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Detailed Chapter 6 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन UP Board Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 6 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Physics Chapter 6 Electromagnetic Induction (वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. चित्र 6.1
(a) से (f) में वर्णित स्थितियों के लिए प्रेरित धारा की दिशा की प्रागुक्ति (predict) कीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.1 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की छह विभिन्न स्थितियों (a से f) को दर्शाता है। (a) और (b) में, कुण्डली के पास चुम्बक की गति (S ध्रुव का पास आना या N ध्रुव का दूर जाना) दिखाई गई है। (c) और (e) में, एक प्राथमिक कुण्डली में दाब कुंजी को बंद या खोला जा रहा है, जिसका प्रभाव द्वितीयक कुण्डली पर पड़ रहा है। (d) में, प्राथमिक कुण्डली में धारा नियन्त्रक का समायोजन (प्रतिरोध घटाना) दिखाया गया है। (f) में, एक सीधे धारावाही तार के पास एक वृत्ताकार लूप रखा गया है। प्रत्येक स्थिति में, प्रेरित धारा की दिशा का पूर्वानुमान करना है।
Answer:
(a) चुम्बक के S ध्रुव को कुण्डली की ओर ले जाया जा रहा है, अतः लेन्ज के नियम के अनुसार कुण्डली का इस ओर का सिरा भी S ध्रुव होना चाहिए ताकि यह चुम्बक की गति का विरोध करे (परस्पर प्रतिकर्षण द्वारा) इसलिए कुण्डली में प्रेरित धारा दक्षिणावर्त दिशा में अर्थात् qrpq दिशा में बहेगी ।
(b) चुम्बक की गति के विरोध के लिए लेन्ज नियम के अनुसार बायीं ओर की कुण्डली का चुम्बक के ध्रुव S की ओर वाला सिरा S बनना चाहिए तथा दायीं ओर की कुण्डली का चुम्बक में N ध्रुव की ओर वाला सिरा भी S ध्रुव ही बनना चाहिए ताकि ध्रुव S पर प्रतिकर्षण तथा N पर आकर्षण बल लगे। इसलिए बायीं ओर की कुण्डली में धारा दक्षिणावर्त दिशा में (अर्थात् prqp दिशा में), तथा दायीं ओर की कुण्डली में धारा yzxy दिशा में प्रेरित होनी चाहिए।
(c) दाब कुंजी तुरन्त बन्द करने पर बायीं ओर कुण्डली में धारा शून्य से बढ़ेगी, अतः दायीं ओर की कुण्डली में प्रेरित धारा बायीं ओर कुण्डली में धारा की विपरीत दिशा में (अर्थात् वामावर्त दिशा में) yzx में होनी चाहिए।
(d) चित्र से स्पष्ट है कि धारा नियन्त्रक द्वारा प्रतिरोध घटाया जा रहा है अर्थात् दायीं ओर कुण्डली में धारा बढ़ेगी जिसकी दिशा वामावर्त है। अतः लेन्ज के नियम के अनुसार बायीं ओर कुण्डली में प्रेरित धारा मुख्य धारा के विपरीत होनी चाहिए अर्थात् zyx दिशा में ।
(e) दाब कुंजी को खोलने के तुरन्त बाद प्राथमिक कुण्डली में धारा घटेगी। अतः द्वितीयक कुण्डली में धारा की दिशा प्राथमिक के मुख्य धारा की दिशा में होनी चाहिए अर्थात् xry दिशा में ।
(f) कोई प्रेरित धारा नहीं चूँकि बल रेखाएँ लूप के तल में स्थित होंगी तथा फ्लक्स में परिवर्तन नहीं होगा। चूँकि बल-रेखाएँ लूप को काटेंगी भी नहीं।In simple words: लेन्ज के नियम का उपयोग करके, प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित की जाती है ताकि यह हमेशा उस परिवर्तन का विरोध करे जिसने इसे उत्पन्न किया है। इसलिए, चुम्बक की गति या कुण्डली में धारा परिवर्तन के अनुसार, प्रेरित धारा की दिशा बदलती है, और जहाँ फ्लक्स परिवर्तन नहीं होता, वहाँ कोई धारा प्रेरित नहीं होती।
🎯 Exam Tip: लेन्ज का नियम और फ्लेमिंग के दायें हाथ का नियम प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक स्थिति में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की पहचान करना और उसके विरोध की दिशा में प्रेरित धारा का निर्धारण करना स्कोरिंग है।
Question 2. चित्र 6.2 में वर्णित स्थितियों के लिए लेंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात कीजिए ।
(a) जब अनियमित आकार का तार वृत्ताकार लूप में बदल रहा हो;
(b) जब एक वृत्ताकार लूप एक सीधे तार में विरूपित किया जा रहा हो ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.2 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की दो स्थितियों को दर्शाता है। (a) में, एक अनियमित आकार का तार का लूप कागज के तल के लंबवत् भीतर की ओर निर्देशित चुम्बकीय क्षेत्र ('x' द्वारा दर्शाया गया) में वृत्ताकार लूप में बदल रहा है। (b) में, एक वृत्ताकार लूप कागज के तल के लंबवत् बाहर की ओर निर्देशित चुम्बकीय क्षेत्र (बिन्दुओं द्वारा दर्शाया गया) में एक सीधे तार में विरूपित हो रहा है। इन स्थितियों में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करनी है।
Answer:
(a) क्रॉस (x) द्वारा एक ऐसे चुम्बकीय-क्षेत्र को प्रदर्शित किया गया है जिसकी दिशा कागज के तल के लम्बवत् भीतर की ओर है अनियमित आकार के लूप को वृत्तीय रूप में खींचने पर इससे गुजरने वाला फ्लक्स बढ़ेगा। अतः लूप में प्रेरित धारा इस प्रकार की होगी कि वह निम्नगामी फ्लक्स को बढ़ने से रोकेगी। प्रेरित धारी कागज के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करेगी। अतः धारा की दिशा adcba मार्ग का अनुसरण करेगी।
(b) चुम्बकीय-क्षेत्र कागज के तल के लम्बवत् बाहर की ओर है। लूप के आकार को बदलने पर उससे गुजरने वाला ऊर्ध्वमुखी फ्लक्स घटेगा। अतः लूप में प्रेरित धारा ऊर्ध्वमुखी चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करेगी। इसके लिए धारा a'd'c'b'a' मार्ग का अनुसरण करेगी।In simple words: लेन्ज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा हमेशा उस चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया है। जब लूप को खींचने या बदलने से भीतर या बाहर की ओर फ्लक्स बढ़ता/घटता है, तो प्रेरित धारा एक विपरीत या समान क्षेत्र उत्पन्न करके इस परिवर्तन का विरोध करती है, जिससे उसकी दिशा निर्धारित होती है।
🎯 Exam Tip: लेन्ज के नियम को लागू करते समय, पहले पहचानें कि चुंबकीय फ्लक्स बढ़ रहा है या घट रहा है। फिर, प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करें जो इस परिवर्तन का विरोध करेगी। क्रॉस (X) अंदरूनी क्षेत्र को और डॉट्स (•) बाहरी क्षेत्र को दर्शाते हैं।
Question 3. एक लम्बी परिनालिका के इकाई सेंटीमीटर लम्बाई में 15 फेरे हैं। उसके अन्दर 2.0 cm का एक छोटा-सा लूप परिनालिका की अक्ष के लम्बवत रखा गया है। यदि परिनालिका में बहने वाली धारा का मान 0.15 में 2.0 A से 40 A कर दिया जाए तो धारा परिवर्तन के समय प्रेरित विद्युत वाहक बल कितना होगा?
Answer: हल-परिनालिका में फेरों की संख्या \( N = 15 \), लम्बाई \( l = 1 \) cm \( = 0.01 \) m
\( i_1 = 2.0 \) A, \( i_2 = 4.0 \) A, \( \Delta t = 0.1 \) s
लूप का क्षेत्रफल \( A = 2.0 \) cm\(^2 = 2.0 \times 10^{-4} \) m\(^2\)
लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल
\( e = n \frac{d\Phi}{dt} = nA \frac{dB}{dt} \) ....(1)
जबकि परिनालिका के अक्ष पर क्षेत्र में परिवर्तन \( [\Phi = BA \implies \frac{d\Phi}{dt} = A \frac{dB}{dt}] \)
\( \frac{dB}{dt} = \frac{\mu_0 N}{l} (i_2 - i_1) \)
\( = \frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 15}{0.01} (4.0 - 2.0) = 120 \pi \times 10^{-5} \)
\( e = \frac{1 \times 2.0 \times 10^{-4} \times 120 \pi \times 10^{-5}}{0.01} \) [: n = 1]
\( = 7.54 \times 10^{-6} \) V \( \approx 7.5 \times 10^{-6} \) VIn simple words: हमने फैराडे के नियम और परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र के सूत्र का उपयोग करके प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना की। पहले चुंबकीय क्षेत्र के परिवर्तन की दर (\( \frac{dB}{dt} \)) ज्ञात की, फिर इस मान को लूप के क्षेत्रफल और फेरों की संख्या से गुणा करके प्रेरित विद्युत वाहक बल प्राप्त किया।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र के सूत्र \( B = \mu_0 n I \) (जहाँ \( n = N/l \)) और प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e = - \frac{d\Phi}{dt} \) के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। \( \Delta t \) की पहचान और इकाइयों का सही रूपांतरण (cm से m) आवश्यक है।
Question 4. एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 8 cm एवं 2 cm हैं, एक स्थान पर थोड़ा कटा हुआ है। यह लूप अपने तल के अभिलम्बवत 0.3 T के एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र से बाहर की ओर निकल रहा है। यदि लूप के बाहर निकलने का वेग 1 cm s\(^{-1}\) है तो कटे भाग के सिरों पर उत्पन्न विद्युत वाहक बल कितना होगा, जब लूप की गति अभिलम्बवत हो
(a) लूप की लम्बी भुजा के
(b) लूप की छोटी भुजा के । प्रत्येक स्थिति में उत्पन्न प्रेरित वोल्टता कितने समय तक टिकेगी?
Answer: हल-
(a) चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र के लम्बवत् स्थित क्षेत्रफल A से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स \( \Phi = BA \)
माना लूप की लम्बाई l व चौड़ाई b है तथा इसके वेग का परिमाण v है। जैसे ही लूप लम्बी भुजा के लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकालता है क्षेत्र से बद्ध क्षेत्रफल बदलता है, जिससे में परिवर्तन होता है। फैराडे के नियम से, प्रेरित वैद्युत वाहक बल का परिमाण
\( |e| = \frac{d\Phi}{dt} = \frac{d}{dt} (BA) = B (\frac{dA}{dt}) \)
अब, \( \frac{dA}{dt} = lv \) (प्रति सेकण्ड लूप द्वारा घिरा क्षेत्रफल)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.3 एक आयताकार लूप को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलते हुए दो अलग-अलग स्थितियों में दर्शाता है। (a) में, लूप अपनी लंबी भुजा के लंबवत चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकल रहा है। (b) में, लूप अपनी छोटी भुजा के लंबवत चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकल रहा है। इन आकृतियों का उपयोग प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना और उसके बने रहने के समय को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
अतः \( |e| = Blv = 0.3 \) वेबर/मीटर\(^2 \times (8 \times 10^{-2} \) मीटर) \( \times (10^{-2} \) मीटर/सेकण्ड)
\( = 2.4 \times 10^{-4} \) वेबर/सेकण्ड
\( = 2.4 \times 10^{-4} \) वोल्ट
\( = 0.24 \) मिलीवोल्ट
प्रेरित विभवान्तर तब तक रहेगा जब तक फ्लक्स परिवर्तित होगा। इस प्रकार, विभवान्तर \( |e| \) के बने रहने का समय
\( \frac{b}{v} = \frac{2 \times 10^{-2} \text{ मीटर}}{10^{-2} \text{ मीटर/सेकण्ड}} = 2 \text{ सेकण्ड} \)
(b) चित्र 6.3(b) से, \( \frac{dA}{dt} = bv \)
\( |e| = Bbv = 0.3 \times (2 \times 10^{-2}) \times 10^{-2} \)
\( = 0.6 \times 10^{-4} \) वोल्ट
\( = 0.06 \) मिलीवोल्ट
\( |e| \) के बने रहने का समय \( = \frac{l}{v} = \frac{8 \times 10^{-2} \text{ मीटर}}{10^{-2} \text{ मीटर/सेकण्ड}} = 8 \text{ सेकण्ड} \)In simple words: जब एक आयताकार लूप चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलता है, तो फ्लक्स में परिवर्तन के कारण एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इसका मान \( Blv \) सूत्र से ज्ञात किया जाता है, जहाँ \( l \) चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत भुजा की लंबाई है। यह प्रेरित वोल्टता तब तक बनी रहती है जब तक लूप पूरी तरह से क्षेत्र से बाहर नहीं निकल जाता, जिसका समय लूप की चौड़ाई या लंबाई को वेग से विभाजित करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: फैराडे के नियम \( e = B l v \) का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि \( l \) (प्रभावी लंबाई) और \( v \) (वेग) एक दूसरे और चुंबकीय क्षेत्र \( B \) के लंबवत हों। प्रेरित वोल्टता के बने रहने का समय ज्ञात करने के लिए, लूप की उस विमा को वेग से विभाजित करें जो चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत है।
Question 5. 1.0 m लम्बी धातु की छड़ उसके एक सिरे से जाने वाले अभिलम्बवत अक्ष के परितः 400 rad-s\(^{-1}\) की कोणीय आवृत्ति से घूर्णन कर रही है। छड़ का दूसरा सिरा एक धात्विक वलय से सम्पर्कित है। अक्ष के अनुदिश सभी जगह 0.5 T का एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र उपस्थित है। वलय तथा अक्ष के बीच स्थापित विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए ।
Answer: हल-दिया है, धात्विक छड़ की लम्बाई \( l = 1.0 \) मीटर
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 400 \) रेडियन/सेकण्ड
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 0.5 \) टेस्ला
छड़ के एक सिरे का वेग \( v_1 = 0 \)
छड़ के दूसरे सिरे का वेग \( v_2 = l\omega \)
अतः छड़ का औसत रेखीय वेग
\( v = \frac{v_1 + v_2}{2} \)
अथवा \( v = \frac{0 + l\omega}{2} = \frac{\omega l}{2} \)
अतः केन्द्र O व वलय के बीच प्रेरित वै० वा० बल
\( E = lv B = l \times \frac{\omega l}{2} \times B = \frac{1}{2} B \omega l^2 \)
\( = \frac{1}{2} \times 400 \times 0.5 \times (1.0)^2 \)
\( = 100 \) वोल्ट
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.4 में एक धातु की छड़ को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक निश्चित अक्ष के चारों ओर घूमते हुए दिखाया गया है। छड़ का एक सिरा अक्ष पर स्थिर है जबकि दूसरा सिरा एक धात्विक वलय के संपर्क में है। चुंबकीय क्षेत्र कागज के तल के लंबवत अंदर की ओर निर्देशित है। यह आरेख घूमने वाली छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना के लिए संदर्भ प्रदान करता है।In simple words: जब एक धातु की छड़ एक चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसके सिरों के बीच प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। यह बल छड़ की लंबाई, चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता और कोणीय वेग पर निर्भर करता है, जिसे \( E = \frac{1}{2} B \omega l^2 \) सूत्र से गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: घूमने वाली छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल के लिए सूत्र \( E = \frac{1}{2} B \omega l^2 \) को याद रखना महत्वपूर्ण है। गणना करते समय, सभी इकाइयों (मीटर, टेस्ला, रेडियन/सेकंड) का सही ढंग से उपयोग सुनिश्चित करें।
Question 6. एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या 8.0 cm तथा फेरों की संख्या 20 है अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः 50 rad-s\(^{-1}\) की कोणीय आवृत्ति से 3.0 x 10\(^{-2}\) T के एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र में घूम रही है। कुंडली में उत्पन्न अधिकतम तथा औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए। यदि कुंडली 10 Ω प्रतिरोध का एक बन्द लूप बनाए तो कुंडली में धारा के अधिकतम मान की गणना कीजिए। जूल ऊष्मन के कारण क्षयित औसत शक्ति की गणना कीजिए। यह शक्ति कहाँ से प्राप्त होती है?
