UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 Environment and Natural Resources

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Detailed Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन UP Board Solutions for Class 12 Civics

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Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन UP Board Solutions PDF

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 Text Book Questions

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 पाठयपुस्तक से अभ्यास प्रश्न

 

Question 1. पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का क्या कारण है? निम्नलिखित में सबसे बेहतर विकल्प चुनें- (क) विकसित देश प्रकृति की रक्षा को लेकर चिन्तित हैं। (ख) पर्यावरण की सुरक्षा मूलवासी लोगों और प्राकृतिक पर्यावासों के लिए जरूरी है। (ग) मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान खतरे की हद तक पहुँच गया है। (घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ग) मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान खतरे की हद तक पहुँच गया है।
In simple words: The growing concern for the environment stems from significant damage caused by human activities, pushing the ecosystem to a dangerous threshold.

🎯 Exam Tip: When answering multiple-choice questions, carefully read all options to identify the most comprehensive and accurate reason. Focus on identifying the primary cause of environmental degradation mentioned.

 

Question 2. निम्नलिखित कथनों में प्रत्येक के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ। ये कथन पृथ्वीसम्मेलन के बारे में हैं (क) इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भाग लिया। (ख) यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्त्वावधान में हुआ । (ग) वैश्विक पर्यावरण मुद्दों ने पहली बार राजनीतिक धरातल पर ठोस आकार ग्रहण किया। (घ) यह महासम्मेलनी बैठक थी।
Answer:
(क) इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भाग लिया।
(ख) यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्त्वावधान में हुआ।
(ग) वैश्विक पर्यावरण मुद्दों ने पहली बार राजनीतिक धरातल पर ठोस आकार ग्रहण किया।
(घ) यह महासम्मेलनी बैठक थी ।
In simple words: The Earth Summit involved many nations, NGOs, and corporations under UN leadership, marking the first time global environmental issues gained significant political attention, signifying a major gathering.

🎯 Exam Tip: For true/false questions about historical events, verify each statement against known facts about the event (e.g., participants, organizers, key outcomes) to ensure accuracy.

 

Question 3. 'विश्व की साझी विरासत' के बारे में निम्नलिखित में कौन-से कथन सही हैं- (क) धरती का वायुमण्डल, अण्टार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अन्तरिक्ष को 'विश्व की साझी विरासत' माना जाता है। (ख) 'विश्व की साझी विरासत' किसी राज्य के सम्प्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आते। (ग) ‘विश्व की साझी विरासत' के प्रबन्धन के सवाल पर उत्तरी व दक्षिणी देशों के बीच मतभेद है। (घ) उत्तरी गोलार्द्ध के देश 'विश्व की साझी विरासत' को बचाने के लिए दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों से कहीं ज्यादा चिन्तित हैं।
Answer:
(क) धरती का वायुमण्डल, अण्टार्कटिका, समुद्री सतह व बाहरी अन्तरिक्ष को विश्व की साझी विरासत माना जाता है। (सही)
(ख) 'विश्व की साझी विरासत' किसी राज्य के सम्प्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आती। (सही)
(ग) 'विश्व की साझी विरासत' के प्रबन्धन के सवाल पर उत्तरी व दक्षिणी देशों के बीच मतभेद है। (सही)
(घ) उत्तरी गोलार्द्ध के देश विश्व की साझी विरासत' को बचाने के लिए दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों से कहीं ज्यादा चिन्तित हैं। (गलत)
In simple words: Global common heritage includes shared spaces like the atmosphere and Antarctica, not under national sovereignty, and its management sees conflict between developed and developing nations, with northern countries showing less concern than southern ones.

🎯 Exam Tip: When evaluating statements about "global commons," understand their definition (beyond national jurisdiction) and recognize the differing perspectives of developed and developing nations regarding their preservation.

 

Question 4. रियो सम्मेलन के क्या परिणाम हुए?
Answer: रियो सम्मेलन (पृथ्वी सम्मेलन) संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्त्वावधान में सन् 1992 में ब्राजील के शहर रियो-डी-जेनेरियो में सम्पन्न हुआ । इस सम्मेलन में 170 देशों, हजारों स्वयंसेवी संगठनों तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगमों ने भाग लिया। यह सम्मेलन पर्यावरण व विकास के मुद्दे पर केन्द्रित था। इस सम्मेलन के अग्रलिखित परिणाम हुए-
(1) इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप विश्व राजनीति के दायरे में पर्यावरण को लेकर बढ़ते सरोकारों को एक ठोस रूप मिला।
(2) रियो सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी के सम्बन्ध में कुछ नियमाचार निर्धारित किए गए।
(3) भविष्य के विकास के लिए 'एजेण्डा-21' प्रस्तावित किया गया जिसमें विकास के कुछ तौर-तरीके भी सुझाए गए। इसमें टिकाऊ विकास की धारणा को विकास रणनीति के रूप में समर्थन प्राप्त हुआ ।
(4) इस सम्मेलन में पर्यावरण रक्षा के बारे में धनी व गरीब देशों अथवा उत्तरी गोलार्द्ध व दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के दृष्टिकोण में मतभेद उभरकर सामने आए। भारत व चीन तथा ब्राजील जैसे विकासशील देशों का तर्क था कि चूंकि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन विकसित देशों ने अधिक किया है, अतः वे पर्यावरण प्रदूषण के लिए अधिक उत्तरदायी हैं। अतः उन्हें पर्यावरण रक्षा हेतु अधिक संसाधन व प्रौद्योगिकी आदि उपलब्ध कराना चाहिए। कई धनी देश इस तर्क से सहमत नहीं थे।
(5) अन्ततः रियो सम्मेलन ने यह स्वीकार किया कि अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के निर्माण, प्रयोग और व्याख्या में विकासशील देशों की विशिष्ट जरूरतों का लेकिन अलग-अलग भूमिका का सिद्धान्त स्वीकृत किया गया। इस सिद्धान्त का तात्पर्य है कि पर्यावरण के विश्वव्यापी क्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है जिसे देखते हुए विभिन्न राष्ट्रों की पर्यावरण रक्षा के प्रति साझी, किन्तु अलग-अलग जिम्मेदारी होगी ।
संक्षेप में, रियो सम्मेलन के बाद पर्यावरण का प्रश्न विश्व राजनीति में महत्त्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा।
In simple words: The Rio Summit of 1992 solidified environmental concerns in global politics, establishing norms for climate change and biodiversity, introducing Agenda-21 for sustainable development, and acknowledging differentiated responsibilities between rich and poor nations for environmental protection.

🎯 Exam Tip: When detailing the outcomes of significant international conferences like the Rio Summit, ensure to cover its primary objectives, key agreements (like Agenda-21), and the impact on global policy and North-South relations regarding environmental issues.

 

Question 5. 'विश्व की साझी विरासत' का क्या अर्थ है? इसका दोहन व प्रदूषण कैसे होता है?
Answer: साझी विरासत का अर्थ साझी विरासत का अर्थ उन संसाधनों से है जिन पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अधिकार होता है। समुदाय स्तर पर नदी, कुआँ, चरागाह आदि साझी सम्पदा के उदाहरण हैं।
विश्व स्तर पर कुछ संसाधन तथा क्षेत्र ऐसे हैं जो किसी एक देश के सम्प्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं, इसलिए उनका प्रबन्धन साझे तौर पर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है। इसे विश्व सम्पदा या मानवता की साझी विरासत कहा जाता है। इस साझी विरासत में पृथ्वी का वायुमण्डल, अण्टार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अन्तरिक्ष शामिल हैं।
विश्व की साझी विरासत का दोहन व प्रदूषण साझी विरासत के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन व इनके प्रदूषण का क्रम जारी है। उदाहरण के लिए, यद्यपि सन् 1959 के बाद अण्टार्कटिका महाप्रदेश में मानवीय गतिविधियाँ वैज्ञानिक अनुसन्धान, मत्स्य आखेट और पर्यटन तक सीमित रही हैं परन्तु इसके बावजूद इस महादेश के कुछ हिस्से अवशिष्ट पदार्थ, जैसे तेल का रिसाव, के कारण अपनी गुणवत्ता खो रहे हैं। भारत ने अनुसन्धान हेतु अण्टार्कटिका प्रदेश में कई वैज्ञानिक दल भेजे हैं तथा वहाँ भारत का गंगोत्री नामक स्थायी अनुसन्धान केन्द्र भी स्थित है।
इसी तरह क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैसों के असीमित उत्सर्जन के कारण वायुमण्डल की ओजोन परत का - क्षरण हो रहा है। 1980 के दशक के मध्य में अण्टार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छेद की खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है। ओजोन परत के क्षय होने पर सूरज की पराबैंगनी किरणें मनुष्यों तथा फसलों व पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती हैं।
तटीय क्षेत्रों में औद्योगिकी व व्यावसायिक गतिविधियों के कारण समुद्री सतह प्रदूषित हो रही है। कई बार तेल समुद्री सतह पर परत के रूप में फैल जाता है, जिससे समुद्री जीवों व वनस्पतियों को नुकसान होता है। इसी प्रकार पर्यावरण प्रदूषण से ग्रीन हाऊस गैसों की मात्रा बढ़ जाती है तथा वायुमण्डल व जलीय स्रोत भी प्रभावित होते हैं। इस प्रदूषण से पारिस्थितिकी व जलवायु परिवर्तन पर विपरीत प्रभाव पड़ते हैं।
साझी विरासत की सुरक्षा हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण समझौते; जैसे-अण्टार्कटिका सन्धि (1959) माण्ट्रियल प्रोटोकॉल (1991) हो चुके हैं। परन्तु पारिस्थितिक सन्तुलन के सम्बन्ध में अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते रहते हैं, जिससे विश्व समुदाय में सहयोग हेतु आम सहमति बनाना कठिन है।
In simple words: "Global common heritage" refers to resources beyond national jurisdiction, like the atmosphere and Antarctica, managed collectively. Over-exploitation and pollution occur through activities like waste dumping in Antarctica, ozone depletion from CFCs, and marine pollution from industrial activities and oil spills, threatening ecological balance.

🎯 Exam Tip: Define "global common heritage" clearly, listing examples. For its exploitation and pollution, provide specific instances (e.g., Antarctica, ozone layer, marine pollution) and mention relevant international agreements as a protective measure.

