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Detailed Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा UP Board Solutions for Class 12 Pedagogy
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Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा UP Board Solutions PDF
Detailed Answer Questions (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
Question 1. जनसंख्या शिक्षा से आप क्या समझते हैं? भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्त्व का भी उल्लेख कीजिए।
Answer: जनसंख्या शिक्षा की अवधारणा जनसंख्या शिक्षा शिक्षाशास्त्र की एक नवीन अवधारणा है। इस अवधारणा की उत्पत्ति और प्रसार का प्रमुख कारण जनसंख्या की तीव्र गति से वृद्धि है। जनसंख्या की असाधारण वृद्धि ने विश्व के सम्मुख एक अत्यन्त भीषण समस्या उत्पन्न कर दी है। जनसंख्या की वृद्धि वैयक्तिक, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक पक्ष पर अपना दूषित प्रभाव डालती है। भारत में तो जनसंख्या इतनी तीव्र गति से बढ़ी है कि हमारे प्रगति के सभी मार्ग अवरुद्ध हो गये हैं। यह शिक्षा लोगों को जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक बनाती है। कुछ समय पूर्व तक जनसंख्या शिक्षा की अवधारणा को व्यक्त करने के हेतु यौन शिक्षा, पारिवारिक जीवन शिक्षा आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता था। 1962 ई० के बाद कोलम्बिया विश्वविद्यालय के प्रो० वेलैण्ड ने जनसंख्या शिक्षा शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया। उसी समय से 'जनसंख्या शिक्षा' शब्द का प्रयोग निरन्तर होता आ रहा है। अब जनसंख्या शिक्षा को अति आवश्यक एवं उपयोगी माना जाने लगा है। इसका कारण यह है कि शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर जनसंख्या शिक्षा के समावेश को आवश्यक माना जाने लगा है।
जनसंख्या शिक्षा की परिभाषा: अभी तक 'जनसंख्या शिक्षा' का कोई भी सर्वमान्य स्वीकृत अर्थ नहीं प्रस्तुत किया गया है और न ही उसकी कोई परिभाषा है। सबसे पहले इसकी व्याख्या सितम्बर, 1970 ई० में यूनेस्को की ओर से बैंकॉक में की गई थी।
In simple words: Population education helps us understand how a fast-growing population affects our lives, society, and country. It teaches us the importance of planning and managing resources for a better future.
🎯 Exam Tip: To score full marks, clearly mention the historical origin of the term 'Population Education' and highlight the contribution of Prof. Wayland in 1962.
जनसंख्या शिक्षा संगोष्ठी
आयोजित की जाने वाली ‘जनसंख्या शिक्षा संगोष्ठी’ में की गयी। उसमें कहा गया-“जनसंख्या शिक्षा एक शैक्षिक कार्यक्रम है, जिसमें परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की जनसंख्या की स्थिति का अध्ययन किया जाता है। इस अध्ययन का उद्देश्य छात्रों में इस स्थिति के प्रति विवेकपूर्ण, उत्तरदायित्वपूर्ण दृष्टिकोण तथा व्यवहार का विकास करना है।”
डॉ० वी०के०आर०वी० राव ने जनसंख्या शिक्षा की परिभाषा इस प्रकार दी है-“जनसंख्या शिक्षा प्रमुख रूप से ऐसी प्रेरणा-शक्ति है जो हमारे परिवार की सीमा एवं परिवार नियोजन की आवश्यकताओं के प्रति उचित दृष्टिकोण उत्पन्न करती है और राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में सहायता प्रदान करती है। इसे यौन शिक्षा और परिवार नियोजन की जानकारी से निश्चित नहीं किया जाना चाहिए।” डॉ० राव का विचार है कि शिक्षा का सम्बन्ध मानवीय स्थितियों के विकास से भी है, क्योंकि सीमित परिवार अथवा परिवार की संख्या उसकी प्रगति अथवा सुधार के मार्ग को निश्चित करती है।
वीडरमैन के अनुसार, “जनसंख्या शिक्षा एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा छात्रों को जनसंख्या तत्त्व की प्रवृत्ति और उसकी व्याख्या, जनसंख्या की विशेषताओं, जनसंख्या में परिवर्तनों के कारणों, उसके परिणामों और इन परिवर्तनों से परिवार, समाज, देश एवं विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराया जाता है।”
डॉ० चन्द्रशेखर का मत है, “जनसंख्या शिक्षा न तो यौन-शिक्षा है और न परिवार नियोजन की शिक्षा। जनसंख्या शिक्षा जनसंख्या वृद्धि, इसके वितरण एवं जीवन-स्तर से, उसके सम्बन्ध और उसके आर्थिक एवं सामाजिक परिणामों का अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र है।” इस तरह जनसंख्या शिक्षा के माध्यम से छात्रों को विश्व, राष्ट्र, राज्य, स्थानीय और परिवार स्तर पर जनसंख्या के विविध पहलुओं से अवगत कराया जाता है। साथ ही उन्हें रहन-सहन के स्तर एवं आर्थिक और सामाजिक स्तर पर जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की जाती है। इस तरह जनसंख्या शिक्षा का अन्तिम लक्ष्य व्यक्ति को इस योग्य बनाना है कि वे जनसंख्या वृद्धि और उससे उत्पन्न समस्याओं को समझ सकें। उनमें यह संचेतना उत्पन्न हो जिससे वे विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकें।
भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता और महत्त्व
2011 की जनसंख्या के अनुसार, भारत की जनसंख्या 121.02 करोड़ हो चुकी है। भारत में जनसंख्या विस्फोट के इस विकराल रूप ने जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता को अनिवार्य बना दिया है। जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्य, जो “राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसन्धान प्रशिक्षण परिषद्” ने अपनी पुस्तिका में व्यक्त किये हैं, उनसे उसका महत्त्व स्पष्ट हो जाता है, इस प्रकार है-
- 1. छात्रों को आधुनिक विश्व की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना के रूप में जनसंख्या वृद्धि की गति तथा कारणों के सम्बन्ध में ज्ञान प्रदान करना।
- 2. छात्रों को व्यक्ति, परिवार, समाज तथा विश्व के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक जीवन पर जनसंख्या वृद्धि के पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराना।
- 3. छात्रों को परिवार के आकार तथा रहन-सहन के स्तर के सम्बन्ध में बताना तथा कम आय वाले परिवारों की कठिनाई बताकर उन्हें छोटा परिवार रखने हेतु प्रेरित करना।
- 4. छात्रों को जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली निम्नलिखित समस्याओं की जानकारी प्रदान करके उनमें जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण रखने के दृष्टिकोण का विकास करना-
- (i) रोगों तथा दुर्भिक्षों का फैलना
- (ii) अपराधों एवं सामाजिक संघर्षों का बढ़ना
- (iii) जन्म-दर एवं मृत्यु-दर में असन्तुलन
- (iv) देश की आवश्यकता तथा सुरक्षा में बाधा उत्पन्न होना
- (v) भोजन, वस्त्र, मकान, रोजगार, शिक्षण संस्थाओं आदि का अभाव होना
जनसंख्या शिक्षा के उपर्युक्त उद्देश्यों को एक राष्ट्रीय सेमिनार में इस प्रकार स्पष्ट किया गया-“जनसंख्या शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को यह समझने की योग्यता प्रदान करना होना चाहिए कि परिवार के आकार को नियन्त्रित किया जा सकता है, जनसंख्या का सीमा निर्धारण राष्ट्र में उत्तम जीवन को सुविधाजनक बना सकता है और परिवार का छोटा आकार प्रत्येक...”