Answer: हल-कुण्डली में बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स
\( \Phi = B A = BA \cos \theta = BA \cos \omega t \) (चूँकि \( \theta = \omega t \))
कुण्डली में प्रेरित वै० वा० बल, \( \varepsilon = - N \frac{d\Phi}{dt} \)
\( = - N \frac{d}{dt} (BA \cos \omega t) = NBA \omega \sin \omega t \)
अधिकतम प्रेरित वै० वा० बल, \( \varepsilon_{max} = NBA \omega = NB (\pi r^2) \omega \)
यहाँ \( N = 20, r = 8.0 \) सेमी \( = 8.0 \times 10^{-2} \) मी,
\( B = 3.0 \times 10^{-2} \) T, \( \omega = 50 \) s\(^{-1} \)
\( \therefore \varepsilon_{max} = 20 \times 3.0 \times 10^{-2} \times 3.14 \times (8.0 \times 10^{-2})^2 \times 50 \)
\( = 0.603 \) V
औसत वै० वा० बल, \( \varepsilon_{av} = NAB\omega (\sin \omega t)_{av} = 0 \)
(चूंकि पूरे चक्र के लिए sin \( \omega t \) का औसत मान शून्य होता है।)
अधिकतम प्रेरित धारा, \( I_{max} = \frac{\varepsilon_{max}}{R} = \frac{0.603}{10} = 0.063 \) A
जूल ऊष्मा के कारण औसत व्यय शक्ति, \( P_{max} = (I^2)_{av} R \)
\( = \frac{(\varepsilon^2)_{av}}{R} = \frac{1}{2} \frac{\varepsilon_{max}^2}{R} \)
[क्योंकि पूरे चक्र के लिए sin\(^2 \omega t \) का औसत मान \( \frac{1}{2} \) होता है। \( \therefore \varepsilon_{av} = \frac{\varepsilon_{max}}{2} \)]
\( \therefore P_{max} = \frac{1}{2} \times \frac{(0.603)^2}{10} = 0.018 \) W
प्रेरित धारा एक बल-आघूर्ण उत्पन्न करती है, जो कुण्डली के घूमने का विरोध करता है। इसलिए कुण्डली को एकसमान कोणीय वेग से घुमाए रखने के लिए एक बाह्य कारक (रोटर) बल-आघूर्ण प्रदान करता है। इसीलिए व्यय ऊष्मा का स्रोत रोटर (rotor) ही है।In simple words: एक चुंबकीय क्षेत्र में घूमने वाली कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा उत्पन्न होती है, जिसका अधिकतम मान \( NBA\omega \) द्वारा दिया जाता है और औसत मान शून्य होता है। उत्पन्न धारा के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा का क्षय होता है, और यह ऊर्जा बाह्य रोटर से प्राप्त होती है जो कुण्डली को घुमाता रहता है।
🎯 Exam Tip: अधिकतम और औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना के लिए सूत्र \( \varepsilon_{max} = NBA\omega \) और \( \varepsilon_{av} = 0 \) (एक पूर्ण चक्र के लिए) महत्वपूर्ण हैं। शक्ति क्षय के लिए \( P = I_{max}^2 R / 2 \) या \( P = \varepsilon_{max}^2 / (2R) \) का उपयोग किया जाता है। सभी भौतिक मात्राओं की इकाइयों को S.I. प्रणाली में परिवर्तित करना न भूलें।
Question 7. पूर्व से पश्चिम दिशा में विस्तृत एक 10 m लम्बा क्षैतिज सीधा तार 0.30 x 10\(^{-4}\) Wbm\(^{-2}\) तीव्रता वाले पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के क्षैतिज घटक के लम्बवत 5.0 m s\(^{-1}\) की चाल से गिर रहा है।
(a) तार में प्रेरित विद्युत वाहक बल का तात्क्षणिक मान क्या होगा?
(b) विद्युत वाहक बल की दिशा क्या है?
(c) तार का कौन-सा सिरा उच्च विद्युत विभव पर है?
Answer: हल-
(a) तार की लम्बाई \( l = 10 \) मीटर, \( B = H = 0.30 \times 10^{-4} \) वेबर/मी\(^2\), तार का वेग \( v = 50 \) मी/सेकण्ड
अतः तार के सिरों के बीच प्रेरित विभवान्तर \( e = Bvl \sin 90^\circ = Bvl = 0.30 \times 10^{-4} \times 5.0 \times 10 = 0.0015 \) वोल्ट
\( = 1.5 \) मिलीवोल्ट
(b) फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम के अनुसार, तार में प्रेरित धारा की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर होगी। अतः प्रेरित वैद्युत वाहक बल की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर होगी ।
(c) चूँकि तार में प्रेरित धारा की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर है, अतः तार में इलेक्ट्रॉन इसके विपरीत पश्चिम से पूर्व की ओर गति करेंगे। चूँकि इलेक्ट्रॉन निम्न विभव से उच्च विभव की ओर गति करते हैं, अतः तार का पूर्वी सिरा उच्च विभव पर होगा। [विशेष-यदि तार उत्तर-दक्षिण दिशा में रहते हुए गिरता, तब इसकी लम्बाई पृथ्वी के क्षेत्र के क्षैतिज घटक के समान्तर होती। अतः कोई वैद्युत वाहक बल प्रेरित नहीं होता।]In simple words: जब एक चालक तार चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उसमें एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जिसका मान \( Bvl \) होता है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम से धारा की दिशा ज्ञात की जाती है, और इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की विपरीत दिशा में उच्च विभव वाला सिरा होता है।
🎯 Exam Tip: प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e = Bvl \) के सूत्र में, \( B, v, l \) एक दूसरे के लंबवत होने चाहिए। फ्लेमिंग के दायें हाथ का नियम (तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे की दिशा) प्रेरित धारा की दिशा और उच्च विभव वाले सिरे को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. किसी परिपथ में 0.1 s में धारा 5.0 A से 0.0 A तक गिरती है। यदि औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल 200 V है तो परिपथ में स्वप्रेरकत्व का आकलन कीजिए।
Answer: हल- यहाँ \( \Delta t = 0.1 \) सेकण्ड, \( \Delta I = I_2 - I_1 = (0 - 5.0) \) ऐम्पियर
\( = - 5 \) ऐम्पियर, \( e = 200 \) वोल्ट
\( e = - L (\frac{\Delta I}{\Delta t}) \)
\( \implies L = - (\frac{e \times \Delta t}{\Delta I}) = - [\frac{200 \times 0.1}{-5}] \) हेनरी
\( = 40 \) हेनरीIn simple words: जब किसी परिपथ में धारा बदलती है, तो उसमें एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। स्वप्रेरकत्व \( L \) का मान इस प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e \) और धारा परिवर्तन की दर \( (\frac{\Delta I}{\Delta t}) \) के अनुपात से निकाला जा सकता है, जहाँ \( e = -L \frac{\Delta I}{\Delta t} \).
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व \( L \) की गणना के लिए फैराडे के नियम \( e = - L \frac{\Delta I}{\Delta t} \) का उपयोग करें। \( \Delta I \) के चिह्न का ध्यान रखें, क्योंकि यह प्रेरित वोल्टेज के विरोध को दर्शाता है। इकाई हेनरी में उत्तर दें।
Question 9. पास-पास रखे कुंडलियों के एक युग्म का अन्योन्य प्रेरकत्व 1.5 H है। यदि एक कुंडली I में 0.5 s में धारा 0 से 20 A परिवर्तित हो तो दूसरी कुंडली की फ्लक्स बंधता में कितना परिवर्तन होगा?
Answer: हल-
यहाँ \( M = 1.5 \) हेनरी, \( \Delta t = 0.5 \) सेकण्ड,
\( \Delta I = I_2 - I_1 = (20 - 0) = 20 \) A
\( \Phi_1 = MI \)
\( \Delta\Phi_2 = M\Delta I_1 \)
अतः द्वितीयक कुण्डली की फ्लक्स बद्धता में परिवर्तन
\( \Delta\Phi_2 = 1.5 \) हेनरी \( \times 20 \) ऐम्पियर \( = 30 \) वेबर यहाँ धारा बढ़ रही है, अतः फ्लक्स बद्धता में परिवर्तन धारा वृद्धि का विरोध करेगा।In simple words: अन्योन्य प्रेरकत्व (\( M \)) दो कुंडलियों के बीच का गुण है जहाँ एक कुंडली में धारा बदलने पर दूसरी में फ्लक्स बंधता में परिवर्तन होता है। इस परिवर्तन को \( \Delta\Phi = M \Delta I \) सूत्र से गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरकत्व से संबंधित प्रश्नों में, \( \Delta\Phi = M \Delta I \) सूत्र का सीधा अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। अन्योन्य प्रेरकत्व \( M \) की इकाई हेनरी और फ्लक्स परिवर्तन \( \Delta\Phi \) की इकाई वेबर में होती है।
Question 10. एक जेट प्लेन पश्चिम की ओर 1800 km/h वेग से गतिमान है। प्लेन के पंख 25 m लम्बे हैं। इनके सिरों पर कितना विभवान्तर उत्पन्न होगा? पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र का मान उस स्थान पर 5 x 10\(^{-4}\) T तथा नति कोण (dip angle) 30° है।
Answer: हल-दिया है, पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 5 \times 10^{-4} \) टेस्ला
नति कोण \( \theta = 30^\circ \)
वायुयान का वेग \( v = 1800 \) किमी/घण्टा
\( = \frac{1800 \times 1000}{60 \times 60} \) मीटर/सेकण्ड
\( = 500 \) मीटर/सेकण्ड
तथा पंखों की लम्बाई \( l = 25 \) मीटर
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक
\( B_v = B \sin \theta \)
\( = 5 \times 10^{-4} \times \sin 30^\circ \)
\( = 5 \times 10^{-4} \times \frac{1}{2} = 2.5 \times 10^{-4} \) टेस्ला
चूँकि पंखों की लम्बाई \( l \), वायुयान का वेग \( v \) तथा चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक \( B_v \), तीनों परस्पर लम्बवत् हैं, अतः पंखों के बीच प्रेरित औसत वैद्युत वाहक बल
\( E = lv B_v \)
\( = 25 \times 500 \times 2.5 \times 10^{-4} \)
\( = 3.125 \) वोल्टIn simple words: जब कोई चालक (जैसे हवाई जहाज के पंख) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करता है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इस बल की गणना करने के लिए, हमें पहले चुंबकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक को ज्ञात करना होगा, क्योंकि यही घटक गति के लंबवत होता है, और फिर \( E = B_v l v \) सूत्र का उपयोग करना होगा।
🎯 Exam Tip: गतिज विद्युत वाहक बल \( E = B l v \) के लिए, \( B, l, v \) के बीच लंबवतता महत्वपूर्ण है। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक \( B_v = B \sin\theta \) का उपयोग करना आवश्यक है, जहाँ \( \theta \) नति कोण है। वेग को \( \text{km/h} \) से \( \text{m/s} \) में बदलना न भूलें।
अतिरिक्त अभ्यास
Question 11. मान लीजिए कि प्रश्न 4 में उल्लिखित लूप स्थिर है किन्तु चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करने वाले विद्युत चुम्बक में धारा का मान कम किया जाता है जिससे चुम्बकीय-क्षेत्र का मान अपने प्रारम्भिक मान 0.3 T से 0.02 Ts\(^{-1}\) की दर से घटता है। अब यदि लूप का कटा भाग जोड़ दें जिससे प्राप्त बन्द लूप का प्रतिरोध 1.6 Ω हो तो इस लूप में ऊष्मन के रूप में शक्ति ह्रास क्या है? इस शक्ति का स्रोत क्या है?
