UP Board Solutions Class 12 Economics Chapter 2 Market

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Detailed Chapter 2 बाज़ार UP Board Solutions for Class 12 Economics

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Class 12 Economics Chapter 2 बाज़ार UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)

 

Question 1. बाजार की परिभाषा दीजिए। विभिन्न प्रकार के बाजारों के लक्षणों की व्याख्या कीजिए। या बाजार को परिभाषित कीजिए। बाजार के मुख्य तत्त्व अथवा विशेषताएँ क्या हैं? बाजार में एक ही वस्तु की कीमत कैसे निर्धारित होती है?
Answer: बाजार का अर्थ तथा परिभाषाएँ: साधारण बोलचाल की भाषा में बाजार शब्द से अभिप्राय किसी ऐसे स्थान विशेष से है जहाँ किसी वस्तु या वस्तुओं के क्रेता व विक्रेता एकत्र होते हैं तथा वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं, परन्तु अर्थशास्त्र में बाजार शब्द का अर्थ इससे भिन्न है। अर्थशास्त्र के अन्तर्गत बाजार शब्द से अभिप्राय उस समस्त क्षेत्र से है जहाँ तक किसी वस्तु के क्रेता व विक्रेता फैले होते हैं तथा उनमें स्वतन्त्र प्रतियोगिता होती है, जिसके कारण वस्तु के मूल्यों में एकरूपता की प्रवृत्ति पायी जाती है।

विभिन्न अर्थशास्त्रियों के द्वारा बाजार की परिभाषाएँ निम्नवत् दी गयी हैं:
एली के अनुसार, “हम बाजार को अर्थ साधारण क्षेत्र से लगाते हैं जिसके अन्तर्गत किसी वस्तु-विशेष पर मूल्य निर्धारित करने वाली शक्तियाँ सक्रिय होती हैं।”
कूर्नो के शब्दों में, “अर्थशास्त्री ‘बाजार’ शब्द का अर्थ किसी ऐसे विशिष्ट स्थान से नहीं लगाते हैं जहाँ पर वस्तुओं का क्रय और विक्रय किया जाता है, बल्कि उस पूरे क्षेत्र से लगाते हैं जहाँ क्रेता और विक्रेता फैले होते हैं।” यह परिभाषा बाजार के आधुनिक और व्यापक दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है।
In simple words: In economics, a market is not just a physical place like a local shopping center. It refers to the entire region or area where buyers and sellers of a product are in close contact with each other to trade at a uniform price.

🎯 Exam Tip: Always define 'market' from both a general perspective and an economic perspective to show a deep understanding of the concept.

बाजार की परिभाषाएँ (Definitions of Market)

...विक्रय होता है, बल्कि उस समस्त क्षेत्र से लगाते हैं जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के मध्य आपस में इस प्रकार का सम्पर्क हो कि किसी वस्तु का मूल्य सरलता एवं शीघ्रता से समान हो जाये।”

प्रो० जेवेन्स के अनुसार: “बाजार शब्द का अर्थ व्यक्तियों के किसी भी ऐसे समूह के लिए होता है जिसमें आपस में व्यापारिक सम्बन्ध हों तथा जो किसी वस्तु का विस्तृत सौदा करते हों।”

प्रो० चैपमैन: “बाजार शब्द आवश्यक रूप से स्थान का बोध नहीं करता, बल्कि वस्तु अथवा वस्तुओं तथा क्रेताओं एवं विक्रेताओं का ज्ञान कराता है, जिसमें पारस्परिक प्रतिस्पर्धा होती है।”

प्रो० बेन्हम: “बाजार वह क्षेत्र होता है, जिसमें क्रेता और विक्रेता एक-दूसरे के इतने निकट सम्पर्क में होते हैं कि एक भाग में प्रचलित कीमतों का प्रभाव दूसरे भाग में प्रचलित कीमतों पर पड़ता रहता है।”

स्टोनियर एवं हेग: “अर्थशास्त्री बाजार का अर्थ एक ऐसे संगठन से लेते हैं, जिसमें किसी वस्तु के क्रेता तथा विक्रेता एक-दूसरे के निकट सम्पर्क में रहते हैं।”

प्रो० जे० के० मेहता: “बाजार एक स्थिति को बताता है, जिसमें एक ऐसी वस्तु की माँग एक ऐसे स्थान पर की जाती है, जहाँ उसे विक्रय के लिए प्रस्तुत किया जाता है।”

बाजार के मुख्य तत्व (लक्षण/विशेषताएँ)

उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर बाजार में पाँच तत्त्वों का समावेश किया जाता है:

  • 1. एक क्षेत्र: बाजार से अर्थ उसे समस्त क्षेत्र से होता है जिसमें क्रेता व विक्रेता फैले रहते हैं तथा क्रय-विक्रय करते हैं।
  • 2. एक वस्तु का होना: बाजार के लिए एक वस्तु का होना भी आवश्यक है। अर्थशास्त्र में प्रत्येक वस्तु का बाजार अलग-अलग माना जाता है; जैसे–कपड़ा बाजार, नमक बाजार, सर्राफा बाजार, किराना बाजार, घी बाजार। अर्थशास्त्र में बाजार की संख्या वस्तुओं के प्रकार तथा किस्मों पर निर्भर करती है।
  • 3. क्रेताओं व विक्रेताओं का होना: विनिमय के कारण बाजार की आवश्यकता होती है। अतः बाजार में विनिमय के दोनों पक्षों (क्रेता व विक्रेता) का होना आवश्यक है। किसी एक भी पक्ष के न होने पर बाजार नहीं होगा।
  • 4. स्वतन्त्र व पूर्ण प्रतियोगिता: बाजार में क्रेता और विक्रेताओं में स्वतन्त्र व पूर्ण प्रतियोगिता होनी चाहिए जिससे कि वस्तु की कीमत सम्पूर्ण बाजार में एकसमान बनी रह सके।
  • 5. एक कीमत: बाजार की एक आवश्यक विशेषता यह भी है कि बाजार में किसी वस्तु की एक समय में एक ही कीमत हो। यदि कोई व्यापारी किसी वस्तु की एक ही समय में भिन्न-भिन्न कीमतें माँगता है तो क्रेता उससे माल नहीं खरीदेंगे। अतः बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति समान होने की होती है।
  • 6. बाजार का पूर्ण ज्ञान: वस्तु का एक ही मूल्य हो, इसके लिए क्रेता-विक्रेता दोनों को ही बाजार का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। बाजार का अपूर्ण ज्ञान होने के कारण उनको वस्तुएँ उचित मूल्य पर प्राप्त होने में कठिनाई होती है। उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर बाजार को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है-“अर्थशास्त्र में बाजार का आशय किसी वस्तु के क्रेताओं एवं विक्रेताओं के ऐसे समूह से होता है, जिसमें स्वतन्त्र पूर्ण प्रतियोगिता हो तथा जिसके फलस्वरूप उस वस्तु की बाजार में एक ही कीमत हो।”

 

Question 2. बाजार की परिभाषा दीजिए। बाजार के वर्गीकरण की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए। या बाजार को परिभाषित कीजिए। समय के आधार पर बाजार के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख कीजिए। [2006, 08, 10, 11, 12]
Answer: [ संकेत बाजार की परिभाषा के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 के उत्तर को देखिए। ] बाजार के वर्गीकरण को सही ढंग से समझने के लिए समय और स्थान के तत्वों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आपको विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 का उत्तर देखना होगा, जहाँ बाजार की परिभाषा और उसके वर्गीकरण को विस्तार से समझाया गया है।