 

Question 6. 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' से क्या अभिप्राय है? हम इस विचार को कैसे लागू कर सकते हैं?
Answer: विश्व पर्यावरण की रक्षा के सम्बन्ध में 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' सिद्धान्त के प्रतिपादन का तात्पर्य है कि चूंकि विश्व पर्यावरण की रक्षा में विकसित देशों की जिम्मेदारी अधिक है। यह जिम्मेदारी विकसित व विकासशील देशों के लिए बराबर नहीं हो सकती । इसके अलावा अभी गरीब देश विकास के पथ पर गुजर रहे हैं, अतः उनके ऊपर पर्यावरण रक्षा की जिम्मेदारी विकसित देशों के बराबर नहीं हो सकती। इस प्रकार रियो सम्मेलन ने माना कि अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के निर्माण, प्रयोग और व्याख्या में विकासशील देशों की विशिष्ट जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।
इसी सन्दर्भ में रियो घोषणा-पत्र का कहना है कि “धरती के पारिस्थितिकी तन्त्र की अखण्डता व गुणवत्ता की बहाली सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए सभी राष्ट्र विश्व बन्धुत्व की भावना से आपस में सहयोग करेंगे। पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राष्ट्रों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राष्ट्रों की साझी, किन्तु अलग-अलग जिम्मेदारी होगी ।”
साझी जिम्मेदारी तथा अलग-अलग भूमिका के सिद्धान्त को लागू करने के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न देशों द्वारा पर्यावरण प्रदूषण के लिए उत्तरदायी गैसों के उत्सर्जन व तत्त्वों के प्रयोग का आकलन किया जाए तथा प्रदूषण रोकने के प्रयासों में उसी अनुपात में उस देश की जिम्मेदारी तय की जाए। पुनः चूँकि पर्यावरण प्रदूषण का मुद्दा एक साझा वैश्विक मुद्दा है अतः विकसित देशों को आधुनिक प्रौद्योगिकी का विकास कर गरीब देशों को उपलब्ध कराना आवश्यक है।
जो देश अभी तक प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं कर पाए हैं तथा अभी विकास की प्रक्रिया में पीछे हैं, उन्हें आधुनिक प्रौद्योगिकी व तकनीक प्रदान कर पर्यावरण रक्षा हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अन्यथा ऐसे देश 'टिकाऊ विकास' (Sustainable Development) की रणनीति को अपनाने हेतु आकर्षित नहीं होंगे। इसी सिद्धान्त के आधार पर जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में क्योटो प्रोटोकॉल, सन् 1997 में चीन तथा भारत जैसे विकासशील देशों को फ्लोरोफ्लोरो कार्बन के उत्सर्जन की सीमा में छूट दी गई है।
In simple words: "Common but differentiated responsibilities" acknowledges that all nations share environmental protection goals, but developed countries, due to historical emissions and greater resources, bear a larger burden than developing ones. Implementing this involves assessing each nation's environmental impact, providing advanced technology to poorer nations, and allowing developing economies flexibility in emission targets, as seen in the Kyoto Protocol.

🎯 Exam Tip: Explain the rationale behind "common but differentiated responsibilities" by distinguishing between the historical roles and current capacities of developed and developing nations. Illustrate its application with examples like the Kyoto Protocol and the transfer of green technologies.

 

Question 7. वैश्विक पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे 1990 के दशक से विभिन्न देशों के प्राथमिक सरोकार क्यों बन गए हैं?
Answer: वैश्विक पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे 1990 के दशक में निम्नलिखित कारणों से विभिन्न देशों में प्राथमिक सरोकार बन गए हैं-
(1) दुनिया में जहाँ जनसंख्या बढ़ रही है वहीं कृषि योग्य भूमि में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जलाशयों की जलराशि में कमी तथा उनका प्रदूषण, चरागाहों की समाप्ति तथा भूमि के अधिक सघन उपयोग से उसकी उर्वरता कम हो रही है तथा खाद्यान्न उत्पादन जनसंख्या के अनुपात से कम हो रहा है।
(2) संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्व विकास रिपोर्ट, 2006 के अनुसार जल स्रोतों के प्रदूषण के कारण दुनिया की एक अरब बीस करोड़ जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता। 30 लाख से ज्यादा बच्चे प्रदूषण के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं।
(3) वनों के कटाव से जैव-विविधता का क्षरण तथा विपरीत जलवायु परिवर्तन का खतरा उत्पन्न हो गया है।
(4) फ्लोरोफ्लोरो कार्बन, गैसों के उत्सर्जन से जहाँ वायुमण्डल की ओजोन परत का क्षय हो रहा है, वहीं ग्रीन हाऊस गैसों के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या खड़ी हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग से कई देशों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ गया है।
(5) समुद्र तटीय क्षेत्रों के प्रदूषण के कारण समुद्री पर्यावरण की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। चूंकि विश्व समुदाय को यह आभास हो गया है कि उक्त समस्याएँ वैश्विक हैं तथा इनका समाधान बिना वैश्विक सहयोग के सम्भव नहीं है, अतः पर्यावरण का मुद्दा विश्व राजनीति का भी अंग बन गया है। प्रत्येक राष्ट्र समूह (विकसित व विकासशील) अपने हितों को ध्यान में रखकर पर्यावरण रक्षा का एजेण्डा प्रस्तुत कर रहा है। परिणामस्वरूप, सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वावधान में विश्व पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया। विशेष रूप से इस सम्मेलन के बाद पर्यावरण व विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं, यथा-टिकाऊ विकास, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जैविक विविधता, मूल देशी जनता के अधिकार व अलग-अलग भूमिका की धारणा पर विस्तार से चर्चा की गई।
उक्त पृष्ठभूमि में पर्यावरण का मुद्दा विभिन्न राष्ट्रों के लिए प्रथम सरोकार के रूप में उभरकर सामने आया। हए।
In simple words: Environmental issues became a primary concern in the 1990s due to increasing population pressure on diminishing agricultural land and water resources, widespread water pollution causing health crises, deforestation leading to biodiversity loss and climate change, ozone layer depletion, global warming, and marine pollution. These interconnected global threats necessitated international cooperation, culminating in major conferences like the 1992 Earth Summit, which brought environmental and developmental aspects into global political discourse.

🎯 Exam Tip: To answer why environmental issues gained prominence, list specific problems (population growth, resource depletion, pollution, climate change, biodiversity loss) and emphasize their global, interconnected nature which compelled international political attention and cooperation.

 

Question 8. पृथ्वी को बचाने के लिए जरूरी है कि विभिन्न देश सुलह व सहकार की नीति अपनाएँ। पर्यावरण के सवाल पर उत्तरी व दक्षिणी देशों के बीच जारी वार्ताओं की रोशनी में इस कथन की पुष्टि करें ।
Answer: पृथ्वी व उसके पर्यावरण को बढ़ती जनसंख्या, तीव्र औद्योगिक विकास व प्राकृतिक संसाधनों के अतिशय दोहन के कारण गम्भीर खतरा बना हुआ है। पर्यावरण प्रदूषण की प्रकृति ऐसी है कि इसे किसी देश की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता। इसका प्रभाव वैश्विक है। अतः इसके सुधार के प्रयास भी वैश्विक स्तर पर होने चाहिए।
विश्व पर्यावरण सुरक्षा के सम्बन्ध में विभिन्न राष्ट्रों के मध्य सहयोग की जो बातचीत चल रही है, उसमें उत्तरी गोलार्द्ध के विकसित देशों तथा दक्षिणी गोलार्द्ध के विकासशील देशों के नजरिए में मतभेद देखने में आया है। विकसित देश पर्यावरण क्षरण के वर्तमान स्तर पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए इसके संरक्षण में सभी राष्ट्रों की समान जिम्मेदारी व भूमिका के हिमायती हैं। इसके विपरीत गरीब देशों का तर्क है कि ऐतिहासिक दृष्टि से विकसित देशों ने पर्यावरण क्षरण किया है तथा प्राकृतिक संसाधनों का अतिशय दोहन किया है, अतः विश्व पर्यावरण की रक्षा में विकसित देशों की भूमिका गरीब देशों की तुलना में अधिक होनी चाहिए। दूसरा, विकासशील देशों में अभी पर्याप्त औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है अतः पर्यावरण सुरक्षा की जिम्मेदारी इन देशों की कम होनी चाहिए।
सन् 1992 के अन्तर्राष्ट्रीय रियो सम्मेलन में ये मतभेद खुलकर सामने आए। इसीलिए सम्मेलन के प्रस्ताव के बीच का रास्ता अपनाया गया जिसमें कहा गया कि विश्व पर्यावरण की सुरक्षा व गुणवत्ता में सभी विश्व समुदाय की साझी जिम्मेदारी होगी, परन्तु इस संरक्षण में विकसित व विकासशील देशों की भूमिकाएँ अलग-अलग होंगी। अर्थात् विकसित देश संसाधनों व प्रौद्योगिकी के माध्यम से विश्व पर्यावरण की सुरक्षा में अधिक योगदान देंगे।
उपर्युक्त मतभेद के बावजूद यह स्पष्ट है कि विश्व पर्यावरण की वैश्विक समस्या के कारण इसकी सुरक्षा हेतु विश्व सहयोग व सहकार की आवश्यकता है तथा विश्व समूहों को इस दिशा में अधिकाधिक सहयोग हेतु तत्पर होना आवश्यक है।
In simple words: Saving Earth requires global cooperation because environmental threats transcend national borders. While developed nations advocate for equal responsibility, developing countries argue for differentiated responsibilities, citing historical exploitation and current developmental needs. The Rio Summit acknowledged this, urging global cooperation where developed nations contribute more through resources and technology due to their greater capacity and past impact.

🎯 Exam Tip: To confirm the necessity of international cooperation, discuss the global nature of environmental problems and then elaborate on the contrasting viewpoints of the North and South, explaining how the "common but differentiated responsibilities" principle helps bridge these differences for collective action.

 

Question 9. विभिन्न देशों के सामने सबसे गम्भीर चुनौती वैश्विक पर्यावरण को आगे कोई नुकसान पहुँचाए बगैर आर्थिक विकास करने की है। यह कैसे हो सकता है? कुछ उदाहरणों के साथ समझाएँ।
Answer: गत 50 वर्षों में विश्व में हुए आर्थिक व औद्योगिक विकास से स्पष्ट हो जाता है कि विकास की यात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ है। इसके कारण पारिस्थितिकी सन्तुलन इतना अधिक बिगड़ गया है कि वह मानव समुदाय के लिए एक संकट का रूप धारण कर रहा है। वायुमण्डल में हुए प्रदूषण में ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ खड़ी हुई हैं। भूमि तथा जलीय संसाधनों का भी प्रदूषण बढ़ा है। वनों की कटाई से जैविक विविधता तथा जलवायु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
अतः विश्व समुदाय ने इस बात पर आवश्यकता अनुभव की कि विकास की रणनीति ऐसी हो जिससे पर्यावरण की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न न हो। एक वैकल्पिक अवधारणा के रूप में सन् 1978 में छपी बर्टलैण्ड रिपोर्ट (अवर कॉमन फ्यूचर) में टिकाऊ विकास (Sustainable Development) का प्रतिपादन किया गया था। रिपोर्ट में चेताया गया था कि औद्योगिक विकास के चालू तौर-तरीके आगे चलकर प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से टिकाऊ साबित नहीं होंगे।
सन् 1992 में रियो सम्मेलन में पर्यावरण की रक्षा की दृष्टि से टिकाऊ विकास की धारणा पर बल दिया गया था। टिकाऊ विकास रणनीति में विकास के ऐसे साधन अपनाए जाते हैं जिनसे प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त व जीवन्त बने रहें। इसमें विकास को पर्यावरण रक्षा के साथ जोड़ दिया जाता है तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा विकास का लक्ष्य बन जाता है।
उदाहरण के लिए, वर्तमान में हम ऊर्जा की माँग को देखते हुए गैर-रम्परागत स्रोतों; जैसे-पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भू-तापीय, बायो-गैस आदि का दोहन कर सकते हैं, जिससे विकास में ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन 135 के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन भी संरक्षित रहेंगे। इसी तरह नवीन तकनीक व मशीनों के प्रयोग कर ग्रीन हाऊस गैसों व क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकते हैं। विकास के साथ वनों का संरक्षण, भू-जल संरक्षण, सामाजिक-वानिकी आदि को अपनाकर हम संसाधनों की सुरक्षा के साथ-साथ विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्षतः टिकाऊ विकास की धारणा के द्वारा हम पर्यावरण रक्षा व विकास दोनों लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
In simple words: Achieving economic development without further environmental damage is a key challenge, prompted by past unsustainable resource exploitation leading to global warming, ozone depletion, and pollution. This can be achieved through "sustainable development," which integrates environmental protection into growth strategies, exemplified by utilizing renewable energy sources like wind and solar power, employing green technologies, and promoting forest and water conservation alongside economic progress.