Answer: हल- लूप का क्षेत्रफल \( A = 8 \times 2 \) cm\(^2 = 16 \times 10^{-4} \) m\(^2\)
\( \frac{dB}{dt} = 0.02 \) Ts\(^{-1}\), \( R = 1.6 \Omega \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल
\( e = -\frac{d\Phi}{dt} = -\frac{d}{dt} (BA) = A\frac{dB}{dt} \)
\( \implies e = 16 \times 10^{-4} \times 0.02 = 3.2 \times 10^{-5} \) V
प्रेरित धारा \( i = \frac{e}{R} = \frac{3.2 \times 10^{-5}}{1.6} = 2.0 \times 10^{-5} \) A
शक्ति ह्रास \( P = e \times i = 3.2 \times 10^{-5} \times 2.0 \times 10^{-5} = 6.4 \times 10^{-10} \) W
यह शक्ति, चुम्बकीय-क्षेत्र में परिवर्तन करने वाले बाह्य स्त्रोत द्वारा प्रदान की जाती है।In simple words: जब एक स्थिर लूप में चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है, तो इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा उत्पन्न होती है, जिससे ऊष्मा के रूप में शक्ति का क्षय होता है। इस शक्ति का स्रोत वह बाहरी प्रणाली है जो चुंबकीय क्षेत्र को बदल रही है।
🎯 Exam Tip: प्रेरित विद्युत वाहक बल (\( e = A \frac{dB}{dt} \)) और शक्ति ह्रास (\( P = e \times i \)) की गणना के लिए सही सूत्रों का उपयोग करें। सुनिश्चित करें कि क्षेत्रफल (\( A \)), प्रतिरोध (\( R \)), और \( \frac{dB}{dt} \) की इकाइयाँ S.I. प्रणाली में हों।
Question 12. 12 cm भुजा वाला वर्गाकार लूप जिसकी भुजाएँ X एवं Y अक्षों के समान्तर हैं, x-दिशा में 8 cm s\(^{-1}\) की गति से चलाया जाता है। लूप तथा उसकी गति का परिवेश धनात्मक दिशा के चुम्बकीय-क्षेत्र का है। चुम्बकीय-क्षेत्र न तो एकसमान है और न ही समय के साथ नियत है। इस क्षेत्र की ऋणात्मक x-अक्ष की दिशा में प्रवणता 10\(^{-3}\) Tcm\(^{-1}\) है। (अर्थात् ऋणात्मक x-अक्ष की दिशा में इकाई सेंटीमीटर दूरी पर क्षेत्र के मान में 10\(^{-3}\) Tcm\(^{-1}\) की वृद्धि होती है) तथा क्षेत्र के मान में 10\(^{-3}\) Ts\(^{-1}\) की दर से कमी भी हो रही है। यदि कुंडली का प्रतिरोध 4.50 mΩ हो तो प्रेरित धारा का परिमाण एवं दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer: हल- लूप का प्रतिरोध \( R = 4.50 \times 10^{-3}\Omega \), लूप की भुजा \( a = 12 \) cm
\( \frac{\partial B}{\partial x} = - 10^{-3} \) T cm\(^{-1} = - 10^{-1} \) T m\(^{-1}\)
\( = - 0.1 \) T m\(^{-1}\)
[x-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में]
तथा \( v = \frac{\partial x}{\partial t} = 8 \) cm s\(^{-1} = 0.08 \) m s\(^{-1}\)
तथा \( \frac{\partial B}{\partial t} = - 10^{-3} \) Ts\(^{-1}\)
\( \frac{\partial B}{\partial x} \) तथा \( \frac{\partial B}{\partial t} \) दोनों का चिह्न ऋणात्मक लिया गया है क्योंकि \( x \) तथा \( t \) दोनों के बढ़ने के साथ चुम्बकीय-क्षेत्र घट रहा है।
माना लूप की भुजा की लम्बाई 'a' है। x दूरी पर स्थित dx चौड़ाई की एक पट्टी पर विचार कीजिए।
माना इस पट्टी पर चुम्बकीय-क्षेत्र B(x, t) है तथा इस पट्टी का क्षेत्रफल \( dA = a dx \) है।
इस पट्टी से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \( d\Phi = BdA = B(x, t) a dx \)
लूप से बद्ध कुल फ्लक्स
\( \Phi = \int_{x=0}^{a} B(x, t) a dx = a \int_{x=0}^{a} B(x, t) dx \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.5 एक वर्गाकार लूप को दर्शाता है जिसकी भुजाएँ X और Y अक्षों के समानांतर हैं, और यह x-दिशा में गतिमान है। लूप एक गैर-समान और समय-परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र में स्थित है। चित्र में चुंबकीय क्षेत्र को बिंदुओं (बाहर की ओर) और क्रॉस (अंदर की ओर) के निशान से दर्शाया गया है, और लूप के कुछ बिंदु (D, C, A, B) और एक छोटी पट्टी `dx` को दर्शाया गया है। यह आरेख प्रेरित धारा की गणना के लिए आवश्यक स्थिति का वर्णन करता है।
\( \frac{d\Phi}{dt} = a \int_{x=0}^{a} \frac{d}{dt} B(x, t) dx \)
\( = a \int_{x=0}^{a} [\frac{\partial B}{\partial t} + \frac{\partial B}{\partial x} \frac{\partial x}{\partial t}] dx \)
\( = a \int_{x=0}^{a} [-10^{-3} - 0.1 \times 0.08] dx \)
\( = - a (0.001 + 0.008) \int_{x=0}^{a} dx \)
\( = - (0.009) a \times (a - 0) = - 0.009 \times a^2 \)
\( = - 0.009 \times (12 \times 10^{-2})^2 \)
\( = - 0.009 \times 144 \times 10^{-4} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e = -\frac{d\Phi}{dt} = 0.009 \times 144 \times 10^{-4} = 1.296 \times 10^{-4} \) V
प्रेरित धारा \( i = \frac{e}{R} = \frac{1.296 \times 10^{-4}}{4.50 \times 10^{-3}} = 2.88 \times 10^{-2} \) A
धारा की दिशा ऐसी होगी जो z-दिशा में चुम्बकीय फ्लक्स के घटने का विरोध करेगी। इसके लिए धारा वामावर्त दिशा में प्रवाहित होगी।In simple words: जब एक लूप समय-परिवर्ती और गैर-समान चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जिसकी गणना आंशिक अवकलज (\( \frac{\partial B}{\partial t} \) और \( \frac{\partial B}{\partial x} \)) का उपयोग करके की जाती है। फिर, इस प्रेरित वोल्टेज को प्रतिरोध से विभाजित करके प्रेरित धारा प्राप्त होती है। लेन्ज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में, चुंबकीय क्षेत्र की प्रवणता और समय-निर्भरता दोनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। कुल फ्लक्स परिवर्तन की दर \( \frac{d\Phi}{dt} = \int (\frac{\partial B}{\partial t} + \frac{\partial B}{\partial x} v) dA \) सूत्र का उपयोग करें। इकाइयों को S.I. प्रणाली में बदलना और लेन्ज के नियम के अनुसार दिशा निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।
Question 13. एक शक्तिशाली लाउडस्पीकर के चुम्बक के ध्रुवों के बीच चुम्बकीय-क्षेत्र की तीव्रता के परिमाण का मापन किया जाना है। इस हेतु एक छोटी चपटी 2 cm क्षेत्रफल की अन्वेषी कुंडली (search coil) का प्रयोग किया गया है। इस कुंडली में पास-पास लिपटे 25 फेरे हैं तथा इसे चुम्बकीय-क्षेत्र के लम्बवत व्यवस्थित किया गया है और तब इसे द्रुत गति से क्षेत्र के बाहर निकाला जाता है। तुल्यतः एक अन्य विधि में अन्वेषी कुंडली को 90° से तेजी से घुमा देते हैं जिससे कुंडली का तल चुम्बकीय-क्षेत्र के समान्तर हो जाए। इन दोनों घटनाओं में कुल 7.5 mC आवेश का प्रवाह होता है (जिसे परिपथ में प्रक्षेप धारामापी (ballistic galvanometer) लगाकर ज्ञात किया जा सकता है)। कुंडली तथा धारामापी का संयुक्त प्रतिरोध 0.50 Ω है। चुम्बक की क्षेत्र की तीव्रता का आकंलन कीजिए ।
Answer: हल- \( A = 2 \times 10^{-4} \) m\(^2\), \( N = 25 \) फेरे, प्रेरित आवेश \( q = 7.5 \times 10^{-3} \) C
परिपथ का प्रतिरोध \( R = 0.50 \Omega \)
माना चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता \( = B \)
प्रारम्भिक फ्लक्स \( \Phi_1 = NBA \cos 0^\circ = NBA \)
अन्तिम फ्लक्स \( \Phi_2 = 0 \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e = - \frac{d\Phi}{dt} \)
तथा प्रेरित धारा \( i = \frac{e}{R} \) या \( i = - \frac{1}{R} \frac{d\Phi}{dt} \)
प्रेरित आवेश \( q = \int dq = \int i dt \)
\( = \int_{\Phi_1}^{\Phi_2} - \frac{1}{R} d\Phi \)
\( \implies qR = - [\Phi_2 - \Phi_1] \)
\( 7.5 \times 10^{-3} \times 0.50 = - (0 - NBA) \)
\( 3.75 \times 10^{-3} = NBA \)
\( 3.75 \times 10^{-3} = 25 \times B \times 2 \times 10^{-4} \)
\( B = \frac{3.75 \times 10^{-3}}{50 \times 10^{-4}} = \frac{3.75}{0.50} \)
\( B = 0.75 \) TIn simple words: एक अन्वेषी कुंडली का उपयोग करके चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता मापने के लिए, हम कुंडली को क्षेत्र से बाहर निकालते या घुमाते हैं, जिससे फ्लक्स में परिवर्तन होता है और एक प्रेरित आवेश प्रवाहित होता है। इस आवेश, प्रतिरोध, और कुंडली के गुणों का उपयोग करके चुंबकीय क्षेत्र (\( B \)) की गणना की जा सकती है, जहाँ \( qR = NBA \)।
🎯 Exam Tip: प्रेरित आवेश \( q = \frac{N \Delta\Phi}{R} \) या \( qR = N \Delta\Phi \) संबंध का उपयोग करें। \( \Delta\Phi \) कुल फ्लक्स परिवर्तन है, जो प्रारंभिक और अंतिम फ्लक्स के बीच का अंतर है। सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (क्षेत्रफल, प्रतिरोध, आवेश) S.I. प्रणाली में हों।
Question 14. चित्र 6.6 में एक धातु की छड़ PQ को दर्शाया गया है जो पटरियों AB पर रखी है तथा एक स्थायी चुम्बक के ध्रुवों के मध्य स्थित है। पटरियाँ, छड़ एवं चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर अभिलम्बवत दिशाओं में हैं। एक गैल्वेनोमीटर (धारामापी) G को पटरियों से एक स्विच K की सहायता से संयोजित किया गया है। छड़ की लम्बाई \( l = 15 \) cm, \( B = 0.50 \) T तथा पटरियों, छड़ तथा धारामापी से बने बन्द लूप का प्रतिरोध \( R = 9.0 \) mΩ है। क्षेत्र को एकसमान मान लें।
(a) माना कुंजी K खुली (open) है तथा छड़ 12 cm s\(^{-1}\) की चाल से दर्शायी गई दिशा में गतिमान है। प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान एवं ध्रुवणता (polarity) बताइए ।
(b) क्या कुंजी K खुली होने पर छड़ के सिरों पर आवेश का आधिक्य हो जाएगा? क्या होगा यदि कुंजी K बंद (close) कर दी जाए?
(c) जब कुंजी K खुली हो तथा छड़ एकसमान वेग से गति में हो तब भी इलेक्ट्रॉनों पर कोई परिणामी बल कार्य नहीं करता यद्यपि उन पर छड़ की गति के कारण चुम्बकीय बल कार्य करता है। कारण स्पष्ट कीजिए।
(d) कुंजी बन्द होने की स्थिति में छड़ पर लगने वाले अवमन्दन बल का मान क्या होगा?
(e) कुंजी बन्द होने की स्थिति में छड़ को उसी चाल (= 12 cm s\(^{-1}\)) से चलाने हेतु कितनी शक्ति (बाह्य कारक के लिए) की आवश्यकता होगी?
(f) बन्द परिपथ में कितनी शक्ति का ऊष्मा के रूप में क्षय होगा? इस शक्ति का स्रोत क्या है?
(g) गतिमान छड़ में उत्पन्न विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा यदि चुम्बकीय-क्षेत्र की दिशा पटरियों के लम्बवत होने की बजाय उनके समान्तर हो?
Answer: हल-
दिया है, \( B = 0.50 \) T, \( l = 0.15 \) m, \( v = 0.12 \) m s\(^{-1}\), \( R = 9.0 \times 10^{-3} \)
(a) छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल
\( e = Bvl = 0.50 \times 0.12 \times 0.15 = 9 \times 10^{-3} \) V \( = 9.0 \) mV छड़ का सिरा P धनात्मक तथा Q ऋणात्मक होगा ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.6 में एक धातु की छड़ PQ को दो समानांतर पटरियों AB पर दिखाया गया है, जो एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के भीतर स्थित हैं। यह क्षेत्र पटरियों और छड़ दोनों के लंबवत है। एक गैल्वेनोमीटर G और स्विच K पटरियों से जुड़े हैं। छड़ PQ को दाईं ओर 12 cm/s की गति से चलाया जा रहा है, जिससे इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
(b) हाँ, छड़ के Q सिरे पर इलेक्ट्रॉन एकत्र हो जाएँगे जबकि P सिरे पर धनावेश की अधिकता हो जाएगी। यदि कुंजी K को बन्द कर दिया जाए तो सिरे पर एकत्र होने वाले इलेक्ट्रॉन बन्द परिपथ से होते हुए (G से होकर) सिरे P की ओर गति करने लगेंगे। इस प्रकार परिपथ में स्थायी धारा स्थापित हो जाएगी ।
(c) जब कुंजी K खुली है तो P सिरा धनात्मक व Q सिरा ऋणात्मक हो जाता है। इससे छड़ के भीतर सिरे P से सिरे Q की ओर एक विद्युत क्षेत्र स्थित हो जाता है। इस क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉनों पर Q से P की ओर विद्युत बल लगता है जो विपरीत दिष्ट चुम्बकीय बल को सन्तुलित कर लेता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉनों पर कोई नैट बल कार्य नहीं करता है।
(d) कुंजी K बन्द होने की स्थिति छड़ PQ से प्रवाहित धारा
\( i = \frac{e}{R} = \frac{9 \times 10^{-3} \text{ V}}{9.0 \times 10^{-3}\Omega} = 1.0 \) A
\( \therefore \) छड़ PQ पर चुम्बकीय क्षेत्र के कारण कार्य करने वाला अवमन्दन बल
\( F = i l B \sin 90^\circ \)
\( = 1.0 \times 0.15 \times 0.50 = 75 \times 10^{-3} \) N \( = 0.075 \) N
(e) कुंजी K के बन्द होने पर छड़ को खींचते रहने के लिए व्यय की जाने वाली शक्ति \( P = Fv = 0.075 \times 0.12 = 9 \times 10^{-3} \) W
(f) परिपथ में व्यय ऊष्मीय शक्ति \( P = I^2 R = (1.0)^2 \times 9.0 \times 10^{-3} = 9 \times 10^{-3} \) W इस शक्ति का स्रोत छड़ को एकसमान वेग से खींचते रहने के लिए बाह्य स्रोत द्वारा व्यय की गई शक्ति है।
(g) शून्य; इस स्थिति में छड़ चुम्बकीय बल रेखाओं को नहीं काटेगी। अतः कोई विद्युत वाहक बल प्रेरित नहीं होगा।In simple words: जब एक धातु की छड़ चुंबकीय क्षेत्र में गति करती है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। यदि परिपथ बंद है, तो प्रेरित धारा प्रवाहित होती है, जिससे अवमंदन बल और शक्ति क्षय होता है, जिसकी ऊर्जा का स्रोत बाहरी कारक होता है। यदि गति चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हो, तो कोई प्रेरित बल नहीं होता।
🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम का उपयोग प्रेरित धारा की दिशा और ध्रुवणता ज्ञात करने के लिए करें। गतिज प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e=Bvl \), प्रेरित धारा \( i=e/R \), अवमंदन बल \( F=i l B \), और शक्ति \( P=Fv \) या \( P=i^2 R \) के सूत्रों को याद रखें। ध्यान दें कि विद्युत वाहक बल केवल तभी प्रेरित होता है जब चालक चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को काटता है।
Question 15. वायु के क्रोड वाली एक परिनालिका में, जिसकी लम्बाई 30 cm तथा अनुप्रस्थ काट का कषेत्रफल 25 cm तथा कुल फेरे 500 हैं, 2.5 A धारा प्रवाहित हो रही है। धारा को 10-3s के अल्पकाल में अचानक बन्द कर दिया जाता है। परिपथ में स्विच के खुले सिरों के बीच उत्पन्न औसत विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा? परिनालिका के सिरों पर चुम्बकीय क्षेत्र के परिवर्तन की उपेक्षा कर सकते हैं ?
