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Detailed Chapter 2 डाटा प्रासेसिंग UP Board Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 2 डाटा प्रासेसिंग UP Board Solutions PDF
UP Board Class 12 Geography Chapter 2 Text Book Questions
UP Board Class 12 Geography Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नांकित चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए:
(i) केन्द्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है, वह है
(a) माध्य
(b) माध्य तथा बहुलक
(c) बहुलक
(d) माध्यिका
Answer: (a) माध्य
In simple words: माध्य सभी मूल्यों का औसत होता है, इसलिए यह चरम या बहुत बड़े/छोटे मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है।
(ii) केन्द्रीय प्रवृत्ति का वह माप जो किसी वितरण के उभरे भाग से हमेशा संपाती होगा, वह
(a) माध्यिका
(b) माध्य तथा बहुलक
(c) माध्य
(d) बहुलक
Answer: (c) माध्य
In simple words: सामान्य वितरण में वक्र का सबसे उभरा हुआ भाग माध्य को दर्शाता है जहाँ सभी मान संपाती होते हैं।
(iii) ऋणात्मक सहसम्बन्ध वाले प्रकीर्ण अंकन में अंकित मानों के वितरण की दिशा होगी
(a) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ
(b) नीचे बाएँ से ऊपर दाएँ
(c) बाएँ से दाएँ
(d) ऊपर दाएँ से नीचे बाएँ
Answer: (a) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ
In simple words: ऋणात्मक सहसम्बन्ध में एक चर के बढ़ने पर दूसरा घटता है, जिससे ग्राफ की दिशा ऊपर बाईं ओर से नीचे दाईं ओर होती है।
🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करने के बाद उसका उत्तर स्पष्ट रूप से लिखें ताकि परीक्षक को समझने में आसानी हो।
Question 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) माध्य को परिभाषित कीजिए।
Answer: माध्य ऐसा मूल्य है जिसके निकट अन्य सभी मूल्य केन्द्रित होते हैं। माध्य से अधिक तथा कम सभी मूल्यों का योग शून्य होता है। अथवा किसी चर के विभिन्न मूल्यों का साधारण अंकगणितीय औसत माध्य कहलाता है। अथवा माध्य वह मान है जो सभी मूल्यों के योग को कुल प्रेक्षणों की संख्या में विभाजित करने पर प्राप्त होता है। यह सांख्यिकी में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला माप है।
In simple words: माध्य का अर्थ है सभी संख्याओं को जोड़कर उनकी कुल संख्या से भाग देना, जिससे हमें उनका औसत मिल जाता है।
(ii) बहुलक के उपयोग के क्या लाभ हैं?
Answer: बहुलक के प्रयोग से गणना आसान हो जाती है और इसे समझना आसान हो जाता है (इसे निरीक्षण द्वारा ही ज्ञात कर लिया जाता है)। यह दैनिक जीवन में सबसे लोकप्रिय मूल्य को दर्शाने के लिए बहुत उपयोगी है।
In simple words: बहुलक वह मान है जो सबसे अधिक बार आता है, इसे केवल देखकर ही आसानी से पहचाना जा सकता है।
(iii) अपकिरण किसे कहते हैं?
Answer: सरल भाषा में अपकिरण विभिन्न इकाइयों का माध्य मूल्य से विचलन को कहते हैं। अपकिरण माध्य मूल्य से प्रसार, बिखराव, प्रकीर्णन परिक्षेपण आदि हैं। कोनर के अनुसार, “जिस सीमा तक व्यक्तिगत पद मूल्यों में भिन्नता होती है, उसके माप को अपकिरण कहते हैं।” यह आंकड़ों के फैलाव को समझने में मदद करता है।
In simple words: अपकिरण हमें यह बताता है कि हमारे आंकड़े अपने औसत मान से कितने दूर-दूर फैले हुए या बिखरे हुए हैं।
(iv) सहसम्बन्ध को परिभाषित कीजिए।
Answer: चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव की माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं। यह दो या दो से अधिक चरों के बीच के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करता है।
In simple words: जब दो चीजें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, तो उनके बीच के इसी जुड़ाव और उसके असर को सहसम्बन्ध कहते हैं।
(v) पूर्ण सहसम्बन्ध किसे कहते हैं?
Answer: सहसम्बन्ध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे ‘पूर्ण सहसम्बन्ध’ कहते हैं। यह दर्शाता है कि दोनों चरों में बिल्कुल सटीक और निश्चित अनुपात में परिवर्तन होता है।
In simple words: जब दो चरों में बदलाव बिल्कुल एक ही अनुपात में होता है, तो उसे पूर्ण सहसम्बन्ध कहते हैं, जिसका मान हमेशा 1 होता है।
(vi) सहसम्बन्ध की अधिकतम सीमाएँ क्या हैं?