🎯 Exam Tip: When discussing sustainable development, begin by explaining why it's a challenge, then define the concept clearly. Support your answer with concrete examples of renewable energy, green technologies, and conservation practices that reconcile economic growth with environmental protection.

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 InText Questions

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

 

Question 1. जंगल के सवाल पर राजनीति, पानी के सवाल पर राजनीति और वायुमण्डल के मसले पर राजनीति! फिर किस बात में राजनीति नहीं है!
Answer: वर्तमान में विश्व की स्थिति कुछ ऐसी बन गई है, जहाँ प्रत्येक बात में राजनीति होने लगी है। इससे ऐसा लगता है कि अब कोई विषय ऐसा नहीं बचा है जिस पर राजनीति नहीं हो।
In simple words: This statement reflects the modern reality where nearly every global issue, from environmental resources like forests, water, and atmosphere, to economic and social matters, has become politicized, indicating that politics permeates all aspects of contemporary international relations.

🎯 Exam Tip: This question invites a philosophical reflection. Emphasize how globalization and interconnectedness have broadened the scope of politics beyond traditional state affairs to encompass universal concerns like resource management, leading to politicization of virtually all issues.

 

Question 2. क्या पृथ्वी की सुरक्षा को लेकर धनी और गरीब देशों के नजरिए में अन्तर है?
Answer: पृथ्वी की सुरक्षा को लेकर धनी और गरीब देशों के नजरिए में अन्तर है। धनी देशों की मुख्य चिन्ता ओजोन परत के छेद और वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) को लेकर है जबकि गरीब देश आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबन्धन के आपसी रिश्ते को सुलझाने के लिए ज्यादा चिन्तित हैं।
धनी देश पर्यावरण के मुद्दे पर उसी रूप में चर्चा करना चाहते हैं जिस रूप में पर्यावरण आज मौजूद है। ये देश चाहते हैं कि पर्यावरण के संरक्षण में हर देश की जिम्मेदारी बराबर हो, जबकि निर्धन देशों का तर्क है कि विश्व में पारिस्थितिकी को हानि अधिकांशतः विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुँची है। यदि धनी देशों ने पर्यावरण को अधिक हानि पहुँचायी है तो उन्हें इस हानि की भरपाई करने की जिम्मेदारी भी अधिक उठानी चाहिए। साथ ही निर्धन देशों पर वे प्रतिबन्ध न लगें जो विकसित देशों पर लगाए जाने हैं।
In simple words: Yes, there's a significant difference: wealthy nations prioritize issues like ozone depletion and global warming, advocating for equal responsibility in environmental protection, while poorer nations focus on economic development and poverty alleviation, arguing that developed countries should bear greater responsibility for historical environmental damage and provide technological support.

🎯 Exam Tip: When comparing perspectives, highlight the core concerns of each group (developed-climate change, developing-development) and explain their underlying arguments regarding historical responsibility, resource consumption, and the burden of mitigation.

 

Question 3. क्योटो प्रोटोकॉल के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करें। किन बड़े देशों ने इस पर दस्तखत नहीं किए और क्यों?
Answer: क्योटो प्रोटोकॉल-जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में विभिन्न देशों के सम्मेलन का आयोजन जापान के क्योटो शहर में 1 दिसम्बर से 11 दिसम्बर, 1997 तक हुआ । इस सम्मेलन में 150 देशों ने हिस्सा लिया और जलवायु परिवर्तन को कम करने की वचनबद्धता को रेखांकित किया। इस प्रोटोकॉल में ग्रीन हाऊस गैसों के उत्जर्सन को कम करने के लिए सुनिश्चित, ठोस और समयबद्ध उपाय करने पर बल दिया गया।
यद्यपि इस बैठक में विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद और अधिक बढ़ गए थे तथापि 11 दिसम्बर, 1997 को क्योटो प्रोटोकॉल (न्यायाचार) को दोनों प्रकार के देशों द्वारा स्वीकार कर लिया गया।
इस प्रोटोकॉल (न्यायाचार) के प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं-
1. इसमें विकसित देशों को अपने सभी छह ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन स्तर को सन् 2008 से 2012 तक सन् 1990 के स्तर से औसतन 5.2% कम करने को कहा गया।
2. यूरोपीय संघ को सन् 2012 तक ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन स्तर में 8%, अमेरिका को 7%, जापान तथा कनाडा को 6% की कमी करनी होगी, जबकि रूस को अपना वर्तमान उत्सर्जन स्तर सन् 1990 के स्तर पर बनाए रखना होगा।
3. इस अवधि में ऑस्ट्रेलिया को अपने उत्सर्जन स्तर को 8 प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट दी गई।
4. विकासशील देशों को निर्धारित लक्ष्य के उत्सर्जन स्तर में कमी करने की अनुमति दी गई ।
5. इस प्रोटोकॉल में उत्सर्जन के दायित्वों की पूर्ति के लिए विकासशील देश विकास में स्वैच्छिक भागीदारी में शामिल होंगे। इस हेतु विकासशील देशों में पूँजी निवेश करने के लिए विकसित देशों को ऋण की सुविधा उपलब्ध होगी ।
In simple words: The Kyoto Protocol, adopted in 1997, was an international treaty aiming to reduce greenhouse gas emissions, primarily by developed nations, based on the principle of "common but differentiated responsibilities." Major nations like the United States signed but did not ratify it, citing concerns over economic impact and the exclusion of binding targets for developing countries like China and India, which they felt would give those economies an unfair advantage.

🎯 Exam Tip: When describing the Kyoto Protocol, mention its purpose (GHG reduction), key features (binding targets for developed nations), and specifically name countries that did not ratify it (e.g., USA) along with their stated reasons, highlighting the economic and equity concerns involved.

 

Question 4. लोग कहते हैं कि लातिनी अमेरिका में एक नदी बेच दी गई। साझी सम्पदा कैसे बेची जा सकती है?
Answer: साझी सम्पदा का अर्थ होता है-ऐसी सम्पदा जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो । ऐसे संसाधन की प्रकृति, उपयोग के स्तर और रख-रखाव के सन्दर्भ में समूह के प्रत्येक सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होते हैं और समान उत्तरदायित्व निभाने होते हैं। लेकिन वर्तमान में निजीकरण, जनसंख्या वृद्धि और पारिस्थितिकी तन्त्र की गिरावट समेत कई कारणों से पूरी दुनिया में साझी सम्पदा का आकार घट रहा है। गरीबों को साझी सम्पदा की उपलब्धता कम हो रही है। सम्भवतः लातिनी अमेरिका में इन्हीं कारणों से नदी पर किसी मनुष्य समुदाय या राज्य ने अधिकार कर लिया हो और वह साझी सम्पदा न रही हो। ऐसी स्थिति में उसे उसके स्वामित्व वाले समूह ने किसी अन्य को बेच दिया हो। इस प्रकार साझी सम्पदा को निजी सम्पदा में परिवर्तित कर उसे बेचा जा रहा है।
In simple words: Common property, like a river, is collectively owned and managed by a community, with equal rights and responsibilities for all members. However, due to factors like privatization, population growth, and ecological degradation, such shared resources can be enclosed or claimed by a specific group or state, which can then sell or transfer ownership, effectively converting communal assets into private property.

🎯 Exam Tip: Define "common property" by emphasizing collective ownership and shared rights/responsibilities. Explain how it can be "sold" by discussing the processes of privatization, enclosure, or appropriation by a state/community, which transforms it into exclusive property.

 

Question 5. मैं समझ गया! पहले उन लोगों ने धरती को बर्बाद किया और अब धरती को चौपट करने की हमारी बारी है। क्या यही है हमारा पक्ष?
Answer: हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ के जलवायु परिवर्तन से सम्बन्धित बुनियादी नियमाचार में चर्चा चली कि तेजी से औद्योगिक होते देश (जैसे-ब्राजील, चीन और भारत) नियमाचार की बाध्यताओं का पालन करते हुए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करें। भारत इस बात के खिलाफ है। उसका कहना है कि भारत पर इस तरह की बाध्यता अनुचित है क्योंकि सन् 2030 तक उसकी प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर मात्र 1.6 ही होगी, जो आधे से भी कम होगी । बावजूद विश्व के (सन् 2000) औसत (3.8 टन/प्रति व्यक्ति) के आधे से भी कम होगा।
भारत या विकासशील देशों के उक्त तर्कों को देखते हुए यह आलोचनात्मक टिप्पणी की गई है कि पहले उन लोगों ने अर्थात् विकसित देशों ने धरती को बर्बाद किया, इसलिए उन पर उत्सर्जन कम करने की बाध्यता को लागू करना न्यायसंगत है और विकासशील देशों में कार्बन की दर कम है इसलिए इन देशों पर बाध्यता नहीं लागू की जाए। इसका यह अर्थ निकाला गया है कि अब धरती को चौपट करने की हमारी बारी है।
लेकिन भारत या विकासशील देशों का अपना पक्ष रखने का यह आशय नहीं है बल्कि आशय यह है कि विकासशील देशों में अभी कार्बन उत्सर्जन दर बहुत कम है तथा सन् 2030 तक यह मात्र 1.6 टन/प्रति व्यक्ति ही होगी, इसलिए इन देशों को अभी इस नियमाचार की बाध्यता से छूट दी जाए ताकि वे अपना आर्थिक और सामाजिक विकास कर सकें। साथ ही ये देश स्वेच्छा से कार्बन की उत्सर्जन दर को कम करने का प्रयास करते रहेंगे।
In simple words: This statement satirizes the "common but differentiated responsibilities" principle, which acknowledges that developed nations contributed more historically to environmental degradation. Developing countries like India argue against immediate, stringent emission caps, asserting their right to develop, as their per capita emissions are still significantly lower than developed nations, promising to voluntarily reduce emissions as they progress.

🎯 Exam Tip: Explain the 'common but differentiated responsibilities' principle as the foundation of the developing countries' stance. Clarify that their argument is not about deliberately causing harm, but about equitable development and acknowledging historical emissions, while also committing to future voluntary reductions.