Answer:हल-परिनालिका में प्रेरित वै० वा० बल, \( \varepsilon = - L \frac{\Delta I}{\Delta t} \)
परिनालिका का स्वप्रेरकत्व, \( L = \frac{\mu_0 N^2 A}{l} \)
प्रेरित वै० वा० बल, \( \varepsilon = - \frac{\mu_0 N^2 A}{l} \frac{\Delta I}{\Delta t} \)
यहाँ \( N = 500 \), \( A = 25 \text{ सेमी}^2 = 25 \times 10^{-4} \text{ मी}^2 \)
\( l = 30 \text{ सेमी} = 0.30 \text{ मी} \)
\( \frac{\Delta I}{\Delta t} = \frac{I_2 - I_1}{\Delta t} = \frac{0 - 2.5}{10^{-3}} = -2.5 \times 10^{-3} \text{ A/s} \)
प्रेरित वै० वा० बल
\( \varepsilon = - \frac{4 \pi \times 10^{-7} \times (500)^2 \times 25 \times 10^{-4}}{0.30} \times (-2.5 \times 10^3) \)
\( = \frac{3.14 \times 25 \times 2.5}{3} \times 10^{-1} = 65 \text{ V} \)
In simple words: जब परिनालिका में धारा अचानक बंद की जाती है, तो इसमें जुड़े चुंबकीय फ्लक्स में तेजी से बदलाव होता है। यह बदलाव एक बड़ा प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न करता है, जिसकी गणना परिनालिका के स्वप्रेरकत्व और धारा परिवर्तन की दर का उपयोग करके की जाती है।
In simple words: When current in a solenoid is suddenly switched off, it causes a rapid change in magnetic flux, which induces a large electromotive force calculated using the solenoid's self-inductance and the rate of change of current.
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, स्वप्रेरकत्व के सूत्र और फैराडे के प्रेरण नियम का सही उपयोग महत्वपूर्ण है। सभी इकाइयों को SI में बदलना न भूलें और गणना में चिह्नों का ध्यान रखें।
Question 16.
(a) चित्र 6.7 में दर्शाए अनुसार एक लम्बे, सीधे तार तथा एक वर्गाकार लूप जिसकी एक भुजा की लम्बाई a है, के लिए अन्योन्य प्रेरकत्व का व्यंजक प्राप्त कीजिए ।
(b) अब मान लीजिए कि सीधे तार में 50 A की धारा प्रवाहित हो रही है तथा लूप एक स्थिर वेग v = 10 m/s से दाईं ओर को गति कर रहा है। लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिकलन चित्र 6.7 उस क्षण पर कीजिए जब x = 0.2 m हो । लूप के लिए a = 0.1 m लीजिए तथा यह मान लीजिए कि उसका प्रतिरोध बहुत अधिक है।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.7 एक सीधे लंबे तार और एक वर्गाकार लूप की व्यवस्था दिखाता है। तार में धारा I प्रवाहित हो रही है। लूप तार से x दूरी पर स्थित है और दाईं ओर वेग v से गति कर रहा है। चित्र 6.8 उसी व्यवस्था का एक विस्तृत दृश्य है, जिसमें लूप के भीतर के क्षेत्र को छोटे dz चौड़ाई वाले स्ट्रिप्स में विभाजित करके दिखाया गया है।
हल- (a) यदि अन्योन्य प्रेरण गुणांक M है तो
\( \phi = Mi \implies Mi = \frac{\mu_0 i a}{2 \pi} \log \left(1 + \frac{a}{x}\right) \)
अतः
अन्योन्य प्रेरकत्व \( M = \frac{\mu_0 a}{2 \pi} \log_e \left(1 + \frac{a}{x}\right) \)
(b) लूप के भीतर तार से z दूरी पर स्थित dz चौडाई की एक ऐसी पट्टी पर विचार कीजिए जो कि तार के समान्तर है।
इस पट्टी का क्षेत्रफल \( dA = adz \)
तार के कारण पट्टी पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi z} \)
यह क्षेत्र पट्टी के तल के लम्बवत् भीतर की ओर है।
... पट्टी से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \( d\phi = BdA = \frac{\mu_0 I}{2 \pi} \frac{a}{z} dz \)
... पूरे लूप द्वारा परिबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स
\( \phi = \int_{z=x}^{x+a} dB = \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \int_{z=x}^{x+a} \frac{1}{z} dz \)
या \( \phi = \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} [\log (z)]_{x}^{x+a} = \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} [\log (x + a) - \log x] \)
\( \implies \phi = \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \log \left(\frac{x+a}{x}\right) \)
दिया है, \( I = 50 \text{ A}, v = 10 \text{ m/s} \)
\( e = ? \), जबकि \( x = 0.2 \text{ m}, a = 0.1 \text{ m} \)
लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल
\( e = - \frac{d\phi}{dt} = - \frac{d}{dt} \left[ \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \log \left(\frac{x+a}{x}\right) \right] \)
\( = - \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \left[ \frac{1}{x+a} \frac{dx}{dt} - \frac{1}{x} \frac{dx}{dt} \right] \)
\( = - \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \left[ \frac{1}{x+a} - \frac{1}{x} \right] \frac{dx}{dt} \)
\( = \frac{\mu_0 I a}{2 \pi} \left[ \frac{1}{x} - \frac{1}{x+a} \right] \frac{dx}{dt} \)
\( = \frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 50 \times 0.1}{2 \pi} \left[ \frac{1}{0.2} - \frac{1}{0.2 + 0.1} \right] \times 10 \) \( \left[ \text{∵ } \frac{dx}{dt} = v \right] \)
\( = 10^{-5} \frac{(0.3 - 0.2)}{0.3 \times 0.2} = 1.7 \times 10^{-5} \text{ V} \)
In simple words: किसी सीधे तार के पास रखे लूप में प्रेरित अन्योन्य प्रेरकत्व, तार में धारा और लूप की ज्यामिति पर निर्भर करता है। जब लूप चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जिसकी गणना फैराडे के नियम से की जाती है।
In simple words: The mutual inductance in a loop near a straight wire depends on the current in the wire and the loop's geometry. When the loop moves in a magnetic field, an electromotive force is induced due to the change in magnetic flux, calculated by Faraday's law.
🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरकत्व के व्यंजक प्राप्त करते समय समाकलन का ध्यान रखें। प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना में वेग के कारण x के परिवर्तन की दर (\( \frac{dx}{dt} \)) को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 17.किसी M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या वाले एक पहिए के किनारे (rim) पर एक रैखिक आवेश स्थापित किया गया है जिसकी प्रति इकाई लम्बाई पर आवेश का मान \( \lambda \) है। पहिए के स्पोक (spoke) हल्के एवं कुचालक हैं तथा वह अपनी अक्ष के परितः घर्षण रहित घूर्णन हेतु स्वतन्त्र हैं जैसा कि चित्र 6.9 में दर्शाया गया है। पहिए के वृत्तीय भाग पर रिम, के अन्दर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र विस्तरित है। इसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.9 एक पहिया दर्शाता है जिसके केंद्र से R त्रिज्या तक स्पोक फैले हुए हैं और किनारे पर एक रैखिक आवेश \( \lambda \) है। पहिए के वृत्तीय भाग पर एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B (\( B = -B_0 \hat{k} \)) फैला हुआ है जो केवल \( r \le a \) क्षेत्र तक सीमित है, जहाँ \( a < R \)।
\( \vec{B} = - B_0 \hat{k} \text{ (r} \le \text{a; a < R)} \)
\( = 0 \text{ (अन्यथा)} \)
चुम्बकीय-क्षेत्र को अचानक 'ऑफ (Switched off) करने के पश्चात्, पहिए का कोणीय वेग ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल-माना चुम्बकीय-क्षेत्र को स्विच ऑफ करने पर E विद्युत-क्षेत्र उत्पन्न होता है तथा पहिया \( \omega \) कोणीय वेग से घूमना प्रारम्भ करता है।
यदि पहिए पर कुल आवेश q है तो एक पूर्ण चक्र के दौरान विद्युत-क्षेत्र द्वारा आवेश को घुमाने में कृत कार्य
\( W = F \times s = qE \times 2 \pi R \)
उत्पन्न विद्युत वाहक बल
\( e = \frac{W}{q} = E \times 2 \pi R \)....(1)
परिपथ से बद्ध कुल फ्लक्स
\( \phi = \pi a^2 B \) [: \( 0 \le r \le a \implies B = -B_0 \hat{k}, a < r \not> B = 0 \)]
... प्रेरित विद्युत वाहक बल
\( e = - \frac{d\phi}{dt} = - \pi a^2 \frac{dB}{dt} \)
अतः \( E \times 2 \pi R = - \pi a^2 \frac{dB}{dt} \)
q dt से गुणा करने पर, \( qE dt \times 2 \pi R = - q \pi a^2 dB \)
या \( F dt = - \frac{q a^2}{2R} dB \) [: \( qE = F \)]
परन्तु \( \text{बल का आवेग} = \text{पहिए के संवेग में परिवर्तन} \)
\( \implies M\omega R - M \cdot 0 = M\omega R \) [: \( v = \omega R \)]
अतः \( M\omega R = - \frac{q a^2}{2R} dB \)
परन्तु \( dB = \text{चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन} \)
\( = \text{स्विच ऑफ करने के बाद क्षेत्र} - \text{स्विच ऑफ करने के पूर्व क्षेत्र} \)
\( = 0 - (-B_0 k) = B_0 k \)
.. \( M\omega R = - \frac{q a^2}{2R} B_0 k = - \frac{\pi \lambda a^2 B_0}{2R} k \)
परन्तु \( q = \lambda \times (2 \pi R) \) (आवेश का रेखीय घनत्व)
क्षेत्र को स्विच ऑफ करने के तुरन्त बाद पहिए का
कोणीय वेग \( \omega = - \frac{\pi \lambda a^2 B_0 k}{Mr} \)
In simple words: जब किसी चालक पहिए से गुजरने वाले चुंबकीय क्षेत्र को अचानक बंद कर दिया जाता है, तो फ्लक्स में परिवर्तन के कारण एक विद्युत क्षेत्र प्रेरित होता है। यह विद्युत क्षेत्र पहिए के आवेशों पर बल लगाता है, जिससे पहिया घूर्णन करना शुरू कर देता है और एक कोणीय वेग प्राप्त करता है।
In simple words: When a magnetic field passing through a conducting wheel is suddenly switched off, an electric field is induced due to the change in flux. This electric field exerts a force on the charges on the wheel, causing it to rotate and acquire an angular velocity.
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न फैराडे के प्रेरण नियम और संवेग संरक्षण के सिद्धांतों को जोड़ता है। आवेश के कारण उत्पन्न बल और उसके परिणामस्वरूप कोणीय संवेग परिवर्तन को सही ढंग से समझना आवश्यक है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. प्रेरित वैद्युत धारा की दिशा का पता चलता है-
(i) लेन्ज के नियम द्वारा
(ii) फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम द्वारा
(iii) बायो-सेवर्ट के नियम द्वारा
(iv) ऐम्पियर के नियम द्वारा
Answer: (i) लेन्ज के नियम द्वारा
In simple words: प्रेरित धारा की दिशा हमेशा लेन्ज के नियम से ज्ञात की जाती है, जो बताता है कि प्रेरित धारा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है।
In simple words: The direction of induced current is always determined by Lenz's Law, which states that the induced current opposes the cause producing it.
🎯 Exam Tip: लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, यह याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. लेन्ज का नियम किसके संरक्षण नियम के अनुरूप उत्पन्न होता है?
(i) आवेश
(ii) संवेग
(iii) ऊर्जा
(iv) द्रव्यमान
Answer: (iii) ऊर्जा
In simple words: लेन्ज का नियम सीधे तौर पर ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत से जुड़ा है, क्योंकि यह बताता है कि प्रेरित धारा हमेशा उस परिवर्तन का विरोध करती है जो उसे उत्पन्न करता है, जिससे ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।
In simple words: Lenz's law is directly related to the principle of energy conservation, as it states that the induced current always opposes the change that produces it, thereby maintaining energy balance.
🎯 Exam Tip: यह एक मौलिक अवधारणा है; लेन्ज का नियम और ऊर्जा संरक्षण के बीच संबंध को अच्छी तरह से समझें।
Question 3. लेन्ज के वैद्युत चुम्बकीय फ्लक्स प्रेरण के नियमानुसार इनमें से क्या सत्य है?
(i) आवेश का संरक्षण
(ii) चुम्बकीय फ्लक्स का संरक्षण
(iii) ऊर्जा का संरक्षण
(iv) संवेग का संरक्षण
Answer: (iii) ऊर्जा का संरक्षण
In simple words: वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण में लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है, यह सुनिश्चित करता है कि प्रेरित धारा उत्पन्न होने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करे।
In simple words: In electromagnetic induction, Lenz's law adheres to the principle of energy conservation, ensuring that the induced current opposes the change in magnetic flux that produces it.
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न पिछले प्रश्न के समान है; ऊर्जा संरक्षण लेन्ज के नियम का मुख्य आधार है।
Question 4. हेनरी/मीटर मात्रक है-
(i) वैद्युतशीलता का
(ii) चुम्बकशीलता का
(iii) परावैद्युतक का
(iv) स्वप्रेरकत्व का
Answer: (ii) चुम्बकशीलता का
In simple words: हेनरी/मीटर चुम्बकशीलता का SI मात्रक है, जो किसी माध्यम में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता को दर्शाता है।
In simple words: Henry/meter is the SI unit of magnetic permeability, indicating the strength of a magnetic field in a medium.
🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के SI मात्रक और विमाएं याद रखना परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 5. \( \frac{L}{R} \) की विमा होगी, जहाँ प्रेरकत्व है तथा प्रतिरोध है-
(i) [M\(^0\)L\(^0\)T\(^{-1}\)]
(ii) [M\(^0\)L\(^0\)T]
(iii) [M\(^0\)L\(^0\)T]
(iv) [MLT\(^{-2}\)]
Answer: (iii) [M\(^0\)L\(^0\)T]
In simple words: प्रेरकत्व L और प्रतिरोध R के अनुपात \( \frac{L}{R} \) की विमा समय (T) के बराबर होती है, जिसका अर्थ है कि यह राशि किसी परिपथ में धारा के वृद्धि या क्षय के समय स्थिरांक को दर्शाती है।
In simple words: The dimension of the ratio \( \frac{L}{R} \) (inductance L to resistance R) is equivalent to time (T), meaning this quantity represents the time constant for current growth or decay in a circuit.
🎯 Exam Tip: विमाओं की गणना करते समय, संबंधित सूत्रों को याद रखें (जैसे \( e = -L \frac{dI}{dt} \) और \( V = IR \)) और उन्हें मूल विमाओं में तोड़ें।
Question 6. 10 ओम प्रतिरोध तथा 10 हेनरी प्रेरकत्व की एक कुण्डली 50 वोल्ट की बैटरी से जोड़ी गयी है। कुण्डली में संचित ऊर्जा है-
(i) 125 जूल
(ii) 62.5 जूल
(iii) 250 जूल
(iv) 500 जूल
Answer: (iv) 500 जूल
In simple words: कुण्डली में संचित ऊर्जा की गणना \( U = \frac{1}{2} L I^2 \) सूत्र से की जाती है, जहाँ I परिपथ में स्थायी धारा है। पहले ओम के नियम से धारा ज्ञात करते हैं, फिर ऊर्जा।
In simple words: The energy stored in an inductor is calculated using the formula \( U = \frac{1}{2} L I^2 \), where I is the steady-state current in the circuit. First, find the current using Ohm's law, then calculate the energy.
🎯 Exam Tip: प्रेरकत्व में संचित ऊर्जा के सूत्र और ओम के नियम को याद रखें। स्थिर अवस्था में धारा \( I = \frac{V}{R} \) होती है।
Question 7. एक कुण्डली के लिए स्वप्रेरकत्व 2 mH है। उसमें वैद्युत धारा प्रवाह की दर 10\(^3\) ऐम्पियर/सेकण्ड है। इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल है-
(i) 1 वोल्ट
(ii) 2 वोल्ट
(iii) 3 वोल्ट
(iv) 4 वोल्ट
Answer: (ii) 2 वोल्ट
In simple words: प्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना स्वप्रेरकत्व और धारा परिवर्तन की दर के गुणनफल से की जाती है, जिसमें लेन्ज के नियम के अनुसार विपरीत दिशा को दर्शाने के लिए ऋणात्मक चिह्न का उपयोग होता है।
In simple words: The induced electromotive force is calculated by multiplying the self-inductance and the rate of change of current, with a negative sign indicating the opposing direction as per Lenz's law.
🎯 Exam Tip: सूत्र \( e = -L \frac{dI}{dt} \) का उपयोग करते समय, मिलीहेनरी को हेनरी में और अन्य इकाइयों को SI में बदलना सुनिश्चित करें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण का लेन्ज का नियम क्या है?
Answer: किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल, अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि यह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।
In simple words: लेन्ज का नियम बताता है कि प्रेरित धारा या विद्युत वाहक बल हमेशा उस परिवर्तन का विरोध करता है जो उसे उत्पन्न करता है, यह ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत है।
In simple words: Lenz's law states that an induced current or electromotive force always opposes the change that produces it, adhering to the principle of energy conservation.
🎯 Exam Tip: यह नियम फैराडे के प्रेरण नियम का एक महत्वपूर्ण पूरक है और ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है। परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें।
Question 2. भंवर धाराओं से आप क्या समझते हैं?
या
भंवर धाराएँ क्या होती हैं?
Answer:आँवर धाराएँ (Eddy Currents)- सन् 1875 में फोको (Focault) ने देखा कि जब किसी धातु का टुकड़ा किसी परिवर्ती (variable) चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, अथवा किसी चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार गति करता है कि उससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन हो, तो धातु के सम्पूर्ण आयतन में प्रेरित धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। ये धाराएँ धातु के टुकड़े की गति का (अथवा फ्लक्स परिवर्तन का) विरोध करती हैं। इन धाराओं को 'भंवर धाराएँ' कहते हैं। फोको के नाम पर इन्हें 'फोको धाराएँ' भी कहा जाता है। कभी-कभी ये धाराएँ इतनी प्रबल हो जाती हैं कि धातु का टुकड़ा गर्म होकर लाल-तप्त हो जाता है।
In simple words: भंवर धाराएँ धातु के ब्लॉक में उत्पन्न होने वाली प्रेरित धाराएँ होती हैं जब वे बदलते चुंबकीय क्षेत्र में होते हैं, और ये धाराएँ उस परिवर्तन का विरोध करती हैं जिससे वे उत्पन्न होती हैं, अक्सर ऊष्मा के रूप में ऊर्जा क्षय करती हैं।
In simple words: Eddy currents are induced currents that form in metal blocks when exposed to changing magnetic fields; they oppose the change that creates them, often dissipating energy as heat.
🎯 Exam Tip: भंवर धाराओं की परिभाषा, उनकी उत्पत्ति का कारण (बदलते फ्लक्स) और उनके प्रभाव (विरोध और ऊष्मन) को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भंवर धाराओं से क्या हानियाँ हैं? किसी ट्रांसफॉर्मर की क्रोड में इनको उत्पन्न होने से किस प्रकार रोका जा सकता है?
Answer: ट्रांसफॉर्मर, डायनमो तथा मोटर की आमेचर कुण्डलियों की क्रोड नर्म लोहे की बनी होती हैं। जब इन यन्त्रों में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है तो क्रोड से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, जिससे क्रोड में भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं और वे गर्म हो जाते हैं। इस प्रकार वैद्युत ऊर्जा का ऊष्मीय ऊर्जा में ह्रास होने लगता है। इस हास (भंवर धाराओं) को कम करने के लिए क्रोड को नर्म लोहे के एक अकेले टुकड़े के रूप में न लेकर, नर्म लोहे की कई पतली-पतली पत्तियों को वार्निश द्वारा जोड़कर आवश्यक मोटाई बना लेते हैं। इस प्रकार की क्रोड, पटलित क्रोड (laminated core) कहलाती है। ऐसा करने से क्रोड का प्रतिरोध बढ़ जाता है तथा मँवर धाराएँ क्षीण हो जाती हैं, फलस्वरूप ऊर्जा ह्रास कम हो जाता है।
In simple words: भंवर धाराएँ ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं क्योंकि वे धातु की क्रोडों को गर्म करती हैं। इस हानि को कम करने के लिए, क्रोड को पतली, विद्युतरोधी पत्तियों (पटलित क्रोड) से बनाया जाता है, जिससे विद्युत प्रतिरोध बढ़ता है और भंवर धाराओं का प्रवाह कम होता है।
In simple words: Eddy currents cause energy loss by heating metal cores. To minimize this, cores are made of thin, insulated laminations, which increase electrical resistance and reduce eddy current flow.
🎯 Exam Tip: भंवर धाराओं के कारण होने वाली ऊर्जा हानि और इसे कम करने के लिए पटलित क्रोड के उपयोग का सिद्धांत अच्छी तरह से समझाना चाहिए।
Question 4. चित्र 6.10 में एक दण्ड-चुम्बक मुक्त रूप से एक कुण्डली के बीच से होकर गिरता है। कारण सहित बताइए कि घुम्बक की त्वरण
(a), गुरुत्वीय त्वरण (g) से कम अथवा समान अथवा अधिक होगा।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.10 एक दण्ड चुम्बक को एक कुंडली के ऊपर से गिरते हुए दिखाता है। कुंडली के माध्यम से गुजरते समय, चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, जिससे कुंडली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है जो चुम्बक की गति का विरोध करती है।
उत्तर- जब एक दण्ड चुम्बक मुक्त रूप से एक कुण्डली के बीच से होकर गिरता है तो कुण्डली में वैद्युत धारा प्रेरित हो जाती है, जो सदैव उस कारण का विरोध करती है, जिससे वह उत्पन्न होती है। अतः चुम्बक का त्वरण (a), गुरुत्वीय त्वरण (g) से कम होगा।
In simple words: जब एक चुंबक कुण्डली के माध्यम से गिरता है, तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है जो चुंबक की गति का विरोध करती है। इस विरोधी बल के कारण चुंबक का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण से कम हो जाता है।
In simple words: When a magnet falls through a coil, an induced current is generated that opposes the magnet's motion. Due to this opposing force, the magnet's acceleration becomes less than the acceleration due to gravity.
🎯 Exam Tip: लेन्ज का नियम यहाँ मुख्य अवधारणा है; प्रेरित धारा हमेशा फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है, जिससे गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध एक बल उत्पन्न होता है।
Question 5. 0.2 वेबर /मी\(^2\) के चुम्बकीय क्षेत्र में 10.0 सेमी\(^2\) पृष्ठ क्षेत्रफल की एक आयताकार कुण्डली 20.0 रेडियन/से के नियत कोणीय वेग से घूम रही है। उत्पन्न अधिकतम प्रेरित विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए
Answer:हल-
आयताकार कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स
\( \Phi = BA = (0.2) \times (10 \times 10^{-4}) \text{ वेबर} = 2 \times 10^{-4} \text{ वेबर} \)
आयताकार कुण्डली 20.0 रेडियन/से के नियत कोणीय वेग से घूम रही है अर्थात् प्रत्येक चक्कर में फ्लक्स परिवर्तन कें होगा। चूंकि कुण्डली 1 सेकण्ड में 20 चक्कर पूरे कर रही है, अतः फ्लक्स परिवर्तन की दर 20\( \Phi \) होगी जो कि अभीष्ट प्रेरित विवा० बल होगा।
अतः \( e = 20\Phi = 20 \times 2 \times 10^{-4} \text{ वोल्ट} = 4.0 \times 10^{-3} \text{ वोल्ट} = 4 \text{ मिलीवोल्ट} \)
In simple words: एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में घूम रही कुण्डली में अधिकतम प्रेरित विद्युत वाहक बल, चुंबकीय क्षेत्र, कुण्डली के क्षेत्रफल और उसके कोणीय वेग के गुणनफल से प्राप्त होता है, क्योंकि यह घूमने पर चुंबकीय फ्लक्स में सबसे बड़ा परिवर्तन दर्शाता है।
In simple words: The maximum induced electromotive force in a coil rotating in a uniform magnetic field is obtained from the product of the magnetic field, the coil's area, and its angular velocity, as this represents the largest change in magnetic flux during rotation.
🎯 Exam Tip: अधिकतम प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र \( \varepsilon_{max} = NAB\omega \) याद रखें। यहाँ \( N=1 \) (एक कुण्डली), \( A=10 \text{ सेमी}^2 \) और \( B=0.2 \text{ वेबर/मी}^2 \), \( \omega = 20 \text{ rad/s} \) है।
Question 6. एक कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स 0.1 सेकण्ड में 1 वेबर से 0.1 वेबर हो जाता है। कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल-कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल \( e = - \frac{\Delta \Phi}{\Delta t} \)
\( e = - \frac{(0.1 - 1)}{0.1} = \frac{-(-0.9)}{0.1} = 9 \text{ वोल्ट} \)
In simple words: प्रेरित विद्युत वाहक बल चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के ऋणात्मक मान के बराबर होता है। जब फ्लक्स 1 वेबर से 0.1 वेबर हो जाता है, तो फ्लक्स में 0.9 वेबर की कमी होती है, जिससे 0.1 सेकंड में 9 वोल्ट का प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
In simple words: The induced electromotive force is equal to the negative of the rate of change of magnetic flux. When flux decreases from 1 Weber to 0.1 Weber, there is a 0.9 Weber change, inducing 9 volts over 0.1 seconds.
🎯 Exam Tip: फैराडे के प्रेरण नियम का सीधा अनुप्रयोग है। \( \Delta \Phi \) और \( \Delta t \) के मानों को सही ढंग से रखकर गणना करें, और ऋणात्मक चिह्न का अर्थ समझें।
Question 7. 1000 फेरों वाली एक कुण्डली में 2.5 ऐम्पियर की दिष्ट धारा प्रवाहित करने पर कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \( 1.4 \times 10^{-4} \) वेबर है। कुण्डली का प्रेरकत्व क्या है?
Answer:हल-
\( L = \frac{N\Phi}{I} = \frac{1.4 \times 10^{-4}}{2.5} \text{ हेनरी} \)
\( = 5.6 \times 10^{-5} \text{ हेनरी} \)
(∵ \( N\Phi = 1.4 \times 10^{-4} \text{ वेबर} \))
In simple words: कुण्डली का प्रेरकत्व (L) उसके फेरों की संख्या (N), कुल चुंबकीय फ्लक्स ( \( \Phi \)) और उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुपात से ज्ञात किया जाता है, जो बताता है कि प्रति इकाई धारा में कितना चुंबकीय फ्लक्स बद्ध है।
In simple words: The inductance (L) of a coil is found by the ratio of its number of turns (N), total magnetic flux (\( \Phi \)), and the current (I) flowing through it, indicating how much magnetic flux is linked per unit current.
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व की परिभाषा \( N\Phi = LI \) को याद रखें। इस सूत्र का उपयोग करके \( L \) की गणना सीधे की जा सकती है।
Question 8. एक कुण्डली से बढ़ चुम्बकीय फ्लक्स 0.1 सेकण्ड में 10 वेबर से 1 वेबर कर दिया जाता है। कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान बताइए।
Answer:हल-कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल \( e = - \frac{\Delta \phi}{\Delta t} \)
\( e = - \frac{(1 - 10)}{0.1} = \frac{-(-9)}{0.1} = 90 \text{ वोल्ट} \)
In simple words: प्रेरित विद्युत वाहक बल, चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के ऋणात्मक मान के बराबर होता है। यहाँ फ्लक्स में कमी (10 वेबर से 1 वेबर) 9 वेबर है, जो 0.1 सेकंड में 90 वोल्ट का प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न करती है।
In simple words: The induced electromotive force equals the negative of the rate of change of magnetic flux. Here, a 9 Weber decrease in flux (from 10 to 1 Weber) over 0.1 seconds induces a 90-volt electromotive force.
