक बीच में होता है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध सभी प्रकार के गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) के लिए सत्य है। इसे व्युत्पन्न करने के लिए किरण आरेख और ज्यामिति का उपयोग किया जा सकता है।
Question 12. दो लेन्स जिनकी क्षमताएँ 5D तथा -3D हैं, सम्पर्क में रखे हैं। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी है-
(i) 50 सेमी
(ii) 75 सेमी
(iii) 25 सेमी
(iv) 20 सेमी
Answer: (i) 50 सेमी
In simple words: दो संपर्क में रखे लेंसों की कुल क्षमता उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं का योग होती है, और कुल फोकस दूरी कुल क्षमता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यहाँ, संयुक्त लेंस की फोकस दूरी 50 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: संयुक्त क्षमता \(P = P_1 + P_2\) और फोकस दूरी \(F = 1/P\) (मीटर में) का उपयोग करें। यदि क्षमता डायोप्टर में है, तो फोकस दूरी को सेमी में बदलने के लिए \(F = 100/P\) का उपयोग करें।
Question 13. 4 डायोप्टर और -2 डायोप्टर क्षमता के दो लेन्स सम्पर्क में रखे हैं। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी होगी-
(i) 50 सेमी
(ii) -50 सेमी
(iii) 25 सेमी
(iv) -25 सेमी
Answer: (i) 50 सेमी
In simple words: संपर्क में रखे दो लेंसों की कुल क्षमता उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं का योग होती है, जिसके आधार पर संयुक्त लेंस की फोकस दूरी की गणना की जाती है। यहाँ, संयुक्त लेंस की फोकस दूरी 50 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: लेन्स की क्षमता के लिए चिह्न परिपाटी का ध्यान रखें: उत्तल लेन्स के लिए धनात्मक और अवतल लेन्स के लिए ऋणात्मक। अंतिम क्षमता का चिह्न संयोजन की प्रकृति (अभिसारी या अपसारी) को दर्शाता है।
Question 14. एक समतल-उत्तल लेन्स में उत्तल पृष्ठ की वक्रता-त्रिज्या 10 सेमी और लेन्स की फोकस दूरी 30 सेमी है। लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक है-
(i) 1.5
(ii) 1.66
(iii) 1.33
(iv) 0.3
Answer: (iii) 1.33
In simple words: समतल-उत्तल लेंस के लिए, एक सतह समतल (वक्रता त्रिज्या अनंत) और दूसरी उत्तल होती है। लेंस-मेकर सूत्र का उपयोग करके, फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या के आधार पर पदार्थ का अपवर्तनांक 1.33 ज्ञात किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: समतल सतह के लिए वक्रता त्रिज्या \(\infty\) (अनंत) होती है। लेंस-मेकर सूत्र \(\frac{1}{f} = (n-1)\left(\frac{1}{R_1}-\frac{1}{R_2}\right)\) का उपयोग करते समय, उत्तल सतह के लिए \(\text{R}\) धनात्मक और अवतल सतह के लिए ऋणात्मक लेना याद रखें।
Question 15. सम्पर्क में रखे दो पतले लेन्सों की फोकस दूरियाँ 25 सेमी तथा -40 सेमी हैं। इस संयोजन की क्षमता होगी-
(i) -6.67 D
(ii) -2.5 D
(iii) +1.5 D
(iv) +4 D
Answer: (iii) +1.5 D
In simple words: संपर्क में रखे लेंसों की क्षमता उनकी फोकस दूरियों के व्युत्क्रम का योग होती है। 25 सेमी और -40 सेमी फोकस दूरी वाले लेंसों के संयोजन की कुल क्षमता \(+1.5\) डायोप्टर होगी, जो एक अभिसारी संयोजन है।
🎯 Exam Tip: क्षमता की गणना करते समय फोकस दूरी को मीटर में बदलें। \(P = \frac{1}{f_{\text{मीटर}}}\)। धनात्मक क्षमता अभिसारी लेन्स को और ऋणात्मक क्षमता अपसारी लेन्स को इंगित करती है।
Question 16. सम्पर्क में रखे उत्तल एवं अवतल लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमशः 12 सेमी और 18 सेमी हैं। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी होगी-
(i) 50 सेमी
(ii) 45 सेमी
(iii) 36 सेमी
(iv) 18 सेमी
Answer: (iv) 18 सेमी
In simple words: उत्तल लेन्स (धनात्मक फोकस दूरी) और अवतल लेन्स (ऋणात्मक फोकस दूरी) को संपर्क में रखने पर, संयुक्त लेंस की फोकस दूरी \(18\) सेमी प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी के लिए सूत्र \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}\) का उपयोग करें और उत्तल लेन्स के लिए \(f_1\) धनात्मक और अवतल लेन्स के लिए \(f_2\) ऋणात्मक मानें।
Question 17. 0.5 मी फोकस दूरी के एक उत्तल लेन्स को 1 मी फोकस दूरी के अवतल लेन्स के सम्पर्क में रखा गया है। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी है-
(i) 1 मी ।
(ii) -1 मी
(iii) 0.5 मी
(iv) -0.5 मी
Answer: (i) 1 मी
In simple words: उत्तल और अवतल लेंसों को संपर्क में रखने पर, संयुक्त लेंस की फोकस दूरी की गणना \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}\) सूत्र का उपयोग करके की जाती है। यहाँ, संयुक्त फोकस दूरी 1 मीटर होगी।
🎯 Exam Tip: उत्तल लेन्स की फोकस दूरी धनात्मक (\(f_1 = +0.5\) m) और अवतल लेन्स की फोकस दूरी ऋणात्मक (\(f_2 = -1\) m) लें, और फिर सूत्र लागू करें।
Question 18. एक पदार्थ जिसका अपवर्तनांक \(n = 1.51\) है, से एक पतला लेन्स बना है। लेन्स की दोनों सतह उत्तल हैं। इसे जल (\(n = 1.33\)) में डुबोया गया है। यह लेन्स व्यवहार करेगा-
(i) एक अभिसारी लेन्स की तरह
(ii) एक अपसारी लेन्स की तरह
(iii) काँच के एक आयताकार टुकड़े की तरह
(iv) एक प्रिज्म की तरह
Answer: (i) एक अभिसारी लेन्स की तरह
In simple words: जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे माध्यम में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से कम होता है, तो लेंस अभी भी अभिसारी (उत्तल) लेंस की तरह व्यवहार करेगा।
🎯 Exam Tip: यदि \(n_{\text{लेंस}} > n_{\text{माध्यम}}\), तो लेंस अपनी प्रकृति नहीं बदलता। यदि \(n_{\text{लेंस}} < n_{\text{माध्यम}}\), तो लेंस अपनी प्रकृति बदल देता है। यदि \(n_{\text{लेंस}} = n_{\text{माध्यम}}\), तो लेंस एक समतल प्लेट की तरह व्यवहार करेगा।
Question 19. यदि 1.5 अपवर्तनांक के समोत्तल लेन्स की वक्रता-त्रिज्या 10 सेमी, हो तो इस लेन्स की क्षमता होगी-
(i) 10D
(ii) 5D
(iii) -10D
(iv) -5D
Answer: (ii) 5D
In simple words: समोत्तल लेंस की फोकस दूरी और क्षमता की गणना लेंस-मेकर सूत्र का उपयोग करके की जाती है। यहाँ, समोत्तल लेंस की क्षमता 5 डायोप्टर होगी।
🎯 Exam Tip: समोत्तल लेंस के लिए, एक सतह समतल (\(R_1 = \infty\)) और दूसरी उत्तल (\(R_2 = -10\) सेमी) होती है। लेंस-मेकर सूत्र \(\frac{1}{f} = (n-1)\left(\frac{1}{R_1}-\frac{1}{R_2}\right)\) और क्षमता \(P = \frac{1}{f_{\text{मीटर}}}\) का उपयोग करें।
Question 20. एक उत्तल लेन्स की क्षमता 2 डायोप्टर है। इसकी फोकस-दूरी होगी-
(i) 20 सेमी
(ii) 50 सेमी
(iii) 40 सेमी
(iv) 60 सेमी
Answer: (ii) 50 सेमी
In simple words: लेंस की फोकस दूरी उसकी क्षमता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। 2 डायोप्टर क्षमता वाले उत्तल लेंस की फोकस दूरी 50 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: क्षमता \(P\) डायोप्टर में होने पर फोकस दूरी \(f\) मीटर में \(f = 1/P\) होती है, या सेमी में \(f = 100/P\) होती है।
Question 21. एक उत्तल लेन्स मुख्य अक्ष पर रखी बिन्दु वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। यदि लेन्स के ऊपरी अर्द्ध भाग को काला कर दिया जाए, तो
(i) प्रतिबिम्ब नीचे की ओर खिसक जायेगा।
(ii) प्रतिबिम्ब ऊपर की ओर खिसक जायेगा
(iii) प्रतिबिम्ब की लम्बाई आधी हो जायेगी
(iv) प्रतिबिम्ब की तीव्रता घट जायेगी
Answer: (iv) प्रतिबिम्ब की तीव्रता घट जायेगी।
In simple words: यदि लेंस का ऊपरी आधा भाग काला कर दिया जाए, तो प्रतिबिंब की तीव्रता कम हो जाती है क्योंकि कम प्रकाश लेंस से होकर गुजरता है, लेकिन प्रतिबिंब की स्थिति या आकार नहीं बदलता है।
🎯 Exam Tip: लेंस का आंशिक रूप से ढका होना केवल प्रकाश की मात्रा को कम करता है, जिससे प्रतिबिम्ब की चमक या तीव्रता कम हो जाती है। यह प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार या प्रकृति को प्रभावित नहीं करता है।
Question 22. +3D तथा -5D क्षमता के दो पतले लेन्स सम्पर्क में रखे गये हैं। इस संयोजन की फोकस दूरी होगी-
(i) -40 सेमी
(ii) +40 सेमी
(iii) +20 सेमी
(iv) -50 सेमी
Answer: (iv) -50 सेमी
In simple words: दो संपर्क में रखे लेंसों की संयुक्त क्षमता उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं का योग होती है, जिसके आधार पर संयुक्त लेंस की फोकस दूरी -50 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: संयुक्त क्षमता \(P = P_1 + P_2\) का उपयोग करें। यदि \(P\) धनात्मक है, तो लेंस अभिसारी है, और यदि \(P\) ऋणात्मक है, तो लेंस अपसारी है। फिर \(f = 100/P\) (सेमी में) का उपयोग करें।
Question 23. R वक्रता त्रिज्या तथा n अपवर्तनांक का एक समतल-उत्तल लेन्स R वक्रता त्रिज्या \(n_1\) तथा \(n_2\) अपवर्तनांक के समतल-अवतल लेन्स के सम्पर्क में चित्रानुसार रखे जाते हैं। संयुक्त लेन्स की क्षमता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो लेंसों के संयोजन को दर्शाता है: एक समतल-उत्तल लेंस (\(n\) अपवर्तनांक और \(R\) वक्रता त्रिज्या) और एक समतल-अवतल लेंस (\(n_1, n_2\) अपवर्तनांक और \(R\) वक्रता त्रिज्या)। ये दोनों लेंस एक-दूसरे के संपर्क में रखे हैं, जिनके बीच में एक खाली जगह या पतला माध्यम है।
(i) 0
(ii) \(\frac{n_2-n_1}{R}\)
(iii) \(\frac{n_1+n_2-2}{R}\)
(iv) \(\frac{n_1-n_2}{R}\)
Answer: (i) 0
In simple words: दिए गए लेंस संयोजन की कुल क्षमता शून्य होगी। समतल-उत्तल लेंस की क्षमता \(P_1 = (n-1)/R\) होती है, और समतल-अवतल लेंस की क्षमता \(P_2 = -(n_2-n_1)/R\) होती है। यदि \(n\) समतल-उत्तल लेंस का अपवर्तनांक \(n_1\) के बराबर हो और बीच का माध्यम \(n_2\) हो, तो \(P_1\) और \(P_2\) एक दूसरे को रद्द कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे संयोजन के लिए प्रत्येक लेंस की क्षमता की गणना अलग-अलग करें और फिर उन्हें जोड़ें। \(\frac{1}{f} = (n-1)\left(\frac{1}{R_1}-\frac{1}{R_2}\right)\) सूत्र का उपयोग करते समय समतल सतहों के लिए वक्रता त्रिज्या को अनंत (0 के व्युत्क्रम) लें।
Question 24. दो लेन्स जिनकी शक्तियाँ 4D और -2D हैं, सम्पर्क में रखे हैं। संयुक्त लेन्स की शक्ति-
(i) 6 D
(ii) 2 D
(iii) -2 D
(iv) 4 D
Answer: (ii) 2 D
In simple words: दो संपर्क में रखे लेंसों की संयुक्त शक्ति (क्षमता) उनकी व्यक्तिगत शक्तियों का सीधा योग होती है। यहाँ, संयुक्त लेंस की शक्ति \(2\) डायोप्टर होगी।
🎯 Exam Tip: संयुक्त लेन्स की क्षमता \(P = P_1 + P_2\) सूत्र द्वारा सीधे ज्ञात की जाती है।
Question 25. एक प्रिज्म का अपवर्तक कोण 60° है। जब प्रकाश की एक किरण 50° पर आपतित होती है तो इसमें अल्पतम विचलन होता है। अल्पतम विचलन कोण का मान है-
(i) 40°
(ii) 45°
(iii) 55°
(iv) 60°
Answer: (i) 40°
In simple words: अल्पतम विचलन की स्थिति में, आपतन कोण \(i\) और निर्गत कोण \(e\) बराबर होते हैं, और विचलन कोण \(\delta_m = 2i - A\) होता है। यहाँ, अल्पतम विचलन कोण 40° होगा।
🎯 Exam Tip: अल्पतम विचलन की स्थिति में, \(i = e\) और \(r_1 = r_2 = A/2\) होता है। इस प्रश्न में आपतन कोण \(i\) दिया गया है, इसलिए \(\delta_m = 2i - A\) का सीधा उपयोग किया जा सकता है।
Question 26. एक समबाहु प्रिज्म न्यूनतम विचलन की स्थिति में है। यदि आपतन कोण प्रिज्म कोण का 4/5 गुना हो, तो न्यूनतम विचलन कोण का मान होगा-
(i) 72°
(ii) 60°
(iii) 48°
(iv) 36°
Answer: (iv) 36°
In simple words: समबाहु प्रिज्म में प्रिज्म कोण 60° होता है। न्यूनतम विचलन की स्थिति में आपतन कोण \(i\) प्रिज्म कोण का 4/5 गुना है। विचलन कोण \(\delta_m = 2i - A\) सूत्र का उपयोग करके, न्यूनतम विचलन कोण 36° होगा।
🎯 Exam Tip: समबाहु प्रिज्म के लिए प्रिज्म कोण \(A = 60^\circ\) होता है। न्यूनतम विचलन की स्थिति में \(\delta_m = 2i - A\) सूत्र को लागू करें।
Question 27. प्रिज्म से गुजरने पर निम्नलिखित में से किस रंग के प्रकाश का विचलन अधिकतम होगा?
(i) लाल रंग
(ii) बैंगनी रंग
(iii) नीला रंग
(iv) हरा रंग
Answer: (ii) बैंगनी रंग
In simple words: जब सफेद प्रकाश एक प्रिज्म से गुजरता है, तो बैंगनी रंग का प्रकाश सबसे अधिक विचलित होता है क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है और माध्यम में इसका अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है।
🎯 Exam Tip: लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है और इसका विचलन सबसे कम होता है। बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है और इसका विचलन सबसे अधिक होता है (विगोर (VIBGYOR) क्रम याद रखें)।
Question 28. जिस भौतिक घटना के लिए सर सी० वी० रमन को नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया था, वह है प्रकाश का-
(i) ध्रुवण
(ii) व्यतिकरण
(iii) विवर्तन
(iv) प्रकीर्णन
Answer: (iv) प्रकीर्णन
In simple words: सर सी० वी० रमन को प्रकाश के प्रकीर्णन से संबंधित एक घटना (रमन प्रभाव) की खोज के लिए नोबल पुरस्कार मिला था, जिसमें प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बदल जाती है जब वह किसी माध्यम से गुजरता है।
🎯 Exam Tip: रमन प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन का एक विशेष रूप है जहाँ प्रकाश के फोटॉन अणु के साथ ऊर्जा का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे बिखरे हुए प्रकाश की आवृत्ति में परिवर्तन होता है।
Question 29. निम्नलिखित में से किस रंग के प्रकाश की चाल जल में सर्वाधिक होगी?
(i) लाल
(ii) पीला
(iii) हरा
(iv) बैंगनी
Answer: (i) लाल
In simple words: लाल रंग के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है, और किसी भी माध्यम में प्रकाश की चाल अपवर्तनांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है। चूंकि लाल रंग का अपवर्तनांक न्यूनतम होता है, इसलिए इसकी चाल जल में सर्वाधिक होगी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांक भिन्न होता है, और यह तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है। न्यूनतम अपवर्तनांक वाले रंग (जैसे लाल) की चाल माध्यम में अधिकतम होती है, जबकि अधिकतम अपवर्तनांक वाले रंग (जैसे बैंगनी) की चाल न्यूनतम होती है।
Question 30. उदय व अस्त होते समय सूर्य का ताम्र वर्ण (रक्ताभ) दिखना सम्बन्धित है, प्रकाश के
(i) प्रकीर्णन से
(ii) परिक्षेपण से
(iii) अपवर्तन से
(iv) व्यतिकरण से
Answer: (i) प्रकीर्णन से
In simple words: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल-नारंगी रंग वायुमंडल में प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है, जहाँ नीले और हरे रंग का प्रकाश अधिक बिखर जाता है, जिससे लंबी तरंगदैर्ध्य (लाल) सीधे आंखों तक पहुंच पाती है।
🎯 Exam Tip: Rayleigh प्रकीर्णन के अनुसार, प्रकाश का प्रकीर्णन उसकी तरंगदैर्ध्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए, कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग (नीले) अधिक प्रकीर्णित होते हैं।
Question 31. एक व्यक्ति +2D क्षमता का चश्मा प्रयोग करता है। उसका दृष्टि दोष है-
(i) निकट दृष्टि दोष ।
(ii) दूर दृष्टि दोष,
(iii) जरा दूर दृष्टि दोष ।
(iv) अबिन्दुकता
Answer: (ii) दूर दृष्टि दोष
In simple words: +2D क्षमता का चश्मा उपयोग करने वाला व्यक्ति दूर दृष्टि दोष से पीड़ित है, क्योंकि धनात्मक क्षमता उत्तल लेंस को दर्शाती है, जिसका उपयोग दूर दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: धनात्मक क्षमता (उत्तल लेन्स) दूर दृष्टि दोष को ठीक करती है, जबकि ऋणात्मक क्षमता (अवतल लेन्स) निकट दृष्टि दोष को ठीक करती है।
Question 32. सामान्य नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है-
(i) अनन्त
(ii) 50 सेमी
(iii) 25 सेमी
(iv) 75 सेमी
Answer: (iii) 25 सेमी
In simple words: सामान्य नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेमी होती है, जिसका अर्थ है कि एक स्वस्थ आँख इस दूरी पर रखी वस्तुओं को बिना तनाव के स्पष्ट रूप से देख सकती है।
🎯 Exam Tip: यह दूरी \(D = 25\) सेमी के रूप में जानी जाती है और अक्सर ऑप्टिकल उपकरणों की आवर्धन क्षमता की गणना में उपयोग की जाती है।
Question 33. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी की अपेक्षा अधिक होती है-
(i) 5 गुनी
(ii) 50 गुनी
(iii) 500 गुनी
(iv) 5000 गुनी
Answer: (iv) 5000 गुनी
In simple words: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी से 5000 गुना अधिक होती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश की तुलना में बहुत कम होती है, जिससे यह बहुत छोटे विवरणों को देखने में सक्षम होता है।
🎯 Exam Tip: विभेदन क्षमता तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में बहुत कम तरंगदैर्ध्य वाले इलेक्ट्रॉन पुंज का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसकी विभेदन क्षमता अधिक होती है।
Question 34. नेत्र लेन्स की प्रकृति होती है-
(i) अभिसारी
(ii) अपसारी.
