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Detailed Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव UP Board Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 12 Biology Chapter 10 Microbes In Human Welfare (मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव प्रश्न 1. जीवाणुओं को नग्न आँखों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परन्तु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जाएँगे और क्यों?
Answer: हम अपने घर में आसानी से उपलब्ध होने वाले दही को प्रयोगशाला में नमूने के रूप में ले जा सकते हैं व सूक्ष्मजीव की उपस्थिति को प्रदर्शित कर सकते हैं क्योकि दूध का दही में परिवर्तन या किण्वन लैक्टोबैसिलस जीवाणु की सहायता से होता है। इसलिए दही में ये सूक्ष्मजीव उपस्थित होते हैं।
In simple words: आप दही का नमूना ले जा सकते हैं क्योंकि उसमें लैक्टोबैसिलस जीवाणु होते हैं जो दूध को दही में बदलते हैं और सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में सूक्ष्मजीवों के सामान्य जीवन में उपयोग और प्रदर्शन के तरीके को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के साथ उत्तर देने पर अधिक अंक मिलते हैं।
घरेलू उत्पाद में सूक्ष्मजीव प्रश्न 2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध कीजिए।
Answer: चावल, आटा, दाल का बना नरम-नरम आटा जिसका प्रयोग डोसा व इडली बनाने में होता है। जीवाणु द्वारा किण्वित होता है। इस आटे का फूला हुआ दिखना \( \text{CO}_2 \) के उत्पादन के कारण होता है। इसी तरह ब्रैड का सना हुआ आटा यीस्ट द्वारा किण्वित होता है।
In simple words: सूक्ष्मजीव किण्वन प्रक्रिया के दौरान गैसें छोड़ते हैं, जिससे डोसा, इडली और ब्रेड का आटा फूल जाता है। यह गैस अक्सर कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
🎯 Exam Tip: उदाहरण सहित गैस निष्कासन की प्रक्रिया को समझाना आवश्यक है, जैसे कि \( \text{CO}_2 \) का उत्पादन डोसा और ब्रेड बनाने में।
मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव की भूमिका प्रश्न 3. किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन कीजिए ।
Answer: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करके दुध को दही में बदल देता है। यह दूध की शर्करा लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलता है। लैक्टिक अम्ल दूध की प्रोटीन केसीन को जमाकर दही में परिवर्तित कर देता है। यह जीवाणु दूध से लैक्टोज को निकाल देता है परंतु बहुत-से व्यक्तियों को बिना लैक्टोज के दूध पीने पर एलर्जी होती है। ये जीवाणु महत्त्वपूर्ण विटामिन \( \text{B}_{12} \) उत्पन्न करते हैं तथा ये सड़ाने वाले जीवाणु व हानिकारक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं।
In simple words: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) दही में पाए जाते हैं। ये दूध को दही में बदलते हैं, \( \text{B}_{12} \) विटामिन बनाते हैं और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को रोकते हैं।
🎯 Exam Tip: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया के कार्यों और उनके लाभों, विशेषकर विटामिन \( \text{B}_{12} \) उत्पादन और दूध से लैक्टोज निकालने की क्षमता को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीवों का महत्व प्रश्न 4. कुछ पारम्परिक भारतीय आहार जो गेहूं, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताइए ।
Answer: गेहूं, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करके भटूरा (गेहुँ से), डोसा व इडली (चावल व उड़द की दाल) इत्यादि से बनते हैं।
In simple words: भारतीय खाद्य पदार्थों जैसे भटूरा, डोसा और इडली को बनाने में सूक्ष्मजीवों का उपयोग होता है, जो इन्हें किण्वित करते हैं।