🎯 Exam Tip: यह पिछले प्रश्न 6 के समान है। फैराडे के नियम का अनुप्रयोग करें और फ्लक्स परिवर्तन की सही दिशा (अंतिम - प्रारंभिक) का ध्यान रखें।
Question 9. अन्योन्य प्रेरण गुणांक की विमा लिखिए।
Answer:[ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)].
In simple words: अन्योन्य प्रेरण गुणांक की विमा [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)] है, जो ऊर्जा, धारा और समय से संबंधित है, क्योंकि यह एक कुण्डली में धारा परिवर्तन से दूसरी कुण्डली में उत्पन्न फ्लक्स लिंकेज को मापता है।
In simple words: The dimension of mutual inductance is [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)], related to energy, current, and time, as it measures the flux linkage induced in one coil due to current change in another.
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व और अन्योन्य प्रेरकत्व दोनों की विमा समान होती है। सूत्र \( M = \frac{\phi}{I} \) या \( e = -M \frac{dI}{dt} \) से विमा प्राप्त की जा सकती है।
Question 10. स्वप्रेरण से आप क्या समझते हैं?
या
स्वप्रेरण का अर्थ समझाइए तथा स्वप्रेरण गुणांक का विमीय सूत्र लिखिए।
Answer:स्वप्रेरण- किसी कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स के मान में परिवर्तन होने पर उसी कुण्डली में प्रेरित वैद्युत वाहक बल तथा प्रेरित धारा क्त्पन्न होने की घटना को स्वप्रेरण कहते हैं। स्वप्रेरण गुणांक का विमीय सूत्र = [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)]
In simple words: स्वप्रेरण एक ऐसी घटना है जहाँ एक कुण्डली में धारा के बदलने पर उसी कुण्डली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जो धारा परिवर्तन का विरोध करता है। इसका गुणांक [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)] विमा रखता है।
In simple words: Self-induction is a phenomenon where a changing current in a coil induces an electromotive force within the same coil, opposing the current change. Its coefficient has the dimension [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)].
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरण की परिभाषा को फैराडे के नियम के संदर्भ में समझाएं और विमीय सूत्र को सटीक रूप से लिखें।
Question 11. स्वप्रेरण-गुणांक का विमा सूत्र लिखिए ।
Answer:[ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)]
In simple words: स्वप्रेरण गुणांक की विमा [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)] है, जो प्रेरकत्व की मौलिक प्रकृति को ऊर्जा, द्रव्यमान, समय और धारा के संदर्भ में परिभाषित करती है।
In simple words: The dimension of self-inductance is [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)], which defines the fundamental nature of inductance in terms of energy, mass, time, and current.
🎯 Exam Tip: विमाएं भौतिकी में राशियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। स्वप्रेरण गुणांक की विमा को याद रखें।
Question 12. 8.0 मिली-हेनरी स्वप्रेरकत्व वाली कुण्डली में 2.0 ऐम्पियर धारा है। कुण्डली के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र में कितनी ऊर्जा संचित है?
Answer:हल-
\( L = 8.0 \text{ mH} = 8.0 \times 10^{-3} \text{ H} \)
\( I = 2.0 \text{ A} \)
संचित ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} L I^2 \)
\( U = \frac{1}{2} \times 8.0 \times 10^{-3} \times (2.0)^2 \)
\( U = \frac{1}{2} \times 8.0 \times 10^{-3} \times 4.0 \)
\( U = 16 \times 10^{-3} \text{ जूल} = 0.016 \text{ जूल} \)
In simple words: एक प्रेरक में संचित चुंबकीय ऊर्जा उसके स्वप्रेरकत्व और उसमें प्रवाहित धारा के वर्ग के आधे गुणनफल के बराबर होती है। यहाँ, 8.0 mH प्रेरकत्व और 2.0 A धारा के साथ, 0.016 जूल ऊर्जा संचित होती है।
In simple words: The magnetic energy stored in an inductor equals half the product of its self-inductance and the square of the current flowing through it. With 8.0 mH inductance and 2.0 A current, 0.016 joules of energy are stored.
🎯 Exam Tip: प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र \( U = \frac{1}{2} L I^2 \) याद रखें और मिलीहेनरी को हेनरी में बदलना न भूलें।
Question 13. एक कुण्डली का स्वप्रेरकत्व \( 3.0 \times 10^{-3} \) हेनरी है। यदि 0.1 सेकण्ड में कुण्डली की धारा का मान 5 ऐम्पियर से घट कर शून्य हो जाये तो कुण्डली में उत्पन्न स्वप्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए।
Answer:हल-
\( e = -L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) = -3.0 \times 10^{-3} \left( \frac{0 - 5}{0.1} \right) \text{ वोल्ट} \)
\( = -3.0 \times 10^{-3} \times \left( \frac{-5}{0.1} \right) \)
\( = -3.0 \times 10^{-3} \times (-50) \)
\( = 0.150 \text{ वोल्ट} \)
In simple words: स्वप्रेरित विद्युत वाहक बल की गणना कुण्डली के स्वप्रेरकत्व और धारा में परिवर्तन की दर से की जाती है। यहाँ, धारा 5 ऐम्पियर से शून्य हो जाती है, जिससे 0.150 वोल्ट का प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
In simple words: The self-induced electromotive force is calculated from the coil's self-inductance and the rate of current change. Here, as current drops from 5 amperes to zero, a 0.150-volt electromotive force is induced.
🎯 Exam Tip: फैराडे के प्रेरण नियम \( e = -L \frac{\Delta I}{\Delta t} \) का सही अनुप्रयोग करें। \( \Delta I \) को हमेशा अंतिम धारा - प्रारंभिक धारा के रूप में लें ताकि चिह्न सही आए।
Question 14. एक कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक 10 मिली हेनरी है। इसमें वैद्युत धारा 5 मिलीसेकण्ड में 5 ऐम्पियर से 15 ऐम्पियर हो जाती है। कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए।
Answer:हल - दिया है, \( L = 10 \text{ मिली हेनरी} = 10 \times 10^{-3} \text{ हेनरी} \)
\( \Delta I = 15 - 5 = 10 \text{ ऐम्पियर} \)
तथा \( \Delta t = 5 \text{ मिली सेकण्ड} = 5 \times 10^{-3} \text{ सेकण्ड} \)
... प्रेरित विद्युत वाहक बल \( e = -L \frac{\Delta I}{\Delta t} \)
\( = -(10 \times 10^{-3}) \times \left( \frac{10}{5 \times 10^{-3}} \right) \)
\( = - \left( \frac{100 \times 10^{-3}}{5 \times 10^{-3}} \right) \)
\( = - \frac{100}{5} \)
\( = -20 \text{ वोल्ट} \)
ऋण चिन्ह यह दर्शाता है कि विद्युत वाहक बल \( e \) ऐसी दिशा में प्रेरित होता है जिससे कि वह कुण्डली में धारा-परिवर्तन का विरोध करता है।
In simple words: प्रेरित विद्युत वाहक बल स्वप्रेरकत्व और धारा परिवर्तन की दर का गुणनफल होता है। यहाँ धारा 5 मिलीसेकण्ड में 5 ऐम्पियर से 15 ऐम्पियर तक बढ़ती है, जिससे -20 वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है, जो धारा वृद्धि का विरोध करता है।
In simple words: The induced electromotive force is the product of self-inductance and the rate of current change. Here, the current increases from 5 A to 15 A in 5 ms, inducing a -20 V electromotive force that opposes the current increase.
🎯 Exam Tip: \( L \), \( \Delta I \), \( \Delta t \) के मानों को सही SI इकाइयों में परिवर्तित करें (मिलीहेनरी को हेनरी, मिलीसेकण्ड को सेकण्ड)। प्रेरित विद्युत वाहक बल के सूत्र \( e = -L \frac{\Delta I}{\Delta t} \) का उपयोग करें और ऋणात्मक चिह्न का महत्व समझें।
Question 15. यदि प्राथमिक कुण्डली में बहने वाली 3.0 ऐम्पियर की धारा को 0.001 सेकण्ड में शून्य कर दिया जाए तो द्वितीयक कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वाहक बल 15000 वोल्ट होता है। इन कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरण गुणांक ज्ञात कीजिए ।
Answer:हल - दिया है, \( \Delta I = (0 - 3.0) \text{ ऐम्पियर}, \Delta t = 0.001 \text{ सेकण्ड} \)
\( e = 15000 \text{ वोल्ट}, M = ? \)
अतः अन्योन्य प्रेरण गुणांक, \( M = \frac{e}{(\Delta I / \Delta t)} = \frac{-e \Delta t}{\Delta I} \)
\( = \frac{15000 \times 0.001}{(0 - 3.0)} \)
\( = \frac{15}{-3} = -5 \text{ हेनरी} \) (यहाँ परिमाण पूछा गया है, इसलिए धनात्मक मान लेंगे)
In simple words: अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) का मान प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) और प्राथमिक कुण्डली में धारा परिवर्तन की दर \( (\frac{\Delta I}{\Delta t}) \) के अनुपात से ज्ञात किया जाता है। यहाँ, प्राथमिक धारा में कमी से द्वितीयक कुण्डली में उच्च प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
In simple words: Mutual inductance (M) is determined by the ratio of the induced electromotive force (e) and the rate of current change \( (\frac{\Delta I}{\Delta t}) \) in the primary coil. Here, a decrease in primary current generates a high induced electromotive force in the secondary coil.
🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरण के सूत्र \( e = -M \frac{\Delta I}{\Delta t} \) का उपयोग करें। \( \Delta I \) में सही परिवर्तन (अंतिम - प्रारंभिक) और \( \Delta t \) के मानों को ध्यान से रखें। ऋणात्मक चिह्न केवल दिशा बताता है, परिमाण के लिए धनात्मक मान लिया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम लिखिए।
Answer:फ्लेमिंग के दायें हाथ का नियम (Fleming's Right Hand Rule)- जब कोई ऋजुरेखीय चालक तार किसी चुम्बकीय क्षेत्र में उसके लम्बवत् गति करता है तो इसमें उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम की सहायता से ज्ञात की जाती है। इस नियम के अनुसार, यदि हम दायें हाथ का अँगूठा तथा इसके पास वाली दोनों अँगुलियों को एक साथ इस प्रकार फैलाएँ कि वे परस्पर लम्बवत् हों (चित्र 6.11), तब यदि पहली अँगुली चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में तथा अँगूठा चालक की गति की दिशा में संकेत करें तो बीच वाली अँगुली चालक में प्रेरित वैद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करेगी ।”
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.11 फ्लेमिंग के दाएं हाथ का नियम दर्शाता है। इसमें अंगूठा चालक की गति की दिशा, तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा को इंगित करती है, ये तीनों परस्पर लंबवत होते हैं।
In simple words: फ्लेमिंग का दाएं हाथ का नियम बताता है कि जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो अंगूठा गति की दिशा, तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा को दर्शाती है।
In simple words: Fleming's Right-Hand Rule states that when a conductor moves in a magnetic field, the thumb indicates the direction of motion, the forefinger indicates the magnetic field, and the middle finger indicates the direction of the induced current.
🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग के दाएं हाथ का नियम प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए महत्वपूर्ण है। तीनों उंगलियों की दिशाओं (बल/गति, क्षेत्र, धारा) को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 2. फैराडे के वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी नियम बताइए ।
Answer:फैराडे के वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के नियम-फैराडे ने वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के निम्नलिखित दो नियम दिये हैं
(i) प्रथम नियम- “जब किसी परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो उसमें एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है।” यदि परिपथ ‘बन्द' है तो उसमें प्रेरित धारा बहने लगती है। यह धारा केवल तभी तक बहती है जब तक कि चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है।
(ii) द्वितीय नियम- “प्रेरित विद्युत वाहक बल चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होता है।” यदि किसी समय परिपथ से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स का मान के \( \Phi_1 \) है और \( \Delta t \) समयान्तर के बाद यह फ्लक्स हो जाता है, तो
\( \Delta t \) समयान्तर में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन \( = (\Phi_2 - \Phi_1) = \Delta \Phi \)
यदि परिपथ में प्रेरित वि० वा० बल \( e \) हो, तो \( e = - \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta \Phi}{\Delta t} \)
जब, \( \Delta t \to 0 \) तो \( e = - \frac{\Delta \Phi}{\Delta t} \) अर्थात् \( e = - \frac{d\Phi}{dt} \)
ऋणात्मक चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि वि० वा० बल सदैव चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करता है। यह लेन्ज का नियम कहलाता है। यदि चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर वेबर प्रति सेकण्ड में लें तो प्रेरित विद्युत वाहक बल वोल्ट में होता है। यदि कुण्डली में N फेरे हों तो पूरी कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल \( e = -N \frac{d\Phi}{dt} \) जहाँ, \( N\Phi \) कुण्डली में चुम्बकीय फ्लक्स-ग्रन्थिताओं (flux linkages) की संख्या है।
In simple words: फैराडे के प्रथम नियम के अनुसार, जब भी चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो एक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। द्वितीय नियम बताता है कि इस प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है और लेन्ज के नियम के अनुसार इसका विरोध करता है।
In simple words: According to Faraday's first law, an electromotive force is induced whenever magnetic flux changes. The second law states that the magnitude of this induced EMF is proportional to the rate of change of magnetic flux and opposes it, as per Lenz's Law.