 

Question 6. क्या आप पर्यावरणविदों के प्रयास से सहमत हैं? पर्यावरणविदों को यहाँ जिस रूप में चित्रित किया गया है क्या आपको वह सही लगता है?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में पर्यावरणविदों को एक उपकरण से एक वृक्ष को जाँचते हुए या पानी देते हुए दिखाया गया है, जबकि एक व्यक्ति के पीछे पाँच प्राणी खड़े हैं जो वृक्ष पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पेड़ पर एक खम्भा है जिससे विद्युत तार निकल रही है। इस चित्रण में, पर्यावरणविदों को वृक्ष को सूखा मानकर काटने की सिफारिश करते हुए दर्शाया गया है, जबकि वे पर्यावरण पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभावों को अनदेखा कर रहे हैं और स्थानीय ज्ञान या सहयोग को शामिल नहीं कर रहे हैं।
अतः यह चित्र पर्यावरणविदों को जिस रूप में चित्रित कर रहा है, वह सही नहीं लगता।
In simple words: The portrayal of environmentalists, as described, seems incomplete or critical, depicting them as experts who might overlook the broader environmental impacts or local community knowledge while focusing narrowly on technical solutions or even destructive actions. Therefore, this representation does not seem accurate or comprehensive regarding the typical efforts of environmentalists.

🎯 Exam Tip: When analyzing a description of an image (even if the image is absent), identify the implied message about environmentalists. Evaluate if this portrayal is balanced, considering both the positive contributions and potential criticisms or misrepresentations of their work.

 

Question 7. पृथ्वी पर पानी का विस्तार ज्यादा और भूमि का विस्तार कम है। फिर भी, कार्टूनिस्ट ने जमीन को पानी की अपेक्षा ज्यादा बड़े हिस्से में दिखाने का फैसला किया है। यह कार्टून किस तरह पानी की कमी को चित्रित करता है?
Answer: पृथ्वी पर पानी का विस्तार ज्यादा और भूमि का विस्तार कम है। फिर भी, कार्टूनिस्ट ने जमीन को पानी की अपेक्षा ज्यादा बड़े हिस्से में दिखाने का फैसला किया है। यह कार्टून विश्व में पीने योग्य जल की कमी को चित्रित करता है।
विश्व के कुछ भागों में पीने योग्य साफ पानी की कमी हो रही है तथा विश्व के हर हिस्से में स्वच्छ जल समान मात्रा में उपलब्ध नहीं है। इस जीवनदायी संसाधन की कमी के कारण हिंसक संघर्ष हो सकते हैं। कार्टूनिस्ट ने इसी को इंगित करते हुए विश्व में जमीन की तुलना में पानी की मात्रा को कम दिखाया है क्योंकि समुद्रों का पानी पीने योग्य नहीं है, इसलिए इसे इस जल मात्रा में शामिल नहीं किया गया है।
In simple words: Despite Earth being mostly water, the cartoonist depicts land as larger than water to highlight the scarcity of *potable* freshwater. By exaggerating the landmass, the cartoon visually emphasizes that while oceans cover vast areas, the usable water for human consumption is limited and unevenly distributed, leading to potential conflicts.

🎯 Exam Tip: Analyze the cartoonist's artistic choice (exaggerated land size) in contrast to reality (more water than land). Explain how this visual distortion effectively symbolizes the scarcity of *fresh* water, not total water, and its implications for global stability.

 

Question 8. आदिवासी जनता और उनके आन्दोलनों के बारे में कुछ ज्यादा बातें क्यों नहीं सुनायी पड़तीं? क्या मीडिया का उनसे कोई मनमुटाव है?
Answer: आदिवासी जनता और उनके आन्दोलनों से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में लम्बे समय तक उपेक्षित रहे हैं। इसका प्रमुख कारण मीडिया के लोगों तक इनके सम्पर्क का अभाव रहा है। सन् 1970 के दशक में विश्व के विभिन्न भागों के आदिवासियों के नेताओं के बीच सम्पर्क बढ़ा है। इससे उनके साझे अनुभवों और सरकारों को शक्ल मिली है तथा सन् 1975 में इन लोगों की एक वैश्विक संस्था 'वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इण्डिजिनस पीपल' का गठन हुआ तथा इनसे सम्बद्ध अन्य स्वयंसेवी संगठनों का गठन हुआ। अब इनके मुद्दों तथा आन्दोलनों की बातें भी मीडिया में उठने लगी हैं। अतः स्पष्ट है कि अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी लोगों की संस्थाओं के न होने के कारण मीडिया में इनकी बातें अधिक नहीं सुनाई पड़ती हैं। जैसे-जैसे आदिवासी समुदाय अपने संगठनों को अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करता जाएगा, इन संगठनों के माध्यम से इनके मुद्दे और आन्दोलन भी मीडिया में मुखरित होंगे ।
In simple words: The limited media coverage of indigenous peoples' movements stems from their historical marginalization and lack of strong, organized representation at national and international levels. However, with the formation of global indigenous organizations since the 1970s, their issues are gradually gaining visibility as they become more unified and vocal.

🎯 Exam Tip: Explain the historical context of indigenous marginalization and the role of organizational strength in media visibility. Emphasize that as indigenous communities form stronger international and national bodies, their issues are increasingly reported by the media.

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 Other Important Questions

UP Board Class 12 Civics Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 1. मूलवासी कौन हैं? मूलवासियों का अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का विस्तार से वर्णन कीजिए। अथवा मूलवासियों का अपने अधिकारों के लिए आन्दोलन एवं इनकी प्राप्ति हेतु वैश्विक प्रयासों का वर्णन कीजिए।
Answer: मूलवासी से आशय संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार मूलवासी ऐसे लोगों के वंशज हैं जो किसी मौजूदा देश में बहत दिनों से रहते चले आ रहे हैं। फिर किसी अन्य संस्कृति या जातीय मूल के लोग विश्व के दूसरे हिस्से से उस देश में आए और इन लोगों को अपने अधीन बना लिया।
ये मूलवासी आज भी सम्बन्धित देश की संस्थाओं के अनुरूप आचरण करने से अधिक अपनी परम्परा, सांस्कृतिक रीति-रिवाज एवं अपने विशेष सामाजिक-आर्थिक तौर-तरीकों पर जीवन-यापन करना पसन्द करते हैं।
मूलवासियों का अपने अधिकारों के लिए संघर्ष एवं आन्दोलन
भारत सहित वर्तमान विश्व में मूलवासियों की जनसंख्या लगभग 30 करोड़ है। दूसरे सामाजिक आन्दोलनों की तरह मूलवासी भी अपने संघर्ष, एजेण्डा और अधिकारों की आवाज उठाते रहे जिनका विवरण निम्नानुसार हैं-
1. विश्व समुदाय में बराबरी का दर्जा पाने के लिए आन्दोलन-मूलवासियों को एक लम्बे समय से सभ्य समाज में दोयम दर्जे का माना जाता था। उन्हें बराबरी का दर्जा प्राप्त नहीं था। वर्तमान विश्व में शेष जनसमुदाय के अपने प्रति निम्न स्तर के व्यवहार को देखकर इन्होंने विश्व समुदाय में बराबरी का दर्जा पाने के लिए अपनी आवाज बुलन्द की है।
2. स्वतन्त्र पहचान की माँग-मूलवासियों के निवास स्थान मध्य एवं दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया एवं भारत में हैं, जहाँ इन्हें आदिवासी या जनजाति कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड सहित ओसियाना क्षेत्र के बहुत-से द्वीपीय देशों में हजारों वर्षों से पॉलिनेशिया, मैलनेशिया एवं माइक्रोनेशिया वंश के मूलवासी निवासरत् हैं। इन मूलवासियों की अपने देश की सरकारों से माँग है कि इन्हें मूलवासी के रूप में अपनी स्वतन्त्र पहचान रखने वाला समुदाय माना जाए।
3. मूलवास स्थान पर अपने अधिकार की माँग-मूलवासी अपने मूलवास स्थान पर अपना अधिकार चाहते हैं। अपने मूलवास स्थान पर अपने अधिकार की माँग हेतु सम्पूर्ण विश्व के मूलवासी यह कहते हैं कि हम यहाँ अनन्त काल से निवास करते चले आ रहे हैं।
4. राजनीतिक स्वतन्त्रता की माँग-भौगोलिक रूप से चाहे मूलवासी अलग-अलग स्थानों पर निवास कर रहे हैं, लेकिन भूमि और उस पर आधारित जीवन प्रणालियों के बारे में इनकी विश्व दृष्टि एक-समान है। भूमि की हानि का इनके लिए अर्थ है-आर्थिक संसाधनों के एक आधार की हानि और यह मूलवासियों के जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा है। उस राजनीतिक स्वतन्त्रता का क्या अर्थ जो जीवन-यापन के साधन ही उपलब्ध न कराए। अतः मूलवासी अपने निवास स्थान पर उपलब्ध संसाधनों पर अपना अधिकार मानते हुए जीवन-यापन के साधन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
मूलवासियों के अधिकारों के वैश्विक प्रयास-
मूलवासियों के अधिकारों के लिए वैश्विक स्तर पर निम्नलिखित प्रयास हए हैं-
1. 1970 के दशक में विश्व के विभिन्न भागों में मूलवासियों के प्रतिनिधियों के मध्य सम्पर्क बढ़ा है। इससे इनके साझे अनुभवों एवं सरोकारों को एक आधार मिला है।
2. सन् 1995 में मूलवासियों से सम्बन्धित 'वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इण्डिजिनस पीपल' का गठन हुआ । संयुक्त राष्ट्र संघ ने सर्वप्रथम इस परिषद् को परामर्शदायी परिषद् का दर्जा प्रदान किया। इसके अलावा आदिवासियों के सरोकारों से सम्बद्ध 10 अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी यह दर्जा प्रदान किया गया है।
In simple words: Indigenous peoples are descendants of original inhabitants, maintaining distinct cultures despite external rule. Their struggles for rights include demanding equality, asserting independent identity, claiming ancestral land rights, and seeking political autonomy to control their resources and way of life, with global efforts leading to organizations like the World Council of Indigenous Peoples to advocate for these rights.

🎯 Exam Tip: Define indigenous peoples clearly, noting their historical ties to land and distinct cultures. When describing their struggles, group demands into categories such as equality, self-determination, land rights, and political autonomy, and mention international organizations supporting their cause.