🎯 Exam Tip: पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों के नाम और उनमें उपयोग होने वाले सूक्ष्मजीवों की भूमिका को स्पष्ट करें।
घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीवों का महत्व प्रश्न 5. हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियन्त्रण में किस प्रकार सूक्ष्मजीव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
Answer: प्रतिजैविक (antibiotic) सूक्ष्मजीवधारियों (microbes) के उपापचयी व्युत्पन्न होते हैं। ये किसी अन्य सूक्ष्म जीवधारी जैसे-जीवाणु के लिए हानिकारक अथवा निरोधी होते हैं। प्रतिजैविक, प्रतियोगिता निरोध द्वारा रोगों को ठीक करते हैं। अधिकतर प्रतिजैविक बैक्टीरिया से ही प्राप्त होते हैं। प्रतिजैविक जैसे- पेनिसिलिन (Penicillin) का उत्पादन सूक्ष्मजीवों (कवक) द्वारा किया जाता है। यह प्रतिजैविक हानिकारक रोगों को उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के काम आते हैं। प्रतिजैविक संक्रमित रोग जैसे- डिप्थीरिया, काली खाँसी तथा न्यूमोनिया की रोकथाम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेनिसिलिन सर्वप्रथम प्राप्त प्रतिजैविक है। इसकी खोज एलेक्जेण्डर फ्लेमिंग (Alexander Fleming) ने की थी।
In simple words: सूक्ष्मजीव प्रतिजैविक (antibiotics) बनाते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को मारते हैं और रोगों को नियंत्रित करते हैं, जैसे पेनिसिलिन जो कवक से बनती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिजैविकों की परिभाषा, उनके कार्यप्रणाली और पेनिसिलिन जैसे प्रमुख उदाहरणों को उनके खोजकर्ता के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव का महत्व प्रश्न 6. किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखिए, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों (एंटीबायोटिक्स) के उत्पादन में किया जाता है।
Answer:
1. रैमाइसिन को म्यूकर रैमोनियास नामक कवक से ।
2. पेनिसिलिन को पेनिसिलियम नोटेटम नामक कवक से प्राप्त करते हैं।
In simple words: प्रतिजैविकों के उत्पादन के लिए म्यूकर रैमोनियास (रैमाइसिन के लिए) और पेनिसिलियम नोटेटम (पेनिसिलिन के लिए) नामक दो कवक प्रजातियों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिजैविकों के उत्पादन में उपयोग होने वाले विशिष्ट कवक प्रजातियों के नाम और उनके संबंधित प्रतिजैविकों को जानना महत्वपूर्ण है।
Biology Notes For Class 12 UP Board In Hindi Pdf प्रश्न 7. वाहित मल से आप क्या समझते हैं? वाहित मल हमारे लिए किस प्रकार से हानिप्रद है?
Answer: प्रतिदिन नगर व शहरों से व्यर्थ जल की बहुत बड़ी मात्रा जनित होती है। इस व्यर्थ जल का प्रमुख घटक मनुष्य का मल-मूत्र है। नगर में इस व्यर्थ जल को वाहित मल (सीवेज) कहते हैं।
1. वाहित मल (सीवेज) में कार्बनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा सूक्ष्मजीव पाये जाते हैं, जो अधिकांशतः रोगजनकीय होते हैं।
2. वाहित मल में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसलिए कार्बनिक पदार्थों का विघटन भी नहीं हो पाता है। इसके फलस्वरूप वाहित मल वातावरण को प्रदूषित करते हैं।
In simple words: वाहित मल शहरों से निकलने वाला दूषित जल है जिसमें मानव मल-मूत्र और कार्बनिक पदार्थ होते हैं। यह रोगजनकीय होता है, ऑक्सीजन कम करता है, और वातावरण को प्रदूषित करता है।
🎯 Exam Tip: वाहित मल की परिभाषा और उसके हानिकारक प्रभावों (जैसे रोगजनकीय सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति, ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण) को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
मानव कल्याण में जीव विज्ञान की भूमिका प्रश्न 8. प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहित मल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अन्तर कौन-से हैं?