🎯 Exam Tip: बोर्ड परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देते समय समय के आधार पर बाजार के वर्गीकरण (अति अल्पकालीन, अल्पकालीन, दीर्घकालीन) को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।

बाजार का वर्गीकरण (Classification of Market)

अर्थशास्त्र में बाजार का वर्गीकरण निम्नलिखित दृष्टिकोणों से किया जाता है:

(क) क्षेत्र की दृष्टि से
(ख) समय की दृष्टि से
(ग) बिक्री की दृष्टि से
(घ) प्रतियोगिता की दृष्टि से
(ङ) वैधानिकता की दृष्टि से

 

(क) क्षेत्र की दृष्टि से

क्षेत्र की दृष्टि से बाजार के वर्गीकरण का आधार यह होता है कि वस्तु-विशेष के क्रेता व विक्रेता कितने क्षेत्र में फैले हुए हैं। इस दृष्टिकोण से बाजार चार प्रकार का होता है:

 

1. स्थानीय बाजार (Local Market)
जब किसी वस्तु की माँग स्थानीय होती है अथवा उसके क्रेता और विक्रेता किसी स्थान-विशेष तक ही सीमित होते हैं, तब उस वस्तु का बाजार स्थानीय होता है। प्रायः भारी एवं कम मूल्य वाली वस्तुओं तथा शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार स्थानीय होता है; जैसे - ईंट, दूध, गोश्त, सब्जी आदि का बाजार स्थानीय होता है। परिवहन के विकास एवं वस्तुओं को सुरक्षित रखने के साधनों के विकास के कारण अब स्थानीय बाजार वाली वस्तुओं का बाजार धीरे-धीरे विकसित होकर प्रादेशिक बाजार का स्थान लेता जा रहा है।

 

2. प्रादेशिक बाजार (Regional Market)
जब वस्तु के क्रेता और विक्रेता केवल एक ही प्रदेश तक सीमित हों तब ऐसा बाजार प्रादेशिक होता है। उदाहरण के लिए हमारे देश में राजस्थानी पगड़ी तथा लाख की चूड़ियाँ केवल राजस्थान में ही प्रयोग में लायी जाती हैं, अन्य राज्यों में नहीं। अतः इन वस्तुओं का बाजार प्रादेशिक कहा जाएगा।

 

3. राष्ट्रीय बाजार (National Market)
जब किसी वस्तु का क्रय-विक्रय केवल उस राष्ट्र तक ही सीमित हो, जिस राष्ट्र में वह वस्तु उत्पन्न की जाती है तब वस्तु का बाजार राष्ट्रीय होगा। गांधी टोपी, जवाहरकट, धोतियाँ आदि कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं जिनका क्रय-विक्रय केवल भारत तक ही सीमित है; अतः इन वस्तुओं का बाजार राष्ट्रीय बाजार कहा जाता है।

 

4. अन्तर्राष्ट्रीय बाजार (International Market)
जब किसी वस्तु के क्रेता-विक्रेता विश्व के विभिन्न राष्ट्रों से वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं या जब किसी वस्तु की माँग देश व विदेश में हो तो उस वस्तु का बाजार अन्तर्राष्ट्रीय होता है; जैसे - सोना, चाँदी, चाय, गेहूँ आदि वस्तुओं के बाजार अन्तर्राष्ट्रीय हैं।

 

(ख) समय की दृष्टि से

प्रो. मार्शल ने समय के अनुसार बाजार को चार वर्गों में विभाजित किया है:

 

1. अति-अल्पकालीन बाजार या दैनिक बाजार (Very Short-Period Market)
जब किसी वस्तु की माँग बढ़ने से उसका लेशमात्र भी सम्भरण (पूर्ति) बढ़ाने का समय नहीं मिलता, तब ऐसे बाजार को अति-अल्पकालीन बाजार कहते हैं अर्थात् पूर्ति की मात्रा केवल भण्डार तक ही सीमित होती है। इसे दैनिक बाजार भी कहते हैं। शीघ्र नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं - दूध, सब्जी, मछली, बर्फ आदि का बाजार अति-अल्पकालीन होता है।

 

2. अल्पकालीन बाजार (Short-Period Market)
अल्पकालीन बाजार में माँग और पूर्ति के सन्तुलन के लिए कुछ समय मिलता है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होता। पूर्ति में माँग के अनुसार कुछ सीमा तक घट-बढ़ की जा सकती है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होती। यद्यपि पूर्ति का मूल्य-निर्धारण में प्रभाव अति अल्पकालीन बाजार की अपेक्षा अधिक होता है, किन्तु फिर भी माँग की अपेक्षा कम ही रहता है।

 

3. दीर्घकालीन बाजार (Long-Period Market)
जब किसी वस्तु का बाजार कई वर्षों के लम्बे समय के लिए होता है, तो उसे दीर्घकालीन बाजार कहते हैं। दीर्घकालीन बाजार में वस्तु की माँग में होने वाली वृद्धि इतने समय तक रहती है कि पूर्ति को बढ़ाकर माँग के बराबर करना सम्भव होता है। इस प्रकार के बाजार में माँग और पूर्ति का पूर्ण साम्य स्थापित किया जा सकता है। दीर्घकालीन बाजार में मूल्य-निर्धारण पर माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है और वस्तु का मूल्य उसके उत्पादन व्यय के बराबर होता है।

 

4. अति-दीर्घकालीन बाजार (Very Long-Period Market)
अति-दीर्घकालीन बाजार में उत्पादकों को पूर्ति बढ़ाने के लिए इतना लम्बा समय मिल जाता है कि उत्पादन विधि तथा व्यवसाय की आन्तरिक व्यवस्था में क्रान्तिकारी परिवर्तन किये जा सकते हैं। ऐसे बाजार में पूर्ति...

🎯 Exam Tip: बाजार के वर्गीकरण (क्षेत्र और समय के आधार पर) को याद रखने के लिए मुख्य बिंदुओं और उदाहरणों (जैसे स्थानीय बाजार के लिए दूध/सब्जी और प्रादेशिक के लिए राजस्थानी पगड़ी) का फ्लोचार्ट बनाकर याद करें। यह परीक्षा में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है। इस बाजार में समय की अवधि इतनी अधिक होती है कि उत्पादक उपभोक्ता के स्वभाव, रुचि, फैशन आदि के अनुरूप उत्पादन कर सकता है। इसके लिए नये-नये उद्योग स्थापित किये जा सकते हैं तथा उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।

 

(ग) बिक्री अथवा कार्यों की दृष्टि से

बिक्री की दृष्टि से या कार्यों के आधार पर बाजार का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार किया गया है।

1. सामान्य अथवा मिश्रित बाजार - मिश्रित बाजार उस बाजार को कहते हैं जिसमें अनेक एवं विविध प्रकार की वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। यहाँ क्रेताओं को प्रायः आवश्यकता की सभी वस्तुएँ उपलब्ध हो जाती हैं।

2. विशिष्ट बाजार - विशिष्ट बाजार वे बाजार होते हैं जहाँ किसी वस्तु-विशेष का क्रय-विक्रय होता है; जैसे–सर्राफा बाजार, बाजार बजाजा, दालमण्डी, गुड़मण्डी आदि। इस प्रकार के बाजार प्रायः बड़े-बड़े नगरों में पाये जाते हैं।