Answer: सहसम्बन्ध की अधिकतम विस्तार (सीमा) 1 (एक) है। यह सीमा धनात्मक दिशा में +1 और ऋणात्मक दिशा में -1 तक होती है।
In simple words: सहसम्बन्ध का मान कभी भी -1 से कम और +1 से अधिक नहीं हो सकता, यही इसकी अधिकतम सीमा है।
🎯 Exam Tip: अति लघु उत्तरीय प्रश्नों में सटीक परिभाषा और सूत्र (यदि कोई हो) लिखने से पूरे अंक प्राप्त होते हैं।
Question 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए:
(i) आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।
Answer: केन्द्रीय प्रवृत्ति के तीन माप माध्य, माध्यिका और बहुलक की तुलना सामान्य वितरण वक्र द्वारा की जा सकती है। सामान्य वक्र घंटाकार वक्र होता है, जिसमें तीनों माप एक ही बिंदु पर संपाती होते हैं। यह वक्र पूरी तरह से सममित होता है।
In simple words: सामान्य वितरण में माध्य, माध्यिका और बहुलक तीनों बिल्कुल बीच में एक ही स्थान पर होते हैं, जिससे वक्र का आकार एक घंटी जैसा बनता है।
🎯 Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में आरेख (diagram) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है, इससे उत्तर अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली बनता है।
Question 1. सामान्य वितरण वक्र (Normal Distribution Curve) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: माध्य की उच्चतम आवृत्ति के दोनों तरफ आवृत्तियों का वितरण एकसमान होता है। माध्य के दोनों तरफ किनारों की ओर जाने पर आवृत्तियों की संख्या क्रमशः कम होती जाती है। इस वक्र में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मान समान होता है। यह एक आदर्श घंटी के आकार (bell-shaped) का वक्र होता है।
सामान्य वितरण वक्र के मुख्य घटक:
• शीर्षक: सामान्य वितरण वक्र (माध्य, माध्यिका, बहुलक)
• Y-अक्ष: विद्यार्थियों की संख्या (आवृत्ति)
• X-अक्ष: प्राप्तांक
• विशेषता: वक्र के केंद्र (प्राप्तांक 50) पर माध्य, माध्यिका और बहुलक तीनों एक ही बिंदु पर मिलते हैं।
In simple words: सामान्य वितरण वक्र में ग्राफ दोनों तरफ एक जैसा (समान) दिखता है। इसके बीचों-बीच माध्य, माध्यिका और बहुलक तीनों का मान बिल्कुल बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य वितरण वक्र का चित्र बनाते समय ध्यान रखें कि माध्य, माध्यिका और बहुलक तीनों को केंद्र में एक ही रेखा पर दर्शाया जाए ताकि पूरे अंक मिल सकें।
Question 2. धनात्मक विषमता (Positive Skewness) वाले वक्र की क्या विशेषताएँ होती हैं?
Answer: विषम वक्र होने पर माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मूल्य भिन्न हो जाता है। धनात्मक विषमता वाले वक्र में निम्न मूल्यों (कम अंकों) की आवृत्तियाँ अधिक तथा अधिक मूल्यों (अधिक अंकों) की आवृत्तियाँ कम होती हैं। इस अवस्था में सबसे पहले बहुलक, फिर माध्यिका और अन्त में माध्य आता है। यह वक्र दाईं ओर अधिक झुका हुआ या फैला हुआ होता है।
धनात्मक विषमता वक्र के मुख्य घटक:
• शीर्षक: धनात्मक विषमता
• Y-अक्ष: विद्यार्थियों की संख्या (आवृत्ति)
• X-अक्ष: प्राप्तांक
• विशेषता: वक्र का झुकाव बाईं ओर अधिक है। इसमें सबसे पहले बहुलक (Peak), फिर माध्यिका (Median) और अंत में माध्य (Mean) आता है।
In simple words: धनात्मक विषमता वाले ग्राफ में बाईं तरफ (कम अंकों की ओर) ऊँचाई अधिक होती है और दाईं तरफ ढलान लंबा होता है। इसमें बहुलक सबसे पहले, फिर माध्यिका और अंत में माध्य आता है।
🎯 Exam Tip: धनात्मक विषमता में क्रम हमेशा याद रखें: बहुलक < माध्यिका < माध्य (Mode < Median < Mean)। परीक्षा में यह क्रम बहुविकल्पीय प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।
चित्र में ऋणात्मक विषमता वाला वक्र दिखाया गया है जिसमें कम मूल्य की आवृत्तियाँ कम तथा अधिक मूल्य की आवृत्तियाँ अधिक हैं। इस अवस्था में पहले माध्य, फिर माध्यिका और अन्त में बहुलक आता है।
रेखाचित्र (ऋणात्मक विषमता वक्र):
- X-अक्ष: प्राप्तांक (0 से 100)
- Y-अक्ष: विद्यार्थियों की संख्या (आवृत्ति) (0 से 20)
- वक्र के बिंदु (बाएँ से दाएँ): माध्य (Mean) < माध्यिका (Median) < बहुलक (Mode)
- वक्र का प्रकार: ऋणात्मक विषमता (Negative Skewness)
Question (ii) माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए (संकेत : उनके गुण तथा दोषों से)।
Answer:
(I) माध्य (Mean)
माध्य के निम्नलिखित गुण हैं:
1. सरल - इसकी गणना करना तथा इसे समझना बहुत सरल है।
2. प्रतिनिधि माध्य - यह श्रेणी की सभी इकाइयों पर आधारित होता है।
3. निश्चित मूल्य - माध्य का मूल्य सदा निश्चित रहता है।
4. स्थिर - यह स्थिर होता है।
माध्य के निम्नलिखित दोष हैं:
1. चरम मूल्यों का प्रभाव - माध्य पर चरम मूल्यों का अधिक प्रभाव होता है।
2. अप्रतिनिधि तथा अवास्तविक - माध्य वह मूल्य हो सकता है जो श्रेणी में उपस्थित न हो।
3. हास्यास्पद परिणाम - माध्य द्वारा कभी-कभी भ्रामक तथा असंगत निष्कर्ष निकल आते हैं जो हास्यास्पद होते हैं।
(II) माध्यिका (Median)
माध्यिका के निम्नलिखित गुण हैं:
1. सरल - माध्यिका को समझना और ज्ञात करना सरल है।
2. चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव - माध्यिका ज्ञात करने में श्रेणी के चरम मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
3. आँकड़ों के अभाव में उपयुक्त - आँकड़ों का अभाव होने पर भी इसकी गणना की जा सकती है।
4. बिन्दुरेखीय प्रदर्शन - माध्यिका मूल्य को ग्राफ की सहायता से ज्ञात किया जा सकता है।
माध्यिका के निम्नलिखित दोष हैं:
1. समंकों का क्रम - समंकों को क्रम में जमाने में अधिक समय लगता है।
2. चरम मूल्यों की उपेक्षा - इसमें चरम मूल्यों की उपेक्षा की गई है।
3. प्रतिनिधित्व का अभाव - यह केवल संभावित माप होता है, वास्तविक नहीं।
4. अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं - यह अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त विधि नहीं है।
In simple words: Mean is very simple to calculate but gets easily affected by extreme high or low values. On the other hand, Median is unaffected by extreme values and can be found graphically, but it requires arranging all data in order first.