जनसंख्या शिक्षा: आवश्यकता और महत्त्व
परिवार के सदस्य के जीवन-स्तर के उन्नयन में अतिशय योगदान दे सकता है।' यहाँ हम भारत में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता और महत्त्व की विवेचना करेंगे। भारत एक प्रगतिशील देश है जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमने विभिन्न क्षेत्रों में काफी प्रगति की है परन्तु जनसंख्या वृद्धि के फलस्वरूप हमारी प्रगति का सम्पूर्ण लाभ राष्ट्र को नहीं प्राप्त हो सका है। यद्यपि खाद्यान्न के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर हो चुके हैं परन्तु अन्य क्षेत्रों में हम काफी पिछड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में जनसंख्या पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है।
जनसंख्या शिक्षा द्वारा छात्र-छात्राओं में इस विचार का समावेश करके कि “छोटा परिवार सुखी परिवार” हम भावी नागरिकों को परिवार नियोजन के हेतु प्रेरित कर सकेंगे। यदि पाठ्यक्रम में जीवन और विज्ञान के अध्ययन को आवश्यक माना जाता है तो मानव जनसंख्या के अध्ययन को भी आवश्यक मानकर उसे पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाना चाहिए। भारत में अनेक सामाजिक कुरीतियाँ व्याप्त हैं। संसार के उन्नत देशों की अपेक्षा भारत में विवाह की आयु बहुत कम है। इस कारण युवक और युवतियों को विवाह से पूर्व ही जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली समस्याओं आदि की जानकारी प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। जब युवक और युवतियां जनसंख्या शिक्षा के द्वारा पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कर लेंगे तो जनसंख्या पर नियंत्रण रखना आसान हो जाएगा। यह कहा जाता है कि किसी देश के स्वस्थ नागरिक ही देश के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।
आज संसार के सभी देश अपने नागरिकों के कल्याण, स्वास्थ्य और पूर्ण विकास के हेतु प्रयत्नशील हैं। भारत भी इस क्षेत्र में प्रयास तो कर रहा है परन्तु हमें सफलता तब तक नहीं प्राप्त हो सकती जब तक यहाँ के लोग जनसंख्या शिक्षा द्वारा जनसंख्या वृद्धि के कुप्रभावों से परिचित न हो जाएँ और जनसंख्या वृद्धि को रोकने के हेतु युद्ध-स्तर पर कार्यवाही की जाए। जनसंख्या की वृद्धि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधक है। जनसंख्या वृद्धि के कारण ही भारतीय नागरिकों के रहन-सहन का स्तर ऊँचा नहीं उठ पा रहा है। जनसंख्या शिक्षा द्वारा छात्र-छात्राओं को इससे अवगत कराना आवश्यक हो गया है। जनसंख्या शिक्षा के अंतर्गत केवल परिवार नियोजन आदि के विषय में ही नहीं बतलाया जाता है बल्कि इसके अंतर्गत छात्रों को उन सभी बातों से अवगत कराया जाता है जो जनसंख्या से संबंधित हैं। इनकी जानकारी प्राप्त करके छात्र-छात्राएँ कालांतर में अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह भली-भाँति कर सकते हैं।
डॉ. लल्ला और डॉ. मूर्ति ने ठीक ही लिखा है-“कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति आधुनिक समय के सन्दर्भ में जनसंख्या शिक्षा के महत्त्व और आवश्यकता की उपेक्षा नहीं कर सकता।” भारत में जनसंख्या शिक्षा की विशेष आवश्यकता है। विकासशील भारत के पास सीमित संसाधन हैं और सीमित संसाधनों से विशाल जनसंख्या का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन है, फलस्वरूप जनसंख्या नियंत्रण की विशेष आवश्यकता है। भारत में जनसंख्या शिक्षा परिवार को सीमित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है, साथ ही जीवन की गुणवत्ता को बनाये रखने, जन्मदर और मृत्युदर को संतुलित रखने, परिवार को स्वस्थ-सुखी बनाने, माताओं को उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने, बच्चों को कुपोषण से बचाने, निरक्षरता का उन्मूलन करने, बेरोजगारी की समस्या के समाधान, पर्यावरण प्रदूषण से बचने और देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए जनसंख्या शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उत्पादन एवं उपभोक्ता के मध्य संतुलन स्थापित करने के लिए भी जनसंख्या शिक्षा की विशेष आवश्यकता है। इस शिक्षा के प्रति लोगों में संचेतना जाग्रत करना अत्यंत आवश्यक है।
Question 2. भारत में जनसंख्या शिक्षा के कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को 1 अप्रैल, 1980 से प्रारम्भ किया गया। शिक्षा की औपचारिक और अनौपचारिक पद्धतियों के साथ जनसंख्या शिक्षा को जोड़ा गया जिससे कि विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी में जनसंख्या के प्रति एक स्वस्थ दृष्टिकोण का विकास हो सके। इस कार्यक्रम को सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के संचालन हेतु केन्द्र सरकार ने एक उच्च अधिकार प्राप्त संचालन समिति का गठन किया है। देश की विभिन्न शिक्षण-संस्थानों में जनसंख्या शिक्षा के प्रसार का दायित्व राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद् के सुपुर्द किया गया। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम के अंतर्गत समय-समय पर विभिन्न कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाता है ताकि शिक्षण पद्धतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। विद्यालय स्तर पर यह एक अलग विषय के रूप में नहीं बल्कि विभिन्न विषयों के साथ सम्मिलित करके पढ़ाया जाता है। इस समय तक लगभग 16 लाख शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है और श्रव्य-दृश्य साधनों के रूप में हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में स्लाइडों को तैयार किया गया है, जिन्हें सभी राज्यों में वितरित किया गया है।
In simple words: भारत में जनसंख्या नियंत्रण और जागरूकता के लिए 1980 में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत स्कूलों में बच्चों को और शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा के बारे में सिखाया जाता है ताकि वे छोटे परिवार के महत्व को समझ सकें।
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय कार्यक्रम की शुरुआत की तिथि (1 अप्रैल, 1980) और इसे लागू करने वाली मुख्य संस्था (NCERT) का नाम अवश्य लिखें। इससे आपको पूरे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों के हेतु जनसंख्या शिक्षा नामक पुस्तक भी प्रकाशित की गयी है जिसमें बी.एड. के सेवा-पूर्व शिक्षक प्रशिक्षण के हेतु पाठ्यचर्या सम्मिलित की गयी है। ‘यूनेपा’ (UNEPA) के सहयोग से भारत ने “मेरे बच्चे, मेरा भविष्य” नामक श्रव्य-दृश्य कार्यक्रम तैयार किया है। वर्तमान समय में 800 लाख छात्रों को जनसंख्या शिक्षा की जानकारी प्रदान की जा रही है। जनसंख्या शिक्षा पर राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर लगभग 400 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। ‘राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद्’ ने स्कूली पाठ्यचर्या में जनसंख्या शिक्षा के हेतु ‘प्लग प्वाइंट्स’ नामक दस्तावेज का प्रकाशन किया है जिसके आधार पर राज्यों और संघीय क्षेत्रों में पाठ्यचर्या निर्मित की गयी है।
साथ ही जनसंख्या शिक्षा से सम्बन्धित प्रदर्शनी, पोस्टर, निबन्ध लेखन प्रतियोगिता, कार्यशाला और सेमिनारों आदि का आयोजन भी किया जाता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग देश के कई विश्वविद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा केन्द्रों और कॉलेजों की स्थापना कर रहा है। विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त जनसंख्या शिक्षा सामग्री की एक निर्देशिका भी तैयार की गयी है जिसे जनसंख्या शिक्षा संस्थानों में वितरित किया गया है। जनसंख्या शिक्षा संस्थान कॉलेजों के नवयुवकों एवं समुदाय के लोगों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। स्कूली शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, उच्च शिक्षा, दस्तकारों एवं नागरिकों के हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को भी जोड़ दिया गया है। अनौपचारिक शिक्षा केन्द्रों में भी जनसंख्या शिक्षा को जोड़ा गया है। जनसंख्या शिक्षा पर ‘राष्ट्रीय स्रोत’ नामक पुस्तिका का प्रकाशन किया गया है जिसमें प्रारम्भिक शिक्षा के शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु जनसंख्या शिक्षा पाठ्यचर्या सम्मिलित की गयी है।
अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुम्बई से जनसंख्या शिक्षा की मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त करके आठवीं तथा नवीं पंचवर्षीय योजना में जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम और अधिक तेज करने का संकल्प रखा गया और 1986 ई. की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप जनसंख्या शिक्षा के प्रशिक्षण को ग्रहण करने के हेतु जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान, अध्यापक शिक्षा कॉलेज और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् के साथ सक्रिय सहयोग स्थापित किया गया। प्रशिक्षण के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रचार माध्यमों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कुछ राज्यों में प्रौढ़ शिक्षा के साथ जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को जोड़ा गया है। जनसंख्या शिक्षा में लगे राज्य संसाधन केन्द्रों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है और प्रशिक्षणार्थियों को स्वास्थ्य, परिवार, कल्याण, रोग प्रतिरोध और जनसंख्या समस्याओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
Question 3. जनसंख्या शिक्षा की समस्याओं का उल्लेख कीजिए तथा उनके समाधान के उपायों का भी वर्णन कीजिए। अथवा जनसंख्या शिक्षा की क्या समस्याएँ हैं? जनसंख्या शिक्षा के शिक्षण के लिए सुझाव दीजिए। [2007]
Answer: जनसंख्या शिक्षा की समस्याएँ: जनसंख्या शिक्षा की समस्याएँ अत्यन्त जटिल हैं। इसका कारण यह है कि जनसंख्या शिक्षा का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक और विस्तृत है। इसके अन्तर्गत जनसंख्या की वृद्धि की गति, वातावरण एवं स्वास्थ्य और व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभाव सम्मिलित होते हैं। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। जनसंख्या शिक्षा की समस्याएँ उसके बहुमुखी प्रभावों का अध्ययन सम्मिलित होता है। इन तथ्यों को टालने और जनधिक्य की समस्याओं से निपटने के लिए छात्रों हेतु जनसंख्या शिक्षा एवं उनके समाधान के उपायों का उल्लेख यहाँ किया जा रहा है-
1. छात्रों हेतु जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी साहित्य की कमी: हमारे देश में विभिन्न स्तरों के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के हेतु जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी साहित्य का अभाव है। इस सम्बन्धी उपकरणों की कमी के फलस्वरूप उन्हें जनसंख्या वृद्धि के वास्तविक आँकड़े, जनसंख्या सम्बन्धी शोध तथा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के जीवन के ऊपर इस वृद्धि के दुष्प्रभावों की पूर्ण जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती है। इसी के फलस्वरूप विद्यालय स्तर पर जनसंख्या शिक्षा का प्रसार नहीं हो पा रहा है।
2. शिक्षकों में जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी ज्ञान की कमी: सभी स्तरों के विद्यालयों के शिक्षकों में जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी ज्ञान का अभाव है। प्रमुख रूप से इसके तीन कारण हैं-
(i) अभी तक जनसंख्या शिक्षा के सम्बन्ध में बहुत कम पुस्तकें लिखी गयी हैं। फलस्वरूप शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती।
In simple words: Population education faces major challenges like a lack of proper books and study materials for students, and a lack of training and resources for teachers. This makes it difficult to effectively teach children about the impacts of overpopulation.
🎯 Exam Tip: When answering questions about educational challenges, structure your response with clear headings like 'Lack of Literature' and 'Teacher Training' to make it easy for the examiner to award full marks.
2. सेवारत शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी ज्ञान प्रदान करने हेतु केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों, शिक्षा विभागों तथा विश्वविद्यालयों द्वारा कोई सुसंगठित योजना अभी पूरी तरह से संचालित नहीं की गयी है।
3. महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों के अन्तर्गत जनसंख्या शिक्षा नामक विषय को स्थान नहीं दिया गया है। इन कारणों से सेवारत तथा नव-प्रशिक्षित शिक्षकों में जनसंख्या शिक्षा के समुचित ज्ञान के होने की आशा नहीं की जा सकती है। समुचित ज्ञान न होने के फलस्वरूप वे छात्रों को जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी बातों का ज्ञान प्रदान करने में असमर्थ रहते हैं।
3. विद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी उपकरणों की कमी
भारतीय विद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी उपकरणों का नितान्त अभाव है। ऐसा कदाचित कोई भी विद्यालय नहीं है जो जनसंख्या शिक्षा से सम्बन्धित सभी उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित हो। सामान्य शिक्षा के उपकरणों को संग्रह करने हेतु जितना प्रयास किया जाता है उसका शतांश प्रयास भी जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी उपकरणों को प्राप्त करने हेतु नहीं किया जाता। सम्भवतः इसका कारण यह है कि जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी उपकरणे अत्यन्त महँगे हैं। किन्तु यदि प्रतिवर्ष थोड़ा-थोड़ा धन व्यय करके इन उपकरणों की व्यवस्था की जाए तो इनके अभाव को दूर किया जा सकता है। परन्तु वास्तविक स्थिति यह है कि इस कार्य हेतु लेशमात्र भी ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप भारतीय विद्यालयों में इनका नितान्त अभाव है और इनके अभाव में जनसंख्या शिक्षा का कार्यक्रम लागू करने में कठिनाई है।
4. जनसंख्या सम्बन्धी शोधकार्यों की कमी
भारत में जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी शोधकार्य अभी प्रारम्भकालीन है। इस कारण जनसंख्या के दुष्परिणामों को सही प्रकार से प्रसार नहीं है।
5. अशिक्षित एवं अर्द्धशिक्षित अभिभावकों द्वारा जनसंख्या शिक्षा का विरोध
भारत में बड़ी संख्या में अभिभावक अशिक्षित एवं अर्द्धशिक्षित हैं। एक अध्ययन के द्वारा यह स्पष्ट हुआ है कि ये अशिक्षित एवं अर्द्धशिक्षित अभिभावक विद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा दिये जाने के प्रबल विरोधी हैं। उनका विरोध निम्नलिखित कारणों से है-
1. वे यह मानते हैं कि जनसंख्या शिक्षा का सम्बन्ध यौन-शिक्षा से है। यदि विद्यालयों में इस शिक्षा की व्यवस्था की जाती है तो बालक-बालिकाओं के नैतिक चरित्र पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
2. उनकी यह मान्यता है कि जनसंख्या शिक्षा परिवार नियोजन को ही दूसरा रूप है, अतएव उनका विद्यालयी शिक्षा से कोई सम्बन्ध नहीं होना चाहिए।
3. उनकी यह भी धारणा है कि जनसंख्या शिक्षा का सम्बन्ध जनसंख्या विषयक तथ्यों एवं आँकड़ों से है। यह तथ्य और आँकड़े इतने कठिन हैं कि अल्प आयु में छात्र इन्हें आत्मसात नहीं कर सकेंगे।
4. उनका यह भी विचार है कि जनसंख्या शिक्षा का विचार अन्य देशों से ग्रहण किया गया है और उनसे प्रभावित होकर ही इस शिक्षा को विद्यालयों में स्थान दिया जा रहा है, और इस कारण ऐसा किया जाना पूरी तरह से अनुचित है।