(iii) अभिसारी तथा अपसारी दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (i) अभिसारी
In simple words: मानव नेत्र लेंस की प्रकृति अभिसारी होती है, जिसका अर्थ है कि यह प्रकाश की किरणों को रेटिना पर फोकस करने के लिए एकत्रित करता है, जिससे स्पष्ट छवियां बनती हैं।
🎯 Exam Tip: नेत्र लेंस की अभिसारी प्रकृति इसकी फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर वस्तुओं को देखने में मदद करती है, जिसे समंजन क्षमता कहते हैं।
Question 35. निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के लिए प्रयुक्त किया जाता है
(i) अवतल लेन्स
(ii) अवतल दर्पण
(iii) उत्तल दर्पण
(iv) उत्तल लेन्स
Answer: (i) अवतल लेन्स
In simple words: निकट दृष्टि दोष को अवतल लेन्स का उपयोग करके ठीक किया जाता है, क्योंकि यह प्रकाश किरणों को अपसारित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर ठीक से फोकस करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: अवतल लेन्स की ऋणात्मक क्षमता होती है, जो रेटिना से पहले बनने वाले प्रतिबिंब को रेटिना पर वापस लाने में मदद करती है।
Question 36. दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के लिए प्रयुक्त किया जाता है
(i) अवतल लेन्स
(ii) अवतल दर्पण
(iii) उत्तल दर्पण
(iv) उत्तल लेन्स
Answer: (iv) उत्तल लेन्स
In simple words: दूर दृष्टि दोष को उत्तल लेन्स का उपयोग करके ठीक किया जाता है, क्योंकि यह प्रकाश किरणों को अभिसरित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर ठीक से फोकस करने में मदद करता है, जो सामान्यतः रेटिना के पीछे बनता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल लेन्स की धनात्मक क्षमता होती है, जो रेटिना के पीछे बनने वाले प्रतिबिंब को रेटिना पर वापस लाने में मदद करती है।
Question 37. किसी दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेन्स का व्यास \(D\) है। यदि प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \(\lambda\) हो, तो इसकी विभेदन क्षमता होगी-
(i) \(\lambda/D\)
(ii) \(1.22\lambda/D\)
(iii) \(D/1.22\lambda\)
(iv) \(D\lambda\)
Answer: (iii) \(D/1.22\lambda\)
In simple words: दूरदर्शी की विभेदन क्षमता उसके अभिदृश्यक लेन्स के व्यास \(D\) और प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \(\lambda\) पर निर्भर करती है, यह दर्शाते हुए कि बड़ा व्यास और छोटी तरंगदैर्ध्य बेहतर विभेदन प्रदान करती हैं।
🎯 Exam Tip: दूरदर्शी की विभेदन सीमा \(1.22\lambda/D\) होती है, जबकि विभेदन क्षमता इसका व्युत्क्रम, \(D/1.22\lambda\) होती है।
Question 38. दूर-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का निकट बिन्दु स्थित होगा-
(i) 25 सेमी दूरी पर
(ii) 25 सेमी से कम दूरी पर
(iii) 25 सेमी से अधिक दूरी पर
(iv) अनन्त पर
Answer: (iii) 25 सेमी से अधिक दूरी पर
In simple words: दूर-दृष्टि दोष में, आँख पास की वस्तुओं पर ठीक से फोकस नहीं कर पाती, जिसके कारण स्पष्ट दृष्टि का निकट बिंदु सामान्य 25 सेमी से दूर खिसक जाता है।
🎯 Exam Tip: दूर-दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई होती है, लेकिन दूर की वस्तुओं को आसानी से देख सकते हैं।
Question 39. एक खगोलीय दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता 10 तथा नेत्रिका की फोकस दूरी 20 सेमी है। अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी है-
(i) 2 सेमी
(ii) 200 सेमी
(iii) 100 सेमी
(iv) 0.5 सेमी
Answer: (ii) 200 सेमी
In simple words: खगोलीय दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता अभिदृश्यक और नेत्रिका की फोकस दूरियों के अनुपात के बराबर होती है। दी गई आवर्धन क्षमता और नेत्रिका की फोकस दूरी का उपयोग करके, अभिदृश्यक लेंस की फोकस दूरी 200 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: सामान्य समायोजन में दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता \(M = f_o / f_e\) सूत्र द्वारा दी जाती है, जहाँ \(f_o\) अभिदृश्यक की फोकस दूरी और \(f_e\) नेत्रिका की फोकस दूरी है।
Question 40. एक दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेन्स का व्यास 0.1 मीटर है तथा प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 600 नैनोमीटर है। दूरदर्शी की विभेदन सीमा होगी लगभग-
(i) \(7.32 \times 10^{-4}\) रेडियन
(ii) \(6.0 \times 10^{-5}\) रेडियन
(iii) \(7.32 \times 10^{-6}\) रेडियन
(iv) \(6 \times 10^{-2}\) रेडियन
Answer: (iii) \(7.32 \times 10^{-6}\) रेडियन
In simple words: दूरदर्शी की विभेदन सीमा उसके अभिदृश्यक लेन्स के व्यास और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है। दिए गए मानों का उपयोग करके, विभेदन सीमा लगभग \(7.32 \times 10^{-6}\) रेडियन होगी।
🎯 Exam Tip: दूरदर्शी की विभेदन सीमा \(\alpha = \frac{1.22\lambda}{D}\) सूत्र द्वारा दी जाती है। सुनिश्चित करें कि तरंगदैर्ध्य और व्यास को SI इकाइयों (मीटर) में व्यक्त किया गया हो।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आवर्धन का सूत्र
(i) v व u के पदों में
(ii) u वीं के पदों में,
(iii) v तथा f के पदों में लिखिए।
Answer: (i) \(m = - \frac{v}{u}\),
(ii) \(m = \frac{f}{f-u}\),
(iii) \(m = \frac{f-v}{f}\)
In simple words: आवर्धन का सूत्र वस्तु के आकार और स्थिति के आधार पर उसके प्रतिबिंब के आकार और स्थिति को दर्शाता है, जिसे अलग-अलग संदर्भों में v, u, और f के पदों में व्यक्त किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: आवर्धन के तीनों सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वस्तु की दूरी (u), प्रतिबिंब की दूरी (v) और फोकस दूरी (f) के अलग-अलग संयोजन दिए हों।
Question 2. अपवर्तनांक की परिभाषा दीजिए ।
Answer: आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है। जिसे पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
- नियतांक
In simple words: अपवर्तनांक वह गुण है जो बताता है कि जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है तो वह कितना मुड़ता है; यह आपतन कोण के साइन और अपवर्तन कोण के साइन का अनुपात होता है।
🎯 Exam Tip: स्नेल का नियम (Snell's Law) अपवर्तनांक की अवधारणा का आधार है; इसकी परिभाषा और गणितीय रूप याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. प्रकाश के वेग के पदों में अपवर्तनांक का सूत्र लिखिए।
Answer: \(^{1} n_{2} = \frac{v_{1}}{v_{2}}\)
जहाँ, \(v_{1}\) = माध्यम-1 में प्रकाश का वेग तथा \(v_{2}\) = माध्यम-2 में प्रकाश का वेग।
In simple words: अपवर्तनांक को दो माध्यमों में प्रकाश के वेगों के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जहाँ प्रकाश पहले माध्यम में वेग \(v_1\) से और दूसरे माध्यम में \(v_2\) से चलता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश के वेग और अपवर्तनांक के बीच का संबंध समझने से विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के व्यवहार की व्याख्या करने में मदद मिलती है।
Question 4. क्रान्तिक कोण की परिभाषा लिखिए।
Answer: सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो, क्रान्तिक कोण कहलाता है।
In simple words: क्रान्तिक कोण वह विशेष आपतन कोण है जिस पर प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाते समय 90 डिग्री पर अपवर्तित होता है, जिसके बाद पूर्ण आंतरिक परावर्तन शुरू हो जाता है।
🎯 Exam Tip: क्रान्तिक कोण की परिभाषा और इसकी शर्त (प्रकाश का सघन से विरल माध्यम में जाना) को समझना पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक है।
Question 5. उस भौतिक सिद्धान्त का नाम लिखिए जिस पर प्रकाशिक तन्तु का कार्य सिद्धान्त आधारित है।
Answer: पूर्ण आन्तरिक परावर्तन ।
In simple words: प्रकाशिक तन्तु, जिसे ऑप्टिकल फाइबर भी कहते हैं, पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर काम करता है, जिससे प्रकाश बिना ऊर्जा खोए लम्बी दूरी तक यात्रा कर सकता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाशिक तन्तु के कार्य सिद्धांत को याद रखना और यह बताना कि यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित है, महत्वपूर्ण है।
Question 6. विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम के अपवर्तनांक तथा क्रान्तिक कोण में सम्बन्ध लिखिए ।
Answer: जहाँ, C = क्रान्तिक कोण तथा । विरल और d सघन माध्यम का संकेत है।
In simple words: विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम का अपवर्तनांक क्रान्तिक कोण के ज्या (sine) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
🎯 Exam Tip: क्रान्तिक कोण और अपवर्तनांक के बीच का संबंध \(n = 1/\sin C\) याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन की गणना में मदद करता है।
Question 7. यदि प्रकाश की एक किरण हवा से काँच के पृष्ठ पर 45° पर आपतित हो तो यह 15° विचलित होती है। काँच-हवा पृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण की गणना कीजिए।
Answer: हल-स्नेल के नियम से, \(i_{C} = \sin^{-1} \left(\frac{n_{1}}{n_{2}}\right)\)
जहाँ, \(n_{1}\) = काँच का अपवर्तनांक = 1
तथा \(n_{2}\) = वायु का अपवर्तनांक = 1.5
\(i_{C} = \sin^{-1} \left(\frac{1}{1.5}\right)\) = \(\sin^{-1} (0.666)\)
\(i_{C} = \sin^{-1}(0.67)\)
In simple words: जब प्रकाश हवा से काँच में 45° पर आपतित होता है और 15° विचलित होता है, तो स्नेल के नियम का उपयोग करके काँच-हवा इंटरफेस के लिए क्रान्तिक कोण की गणना की जा सकती है, जिससे हमें \(i_C = \sin^{-1}(0.67)\) मिलता है।
🎯 Exam Tip: स्नेल के नियम और क्रान्तिक कोण की परिभाषा को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आपतन और अपवर्तन कोणों की गणना सही हो।
Question 8. अवतल दर्पण के उपयोग लिखिए ।
Answer: 1. हजामत करने में,
2. डॉक्टर द्वारा शरीर के सूक्ष्म भागों की जाँच करने में,
3. कार की हेडलाइट में, टॉर्च में तथा टेबल लैम्पों के शेड में परावर्तक के रूप में।
In simple words: अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग, चिकित्सा जांच, और हेडलाइट्स जैसी चीजों में किया जाता है क्योंकि यह बड़ा और केंद्रित प्रतिबिंब बनाता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के तीन मुख्य उपयोगों को याद रखना और यह समझाना कि क्यों वे उस विशेष कार्य के लिए उपयुक्त हैं, जैसे कि प्रतिबिंब को बड़ा या केंद्रित करना, महत्वपूर्ण है।
Question 9. अवतल दर्पण द्वारा अनन्त पर स्थित वस्तु के प्रतिबिम्ब को किरण आरेख द्वारा दर्शाइए ।
Answer: अवतल दर्पण द्वारा अनन्त पर स्थित वस्तु के प्रतिबिम्ब को चित्र 9.14 में प्रदर्शित किया गया है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र अवतल दर्पण द्वारा अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है। समांतर प्रकाश किरणें (जो वस्तु से आ रही हैं) अवतल दर्पण पर आपतित होती हैं और परावर्तन के बाद फोकस (F) पर मिलती हैं, जिससे वास्तविक, उल्टा और अत्यधिक छोटा प्रतिबिंब बनता है।
In simple words: जब कोई वस्तु अवतल दर्पण से बहुत दूर होती है, तो उसकी समांतर किरणें दर्पण से टकराकर फोकस बिंदु पर मिलती हैं, जिससे एक बहुत छोटा, वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
🎯 Exam Tip: अनंत पर रखी वस्तु के लिए अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण का किरण आरेख बनाते समय, समांतर प्रकाश किरणों को फोकस बिंदु पर परिवर्तित होते हुए दिखाना महत्वपूर्ण है।
Question 10. किसी समतल परावर्ती तल पर 5000 Å का प्रकाश आपतित है। परावर्तित प्रकाश की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-परावर्तित प्रकाश की आवृत्ति \(v = \frac{c}{\lambda}\)
जहाँ c = प्रकाश का वेग
तथा \(\lambda\) = तरंगदैर्ध्य
\(v = \frac{3 \times 10^{8} \text{ मी/से}}{5000 \times 10^{-10} \text{ मी}}\)
\(v = 6 \times 10^{14} \text{ हर्ट्ज}\)
In simple words: प्रकाश की आवृत्ति को प्रकाश के वेग और उसकी तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है; दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर, 5000 Å तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश की आवृत्ति \(6 \times 10^{14}\) हर्ट्ज होगी।
🎯 Exam Tip: प्रकाश की गति (\(3 \times 10^8\) मी/से) और तरंगदैर्ध्य को मीटर में बदलने के लिए (\(1 Å = 10^{-10}\) मी) याद रखना आवश्यक है।
Question 11. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी की परिभाषा दीजिए। एक अवतल दर्पण अपने सामने से 10 सेमी दूरी पर रखी वस्तु का 3 गुना वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। दर्पण की वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer: दर्पण के ध्रुव से मुख्य फोकस तक की दूरी को गोलीय दर्पण की फोकस दूरी कहते हैं।
यहाँ, u = -10 सेमी
माना O = x होगी ।
I = 3x सेमी
हम जानते हैं कि,
\(\frac{I}{O} = - \frac{v}{u}\)
\(\implies \frac{3x}{x} = - \frac{v}{-10}\)
\(3 = \frac{v}{10}\)
\(v = 30 \text{ सेमी}\)
अब, दर्पण सूत्र \(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\) से,
\(\frac{1}{f} = \frac{1}{30} + \frac{1}{-10}\)
\(\frac{1}{f} = \frac{1-3}{30} = \frac{-2}{30}\)
\(f = - \frac{30}{2} = -15 \text{ सेमी}\)
अतः, फोकस दूरी \(f = -15 \text{ सेमी}\)
वक्रता त्रिज्या \(R = 2f\)
\(R = 2 \times (-15)\)
\(R = -30 \text{ सेमी}\)
अतः दर्पण की वक्रता त्रिज्या 30 सेमी है।
In simple words: अवतल दर्पण की फोकस दूरी वह दूरी है जहाँ समांतर किरणें दर्पण से परावर्तित होकर मिलती हैं; दिए गए प्रश्न में, वस्तु की स्थिति और आवर्धन का उपयोग करके, दर्पण की फोकस दूरी -15 सेमी और वक्रता त्रिज्या -30 सेमी पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: गोलीय दर्पण के लिए फोकस दूरी, वस्तु की दूरी और प्रतिबिंब की दूरी के बीच संबंध वाले दर्पण सूत्र (\(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\)) का उपयोग करते समय, उचित चिह्न परिपाटी का ध्यान रखें और आवर्धन सूत्र (\(m = -\frac{v}{u}\)) का भी सही उपयोग करें।
Question 12. 15 सेमी फोकस दूरी वाले एक अवतल दर्पण के सामने दर्पण से 10 सेमी दूरी पर 8 सेमी ऊँचाई की वस्तु रखी है। दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-दिया है, f = -15 सेमी, u = -10 सेमी, O = 8 सेमी
दर्पण के सूत्र \(\frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u}\) से,
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{-15} - \frac{1}{-10}\)
\(\frac{1}{v} = - \frac{1}{15} + \frac{1}{10}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{-2+3}{30} = \frac{1}{30}\)
\(v = 30 \text{ सेमी}\)
प्रतिबिम्ब की स्थिति दर्पण के ध्रुव के दायीं ओर 30 सेमी की दूरी पर है।
In simple words: अवतल दर्पण के लिए, दी गई फोकस दूरी और वस्तु की दूरी का उपयोग करके, प्रतिबिंब की दूरी 30 सेमी मिलती है, जो दर्पण के ध्रुव के दायीं ओर बनती है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के लिए दर्पण सूत्र (\(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\)) का उपयोग करते समय, अवतल दर्पण के लिए फोकस दूरी (f) और वस्तु की दूरी (u) को ऋणात्मक लेना महत्वपूर्ण है।
Question 13. वायु के सापेक्ष पानी तथा काँच के अपवर्तनांक क्रमशः तथा हैं। काँच से पानी पर आपतित प्रकाश किरण के लिए क्रान्तिक कोण का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-प्रश्नानुसार, \(^{a}n_{w} = \frac{4}{3}\) तथा \(^{a}n_{g} = \frac{3}{2}\)
अतः \(^{w}n_{g} = \frac{^{a}n_{g}}{^{a}n_{w}} = \frac{3/2}{4/3} = \frac{9}{8}\)
यदि पानी पर आपतित प्रकाश किरण के लिए क्रान्तिक कोण C हो, तो
\(\sin C = \frac{1}{^{w}n_{g}} = \frac{1}{9/8} = \frac{8}{9}\)
अतः
\(C = \sin^{-1} \left(\frac{8}{9}\right)\)
In simple words: वायु के सापेक्ष पानी और काँच के अपवर्तनांक का उपयोग करके, पानी के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक ज्ञात किया जाता है, फिर क्रान्तिक कोण C की गणना की जाती है, जो \(\sin^{-1} (8/9)\) होता है।
🎯 Exam Tip: दिए गए संदर्भों में सापेक्ष अपवर्तनांकों की गणना में विशेष ध्यान रखें। क्रान्तिक कोण का सूत्र \(\sin C = 1/n\) है, जहाँ n सघन माध्यम के सापेक्ष विरल माध्यम का अपवर्तनांक है।
Question 14. किसी लेन्स के लिए न्यूटन का सूत्र लिखिए तथा प्रतीकों के अर्थ बताइए ।
Answer: \(x'x = ff'\), जहाँ x' तथा x क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय फोकस से वस्तु की दूरियाँ एवं f' तथा f क्रमशः लेन्स की प्रथम तथा द्वितीय फोकस दूरियाँ हैं।
In simple words: न्यूटन का सूत्र लेन्स के फोकस बिंदुओं से वस्तु और उसके प्रतिबिंब की दूरियों को लेन्स की फोकस दूरियों से संबंधित करता है।
🎯 Exam Tip: न्यूटन के सूत्र में प्रयुक्त सभी प्रतीकों (x, x', f, f') का अर्थ स्पष्ट रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. लेन्स की फोकस दूरी का सूत्र लिखिए, जबकि लेन्स के दोनों ओर के माध्यम भिन्न-भिन्न हैं।
Answer: (This question is a conceptual query about a formula, but no formula or derivation is provided in the OCR extract for this specific case. I must adhere strictly to verbatim extraction and cannot generate content not present in the source.)
In simple words: लेन्स की फोकस दूरी का सूत्र लेन्स के दोनों ओर के माध्यमों के अपवर्तनांकों, लेन्स के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसकी वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है कि लेन्स की फोकस दूरी उसके आसपास के माध्यम पर निर्भर करती है।
Question 16. एक लेन्स की क्षमता + 2.5 डायोप्टर है? लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-लेन्स की फोकस दूरी \(f = \frac{1}{P} = \frac{1}{2.5} = 0.4 \text{ मी}\)
= 40 सेमी
In simple words: लेन्स की क्षमता और फोकस दूरी एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होती हैं; इसलिए, +2.5 डायोप्टर क्षमता वाले लेन्स की फोकस दूरी 0.4 मीटर या 40 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: लेन्स की क्षमता (P) और फोकस दूरी (f) के बीच का संबंध (\(P = 1/f\)) याद रखें, जहाँ f हमेशा मीटर में होता है।
Question 17. किसी उत्तल लेन्स की फोकस दूरी f, अपवर्तनांक n एवं लेन्स की वक्रता त्रिज्याओं R₁ और R2 के बीच सम्बन्ध का सूत्र लिखिए।
Answer: \(\frac{1}{f} = (n-1)\left(\frac{1}{R_{1}} - \frac{1}{R_{2}}\right)\)
In simple words: लेन्स निर्माता का सूत्र उत्तल लेन्स की फोकस दूरी को उसके पदार्थ के अपवर्तनांक और उसकी सतहों की वक्रता त्रिज्याओं से जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: लेन्स निर्माता का सूत्र (\(\frac{1}{f} = (n-1)\left(\frac{1}{R_{1}} - \frac{1}{R_{2}}\right)\)) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लेन्स से संबंधित सभी गणनाओं का आधार है। उत्तल लेन्स के लिए R1 धनात्मक और R2 ऋणात्मक होता है।
Question 18. एक उभयोत्तल लेन्स की दोनों वक्रता-त्रिज्याएँ 20 सेमी हैं तथा लेन्स के काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। लेन्स की फोकस दूरी क्या होगी ?
Answer: उत्तर- जब उभयोत्तल लेन्स की वक्रता त्रिज्याएँ समान होती हैं तब उसकी फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या के समान होती है।
अत: f = R = 20 सेमी ।
In simple words: एक उभयोत्तल लेन्स जिसकी दोनों वक्रता त्रिज्याएँ समान और 20 सेमी हैं, और काँच का अपवर्तनांक 1.5 है, उसकी फोकस दूरी 20 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: उभयोत्तल लेन्स के लिए R1 = +R और R2 = -R मानें। लेन्स निर्माता के सूत्र में मानों को सही ढंग से रखकर गणना करें।
Question 19. यदि एक उत्तल लेन्स की वायु में फोकस दूरी 20 सेमी है, तो जल में उसकी फोकस दूरी क्या होगी ?
Answer: हल-\(f_{w} = f_{a} \frac{(^{a}n_{g} - 1)}{(^{w}n_{g} - 1)}\)
यहाँ, \(^{a}n_{g}\) (वायु के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक) = 1.5
\(f_a\) = 20 सेमी
\(f_w\) = ?
\(^{w}n_{g} = \frac{^{a}n_{g}}{^{a}n_{w}} = \frac{1.5}{1.33} = 1.127\)
\(f_w = 20 \times \frac{(1.5 - 1)}{(1.127 - 1)} = 20 \times \frac{0.5}{0.127} \approx 78.74 \text{ सेमी}\)
अतः \(f_w \approx 80 \text{ सेमी}\)
In simple words: उत्तल लेन्स की फोकस दूरी जल में बदल जाती है क्योंकि अपवर्तनांक बदल जाता है; वायु में 20 सेमी फोकस दूरी वाला लेन्स जल में लगभग 80 सेमी फोकस दूरी वाला हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: किसी लेन्स की फोकस दूरी माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। जब माध्यम बदलता है, तो फोकस दूरी भी बदल जाती है। इस सूत्र \(\frac{f_w}{f_a} = \frac{(^{a}n_{g} - 1)}{(^{w}n_{g} - 1)}\) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 20. वायु के सापेक्ष काँच एवं जल का अपवर्तनांक क्रमशः एवं है। जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-यहाँ, \(^{a}n_{g} = \frac{3}{2}\) तथा \(^{a}n_{w} = \frac{4}{3}\)
अतः जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक \(^{w}n_{g} = \frac{^{a}n_{g}}{^{a}n_{w}} = \frac{3/2}{4/3} = \frac{9}{8}\)
In simple words: वायु के सापेक्ष काँच और जल के अपवर्तनांक दिए होने पर, जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक दोनों के अनुपात के रूप में ज्ञात किया जाता है, जो \(9/8\) आता है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष अपवर्तनांक की गणना के लिए सूत्र \(^{w}n_{g} = \frac{^{a}n_{g}}{^{a}n_{w}}\) को याद रखना और इसे सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 21. एक पतले समतल-उत्तल लेन्स की फोकस दूरी 20.0 सेमी है। इस लेन्स के वक्र पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए। लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक 1.5 है।
Answer: उत्तर-
\(R_{1} = \text{ ?, } R_{2} = \infty\), f = 20 सेमी तथा n = 1.5
\(\frac{1}{f} = (n-1) \left(\frac{1}{R_{1}} - \frac{1}{R_{2}}\right)\)
\(\frac{1}{20} = (1.5-1) \left(\frac{1}{R_{1}} - \frac{1}{\infty}\right)\)
\(\frac{1}{20} = 0.5 \left(\frac{1}{R_{1}}\right)\)
\(R_{1} = 20 \times 0.5 = 10 \text{ सेमी}\)
In simple words: एक समतल-उत्तल लेन्स की फोकस दूरी 20 सेमी और अपवर्तनांक 1.5 होने पर, लेन्स निर्माता के सूत्र का उपयोग करके इसके वक्र पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या 10 सेमी पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: समतल-उत्तल लेन्स के लिए एक सतह की वक्रता त्रिज्या अनंत (\(\infty\)) होती है। लेन्स निर्माता के सूत्र को सही ढंग से लागू करते समय इस तथ्य को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 22. किस दशा में लेन्स की प्रथम फोकस दूरी का मान उसकी द्वितीय फोकस दूरी के मान के बराबर नहीं होता है?
Answer: उत्तर- जब लेन्स के दोनों ओर माध्यम भिन्न-भिन्न होता है।
In simple words: जब लेन्स के दोनों ओर अलग-अलग माध्यम होते हैं, तो उसकी प्रथम और द्वितीय फोकस दूरियां समान नहीं होती हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु है कि लेन्स की फोकस दूरी आसपास के माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है।
Question 23. 20 सेमी फोकस दूरी वाले दो पतले उत्तल लेन्स सम्पर्क में रखे गये हैं। इससे 20 सेमी की दूरी पर रखी गयी वस्तु के लिए वस्तु एवं उसके प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
\(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_{1}} + \frac{1}{f_{2}}\)
\(\frac{1}{F} = \frac{1}{20} + \frac{1}{20} = \frac{2}{20} = \frac{1}{10}\)
F = 10 सेमी
दिया है, u = -20 सेमी (लेन्स से वस्तु की दूरी)
v = ? (प्रतिबिंब की दूरी)
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{F} + \frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{10} + \frac{1}{-20}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{2-1}{20} = \frac{1}{20}\)
v = 20 सेमी
वस्तु एवं उसके प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी = \(|v| - |u|\)
चूँकि वस्तु और प्रतिबिंब लेन्स के विपरीत दिशाओं में हैं,
वस्तु और प्रतिबिंब के बीच की दूरी = \(|u| + |v| = 20 + 20 = 40 \text{ सेमी}\)
In simple words: जब दो उत्तल लेन्सों को संपर्क में रखा जाता है, तो उनकी संयुक्त फोकस दूरी कम हो जाती है; इस संयुक्त लेन्स से 20 सेमी दूर रखी वस्तु का प्रतिबिंब 20 सेमी पर ही बनता है, जिससे वस्तु और प्रतिबिंब के बीच की कुल दूरी 40 सेमी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: संपर्क में रखे लेन्सों की संयुक्त फोकस दूरी ज्ञात करने के लिए \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_{1}} + \frac{1}{f_{2}}\) सूत्र का उपयोग करें, और फिर लेन्स सूत्र (\(\frac{1}{F} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}\)) का उपयोग करके प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करें।
Question 24. सम्पर्क में रखे दो पतले लेंसों के संयोजन की फोकस दूरी एवं क्षमता का सूत्र लिखिए।
Answer: \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_{1}} + \frac{1}{f_{2}}\) , \(P = P_{1} + P_{2}\)
In simple words: संपर्क में रखे दो पतले लेन्सों की संयुक्त फोकस दूरी उनके अलग-अलग फोकस दूरियों के व्युत्क्रमों का योग होती है, और उनकी संयुक्त क्षमता उनकी अलग-अलग क्षमताओं का योग होती है।
🎯 Exam Tip: संपर्क में रखे लेन्सों के लिए फोकस दूरी और क्षमता के सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये संयोजन वाले लेन्स से संबंधित गणनाओं के लिए मूलभूत हैं।
Question 25. दो उत्तल लेंस जिनमें प्रत्येक की फोकस दूरी 20 सेमी है सम्पर्क में रखे हैं। संयुक्त लेंस की क्षमता की गणना कीजिए।
Answer: हल-
दिया है, \(P_{1}\) = 20 सेमी, \(P_{2}\) = 20 सेमी
(यहाँ \(P_1\) और \(P_2\) क्षमता नहीं, फोकस दूरियाँ हैं, तो पहले क्षमता ज्ञात करें)
\(P_1 = \frac{100}{f_1} = \frac{100}{20} = 5D\)
\(P_2 = \frac{100}{f_2} = \frac{100}{20} = 5D\)
संयुक्त क्षमता \(P = P_{1} + P_{2} = 5 + 5 = 10D\)
In simple words: दो उत्तल लेन्सों को संपर्क में रखने पर, प्रत्येक की फोकस दूरी 20 सेमी होने से उनकी क्षमता 5D होती है, और उनकी संयुक्त क्षमता 10D होती है।
🎯 Exam Tip: क्षमता (डायोप्टर में) ज्ञात करने के लिए फोकस दूरी को सेमी में 100 से भाग दें। संयुक्त क्षमता \(P = P_1 + P_2\) सूत्र का उपयोग करें।
Question 26. एक लेन्स जिसकी क्षमता +2D है -1D क्षमता वाले दूसरे लेन्स के साथ युग्म बनाता है। युग्म की तुल्य फोकस दूरी क्या होगी?
Answer: हल-
दिया है, \(P_{1}\) = + 2D, \(P_{2}\) = -1D
संयुक्त क्षमता \(P = P_{1} + P_{2} = +2D + (-1D) = +1D\)
फोकस दूरी \(F = \frac{1}{P} = \frac{1}{1 \text{ D}} = 1 \text{ मीटर} = 100 \text{ सेमी}\)
In simple words: +2D और -1D क्षमता वाले लेन्सों के संयोजन से कुल क्षमता +1D होती है, जिससे संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी 1 मीटर या 100 सेमी होगी।
🎯 Exam Tip: संपर्क में रखे लेन्सों की संयुक्त क्षमता \(P = P_1 + P_2\) का उपयोग करें, और फिर संयुक्त फोकस दूरी (\(F = 1/P\)) ज्ञात करें, सुनिश्चित करें कि फोकस दूरी मीटर में हो या 100 सेमी में बदल लें।
Question 27. प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक का सूत्र लिखिए । प्रयुक्त प्रतीकों का अर्थ बताइए।
या
किसी प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक का सूत्र अल्पतम विचलन कोण एवं प्रिज्म कोण के पदों में व्यक्त कीजिए।
Answer: \(n = \frac{\sin\left(\frac{A+\delta_{m}}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}\)
जहाँ, A प्रिज्म कोण तथा \(\delta_{m}\) अल्पतम विचलन कोण है।
In simple words: प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक प्रिज्म कोण (A) और न्यूनतम विचलन कोण (\(\delta_m\)) के साइन मानों के अनुपात से निर्धारित होता है, जो दर्शाता है कि प्रकाश प्रिज्म से कितना मुड़ता है।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के अपवर्तनांक के सूत्र को सही ढंग से याद रखना और उसके प्रतीकों (A और \(\delta_m\)) का अर्थ स्पष्ट रूप से जानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रिज्म से संबंधित गणनाओं के लिए मूलभूत है।
Question 28. किसी प्रिज्म के लिये आपतन कोण तथा विचलन कोण के बीच का ग्राफ दिखाइए । विचलन कोण कब न्यूनतम होगा ?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ आपतन कोण (i) और विचलन कोण (\(\delta\)) के बीच के संबंध को दर्शाता है। विचलन कोण पहले आपतन कोण के बढ़ने के साथ घटता है, एक न्यूनतम मान (\(\delta_m\)) तक पहुंचता है, और फिर बढ़ने लगता है। न्यूनतम विचलन तब होता है जब प्रिज्म के अंदर अपवर्तित किरण आधार के समानांतर होती है, और आपतन कोण निर्गत कोण के बराबर होता है।
जब आपतन कोण तथा निर्गत कोण बराबर होते हैं, अर्थात् प्रिज्म के अन्दर अपवर्तित किरण प्रिज्म के आधार के समान्तर होती है; तब विचलन कोण न्यूनतम होगा।
In simple words: विचलन कोण पहले आपतन कोण के साथ घटता है, एक न्यूनतम बिंदु पर पहुंचता है, और फिर बढ़ता है; यह न्यूनतम विचलन तब होता है जब आपतन कोण और निर्गत कोण बराबर होते हैं।
🎯 Exam Tip: आपतन कोण और विचलन कोण के ग्राफ को याद रखना और न्यूनतम विचलन की स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें आपतन कोण निर्गत कोण के बराबर होता है।
Question 29. किसी प्रकाशिक माध्यम की वर्ण विक्षेपण क्षमता का सूत्र लिखिए।
Answer: \(\omega = \frac{n_{v} - n_{r}}{n_{y} - 1}\) जहाँ \(n_v\), \(n_r\), \(n_y\) क्रमशः बैंगनी, लाल और पीले रंगों के लिए अपवर्तनांक हैं।
In simple words: वर्ण विक्षेपण क्षमता किसी माध्यम की उस क्षमता को दर्शाती है जिससे वह श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में विभाजित करता है, जिसे विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांकों के अनुपात से मापा जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ण विक्षेपण क्षमता के सूत्र और उसमें प्रयुक्त प्रतीकों (विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांक) का अर्थ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 30. किसी पतले प्रिज्म द्वारा उत्पन्न न्यूनतम विचलन तथा कोणीय विक्षेपण के लिये सूत्र लिखिए।
Answer: न्यूनतम विचलन कोण \(\delta_{m} = (n-1)A\)
कोणीय विक्षेपण के लिए सूत्र \(\theta = (n_{v} - n_{r})A\) जहाँ \(n_{v}\) तथा \(n_{r}\) क्रमशः लाल व बैंगनी रंगों के प्रकाश के लिए प्रिज्म के काँच के अपवर्तनांक हैं तथा A प्रिज्म का कोण है।
In simple words: पतले प्रिज्म द्वारा न्यूनतम विचलन कोण प्रिज्म के अपवर्तनांक और कोण पर निर्भर करता है, जबकि कोणीय विक्षेपण लाल और बैंगनी प्रकाश के अपवर्तनांकों के अंतर पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: पतले प्रिज्म के लिए न्यूनतम विचलन और कोणीय विक्षेपण के सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये प्रिज्म से संबंधित गणनाओं के लिए मूलभूत हैं।
Question 31. न्यूनतम विचलन की क्या सार्थकता है?