Answer: वाहित मल का उपचार वाहित मल संयन्त्र में किया जाता है जिससे यह प्रदूषण मुक्त हो सके। यह उपचार दो चरणों में सम्पन्न होता है –
1. प्राथमिक उपचार (Primary treatment) – प्राथमिक उपचार में मुख्यतः बड़े-छोटे कणों को भौतिक क्रियाओं; जैसे-अवसादन (sedimentation), निस्यंदन (filtration), प्लवन आदि द्वारा अलग किया जाता है। सबसे पहले तैरते हुए कूड़े-करकट को नियंदन द्वारा हटा दिया जाता है। इसके बाद ग्रिट (grit) मृदा तथा छोटे कणों को अवसादन द्वारा पृथक् किया जाता है। बारीक कण प्राथमिक स्लज (primary sludge) के रूप में नीचे बैठ जाते हैं और प्लावी बहिःस्राव (supernatant effluent) का निर्माण होता है। बहि:स्राव को प्राथमिक उपचार टैंक से द्वितीयक उपचार के लिए ले जाया जाता है।
2. द्वितीयक उपचार (Secondary treatment) – द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीवधारियों का उपयोग किया जाता है। जैसे-ऑक्सीकरण ताल एक उथला जलाशय होता है जिसमें वाहित मल एकत्रित किया जाता है। इसमें कार्बनिक पदार्थ अधिक होने के कारण शैवाल और जीवाणुओं की अच्छी वृद्धि होने लगती है। जीवाणु अपघटन करते हैं और शैवाल उनसे उत्पन्न कार्बन डाइ ऑक्साइड का प्रकाश संश्लेषण में उपयोग करते हैं। प्रकाश संश्लेषण में विमोचित ऑक्सीजन जल को दूषित होने से बचाती है। इस प्रकार ऑक्सीकरण ताल, शैवाल और जीवाणुओं के बीच सहजीविता का उदाहरण है। ऑक्सीजन ताल में होने वाली क्रियाओं द्वारा संक्रामक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के पश्चात् केवल नुकसान न देने वाले पदार्थ ही रह जाते हैं। द्वितीयक उपचार के पश्चात् प्लान्ट से बहिःस्राव सामान्यतः जल के प्राकृतिक स्रोतों जैसे-नदियों, झरनों आदि में छोड़ दिया जाता है अथवा तृतीयक उपचार हेतु रासायनिक क्रियाविधियों द्वारा इससे नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस लवणों को पृथक् करने के पश्चात् बहिःस्राव को जलाशयों में मुक्त कर दिया जाती है।
In simple words: प्राथमिक उपचार में भौतिक विधियों से बड़े कणों को हटाया जाता है, जबकि द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके कार्बनिक पदार्थों का जैविक अपघटन किया जाता है।
🎯 Exam Tip: वाहित मल उपचार के दोनों चरणों (प्राथमिक और द्वितीयक) की प्रक्रियाओं, शामिल विधियों और उनके उद्देश्यों को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव प्रश्न 9. क्या सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है? यदि हाँ, तो किस प्रकार से? इस पर विचार करें।
Answer: हाँ, सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। बायोगैस एक प्रकार से गैसों (मुख्यतः मीथेन) का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। गोबर में पादपों के सेलुलोजीय व्युत्पन्न प्रचुर मात्रा में होते हैं। अतः इसका प्रयोग बायोगैस को पैदा करने में किया जाता है। गोबर में मुख्य रूप से मिथेनोबैक्टीरियम पाया जाता है, जो मीथेन का उत्पादन करते हैं। बायोगैस (गोबर गैस) संयन्त्र का उपयोग मुख्य रूप से गाँवों में खाना बनाने एवं प्रकाश उत्पन्न करने में किया जाता है।
In simple words: हाँ, सूक्ष्मजीवों का उपयोग बायोगैस (मीथेन) बनाने के लिए किया जा सकता है। मिथेनोबैक्टीरियम गोबर में सेलूलोज का अपघटन करके बायोगैस उत्पन्न करते हैं, जिसका उपयोग खाना पकाने और प्रकाश के लिए होता है।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मजीवों द्वारा बायोगैस उत्पादन की प्रक्रिया, इसमें शामिल मुख्य गैस (मीथेन) और सूक्ष्मजीवों (मिथेनोबैक्टीरियम) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Biology Class 12 UP Board प्रश्न 10. सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्पन्न होगा? व्याख्या कीजिए। (2014, 15, 16, 17, 18)
