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Detailed Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति UP Board Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 6 Work Energy and Power (कार्य, ऊर्जा और शक्ति)
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अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्त्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक -
(a) किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य ।
(b) उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ।
(c) किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य ।
(d) किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
(e) किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य ।
Answer:
(a) चूँकि मनुष्य द्वारा लगाया गया बल तथा बाल्टी का विस्थापन दोनों ऊपर की ओर दिष्ट हैं; अतः कार्य धनात्मक होगा।
(b) चूँकि गुरुत्वीय बल नीचे की ओर दिष्ट है तथा बाल्टी का विस्थापन ऊपर की ओर है; अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा ।
(c) चूँकि घर्षण बेल सदैव वस्तु के विस्थापन की दिशा के विपरीत दिष्ट होता है; अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा ।
(d) वस्तु पर लगाया गया बल घर्षण के विपरीत अर्थात् वस्तु की गति की दिशा में है; अतः इस बल द्वारा कृत कार्य धनात्मक होगा ।
(e) वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिष्ट होता है; अतः कार्य ऋणात्मक होगा।
In simple words: कार्य धनात्मक तब होता है जब बल विस्थापन की दिशा में हो और ऋणात्मक तब जब बल विस्थापन की विपरीत दिशा में हो। गुरुत्वीय बल नीचे की ओर लगता है, घर्षण बल गति के विपरीत लगता है, और वायु प्रतिरोध भी गति का विरोध करता है।
🎯 Exam Tip: बल और विस्थापन की सापेक्ष दिशा को पहचानना कार्य के चिह्न को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है। समान दिशा में कार्य धनात्मक, विपरीत दिशा में ऋणात्मक।
Question 2. 2kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरम्भ में विरामावस्था में है, 7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज-घर्षण गुणांक 0-1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए -
(a) लगाए गए बल द्वारा 10s में किया गया कार्य ।
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य ।
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10s में किया गया कार्य ।
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन ।
Answer:
हल-दिया है : \(F = 7 \, N\), \(m = 2 \, kg\), \(u = 0\), \(\mu_k = 0.1\)
\(\therefore\) गति क्षैतिज मेज पर हो रही है,
\(\therefore\) गतिज घर्षण बल \(\mu_k N = \mu_k mg\)
\( = 0.1 \times 2 \, kg \times 10 \, m \, s^{-2} = 2 \, N\)
\(\therefore\) पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल
\(F_1 = F - \mu_k N = 7 \, N - 2 \, N = 5 \, N\)
सूत्र \(F=ma\) से,
वस्तु का त्वरण \(a = \frac{F_1}{m} = \frac{5 \, N}{2 \, kg} = 2.5 \, m \, s^{-2}\)
\(\therefore\) \(10 \, s\) में तय दूरी, \(s = ut + \frac{1}{2} at^2\)
\( = 0 \times 10 \, s + \frac{1}{2} (2.5 \, m \, s^{-2}) \times (10)^2\)
\( = 125 \, m\)
(a) लगाए गए बल द्वारा \(10 \, s\) में कृत कार्य
\(W_1 = F \cdot s \cos 0^\circ\)
\( = 7 \, N \times 125 \, m = +875 \, J\)
\(\therefore\) विस्थापन बाह्य बल की दिशा में है; अतः यह कार्य धनात्मक है।
(b) घर्षण बल द्वारा \(10 \, s\) में कृत कार्य
\(W_2 = - (\mu_k N) \cdot s\)
\( = - 2 \, N \times 125 \, m = - 250 \, J\)
\(\therefore\) विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है; अतः यह कार्य ऋणात्मक है।
(c) कुल बल द्वारा किया गया कार्य
\(W = \) कुल बल \(\times\) विस्थापन
\( = +5 \, N \times 125 \, m = +625 \, J\)
(d) कार्य-ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन \(\Delta K = \) कुल बल द्वारा कृत कार्य \( = + 625 \, J\)
व्याख्या – गतिज ऊर्जा में कुल-परिवर्तन (\(625 \, J\)) बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य (\(875 \, J\)) से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल के द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण के प्रभाव को समाप्त करने में व्यय होता है।
In simple words: हमने लगाए गए बल, घर्षण बल और कुल बल द्वारा किए गए कार्य की गणना की, साथ ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तन भी निकाला। लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक है, जबकि घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है। गतिज ऊर्जा में परिवर्तन कुल बल द्वारा किए गए कार्य के बराबर होता है, जो कि लगाए गए बल द्वारा किए गए कार्य से कम है क्योंकि घर्षण ने कुछ ऊर्जा व्यय कर दी।
🎯 Exam Tip: कार्य-ऊर्जा प्रमेय को याद रखें, जो बताता है कि किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन उस पर किए गए कुल कार्य के बराबर होता है। घर्षण जैसे गैर-संरक्षी बल हमेशा ऋणात्मक कार्य करते हैं।
Question 3. चित्र – 6.1 में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा-फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि-अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बंताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भों के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.1(a) एक ऊर्जा वक्र दिखाता है जहां स्थितिज ऊर्जा V(x) एक निश्चित बिंदु 'a' तक शून्य है और उसके बाद अनंत है, जबकि कुल ऊर्जा E 'a' पर V(a) के बराबर है। चित्र 6.1(b) एक सीढ़ीनुमा ऊर्जा वक्र दिखाता है जहां स्थितिज ऊर्जा कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थिर मानों पर है। चित्र 6.1(c) एक बॉक्स जैसा ऊर्जा वक्र दिखाता है जिसमें स्थितिज ऊर्जा कुछ क्षेत्रों में उच्च और अन्य में निम्न है।
Answer:
उत्तर : \(K.E. + P.E. = E\) (constant) \(\therefore K.E. = E – P.E.\)
(a) इस ग्राफ में \(x < a\) के लिए स्थितिज ऊर्जा वक्र, दूरी अक्ष के साथ सम्पाती है (\(P.E. = O\)) जबकि \(x > a\) के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण \(x > a\) क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।
(b) इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर \(P.E. > E\)
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः
कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।
(c) \(0 < x < a\) तथा \(b < x\) क्षेत्रों में
\(P.E. > E\)
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।
(d) \(-\frac{b}{2} < x < -\frac{a}{2}\)
तथा \(\frac{a}{2} < x < \frac{b}{2}\) क्षेत्रों में \(P.E. > E\);
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।
In simple words: कण केवल उन्हीं क्षेत्रों में रह सकता है जहाँ उसकी गतिज ऊर्जा धनात्मक या शून्य हो। यदि स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक हो जाती है, तो गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाती है, जो भौतिक रूप से असंभव है, इसलिए कण उन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि गतिज ऊर्जा कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकती। इसलिए, यदि किसी क्षेत्र में संभावित ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक हो जाती है, तो कण को उस क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता है।
Question 4. रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का (d) स्थितिज ऊर्जा फलन \(v (x) = 1/2 kx^2 / 2\) है, जहाँ \(k\) दोलक का बल नियतांक है। \(k = 0.5 \, N \, m^{-1}\) के लिए \(v (x)\) व \(x\) के मध्य ग्राफ चित्र-6.2 में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अन्तर्गत गतिमान कुल \(1 \, J\) ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही 'वापस आना चाहिए जब यह \(x = \pm 2 \, m\) पर पहुँचता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.2 एक परवलयिक वक्र को दर्शाता है, जो सरल आवर्त गति में एक कण के लिए स्थितिज ऊर्जा V(x) को विस्थापन x के फलन के रूप में दर्शाता है। वक्र मूलबिंदु पर न्यूनतम स्थितिज ऊर्जा दिखाता है और दोनों धनात्मक और ऋणात्मक x मानों के लिए सममित रूप से बढ़ता है, जो एक स्प्रिंग-द्रव्यमान प्रणाली के अनुरूप है।
Answer:
उत्तर-सरल आवर्त गति करते कण की कुल ऊर्जा
\[E = K.E. + P.E.\]
\[E = \frac{1}{2} mv^2 + \frac{1}{2} kx^2\]
\(\therefore\) दिया है, \(x\) विस्थापन पर \(P.E. = V (x) = \frac{1}{2} kx^2\)
कण उस स्थिति \(x = x_m\) से लौटना प्रारम्भ करेगा जबकि उसकी गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
अतः \(\frac{1}{2} mv^2 = 0\) व \(x = x_m\) रखने पर
\[E = \frac{1}{2} kx_m^2\]
दिया है: \(E = 1 \, J\) तथा \(k = 0.5 \, N \, m^{-1}\)
\(\therefore\) \(1 = \frac{1}{2} \times 0.5 \times x_m^2 \implies x_m^2 = \frac{2}{0.5} = 4\)
\(x_m = \pm 2 \, m\)
अतः कण जब \(x = \pm 2 \, m\) पर पहुँचता है तो वहीं से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।
In simple words: एक कण सरल आवर्त गति में अपनी गति की दिशा तब बदलता है जब उसकी गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है, जिसका अर्थ है कि कुल ऊर्जा पूरी तरह से स्थितिज ऊर्जा में बदल गई है। दिए गए ऊर्जा फलन और कुल ऊर्जा मान का उपयोग करके, हमने पाया कि यह \(x = \pm 2 \, m\) पर होता है।
🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में, कुल ऊर्जा गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है। टर्निंग पॉइंट (जहां कण अपनी दिशा बदलता है) वह बिंदु होता है जहां गतिज ऊर्जा शून्य होती है और कुल ऊर्जा पूरी तरह से स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है।
Question 5. निम्नलिखित का उत्तर दीजिए -
(a) किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई रॉकेट या वातावरण?
(b) धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लम्बवत नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?
(c) पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे-जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?
(d) चित्र-6.3 (i) में एक व्यक्ति अपने हाथों में \(15 \, kg\) का कोई द्रव्यमान लेकर \(2 \, m\) चलता है। चित्र-6.3 (ii) में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर \(15 \, kg\) का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.3(i) में एक व्यक्ति को दिखाया गया है जो अपने हाथों में \(15 \, kg\) का द्रव्यमान पकड़े हुए क्षैतिज रूप से \(2 \, m\) चल रहा है। चित्र 6.3(ii) में उसी व्यक्ति को एक घिरनी प्रणाली का उपयोग करके रस्सी खींचते हुए दिखाया गया है, जहां एक \(15 \, kg\) का द्रव्यमान रस्सी के दूसरे सिरे पर लटका हुआ है, और वह द्रव्यमान को ऊपर खींचने के लिए रस्सी को उसी \(2 \, m\) की दूरी तक खींचता है।
Answer:
उत्तर :
(a) बाह्य आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा (\(K.E. + P.E.\)) से प्राप्त की गई।
(b) धूमकेतु पर सूर्य द्वारा आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है; अतः धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य 'क गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा कृत कार्य शून्य होगा।
(c) जैसे-जैसे उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे-वैसे उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा घटती है, ऊर्जा संरक्षण के अनुसार गतिज ऊर्जा बढ़ती जाती है; अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाती है।
(d) (i) इस दशा में व्यक्तिद्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (\(\theta = 90^\circ\))
\(\therefore\) मनुष्य द्वारा कृत कार्य \(W = F \, d \cos 90^\circ = 0\)
(ii) इस दशा में पुली मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है तथा द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (\(\theta = 0^\circ\))
\(\therefore\) मनुष्य द्वारा कृत कार्य \(W = m \, g \, h \cos 0^\circ = 15 \, kg \times 10 \, m \, s^{-2} \times 2 \, m = 300 \, J\)
अतः दशा (ii) में अधिक कार्य किया जाएगा।
In simple words:
(a) रॉकेट का आवरण जलने के लिए अपनी यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग करता है।
(b) संरक्षी बल द्वारा बंद पथ में किया गया कुल कार्य शून्य होता है, इसलिए सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा धूमकेतु पर किया गया कुल कार्य शून्य है।
(c) उपग्रह पृथ्वी के करीब आने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है (जिससे चाल बढ़ती है), हालांकि वायु प्रतिरोध के कारण कुल ऊर्जा कम होती है।
(d) क्षैतिज विस्थापन के साथ वस्तु को उठाने में शून्य कार्य होता है, जबकि रस्सी खींचकर ऊपर उठाने में धनात्मक कार्य होता है, इसलिए दूसरी स्थिति में अधिक कार्य किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कार्य की गणना करते समय बल और विस्थापन के बीच के कोण पर ध्यान दें। संरक्षी बलों द्वारा बंद पथ में किया गया शुद्ध कार्य शून्य होता है, जबकि वायु प्रतिरोध जैसे गैर-संरक्षी बल हमेशा ऊर्जा क्षय करते हैं।
Question 6. सही विकल्प को रेखांकित कीजिए -
(a) जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
(b) किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
(c) किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आन्तरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
(d) किन्हीं दो पिण्डों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।
Answer:
(a) घटती है, क्योंकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य (बाह्य बल द्वारा धनात्मक कार्य) ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
(b) गतिज ऊर्जा, क्योंकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही हो ।
(c) बाह्य बल, क्योंकि बहुकण निकाय में आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है तथा आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते ।
(d) कुल रेखीय संवेग
In simple words: संरक्षी बल द्वारा धनात्मक कार्य से स्थितिज ऊर्जा घटती है। घर्षण बल गतिज ऊर्जा को क्षय करता है। बहुकण निकाय में कुल संवेग परिवर्तन की दर बाह्य बल के समानुपाती होती है। अप्रत्यास्थ संघट्ट में केवल कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।
🎯 Exam Tip: संरक्षी बल और स्थितिज ऊर्जा के बीच व्युत्क्रम संबंध को याद रखें। घर्षण हमेशा गतिज ऊर्जा को कम करता है। संवेग संरक्षण बाहरी बलों की अनुपस्थिति में होता है, और अप्रत्यास्थ संघट्ट में गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती।
Question 7. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए -
(a) किन्हीं दो पिण्डों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिण्ड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
(b) किसी पिण्ड पर चाहे कोई भी आन्तरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
(c) प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बन्द लूप में, किसी पिण्ड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