समस्याओं का समाधान
हम इस तथ्य से सहमत हैं कि भारत की जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है जो भविष्य में विभिन्न प्रकार की समस्याओं की उत्पत्ति का कारण बनेगी। अतः जनसंख्या विस्फोट को रोकने के सम्बन्ध में जनसंख्या शिक्षा को एकमात्र-आशा की किरण माना जा रहा है। जनसंख्या शिक्षा के निम्नलिखित तथ्य जनसंख्या-विस्फोट का समाधान करने में सहायक सिद्ध हुए हैं-
1. पर्याप्त एवं उपयुक्त साहित्य की व्यवस्था
भारतीय विश्वविद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा के प्रसार को गति प्रदान करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपयुक्त साहित्य का निर्माण किया जाना चाहिए। इस साहित्य का निर्माण सरल एवं सुबोध भाषा वाली पुस्तकों के रूप में किया जाए जिससे कि प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को जनसंख्या शिक्षा का अध्ययन करके ज्ञान प्रदान करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। इसके साथ ही सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में जनसंख्या शिक्षा से सम्बन्धित पाठों को स्थान दिया जाना चाहिए।
2. शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी ज्ञान प्रदान करने की व्यवस्था
यदि शिक्षकों से यह आशा की जाती है कि वे छात्रों को जनसंख्या शिक्षा की शिक्षा दें तो स्वयं शिक्षकों को इस ज्ञान से सम्पन्न करने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। इस व्यवस्था में शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं ।
- 1. राज्यों अथवा शिक्षा विभागों द्वारा जनसंख्या शिक्षा के केन्द्र स्थापित किए जाने चाहिए और विद्यालयों द्वारा सेवारत अध्यापकों को इन केन्द्रों पर निश्चित अवधि तक रहने हेतु पूर्ण वेतन पर अवकाश दिया जाना चाहिए। इन केन्द्रों में अध्यापकों हेतु व्याख्यानों, विचार-गोष्ठियों एवं अध्ययन की समस्त सुविधाओं का प्रबन्ध किया जाना चाहिए।
- 2. महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रमों में जनसंख्या शिक्षा के विषय को सम्मिलित किया जाना चाहिए। यदि इन सुझावों को व्यावहारिक रूप प्रदान कर दिया जाए तो सेवारत और नव-प्रशिक्षित दोनों तरह के शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा का पर्याप्त ज्ञान प्राप्त हो जाएगा और उसके द्वारा वे अपने छात्रों को लाभान्वित कर सकेंगे।
3. उपकरणों की व्यवस्था
विद्यालय प्रबन्धकों को यह समझना चाहिए कि जितने आवश्यक सामान्य शिक्षा के उपकरण हैं उतने ही आवश्यक जनसंख्या शिक्षा के उपकरण भी हैं। उन्हें जनसंख्या शिक्षा से सम्बन्धित उपकरणों की व्यवस्था हेतु निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। इन उपकरणों में निम्नलिखित पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए-
- 1. जनसंख्या शिक्षा हेतु उपयोगी फिल्म और श्रव्य-दृश्य सामग्री।
- 2. छात्रों को अपने देश और विश्व की जनसंख्या सम्बन्धी जानकारी प्रदान करने वाले ग्राफ, चार्ट और प्रतिमान।
4. जनसंख्या सम्बन्धी शोधकार्यों की व्यवस्था
इसके लिए विद्वानों और सुशिक्षित व्यक्तियों को भी जनसंख्या वृद्धि के कुप्रभावों एवं दुष्परिणामों से भली-भाँति अवगत कराने हेतु जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी शोधकार्य की उत्तम व्यवस्था की जानी चाहिए। यह कार्य मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रश्नों से सम्बन्धित होने चाहिए-
- 1. विद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा के हेतु अनुकूल वातावरण का निर्माण किस तरह किया जा सकता है?
- 2. शिक्षकों को जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी ज्ञान से पूरी तरह से सम्पन्न बनाने हेतु किस तरह के कार्यक्रम उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं?
- 3. विद्यालयों के प्रबन्ध समितियों तथा शिक्षा विभागों द्वारा जनसंख्या शिक्षा के प्रसार में कितना और किस तरह का योगदान दिया जा सकता है?
- 4. साधारण जनता में जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता तथा उपयोगिता के सम्बन्ध में किन उपायों द्वारा अधिकाधिक विश्वास उत्पन्न किया जा सकता है?
5. अभिभावकों के विरोध को समाप्त करना
विद्यालयों में जनसंख्या शिक्षा के कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु, उसके प्रति अशिक्षित और अर्द्धशिक्षित अभिभावकों का विरोध समाप्त किया जाना चाहिए। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दो उपाय किये जा सकते हैं-
- 1. पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, फिल्म प्रदर्शनी और विद्वानों के व्याख्यानों द्वारा जनसंख्या शिक्षा की धारणा का स्पष्टीकरण।
- 2. विद्यालयों द्वारा जनसंख्या शिक्षा के दिवसों, समारोहों आदि का आयोजन किया जाये और उनमें अभिभावकों को आमन्त्रित करके उन्हें जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी बातों से अवगत कराया जाए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) क्या है? भारत में जनसंख्या विस्फोट के कारणों का उल्लेख कीजिए। या देश में जनसंख्या विस्फोट हो रहा है। इसको रोकने में जनसंख्या शिक्षा किस प्रकार सहायक है? [2016] या भारत में जनसंख्या वृद्धि के क्या कारण हैं? [2012, 14] या भारत में जनसंख्या विस्फोट के क्या कारण हैं? [2012]
Answer: जनसंख्या विस्फोट से आशय है-जनसंख्या की वृद्धि की दर का अत्यधिक होना। हमारे देश में होने वाली जनसंख्या की वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट की श्रेणी में ही रखा जाएगा। इसका प्रमाण यह है कि सन् 1951 ई० की जनगणना में भारत की जनसंख्या 36.1 करोड़ थी जो 2011 ई० में बढ़कर 121.02 करोड़ हो चुकी है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि की दर बहुत अधिक है। भारत में जनसंख्या विस्फोट के लिए विभिन्न कारक जिम्मेदार हैं। सर्वप्रथम हमारे देश में जन्म-दर बहुत अधिक है। इसका एक मुख्य कारण अशिक्षा तथा यौन-शिक्षा की जानकारी का अभाव है। हमारे देश में छोटी आयु में विवाह का प्रचलन है। इससे स्त्रियों का प्रजनन काल काफी लम्बा होता है। अतः अधिक सन्ताने उत्पन्न होने की गुंजाइश रहती है। इसके साथ ही गर्म जलवायु भी प्रजनन शक्ति की वृद्धि में सहायक होती है। हमारे समाज में बेटे को जन्म देना प्रायः अनिवार्य माना जाता है। अतः बेटे की चाह में प्राय: तीन-चार अथवा इससे भी अधिक बेटियों को जन्म दे दिया जाता है। यही नहीं कुछ धार्मिक अन्धविश्वासों के अनुसार परिवार-नियोजन अर्थात् सन्तानोत्पत्ति को रोकना अनुचित तथा पाप माना जाता है। इस कारण भी जन्म-दर में वृद्धि होती है। इन विभिन्न कारणों से हमारे देश में आज भी जन्म-दर काफी अधिक है तथा यह कारक जनसंख्या विस्फोट का प्रबल कारक है। इसके अतिरिक्त आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में हुई चमत्कारिक खोजों एवं उपचार के उपायों के कारण बाल-मृत्यु दर बहुत घट गयी है तथा व्यक्ति की औसत आयु में भी वृद्धि हुई है। इस कारक ने भी जनसंख्या विस्फोट में योगदान प्रदान किया है। देश में जनसंख्या की वृद्धि की अधिक दर को नियन्त्रित करने का एक प्रभावी उपाय है-जनसंख्या शिक्षा। जनसंख्या शिक्षा की समुचित व्यवस्था से निश्चित रूप से जनसंख्या वृद्धि की दर को घटाया जा सकता है। यह शिक्षा लोगों को छोटे परिवार के लाभों के प्रति जागरूक बनाती है।
In simple words: Population explosion means a very fast increase in the number of people living in a country. In India, this is happening because of early marriages, lack of education, and better medical facilities which have reduced the death rate.