Answer: जैव नियन्त्रण (Bio Control) – पादप रोगों तथा पीड़कों (pests) के नियन्त्रण के लिए जैववैज्ञानिक विधि (biological methods) का प्रयोग ही जैव नियन्त्रण (bio control) है। आधुनिक समाज में ये समस्याएँ रसायनों, कीटनाशियों तथा पीड़कनाशियों के बढ़ते हुए प्रयोगों की सहायता से नियन्त्रित की जाती हैं। ये रसायन मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं के लिए अत्यन्त ही विषैले तथा हानिकारक होते हैं। विषाक्त रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवधारियों के शरीर में पहुंचते हैं। ये पर्यावरण को भी प्रदूषित करते हैं। जैव उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव (Microbes as biofertilizers) – जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। लेग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर उपस्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु के सहजीवी सम्बन्ध द्वारा होता है। ये जीवाणु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित करते हैं। मृदा में मुक्तावस्था में रहने वाले अन्य जीवाणु जैसे-एजोस्पाइरिलम (Azospirilum) तथा एजोटोबैक्टर (Azotobacter) भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मृदा में नाइट्रोजन अवयव की मात्रा को बढ़ाते हैं। कवक अनेक पादपों के साथ सहजीवी सम्बन्ध स्थापित करते हैं। इस सम्बन्ध को माईकोराइजा (Mycorrhiza) कहते हैं। ग्लोमस (Glomus) जीनस के बहुत-से कवक सदस्य माइकोराइजा बनाते हैं। इस सम्बन्ध में कवकीय सहजीवी मृदा से जल एवं पोषक तत्वों का अवशोषण कर पादपों को प्रदान करते हैं और पादपों से भोजन प्राप्त करते हैं। सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) स्वपोषित सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को नाइट्रोजन यौगिकों के रूप में स्थिर करके मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं। जैसे-ऐनाबीना (Anabaena), नॉस्टॉक (Nostoc) आदि । धान के खेत में सायनोबैक्टीरिया महत्त्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। पीड़क तथा रोगों का जैव नियन्त्रण (Biological Control of Pests & Diseases) – जैव नियन्त्रण विधि से विषाक्त रसायन तथा पीड़कनाशियों पर हमारी निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैक्टीरिया बैसीलस थूरिनजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis) को प्रयोग बटरफ्लाई कैटरपिलर नियन्त्रण में किया जाता है। पिछले दशक में आनुवंशिक अभियान्त्रिकी की सहायता से वैज्ञानिक बैसीलस थूरिनजिएन्सिस टॉक्सिन जीन को पादपों में पहुँचा सके हैं। ऐसे पादप पीड़के द्वारा किए गए आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। Bt-कॉटन इसका एक उदाहरण है जिसे हमारे देश के कुछ राज्यों में उगाया जाता है। ड्रेगनफ्लाई (dragonflies), मच्छर और ऐफिड्स (aphids) आदि Bt-कॉटन को क्षति नहीं पहुंचा पाते । जैव वैज्ञानिक नियन्त्रण के तहत कवक ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) का उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है। यह बहुत-से पादप रोगजनकों का प्रभावशील जैव नियन्त्रण कारक है। बेक्यूलोवायरसिस (Baculoviruses) ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा सन्धिपादों (आर्थोपोड्स) पर हमला करते हैं। अधिकांश बैक्यूलोवायरसिस जो जैव वैज्ञानिक नियन्त्रण कारकों की तरह प्रयोग किए जाते हैं, वे न्यूक्लिओपॉलिहीड्रोवायरस (nucleopolyhedrovirus) प्रजाति के अन्तर्गत आते हैं। यह विषाणु प्रजाति-विशेष; सँकरे स्पेक्ट्रम कीटनाशीय उपचारों के लिए अति उत्तम मानी जाती हैं।