(d) किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अन्तिम गतिज ऊर्जा, आरम्भिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।
Answer:
उत्तर :
(a) असत्य, पूर्ण निकाय का संवेग व गतिज ऊर्जा संरक्षित रहते हैं।
(b) सत्य, निकाय की कुल ऊर्जा सदैव संरक्षित रहती है।
(c) असत्य, केवल संरक्षी बलों के लिए, बन्द लूप में गति के दौरान पिण्ड पर किया गया कार्य शून्य होता है।
(d) सत्य, क्योंकि अप्रत्यास्थ संघट्ट में गतिज ऊर्जा की सदैव हानि होती है।
In simple words:
(a) प्रत्यास्थ संघट्ट में, पूरे निकाय का संवेग और कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है, न कि व्यक्तिगत पिंडों की।
(b) कुल ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है, यह ऊर्जा संरक्षण का नियम है।
(c) बंद लूप में केवल संरक्षी बलों द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
(d) अप्रत्यास्थ संघट्ट में, गतिज ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऊष्मा, ध्वनि आदि में बदल जाता है, इसलिए अंतिम गतिज ऊर्जा प्रारंभिक से कम होती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम और संवेग संरक्षण के नियम के बीच के अंतर को समझें, विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के संघट्टों (प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ) के संदर्भ में। संरक्षी और गैर-संरक्षी बलों के प्रभाव को भी याद रखें।
Question 8. निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए -
(a) किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे सम्पर्क में होती हैं) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
(b) दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है
(c) किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व
(b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
(d) यदि दो बिलियर्ड-गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केन्द्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, न कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)
Answer:
उत्तर :
(a) नहीं, संघट्ट काल के दौरान गेंदें संपीडित हो जाती हैं; अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
(b) हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
(c) उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
(d) चूंकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों की पृथक्करण दूरी पर निर्भर करती है, इसका यह अर्थ हुआ कि संघट्ट काल में पिण्डों के बीच लगने वाला संरक्षी बल है; अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। इसलिए संघट्ट प्रत्यास्थ होगा।
In simple words:
(a) प्रत्यास्थ संघट्ट के दौरान जब गेंदें संपर्क में होती हैं, तो गतिज ऊर्जा पूरी तरह से संरक्षित नहीं रहती क्योंकि यह स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
(b) प्रत्यास्थ संघट्ट में कुल रेखीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है।
(c) अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए, गतिज ऊर्जा भी संरक्षित नहीं रहती लेकिन रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।
(d) यदि स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के बीच की दूरी पर निर्भर करती है, तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा क्योंकि बल संरक्षी होगा और कुल ऊर्जा संरक्षित रहेगी।
🎯 Exam Tip: संघट्ट के दौरान गतिज ऊर्जा और संवेग के संरक्षण को समझें। प्रत्यास्थ संघट्ट में संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, लेकिन संपर्क के क्षण में गतिज ऊर्जा अस्थायी रूप से स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। अप्रत्यास्थ संघट्ट में केवल संवेग संरक्षित रहता है।
Question 9. कोई पिण्ड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी। समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है -
Answer:
उत्तर- त्वरण \(a\) अचर है तथा \(u = 0\)
\(\therefore\) बल \(F = ma\) (अचर है) तथा \(t\) समय पर वेग \(v = at\)
\(\therefore t\) समय पर दी गई शक्ति
\[P = Fv = (ma)at\]
\[P = (ma^2)t\]
\(\implies P \propto t\)
अतः विकल्प (ii) सही है।
In simple words: चूंकि वस्तु विरामावस्था से अचर त्वरण के साथ चलती है, तो उसका वेग समय के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है। शक्ति बल और वेग का गुणनफल है, इसलिए शक्ति समय के सीधे आनुपातिक होती है।
🎯 Exam Tip: बल, वेग, त्वरण और शक्ति के बीच संबंधों को याद रखें। यदि त्वरण स्थिर है और प्रारंभिक वेग शून्य है, तो वेग \(v=at\) होता है और शक्ति \(P=Fv=mat = ma^2t\), जिससे \(P \propto t\) प्राप्त होता है।
Question 10. एक, पिण्ड अचर शक्ति के स्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका \(t\) समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है -
Answer:
उत्तर-दिया है : शक्ति \(P = F v\) अचर है
\[P = mav = m \frac{dv}{dt} v\]
\(\frac{dv}{dt} v = \frac{P}{m}\)
\(v \, dv = \frac{P}{m} dt\)
समाकलन करने पर,
\[\frac{v^2}{2} = \frac{Pt}{m} + C_1\]
माना \(t = 0\) पर \(v = 0\) तो \(C_1 = 0\)
\[v^2 = \frac{2P}{m} t \implies v = \sqrt{\frac{2P}{m}} t^{1/2}\]
\[\frac{ds}{dt} = \sqrt{\frac{2P}{m}} t^{1/2}\]
\[ds = \sqrt{\frac{2P}{m}} t^{1/2} dt\]
माना जब \(t = 0\) तो \(s = 0\) तब \(c_2 = 0\)
\[s = \sqrt{\frac{2P}{m}} \frac{t^{3/2}}{3/2} + C_2\]
\[s = \frac{2}{3} \sqrt{\frac{2P}{m}} t^{3/2}\]
\(\implies s \propto t^{3/2}\)
अतः विकल्प (iii) सही है।
In simple words: अचर शक्ति के प्रभाव में, कण का वेग समय के वर्गमूल के आनुपातिक होता है। वेग, विस्थापन के समय के साथ परिवर्तन की दर है, इसलिए विस्थापन समय के \(3/2\) घात के आनुपातिक होता है।
🎯 Exam Tip: अचर शक्ति के साथ गति में विस्थापन की गणना करने के लिए, शक्ति को \(Fv\) के रूप में व्यक्त करें और न्यूटन के द्वितीय नियम \((F=ma)\) का उपयोग करें। फिर वेग को प्राप्त करने के लिए इसे एकीकृत करें, और फिर विस्थापन प्राप्त करने के लिए एक बार और एकीकृत करें।
Question 11. किसी पिण्ड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार \(z –\) अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है, जो इस प्रकार है -
जहाँ \(\hat{i}\), \(\hat{j}\) तथा \(\hat{k}\) क्रमशः \(x, y\) एवं \(z -\) अक्षों के अनुदिश एकांक सदिश हैं। इस वस्तु को \(z-\) अक्ष के अनुदिश \(4\) मी की दूरी तक गति कराने के लिए आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
Answer:
हल-यहाँ बल, \(F = (-\hat{i} + 2\hat{j} + 3\hat{k})\) न्यूटन
बल का विस्थापन, \(d = Z-\)अक्ष के अनुदिश \(4\) मीटर अर्थात् \(4\hat{k}\) मीटर \( = (0\hat{i} + 0\hat{j} + 4\hat{k})\)
अतः आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य,
\(W = \vec{F} \cdot \vec{d} = (-\hat{i} + 2\hat{j} + 3\hat{k}) \cdot (0\hat{i} + 0\hat{j} + 4\hat{k})\) मीटर
\( = (-1)\times 0 + 2 \times 0 + 3 \times 4 = 12\) जूल
In simple words: किसी पिंड पर बल द्वारा किया गया कार्य बल और विस्थापन के अदिश गुणनफल के बराबर होता है। चूंकि विस्थापन केवल \(z\)-अक्ष के अनुदिश है, तो कार्य की गणना के लिए केवल बल के \(z\)-घटक को विस्थापन के परिमाण से गुणा करना होगा।
🎯 Exam Tip: कार्य एक अदिश राशि है, और इसकी गणना बल और विस्थापन सदिशों के अदिश गुणनफल (\(W = \vec{F} \cdot \vec{d}\)) से की जाती है। यदि बल और विस्थापन सदिश घटकों में दिए गए हैं, तो संबंधित घटकों को गुणा करें और परिणामों को जोड़ें।
Question 12. किसी अन्तरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा \(10 \, kev\) है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा \(100 \, kev\) है। इनमें कौन-सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों को अनुपात ज्ञात कीजिए।
(इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \( = 9.11 \times 10^{-31} \, kg\), प्रोटॉन का द्रव्यमान \( = 1.67 \times 10^{-27} \, kg\), \(1 \, eV = 1.60 \times 10^{-19} \, J\))
Answer:
हल - यहाँ इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा \(K_e = 10 \, keV\); इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \(m_e = 9.11 \times 10^{-31}\) किग्रा
तथा प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा \(K_p = 100 \, keV\);
प्रोटॉन का द्रव्यमान \(m_p = 1.67 \times 10^{-27}\) किग्रा
\(\therefore\) गतिज ऊर्जा, \(K = \frac{1}{2} mv^2\)
\(\therefore\) वेग, \(v = \sqrt{\frac{2K}{m}}\)
\(\implies v \propto \sqrt{K}\) तथा \(v \propto \frac{1}{\sqrt{m}}\)
अतः
\[\frac{v_e}{v_p} = \frac{\sqrt{2K_e/m_e}}{\sqrt{2K_p/m_p}} = \sqrt{\frac{K_e}{K_p} \times \frac{m_p}{m_e}}\]
\[= \sqrt{\frac{10 \, keV}{100 \, keV} \times \frac{1.67 \times 10^{-27} \, \text{न्यूटन}}{9.11 \times 10^{-31} \, \text{किग्रा}}}\]
\[= 13.5\]
इसलिए इलेक्ट्रॉन की चाल प्रोटॉन की चाल से अधिक होगी।
In simple words: गतिज ऊर्जा के सूत्र (\(K = \frac{1}{2}mv^2\)) का उपयोग करके, हम वेग के लिए \(v = \sqrt{\frac{2K}{m}}\) प्राप्त करते हैं। द्रव्यमान और गतिज ऊर्जा के दिए गए मानों को प्रतिस्थापित करने पर, इलेक्ट्रॉन की चाल प्रोटॉन की चाल से लगभग 13.5 गुना अधिक पाई जाती है, जिससे इलेक्ट्रॉन अधिक तीव्रगामी होता है।
🎯 Exam Tip: कणों की गतिज ऊर्जा और द्रव्यमान दिए होने पर उनकी चालों की तुलना करने के लिए, गतिज ऊर्जा के सूत्र को वेग के संदर्भ में पुनर्व्यवस्थित करें। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एक ही गतिज ऊर्जा के लिए, कम द्रव्यमान वाला कण अधिक चाल से गति करेगा।
Question 13. 2 मिमी त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 मी की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरम्भिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्द्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 मी / से -1 हो तो सम्पूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
Answer:
हल - वर्षा की बूँद की त्रिज्या \(r = 2\) मिमी \( = 2 \times 10^{-3}\) मी, बूँद का घनत्व \(\rho = 10^3\) किग्रा/मी\(^3\)
\(\therefore\) बूँद का द्रव्यमान \(m = \) आयतन \(\times\) घनत्व \( = \left(\frac{4}{3} \pi r^3\right) \rho\)
\( = \frac{4}{3} \times 3.14 \times (2 \times 10^{-3})^3 \times 10^3\) किग्रा
\( = 3.35 \times 10^{-5}\) किग्रा
वर्षा की बूँद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्द्ध भागों पर (प्रत्येक के लिए \(h = 500\) मी\(/2 = 250\) मी) गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य बराबर होगा जिसका परिमाण
\(W = \) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में कमी \( = mgh\)
\( = 3.35 \times 10^{-5}\) किग्रा \(\times 9.8\) मी/से\(^2 \times 250\) मी
\( = 0.082\) जूल
ऊर्जा संरक्षण के नियम के आधार पर पृथ्वी पर पहुँचने पर-
गतिज ऊर्जा में वृद्धि \( = \) प्रतिरोधी बल द्वारा कृत कार्य \( + \) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में कमी (अर्थात् गुरुत्व बल द्वारा कृत कार्य)
\(\therefore \frac{1}{2} mv^2 = W_{\text{प्रतिरोधी}} + mgH\)
अतः \(W_{\text{प्रतिरोधी}} = \frac{1}{2} mv^2 - mgH\)
यहाँ \(H = 500\) मीटर
तथा \(v = 10\) मी-से\(^{-1}\)
\(\therefore W_{\text{प्रतिरोधी}} = \frac{1}{2} (3.35 \times 10^{-5}) (10)^2\) जूल \( - 3.35 \times 10^{-5} \times 9.8 \times 500\) जूल
\( = (0.002 - 0.164) = -0.162\) जूल
\(W_{\text{प्रतिरोधी}}\) ऋणात्मक है, क्योंकि वर्षा की बूँद पर प्रतिरोधी बल ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर तथा बूंद का विस्थापन नीचे की ओर है।
In simple words: वर्षा की बूंद पर गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य प्रत्येक आधे भाग में समान होता है, और यह उसकी स्थितिज ऊर्जा में कमी के बराबर होता है। कुल यात्रा के दौरान प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करके निकाला जा सकता है, जिसमें कुल गतिज ऊर्जा में वृद्धि प्रतिरोधी बल द्वारा किए गए कार्य और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में कमी के योग के बराबर होती है। प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है क्योंकि यह विस्थापन के विपरीत दिशा में होता है।
🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य हमेशा \(mgh\) होता है, चाहे गति का मार्ग कुछ भी हो। वायु प्रतिरोध जैसे गैर-संरक्षी बलों द्वारा किए गए कार्य को निकालने के लिए ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करें, जिसमें गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा दोनों में परिवर्तन शामिल होते हैं।
Question 14. किसी गैस-पात्र में कोई अणु \(200 \, m \, s^{-1}\) की चाल से अभिलम्ब के साथ \(30^\circ\) का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुनः उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
Answer:
हल- दिया है : अणु की चाल \(u = 200 \, m \, s^{-1}\), \(\theta = 30^\circ\)
दीवार से संघट्ट के बाद चाल \(v = 200 \, m \, s^{-1}\)
\(\therefore\) प्रत्येक प्रकार के संघट्ट में संवेग संरक्षित रहता है।
अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित होगा।
माना अणु का द्रव्यमान \( = m \, kg\)
तब दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा \(K_1 = \frac{1}{2} mu^2 = \frac{1}{2} m (200)^2 \, J\)
संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा \(K_2 = \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{2} m (200)^2 \, J\)
\(\therefore\) गतिज ऊर्जा संरक्षित है; अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।
In simple words: चूंकि अणु उसी चाल से वापस लौटता है जिससे वह टकराता है, और संवेग सभी संघट्टों में संरक्षित रहता है, इसलिए यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है जिसमें गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है।
🎯 Exam Tip: संवेग हमेशा सभी प्रकार के संघट्टों (प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ) में संरक्षित रहता है, बशर्ते कोई बाहरी बल न हो। यदि संघट्ट से पहले और बाद में गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, तो संघट्ट प्रत्यास्थ कहलाता है।
Question 15. किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पम्प \(30 \, m^3\) आयतन की पानी की टंकी को \(15\) मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से \(40 \, m\) ऊपर हो और पम्प की दक्षता \(30\%\) हो तो पम्प द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
Answer:
हल - पम्प द्वारा टंकी को भरने के लिए भूतल से \(h = 40\) मीटर ऊँचाई पर उठाये गये जल का द्रव्यमान
\(m = \) आयतन \(\times\) घनत्व
\( = 30 \, \text{मी}^3 \times 10^3 \, \text{किग्रा/मी}^3\)
\( = 3 \times 10^4\) किग्रा
\(\therefore\) टंकी को भरने में पम्प द्वारा किया गया कार्य
\(W = mgh\)
\(W = 3 \times 10^4\) किग्रा \(\times 9.8\) मी/से\(^2 \times 40\) मीटर
\( = 1.176 \times 10^7\) जूल
इस कार्य को करने में पम्प द्वारा लिया गया समय \(t = 15\) मिनट
अर्थात् \(t = 15 \times 60\) सेकण्ड \( = 900\) सेकण्ड