🎯 Exam Tip: To score full marks, clearly present the merits (गुण) and demerits (दोष) of both Mean and Median using numbered points, and highlight how extreme values affect them differently.
Question (III). बहुलक के गुण और दोष लिखिए।
Answer:
बहुलक के गुण:
1. सरल गणना - इसकी गणना बड़ी सरल है।
2. चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव - यह चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है।
3. सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व - यह श्रेणी का सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व करता है।
4. व्यावहारिक उपयोगिता - व्यवहार में बहुलक का काफी प्रयोग किया जाता है।
बहुलक के दोष:
1. अनिश्चित माध्य - बहुलक सबसे अधिक अनिश्चित व अस्पष्ट माध्य है।
2. सभी मूल्यों पर आधारित नहीं - यह सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होता है।
3. चरम मूल्यों की उपेक्षा - यह चरम मूल्यों की उपेक्षा करता है।
4. वर्ग विस्तार से प्रभावित - यह वर्ग विस्तार से प्रभावित होता है।
In simple words: बहुलक वह मान होता है जो किसी समूह में सबसे अधिक बार आता है। इसे ढूंढना बहुत आसान होता है और इस पर बहुत बड़े या बहुत छोटे नंबरों का असर नहीं पड़ता, लेकिन यह सभी नंबरों को ध्यान में नहीं रखता।
🎯 Exam Tip: परीक्षा में बहुलक के गुण और दोषों को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत बिंदुवार (point-wise) लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट और आकर्षक दिखे।
Question (iii). एक काल्पनिक उदाहरण की सहायता से मानक विचलन की गणना की प्रक्रिया समझाइए।
Answer: मानक विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न मूल्यों के समान्तर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। मानक विचलन हमेशा समान्तर माध्य के लिए ज्ञात किए जाते हैं और विचलन लेते समय शुद्धि की दृष्टि से '+' तथा '-' चिह्नों का पूरा ध्यान रखा जाता है। उन्हें पुनः धनात्मक बनाने के लिए उनके वर्ग कर लिए जाते हैं और फिर उनका वर्गमूल ज्ञात करके मानक विचलन निकाल लिया जाता है। इसे व्यक्त करने के लिए ग्रीक भाषा का अक्षर (छोटा सिग्मा \( \sigma \)) प्रयुक्त किया जाता है।
अवर्गीकृत आँकड़ों का मानक विचलन ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है:
मानक विचलन \( (\sigma) = \sqrt{\frac{\sum(X-\bar{X})^{2}}{N}} \)
जहाँ \( \sum(X-\bar{X})^{2} \) = विचलनों के वर्गों का योग तथा \( N \) = बारम्बारता (या प्रेक्षणों की संख्या)।
उपर्युक्त सूत्र कुछ कठिन प्रतीत होगा। यदि \( X \) का मान दशमलव अंकों में हो और प्रेक्षणों की संख्या बहुत अधिक हो, उस स्थिति में हम निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करेंगे:
\( \sigma = \sqrt{\frac{\sum X^{2}}{N}-\left(\frac{\sum X}{N}\right)^{2}} \)
उदाहरण- निम्न तालिका में आगरा के 10 वर्षों की वर्षा के आँकड़े दिए गए हैं। मानक विचलन ज्ञात कीजिए।
In simple words: मानक विचलन हमें यह बताता है कि हमारे आंकड़े औसत मान से कितने दूर या फैले हुए हैं। इसे निकालने के लिए पहले माध्य से अंतर (विचलन) निकालते हैं, उसका वर्ग करते हैं, फिर उसका औसत निकालकर वर्गमूल ले लेते हैं।
🎯 Exam Tip: मानक विचलन का सूत्र लिखते समय संकेतों जैसे \( \sigma \), \( \bar{X} \) और \( N \) का अर्थ स्पष्ट रूप से लिखना न भूलें।
हल—
| वर्ष | वर्षा (सेमी में) | \( X - \bar{X} \) | \( (X - \bar{X})^2 \) |
|---|---|---|---|
| 1. | 90 | - 10 | 100 |
| 2. | 100 | 0 | 0 |
| 3. | 110 | + 10 | 100 |
| 4. | 120 | + 20 | 400 |
| 5. | 70 | - 30 | 900 |
| 6. | 80 | - 20 | 400 |
| 7. | 130 | + 30 | 900 |
| 8. | 150 | + 50 | 2500 |
| 9. | 100 | 0 | 0 |
| 10. | 50 | - 50 | 2500 |
| \( N = 10 \) | \( \Sigma X = 1000 \) | \( \Sigma (X - \bar{X}) = 0 \) | \( \Sigma (X - \bar{X})^2 = 7800 \) |
\( \bar{X} = \frac{\Sigma X}{N} = \frac{1000}{10} = 100 \)
\( \text{S.D. } (\sigma) = \sqrt{\frac{\Sigma (X - \bar{X})^2}{N}} = \sqrt{\frac{7800}{10}} = \sqrt{780} = 27.93 \)
Question (iv). प्रकीर्णन का कौन-सा माप सबसे अधिक अस्थिर है तथा क्यों?
Answer: परिसर अथवा विस्तार किसी श्रृंखला में अधिकतम तथा न्यूनतम मानों के बीच अन्तर को परिसर (Range) कहते हैं। इसकी गणना निम्नलिखित सूत्र के द्वारा की जाती है, अर्थात् \( R = L - S \) यहाँ \( R = \) परिसर/विस्तार, \( L = \) अधिकतम मान, \( S = \) न्यूनतम मान। प्रकीर्णन का परिसर (विस्तार) माप सबसे अधिक अस्थिर है, क्योंकि यह केवल अधिकतम तथा न्यूनतम मानों पर निर्भर करता है और अन्य मानों का प्रयोग नहीं करता जिससे इसका प्रयोग अधिक नहीं होता है। यद्यपि इसे ज्ञात करना अत्यन्त सरल है। परिसर, परिवर्तनशीलता का अशोधित (crude) माप है और इसे सावधानी से केवल उसी परिस्थिति में प्रयोग करना चाहिए जहाँ आँकड़े लगातार तथा नियमित हों। सांख्यिकी में स्थिरता के लिए अन्य मापों जैसे मानक विचलन का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है।
In simple words: Range is the most unstable measure of dispersion because it only looks at the highest and lowest values, ignoring all other numbers in between.