Answer: न्यूनतम विचलन की सार्थकता- अल्पतम (न्यूनतम) विचलन की स्थिति में प्रिज्म के अन्दर अपवर्तित किरण प्रिज्म के आधार के समान्तर होती है तथा आपतन कोण व निर्गत कोण बराबर होते हैं।
In simple words: न्यूनतम विचलन वह स्थिति है जब प्रिज्म से निकलने वाली प्रकाश किरण प्रिज्म के आधार के समानांतर होती है, और आपतन कोण व निर्गत कोण समान होते हैं।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन की स्थिति की शर्तों को याद रखना महत्वपूर्ण है (अर्थात् अपवर्तित किरण आधार के समानांतर होती है और आपतन कोण निर्गत कोण के बराबर होता है)।
Question 32. किसी पदार्थ के लाल, बैंगनी तथा पीले रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक क्रमशः 1.52, 1.62 तथा 1.60 हैं। पदार्थ की वर्ण-विक्षेपण (परिक्षेपण) क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
\(n_{r} = 1.52\) (लाल रंग के लिए अपवर्तनांक)
\(n_{v} = 1.62\) (बैंगनी रंग के लिए अपवर्तनांक)
\(n_{y} = 1.60\) (पीले रंग के लिए अपवर्तनांक)
वर्ण विक्षेपण क्षमता \(\omega = \frac{n_{v} - n_{r}}{n_{y} - 1}\)
\(\omega = \frac{1.62 - 1.52}{1.60 - 1} = \frac{0.10}{0.60} = 0.166\)
In simple words: दिए गए लाल, बैंगनी और पीले रंगों के अपवर्तनांक का उपयोग करके, पदार्थ की वर्ण-विक्षेपण क्षमता लगभग 0.166 पाई जाती है, जो प्रकाश को रंगों में विभाजित करने की क्षमता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ण विक्षेपण क्षमता का सूत्र \(\omega = \frac{n_{v} - n_{r}}{n_{y} - 1}\) और विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांकों को सही ढंग से सूत्र में रखना महत्वपूर्ण है।
Question 33. लाल और नीले प्रकाश की किरणें एक दिये गये प्रिज्म पर डाली जाती हैं। किसके लिए अल्पतम विचलन कोण 6, का मान अधिक होगा? व्याख्या कीजिए।
Answer: उत्तर-\(\delta_{m} = (n-1) A\)
हम जानते हैं कि नीले रंग के लिए अपवर्तनांक लाल रंग के अपवर्तनांक से अधिक होता है।
\(n_{नीला} > n_{लाल}\)
\(\implies (\delta_{m})_{नीला} > (\delta_{m})_{लाल}\)
अर्थात् नीले रंग के लिए विचलन कोण \(\delta_{m}\) का मान अधिक होगा।
In simple words: चूंकि नीले प्रकाश का अपवर्तनांक लाल प्रकाश से अधिक होता है, इसलिए प्रिज्म द्वारा नीले प्रकाश के लिए न्यूनतम विचलन कोण लाल प्रकाश की तुलना में अधिक होगा।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन कोण (\(\delta_m = (n-1)A\)) का सूत्र याद रखना और यह जानना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांक भिन्न होते हैं, जिससे विचलन भी भिन्न होता है।
Question 34. काँच के एक प्रिज्म का कोण 60° है तथा अल्पतम विचलन कोण 39° है। काँच का अपवर्तनांक क्या है? दिया है, sin 49.5° = 0.76.
Answer: हल-काँच का अपवर्तनांक \(n = \frac{\sin\left(\frac{A+\delta_{m}}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}\)
यहाँ A = 60°, \(\delta_{m}\) = 39°
\(n = \frac{\sin\left(\frac{60^{\circ}+39^{\circ}}{2}\right)}{\sin\left(\frac{60^{\circ}}{2}\right)}\)
\(n = \frac{\sin(49.5^{\circ})}{\sin(30^{\circ})} = \frac{0.76}{0.5} = 1.52\)
In simple words: प्रिज्म के अपवर्तनांक के सूत्र का उपयोग करके, दिए गए प्रिज्म कोण (60°) और न्यूनतम विचलन कोण (39°) से काँच का अपवर्तनांक 1.52 पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के अपवर्तनांक के सूत्र का सही उपयोग करना और दी गई त्रिकोणमितीय मान (\(\sin 49.5^\circ = 0.76\)) का सही ढंग से उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 35. काँच से निर्मित एक पतले प्रिज्म से उत्पन्न न्यूनतम विचलन कोण 4° है। प्रिज्म कोण ज्ञात कीजिए । (काँच का अपवर्तनांक 1.5 है)।
Answer: हल-
\(\delta_{m} = (n-1)A\)
\(4^{\circ} = (1.5-1)A\)
\(4^{\circ} = 0.5A\)
\(A = \frac{4^{\circ}}{0.5} = 8^{\circ}\)
In simple words: पतले प्रिज्म के लिए न्यूनतम विचलन कोण और अपवर्तनांक का उपयोग करके, प्रिज्म कोण 8° पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: पतले प्रिज्म के लिए न्यूनतम विचलन कोण का सूत्र (\(\delta_m = (n-1)A\)) याद रखना महत्वपूर्ण है, जहाँ \(n\) अपवर्तनांक और \(A\) प्रिज्म कोण है।
Question 36. एक पतले प्रिज्म का प्रिज्म कोण 4° है तथा इसके पदार्थ का अपवर्तनांक 1.5 है। प्रिज्म द्वारा उत्पन्न न्यूनतम विचलन कोण ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-
\(\delta_{m} = (n-1)A\)
\(\delta_{m} = (1.5-1) \times 4^{\circ}\)
\(\delta_{m} = 0.5 \times 4^{\circ} = 2^{\circ}\)
In simple words: पतले प्रिज्म के प्रिज्म कोण (4°) और पदार्थ के अपवर्तनांक (1.5) का उपयोग करके, न्यूनतम विचलन कोण 2° पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: पतले प्रिज्म के लिए न्यूनतम विचलन कोण का सूत्र \(\delta_m = (n-1)A\) को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 37. न्यूनतम विचलन अवस्था में एक प्रकाश किरण एक समकोणिक प्रिज्म पर इस प्रकार आपतित होती है कि आपतन कोण, प्रिज्म कोण का है। न्यूनतम विचलन कोण ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-माना प्रिज्म कोण = A
तब आपतन कोण \(i = \frac{3}{4} A\)
न्यूनतम विचलन कोण \(\delta_{m} = ?\)
न्यूनतम विचलन की स्थिति में, \(i = \frac{A+\delta_{m}}{2}\)
\(\frac{3}{4} A = \frac{A+\delta_{m}}{2}\)
\(\frac{3}{2} A = A+\delta_{m}\)
\(\delta_{m} = \frac{3}{2} A - A = \frac{1}{2} A\)
अतः न्यूनतम विचलन कोण प्रिज्म कोण का आधा होगा।
In simple words: न्यूनतम विचलन की स्थिति में, यदि आपतन कोण प्रिज्म कोण का \(\frac{3}{4}\) गुना है, तो न्यूनतम विचलन कोण प्रिज्म कोण का आधा होगा।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन की स्थिति के लिए आपतन कोण और विचलन कोण के संबंध को याद रखें, जो \(i = \frac{A+\delta_m}{2}\) होता है।
Question 38. किसी पतले प्रिज्म से उत्पन्न न्यूनतम विचलन कोण 10° है। प्रिज्म कोण ज्ञात कीजिए। प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक 1.5 है।
Answer: हल-दिया है, विचलन कोण, \(\delta_{m}\) = 10°, n = 1.5
\(\delta_{m} = (n-1)A\)
\(10^{\circ} = (1.5-1)A\)
\(10^{\circ} = 0.5A\)
\(A = \frac{10}{0.5} = 20^{\circ}\)
अतः प्रिज्म कोण 20° है।
In simple words: पतले प्रिज्म के न्यूनतम विचलन कोण (10°) और अपवर्तनांक (1.5) का उपयोग करके, प्रिज्म कोण 20° पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: पतले प्रिज्म के लिए न्यूनतम विचलन कोण का सूत्र \(\delta_m = (n-1)A\) को याद रखें और इसे सही ढंग से लागू करें।
Question 39. 63° कोण वाले प्रिज्म का पीले प्रकाश के लिए विचलन कोण 29° है। आपतन कोण ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-दिया है, प्रिज्म कोण (A) = 63°
विचलन कोण \(\delta_{m}\) = 29°
न्यूनतम विचलन की स्थिति में आपतन कोण \(i = \frac{(A+\delta_{m})}{2}\) से,
\(i = \frac{(63^{\circ}+29^{\circ})}{2} = \frac{92^{\circ}}{2} = 46^{\circ}\)
In simple words: न्यूनतम विचलन की स्थिति में, आपतन कोण को प्रिज्म कोण और न्यूनतम विचलन कोण के योग का आधा करके ज्ञात किया जाता है, जो 46° आता है।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन की स्थिति में आपतन कोण \(i = \frac{(A+\delta_m)}{2}\) का सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 40. किसी प्रिज्म के पदार्थ की वर्ण विक्षेपण क्षमता से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- जब सूर्य का श्वेत प्रकाश एक पतले प्रिज्म में से गुजरता है, तो बैंगनी तथा लाल रंगों की निर्गत किरणों के बीच उत्पन्न कोणीय परिक्षेपण तथा मध्यवर्ती (अर्थात् पीले रंग की किरण के लिए विचलन कोण के अनुपात को प्रिज्म के पदार्थ की वर्ण विक्षेपण क्षमता कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर \(\omega\) (ओमेगा) से प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: वर्ण विक्षेपण क्षमता वह गुण है जो यह मापता है कि प्रिज्म श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में कितनी कुशलता से फैलाता है, जिसे बैंगनी और लाल रंगों के कोणीय परिक्षेपण और पीले रंग के विचलन कोण के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ण विक्षेपण क्षमता की परिभाषा को याद रखें, जिसमें कोणीय परिक्षेपण (बैंगनी और लाल प्रकाश के बीच) और मध्यवर्ती किरण (पीले प्रकाश) के विचलन कोण का अनुपात शामिल है।
Question 41. फ्लिन्ट काँच के लिए बैंगनी एवं लाल रंगों के प्रकाश हेतु अपवर्तनांक क्रमशः 1.632 तथा 1.613 हैं। प्रिज्म के पदार्थ की विक्षेपण क्षमता की गणना कीजिए।
Answer: उत्तर- दिया है, \(n_{v} = 1.632\), \(n_{r} = 1.613\)
मध्यवर्ती (पीली) किरण के लिए अपवर्तनांक
\(n_{y} = \frac{n_{v} + n_{r}}{2} = \frac{1.632+1.613}{2} = \frac{3.245}{2} = 1.6225\)
यहाँ, \(n_y \approx 1.62\)
वर्ण विक्षेपण क्षमता \(\omega = \frac{n_{v} - n_{r}}{n_{y} - 1}\)
\(\omega = \frac{1.632 - 1.613}{1.62 - 1} = \frac{0.019}{0.62} \approx 0.0306\)
In simple words: फ्लिन्ट काँच के बैंगनी और लाल रंगों के लिए दिए गए अपवर्तनांक का उपयोग करके, पीले रंग के लिए माध्य अपवर्तनांक की गणना की जाती है, और फिर पदार्थ की वर्ण विक्षेपण क्षमता लगभग 0.0306 पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: वर्ण विक्षेपण क्षमता का सूत्र \(\omega = \frac{n_{v} - n_{r}}{n_{y} - 1}\) का सही उपयोग करें, और पीले रंग के लिए अपवर्तनांक (\(n_y\)) को बैंगनी और लाल रंगों के औसत के रूप में ज्ञात करना याद रखें।
Question 42. नेत्र की समंजन क्षमता से आप क्या समझते हैं ?
Answer: उत्तर- नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण नेत्र लेन्स की फोकस दूरी में परिवर्तन कर नजदीक व दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है।
In simple words: समंजन क्षमता आँखों की वह प्राकृतिक क्षमता है जिससे वे अपनी फोकस दूरी को बदलकर अलग-अलग दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाती हैं।
🎯 Exam Tip: समंजन क्षमता की परिभाषा को याद रखें, जिसमें नेत्र लेन्स की फोकस दूरी को बदलकर विभिन्न दूरियों पर वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता का उल्लेख हो।
Question 43. एक व्यक्ति को पुस्तक पढ़ने के लिए पुस्तक को आँख से 35 सेमी दूर रखना पड़ता है। इस व्यक्ति के नेत्र में कौन-सा दोष है?
Answer: उत्तर- दूर-दृष्टि दोष ।
In simple words: यदि किसी व्यक्ति को पुस्तक पढ़ने के लिए उसे 35 सेमी दूर रखना पड़ता है, तो उसे दूर-दृष्टि दोष है, क्योंकि सामान्य निकट बिंदु 25 सेमी होता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य नेत्र के लिए निकट बिंदु 25 सेमी होता है। यदि कोई व्यक्ति 25 सेमी से अधिक दूरी पर ही स्पष्ट देख पाता है, तो उसे दूर-दृष्टि दोष होता है।
Question 44. मनुष्य की आँख के रेटिना के कार्य का उल्लेख कीजिए।
Answer: उत्तर-
रेटिना प्रकाश-शिराओं की एक फिल्म होती है, जो वस्तुओं के प्रतिबिम्बों के रूप-रंग और आकार का ज्ञान मस्तिष्क तक पहुँचाती है। जिस स्थान पर प्रकाश-शिरा रेटिना को छेदकर मस्तिष्क में जाती है, उस स्थान पर प्रकाश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस स्थान को अंध-बिन्दु कहते हैं। रेटिना के बीचों-बीच एक पीत-बिन्दु होता है।
In simple words: रेटिना आँख का वह हिस्सा है जो प्रकाश को पहचानता है और वस्तुओं के रंग, आकार और प्रकाश को मस्तिष्क तक पहुँचाता है, जिसमें अंध-बिंदु और पीत-बिंदु जैसे महत्वपूर्ण भाग होते हैं।
🎯 Exam Tip: रेटिना के मुख्य कार्यों को याद रखें: प्रतिबिंब बनाना, रंग और आकार की जानकारी मस्तिष्क तक पहुंचाना, और अंध-बिंदु तथा पीत-बिंदु के महत्व को समझना।
Question 45. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी से उत्तम क्यों माना जाता है?
Answer: उत्तर- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी की तुलना में किसी वस्तु का लगभग 5000 गुना आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाता है, इसलिए यह प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी से उत्तम माना जाता है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी से बेहतर है क्योंकि यह वस्तुओं को 5000 गुना अधिक बड़ा करके दिखाता है, जिससे बहुत छोटे विवरण भी देखे जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की प्रमुख विशेषता (उच्च आवर्धन क्षमता) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जिससे इसे प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी से बेहतर माना जाता है।
Question 46. किसी प्रकाशिक यन्त्र की विभेदन क्षमता से क्या तात्पर्य है?
Answer: उत्तर- किसी प्रकाशिक यन्त्र की दो पास-पास रखी वस्तुओं के प्रतिबिम्बों को अलग-अलग करने की क्षमता को विभेदन क्षमता (resolving power) कहते हैं।
In simple words: विभेदन क्षमता वह माप है कि कोई ऑप्टिकल उपकरण कितनी अच्छी तरह दो बहुत करीब की वस्तुओं को अलग-अलग छवियों के रूप में दिखा सकता है।
🎯 Exam Tip: विभेदन क्षमता की परिभाषा को याद रखें: दो पास-पास रखी वस्तुओं के प्रतिबिंबों को अलग-अलग करने की क्षमता।
Question 47. आँख पर चन्द्रमा का दर्शन कोण 0.6° है। दूरदर्शी के अभिदृश्यक एवं नेत्रिका की फोकस दूरियाँ क्रमशः 200 सेमी एवं 10 सेमी हैं। दूरदर्शी से देखने पर चन्द्रमा का दर्शन कोण कितना होगा?
Answer: हल-आवर्धन क्षमता \(M = - \frac{f_{o}}{f_{e}} = - \frac{200}{10} = -20\)
जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनता है, तो आवर्धन क्षमता \(|M| = 20\)
अन्तिम प्रतिबिम्ब द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण (\(\beta\)) = \(M \times \text{चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण } (\alpha)\)
\(\beta = M \times \alpha\)
अतः दूरदर्शी द्वारा देखने पर चन्द्रमा द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण
\(\beta = 20 \times 0.6^{\circ} = 12^{\circ}\)
In simple words: दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता (20) का उपयोग करके, चंद्रमा का वास्तविक दर्शन कोण (0.6°) को 20 से गुणा करने पर दूरदर्शी द्वारा देखा गया दर्शन कोण 12° प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता (\(M = -\frac{f_o}{f_e}\)) और यह संबंध कि \(\beta = M \times \alpha\) को याद रखें, जहाँ \(\alpha\) वस्तु का वास्तविक दर्शन कोण है और \(\beta\) प्रतिबिंब का दर्शन कोण है।
Question 48. दूरदर्शी के अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा क्यों बनाया जाता है?
Answer: उत्तर- दूरदर्शी की विभेदन क्षमता तथा प्रतिबिम्ब की तीव्रता बढ़ाने के लिए इसके अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा बनाया जाता है।
In simple words: दूरदर्शी के अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा बनाने से उसकी विभेदन क्षमता और प्रतिबिंब की चमक दोनों बढ़ जाती हैं, जिससे बेहतर और स्पष्ट दृश्य प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: अभिदृश्यक के बड़े द्वारक के दो मुख्य लाभ याद रखें: विभेदन क्षमता में वृद्धि और प्रतिबिंब की अधिक तीव्रता।
Question 49. 50 सेमी द्वारक के अभिदृश्यक लेन्स वाले दूरदर्शी की विभेदन सीमा कितनी होगी? अभिदृश्यक लेन्स में आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \(\lambda\) = 6000 Å है।
Answer: हल-विभेदन सीमा = \(\frac{1.22 \lambda}{d}\)
यहाँ, \(\lambda\) = 6000 Å = \(6000 \times 10^{-10}\) मीटर
d = 50 सेमी = \(50 \times 10^{-2}\) मीटर
विभेदन सीमा = \(\frac{1.22 \times 6000 \times 10^{-10}}{50 \times 10^{-2}} \text{ रेडियन}\)
= \(\frac{1.22 \times 6}{5} \times 10^{-8} \text{ रेडियन}\)
= \(0.1464 \times 10^{-5} \text{ रेडियन}\)
In simple words: दूरदर्शी की विभेदन सीमा की गणना अभिदृश्यक के द्वारक और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके की जाती है, जो दिए गए मानों के साथ लगभग \(0.1464 \times 10^{-5}\) रेडियन आती है।
🎯 Exam Tip: दूरदर्शी की विभेदन सीमा का सूत्र \(\frac{1.22 \lambda}{d}\) याद रखें और गणना करते समय सभी इकाइयों को SI इकाइयों (मीटर और रेडियन) में बदलें।
Question 50. सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा हेतु व्यंजक लिखिए । प्रयुक्त संकेतों के अर्थ लिखिए।
Answer: उत्तर-
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा = \(\frac{1.22 \lambda}{2n \sin \alpha}\)
जहाँ, \(\lambda\) = प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, n = वस्तु एवं अभिदृश्यक लेन्स के बीच उपस्थित माध्यम का अपवर्तनांक, \(\alpha\) = वस्तु एवं अभिदृश्यक के बीच बने प्रकाश शंकु का अर्द्धशीर्ष कोण ।
In simple words: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा यह दर्शाती है कि वह कितनी बारीकी से दो पास-पास की वस्तुओं को अलग कर सकता है, और यह सूत्र प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, माध्यम के अपवर्तनांक और प्रकाश शंकु के कोण पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा के सूत्र \(\frac{1.22 \lambda}{2n \sin \alpha}\) को याद रखें और उसमें प्रयुक्त प्रतीकों (\(\lambda\), n, \(\alpha\)) का अर्थ स्पष्ट रूप से जानें।
Question 51. परावर्ती दूरदर्शी में परवलयाकार दर्पण के द्वारक का मान अधिक क्यों रखा जाता है।
Answer: उत्तर- जिससे दूरदर्शी में अधिक प्रकाश प्रवेश कर सके तथा प्रतिबिम्ब चमकीला बने ।
In simple words: परावर्ती दूरदर्शी में परवलयाकार दर्पण का द्वारक बड़ा इसलिए रखा जाता है ताकि अधिक प्रकाश इकट्ठा हो सके और प्रतिबिंब अधिक चमकीला और स्पष्ट बने।
🎯 Exam Tip: परावर्ती दूरदर्शी में बड़े द्वारक के मुख्य लाभों को याद रखें: अधिक प्रकाश संग्रह और चमकीला प्रतिबिंब।
Question 52. -2D क्षमता वाले लेन्स का उपयोग करने वाले व्यक्ति को दूर बिन्दु कितनी दूरी पर होगा?
Answer: हल-लेन्स की क्षमता, \(P = -2D\)
तब फोकस दूरी, \(f = \frac{100}{P} = \frac{100}{-2} = -50 \text{ सेमी}\)
यहाँ u = \(\infty\), v = ?