\(\therefore\) पम्प की आवश्यक सामर्थ्य, \(P = \frac{W}{t} = \frac{1.176 \times 10^7 \, \text{जूल}}{900 \, \text{सेकण्ड}} = 1.306 \times 10^4\) वाट
पम्प की क्षमता \( = \frac{\text{निर्गत शक्ति}}{\text{निवेशी शक्ति}} = \frac{\text{आवश्यक सामर्थ्य}}{\text{उपयोग की गयी विद्युत शक्ति}}\)
\(\therefore\) उपयोग की गयी विद्युत शक्ति \( = \frac{\text{आवश्यक सामर्थ्य}}{\text{पम्प की क्षमता}}\)
\( = \frac{1.306 \times 10^4 \, \text{वाट}}{30\%}\)
\( = \frac{1.306 \times 10^4 \times 100}{30}\) वाट \( = 4.36 \times 10^4\) वाट
\( = 43.6\) किलोवाट
In simple words: पहले पानी के द्रव्यमान की गणना की गई, फिर टंकी को भरने के लिए आवश्यक कार्य (\(mgh\)) निकाला गया। इसके बाद, कार्य को समय से विभाजित करके पम्प की आवश्यक शक्ति ज्ञात की गई। अंत में, पम्प की दक्षता का उपयोग करके, कुल विद्युत शक्ति की गणना की गई जो पम्प द्वारा उपयोग की गई थी।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए, कार्य \((W=mgh)\), शक्ति \((P=W/t)\) और दक्षता (\(\eta = P_{out}/P_{in}\)) के सूत्रों को याद रखें। सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ एक ही प्रणाली (जैसे SI) में हैं।
Question 16. दो समरूपी बॉल-बियरिंग एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज। पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बॉल-बियरिंग, जो आरम्भ में \(y\) चाल से गतिमान है. सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र-6.4) में से कौन-सा परिणाम सम्भव है?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.4 तीन बॉल-बियरिंगों के प्रत्यास्थ संघट्ट के बाद की तीन संभावित स्थितियाँ दिखाता है। स्थिति (i) में, पहली गेंद रुक जाती है और दूसरी व तीसरी गेंद आधी चाल से चलती हैं। स्थिति (ii) में, पहली व दूसरी गेंद रुक जाती हैं और तीसरी गेंद पूरी चाल से चलती है। स्थिति (iii) में, पहली, दूसरी और तीसरी तीनों गेंदें एक तिहाई चाल से चलती हैं।
Answer:
उत्तर-माना प्रत्येक बॉल-बियरिंग का द्रव्यमान \(m\) है।
संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा
\[K_1 = \frac{1}{2} m V^2 + 0 + 0 = \frac{1}{2} m V^2\]
दशा (i) में संघट्ट के बाद निकाय की गतिज ऊर्जा
\[K_2 = 0 + \frac{1}{2} (m + m) \left(\frac{V}{2}\right)^2 = \frac{1}{4} m V^2\]
स्पष्ट है कि \(K_2 < K_1\)
दशा (ii) में संघट्ट के बाद निकाय की कुल ऊर्जा
\[K_2 = 0 + 0 + \frac{1}{2} m V^2 = \frac{1}{2} m V^2\]
स्पष्ट है कि \(K_2 = K_1\)
दशा (iii) में संघट्ट के बाद निकाय की गतिज ऊर्जा
\[K_2 = \frac{1}{2} (m+m+m) \left(\frac{V}{3}\right)^2 = \frac{1}{6} m V^2\]
स्पष्ट है कि \(K_2 < K_1\)
यह दिया गया है कि संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी।
\(\therefore\) केवल दशा (ii) में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रही है; अतः केवल यही परिणाम सम्भव है।
In simple words: प्रत्यास्थ संघट्ट में, निकाय की कुल गतिज ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है। हमने प्रत्येक दी गई स्थिति के लिए संघट्ट के बाद की कुल गतिज ऊर्जा की गणना की और पाया कि केवल स्थिति (ii) में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है (प्रारंभिक गतिज ऊर्जा के बराबर रहती है), जिससे यह एकमात्र संभव परिणाम है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थ संघट्ट में, गतिज ऊर्जा और संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं। इस प्रकार की समस्या में, संघट्ट के बाद की गतिज ऊर्जा की गणना करें और देखें कि यह प्रारंभिक गतिज ऊर्जा के बराबर है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए कि कौन सा परिणाम संभव है।
Question 17. किसी लोलक के गोलक A को, जो ऊधर से \(30^\circ\) का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र-6.5 में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.5 एक सरल लोलक को दर्शाता है, जिसमें एक गोलक A को ऊर्ध्वाधर से \(30^\circ\) के कोण पर छोड़ा जाता है। यह नीचे आकर एक मेज पर विरामावस्था में रखे समान द्रव्यमान के गोलक B से प्रत्यास्थ संघट्ट करता है। गोलक A एक धागे से निलंबित है, जबकि गोलक B मेज पर है।
Answer:
उत्तर : दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।
In simple words: प्रत्यास्थ संघट्ट और समान द्रव्यमान वाले पिंडों के बीच, गति का पूरी तरह से आदान-प्रदान होता है। इसका मतलब है कि लोलक का गोलक A अपनी सारी गतिज ऊर्जा विरामावस्था में रखे गोलक B को हस्तांतरित कर देगा, और स्वयं संघट्ट के बाद तुरंत रुक जाएगा, जिससे वह ऊपर नहीं उठेगा।
🎯 Exam Tip: समान द्रव्यमान के पिंडों के बीच एक आयामी प्रत्यास्थ संघट्ट में, पिंड अपनी चालों का आदान-प्रदान करते हैं। यदि एक पिंड विराम पर है, तो दूसरा पिंड अपनी सारी गतिज ऊर्जा उसे स्थानांतरित कर देगा और स्वयं विराम पर आ जाएगा, जबकि विराम वाला पिंड अपनी गतिज ऊर्जा के साथ चलना शुरू कर देगा।
Question 18. किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लम्बाई \(1.5 \, m\) है तो निम्नतम बिन्दु पर आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी प्रारम्भिक ऊर्जा का \(5\%\) अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 6.6 एक सरल लोलक को दर्शाता है जिसमें गोलक को क्षैतिज स्थिति A से छोड़ा जाता है। लोलक की लंबाई L 1.5 मीटर है। गोलक नीचे गिरता है और निम्नतम बिंदु B पर पहुंचता है। स्थिति A प्रारंभिक स्थिति है (क्षैतिज अवस्था) और स्थिति B निम्नतम बिंदु (ऊर्ध्वाधर अवस्था) है।
Answer:
हल - प्रारम्भिक स्थिति A में गोलक की गतिज ऊर्जा \(K_A = 0\)
स्थितिज ऊर्जा \(U_A = mgl\)
\(\therefore A\) पर गोलक की कुल ऊर्जा
\(E_A = K_A + U_A = 0 + mgl = mgl\)
निम्नतम बिन्दु B पर गोलक की गतिज ऊर्जा \(K_B = \frac{1}{2} mv_B^2\)
तथा स्थितिज ऊर्जा \(U_B = 0\)
कुल ऊर्जा \(E_B = K_B + U_B = \frac{1}{2} mv_B^2 + 0 = \frac{1}{2} mv_B^2\)
चूंकि आरम्भिक ऊर्जा का \(5\%\) अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है, इसलिए प्रारम्भिक ऊर्जा \(E_A\) का \(95\%\) अन्तिम ऊर्जा \(E_B\) में बदलता है।
\(\therefore E_B = E_A\) का \(95\%\)
\(\frac{1}{2} mv_B^2 = mgl\) का \(95\% = 0.95mgl\)
\(\therefore v_B = \sqrt{\frac{2 \times 0.95mgl}{m}} = \sqrt{1.90gl}\)
\( = \sqrt{1.90 \times 9.8 \times 1.5}\) मी/से
\( = 5.285\) मी/से \(\approx 5.3\) मी/से
In simple words: लोलक को क्षैतिज स्थिति से छोड़ने पर, उसकी प्रारंभिक ऊर्जा पूरी तरह से स्थितिज ऊर्जा (\(mgl\)) होती है। वायु प्रतिरोध के कारण \(5\%\) ऊर्जा क्षय होने के बाद, निम्नतम बिंदु पर कुल ऊर्जा प्रारंभिक ऊर्जा का \(95\%\) होगी, जो पूरी तरह से गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। इस सिद्धांत का उपयोग करके अंतिम वेग की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करें, यह ध्यान में रखते हुए कि वायु प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का एक निश्चित प्रतिशत नष्ट हो जाता है। प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा को अंतिम गतिज ऊर्जा से संबंधित करें और नष्ट हुई ऊर्जा के लिए समायोजित करें।
Question 19. \(300 \, kg\) द्रव्यमान की कोई ट्रॉली, \(25 \, kg\) रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर \(27 \, km \, h^{-1}\) की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात बोरे में किसी छिद्र से रेत \(0.05 \, kg \, s^{-1}\) की दर से निकलकर ट्रॉली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
Answer:
उत्तर : ट्रॉली तथा रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है (एकसमान वेग के कारण); अतः
निकाय का रैखिक संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी प्रकार का आन्तरिक परिवर्तन (रेत ट्रॉली में ही गिर रहा है, बाहर नहीं) क्यों न हो जाए। अतः ट्रॉली की चाल \(27 \, km \, h^{-1}\) ही बनी रहेगी।
In simple words: चूंकि ट्रॉली और रेत के बोरे की प्रणाली पर कोई बाहरी बल कार्य नहीं कर रहा है (यह घर्षणरहित है और एकसमान वेग से गतिमान है), इसलिए प्रणाली का कुल रैखिक संवेग संरक्षित रहेगा, भले ही रेत ट्रॉली से बाहर रिस रही हो। परिणामस्वरूप, ट्रॉली की चाल अपरिवर्तित रहेगी।
🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का नियम बताता है कि यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल कार्य नहीं करता है, तो निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है। आंतरिक प्रक्रियाओं, जैसे कि द्रव्यमान का रिसाव, निकाय के कुल संवेग या वेग को प्रभावित नहीं करते जब तक कि द्रव्यमान निकाय से बाहर न निकले।
Question 20. \(0.5 \, kg\) द्रव्यमान का एक कण \( = a x^{3/2}\) वेग से सरल रेखीय मति करता है, जहाँ \(a = 5 \, m^{-1/2} \, s^{-1}\) है । \(x = 0\) से \(x= 2m\) तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
Answer:
हल-कण का द्रव्यमान \(m = 0.5\) किग्रा
\(v = ax^{3/2}\) से (जहाँ \(a = 5\) मी\(^{-1/2}\) से\(^{-1}\))
\(x = 0\) पर वेग \(v_0 = 5 \, \text{मी}^{-1/2} \, \text{से}^{-1} \times 0 = 0\)
\(x = 2\) मी पर वेग \(v = 5 \, \text{मी}^{-1/2} \, \text{से}^{-1} \times (2 \, \text{मी})^{3/2} = 10\sqrt{2}\) मी/से
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार,
बल द्वारा किया गया कार्य, \(W = \) कण की गतिज ऊर्जा में वृद्धि
\[ = \frac{1}{2} mv^2 - \frac{1}{2} mv_0^2\]
\[ = \frac{1}{2} m(v^2 - v_0^2) = \frac{1}{2} mv^2\]
(\(\therefore v_0 = 0\))
\[W = \frac{1}{2} \times 0.5 \, \text{किग्रा} \times (10\sqrt{2} \, \text{मी/से})^2 = 50\] जूल
In simple words: कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किया गया कार्य गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। दिए गए वेग फलन का उपयोग करके, हमने प्रारंभिक और अंतिम वेग की गणना की। चूंकि प्रारंभिक वेग शून्य है, तो कार्य अंतिम गतिज ऊर्जा के बराबर हो जाता है, जिससे कुल कार्य 50 जूल निकलता है।
🎯 Exam Tip: कार्य-ऊर्जा प्रमेय का उपयोग करें, जिसमें कहा गया है कि किसी बल द्वारा किया गया शुद्ध कार्य निकाय की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है (\(W = \Delta K\)). यदि प्रारंभिक वेग शून्य है, तो \(W = K_f\).
Question 21. किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल \(A\) के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं।
(a) यदि हवा \(u\) वेग से वृत्त के लम्बवत दिशा में बहती है तो \(t\) समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमाने क्या होगा?
(b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
(c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की \(25\%\) ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है। यदि \(A = 30 \, \text{मी}^2\) और \(u = 36\) किमी/घण्टा \(^{-1}\) और वायु का घनत्व \(1.2\) किग्रा – मी\(^{-3}\) है। तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
Answer:
हल-ब्लेड का क्षेत्रफल \(A = 30\) मीटर\(^2\),
हवा का वेग \(v = 36\) किमी/घण्टा \( = 36 \times \left(\frac{5}{18}\right)\) मी/से \( = 10\) मी/से
वायु का घनत्व \(\rho = 1.2\) किग्रा-मी\(^{-3}\)
(a) \(t\) समय में गुजरने वाली वायु का आयतन \(V = A(v \times t)\)
वायु का द्रव्यमान, \(m = V \times \rho = A v t \times \rho\)
अर्थात् \(m = 30 \, \text{मी}^2 \times 10 \, \text{मी/से} \times 1 \times 1.2\) किग्रा/मी\(^3 = 360t\) किग्रा
(b) वायु की गतिज ऊर्जा,
\[K = \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{2} (A \rho v t) v^2 = \frac{1}{2} A \rho t v^3\]
\( = \frac{1}{2} \times 30 \times 1.2 \times t \times (10)^3\) जूल \( = 18000t\) जूल
(c) \(t\) समय में उत्पन्न वैद्युत ऊर्जा, \(W = \) वायु की गतिज ऊर्जा का \(25\%\)
\( = \frac{25}{100} \times 18000t = (4500)t\) जूल
\(\therefore\) उत्पन्न वैद्युत शक्ति \( = \frac{W}{t} = \frac{(4500) \, \text{जूल}}{1 \, \text{सेकण्ड}} = 4500\) वाट \( = 4.5\) किलोवाट
In simple words:
(a) \(t\) समय में पवनचक्की से गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान ब्लेड के क्षेत्रफल, वायु के वेग और घनत्व के गुणनफल से निकाला जाता है।
(b) वायु की गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2}mv^2 \) सूत्र से निकाली जाती है, जहाँ \(m\) ऊपर गणना किया गया द्रव्यमान है।
(c) पवनचक्की की विद्युत शक्ति हवा की गतिज ऊर्जा का \(25\%\) है, जिसे समय से विभाजित करके गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: पवनचक्की की समस्याओं में, गतिज ऊर्जा और शक्ति की गणना के लिए वायु के द्रव्यमान की सटीक गणना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि वेग को किमी/घंटा से मी/से में परिवर्तित किया जाए और दक्षता प्रतिशत को दशमलव में बदला जाए।
Question 22. कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए \(10\) किग्रा द्रव्यमान को \(0.5\) मी की ऊँचाई तक \(1000\) बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है।
(a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है?
(b) यदि वसा \(3.8 \times 10^7 \, J\) ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि \(20\%\) दक्षता की दर से यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी वसा खर्च कर डालेगा
Answer:
हल - (a) गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य
\(W = \) स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि
अर्थात् \(W = 1000 \, (mgh)\)
\( = 1000 \, (10 \, \text{किग्रा} \times 9.8 \, \text{मी/से}^2 \times 0.5 \, \text{मी})\)
\( = 4.9 \times 10^4\) जूल
(b) वसा द्वारा प्रति किलोग्राम आपूर्तित यान्त्रिक ऊर्जा
\( = \left(\frac{20}{100}\right) \times 3.8 \times 10^7\) जूल/किग्रा
\( = 7.6 \times 10^6\) जूल/किग्रा
\(\therefore\) व्यक्ति द्वारा खर्च की गयी वसा \( = \frac{W}{\text{प्रति किग्रा आपूर्ति ऊर्जा}}\)
\( = \frac{4.9 \times 10^4 \, \text{जूल}}{7.6 \times 10^6 \, \text{जूल / किग्रा}}\)
\( = 6.45 \times 10^{-3}\) किग्रा
In simple words:
(a) व्यक्ति द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध किया गया कुल कार्य प्रत्येक बार उठाए गए द्रव्यमान की स्थितिज ऊर्जा (\(mgh\)) को उठाने की संख्या से गुणा करके निकाला जाता है।
(b) वसा की दक्षता को ध्यान में रखते हुए, व्यक्ति द्वारा खर्च की गई कुल वसा की मात्रा की गणना आवश्यक कार्य को प्रति किलोग्राम वसा द्वारा उपलब्ध प्रभावी यांत्रिक ऊर्जा से विभाजित करके की जाती है।
🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य की गणना करते समय \(W=mgh\) सूत्र का उपयोग करें, और कुल कार्य के लिए दोहरावों की संख्या से गुणा करें। ऊर्जा दक्षता की समस्याओं में, ध्यान दें कि इनपुट ऊर्जा का केवल एक अंश ही उपयोगी कार्य में परिवर्तित होता है।
Question 23. कोई परिवार \(8 \, kw\) विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है।
(a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर \(200 \, w \, m^{-2}\) है। यदि इस ऊर्जा का \(20\%\) भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो \(8kw\) की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी?