🎯 Exam Tip: Always write the formula \( R = L - S \) and define each term clearly to secure full marks in range-related questions.
Question (v). सहसम्बन्ध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
Answer: सहसम्बन्ध की गहनता सहसम्बन्ध की ऋणात्मक अथवा धनात्मक सहसम्बन्ध के अलावा हमारे लिए दो चरों के बीच सहसम्बन्ध की गहनता के सम्बन्ध में जानना भी आवश्यक है। साहचर्य की गहनता अधिक 1 से लेकर न्यूनतम -1 तक होती है और इन दो चरम सीमाओं के बीच शून्य (0) होती है। इस विस्तार का रैखिक वर्णन चित्र में दर्शाया गया है। सहसम्बन्ध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे पूर्ण सहसम्बन्ध कहते हैं। इस तरह गहनतम सहसम्बन्ध के दो विपरीत सिरों के ठीक मध्य में शून्य (0) सहसम्बन्ध स्थित होता है, जिस बिन्दु पर चरों के मध्य सहसम्बन्ध का अभाव अथवा सहसम्बन्ध अनुपस्थित होता है। यह मान दो चरों के बीच के संबंध की मजबूती को दर्शाता है।
सहसम्बन्ध की दिशा व गहनता का विस्तार:
• -1: पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध (Perfect Negative Correlation)
• -1 से 0 के बीच: बढ़ता सहसम्बन्ध (गहन, मध्यम, कमजोर)
• 0: सहसम्बन्ध का अभाव (No Correlation)
• 0 से +1 के बीच: बढ़ता सहसम्बन्ध (कमजोर, मध्यम, गहन)
• +1: पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध (Perfect Positive Correlation)
In simple words: Correlation strength shows how closely two things are related, ranging from -1 (perfect opposite relation) to +1 (perfect direct relation), with 0 meaning no relation at all.
🎯 Exam Tip: Draw the linear scale showing values from -1 to +1 to clearly illustrate the degrees of correlation strength.
Question (vi). कोटि सहसम्बन्ध की गणना के विभिन्न चरण कौन-से हैं?
Answer: कोटि सहसम्बन्ध (स्पीयरमैन) कोटि संहसम्बन्ध को सन् 1904 में स्पीयरमैन ने प्रतिपादित किया था। इस विधि के अनुसार सहसम्बन्ध की गणना कोटियों के आधार पर की जाती है। यह विधि गुणात्मक तथ्यों के मापन में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है।
In simple words: Rank correlation is a method introduced by Spearman in 1904 to find the relationship between two sets of data by ranking them in order.
🎯 Exam Tip: Mention the year 1904 and Spearman's name as key historical facts when explaining rank correlation.
कोटि सहसम्बन्ध की गणना के विभिन्न चरण
- 1. X – Y चरों को सारणी के क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्तम्भों में दिखाएँ।
- 2. दोनों चर अलग कोटि के हैं। X के मान को तीसरे स्तम्भ में दिखाया गया है। इसी प्रकार Y के मान को चौथे स्तम्भ में दिखाया गया है। सर्वाधिक मान को \( R_1 \) तथा दूसरे सबसे अधिक मान को \( R_2 \) दिखाते हैं।
- 3. जब XR और YR प्राप्त कर लिए जाते हैं तो दोनों का अन्तर ज्ञात किया जाता है और पाँचवें स्तम्भ में रख दिया जाता है।
- 4. इनमें प्रत्येक अन्तर का वर्ग ज्ञात किया जाता है और इनका जोड़ किया जाता है। इसे छठे स्तम्भ में रखते हैं।
- 5. इस प्रकार कोटि सहसम्बन्ध का परिकलन निम्न सूत्र से किया जाता है:
\[ \rho = 1 - \frac{6 \sum D^{2}}{N\left(N^{2}-1\right)} \]
जिसमें \( \rho \) = कोटि सहसम्बन्ध, \( \sum D^2 \) = दोनों कोटियों के अन्तर के वर्ग का योग, \( N \) = X – Y युग्मों की संख्या।
क्रियाकलाप
Question 1. भौगोलिक विश्लेषण के लिए प्रयुक्त कोई काल्पनिक उदाहरण लीजिए तथा अवर्गीकृत आँकड़ों की गणना करने की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विधियों को समझाइए।
Answer: काल्पनिक उदाहरण: निम्नलिखित सारणी में लखनऊ के मासिक तापमान के आँकड़े दिए गए हैं। इससे लखनऊ का औसत तापमान ज्ञात कीजिए। यह औसत तापमान हमें लखनऊ की सामान्य जलवायु परिस्थितियों को समझने में मदद करता है।
| माह | जनवरी | फरवरी | मार्च | अप्रैल | मई | जून | जुलाई | अगस्त | सितम्बर | अक्टूबर | नवम्बर | दिसम्बर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तापमान (°C) | 14 | 16 | 22 | 28 | 33 | 34 | 31 | 30 | 29 | 26 | 20 | 15 |
\[ \bar{X} = \frac{\sum X}{n} \]
\[ \bar{X} = \frac{14 + 16 + 22 + 28 + 33 + 34 + 31 + 30 + 29 + 26 + 20 + 15}{12} \]
\[ \sum X = 298 \]
\[ n = 12 \]
\[ \bar{X} = \frac{298}{12} = 24.83 \]
अतः लखनऊ का औसत मासिक तापमान 24.83°C है।
In simple words: To find the average temperature, we add up the temperatures of all 12 months and then divide the total sum by 12. This gives us a single value representing the typical temperature of the year.
🎯 Exam Tip: Always write the formula clearly before substituting values, and double-check your addition to avoid simple calculation errors.
