UP Board Solutions Class 11 Physics Chapter 5 Laws of motion

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Detailed Chapter 5 गति के नियम UP Board Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 5 गति के नियम UP Board Solutions PDF

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

(सरलता के लिए आंकिक परिकल्पनाओं में g = 10 ms-2 लीजिए ।)

Question 1. निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए-
(a) एकसमान चाल से नीचे गिरती वर्षा की कोई बूंद
(b) जल में तैरता 10g संहति का कोई कॉर्क
(c) कुशलता से आकाश में स्थिर रोकी गई कोई पतंग
(d) 30 km h-1 के एकसमान वेग से ऊबड़-खाबड़ सड़क पर गतिशील कोई कार
(e) सभी गुरुत्वीय पिण्डों से दूर तथा वैद्युत और चुम्बकीय क्षेत्रों से मुक्त, अन्तरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन ।
Answer:
(a) : त्वरण शून्य है; अतः नेट बल भी शून्य होगा।
(b) : उपरिमुखी गति के समय कॉर्क जल पर स्थिर तैर रहा है अर्थात् गति नहीं हो रही है, अत : त्वरण शून्य है, - नेट बल भी शून्य है।
(c) : पतंग को स्थिर रोका गया है; अतः त्वरण a = 0 - नेट बल भी शून्य है।
(d) : कार का वेग एकसमान है; अतः त्वरण a = 0 - नेट बल भी शून्य होगा।
(e) : इलेक्ट्रॉन गुरुत्वीय पिण्डों, वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों से दूर है; अतः उस पर कोई बल नहीं लगेगा।
In simple words: जब कोई वस्तु एकसमान वेग से गति करती है या स्थिर रहती है, तो उस पर लगने वाला कुल (नेट) बल शून्य होता है। बाहरी बल के अभाव में भी कोई बल नहीं लगता।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में गति की अवस्था (स्थिर, एकसमान गति, त्वरित गति) को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही नेट बल के शून्य होने या न होने का निर्धारण करता है।

 

Question 2. 0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए-
(a) उपरिमुखी गति के समय ।
(b) अधोमुखी गति के समय ।
(c) उच्चतम बिन्दु पर जहाँ क्षण भर के लिए यह विराम में रहता है। यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से 45° कोण पर फेंका जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? वायु-प्रतिरोध को उपेक्षणीय मानिए ।
Answer:
(a) उपरिमुखी गति के समय कंकड़ पर बल = कंकड़ का भार = mg = 0.05 kg × 10 m s-2 = 0.5 N
(b) अधोमुखी गति के समय भी कंकड़ पर बल उसके भार के बराबर अर्थात् 0.5 N लगेगा।
(c) इस स्थिति में भी कंकड़, पर वही बल 0.5 N ही लगेगा। कंकड़ को क्षैतिज से 45° के कोण पर फेंकने पर भी कंकड़ पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र में गति करता है; अतः इस स्थिति में भी, प्रत्येक दशा में कंकड़ पर बल 0.5 N ही लगेगा ।
In simple words: वायु प्रतिरोध को अनदेखा करने पर, किसी भी प्रक्षेप्य गति के दौरान वस्तु पर एकमात्र बल हमेशा उसका भार होता है, जो नीचे की ओर कार्य करता है। इसका परिमाण पूरी गति के दौरान स्थिर रहता है, चाहे वस्तु ऊपर जा रही हो, नीचे आ रही हो या उच्चतम बिंदु पर हो।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य गति के प्रश्नों में, यदि वायु प्रतिरोध को उपेक्षणीय माना जाता है, तो वस्तु पर एकमात्र बल हमेशा गुरुत्वाकर्षण बल (भार) होता है, जो नीचे की ओर कार्य करता है। यह अवधारणा कई समस्याओं को सरल बनाती है।

 

Question 3. 0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियों में ज्ञात कीजिए –
(a) पत्थर को स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्
(b) पत्थर को 36 km h-1 के एकसमान वेग से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्,
(c) पत्थर को 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरन्त पश्चात्,
(d) पत्थर 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी के फर्श पर पड़ा है तथा वह रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है। उपर्युक्त सभी स्थितियों में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए ।
Answer:
(a) स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने पर, पत्थर पर एकमात्र बल उसका भार नीचे की ओर कार्य करेगा।
- पत्थर पर बल = mg = 0.1 kg × 10 m s-2 = 1N ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर ।
(b) इस स्थिति में भी गाड़ी से पत्थर गिराने के पश्चात् गाड़ी की गति के कारण उस पर कार्य करने वाले बल का कोई प्रभाव नहीं होगा और पत्थर पर केवल उसका भार कार्य करेगा। - पत्थर पर बल =1N ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर ।
(c) : पत्थर गाड़ी से नीचे गिरा दिया गया है; अतः अब उस पर केवल उसका भार कार्य करेगा। - पत्थर पर बल 1N ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर
(d) : पत्थर रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है,
- पत्थर का त्वरण a = रेलगाड़ी का त्वरण = 1 m s-2
\( \therefore F = m a \) से, गाड़ी की त्वरित गति के कारण पत्थर पर नेट बल \( F = m a = 0.1 \text{ kg} \times 1 \text{ m s-2} = 0.1 \text{ N} \) (क्षैतिज दिशा में)।
पत्थर पर कार्यरत अन्य बल उसका भार तथा फर्श की अभिलम्ब प्रतिक्रिया परस्पर सन्तुलित हो जाते हैं।
In simple words: किसी भी प्रक्षेप्य गति में, यदि वस्तु को गाड़ी से गिराया जाता है, तो उसका क्षैतिज वेग गुरुत्वाकर्षण बल से प्रभावित नहीं होता। वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर, गिराए गए पत्थर पर एकमात्र बल उसका भार होता है, जो नीचे की ओर कार्य करता है। हालांकि, अगर पत्थर गाड़ी के सापेक्ष स्थिर है और गाड़ी त्वरित गति कर रही है, तो पत्थर पर गाड़ी के त्वरण के कारण एक क्षैतिज बल भी लगेगा।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तु पर गाड़ी की गति का क्षैतिज प्रभाव समाप्त हो जाता है, जबकि गाड़ी के साथ स्थिर वस्तु पर गाड़ी का त्वरण बल के रूप में कार्य करता है। जड़त्वीय और गैर-जड़त्वीय फ्रेम के बीच अंतर को जानें।

 

Question 4. L लम्बाई की एक डोरी का एक सिरा m संहति के किसी कण से तथा दूसरा सिरा चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी बँटी से बँधा है। यदि कण v चाल से वृत्त में गति करता है तो कण पर (केन्द्र की ओर निर्देशित) नेट बल है-
(i) T
(ii) \( T - \frac{mv^2}{L} \)
(iii) \( T + \frac{mv^2}{L} \)
(iv) 0.
T डोरी में तनाव है। सही विकल्प चुनिए।
Answer: (i) T
कण को वृत्तीय गति देने के लिए अभिकेन्द्र बल \( \frac{mv^2}{L} \) चाहिए जो उसे डोरी में तनाव T से मिलता है।
अर्थात् \( T = \frac{mv^2}{L} \)
अतः कण पर नेट बल = T
In simple words: जब कोई वस्तु वृत्तीय गति करती है, तो उसे केंद्र की ओर एक बल की आवश्यकता होती है जिसे अभिकेन्द्र बल कहते हैं। इस स्थिति में, डोरी में तनाव (T) ही अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है, इसलिए कण पर कुल नेट बल तनाव T के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: वृत्तीय गति में, अभिकेन्द्र बल हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है और यह किसी वास्तविक बल (जैसे तनाव, घर्षण, गुरुत्वाकर्षण) द्वारा प्रदान किया जाता है। नेट बल की पहचान करते समय, अभिकेन्द्र बल के स्रोत को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 15 ms-1 की आरम्भिक चाल से गतिशील 20 kg संहति के किसी पिण्ड पर 50 N का स्थायी मन्दन बल आरोपित किया गया है। पिण्ड को रुकने में कितना समय लगेगा?
Answer:
हल - मंदक बल F = -50 न्यूटन, पिण्ड का द्रव्यमान m = 20 किग्रा
अतः पिण्ड में अवमन्दन, \( a = \frac{F}{m} = \frac{-50}{20} \text{ किग्रा} = -2.5 \text{ मी/से}^2 \)
गति की समीकरण \( v_t = v_0 + at \) से,
रुकने पर \( v_t = 0 \) तथा आरम्भिक चाल \( v_0 = 15 \text{ मी/से-1} \)
\( 0 = 15 + (-2.5) \times t \)
\( \implies t = \frac{15}{2.5} \text{ सेकण्ड} = 6 \text{ सेकण्ड} \)
वैकल्पिक विधि-मंदक बल F = -50 न्यूटन;
द्रव्यमान (संहति) m = 20 किग्रा
प्रारम्भिक चाल \( v_1 = 15 \text{ मी/से} \) तथा रुकने पर अन्तिम चाल \( v_2 = 0 \)
माना पिण्ड को रोकने में \( \Delta t \) सेकण्ड समय लगता है,
अतः आवेग = संवेग-परिवर्तन
\( F \times \Delta t = P_2 - P_1 = mv_2 - mv_1 = m(v_2 - v_1) \)
\( -50 \text{ न्यूटन} \times \Delta t = 20 \text{ किग्रा} \times (0-15) \text{ मी/से} \)
\( \implies \Delta t = \frac{20 \times 15}{50} = 6 \text{ सेकण्ड} \)
In simple words: मंदन बल का उपयोग करके, हम त्वरण की गणना कर सकते हैं। फिर गति के समीकरणों या संवेग-परिवर्तन के सिद्धांत का उपयोग करके, हम उस समय की गणना कर सकते हैं जो वस्तु को रुकने में लगेगा।

🎯 Exam Tip: मंदन बल का अर्थ ऋणात्मक त्वरण है। गति के समीकरणों या आवेग-संवेग प्रमेय का उपयोग करके ऐसे प्रश्नों को हल किया जा सकता है। दोनों विधियों से एक ही परिणाम प्राप्त होता है।