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
Answer:
हल - (a) परिवार द्वारा प्रयुक्त विद्युत शक्ति \(P = 8\) किलोवाट \( = 8 \times 10^3\) वाट ...(1)
सौर ऊर्जा के आपतन की दर \( = 200\) वाट/मीटर\(^2\)
यदि आवश्यक क्षेत्रफल \(A\) मी\(^2\) हो तो इस क्षेत्रफल पर आपतित सौर शक्ति \( = 200A\) वाट
परन्तु आपतित ऊर्जा का \(20\%\) भाग लाभदायक ऊर्जा में बदलता है इसलिए लाभदायक विद्युत शक्ति
\(P = 200A\) का \(20\% = 200A \times \frac{20}{100} = 40A\) वाट ...(2)
समी\(\circ\) (1) तथा समी\(\circ\) (2) से,
\[40A = 8 \times 10^3 \, \text{वाट}\]
\[A = \frac{8 \times 10^3}{40} \, \text{मीटर}^2 = 200 \, \text{मीटर}^2\]
(b) माना विशिष्ट भवन वर्गाकार है जिसकी लम्बाई व चौड़ाई \(x\) मीटर है, तब
\(x^2 = 200\)
अथवा \(x = 14\) मीटर
अतः भवन की विमाएँ \(14\) मी \(\times 14\) मी व क्षेत्रफल लगभग \(196\) मीटर\(^2\) का होना चाहिए।
अतः \(8 \, kW\) विद्युत आपूर्ति के लिए आवश्यक क्षेत्रफल विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल के साथ तुलनीय है।
In simple words:
(a) हमने पहले कुल ऊर्जा आवश्यकता को वाट में बदला। फिर, सौर ऊर्जा की आपतन दर और दक्षता प्रतिशत का उपयोग करके आवश्यक क्षेत्रफल की गणना की, जिससे \(200 \, \text{मीटर}^2\) का क्षेत्रफल मिला।
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना एक विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से की गई, जो लगभग \(14 \, \text{मी} \times 14 \, \text{मी}\) के बराबर है, जिससे यह तुलनीय पाया गया।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की समस्याओं में, ऊर्जा इकाइयों को मानकीकृत करना (जैसे किलोवाट को वाट में) और दक्षता प्रतिशत को दशमलव में बदलना महत्वपूर्ण है। आवश्यक क्षेत्रफल की गणना करने के लिए ऊर्जा संरक्षण और शक्ति घनत्व के सिद्धांतों का उपयोग करें।
Question 23. कोई परिवार 8 kw विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है।
(a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 w m-² है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8kw की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी?
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
Answer: हल -
(a) परिवार द्वारा प्रयुक्त विद्युत शक्ति \(P = 8\) किलोवाट \( = 8 \times 10^3 \) वाट
सौर ऊर्जा के आपतन की दर \( = 200 \) वाट/मीटर \(^2\)
यदि आवश्यक क्षेत्रफल \(A\) मी \(^2\) हो तो इस क्षेत्रफल पर आपतित सौर शक्ति \( = 200A \) वाट
परन्तु आपतित ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक ऊर्जा में बदलता है इसलिए लाभदायक विद्युत शक्ति
\(P = 200A\) का 20% \( = 200A \times \frac{20}{100} = 40A \) वाट
समी० (1) तथा समी० (2) से,
\(40A = 8 \times 10^3\) वाट
\(A = \frac{8 \times 10^3}{40}\) मीटर \(^2 = 200\) मीटर \(^2\)
(b) माना विशिष्ट भवन वर्गाकार है जिसकी लम्बाई व चौड़ाई \(x\) मीटर है, तब
\(x^2 = 200\)
\(x = 14\) मीटर
अतः भवन की विमाएँ 14 मी \(\times\) 14 मी व क्षेत्रफल लगभग 196 मीटर \(^2\) का होना चाहिए।
अतः 8 kW विद्युत आपूर्ति के लिए आवश्यक क्षेत्रफल विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल के साथ तुलनीय है।
In simple words: A family needs 8 kW of power. If solar panels provide 200 W/m² and convert 20% to electricity, 200 m² of panel area is required. This is comparable to the roof area of a typical house.
🎯 Exam Tip: For problems involving energy conversion efficiency, clearly state the input energy, output energy, and the efficiency factor. Ensure units are consistent throughout calculations (e.g., kW to W).
अतिरिक्त अभ्यास
Question 24. 0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-¹ की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरन्त ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए ।
Answer: हल : गोली का द्रव्यमान, \(m = 0.012\) किग्रा
गोली की प्रारम्भिक चाल \(\mu = 70\) मी से \(^{-1}\) तथा गुटके का द्रव्यमान \(M = 0.4\) किग्रा
जब गोली गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष विरामावस्था में आ जाती है तो इसका अर्थ है कि गोली गुटके में घुसकर रुक जाती है तथा (गोली + गुटका) निकाय (माना) एक साथ \(u\) वेग से गति करके (माना) \(h\) ऊँचाई ऊपर उठ जाता है।
संवेग संरक्षण के सिद्धान्त से,
\(mu + M \times 0 = (M + m)v\)
\(v = \frac{mu}{(M+m)}\)
\(v = \frac{0.012 \times 70}{(0.4 + 0.012)}\) मी/से \( = 2.04 \) मी/से
इस स्थिति में निकाय द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा \( = \frac{1}{2}(M + m)v^2 \) तथा इसके \(h\) ऊँचाई ऊपर उठने पर यह गतिज ऊर्जा गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
अतः
\((M+m)gh = \frac{1}{2}(M+m)v^2\)
\(h = \frac{v^2}{2g} = \frac{(2.04)^2}{2 \times 9.8}\) मी \( = 0.212 \) मीटर
चूँकि गुटके व गोली की टक्कर अप्रत्यास्थ है इसलिए गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती तथा कुछ गतिज ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है।
अतः गुटके में पैदा हुई ऊष्मा \( = \) गतिज ऊर्जा में कमी
\( = \) प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा \( - \) अन्तिम गतिज ऊर्जा
\( = \frac{1}{2}m\mu^2 - \frac{1}{2}(M+m)v^2\)
\( = [\frac{1}{2} \times 0.012 \times (70)^2]\) जूल \( - [\frac{1}{2}(0.4+0.02)(2.04)^2]\) जूल
\( = (29.4 - 0.86)\) जूल
\( = 28.54\) जूल
In simple words: When a 0.012 kg bullet hits a 0.4 kg wooden block and embeds in it, their combined velocity after impact is 2.04 m/s. This allows the block to rise 0.212 meters. The inelastic collision converts 28.54 J of kinetic energy into heat.
🎯 Exam Tip: In collision problems, first apply the conservation of momentum to find the combined velocity. Then, use the conservation of energy to determine the height or energy loss, recognizing whether the collision is elastic or inelastic.
Question 25. दो घर्षणरहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है। और दूसरे की ढाल कम है, बिन्दु A पर मिलते हैं। बिन्दु A से प्रत्येक पथ पर एक-एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र-6.7) क्या ये पत्थर एक ही समय \(40\) पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि \(\theta_1 = 30^\circ, \theta_2 = 60^\circ\) और \(h = 10\) m दिया है तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुँचने में लिए गए समय क्या हैं?
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में दो आनत तल AB और AC दिखाए गए हैं, जो एक ही बिंदु A से शुरू होते हैं और अलग-अलग कोणों \(\theta_1\) और \(\theta_2\) पर झुके हुए हैं। बिंदु C और B समान ऊँचाई h पर हैं। पत्थर A से नीचे की ओर सरकना शुरू करते हैं।
उत्तर- चित्र 6.7 से, तल AB की लम्बाई, \(l_1 = \frac{h}{\sin\theta_1}\)
इस तल पर नीचे की ओर पत्थर का त्वरण, \(a_1 = g\sin\theta_1\)
यदि इस तल पर नीचे पहुँचने में पत्थर द्वारा लिया गया समय \(t_1\) सेकण्ड हो तो,
\(s = ut + \frac{1}{2}at^2\)
\(h = 0 \times t_1 + \frac{1}{2}g\sin\theta_1 \times t_1^2\)
सरल करने पर,
\(t_1 = \sqrt{\frac{2h}{g\sin\theta_1}} = \sqrt{\frac{2 \times 10}{10 \sin 30^\circ}} = \sqrt{\frac{2 \times 10}{10 \times \frac{1}{2}}} = 2\sqrt{2}\) सेकण्ड
इसी प्रकार तल AC के लिए इस पर पत्थर के नीचे आने का समय
\(t_2 = \sqrt{\frac{2h}{g\sin\theta_2}} = \sqrt{\frac{2 \times 10}{10 \sin 60^\circ}} = \sqrt{\frac{2 \times 10}{10 \times \frac{\sqrt{3}}{2}}} = \frac{2\sqrt{2}}{\sqrt{3}}\) सेकण्ड
अतः गति की समीकरण \(v^2 = u^2 + 2as\) से,
\(v^2 = 0 + 2(g\sin\theta_1) \times \frac{h}{\sin\theta_1} = 2gh\)
अथवा पत्थर की B पर पहुँचने की चाल, \(v = \sqrt{2gh}\)
चूँकि यह \(\theta\) पर निर्भर नहीं करती है, अतः AB तथा AC पर नीचे आने वाले पत्थर नीचे एक ही चाल से पहुँचेंगे जिसका मान
\(v = \sqrt{2gh} = \sqrt{2 \times 10 \times 10}\)
\( = 10\sqrt{2} = 10 \times 1.41\) मीटर/सेकण्ड \( = 14.1\) मी/से
In simple words: When two stones slide down frictionless inclined planes of different angles but same vertical height, they reach the bottom with the same speed, 14.1 m/s. However, the stone on the steeper incline (\(\theta_2 = 60^\circ\)) will take less time (\(2\sqrt{2}/\sqrt{3}\) s) to reach the bottom than the one on the shallower incline (\(\theta_1 = 30^\circ\)), which takes \(2\sqrt{2}\) s.
🎯 Exam Tip: Remember that for objects sliding down frictionless inclines from the same vertical height, their final speed depends only on the height, not the angle of inclination. However, the time taken does depend on the angle.
Question 26. किसी रूक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 N m-¹ स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र 6.8 के अनुसार जुड़ा है। गुटके को सिंप्रग की बिना खिंची। स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गुटके और आनत तल चित्र 6.8 के मध्य घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उप्रेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र में एक 1 kg द्रव्यमान का गुटका एक आनत तल पर रखा हुआ है और एक स्प्रिंग से जुड़ा हुआ है। स्प्रिंग का बल नियतांक \(k=100\) N/m है। यह गुटका विराम की स्थिति से आनत तल पर नीचे की ओर 10 cm खिसकता है, जिससे स्प्रिंग भी खिंचती है।
हल : यहाँ दिये गये गुटके पर कार्य करने वाले विभिन्न बल चित्र 6.9 में प्रदर्शित किये गये हैं। नत समतल के लम्बवत् पिण्ड की साम्यावस्था के लिए तल की गुटके पर अभिलम्ब प्रतिक्रिया
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 6.9, चित्र 6.8 में दिखाए गए गुटके पर कार्य करने वाले बलों को दर्शाता है। इसमें घर्षण बल (f), अभिलम्ब प्रतिक्रिया (R), स्प्रिंग बल (ky), और गुरुत्वाकर्षण बल (mg) के घटक (mg sin 37° और mg cos 37°) को आनत तल पर दर्शाया गया है। गुटका आनत तल पर 37° के कोण पर झुका हुआ है। ऊर्ध्वाधर विस्थापन h को भी दिखाया गया है।
\(R = Mg\cos 37^\circ\)
अतः गुटके तथा तल के बीच घर्षण बल
\(f = \mu \cdot R = \mu Mg\cos 37^\circ\)
यदि गुटके के तल पर नीचे की ओर विस्थापन \(x\) हो तो स्प्रिंग का क्षैतिज तल पर खिंचाव (लम्बाई में वृद्धि) भी \(x\) होगी।
जहाँ \(x = 10\) सेमी \( = 0.10\) मी
माना ऊर्ध्वाधर विस्थापन \(h\) है जहाँ \(h = x\sin 37^\circ\)
इस प्रकार ऊर्जा संरक्षण नियम के आधार पर
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में कमी \( = \) स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि \( + \) घर्षण के विरुद्ध कृत कार्य
\(Mgh = \frac{1}{2}kx^2 + fx\)
या
\(Mgx\sin 37^\circ = \frac{1}{2}kx^2 + \mu Mg\cos 37^\circ x\)
अथवा
\(Mg\sin 37^\circ = \frac{1}{2}kx + \mu Mg\cos 37^\circ\)
ज्ञात मान रखने पर,
\(1.0 \times 10 \times \frac{3}{5} = \frac{1}{2} \times 100 \times 0.1 + \mu \times 1.0 \times 10 \times \frac{4}{5}\)
सरल करने पर, \(\mu = 0.125\)
In simple words: A 1 kg block attached to a 100 N/m spring slides 10 cm down a rough inclined plane from rest. Using the conservation of energy, the loss in gravitational potential energy equals the gain in spring potential energy plus the work done against friction. This allows us to calculate the coefficient of friction as 0.125.
🎯 Exam Tip: For problems involving inclined planes with friction and springs, remember to consider all forces acting on the object and apply the principle of conservation of energy (work-energy theorem), accounting for both conservative (gravity, spring) and non-conservative (friction) forces.
Question 27. 0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 m s-¹ की एकसमान चाल से नीचे आ रही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लम्बाई \( = 3\)m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपको उत्तर इससे भिन्न होता?
Answer: हल : जड़त्व के कारण बोल्ट की प्रारम्भिक चाल, लिफ्ट की चाल के बराबर है। अतः लिफ्ट के सापेक्ष बोल्ट की प्रारम्भिक चाल शून्य है। जब बोल्ट नीचे गिरता है, इसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती है, जो अन्त में ऊष्मा में बदल जाती है।
अतः उत्पन्न ऊष्मा \( = mgh = 3 \times 9.8 \times 3\) जूल \( = 8.82\) जूल ।
यदि लिफ्ट स्थिर होती तो भी बोल्ट की लिफ्ट के सापेक्ष चाल शून्य होती; इसलिए उत्तर अब भी वही रहेगा अर्थात् अब भी इस दशा में उत्पन्न ऊष्मा \( = 8.82\) जूल ।
In simple words: When a bolt falls from the ceiling of a moving lift, its relative initial velocity to the lift floor is zero. The gravitational potential energy (mgh) of the bolt, converted to kinetic energy upon impact, is entirely dissipated as heat, which is 8.82 J. This outcome remains unchanged even if the lift is stationary because the relative motion remains the same.