In simple words: सूक्ष्मजीव जैव उर्वरक के रूप में (जैसे राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, माइकोराइजा, सायनोबैक्टीरिया) मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और जैविक कीट नियंत्रण (जैसे बैसीलस थूरिनजिएन्सिस, ट्राइकोडर्मा, बैकुलोवायरस) से रासायनिक पीड़कनाशियों की आवश्यकता कम करते हैं।
🎯 Exam Tip: जैव उर्वरक और जैविक कीट नियंत्रण, दोनों की विस्तृत व्याख्या, उनके प्रकार और कार्यप्रणाली को उदाहरणों सहित समझना इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है।
Biology Syllabus Class 12 UP Board प्रश्न 11. जल के तीन नमूने लो, एक-नदी का जल, दूसरा-अनुपचारित वाहित मल जले तथा तीसरा-वाहित मल उपचार संयन्त्र से निकला द्वितीयक बहिःस्राव; इन तीनों नमूनों पर 'अ', 'ब', 'स' के लेबल लगाओ। इस बारे में प्रयोगशाला कर्मचारी को पता नहीं है कि कौन-सा क्या है? इन तीनों नमूनों 'अ', 'ब', 'स' का बी०ओ०डी० रिकॉर्ड किया गया जो क्रमशः 20 mg/L, 8 mg/L तथा 400 mg/L निकाला। इन नमूनों में कौन-सा सबसे अधिक प्रदूषित नमूना है? इस तथ्य को सामने रखते हुए कि नदी का जल अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ है। क्या आप सही लेबल का प्रयोग कर सकते हैं?
Answer: BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत निश्चित समय-काल में करता है। तथा उन्हें ऑक्सीकृत करता है। अनुपचारित वाहित मल जल सबसे अधिक प्रदूषित होता है क्योंकि इसमें मनुष्य का मल-मूत्र, कपड़े की धुलाई से उत्पन्न जल, औद्योगिक तथा कृषि अपशिष्ट आदि उपस्थित रहता है, इसलिए इस जल का BOD सबसे अधिक होगा। नदी का जल साफ होता है क्योंकि इसमें कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बहुत कम होती है, अतः इस जल को BOD सबसे कम होगा। इसलिए ये निम्नलिखित प्रकार से लेबल किए जा सकते हैं –
| नमूना | BOD मापन | नमूने का प्रकार |
| (अ) | 20 mg/L | द्वितीयक बहिःस्राव |
| (ब) | 8 mg/L | नदी का जल |
| (स) | 400 mg/L | अनुपचारित वाहित मल जल |
In simple words: BOD पानी में कार्बनिक प्रदूषण का माप है। अनुपचारित वाहित मल का BOD सबसे अधिक (400 mg/L) होता है, नदी के जल का सबसे कम (8 mg/L), और उपचारित जल का बीच में (20 mg/L)।
🎯 Exam Tip: BOD के सिद्धांत को समझना और विभिन्न जल नमूनों के BOD मानों को उनकी प्रदूषण स्तर से जोड़कर सही लेबलिंग करना महत्वपूर्ण है।
Biology Class 12 UP Board Syllabus प्रश्न 12. उन सूक्ष्मजीवों के नाम बताओ जिनसे साइक्लोस्पोरिन-ए (प्रतिरक्षा निषेधात्मक औषधि) तथा स्टैटिन (रक्त कोलिस्ट्रॉल लघुकरण कारक) को प्राप्त किया जाता है।
Answer:
1. साइक्लोस्पोरिन-ए का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम नामक कवक से किया जाता है।
2. स्टैटिन (लोभास्टैटिन) का उत्पादन मोनॉस्कस परफ्यूरीअस से किया जाता है।
In simple words: साइक्लोस्पोरिन-ए ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम कवक से और स्टैटिन मोनॉस्कस परफ्यूरीअस कवक से प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: साइक्लोस्पोरिन-ए और स्टैटिन जैसे महत्वपूर्ण औषधीय यौगिकों के उत्पादन में शामिल विशिष्ट सूक्ष्मजीवों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Biology Notes For Class 12 UP Board In Hindi Pdf प्रश्न 13. निम्नलिखित में सूक्ष्मजीवियों की भूमिका का पता लगाएँ तथा अपने अध्यापक से इनके विषय में विचार-विमर्श करें –