Question 2. विभिन्न प्रकार के पूर्ण सहसम्बन्ध दर्शाने के लिए प्रकीर्ण आरेख बनाइए।
Answer: (छात्र स्वयं करें।) प्रकीर्ण आरेख (Scatter Diagram) बनाने के लिए ग्राफ पेपर पर X और Y अक्षों पर चरों को अंकित करके बिन्दुओं को दर्शाया जाता है। पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध में सभी बिन्दु नीचे बाईं ओर से ऊपर दाहिनी ओर एक सीधी रेखा में होते हैं, जबकि पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध में बिन्दु ऊपर बाईं ओर से नीचे दाहिनी ओर एक सीधी रेखा में होते हैं।
In simple words: A scatter diagram is a graph that shows the relationship between two things using dots. If the dots form a perfect straight line going up, it is a perfect positive correlation; if they go down, it is a perfect negative correlation.
🎯 Exam Tip: When drawing scatter diagrams, clearly label both the X and Y axes and use a scale that fits all your data points neatly.
UP Board Class 12 Geography Chapter 2 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. सहसम्बन्ध किसे कहते हैं? इसके प्रकारों को समझाइए।
Answer: सहसम्बन्ध का अर्थ प्रकृति में प्रत्येक तथ्य एवं परिघटना किसी अन्य तथ्य या परिघटना से प्रभावित और संबंधित होती है। इसी कारण दो या दो से अधिक श्रेणियों में परस्पर सम्बन्ध पाया जाता है अर्थात् एक श्रेणी में परिवर्तन आने पर दूसरी श्रेणी में भी परिवर्तन आ जाता है। उदाहरण- किसी स्थान पर तापमान बढ़ने से वहाँ का वायुदाब कम होने लगता है। चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव के माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहा जाता है। “जब सम्बन्ध संख्यात्मक प्रकृति का होता है तो उसे खोजने, मापने तथा सूत्र में व्यक्त करने की विधि को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं।” यह सांख्यिकीय उपकरण दो चरों के बीच के सह-अस्तित्व और उनकी दिशा को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।
In simple words: Correlation is a measure of how two different things are connected to each other. For example, when the temperature rises, the air pressure usually drops, showing that they change together.
🎯 Exam Tip: Define correlation clearly in the beginning and always provide a real-world example like temperature and air pressure to secure maximum marks.
सहसम्बन्ध के प्रकार
सहसम्बन्ध के दो प्रकार निम्नलिखित हैं:
1. धनात्मक सहसम्बन्ध: जब दो चरों में परिवर्तन एक ही दिशा में होता है अर्थात् एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर भी बढ़ता है और एक के घटने पर दूसरा भी घटता है तो ऐसे सहसम्बन्ध को ‘धनात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं।
2. ऋणात्मक सहसम्बन्ध: जब दो चरों में परिवर्तन एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में होता है तो इसे ‘ऋणात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं।
Question 2. निम्नलिखित आँकड़ों से माध्य विचलन ज्ञात कीजिए: 15, 17, 19, 25, 30, 35, 48.
Answer:
समान्तर माध्य (\( \bar{X} \)) की गणना:
\[ \bar{X} = \frac{\Sigma X}{n} = \frac{189}{7} = 27 \]
| क्रम संख्या | मद (x) | मद से माध्य का विचलन \( X - \bar{X} = d \) |
|---|---|---|
| 1. | 15 | 12 |
| 2. | 17 | 10 |
| 3. | 19 | 8 |
| 4. | 25 | 2 |
| 5. | 30 | 3 |
| 6. | 35 | 8 |
| 7. | 48 | 21 |
| \( n = 7 \) | \( \Sigma X = 189 \) | \( \Sigma d = 64 \) |
(1) मदों को \( X \) मानिए।
(2) समान्तर माध्य (\( \bar{X} \)) ज्ञात कीजिए।
(3) प्रत्येक मद में से \( \bar{X} \) घटाइए (\( X - \bar{X} = d \))।
(4) प्रत्येक विचलन को जोड़कर \( \Sigma d \) ज्ञात करें।
(5) विचलनों के योग को मदों की संख्या से भाग दीजिए।
सूत्र: माध्य विचलन = \( \frac{\Sigma d}{n} = \frac{64}{7} = 9.14 \)
In simple words: माध्य विचलन (Mean Deviation) निकालने के लिए सबसे पहले सभी संख्याओं का औसत (माध्य) निकालते हैं। फिर हर संख्या का उस औसत से अंतर निकालकर, उन सभी अंतरों का औसत निकाल लेते हैं।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन ज्ञात करते समय ऋणात्मक चिह्नों (+/-) को छोड़ दिया जाता है और केवल धनात्मक मान (absolute values) ही लिए जाते हैं। गणना के सभी चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ को स्पष्ट कीजिए:
(i) आवृत्ति या बारंबारता
(ii) वर्ग
(iii) वर्ग-आवृत्ति
(iv) आवृत्ति-वितरण श्रृंखला
(v) मिलान रेखाएँ
Answer:
(i) आवृत्ति या बारंबारता: किन्हीं आँकड़ों के समूह में एक मद (विशेष अंक) कितनी बार आता है अर्थात् उस संख्या की कितनी बार पुनरावृत्ति होती है, उसे उस मद की आवृत्ति या बारंबारता कहते हैं। उदाहरणतः किसी सारणी में मद 135 की चार बार पुनरावृत्ति हुई है, अतः 135 की बारंबारता 4 है।
(ii) वर्ग: यदि मदों (आँकड़ों) की संख्या बहुत अधिक हो तो विभिन्न मानों को छोटे-छोटे समूहों में बाँट दिया जाता, जिन्हें वर्ग कहते हैं; जैसे- 119-129, 129-139 वर्ग हैं।
(iii) वर्ग-आवृत्ति: किसी भी एक वर्ग में आने वाले मदों की संख्या को ‘वर्ग आवृत्ति’ कहते हैं।
(iv) आवृत्ति-वितरण श्रृंखला: यह आवृत्तियों के बंटन को प्रदर्शित करने वाली श्रृंखला है जिसमें मात्रात्मक सूचनाओं को संक्षिप्त करके व्यवस्थित रूप में रखा जाता है।
(v) मिलान रेखाएँ: आवृत्ति श्रृंखला की रचना करते समय प्रत्येक वर्ग में पड़ने वाली मद को एक छोटी-सी रेखा के द्वारा प्रकट किया जाता है जिसे ‘मिलान रेखा’ कहा जाता है। प्रत्येक चार मिलान रेखाओं के समूह के बाद पाँचवीं मिलान रेखा उन चारों रेखाओं को काटती हुई खींची जाती है। फिर इन्हें गिनकर उस वर्ग-विशेष के सामने लिख दिया जाता है।
In simple words: ये सभी सांख्यिकी (Statistics) के बुनियादी शब्द हैं जो बड़े डेटा को छोटे समूहों में बांटने, उनकी गिनती करने और उन्हें व्यवस्थित रूप से तालिका में दिखाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: मिलान रेखाओं (Tally Marks) को दर्शाते समय हमेशा ध्यान रखें कि 5वीं रेखा तिरछी खींची जाती है जो पहले की 4 खड़ी रेखाओं को काटती है (卌)।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
Question 1. माध्य क्या है?