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{v} = \frac{1}{-50} + \frac{1}{\infty}\)
\(\frac{1}{v} = - \frac{1}{50}\)
\(v = -50 \text{ सेमी}\)
अतः व्यक्ति का दूर बिन्दु 50 सेमी पर होगा।
In simple words: -2D क्षमता वाले लेन्स की फोकस दूरी -50 सेमी होती है; चूंकि यह लेन्स अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब 50 सेमी पर बनाता है, इसलिए व्यक्ति का दूर बिंदु 50 सेमी पर होगा।
🎯 Exam Tip: लेन्स की क्षमता (\(P\)) और फोकस दूरी (\(f\)) के बीच का संबंध (\(f = 1/P\)) याद रखें, और दूर बिंदु के लिए वस्तु को अनंत पर मानें (\(u = \infty\))।
Question 53. निकट दृष्टि दोष वाला व्यक्ति 15 सेमी दूर की वस्तु स्पष्ट देख सकता है। 25 सेमी दूर वस्तु को स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी निकालिए।
Answer: हल-दिया है, u = -25 सेमी, v = -15 सेमी
सूत्र \(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}\) से,
\(\frac{1}{f} = \frac{1}{-15} - \frac{1}{-25}\)
\(\frac{1}{f} = - \frac{1}{15} + \frac{1}{25}\)
\(\frac{1}{f} = \frac{-5+3}{75} = \frac{-2}{75}\)
\(f = - \frac{75}{2} = -37.5 \text{ सेमी}\)
In simple words: 15 सेमी पर स्पष्ट देखने वाला व्यक्ति 25 सेमी पर वस्तु को स्पष्ट देखने के लिए -37.5 सेमी फोकस दूरी वाले अवतल लेन्स का उपयोग करेगा।
🎯 Exam Tip: लेन्स सूत्र (\(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}\)) का उपयोग करते समय, उचित चिह्न परिपाटी का ध्यान रखें। अवतल लेन्स के लिए फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. प्रकाश के अपवर्तन से आप क्या समझते हैं? इसके नियम लिखिए ।
Answer: प्रकाश का अपवर्तन- जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करता है, तो दूसरे माध्यम में जाने पर इसका वेग तथा दिशा बदल जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रकाश के अपवर्तन को दर्शाता है जहाँ एक प्रकाश किरण विरल माध्यम (जैसे वायु) से सघन माध्यम (जैसे तेल) में प्रवेश करती है। आपतित किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है, जिससे उसका पथ बदल जाता है। यह स्नेल के नियम के अनुसार होता है जो प्रकाश के वेग और दिशा में परिवर्तन को दर्शाता है।
अपवर्तन के नियम-
प्रकाश का अपवर्तन निम्न दो नियमों के अनुसार होता है-
(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
(ii) किन्हीं दो माध्यमों के लिए तथा एक निश्चित रंग (तरंगदैर्ध्य) के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या की निष्पत्ति एक नियतांक होती है। यदि आपतन कोण i व अपवर्तन कोण r हैं, तो \(\frac{\sin i}{\sin r}\) = नियतांक
इस नियम को स्नेल का नियम (Snell's Law) कहते हैं तथा इस नियतांक को पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक (refractive index) कहते हैं। यदि पहले व दूसरे माध्यम : को 1 व 2 से निरूपित करें, तो माध्यम 2 का 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक \(^{1} n_{2}\) से प्रदर्शित करते हैं।
इस प्रकार
= किसी पदार्थ का अपवर्तनांक (n) (i) माध्यम की प्रकृति, (ii) माध्यम की भौतिक अवस्था, (iii) प्रकाश के रंग तथा (iv) माध्यम के ताप पर निर्भर करता है।
In simple words: प्रकाश का अपवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर अपनी दिशा और गति बदल देती है, और इसके दो मुख्य नियम हैं: आपतित किरण, अपवर्तित किरण, और अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं, तथा साइन (i) और साइन (r) का अनुपात स्थिर रहता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश के अपवर्तन की परिभाषा और स्नेल के नियम (दोनों नियम) को पूरी तरह से याद रखें, क्योंकि यह प्रकाशिकी में एक मूलभूत अवधारणा है।
Question 2. किसी अवतल दर्पण के लिए सूत्र की स्थापना कीजिए, जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।
Answer: हल-
माना कि \(M_{1} M_{2}\) एक अवतल दर्पण है जिसका ध्रुव P है, फोकस F है तथा वक्रता केन्द्र C है (चित्र 9.17)। इसकी मुख्य अक्ष के किसी बिन्दु पर एक वस्तु AB रखी है। वस्तु के सिरे A से मुख्य अक्ष के समानान्तर चलने वाली आपतित किरण AM दर्पण के बिन्दु M से टकराती है। परावर्तन के पश्चात् यह किरण दर्पण के फोकस F से होकर गुजरती है। दूसरी किरण AO दर्पण के वक्रता केन्द्र से होकर जाती है तथा परावर्तन के पश्चात् उसी मार्ग से वापस लौट जाती है। दोनों परावर्तित किरणें बिन्दु A' पर काटती हैं। इस बिन्दु A' से मुख्य अक्ष पर डाला गया लम्ब A' B', वस्तु AB की प्रतिबिम्ब है। अब, माना कि वस्तु AB की दर्पण के ध्रुव से दूरी PB = -u, प्रतिबिम्ब A'B' की दूरी PB' = -v, दर्पण की वक्रता त्रिज्या PC = -R तथा दर्पण की फोकस दूरी PF = -f है। (ये सभी दूरियाँ चूंकि आपतित किरण के चलने की दिशा के विपरीत दिशा में नापी जाती हैं अर्थात् दर्पण के बायीं ओर हैं; अतः चिह्न परिपाटी के अनुसार ये दूरियाँ ऋणात्मक हैं।)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र अवतल दर्पण के सामने रखी वस्तु AB का किरण आरेख और उसके प्रतिबिंब A'B' के निर्माण को दर्शाता है। समांतर किरण AM परावर्तन के बाद फोकस F से गुजरती है, जबकि वक्रता केंद्र C से गुजरने वाली किरण AO परावर्तन के बाद अपने ही पथ पर वापस लौट आती है। ये परावर्तित किरणें A' पर मिलती हैं, जिससे वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है, जो दर्पण सूत्र की व्युत्पत्ति के लिए आधार प्रदान करता है।
\(\triangle ABC\) तथा \(\triangle A'B'C\) समकोणिक हैं।
अतः \(\frac{AB}{A'B'} = \frac{CB}{B'C}\) ...(1)
इसी प्रकार, \(\triangle A'B'F\) तथा \(\triangle MNF\) भी समकोणिक हैं।
\(\frac{MN}{A'B'} = \frac{NF}{FB'}\) ...(2)
परन्तु MN = AB,
\(\frac{AB}{A'B'} = \frac{NF}{FB'}\) ...(3)
समीकरण (1) व (3) की तुलना करने पर,
\(\frac{CB}{B'C} = \frac{NF}{FB'}\) ...(4)
माना दर्पण पर बिन्दु M, ध्रुव P के बहुत समीप है, तब N व P बिन्दु अत्यन्त निकट होंगे। उस स्थिति में
NF = PF (लगभग)
यह मान समीकरण (4) में रखने पर,
\(\frac{CB}{B'C} = \frac{PF}{FB'}\) अथवा \(\frac{PB-PC}{PC-PB'} = \frac{PF}{PB'-PF}\)
चिह्न सहित मान रखने पर,
\(\frac{-u-(-R)}{-R-(-v)} = \frac{-f}{-v-(-f)}\)
\(\frac{-u+R}{-R+v} = \frac{-f}{-v+f}\)
परन्तु R = 2f,
\(\frac{-u+2f}{-2f+v} = \frac{-f}{-v+f}\)
या \((-u+2f)(-v+f) = -f(-2f+v)\)
\((uv - uf - 2fv + 2f^{2}) = (2f^{2} - fv)\)
\(uv - uf - 2fv + fv = 0\)
\(uv - uf - fv = 0\)
दोनों पक्षों में uvf से भाग करने पर,
\(\frac{1}{f} - \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = 0\)
\(\frac{1}{f} = \frac{1}{u} + \frac{1}{v}\)
यही सूत्र अवतल दर्पण के लिए फोकस दूरी तथा दर्पण से वस्तु और प्रतिबिम्ब की दूरियों में सम्बन्ध का सूत्र है।
In simple words: अवतल दर्पण के लिए दर्पण सूत्र (\(\frac{1}{f} = \frac{1}{u} + \frac{1}{v}\)) को ज्यामितीय विधि का उपयोग करके व्युत्पन्न किया जा सकता है, जिसमें त्रिभुजों की समानता और चिह्न परिपाटी का ध्यान रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: दर्पण सूत्र की व्युत्पत्ति के लिए, किरण आरेख और ज्यामितीय सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण है। चिह्न परिपाटी का सही उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 3. परस्पर सम्पर्क में रखे दो पतले लेन्सों के संयोजन की फोकस दूरी के लिए सूत्र की स्थापना कीजिए।
या
परस्पर सम्पर्क में रखे दो पतले उत्तल लेन्सों के संयोजन की फोकस दूरी F के लिए सूत्र की स्थापना कीजिए, जहाँ f1 तथा f2 क्रमशः दोनों लेन्सों की फोकस दूरियाँ हैं।
Answer: उत्तर-
चित्र 9.18 के अनुसार दो पतले उत्तल लेन्सों \(L_{1}\) व \(L_{2}\) को सम्पर्क में रखकर एक संयुक्त लेन्स बनाया गया है। माना इनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः \(f_{1}\) व \(f_{2}\) हैं तथा इस संयुक्त लेन्स द्वारा बिन्दु-वस्तु O का प्रतिबिम्ब I पर बनता है। प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया को निम्न प्रकार समझा जा सकता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र संपर्क में रखे दो पतले उत्तल लेन्सों L1 और L2 के संयोजन को दर्शाता है। एक बिंदु वस्तु O से आने वाली प्रकाश किरणें पहले लेन्स L1 से अपवर्तित होती हैं और एक आभासी प्रतिबिंब I' बनाती हैं। यह आभासी प्रतिबिंब I' दूसरे लेन्स L2 के लिए एक वस्तु का काम करता है, जो अंततः एक वास्तविक प्रतिबिंब I बनाता है। यह आरेख संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी के सूत्र की व्युत्पत्ति को समझने में मदद करता है।
यदि \(L_{2}\) लेन्स न हो तो वस्तु O का प्रतिबिम्ब लेन्स \(L_{1}\) द्वारा I' पर बनता । यदि I' की \(L_{1}\) से दूरी v' हो तथा \(L_{1}\) से O की दूरी u हो, तो लेन्स के सूत्र से
\(\frac{1}{v'} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_{1}}\)
अब, प्रतिबिम्ब I' लेन्स \(L_{2}\) के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है जो इसका प्रतिबिम्ब I पर बनाता है। प्रतिबिम्ब I की \(L_{2}\) से दूरी v हो, तो लेन्स के सूत्र से,
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{v'} = \frac{1}{f_{2}}\)
समी० (1) व समी० (2) को जोड़ने पर
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_{1}} + \frac{1}{f_{2}}\)
यदि इन दोनों लेन्सों के स्थान पर एक ऐसे पतले लेन्स का प्रयोग करें जो u दूरी पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब v दूरी पर बनाये, तो लेन्स की फोकस दूरी F के लिए ।
\(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{F}\)
समी० (3) व समी० (4) की तुलना करने पर
\(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_{1}} + \frac{1}{f_{2}}\)
इस सूत्रे से संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी की गणना की जा सकती है।
समीकरण (5) प्राप्त करने के लिए दो उत्तल लेन्सों को सम्पर्क में रखा हुआ माना गया है, परन्तु यह समीकरण ऐसे संयुक्त लेन्स के लिए भी सही है जो एक उत्तल एवं एक अवतल लेन्स से बना हो, अथवा दो अवतल लेन्सों से बना हो । समीकरण (5) का उपयोग करते समय इस बात को ध्यान में रखते हैं कि उत्तल लेन्स के लिए फोकस दूरी धनात्मक एवं अवतल लेन्स की फोकस दूरी ऋणात्मक लेते हैं। यदि \(L_{1}\) उत्तल लेन्स एवं \(L_{2}\) अवतल लेन्स हो, तो
• यदि \(f_{1} > f_{2}\), तब F ऋणात्मक होगा और संयुक्त लेन्स अवतल लेन्स की भाँति कार्य करेगा।
• यदि \(f_{1} < f_{2}\), तब F धनात्मक होगा और संयुक्त लेन्स उत्तल लेन्स की भाँति कार्य करेगा।
• यदि \(f_{1} = f_{2}\), तब F अनन्त होगा और संयुक्त लेन्स समतल प्लेट की भाँति कार्य करेगा।
In simple words: संपर्क में रखे दो पतले लेन्सों की संयुक्त फोकस दूरी का सूत्र \(\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2}\) उनकी अलग-अलग फोकस दूरियों के व्युत्क्रमों के योग से प्राप्त होता है, और यह संयोजन की प्रकृति को निर्धारित करता है।
🎯 Exam Tip: संपर्क में रखे लेन्सों की फोकस दूरी के सूत्र की व्युत्पत्ति को याद रखें, जिसमें लेन्स सूत्र का दो बार उपयोग करके पहले लेन्स द्वारा बने प्रतिबिंब को दूसरे लेन्स के लिए वस्तु के रूप में माना जाता है।
Question 3. परस्पर सम्पर्क में रखे दो पतले लेन्सों के संयोजन की फोकस दूरी के लिए सूत्र की स्थापना कीजिए। (2011, 15, 16, 17)
या
परस्पर सम्पर्क में रखे दो पतले उत्तल लेन्सों के संयोजन की फोकस दूरी F के लिए सूत्र की स्थापना कीजिए, जहाँ f1 तथा f2 क्रमशः दोनों लेन्सों की फोकस दूरियाँ हैं।
या
f₁ फोकस दूरी को उत्तल लेन्स f2 फोकस दूरी के अवतल लेन्स के सम्पर्क में रखा है। संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी एवं प्रकृति ज्ञात कीजिए, जबकि f1 < f2.
Answer:उत्तर- चित्र 9.18 के अनुसार दो पतले उत्तल लेन्सों \(L_1\) व \(L_2\) को सम्पर्क में रखकर एक संयुक्त लेन्स बनाया गया है। माना इनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः \(f_1\) व \(f_2\) हैं तथा इस संयुक्त लेन्स द्वारा बिन्दु-वस्तु O का प्रतिबिम्ब \(I\) पर बनता है। प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया को निम्न प्रकार समझा जा सकता है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो उत्तल लेंसों \(L_1\) और \(L_2\) को संपर्क में दर्शाता है। एक वस्तु O को लेंसों के सामने रखा गया है, और उसका अंतिम प्रतिबिंब I बनता हुआ दिखाया गया है। लेंसों से प्रकाश के अपवर्तन के पथ को दर्शाया गया है, जहाँ \(L_1\) वस्तु O का आभासी प्रतिबिंब I' बनाता है, जो फिर \(L_2\) के लिए वस्तु का काम करता है और अंतिम प्रतिबिंब I देता है। यदि \(L_2\) लेन्स न हो तो वस्तु O का प्रतिबिम्ब लेन्स \(L_1\) द्वारा \(I'\) पर बनता । यदि \(I'\) की \(L_1\) से दूरी \(v'\) हो तथा \(L_1\) से O की दूरी \(u\) हो, तो लेन्स के सूत्र से \( \frac{1}{v'} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1} \) अब, प्रतिबिम्ब \(I'\) लेन्स \(L_2\) के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता है जो इसका प्रतिबिम्ब \(I\) पर बनाता है। प्रतिबिम्ब \(I\) की \(L_2\) से दूरी \(v\) हो, तो लेन्स के सूत्र से, \( \frac{1}{v} - \frac{1}{v'} = \frac{1}{f_2} \) समी० (1) व समी० (2) को जोड़ने पर \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} \) यदि इन दोनों लेन्सों के स्थान पर एक ऐसे पतले लेन्स का प्रयोग करें जो \(u\) दूरी पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब \(v\) दूरी पर बनाये, तो लेन्स की फोकस दूरी \(F\) के लिए \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{F} \) समी० (3) व समी० (4) की तुलना करने पर \( \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} \) इस सूत्रे से संयुक्त लेन्स की फोकस दूरी की गणना की जा सकती है। समीकरण (5) प्राप्त करने के लिए दो उत्तल लेन्सों को सम्पर्क में रखा हुआ माना गया है, परन्तु यह समीकरण ऐसे संयुक्त लेन्स के लिए भी सही है जो एक उत्तल एवं एक अवतल लेन्स से बना हो, अथवा दो अवतल लेन्सों से बना हो । समीकरण (5) का उपयोग करते समय इस बात को ध्यान में रखते हैं कि उत्तल लेन्स के लिए फोकस दूरी धनात्मक एवं अवतल लेन्स की फोकस दूरी ऋणात्मक लेते हैं। यदि \(L_1\) उत्तल लेन्स एवं \(L_2\) अवतल लेन्स हो, तो - यदि \(f_1 > f_2\), तब \(F\) ऋणात्मक होगा और संयुक्त लेन्स अवतल लेन्स की भाँति कार्य करेगा। - यदि \(f_1 < f_2\), तब \(F\) धनात्मक होगा और संयुक्त लेन्स उत्तल लेन्स की भाँति कार्य करेगा। - यदि \(f_1 = f_2\), तब \(F\) अनन्त होगा और संयुक्त लेन्स समतल प्लेट की भाँति कार्य करेगा।
In simple words: जब दो पतले लेंसों को संपर्क में रखा जाता है, तो उनकी संयुक्त फोकस दूरी उनके व्यक्तिगत फोकस दूरियों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होती है। यह सूत्र लेंसों के प्रकार (उत्तल या अवतल) और उनकी फोकस दूरियों के आधार पर संयुक्त लेंस की प्रकृति (अभिसारी या अपसारी) निर्धारित करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: यह व्युत्पत्ति लेंसों के संयोजन के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है और इसे अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है। सूत्रों को सही ढंग से लिखना और प्रतीकों का उचित उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. एक लेन्स जिसकी फोकस दूरी \(f\) है, एक दीप्त वस्तु का चित्र पर्दे पर \(m\) गुना बड़ा बनाता है। सिद्ध कीजिए कि पर्दे की लेन्स से दूरी \((m + 1) f\) है।
Answer:हल- लेन्स सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) के दोनों पक्षों में \(v\) से गुणा करने पर \( 1 - \frac{v}{u} = \frac{v}{f} \) या \( 1 - m = \frac{v}{f} \) (\( \because \frac{v}{u} = \) आवर्धन \(m\)) \( v = f (1-m) \) ...(1) परन्तु पर्दे पर प्राप्त चित्र वास्तविक होता है जिसके लिए \(m\) ऋणात्मक होता है। अतः समी॰ (1) में \(m\) के स्थान पर \((-m)\) रखने पर पर्दे की लेन्स से दूरी \(v = f (1 + m) = (m + 1) f\).
In simple words: यह व्युत्पत्ति दर्शाती है कि जब एक लेंस किसी वस्तु का m गुना वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है, तो पर्दे और लेंस के बीच की दूरी लेंस की फोकस दूरी और (1+m) के गुणनफल के बराबर होती है। यह वास्तविक प्रतिबिंबों के लिए आवर्धन और दूरी के संबंध को स्पष्ट करता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के व्युत्पत्ति वाले प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। सुनिश्चित करें कि आप आवर्धन के लिए सही चिह्न परिपाटी (वास्तविक प्रतिबिंब के लिए ऋणात्मक m) का उपयोग करें।
Question 5. एक उत्तल लेन्स 20 सेमी फोकस दूरी का तथा एक अवतल लेन्स 25 सेमी फोकस दूरी का, सम्पर्क में रखे गये हैं। इस युग्म से 2 मी दूरी पर रखी वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- प्रश्नानुसार, उत्तल लेन्स की फोकस दूरी \(f_1 = +20\) सेमी तथा अवतल लेन्स की फोकस-दूरी \(f_2 = -25\) सेमी । यदि इन लेसों को परस्पर सम्पर्क में रखने पर बने लेन्स युग्म की फोकस दूरी \(F\) हो, तो \( \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} \) \( \frac{1}{F} = \frac{1}{20} + \frac{1}{-25} = \frac{5-4}{100} = \frac{1}{100} \) \( F = 100 \) सेमी \( = 1 \) मीटर युग्म से वस्तु की दूरी \(u = -2\) मीटर। यदि युग्म से प्रतिबिम्ब की दूरी \(v\) हो, तो लेन्स सूत्र से, \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{F} \) \( \frac{1}{v} = \frac{1}{F} + \frac{1}{u} = \frac{1}{1} + \frac{1}{-2} = \frac{2-1}{2} = \frac{1}{2} \) या \( v = 2 \) मीटर अतः आवर्धन \( (m) = \frac{v}{u} = \frac{2 \text{ मीटर}}{-2 \text{ मीटर}} = -1 \) प्रतिबिम्ब के आकार तथा वस्तु के आकार का अनुपात आवर्धन \((m)\) होता है। अतः प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होगा। आवर्धन \((m)\) का ऋणात्मक चिह्न इस बात का प्रतीक है कि प्रतिबिम्ब उल्टा बनेगा। इस प्रकार प्रतिबिम्ब युग्म से 2 मीटर दूरी पर वस्तु की दिशा की विपरीत दिशा में अर्थात् युग्म के पीछे उल्टा, वास्तविक तथा आकार में वस्तु के बराबर बनेगा ।
In simple words: जब उत्तल और अवतल लेंसों को संपर्क में रखा जाता है, तो उनकी संयुक्त फोकस दूरी 100 सेमी (1 मीटर) होती है। 2 मीटर दूर रखी वस्तु का प्रतिबिंब लेंसों के पीछे 2 मीटर पर वास्तविक और उल्टा बनेगा, और उसका आकार वस्तु के आकार के बराबर होगा।
🎯 Exam Tip: लेंस संयोजन के प्रश्नों में, संयुक्त फोकस दूरी की गणना करते समय लेंसों की फोकस दूरियों के चिह्न का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. दो पतले लेन्स सम्पर्क में रखे हैं। एक लेन्स की फोकस दूरी 30.0 सेमी है। यदि संयोजन की फोकस दूरी 15.0 सेमी हो, तो दूसरे लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। यदि एकसमान फोकस दूरी के विपरीत प्रकृति वाले दो लेन्सों को सम्पर्क में रखा जाए, तो संयोजन की. क्षमता क्या होगी?
Answer:हल- दिया है, \(f_1 = 30\) सेमी, \(F = 15\) सेमी, \(f_2 = ?\) संयुक्त लेंस की फोकस दूरी के सूत्र से: \( \frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} \) \( \frac{1}{15} = \frac{1}{30} + \frac{1}{f_2} \) \( \frac{1}{f_2} = \frac{1}{15} - \frac{1}{30} = \frac{2-1}{30} = \frac{1}{30} \) \( f_2 = 30 \) सेमी एकसमान फोकस दूरी एवं विपरीत प्रकृति वाले दो लेन्सों को सम्पर्क में रखने पर, संयोजन की फोकस दूरी अनन्त होगी। अतः संयोजन की क्षमता शून्य होगी ।
In simple words: यदि दो पतले लेंस संपर्क में हैं और एक की फोकस दूरी 30 सेमी तथा संयुक्त फोकस दूरी 15 सेमी है, तो दूसरे लेंस की फोकस दूरी 30 सेमी होगी। यदि दो लेंस जिनकी फोकस दूरी समान है लेकिन प्रकृति विपरीत है (जैसे एक उत्तल और एक अवतल), उन्हें संपर्क में रखा जाए, तो उनकी संयुक्त फोकस दूरी अनंत हो जाती है, जिसका अर्थ है कि संयोजन की क्षमता शून्य होगी।
🎯 Exam Tip: लेंसों के संयोजन के प्रश्नों में, फोकस दूरी के लिए सही चिह्न परिपाटी (उत्तल के लिए धनात्मक, अवतल के लिए ऋणात्मक) का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। क्षमता (P=1/F) की गणना करते समय दूरी को मीटर में बदलें (\(P = 1/f(\text{मीटर})\)).
Question 7. एक उभयोत्तल लेन्स 1.5 अपवर्तनांक के काँच से बना है। इसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएँ 20 सेमी हैं। लेन्स की क्षमताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए जब इसे हवा में रखा जाए और जब इसे 1.25 अपवर्तनांक के द्रव में डुबाया जाए।
Answer:हल- वायु के लिए लेन्स की क्षमता लेन्स मेकर सूत्र से, \( P_{air} = \frac{1}{f_{air}} = (n_g - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \) जहाँ \(n_g\) काँच का अपवर्तनांक है। दिया है, \(n_g = 1.5\), \(R_1 = +20\) सेमी, \(R_2 = -20\) सेमी \( P_{air} = (1.5 - 1) \left( \frac{1}{20} - \frac{1}{-20} \right) = (0.5) \left( \frac{1}{20} + \frac{1}{20} \right) \) \( P_{air} = 0.5 \times \frac{2}{20} = 0.5 \times \frac{1}{10} = \frac{1}{20} \) डायोप्टर अब द्रव में लेन्स की क्षमता जब लेन्स को द्रव में डुबोया जाता है, तो लेन्स के पदार्थ का द्रव के सापेक्ष अपवर्तनांक \(n_{lg}\) होगा, जहाँ \(n_{lg} = \frac{n_g}{n_l} \). दिया है, \(n_l = 1.25\) \( n_{lg} = \frac{1.5}{1.25} = 1.2 \) तो द्रव में लेन्स की क्षमता \( P_{liquid} = (n_{lg} - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \) \( P_{liquid} = (1.2 - 1) \left( \frac{1}{20} - \frac{1}{-20} \right) = (0.2) \left( \frac{1}{20} + \frac{1}{20} \right) \) \( P_{liquid} = 0.2 \times \frac{2}{20} = 0.2 \times \frac{1}{10} = \frac{1}{50} \) डायोप्टर अनुपात \( \frac{P_{air}}{P_{liquid}} = \frac{1/20}{1/50} = \frac{50}{20} = 5:2 \)
In simple words: जब एक उभयोत्तल लेंस को हवा में रखा जाता है, तो उसकी क्षमता द्रव में रखने पर उसकी क्षमता से 5:2 के अनुपात में अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लेंस का अपवर्तनांक माध्यम के सापेक्ष बदलता है, जिससे उसकी फोकस दूरी और क्षमता प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: लेंस मेकर सूत्र का सही उपयोग करें और विभिन्न माध्यमों में लेंस की क्षमता की गणना करते समय सापेक्ष अपवर्तनांक को ध्यान में रखें।
Question 8. एक वस्तु से पर्दा 75 सेमी की दूरी पर है। इनके बीच में 12 सेमी फोकस दूरी वाले उत्तल लेन्स को कहाँ रखा जाए, जिससे पर्दे पर वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब बन जाए।
Answer:हल- दिया है, \(u = 75\) सेमी, \(f = 12\) सेमी सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से, \( \frac{1}{v} = \frac{1}{f} + \frac{1}{u} \) \( \frac{1}{v} = \frac{1}{12} + \frac{1}{75} = \frac{75+12}{12 \times 75} = \frac{87}{900} \) \( v = \frac{900}{87} \approx 10.3 \) सेमी अतः उत्तल लेन्स को 10.3 सेमी की दूरी पर रखा जाएगा।
In simple words: दिए गए हल के अनुसार, 75 सेमी की वस्तु दूरी और 12 सेमी की फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस के लिए, वास्तविक प्रतिबिंब 10.3 सेमी की दूरी पर बनेगा। इस दूरी पर लेंस को रखने पर पर्दे पर स्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त होगा।
🎯 Exam Tip: लेंस सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) का उपयोग करते समय, चिह्न परिपाटी का सही उपयोग करें। वास्तविक प्रतिबिंब के लिए \(v\) धनात्मक होता है और उत्तल लेंस के लिए \(f\) धनात्मक होता है।
Question 9. एक 10 सेमी वक्रता त्रिज्या वाले काँच \((n_g = \frac{3}{2})\) के द्वि-उत्तल लेन्स AB को तल के अनुदिश दो बराबर भागों में काटा जाता है। लेन्स के किसी एक भाग \((n_w = )\) में डुबाने पर उस भाग की फोकस दूरी की गणना कीजिए।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक द्वि-उत्तल लेंस को दर्शाता है जिसके दो वक्र सतहें हैं। लेंस को उसके तल के अनुदिश दो बराबर भागों में काटा जा सकता है, जिससे दो समतल-उत्तल लेंस बनते हैं। यह एक मानक उभयोत्तल लेंस की ज्यामिति को प्रस्तुत करता है। हल- दिया है, \(n_g = \frac{3}{2}\), \(R_1 = 10\) सेमी, \(R_2 = -10\) सेमी लेन्स की फोकस दूरी के सूत्र से, \( \frac{1}{f} = (n_g - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \) \( \frac{1}{f} = \left( \frac{3}{2} - 1 \right) \left( \frac{1}{10} - \frac{1}{-10} \right) \) \( \frac{1}{f} = \frac{1}{2} \left( \frac{1}{10} + \frac{1}{10} \right) = \frac{1}{2} \times \frac{2}{10} = \frac{1}{10} \) लेन्स की फोकस दूरी \(f = 10\) सेमी
In simple words: प्रश्न में एक उभयोत्तल लेंस की फोकस दूरी की गणना की गई है, जो 10 सेमी है। यदि लेंस को काटा जाता और फिर जल में डुबोया जाता, तो उसकी फोकस दूरी बदल जाती।
🎯 Exam Tip: लेंस मेकर सूत्र को सही ढंग से लागू करना सीखें। लेंस को काटने और विभिन्न माध्यमों में डुबाने पर फोकस दूरी कैसे बदलती है, यह समझना महत्वपूर्ण है। पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए प्रश्न के सभी भागों का उत्तर दें।
Question 10. प्रकाश के दो बिन्दु स्रोतों के बीच की दूरी 30 सेमी है। एक स्रोत से 20 सेमी दूर एक उत्तल लेन्स रखने पर दोनों स्रोतों के प्रतिबिम्ब एक ही बिन्दु पर बनते हैं। उसे उत्तल लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए तथा संगत किरण आरेख भी बनाइए।
Answer:उत्तर-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक उत्तल लेंस को दर्शाता है जिसके सामने दो बिंदु स्रोत O1 और O2 रखे हैं। O1 से 20 सेमी की दूरी पर लेंस रखा गया है, और O1 तथा O2 के बीच की दूरी 30 सेमी है। किरणें लेंस से अपवर्तित होकर एक ही बिंदु I पर मिलती हुई दिखाई गई हैं, जो दोनों स्रोतों का प्रतिबिंब है। प्रश्नानुसार, दोनों वस्तुओं के प्रतिबिम्ब एक ही बिन्दु पर (लेन्स के एक ही ओर) बनते हैं, अत: इनमें से एक वास्तविक तथा दूसरा आभासी होगा अर्थात् लेन्स के समीप वाली वस्तु फोकस से पहले रखी होगी। स्रोत \(O_1\) के लिए, \(u = -20\) सेमी अतः लेन्स के सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से, \( \frac{1}{v} - \frac{1}{-20} = \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{v} + \frac{1}{20} = \frac{1}{f} \) ...(1) स्रोत \(O_2\) के लिए, \(u = 10\) सेमी, अतः \( \frac{1}{v} - \frac{1}{10} = \frac{1}{f} \) ...(2) चूँकि स्रोत \(O_2\) लेन्स के दायीं ओर है अर्थात् किरणें लेन्स के दायीं ओर से लेन्स पर गिरती हैं, अतः लेन्स की फोकस दूरी को ऋणचिन्ह के साथ लिया गया है। समीकरण (2) को समीकरण (1) में से घटाने पर, \( \left( \frac{1}{v} + \frac{1}{20} \right) - \left( \frac{1}{v} - \frac{1}{10} \right) = \frac{1}{f} - \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{20} + \frac{1}{10} = \frac{2}{f} \) अथवा \( \frac{3}{20} = \frac{2}{f} \) अतः लेन्स की फोकस दूरी \(f = \frac{40}{3}\) सेमी
In simple words: इस समस्या में, दो प्रकाश स्रोतों के प्रतिबिंब एक ही बिंदु पर बनने की शर्त का उपयोग करके एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात की गई है। हालांकि, समस्या के भीतर कुछ व्याख्याएं और गणितीय चरण पारंपरिक प्रकाशिकी सिद्धांतों के साथ पूरी तरह से सुसंगत नहीं हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: दो वस्तुओं के एक ही बिंदु पर प्रतिबिंब बनाने वाले प्रश्नों में, लेंस सूत्र का सही उपयोग और चिह्न परिपाटी का सख्त पालन महत्वपूर्ण है। अपनी गणनाओं की आंतरिक संगति सुनिश्चित करें।
Question 11. प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण से आप क्या समझते हैं? एक प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्णविक्षेपण किस प्रकार होता है? समझाइए ।
Answer:उत्तर- श्वेत प्रकाश विभिन्न रंगों के प्रकाश का मिश्रण होता है। जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म पर आपतित होती है तो विभिन्न रंगों की अनेक किरणों में विभाजित हो जाती है। इस प्रक्रिया को प्रकाश को 'वर्ण-विक्षेपण' (dispersion) कहते हैं। वर्ण-विक्षेपण का कारण किसी पदार्थिक माध्यम में भिन्न-भिन्न रंगों में प्रकाश की चाल का भिन्न-भिन्न होना है। अतः किसी पदार्थ का अपवर्तनांक \(n\) भिन्न-भिन्न रंगों में प्रकाश के लिए भिन्न-भिन्न होता है। काँच का अपवर्तनांक बैंगनी प्रकाश के लिए सबसे अधिक होता है। अतः सूत्र \( \delta_m = (n - 1) A \) के अनुसार, बैंगनी प्रकाश का विचलन कोण लाल प्रकाश के विचलन कोण से बड़ा होता है। भिन्न-भिन्न रंगों के लिए भिन्न-भिन्न विचलन कोण होने के कारण, श्वेत प्रकाश के प्रिज्म में प्रवेश करने पर इसमें से भिन्न रंगों की किरणें भिन्न-भिन्न दिशाओं में निकलती हैं। बैंगनी रंग के प्रकाश की किरण प्रिज्म के आधार की ओर सबसे अधिक तथा लाल प्रकाश की ओर सबसे कम झुकती है। अतः श्वेत प्रकाश विभिन्न रंगों की किरणों में विभाजित हो जाता है। इसी को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।
In simple words: वर्ण-विक्षेपण वह घटना है जिसमें श्वेत प्रकाश प्रिज्म से गुजरने पर अपने घटक रंगों (जैसे वायलेट, इंडिगो, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) में विभाजित हो जाता है। यह इसलिए होता है क्योंकि प्रत्येक रंग की प्रकाश तरंग की गति और अपवर्तनांक अलग-अलग होते हैं, जिससे वे प्रिज्म द्वारा विभिन्न कोणों पर विचलित होते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्ण-विक्षेपण की परिभाषा, उसके कारण और प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के विभाजन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है। बैंगनी और लाल प्रकाश के विचलन कोणों की तुलना को याद रखें।
Question 12. काँच \((n_g)\) पतले प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का अल्पतम विचलन कोण 60° है। यदि पप्रिज्म को जल \((n_w)\) में डुबो देया जाए तो विचलन कोण कितना हो जायेगा?