🎯 Exam Tip: फैराडे के दोनों नियमों को स्पष्ट रूप से लिखें और यह सुनिश्चित करें कि आप ऋणात्मक चिह्न का महत्व (लेन्ज का नियम और ऊर्जा संरक्षण) समझाएं।
Question 3. भंवर धाराओं के अनुप्रयोग लिखिए।
Answer:आँवर धाराओं के अनुप्रयोग निम्नवत् हैं-
(i) दोलन-रुद्ध धारामापी- चल-कुण्डली धारामापियों को दोलन-रुद्ध (dead beat) बनाने के लिए भंवर धाराओं का उपयोग किया जाता है। इसके लिये धारामापी की कुण्डली ताँबे के विद्युतरोधी तार को ऐलुमिनियम के फ्रेम पर लपेटकर बनायी जाती है। जब कुण्डली विक्षेपित होती है, तो उससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है जिससे फ्रेम में भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो कुण्डली की गति का विरोध करती हैं। अतः कुण्डली शीघ्र ही शून्य पर लौट आती है।
(ii) प्रेरण भट्टी- प्रेरण भट्टी में पिघलाये जाने वाली धातु को एक तेजी से परिवर्तित होने वाले चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है जिसे उच्च-आवृत्ति प्रत्यावर्ती धारा से प्राप्त किया जाता है इससे धातु में प्रबल भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं जिनकी ऊष्मा से धातु लाल-तप्त होकर पिघल जाती है। यह प्रक्रिया खनिज पदार्थ से धातु निकालने में भी प्रयुक्त की जाती है।
(iii) प्रेरण मोटर- जब एक धात्विक बेलन किसी घूमते हुए चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो बेलन में भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। ये धाराएँ, लेन्ज के नियमानुसार, बेलन तथा चुम्बकीय क्षेत्र के बीच आपेक्षिक गति को घटाने का प्रयत्न करती हैं। अतः बेलन चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में घूमने लगता है। प्रेरण मोटर का यही सिद्धान्त है।
(iv) वैद्युत ब्रेक- विद्युत रेलगाड़ियों में पहिये की धुरी के साथ एक ड्रम लगा रहता है जो पहिये के साथ घूमता है। जब ब्रेक लगाने होते हैं, तो ड्रम पर एक प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र लगा दिया जाता है। जिससे ड्रम में भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं और ड्रम पहिये को रोक देता है।
In simple words: भंवर धाराओं के कई उपयोगी अनुप्रयोग हैं, जैसे दोलन-रुद्ध धारामापी में तेजी से सुई को रोकना, प्रेरण भट्टियों में धातुओं को गर्म करना, प्रेरण मोटरों में घूर्णन उत्पन्न करना, और ट्रेनों में कुशल वैद्युत ब्रेक लगाना।
In simple words: Eddy currents have various useful applications, including quickly damping needles in galvanometers, heating metals in induction furnaces, generating rotation in induction motors, and providing efficient electromagnetic braking in trains.
🎯 Exam Tip: भंवर धाराओं के चार मुख्य अनुप्रयोगों (धारामापी, प्रेरण भट्टी, प्रेरण मोटर, वैद्युत ब्रेक) और प्रत्येक में उनके कार्य सिद्धांत को याद रखें।
Question 4. एक कुण्डली का क्षेत्रफल 100 सेमी\(^2\) है तथा इसमें 400 फेरे हैं। 0.20 वेबर/मी\(^2\) का चुम्बकीय क्षेत्र कुण्डली के तल के लम्बवत है। यदि चुम्बकीय क्षेत्र 0.1 सेकण्ड में घटकर शुन्य हो जाए तो कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल का मान ज्ञात कीजिए। यदि कुण्डली का प्रतिरोध 4 ओम हो तो प्रेरित धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:हल-विद्युत वाहक बल \( e = -N \frac{\Delta \Phi}{\Delta t} = -N \frac{\Delta (BA)}{\Delta t} = -NA \frac{\Delta B}{\Delta t} \)
\( = -400 \times 1.0 \times 10^{-2} \left( \frac{0 - 0.2}{0.1} \right) \)
\( = -400 \times 1.0 \times 10^{-2} \times (-2) \)
\( = -4 \times (-2) = 8 \text{ वोल्ट} \)
... कुण्डली का प्रतिरोध \( R = 4 \text{ ओम} \)
... कुण्डली में प्रेरित धारा \( i = \frac{e}{R} = \frac{8}{4} = 2 \text{ ऐम्पियर} \)
In simple words: चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण कुण्डली में एक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है, जिसका परिमाण फ्लक्स परिवर्तन की दर और फेरों की संख्या पर निर्भर करता है। इस प्रेरित विद्युत वाहक बल और कुण्डली के प्रतिरोध से प्रेरित धारा की गणना की जा सकती है।
In simple words: An electromotive force is induced in a coil due to a change in magnetic flux, its magnitude depending on the rate of flux change and the number of turns. The induced current can then be calculated from this EMF and the coil's resistance.
🎯 Exam Tip: फैराडे के प्रेरण नियम \( e = -N A \frac{\Delta B}{\Delta t} \) और ओम के नियम \( I = \frac{e}{R} \) का सही अनुप्रयोग करें। क्षेत्रफल को सेमी\(^2\) से मी\(^2\) में बदलना न भूलें।
Question 5. एक L लम्बाई की धातु की छड़ कोणीय आवृत्ति से अपने एक सिरे के परितः घूर्णन कर रही है। चुम्बकीय क्षेत्र B छड़ की घूर्णन अक्ष के समान्तर आरोपित है। छड़ के सिरों के बीच उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिए। यदि छड़ का प्रतिरोध हो तब उसमें प्रेरित धारा क्या होगी?
Answer:हल-एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में गतिशील छड़ में उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल
\( e = Bvl \)
जहाँ, B = चुम्बकीय क्षेत्र, v = छड़ का वेग, l = छड़ की लम्बाई
प्रश्नानुसार, छड़ कोणीय आवृत्ति \( \omega \) से घूर्णन कर रही है, इसलिए प्रेरित वि० वा० बल
\( e = B\omega L^2 \)
यदि छड़ का प्रतिरोध R है, तब प्रेरित धारा \( I = \frac{e}{R} \)
जहाँ, \( e = B\omega L^2 \) \( \implies I = \frac{B\omega L^2}{R} \)
In simple words: एक चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल चुंबकीय क्षेत्र, कोणीय वेग और छड़ की लंबाई के वर्ग के गुणनफल के बराबर होता है। यदि छड़ का प्रतिरोध ज्ञात हो, तो प्रेरित धारा की गणना ओम के नियम से की जा सकती है।
In simple words: The induced electromotive force in a rod rotating in a magnetic field is equal to the product of the magnetic field, angular velocity, and the square of the rod's length. If the rod's resistance is known, the induced current can be calculated using Ohm's law.
🎯 Exam Tip: घूर्णन करती छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र \( e = \frac{1}{2} B\omega L^2 \) या \( e = B\omega L^2 \) (यदि औसत वेग \( \frac{\omega L}{2} \) लिया जाए) याद रखें। इस प्रश्न में \( B\omega L^2 \) दिया है, जो सामान्यतः औसत प्रेरित विभव के लिए होता है।
Question 6. जब एक प्राथमिक कुण्डली में धारा शून्य से 2.0 ऐम्पियर, 300 मिली सेकण्ड में परिवर्तित की जाती है तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल 0.80 वोल्ट है। दोनों कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक की गणना कीजिए।
Answer:हल-
\( \Delta I = 2.0 \text{ ऐम्पियर}, \Delta t = 0.3 \text{ सेकण्ड}, e = 0.80 \text{ वोल्ट} \)
विद्युत वाहक बल \( e = -M \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \)
\( \implies 0.80 = M \left( \frac{2.0}{0.3} \right) \) (परिमाण के लिए)
\( M = \frac{0.80 \times 0.3}{2.0} = \frac{0.24}{2.0} = 0.12 \text{ हेनरी} \)
\( = 12 \times 10^{-2} \text{ हेनरी} \)
In simple words: दो कुंडलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक प्राथमिक कुण्डली में धारा परिवर्तन की दर और द्वितीयक कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल के अनुपात से ज्ञात किया जाता है।
In simple words: The mutual inductance between two coils is determined by the ratio of the induced electromotive force in the secondary coil to the rate of current change in the primary coil.
🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरण गुणांक \( M \) की गणना के लिए सूत्र \( e = -M \frac{\Delta I}{\Delta t} \) का उपयोग करें। सभी इकाइयों को SI में बदलें और अंतिम परिणाम हेनरी में व्यक्त करें।
Question 7. स्वप्रेरण गुणांक की परिभाषा लिखिए तथा मात्रक बताइए।
या
स्वप्रेरकत्व की परिभाषा लिखिए।
Answer:\( N\Phi = LI \) तथा यदि \( I = 1 \) तो \( L = N\Phi \), अतः किसी कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक कुण्डली में चुम्बकीय फ्लक्स ग्रन्थिताओं के बराबर होता है, जबकि कुण्डली में एकांक धारा प्रवाहित हो रही है। संख्यात्मक रूप से प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण
\( e = L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \)
अथवा \( L = \frac{e}{(\Delta I / \Delta t)} \) अतः "किसी कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक संख्यात्मक रूप से उस प्रेरित वि० वा० बल के बराबर होता है जो कुण्डली में धारा-परिवर्तन की दर एकांक अर्थात् एक ऐम्पियर प्रति सेकण्ड होने पर उत्पन्न होता है।” इसका मात्रक हेनरी होता है।
In simple words: स्वप्रेरण गुणांक (या स्वप्रेरकत्व) किसी कुण्डली का वह गुण है जो उसमें एकांक धारा परिवर्तन की दर से उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल के संख्यात्मक मान के बराबर होता है। इसका मात्रक हेनरी है।
In simple words: Self-inductance is a property of a coil numerically equal to the induced electromotive force generated per unit rate of current change within it. Its unit is the Henry.
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरण गुणांक की दोनों परिभाषाएँ (फ्लक्स लिंकेज के संदर्भ में और प्रेरित विद्युत वाहक बल के संदर्भ में) महत्वपूर्ण हैं। SI मात्रक (हेनरी) को याद रखें।
Question 8. एक समतल वृत्ताकार कुण्डली के लिए स्वप्रेरण गुणांक का सूत्र निगमित कीजिए।
Answer:उत्तर-
माना r मीटर त्रिज्या तथा N फेरों की एक समतल वृत्ताकार कुण्डली में ऐम्पियर की वैद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। अतः कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 NI}{2r} \)
मानी कुण्डली के सम्पूर्ण तल में चुम्बकीय क्षेत्र B एकसमान है (यद्यपि कुण्डली की परिधि के समीप चुम्बकीय क्षेत्र B अधिक होता है)। अतः कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय-फ्लक्स \( \Phi = BA \) जहाँ, A कुण्डली के तल का क्षेत्रफल है; अतः \( A = \pi r^2 \) समीकरण (1) से B का मान रखने पर,
\( \Phi = BA = \frac{\mu_0 NI}{2r} \times \pi r^2 = \frac{\mu_0 N I \pi r}{2} \)
कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक \( L = \frac{N\Phi}{I} = N \left( \frac{\mu_0 N \pi r}{2 I} \right) \) समीकरण (1) से स्पष्ट है कि \( \implies L = \frac{\mu_0 N^2 \pi r}{2} \)
अतः समतल कुण्डली का स्वप्रेरकत्व \( L = \frac{\mu_0 \pi N^2 r}{2} \)
किसी कुण्डली का स्वप्रेरकत्व बढ़ाने के लिए कुण्डली में फेरों की संख्या अधिक लेनी चाहिए। यदि कुण्डली के अन्दर लौहचुम्बकीय पदार्थ की छड़ रख दी जाए तो कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय-फ्लक्स बढ़ जाता है, जिससे कुण्डली का स्वप्रेरकत्व बढ़ जाएगा ।
In simple words: एक समतल वृत्ताकार कुण्डली का स्वप्रेरकत्व, निर्वात की चुम्बकशीलता, कुण्डली के फेरों की संख्या के वर्ग, और कुण्डली की त्रिज्या पर निर्भर करता है। यह सूत्र दर्शाता है कि फेरों की संख्या और त्रिज्या बढ़ने पर स्वप्रेरकत्व बढ़ता है।
In simple words: The self-inductance of a flat circular coil depends on the permeability of free space, the square of the number of turns, and the coil's radius. This formula shows that increasing the number of turns and radius increases self-inductance.
🎯 Exam Tip: इस निगमन में, पहले कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करें, फिर कुल चुंबकीय फ्लक्स, और अंत में स्वप्रेरकत्व के सूत्र \( L = \frac{N\Phi}{I} \) का उपयोग करें।
Question 9. धारावाही लम्बी परिनालिका के स्व-प्रेरकत्व का सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer:उत्तर-
माना एक लम्बी वायु-क्रोड परिनालिका की लम्बाई \( l \) तथा परिच्छेद क्षेत्रफल A है। परिनालिका में फेरों की कुल संख्या N तथा उसमें प्रेरित धारा I है ।
परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 NI}{l} \)
जहाँ \( \mu_0 \) निर्वात् की चुम्बकशीलता है।
कुण्डली के प्रत्येक फेरे से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \( \phi = BA = \frac{\mu_0 NIA}{l} \)
अतः परिनालिका के सभी फेरों से बद्ध कुल चुम्बकीय फ्लक्स \( N\phi = N \left( \frac{\mu_0 NIA}{l} \right) = \frac{\mu_0 N^2 IA}{l} \)
परन्तु परिनालिका के सभी फेरों से बद्ध कुल चुम्बकीय फ्लक्स \( N\phi = LI \)
जहाँ, L परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व है।
अतः परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व \( L = \frac{N\phi}{I} \)
\( L = \frac{\mu_0 N^2 A}{l} \text{ हेनरी} \)
यदि परिनालिका को \( \mu \) चुम्बकशीलता के पदार्थ की क्रोड पर लपेटकर बनाया गया है, तब
परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व \( L = \frac{\mu N^2 A}{l} \text{ हेनरी} \)
जहाँ, \( \mu = \mu_0 \mu_r \), यहाँ \( \mu_r \), परिनालिका की क्रोड के पदार्थ की सापेक्ष चुम्बक्शीलता है।
In simple words: एक लम्बी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व उसकी ज्यामिति (लंबाई और क्षेत्रफल) और फेरों की संख्या के वर्ग के सीधे समानुपाती होता है, और यह उस पदार्थ की चुम्बकशीलता पर भी निर्भर करता है जिससे उसकी क्रोड बनी है।
In simple words: The self-inductance of a long solenoid is directly proportional to its geometry (length and area) and the square of the number of turns, and it also depends on the magnetic permeability of its core material.
🎯 Exam Tip: यह निगमन बोर्ड परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पहले परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र, फिर फ्लक्स लिंकेज और अंत में स्वप्रेरकत्व का सूत्र \( L = \frac{N\phi}{I} \) का उपयोग करके प्राप्त करें।
Question 10.स्वप्रेरण गुणांक की परिभाषा दीजिए।
एक प्रेरक में प्रवाहित धारा \( i = 2 + 5t \) द्वारा व्यक्त की जाती है, जहाँ \( i \) ऐम्पियर तथा \( t \) सेकण्ड में है। इसमें स्वप्रेरित विद्युत वाहक बल 10 मिलीवोल्ट है। ज्ञात कीजिए।
(i) स्वप्रेरण गुणांक तथा
(ii) \( t = 2 \) सेकण्ड पर प्रेरक में संचित ऊर्जा
Answer:हल-
[स्वप्रेरण गुणांक की परिभाषा के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न 7 का उत्तर देखें ।]
दिया है,
\( e = 10 \text{ मिलीवोल्ट} = 10 \times 10^{-3} \text{ वोल्ट} \)
धारा \( i = 2+5t \)
... \( \frac{dI}{dt} = \frac{d}{dt} (2+5t) = 5 \text{ ऐम्पियर/सेकण्ड} \)
(i) स्वप्रेरण गुणांक \( L = \frac{e}{(dI/dt)} = \frac{10 \times 10^{-3}}{5} = 2 \times 10^{-3} \text{ हेनरी} \)
\( = 2 \text{ मिली हेनरी} \)
(ii) \( t = 2 \) सेकण्ड पर प्रेरक में धारा \( i = 2+5 \times 2 \)
\( = 2+10 = 12 \text{ ऐम्पियर} \)
... प्रेरक में संचित ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} L I^2 = \frac{1}{2} \times 2 \times 10^{-3} \times (12)^2 \)
\( = 1 \times 10^{-3} \times 144 \)
\( = 144 \times 10^{-3} = 0.144 \text{ जूल} \)
In simple words: एक प्रेरक का स्वप्रेरण गुणांक प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा परिवर्तन की दर के अनुपात से ज्ञात होता है। इस गुणांक का उपयोग करके किसी विशेष समय पर उसमें प्रवाहित धारा के कारण संचित ऊर्जा की गणना की जा सकती है।
In simple words: An inductor's self-inductance is found from the ratio of induced electromotive force to the rate of current change. This coefficient then allows for calculation of the energy stored due to a specific current at a given time.