Answer: माध्य- इसे औसत भी कहते हैं। आंकड़ों को समझने और उनकी तुलना करने में औसत सर्वाधिक प्रभावशाली है। माध्य या औसत एक ऐसी अकेली संख्या है जो पूरी श्रृंखला के सभी आंकड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। औसत तो अधिकतम और न्यूनतम मूल्यों के बीच का एक मूल्य या मद होती है जो अधिक या कम सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व कर देती है। यह सांख्यिकी में सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण उपकरण है।
In simple words: Mean (or average) is a single number that represents a whole group of numbers. It helps us easily understand and compare large amounts of data by finding a middle value.
🎯 Exam Tip: Always define mean as the representative value of the entire data set and mention that it is also commonly known as the average.
Question 2. सहसम्बन्ध में स्वतन्त्र व आश्रित चर को समझाइए।
Answer: सहसम्बन्ध में स्वतन्त्र व आश्रित चर-सहसम्बन्ध के कुछ चर दूसरे चरों को प्रभावित करते हैं; इसीलिए उनमें सहसम्बन्ध होता है। जो चर प्रभावित होते हैं उन्हें ‘आश्रित चर’ कहा जाता है। इसके विपरीत जो चर प्रभावित करते हैं उन्हें ‘स्वतन्त्र चर’ कहा जाता है। उदाहरणतः कृषि उत्पादकता सिंचाई पर निर्भर करती है। इसमें सिंचाई ‘स्वतन्त्र चर’ व कृषि ‘आश्रित चर’ मानी जाती है। यह वर्गीकरण चरों के बीच के कारण और प्रभाव के संबंध को स्पष्ट करता है।
In simple words: An independent variable is the cause that changes other things, while a dependent variable is the effect that gets changed. For example, more rain (independent) causes more crop growth (dependent).
🎯 Exam Tip: Use the agriculture and rainfall example to clearly distinguish between independent and dependent variables for maximum marks.
Question 3. माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. माध्य संक्षिप्तीकरण में सहायक है।
2. यह तुलना में सहायक है。
3. यह विश्लेषण में सहायक है।
4. यह अनुपात निर्धारण में सहायक है।
5. यह समग्र का प्रतिनिधित्व करता है।
6. यह मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह जटिल आंकड़ों को सरल बनाकर निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
In simple words: The mean helps simplify huge amounts of data into one single number. This makes it very easy to compare different groups and make smart decisions.
🎯 Exam Tip: List all six points clearly using a numbered list to make your answer structured and easy for the examiner to read.
Question 4. एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ बताइए।
Answer: एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. आदर्श माध्य की स्थिर परिभाषा होती है।
2. यह सभी मूल्यों पर आधारित है।
3. यह सरल और बोधगम्य है।
4. यह शीघ्र गणनीय होता है।
5. यह बीजगणितीय विवेचन के योग्य है।
6. यह निदर्शन परिवर्तनों से न्यूनतम प्रभावित होता है। यह स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
In simple words: An ideal average should be simple to calculate, easy to understand, based on all observations, and not change easily with small changes in data.
🎯 Exam Tip: Keywords like "algebraic treatment" (बीजगणितीय विवेचन) and "based on all observations" (सभी मूल्यों पर आधारित) are highly valued by examiners.
Question 5. बहुलक की विशेषताएँ बताइए।
Answer: बहुलक की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. बहुलक में सर्वाधिक आवृत्ति होती है।
2. इसमें एकाधिक माध्य होता है।
3. यह आवृत्ति पर निर्भर करती है।
4. इसकी परिकलन विधि आसान है।
5. इसमें अधिक व न्यून मूल्य का महत्व नहीं होता है। यह चरम सीमाओं से अप्रभावित रहता है।
In simple words: Mode is the value that appears most frequently in a data set. It is very easy to find and is not affected by extremely high or low values.
🎯 Exam Tip: Remember that mode represents the most popular or common item in a dataset, which is useful for business decisions like stocking popular shoe sizes.
Question 6. माध्यिका की विशेषताओं को समझाइए।
Answer: माध्यिका की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• माध्यिका का निर्धारण करने के लिए पदों को आरोही (बढ़ते हुए) या अवरोही (घटते हुए) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
• माध्यिका समंकमाला के केन्द्र में स्थित पद का मूल्य होता है।
• माध्यिका सम्पूर्ण समंक श्रेणी को दो बराबर-बराबर भागों में बाँटती है तथा विभाजित करती है।
• माध्यिका को पद-मूल्यों की क्रमिक वृद्धि पर आधारित किया जाता है, जिसके एक तरफ मूल्य कम तथा दूसरी तरफ अधिक मूल्य होते हैं। यह गुणात्मक तथ्यों के विश्लेषण में विशेष रूप से उपयोगी होती है।
In simple words: Median is the exact middle value when you arrange numbers from smallest to largest. It splits the entire data set into two equal halves.