🎯 Exam Tip: उत्तर लिखते समय जनसंख्या विस्फोट की परिभाषा के साथ-साथ इसके मुख्य कारणों जैसे उच्च जन्म-दर, अशिक्षा और बाल-विवाह को अलग-अलग हेडिंग्स में स्पष्ट करें।
Question 2. ‘नयी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000’ का सामान्य परिचय दीजिए। या। भारतवर्ष की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2011, 13]
Answer: भारत की जनसंख्या में निरन्तर होने वाली वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इसे नियन्त्रित करना अनिवार्य माना जा रहा है। इस मुख्य उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘नयी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-2000’ निर्धारित की गयी। ‘नयी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-2000’ की घोषणा फरवरी 2000 में भारत के प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा की गयी। इस जनसंख्या नीति में सर्वप्रथम कहा गया था कि सन् 2010 ई० तक जनसंख्या वृद्धि की दर को 2.1 प्रतिशत पर लाया जाएगा तथा सन् 2045 ई० में जनसंख्या वृद्धि रुक जाएगी अर्थात् जनसंख्या स्थिर हो जाएगी। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर सम्भव उपाय किये जाएँगे। इस नीति को कार्यान्वित करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न निर्णय लिये गये हैं, जैसे कि -
1. इस जनसंख्या नीति के अन्तर्गत पंचायतों/जिला परिषदों को जनसंख्या नियन्त्रण के लिए प्रेरित करने के लिए पुरस्कार प्रदान किये जाएँगे।
2. इस नीति के अन्तर्गत ‘बाल-विवाह निरोधक अधिनियम’ तथा ‘प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण तकनीकी निरोधक अधिनियम’ को कठोरता से लागू करने की घोषणा की गयी है।
3. समाज के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा-योजना को लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त बालिका शिशुओं के पालन-पोषण के लिए उसके माता-पिता को Rs. 1500 की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है।
नयी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति’ सराहनीय है परन्तु कुछ विद्वानों ने इसकी व्यावहारिकता पर प्रश्न-चिह्न लगाया है। उनका कहना है कि 2010 तक जनसंख्या वृद्धि की दर को 2.1 प्रतिशत तक लाना सम्भव नहीं है। इसके अतिरिक्त इस नीति में सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है।
In simple words: The National Population Policy 2000 was made to control India's population growth. It aimed to stabilize the population by 2045 using steps like stopping child marriage, giving health insurance to the poor, and rewarding panchayats for population control.
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में नीति के मुख्य लक्ष्यों (जैसे वर्ष 2010 और 2045 के लक्ष्य) और सरकार द्वारा उठाए गए तीन प्रमुख कदमों को बिंदुवार लिखना न भूलें।
Question 3. राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् के अनुसार जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। या जनसंख्या शिक्षा के चार उद्देश्य बताइए। [2010]
Answer: ‘राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् ने Population in Classroom नामक एक पुस्तिका प्रकाशित की थी। इसमें जनसंख्या शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है-
यह पुस्तिका शिक्षकों को कक्षा में जनसंख्या के मुद्दों को प्रभावी ढंग से समझाने में मदद करती है।
1. छात्रों को आधुनिक विश्व की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना के रूप में जनसंख्या वृद्धि की गति तथा कारणों के सम्बन्ध में ज्ञान प्रदान करना।
2. छात्रों को व्यक्ति, परिवार, समाज तथा विश्व के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक जीवन पर जनसंख्या वृद्धि के पड़ने वाले प्रभावों से अवगत कराना।
3. छात्रों को परिवार के आकार तथा रहन-सहन के स्तर के सम्बन्ध में बताना तथा कम आय वाले परिवारों की कठिनाई बताकर उन्हें छोटा परिवार रखने हेतु प्रेरित करना।
4. छात्रों को जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न होने वाली निम्नलिखित समस्याओं की जानकारी प्रदान करके उनमें जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण रखने के दृष्टिकोण का विकास करना-
(क) रोगों तथा दुर्भिक्षों का फैलना
(ख) अपराधों एवं सामाजिक संघर्षों का बढ़ना
(ग) जन्म-दर एवं मृत्यु-दर में असन्तुलन
(घ) देश की आवश्यकता और सुरक्षा में बाधा उत्पन्न होना तथा
(ङ) भोजन, वस्त्र, मकान, रोजगार तथा शिक्षण संस्थाओं आदि का अभाव होना।
In simple words: The main goal of population education is to make students aware of how rapid population growth affects our families, society, and resources, and why it is important to control it.
🎯 Exam Tip: To score full marks, list all four main objectives clearly and mention the name of the booklet 'Population in Classroom' published by NCERT.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जनसंख्या शिक्षा में अध्यापक की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Answer: निःसन्देह जनसंख्या शिक्षा अत्यधिक आवश्यक एवं महत्त्वपूर्ण है। शिक्षा के इस प्रकार में शिक्षक द्वारा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी जाती है। शिक्षक को जनसंख्या शिक्षा की समुचित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। उसका दायित्व है कि वह अपने छात्र-छात्राओं तथा समाज के व्यक्तियों को जनसंख्या सम्बन्धी विस्तृत जानकारी प्रदान करे। शिक्षक का दायित्व है कि वह छात्रों को जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करे तथा जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने की आवश्यकता तथा उपायों की भी जानकारी प्रदान करे। यहाँ यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि शिक्षा के पाठ्यक्रम में जनसंख्या शिक्षा को अवश्य सम्मिलित किया जाना चाहिए। इस स्थिति में शिक्षक अपने दायित्व को भली-भाँति निभा सकेंगे। एक जागरूक शिक्षक ही समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रख सकता है।
In simple words: Teachers play a vital role in population education by teaching students and society about the problems of overpopulation and how to control it.
🎯 Exam Tip: Highlight the key responsibilities of a teacher, such as spreading awareness and explaining control measures, to make your answer impactful.
Question 2. जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के दो कुप्रभावों का उल्लेख कीजिए। [2009]
Answer: जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट के रूप में जाना जाता है। यह एक गम्भीर समस्या है तथा इसका बुरा प्रभाव जनजीवन के प्रायः सभी पक्षों पर पड़ता है। सर्वप्रथम यह स्पष्ट है कि इस स्थिति में देश के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं की अत्यधिक कमी महसूस होने लगती है। इसके अतिरिक्त दूसरा प्रतिकूल प्रभाव यह होता है कि देश में बेरोजगारी तथा निर्धनता की समस्याएँ प्रबल हो जाती हैं। इससे देश के आर्थिक विकास की गति भी काफी धीमी हो जाती है।
In simple words: Rapid population growth leads to a shortage of basic facilities like food and water, and increases problems like unemployment and poverty.