3. नमूने द्वारा बिक्री का बाजार - ऐसे बाजार में विक्रेता को अपना सम्पूर्ण माल नहीं ले जाना पड़ता है, वह माल को देखकर सौदा तय करते हैं तथा सौदा तय होने पर माल गोदामों से भिजवा देते हैं। इससे बाजारों का विस्तार होता है। क्रेता अपने घर बैठे ही नमूना देखकर तथा उसमें चुनाव करके, बहुत-सा सामान मँगा लेता है।

4. Grade द्वारा बिक्री का बाजार - इस प्रकार के बाजार में वस्तुओं की बिक्री उनके विशेष नाम अथवा ग्रेड द्वारा होती है। विक्रेता को न तो वस्तुओं के नमूने दिखाने पड़ते हैं और न ही क्रेता को कुछ बताना पड़ता है। उदाहरण के लिए-गेहूँ R. R. 21, K-68, फिलिप्स रेडियो, हमाम साबुन आदि।

5. निरीक्षण बाजार - जहाँ वस्तुओं का निरीक्षण करके क्रय किया जाता है उसे निरीक्षण द्वारा बिक्री का बाजार कहते हैं; जैसे-गाय, बैल, भेड़, बकरी, घोड़े आदि का बाजार।

6. ट्रेडमार्का बिक्री बाजार - बिक्री की सुविधा के लिए बहुत-से व्यापारियों के माल व्यापार-चिह्न के आधार पर बिक्री होते हैं; जैसे-बिरला सीमेण्ट, उषा मशीन, लिरिल साबुन, मदन कैंची आदि। जब ट्रेडमार्क द्वारा वस्तु की बिक्री की जाती है तो इसे ट्रेडमार्का बाजार कहते हैं।

 

(घ) प्रतियोगिता की दृष्टि से

प्रतियोगिता के आधार पर बाजार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

1. पूर्ण बाजार - पूर्ण बाजार उस बाजार को कहते हैं जिसमें पूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है। इस स्थिति में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है, कोई भी व्यक्तिगत रूप से वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता। क्रेता और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है, जिसके कारण वस्तु की बाजार में एक ही कीमत होने की प्रवृत्ति पायी जाती है। यदि किसी स्थान पर मूल्य में भिन्नता होती है तो दूसरे स्थान से वहाँ तुरन्त माल आ जाता है और सभी स्थानों पर मूल्य समान हो जाता है।

2. अपूर्ण बाजार - जब किसी बाजार में प्रतियोगिता सीमित मात्रा में पायी जाती है, क्रेताओं और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान नहीं होता है, तब उसे अपूर्ण बाजार कहते हैं। इस बाजार में अपूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार-कीमत में भिन्नता होती है।

3. एकाधिकार - एकाधिकार बाजार में प्रतियोगिता का अभाव होता है। बाजार में वस्तु का क्रेता या विक्रेता केवल एक ही होता है। एकाधिकारी का वस्तु की कीमत तथा पूर्ति पर पूर्ण नियन्त्रण होता है। एकाधिकारी बाजार में वस्तु की भिन्न-भिन्न कीमतें निश्चित कर सकता है।

 

(ङ) वैधानिकता की दृष्टि से

वैधानिक दृष्टि से बाजार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

बाजार के प्रकार

1. अधिकृत या उचित बाजार: अधिकृत बाजार में सरकार द्वारा अधिकृत दुकानें होती हैं तथा वस्तुओं का क्रय-विक्रय नियन्त्रित मूल्यों पर होता है। युद्धकाल अथवा महँगाई के समय में वस्तुओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं। ऐसी दशा में सरकार आवश्यक वस्तुओं का मूल्य नियन्त्रित कर देती है और उनके उचित वितरण की व्यवस्था करती है।

2. चोर बाजार: युद्धकाल अथवा महँगाई के समय में, वस्तुओं की कमी एवं अन्य कारणों से वस्तुओं के मूल्य बढ़ जाते हैं। तब सरकार वस्तुओं के मूल्य नियन्त्रित कर उनके वितरण की व्यवस्था करती है। कुछ दुकानदार चोरी से सरकार द्वारा निश्चित मूल्य से अधिक मूल्य पर वस्तुएँ बेचते रहते हैं। अधिकांशतः ऐसा कार्य अनधिकृत दुकानदार ही करते हैं। ये बाजार अवैध होते हैं।

3. खुला बाजार: जब बाजार में वस्तुओं के मूल्य पर सरकार द्वारा कोई नियन्त्रण नहीं होता है तथा क्रेताओं और विक्रेताओं की परस्पर प्रतियोगिता के आधार पर वस्तुओं का मूल्य-निर्धारण होता है, तब इस प्रकार के बाजार को खुला या स्वतन्त्र बाजार कहते हैं।

 

Question 3. वस्तु बाजार को विस्तृत करने वाले तत्त्वों (कारकों) का वर्णन कीजिए। [2016]
या बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले तत्त्वों (कारकों) का वर्णन कीजिए।

Answer: बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले तत्त्व (कारक) वस्तु के बाजार का विस्तार निम्नलिखित दो बातों पर निर्भर करता है (अ) वस्तु के गुण तथा (ब) देश की आन्तरिक दशाएँ।

(अ) वस्तु के गुण: किसी वस्तु के गुण उस वस्तु के बाजार-विस्तार को निम्नवत् प्रभावित करते हैं:

1. वस्तु की विस्तृत माँग – किसी वस्तु के बाजार का विस्तृत अथवा संकुचित होना उस वस्तु की माँग पर निर्भर करता है। जिस वस्तु की माँग जितनी अधिक विस्तृत होती है उस वस्तु का बाजार उतना ही विस्तृत होता है। उदाहरण के लिए गेहूँ, सोना, चाँदी आदि वस्तुओं की माँग विश्वव्यापी होने से इनका बाजार अन्तर्राष्ट्रीय है। यह विश्वव्यापी माँग बाजार के आकार को बहुत बड़ा बना देती है।
2. वस्तु की पर्याप्त पूर्ति – वस्तु के बाजार-विस्तार के लिए वस्तु की पूर्ति माँग के अनुरूप होनी आवश्यक है। यदि किसी वस्तु की माँग अधिक है और पूर्ति कम है तब वस्तु का बाजार विस्तृत नहीं हो सकेगा। इसलिए वस्तु की पर्याप्त पूर्ति बाजार के विस्तार को प्रभावित करती है।
3. वस्तु का टिकाऊपन – टिकाऊ वस्तुओं का बाजार क्षेत्र विस्तृत होता है। इसके विपरीत शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार संकुचित होता है। उदाहरणार्थ-सोना व चाँदी का बाजार दूध व सब्जी के बाजार से अधिक विस्तृत होती है।
4. वहनीयता – जिन वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सरलतापूर्वक ले जाया जा सकता है, उनका बाजार विस्तृत होता है। जिन वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है परन्तु भार एवं तौल में बहुत कम होती हैं, उनका बाजार विस्तृत होता है। ऐसी वस्तुओं को लाने में ले जाने का यातायात व्यय कम होता है।
5. वस्तु को ग्रेड या नमूनों में बाँटने की सुविधा – जिन वस्तुओं का उनके गुणों के आधार पर विभिन्न प्रकारों व ग्रेडों में वर्गीकरण किया जा सकता है, उन वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है। इस प्रकार की वस्तुओं के ट्रेडमार्क निश्चित करके उनका विज्ञापन कर, उस वस्तु की माँग देश-विदेश में उत्पन्न की जा सकती है।
6. वस्तु का स्थानापन्न न होना – बाजार में यदि किसी वस्तु के अधिक स्थानापन्न विद्यमान हैं, तब उस वस्तु का बाजार संकीर्ण होगा। इसके विपरीत यदि वस्तु का कोई स्थानापन्न विद्यमान नहीं है तब उस वस्तु का बाजार विस्तृत होगा।
7. वस्तु का विशेष उपयोग एवं फैशन – किसी वस्तु का उपयोग किसी कार्य-विशेष के लिए होने लगने पर वस्तु का बाजार विस्तृत हो जाता है; जैसे-टेलीफोन आदि। इसके अतिरिक्त यदि कोई वस्तु फैशन में आ जाती है तो उस वस्तु का बाजार भी बहुत तेजी से विस्तृत हो जाता है।
In simple words: A product's market size depends on its features like high demand, durability, easy transportability, and whether it can be graded or has no close substitutes. Durable and highly demanded goods like gold have a wider international market compared to perishable goods like milk.