Answer:हल- वायु में \(n = n_{ang} = \frac{3}{2}\) तथा जल में \(n = n_{anw} = \frac{4}{3}\) अतः जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक \(n_{wg} = \frac{n_{ag}}{n_{aw}} = \frac{3/2}{4/3} = \frac{9}{8}\) सूत्र \( \delta_m = (n - 1)A \) से, वायु में न्यूनतम विचलन कोण \( \delta_m = (n_{ag} - 1)A \) \( 60^\circ = \left( \frac{3}{2} - 1 \right) A = \frac{1}{2} A \) ...(1) जल में न्यूनतम विचलन कोण \( \delta'_m = (n_{wg} - 1)A \) \( \delta'_m = \left( \frac{9}{8} - 1 \right) A = \frac{1}{8} A \) ...(2) समी० (2) को समी० (1) से भाग करने पर, \( \frac{\delta'_m}{60^\circ} = \frac{\frac{1}{8} A}{\frac{1}{2} A} = \frac{1}{8} \times \frac{2}{1} = \frac{1}{4} \) \( \delta'_m = \frac{60^\circ}{4} = 15^\circ \) अतः जल में प्रिज्म द्वारा उत्पन्न न्यूनतम विचलन कोण 15° है।
In simple words: जब एक प्रिज्म को हवा से जल में डुबोया जाता है, तो उसका न्यूनतम विचलन कोण बदल जाता है। हवा में 60° का विचलन कोण जल में 15° हो जाता है, क्योंकि माध्यम बदलने से प्रिज्म के पदार्थ का सापेक्ष अपवर्तनांक बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन कोण के सूत्र \(\delta_m = (n-1)A\) का उपयोग करते समय, माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक को सही ढंग से गणना करें।
Question 13. एक पतले प्रिज्म के पदार्थ के लिए लाल एवं बैंगनी रंगों के अपवर्तनांक 1.65 हैं। पदार्थ की विक्षेपण क्षमता 0.08 है। प्रकाश के पीले रंग के लिए प्रिज्म का विचलन कोण 5.0° है। प्रिज्म कोण की गणना कीजिए।
Answer:हल- दिया है, \(n_V = 1.65\), \(n_R = 1.65\) (यह प्रश्न में दिए गए मान हैं) (Note: The provided solution in the OCR seems to use different values for \(n_V\) and \(n_R\) than explicitly stated in this question. The following calculation is based on the values present in the OCR's image `हल-` block.) मध्यवर्ती (पीली) किरण के लिए अपवर्तनांक \(n_y = \frac{n_V + n_R}{2} = \frac{1.61 + 1.65}{2} = \frac{3.26}{2} = 1.63\) (Here, \(n_R=1.61\) is used instead of \(1.65\) from question) विचलन कोण \(\delta_y = (n_y - 1)A\)
\( \implies A = \frac{\delta_y}{n_y - 1} \) \( A = \frac{5.0^\circ}{1.63 - 1} = \frac{5.0^\circ}{0.63} \approx 7.936^\circ \)
In simple words: इस प्रश्न में प्रिज्म कोण की गणना की गई है। दिए गए विचलन कोण और पीले रंग के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक का उपयोग करके सूत्र \(\delta_y = (n_y - 1)A\) की सहायता से प्रिज्म कोण A का मान निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के न्यूनतम विचलन और वर्ण विक्षेपण क्षमता से संबंधित प्रश्नों को हल करते समय, सभी दिए गए मानों को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप सही अपवर्तनांक (लाल, बैंगनी, और पीले रंग के लिए) का उपयोग कर रहे हैं।
Question 14. किसी प्रिज्म के पदार्थ के लिए लाल, बैंगनी, पीले रंग के प्रकाश के अपवर्तनांक क्रमशः 1.51, 1.61 तथा 1.59 हैं। पदार्थ की वर्ण-विक्षेपण क्षमता ज्ञात कीजिए। यदि माध्य विचलन 5° हो, तो कोणीय वर्ण-विक्षेपण कितना होगा?
Answer:हल- प्रिज्म के पदार्थ की वर्ण-विक्षेपण क्षमता दिया है, \(n_R = 1.51\), \(n_V = 1.61\), \(n_y = 1.59\) वर्ण-विक्षेपण क्षमता \( \omega = \frac{n_V - n_R}{n_y - 1} \) \( \omega = \frac{1.61 - 1.51}{1.59 - 1} = \frac{0.10}{0.59} \approx 0.169 \) यदि बैंगनी, लाल व पीले (माध्य) रंगों के प्रकाश के लिए प्रिज्म द्वारा उत्पन्न विचलन क्रमशः \(\delta_V\), \(\delta_R\) व \(\delta_y\) हों, तब वर्ण-विक्षेपण क्षमता \( \omega = \frac{\delta_V - \delta_R}{\delta_y} \) दिया है, माध्य विचलन \(\delta_y = 5^\circ\) कोणीय वर्ण-विक्षेपण \( \delta_V - \delta_R = \omega \times \delta_y = 0.169 \times 5^\circ = 0.845^\circ \)
In simple words: इस प्रश्न में, प्रिज्म के पदार्थ के लिए वर्ण-विक्षेपण क्षमता और कोणीय वर्ण-विक्षेपण की गणना की गई है। विभिन्न रंगों के अपवर्तनांक का उपयोग करके वर्ण-विक्षेपण क्षमता ज्ञात की जाती है, और फिर इसे माध्य विचलन से गुणा करके कोणीय वर्ण-विक्षेपण प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ण-विक्षेपण क्षमता \(\omega\) और कोणीय वर्ण-विक्षेपण \(\theta = \delta_V - \delta_R\) के सूत्रों को याद रखें। अपवर्तनांकों और विचलन कोणों के सही मानों का उपयोग करें।
Question 15. किसी प्रिज्म से अल्पतम-विचलन कोण 30°, प्रिज्म के प्रथम अपवर्तक पृष्ठ पर अपवर्तन कोण 30° है। प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- \(\delta_m = 30^\circ\), \(r_1 = 30^\circ\). अल्पतम विचलन की स्थिति में, \(r_1 = r_2 = r\), इसलिए \(r = 30^\circ\). और प्रिज्म कोण \(A = r_1 + r_2 = 2r = 2 \times 30^\circ = 60^\circ\). आपतन कोण \(i = \frac{A + \delta_m}{2} = \frac{60^\circ + 30^\circ}{2} = \frac{90^\circ}{2} = 45^\circ\). स्नेल के नियम से, प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक \( n = \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{\sin 45^\circ}{\sin 30^\circ} \) \( n = \frac{1/\sqrt{2}}{1/2} = \frac{1}{\sqrt{2}} \times 2 = \sqrt{2} \approx 1.414 \)
In simple words: इस प्रश्न में, एक प्रिज्म के न्यूनतम विचलन कोण और अपवर्तन कोण का उपयोग करके उसके पदार्थ का अपवर्तनांक ज्ञात किया गया है। न्यूनतम विचलन की स्थिति में प्रिज्म कोण और आपतन कोण की गणना करके स्नेल के नियम का प्रयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम विचलन की शर्तों, प्रिज्म कोण के सूत्र \(A=r_1+r_2\) और आपतन कोण के सूत्र \(i=(A+\delta_m)/2\) को याद रखें। स्नेल के नियम \(n=\sin i / \sin r\) का सही उपयोग करें।
Question 16. A प्रिज्म कोण वाले प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक Cosec \(\left( \frac{A}{2} \right)\) है। न्यूनतम विचलन कोण का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- अपवर्तनांक \(n = \text{cosec} \left( \frac{A}{2} \right)\) न्यूनतम विचलन कोण के लिए सूत्र है: \( n = \frac{\sin \left( \frac{A + \delta_m}{2} \right)}{\sin \left( \frac{A}{2} \right)} \) दिया है \(n = \text{cosec} \left( \frac{A}{2} \right) = \frac{1}{\sin \left( \frac{A}{2} \right)}\)
\( \implies \frac{1}{\sin \left( \frac{A}{2} \right)} = \frac{\sin \left( \frac{A + \delta_m}{2} \right)}{\sin \left( \frac{A}{2} \right)} \) \( \sin \left( \frac{A + \delta_m}{2} \right) = 1 \) चूँकि \( \sin 90^\circ = 1 \),
\( \implies \frac{A + \delta_m}{2} = 90^\circ \)
\( \implies A + \delta_m = 180^\circ \)
\( \implies \delta_m = 180^\circ - A \) अतः न्यूनतम विचलन कोण \( \delta_m = 180^\circ - A \)
In simple words: इस प्रश्न में, प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक को \(n = \text{cosec} \left( \frac{A}{2} \right)\) के रूप में दिया गया है, और न्यूनतम विचलन कोण \(\delta_m\) ज्ञात करने के लिए प्रिज्म सूत्र का उपयोग किया गया है, जिससे \(\delta_m = 180^\circ - A\) प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के न्यूनतम विचलन कोण के सूत्र को याद रखें और त्रिकोणमितीय पहचानों का सही उपयोग करें।
Question 17. प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है? प्रकीर्णन पर आधारित रमन प्रभाव क्या है?
Answer:हल- प्रकाश का प्रकीर्णन- माध्यम के कणों द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित कर अन्य दिशाओं में पुनः विकरित करने की क्रिया को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। बेन्जीन जैसे कार्बनिक द्रव पर प्रकाश के तीव्र किरण पुंज को डालकर उससे प्रकीर्णित प्रकाश का अध्ययन करते हुए देखा कि प्रकीर्णित प्रकाश में आपतित प्रकाश की आवृत्ति \(\nu\) की रेखा के अतिरिक्त उससे कम आवृत्ति \((\nu - \nu_1)\) \((\nu - \nu_2)\)... तथा उससे अधिक आवृत्ति \((\nu + \nu_1)\) \((\nu + \nu_2)\)... की भी रेखाएँ प्राप्त होती हैं, जिन्हें स्टोक रेखाएँ तथा प्रतिस्टोक रेखाएँ कहते हैं। इस स्पेक्ट्रम को रमन स्पेक्ट्रम तथा इस प्रभाव को रमन प्रभाव कहते हैं।
In simple words: प्रकाश का प्रकीर्णन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश माध्यम के कणों द्वारा अवशोषित होकर विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है। रमन प्रभाव प्रकीर्णन की एक विशेष घटना है जहाँ प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति मूल प्रकाश से भिन्न होती है, जिससे स्टोक और एंटी-स्टोक रेखाएँ उत्पन्न होती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश के प्रकीर्णन और रमन प्रभाव की परिभाषाओं को याद रखें। रमन प्रभाव में स्टोक और प्रतिस्टोक रेखाओं के कॉन्सेप्ट को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 18. फ्लिण्ट काँच के लिए बैंगनी, पीले तथा लाल रंगों के प्रकाश के लिए अपवर्तनांक क्रमशः 1.632, 1.620 तथा 1.613 है। फ्लिट काँच के पदार्थ की विक्षेपण क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer:हल- फ्लिण्ट काँच के पदार्थ की विक्षेपण क्षमता दिया है, \(n_V = 1.632\) (बैंगनी), \(n_y = 1.620\) (पीला), \(n_R = 1.613\) (लाल) विक्षेपण क्षमता \(\omega = \frac{n_V - n_R}{n_y - 1}\) \( \omega = \frac{1.632 - 1.613}{1.620 - 1} = \frac{0.019}{0.620} \approx 0.0306 \)
In simple words: इस प्रश्न में, फ्लिंट कांच के विभिन्न रंगों के अपवर्तनांकों का उपयोग करके उसकी वर्ण विक्षेपण क्षमता की गणना की गई है। वर्ण विक्षेपण क्षमता प्रकाश के रंगों को अलग करने की कांच की क्षमता का माप है।
🎯 Exam Tip: वर्ण विक्षेपण क्षमता का सूत्र \(\omega = \frac{n_V - n_R}{n_y - 1}\) को याद रखें और दिए गए अपवर्तनांकों को सही ढंग से सूत्र में रखें।
Question 19.
(a) 25.0 सेमी तथा 2.5 सेमी फोकस दूरी वाले दो उत्तल लेन्स दिए गए हैं। दूरदर्शी बनाने हेतु इनको किस प्रकार समायोजित करेंगे? एक स्वच्छ चित्र द्वारा प्रतिबिम्ब के बनने को प्रदर्शित कीजिए। इस दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता कितनी होगी?
(b) खगोलीय दूरदर्शक के अभिदृश्यक तथा नेत्रिका की फोकस दूरियाँ क्रमशः 250 सेमी व 10 सेमी हैं। अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की (i) न्यूनतम दूरी पर बनता है, (ii) अनन्तता पर बनता है। दोनों दशाओं में दूरदर्शक की आवर्धक क्षमता की गणना कीजिए।
Answer:हल- (a) 25.0 सेमी फोकस दूरी वाला उत्तल लेन्स अभिदृश्यक \(O\), तथा 2.5 सेमी वाला नेत्रिका \(E\) के रूप में प्रयुक्त किया जायेगा। श्रांत आँख (relaxed eye) से देखने के लिए अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनना चाहिए। इसके लिए नेत्रिका \(E\) तथा अभिदृश्यक \(O\) के बीच दूरी इतनी है कि दूर-स्थित वस्तु AB का अभिदृश्यक द्वारा बना प्रतिबिम्ब \(A'B'\), नेत्रिका \(E\) के फोकस पर पड़े (चित्र 9.21)। स्पष्ट है कि इसके लिए दोनों लेन्सों के बीच दूरी \((f_o + f_e)\) के बराबर होगी, जहाँ \(f_o\) अभिदृश्यक की तथा \(f_e\) नेत्रिका की फोकस दूरी है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक खगोलीय दूरबीन को दर्शाता है जिसमें अभिदृश्यक (Objective) लेंस \(O\) और नेत्रिका (Eyepiece) लेंस \(E\) हैं। दूर से आती हुई समांतर किरणें अभिदृश्यक से अपवर्तित होकर \(F_o\) पर केंद्रित होती हैं, जिससे एक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब \(A'B'\) बनता है। यह प्रतिबिंब नेत्रिका के लिए वस्तु का काम करता है, और अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है, जब नेत्रिका को \(F_e\) पर समायोजित किया जाता है। लेन्सों के बीच दूरी, \(f_o + f_e = 25.0\) सेमी \(+ 2.5\) सेमी \( = 27.5\) सेमी आवर्धन-क्षमता, \( M = -\frac{f_o}{f_e} = -\frac{25.0 \text{ सेमी}}{2.5 \text{ सेमी}} = -10 \) (b) (i) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी \(D\) पर बनता है, तब खगोलीय दूरदर्शी की आवर्धन-क्षमता \( M = -\frac{f_o}{f_e} \left( 1 + \frac{f_e}{D} \right) \) जहाँ \(f_o\) तथा \(f_e\) क्रमशः अभिदृश्यक तथा नेत्रिका लेन्सों की फोकस दूरियाँ हैं। यहाँ \(f_o = +250\) सेमी, \(f_e = +10\) सेमी तथा \(D = 25\) सेमी ।
\( \therefore M = -\frac{250 \text{ सेमी}}{10 \text{ सेमी}} \left( 1 + \frac{10 \text{ सेमी}}{25 \text{ सेमी}} \right) \) \( M = -25 \left( 1 + \frac{2}{5} \right) = -25 \left( \frac{7}{5} \right) = -5 \times 7 = -35 \) ऋण चिह्न यह प्रकट करता है कि प्रतिबिम्ब उल्टा है। (ii) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है, तब आवर्धन क्षमता \( M = -\frac{f_o}{f_e} = -\frac{250 \text{ सेमी}}{10 \text{ सेमी}} = -25 \)
In simple words: दूरबीन में, अभिदृश्यक और नेत्रिका लेंस का उपयोग करके दूर की वस्तुओं को आवर्धित किया जाता है। आवर्धन क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है या अनंत पर। अधिक आवर्धन के लिए अभिदृश्यक की फोकस दूरी अधिक और नेत्रिका की फोकस दूरी कम होनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: दूरबीन की आवर्धन क्षमता के दोनों सूत्रों (जब अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर हो और जब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर हो) को याद रखें। दूरबीन के घटकों के उचित समायोजन और किरण आरेख का अभ्यास करें।
Question 20. सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता से आप क्या समझते हैं? इसका सूत्र लिखिए तथा बताइए कि यह किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है? या किसी सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता से क्या तात्पर्य है? (2013)
या
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता के लिए व्यंजक लिखिए। सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता कैसे बढ़ायी जा सकती है? (2015)
Answer:उत्तर- किसी सूक्ष्मदर्शी की विभेदन- क्षमता उसकी दो समीपवर्ती वस्तुओं के प्रतिबिम्बों को अलग-अलग करने की क्षमता है। सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \((\lambda)\) के व्युत्क्रमानुपाती तथा सूक्ष्मदर्शी में प्रवेश करने वाली प्रकाश-किरणों के शंकु-कोण के अनुक्रमानुपाती होती है। विभेदन-क्षमता \( \propto \frac{\text{शंकु-कोण}}{\lambda} \) अथवा विभेदन-क्षमता \( = \frac{2n \sin \alpha}{1.22 \lambda} \) जहाँ \(\lambda\) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य है, \(n\) वस्तु तथा अभिदृश्यक के बीच माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक तथा \(\alpha\) = अर्द्ध शंकु-कोण । सूक्ष्मदर्शी का उपयोग समीप की वस्तुओं को देखने में होता है; जैसे – सूक्ष्म कण, स्लाइडे इत्यादि । इन वस्तुओं को किसी प्रकाश-स्रोत से प्रकाशित करते हैं। इसकी विभेदन-सीमा घटाने के लिए (अथवा विभेदन-क्षमता बढ़ाने के लिए) शंकु-कोण का मान अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है, परन्तु छोटे तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का प्रयोग करके \(\lambda\) का मान घटाया जा सकता है। अतः साधारण प्रकाश के स्थान पर नीला प्रकाश प्रयुक्त करके सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
In simple words: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता वस्तुओं को अलग-अलग दिखाने की क्षमता है। इसे छोटे तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का उपयोग करके या अभिदृश्यक लेंस के द्वारा बने शंकु-कोण को बढ़ाकर बढ़ाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता की परिभाषा, सूत्र और इसे बढ़ाने के तरीकों को याद रखें। विशेष रूप से तरंगदैर्ध्य और शंकु-कोण के संबंध पर ध्यान दें।
Question 21. किसी दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता से क्या तात्पर्य है? इसका सूत्र लिखिए । दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता कैसे बढ़ायी जा सकती है? (2017)
या
दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता का सूत्र लिखिए तथा प्रयुक्त संकेतों के अर्थ लिखिए। यह किन-किन बातों पर निर्भर करती है? (2009)
या
दूरदर्शी की विभेदन क्षमता का सूत्र लिखिए तथा प्रयुक्त प्रतीकों के अर्थ बताइए। इसको. कैसे बढ़ाया जा सकता है? (2011, 12)
Answer:उत्तर- दो समीपवर्ती वस्तुओं को दूरदर्शी द्वारा देखने पर प्रतिबिम्बों को अलग-अलग करने की क्षमता को दूरदर्शी. की 'विभेदन-क्षमता' कहते हैं। दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता \( \propto \frac{1}{\text{विभेदन-सीमा}} \) अथवा विभेदन-क्षमता \( = \frac{d}{1.22\lambda} \) जहाँ \(\lambda\) प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य तथा \(d\) दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेन्स का व्यास है। विभेदन क्षमता \( \propto \frac{1}{1.22\lambda/d} \) अर्थात् विभेदन क्षमता \( = \frac{d}{1.22\lambda} \) स्पष्ट है कि दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता, दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेन्से का व्यास \((d)\) बढ़ाकर बढ़ायी जा सकती है अर्थात्, विभेदन-क्षमता अभिदृश्यक के द्वारक तथा प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है।
In simple words: दूरबीन की विभेदन क्षमता दो पास की वस्तुओं को अलग-अलग दिखाने की उसकी क्षमता है। इसे अभिदृश्यक लेंस के व्यास को बढ़ाकर या उपयोग किए जा रहे प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को कम करके बढ़ाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: दूरबीन की विभेदन क्षमता की परिभाषा, सूत्र और इसे बढ़ाने के तरीकों को याद रखना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से अभिदृश्यक के व्यास और तरंगदैर्ध्य के प्रभाव पर ध्यान दें।
Question 22. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का नामांकित किरण आरेख बनाइए जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है। इसकी विभेदन क्षमता कैसे बढ़ायी जा सकती है? (2015)
Answer:उत्तर- श्रांत आँख के लिए अन्तिम प्रतिबिम्ब A”B” अनन्तता पर बनता है। इस दशा में प्रतिबिम्ब A'B', नेत्रिका \(E\) के फोकस \(F'_e\) पर होगा। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता के लिए उपर्युक्त प्रश्न (20) देखिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का नामांकित किरण आरेख दिखाता है जब अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है। इसमें एक अभिदृश्यक लेंस (\(F_o\)) होता है जो एक वस्तु \(AB\) का वास्तविक और आवर्धित प्रतिबिंब \(A'B'\) बनाता है। यह प्रतिबिंब फिर नेत्रिका लेंस (\(F_e\)) के लिए वस्तु का काम करता है। जब \(A'B'\) नेत्रिका के फोकस पर होता है, तो अंतिम प्रतिबिंब \(A''B''\) अनंत पर बनता है।
In simple words: संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में, वस्तु का वास्तविक आवर्धित प्रतिबिंब अभिदृश्यक द्वारा बनता है, जो नेत्रिका के फोकस पर स्थित होने पर अंतिम प्रतिबिंब को अनंत पर बनाता है, जिससे आंख पर कोई तनाव नहीं पड़ता। इसकी विभेदन क्षमता को छोटे तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग करके बढ़ाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का किरण आरेख बनाना, खासकर जब अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता हो, बहुत महत्वपूर्ण है। विभेदन क्षमता को बढ़ाने वाले कारकों को भी याद रखें।
Question 23. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की तुलना में अधिक क्यों होती है? (2011, 13)
या
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की उपयोगिता बताइए । (2010)
या
समझाइए कि किसी इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता, प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से अधिक क्यों होती है? (2013)
Answer:उत्तर- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी- आजकल अतिसूक्ष्म वस्तुओं के चित्र लेने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (electron microscope) काम में लाया जाता है। इसमें प्रकाश पुंज के स्थान पर तीव्रगामी इलेक्ट्रॉन पुंज को प्रयुक्त करते हैं। इलेक्ट्रॉन पुंज तरंग की तरह व्यवहार करता है जिसकी तरंगदैर्ध्य डी-ब्रॉगली के सिद्धान्तानुसार \( \lambda = (h/mu) \) बहुत छोटी अर्थात् 1 Å की कोटि (order) की होती है। यह दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से लगभग 5000 गुना छोटी होती है। परन्तु विभेदन-क्षमता तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अतः इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन-क्षमता, प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी की तुलना में लगभग 5000 गुना अधिक होती है। यही इस सूक्ष्मदर्शी की उपयोगिता है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता पारंपरिक प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से बहुत अधिक होती है क्योंकि यह प्रकाश तरंगों के बजाय इलेक्ट्रॉन पुंज का उपयोग करता है। इलेक्ट्रॉनों की डी-ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से काफी कम होती है, जिससे यह बहुत छोटी वस्तुओं का अधिक स्पष्ट प्रतिबिंब बना सकता है।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के कार्य सिद्धांत, विशेष रूप से डी-ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य के संबंध में, को समझें। इसकी उच्च विभेदन क्षमता का कारण और उपयोगिता स्पष्ट करें।
Question 24. एक दूर-दृष्टि दोष वाले मनुष्य का निकट बिन्दु आँख से 150 सेमी पर है। यदि वह 25 सेमी दूर स्थित पुस्तक को पढ़ना चाहता है तो उसे कैसा तथा कितनी फोकस दूरी का लेन्स लगाना होगा?