 

Question 6. 3.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर आरोपित कोई बल 25 s में उसकी चाल को 2.0 ms-1 से 3.5 ms-1 कर देता है। पिण्ड की गति की दिशा अपरिवर्तित रहती है। बल का परिमाण व दिशा क्या है?
Answer:
हल-पिण्ड का द्रव्यमान m = 3.0 किग्रा
समयान्तराल \( (t_2 - t_1) = 25 \text{ सेकण्ड} \)
\( v_{t1} = 2.0 \text{ मी/से} \) तथा \( v_{t2} = 3.5 \text{ मी/से} \)
गति की समीकरण \( v_{t2} = v_{t1} + a(t_2 - t_1) \) से,
\( 3.5 \text{ मी/से} = 2.0 \text{ मी/से} + a(25 \text{ सेकण्ड}) \)
अतः पिण्ड में उत्पन्न त्वरण, \( a = \frac{(3.5-2.0) \text{ मी/से}}{25 \text{ सेकण्ड}} = 0.06 \text{ मी/से}^2 \)
- बल का परिमाण \( F = mg = 3.0 \text{ किग्रा} \times 0.06 \text{ मी/से}^2 = 0.18 \text{ न्यूटन} \)
चूँकि आरोपित बल का दिशा अपरिवर्तित है तथा यह पिण्ड की चाल को बढ़ा रहा है, अतः बल की दिशा पिण्ड की गति की दम में ही होगी।
In simple words: बल के कारण वस्तु की चाल में वृद्धि हुई है, इसलिए बल की दिशा वस्तु की गति की दिशा में होगी। पहले त्वरण ज्ञात करें, फिर बल के परिमाण की गणना करें।

🎯 Exam Tip: बल की दिशा का निर्धारण करते समय, यह देखना महत्वपूर्ण है कि बल चाल बढ़ा रहा है या घटा रहा है। यदि चाल बढ़ती है तो बल गति की दिशा में होता है, और यदि घटती है तो गति की विपरीत दिशा में।

 

Question 7. 5.0 kg संहति के किसी पिण्ड पर 8 N व 6 N के दो लम्बवत् बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए ।
Answer:
हल-पिण्ड का द्रव्यमान M = 5.0 किग्रा, बलों के परिमाण \( |F_1| = 8 \text{ न्यूटन} \) तथा \( |F_2| = 6 \text{ न्यूटन} \) हैं तथा ये परस्पर लम्बवत् हैं।
अतः इन बलों के परिणामी बल का परिमाण
\( F = \sqrt{|F_1|^2 + |F_2|^2} \)
\( = \sqrt{[8^2 + 6^2]} \text{ न्यूटन} = \sqrt{(64+36)} \text{ न्यूटन} \)
\( = \sqrt{100} = 10 \text{ न्यूटन} \)
- त्वरण का परिमाण,
\( a = \frac{F}{M} = \frac{10 \text{ न्यूटन}}{5.0 \text{ किग्रा}} = 2 \text{ मी/से}^2 \)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो लंबवत बलों F1 और F2 के कारण एक वस्तु पर लगने वाले परिणामी बल और त्वरण की दिशा को दर्शाता है। बल F1 क्षैतिज दिशा में है और F2 ऊर्ध्वाधर दिशा में है, जिसके कारण परिणामी बल F दोनों के बीच में \( \theta \) कोण पर कार्य कर रहा है।


इस त्वरण की दिशा बल \( \vec{F} \) की दिशा में होगी। चित्र 5.1 में बल \( \vec{F}_1 \) की दिशा से \( \theta \) कोण बना रहा है, जहाँ चित्रानुसार,
\( \tan \theta = \frac{|\vec{F}_2|}{|\vec{F}_1|} = \frac{6}{8} = 0.75 \)
- दिशा \( \theta = \tan^{-1} (0.75) = 36^\circ 53' \approx 37^\circ \)
यही दिशा पिण्ड में उत्पन्न त्वरण की भी होगी।
In simple words: जब दो बल एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, तो उनका परिणामी बल पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है। बल की दिशा को स्पर्शरेखा (tan) फ़ंक्शन का उपयोग करके कोण के रूप में व्यक्त किया जाता है, और त्वरण की दिशा बल की दिशा के समान होती है।

🎯 Exam Tip: लंबवत बलों के परिणामी बल और दिशा की गणना के लिए वेक्टर योग का उपयोग करें। त्वरण की दिशा हमेशा परिणामी बल की दिशा में होती है।

 

Question 8. 36 km h-1 की चाल से गतिमान किसी ऑटो रिक्शा का चालक सड़क के बीच एक बच्चे को खड़ा देखकर अपने वाहन को ठीक 4.0s में रोककर उस बच्चे को बचा लेता है। यदि ऑटो रिक्शा बच्चे के ठीक निकट रुकता है तो वाहन पर लगा औसत मन्द्रन बल क्या है? ऑटो रिक्शा तथा चालक की संहतियाँ क्रमशः 400 kg और 65 kg हैं।
Answer:
हल :
ऑटो रिक्शा की प्रारम्भिक चाल \( u_0 = 36 \text{ किमी/घण्टा} \)
\( = 36 \times (5 / 18) \text{ मी/से} = 10 \text{ मी/से} \)
रुकने पर ऑटो-रिक्शा की अन्तिम चाल \( u_t = 0 \)
रुकने में लिया गया समय \( t = 4.0 \text{ सेकण्ड} \)
गति की समीकरण \( u_t = u_0 + at \) से,
\( 0 = 10 + a \times 4.0 \)
या
मंदक, \( a = -(10/4) \text{ मी/से}^2 = -2.5 \text{ मी/से}^2 \)
निकाय (ऑटो-रिक्शा + चालक) का द्रव्यमान
\( M = 400 \text{ किग्रा} + 65 \text{ किग्रा} = 465 \text{ किग्रा} \)
- औसत मंदन बल \( F = M \times a = 465 \text{ किग्रा} \times (-2.5 \text{ मी/से}^2) \)
\( = -1.162 \times 10^3 \text{ न्यूटन} \) [यहाँ (-) चिह्न मंदन का प्रतीक है ।]
In simple words: पहले किमी/घंटा की चाल को मी/से में बदलें। फिर गति के समीकरण का उपयोग करके त्वरण (मंदन) की गणना करें। अंत में, कुल द्रव्यमान को त्वरण से गुणा करके मंदन बल ज्ञात करें।

🎯 Exam Tip: चाल की इकाइयों को किलोमीटर प्रति घंटा से मीटर प्रति सेकंड में सही ढंग से परिवर्तित करना सुनिश्चित करें। ऋणात्मक त्वरण मंदन को इंगित करता है, और बल की गणना के लिए कुल द्रव्यमान का उपयोग करना चाहिए।

 

Question 9. 20000 kg उत्थापन संहति के किसी रॉकेट में 5 ms-2 के आरम्भिक त्वरण के साथ ऊपर की ओर स्फोट किया जाता है। स्फोट का आरम्भिक प्रणोद (बल) परिकलित कीजिए।
Answer:
हल- रॉकेट का द्रव्यमान \( m = 20000 \text{ kg} \), त्वरण \( a = 5 \text{ ms-2} \)
माना रॉकेट पर आरम्भिक प्रणोद F है जो ऊपर की ओर कार्य करता है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक रॉकेट को ऊपर की ओर गति करते हुए दिखाता है। प्रणोद बल (F) ऊपर की ओर कार्य करता है, जबकि रॉकेट का भार (mg) नीचे की ओर कार्य करता है। रॉकेट ऊपर की ओर त्वरित गति कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि प्रणोद बल भार से अधिक है।


रॉकेट पर दो बल लगे हैं- (1) प्रणोद F ऊपर की ओर तथा (2) रॉकेट का भार mg नीचे की ओर।
- रॉकेट ऊपर उठ रहा है: अतः नेट बल \( F_1 = F - mg \) ऊपर की ओर लगेगा।
गति के द्वितीय नियम से,
\( F - mg = ma \)
- रॉकेट पर प्रणोद \( F = m (g + a) \)
\( = 20000 \text{ kg} \times (10+5) \text{ ms-2} \)
\( F = 3.0 \times 10^5 \text{ N} \)
In simple words: रॉकेट पर ऊपर की ओर लगने वाला प्रणोद बल उसके भार और ऊपर की ओर त्वरण उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल का योग होता है। न्यूटन के दूसरे नियम का उपयोग करके प्रणोद की गणना करें।

🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु ऊपर की ओर त्वरित गति करती है, तो उस पर लगने वाला नेट बल उसके भार और त्वरण के लिए आवश्यक बल का योग होता है। ध्यान दें कि गुरुत्वीय त्वरण (g) को त्वरण (a) में जोड़ा जाता है जब ऊपर की ओर गति हो रही हो।

 