 

Question 2. एजेण्डा-21 से आप क्या समझते हैं? “उत्तरदायित्व संयुक्त, भूमिकाएँ अलग-अलग” का क्या अर्थ है?
Answer: एजेण्डा-21 का अभिप्राय सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ का पर्यावरण एवं विकास के मुद्दे पर केन्द्रित एक सम्मेलन ब्राजील के रियो-डी-जनेरियो में हुआ था। इस सम्मेलन को पृथ्वी सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है। इस पृथ्वी सम्मेलन में 170 देशों के प्रतिनिधियों, हजारों स्वयंसेवी संगठनों तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगमों ने हिस्सा लिया। इस . सम्मेलन के दौरान विश्व राजनीति में पर्यावरण को एक ठोस स्वरूप मिला।
इस अवसर पर 21वीं सदी के लिए एक विशाल कार्यक्रम अर्थात् एजेण्डा-21 पारित किया गया। सभी राज्यों से निवेदन किया गया कि वे प्राकृतिक सन्तुलन को बनाए रखें, पर्यावरण प्रदूषण को रोकें तथा पोषणीय विकास का रास्ता अपनाएँ।
एजेण्डा-21 के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् थे-
1. पर्यावरण एवं विकास के मध्य सम्बन्ध के मुद्दों को समझा जाए।
2. ऊर्जा का अधिक कुशल तरीके से प्रयोग किया जाए।
3. किसानों को पर्यावरण सम्बन्धी जानकारी दी जाए।
4. प्रदूषण फैलाने वालों पर भी भारी अर्थदण्ड लगाया जाए।
5. इस दृष्टिकोण से राष्ट्रीय योजनाएँ बनाई एवं लागू की जाएँ।
उत्तरदायित्व संयुक्त, भूमिकाएँ अलग-अलग का अर्थ
पर्यावरण एवं संरक्षण को लेकर उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के दृष्टिकोणों में पर्याप्त अन्तर है। उत्तर के विकसित देश पर्यावरण के मामले पर उसी रूप में विचार-विमर्श करना चाहते हैं जिस परिस्थिति में पर्यावरण वर्तमान में विद्यमान है। ये देश चाहते हैं कि पर्यावरण के संरक्षण में प्रत्येक देश का बराबर का उत्तरदायित्व हो ।
दक्षिण के विकासशील देशों का तर्क है कि विश्व में पारिस्थितिकी को अधिकांश क्षति (नुकसान) विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुंची है। यदि विकसित देशों ने पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुँचाया है तो इन्हें इसकी क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। इसके अलावा विकासशील देश अभी औद्योगीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और यह आवश्यक है कि इन पर वे प्रतिबन्ध न लगें जो विकसित देशों पर लगाए जाते हैं।
पृथ्वी सम्मेलन से जुड़े निर्णय अथवा सुझाव
सन् 1992 में सम्पन्न पृथ्वी सम्मेलन में इस तर्क को मान लिया गया और इसे 'संयुक्त उत्तरदायित्व लेकिन अलग-अलग भूमिका का सिद्धान्त' कहा गया। इस सन्दर्भ में रियो घोषणा-पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि “पृथ्वी के पारिस्थितिकी तन्त्र की अखण्डता तथा गुणवत्ता की बहाली, सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए विभिन्न देश विश्व बन्धुत्व की भावना से परस्पर एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न राज्यों के अलग-अलग उत्तरदायित्व होंगे। विकसित देशों के समाजों का वैश्विक पर्यावरण पर दबाव अधिक है तथा इन देशों के पास विपुल प्रौद्योगिकी एवं वित्तीय संसाधन मौजूद हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ विकास के अन्तर्राष्ट्रीय आयाम में विकसित देश अपना विशेष उत्तरदायित्व स्वीकारते हैं।”
In simple words: Agenda-21 is a comprehensive action plan adopted at the 1992 Earth Summit for sustainable development in the 21st century, promoting ecological balance and economic progress. "Common but differentiated responsibilities" acknowledges that while all nations share environmental goals, developed countries, with greater historical impact and resources, bear a larger and different responsibility than developing nations in achieving them.

🎯 Exam Tip: Define Agenda-21 by stating its origin (Earth Summit 1992), purpose (sustainable development), and core principles. Explain "common but differentiated responsibilities" by highlighting the differing capacities and historical roles of developed and developing nations in environmental protection.

 

Question 3. देवस्थान क्या हैं? भारत में पर्यावरण संरक्षण में इसके महत्त्व का विस्तार से वर्णन कीजिए। अथवा पावन वन-प्रान्तर क्या है? पर्यावरणीय दृष्टि से इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Answer: पावन वन-प्रान्तर (देवस्थान) का अर्थ
अनेक पुराने समाजों में धार्मिक कारणों से प्रकृति की रक्षा करने का प्रचलन है। भारत में विद्यमान पावन वन-प्रान्तर इस चलन के सुन्दर उदाहरण हैं। पावन वन-प्रान्तर प्रथा में वनों के कुछ हिस्सों को काटा नहीं जाता। इन स्थानों पर देवता अथवा किसी पुण्यात्मा का वास माना जाता है। इसे ही पावन वन-प्रान्तर या देवस्थान कहा जाता है।
पावन वन-प्रान्तर (देवस्थान) का देशव्यापी विस्तार भारत में पावन वन-प्रान्तर का देशव्यापी विस्तार पाया जाता है। इनके देशव्यापी विस्तार का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि सम्पूर्ण देश की भाषाओं में इनके लिए अलग-अलग शब्दों का प्रयोग होता है। इन देवस्थानों को राजस्थान में वानी, केंकड़ी व ओसन; मेघालय में लिंगदोह; केरल में काव; झारखण्ड में जहेरा थान व सरना; उत्तराखण्ड में थान या देवभूमि तथा महाराष्ट्र में देवरहतिस आदि नामों से जाना जाता है।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पावन वन-प्रान्तर का महत्त्व
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पावन वन-प्रान्तर के महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है-
1. समुदाय आधारित संसाधन प्रबन्धन में महत्त्व-पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित भारतीय साहित्य में पावन वन-प्रान्तर के महत्त्व को अब स्वीकार किया जा रहा है तथा इसे समुदाय आधारित संसाधन प्रबन्धन के रूप में देखा जा रहा है।
2. पारिस्थितिकी तन्त्र के सन्तुलन में महत्त्व-पावन वन-प्रान्तर को हम एक ऐसी व्यवस्था के रूप में देख सकते हैं जिसमें प्राचीन समाज प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग इस तरह करते हैं कि पारिस्थितिकी तन्त्र का सन्तुलन बना रहे। कुछ शोधकर्ताओं का विश्वास है कि पावन वन-प्रान्तर (देवस्थान) की मान्यता से जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी संरक्षण में ही नहीं सांस्कृतिक वैविध्य को बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।
3. साझी सम्पदा के संरक्षण की व्यवस्था के समान–पावन वन-प्रान्तर की व्यवस्था वन संरक्षण के विभिन्न तौर-तरीकों से सम्पन्न हैं और इस व्यवस्था की विशेषताएँ साझी सम्पदा के संरक्षण की व्यवस्था से मिलती-जुलती हैं।
4. क्षेत्र की आध्यात्मिक या सांस्कृतिक विशेषताएँ-देवस्थान के महत्त्व का परम्परागत आधार ऐसे क्षेत्र की आध्यात्मिक अथवा सांस्कृतिक विशेषताएँ हैं। हिन्दू समवेत रूप से प्राकृतिक वस्तुओं की पूजा करते हैं जिसमें पेड़ व वन-प्रान्सर भी शामिल हैं। अनेक मन्दिरों का निर्माण, देवस्थान में हुआ है। संसाधनों की विरलता नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता बनाए रखी। पावन वन-प्रान्तर की वर्तमान स्थिति-पिछले कुछ वर्षों से मनुष्यों की बसावट के विस्तार ने धीरे-धीरे पावन वन-प्रान्तर (देवस्थानों) पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया है। नवीन राष्ट्रीय वन नीतियों के लागू होने के साथ कई स्थानों पर इन परम्परागत वनों की पहचान मन्द पड़ने लगी है। देवस्थान के प्रबन्धन में एक कठिन समस्या यह आ रही है कि देवस्थान का कानूनी स्वामित्व तो राज्यों के पास है तथा इसका व्यावहारिक नियन्त्रण समुदायों के पास है। राज्यों व समुदायों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं एवं देवस्थानों के उपयोग के उद्देश्य में भी इनके बीच कोई तालमेल नहीं है।
इस तरह कहा जा सकता है कि पावन वन-प्रान्तर (देवस्थान) का हमारे देश में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है।
In simple words: Sacred groves (Devasthan or Pawan Van-Prantar) are forest patches protected for religious reasons, believed to be abodes of deities, found across India under various local names. Their environmental importance lies in community-based resource management, maintaining ecological balance, preserving biodiversity and cultural diversity, and functioning as a traditional form of common property resource conservation rooted in reverence for nature.

🎯 Exam Tip: Define sacred groves by their religious significance and conservation practice. Elaborate on their environmental importance by connecting them to biodiversity, ecological balance, community management, and cultural heritage, and briefly mention current challenges in their preservation.

 

Question 4. अण्टार्कटिका महादेशीय क्षेत्र के प्रमुख लक्षण, महत्त्व एवं अण्टार्कटिका पर स्वामित्व सम्बन्धी विवाद को विस्तार से बताइए ।
Answer: अण्टार्कटिका विश्व के सात प्रमुख महाद्वीपों में से एक है।
अण्टार्कटिका महाद्वीप के प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ)
अण्टार्कटिका महाद्वीप की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. अण्टार्कटिका महादेशीय क्षेत्र का विस्तार लगभग 1.40 वर्ग करोड़ किमी में फैला हुआ है।
2. विश्व के निर्धन क्षेत्र का 26 प्रतिशत भाग इस महाद्वीप में आता है।
3. स्थलीय हिम का 90 प्रतिशत भाग एवं धरती के स्वच्छ जल का 70 प्रतिशत भाग इस महाद्वीप में उपलब्ध है।
4. इस महादेश का 3.60 करोड़ वर्ग किमी तक अतिरिक्त विस्तार समुद्र में है।
5. यह विश्व का सबसे सुदूर ठण्डा एवं झंझावाती प्रदेश है।
6. सीमित स्थलीय जीवनं वाले इस महादेश का समुद्री पारिस्थितिकी तन्त्र अत्यन्त उर्वर है, जिसमें कुछ पादप; जैसे-सूक्ष्म शैवाल, कवक और लाइकेन तथा समुद्री स्तनधारी जीव, मत्स्य एवं कठिन वातावरण में जीवन-यापन के लिए अनुकूलित विभिन्न पक्षी शामिल हैं।
7. इस महाद्वीप में समुद्री आहार श्रृंखला की धुरी-क्रिल मछली भी मिलती है। इस मछली पर अन्य जीवों का आहार निर्भर है।
अण्टार्कटिका महाद्वीप का महत्त्व-अण्टार्कटिका महाद्वीप का महत्त्व निम्नलिखित हैं-
1. अण्टार्कटिका महाद्वीप विश्व की जलवायु को सन्तुलित रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है।
2. इस महाद्वीपीय प्रदेश की आन्तरिक हिमानी परत ग्रीन हाऊस गैस के जमाव का महत्त्वपूर्ण सूचना स्रोत है।
3. इस महाद्वीपीय प्रदेश में जमी बर्फ से लाखों वर्ष पूर्व के वायुमण्डलीय तापमान का पता लगाया जा सकता है।
4. इस महाद्वीपीय क्षेत्र में समुद्री पारिस्थितिकी तन्त्र अत्यन्त उर्वर पाया जाता है।
5. यह क्षेत्र वैज्ञानिक अनुसन्धान, मत्स्य, आखेट एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
अण्टार्कटिका क्षेत्र में पर्यावरण सुरक्षा – अण्टार्कटिका क्षेत्र में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तन्त्र की सुरक्षा के नियम बनाए गए हैं जिनको अपनाया गया है। ये नियम कल्पनाशील एवं दूरगामी प्रभाव वाले हैं। अण्टार्कटिका एवं पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र पर्यावरण सुरक्षा के विशेष क्षेत्रीय नियमों में आते हैं। सन् 1959 के पश्चात् इस क्षेत्र में गतिविधियाँ वैज्ञानिक अनुसन्धान, मत्स्य, आखेट एवं पर्यटन तक ही सीमित रही हैं, लेकिन न्यून गतिविधियों के बावजूद इस क्षेत्र के कुछ भागों में अवशिष्ट पदार्थों जैसे तेल के रिसाव के दबाव में अपनी गुणवत्ता खो रहे हैं।
अण्टार्कटिका पर स्वामित्व-विश्व के सबसे सुदूर ठण्डे एवं झंझावाती महादेश अण्टार्कटिका पर किसका स्वामित्व है? इसके सम्बन्ध में दो दावे किए जाते हैं। कुछ देश, जैसे-ब्रिटेन, अर्जेण्टीना, चिली, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड ने अण्टार्कटिका क्षेत्र पर अपने सम्प्रभु अधिकार का दावा किया है, जबकि अन्य अधिकांश देशों का मत है कि अण्टार्कटिका प्रदेश विश्व की साझी सम्पदा है और यह किसी भी राष्ट्र के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है।
In simple words: Antarctica, a vast, cold continent, holds 90% of Earth's ice and 70% of freshwater, playing a crucial role in regulating global climate and providing climate history data from its ice. It supports a unique marine ecosystem with krill as a key species and is vital for scientific research and tourism. Despite rules to limit human activity since 1959, it faces threats from pollution. Its ownership is disputed; some nations claim sovereignty, while most view it as a global common heritage.