Answer:हल- इस व्यक्ति की आँख का निकट-बिन्दु 150 सेमी पर है। उसे एक ऐसा लेन्स चाहिए जो 25 सेमी की दूरी पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब 150 सेमी पर बना दे। इस प्रकार लेन्स के लिए \(u = -25\) सेमी तथा \(v = -150\) सेमी लेन्स के सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से, \( \frac{1}{-150} - \frac{1}{-25} = \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} - \frac{1}{150} = \frac{6-1}{150} = \frac{5}{150} = \frac{1}{30} \)
\( \implies f = +30 \) सेमी (उत्तल लेन्स)
In simple words: दूर-दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को 25 सेमी पर रखी पुस्तक को पढ़ने के लिए 30 सेमी फोकस दूरी के उत्तल लेंस की आवश्यकता होगी। यह लेंस 25 सेमी पर रखी वस्तु का एक आभासी प्रतिबिंब 150 सेमी पर बनाएगा, जो व्यक्ति के निकट बिंदु पर होगा।
🎯 Exam Tip: दृष्टि दोषों के सुधार के लिए लेंस सूत्र का उपयोग करते समय, निकट बिंदु और वांछित वस्तु दूरी के लिए सही चिह्न परिपाटी का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। याद रखें कि दूर-दृष्टि दोष के लिए उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।
Question 25. एक निकट दृष्टि दोष वाला व्यक्ति 30 सेमी से अधिक दूर की वस्तु को स्पष्ट नहीं देख सकता है। अनन्त पर स्थित वस्तु को देखने के लिए कितनी फोकस दूरी के तथा किस प्रकार के लेन्स की आवश्यकता होगी?
Answer:हल- दिया है, \(u = -\infty\), \(v = -30\) सेमी, \(f = ?\) लेन्स के सूत्र से, \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{-30} - \frac{1}{-\infty} = \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{f} = -\frac{1}{30} - 0 = -\frac{1}{30} \)
\( \implies f = -30 \) सेमी अतः व्यक्ति को अनन्त पर स्थित वस्तु को देखने के लिए 30 सेमी फोकस दूरी के अवतल लेन्स की आवश्यकता होगी ।
In simple words: निकट दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए, जिस व्यक्ति को 30 सेमी से आगे की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखतीं, उसे अनंत पर स्थित वस्तुओं को देखने के लिए 30 सेमी फोकस दूरी के अवतल लेंस की आवश्यकता होगी।
🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष के लिए लेंस सूत्र का उपयोग करते समय, अनंत पर वस्तु को \(u = -\infty\) और व्यक्ति के दूर बिंदु को \(v\) के रूप में लें। हमेशा याद रखें कि निकट दृष्टि दोष के लिए अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है।
Question 26. दूरदृष्टि दोष वाले व्यक्ति का निकट बिन्दु आँख से 100 सेमी है। आँख से 25 सेमी की दूरी पर रखी किताब को स्पष्ट पढने के लिए कितनी क्षमता का लेन्स आवश्यक है? इसके लिए किस प्रकार के लेन्स का प्रयोग किया जाएगा?
Answer:हल- दिया है, \(u = -25\) सेमी, \(v = -100\) सेमी लेन्स के सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) से \( \frac{1}{-100} - \frac{1}{-25} = \frac{1}{f} \) \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} - \frac{1}{100} = \frac{4-1}{100} = \frac{3}{100} \) \( f = +\frac{100}{3} \) सेमी (उत्तल लेन्स) क्षमता \( P = \frac{100}{f(\text{सेमी})} = \frac{100}{100/3} = +3 \) डायोप्टर
In simple words: दूरदृष्टि दोष वाले व्यक्ति को 25 सेमी पर रखी किताब पढ़ने के लिए +3 डायोप्टर क्षमता वाले उत्तल लेंस की आवश्यकता होगी, जिससे 25 सेमी पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब उसके 100 सेमी पर स्थित निकट बिंदु पर बन सके।
🎯 Exam Tip: दूरदृष्टि दोष के प्रश्नों में, वांछित वस्तु दूरी (\(u\)) और व्यक्ति के निकट बिंदु (\(v\)) का सही उपयोग करें। उत्तल लेंस का उपयोग होता है और क्षमता को डायोप्टर में व्यक्त करने के लिए फोकस दूरी को मीटर में बदलें (\(P = 1/f(\text{मीटर})\)).
Question 27. एक दूरदर्शी में अभिदृश्यक एवं नेत्रिका की फोकस दूरियाँ क्रमशः 100 सेमी और 50 सेमी हैं। दूरदर्शी की अधिकतम लम्बाई और आवर्धन क्षमता की गणना कीजिए।
Answer:हल- दिया है, \(f_o = 100\) सेमी, \(f_e = 50\) सेमी दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता, \( M = -\frac{f_o}{f_e} = -\frac{100}{50} = -2 \) दूरदर्शी की लम्बाई, \(L = f_o + f_e = 100 + 50 = 150\) सेमी
In simple words: इस दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता -2 है, जिसका अर्थ है कि यह वस्तु को दो गुना आवर्धित और उल्टा दिखाता है। इसकी अधिकतम लंबाई 150 सेमी है, जो अभिदृश्यक और नेत्रिका लेंस की फोकस दूरियों का योग है।
🎯 Exam Tip: खगोलीय दूरबीन के लिए आवर्धन क्षमता \((M = -f_o/f_e)\) और दूरबीन की लंबाई \((L = f_o + f_e)\) के सूत्रों को याद रखें, खासकर जब अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता हो।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. क्रान्तिक कोण तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है ? सिद्ध कीजिए कि, जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं। (2015, 17)
या
सिद्ध कीजिए कि सघन माध्यम का अपवर्तनांक क्रान्तिक कोण की ज्या (sine) का व्युत्क्रमानुपाती होगा। (2015, 17)
Answer:उत्तर- जब कोई प्रकाश-किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो इसका अधिकांश भाग अपवर्तित हो जाता है तथा शेष भाग परावर्तित हो जाता है। इस दशा में प्रकाश-किरण अभिलम्ब से दूर हटती है, अतः अपवर्तन कोण का मान आपतन कोण से बड़ा होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र प्रकाश के अपवर्तन और पूर्ण आंतरिक परावर्तन को दर्शाता है। (a) में, एक प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही है, अभिलंब से दूर हट रही है। (b) में, आपतन कोण को बढ़ाने पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, यह क्रांतिक कोण की स्थिति है। (c) में, आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होने पर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, जहाँ प्रकाश सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाता है। अब यदि सघने माध्यम में आपतन कोण \((i)\) को बढ़ाते जायें तो विरल माध्यम में अपवर्तन कोण \((r)\) का मान भी बढ़ता जाता है। एक विशेष आपतन कोण के लिए अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस आपतन कोण को 'क्रान्तिक कोण' कहा जाता है तथा 'C' से प्रदर्शित करते हैं। अतः क्रान्तिक कोण को निम्न प्रकारे से परिभाषित किया जाता है- “सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण जिसके लिए विरले माध्यम में बना अपवर्तन कोण समकोण अर्थात् 90° होता है, दोनों माध्यमों के अन्तरापृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण कहलाता है।” जब यदि माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से आगे थोड़ा-सा ही बढ़ाया जाता है, तो सम्पूर्ण आपतित प्रकाश, परावर्तन के नियमों के अनुसार परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है। इस घटना को प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं। अतः पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना होने के लिए अग्रलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है- 1. प्रकाश सघनं माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए। 2. सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से बड़ा होना चाहिए। अपवर्तनांक तथा क्रान्तिक कोण में सम्बन्ध- यदि विरल माध्यम को माध्यम -1 तथा सघन माध्यम को माध्यम -2 से प्रदर्शित करें तो स्नेल के नियम के अनुसार, \( \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_1}{n_2} \) क्रान्तिक कोण आपतन पर, \(i = C\) तथा \(r = 90^\circ\) अतः पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक \( \frac{n_1}{n_2} = \frac{\sin C}{\sin 90^\circ} = \sin C \)
\( \implies {}_{1} n_2 = \sin C \) परन्तु प्रकाश के उत्क्रमणीयता के सिद्धान्त से, \( {}_{2} n_1 = \frac{1}{ {}_{1} n_2} \)
\( \implies {}_{2} n_1 = \frac{1}{\sin C} \) प्रकार क्रान्तिक कोण की ज्या \(( \sin C )\) को व्युत्क्रम विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम के अपवर्तनांक के बराबर होता है।
In simple words: क्रांतिक कोण वह आपतन कोण है जिस पर सघन से विरल माध्यम में जाने वाली प्रकाश किरण 90° पर अपवर्तित होती है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन तब होता है जब आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो, जिससे प्रकाश सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाता है। सघन माध्यम का अपवर्तनांक, विरल माध्यम के सापेक्ष, क्रांतिक कोण के साइन के व्युत्क्रम के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: क्रांतिक कोण और पूर्ण आंतरिक परावर्तन की परिभाषाओं और शर्तों को अच्छी तरह से समझें। स्नेल के नियम का उपयोग करके अपवर्तनांक और क्रांतिक कोण के बीच संबंध स्थापित करना एक महत्वपूर्ण व्युत्पत्ति है, जहां चिह्न परिपाटी और माध्यमों का क्रम (सघन से विरल) सही होना चाहिए।
Question 2. प्रकाशिक तन्तु क्या होते हैं? इनकी रचना, कार्य सिद्धान्त तथा अनुप्रयोग लिखिए। इसमें किस घटना का उपयोग होता है? (2015)
या
प्रकाशिक तन्तु नलिका में पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की प्रक्रिया चित्र द्वारा समझाइए तथा आवश्यक सूत्र भी लिखिए। (2018)
Answer:उत्तर- प्रकाशिक तन्तु- प्रकाशिक तन्तु पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना पर आधारित वह युक्ति है। जिसकी सहायता से एक प्रकाश सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिना ऊर्जा-ह्रास के प्रक्षेपित किया जा सकता है। रचना-इसको चित्र 9.24 में दर्शाया गया है। यह उच्च कोटि के काँच (क्वार्ट्ज अपवर्तनांक 1.7) के अत्यधिक लम्बे तथा पतले हजारों तन्तुओं (fibers) से मिलकर बना होता है। प्रत्येक रेशे (तन्तु) की मोटाई लगभग माइक्रो मीटर (10-6 मी) कोटि की होती है। तन्तु (क्वार्ट्ज के रेशे के चारों ओर अपेक्षाकृत कम अपवर्तनांक \((n = 1.5)\) वाले पदार्थ की पतली तह लेपित कर दी जाती है। पाइप के भीतरी भाग को क्रोड (core) तथा लेपित भाग को अधिपट्टन (cladding) कहते हैं। क्रोड के पदार्थ का अपवर्तनांक अधिपट्टन के अपवर्तनांक की तुलना में अधिक होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रकाशिक तन्तु को दर्शाता है, जिसमें एक उच्च अपवर्तनांक का क्रोड (core) और उसके चारों ओर निम्न अपवर्तनांक का अधिपट्टन (cladding) होता है। प्रकाश क्रोड में प्रवेश करता है और क्रोड-अधिपट्टन इंटरफेस पर बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन के माध्यम से यात्रा करता है, जिससे प्रकाश को बिना किसी महत्वपूर्ण ऊर्जा हानि के लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है। कार्य सिद्धान्त- जब प्रकाश किरण तन्तु के एक सिरे पर अल्प कोण बनाती हुई आपतित होती है तो यह इसके अन्दर अपवर्तित होकर तन्तु तथा तन्तु के ऊपर किये गये लेप के अन्तरापृष्ठ पर क्रान्तिक कोण से बड़े कोण पर आपतित होती है। अतः यह किरण यहाँ से पूर्ण परावर्तित होकर इसके सम्मुख वाले अन्तरापृष्ठ पर टकराती है। यहाँ पर यह पुनः क्रान्तिक कोण से बड़े कोण पर आपतित होती है। इसलिए यह पुनः पूर्ण आन्तरिक परावर्तित हो जाती है। इस प्रकार यह किरण बार-बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तित होती हुई प्रकाशिक तन्तु के दूसरे सिरे पर पहुँच जाती है। तन्तु के इस सिरे पर यह किरण वायु में अपवर्तित होकर अभिलम्ब से दूर हटती हुई तीव्रता के कम हुए बिना बाहर निकल जाती है। अनुप्रयोग- इनके अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं- 1. संचार प्रणाली में प्रकाशिक तन्तु से संदेशों को मॉडुलन (modulation) द्वारा एक साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। संदेशों की अधिक संख्या उच्च आवृत्ति वाली वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों द्वारा मॉडुलित करके एक साथ संचारित की जा सकती है। प्रकाश अति उच्च आवृत्ति वाली वैद्युत-चुम्बकीय तरंग है। इनका संचरण सुचालक तार के स्थान पर प्रकाशिक तन्तु द्वारा किया जा सकता है। आधुनिक युग में प्रकाशिक तन्तुओं का उपयोग टेलीफोन व संचार लाइनों के रूप में हो रहा है। 2. प्रकाशीय तन्तु विद्युत संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरित करने में काम आते हैं। ये विद्युत संकेत परांतरित्र (transducer) द्वारा प्रकाश में परिवर्तित कर दिये जाते हैं। अब इन प्रकाशीय संकेतों को प्रकाश तन्तुओं द्वारा दूरस्थ स्थानों तक भेज दिया जाता है। 3. प्रकाशीय तन्तुओं द्वारा वस्तुओं के प्रतिबिम्बों को दूरस्थ स्थानों पर भेजा जा सकता है। 4. इनका प्रयोग सजावट करने वाले लैम्पों में किया जाता है। फव्वारों में जल की धारा को प्रकाशित करने में इनका प्रयोग किया जाता है।
In simple words: प्रकाशिक तन्तु एक ऐसी युक्ति है जो पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर काम करती है, जिससे प्रकाश संकेतों को बिना ऊर्जा हानि के लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है। इसमें उच्च अपवर्तनांक वाले क्रोड और निम्न अपवर्तनांक वाले अधिपट्टन होते हैं। इसके मुख्य अनुप्रयोग संचार, चिकित्सा और सजावट में हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाशिक तन्तु की परिभाषा, उसकी संरचना (क्रोड और अधिपट्टन), पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत और उसके विभिन्न अनुप्रयोगों को अच्छी तरह से याद रखें। किरण आरेख का अभ्यास करें।
प्रश्न 3.किसी गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र, प्रयुक्त चिह्नों का अर्थ बताते हुए लिखिए तथा इसकी सहायता से पतले लेन्स के लिए सम्बन्ध सिद्ध कीजिए।
या
किसी लेन्स की फोकस दूरी के लिये उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं तथा उसके पदार्थ के अपवर्तनांक के पदों में एक व्यंजक का निगमन कीजिए। यदि काँच के लेन्स को ऐसे व्रव में डुबा दिया जाये जिसका अपवर्तनांक काँच के अपवर्तनांक से अधिक हो, तो इसकी फोकस दूरी में क्या परिवर्तन हो जाएगा?
या
किसी गोलीय पृष्ठ पर प्रकाश के अपवर्तन का सूत्र लिखिए। इसकी सहायता से किसी पतले लेन्स की फोकस दूरी के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
या
यदि एक लेन्स के दोनों ओर माध्यम एक ही हो, तो पतले लेन्स की फोकस दूरी के लिए अपवर्तनांक और वक्रता त्रिज्याओं के पदों में सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। यदि एक काँच लेन्स, काँच की अपेक्षा अधिक अपवर्तनांक के एक द्रव में डुबोया जाये तो इसकी फोकस दूरी एवं प्रकृति कैसे परिवर्तित होगी?
Answer:
उत्तर-
गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र
जहाँ \(n\) पृष्ठ के पदार्थ का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक है, \(u\) वस्तु की ध्रुव से दूरी है, \(v\) प्रतिबिम्ब की ध्रुव से दूरी है तथा \(R\) पृष्ठ की वक्रता-त्रिज्या है।
पतले लेन्स के लिए अपवर्तन का सूत्र-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक पतले उत्तल लेंस को दर्शाता है जिसके मुख्य अक्ष पर एक वस्तु O रखी है। वस्तु से निकलने वाली प्रकाश किरणें लेंस के दोनों पृष्ठों से अपवर्तित होकर अंतिम प्रतिबिंब I बनाती हैं। यह वस्तु दूरी (u), प्रतिबिंब दूरी (v), वक्रता त्रिज्या (R1, R2) और अपवर्तनांक (n) के बीच संबंध को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।
चित्र 9.25 में एक पतला लेन्स L वायु में रखा है। लेन्स के पदार्थ का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक \(n\) है तथा इसके पहले व दूसरे पृष्ठों की वक्रता-त्रिज्याएँ क्रमशः \(R_1\) व \(R_2\) हैं। माना लेन्स की मोटाई \(t\) है । एक बिन्दु-वस्तु O लेन्स की मुख्य अक्ष पर लेन्स के प्रथम पृष्ठ के ध्रुवे \(P_1\) से \(u\) दूरी पर रखी है। यह पृष्ठ O का प्रतिबिम्ब \(I'\) बनाता है।
यदि \(I'\) की पृष्ठ के ध्रुव \(P_1\) से दूरी \(v'\) है तो समी० (1) से
\[\frac{n}{v'} - \frac{1}{u} = \frac{(n-1)}{R_1} \quad ...(2)\]
प्रतिबिम्ब \(I'\) दूसरे पृष्ठ के लिए आभासी वस्तु का कार्य करता हैं। \(I'\) की दूसरे पृष्ठ के ध्रुव \(P_2\) से दूरी \((v' - t)\) होगी। यह पृष्ठ \(I'\) का अन्तिम प्रतिबिम्ब \(I\) अपने से \(v\) दूरी पर बनाता है।
इस पृष्ठ के लिए अपवर्तन के सूत्र से,
\[\frac{1/n}{v} - \frac{1}{(v'-t)} = \frac{(1/n)-1}{R_2} \quad ...(3)\]
यहाँ \(n\) के स्थान पर \(1/n\) लिया गया है, क्योंकि अब प्रकाश लेन्स से वायु में जा रहा है
अथवा \[\frac{1}{n_g} \quad \text{जहाँ } n_g \text{ = वायु के सापेक्ष लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक}\]
पतले लेन्स के लिए \(t\) का मान \(v'\) के सापेक्ष उपेक्षणीय है, अतः समी० (3) को सरल करने पर
\[\frac{1}{nv} - \frac{1}{v'} = \frac{1-n}{nR_2} \quad ...(4)\]
समी० (2) व समी० (4) को जोड़ने पर,
\[\frac{n}{v'} - \frac{1}{u} + \frac{1}{nv} - \frac{1}{v'} = \frac{n-1}{R_1} + \frac{1-n}{nR_2}\]
या
\[\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = (n-1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \quad ...(5)\]
मुख्य फोकस की परिभाषा के अनुसार, जब वस्तु अनन्त पर होगी तो प्रतिबिम्ब द्वितीय फोकस अर्थात् मुख्य फोकस पर होगा, अर्थात् यदि \(u = \infty\) तो \(v = f\)
अतः समी० (5) से,
\[\frac{1}{f} - \frac{1}{\infty} = (n-1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right)\]
या
\[\frac{1}{f} = (n-1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \quad ...(6)\]
समी० (5) व (6) की तुलना से
\[\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\]
यही पतले लेन्स के अपवर्तन का सूत्र है। यदि काँच के लेन्स को ऐसे द्रव में डुबो दिया जाये जिसका अपवर्तनांक काँच के अपवर्तनांक से अधिक है, तो लेन्स की फोकस दूरी बढ़ जायेगी तथा इसके साथ-साथ फोकस दूरी का चिह्न भी उलट जायेगा अर्थात् लेन्स की प्रकृति उलट जायेगी ।
In simple words: लेंस सूत्र गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन के सिद्धांत से व्युत्पन्न होता है। जब लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक हो, तो लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है और उसकी प्रकृति (अभिसारी से अपसारी या इसके विपरीत) उलट सकती है।
🎯 Exam Tip: लेंस सूत्र और लेंस निर्माता सूत्र के व्युत्पत्ति चरण-दर-चरण सटीक चिह्नों के साथ दर्शाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें छोटे चिह्नों की गलतियों से भी अंक कट सकते हैं।
प्रश्न 4.एक 25 सेमी फोकस दूरी का उत्तल लेन्स 20 सेमी फोकस दूरी के अवतल लेन्स के सम्पर्क में रखा जाता है। इस संयोजन की क्षमता तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए। संयोजन को 1.6 अपवर्तनांक वाले द्रव में रखे जाने पर फोकस दूरी तथा प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? लेन्सों के पदार्थ का अपवर्तनांक 1.5 है।
Answer:
हल- दिया है, \(f_1 = + 25\) सेमी तथा \(f_2 = - 20\) सेमी
सूत्र \[\frac{1}{F} = \frac{1}{f_1} + \frac{1}{f_2} = \frac{1}{25} + \frac{1}{-20} = \frac{4-5}{100} = \frac{-1}{100}\]
\[F = - 100 \text{ सेमी}\]
संयोजन की क्षमता \[\text{D} = \frac{100}{F} = \frac{100}{-100} = -1 \text{ D}\]
लेन्सों का संयोजन अवतल होगा।
द्रव का अपवर्तनांक \(n_l = 1.6\)
लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक \(n_g = 1.5\)
वायु के लिए \[\frac{1}{f} = (n_g-1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right) \quad ...(1)\]
\[\frac{1}{-100} = (1.5-1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)\]
माना लेन्स को द्रव में डुबोने पर फोकस दूरी \(f'\) है। तब,
\[\frac{1}{f'} = \left(\frac{n_g}{n_l}-1\right)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right) \quad ...(2)\]
समी० (1) को (2) से भाग करने पर
\[\frac{f'}{-100} = \frac{(n_g-1)}{(\frac{n_g}{n_l}-1)} = \frac{(1.5-1)}{(\frac{1.5}{1.6}-1)} = \frac{0.5}{0.9375-1} = \frac{0.5}{-0.0625} = -8\]
\[f' = -100 \times (-8) = +800 \text{ सेमी}\]
या \[\frac{1}{f'} = \left(\frac{1.5}{1.6}-1\right)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right) = \left(\frac{1.5-1.6}{1.6}\right)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right) = \frac{-0.1}{1.6}\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)\]
समी० (1) से \[\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right) = \frac{1}{-100 \times 0.5} = \frac{1}{-50}\]
\[\frac{1}{f'} = \frac{-0.1}{1.6} \times \frac{1}{-50} = \frac{0.1}{80} = \frac{1}{800}\]
\[f' = +800 \text{ सेमी}\]
द्रव में डुबोने पर संयोजन की प्रकृति उत्तल होगी। (अभिसारी)
In simple words: दो लेंसों के संयोजन की क्षमता -1D है, जो इसे अपसारी बनाता है। जब इसे 1.6 अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया जाता है, तो इसकी फोकस दूरी +800 सेमी हो जाती है, जिससे यह अभिसारी लेंस की तरह व्यवहार करता है।
🎯 Exam Tip: लेंस की प्रकृति को निर्धारित करने के लिए फोकल लंबाई के चिह्न को समझना महत्वपूर्ण है। फोकल लंबाई की गणना करते समय सापेक्ष अपवर्तनांक को सही ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें।
प्रश्न 5.एक वस्तु किसी पर्दे से 60.0 सेमी की दूरी पर स्थित है। एक उत्तल लेन्स को इनके बीच दो भिन्न स्थानों पर रखने से पर्दे पर दो बार वास्तविक प्रतिबिम्ब बनते हैं। यदि प्रतिबिम्बों की लम्बाइयाँ 9.0 सेमी तथा 4.0 सेमी हों तो वस्तु की लम्बाई तथा लेन्स की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल-
हम जानते हैं कि, विस्थापन विधि में
\[v + u = a = 60 \text{ सेमी}\]
तथा \[\frac{I_1}{I_2} = \left(\frac{v}{u}\right)^2 \implies \frac{9}{4} = \left(\frac{v}{u}\right)^2 \implies \frac{v}{u} = \frac{3}{2} \implies v = \frac{3}{2}u \quad ...(1)\]
समी० (1) व \(v + u = 60\) सेमी से, \(u = 24\) सेमी तथा \(v = 36\) सेमी
लेन्स के सूत्रानुसार,
\[\frac{1}{F} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \implies \frac{1}{F} = \frac{1}{36} - \frac{1}{(-24)} = \frac{1}{36} + \frac{1}{24} = \frac{2+3}{72} = \frac{5}{72}\]
\[F = \frac{72}{5} = 14.4 \text{ सेमी}\]
वस्तु की लम्बाई \[\text{O} = \sqrt{I_1 I_2} = \sqrt{9 \times 4} = \sqrt{36} = 6 \text{ सेमी}\]
In simple words: विस्थापन विधि का उपयोग करके, हमने पाया कि वस्तु और पर्दे के बीच की दूरी 60 सेमी है। दो अलग-अलग स्थानों पर लेंस रखने पर 9 सेमी और 4 सेमी के प्रतिबिंब बनते हैं, जिससे वस्तु की वास्तविक लंबाई 6 सेमी और लेंस की फोकस दूरी 14.4 सेमी है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन विधि से संबंधित प्रश्नों को हल करते समय, \(v+u=a\) और \(I_1/I_2 = (v/u)^2\) जैसे सूत्रों का सही अनुप्रयोग सुनिश्चित करें। वस्तु की लंबाई की गणना \(O = \sqrt{I_1 I_2}\) का उपयोग करके की जा सकती है।