Question 10. उत्तर की ओर 10 ms-1 की एकसमान आरम्भिक चाल से गतिमान 0.40 kg संहति के किसी पिण्ड पर दक्षिण दिशा के अनुदिश 8.0 N का स्थायी बल 30s के लिए आरोपित किया गया है। जिस क्षण बल आरोपित किया गया उसे t-0 तथा उस समय पिण्ड की स्थिति x = 0 लीजिए ।t – 5s, 25 s, 100 s पर इस कण की स्थिति क्या होगी?
Answer:
हल-उत्तर दिशा को धनात्मक (X-अक्ष) तथा दक्षिण दिशा को ऋणात्मक (Y-अक्ष) लेते हुए t = 0 पर प्रारम्भिक वेग \( v_0 = 10 \text{ मी/से} \)
बल, \( F = -8.0 \text{ न्यूटन} \) (: बल की दिशा दक्षिण की ओर है)
पिण्ड में मंदक, \( a = \frac{F}{m} = \frac{-8.0 \text{ न्यूटन}}{0.40 \text{ किग्रा}} = -20 \text{ मी/से}^2 \)
अर्थात् यह दक्षिण दिशा में है।
चूँकि पिण्ड पर बल t = 0 पर कार्य करने लगता है। अतः \( t = -5 \text{ सेकण्ड} \) पर पिण्ड पर कोई बल न लगने के कारण पिण्ड में त्वरण a=0
गति के समीकरण से, \( x_t = x_0 + v_0t + \frac{1}{2} at^2 \)
\( t = -5 \text{ सेकण्ड} \) पर,
\( x_{-5} = 0 + 10 \times (-5) + \frac{1}{2} (0) (-5)^2 = -50 \text{ मी} \)
अर्थात् 50 मी पर दक्षिण की ओर।
\( t = 25 \text{ सेकण्ड} \) पर,
\( x_{25} = [0 + 10 \times 25 + \frac{1}{2} (-20) \times (25)^2] \text{ मी} \)
\( = (250-6250) = -6000 \text{ मी} = 6.0 \text{ किमी} \)
अर्थात् 6.0 किमी पर दक्षिण की ओर।
चूँकि पिण्ड पर बल केवल 30 सेकण्ड तक कार्य करता है, अतः 30 सेकण्ड पश्चात् पिण्ड इस एक समान चाल से चलेगा जिसको यह t = 30 सेकण्ड पर प्राप्त कर लेगा।
\( v_t = v_0 + at \) से,
\( v_{30} = 10 + (-20)30 = -590 \text{ मी/से} \)
\( t = 30 \text{ सेकण्ड} \) पर,
\( x_{30} = [10 \times 30 + \frac{1}{2} (-20) \times 30^2] \text{ मी} = -8700 \text{ मी} \)
तथा शेष 70 सेकण्ड में वस्तु नियत वेग (-590 मी/से) से चलती है।
दूरी \( x_{70} = (-590 \text{ मी/से}) (70 \text{ से}) = -41300 \text{ मी} \)
- \( t = 100 \text{ सेकण्ड} \) पर,
\( x_{100} = -41300 \text{ मी} + (x_{30}) \)
\( = -41300 \text{ मी} + (-8700 \text{ मी}) \)
\( = -50000 \text{ मी} = -50 \text{ किमी} \)
In simple words: पहले बल से उत्पन्न त्वरण की गणना करें। फिर गति के समीकरणों का उपयोग करके अलग-अलग समय बिंदुओं पर स्थिति ज्ञात करें। ध्यान दें कि बल 30 सेकंड के बाद लगना बंद हो जाता है, जिसके बाद वस्तु नियत वेग से चलती है।

🎯 Exam Tip: बल की दिशा और उसके कारण होने वाले त्वरण को सही ढंग से निर्धारित करें। यह भी ध्यान रखें कि बल केवल एक सीमित समय के लिए कार्य करता है, जिसके बाद वस्तु नियत वेग से चलती है।

 

Question 11. कोई ट्रक विरामावस्था से गति आरम्भ करके 2.0 ms-2 के समान त्वरण से गतिशील रहता है। t = 10 s पर, ट्रक के ऊपर खड़ा एक व्यक्ति धरती से 6 m की ऊँचाई से कोई पत्थर बाहर गिराता है।t =11s पर, पत्थर का – (a) वेग तथा (b) त्वरण क्या है? (वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए ।)
Answer:

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ट्रक से गिराए गए पत्थर की गति को दर्शाता है। गिराए जाने के बाद, पत्थर का क्षैतिज वेग \( U_x \) ट्रक के तात्कालिक वेग के बराबर रहता है, जबकि ऊर्ध्वाधर वेग \( U_y \) गुरुत्वाकर्षण के कारण बढ़ता है। परिणामी वेग \( V \) इन दोनों घटकों का सदिश योग है, और यह क्षैतिज से \( \theta \) कोण पर है।


(a) किसी ट्रक से पत्थर को गिराते समय पत्थर का क्षैतिज वेग ट्रक के तात्कालिक वेग के बराबर होता है (जड़त्व के कारण) तथ. यह ऊर्ध्वाधर वेग गुरुत्व के कारण प्राप्त करता है जबकि गिराते क्षण ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर वेग \( u_0 = \) शून्य ।
\( t = 10 \text{ सेकण्ड} \) पर ट्रक का वेग,
\( v_{10} = v_0 + a \cdot t = 0 + 2.0 \text{ ms-2} \times 10 \text{ सेकण्ड} \)
\( = 20 \text{ मी/से} \)
- क्षैतिज दिशा में गिरते हुए पत्थर में कोई त्वरण नहीं है, अतः इस दशा में पत्थर का वेग \( v_x = 20 \text{ मी/से} \) नियत रहेगा। \( t = 11 \text{ सेकण्ड} \) पर अर्थात् \( t = 10 \text{ सेकण्ड} \) पर ट्रक से पत्थर गिराये जाने के \( \Delta t = 11-10 = 1 \text{ सेकण्ड} \) पश्चात् पत्थर का ऊर्ध्वाधरतः नीचे के ओर वेग,
\( v_y = v_0 + g \cdot \Delta t \)
\( = 0 + (-10) \times 1 = -10 \text{ मी/से} \) [ - चिह्न \( v_y \) की दिशा का प्रतीक है।]
अतः पत्थर का \( t = 11 \text{ सेकण्ड} \) पर नेट वेग,
\( v = \sqrt{v_x^2 + v_y^2} = \sqrt{(20)^2+(10)^2} = \sqrt{500} = 22.4 \text{ मी/से} \)
यदि \( \vec{v} \) द्वारा क्षैतिज से बना कोण \( \theta \) हो, तो
\( \tan \theta = \frac{v_y}{v_x} = \frac{-10}{20} = -0.5 \)
या
\( \theta = \tan^{-1} (-0.5) = -26.6^\circ \)
(-) चिह्न. यह दर्शाता है कि \( \vec{v} \) की दिशा 29.5° क्षैतिज से नीचे की ओर अर्थात् दक्षिणावर्त है (चित्र 5.3)।
(b) \( t = 11 \text{ सेकण्ड} \) पर, पत्थर का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण \( = 10 \text{ मी/से}^2 \) ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर है।
In simple words: ट्रक से गिराए गए पत्थर का क्षैतिज वेग ट्रक के तात्कालिक वेग के बराबर रहता है, जबकि ऊर्ध्वाधर वेग गुरुत्वाकर्षण के कारण बढ़ता है। पत्थर पर लगने वाला एकमात्र त्वरण गुरुत्वीय त्वरण है, जो हमेशा नीचे की ओर कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, जड़त्व के कारण गिराए गए वस्तु का प्रारंभिक क्षैतिज वेग वाहन के वेग के बराबर होता है। ऊर्ध्वाधर गति गुरुत्वाकर्षण के कारण होती है, और क्षैतिज त्वरण (वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर) शून्य होता है।

 

Question 12. किसी कमरे की छत से 2 m लम्बी डोरी द्वारा 0.1 kg संहति के गोलक को लटकाकर दोलन आरम्भ किए गए। अपनी माध्य स्थिति पर गोलक की चाल 1 ms-1 है। गोलक का प्रक्षेप्य पथ क्या होगा यदि डोरी को उस समय काट दिया जाता है जब गोलक अपनी – (a) चरम स्थितियों में से किसी एक पर है तथा (b) माध्य स्थिति पर है?
Answer:
(a) चरम स्थिति में गोलक का वेग शून्य होगा; अतः डोरी काट देने पर, गोलक ऊर्ध्वाधर रेखा में नीचे की ओर गिर जाएगा।
(b) माध्य स्थिति में गोलक के पास क्षैतिज दिशा में अधिकतम वेग होगा; अतः इस स्थिति में डोरी काट दिए जाने पर गोलक प्रक्षेप्य की भाँति परवलयाकार पथ पर चलता हुआ अन्त में भूमि पर गिर जाएगा।
In simple words: जब गोलक चरम स्थिति पर होता है और डोरी काटी जाती है, तो उसका वेग शून्य होता है, इसलिए वह सीधा नीचे गिर जाता है। जब गोलक माध्य स्थिति पर होता है और डोरी काटी जाती है, तो उसके पास क्षैतिज वेग होता है, इसलिए वह परवलयाकार पथ पर गिरता है।

🎯 Exam Tip: सरल आवर्त गति में, चरम स्थिति पर वेग शून्य होता है, जबकि माध्य स्थिति पर वेग अधिकतम होता है। डोरी काटने के बाद की गति को निर्धारित करने के लिए वस्तु के तात्कालिक वेग और त्वरण पर ध्यान दें।

 

Question 13. किसी व्यक्ति की संहति 70 kg है। वह एक गतिमान लिफ्ट में तुला पर खड़ा है जो –
(a) 10 ms-1 की एकसमान चाल से ऊपर जा रही है
(b) 5 ms-2 के एकसमान त्वरण से नीचे जा रही है
(c) 5 ms-2 के एकसमान त्वरण से ऊपर जा रही है, तो प्रत्येक प्रकरण में तुला के पैमाने का पाठयांक क्या होगा?
(d) यदि लिफ्ट की मशीन में खराबी आ जाए और वह गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से नीचे गिरे तो पाठयांक क्या होगा?
Answer:
हल :
दिया है। व्यक्ति की संहति m = 70 kg
(a) : लिफ्ट एकसमान वेग से गतिमान है; अतः त्वरण \( a = 0 \)
- तुला का पाठयांक \( R = mg = 70 \text{ kg} \times 9.8 \text{ m s-2} = 686 \text{ N} \)
(b) यहाँ लिफ्ट त्वरण \( a = 5 \text{ m s-2} \) से नीचे जा रही है
- तुला का पाठयांक \( R = m (g – a) \)
\( = 70 \text{ kg} (9.8 – 5) \text{ m s-2} = 336 \text{ N} \)
(c) यहाँ लिफ्ट त्वरण \( a = 5 \text{ m s-2} \) से ऊपर जा रही है,
- तुला का पाठयांक \( R = m (g + a) \)
\( = 70 \text{ kg} (9.8 + 5) \text{ m s-2} = 1036 \text{ N} \)
(d) : लिफ्ट गुरुत्वीय प्रभाव में मुक्त रूप से गिर रही है, अर्थात् \( a = g \) तब, तुला का पाठयांक \( R = m (g – a) = 70 \text{ kg} \times 0 = 0 \)
In simple words: लिफ्ट के त्वरण के आधार पर व्यक्ति का आभासी भार बदलता है। यदि लिफ्ट स्थिर या एकसमान वेग से गतिमान है, तो आभासी भार वास्तविक भार के बराबर होता है। यदि लिफ्ट त्वरित गति से ऊपर जाती है, तो भार बढ़ता है; यदि त्वरित गति से नीचे जाती है, तो भार घटता है; और यदि मुक्त रूप से गिरती है, तो भार शून्य हो जाता है।