🎯 Exam Tip: To score full marks, list all 7 characteristics of a product clearly with examples like gold, wheat, or milk to illustrate durability and demand.

भी विस्तृत हो जाता है; जैसे-आज फैशन के युग में क्रीम, पाउडर व चाय आदि का उपयोग निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इसके विपरीत, उन वस्तुओं का बाजार स्वतः सीमित हो जाता है, जो वस्तुएँ प्रचलन में नहीं रहतीं।

(ब) देश की आन्तरिक दशाएँ

वस्तु के बाजार के विस्तार को देश की आन्तरिक दशाएँ निम्नवत् प्रभावित करती हैं:

  • 1. अन्तर्राष्ट्रीय मैत्री एवं सहयोग – किसी वस्तु का बाजार विस्तृत होने के लिए आवश्यक है कि विभिन्न राष्ट्रों में परस्पर सहयोग एवं मित्रता की भावना हो। यदि एक देश दूसरे देश के आयात एवं निर्यात को प्रोत्साहित करता है तब वस्तु का बाजार विस्तृत होगा। आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजार का विस्तार तथा विकास होता जा रहा है।
  • 2. यातायात के साधन व उत्तम संचार-व्यवस्था – यदि देश में यातायात व संचार के अच्छे, सस्ते व विकसित साधन उपलब्ध हैं तो बाजार का विस्तार होता है, क्योंकि इन साधनों के द्वारा किसी एक स्थान-विशेष पर उत्पन्न वस्तु को न केवल स्थानीय बाजारों में, वरन् देश-विदेश में भेजा जा सकता है।
  • 3. देश में शान्ति, सुरक्षा तथा सुव्यवस्थित शासन-व्यवस्था – जब देश में सर्वत्र शान्ति एवं सुरक्षा होती है तथा शासन व्यवस्था उत्तम होती है तब व्यापारियों में व्यापार के प्रति विश्वास व उत्साह बना रहता है, जिसके परिणामस्वरूप वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है।
  • 4. उत्पादकों व व्यापारियों में विश्वास व नैतिकता – आज के युग में अधिकांश व्यापारिक कार्य विश्वास पर आधारित होते हैं। व्यापारिक भुगतान नकद न होकर चेक या बिल ऑफ एक्सचेंज के द्वारा होते हैं। ऐसी स्थिति में देश के उत्पादक व व्यापारी एक-दूसरे की साख पर विश्वास करके ही लेन-देन करते हैं। यदि वह विश्वास समाप्त हो जाए तो व्यापार का क्षेत्र संकुचित हो जाएगा। अतः विस्तृत बाजार के लिए उत्पादकों व व्यापारियों का चरित्रवान् व ईमानदार होना आवश्यक है।
  • 5. कुशल मुद्रा व बैंकिंग प्रणाली – किसी वस्तु के बाजार का विस्तार अच्छी बैंकिंग प्रणाली तथा मुद्रा प्रणाली पर निर्भर करता है। मुद्रा मूल्य में स्थिरता होनी चाहिए तथा बीमा-व्यवस्था का भी प्रबन्ध होना चाहिए, जिससे कि जो माल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सके, उसका बीमा कराया जा सके। जिस देश में बैंकिंग, मुद्रा तथा बीमा की व्यवस्था उत्तम है, उस देश में वस्तुओं के बाजार विस्तृत होते हैं।
  • 6. व्यापार के आधुनिक एवं वैज्ञानिक ढंग – आधुनिक युग में व्यापार वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है, अतः जिस देश में वस्तुओं का विज्ञापन, प्रचार व प्रसार नई व आधुनिक प्रणाली से समाचार-पत्रों, रेडियो, टेलीविजन आदि के द्वारा किया जाता है, उस देश में वस्तुओं का बाजार विस्तृत हो जाता है।
  • 7. सरकार की व्यापारिक नीति – वस्तु के बाजार-विस्तार पर सरकार की व्यापारिक नीति का पर्याप्त प्रभाव पड़ता है। स्वतन्त्र व्यापार नीति के परिणामस्वरूप अनेक वस्तुओं के बाजार विस्तृत हो जाएँगे। इसके विपरीत संरक्षण की नीति में वस्तुओं का बाजार संकुचित रहेगा। अतः यदि सरकार की व्यापारिक नीति अनुकूल है और कर अधिक नहीं हैं तो बाजार विस्तृत किया जा सकता है।
  • 8. पैकिंग का ढंग व शीत भण्डार की व्यवस्था – शीत भण्डार-गृहों की उचित व्यवस्था होने पर क्षयशील वस्तुओं को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वस्तुओं को उत्तम पैकिंग-व्यवस्था के द्वारा दूर-दूर स्थानों तक भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में वस्तुओं का बाजार विस्तृत होगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

 

Question 1. क्षेत्र के आधार पर बाजार का वर्गीकरण कीजिए। [2012, 13, 14]
Answer: विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें। वहाँ क्षेत्र के आधार पर बाजार के वर्गीकरण का विस्तृत विवरण दिया गया है जिसमें स्थानीय, प्रांतीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की व्याख्या की गई है।
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 में दिया गया है, जहाँ बाजार के भौगोलिक क्षेत्रों जैसे स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों के वर्गीकरण को विस्तार से समझाया गया है।

🎯 Exam Tip: परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देते समय बाजार के वर्गीकरण के मुख्य आधारों (जैसे स्थानीय, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय) के नाम अवश्य लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

p>Question 2. समय की दृष्टि से बाजार का वर्गीकरण कीजिए। [2008, 14, 15]
Answer: विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें। यह वर्गीकरण समय की विभिन्न अवधियों के आधार पर बाजार के व्यवहार को समझने में मदद करता है।
In simple words: समय के आधार पर बाजार को अलग-अलग भागों में बांटा जाता है, जैसे अति-अल्पकाल, अल्पकाल और दीर्घकाल।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में संदर्भ (reference) का सही उल्लेख करें ताकि परीक्षक को पता चले कि आपने विस्तृत उत्तर का अध्ययन किया है।