🎯 Exam Tip: When dealing with objects inside a moving frame of reference, always consider the relative velocity and displacement. If the frame's velocity is constant, the relative motion and energy changes remain the same as if the frame were stationary.
Question 28. 200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-¹ की एकसमान चल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 m s-¹ की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है। और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अन्तिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरम्भ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की ?
Answer: हल-निकाय (ट्रॉली + बच्चे) का द्रव्यमान
\(M = \) (ट्रॉली \( + \) बच्चे) का द्रव्यमान
\(\implies 200\) किग्रा \( + 20\) किग्रा \( = 220\) किग्रा
निकाय का प्रारम्भिक वेग \(v_1 = 36\) किमी-घण्टा\(^{-1}\)
\( = 36 \times \frac{5}{18}\) मी/से \( = 10\) मी-से\(^{-1}\)
ट्रॉली पर बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग
\(P_1 = (M)v_1\)
\(P_1 = (220\) किग्रा) \(\times 10\) मी-से\(^{-1} = 2200\) किग्रा-मी-से\(^{-1}\)
ट्रॉली पर बच्चे के दौड़ना आरम्भ करने पर यह ट्रॉली को कुछ संवेग प्रदान करता है तथा ट्रॉली के नये वेग के सापेक्ष 4 मी-से\(^{-1}\) वेग से दौड़ता है।
माना ट्रॉली का नया वेग \(v\) मी/से है जबकि पृथ्वी के सापेक्ष बच्चे का वेग \((v - 4)\) मी/से होगा।
अतः निकाय का अन्तिम संवेग \(p_2 = 200 \times v + 20 \times (v - 4)\)
\( = (220v - 80)\) किग्रा-मी-से\(^{-1}\)
संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार, \(P_2 = P_1\)
\(220v - 80 = 2200\)
\(\implies v = 10.36\) मी/से
बच्चे द्वारा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक दौड़ने में लिया गया समय
\(t = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{10}{\text{4 मी-से}^{-1}} = 2.5\) सेकण्ड
इस समय में ट्रॉली द्वारा तय की गयी दूरी \( = v \times t = 10.36\) मी/से \(\times 2.5\) सेकण्ड
\( = 25.9\) मीटर
In simple words: A 200 kg trolley moving at 10 m/s with a 20 kg child on it has an initial momentum of 2200 kg-m/s. When the child runs at 4 m/s relative to the trolley in the opposite direction and jumps off, the trolley's final speed becomes 10.36 m/s due to momentum conservation. During the 2.5 seconds the child runs, the trolley covers 25.9 meters.
🎯 Exam Tip: For problems involving systems with changing internal configurations (like a child running on a trolley), apply the principle of conservation of momentum. Be careful to use velocities relative to a common inertial frame (usually the ground) consistently.
Question 29. चित्र-6.10 में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक़ों में से कौन-सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँ गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी \(r\) है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास \(R\) है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस प्रश्न में छह अलग-अलग स्थितिज ऊर्जा (V(r)) बनाम गेंदों के केंद्रों के बीच की दूरी (r) के ग्राफ दिए गए हैं, जो दो बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं। x-अक्ष पर 2R बिंदु, गेंदों के संपर्क में आने की स्थिति को दर्शाता है।
Answer: उत्तर : जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक-दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरी \(r, 2R\) से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी ।
प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर \((r = 2R)\) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।
केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।
In simple words: During an elastic collision of billiard balls, as they approach, their potential energy increases as their separation decreases below 2R (contact). As they rebound, this potential energy converts back to kinetic energy, and their potential energy returns to zero when the separation is 2R again. Graph (V) accurately depicts this behavior, showing potential energy increasing as r decreases from 2R, and returning to zero when r is 2R. Other graphs do not correctly represent this.
🎯 Exam Tip: For elastic collisions, remember that potential energy increases as particles deform or interact strongly (i.e., when their separation is less than the sum of their radii), and this potential energy converts back to kinetic energy as they separate. The total energy (kinetic + potential) remains constant.
Question 30. विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए \(n \to p + e^-\)
प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिण्ड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के \(\beta - \) क्ष्य में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता। (चित्र-6.11)
[नोट – इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिसे डब्ल्यु पॉली द्वारा \(\beta - \) क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे \(e^-, p\) या \(n\)) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या इसका द्रव्यमान (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय – प्रक्रिया इस प्रकार है : \(n \to p + e^- + \nu\)]
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 6.11, \(\beta\)-कणों की संख्या को उत्सर्जित \(\beta\)-कणों की गतिज ऊर्जा के फलन के रूप में दर्शाता है। ग्राफ एक सतत ऊर्जा वितरण दिखाता है, जहाँ \(\beta\)-कणों की गतिज ऊर्जा शून्य से अधिकतम मान तक फैली हुई है।
Answer: उत्तर : चूँकि न्यूट्रॉन विरामावस्था में है; अतः उक्त अभिक्रिया के अनुसार न्यूट्रॉन क्षय में एक नियत ऊर्जा मुक्त होनी चाहिए और \(\beta - \) कण को उस नियत ऊर्जा के साथ नाभिक से उत्सर्जित होना चाहिए। इस प्रकार नाभिक से उत्सर्जित \(\beta - \) कण की ऊर्जा नियत होनी चाहिए, जबकि दिया गया ग्राफ यह प्रदर्शित करता है कि उत्सर्जित \(\beta - \) कण शून्य से लेकर एक महत्तम मान के बीच कोई भी ऊर्जा लेकर बाहर आ सकता है; अतः न्यूट्रॉन क्षय की उक्त अभिक्रिया ग्राफ द्वारा प्रदर्शित हु-कणों के सतत ऊर्जा वितरण की व्याख्या नहीं कर सकता।
In simple words: If a neutron decayed into only a proton and an electron, energy conservation would dictate that the electron always has a fixed kinetic energy. However, the observed beta decay spectrum shows a continuous distribution of electron energies, which implies that a third, undetected particle (the neutrino) must be sharing the energy, making it a three-body decay.
🎯 Exam Tip: For nuclear decay problems, always consider the conservation of energy and momentum. If a decay is expected to be two-body but shows a continuous energy spectrum for one product, it implies a third, unobserved particle is involved to conserve energy and momentum (e.g., the neutrino in beta decay).
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. कार्य ऊर्जा प्रमेय है।
(i) न्यूटन के गति के प्रथम नियम का समाकल रूप
(ii) न्यूटन के द्वितीय नियम का समाकल रूप
(iii) न्यूटन के तृतीय नियम का समाकल रूप
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ii) न्यूटन के द्वितीय नियम का समाकल रूप
In simple words: The work-energy theorem is derived by integrating Newton's second law over displacement, relating the net work done on an object to its change in kinetic energy.
🎯 Exam Tip: Understand that the work-energy theorem is a direct consequence of Newton's second law and is fundamental for analyzing motion when forces cause changes in kinetic energy.
Question 2. कार्य का S.I. मात्रक है।
(i) जूल
(ii) अर्ग
(iii) किग्रा-भार \(\times\) मीटर
(iv) किलोवाट
Answer: (i) जूल
In simple words: The SI unit for work is the Joule (J), defined as one Newton-meter, representing the energy transferred when a force of one Newton acts over one meter.
🎯 Exam Tip: Always use SI units in physics problems unless otherwise specified. Knowing the fundamental SI unit for each quantity is crucial.
Question 3. यदि किसी पिण्ड का संवेग दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी
(i) दोगुनी
(ii) आधी
(iii) चार गुनी
(iv) चौथाई
Answer: (iii) चार गुनी
In simple words: Kinetic energy is proportional to the square of momentum (K = p² / 2m). So, if momentum (p) doubles, kinetic energy (K) becomes four times its original value.
🎯 Exam Tip: Remember the relationship between kinetic energy (K) and momentum (p): \(K = \frac{p^2}{2m}\). This formula helps quickly determine changes in kinetic energy when momentum changes.
Question 4. किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना तथा वेग आधा करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी
(i) आधी
(ii) दोगुनी
(iii) अपरिवर्तित
(iv) चौथाई
Answer: (i) आधी
In simple words: Kinetic energy is \(K = \frac{1}{2}mv^2\). If mass (m) doubles and velocity (v) halves, the new kinetic energy becomes \(\frac{1}{2}(2m)(\frac{v}{2})^2 = \frac{1}{2}(2m)\frac{v^2}{4} = \frac{1}{2} \times \frac{1}{2}mv^2\), which is half the original kinetic energy.
🎯 Exam Tip: When analyzing changes in kinetic energy due to variations in mass and velocity, substitute the new values into the formula \(K = \frac{1}{2}mv^2\) and compare it to the original value.
Question 5. निम्नलिखित में से कौन गतिज ऊर्जा का उदाहरण है।
(i) पृथ्वी-तल से 2 मीटर ऊँचाई पर उठा हुआ 5 किग्रा-भार का एक पिण्ड
(ii) चाबी भरी हुई घड़ी का स्प्रिंग
(iii) भूमि पर लुढकती क्रिकेट की गेंद
(iv) बन्द बेलन में पिस्टन द्वारा सम्पीडित गैस
Answer: (iii) भूमि पर लुढकती क्रिकेट की गेंद
In simple words: Kinetic energy is the energy of motion. A rolling cricket ball possesses kinetic energy because it is in motion. The other options describe objects with potential energy (gravitational or elastic) or internal energy (compressed gas).
🎯 Exam Tip: Differentiate between kinetic energy (due to motion) and potential energy (due to position or configuration). Examples like a rolling ball clearly demonstrate kinetic energy.
Question 6. संरक्षी बल \(\overrightarrow{(F)}\) तथा स्थितिज ऊर्जा (U) में सम्बन्ध होता है।
(i) \(\overrightarrow{F} = \Delta U\)
(ii) \(U = \Delta \cdot \overrightarrow{F}\)
(iii) \(\overrightarrow{F} = - \frac{dU}{dx}\) (This should be \(\overrightarrow{F} = - \vec{\nabla} U\) or \(F_x = -\frac{dU}{dx}\) for 1D. Assuming 1D here)
(iv) \(U = - \Delta \cdot \overrightarrow{F}\)
Answer: (iii) \(\overrightarrow{F} = - \frac{dU}{dx}\)
In simple words: For a conservative force, the force is the negative gradient of the potential energy. In one dimension, this means the force is the negative derivative of the potential energy with respect to position.
🎯 Exam Tip: Remember the fundamental relationship between a conservative force and potential energy: the force acts in the direction of decreasing potential energy, hence the negative sign in \(F = -\frac{dU}{dx}\).
Question 7. ऊर्जा संरक्षण के नियम का अभिप्राय है।
(i) कुल यान्त्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है।
(ii) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है।
(iii) कुल स्थितिज ऊर्जा संरक्षित रहती है।
(iv) सभी प्रकार की ऊर्जाओं का योग संरक्षित रहता है।
Answer: (iv) सभी प्रकार की ऊर्जाओं का योग संरक्षित रहता है।
In simple words: The law of conservation of energy states that the total energy in an isolated system remains constant; energy can transform from one form to another, but it is neither created nor destroyed.
🎯 Exam Tip: The conservation of total energy is a universal principle, broader than the conservation of mechanical energy, which only applies when conservative forces are acting.
Question 8. शक्तिका S.I. मात्रक है।
(i) जूल
(ii) अश्वशक्ति
(iii) वाट
(iv) किलोवाट
Answer: (iii) वाट
In simple words: The SI unit for power is the Watt (W), which represents one Joule of energy transferred or converted per second.
🎯 Exam Tip: Always distinguish between energy (Joule) and power (Watt). Power is the rate at which energy is transferred or work is done.
Question 9. किलोवाट-घण्टा मात्रक है।
(i) शक्ति का
(ii) ऊर्जा का
(iii) दोनों का
(iv) किसी का भी नहीं
Answer: (ii) ऊर्जा का
In simple words: Kilowatt-hour (kWh) is a unit of energy, commonly used for electricity billing. It represents the energy consumed by a 1 kilowatt device operating for one hour.
🎯 Exam Tip: Do not confuse kilowatt-hour (kWh) with kilowatt (kW). Kilowatt is a unit of power, while kilowatt-hour is a unit of energy (Power \(\times\) Time = Energy).
Question 10. एक किलोवाट बराबर होता है।
(i) 1.34 अश्व-सामर्थ्य
(ii) 10 अश्व-सामर्थ्य
(iii) 746 अश्व-सामर्थ्य
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (i) 1.34 अश्व-सामर्थ्य
In simple words: One kilowatt is approximately equal to 1.34 horsepower. This conversion factor is useful for relating electrical power to mechanical power.
🎯 Exam Tip: Memorize common power conversions, especially between watts, kilowatts, and horsepower, as they are frequently used in practical applications and problems.
Question 11. कार्य एवं सामर्थ्य में सम्बन्ध होता है।
(i) कार्य = सामर्थ्य \(\times\) समय
(ii) कार्य = सामर्थ्य \(+\) समय
(iii) कार्य = समय/सामर्थ्य
(iv) कार्य = सामर्थ्य/समय
Answer: (i) कार्य = सामर्थ्य \(\times\) समय
In simple words: Power is the rate at which work is done (Power = Work / Time). Therefore, Work can be calculated as Power multiplied by Time.
🎯 Exam Tip: The relationship Work = Power \(\times\) Time is a fundamental definition in physics and is essential for calculating energy transfer over a duration.
Question 12. एक मशीन 200 जूल कार्य 8 सेकण्ड में करती है। मशीन की सामर्थ्य होगी
(i) 25 वाट
(ii) 25 जूल
(iii) 1600 जूले-सेकण्ड
(iv) 25 जूल-सेकण्ड
Answer: (i) 25 वाट
In simple words: Power is calculated by dividing the work done (200 Joules) by the time taken (8 seconds). So, 200/8 = 25 Watts.
🎯 Exam Tip: To calculate power, use the formula Power = Work / Time. Ensure that work is in Joules and time is in seconds to get power in Watts.
Question 13. दो पिण्डों की प्रत्यास्थ टक्कर में
(i) निकाय की केवल गंतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है।
(ii) निकाय का केवल संवेग संरक्षित रहता है।
(iii) निकाय की गतिज ऊर्जा व संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं।
(iv) निकाय की न तो गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है और न ही संवेग
Answer: (iii) निकाय की गतिज ऊर्जा व संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं।
In simple words: In an elastic collision, both the total kinetic energy and the total linear momentum of the system are conserved.
🎯 Exam Tip: The defining characteristics of an elastic collision are the conservation of both kinetic energy and momentum. This is a key distinction from inelastic collisions.
Question 14. पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट में होते हैं।
(i) संवेग एवं गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित
(ii) संवेग एवं गतिज ऊर्जा दोनों असंरक्षित
(iii) संवेग संरक्षित एवं गतिज ऊर्जा असंरक्षित
(iv) संवेग असंरक्षित एवं गतिज ऊर्जा संरक्षित
Answer: (iii) संवेग संरक्षित एवं गतिज ऊर्जा असंरक्षित
In simple words: In a perfectly inelastic collision, the total linear momentum of the system is conserved, but the kinetic energy is not; some kinetic energy is lost, usually converted into heat or sound.
🎯 Exam Tip: All collisions (elastic, inelastic, perfectly inelastic) conserve momentum. The key difference for inelastic collisions is that kinetic energy is not conserved, typically due to deformation or heat generation.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. 1 जूल से क्या तात्पर्य है?