🎯 Exam Tip: लिफ्ट समस्याओं में, आभासी भार को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक लिफ्ट का त्वरण है। \( R = m(g \pm a) \) सूत्र को सही ढंग से लागू करने के लिए लिफ्ट की गति की दिशा और त्वरण की दिशा का ध्यान रखें।

 

Question 14. चित्र-5.4 में 4 kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है।
(a) t < 0 ; t > 4 s ; 0 < t,< 4 s के लिए पिण्ड पर आरोपित बल क्या है?
(b) t = 0 तथा t =4 s पर आवेग क्या है? (केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए)
Answer:

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ एक पिण्ड की स्थिति (x) को समय (t) के फलन के रूप में दर्शाता है। t < 0 और t > 4s के लिए, ग्राफ एक सीधी क्षैतिज रेखा है, जो स्थिर स्थिति को इंगित करता है। 0 से 4s के बीच, ग्राफ एक सीधी ढलान वाली रेखा है, जो एकसमान वेग से गति को इंगित करता है।


(a) t <0 के लिए स्थिति-समय ग्राफ समय अक्ष के साथ सम्पाती है अर्थात् पिण्ड मूलबिन्दु पर विराम में स्थित है।
- पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है। t > 4 s के लिए स्थिति-समय ग्राफ समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा है जो बताती है कि इस काल में पिण्ड की मूलबिन्दु से दूरी नियत है। अर्थात् पिण्ड विराम में है।
- पिण्ड पर कार्यरत बल शून्य है। पुनः \( 0 < t < 4s \) के लिए स्थिति समय-ग्राफ एक झुकी हुई सरल रेखा है जो यह बताती है कि इस काल में पिण्ड की मूलबिन्दु से दूरी नियत दर से बढ़ रही है।
अर्थात् पिण्ड नियत वेग से गति कर रहा है; अतः उसको त्वरण शून्य है।
- पिण्ड पर आरोपित बल शून्य है।
(b) \( t = 0 \) से पूर्व पिण्ड का वेग, \( v_1 = 0 \)
\( t = 0 \) के तुरन्त बाद पिण्ड का वेग \( v_2 = \) ग्राफ OA का ढाल
\( = \frac{3-0}{4-0} = \frac{3}{4} \text{ ms-1} \)
- \( t = 0 \) पर,
आवेग = संवेग-परिवर्तन
\( = mv_2 - mv_1 \)
\( = 4 \text{ kg} \times \frac{3}{4} \text{ ms-1} - 4 \text{ kg} \times 0 \)
\( = 3 \text{ kg m s-1} \)
पुनः \( t = 4s \) से ठीक पहले वेग \( v_1 = \frac{3}{4} \text{ ms-1} \)
(\( t = 0 \) से \( t = 4s \) तक वेग नियत है)
तथा \( t = 4s \) के ठीक बाद वेग \( v_2 = 0 \)
- \( t = 4s \) पर आवेग = संवेग-परिवर्तन
\( = mv_2 - mv_1 \)
\( = 4 \text{ kg} \times 0 - 4 \text{ kg} \times \frac{3}{4} \text{ ms-1} \)
\( = -3 \text{ kg ms-1} \)
In simple words: स्थिति-समय ग्राफ का ढाल वेग को दर्शाता है, और वेग में परिवर्तन आवेग को दर्शाता है। यदि ग्राफ सीधी रेखा है, तो वेग स्थिर है, जिसका अर्थ है कि बल शून्य है। आवेग की गणना वेग में परिवर्तन और द्रव्यमान के गुणनफल के रूप में की जाती है।

🎯 Exam Tip: स्थिति-समय ग्राफ में, ढलान वेग को दर्शाता है। वेग में परिवर्तन आवेग को जन्म देता है, जबकि स्थिर वेग या शून्य वेग (स्थिर स्थिति) का अर्थ है कि वस्तु पर कोई शुद्ध बल कार्य नहीं कर रहा है।

 

Question 15. किसी घर्षणरहित मेज पर रखे 10 kg तथा 20kg के दो पिण्ड किसी पतली डोरी द्वारा आपस में जुड़े हैं। 600 N का कोई क्षैतिज बल (i) A पर, (ii) B पर डोरी के अनुदिश लगाया जाता है। प्रत्येक स्थिति में डोरी में तनाव क्या है?
Answer:
हल-दिया है : F = 600 N, \( m_A = 10 \text{ kg} \), \( m_B = 20 \text{ kg} \)
(i) माना पिण्ड A पर बल लगाने से दोनों पिण्ड a त्वरण से चलना प्रारम्भ करते हैं तथा डोरी में तनाव T है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो पिण्डों A (10 kg) और B (20 kg) को एक डोरी से जुड़ा हुआ दिखाता है। एक क्षैतिज बल F = 600N पिण्ड A पर लगाया गया है। डोरी में तनाव T दोनों पिण्डों के बीच बल को दर्शाता है, जिससे वे एक साथ त्वरण a से गति करते हैं।


पिण्ड A पर बल F आगे की ओर तथा तनाव T पीछे की ओर लगेगा; अतः नेट बल \( F_A = F-T \)
- गति के द्वितीय नियम से,
\( F_A = m_A a \)
या
\( F-T = m_A a \)
\( 600-T = 10a \) ...(1)
पिण्ड B पर एकमात्र बल, डोरी का तनाव T आगे की ओर लगेगा
- या
\( T = m_B a \)
\( T = 20a \) ...(2)
समी० (1) को 2 से गुणा करके समी० (2) में से घटाने पर,
\( (1200 - 2T) - T = (20a \times 2) - 20a \) (गलत, यह समीकरण को 2 से गुणा करके फिर समीकरण (2) घटाना है।)
समीकरण (1) में से समीकरण (2) को घटाने पर:
\( (600 - T) - T = 10a - 20a \)
\( 600 - 2T = -10a \)
समीकरण (1) और (2) को a के लिए हल करने के लिए, समीकरण (2) से \( a = T/20 \) को समीकरण (1) में रखें:
\( 600 - T = 10 (\frac{T}{20}) \)
\( 600 - T = \frac{T}{2} \)
\( 600 = T + \frac{T}{2} = \frac{3T}{2} \)
\( 3T = 1200 \)
\( T = \frac{1200}{3} = 400 \text{ N} \)
(ii) इस स्थिति में, पिण्ड B पर नेट बल \( F_B = F - T \) होगा; अतः गति के द्वितीय-नियम से,

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो पिण्डों A (10 kg) और B (20 kg) को एक डोरी से जुड़ा हुआ दिखाता है। एक क्षैतिज बल F = 600N पिण्ड B पर लगाया गया है। डोरी में तनाव T दोनों पिण्डों के बीच बल को दर्शाता है, जिससे वे एक साथ त्वरण a से गति करते हैं।


या
\( F-T = m_B a \)
\( 600-T = 20a \) ...(1)
पिण्ड A पर नेट बल T आगे की ओर लगेगा
या
\( T = m_A a \)
\( T = 10a \) ...(2)
समीकरण (2) को 2 से गुणा करके समी० (1) में से घटाने पर,
\( (600 - T) - 2T = 20a - 20a \)
\( 600 - 3T = 0 \)
या
\( 3T = 600 \text{ N} \)
- डोरी का तनाव \( T = \frac{600}{3} = 200 \text{ N} \)
In simple words: डोरी से जुड़े पिण्डों की गति में, कुल बल को कुल द्रव्यमान से विभाजित करके त्वरण ज्ञात किया जाता है। तनाव बल की गणना करने के लिए, किसी एक पिण्ड पर न्यूटन के दूसरे नियम को लागू करें, जिसमें तनाव को अज्ञात बल के रूप में माना जाए। बल जिस पिण्ड पर लगता है, तनाव उसकी गति की दिशा के विपरीत होता है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि बल आरेख सही ढंग से बनाया गया है, जिसमें सभी बाहरी और आंतरिक बल (तनाव) शामिल हों। दोनों पिण्डों के लिए न्यूटन के दूसरे नियम के समीकरणों को स्थापित करें और उन्हें एक साथ हल करें।

 

Question 16. 8 kg तथा 12kg के दो पिण्डों को किसी हल्की अवितान्य डोरी, जो घर्षणरहित घिरनी पर चढ़ी है, के दो सिरों से बाँधा गया है। पिण्डों को मुक्त रूप से छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
Answer:
हल – माना पिण्डों को मुक्त छोड़ने पर भारी पिण्ड a त्वरण से नीचे की ओर उतरता है। चूंकि डोरी अवितान्य है; अतः हल्का पिण्ड त्वरण से ऊपर की ओर चढ़ेगा।
माना डोरी में तनाव T है, जो कि पूरी डोरी में एकसमान होगा।
भारी अर्थात् 12 kg के पिण्ड पर नेट बल \( F = 12g – T \) नीचे की ओर कार्य करेगा।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक घिरनी पर से गुज़रती एक डोरी से जुड़े दो पिण्डों को दर्शाता है। एक 8kg का पिण्ड ऊपर की ओर त्वरण 'a' से गति कर रहा है, जबकि एक 12kg का पिण्ड नीचे की ओर त्वरण 'a' से गति कर रहा है। डोरी में तनाव 'T' दिखाया गया है।