1. एकल कोशिका प्रोटीन (SCP)
2. मृदा ।
Answer:
1. एकल कोशिका प्रोटीन (Single Cell Protein) – शैवाल (algae); जैसे- स्पाइरुलिना, क्लोरेला तथा सिनेडेस्मस एवं कवक (fungi); जैसे- यीस्ट सैकेरोमाइसीटी, टॉरुलाप्सिस तथा कैंडिडा का उपयोग एकल कोशिका प्रोटीन के रूप में किया जा रहा है।
2. मृदा (Soil) – यह एक अकेला निवास स्थल है जिसमें विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव तथा प्राणिजात उपस्थित रहते हैं और उच्च पादपों को यांत्रिक सहायता एवं पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं, जिस पर मनुष्य की सभ्यता आधारित है। पौधे के विकास पर राइजोस्फीयर सूक्ष्मजीवों का लाभदायक प्रभाव पड़ता है। राइजोस्फीयर में सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिक्रिया के फलस्वरूप \( \text{CO}_2 \) तथा कार्बनिक अम्ल का निर्माण होता है जो पौधे में अकार्बनिक पोषकों को घुलाते हैं। कुछ राइजोस्फीयर सूक्ष्मजीव वृद्धि उत्तेजक पदार्थ भी उत्पादित करते हैं। जीवाणु, कवक, सायनोबैक्टीरिया आदि जैव उर्वरक मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं।
In simple words: एकल कोशिका प्रोटीन (SCP) स्पाइरुलिना और यीस्ट जैसे सूक्ष्मजीवों से प्राप्त होती है, जो खाद्य पूरक है। मृदा में सूक्ष्मजीव (जैसे जीवाणु, कवक) पोषक तत्वों को पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: SCP के उत्पादन में शामिल सूक्ष्मजीवों और मिट्टी की उर्वरता तथा पौधों के विकास में सूक्ष्मजीवों की बहुआयामी भूमिका को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Biology 12 UP Board प्रश्न 14. निम्नलिखित को घटते क्रम में मानव समाज कल्याण के प्रति उनके महत्त्व के अनुसार संयोजित करें; महत्त्वपूर्ण पदार्थ को पहले रखते हुए कारणों सहित अपना उत्तर लिखें- बायोगैस, सिट्रिक एसिड, पेनिसिलिन तथा दही
Answer:
1. पेनिसिलिन – यह एक प्रतिजैविक है। इसका उपयोग बहुत-से जीवाणु-जनित रोगों; जैसे- सिफलिस, गठिया, डिप्थीरिया, फेफड़े का संक्रमण आदि के उपचार में किया जाता है।
2. बायोगैस – इसका उपयोग खाना बनाने एवं प्रकाश पैदा करने में किया जाता है। गोबर गैस निर्माण के उपरान्त उपयोग की गई गोबर की स्लरी का प्रयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है।
3. सिट्रिक एसिड – इसका उपयोग बहुत-से भोज्य पदार्थों के परिरक्षण के रूप में किया जाता है। सिट्रिक अम्ल का उत्पादन ऐस्परजिलस नाइजर नामक कवक द्वारा किया जाता है।
4. दही – यह एक दुग्ध उत्पाद है जिसका उपयोग हम प्रतिदिन करते हैं। लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं।
In simple words: मानव समाज कल्याण के लिए महत्व के घटते क्रम में: पेनिसिलिन (रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण), बायोगैस (ऊर्जा और उर्वरक), सिट्रिक एसिड (खाद्य परिरक्षण), और दही (दैनिक उपभोग)।
🎯 Exam Tip: दिए गए पदार्थों के मानव कल्याण में महत्व को पहचानना और उन्हें तार्किक क्रम में व्यवस्थित करना महत्वपूर्ण है, साथ ही प्रत्येक के उपयोगों का संक्षिप्त विवरण देना भी।
UP Board Class 12 Biology Solutions प्रश्न 15. जैव- उर्वरक किस प्रकार से मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं?