Answer: यदि किसी वस्तु पर 1 न्यूटन का बल कार्य करता है और वस्तु को अपनी ही दिशा में 1 मीटर विस्थापित कर देता है तो बल द्वारा किया गया कार्य 1 जूल कहलाता है। 1 जूल = 1 न्यूटन \(\times\) 1 मीटर अर्थात् \( = 1\) न्यूटन मीटर
In simple words: One Joule of work is done when a force of 1 Newton causes a displacement of 1 meter in the direction of the force.
🎯 Exam Tip: The definition of a Joule (N-m) is fundamental to understanding work and energy. Ensure you specify both the magnitude of force and displacement, and that they are in the same direction.
Question 2. एक क्षैतिज प्लेटफॉर्म पर अपने सिर पर बॉक्स रखकर कुली घूम रहा है। क्या वह गुरुत्व बल के विरुद्ध कोई कार्य कर रहा है? वह किस बल के विरुद्ध कार्य कर रहा है?
Answer: उत्तर : उसकी गति क्षैतिज है और गुरुत्व बल ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर होता है, अतः वह कोई कार्य नहीं कर रहा है। परन्तु चलते समय वह घर्षण बल के विरुद्ध कार्य कर रहा है।
In simple words: A porter carrying a box horizontally does no work against gravity because the displacement is perpendicular to the gravitational force. However, he does work against friction as he moves.
🎯 Exam Tip: Work done by a force is zero if the force is perpendicular to the displacement. This is a common conceptual question in exams.
Question 3. 5.0 ग्राम द्रव्यमान की एक गेंद 1.0 किमी की ऊँचाई से गिर रही है। यह 50.0 मी/से के वेग से पृथ्वी से टकराती है। किये गये कार्य की गणना कीजिए । \((g = 10\) मी/से\(^2)\)
Answer: हल : गुरुत्वीय बल \(f = mg = 5.0 \times 10 = 50\) न्यूटन \(\cdot\) कृत कार्य, \(W = \) बल \(\times\) विस्थापन \( = 50 \times 1000 = 50,000\) जूल
In simple words: For a 5.0 gram ball falling from 1.0 km, the work done by gravity is calculated as force (mg) times displacement (h). This results in 50,000 Joules of work.
🎯 Exam Tip: In problems involving free fall, work done by gravity is straightforwardly calculated as \(W = mgh\). Be careful with unit conversions (grams to kg, km to m).
Question 4. एक हल्की और एक भारी वस्तु के संवेग समान हैं तो किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी?
Answer: हल्की वस्तु की । \((K = p^2/2m)\)
In simple words: If two objects have the same momentum, the lighter object will have greater kinetic energy because kinetic energy is inversely proportional to mass for a given momentum (\(K = p^2/2m\)).
🎯 Exam Tip: Use the formula \(K = p^2/2m\) to quickly compare kinetic energies when momentum is constant. This shows that lower mass implies higher kinetic energy for the same momentum.
Question 5. स्थितिज ऊर्जा किन कारणों से उत्पन्न होती है?
Answer: वस्तु की विकृत अवस्था एवं स्थिति के कारण।
In simple words: Potential energy arises from an object's position (like gravitational potential energy) or its deformed state (like elastic potential energy in a spring).
🎯 Exam Tip: Understand that potential energy is stored energy related to an object's configuration or location within a force field, not its motion.
Question 6. स्थितिज ऊर्जा का मान धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों ही हो सकते हैं। व्याख्या कीजिए।
Answer: ऊर्जा संरक्षण से, कुल ऊर्जा \(E = K + U = \) नियतांक । अब क्योंकि गतिज ऊर्जा \(K = \frac{1}{2}m\mu^2\), सदैव धनात्मक है, अतः \(U\) का मान धनात्मक या ऋणात्मक दोनों ही सम्भव हैं।
In simple words: Potential energy can be positive or negative depending on the choice of reference point. Since total mechanical energy (E = K + U) is conserved and kinetic energy (K) is always positive, potential energy (U) must be able to be both positive and negative to allow for various total energy values.
🎯 Exam Tip: The sign of potential energy depends on the chosen reference point. Gravitational potential energy is usually taken as zero at ground level, but it can be negative if the object is below that reference.
Question 7. द्रव्यमान-ऊर्जा सम्बन्ध लिखिए। यह किस नाम से जाना जाता है?
Answer: \(E = mc^2\) (आइन्स्टीन की द्रव्यमान-ऊर्जा सम्बन्ध)।
In simple words: The mass-energy equivalence, \(E = mc^2\), formulated by Einstein, states that mass and energy are interconvertible, meaning mass can be converted into energy and vice versa.
🎯 Exam Tip: Einstein's mass-energy equivalence \(E = mc^2\) is a cornerstone of modern physics, linking mass directly to energy through the speed of light squared.
Question 8. किलोवाट-घण्टा तथा जूल में सम्बन्ध लिखिए।
Answer: 1 किलोवाट-घण्टा \( = 3.6 \times 10^6\) जूल ।
In simple words: One kilowatt-hour is equal to 3.6 million Joules. This conversion is obtained by multiplying 1000 Watts by 3600 seconds.
🎯 Exam Tip: Remember the conversion factor: \(1 \text{ kWh} = 3.6 \times 10^6 \text{ J}\). This is crucial for energy calculations, especially in contexts like electricity consumption.
Question 9. 72 किमी प्रति घण्टाकी चाल से क्षैतिज सड़क पर चलने वाली कोई कार 180 न्यूटन बल का सामना कर रही है। उसके इंजन की शक्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-दिया है, \(v = 72\) किमी/घण्टा \( = \frac{72 \times 1000}{60 \times 60} = 20\) मी-से\(^{-1}\)
बल \(F = 180\) न्यूटन, शक्ति \(P = ?\)
\(P = F \times v = 180 \times 20 = 3600\) वाट \( = 3.6\) किलोवाट
In simple words: A car moving at 72 km/h (20 m/s) against a resistance force of 180 N requires an engine power of 3600 Watts or 3.6 kilowatts.
🎯 Exam Tip: To calculate power when force and velocity are known, use \(P = Fv\). Ensure all units are in the SI system (force in Newtons, velocity in m/s) to get power in Watts.
Question 10. अप्रत्यास्थ संघट्ट में ऊर्जा-हानि का क्या होता है?
Answer: टकराने वाले पिण्डों की आन्तरिक उत्तेजन ऊर्जा ऊष्मीय तथा ध्वनि ऊर्जा में बदल जाती है।
In simple words: In an inelastic collision, the lost kinetic energy is transformed into other forms, primarily thermal energy (heat) and sound energy, due to the deformation and friction between the colliding objects.
🎯 Exam Tip: For inelastic collisions, the "lost" kinetic energy is not truly lost but converted into non-mechanical forms of energy. Identifying these forms (heat, sound, deformation) is important.
Question 11. प्रत्यास्थ टक्कर में ऊर्जा का आदान-प्रदान अधिकतम कब होता है?
Answer: जब टकराने वाली वस्तुओं के द्रव्यमान बराबर होते हैं।
In simple words: In an elastic collision, the maximum exchange of energy between two colliding objects occurs when their masses are equal.
🎯 Exam Tip: Remember that for head-on elastic collisions, equal masses lead to the most efficient transfer of kinetic energy between objects, often resulting in one object coming to rest and the other taking on its velocity.
Question 12. दर्शाइए कि समान द्रव्यमान की दो गतिशील वस्तुओं के प्रत्यास्थ संघटन के बाद उनके वेग आपस में बदल जाते हैं।
Answer: उत्तर : माना संघट्टन के बाद उनके वेग क्रमशः \(v_1\) तथा \(v_2\) हैं तो संवेग संरक्षण के नियम से,
\(mu_1 + mu_2 = mv_1 + mv_2\)
या
\(u_1 + u_2 = v_1 + v_2\)
प्रत्यास्थ संघट्टन के लिए,
\(v_1 - v_2 = - (u_1 - u_2)\)
समी० (1) तथा (2) को हल करने पर,
\(v_1 = u_2\) तथा \(v_2 = u_1\)
अर्थात् पिण्डों के वेग आपस में बदल जाएँगे।
In simple words: In a one-dimensional elastic collision between two objects of equal mass, their velocities are exchanged after the collision. The first object takes the second object's initial velocity, and vice versa.
🎯 Exam Tip: This is a classic result for elastic collisions between equal masses. Be prepared to derive it using conservation of momentum and conservation of kinetic energy.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कार्य क्या है? इसका S.I. मात्रक तथा विमीय सूत्र लिखिए।
Answer: उत्तर :
कार्य – बल लगाकर किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते
कार्य = बल \(\times\) बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन
\(W = F \cdot s\). कार्य एक अदिश राशि हैं।
कार्य का S.I. पद्धति में मात्रक जूल तथा विमा \([ML^2T^{-2}]\) है।
In simple words: Work is the energy transferred when a force causes displacement in the direction of the force. Its SI unit is the Joule, and its dimensional formula is \([ML^2T^{-2}]\).
🎯 Exam Tip: Always remember that work is a scalar quantity, calculated as the dot product of force and displacement. Its dimensional formula is the same as that of energy.
Question 2. एक पिण्ड पर बल लगाकर उसे विस्थापित किया जाता है, बताइए
1. पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर अधिकतम कार्य होगा?
2. पिण्ड पर किस दिशा में बल लगाने पर कार्य शून्य होगा?
Answer: उत्तर : पिण्ड पर किए गए कार्य का सूत्र \(W = F \times s \cos\theta\) से,
(i) यदि \(\theta = 0^\circ\) तो \(\cos\theta = 1\) जो कि Cose का अधिकतम मान है। \(W_{\text{max}} = F \times s\)
अतः जब पिण्ड का विस्थापन लगाए गए बल की दिशा में होता है, अर्थात् \(\theta = 0^\circ\) तो किया गया कार्य अधिकतम होगा।
(ii) यदि \(\theta = 90^\circ\) तो \(\cos 90^\circ = 0\) जो कि \(\cos\theta\) का न्यूनतम मान है। \(W_{\text{min}}\) (न्यूनतम) \( = 0\)
अतः जब पिण्ड का विस्थापन लगाए गए बल के लम्बवत् होता है, अर्थात् \(\theta = 90^\circ\) तो किया गया कार्य शून्य (न्यूनतम) होगा।
In simple words: Work done is maximum when the force and displacement are in the same direction (angle = 0°), and work done is zero when the force is perpendicular to the displacement (angle = 90°).
🎯 Exam Tip: The cosine function in \(W = Fs \cos\theta\) is key to understanding the angle dependence of work. Maximum work occurs when \(\cos\theta = 1\), and zero work when \(\cos\theta = 0\).
Question 3. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा किसे कहते हैं? किसी पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का व्यजंक प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर : किसी वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर है जो गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध वस्तु को पृथ्वी के तल से उच्च स्थिति में रखने में किया जाता है।
किसी पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक – माना \(m\) द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी तल से उठाकर \(h\) ऊँचाई पर रखा जाता है।
तब पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा \( = \) पिण्ड को गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध \(h\) ऊँचाई तक रखने में कृत कार्य \( = \) बाह्य बल \((F) \times\) दूरी \((h)\) परन्तु बाह्य बल \( = \) पिण्ड का भार \( = mg\)
\(\therefore\) स्थितिज ऊर्जा \( = \) भार \(\times\) ऊँचाई \( = (mg) \times h = mgh\)
स्थितिज ऊर्जा \((mgh)\) गुरुत्वीय के विरुद्ध कार्य करने के कारण है, इसलिए इसे गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
In simple words: Gravitational potential energy is the energy stored in an object due to its height in a gravitational field. It is equal to the work done against gravity to lift the object to that height, given by \(mgh\).
🎯 Exam Tip: Gravitational potential energy (\(mgh\)) is a conservative energy. Its value depends on the mass, gravitational acceleration, and height relative to a chosen reference level.
Question 4. द्रव्यमान-ऊर्जा समलुल्यता का अर्थ स्पष्ट कीजिए। आइन्स्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा सम्बन्ध लिखिए।
Answer: उत्तर :
द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता – सन् 1905 में अल्बर्ट आइंस्टाइन ने प्रदर्शित किया कि द्रव्यमान तथा ऊर्जा एक-दूसरे के तुल्य हैं। द्रव्य को ऊर्जा एवं ऊर्जा को द्रव्य में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने द्रव्य को ऊर्जा में बदलने के लिए एक सरल समीकरण का प्रतिपादन किया जिसे द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता कहते हैं।
द्रव्यमान-ऊर्जा सम्बन्ध \(E = mc^2\)
(जहाँ \(m = \) द्रव्यमान तथा \(c = \) प्रकाश की निर्वात् में चाल \(3 \times 10^8\) मी/से) इसे ही द्रव्यमान-ऊर्जा सम्बन्ध कहते हैं।
1 किग्रा द्रव्यमान के तुल्य ऊर्जा \(E = 1 \times (3 \times 10^8)^2\) जूल \( = 9 \times 10^{16}\) जूल
In simple words: Mass-energy equivalence, described by Einstein's equation \(E = mc^2\), means that mass and energy are interchangeable. A small amount of mass can be converted into a very large amount of energy, and vice versa.
🎯 Exam Tip: \(E = mc^2\) implies that mass itself is a form of energy. This concept is fundamental to nuclear reactions and high-energy physics.
Question 5. ऊर्जा संरक्षण का सिद्धान्त उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: उत्तर :
ऊर्जा संरक्षण का सिद्धान्त – ऊर्जा संरक्षण सिद्धान्त के अनुसार, “ऊर्जा न तो नष्ट की जा सकती है और न ही इसे उत्पन्न किया जा सकता है इसका एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरण ही सम्भव है। दूसरे शब्दों में, जब ऊर्जा का एक रूप विलुप्त होता है तो वही ऊर्जा इतने ही परिमाण में किसी और रूप में प्रकट हो जाती है।
यह व्यापक सिद्धान्त संरक्षी एवं असंरक्षी दोनों प्रकार के बलों के लिए समान उपयोगी है।
उदाहरण – बाँधों में संचित जल की स्थितिज ऊर्जा, टरबाइन की गतिज ऊर्जा में बदलती है जो अन्ततः जेनरेटर द्वारा विद्युत ऊर्जा में बदल दी जाती है।
In simple words: The principle of conservation of energy states that energy cannot be created or destroyed, only transformed from one form to another. For example, water stored in a dam has potential energy, which converts to kinetic energy as it flows, and then to electrical energy via a turbine-generator system.
🎯 Exam Tip: The law of conservation of energy is a universal law. Remember that while the form of energy may change, the total amount of energy in an isolated system always remains constant.
Question 6. प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट से आप क्या समझते हैं?
या
प्रत्यास्थ संघट्ट की व्याख्या कीजिए।
Answer: उत्तर :
1. प्रत्यास्थ संघट्ट – यदि संघट्ट के दौरान निकाय की कुले गतिज ऊर्जा एवं संवेग नियत रहते हैं, तो संघट्ट प्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। अपरमाणविक कणों (sub atomic particles) में संघट्ट प्रायः प्रत्यास्थ होता है। ऐसे संघट्टों में यांत्रिक ऊर्जा की हानि नहीं होती। दो स्टील की गेंदों का संघट्ट लगभग प्रत्यास्थ होता है।
2. अप्रत्यास्थ संघट्ट – यदि संघट्ट के दौरान निकाय की कुल गतिज ऊर्जा नियत न रहे, तो संघट्ट अप्रत्यास्थ कहलाता है। दैनिक जीवन में होने वाले संघट्ट सामान्यतः अप्रत्यास्थ ही होते हैं। बन्दूक की गोली का लक्ष्य से संघट्ट अप्रत्यास्थ है। यदि दो वस्तुएँ संघट्ट के पश्चात् परस्पर चिपक जाती हैं, तो संघट्ट पूर्णतः अप्रत्यास्थ कहलाता है। दीवार के साथ कीचड़ का संघट्ट पूर्णतः अप्रत्यास्थ है।
In simple words: An elastic collision conserves both kinetic energy and momentum, with no loss of mechanical energy (like billiard balls). An inelastic collision conserves momentum but not kinetic energy, as some mechanical energy is converted to other forms like heat or sound (like a bullet embedding in a target).