अतः गति के द्वित्तीय नियम से,
\( F = ma \)
अर्थात्
\( 12g - T = 12a \) ...(1)
- 8 kg का पिण्ड ऊपर की ओर चढ़ रहा है; अतः इसकी गति का समीकरण
\( T - 8g = 8a \) ...(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर,
\( (12g - T) + (T - 8g) = 12a + 8a \)
\( 4g = 20a \)
पिण्डों का त्वरण \( a = \frac{4g}{20} = \frac{4 \times 10 \text{ m s-2}}{20 \text{ kg}} = 2.0 \text{ ms-2} \)
समीकरण (2) में त्वरण a का मान रखने पर,
\( T - 8g = 8 \times 2.0 \)
अतः डोरी का तनाव \( T = 8g + 8 \times 2.0 \)
\( = 8 \text{ kg} \times (10 + 2.0) \text{ ms-2} = 96.0 \text{ N} \)
In simple words: डोरी से जुड़े दो पिण्डों की गति को न्यूटन के दूसरे नियम का उपयोग करके विश्लेषण किया जाता है। दोनों पिण्डों पर लगने वाले बल (गुरुत्वाकर्षण और तनाव) के समीकरणों को स्थापित करके त्वरण और तनाव दोनों की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: इस तरह की समस्याओं को हल करते समय, प्रत्येक पिण्ड के लिए अलग-अलग मुक्त-पिण्ड आरेख बनाएं। प्रत्येक पिण्ड पर कार्य करने वाले बलों (गुरुत्वाकर्षण और तनाव) को पहचानें और न्यूटन के दूसरे नियम (\( F=ma \)) को लागू करें, फिर समीकरणों को एक साथ हल करें।

 

Question 17. अयोगशाला के निर्देश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है। यदि यह नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता हैं तो यह दर्शाइए कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करने चाहिए।
Answer:
उत्तर :
माना नाभिक का द्रव्यमान m है तथा प्रश्नानुसार यह विराम में है अर्थात् \( \vec{v} = 0 \)
- नाभिक को प्रारम्भिक संवेग \( = m \times 0 = 0 \)
माना इसके टूटने से बने दो नाभिकों के द्रव्यमान \( m_1 \) तथा \( m_2 \) हैं तथा ये क्रमशः \( \vec{v_1} \) तथा \( \vec{v_2} \) वेगों से गति करते हैं ।
अतः इन नए नाभिकों का कुल संवेग \( = m_1 \vec{v_1} + m_2 \vec{v_2} \)
- नाभिक स्वतः विघटित हुआ है अर्थात् उस पर बाह्य बल शून्य है; अतः निकाय का संवेग संरक्षित रहेगा।
- विघटन के बाद कुल संवेग = विघटन के पूर्व कुल संवेग
अथवा
\( m_1 \vec{v_1} + m_2 \vec{v_2} = 0 \)
अथवा
\( m_2 \vec{v_2} = -m_1 \vec{v_1} \)
\( \implies \vec{v_2} = -(\frac{m_1}{m_2}) \vec{v_1} \)
अथवा
\( \vec{v_2} = -\lambda \vec{v_1} \) (जहाँ \( \lambda = \frac{m_1}{m_2} \) धनात्मक संख्या है)
उक्त सम्बन्ध से स्पष्ट है कि वेग \( \vec{v_1} \) तथा \( \vec{v_2} \) परस्पर विपरीत हैं अर्थात् उत्पाद नाभिक विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।
In simple words: संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि एक विराम में नाभिक दो छोटे नाभिकों में टूटता है और कोई बाहरी बल कार्य नहीं कर रहा है, तो विघटन के बाद कुल संवेग शून्य होना चाहिए। इसका मतलब है कि दोनों उत्पाद नाभिकों को एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में चलना होगा।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का सिद्धांत ऐसे प्रश्नों को हल करने की कुंजी है। यदि प्रारंभिक संवेग शून्य है, तो अंतिम संवेग भी शून्य होना चाहिए, जिससे यह सिद्ध होता है कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।

 

Question 18. दो बिलियर्ड गेंद जिनमें प्रत्येक की संहति 0.05 kg है, 6 मी / से-1 की चाल से विपरीत दिशाओं में गति करती हुई संघट्ट करती हैं और संघट्ट के पश्चात् उसी चाल से वापस लौटती हैं। प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद कितना आवेग लगाती है?
Answer:
हल :
संघट्ट के पश्चात् प्रत्येक गेंद के वेग की दिशा उलट जाती है। अतः प्रत्येक गेंद के वेग में परिवर्तन का परिमाण
\( |\Delta v| = 6 \text{ मी/से} - (-6 \text{ मी/से}) = 12 \text{ मी/से} \)
- प्रत्येक गेंद द्वारा दूसरी गेंद पर आरोपित आवेग का परिमाण
= संवेग में परिवर्तन का परिमाण \( = m \times |\Delta v| \)
यहाँ प्रत्येक गेंद के लिए, \( m = 0.05 \text{ किग्रा} \)
- आवेग का परिमाण \( = 0.05 \text{ किग्रा} \times 12 \text{ मी/से} = 0.60 \text{ किग्रा-मी/से} \)
स्पष्ट है कि दोनों आवेग परस्पर विपरीत दिशाओं में होंगे।
In simple words: जब दो गेंदें टकराती हैं और विपरीत दिशाओं में उसी चाल से लौटती हैं, तो वेग में परिवर्तन दोगुना हो जाता है। आवेग की गणना द्रव्यमान को वेग में इस परिवर्तन से गुणा करके की जाती है, और आवेग की दिशा वेग में परिवर्तन की दिशा में होती है।

🎯 Exam Tip: आवेग संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है। विपरीत दिशाओं में गति के कारण वेग में परिवर्तन की गणना करते समय दिशा का ध्यान रखें। वेग में परिवर्तन की दिशा में ही आवेग होता है।

 

Question 19. 100 kg संहति की किसी तोप द्वारा 0.020 kg का गोला दागा जाता है। यदि गोले की नालमुखी चाल 80 मी/से-1 है तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या है?
Answer:
हल :
तोप का द्रव्यमान M = 100 किग्रा
गोले का द्रव्यमान m=0.020 किग्रा
गोले की नालमुखी चाल = 80 मी/से
माना तोप की प्रतिक्षेप चाल = V मी/से
प्रारम्भ में गोला व तोप दोनों विरामावस्था में हैं। अतः प्रारम्भ में प्रत्येक का संवेग शून्य था।
अतः रेखीय संवेग-संरक्षण नियम के अनुसार,
तोप तथा गोले का अन्तिम संवेग = प्रारम्भिक संवेग
\( M \times V + m \times v = 0 \)
या
\( MV = -mv \)
\( V = -(\frac{m}{M})v = -(\frac{0.020 \text{ किग्रा}}{100 \text{ किग्रा}}) \times 80 \text{ मी/से} \) यहाँ (-) चिह्न इस तथ्य का प्रतीक है कि तोप का वेग गोले के वेग की विपरीत दिशा में होगा। इसीलिए इसको प्रतिक्षेप चाल कहते हैं। अतः तोप की प्रतिक्षेप चाल = 0.016 मी/से ।
In simple words: संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, एक तोप से गोला दागने पर, तोप पीछे की ओर धकेली जाती है (प्रतिक्षेप)। गोले का संवेग तोप के संवेग के बराबर और विपरीत होता है, जिससे तोप की प्रतिक्षेप चाल की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का नियम बताता है कि एक बंद प्रणाली में कुल संवेग स्थिर रहता है। ऐसे समस्याओं में, गोला दागने से पहले कुल संवेग (शून्य) दागने के बाद के कुल संवेग (तोप का संवेग + गोले का संवेग) के बराबर होना चाहिए।

 

Question 20. कोई बल्लेबाज किसी गेंद को 45° के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने में वह गेंद की आरम्भिक चाल, जो 54 km/h-1 है, में कोई परिवर्तन नहीं करता। गेंद को कितना आवेग दिया जाता है? (गेंद की संहति 0.15 kg है)
Answer:
हल :
माना गेंद पथ AB के अनुदिश बल्लेबाज की ओर \( u = 54 \text{ किमी/घण्टा} = 54 \times (5 / 18) \text{ मी/से} = 15 \text{ मी/से} \) की चाल से आ रही है। यह बिन्दु B पर बल्लेबाज द्वारा उसी चाल से कोण \( ABC = 45^\circ \) पर पथ BC के अनुदिश विक्षेपित कर दी जाती है। B से गुजरते ऊर्ध्वाधर तल पर X' BX अभिलम्ब है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक बल्लेबाज द्वारा गेंद को विक्षेपित करने की प्रक्रिया को दर्शाता है। गेंद A से B की ओर आती है और B से C की ओर 45° के कोण पर विक्षेपित हो जाती है। प्रारंभिक संवेग \( p_1 \) और अंतिम संवेग \( p_2 \) को उनके घटक \( p_{1x}, p_{1y}, p_{2x}, p_{2y} \) के साथ दर्शाया गया है, जिससे संवेग में परिवर्तन और आवेग की गणना की जा सके।