 

Question 3. प्रतियोगिता के आधार पर बाजारों का वर्गीकरण कीजिए। [2013, 14]
Answer: विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें। प्रतियोगिता का स्तर बाजार की संरचना और मूल्य निर्धारण को गहराई से प्रभावित करता है।
In simple words: बाजार में कितनी प्रतियोगिता है, इस आधार पर बाजारों को पूर्ण प्रतियोगिता या एकाधिकार जैसे रूपों में वर्गीकृत किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रतियोगिता के आधार पर वर्गीकरण के मुख्य प्रकारों के नाम संक्षेप में लिख देने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है।

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

 

Question 1. पूर्ण प्रतियोगी बाजार की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। [2008]
Answer: पूर्ण प्रतियोगी बाजार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है।
2. व्यक्तिगत रूप से कोई भी वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता।
3. क्रेता और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
4. पूर्ण प्रतियोगी बाजार में वस्तु की एक ही कीमत होने की प्रवृत्ति पायी जाती है। यह बाजार मॉडल वास्तविक दुनिया में एक आदर्श स्थिति के रूप में कार्य करता है।
In simple words: पूर्ण प्रतियोगी बाजार वह होता है जहाँ बहुत सारे खरीदार और बेचने वाले होते हैं, सबको बाजार की पूरी जानकारी होती है, और वस्तु की कीमत एक समान रहती है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण प्रतियोगी बाजार की कम से कम तीन विशेषताओं को स्पष्ट रूप से बिंदुवार (point-wise) लिखें ताकि पूरे 2 अंक मिल सकें।

 

Question 2. किसी वस्तु के बाजार को प्रभावित करने वाले तत्वों की व्याख्या कीजिए।
Answer: वस्तु के बाजार का विस्तार निम्नलिखित दो बातों पर निर्भर करता है:
(क) वस्तु के गुण – किसी वस्तु के गुणों का प्रभाव बाजार पर पड़ता है जो अग्रवत् है:
1. वस्तु की विस्तृत माँग।
2. वस्तु की पर्याप्त पूर्ति।
3. वस्तु का टिकाऊपन।
4. वहनीयता।
5. वस्तुओं को ग्रेड या नमूनों में बाँटने की सुविधा
6. वस्तु का स्थानापन्न न होना।
7. वस्तु का विशेष उपयोग एवं फैशन।

(ख) देश की आन्तरिक दशाएँ
1. अन्तर्राष्ट्रीय मैत्री एवं सहयोग।
2. यातायात के साधन व उत्तम संचार-व्यवस्था।
3. देश में शान्ति, सुरक्षा तथा सुव्यवस्थित शासन-व्यवस्था।
4. उत्पादकों एवं व्यापारियों में विश्वास व नैतिकता।
5. कुशल मुद्रा व बैंकिंग प्रणाली
6. सरकार की व्यापारिक नीति।
7. पैकिंग का ढंग व शीत भण्डार की व्यवस्था। इन सभी कारकों के आपसी तालमेल से ही किसी भी बाजार का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है।
In simple words: किसी वस्तु का बाजार इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु के अपने गुण (जैसे टिकाऊपन, मांग) कैसे हैं और देश के अंदर की व्यवस्था (जैसे शांति, यातायात, बैंकिंग) कैसी है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर को (क) और (ख) दो मुख्य शीर्षकों में विभाजित करके लिखने से परीक्षक पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

Question 3. बाजार के आवश्यक तत्त्व बताइए। या बाजार की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। [2010, 11]
Answer: बाजार के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं:
1. एक क्षेत्र – वह समस्त क्षेत्र जिसमें किसी वस्तु के क्रेता व विक्रेता क्रय-विक्रय करते हैं।
2. एक वस्तु – अर्थशास्त्र में प्रत्येक वस्तु का बाजार अलग-अलग माना जाता है। बाजार के लिए एक वस्तु का होना आवश्यक है। आधुनिक युग में इंटरनेट के कारण बाजार का क्षेत्र भौगोलिक सीमाओं से परे विस्तृत हो चुका है।
In simple words: बाजार के लिए दो चीजें बहुत जरूरी हैं: पहला, वह क्षेत्र जहाँ खरीदार और विक्रेता मिल सकें, और दूसरा, वह वस्तु जिसका व्यापार किया जाना है।

🎯 Exam Tip: 'एक क्षेत्र' और 'एक वस्तु' को हेडिंग बनाकर उनके सामने एक-एक लाइन का स्पष्टीकरण जरूर लिखें।

3. क्रेता व विक्रेताओं का होना – बाजार में क्रेता व विक्रेताओं का होना आवश्यक है। इसके अभाव में बाजार नहीं हो सकता है।
4. स्वतन्त्र प्रतियोगिता – बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं में स्वतन्त्र प्रतियोगिता होनी चाहिए।
5. एक कीमत – बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति समान होनी चाहिए।

 

प्रश्न 4. किसी वस्तु के बाजार को विस्तृत बनाने वाले किन्हीं दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए। या बाजार के विस्तार को प्रभावित करने वाले दो तत्त्व बताइए।
उत्तर: वस्तु के बाजार को विस्तृत करने वाले तत्त्व निम्नलिखित हैं:
1. यातायात व सन्देशवाहन के साधन – किसी वस्तु के बाजार के विस्तार के लिए देश में यातायात व सन्देशवाहन के अच्छे, सस्ते व विकसित साधनों का उपलब्ध होना आवश्यक है। ये साधन व्यापार को सुगम और तीव्र बनाते हैं।
2. वस्तु की विस्तृत माँग – किसी वस्तु के बाजार के विस्तार के लिए वस्तु की माँग विस्तृत होनी चाहिए।
3. टिकाऊपन – बाजार के विस्तार के लिए वस्तु को टिकाऊ होना चाहिए।
In simple words: To make a market bigger, we need good transport to move goods easily, high demand from buyers, and products that last long without spoiling.

🎯 Exam Tip: Mention at least two points clearly with headings like 'यातायात के साधन' and 'वस्तु की माँग' to score full marks.

 

प्रश्न 5. क्षेत्र के आधार पर बाजार का विभाजन कीजिए। [2010]
उत्तर: क्षेत्र के आधार पर बाजार को निम्नलिखित बाजारों में विभाजित किया जा सकता है:
1. स्थानीय बाजार,
2. प्रादेशिक बाजार,
3. राष्ट्रीय बाजार,
4. अन्तर्राष्ट्रीय बाजार।
यह वर्गीकरण भौगोलिक सीमाओं के आधार पर किया जाता है।
In simple words: Markets can be divided based on area into local, regional, national, and international markets depending on how far the goods are traded.

🎯 Exam Tip: List all four types of markets clearly in a numbered sequence to get full marks.

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

 

प्रश्न 1. बाजार की परिभाषा दीजिए। [2015] या अर्थशास्त्र में बाजार से क्या तात्पर्य होता है?
उत्तर: कून के शब्दों में, “अर्थशास्त्र में ‘बाजार’ शब्द का अर्थ किसी ऐसे विशिष्ट स्थान से नहीं लगाते हैं जहाँ पर वस्तुओं का क्रय-विक्रय होती है, बल्कि उस समस्त क्षेत्र से लगाते हैं जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं के मध्य आपस में इस प्रकार का सम्पर्क हो कि किसी वस्तु का मूल्य सरलता एवं शीघ्रता से समान हो जाए।” इस प्रकार, बाजार एक क्षेत्र है न कि कोई एक निश्चित स्थान।
In simple words: In economics, a market is not just a physical shop or place, but the entire area where buyers and sellers can easily contact each other to trade goods.