Answer: जैव-उर्वरक का निर्माण विभिन्न प्रकार के जीवों; जैसे- नील- हरित शैवाल या सायनोबैक्टीरिया, जीवाणु एवं कवक से होता है। सायनोबैक्टीरिया की कई जातियाँ; जैसे- नॉस्टॉक, ऐनाबीना, टोलीप्रोनिक्स आदि वायुमण्डल से नाइट्रोजन गैस को ग्रहण कर इसे नाइट्रोजन यौगिकों में परिणत कर देती हैं। इनमें हेट्रोसिस्ट नामक विशेष कोशिका पायी जाती है, जो नाइट्रोजन-स्थिरीकरण में मुख्य भूमिका निभाती हैं तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती हैं। सहजीवी जीवाणु; जैसे- राइजोबियम मटर कुल के पौधों की जड़ों में ग्रंथियाँ बनाते हैं और वायुमण्डल से नाइट्रोजन गैस ग्रहण कर इसे नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिणत करते हैं। इससे मृदा की पोषक शक्ति की वृद्धि होती है। भूमि में पाए जाने वाले मुक्तजीवी जीवाणु; जैसे-एजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम भी वायुमण्डल के नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं। माइकोराइजा के कवक पौधों को पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं। कवक के तन्तु मृदा से फॉस्फोरस तथा अन्य पोषकों को ग्रहण कर पौधों को उपलब्ध कराते हैं।
In simple words: जैव-उर्वरक (जैसे सायनोबैक्टीरिया, राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, माइकोराइजा) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके या मिट्टी से पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचाकर मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के जैव-उर्वरकों (सायनोबैक्टीरिया, जीवाणु, कवक) और उनके विशिष्ट कार्यप्रणालियों (नाइट्रोजन स्थिरीकरण, पोषक तत्व अवशोषण) को समझना महत्वपूर्ण है।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
मानव कल्याण में रोगाणुओं प्रश्न 1. स्ट्रेप्टोमाइसिन उत्पादित की जाती है –
(क) स्ट्रेप्टोमाइसिस स्कोलियस द्वारा
(ख) स्ट्रेप्टोमाइसिस फ्रेडी द्वारा
(ग) स्ट्रेप्टोमाइसिस वैनेजुएली द्वारा
(घ) स्ट्रेप्टोमाइसिस ग्रीसिअस द्वारा
Answer: (घ) स्ट्रेप्टोमाइसिस ग्रीसिअस द्वारा
In simple words: स्ट्रेप्टोमाइसिन एक प्रतिजैविक है जिसे स्ट्रेप्टोमाइसिस ग्रीसिअस नामक जीवाणु से प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट प्रतिजैविकों और उनके उत्पादन में प्रयुक्त सूक्ष्मजीवों के नाम याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. सायनोबैक्टीरिया का प्रयोग जैव-उर्वरक के रूप में खेतों में किया जाता है –
(क) गेहूं
(ख) मक्का
(ग) धान
(घ) गन्ना
Answer: (ग) धान
In simple words: सायनोबैक्टीरिया, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं, धान के खेतों में जैव-उर्वरक के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: सायनोबैक्टीरिया के उपयोग और उनके विशिष्ट कृषि अनुप्रयोगों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर धान के खेतों में।
प्रश्न 3. किस तत्त्व के पोषण के लिए माइकोराइजा उत्तरदायी है?