🎯 Exam Tip: स्वप्रेरण गुणांक की गणना के लिए \( L = \frac{e}{(dI/dt)} \) सूत्र और संचित ऊर्जा के लिए \( U = \frac{1}{2} L I^2 \) सूत्र का उपयोग करें। \( \frac{dI}{dt} \) को सही ढंग से अवकलित करें।
Question 11. एक प्रेरकत्व कुण्डली में वैद्युत धारा 0.3 सेकण्ड में शून्य से बढ़कर 8.0 A हो जाती है। जिसके कारण उसमें 30 V का प्रेरित वि० वा० बल उत्पन्न हो जाता है। कुण्डली का स्वप्रेरकत्व गुणांक ज्ञात कीजिए।
Answer:हल - समयान्तराल \( \Delta t = 0.3 \text{ सेकण्ड} \)
धारा-परिवर्तन \( \Delta I = (8.0 - 0) = 8.0 \text{ A} \)
वि० वा० बल, \( e = 30 \text{ V} \)
सूत्र \( e = -L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \) में (-) चिह्न दिशा का प्रतीक है। अतः इसे छोड़ने पर,
संख्यात्मक रूप से, \( e = L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \)
\( L = e \left( \frac{\Delta t}{\Delta I} \right) = 30 \times \left( \frac{0.3}{8.0} \right) = \frac{9}{8} \)
\( = 1.125 \text{ हेनरी} \)
In simple words: कुण्डली का स्वप्रेरकत्व गुणांक, प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा परिवर्तन की दर के अनुपात से ज्ञात किया जा सकता है। यहाँ, धारा में वृद्धि होने पर 1.125 हेनरी का स्वप्रेरकत्व प्राप्त होता है।
In simple words: A coil's self-inductance can be determined from the ratio of the induced electromotive force to the rate of current change. Here, with an increasing current, a self-inductance of 1.125 Henry is obtained.
🎯 Exam Tip: \( L = \frac{e}{(\Delta I / \Delta t)} \) सूत्र का उपयोग करें। परिमाण ज्ञात करते समय ऋणात्मक चिह्न को अनदेखा किया जा सकता है, क्योंकि यह केवल दिशा को दर्शाता है।
Question 12. किसी कुण्डली में 0.1 सेकण्ड में धारा शून्य से बढ़कर 5.0 ऐम्पियर हो जाती है, जिससे 20 वोल्ट का प्रेरित वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक ज्ञात कीजिए।
Answer:हल-
दिया है, समयान्तराल \( \Delta t = 0.1 \text{ सेकण्ड} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल, \( e = 20 \text{ वोल्ट} \)
धारा परिवर्तन, \( \Delta I = (5 - 0) = 5 \text{ ऐम्पियर} \)
सूत्र \( e = -L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \) में ऋणात्मक चिह्न दिशा का प्रतीक है। अतः इसे छोड़ने पर,
\( e = L \left( \frac{\Delta I}{\Delta t} \right) \)
\( \implies L = e \left( \frac{\Delta t}{\Delta I} \right) = 20 \times \left( \frac{0.1}{5.0} \right) \)
\( L = \frac{2}{5} = 0.4 \text{ हेनरी} \)
In simple words: कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक उसके प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा परिवर्तन की दर के अनुपात से निकाला जाता है। 20 वोल्ट प्रेरित विद्युत वाहक बल और 0.1 सेकंड में 5 ऐम्पियर धारा परिवर्तन के साथ, स्वप्रेरण गुणांक 0.4 हेनरी है।
In simple words: A coil's self-inductance is derived from the ratio of its induced electromotive force to the rate of current change. With a 20-volt induced EMF and a 5-ampere current change over 0.1 seconds, the self-inductance is 0.4 Henry.
🎯 Exam Tip: यह पिछले प्रश्नों के समान एक सीधा अनुप्रयोग है। मानों को सही ढंग से सूत्र में रखें और गणना करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. संक्षेप में बताइए कि लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त को कैसे पोषित करता है? लेन्ज का नियम लिखिए। क्या यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त का उल्लंघन करता है? विद्युत चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी लेन्ज के नियम का उल्लेख कीजिए। यह किस संरक्षण के नियम पर आधारित है? लेन्ज का नियम क्या है?
Answer: लेन्ज का नियम - किसी परिपथ में प्रेरित वि० वा० बल, अथवा प्रेरित धारा, की दिशा सदैव ऐसी होती है कि यह उस कारण का विरोध करती है जिससे कि यह उत्पन्न होती है। इसे ही 'लेन्ज का नियम' कहते हैं। लेन्ज के नियम की पुष्टि फैराडे के प्रयोगों से हो जाती है। इन प्रयोगों में चुम्बक की गति के कारण ही कुण्डली में प्रेरित धारा बहती है। जब हम चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली के पास लाते हैं तो कुण्डली में प्रेरित धारा ऐसी दिशा में प्रवाहित होती है कि कुण्डली का चुम्बक के सामने वाला तल उत्तरी ध्रुव की तरह कार्य करता है (चित्र 6.12 a)। अतः यह पास आते हुए चुम्बक को दूर हटाने का प्रयत्न करता है अर्थात् उसकी गति का विरोध करता है। इसी प्रकार, जब चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली से दूर हटाते हैं तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि कुण्डली का सामने वाला तल दक्षिणी ध्रुव की तरह कार्य करता है (चित्र 6.12 b) । अब यह चुम्बक को अपनी ओर आकर्षित करता है अर्थात् उसकी गति को पुनः विरोध करता है। ठीक इसी प्रकार, जब चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव को कुण्डली के पास ले जाते हैं अथवा दूर हटाते हैं तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि वह चुम्बक की गति का विरोध करती है (चित्र 6.12 c तथा d)। अतः स्पष्ट है कि प्रत्येक दशा में चुम्बक को गतिमान करने के लिए इस विरोधी बल के कारण कुछ यान्त्रिक कार्य करना पड़ता है। ऊर्जा-संरक्षण के नियमानुसार, ठीक यही कार्य हमें कुण्डली में वैद्युत-ऊर्जा (ऊष्मा) के रूप में प्राप्त होता है। हम चुम्बक को जितना तेज चलायेंगे हमें उतनी ही तेजी से कार्य करना होगा अर्थात् प्रेरित धारा उतनी ही प्रबल होगी । यदि कुण्डली किसी स्थान पर कटी हो (परिपथ खुला हो) तब चुम्बक को चलाने पर धारा प्रेरित नहीं होगी (यद्यपि वि० वा० बल प्रेरित होगा) तथा कोई कार्य भी नहीं होगा। उपर्युक्त प्रयोगों में यह बात उल्लेखनीय है कि यदि कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा चुम्बक की गति का विरोध न करे तो हमें बिना कोई कार्य किये ही लगातार वैद्युत-ऊर्जा प्राप्त होती रहेगी जो कि असम्भव है। अतः लेन्ज का नियम ऊर्जा-संरक्षण के लिए एक आवश्यकता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.12 में एक दण्ड चुम्बक और एक कुण्डली की आपेक्षिक गति के कारण प्रेरित धारा की दिशा को दर्शाया गया है। (a) और (c) में चुम्बक को कुण्डली के पास लाया जा रहा है, जिससे कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित धारा चुम्बक की गति का विरोध करती है। (b) और (d) में चुम्बक को कुण्डली से दूर हटाया जा रहा है, जिससे प्रेरित धारा चुम्बक की गति का पुनः विरोध करती है, अर्थात उसे आकर्षित करती है।
In simple words: लेन्ज का नियम बताता है कि किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित धारा या विद्युत वाहक बल की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, क्योंकि यदि प्रेरित धारा गति का विरोध न करे, तो बिना कार्य किए लगातार ऊर्जा उत्पन्न होती रहेगी, जो असंभव है।
🎯 Exam Tip: लेन्ज का नियम वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के मुख्य सिद्धांतों में से एक है। इसकी परिभाषा, ऊर्जा संरक्षण से इसका संबंध, और विभिन्न स्थितियों में प्रेरित धारा की दिशा का सही निर्धारण महत्वपूर्ण है।
Question 2. वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण क्या होता है? वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण के आधार पर अन्योन्य प्रेरण की परिघटना समझाइए। अन्योन्य प्रेरण का एक उदाहरण दीजिए। अन्योन्य प्रेरण गुणांक की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए। दो समतल कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
Answer: वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)- जब किसी कुण्डली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति होती है तो कुण्डली में एक वि० वा० बल उत्पन्न हो जाता है, जिसे प्रेरित विद्युत वाहक बल कहते हैं। यदि कुण्डली एक बन्द परिपथ में है तो इस प्रेरित वि० वा० बल के कारण कुण्डली में वैद्युत धारा प्रवाहित होती है, जिसे प्रेरित धारा कहते हैं। इस घटना को वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)- यदि दो कुण्डलियों को पास-पास रखकर, एक में धारा प्रवाहित करें, अथवा उसमें प्रवाहित धारा को बन्द करे, अथवा प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन करें तो दूसरी कुण्डली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण की यह घटना अन्योन्य प्रेरण कहलाती है। वह कुण्डली जिसमें धारा परिवर्तित होती है, प्राथमिक कुण्डली तथा जिसमें प्रेरित वि० वा० बल उत्पन्न होता है, द्वितीयक कुण्डली कहलाती है। अन्योन्य प्रेरण के उदाहरण ट्रांसफॉर्मर तथा प्रेरण कुण्डली हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.13 (a) में एक प्राथमिक कुण्डली P (बैटरी, कुंजी K, और धारा नियंत्रक Rh से जुड़ी) और एक द्वितीयक कुण्डली S (गैल्वेनोमीटर से जुड़ी) एक-दूसरे के पास रखी हैं। कुंजी दबाने पर, P में धारा प्रवाहित होती है, जिससे S में क्षणिक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। चित्र 6.13 (b) में कुंजी छोड़ने पर, P में धारा का प्रवाह बंद होता है, जिससे S में विपरीत दिशा में क्षणिक प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
अन्योन्य प्रेरण-गुणांक अथवा अन्योन्य प्रेरकत्व - (i) यदि प्राथमिक कुण्डली में \(i_p\) ऐम्पियर की धारा प्रवाहित होने से द्वितीयक कुण्डली में प्रत्येक फेरे से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \(\Phi_s\), हो और द्वितीयक कुण्डली में कुल \(N_s\) फेरे हों, तो द्वितीयक कुण्डली से बद्ध कुल चुम्बकीय फ्लक्स \(N_s\Phi_s\) होगा, जो प्राथमिक कुण्डली में प्रवाहित धारा \(i_p\) के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात्
\(N_s\Phi_s \propto i_p\)
\(N_s\Phi_s = M i_p\)
जहाँ M एक नियतांक है जिसे दोनों कुण्डलियो के बीच अन्योन्य प्रेरण-गुणांक अथवा अन्योन्य प्रेरकत्व कहते हैं।
\(M = \frac{N_s\Phi_s}{i_p}\)
यदि इस सूत्र में \(i_p = 1\) ऐम्पियर तो \(M = N_s\Phi_s\). अतः "दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण-गुणांक किसी एक कुण्डली में चुम्बकीय फ्लक्स ग्रन्थिताओं की संख्या के बराबर होता है, जबकि दूसरी कुण्डली में एकांक धारा प्रवाहित हो रही हो।"
यदि प्राथमिक कुण्डली में धारा के मान में परिवर्तन करने से द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि० वा० बल \(e_s\) हो, तो फैराडे के वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी द्वितीय नियमानुसार,
\(e_s = - N_s \frac{\Delta\Phi_s}{\Delta t} = - \frac{\Delta(N_s\Phi_s)}{\Delta t}\)
जहाँ, \(\Delta(N_s\Phi_s)/\Delta t\) प्राथमिक कुण्डली में धारा-परिवर्तन के कारण द्वितीयक कुण्डली में फ्लक्स-परिवर्तन की दर है।
परन्तु \(N_s\Phi_s = M i_p\)
\(e_s = - \frac{\Delta(M i_p)}{\Delta t} = - M \frac{\Delta i_p}{\Delta t}\)
\(M = - \frac{e_s}{\Delta i_p / \Delta t}\)
यदि \(\Delta i_p / \Delta t = 1\) ऐम्पियर/सेकण्ड तो \(M = e_s\) (संख्यात्मक रूप से)
अतः 'दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण-गुणांक किसी एक कुण्डली के उस प्रेरित वि० वा० बल के संख्यात्मक मान के बराबर होता है जो कि दूसरी कुण्डली में धारा-परिवर्तन की दर एकांक होने पर उत्पन्न होता है।” अन्योन्य प्रेरण-गुणांक का मात्रक हेनरी है तथा विमा [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)] है।
In simple words: वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण वह घटना है जब किसी कुण्डली या चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति से विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। अन्योन्य प्रेरण तब होता है जब एक कुण्डली में धारा बदलने से पास रखी दूसरी कुण्डली में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। अन्योन्य प्रेरण गुणांक दोनों कुंडलियों के बीच इस प्रभाव की माप है।
🎯 Exam Tip: वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण और अन्योन्य प्रेरण की परिभाषाएँ, फैराडे के नियम, लेन्ज के नियम, और अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) के सूत्र और मात्रक (हेनरी) व विमा [ML\(^2\)T\(^{-2}\)A\(^{-2}\)] पर विशेष ध्यान दें। उदाहरण और अनुप्रयोगों को याद रखना भी महत्वपूर्ण है।
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