🎯 Exam Tip: Always mention the prerequisite of arranging data in ascending or descending order before calculating the median to secure full marks.
Question 7. विस्तार के गुणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: विस्तार के गुण निम्नलिखित हैं:
(i) विस्तार को सफलतापूर्वक मापा जा सकता है।
(ii) विस्तार को समझना भी सरल है।
(iii) इसका प्रयोग बड़े उद्योगों एवं कल-कारखानों में उत्पादन की वस्तुओं की गुणवत्ता के नियन्त्रण में विशेष रूप से किया जाता है। यह सांख्यिकी में सबसे सरल और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली माप है।
In simple words: Range (विस्तार) is very easy to calculate and understand. It is highly useful in factories to check and control the quality of products.
🎯 Exam Tip: Clearly list the points with proper numbering to make your answer structured and easy for the examiner to read.
Question 8. विस्तार के दोषों को समझाइए।
Answer: विस्तार के दोष निम्नलिखित हैं:
• विस्तार किसी भी श्रेणी के विचरण का स्थायी माप नहीं होता है।
• अधिकतम और न्यूनतम के मध्य पद मूल्यों में होने वाले प्रभाव का विस्तार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
• विस्तार की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें चरम मूल्यों के बीच स्थित पद-मूल्यों के विचलन का ज्ञान नहीं हो पाता है। इस प्रकार, यह केवल चरम सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करता है और आंतरिक डेटा वितरण की उपेक्षा करता है।
• आवृत्ति बंटनों के लिए विस्तार हमेशा उपयुक्त नहीं होते हैं।
In simple words: Range only looks at the biggest and smallest numbers, ignoring all the numbers in between. This makes it unreliable if there are extreme values.
🎯 Exam Tip: Mention that range is highly affected by extreme values (outliers) as this is its main limitation.
Question 9. मानक विचलन की विशेषताएँ समझाइए।
Answer: मानक विचलन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) इसके आकलन में मूल्य के विचलन सदैव समान्तर माध्य से ही ज्ञात किए जाते हैं।
(ii) इसकी माप में धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) चिह्नों को छोड़ा नहीं जाता है, बल्कि विचलनों का वर्ग तो लिया जाता है। यह इसे गणितीय रूप से अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाता है।
In simple words: Standard deviation always calculates deviations from the mean and squares them, so negative signs are naturally eliminated without being ignored.
🎯 Exam Tip: Remember to highlight that algebraic signs (+ and -) are not ignored in standard deviation, unlike in mean deviation.
Question 10. विचरण के गुणांक को समझाइए।
Answer: विचरण का गुणांक-प्रमाप विचलन के गुणांक का प्रयोग विभिन्न श्रेणियों में प्रमाप विचलन का तुलनात्मक अध्ययन एवं विवेचन करने के लिए किया जाता है। इसका मूल्य सामान्यतया एक से कम दशमलव 1 से 9 तक संख्या हो सकती है। प्रमाप विचलन का प्रतिशत ही विचरण का गुणांक होता है। यह दो या दो से अधिक समूहों के बीच स्थिरता की तुलना करने में बहुत मददगार है। इसका सूत्र निम्नलिखित है:
\[ \text{Coefficient of Variation} = \frac{\text{S.D.}}{x} \times 100 \]
अथवा Coefficient of S.D. \( \times \) 100.
In simple words: Coefficient of variation is the percentage form of standard deviation. It helps us compare how stable or consistent two different groups of data are.
🎯 Exam Tip: Always write the formula clearly in a separate line to secure full marks for conceptual questions.
Question 11. प्रमाप विचलन के लाभ बताइए।
Answer: प्रमाप विचलन के लाभ निम्नलिखित हैं:
(i) प्रमाप विचलन सभी मूल्यों पर आधारित है।
(ii) यह स्पष्ट व निश्चित माप होता है।
(iii) इसमें परिवर्तन पर न्यूनतम प्रभाव होता है।
(iv) यह उच्चस्तरीय सांख्यिकी में प्रयोग किया जाता है। यह शोधकर्ताओं को डेटा के फैलाव का एक स्पष्ट और सटीक चित्र प्रदान करता है।
(v) यह अपकिरण के माप की सर्वश्रेष्ठ विधि है।
In simple words: Standard deviation is the best way to measure data spread because it uses every single value in the data and is highly stable.
🎯 Exam Tip: Emphasize that standard deviation is based on all observations, which makes it the most reliable measure of dispersion.
Question 12. प्रमाप विचलन के दोष/अवगुण/कमियाँ समझाइए।
Answer: प्रमाप विचलन के दोष/अवगुण/कमियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) प्रमाप विचलन की गणना विधि एवं प्रक्रिया अन्य अपकिरण की माप की विधियों से कठिन है। इसे समझना, गणना करना आदि कष्टसाध्य है।
(ii) इसके माप में चरम मूल्यों को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है। इसके अलावा, यदि डेटा में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव हो, तो यह भ्रामक परिणाम दे सकता है।
In simple words: Standard deviation is hard to calculate compared to other methods, and it gives too much importance to extremely high or low values.
🎯 Exam Tip: Mention the complexity of calculation and sensitivity to extreme values as the two primary drawbacks.
Oral Questions and Answers
Question 1. केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप क्या होता है?
Answer: आँकड़ों की समंक श्रेणी में एक ऐसा प्रतिनिधि मूल्य जो सम्पूर्ण श्रेणी की केन्द्रीय प्रवृत्ति को सरल और संक्षिप्त रूप से अभिव्यक्त करे, 'केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप' कहलाता है। यह पूरे डेटा सेट का प्रतिनिधित्व करने वाला एक एकल मान होता है।
In simple words: A measure of central tendency is a single central value that represents the middle or center of the entire set of data.
🎯 Exam Tip: Define it as a representative value of the entire data series to get full marks.