🎯 Exam Tip: When discussing Antarctica, cover its key characteristics (size, ice, freshwater), ecological importance (marine life, climate regulation), scientific value (paleoclimatology), and the ongoing international debate regarding its sovereignty versus its status as a global common.

 

Question 5. पर्यावरण सम्बन्धी मामलों पर भारतीय पक्ष की व्याख्या कीजिए।
Answer: पर्यावरण सम्बन्धी मामलों पर भारतीय पक्ष पर्यावरण सम्बन्धी मामलों पर भारतीय पक्ष की व्याख्या निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा की जा सकती है-
1. भारतीय पर्यावरण संरक्षण का उत्तरदायित्व संयुक्त है, लेकिन भूमिकाएँ अलग-अलग होनी चाहिए-पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के दृष्टिकोण में पर्याप्त अन्तर है। उत्तर के विकसित देश पर्यावरणीय मुद्दे पर उसी रूप में चर्चा करना चाहते हैं जिस दशा में पर्यावरण वर्तमान में विद्यमान है। ये देश चाहते हैं कि पर्यावरणीय संरक्षण में प्रत्येक देश का उत्तरदायित्व एक समान हो। दक्षिण के देशों का अभिमत है कि विश्व में पारिस्थितिकी को क्षति अधिकांशतया विकसित देशों के औद्योगिक विकास से हुई है। यदि विकसित देशों ने पर्यावरण को अधिक क्षति पहुँचायी है तो उन्हें इसकी भरपाई भी अधिक चाहिए।
2. उत्तरदायित्व को लागू करने हेतु भारतीय सुझाव-इस सन्दर्भ में निम्नलिखित दो सुझाव दिए गए-
• अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के निर्माण, प्रयोग तथा व्याख्या में विकासशील देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखा जाना चाहिए ।
• प्रत्येक राष्ट्र की कुल राष्ट्रीय आय का कुछ प्रतिशत भाग अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधीशों द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए तथा वह धनराशि सिर्फ पर्यावरण संरक्षण पर विश्व बैंक अथवा संयुक्त राष्ट्र संघ की किसी संस्था के माध्यम से मानवीय सुरक्षा एवं संयुक्त सम्पदा संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए खर्च की जानी चाहिए ।
3. वन संरक्षण के प्रति भारतीय दृष्टिकोण-दक्षिणी गोलार्द्ध देशों के वन आन्दोलन उत्तरी देशों के वन आन्दोलन से विशेष अर्थों में अलग हैं। दक्षिणी देशों में वन निर्जन नहीं हैं, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध के देशों में वन जनविहीन हैं। इसी कारण उत्तरी देशों में वन भूमि को निर्जन भूमि की श्रेणी में रखा गया है। यह दृष्टिकोण व्यक्ति को प्रकृति का हिस्सा नहीं मानता। अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि यह दृष्टिकोण पर्यावरण को व्यक्ति से दूर की वस्तु मानता है।
4. पृथ्वी को बचाने हेतु भारतीय सुझाव-इस सन्दर्भ में निम्नलिखित बिन्दु उल्लेखनीय हैं-
• पृथ्वी को बचाने हेतु विभिन्न देश सुलह एवं सहकार की नीति अपनाएँ, क्योंकि पृथ्वी का सम्बन्ध किसी एक देश विशेष से न होकर, सम्पूर्ण विश्व एवं मानव जाति से है।
• अभी कुछ समयावधि पूर्व संयुक्त राष्ट्र संघ में यह परिचर्चा हुई कि तीव्रता से औद्योगिक विकास करते हुए ब्राजील, चीन तथा भारत इत्यादि देश नियमाचार की बाध्यताओं का परिपालन करते हुए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को न्यूनतम करें। भारत इस बात के विरुद्ध है और उसकी मान्यता है कि यह तथ्य इस नियमाचार की मूल भावना के विपरीत है।
• हमारे देश भारत पर इस प्रकार का प्रतिबन्ध थोपना भी अनुचित ही है। सन् 2030 तक भारत में कार्बन का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन बढ़ने के बावजूद विश्व के वर्तमान औसत अर्थात् 3.8 टन प्रति व्यक्ति के आधे से भी कम होगा। जहाँ सन् 2000 तक भारत का प्रति व्यक्ति उत्जर्सन 0.9 टन था वहीं एक अनुमान के अनुसार सन् 2030 तक यह आँकड़ा बढ़कर 1.6 टन प्रति व्यक्ति हो जाएगा।
In simple words: India advocates for "common but differentiated responsibilities" in environmental protection, arguing that developed nations, being historically greater polluters, should bear more responsibility and provide technology to developing countries. India suggests international environmental laws consider developing nations' needs and allocate funds from national incomes for conservation. Additionally, India's forest conservation approach differs from Western views, emphasizing human-nature integration, and it opposes stringent emission caps due to its low per capita emissions and ongoing development needs.

🎯 Exam Tip: When explaining India's stance, focus on the "common but differentiated responsibilities" principle, its historical context, and India's arguments for equitable burden-sharing, technological transfer, and flexibility in emission targets given its developmental stage.

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. वैश्विक राजनीति में पर्यावरण महत्त्व के प्रमुख मुद्दों का उल्लेख कीजिए ।
Answer: वैश्विक राजनीति में पर्यावरणीय महत्त्व के प्रमुख मुद्दे निम्नवत् हैं-
(1) विश्व में अब भूमि का विस्तार करना असम्भव है। वर्तमान में उपलब्ध भूमि के एक बड़े भाग की उर्वरता लगातार कम होती चली जा रही है। जहाँ चरागाहों के चारे समाप्त होने के कगार पर हैं वहीं मछली भण्डार भी निरन्तर कम होता जा रहा है। इसी तरह जलाशयों का जल-स्तर भी तेजी से घटा है और जल प्रदूषण बढ़ गया है। खाद्य उत्पादों में भी लगातार कमी होती चली जा रही है।
(2) सन् 2006 में जारी संयुक्त राष्ट्र की विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों की एक अरब बीस करोड़ जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं होता तथा यहाँ की दो अरब साठ करोड़ की आबादी साफ-सफाई की सुविधा से वंचित है। उक्त कारण से लगभग तीस लाख से अधिक बच्चे प्रतिवर्ष असमय काल के ग्रास में समा जाते हैं।
(3) वनों की कटाई से लोग विस्थापित हो रहे हैं। वनों की कटाई का प्रभाव जैव प्रजातियों पर भी पड़ा है और अनेक जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधों की प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।
(4) पृथ्वी के ऊपरी वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा लगातार घट रही है जिसके फलस्वरूप पारिस्थितिकी तन्त्र तथा मानवीय स्वास्थ्य पर गम्भीर संकट आ गया है।
In simple words: Key global environmental issues include irreversible land degradation and declining fertility, dwindling pasturelands and fish stocks, decreasing water levels and increasing water pollution, food scarcity, lack of access to clean water and sanitation leading to child mortality, deforestation causing displacement and biodiversity loss, and ozone layer depletion threatening ecosystems and human health.

🎯 Exam Tip: For environmental issues, focus on interconnected problems like resource depletion (land, water, fish), pollution (water, air), biodiversity loss (deforestation), and their social consequences (health crises, displacement).

 

Question 2. पर्यावरण प्रदूषण के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण बताइए।
Answer: पर्यावरण प्रदूषण के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
1. पश्चिमी विचारधारा-पर्यावरण प्रदूषण के लिए पश्चिमी चिन्तन तथा उनकी भौतिक जीवन दृष्टि काफी सीमा तक उत्तरदायी है।
2. जनसंख्या में वृद्धि-जनसंख्या वृद्धि के कारण मानव की आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति का शोषण बढ़ता है तथा पर्यावरण प्रदूषित होता है।
3. वनों की कटाई एवं भूक्षरण-वनों की निरन्तर कटाई के फलस्वरूप कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
4. जल प्रदूषण-कारखानों से निकलने वाले विषैले रसायनों तथा नगरों के गन्दे पानी से नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है।
In simple words: The main causes of environmental pollution are Western ideologies emphasizing material consumption, rapid population growth leading to over-exploitation of natural resources, continuous deforestation and soil erosion increasing carbon dioxide and overall pollution, and water contamination from industrial chemical waste and untreated urban sewage.

🎯 Exam Tip: When identifying causes of pollution, consider both philosophical/ideological factors (e.g., consumerism) and practical pressures (population growth, industrialization, deforestation, waste disposal). Provide brief explanations for each cause.

 

Question 3. पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख उपाय लिखिए।
Answer: पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-
1. समग्र चिन्तन की आवश्यकता-पश्चिमी जगत् के भौतिक चिन्तन में इस बात पर जोर दिया जाता है कि पृथ्वी पर व प्रकृति पर जो कुछ भी है, वह मानव के उपभोग के लिए है। अतः आवश्यकता मानव की सोंच बदलने की है। इसके लिए भारत का समग्र चिन्तन आवश्यक है।
2. वन संरक्षण-पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए वनों की अन्धाधुन्ध कटाई को रोकना अति आवश्यक है।
3. जनसंख्या नियन्त्रण-पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जनसंख्या को नियन्त्रित करना आवश्यक है।
4. वन्य जीव का संरक्षण-पर्यावरण संरक्षण के लिए यह आवश्यक है कि वन संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीवों का संरक्षण भी किया जाए।
In simple words: Key measures to control environmental pollution include adopting a holistic mindset that views nature as more than just a resource for human consumption, protecting forests by curbing indiscriminate felling, controlling population growth to reduce pressure on resources, and conserving wildlife alongside forest protection to maintain ecological balance.