(क) पोटैशियम
(ख) कॉपर
(ग) जिंक
(घ) फॉस्फोरस
Answer: (घ) फॉस्फोरस
In simple words: माइकोराइजा कवक जड़ों से जुड़कर पौधों को फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: माइकोराइजा के सहजीवी संबंध और पौधों के लिए फॉस्फोरस अवशोषण में उनकी विशिष्ट भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. यीस्ट कोशिकाओं का किण्वन में क्या योगदान है? (2014)
Answer: यीस्ट कोशिकाएँ किण्वन की प्रक्रिया में शर्कराओं को तोड़कर उन्हें अम्ल, गैसों तथा ऐल्कोहॉल में परिवर्तित कर देती हैं।
In simple words: यीस्ट किण्वन द्वारा शर्करा को तोड़कर ऐल्कोहॉल, अम्ल और गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) में बदलता है।
🎯 Exam Tip: यीस्ट द्वारा किण्वन की प्रक्रिया और उसके उत्पादों (अम्ल, गैस, ऐल्कोहॉल) को संक्षेप में स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. बायोगैस के घटक गैसों के नाम लिखिए तथा इससे मनुष्य को होने वाले दो लाभ बताइए । (2016, 17)
Answer: बायोगैस एक प्रकार से गैसों (जिसमें मुख्यतः मेथेन शामिल है) का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। कुछ बैक्टीरिया जो सेल्यूलोजीय पदार्थों पर अवायुवीय रूप से उगते हैं; वह \( \text{CO}_2 \) तथा \( \text{H}_2 \) के साथ-साथ बड़ी मात्रा में मेथेन भी उत्पन्न करते हैं।
In simple words: बायोगैस मुख्यतः मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण है। इसके लाभों में खाना पकाने के लिए ईंधन और प्रकाश उत्पादन शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: बायोगैस के प्रमुख घटक गैसों और मानव जीवन में इसके दो मुख्य लाभों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. जैव उर्वरक के रूप में प्रयुक्त दो सूक्ष्म जीवों के नाम लिखिए।
Answer: राइजोबियम तथा एनाबीना ।
In simple words: राइजोबियम और एनाबीना दो सूक्ष्मजीव हैं जो पौधों के लिए जैव उर्वरक के रूप में उपयोग होते हैं।
🎯 Exam Tip: जैव उर्वरक के रूप में कार्य करने वाले किन्हीं दो सूक्ष्मजीवों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. घरेलू उत्पादों तथा औद्योगिक उत्पादन में सूक्ष्मजीवों के महत्त्व को समझाइए । (2014, 15, 16, 17, 18)
Answer:
1. घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव हम प्रतिदिन सूक्ष्मजीवियों अथवा उनसे व्युत्पन्न पदार्थों का प्रयोग करते हैं। इसका सामान्य उदाहरण दूध से दही को उत्पादन है। सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टोबैसिलस तथा अन्य जिन्हें सामान्यतः लैक्टिक ऐसिड बैक्टीरिया कहते हैं, दूध में वृद्धि करते हैं और उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं। इसके अतिरिक्त डोसा, इडली, ब्रेड आदि को बनाने में भी सूक्ष्मजीवों का प्रयोग किया जाता है जो दाल-चावल के आटे व मैदा को स्पंजित कर देते हैं।
2. औद्योगिक उत्पादन में सूक्ष्मजीव औद्योगिक क्षेत्र में भी सूक्ष्मजीवों का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है। सूक्ष्मजीव विशेषकर यीस्ट (सैकेरोमाइसीस सैरीविसेई) का प्रयोग प्राचीन काल से ही वाइन, बीयर, ह्विस्की, ब्रांडी, रम आदि के उत्पादन में किया जाता रहा है। सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिजैविकों (एंटीबायोटिक) का भी उत्पादन होता है। एक प्रमुख एंटीबायोटिक पेनिसिलिन का उत्पादन (पेनिसिलियम नोटेटम) नामक सूक्ष्मजीव से किया। जाता है। कुछ विशेष प्रकार के रसायनों; जैसे-कार्बनिक अम्ल, ऐल्कोहॉल, एंजाइम आदि के व्यावसायिक तथा औद्योगिक उत्पादन में भी सूक्ष्मजीवों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ-ऐसीटिक अम्ल का उत्पादन ऐसीटोबैक्टर एसिटाई तथा एथेनॉल का उत्पादन सकेरोमाइसीस सैरीविसेई नामक सूक्ष्मजीवों द्वारा किया जाता है।
In simple words: सूक्ष्मजीव घरेलू उत्पादों (दही, डोसा, ब्रेड) और औद्योगिक उत्पादों (ऐल्कोहॉल, वाइन, प्रतिजैविक, कार्बनिक अम्ल) दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे खाद्य प्रसंस्करण और औद्योगिक उत्पादन संभव होता है।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मजीवों के घरेलू और औद्योगिक महत्व को अलग-अलग उदाहरणों (जैसे दही, शराब, प्रतिजैविक) के साथ विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
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