\( \angle ABX' = \angle X'BC = 45^\circ/2 = 22.5^\circ \)
यहाँ गेंद की प्रारम्भिक तथा अन्तिम चाल समान हैं अर्थात प्रारम्भिक व अन्तिम वेगों के परिमाण \( v = 15 \text{ मी/से} \)
प्रारम्भिक संवेग \( \vec{p_1} \) का परिमाण \( = mv \)
अन्तिम संवेग \( \vec{p_2} \) का परिमाण \( = mv \)
\( p_1 \) का Y-अक्ष की धन दिशा में घटक का परिमाण
\( p_{1y} = mv \sin 22.5^\circ \)
\( p_2 \) का Y-अक्ष की धन दिशा में घटक का परिमाण
\( p_{2y} = mv \cos (90^\circ-22.5^\circ) = mv \sin 22.5^\circ \)
- Y-अक्ष के अनुदिश संवेग में परिवर्तन
\( \Delta p_y = p_{2y} - p_{1y} = 0 \) (यह धन दिशा में होगा)
\( p_1 \) का X-अक्ष की धन दिशा में घटक का परिमाण
\( p_{1x} = mv \cos 22.5^\circ \)
\( p_2 \) का X-अक्ष की ऋण दिशा में घटक का परिमाण
\( p_{2x} = mv \cos 22.5^\circ \)
- X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में संवेग में परिवर्तन
\( \Delta p_x = -p_{2x} - p_{1x} = -2mv \cos 22.5^\circ \)
- संवेग में परिणामी परिवर्तन,
\( \Delta p = \sqrt{\Delta p_x^2 + \Delta p_y^2} = \sqrt{(-2mv \cos 22.5^\circ)^2 + 0^2} = 2mv \cos 22.5^\circ \)
- गेंद को दिया गया आवेग = संवेग-परिवर्तन
\( = 2mv \cos 22.5^\circ = 2 \times 0.15 \text{ किग्रा} \times 15 \text{ मी/से} \times 0.924 \)
\( = 4.16 \text{ किग्रा-मी/से} = 4.16 \text{ (किग्रा-मी/से}^2) \text{ सेकण्ड} \)
\( = 4.16 \text{ न्यूटन-सेकण्ड} \)
In simple words: गेंद को दिए गए आवेग की गणना करने के लिए, पहले प्रारंभिक और अंतिम वेग के घटकों को ज्ञात करें। फिर X और Y अक्षों के साथ संवेग में परिवर्तन की गणना करें। आवेग संवेग में परिणामी परिवर्तन के बराबर होता है, जो वेक्टर योग का उपयोग करके ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: संवेग एक सदिश राशि है, इसलिए वेग में परिवर्तन की गणना करते समय दिशा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। घटकों में वियोजित करके परिणामी संवेग परिवर्तन की गणना करना आमतौर पर सबसे सीधा तरीका है।

 

Question 21. किसी डोरी के एक सिरे से बँधा 0.25 kg संहति का कोई पत्थर क्षैतिज तल में 1.5 m त्रिज्या के वृत्त पर 40 rev/min की चाल से चक्कर लगाता है। डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 200 N के अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है, तो वह अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
Answer: हल :
दिया है : पत्थर का द्रव्यमान \(m=0.25\) kg
(i) वृत्तीय पथ की त्रिज्या \(R = 1.5\) m,
घूर्णन आवृत्ति \( \nu = \frac{40 \text{ चक्कर}}{1 \text{ min}} = \frac{40 \text{ चक्कर}}{60 \text{ s}} = \frac{2}{3} \) चक्कर/s
डोरी में तनाव \(T = ?\)
पत्थर को वृत्तीय पथ पर घूमने के लिए अभिकेन्द्र बल डोरी के तनाव \(T\) से मिलता है,
अतः \(T = mR\omega^2 = mR (2\pi\nu)^2\) (∵ \(\omega = 2\pi\nu\))
\( = 4\pi^2mR\nu^2\)
\( = 4 \times (3.14)^2 \times 0.25 \text{ kg} \times 1.5\text{m} \times (\frac{2}{3} \text{ s}^{-1})^2\)
(ii) डोरी का अधिकतम तनाव \(T_{max} = 200\) N तो पत्थर की अधिकतम चाल \( = ?\)
सूत्र \(T = \frac{mv^2}{R}\) से,
\(T \propto v^2\)
अतः जब \(T\) महत्तम होगा तो चाल \(v\) भी महत्तम होगी।
\( v_{max}^2 = \frac{T_{max}R}{m}\)
\( = \frac{200 \text{ N} \times 1.5 \text{ m}}{0.25 \text{ kg}}\) \( = 1200 \text{ m}^2\text{s}^{-2}\)
\( v_{max} = \sqrt{1200} \text{ m s}^{-1} = 20 \times \sqrt{3} \text{ m s}^{-1}\)
\( = 34.6 \text{ m s}^{-1} \approx 35 \text{ m s}^{-1}\)
In simple words: डोरी में तनाव अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है। तनाव की गणना \(4\pi^2mR\nu^2\) सूत्र से की जाती है। अधिकतम चाल तब प्राप्त होती है जब तनाव अधिकतम होता है, जिसकी गणना \( \sqrt{\frac{T_{max}R}{m}} \) से की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: वृत्तीय गति में अभिकेन्द्र बल और तनाव के सूत्रों को सही ढंग से लागू करना और इकाइयों का रूपांतरण (जैसे rev/min को s⁻¹) महत्वपूर्ण है।

 

Question 22. यदि अभ्यास प्रश्न 21 में पत्थर की चाल को अधिकतम निर्धारित सीमा से भी अधिक कर दिया जाए तथा डोरी यकायक टूट जाए, तो डोरी के टूटने के पश्चात पत्थर के प्रक्षेप का सही वर्णन निम्नलिखित में से कौन करता है –
(a) वह पत्थर झटके के साथ त्रिज्यतः बाहर की ओर जाता है।
(b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरेखीय पथ पर उड़ जाता है।
(c) पत्थर स्पर्शी से किसी कोण पर, जिसका परिमाण पत्थर की चाल पर निर्भर करता है, उड़ जाता है।
Answer: (b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरेखीय पथ पर उड़ जाता है क्योंकि उस क्षण पर पत्थर की चाल स्पर्शरेखीय होती है।
In simple words: जब डोरी टूटती है, तो पत्थर पर लगने वाला अभिकेन्द्र बल समाप्त हो जाता है। जड़त्व के कारण पत्थर उस क्षण की तात्कालिक स्पर्शरेखीय दिशा में आगे बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: वृत्तीय गति में किसी वस्तु की गति की दिशा हमेशा वृत्त के स्पर्शरेखीय होती है। बल हटने पर वस्तु इसी दिशा में गति करना जारी रखती है।

 

Question 23. स्पष्ट कीजिए कि क्यों :
(a) कोई घोड़ा रिक्त दिकस्थान (निर्वात) में किसी गाड़ी को खींचते हुए दौड़ नहीं सकता।
(b) किसी तीव्र गति से चल रही बस के यकायक रुकने पर यात्री आगे की ओर गिरते हैं।
(c) लान मूवर को धकेलने की तुलना में खींचना आसान होता है।
(d) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता है।
Answer: उत्तर :
(a) रिक्त दिक्स्थान (निर्वात) में घोड़े को गाड़ी खींचने के लिए आवश्यक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाएगी।
(b) तीव्र गति से गतिशील बस में बैठे यात्री का शरीर गाड़ी के ही वेग से गति करता रहता है। जब यकायक गाड़ी रुकती है तो फर्श के सम्पर्क में स्थित यात्री के पैर तो ठीक उसी समय विराम में आ जाते हैं, परन्तु गति के जड़त्व के कारण ऊपर का शरीर गतिशील बना रहता है और यात्री आगे की ओर गिर जाते हैं।
(c) लान मूवर को धकेलने की अपेक्षा खींचना आसान है – मान लीजिए कि चित्र-5.9

(a) के अनुसार एक लान मूवर को धकेलकर ले जाया जा रहा है। इसके लिए हम मूवर के हत्थे के अनुदिश एक बल \(F\) लगाते हैं, जो क्षैतिज से नीचे की ओर \(\theta\) कोण (माना) पर कार्य करता है। मूवर पर कार्यरत अन्य बल, उसका भार \(Mg\), भूमि की अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(N\) तथा पश्चमुखी घर्षण बल \(f_1\) है ।
- ऊर्ध्वाधर दिशा में कोई गति नहीं है।
अतः इस दिशा में नेट बल शून्य होगा।
\( N - Mg - F \sin \theta = 0\)
अथवा \(N = Mg + F \sin \theta\)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.9(a) में एक व्यक्ति द्वारा लॉन मूवर को धकेलते हुए दिखाया गया है, जहाँ बल \(F\) नीचे की ओर एक कोण \(\theta\) पर लगता है। इसमें भार \(Mg\), अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(N\), घर्षण बल \(f_1\) और बल \(F\) के घटक शामिल हैं। चित्र 5.9(b) में लॉन मूवर को खींचते हुए दिखाया गया है, जहाँ बल \(F\) ऊपर की ओर एक कोण \(\theta\) पर लगता है। इसमें भी समान बल घटक होते हैं, लेकिन बल \(F\) की दिशा विपरीत होती है।
यदि लान मूवर को चित्र-5.9 (b) के अनुसार खींचकर ले जाएँ तो इसके लिए मूवर के हत्थे के अनुदिश बल \(F\) क्षैतिज से ऊपर की ओर \(\theta\) कोण (माना) पर लगाया गया है।
पुनः चूँकि ऊर्ध्वाधर दिशा में कोई गति नहीं है; अतः
\( N + F \sin \theta - Mg = 0\)
अथवा \(N = Mg - F \sin \theta\)
समीकरण (1) व (2) से स्पष्ट है कि मूवर को खींचते समये अभिलम्ब प्रतिक्रिया उसे धकेलते समय अभिलम्ब प्रतिक्रिया से कम है। चूंकि सीमान्त घर्षण बल अभिलम्ब प्रतिक्रिया के अनुक्रमानुपाती होता है; अतः मूवर को खींचते समय अपेक्षाकृत कम घर्षण बल लगेगा । इससे स्पष्ट है कि मूवर को खींचकर ले जाना धकेलकर ले जाने की तुलना में आसान होता है।
(d) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता है - ऐसा करने में गेंद को विराम में आने तक पर्याप्त समय मिल जाता है, इससे गेंद के संवेग की परिवर्तन की दर कम हो जाती है और हाथों पर लगने वाला बल घट जाता है फलस्वरूप चोट लगने की सम्भावना कम हो जाती है।
In simple words: ये सभी घटनाएँ न्यूटन के गति के नियमों और जड़त्व से संबंधित हैं। (a) क्रिया-प्रतिक्रिया के अभाव में घोड़ा आगे नहीं बढ़ सकता। (b) जड़त्व के कारण यात्री अचानक रुकने पर आगे की ओर झुक जाते हैं। (c) खींचने से घर्षण कम होता है, इसलिए यह आसान है। (d) संवेग परिवर्तन के लिए अधिक समय मिलने से बल कम लगता है, जिससे चोट से बचाव होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के नियमों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़ना और प्रत्येक नियम की स्पष्ट व्याख्या करना महत्वपूर्ण है। (c) और (d) विशेष रूप से संवेग और घर्षण बल की अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