🎯 Exam Tip: Focus on a multi-faceted approach to pollution control, including changes in human mindset (holistic thinking), direct conservation efforts (forests, wildlife), and addressing root causes like population growth. Present distinct and actionable solutions.

 

Question 4. पर्यावरण के सन्दर्भ में हम मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा किस प्रकार कर सकते हैं?
Answer: पर्यावरण के सन्दर्भ में हम मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा निम्न प्रकार कर सकते हैं-
1. मूलवासियों के प्राकृतिक आवास अर्थात् वन क्षेत्र को कुल भूमि क्षेत्र का 33.3 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाना चाहिए ।
2. आदिवासियों को उनकी परम्परा में परिवर्तन किए बिना मूल रूप से राजनीतिक संरक्षण दिया जाए।
3. आदिवासियों (मूलवासियों) को संगठित करके विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिनिधित्व दिलाया जाए।
4. आदिवासियों को शिक्षा तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी मार्गदर्शन देकर मुख्यधारा के साथ जुड़ने की उनमें स्वतः इच्छा जाग्रत की जाए।
In simple words: To protect indigenous rights in environmental contexts, we should increase their natural habitat (forest areas) to 33.3% of total land, provide political protection to their traditional way of life, ensure their representation in international forums like the UN, and empower them through education and health guidance while respecting their cultural identity.

🎯 Exam Tip: Emphasize both land-based and self-determination aspects. Focus on increasing their habitat, ensuring political and cultural protection, facilitating international representation, and providing access to education and health services without forcing assimilation.

 

Question 5. यू०एन०ई०पी० क्या है? इसके किन्हीं दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: यू०एन०ई०पी० संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरण कार्यक्रम से सम्बद्ध (जुड़ी) एक अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसी या संस्था है। इसका पूरा नाम यूनाइटेड नेशन्स एनवायरमेण्ट प्रोग्राम (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) है। इसके दो प्रमुख कार्य निम्नवत् हैं-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरण कार्यक्रम अर्थात् यूनाइटेड नेशन्स एनवायरमेण्ट प्रोग्राम सहित अनेक अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर सम्मेलन कराया और इस विषय के अध्ययन को प्रोत्साहन दिया।
2. इस संस्था का उद्देश्य पर्यावरण की समस्याओं को दूर करने की दृष्टि से प्रयासों की अधिक कारगर विश्व स्तर पर शुरुआत करना था। इसके प्रयत्नों के फलस्वरूप ही पर्यावरण वैश्विक राजनीति का एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा बन सका ।
In simple words: UNEP (United Nations Environment Programme) is a UN agency focused on environmental issues. Its two main functions are to organize international conferences and promote studies on environmental problems, and to initiate effective global efforts to address these issues, thereby raising environmental concerns to a prominent level in global politics.

🎯 Exam Tip: Define UNEP by its full name and affiliation with the UN. For its functions, focus on its roles in fostering international collaboration (conferences, studies) and catalyzing global action to elevate environmental concerns in international politics.

 

Question 6. पर्यावरण से सम्बन्धित उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के विचारों में क्या अन्तर है?
Answer: इस तथ्य को हम निम्नलिखित दो बिन्दुओं द्वारा सरलता से स्पष्ट कर सकते हैं-
(1) जहाँ उत्तरी गोलार्द्ध के देश वन क्षेत्र को बीहड़ या जनहीन प्रान्त मानते हैं वहीं दक्षिणी गोलार्द्ध के देश इनको देवस्थान या वन-प्रान्तर स्थान जैसे श्रद्धा उत्पन्न करने वाले नामों से पुकारते हैं। जब वनों के प्रति विकसित देशों अर्थात् उत्तरी गोलार्द्ध की धारणा ही तुच्छ कोटि की है, जबकि पर्यावरणीय एजेण्डा-21 में कहा गया है कि विश्व पर्यावरण अथवा मानवता की संयुक्त विरासत को विनाश से बचाने की उनकी अधिक जिम्मेदारी रहेगी। उन्हें अपनी धारणा के साथ-साथ कार्यप्रणाली में भी आमूल-चूल बदलाव लाना है।
(2) दक्षिणी गोलार्द्ध का पर्यावरणीय एजेण्डा ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन की मात्रा कम दर्शाता है जबकि उत्तरी गोलार्द्ध का एजेण्डा इन्हें अधिक दर्शाता है।
In simple words: Northern Hemisphere (developed) nations often view forests as barren or uninhabited lands, emphasizing equal responsibility for environmental protection, but their agenda highlights greenhouse gas emissions more. Southern Hemisphere (developing) nations, in contrast, revere forests as sacred (Devasthan/Van-Prantar), and their environmental agenda shows lower greenhouse gas emissions, advocating for differentiated responsibilities based on historical pollution and development needs.

🎯 Exam Tip: Differentiate between the North and South by contrasting their perceptions of natural resources (e.g., forests as commodities vs. sacred), their historical contributions to environmental degradation, their current emission levels, and their preferred approaches to environmental responsibility (equal vs. differentiated).

 

Question 7. क्योटो प्रोटोकॉल का क्या महत्त्व है? क्या भारत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं?
Answer: क्योटो प्रोटोकॉल को पर्यावरण संरक्षण हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों के फलस्वरूप मान्यता मिली। औद्योगिक विकास से सम्पन्न देश पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए अपने उद्योगों से निकलने वाली जहरीली गैसों के अनुपात को निर्धारित सीमा तक घटाने पर सहमत हुए। ऐसे विकसित उत्तरी गोलार्द्ध के देश अपने कल-कारखानों से निकलने वाली हरित प्रभाव गैसों का अनुपात घटाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य करेंगे।
इस अन्तर्राष्ट्रीय सहमति पर जापानी शहर क्योटो में सन् 1997 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के दौरान यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) द्वारा निर्धारित मापदण्डों को स्वीकार कर लिया गया था। अगस्त 2002 में भारत ने इस न्यायाचार को हस्ताक्षरित किया। इसके अनुसार चीन सहित भारत को विकासशील देश मानते हुए हरित गैसों की मात्रा घटाने के दायित्व से मुक्त रखा गया। उल्लेखनीय है कि इन देशों के औद्योगिक विकास से अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण को उतनी हानि नहीं हुई है, जितनी कि पश्चिमी तथा अन्य औद्योगिक विकसित राष्ट्रों में हुई ।
In simple words: The Kyoto Protocol is crucial as it's the first international treaty to set legally binding targets for reducing greenhouse gas emissions for developed countries, thereby recognizing the global climate change problem. Yes, India signed and ratified the Kyoto Protocol in August 2002, but as a developing nation, it was exempt from immediate binding emission reduction targets, reflecting the principle of common but differentiated responsibilities.

🎯 Exam Tip: State the significance of the Kyoto Protocol as the first binding GHG reduction treaty. Clearly answer whether India signed and ratified it, explaining India's status (developing nation) and the implications for its emission targets within the protocol's framework.

 

Question 8. ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को नियन्त्रित करने हेतु भारत द्वारा किए गए किन्हीं पाँच प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
Answer: ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को नियन्त्रित करने हेतु भारत द्वारा किए गए अग्रलिखित पाँच प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं-
1. भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल को सन् 2002 में हस्ताक्षरित करके उसका अनुमोदन किया है।
2. भारत ने अपनी राष्ट्रीय मोटर-कार ईंधन नीति में वाहनों के लिए स्वच्छत्तर ईंधन अनिवार्य कर दिया है।
3. सन् 2001 में पारित ऊर्जा संरक्षण अधिनियम में ऊर्जा के अधिक कारगर उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
4. विद्युत अधिनियम, 2003 में प्राकृतिक गैस के आयात, अपूरणीय ऊर्जा के उपयोग तथा स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में कार्य करना प्रारम्भ किया है।
5. भारत बायोडीजल से सम्बन्धित एक राष्ट्रीय मिशन चलाने के लिए भी प्रयासरत है।
In simple words: India has made several efforts to control greenhouse gas emissions, including ratifying the Kyoto Protocol in 2002, implementing cleaner fuel standards for vehicles, emphasizing efficient energy use through the 2001 Energy Conservation Act, promoting natural gas imports and renewable energy sources, and initiating a national mission for biodiesel to reduce reliance on fossil fuels.

🎯 Exam Tip: When listing India's efforts, include both policy measures (Kyoto Protocol ratification, fuel policy, energy conservation act) and initiatives for promoting cleaner energy sources (natural gas, renewables, biodiesel). Aim for a mix of legislative and technological approaches.

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. आप पर्यावरण आन्दोलन के स्वयंसेवक के रूप में किन कथनों को उठाएँगे?
Answer:
1. पर्यावरण आन्दोलन के स्वयंसेवक के रूप में हम वनों की अन्धाधुन्ध कटाई के विरुद्ध आन्दोलन चलाएँगे तथा वृक्षारोपण के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे।
2. खनिजों के अन्धाधुन्ध दोहन के विरोध में आन्दोलन करेंगे।
In simple words: As an environmental volunteer, I would advocate against rampant deforestation and illegal mining, raising public awareness about tree plantation and sustainable resource extraction to protect our natural heritage.

🎯 Exam Tip: Focus on actionable and impactful issues within environmental activism, such as protecting forests and regulating resource extraction. Frame your answer in terms of raising awareness and leading movements.

 

Question 2. पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित स्टॉकहोम सम्मेलन के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित सबसे पहला और महत्त्वपूर्ण सम्मेलन जून 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुआ । इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्त्वावधान में किया गया था। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण हेतु सात महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित किया गया।
In simple words: The Stockholm Conference, held in June 1972 under UN auspices in Sweden, was the first major international conference on environmental protection, where seven key resolutions were passed to address global environmental concerns.

🎯 Exam Tip: Highlight the historical significance of the Stockholm Conference as the *first* global environmental summit, mentioning its year, location, organizer (UN), and key outcome (resolutions).

 

Question 3. क्योटो प्रोटोकॉल के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में विभिन्न देशों के सम्मेलन का आयोजन जापान के क्योटो शहर में 1 दिसम्बर से 11 दिसम्बर, 1997 तक हुआ । इस सम्मेलन में कहा गया कि सूचीबद्ध औद्योगिक देश सन् 2008 से 2012 तक सन् 1990 के स्तर से नीचे 5.2% तक अपने सामूहिक उत्सर्जन में कमी करेंगे ।
In simple words: The Kyoto Protocol is an international agreement from 1997 that legally bound developed countries to reduce their greenhouse gas emissions by an average of 5.2% below 1990 levels during the period 2008-2012, aiming to combat climate change.

🎯 Exam Tip: Define the Kyoto Protocol by its core aim (GHG reduction), the participants (developed nations), the target reduction percentage, and the implementation period, focusing on its binding nature.