🎯 Exam Tip: Write the definition given by 'कून' exactly in double quotes to impress the examiner.

 

प्रश्न 2. अति-अल्पकालीन बाजार क्या है ? [2010]
उत्तर: जब किसी वस्तु की माँग बढ़ने से उसका लेशमात्र भी सम्भरण (पूर्ति) बढ़ाने का समय नहीं मिलता तब ऐसे बाजार को अति-अल्पकालीन बाजार कहते हैं अर्थात् पूर्ति की मात्रा केवल भण्डार तक ही सीमित होती है। इसे दैनिक बाजार भी कहते हैं। शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं – दूध, सब्जी, मछली, बर्फ आदि – का बाजार अति-अल्पकालीन बाजार होता है। ऐसे बाजार में मूल्य निर्धारण में माँग की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: A very short-period market is one where the supply of goods cannot be increased at all when demand rises, usually because the goods are perishable like milk or vegetables.

🎯 Exam Tip: Always give examples like milk, vegetables, or fish to clearly explain very short-period markets.

 

प्रश्न 3. एकाधिकार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर: जिस बाजार में वस्तु का केवल एक उत्पादक या विक्रेता होता है, उसे एकाधिकार बाजार कहते हैं। एकाधिकार बाजार प्रतियोगितारहित बाजार होता है। इसमें एकाधिकारी (Monopolist) अपनी वस्तु की कीमत अपनी इच्छानुसार निर्धारित करता है। इस बाजार में कोई निकटतम स्थानापन्न वस्तु उपलब्ध नहीं होती है।
In simple words: Monopoly is a market where there is only one seller of a product, so they have full control over the price and face no competition.

🎯 Exam Tip: Highlight the keyword 'एक उत्पादक या विक्रेता' (single seller) and 'प्रतियोगितारहित' (no competition) to secure full marks.

 

प्रश्न 4. पूर्ण बाजार की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: पूर्ण बाजार की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. पूर्ण बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है।
2. क्रेताओं और विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
3. पूर्ण बाजार में वस्तु की कीमत की प्रवृत्ति एकसमान होती है।
इसके अलावा, बाजार में फर्मों के प्रवेश और निकास की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
In simple words: A perfect market has many buyers and sellers, everyone knows the market prices, and the price of the product remains the same everywhere.

🎯 Exam Tip: Write all three points clearly with numbers to ensure you get full marks for this question.

 

Question 5. अल्पकालीन बाजार से क्या आशय है? [2006]
Answer: अल्पकालीन बाजार में माँग और पूर्ति में सन्तुलन के लिए कुछ समय मिलता है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होता। पूर्ति में माँग के अनुसार कुछ सीमा तक घट-बढ़ की जा सकती है, किन्तु यह पर्याप्त नहीं होती। अल्पकालीन बाजार में समय की कमी के कारण पूर्ति को पूरी तरह से मांग के अनुरूप ढालना असंभव होता है।
In simple words: A short-period market is one where there is very little time to adjust the supply of goods according to their demand.

🎯 Exam Tip: Mention the role of time in determining supply to score full marks.

 

Question 6. पूर्ण प्रतियोगी बाजार से आप क्या समझते हैं? [2006]
Answer: ऐसा बाजार जिसमें क्रेताओं व विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है तथा व्यक्तिगत रूप से कोई भी वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता। इस प्रकार के बाजार में सभी फर्में समान वस्तुएं बेचती हैं।
In simple words: In a perfect market, there are so many buyers and sellers that no single person can change the price of a product on their own.

🎯 Exam Tip: Highlight that individual buyers or sellers are price takers, not price makers.

 

Question 7. दीर्घकालीन बाजार से क्या अभिप्राय है?
Answer: जब किसी वस्तु का बाजार कई वर्षों के लम्बे समय के लिए होता है, तो उसे दीर्घकालीन बाजार कहते हैं। ऐसे बाजार में माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है तथा वस्तु का मूल्य उसके उत्पादन व्यय के बराबर होता है। दीर्घकाल में उत्पादक अपनी उत्पादन क्षमता को पूरी तरह से बदल सकते हैं।
In simple words: A long-period market gives producers enough time to change their supply completely to match the demand.

🎯 Exam Tip: Remember that in the long run, price tends to equal the minimum cost of production.

 

Question 8. अपूर्ण प्रतियोगी बाजार की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2008]
Answer: अपूर्ण प्रतियोगी बाजार की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
(1) सीमित मात्रा में प्रतियोगिता।
(2) बाजार कीमत में भिन्नता।
(3) क्रेताओं व विक्रेताओं को भिन्नता बाजार का अपूर्ण ज्ञान। इस बाजार में विज्ञापन और प्रचार का भी बहुत महत्व होता है।
In simple words: In an imperfect market, there is less competition, prices of similar goods can vary, and buyers do not have full information about the market.

🎯 Exam Tip: List all three points clearly with proper numbering to secure maximum marks.

 

Question 9. बाजार की किस दशा में वस्तु की कीमत उत्पादन लागत के बराबर होती है ?
Answer: पूर्ण बाजार में। पूर्ण बाजार में दीर्घकाल में फर्मों को केवल सामान्य लाभ ही प्राप्त होता है।
In simple words: In a perfectly competitive market, the price of a product becomes equal to its cost of making in the long run.

🎯 Exam Tip: Write "पूर्ण बाजार" (Perfect Market) clearly as the direct answer.

 

Question 10. भौगोलिक दृष्टि से सोने-चाँदी का बाजार कैसा होता है ?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय बाजार। सोने और चाँदी जैसी मूल्यवान धातुओं की मांग पूरी दुनिया में होती है।
In simple words: Gold and silver have an international market because they are bought and sold across different countries worldwide.

🎯 Exam Tip: Clearly state "अन्तर्राष्ट्रीय बाजार" (International Market) for geographical classification of precious metals.

 

Question 11. बाजार में किस प्रकार के बाजार के अन्तर्गत कीमत-स्तर स्थिर होता है ?
Answer: पूर्ण बाजार के अन्तर्गत। पूर्ण प्रतियोगिता में सभी फर्में एक समान कीमत पर ही वस्तुएं बेचती हैं।
In simple words: In a perfect market, the price level remains stable because all sellers sell identical products at the same price.

🎯 Exam Tip: Mention "पूर्ण बाजार" (Perfect Market) as the market form where price remains constant for all sellers.

 

Question 12. जब बाजार में प्रतियोगिता सीमित मात्रा में हो, वह कैसा बाजार कहलाएगा ?
Answer: अपूर्ण बाजार। ऐसे बाजार में कुछ ही विक्रेता होते हैं जो कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।
In simple words: When competition is limited and not perfect, it is called an imperfect market.

🎯 Exam Tip: Use the term "अपूर्ण बाजार" (Imperfect Market) to describe limited competition.

 

Question 13. जब बाजार में प्रतियोगिता का अभाव हो तो उस बाजार को किस प्रकार का बाजार कहते हैं?
Answer: एकाधिकार बाजार। एकाधिकार बाजार में केवल एक ही उत्पादक या विक्रेता होता है।
In simple words: When there is no competition at all because there is only one seller, it is called a monopoly market.