 

अतिरिक्त अभ्यास

 

Question 24. चित्र 5.10 में 0.04kg संहति के किसी पिण्ड का स्थिति-समय ग्राफ दर्शाया गया है। इस गति के लिए कोई उचित भौतिक संदर्भ प्रस्तावित कीजिए। पिण्ड द्वारा प्राप्त दो क्रमिक आवेगों के बीच समय-अन्तराल क्या है? प्रत्येक आवेग का परिमाण क्या है?
Answer: हल :
यह स्थिति-समय ग्राफ दो समान्तर ऊर्ध्वाधर दीवारों के बीच एकसमान चाल से क्षैतिज गति करती हुई गेंद का ग्राफ हो सकता है, जो बारम्बार एक दीवार से टकराती है फिर 2s बाद दूसरी दीवार से टकराती है। यह क्रिया लगातार चलती है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.10 एक स्थिति-समय ग्राफ है जो x-अक्ष (स्थिति) पर y-अक्ष (समय) के साथ एक त्रिकोणीय तरंग पैटर्न को दर्शाता है। यह 0 से 2 cm के बीच दोलन करता है और प्रत्येक 2 सेकंड में अपनी दिशा बदलता है, जो किसी वस्तु के दो दीवारों के बीच बार-बार टकराने का प्रतिनिधित्व करता है।
पिण्ड के वेग में प्रत्येक 2s के अन्तराल के बाद परिवर्तन आता है।
अतः दो क्रमिक आवेगों के बीच समयान्तराल \( = 2s\)
\(t = 2\) s से पहले वेग \(v_1 = \) ग्राफ का ढाल \( = \frac{2-0}{2-0} = 1 \text{ cm s}^{-1} = 0.01 \text{ m s}^{-1}\)
\(t = 2\)s के बाद वेग \(v_2 = \) ग्राफ का ढाल \( = \frac{0-2}{4-2} = -1 \text{ cm s}^{-1} = -0.01 \text{ m s}^{-1}\)
- प्रारम्भिक संवेग \(P_1 = mv_1 = 0.04 \times 0.01 = 4 \times 10^{-4} \text{ kg m s}^{-1}\)
अन्तिम संवेग \(P_2 = mv_2 = 0.04 \times (-0.01) = -4 \times 10^{-4} \text{ kg m s}^{-1}\)
- प्रत्येक आवेग का परिमाण \( = \) संवेग परिवर्तन
\( = P_1 - P_2 = [4 \times 10^{-4} - (-4 \times 10^{-4})]\)
\( = 8 \times 10^{-4} \text{ kg m s}^{-1}\)
\( = 8 \times 10^{-4} \text{ Ns}\)
In simple words: ग्राफ एक ऐसी वस्तु की गति को दर्शाता है जो दो दीवारों के बीच बार-बार टकराती है, जिससे हर 2 सेकंड में वेग की दिशा बदल जाती है। दो आवेगों के बीच का समय 2 सेकंड है, और प्रत्येक आवेग का परिमाण संवेग परिवर्तन के बराबर है, जो \(8 \times 10^{-4}\) Ns है।

🎯 Exam Tip: स्थिति-समय ग्राफ से वेग की गणना (ढाल) करना और संवेग परिवर्तन के सिद्धांत का उपयोग करके आवेग ज्ञात करना महत्वपूर्ण है। दिशा परिवर्तन के कारण वेग के चिह्न को ध्यान में रखें।

 

Question 25. चित्र 5.11 में कोई व्यक्ति \(1 \text{ ms}^{-2}\) त्वरण से गतिशील क्षैतिज संवाहक पट्टे पर स्थिर खड़ा है। उस व्यक्ति पर आरोपित नेट बल क्या है? यदि व्यक्ति के जूतों और पट्टे के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.2 है तो पट्टे के कितने त्वरण तक वह व्यक्ति उस पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है? (व्यक्ति की संहति \( = 65 \text{ kg}\))
Answer: हल :
(i) दिया है : पट्टे का त्वरण \(a = 1 \text{ m s}^{-2}\), व्यक्ति का द्रव्यमान \(m = 65 \text{ kg}\)
- व्यक्ति पट्टे पर स्थिर खड़ा है; अतः व्यक्ति का त्वरण भी \(a = 1 \text{ m s}^{-2}\) है।
सूत्र \(F = ma\) से,
व्यक्ति पर आरोपित नेट बल \(F = 65 \text{ kg} \times 1 \text{ m s}^{-2} = 65 \text{ N}\)
(ii) व्यक्ति के जूतों और पट्टे के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक \(\mu_s = 0.2\)
- पट्टा क्षैतिज है; अतः मनुष्य पर पट्टे की अभिलम्ब प्रतिक्रिया
\(N = mg = 65 \text{ kg} \times 10 \text{ m s}^{-2} = 650 \text{ N}\)
माना पट्टे का अधिकतम त्वरण \(a\) है, तब पट्टे के साथ गति करने के लिए व्यक्ति को \(ma\) के बराबर बल की आवश्यकता होगी जो उसे स्थैतिक घर्षण से मिलेगा।
इसके लिए आवश्यक है कि
\( ma \le \mu_s N\)
- अधिकतम त्वरण \(a = \frac{\mu_s N}{m}\)
\( = \frac{0.2 \times 650\text{N}}{65 \text{ kg}}\)
\( = 2.0 \text{ m s}^{-2}\)
In simple words: व्यक्ति पर नेट बल \(ma\) के बराबर होगा, क्योंकि वह पट्टे के साथ त्वरित हो रहा है। व्यक्ति तभी तक पट्टे पर स्थिर रह सकता है जब तक आवश्यक त्वरण के लिए घर्षण बल उपलब्ध हो, जिसकी अधिकतम सीमा \(\mu_s N\) है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में न्यूटन के द्वितीय नियम (\(F=ma\)) और घर्षण बल (\(f_s = \mu_s N\)) के सूत्रों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। अभिलम्ब प्रतिक्रिया (\(N\)) की गणना और अधिकतम त्वरण के लिए शर्त को समझना आवश्यक है।

 

Question 26. \(m\) संहति के पत्थर को किसी डोरी के एक सिरे से बाँधकर \(R\) त्रिज्या के ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमायो जाता है। वृत्त के निम्नतम तथा उच्चतम बिन्दुओं पर ऊर्ध्वाधरतः अधोमुखी दिशा में नेट बल है- (सही विकल्प चुनिए)
निम्नतम बिन्दु पर
(i) \(mg - T_1\)
(ii) \(mg + T_1\)
(iii) \(mg + T_1 - \frac{mv_1^2}{R}\)
(iv) \(mg - T_1 - \frac{mv_1^2}{R}\)
उच्चतम बिन्दु पर
\(mg + T_2\)
\(mg - T_2\)
\(mg - T_2 + \frac{mv_2^2}{R}\)
\(mg + T_2 + \frac{mv_2^2}{R}\)
Answer: उत्तर :
निम्नतम बिन्दु पर तनाव \(T_1\) ऊपर की ओर, भार \(mg\) नीचे की ओर है।
- नेट अधोमुखी बल \( = mg - T_1\)
उच्चतम बिन्दु पर तनाव \(T_2\) व भार \(mg\) दोनों नीचे की ओर लगेंगे ।
- नेट अधोमुखी बल \( = mg + T_2\) अतः विकल्प (i) सही है।
In simple words: ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति करते समय, निम्नतम बिंदु पर नेट अधोमुखी बल \(mg-T_1\) होता है (क्योंकि तनाव ऊपर की ओर होता है), जबकि उच्चतम बिंदु पर नेट अधोमुखी बल \(mg+T_2\) होता है (क्योंकि तनाव भी नीचे की ओर होता है)।

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वाधर वृत्तीय गति में तनाव और गुरुत्वाकर्षण बल की दिशाओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। निम्नतम बिंदु पर तनाव ऊपर की ओर होता है जबकि उच्चतम बिंदु पर यह नीचे की ओर होता है।

 

Question 27. 1000 kg संहति का कोई हेलीकॉप्टर \(15 \text{ ms}^{-2}\) के ऊध्वाधर त्वरण से ऊपर उठता है। चालक दल तथा यात्रियों की संहति 300 kg है। निम्नलिखित बलों का परिमाण व दिशा लिखिए –
(a) चालक दल तथा यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल
(b) चारों ओर की वायु पर हेलीकॉप्टर के रोटर की क्रिया, तथा
(c) चारों ओर की वायु के कारण हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल ।
Answer: हल-हेलीकॉप्टर का द्रव्यमान \(m_1 = 1000\) किग्रा
चालक दल + यात्रियों की संहति \(m_2 = 300\) किग्रा
ऊपर की ओर त्वरण \(a = 15 \text{ मी/से}^2\) तथा \(g = 10 \text{ मी/से}^2\)
(a) चित्र 5.12 में हेलीकॉप्टर के अन्दर स्थित निकाय (चालक दल + यात्री) का मुक्त पिण्ड आरेख प्रदर्शित है। इस निकाय पर निम्नलिखित बल कार्यरत हैं-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.12 एक हेलीकॉप्टर के अंदर चालक दल और यात्रियों के मुक्त-पिंड आरेख को दर्शाता है। इसमें नीचे की ओर लगने वाला भार \(m_2g\) और ऊपर की ओर फर्श द्वारा आरोपित बल \(F\) को दिखाया गया है, जो निकाय के ऊपर की ओर त्वरण \(a\) को दर्शाता है।
(i) निकाय का भार \(m_2g\) (ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर)
(ii) फर्श द्वारा निकाय (चालक दल + यात्री) पर आरोपित बल \(F\) (ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर)
इस निकाय की गति की समीकरण \(F - m_2g = m_2a\)
- \(F=m_2(a + g)=300 \text{ किग्रा} \times (15+10) \text{ मी/से}^2\)
\( = 7500 \text{ न्यूटन}\) (ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर)
अतः गति विषयक क्रिया-प्रतिक्रिया (तृतीय) नियम के आधार पर,
चालक दल + यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल
\( = 7500 \text{ न्यूटन}\) (ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर)
(b) सम्पूर्ण निकाय (हेलीकॉप्टर + चालक दल + यात्री) का कुल द्रव्यमान
\( M = m_1 + m_2 =(1000 \text{ किग्रा} + 300 \text{ किग्रा})\)
\( = 1300 \text{ किग्रा}\)
माना चारों ओर की वायु द्वारा सम्पूर्ण निकाय पर आरोपित बल \(F'\) है तो सम्पूर्ण निकाय के मुक्त पिण्ड आरेख (चित्र 5.13) से इसकी गति समीकरण