 

Question 4. माण्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है? इसके प्रमुख उद्देश्य बताइए ।
Answer: सन् 1987 में 175 औद्योगिक देशों ने माण्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। ओजोन परत को बचाने के लिए यह एक अन्तर्राष्ट्रीय सहमति थी जिसे माण्ट्रियल प्रोटोकॉल कहा गया। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. ओजोन ह्रास करने वाले पदार्थों के उत्पादन में कमी लाना ।
2. ओजोन ह्रास वाले पदार्थों के विकल्प ढूँढना।
3. ओजोन उत्पादन पर नियन्त्रण करना।
In simple words: The Montreal Protocol, signed in 1987 by 175 industrial countries, is an international treaty aimed at protecting the ozone layer. Its main objectives are to reduce the production of ozone-depdepleting substances, find alternatives for them, and control ozone-generating activities.

🎯 Exam Tip: Clearly state the purpose of the Montreal Protocol (ozone layer protection) and its year of signing. List its main objectives, focusing on the reduction and replacement of ozone-depleting substances.

 

Question 5. विश्व जलवायु परिवर्तन बैठक के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: सन् 1997 में नई दिल्ली में विश्व जलवायु परिवर्तन बैठक हुई। इस बैठक में निर्धनता, पर्यावरण तथा संसाधन प्रबन्ध के समाधान के सम्बन्ध में विकसित तथा विकासशील देशों में व्यापार की सम्भावनाओं पर विचार किया गया।
In simple words: The World Climate Change Conference in New Delhi in 1997 discussed solutions to poverty, environmental issues, and resource management, focusing on trade opportunities between developed and developing countries in the context of climate change.

🎯 Exam Tip: When describing the New Delhi climate change meeting, identify its year and location, and highlight its focus on integrated solutions for poverty, environment, and resource management, especially concerning trade between developed and developing nations.

 

Question 6. विश्व की साझी विरासत का क्या अर्थ है?
Answer: कुछ क्षेत्र एक देश के क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं; जैसे-पृथ्वी का वायुमण्डल, अण्टार्कटिका, समुद्री सतह तथा बाहरी अन्तरिक्ष आदि । इसका प्रबन्धन अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा साझे तौर पर किया जाता है। इन्हीं को 'विश्व की साझी विरासत' या 'साझी सम्पदा' कहा जाता है।
In simple words: "Global common heritage" refers to resources or regions that are not under the sovereign jurisdiction of any single nation, such as Earth's atmosphere, Antarctica, the ocean surface, and outer space, and are managed collectively by the international community.

🎯 Exam Tip: Define global common heritage by emphasizing resources outside national sovereignty and listing key examples like the atmosphere, Antarctica, and outer space, stressing their collective international management.

 

Question 7. विश्व की साझी विरासत की सुरक्षा के कोई दो उपाय बताइए।
Answer: विश्व की साझी विरासत की सुरक्षा के उपाय निम्नलिखित हैं-
1. सीमित प्रयोग-विश्व की साझी विरासतों का सीमित प्रयोग करना चाहिए।
2. जागरूकता पैदा करना — विश्व की साझी विरासतों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करनी चाहिए।
In simple words: Two ways to protect global common heritage are to limit their exploitation to ensure sustainability and to raise public awareness about their importance and the need for their preservation.

🎯 Exam Tip: Focus on practical and broad strategies: controlling resource usage (limited exploitation) and fostering public engagement (awareness campaigns) for collective responsibility.

 

Question 8. ब्यूनस आइरस सम्मेलन कब और क्यों हुआ?
Answer: अर्जेण्टीना के ब्यूनस आइरस में जलवायु परिवर्तन के संयुक्त राष्ट्र फेमवर्क कन्वेंशन से सम्बद्ध पक्षों का चौथा अधिवेशन 2 नवम्बर से 14 नवम्बर, 1998 को हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन क्योटो, प्रोटोकॉल 1997 के कार्यान्वयन पर विचार करने के लिए किया गया था।
In simple words: The Buenos Aires Conference, held in Argentina from November 2-14, 1998, was the fourth Conference of Parties (COP4) to the UNFCCC. Its primary purpose was to discuss and advance the implementation of the Kyoto Protocol, which had been adopted the previous year.

🎯 Exam Tip: Identify the date, location, and the specific event (COP4 of UNFCCC). Crucially, state its main objective: to discuss the implementation of the recently adopted Kyoto Protocol.

 

Question 9. पर्यावरण सम्बन्धी नियमों को समकालीन विश्व राजनीति के हिस्से के रूप में क्यों देखना चाहिए?
Answer: पर्यावरण के वर्तमान में हो रहे विनाश को कोई एक सरकार नहीं बल्कि समूचे विश्व की सरकारें ही विचार-विमर्श करके रोक सकती हैं। इस दृष्टि से पर्यावरण सम्बन्धी नियमों को समकालीन विश्व राजनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
In simple words: Environmental rules should be considered part of contemporary world politics because environmental degradation is a global problem that no single government can solve alone. It requires collective deliberation and action by all nations to prevent further destruction.

🎯 Exam Tip: Emphasize the transnational nature of environmental problems. Explain that since these issues affect all nations and require collective solutions, they necessarily become central to global political discourse and policy-making.

 

Question 10. मूलवासियों को परिभाषित कीजिए ।
Answer: मूलवासी ऐसे लोगों के वंशज हैं जो किसी मौजूद देश में लम्बी समयावधि से रहते चले आ रहे हैं। यद्यपि किसी दूसरी जातीय मूल के लोगों ने अन्य हिस्सों से आकर इनको अपने अधीन कर लिया तथापि ये अभी भी अपनी परम्परा, संस्कृति, रीति-रिवाज का पालन करना पसन्द करते हैं।
In simple words: Indigenous peoples are the descendants of a country's original inhabitants who have lived there for generations. Despite being subjected to rule by later settlers, they continue to preserve their distinct traditions, cultures, and customs.

🎯 Exam Tip: Define indigenous peoples by focusing on their ancestral ties to a land, their long-standing habitation, and their enduring commitment to preserving their unique cultural identities, even when living under the governance of other groups.

 

Question 11. मूलवासियों के अधिकारों का वर्णन कीजिए ।
Answer: मूलवासियों के अधिकार निम्नलिखित हैं-
1. विश्व में मूलवासियों को बराबरी का दर्जा प्राप्त हो ।
2. मूलवासियों को अपनी स्वतन्त्र पहचान रखने वाले समुदाय के रूप में जाना जाए।
3. मूलवासियों के आर्थिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन न किया जाए।
4. देश के विकास से होने वाला लाभ मूलवासियों को भी मिलना चाहिए।
In simple words: Indigenous peoples have rights to equality and recognition of their distinct cultural identity. They also have rights over their traditional economic resources, advocating against over-exploitation, and demanding a fair share in the benefits derived from national development.

🎯 Exam Tip: When outlining indigenous rights, include both cultural and economic aspects. Focus on equality, recognition of identity, protection of traditional resources, and equitable sharing of developmental benefits, ensuring a comprehensive view.

Multiple Choice Questions

 

Question 1. विश्व की साझी विरासत में क्या शामिल नहीं है-
(a) वायुमण्डल
(b) सड़क मार्ग
(c) समुद्री सतह
(d) बाहरी अन्तरिक्षा
Answer: (b) सड़क मार्ग
In simple words: विश्व की साझी विरासत में वे सभी क्षेत्र या संसाधन शामिल होते हैं जिन पर किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिकार होता है, जैसे वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष। सड़क मार्ग किसी देश के क्षेत्राधिकार में आता है, इसलिए यह साझी विरासत नहीं है।

🎯 Exam Tip: साझी विरासत के उदाहरणों को याद रखें और समझें कि कौन से क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2. क्योटो प्रोटोकॉल सम्मेलन जिस देश में हुआ वह है-
(a) जापान
(b) सिंगापुर
(c) नेपाल
(d) बाली ।
Answer: (a) जापान
In simple words: क्योटो प्रोटोकॉल, जो जलवायु परिवर्तन से संबंधित एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जापान के क्योटो शहर में हुआ था। यह सम्मेलन ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए आयोजित किया गया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और उनके स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. रियो सम्मेलन में कितने देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया-
(a) 172
(b) 170
(c) 180
(d) 185
Answer: (b) 170
In simple words: रियो सम्मेलन, जिसे पृथ्वी सम्मेलन भी कहा जाता है, में लगभग 170 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यह पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण वैश्विक बैठक थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख वैश्विक पर्यावरण सम्मेलनों में भाग लेने वाले देशों की संख्या जैसे विशिष्ट तथ्यों को याद रखें।

 

Question 4. पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का कारण है-
(a) पर्यावरण की सुरक्षा मूलवासी लोगों और प्राकृतिक पर्यावासों के लिए जारी है।
(b) विकसित देश प्रकृति की रक्षा को लेकर चिन्तित हैं ।
(c) मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान खतरे की हद तक पहुँच गया है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (c) मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान खतरे की हद तक पहुँच गया है।
In simple words: पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंता का मुख्य कारण यह है कि मनुष्य की गतिविधियों ने पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया है, और यह नुकसान अब एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण संबंधी समस्याओं के मूल कारणों को समझना और उन्हें स्पष्ट रूप से व्यक्त करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. पृथ्वी सम्मेलन कब हुआ-
(a) 1992 में
(b) 1995 में
(c) 1997 में
(d) 2000 में।
Answer: (a) 1992 में।
In simple words: पृथ्वी सम्मेलन, जो पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन था, 1992 में ब्राजील के रियो-डी-जनेरियो में आयोजित किया गया था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं और उनके संबंधित वर्षों को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

Question 6. माण्ट्रियल प्रोटोकॉल पर कितने देशों ने हस्ताक्षर किए-
(a) 170
(b) 172
(c) 175
(d) 180
Answer: (c) 175
In simple words: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, ओजोन परत को बचाने के उद्देश्य से एक अंतरराष्ट्रीय संधि, पर 175 देशों ने हस्ताक्षर किए थे।

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय समझौतों से जुड़े देशों की संख्या जैसे विशिष्ट डेटा को याद रखें।

 

Question 7. धरती के वायुमण्डल में निम्नलिखित में से जिस गैस की मात्रा में लगातार कमी हो रही है, वह है-
(a) ओजोन गैस
(b) कार्बन डाइ-ऑक्साइड गैस
(c) मीथेन गैस
(d) नाइट्रस ऑक्साइड गैस ।
Answer: (a) ओजोन गैस
In simple words: धरती के वायुमंडल में ओजोन गैस की मात्रा में लगातार कमी हो रही है, जिससे ओजोन परत का क्षरण हो रहा है और यह मनुष्यों तथा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।

🎯 Exam Tip: वायुमंडलीय गैसों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को समझें।

 

Question 8. भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल (1997) पर हस्ताक्षर किए और इसका अनुमोदन किया-
(a) सन् 1997 में
(b) सन् 1998 में
(c) सन् 2002 में
(d) सन् 2001 में।
Answer: (c) सन् 2002 में।
In simple words: भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल पर 2002 में हस्ताक्षर किए और इसका अनुमोदन किया। यह प्रोटोकॉल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।

🎯 Exam Tip: भारत की प्रमुख पर्यावरणीय संधियों में भागीदारी और उनके अनुमोदन के वर्षों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

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FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Civics are as per latest UP Board curriculum.

Are the Civics UP Board solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Civics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Civics. You can access UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Civics UP Board solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 12 Civics Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन in printable PDF format for offline study on any device.