🎯 Exam Tip: Clearly state the two main negative impacts—shortage of basic amenities and rise in unemployment/poverty—using bullet points or distinct sentences.
Question 3. जनसंख्या शिक्षा के क्षेत्र का उल्लेख कीजिए।
Answer: जनसंख्या शिक्षा में निम्नलिखित तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है-
यह क्षेत्र छात्रों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक होता है।
1. जनसंख्या की स्थिति के प्रति छात्रों में जागृति तथा उचित दृष्टिकोण विकसित करना।
2. जनाधिक्य का जीवन की गुणवत्ता पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है? इसके सम्बन्ध में बताना।
3. जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक समस्याओं के सम्बन्ध में संचेतना का विकास करना।
4. जनसंख्या-वृद्धि के कारणों एवं नियन्त्रण के उपायों की जानकारी प्रदान करना।
In simple words: The scope of population education includes teaching students about population status, its bad effects on quality of life, social-economic problems, and ways to control it.
🎯 Exam Tip: Remember to list all four areas of population education to ensure you get full marks for this descriptive question.
5. जनसंख्या-वृद्धि का पर्यावरण, रोजगार, आवास, खाद्यान्न और शिक्षा पर क्या कुप्रभाव पड़ता है? इस सम्बन्ध में छात्रों को जानकारी प्रदान करना।
निश्चित उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जनसंख्या शिक्षा क्या है? [2009]
Answer: “जनसंख्या शिक्षा एक शैक्षिक कार्यक्रम है, जिसमें परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की जनसंख्या की स्थिति का अध्ययन किया जाता है। इस अध्ययन का उद्देश्य छात्रों में इस स्थिति के प्रति विवेकपूर्ण एवं उत्तरदायित्वपूर्ण दृष्टिकोण तथा व्यवहार का विकास करना है।” यह परिभाषा यूनेस्को द्वारा आयोजित जनसंख्या शिक्षा संगोष्ठी में दी गई थी।
In simple words: जनसंख्या शिक्षा हमें यह सिखाती है कि बढ़ती आबादी का हमारे परिवार, समाज और देश पर क्या असर पड़ता है ताकि हम जिम्मेदारी से निर्णय ले सकें।
🎯 Exam Tip: यूनेस्को (UNESCO) की परिभाषा को ज्यों का त्यों (verbatim) लिखने से परीक्षा में पूरे अंक मिलते हैं।
Question 2. भारत जैसे विकासशील देशों की प्रमुख समस्या क्या है?
Answer: भारत जैसे विकासशील देशों की प्रमुख समस्या जनसंख्या की वृद्धि की दर का अधिक होना है। तीव्र गति से बढ़ती आबादी के कारण देश के सीमित संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।
In simple words: भारत जैसे देशों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहाँ लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिससे संसाधन कम पड़ रहे हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तर में 'जनसंख्या वृद्धि की तीव्र दर' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
Question 3. जनसंख्या-वृद्धि सम्बन्धी समस्या के समाधान के लिए किया जाने वाला शैक्षिक उपाय क्या है?
Answer: जनसंख्या-वृद्धि सम्बन्धी समस्या के समाधान के लिए किया जाने वाला शैक्षिक उपाय जनसंख्या शिक्षा की व्यवस्था करना है। इसके माध्यम से भावी पीढ़ी को जागरूक बनाया जा सकता है।
In simple words: आबादी बढ़ने की समस्या को रोकने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जनसंख्या शिक्षा पढ़ाना सबसे अच्छा तरीका है।
🎯 Exam Tip: शैक्षिक उपाय पूछे जाने पर 'जनसंख्या शिक्षा' शब्द को मुख्य रूप से रेखांकित करें।
Question 4. भारत में जनसंख्या सम्बन्धी स्थिति क्या है?
Answer: भारत में जनसंख्या सम्बन्धी स्थिति जनसंख्या-विस्फोट की है। यहाँ जनसंख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यह देश के विकास में बाधा बन रही है।
In simple words: भारत में आबादी बहुत ही तेजी से बढ़ रही है, जिसे 'जनसंख्या विस्फोट' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: 'जनसंख्या-विस्फोट' (Population Explosion) शब्द का प्रयोग इस उत्तर की कुंजी है।
Question 5. जनसंख्या विस्फोट से क्या आशय है? या जनसंख्या विस्फोट क्या है? [2007, 11]
Answer: जनसंख्या विस्फोट का आशय जनसंख्या की वृद्धि की दर का अत्यधिक होना है। जब किसी देश की जनसंख्या उसकी वहन क्षमता से अधिक तेजी से बढ़ती है, तो उसे जनसंख्या विस्फोट कहते हैं।
In simple words: जब किसी जगह पर लोगों की संख्या बहुत ही कम समय में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो उसे जनसंख्या विस्फोट कहते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में तीव्र वृद्धि दर और उसके प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
Question 6. किस बच्चे को देश का एक अरबवाँ बच्चा घोषित किया गया?
Answer: 11 मई, 2000 को नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में जन्म लेने वाली आस्था नामक बच्ची को देश को एक अरबवाँ बच्चा घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक घटना ने भारत की विशाल जनसंख्या की ओर पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया।
In simple words: 11 मई 2000 को दिल्ली में जन्मी 'आस्था' नाम की लड़की को भारत का 100 करोड़वाँ (एक अरबवाँ) बच्चा माना गया।
🎯 Exam Tip: तारीख (11 मई, 2000), अस्पताल का नाम (सफदरजंग) और बच्ची का नाम (आस्था) तीनों लिखना अनिवार्य है।
Question 7. भारत की नयी जनसंख्या नीति कब घोषित की गयी?
Answer: भारत की नयी जनसंख्या नीति 15 फरवरी, 2000 को प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा घोषित की गयी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या को स्थिर करना और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करना था।
In simple words: भारत सरकार ने देश की आबादी को नियंत्रित करने के लिए 15 फरवरी 2000 को एक नई योजना बनाई जिसे नई जनसंख्या नीति कहते हैं।
🎯 Exam Tip: तिथि '15 फरवरी, 2000' और प्रधानमंत्री 'अटल बिहारी वाजपेयी' का नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 8. जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने का शैक्षिक उपाय क्या है?
Answer: जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने का शैक्षिक उपाय जनसंख्या शिक्षा को लागू करना है। शिक्षा के माध्यम से लोगों में छोटे परिवार के महत्व के प्रति जागरूकता पैदा की जा सकती है।
In simple words: लोगों को पढ़ाई-लिखाई के जरिए जनसंख्या नियंत्रण के फायदों के बारे में समझाना ही सबसे बड़ा शैक्षिक उपाय है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए 'जनसंख्या शिक्षा को लागू करना' मुख्य बिंदु के रूप में लिखें।
Question 9. जनसंख्या शिक्षा की अवधारणा को सर्वप्रथम किसने प्रस्तुत किया था?
Answer: जनसंख्या शिक्षा की अवधारणा को सर्वप्रथम प्रो० स्लोन आर० वेलैण्ड ने प्रस्तुत किया था। उन्होंने इस विषय को अकादमिक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: प्रो० स्लोन आर० वेलैण्ड वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दुनिया को बताया कि जनसंख्या शिक्षा जैसी कोई पढ़ाई भी होनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: विचारक का नाम 'प्रो० स्लोन आर० वेलैण्ड' बिल्कुल सही वर्तनी (spelling) के साथ लिखें।
Question 10. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी थी? [2014]
Answer: 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ से अधिक थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।
In simple words: साल 2011 में जब भारत के लोगों की गिनती हुई, तब हमारी कुल आबादी 121 करोड़ से ज्यादा पाई गई।
🎯 Exam Tip: '121 करोड़ से अधिक' लिखना पर्याप्त है, सटीक आंकड़ा याद रखने की आवश्यकता नहीं है।
Question 11. ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को जनसंख्या शिक्षा प्रदान करने का प्रमुख साधन क्या है?