Question 2. केन्द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख माप कौन-कौन-से हैं?
Answer: सामान्यतः केन्द्रीय प्रवृत्ति के 3 माप होते हैं:
(i) अंकगणितीय माध्य/औसत (Arithmetic Mean)
(ii) माध्यिका (Median)
(iii) बहुलक (Mode)
ये तीनों माप अलग-अलग तरीकों से डेटा के केंद्र बिंदु को दर्शाते हैं।
In simple words: The three main ways to find the center of data are Mean (average), Median (middle value), and Mode (most frequent value).
🎯 Exam Tip: List all three measures (Mean, Median, and Mode) clearly as they are the pillars of central tendency.
Question 3. केन्द्रीय प्रवृत्ति का कौन-सा माप स्थितिजन्य है?
Answer: केन्द्रीय प्रवृत्ति के स्थितिजन्य माप माध्यिका एवं बहुलक हैं। ये माप श्रेणी में पदों की स्थिति के आधार पर ज्ञात किए जाते हैं।
In simple words: Median and Mode are called positional measures because they depend on the position of values in a data set rather than their actual numerical calculation.
🎯 Exam Tip: Clearly mention both Median (माध्यिका) and Mode (बहुलक) as positional averages to secure full marks.
Question 4. आँकड़ों में विचरणशीलता का विक्षेपण को जानना क्यों आवश्यक है?
Answer: यह जानने के लिए कि माध्य आँकड़ों का उचित प्रतिनिधित्व कर रहा है अथवा नहीं, विचरणशीलता का अध्ययन आवश्यक है। इससे हमें आँकड़ों के बिखराव की सीमा का सही ज्ञान होता है।
In simple words: Studying dispersion helps us understand how spread out the data points are from the average value, showing if the average is reliable.
🎯 Exam Tip: Focus on the keyword 'representativeness of mean' (माध्य का प्रतिनिधित्व) when explaining the need for dispersion.
Question 5. प्रकीर्णन के मापन की प्रमुख विधियों के नाम बताइए।
Answer: प्रकीर्णन के मापन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. विस्तार
2. चतुर्थक विचलन
3. माध्य विचलन
4. मानक विचलन (S.D.) तथा विचरण गुणांक (C.V.)
5. लॉरेन्ज वक्र। ये सभी विधियाँ सांख्यिकीय विश्लेषण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: These are five different mathematical ways to measure how much our data spreads out or varies from the center.
🎯 Exam Tip: List all five methods in a neat numbered list to ensure you don't miss any points.
Question 6. सहसम्बन्ध किसे कहते हैं?
Answer: विभिन्न चरों के बीच संख्यात्मक सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव के माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं। यह दो या दो से अधिक चरों के बीच के संबंध की दिशा को भी दर्शाता है।
In simple words: Correlation measures how strongly two different things are related to each other, like study hours and exam marks.
🎯 Exam Tip: Define correlation as the strength and direction of the relationship between variables for a complete answer.
Question 7. सहसम्बन्ध ज्ञात करने की मात्रिक विधियाँ कौन-कौन-सी हैं?
Answer: सहसम्बन्ध ज्ञात करने की मात्रिक विधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. कार्ल पियर्सन का सहसम्बन्ध का गुणांक (r) तथा
2. स्पीयरमैन कोटिक्रम सहसम्बन्ध (\( r_K \))। ये दोनों विधियाँ विभिन्न प्रकार के आँकड़ों के लिए उपयुक्त होती हैं।
In simple words: These are two standard mathematical formulas used to calculate the exact connection value between two sets of data.
🎯 Exam Tip: Remember to write the symbols (r) and (\( r_K \)) alongside the names of the methods.
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
Question 1. केन्द्रीय प्रवृत्ति का प्रमुख माप है
(a) अंकगणितीय माध्य
(b) माध्यिका
(c) बहुलक
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: Mean, median, and mode are all different ways to find the central or middle value of a group of numbers.
🎯 Exam Tip: Read all options carefully before marking 'All of the options' as the correct answer.
Question 2. केन्द्रीय प्रवृत्ति का स्थितिजन्य माप है
(a) माध्यिका
(b) बहुलक
(c) (a) व (b) दोनों
(d) इनमें से कोई भी विकल्प नहीं
Answer: (c) (a) व (b) दोनों
In simple words: Both median and mode are determined by where the numbers sit in a list, rather than adding them all up.
🎯 Exam Tip: Remember that arithmetic mean is a mathematical average, while median and mode are positional averages.
Question 3. प्रकीर्णन के मापन की विधि नहीं है
(a) विस्तार
(b) बहुलक
(c) माध्य विचलन
(d) लॉरेन्ज वक्र
Answer: (b) बहुलक
In simple words: Mode is used to find the most common value (central tendency), not to measure how spread out the data is.
🎯 Exam Tip: Do not confuse measures of central tendency (like mode) with measures of dispersion (like range or mean deviation).
Question 4. ‘विस्तार’ का संकेताक्षर है
(a) R
(b) L
(c) S
(d) P
Answer: (a) R
In simple words: 'R' stands for 'Range', which is the English word for 'विस्तार'.
🎯 Exam Tip: Range (R) is calculated as the difference between the largest (L) and smallest (S) values: \( R = L - S \).
Question 5. पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है
(a) 1
(b) 0
(c) -1
(d) इनमें से कोई भी विकल्प नहीं
Answer: (c) -1
In simple words: A perfect negative correlation is represented by -1, meaning when one thing goes up, the other goes down in perfect balance.
🎯 Exam Tip: The minus sign indicates a negative relationship, and 1 indicates it is perfect or complete.
Question 6. पूर्ण सहसम्बन्ध होता है
(a) -1
(b) +1
(c) ±1
(d) इनमें से कोई भी विकल्प नहीं
Answer: (c) ±1
In simple words: Perfect correlation can be either completely positive (+1) or completely negative (-1), so we write it as ±1.
🎯 Exam Tip: Pay attention to the word 'पूर्ण' (perfect) without direction; it includes both positive and negative perfect correlations.
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