🎯 Exam Tip: "एकाधिकार" (Monopoly) means single seller; highlight this definition in your answer.

 

Question 14. किस प्रकार के बाजार में वस्तुओं का क्रय-विक्रय नियन्त्रित मूल्यों पर होता है ?
Answer: अधिकृत या वैधानिक बाजार में। सरकार ऐसे बाजारों में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाती है।
In simple words: In a regulated or legal market, goods are bought and sold at prices controlled by the government or authorities.

🎯 Exam Tip: Use terms like "अधिकृत" (Authorized) or "वैधानिक" (Legal/Regulated) market.

 

Question 15. पूर्ण बाजार की दो आवश्यक दशाएँ लिखिए।
Answer: पूर्ण बाजार की दो आवश्यक दशाएँ निम्नलिखित हैं:
(1) क्रेता-विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है।
(2) पूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है। इसके अतिरिक्त, बाजार में समरूप वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है।
In simple words: For a perfect market, buyers and sellers must have complete knowledge of prices, and there must be free competition.

🎯 Exam Tip: Present both points with clear numbering to make it easy for the examiner to grade.

 

Question 16. आर्थिक बाजार के दो आवश्यक गुण बताइए।
Answer: आर्थिक बाजार के दो आवश्यक गुण निम्नलिखित हैं:
(1) क्रेता तथा विक्रेताओं का होना।
(2) परस्पर प्रतियोगिता का पाया जाना। इन दोनों तत्वों के बिना किसी भी बाजार की कल्पना नहीं की जा सकती।
In simple words: The two main features of an economic market are the presence of buyers and sellers, and competition between them.

🎯 Exam Tip: Remember that a physical place is not necessary for a market; buyers, sellers, and competition are the real essentials.

 

Question 17. “बाजार किसी स्थान को नहीं बताता, वरन वह किसी वस्तु अथवा वस्तुओं तथा उनके ग्राहकों और विक्रेताओं की ओर संकेत करता है, जो एक-दूसरे के साथ सीधी प्रतियोगिता करते हों।” यह परिभाषा किस अर्थशास्त्री की है ?
Answer: चैपमैन की। चैपमैन ने बाजार को एक भौगोलिक क्षेत्र के बजाय क्रियात्मक संबंध के रूप में परिभाषित किया है।
In simple words: This definition was given by Chapman, who explained that a market is not just a physical place but a network of buyers and sellers in competition.

🎯 Exam Tip: Memorize the name "चैपमैन" (Chapman) as definitions are often asked directly in exams.

 

Question 18. वस्तु-विभेद किस बाजार का प्रमुख लक्षण होता है? [2011, 13]
Answer: वस्तु-विभेद अपूर्ण प्रतियोगिता वाले बाजार का प्रमुख लक्षण है। इसमें उत्पादक अपनी वस्तु को दूसरों से अलग दिखाने के लिए ब्रांडिंग का सहारा लेते हैं।
In simple words: Product differentiation (making products look different from each other) is a key feature of an imperfectly competitive market.

🎯 Exam Tip: "वस्तु-विभेद" (Product differentiation) is the most important feature of monopolistic competition (अपूर्ण प्रतियोगिता).

 

Question 19. अण्डे के बाजार को किस वर्गीकरण में रखा जाएगा?
Answer: स्थानीय बाजार। अण्डे जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार आमतौर पर स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहता है।
In simple words: The market for eggs is classified as a local market because eggs can spoil quickly and are usually sold nearby.

🎯 Exam Tip: Perishable goods like eggs, milk, and vegetables always belong to the "स्थानीय बाजार" (Local Market).

 

Question 20. गेहूं व सब्जियों के बाजार को क्षेत्र के आधार पर कौन-से बाजार की संज्ञा दी जाती है?
Answer: स्थानीय बाजार। सब्जियों जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं का बाजार स्थानीय होता है, जबकि गेहूं का बाजार अधिक विस्तृत हो सकता है परंतु यहाँ दिए गए संदर्भ में इसे स्थानीय बाजार की श्रेणी में रखा गया है।
In simple words: Based on area, the market for vegetables and daily food items is classified as a local market.

🎯 Exam Tip: Be careful to distinguish between perishable goods (local) and durable agricultural goods (national/regional) if asked separately.

Question 21. एकाधिकारी बाजार का अर्थ लिखिए। [2016]
Answer: जिस बाजार में वस्तु का केवल एक उत्पादक या विक्रेता होता है, उसे एकाधिकारी बाजार कहते हैं। इस प्रकार के बाजार में प्रतियोगिता का पूर्णतः अभाव पाया जाता है।
In simple words: A monopoly market is a market where there is only one seller or producer of a product, meaning there are no competitors.

🎯 Exam Tip: Clearly define 'monopoly' by emphasizing the single seller aspect to secure full marks.

 

Question 22. किस बाजार में एक फर्म की औसत आगम उसकी सीमान्त आगम के बराबर होती है ? [2010]
Answer: पूर्ण प्रतियोगिता के बाजार में। इस बाजार में सभी फर्में समान कीमत पर वस्तुएं बेचती हैं।
In simple words: In a perfect competition market, the average revenue (price) is always equal to the marginal revenue because prices remain constant.

🎯 Exam Tip: Remember that AR = MR is a unique characteristic of a perfectly competitive market.

 

Question 23. एकाधिकारी के अन्तर्गत कितने उत्पादक होते हैं? [2016]
Answer: केवल एक। एकाधिकार बाजार में उत्पादक ही पूरी आपूर्ति को नियंत्रित करता है।
In simple words: Under a monopoly, there is only one single producer or seller of the product in the entire market.

🎯 Exam Tip: Write "only one" clearly as it is a direct one-word or one-sentence answer.

 

बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

 

Question 1. सोने एवं चाँदी का बाजार होता है
(a) दैनिक
(b) अल्पकालीन
(c) दीर्घकालीन
(d) अति-दीर्घकालीन
Answer: (d) अति-दीर्घकालीन
In simple words: Gold and silver are durable goods whose supply can be adjusted over a very long period, making their market secular or very long-term.

🎯 Exam Tip: Durable precious metals like gold and silver always have a very long-term (secular) market.

 

Question 2. सोने-चाँदी का बाजार है
(a) स्थानीय बाजार
(b) प्रादेशिक बाजार
(c) राष्ट्रीय बाजार
(d) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
Answer: (d) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
In simple words: Gold and silver are traded globally across different countries, which is why they have an international market.

🎯 Exam Tip: Since precious metals have high value and universal demand, their market is international.

 

Question 3. सामान्यतः ईंट का बाजार होता है [2012]
(a) स्थानीय बाजार
(b) प्रादेशिक बाजार
(c) राष्ट्रीय बाजार
(d) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
Answer: (a) स्थानीय बाजार
In simple words: Bricks are heavy and cheap, so they are not transported to far-off places, making their market local or regional.

🎯 Exam Tip: Heavy and low-value goods like bricks generally have a local or local-area market.

 

Question 4. नेहरू जी की आत्मकथा’ पुस्तक का बाजार है
(a) स्थानीय बाजार
(b) प्रादेशिक बाजार
(c) राष्ट्रीय बाजार
(d) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
Answer: (d) अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
In simple words: Books written by world-famous leaders like Nehru are read and sold all over the world, so they have an international market.