Answer: ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को जनसंख्या शिक्षा प्रदान करने का प्रमुख साधन दूरदर्शन तथा जनसंचार के अन्य माध्यम हैं। इन माध्यमों से संदेश आसानी से ग्रामीण आबादी तक पहुँच जाता है।
In simple words: गाँवों में लोगों को जागरूक करने के लिए टीवी (दूरदर्शन) और रेडियो सबसे अच्छे और आसान साधन हैं।
🎯 Exam Tip: 'दूरदर्शन' और 'जनसंचार के माध्यम' शब्दों का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
Question 12. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) द्वारा प्रकाशित जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी पुस्तक का क्या नाम है?
Answer: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) द्वारा प्रकाशित जनसंख्या शिक्षा सम्बन्धी पुस्तक का नाम Population in Classroom है। यह पुस्तक शिक्षकों को इस विषय को पढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
In simple words: NCERT ने जनसंख्या शिक्षा के लिए जो किताब छापी है, उसका नाम 'Population in Classroom' है।
🎯 Exam Tip: पुस्तक का नाम अंग्रेजी में 'Population in Classroom' ही लिखें ताकि कोई अंक न कटे।
Question 13. निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य-
(i) विश्व के अधिकांश विकासशील देशों में जनसंख्या की अधिकता की गम्भीर समस्या है।
(ii) जनसंख्या शिक्षा के अन्तर्गत जनसंख्या सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।
Answer:
(i) सत्य
(ii) सत्य
ये दोनों ही कथन जनसंख्या शिक्षा के मूल सिद्धांतों और वैश्विक जनसांख्यिकी की वास्तविकताओं को सही रूप में दर्शाते हैं।
In simple words: दोनों बातें बिल्कुल सच हैं; विकासशील देशों में आबादी की बड़ी समस्या है और जनसंख्या शिक्षा में हम इसी के बारे में पढ़ते हैं।
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य वाले प्रश्नों में प्रत्येक भाग का उत्तर स्पष्ट रूप से (i) और (ii) लिखकर दें।
Question 3. स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले युवक-युवतियों के लिए जनसंख्या शिक्षा अनावश्यक एवं व्यर्थ है - सत्य या असत्य?
Answer: असत्य
In simple words: स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए जनसंख्या शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है ताकि वे भविष्य के लिए जागरूक नागरिक बन सकें।
🎯 Exam Tip: परीक्षा में सत्य/असत्य लिखते समय वाक्य को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि 'अनावश्यक' जैसे शब्द वाक्य का अर्थ बदल देते हैं।
Question 4. ‘राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के अध्यक्ष के०सी० पंत हैं - सत्य या असत्य?
Answer: असत्य
In simple words: राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, न कि के०सी० पंत।
🎯 Exam Tip: आयोगों के अध्यक्षों के नाम और उनकी संरचना से जुड़े तथ्यों को अच्छी तरह याद रखें।
Question 5. नयी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के अनुसार सन् 2045 तक जनसंख्या में स्थिरीकरण आ जाएगा - सत्य या असत्य?
Answer: सत्य
In simple words: नई नीति का लक्ष्य है कि साल 2045 तक हमारे देश की जनसंख्या स्थिर यानी संतुलित हो जाए।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण नीतियों के लक्ष्यों और उनके वर्षों (जैसे 2045) को विशेष रूप से याद रखें।
बहुविकल्पीय प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों में दिये गये विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव कीजिए-
Question 1. “जनसंख्या शिक्षा परिवार के आकार के सम्बन्ध में वैज्ञानिक मनोवृत्ति विकसित करने के लिए प्रेरणाशक्ति प्रदान करती है।” यह कथन किसका है?
(a) डॉ० चन्द्रशेखर
(b) डॉ० माल्थस
(c) डॉ० वी०के०आर०वी०राव
(d) डॉ० अमर्त्यसेन
Answer: (c) डॉ० वी०के०आर०वी०राव
In simple words: डॉ० वी०के०आर०वी०राव का मानना था कि जनसंख्या शिक्षा लोगों को वैज्ञानिक सोच देकर छोटे परिवार के महत्व को समझने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण परिभाषाओं और कथनों के साथ उनके विचारकों के नाम अवश्य याद रखें, यह सीधे अंक दिलाने वाले प्रश्न होते हैं।
Question 2. जनसंख्या शिक्षा की आवश्यकता किस कारण से है?
(a) जनसंख्या की वृद्धि
(b) जनसंख्या-नियन्त्रण
(c) परिवार नियोजन
(d) परिवार कल्याण
Answer: (b) जनसंख्या-नियन्त्रण
In simple words: जनसंख्या शिक्षा हमें यह सिखाती है कि बढ़ती आबादी को कैसे नियंत्रित किया जाए ताकि देश का विकास सही से हो सके।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या शिक्षा का मुख्य व्यावहारिक उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण और जागरूकता फैलाना है।
Question 3. जनसंख्या शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य है
(a) शिशु कल्याण
(b) मातृ कल्याण
(c) सीमित परिवार
(d) सुखी जीवन
Answer: (c) सीमित परिवार
In simple words: इस शिक्षा का मुख्य उद्देश्य लोगों को छोटे और सीमित परिवार के फायदों के बारे में जागरूक करना है।
🎯 Exam Tip: सीमित परिवार ही सुखी जीवन का आधार है, इसलिए जनसंख्या शिक्षा का प्राथमिक लक्ष्य सीमित परिवार की अवधारणा को बढ़ावा देना है।
Question 4. जनसंख्या शिक्षा का आरम्भ होना चाहिए
(a) माध्यमिक शिक्षा स्तर पर
(b) प्राथमिक शिक्षा स्तर पर
(c) व्यावसायिक शिक्षा स्तर पर
(d) उच्च शिक्षा स्तर पर
Answer: (b) प्राथमिक शिक्षा स्तर पर
In simple words: बच्चों को बचपन से ही यानी प्राथमिक स्कूल से ही जनसंख्या और परिवार के महत्व के बारे में सिखाना शुरू कर देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: अच्छी आदतों और समझ की नींव प्राथमिक स्तर पर ही पड़ती है, इसलिए जनसंख्या शिक्षा की शुरुआत प्राथमिक स्तर से ही होनी चाहिए।
Question 5. भारतीय जनसंख्या की प्रमुख विशेषता है
(a) जन्म-दर में वृद्धि
(b) मृत्यु-दर में वृद्धि
(c) महिलाओं की अधिक संख्या
(d) साक्षरता का अधिक प्रतिशत
Answer: (a) जन्म-दर में वृद्धि
In simple words: भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ने का मुख्य कारण यहाँ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या (जन्म-दर) का अधिक होना है।
🎯 Exam Tip: भारत में उच्च जन्म-दर और घटती मृत्यु-दर जनसंख्या विस्फोट के मुख्य कारण हैं।
Question 6. भारत की जनसंख्या एक अरब कब हुई?