🎯 Exam Tip: The key differentiator between elastic and inelastic collisions is the conservation of kinetic energy. Momentum is conserved in both types of collisions.
Question 7. 10 किग्रा के द्रव्यमान की, जिसका वेग 5 मीटर/सेकण्ड है, एक अन्य 10 किग्रा के द्रव्यमान से, जो विरामावस्था में है, सम्मुख प्रत्यास्थ टक्कर होती है। टक्कर के बाद दोनों द्रव्यमानों के वेग ज्ञात कीजिए।
Answer: हल-संवेग-संरक्षण नियम से,
\(m_1u_1 + m_2u_2 = m_1v_1 + m_2v_2\)
यहाँ \(m_1 = 10\) किग्रा, \(u_1 = 5\) मीटर/सेकण्ड, \(m_2 = 10\) किग्रा,
\(u_2 = 0\)
\(50+0 = 10(v_1 + v_2)\)
अथवा
\(v_1+v_2 = 5\)
चूँकि टक्कर प्रत्यास्थ है, अतः गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है। इसलिए,
\(\frac{1}{2}m_1u_1^2 + \frac{1}{2}m_2u_2^2 = \frac{1}{2}m_1v_1^2 + \frac{1}{2}m_2v_2^2\)
मान रखने पर,
\(125+0 = 5(v_1^2 + v_2^2)\)
अथवा
\(v_1^2+v_2^2 = 25\)
समी० (1) से, \(v_2 = 5-v_1\); यह मान समी० (2) में रखने पर,
\(v_1^2 + (5-v_1)^2 = 25\)
या
\(v_1^2 + 25 + v_1^2 - 10v_1 = 25\)
या
\(2v_1^2 - 10v_1 = 0\)
\(\implies v_1 = 0\) या \(5\) मी/से
\(\therefore v_2 = 5\) मी/से या \(0\)
चूँकि टक्कर पूर्ण प्रत्यास्थ है तथा दोनों द्रव्यमान बराबर हैं, अतः टक्कर के पश्चात् दूसरा द्रव्यमान 5 मी/से के वेग से गति करेगा तथा पहला विरामावस्था में आ जायेगा। अतः टक्कर के बाद \(v_1 = 0\) तथा \(v_2 = 5\) मी/से ।
In simple words: In a head-on elastic collision between two objects of equal mass, where one is initially at rest, the moving object transfers all its momentum and kinetic energy to the stationary one. Thus, the first 10 kg mass (initially at 5 m/s) stops, and the second 10 kg mass (initially at rest) moves off at 5 m/s.
🎯 Exam Tip: For elastic collisions between equal masses in one dimension, the velocities are exchanged. This simplifies calculations considerably when one object is initially at rest.
Question 8. 4.0 मी/से वेग से गतिमान एक 10 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु एक घर्षणहीन मेज से जुड़े हुए स्प्रिंग से टकराती है और स्थिर हो जाती है। यदि स्प्रिंग का बल नियतांक \(4 \times 10^5\) न्यूटन/मी हो तो स्प्रिंग की लम्बाई में कितना परिवर्तन होगा?
Answer: हल-दिया है, वस्तु का द्रव्यमान \((m) = 10\) किग्रा, \(u = 4.0\) मी/से
वस्तु की गतिज ऊर्जा \((K) = \frac{1}{2}mu^2 = \frac{1}{2} \times 10 \times (4)^2 = \frac{1}{2} \times 10 \times 16 = 80\) जूल
प्रश्नानुसार, माना स्प्रिंग की लम्बाई में \(x\) मी वृद्धि होती है।
तब,
\(\frac{1}{2}kx^2 = 80 \implies kx^2 = 80 \times 2\)
\(4 \times 10^5 \times x^2 = 80 \times 2\)
\(x^2 = \frac{80 \times 2}{4 \times 10^5}\)
\(x^2 = 4 \times 10^{-4}\)
\(x = 2 \times 10^{-2} = 0.02\) मी
In simple words: A 10 kg object moving at 4.0 m/s hits a spring and comes to rest, converting its 80 Joules of kinetic energy into the spring's potential energy. Given the spring constant of \(4 \times 10^5\) N/m, the spring compresses by 0.02 meters.
🎯 Exam Tip: This problem demonstrates the conservation of energy, where kinetic energy is converted into elastic potential energy. The key is to equate \(\frac{1}{2}mv^2\) with \(\frac{1}{2}kx^2\) to solve for the unknown.
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कार्य-ऊर्जा प्रमेयः बताइए तथा उसको सिद्ध कीजिए। इस प्रमेय की उपयोगिता समझाइए ।
या
कार्य-ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए।
या
कार्य-ऊर्जा प्रमेय का उल्लेख कीजिए।
Answer: उत्तर :
कार्य-ऊर्जा प्रमेय –“जब किसी बाह्य बल द्वारा किसी वस्तु पर कुछ कार्य किया जाता है तो वस्तु की गतिज ऊर्जा में इस कार्य के बराबर वृद्धि हो जाती है। इसके विपरीत यदि कोई वस्तु किसी अवरोधी बल के विरुद्ध कुछ कार्य करती है. तो उसकी गतिज ऊर्जा में इस कार्य के बराबर कमी हो जाती है।”
अतः कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, “कार्य तथा गतिज ऊर्जा एक-दूसरे के समतुल्य हैं तथा गतिज ऊर्जा में परिवर्तन किये गये कार्य के बराबर होता है।”
उपपत्ति Proof – स्थिति 1 : जब वस्तु पर अचर (constant) बल लगा हो – माना एक अचर या नियत बल \(\overrightarrow{F}\), \(m\) द्रव्यमान की वस्तु पर कार्य करता है। यदि इस बल के कारण, बल की दिशा में, विस्थापन \(\overrightarrow{S}\) हो तो किया गया कार्य
\(W = \overrightarrow{F} \cdot \overrightarrow{S} = Fs\)
यदि बल द्वारा वस्तु में त्वरण \(a\) उत्पन्न होता है, तो \(F = ma\) (न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से) \(\therefore W = (ma)s = m(as)\) ......(1) वस्तु के प्रारम्भिक और अन्तिम वेगों के परिमाण क्रमशः \(u\) तथा \(v\) हैं तब गति की तृतीय समीकरण \(v^2\)
\(= u^2 + 2as\) से,
\(as = \frac{v^2 - u^2}{2}\)
यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
\(W = m \left[\frac{v^2 - u^2}{2}\right]\) या \(W = \frac{1}{2}mv^2 - \frac{1}{2}mu^2\)
अथवा
\(W = K_f - K_i\)
(जहाँ \(K_i\) तथा \(K_f\) क्रमशः प्रारम्भिक व अन्तिम गतिज ऊर्जाएँ हैं।)
अतः किसी नियत बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। (यही कार्य-ऊर्जा प्रमेय का कथन है।)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): इस चित्र 6.12 में एक कण को बिंदु A से B तक एक वक्र के अनुदिश गति करते हुए दिखाया गया है, जिस पर परिवर्ती बल (F) कार्य कर रहे हैं। पथ को छोटे-छोटे विस्थापन खण्डों (\(\Delta x_1, \Delta x_2, \ldots, \Delta x_n\)) में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक खण्ड पर अलग-अलग बल (\(F_1, F_2, \ldots, F_n\)) और उनके कोणों (\(\theta_1, \theta_2, \ldots, \theta_n\)) को दर्शाया गया है।
स्थिति 2 : जब वस्तु पर परिवर्ती (variable) बल लगा हो – माना \(m\) द्रव्यमान का एक कण बिन्दु A से B तक । एक वक्र के अनुदिश (चित्र 6.12) एक परिवर्ती बल के आधीन गति करता है। अब यदि कण के बिन्दु A से B तक की यात्रा के मध्य कृत कार्य की गणना करनी हो तो ऐसी दशा में बिन्दु A व B के बीच के पथ को \(\Delta x\) लम्बाई के छोटे-छोटे खण्डों में इस प्रकार विभाजित किया जाना चाहिए कि इन खण्डों में बल \(F\) लगभग नियत रहे। यदि प्रथम अन्तराल के मध्य औसत बल \(F_1\) हो तथा यह लघुखण्ड \(\Delta x_1\), से \(\theta_1\), कोण बनाता हो। इसी प्रकार द्वितीय लघु खण्ड \(\Delta x_2\) पर लग रहा औसत बल \(F_2\) हो और यह खण्ड \(\Delta x_2\) से \(\theta_2\) कोण बनाता हो तब,
\(\Delta W_1 = F_1 \cos \theta_1 \times \Delta x_1 = \frac{1}{2}mv_1^2 - \frac{1}{2}mu^2\)
\(\Delta W_2 = F_2 \cos \theta_2 \times \Delta x_2 = \frac{1}{2}mv_2^2 - \frac{1}{2}mv_1^2\)
\(\Delta W_n = F_n \cos \theta_n \times \Delta x_n = \frac{1}{2}mv^2 - \frac{1}{2}mv_{n-1}^2\)
जहाँ \(\Delta W_1, \Delta W_2, \ldots, \Delta W_n\) विभिन्न अन्तरालों के मध्य कृत कार्य, \(u\) वस्तु का प्रारम्भिक वेग अर्थात् कण का बिन्दु A पर वेग \(v_1, v_2, \ldots\) प्रथम, द्वितीय आदि अन्तरालों के अन्त में वेग व \(v\) कण का बिन्दु B पर वेग है।
अब भिन्न-भिन्न खण्डों में हुए कार्य के व्यंजकों को जोड़ने पर,
\(W = \sum_{i=1}^{i=n} F_i \cos \theta_i \Delta x_i = \frac{1}{2}mv^2 - \frac{1}{2}mu^2\)
परन्तु
\(\frac{1}{2}mv^2 - \frac{1}{2}mu^2 = K_f - K_i\)
(जहाँ \(K_i\) व \(K_f\) क्रमशः A तथा B पर गतिज ऊर्जाएँ हैं।)
अतः
\(W = K_f - K_i\)
अथवा \(W = \) सम्पूर्ण विस्थापन में गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
अतः यह स्पष्ट है कि परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है (यही कार्य ऊर्जा-प्रमेय का कथन है)। इस प्रकार कार्य-ऊर्जा प्रमेय, चाहे बल नियत हो या परिवर्ती, दोनों ही स्थितियों में सत्य होती है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय की उपयोगिता – अनेक समस्याओं में बल और उसके विस्थापन का सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होता है, अतः बल द्वारा किये गये कार्य की गणना सीधे ही नहीं की जा सकती। ऐसी समस्याओं में प्रायः वस्तु की या निकाय की गतिज ऊर्जा में वृद्धि या कमी को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।
गतिज ऊर्जा में यह परिवर्तन ही बल द्वारा किये गये कार्य के बराबर होता है।
In simple words: The work-energy theorem states that the net work done on an object equals the change in its kinetic energy. It can be derived from Newton's second law for both constant and variable forces. This theorem is useful for solving problems where direct calculation of forces and displacements is complex, by focusing on energy changes instead.
🎯 Exam Tip: The work-energy theorem is a powerful tool because it connects forces (through work) directly to changes in motion (kinetic energy), often simplifying problem-solving by avoiding detailed kinematic calculations. Be able to state it clearly and provide a derivation.
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक कण के पथ को दर्शाता है जो A से B तक एक वक्र के अनुदिश गति कर रहा है, जिस पर परिवर्ती बल लग रहा है। पथ को छोटे-छोटे खंडों (Δx₁, Δx₂, ..., Δxn) में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक खंड पर औसत बल (F₁, F₂, ..., Fn) और विस्थापन की दिशा के बीच का कोण (θ₁, θ₂, ..., θn) दिखाया गया है। यह कार्य-ऊर्जा प्रमेय के लिए परिवर्ती बल की स्थिति को समझाता है। स्थिति 2 : जब वस्तु पर परिवर्ती (variable) बल लगा हो - माना m द्रव्यमान का एक कण बिन्दु A से B तक । एक वक्र के अनुदिश (चित्र 6.12) एक परिवर्ती बल के आधीन गति करता है। अब यदि कण के बिन्दु A से B तक की यात्रा के मध्य कृत कार्य की गणना करनी हो तो ऐसी दशा में बिन्दु A व B के बीच के पथ को \( \triangle x \) लम्बाई के छोटे-छोटे खण्डों में इस प्रकार विभाजित किया जाना चाहिए कि इन खण्डों में बल F लगभग नियत रहे। यदि प्रथम अन्तराल के मध्य औसत बल F₁ हो तथा यह लघुखण्ड \( \triangle X_1 \) से \( \theta_1 \), कोण बनाता हो। इसी प्रकार द्वितीय लघु खण्ड \( \triangle x_2 \) पर लग रहा औसत बल F₂ हो और यह खण्ड \( \triangle X_2 \) से \( \theta_2 \) कोण बनाता हो तब, \( \triangle W_1 = F_1 \cos \theta_1 \times \triangle x_1 = \frac{1}{2} mv_1^2 - \frac{1}{2} mu^2 \) \( \triangle W_2 = F_2 \cos \theta_2 \times \triangle x_2 = \frac{1}{2} mv_2^2 - \frac{1}{2} mv_1^2 \) ... \( \triangle W_n = F_n \cos \theta_n \times \triangle x_n = \frac{1}{2} mv_n^2 - \frac{1}{2} mv_{n-1}^2 \) जहाँ \( \triangle W_1, \triangle W_2..... \triangle W_n \) विभिन्न अन्तरालों के मध्य कृत कार्य, u वस्तु का प्रारम्भिक वेग अर्थात् कण का बिन्दु A पर वेग \( v_1, v_2 \) प्रथम, द्वितीय आदि अन्तरालों के अन्त में वेग व \( v_n \) कण का बिन्दु B पर वेग है। अब भिन्न-भिन्न खण्डों में हुए कार्य के व्यंजकों को जोड़ने पर, \[ W = \sum_{i=1}^{i=n} F_i \cos \theta_i \triangle x_i = \frac{1}{2} mv_n^2 - \frac{1}{2} mu^2 \] परन्तु \( \frac{1}{2} mv^2 - \frac{1}{2} mu^2 = K_f - K_i \) (जहाँ Ki व Kf क्रमशः A तथा B पर गतिज ऊर्जाएँ हैं।) अतः W = Kf - Kiअथवा W = सम्पूर्ण विस्थापन में गतिज ऊर्जा में परिवर्तन अतः यह स्पष्ट है कि परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है (यही कार्य ऊर्जा-प्रमेय का कथन है)। इस प्रकार कार्य-ऊर्जा प्रमेय, चाहे बल नियत हो या परिवर्ती, दोनों ही स्थितियों में सत्य होती है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय की उपयोगिता - अनेक समस्याओं में बल और उसके विस्थापन का सम्पूर्ण ज्ञान नहीं होता है, अतः बल द्वारा किये गये कार्य की गणना सीधे ही नहीं की जा सकती। ऐसी समस्याओं में प्रायः वस्तु की या निकाय की गतिज ऊर्जा में वृद्धि या कमी को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है। गतिज ऊर्जा में यह परिवर्तन ही बल द्वारा किये गये कार्य के बराबर होता है।
In simple words: The work-energy theorem states that the net work done on an object by all forces is equal to the change in its kinetic energy. This applies whether the force is constant or variable. It's useful when full knowledge of forces and displacements isn't available, allowing us to calculate changes in kinetic energy directly.