🎯 Exam Tip: Famous literary works and biographies of global leaders have an international audience and market.

 

Question 5. निम्नलिखित में से किस बाजार में औसत आगम एवं सीमान्त आगम सदैव बराबर होता है? [2015]
या
\( AR = MR \) निम्नलिखित में से किस व्यापार की एक आवश्यक दशा है? [2012]

(a) एकाधिकार बाजार
(b) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(c) अपूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(d) None of the options
Answer: (b) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
In simple words: In perfect competition, the price of the product remains constant, so the average revenue is always equal to the marginal revenue.

🎯 Exam Tip: Remember the condition AR = MR = Price is only possible under perfect competition.

 

Question 6. ‘जब वस्तुओं की माँग बढ़ने पर इतना समय मिल जाए कि उत्पादकों द्वारा उत्पादन में वृद्धि करके पूर्ति को माँग के अनुसार बढ़ाया जा सके ऐसे बाजार को कहते हैं
(a) अति-अल्पकालीन बाजार
(b) अति-दीर्घकालीन बाजार
(c) दीर्घकालीन बाजार
(d) अल्पकालीन बाजार
Answer: (b) अति-दीर्घकालीन बाजार
In simple words: When there is enough time to completely change the scale of production to match the demand, it is called a very long-period or secular market.

🎯 Exam Tip: When supply can be fully adjusted to match demand changes, it represents a very long-run market situation.

 

Question 7. पूर्ण बाजार की विशेषताएँ हैं।
(a) क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या
(b) गलाकाट प्रतियोगिता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) None of the options
Answer: (c) (a) और (b) दोनों
In simple words: A perfect market has a large number of buyers and sellers, and intense competition among them to sell products.

🎯 Exam Tip: Read all options carefully before choosing "both" or "all of the options" to ensure accuracy.

 

Question 8. बाजार का विस्तार होता है
(a) आतंकवाद से
(b) असुरक्षा से
(c) अशांति से
(d) देश में शान्ति एवं सुरक्षा से
Answer: (d) देश में शान्ति एवं सुरक्षा से
In simple words: A market grows and expands when there is peace and safety in the country, as people can trade without fear.

🎯 Exam Tip: Remember that peace and security are essential infrastructure for any business or market to thrive.

 

Question 9. अति-दीर्घकालीन बाजार में पूर्ति का स्वरूप हो सकता है
(a) पूर्ति को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है।
(b) पूर्ति को माँग के बराबर नहीं बढ़ाया जा सकता है।
(c) पूर्ति को माँग के अनुसार बढ़ाने के लिए समय नहीं मिल पाता है।
(d) None of the options
Answer: (a) पूर्ति को स्थायी रूप से माँग के बराबर किया जा सकता है।
In simple words: In the very long run, sellers have enough time to adjust their supply completely to match any changes in demand.

🎯 Exam Tip: In the very long run (अति-दीर्घकाल), all factors of production are variable, allowing supply to fully adapt to demand.

 

Question 10. पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति है
(a) वास्तविक
(b) काल्पनिक
(c) वास्तविक और काल्पनिक
(d) None of the options
Answer: (b) काल्पनिक
In simple words: Perfect competition is an imaginary or theoretical concept because real-world markets always have some imperfections.

🎯 Exam Tip: Highlight that perfect competition is a theoretical benchmark rather than a practical market structure found in reality.

 

Question 11. अपूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति उत्पन्न होने का कारण है
(a) क्रेता और विक्रेताओं की संख्या का अधिक होना
(b) क्रेता तथा विक्रेताओं की कम संख्या होना।
(c) क्रेता तथा विक्रेताओं को बाजार का पूर्ण ज्ञान होना
(d) None of the options
Answer: (b) क्रेता तथा विक्रेताओं की कम संख्या होना।
In simple words: Imperfect competition happens when there are fewer buyers and sellers, meaning they can influence the market prices.

🎯 Exam Tip: Fewer buyers and sellers prevent the market from reaching perfect competition, leading to imperfect market conditions.

 

Question 12. निम्नलिखित में से कौन-सी पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की विशेषता नहीं है?
(a) क्रेताओं-विक्रेताओं की संख्या अत्यधिक होना
(b) वस्तु का समरूप होना
(c) फर्मों के प्रवेश एवं बहिर्गमन की स्वतन्त्रता
(d) विज्ञापन एवं गैर-कीमत प्रतियोगिता का होना
Answer: (d) विज्ञापन एवं गैर-कीमत प्रतियोगिता का होना
In simple words: In perfect competition, products are identical, so there is no need for advertising or non-price competition.

🎯 Exam Tip: Advertising and selling costs are features of monopolistic competition, not perfect competition.

 

Question 13. समान कीमत किस बाजार की विशेषता है? [2007]
(a) एकाधिकार
(b) पूर्ण प्रतियोगिता
(c) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
(d) None of the options
Answer: (b) पूर्ण प्रतियोगिता
In simple words: In a perfectly competitive market, all identical goods must be sold at the exact same price everywhere.

🎯 Exam Tip: Uniform price (समान कीमत) is a key feature of perfect competition because buyers and sellers have perfect knowledge.

 

Question 14. वस्तु-विभेद किस बाजार में पाया जाता है? [2007, 13]
(a) पूर्ण प्रतियोगिता
(b) एकाधिकार
(c) अपूर्ण प्रतियोगिता
(d) None of the options
Answer: (b) एकाधिकार
In simple words: Product differentiation or price discrimination can be practiced by a monopoly seller who has full control over the market.

🎯 Exam Tip: Follow your textbook's specific classification for market features to ensure you get full marks in the exam.

 

Question 15. पूर्ण प्रतियोगी बाजार में [2006]
(a) सीमान्त आगम से औसत आगम अधिक होती है।
(b) सीमान्त आगम से औसत आगम कम होती है।
(c) सीमान्त आगम औसत आगम के समान होती है।
(d) औसत आगम और सीमान्त आगम में कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
Answer: (c) सीमान्त आगम औसत आगम के समान होती है।
In simple words: In perfect competition, since the price remains constant, the average revenue (AR) is always equal to the marginal revenue (MR).

🎯 Exam Tip: Remember the relationship \( \text{AR} = \text{MR} = \text{Price} \) is a unique characteristic of a perfectly competitive market.

 

Question 16. किसी शहर की दूध-मण्डी, उदाहरण है [2007]
(a) स्थानीय बाजार का
(b) प्रादेशिक बाजार का
(c) राष्ट्रीय बाजार का
(d) None of the options
Answer: (a) स्थानीय बाजार का
In simple words: A local milk market serves only the nearby city area because milk is perishable and sold quickly nearby.

🎯 Exam Tip: Perishable goods like milk and vegetables are always traded in local markets (स्थानीय बाजार).

 

Question 17. बाजार की शक्तियों से क्या अभिप्राय है? [2014]
(a) माँग और पूर्ति
(b) माँग और कीमत
(c) पूर्ति और कीमत
(d) None of the options
Answer: (a) माँग और पूर्ति
In simple words: Market forces refer to demand (what buyers want) and supply (what sellers have). Together, these two forces decide the prices of goods in the market.

🎯 Exam Tip: Always identify demand and supply as the two core market forces. Mentioning their role in price determination helps in securing maximum marks.

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