(a) 11 मई, 2000 में
(b) 15 मई, 2000 में
(c) 31 मई, 2000 में
(d) 1 जुलाई, 2000 में
Answer: (a) 11 मई, 2000 में
In simple words: 11 मई 2000 को भारत ने आधिकारिक तौर पर एक अरब (100 करोड़) की जनसंख्या का आंकड़ा पार किया था।
🎯 Exam Tip: भारत की जनसंख्या के इस ऐतिहासिक मील के पत्थर (एक अरब) की तिथि को अच्छी तरह याद रखें।
Question 7. जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में स्थान है
(a) प्रथम
(b) द्वितीय
(c) तृतीय
(d) चतुर्थ
Answer: (b) द्वितीय
In simple words: दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी के मामले में भारत दूसरे स्थान पर आता है (ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार)।
🎯 Exam Tip: परीक्षा में दिए गए विकल्पों के अनुसार उत्तर चुनें; पारंपरिक रूप से भारत का स्थान दूसरा रहा है।
Question 8. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन कब हुआ?
(a) 15 जून, 1995 को
(b) 20 मई, 1997 को
(c) 11 मई, 2000 को
(d) 1 जुलाई, 2000 को
Answer: (c) 11 मई, 2000 को
In simple words: देश में जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सही से लागू करने के लिए 11 मई 2000 को राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के गठन की तिथि और भारत की जनसंख्या एक अरब होने की तिथि दोनों एक ही हैं (11 मई, 2000), इसे याद रखना आसान है!
Question 9. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के उपाध्यक्ष कौन हैं?
(a) यशवन्त सिन्हा
(b) डॉ० हर्षवर्धन
(c) नटवर सिंह
(d) जी० टी० नानावती
Answer: (b) डॉ० हर्षवर्धन
In simple words: दिए गए विकल्पों के अनुसार, डॉ० हर्षवर्धन को राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
🎯 Exam Tip: आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और उपाध्यक्ष योजना आयोग (अब नीति आयोग) के उपाध्यक्ष या स्वास्थ्य मंत्री होते हैं।
Question 10. विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष किस तिथि को मनाया जाता है? [2014]
(a) 4 जुलाई
(b) 11 जुलाई
(c) 11 अगस्त
(d) 10 दिसंबर
Answer: (b) 11 जुलाई
In simple words: पूरी दुनिया में बढ़ती आबादी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण दिवसों की सूची में 'विश्व जनसंख्या दिवस' (11 जुलाई) सबसे महत्वपूर्ण है, इसे जरूर याद रखें।
Question 11. कौन-सा प्रान्त, भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, सबसे अधिक जनसंख्या वाला है?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) बिहार
(c) मध्य प्रदेश
(d) राजस्थान
Answer: (a) उत्तर प्रदेश
In simple words: According to the 2011 census, Uttar Pradesh has the highest number of people living in it compared to any other state in India.
🎯 Exam Tip: Remember that Uttar Pradesh is the most populous state in India, while Sikkim is the least populous. This is a very common question in board exams.
Question 12. जनसंख्या शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है- [2007]
(a) छात्रों और अध्यापकों को जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों से अवगत कराना
(b) सांस्कृतिक विकास लाना
(c) राजनैतिक उथल-पुथल पैदा करना
(d) वैज्ञानिक और तकनीकी विकास लाना
Answer: (a) छात्रों और अध्यापकों को जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों से अवगत कराना
In simple words: The main goal of population education is to make students and teachers aware of the problems caused by rapid population growth.
🎯 Exam Tip: Focus on the word 'awareness' (अवगत कराना) when looking for the main objective of population education in exams.
Question 13. भारत में जनसंख्या शिक्षा पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ- [2008]
(a) 1984 ई० में
(b) 1985 ई० में
(c) 1980 ई० में
(d) 1986 ई० में
Answer: (d) 1986 ई० में
In simple words: India started its first national program on population education in the year 1986 to teach people about family planning and population control.
🎯 Exam Tip: Memorize the year 1986 as it is also associated with the National Policy on Education (NPE) in India.
Question 14. भारत में जनगणना कितने वर्षों बाद की जाती है ? [2009, 15]
(a) 15 वर्ष बाद
(b) 20 वर्ष बाद
(c) 10 वर्ष बाद
(d) 25 वर्ष बाद
Answer: (c) 10 वर्ष बाद
In simple words: In India, the government counts the total population (census) once every 10 years to update its records.
🎯 Exam Tip: The Indian census is decennial, meaning it happens every 10 years. The last official census was conducted in 2011.
Question 15. जनसंख्या-वृद्धि का मुख्य कारण है [2013]
(a) शिक्षा का विस्तार
(b) स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि
(c) जनसंख्या विस्फोट
(d) वृक्षारोपण
Answer: (b) स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि
In simple words: Better healthcare services mean fewer people die from diseases, which leads to a steady increase in the overall population.
🎯 Exam Tip: Improved medical facilities lower the death rate, which is a primary driver of population growth in developing nations.
Question 16. जनसंख्या शिक्षा का प्रमुख रूप से किससे सम्बन्ध है?
(a) परिवार नियोजन से
(b) छोटे परिवार से
(c) जनसंख्या की स्थिति से
(d) None of the options
Answer: (c) जनसंख्या की स्थिति से
In simple words: Population education is mainly about understanding the current state, trends, and dynamics of the population.
🎯 Exam Tip: Do not confuse population education with family planning; population education is a broader study of population situations and dynamics.
Question 17. जनसंख्या शिक्षा की अवधारणा को सर्वप्रथम किसने प्रस्तुत किया?
(a) बलेंसन ने
(b) स्लोन आर० वेलैण्ड ने
(c) मसिआलस ने
(d) None of the options
Answer: (b) स्लोन आर० वेलैण्ड ने
In simple words: Sloan R. Wayland was an American professor who first introduced the idea of population education to help students understand the effects of population growth.
🎯 Exam Tip: Remember the name Sloan R. Wayland as the pioneer of population education, as this is a frequently asked direct question in exams.
Question 18. जनसंख्या शिक्षा की प्रमुख समस्या है:
(a) अभिभावकों के विरोध की समस्या
(b) अन्धविश्वास
(c) अशिक्षा
(d) All of the options
Answer: (d) All of the options
In simple words: Population education faces many hurdles, including opposition from parents, traditional superstitions, and a general lack of education among people.
🎯 Exam Tip: When options include multiple negative societal factors like illiteracy and superstition, "All of the options" is highly likely to be the correct choice.
Question 19. जनसंख्या शिक्षा का आरम्भ होना चाहिए:
(a) माध्यमिक शिक्षा स्तर से
(b) प्राथमिक शिक्षा स्तर से
(c) व्यावसायिक शिक्षा स्तर से
(d) उच्च शिक्षा स्तर से
Answer: (b) प्राथमिक शिक्षा स्तर से
In simple words: Teaching children about population awareness should start at the primary school level so they develop responsible habits and understanding from an early age.
🎯 Exam Tip: Always remember that basic social and civic awareness programs are most effective when started at the primary education level.
Question 20. जनसंख्या शिक्षा, भारत की दिन-प्रतिदिन बढ़ती आबादी के सन्दर्भ में:
(a) अनावश्यक है
(b) आवश्यक है
(c) महत्त्वहीन है
(d) अनुपयोगी है
Answer: (b) आवश्यक है
In simple words: Since India's population is growing very fast, population education is highly necessary to teach people how to manage resources and plan families.
🎯 Exam Tip: For questions regarding India's rapid population growth, keywords like "necessary" (आवश्यक) or "highly important" are almost always the correct answers.
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UP Board Solutions Class 12 Pedagogy Chapter 17 जनसंख्या शिक्षा
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