प्रश्न 6.लेन्स द्वारा प्रकाश के अपवर्तन के लिए न्यूटन का सूत्र \(xx' = ff'\) स्थापित कीजिए।
Answer:
उत्तर-
सूत्र की उपपत्ति- माना एक लेन्स का प्रकाशिक केन्द्र C है । \(F\) व \(F'\) इसके फोकस बिन्दु तथा OCI मुख्य अक्ष है। O एक वस्तु है जिसका लेन्स द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब \(I\) है । इस प्रकार O तथा \(I\) संयुग्मी बिन्दु (conjugate points) हैं। \(O'\) से चलने वाली आपतित किरण \(O'A\) जो मुख्य अक्ष के समान्तर है, अपवर्तन के पश्चात् लेन्स के फोकस \(F\) से होकर जाती है। दूसरी किरण \(O'B\) प्रथम फोकस बिन्दु से गुजरती हुई लेन्स से अपवर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती है। दोनों निर्गत किरणें \(I'\) पर मिलती हैं, जो \(O'\) का वास्तविक प्रतिबिम्ब है । \(I'\) से मुख्य अक्ष पर खींचा गया लम्ब \(II'\) वस्तु \(OO'\) का प्रतिबिम्ब है ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक उत्तल लेंस द्वारा वस्तु (OO') के प्रतिबिंब (II') के निर्माण को दर्शाता है। इसमें वस्तु, प्रतिबिंब, फोकस बिंदु (F, F'), और ऑप्टिकल केंद्र (C) की स्थिति दिखाई गई है, जो न्यूटन के लेंस सूत्र xx' = ff' की व्युत्पत्ति के लिए आवश्यक प्रकाश किरणों के पथ को स्पष्ट करता है।
चित्र 9.26 में \(AF'OO'\) तथा \(AF''CB\) समरूप हैं।
\[\frac{OO'}{CB} = \frac{F'O}{CF'} \quad ...(1)\]
परन्तु \(CB = II'\)
\[\frac{OO'}{II'} = \frac{F'O}{CF'} \quad ...(2)\]
इसी प्रकार, त्रिभुज \(CAF\) तथा त्रिभुज \(FII'\) समरूप हैं।
\[\frac{CA}{II'} = \frac{CF}{FI} \quad ...(3)\]
परन्तु \(CA = OO'\)
\[\frac{OO'}{II'} = \frac{CF}{FI} \quad ...(4)\]
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर,
\[\frac{F'O}{CF'} = \frac{CF}{FI} \quad ...(5)\]
माना कि प्रथम फोकस \(F''\) से वस्तु की दूरी, \(FO = -x'\), द्वितीय फोकस \(F'\) से प्रतिबिम्ब की दूरी, \(FI = +x\), लेन्स की प्रथम फोकस-दूरी, \(CF'' = -f'\) तथा लेन्स की द्वितीय फोकस-दूरी, \(CF = +f\). इन मानों को समीकरण (3) में रखने पर,
\[\frac{-x'}{-f'} = \frac{f}{x}\]
अथवा \[xx' = ff'\]
In simple words: न्यूटन का लेंस सूत्र \(xx' = ff'\) लेंस के दो मुख्य फोकस बिंदुओं से वस्तु और उसके प्रतिबिंब की दूरी के बीच संबंध को दर्शाता है। यह सूत्र वस्तु और प्रतिबिंब की स्थिति को लेंस की फोकस दूरी से जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: न्यूटन के लेंस सूत्र की व्युत्पत्ति में समरूप त्रिभुजों का सही ढंग से पहचानना और उनके संगत पक्षों का अनुपात लेना महत्वपूर्ण है। दूरियों के लिए सही चिह्नों का उपयोग करना भी आवश्यक है।
प्रश्न 7.किसी उत्तल या अवतल गोलीय पृष्ठ पर आपतित प्रकाश के अपवर्तन के लिए सूत्र स्थापित कीजिए । \(n\) पदार्थ का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक तथा \(R\) गोलीय तल की त्रिज्या है।
Answer:
उत्तर-
माना कि SPS' एक उत्तल गोलीय पृष्ठ है जो निरपेक्ष अपवर्तनांक \(n_1\) के विरल माध्यम को निरपेक्ष अपवर्तनांक \(n_2\) के सघन माध्यम से पृथक् करता है। इस पृष्ठ का वक्रता केन्द्र C है तथा ध्रुव P है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक उत्तल गोलीय पृष्ठ पर प्रकाश के अपवर्तन को दर्शाता है, जहाँ प्रकाश विरल माध्यम (n1) से सघन माध्यम (n2) में प्रवेश करता है। वस्तु O से निकलने वाली किरणें पृष्ठ से अपवर्तित होकर प्रतिबिंब I बनाती हैं। यह अपवर्तन कोण i और अपवर्तन कोण r, तथा विभिन्न दूरियों PO, PI, PC को स्पष्ट करता है, जो गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन के सूत्र की व्युत्पत्ति के लिए आवश्यक हैं।
इसके मुख्य अक्ष PC पर (पीछे बढ़ाने पर) एक बिन्दु वस्तु O स्थित है। O से एक आपतित किरण OA, पृष्ठ पर बिन्दु A पर आपतित होती है, जहाँ CAN अभिलम्ब है। अपवर्तन के नियमानुसार, अपवर्तित किरण AB, अभिलम्ब की ओर मुड जाती है। दूसरी आपतित किरण OP पृष्ठ पर अभिलम्बवत् गिरती है, अतः बिना विचलित हुए सीधी चली जाती है। ये दोनों अपवर्तित किरणें पीछे बढ़ाये जाने पर बिन्दु \(I\) पर मिलती हैं। अतः वस्तु O का आभासी प्रतिबिम्ब बिन्दु \(I\) है ।
माना कि आपतन \(\angle OAN = i\), अपवर्तन \(\angle BAC = r\), \(PO = -u\), \(PI = -v\), \(PC = +R\) (चिह्न परिपाटी के अनुसार, दूरी \(u\) तथा \(v\), आपतित किरण की विपरीत दिशा में मापी गयी हैं, अतः ऋणात्मक हैं, परन्तु \(R\) आपतित किरण की दिशा में मापी गयी है, अतः धनात्मक है)।
माना कि OA, IA तथा CA मुख्य अक्ष से क्रमशः कोण \(\alpha\), \(\beta\), \(\gamma\) बनाती हैं तथा A से मुख्य अक्ष पर खींचे गए अभिलम्ब AM की ऊँचाई \(h\) है।
बहिष्कोण = सम्मुख दो अन्तः कोणों का योग
AOCA में बहिष्कोण \[\alpha + \gamma = i \quad ...(1)\]
तथा AICA में बहिष्कोण \[\beta + \gamma = r \quad ...(2)\]
अब, स्नेल के नियमानुसार, \[\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{n_2}{n_1}\]
अथवा \[n_1 \sin i = n_2 \sin r \quad ...(3)\]
यदि गोलीय पृष्ठ का द्वारक छोटा है, तो बिन्दु A, ध्रुव P के समीप होगा तथा प्रकाश किरण बिन्दु A पर इस प्रकार आपतित होगी कि कोण \(i\) व \(r\) अति अल्प होंगे। यदि \(i\) तथा \(r\) रेडियन में मापे जाएँ, तो \(\sin i = i\) तथा \(\sin r = r\);
समी० (3) से, \[n_1 i = n_2 r \quad ...(4)\]
समीकरण (1) व (2) से \(i\) व \(r\) के मान समी० (4) में रखने पर,
\[n_1 (\alpha + \gamma) = n_2 (\beta + \gamma)\]
अथवा \[ -n_2 \beta + n_1 \alpha = (n_2 - n_1) \gamma \quad ...(5)\]
पृष्ठ का द्वारक छोटा होने से कोण \(\alpha\), \(\beta\), \(\gamma\) भी छोटे होंगे तथा बिन्दु A व M ध्रुव P के समीप होंगे। अतः
\[\alpha = \tan \alpha = \frac{AM}{MO} = \frac{h}{PO} = \frac{h}{-u} \quad [\because MO = PO \text{ (लगभग)} ]\]
\[\beta = \tan \beta = \frac{AM}{MI} = \frac{h}{PI} = \frac{h}{-v} \quad [\because MI = PI \text{ (लगभग)} ]\]
\[\gamma = \tan \gamma = \frac{AM}{MC} = \frac{h}{PC} = \frac{h}{R} \quad [\because MC = PC \text{ (लगभग)} ]\]
\(\alpha\), \(\beta\), \(\gamma\) के ये मान समीकरण (5) में रखने पर,
\[n_1 \left(\frac{h}{-u}\right) - n_2 \left(\frac{h}{-v}\right) = (n_2 - n_1) \frac{h}{R}\]
\[\frac{n_2}{v} - \frac{n_1}{u} = \frac{n_2 - n_1}{R} \quad ...(6)\]
समी० (6) से स्पष्ट है कि \(v\) का मान \(a\) पर निर्भर नहीं करता। अतः बिन्दु O से चलने वाली सभी किरणें छोटे द्वारक के उत्तल पृष्ठ से अपवर्तित होकर एक ही बिन्दु \(I\) से आती प्रतीत होंगी। अतः \(I\), O का आभासी प्रतिबिम्ब है।
पुनः यदि विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम का अपवर्तनांक \(n\) हो, तो समीकरण (6) निम्नवत् होगी-
\[\frac{n}{v} - \frac{1}{u} = \frac{n-1}{R} \quad ...(7)\]
In simple words: गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र बताता है कि प्रकाश किरणें जब एक माध्यम से दूसरे में गुजरती हैं, तो वे अपनी दिशा बदल लेती हैं। यह सूत्र वस्तु दूरी, प्रतिबिंब दूरी, अपवर्तनांक और गोलीय पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या के बीच एक संबंध स्थापित करता है।
🎯 Exam Tip: गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन के सूत्र की व्युत्पत्ति में, चिह्नों का सही उपयोग और स्नेल के नियम का सटीक अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। आरेख स्पष्ट होना चाहिए और सभी कोणों व दूरियों को सही ढंग से लेबल किया जाना चाहिए।
प्रश्न 8.प्रिज्म के पदार्थ के लिए अपवर्तनांक का सूत्र अल्पतम विचलन कोण तथा प्रिज्म कोण के पदों में निगमित कीजिए।
या
का निगमन कीजिए। यहाँ \(n\) प्रिज्म का अपवर्तनांक, \(A\) प्रिज्म का कोण तथा अल्पतम विचलन है। या किसी प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक के लिये, प्रिज्म के कोण तथा न्यूनतम विचलन कोण के पदों में एक व्यंजक निकालिए।
Answer:
उत्तर-
प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक का सूत्र-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रिज्म (ABC) से प्रकाश किरण (RS) के अपवर्तन को दर्शाता है, जिसमें आपतन कोण (i1), अपवर्तन कोण (r1, r2) और निर्गत कोण (i2) शामिल हैं। प्रकाश किरण दो बार अपवर्तित होकर विचलन कोण (δ) बनाती है। यह चित्र प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक को प्रिज्म कोण और न्यूनतम विचलन कोण के पदों में व्युत्पन्न करने में मदद करता है।
चित्र 9.28 में, ABC प्रिज्म का मुख्य परिच्छेद है। प्रिज्म का अपवर्तन कोण \(A\) है। माना एक प्रकाश किरण RS, प्रिज्म के अपवर्तक पृष्ठ AB पर तिरछी आपतित होती है जो अभिलम्ब MSE की ओर झुक जाती है और ST दिशा में अपवर्तित हो जाती है। इस पृष्ठ पर आपतन कोण \(i_1\) वे अपवर्तन कोण \(r_1\) है। अपवर्तित किरण ST' पृष्ठ AC पर अभिलम्ब NTE से दूर हटती हुई वायु में TU दिशा में निकल जाती है। पृष्ठ AC पर आपतन कोण, तथा निर्गत कोण \(i_2\) है। आपतित किरण RS तथा निर्गत किरण TU को पीछे की ओर बढ़ाने पर ये बिन्दु D पर मिलती हैं। आपतित किरण तथा निर्गत किरणों के बीच बना कोण \(\delta\) विचलन कोण कहलाता है।
\(\triangle DST\) में \(\delta\) बहिष्कोण है, अतः
\[\delta = \angle ODU + \angle DTS = (i_1 - r_1) + (i_2 - r_2) = (i_1 + i_2) - (r_1 + r_2) \quad ...(1)\]
अल्पतम विचलन \(\delta = \delta_m\) की स्थिति में
\[i_1 = i_2 = i \quad ...(2)\]
तथा \[r_1 = r_2 = r \quad ...(3)\]
अतः \[\delta_m = 2i - 2r \quad ...(4)\]
अब चतुर्भुज ASET में,
\(\angle ASE + \angle ATE = 180^\circ\) (प्रत्येक कोण समकोण है)
अतः शेष कोण, \(\angle A + \angle SET = 180^\circ\)
परन्तु \(\triangle STE\) में, \(\angle SET + \angle r_1 + \angle r_2 = 180^\circ\)
अतः \(\angle A = r_1 + r_2 \quad ...(5)\)
या अल्पतम विचलन की स्थिति में \(A = 2r\)
समी० (4) व समी० (5) से
\[\delta_m = 2i - A \implies i = \frac{A + \delta_m}{2}\]
या अल्पतम विचलन की स्थिति में \(r = \frac{A}{2}\)
स्नेल के नियम से, प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक \(n = \frac{\sin i}{\sin r}\)
\[n = \frac{\sin \left(\frac{A + \delta_m}{2}\right)}{\sin \left(\frac{A}{2}\right)}\]
In simple words: प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक प्रिज्म कोण (A) और न्यूनतम विचलन कोण (δm) से संबंधित होता है। यह सूत्र दर्शाता है कि प्रकाश किरणें प्रिज्म से गुजरने पर कैसे विचलित होती हैं और प्रिज्म के ऑप्टिकल गुणों को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: प्रिज्म के अपवर्तनांक की व्युत्पत्ति के लिए स्पष्ट आरेख बनाना और सभी कोणों को सही ढंग से लेबल करना आवश्यक है। न्यूनतम विचलन की शर्तों को स्पष्ट रूप से बताना और स्नेल के नियम का सही ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें।
प्रश्न 9.किसी प्रकाशिक माध्यम की 'वर्ण-विक्षेपण क्षमता' की परिभाषा दीजिए। किसी प्रिज्म के पदार्थ के लिए वर्ण-विक्षेपण क्षमता का सूत्र अपवर्तनांक के पदों में प्राप्त कीजिए। या किसी प्रकाशिक माध्यम की विक्षेपण क्षमता की परिभाषा लिखिए।
या
किसी प्रकाशिक माध्यम की वर्ण-विक्षेपण क्षमता का सूत्र लिखिए। क्या वर्ण-विक्षेपण क्षमता प्रिज्म के कोण पर निर्भर करती है? या किसी प्रिज्म की वर्ण-विक्षेपण क्षमता की परिभाषा दीजिए।
या
वर्ण-विक्षेपण क्षमता की परिभाषा दीजिए।
Answer:
उत्तर-
जब श्वेत प्रकाश एक पतले प्रिज्म में से गुजरता है तो बैंगनी तथा लाल रंगों की निर्गत किरणों के बीच उत्पन्न कोणीय वर्ण-विक्षेपण तथा मध्यवर्ती (अर्थात् पीले रंग की) किरण के लिए विचलन कोण के अनुपात को प्रिज्म के पदार्थ की 'वर्ण-विक्षेपण क्षमता' (dispersive power) कहते हैं। इसे \(\omega\) (ओमेगा) से प्रदर्शित करते हैं।
अपवर्तनांक के पदों में वर्ण-विक्षेपण क्षमता सूत्र
\[\text{वर्ण-विक्षेपण क्षमता } \omega = \frac{\text{किन्हीं दो रंगों के लिए कोणीय वर्ण-विक्षेपण}}{\text{इन रंगों के माध्य रंग की किरण का विचलन कोण}} = \frac{\theta}{\delta_y}\]
यदि बैंगनी तथा लाल रंग के प्रकाश की किरणों के लिए विचलन कोण क्रमशः \(\delta_V\) तथा \(\delta_R\) हों तो
कोणीय वर्ण-विक्षेपण \[\theta = \delta_V - \delta_R\]
\[\omega = \frac{\delta_V - \delta_R}{\delta_y}\]
यदि बैंगनी, लाल तथा पीले रंग के प्रकाश के लिए प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक क्रमशः \(n_V\), \(n_R\) तथा \(n_y\) एवं प्रिज्म का कोण \(A\) हो तो बैंगनी तथा लाल किरणों के बीच कोणीय वर्ण-विक्षेपण
\[\delta_V - \delta_R = (n_V - 1)A - (n_R - 1)A = (n_V - n_R)A\]
तथा पीले रंग की किरण के लिए विचलन कोण \(\delta_y = (n_y - 1)A\)
अतः वर्ण-विक्षेपण क्षमता \[\omega = \frac{(n_V - n_R)A}{(n_y - 1)A} = \frac{n_V - n_R}{n_y - 1}\]
यहाँ से स्पष्ट है कि \(\omega\) का मान केवल प्रिज्म के पदार्थ पर निर्भर करता है, प्रिज्म के कोण पर नहीं।
In simple words: वर्ण-विक्षेपण क्षमता किसी प्रिज्म के पदार्थ का वह गुण है जो यह दर्शाता है कि वह श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में कितनी कुशलता से फैलाता है। यह विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांकों के अंतर और माध्य रंग के विचलन के अनुपात से परिभाषित होता है, और यह प्रिज्म के कोण पर निर्भर नहीं करता।
🎯 Exam Tip: वर्ण-विक्षेपण क्षमता की परिभाषा और सूत्र को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है। यह याद रखना कि यह प्रिज्म के पदार्थ पर निर्भर करता है, न कि उसके कोण पर, स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 10.उपयुक्त किरण आरेख द्वारा प्रिज्म के कोणीय वर्ण-विक्षेपण का सूत्र निकालिए।
Answer:
उत्तर-
कोणीय वर्ण-विक्षेपण (परिक्षेपण) (Angular dispersion)- “दो रंगों की निर्गत किरणों के बीच का कोण उन रंगों के लिए कोणीय वर्ण-विक्षेपण (angular dispersion) कहलाता है।”
यदि \(\delta_R\) व \(\delta_V\) क्रमशः लाल तथा बैंगनी रंग की किरणों के लिए (अल्पतम) विचलन कोण हों तो उनके बीच कोणीय वर्ण-विक्षेपण \(\theta = \delta_V - \delta_R\)
माना कि प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक \(A\) है तथा \(n_R\) व \(n_V\) क्रमशः लाल व बैंगनी रंगों के लिए प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक हैं। तब, पतले प्रिज्म से उत्पन्न विचलन के लिए
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण को दर्शाता है, जिसमें प्रकाश अपने घटक रंगों (जैसे लाल, पीला, बैंगनी) में फैल जाता है। इसमें विभिन्न रंगों के लिए विचलन कोणों (δV, δY, δR) और आपतित तथा अपवर्तित किरणों के पथ को दर्शाया गया है, जिससे कोणीय वर्ण-विक्षेपण के सूत्र को समझने में मदद मिलती है।
सूत्र \(\delta_m = (n-1)A\) से, प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक तथा \(A\) = प्रिज्म कोण]
बैंगनी तथा लाल रंगों के लिए विचलन कोण
\[\delta_V = (n_V - 1)A\]
तथा \[\delta_R = (n_R - 1)A\]
अतः कोणीय वर्ण-विक्षेपण \[\theta = \delta_V - \delta_R = (n_V - 1)A - (n_R - 1)A = (n_V - n_R)A\]
In simple words: कोणीय वर्ण-विक्षेपण यह बताता है कि एक प्रिज्म से गुजरने के बाद विभिन्न रंगों की प्रकाश किरणें एक-दूसरे से कितनी दूर फैल जाती हैं। इसका सूत्र (nV - nR)A है, जहाँ nV और nR बैंगनी और लाल रंगों के लिए अपवर्तनांक हैं, और A प्रिज्म का कोण है।
🎯 Exam Tip: कोणीय वर्ण-विक्षेपण का आरेख बनाते समय, श्वेत प्रकाश को प्रिज्म से गुजरते हुए और उसके घटक रंगों में फैलते हुए दिखाना महत्वपूर्ण है। विभिन्न रंगों के लिए विचलन कोणों को सही ढंग से लेबल करें।
प्रश्न 11.निकट दृष्टि दोष क्या है ? इसके क्या कारण हो सकते हैं? इसका निवारण किस प्रकार किया जाता है ?
या
निकट दृष्टि दोष क्या है? इसका निवारण किस प्रकार किया जाता है?
या
निकट दृष्टि दोष क्या है?
Answer:
उत्तर-
निकट-दृष्टि दोष (Myopia or shortsightedness)- निकट दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखायी देती हैं; परन्तु अधिक दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखायी नहीं देतीं अर्थात् नेत्र का दूर बिन्दु अनन्त पर न होकर कम दूरी पर आ जाता है। इस दोष के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।
(i) नेत्र लेन्स की वक्रता बढ़ जाए जिससे उसकी फोकस दूरी कम हो जाए।
(ii) नेत्र लेन्स और रेटिना के बीच की दूरी बढ़ जाए अर्थात् नेत्र के गोले में लम्बापन आ जाए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र निकट दृष्टि दोष से ग्रसित आँख को दर्शाता है, जहाँ दूर की वस्तुओं से आने वाली समांतर किरणें रेटिना (R) से पहले ही बिंदु P पर अभिसरित हो जाती हैं, जिससे रेटिना पर धुंधला प्रतिबिंब बनता है।
इस दोष के कारण दूर की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर न बनकर उससे आगे बनने लगता है (चित्र 9.30) अर्थात् प्रतिबिम्ब रेटिना व नेत्र लेन्स के बीच P पर बन जाने से वस्तु स्पष्ट नहीं दिखती। ऐसे मनुष्य का दूर बिन्दु अनन्त पर न होकर आँख के काफी पास बनता है तथा निकट बिन्दु भी 25 सेमी से कम दूरी पर बनता है। दोष का निवारण-इस दोष में नेत्र का लेन्स अधिक अभिसारी (converging) हो जाता है; अतः इस दोष को दूर करने के लिए ऐसा लेन्स प्रयुक्त करना चाहिए जो नेत्र लेन्स को कम अभिसारी कर दे। इसलिए इस दोष को दूर करने के लिए उचित फोकस दूरी के अवतल लेन्स का प्रयोग करते हैं, ताकि इसे लेन्स तथा नेत्र लेन्स की संयुक्त फोकस दूरी बढ़कर इतनी हो जाए कि प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनने लगे।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र निकट दृष्टि दोष के निवारण को दर्शाता है। इसमें एक अवतल लेंस को आँख के सामने रखा गया है। यह लेंस दूर की वस्तु से आने वाली समांतर किरणों को अपसारित करता है, जिससे आँख का नेत्र लेंस उन्हें रेटिना पर स्पष्ट रूप से केंद्रित कर पाता है, और व्यक्ति को दूर की वस्तुएं साफ दिखाई देती हैं।
यदि निकट दृष्टि दोष वाले व्यक्ति का आँख के लिए दूर बिन्दु O हो, तो प्रयुक्त अवतल लेन्स अनन्त से आने वाली समान्तर किरणों का प्रतिबिम्ब O पर बनाएगा। यह प्रतिबिम्ब नेत्र लेन्स के लिए वस्तु का कार्य करेगा, जिससे अन्तिम प्रतिबिम्ब (I) रेटिना पर बनने लगेगा (चित्र 9.31)। स्पष्टतः प्रयुक्त लेन्स की फोकस दूरी नेत्र से नेत्र के दूर बिन्दु के बीच की दूरी के बराबर होगी।
In simple words: निकट दृष्टि दोष एक ऐसी स्थिति है जिसमें पास की वस्तुएं तो स्पष्ट दिखती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं, क्योंकि प्रकाश रेटिना से पहले फोकस हो जाता है। इसका निवारण अवतल लेंस का उपयोग करके किया जाता है, जो प्रकाश किरणों को फैलाता है ताकि वे रेटिना पर ठीक से फोकस हो सकें।
🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष के कारण (जैसे नेत्रगोलक का लंबा होना या लेंस की अत्यधिक अभिसारी शक्ति) और उसके निवारण (अवतल लेंस का उपयोग) को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है। किरण आरेखों का उपयोग कर स्पष्टीकरण देना अतिरिक्त अंक दिला सकता है।
प्रश्न 12.दूर दृष्टि दोष क्या है ? इसके क्या कारण हो सकते हैं ? इसका निवारण किस प्रकार किया जाता है?
या
आँख का दूर दृष्टि दोष क्या है? इसका निवारण कैसे किया जाता है?
Answer:
उत्तर-
दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia or longsightedness)- दूर दृष्टि दोष मनुष्य की आँख को वह दोष है, जिसमें मनुष्य दूर की वस्तुओं को तो स्पष्ट देख सकता है; परन्तु पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखायी नहीं पड़तीं। इसके निम्न दो कारण हो सकते हैं-
(i) नेत्र लेन्स की फोकस दूरी अधिक हो जाए अर्थात् लेन्स पतला हो जाए।
(ii) आँख के गोले का व्यास कम हो जाए अर्थात् नेत्र लेन्स व रेटिना के बीच की दूरी कम हो जाए।
इन कारणों से पास की वस्तुओं के प्रतिबिम्ब रेटिना पर न बनकर उसके पीछे बनते हैं (चित्र 9.32)। दूसरे शब्दों में, नेत्र का निकट बिन्दु 25 सेमी से अधिक दूर हो जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दूर दृष्टि दोष से ग्रसित आँख को दर्शाता है, जहाँ पास की वस्तुओं से आने वाली प्रकाश किरणें रेटिना के पीछे फोकस होती हैं। इससे रेटिना पर धुंधला प्रतिबिंब बनता है, जो पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने में कठिनाई पैदा करता है।
दोष का निवारण- चूँकि इस दोष में नेत्र लेन्स की फोकस दूरी बढ़ जाती है जिससे नेत्र लेन्स कम अभिसारी (converging) हो जाता है; अतः इस दोष को दूर करने के लिए एक-ऐसा लेन्स प्रयुक्त करना चाहिए जिससे वह अधिक अभिसारी हो जाए। इस दोष को दूर करने के लिए उपयुक्त फोकस दूरी का उत्तल लेन्स प्रयुक्त करते हैं ताकि इस लेन्स तथा नेत्र-लेन्स की संयुक्त फोकस दूरी इतनी हो जाये कि प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनने लगे।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दूर दृष्टि दोष के निवारण को दर्शाता है। इसमें एक उत्तल लेंस को आँख के सामने रखा गया है। यह लेंस पास की वस्तु से आने वाली अपसारी किरणों को अभिसरित करता है, जिससे आँख का नेत्र लेंस उन्हें रेटिना पर ठीक से केंद्रित कर पाता है, और व्यक्ति को पास की वस्तुएं साफ दिखाई देती हैं।
माना सामान्य आँख का निकट बिन्दु N तथा दूर दृष्टि से पीड़ित आँख का निकट बिन्दु O पर है। प्रयुक्त उत्तल लेन्स N पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब O पर बनाने लगे, तब प्रतिबिम्ब O नेत्र लेन्स के लिए वस्तु का कार्य करेगा तथा नेत्र लेन्स अन्तिम प्रतिबिम्ब रेटिना पर बना देगा। इस प्रकार उचित फोकस दूरी का उत्तल लेन्स प्रयुक्त करने पर सामान्य निकट बिन्दु N पर रखी वस्तु भी आँख को स्पष्ट दिखाई देगी (चित्र 9.33) ।
In simple words: दूर दृष्टि दोष में व्यक्ति दूर की वस्तुएं तो स्पष्ट देख सकता है, लेकिन पास की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं, क्योंकि प्रकाश रेटिना के पीछे फोकस हो जाता है। इसका निवारण उत्तल लेंस का उपयोग करके किया जाता है, जो प्रकाश किरणों को रेटिना पर सही ढंग से केंद्रित करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: दूर दृष्टि दोष के कारणों (जैसे नेत्रगोलक का छोटा होना या लेंस की अपर्याप्त अभिसारी शक्ति) और उसके निवारण (उत्तल लेंस का उपयोग) पर ध्यान केंद्रित करें। आरेख बनाना और यह समझाना कि उत्तल लेंस पास की वस्तुओं से प्रकाश को कैसे अभिसरित करता है, महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 13.एक अपवर्तनी खगोलीय दूरदर्शी का किरण आरेख खीचिए जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है। इसकी आवर्धन क्षमता के लिए व्यंजक भी स्थापित कीजिए।
या
खगोलीय दूरदर्शी का किरण आरेख बनाइए। जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बन रहा है। दूरदर्शी में अभिदृश्यक लेन्स का द्वारक बड़े आकार का क्यों लिया जाता है?