🎯 Exam Tip: Understanding the work-energy theorem is crucial as it connects work and kinetic energy. Be prepared to apply it for both constant and variable forces, as derivations and applications are common in exams.
Question 2. किसी पिण्ड की यान्त्रिक-ऊर्जा से क्या तात्पर्य है? मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड के लिए यान्त्रिक ऊर्जा के संरक्षण सिद्धान्त की पुष्टि कीजिए ।
या
सिद्ध कीजिए कि मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड में प्रत्येक बिन्दु पर स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा का योग सदैव स्थिर रहता है।
Answer:यान्त्रिक-ऊर्जा के संरक्षण का नियम- यदि बल संरक्षी है, तो कण की यान्त्रिक ऊर्जा नियत रहती है। अर्थात् कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = नियत संकेतों में, E = K + U = नियत व्युत्पत्ति - माना m द्रव्यमान का एक कण संरक्षी बलों के अन्तर्गत स्थिति x₁ से x₂ तक विस्थापित किया जाता है। इसके फलस्वरूप इसका वेग v₁ से v₂ हो जाता है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय से, \[ W = \int_{x_1}^{x_2} F_{ext} dx = \frac{1}{2} mv_2^2 - \frac{1}{2} mv_1^2 = K_2 - K_1 \]...(1) यदि स्थितियों x₁ व x₂ पर कण की स्थितिज ऊर्जाएँ क्रमशः U₁ व U₂ हों, तो \[ \text{कार्य } W = \int_{x_1}^{x_2} F_{ext} dx \] \( = \int_{x_1}^{x_2} \left(-\frac{dU}{dx}\right) dx = -[U(x_2) - U(x_1)] = -(U_2 - U_1) = U_1 - U_2 \) ...(2) समीकरण (1) व (2) से, K₂ - K₁ = U₁ - U₂
\( \implies K_1 + U_1 = K_2 + U_2 \) अर्थात् K + U = नियतांक मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड का उदाहरण मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड की यान्त्रिक ऊर्जा (अर्थात् गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) नियत रहती है। इसे गणनों द्वारा निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है माना m द्रव्यमान की कोई वस्तु पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थित बिन्दु A से गिरती है। प्रारम्भ में बिन्दु A पर गतिज ऊर्जा शून्य है और केवल स्थितिज ऊर्जा है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड की यान्त्रिक ऊर्जा के संरक्षण को दर्शाता है। इसमें एक m द्रव्यमान की वस्तु को h ऊँचाई पर बिन्दु A से छोड़ा गया है। बिन्दु B, A से x दूरी नीचे है, और बिन्दु C पृथ्वी तल पर है। यह आरेख गति के दौरान वस्तु की स्थितिज और गतिज ऊर्जा में परिवर्तनों को दर्शाता है, जिससे यह दिखाया जाता है कि कुल यान्त्रिक ऊर्जा हर बिन्दु पर स्थिर रहती है।
.: A बिन्दु पर वस्तु में कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = 0 + mgh = mgh ...(1) माना गिरते समय किसी क्षण वस्तु बिन्दु B पर है, जो अपनी प्रारम्भिक स्थिति से x दूरी गिर चुकी है। यदि बिन्दु B पर वस्तु का वेग u हो, तो सूत्र \( u^2 = u^2 + 2as \) से, \( u^2 = 0 + 2gx = 2gx \)
.: बिन्दु B पर वस्तु की गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} mu^2 = \frac{1}{2} m(2gx) = mgx \) बिन्दु B पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = mg (h - x)
.: बिन्दु B पर वस्तु की कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = mgx + mg (h - x) = mgh ...(2) अब माना वस्तु पृथ्वी तल पर स्थित बिन्दु c के ठीक ऊपर है तथा वस्तु पृथ्वी से ठीक टकराने ही वाली है। अब उसकी स्थितिज ऊर्जा शून्य है। वस्तु द्वारा गिरी ऊँचाई = h सूत्र = \( u^2 + u^2 + 2as \) से, C पर वस्तु का वेग (a = g तथा s = h), \( u^2 = 0 + 2gh = 2gh \) C पर वस्तु की गतिज ऊर्जा = \( \frac{1}{2} m(u')^2 = \frac{1}{2} m(2gh) = mgh \) C पर वस्तु की कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = mgh + 0 = mgh इस प्रकार हम देखते हैं कि गिरती वस्तु के प्रत्येक बिन्दु पर गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग नियत बना रहता है। अतः गुरुत्वीय बल के अन्तर्गत वस्तु की कुल यान्त्रिक ऊर्जा नियत रहती है।
In simple words: Mechanical energy is the sum of an object's kinetic and potential energy. For a freely falling object, its total mechanical energy (kinetic + potential) remains constant at every point in its path, provided only conservative forces like gravity are acting on it. This principle is known as the conservation of mechanical energy.
🎯 Exam Tip: The principle of conservation of mechanical energy for a freely falling body is a fundamental concept. Students should be able to derive it and explain how potential energy converts to kinetic energy while the total remains constant, as this is a frequently tested topic.
Question 3. प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा से आप क्या समझते हैं। किसी स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए ।
Answer:प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा - किसी वस्तु में उसके सामान्य आकार अथवा विन्यास में परिवर्तन के कारण जो कार्य करने की क्षमता होती है, वस्तु की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। जब किसी प्रत्यास्थ वस्तु को उसकी सामान्य अवस्था से विकृत किया जाता है, तो वस्तु पर एक प्रत्यानयन बल (restoring force) कार्य करता है जो वस्तु को उसकी सामान्य अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है। इस प्रत्यानयन बल के कारण ही विकृत वस्तु में कार्य करने की क्षमता निहित रहती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक स्प्रिंग की विभिन्न स्थितियों को दर्शाता है जो प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के निगमन में सहायक है। (a) स्प्रिंग की सामान्य (बिना खींची या संपीडित) अवस्था, जहाँ प्रत्यानयन बल Fs = 0 और विस्थापन x = 0 है। (b) स्प्रिंग को x दूरी तक खींचा गया है, जिससे प्रत्यानयन बल Fs ऋणात्मक (विस्थापन के विपरीत) दिशा में लग रहा है, और बाह्य बल Fext धनात्मक दिशा में कार्य कर रहा है। (c) स्प्रिंग को x दूरी तक संपीडित किया गया है, जिससे प्रत्यानयन बल Fs धनात्मक दिशा में लग रहा है, और बाह्य बल Fext ऋणात्मक दिशा में कार्य कर रहा है। यह स्प्रिंग के विरूपण और उस पर लगने वाले बलों को स्पष्ट करता है। सिंप्रग की प्रत्यास्थ ऊर्जा के लिए व्यंजक - जब किसी स्प्रिंग को संपीडित या प्रसारित किया जाता है, तो स्प्रिंग में एक प्रत्यानयन बल (restoring force) कार्य करता है, जो स्प्रिंग में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है। अतः लगाए गए बाह्य बल को प्रत्यानयन बल के विरूद्ध कार्य करना पड़ता है जो स्प्रिंग में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अतः संपीडित अथवा प्रसारित स्प्रिंग में जो कार्य करने की क्षमता निहित रहती है, स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। माना एक भारहीन एवं पूर्ण प्रत्यास्थ स्प्रिंग का एक सिरा एक दृढ़ आधार (rigid support) से जुड़ा है तथा इसके दूसरे सिरे से m द्रव्यमान का एक गुटका सम्बन्धित है जो एक घर्षणरहित क्षैतिज समतल मेज पर गति के लिए स्वतन्त्र है। स्प्रिंग की सामान्य स्थिति में गुटके की माध्य स्थिति बिन्दू 0 पर है। [चित्र-6.14 (a)] स्प्रिंग पर बाह्य बल लगाकर उसकी लम्बाई में ऋणात्मक वृद्धि करने पर स्प्रिंग पर एक प्रत्यानयन बल कार्य करता है जो स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि के अनुक्रमानुपाती होता है। यदि स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि x हो, तब उस पर कार्यरत् है प्रत्यानयन बल \( F \propto -x \) अथवा \( F = -kx \) जहाँ k एक नियतांक है जिसे स्प्रिंग का बल नियतांक या स्प्रिंग नियतांक कहते हैं। सिंप्रग की लम्बाई में वृद्धि के लिए प्रत्यानयन बल के विपरीत दिशा में बराबर बाह्य बल लगाना पड़ता है। [चित्र - 6.14(b)]। अतः स्प्रिंग पर लगाया गया बाह्य बल \( F_{ext} = -F = -(-kx) = kx \) बाह्य बल द्वारा स्प्रिंग की लम्बाई में अत्यन्त सूक्ष्म वृद्धि dx करने में किया गया कार्य \( dW = F_{ext} \times dx = kx dx \) बाह्य बल द्वारा स्प्रिंग की लम्बाई में x₁ = 0 से x₂ = x तक वृद्धि करने में किया गया कार्य \[ W = \int_{x_1=0}^{x_2=x} kx. dx = k \left[ \frac{x^2}{2} \right]_{x_1=0}^{x_2=x} \] \( = k \left[ \frac{x^2}{2} - \frac{0^2}{2} \right] = \frac{1}{2} kx^2 \) यह कार्य ही स्प्रिंग में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अतः स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} kx^2 \) यदि एक बाह्य बल F लगाकर स्प्रिंग को x लम्बाई से संकुचित किया जाए, [चित्र-6.14(c)] तो F की दिशा बायीं ओर तथा स्प्रिंग बल Fs की दिशा दायीं ओर होती है। इस स्थिति में \( \theta = 180^\circ \) होने के कारण Fs तथा किया गया कार्य \( -\frac{1}{2} kx^2 \) तथा F द्वारा किया गया कार्य \( +\frac{1}{2} kx^2 \) होता है, अतः पुनः स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} kx^2 \) होती है।
In simple words: Elastic potential energy is the energy stored in a body due to its deformation from its normal shape or size. For a spring, this energy is stored when it is stretched or compressed, and it is given by the formula \( U = \frac{1}{2} kx^2 \), where 'k' is the spring constant and 'x' is the displacement from its equilibrium position.
🎯 Exam Tip: The derivation of elastic potential energy is a common theoretical question. Focus on understanding Hooke's Law and how the work done by an external force against the restoring force leads to stored potential energy. Practicing the formula's application for different scenarios is also important.
Question 4. X - अक्ष में 0.1 किग्रा द्रव्यमान की एक गेंद 4.0 मी/से के वेग से गति करती हुई, उसी दिशा में 3.0 मी/से के वेग से गतिशील 0.2 किग्रा की दूसरी गेंद से टकराती है। टक्कर के बाद प्रथम गेंद 0.2 मी/से के वेग से वापस लौटने लगती है। दूसरी गेंद की टक्कर के बाद गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
Answer:हल : दिया है, पहली गेंद का द्रव्यमान, \( m_1 \) = 0.1 किग्रा, पहली गेंद का वेग \( u_1 \) = 4.0 मी/से, दूसरी गेंद का द्रव्यमान \( m_2 \) = 0.2 किग्रा तथा दूसरी गेंद का वेग \( u_2 \) = 3.0 मी/से टक्कर के पश्चात् पहली गेंद का विपरीत दिशा में वेग \( v_1 \) = - 0.2 मी/से (ऋणात्मक चिह्न इसलिए लिया गया है, क्योंकि गेंद टक्कर के बाद वापस लौटने लगती है।) संवेग संरक्षण के नियमानुसार, \( m_1u_1 + m_2u_2 = m_1v_1 + m_2v_2 \) \( \implies 0.1 \times 4.0 + 0.2 \times 3.0 = 0.1 \times (-0.2) + 0.2 \times v_2 \)
\( \implies 0.4 + 0.6 = -0.02 + 0.2v_2 \)
\( \implies 0.2v_2 = 1 + 0.02 \)
\( v_2 = \frac{1+0.02}{0.2} = \frac{1.02}{0.2} = 5.1 \) मी/से अतः टक्कर के बाद दूसरी गेंद की गतिज ऊर्जा, \[ K_2 = \frac{1}{2} m_2v_2^2 = \frac{1}{2} \times 0.2 \times (5.1)^2 \] \( = 0.1 \times 26.01 = 2.6 \) जूल
In simple words: When two balls collide, their total momentum before and after the collision is conserved. By applying the conservation of momentum and using the given masses and velocities, we can find the velocity of the second ball after the collision and then calculate its kinetic energy.
🎯 Exam Tip: Problems involving collisions often require applying the principle of conservation of momentum. Pay close attention to the directions of velocities and use appropriate signs (positive/negative) to avoid errors in calculations. Calculating kinetic energy after finding velocities is usually the final step.
Question 5. 0.5 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड 4.0 मी/से के वेग से एक चिकने तल पर गति कर रहा है। यह एक-दूसरे से 1.0 किग्रा के स्थिर पिण्ड से टकराता है और वे एक पिण्ड के रूप में एक साथ गति करते हैं। संघट्ट के समय ऊर्जा हास की गणना कीजिए ।
Answer:हल-दिया है, पहले पिण्ड का द्रव्यमान, (\( m_1 \)) = 0.5 किग्रा, दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान (\( m_2 \)) = 1 किग्रा, पहले पिण्ड का वेग (\( u_1 \)) = 4.0 मी/से,
.: दूसरे पिण्ड का वेग (\( u_2 \)) = 0 (क्योंकि दूसरा पिण्ड प्रारम्भ में स्थिर है।) संवेग संरक्षण के नियम से, \( m_1u_1 + m_2u_2 = (m_1 + m_2) v \)
\( \implies 0.5 \times 4.0 + 1.0 \times 0 = (0.5 + 1.0) v \)
\( 2 = 1.5v \)
\( v = \frac{2}{1.5} = \frac{4}{3} \) मी/से संघट्ट के समय ऊर्जा हास = \( \left( \frac{1}{2} m_1u_1^2 + \frac{1}{2} m_2u_2^2 \right) - \frac{1}{2} (m_1 + m_2) v^2 \) \[ = \left[ \frac{1}{2} (0.5 \times (4.0)^2 + 1.0 \times 0^2) \right] - \left[ \frac{1}{2} (0.5+1.0) \times \left(\frac{4}{3}\right)^2 \right] \] \[ = \left[ \frac{1}{2} (0.5 \times 16) + 0 \right] - \left[ \frac{1}{2} (1.5) \times \frac{16}{9} \right] \] \[ = \frac{1}{2} (8 - 2.67) = \frac{1}{2} \times 5.33 = 2.67 \text{ जूल} \]
In simple words: In an inelastic collision, momentum is conserved, but kinetic energy is not. When two objects collide and stick together, the loss in kinetic energy is converted into other forms, such as heat or sound. This energy loss is calculated by subtracting the final kinetic energy of the combined mass from the initial total kinetic energy of the individual masses.
🎯 Exam Tip: This question deals with an inelastic collision where objects stick together. Remember that while momentum is always conserved in any collision, kinetic energy is only conserved in elastic collisions. For inelastic collisions, calculate the initial and final kinetic energies separately to find the energy loss. Be careful with unit conversions and direction signs.
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