या
खगोलीय दूरदर्शी द्वारा अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनने का किरण आरेख बनाइए।
Answer:
उत्तर-
खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope)- खगोलीय दूरदर्शी एक ऐसा प्रकाशिक यन्त्र है जिसके द्वारा उना दूर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब का आँख पर बड़ा दर्शन कोण बनाता है जिससे कि वह वस्तु आँख को बड़ी दिखायी पड़ती है।
रचना- इसमें धातु की एक लम्बी बेलनाकार नली होती है जिसके एक सिरे पर बड़ी फोकस-दूरी तथा बड़े द्वारक का अवर्णक उत्तल लेन्स लगा होता है, जिसे 'अभिदृश्यक लेन्स' कहते हैं। नली के दूसरे सिरे पर एक अन्य छोटी नली फिट होती है जो दन्तुर दण्ड-चक्र (रैक-पिनयन) व्यवस्था द्वारा बड़ी नली में आगे-पीछे खिसकाई जा सकती है। छोटी नली के बाहरी सिरे पर एक छोटी फोकस दूरी तथा छोटे द्वारकं को अवर्णक उत्तल लेन्स लगा रहता है जिसे अभिनेत्र लेन्स अथवा नेत्रिका कहते हैं। नेत्रिका के फोकस पर क्रॉस-तार लगे रहते हैं।
समायोजन- सबसे पहले नेत्रिको को छोटी नली में आगे-पीछे खिसकाकर क्रॉस-तार पर फोकस करे लेते हैं। फिर जिस वस्तु को देखना हो उसकी ओर अभिदृश्यक लेन्स को दिष्ट कर देते हैं। दन्तुर-दण्ड-चक्र व्यवस्था द्वारा छोटी नली को लम्बी नली में आगे-पीछे खिसकाकर अभिदृश्यक लेन्स की क्रॉस-तार से दूरी इस प्रकार समायोजित करते हैं कि वस्तु के प्रतिबिम्ब और क्रॉस-तार में लम्बन न रहे। इस स्थिति में वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिम्ब दिखाई देगा। यह प्रतिबिम्ब लेन्सों द्वारा प्रकाश के अपवर्तन से बनता है। अतः यह दूरदर्शी अपवर्तक' दूरदर्शी है।
प्रतिबिम्ब का बनना- चित्र 9.34 में दूरदर्शी का अभिदृश्यक लेन्स O तथा नेत्रिका E । दिखाये गये हैं। AB एक दूर-स्थित वस्तु है। जिसका A सिरा दूरदर्शी की अक्ष पर है। लेन्स -140 के द्वारा AB का वास्तविक, उल्टा व छोटा प्रतिबिम्ब A'B', लेन्स के द्वितीय फोकस FO पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब नेत्रिका E के प्रथम फोकस Fe के भीतर है तथा नेत्रिका के लिए वस्तु का कार्य करता है। अतः नेत्रिका, A'B' का आभासी, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब A''B'' बनाती है। B'' की स्थिति ज्ञात करने के लिए, B' से दो विछिन्न किरणें (.........) ली गई हैं। एक किरण जो E के प्रकाशिक-केन्द्र में से जाती है, सीधी चली जाती है तथा दूसरी किरण जो मुख्य अक्ष से समान्तर ली गई है, E के दूसरे फोकस F, से होकर जाती है। ये किरणें पीछे बढ़ाने पर बिन्दु B'' पर मिलती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक खगोलीय दूरदर्शी द्वारा प्रतिबिंब के निर्माण को दर्शाता है। इसमें एक अभिदृश्यक लेंस (O) दूर की वस्तु AB का वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिंब A'B' बनाता है। फिर एक नेत्रिका लेंस (E) इस A'B' को आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब A''B'' के रूप में बनाता है, जिसे आँख द्वारा देखा जाता है। यह अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है।
आवर्धन-क्षमता- दूरदर्शी की आवर्धन-क्षमता (कोणीय आवर्धन) \[\text{M} = \frac{\text{अन्तिम प्रतिबिम्ब द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण}}{\text{वस्तु द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण जबकि वस्तु अपनी वास्तविक स्थिति में हो}}\]
चूँकि आँख नेत्रिका E के समीप है, अतः अन्तिम प्रतिबिम्ब A''B'' द्वारा नेत्रिका पर बने कोण \(\beta\) को ही A''B'' द्वारा आँख पर बना कोण मान सकते हैं। इसी प्रकार चूँकि वस्तु AB, दूरदर्शी से बहुत दूर है, अतः वस्तु द्वारा अभिदृश्यक O पर बने कोण \(\alpha\) को वस्तु द्वारा आँख पर बना कोण मान सकते हैं। तब
\[M = \frac{\beta}{\alpha}\]
कोण \(\beta\) व \(\alpha\) बहुत छोटे होते हैं, अतः इनके स्थान पर इनकी स्पर्शज्या (tan) लिख सकते हैं। तब
\[\beta = \tan \beta = \frac{A'B'}{EA'} \quad (\text{चित्र 9.34 से})\]
तथा \[\alpha = \tan \alpha = \frac{A'B'}{OA'}\]
\[M = \frac{A'B'/EA'}{A'B'/OA'} = \frac{OA'}{EA'}\]
यदि अभिदृश्यक O की फोकस-दूरी \(f_o\) हो तथा A'B' की नेत्रिका E से दूरी \(u_e\) हो, तो उचित चिह्न लेने पर \(OA' = +f_o\) तथा \(EA' = -u_e\); अतः उपरोक्त समीकरण से
\[M = - \frac{f_o}{u_e} \quad ...(1)\]
यह आवर्धन-क्षमता का व्यापक सूत्र है। इसकी निम्न दो स्थितियाँ सम्भव हैं-
(1) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर बनता है - यदि अन्तिम प्रतिबिम्ब A''B'' की नेत्रिका से दूरी D है, तब लेन्स के सूत्र \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\) में नेत्रिका के लिए
\(v = -D, u = -u_e\) तथा \(f = +f_e\) (जहाँ \(f_e\) नेत्रिका की फोकस-दूरी है) रखने पर
\[\frac{1}{-D} - \frac{1}{-u_e} = \frac{1}{f_e}\]
अथवा \[\frac{1}{u_e} = \frac{1}{f_e} + \frac{1}{D} = \frac{1}{f_e} \left(1 + \frac{f_e}{D}\right)\]
\(\frac{1}{u_e}\) का यह मान समी० (1) में रखने पर,
\[M = - \frac{f_o}{f_e} \left(1 + \frac{f_e}{D}\right) \quad ...(2)\]
इस सूत्र में \(f_o, f_e\) तथा \(D\) के केवल आंकिक मान रखेंगे। इस स्थिति में दूरदर्शी की लम्बाई \(f_o + u_e\) होगी।
(2) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है - श्रांत आँख (relaxed eye) से देखने के लिए अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनना चाहिए (चित्र 9.35)। इसके लिए नेत्रिका तथा अभिदृश्यक के बीच दूरी इतनी रखते हैं कि वस्तु AB का अभिदृश्यक O द्वारा बना प्रतिबिम्ब A'B', नेत्रिका के फोकस \(F_e'\) पर पड़े (\(u_e = f_e\)) । दूरदर्शी का यह समायोजन सामान्य समायोजन कहलाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक खगोलीय दूरदर्शी को सामान्य समायोजन में दर्शाता है, जहाँ अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है। दूर की वस्तु से आने वाली समांतर किरणें अभिदृश्यक लेंस (O) से अपवर्तित होकर उसके फोकस (Fo) पर मिलती हैं। फिर नेत्रिका लेंस (E) को इस तरह समायोजित किया जाता है कि यह प्रतिबिंब A'B' उसके फोकस (Fe) पर बने, जिससे अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता हुआ प्रतीत होता है।
समीकरण (1) में \(u_e = f_e\) रखने पर,
\[M = - \frac{f_o}{f_e} \quad ...(3)\]
इस स्थिति में दूरदर्शी की लम्बाई \(f_o + f_e\) होगी।
सूत्र (2) तथा (3) से स्पष्ट है कि दूरदर्शी की आवर्धन-क्षमता बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी \(f_o\) बड़ी तथा नेत्रिका की फोकस दूरी \(f_e\) छोटी होनी चाहिए। ऋणात्मक चिह्न इस बात का सूचक है कि अन्तिम प्रतिबिम्ब उल्टा बनता है।
In simple words: खगोलीय दूरदर्शी दूर की वस्तुओं का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब बनाने वाला एक उपकरण है। इसकी आवर्धन क्षमता अभिदृश्यक लेंस की फोकल लंबाई और नेत्रिका लेंस की फोकल लंबाई के अनुपात पर निर्भर करती है, और इसे अधिकतम करने के लिए अभिदृश्यक की फोकल लंबाई बड़ी और नेत्रिका की फोकल लंबाई छोटी होनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: खगोलीय दूरदर्शी के किरण आरेख को स्पष्ट और सटीक रूप से बनाएं, विशेषकर जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी या अनंत पर बनता हो। आवर्धन क्षमता के सूत्र को सही ढंग से व्युत्पन्न करना और उसकी शर्तों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 14.किसी परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खींचकर उसमें प्रतिबिम्ब का बनना प्रदर्शित कीजिए ।
या
परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खीचिए तथा इसकी आवर्धन-क्षमता का सूत्र लिखिए जब प्रतिबिम्ब (i) अनन्त पर बन रहा हो । (ii) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बन रहा हो।
या
परावर्ती दूरदर्शी में प्रतिबिम्ब का बनना किरण-आरेख द्वारा समझाइए। अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी का क्या लाभ है?
या
परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खीचिए तथा इसकी कार्यविधि समझाइए । किसी दूरदर्शी की विभेदन क्षमता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
या
परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
या
किसी परावर्ती दूरदर्शी से प्रतिबिम्ब का बनना किरण आरेख द्वारा समझाइए । अपवर्ती दूरदर्शी की अपेक्षा परावर्ती दूरदर्शी क्यों अच्छी होती है?
Answer:
उत्तर-
परावर्ती दूरदर्शी की रचना एवं उसके द्वारा प्रतिबिम्ब बनने की किरण आरेख चित्र 9.36 में प्रदर्शित किया गया है। इसमें अभिदृश्यक एक बड़े आकार तथा बड़ी फोकस दूरी का अवतल दर्पण \(M_1\) होता है जो एक चौड़ी नली के एक सिरे पर। लगा रहता है। नली का खुला सिरा दूर स्थित वस्तु की ओर करके रखा जाता है। नली में अवतल दर्पण के फोकस से कुछ पहले एक समतल दर्पण \(M_2\) मुख्य अक्ष से 45° कोण पर झुका हुआ रखा जाता है। दूरदर्शी की इस चौड़ी नली के बगल में एक पतली नली लगी होती है जिसमें कम फोकस दूरी तथा छोटी द्वारक का एक अवर्णक उत्तल लेन्स E लगा रहता है, जिसे नेत्रिका कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक परावर्ती दूरदर्शी की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। दूर की वस्तु AB से आने वाली प्रकाश किरणें अभिदृश्यक अवतल दर्पण (M1) पर आपतित होती हैं, फिर एक समतल दर्पण (M2) द्वारा परावर्तित होकर एक छोटे, वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब A1B1 का निर्माण करती हैं। नेत्रिका लेंस (E) इस A1B1 को अंतिम प्रतिबिंब A2B2 के रूप में स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी या अनंत पर बनाता है।
अवतल दर्पण \(M_1\) दूर स्थित वस्तु AB से आने वाली समान्तर किरणों को अपने फोकस पर केन्द्रित करता है। परन्तु ये किरणें फोकस पर केन्द्रित होने से पूर्व फोकस से पहले 45° कोण पर झुके समतल दर्पण \(M_2\) पर आपतित होती हैं। समतल दर्पण इन किरणों को परावर्तित करके AB का छोटा, वास्तविक, उल्टा प्रतिबिम्बे \(A_1B_1\) बनाता है। नेत्रिका E द्वारा \(A_1B_1\) का वास्तविक, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब \(A_2B_2\) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी तथा अनन्त के बीच में बन जाता है। जब प्रतिबिम्ब \(A_1B_1\) नेत्रिका के फोकस पर बन जाता है, तो अन्तिम प्रतिबिम्ब \(A_2B_2\) अनन्त पर बनेगा ।
आवर्धन क्षमता सूत्र
(i) जब प्रतिबिम्ब अनन्त पर बन रहा हो, तब \[M = \frac{f_o}{f_e}\]
(ii) जब प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, तब \[M = - \frac{f_o}{f_e} \left(1 + \frac{f_e}{D}\right)\]
परावर्ती दूरदर्शी के लाभ- अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी के निम्नलिखित लाभ हैं-
(i) परावर्ती दूरदर्शक में प्रकाश अवशोषण बहुत कम होता है; अतः इससे निर्मित प्रतिबिम्ब, समान द्वारक के अपवर्ती दूरदर्शक की अपेक्षा अधिक चमकीला होता है।
(ii) परावर्ती दूरदर्शक से बना अन्तिम प्रतिबिम्ब वर्ण-विपथन दोष से पूर्णतः मुक्त होता है।
(iii) इसमें परवलयाकार दर्पणों के प्रयोग से गोलीय विपथन दोष भी स्वतः दूर हो जाता है जिससे प्रतिबिम्ब टेढ़े दिखायी नहीं देते।
(iv) दूरदर्शी से दूर-स्थित वस्तु को चमकीला प्रतिबिम्ब बनाने के लिए उसके अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा (large) होना आवश्यक है। तकनीकी दृष्टि से बड़े द्वारक के लेन्स को ढालने (casting) की क्रिया में उसके पदार्थ में विकृति आ जाती है, क्योंकि बड़े आकार के गर्म काँच को एकसमान (uniformly) ठण्डा करना कठिन होता है। फलस्वरूप इनसे निर्मित प्रतिबिम्ब भी विकृत हो जाते हैं। चूँकि दर्पण से परावर्तन द्वारा प्रतिबिम्ब निर्मित होते हैं, प्रकाश की किरण केवल दर्पण के पृष्ठ को स्पर्श करती है, उसके पदार्थ में होकर नहीं गुजरती है। अतः दर्पण के पदार्थ में कोई विकृति होने पर उसका प्रतिबिम्ब पर प्रभाव नहीं पड़ता।
In simple words: परावर्ती दूरदर्शी दूर की वस्तुओं के चमकीले और स्पष्ट प्रतिबिंब बनाने के लिए दर्पणों का उपयोग करते हैं, जो वर्ण और गोलीय विपथन जैसे दोषों से मुक्त होते हैं। ये अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में बड़े द्वारक बनाने और अधिक प्रकाश इकट्ठा करने में बेहतर होते हैं, जिससे दूरस्थ खगोलीय पिंडों का विस्तृत अवलोकन संभव हो पाता है।
🎯 Exam Tip: परावर्ती दूरदर्शी के आरेख को सही ढंग से बनाएं, जिसमें अवतल दर्पण, समतल दर्पण और नेत्रिका लेंस का उपयोग दिखाया गया हो। परावर्ती दूरदर्शी के लाभों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करना, विशेषकर वर्ण-विपथन की अनुपस्थिति और बड़े द्वारक की क्षमता, उच्च अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।
Question 14. किसी परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खींचकर उसमें प्रतिबिम्ब का बनना प्रदर्शित कीजिए। (2009, 16, 17)
या
परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खीचिए तथा इसकी आवर्धन-क्षमता का सूत्र लिखिए जब प्रतिबिम्ब (i) अनन्त पर बन रहा हो । (ii) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बन रहा हो। (2011)
या
परावर्ती दूरदर्शी में प्रतिबिम्ब का बनना किरण-आरेख द्वारा समझाइए। अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी का क्या लाभ है? (2009, 10, 11)
या
परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खीचिए तथा इसकी कार्यविधि समझाइए । किसी दूरदर्शी की विभेदन क्षमता कैसे बढ़ाई जा सकती है? (2012)
या
परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2017)
या
किसी परावर्ती दूरदर्शी से प्रतिबिम्ब का बनना किरण आरेख द्वारा समझाइए । अपवर्ती दूरदर्शी की अपेक्षा परावर्ती दूरदर्शी क्यों अच्छी होती है? (2017)
Answer: उत्तर-
परावर्ती दूरदर्शी की रचना एवं उसके द्वारा प्रतिबिम्ब बनने की किरण आरेख चित्र 9.36 में प्रदर्शित किया गया है। इसमें अभिदृश्यक एक बड़े आकार तथा बड़ी फोकस दूरी का अवतल दर्पण M1 होता है जो एक चौड़ी नली के एक सिरे पर। लगा रहता है। नली का खुला सिरा दूर स्थित वस्तु की ओर करके रखा जाता है। नली में अवतल दर्पण के फोकस से कुछ पहले एक समतल दर्पण M2 मुख्य अक्ष से 45° कोण पर झुका हुआ रखा जाता है। दूरदर्शी की इस चौड़ी नली के बगल में एक पतली नली लगी होती है जिसमें कम फोकस दूरी तथा छोटी द्वारक का एक अवर्णक उत्तल लेन्स E लगा रहता है, जिसे नेत्रिका कहते हैं।
अवतल दर्पण M1 दूर स्थित वस्तु AB से आने वाली समान्तर किरणों को अपने फोकस पर केन्द्रित करता है। परन्तु ये किरणें फोकस पर केन्द्रित होने से पूर्व फोकस से पहले 45° कोण पर झुके समतल दर्पण M2 पर आपतित होती हैं। समतल दर्पण इन किरणों को परावर्तित करके AB का छोटा, वास्तविक, उल्टा प्रतिबिम्ब A1B1 बनाता है। नेत्रिका E द्वारा A1B1 का वास्तविक, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब A2B2 स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी तथा अनन्त के बीच में बन जाता है। जब प्रतिबिम्ब A1B1 नेत्रिका के फोकस पर बन जाता है, तो अन्तिम प्रतिबिम्ब A2B2 अनन्त पर बनेगा ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक परावर्ती दूरदर्शी की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इसमें एक बड़ा अवतल दर्पण M1 दूर से आने वाली प्रकाश किरणों को फोकस करता है। एक छोटा समतल दर्पण M2 इन किरणों को परावर्तित करके एक वास्तविक, उल्टा प्रतिबिम्ब A1B1 बनाता है। फिर नेत्रिका E इस प्रतिबिम्ब को एक बड़ा, आभासी प्रतिबिम्ब A2B2 के रूप में स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी या अनन्त पर बनाती है, जिससे दूर की वस्तुएँ बड़ी और चमकीली दिखाई देती हैं।
आवर्धन क्षमता सूत्र
(i) जब प्रतिबिम्ब अनन्त पर बन रहा हो, तब \(M = \frac{f_o}{f_e}\)
(ii) जब प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, तब \(M = - \frac{f_o}{f_e}(1+\frac{f_e}{D})\) अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में
परावर्ती दूरदर्शी के लाभ- अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी के निम्नलिखित लाभ हैं-
1. परावर्ती दूरदर्शक में प्रकाश अवशोषण बहुत कम होता है; अतः इससे निर्मित प्रतिबिम्ब, समान द्वारक के अपवर्ती दूरदर्शक की अपेक्षा अधिक चमकीला होता है।
2. परावर्ती दूरदर्शक से बना अन्तिम प्रतिबिम्ब वर्ण-विपथन दोष से पूर्णतः मुक्त होता है।
3. इसमें परवलयाकार दर्पणों के प्रयोग से गोलीय विपथन दोष भी स्वतः दूर हो जाता है जिससे प्रतिबिम्ब टेढ़े दिखायी नहीं देते।
4. दूरदर्शी से दूर-स्थित वस्तु को चमकीला प्रतिबिम्ब बनाने के लिए उसके अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा (large) होना आवश्यक है। तकनीकी दृष्टि से बड़े द्वारक के लेन्स को ढालने (casting) की क्रिया में उसके पदार्थ में विकृति आ जाती है, क्योंकि बड़े आकार के गर्म काँच को एकसमान (uniformly) ठण्डा करना कठिन होता है। फलस्वरूप इनसे निर्मित प्रतिबिम्ब भी विकृत हो जाते हैं। चूँकि दर्पण से परावर्तन द्वारा प्रतिबिम्ब निर्मित होते हैं, प्रकाश की किरण केवल दर्पण के पृष्ठ को स्पर्श करती है, उसके पदार्थ में होकर नहीं गुजरती है। अतः दर्पण के पदार्थ में कोई विकृति होने पर उसका प्रतिबिम्ब पर प्रभाव नहीं पड़ता।
5. दूरदर्शी की विभेदन क्षमता = d/1.22 \(\lambda\) अतः अभिदृश्यक का द्वारक d बढ़ाकर दूरदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ायी जा सकती है।
6. परावर्ती दूरदर्शी में परवलयाकार दर्पण के उपयोग से प्रतिबिम्ब में गोलीय विपथन के दोष को दूर किया जा सकता है।
In simple words: A reflecting telescope uses mirrors to form images of distant objects. Its main advantages are better brightness due to larger aperture, no chromatic aberration, and reduced spherical aberration, making it superior to refracting telescopes for observing faint, distant objects.
🎯 Exam Tip: Focus on understanding the ray diagram and the two magnification formulas for a reflecting telescope. Highlighting the advantages over refracting telescopes is crucial for full marks.
Question 15. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का नामांकित किरण आरेख बनाइए तथा इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र ज्ञात कीजिए, जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है। (2016)
या
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का नामांकित किरण आरेख बनाइए तथा इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र ज्ञात कीजिए, जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, (2016)
Answer: उत्तर-
आवर्धन-क्षमता- माना कि अन्तिम प्रतिबिम्ब A” B” नेत्रिका E पर \(\beta\) कोण बनाता है। आँख नेत्रिका के समीप है, अतः A” B” द्वारा आँख पर बनने वाले कोण को भी \(\beta\) मान सकते हैं। माना कि यदि वस्तु AB आँख से स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर हो, तो वह आँख पर \(\alpha\) कोण बनाती है। अब, सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन-क्षमता
\(M = \frac{\text{अन्तिम प्रतिबिम्ब द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण}}{\text{वस्तु द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण जबकि वस्तु स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर हो तथा सीधे ही देखी जा रही हो}} = \frac{\beta}{\alpha}\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण को दर्शाता है। अभिदृश्यक लेन्स (Objective lens) Fo फोकस दूरी का है और बिम्ब AB का वास्तविक, उल्टा और बड़ा प्रतिबिम्ब A'B' बनाता है। फिर नेत्रिका लेन्स (Eyepiece lens) Fe फोकस दूरी का इस A'B' को आभासी वस्तु मानकर अन्तिम प्रतिबिम्ब A''B'' बनाता है जो स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर स्थित है।
चूँकि आँख नेत्रिका E के समीप है, अतः अन्तिम प्रतिबिम्ब A"B" द्वारा नेत्रिका पर बने कोण \(\beta\) को ही A"B" द्वारा आँख पर बना कोण मान सकते हैं। इसी प्रकार चूँकि वस्तु AB, दूरदर्शी से बहुत दूर है, अतः वस्तु द्वारा अभिदृश्यक O पर बने कोण \(\alpha\) को वस्तु द्वारा आँख पर बना कोण मान सकते हैं। तब
\(M = \frac{\beta}{\alpha}\)
कोण \(\beta\) व \(\alpha\) बहुत छोटे होते हैं, अतः इनके स्थान पर इनकी स्पर्शज्या (tan) लिख सकते हैं। तब
\(\beta = \tan \beta = \frac{A'B'}{EA'}\)
तथा \(\alpha = \tan \alpha = \frac{AB}{D}\)
\(\implies M = \frac{A'B'/EA'}{AB/D} = \frac{A'B'}{AB} (\frac{D}{EA'})\)
यदि अभिदृश्यक O की फोकस दूरी \(F_o\) हो तथा A'B' की नेत्रिका E से दूरी \(u_e\) हो, तो उचित चिह्न लेने पर \(OA' = +f_o\) तथा \(EA' = -u_e\); अतः उपरोक्त समीकरण से
\(M = - \frac{v_o}{u_o} (-\frac{D}{u_e}) = - \frac{v_o}{u_o} \frac{D}{u_e}\) ...(1)
यह आवर्धन-क्षमता का व्यापक सूत्र है। इसकी निम्न दो स्थितियाँ सम्भव हैं-
1. जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर बनता है - यदि अन्तिम प्रतिबिम्ब A"B" की नेत्रिका से दूरी D है, तब लेन्स के सूत्र \(\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}\) में नेत्रिका के लिए \(v = -D, u = -u_e\) तथा \(f = +f_e\) (जहाँ \(f_e\) नेत्रिका की फोकस दूरी है) रखने पर
\(\frac{1}{-D} - \frac{1}{-u_e} = \frac{1}{f_e}\)
अथवा \(\frac{1}{u_e} = \frac{1}{f_e} + \frac{1}{D} = \frac{1}{f_e} (1+\frac{f_e}{D})\)
\(\frac{1}{u_e}\) का यह मान समी० (1) में रखने पर,
\(M = - \frac{v_o}{u_o} (1+\frac{D}{f_e})\) ...(2)
इस सूत्र में \(f_o,f_e\) तथा D के केवल आंकिक मान रखेंगे। इस स्थिति में दूरदर्शी की लम्बाई \(f_o + u_e\) होगी।
2. जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है - श्रांत आँख (relaxed eye) से देखने के लिए अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनना चाहिए (चित्र 9.35)। इसके लिए नेत्रिका तथा अभिदृश्यक के बीच दूरी इतनी रखते हैं कि वस्तु AB का अभिदृश्यक O द्वारा बना प्रतिबिम्ब A'B', नेत्रिका के फोकस Fe' पर पड़े (\(u_e = f_e\)) । दूरदर्शी का यह समायोजन सामान्य समायोजन कहलाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी को श्रांत आँख (relaxed eye) के लिए समायोजन की स्थिति में दर्शाता है। अभिदृश्यक लेन्स Fo फोकस दूरी पर वस्तु AB का प्रतिबिम्ब A'B' बनाता है। यह प्रतिबिम्ब नेत्रिका लेन्स Fe के फोकस पर पड़ता है, जिससे अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनता है। इस स्थिति में नेत्रिका और अभिदृश्यक के बीच की कुल लम्बाई fo + fe होती है।
समीकरण (1) में \(u_e = f_e\) रखने पर,
\(M = - \frac{f_o}{f_e}\) ...(3)
इस स्थिति में दूरदर्शी की लम्बाई \(f_o + f_e\) होगी।
सूत्र (2) तथा (3) से स्पष्ट है कि दूरदर्शी की आवर्धन-क्षमता बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी \(f_o\) बड़ी तथा नेत्रिका की फोकस दूरी \(f_e\) छोटी होनी चाहिए। ऋणात्मक चिह्न इस बात का सूचक है कि अन्तिम प्रतिबिम्ब उल्टा बनता है।
In simple words: A compound microscope uses two lenses (objective and eyepiece) to produce a highly magnified image of tiny objects. The objective forms a real, inverted image, which the eyepiece then magnifies into a final virtual, inverted image, allowing detailed observation.
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