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.13 पूरे हेलीकॉप्टर निकाय (हेलीकॉप्टर, चालक दल और यात्रियों) के मुक्त-पिंड आरेख को दर्शाता है। इसमें नीचे की ओर लगने वाला कुल भार \(Mg\) और ऊपर की ओर वायु द्वारा आरोपित प्रणोद बल \(F'\) को दिखाया गया है, जो पूरे निकाय के ऊपर की ओर त्वरण \(a\) को दर्शाता है।
\( F' - Mg = Ma\)
- \(F' = M(a + g) = 1300 \text{ किग्रा} \times (15+10) \text{ मी/से}^2\)
\( = 32500 \text{ न्यूटन} = 3.25 \times 10^4 \text{ न्यूटन}\) (ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर)
अतः चारों ओर की वायु पर हेलीकॉप्टर के रोटर की क्रिया
\(A = -F'\) (न्यूटन के गति विषयक तृतीय नियम के अनुसार)
\( = 3.25 \times 10^4 \text{ न्यूटन}\) (ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर)
(c) चारों ओर की वायु के कारण हेलीकॉप्टर पर आरोपित बल
\( F' = 3.25 \times 10^4 \text{ न्यूटन}\) (ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर)
In simple words: हेलीकॉप्टर के ऊपर उठने पर, चालक दल और यात्री फर्श पर नीचे की ओर 7500 N का बल लगाते हैं। वायु हेलीकॉप्टर पर ऊपर की ओर 3.25 × 10⁴ N का बल लगाती है, और बदले में हेलीकॉप्टर वायु पर नीचे की ओर समान बल लगाता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के दूसरे और तीसरे नियमों का अनुप्रयोग यहाँ महत्वपूर्ण है। निकाय के अंदर के बलों और बाहरी बलों को अलग-अलग पहचानें। क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म हमेशा विपरीत दिशा में होते हैं।

 

Question 28. \(15 \text{ ms}^{-1}\) चाल से क्षैतिजतः प्रवाहित कोई जलधारा \(10^{-2} \text{ मी}^2\) अनुप्रस्थ काट की किसी नली से बाहर निकलती है तथा समीप की किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से टकराती है। जल की टक्कर द्वारा, यह मानते हुए कि जलधारा टकराने पर वापस नहीं लौटती, दीवार पर आरोपित बल ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल :
नली के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \(A=10^{-2} \text{ मी}^2\)
इससे निकलने वाली जल-धारा का वेग अर्थात् प्रति सेकण्ड तय की दूरी
\(u=15 \text{ मी/से}\)
- नली से निकलकर दीवार पर प्रति सेकण्ड लम्बवत् टकराने वाले जल को आयतन \( = A \times u\)
अतः दीवार पर प्रति सेकण्ड लम्बवत् टकराने वाले जल का द्रव्यमान
\(m=\) आयतन \(\times\) जल का घनत्व \( = A \times u \times \rho\)
जल का घनत्व, \(\rho = 10^3 \text{ किग्रा/मी}^3\)
\(m = 10^{-2} \text{ मी}^2 \times 15 \text{ मी/से} \times 10^3 \text{ किग्रा/मी}^3 = 150 \text{ किग्रा}\)
चूँकि दीवार पर टकराने पर जल-धारा वापस नहीं लौटती है अर्थात् उसका वेग शून्य हो जाता है, अतः \(\Delta t = 1\) सेकण्ड में जल-धारा के संवेग में परिवर्तन,
\(\Delta p=m. \Delta v=m (v_2-v_1)=m(0-v)=-mv\)
- जल-धारा के संवेग-परिवर्तन की दर \( = \frac{\Delta p}{\Delta t}\)
परन्तु न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से, \(F = \frac{\Delta p}{\Delta t}\)
- जल-धारा पर दीवार द्वारा आरोपित बल, \(F = -\frac{mv}{\Delta t}\)
अतः न्यूटन के गति विषयक तृतीय नियम के अनुसार,
जल-धारा द्वारा दीवार पर आरोपित बल, \(F' = -F\)
अर्थात् \( F' = - (-\frac{mv}{\Delta t})\)
\( = \frac{150 \text{ किग्रा} \times 15 \text{ मी/से}}{1 \text{ सेकण्ड}}\) \( = 2250 \text{ किग्रा-मी/से}^2\)
\( = 2250 \text{ न्यूटन} = 2.250 \times 10^3 \text{ न्यूटन}\)
In simple words: जलधारा दीवार से टकराकर रुक जाती है, जिससे संवेग में परिवर्तन होता है। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है। तीसरे नियम के अनुसार, दीवार पर आरोपित बल जलधारा द्वारा दीवार पर लगाए गए बल के बराबर और विपरीत होगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में संवेग संरक्षण, न्यूटन के दूसरे और तीसरे नियमों का संयुक्त अनुप्रयोग है। प्रति सेकण्ड द्रव्यमान प्रवाह की गणना (\(\text{density} \times \text{area} \times \text{velocity}\)) और संवेग में परिवर्तन को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 29. किसी मेज पर एक-एक रुपये के दस सिक्कों को एक के ऊपर एक करके रखा गया है। प्रत्येके सिक्के की संहति \(m\) है। निम्नलिखित प्रत्येक स्थिति में बल का परिमाण एवं दिशा लिखिए
(a) सातवें सिक्के (नीचे से गिनने पर) पर उसके ऊपर रखे सभी सिक्कों के कारण बल
(b) सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के द्वारा आरोपित बल, तथा
(c) छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया।
Answer: हल :
(a) नीचे से सातवें सिक्के के ऊपर तीन सिक्के रखे हैं। अतः सातवाँ सिक्का इन तीन सिक्कों के भार के बराबर बल का अनुभव करेगा । - सातवें सिक्के पर ऊपर के सिक्कों के कारण बल \( = 3 \text{ mg N}\)
(b) आठवें सिक्के के ऊपर दो सिक्के और रखे हैं; अतः सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के के कारण बल, आठवें सिक्के तथा ऊपर के दो सिक्कों के भारों के योग के बराबर होगा। - सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के के कारण बल \( = \text{mg} + 2 \text{ mg} = 3 \text{ mg N}\)
(c) सातवें सिक्के के ऊपर तीन सिक्के रखे हैं; अतः सातवाँ सिक्का अपने तथा ऊपर के तीन सिक्कों के भारों के योग के बराबर बल से छठवें सिक्के को दबाएगा। अत: छठे सिक्के पर सातवें के कारण बल \( = \text{mg} + 3 \text{ mg} = 4 \text{ mgN}\). छठवें सिक्के की सातवें पर प्रतिक्रिया \( = 4 \text{mg N}\)
In simple words: सिक्कों के ढेर में, किसी भी सिक्के पर ऊपर से लगने वाला बल उसके ऊपर रखे सभी सिक्कों के कुल भार के बराबर होता है। क्रिया-प्रतिक्रिया बल हमेशा परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न न्यूटन के तीसरे नियम और बलों के योग की अवधारणा को समझने के लिए है। Free-body diagram बनाकर प्रत्येक सिक्के पर कार्यरत बलों को स्पष्ट करना सहायक हो सकता है।

 

Question 30. कोई वायुयान अपने पंखों को क्षैतिज से 15° के झुकाव पर रखते हुए \(720 \text{ kmh}^{-1}\) की चाल से एक क्षैतिज लूप पूरा करता है। लूप की त्रिज्या क्या है?
Answer: हल-दिया है : वायुयान की चाल \(v = 720 \text{ km h}^{-1} = 720 \times \frac{5}{18} = 200 \text{ m s}^{-1}\),
क्षैतिज से झुकाव \(\theta = 15^\circ\)
माना लूप की त्रिज्या \(R\) है तो
सूत्र \( \tan \theta = \frac{v^2}{gR}\) से,
\( R = \frac{v^2}{g \tan \theta}\)
\( = \frac{200 \times 200}{10 \times 0.27}\)
\( = 14814 \text{ m} = 14.8 \text{ km}\)
In simple words: वायुयान द्वारा क्षैतिज लूप में उड़ने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल पंखों के झुकाव से प्राप्त होता है। लूप की त्रिज्या की गणना \( R = \frac{v^2}{g \tan \theta} \) सूत्र से की जा सकती है, जहाँ \(v\) चाल, \(g\) गुरुत्वाकर्षण और \(\theta\) झुकाव कोण है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में गतिज ऊर्जा और अभिकेन्द्र बल से संबंधित सूत्रों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। वेग को \(\text{km/h}\) से \(\text{m/s}\) में बदलना और त्रिकोणमितीय मानों का सही उपयोग करना सुनिश्चित करें।

 

Question 31. कोई रेलगाड़ी बिना ढाल वाले 30 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर \(54 \text{ kmh}^{-1}\) की चाल से चलती है। रेलगाड़ी की संहति \(10^6 \text{ kg}\) है। इस कार्य को करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल कौन प्रदान करता है, इंजन अथवा पटरियाँ ? पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए मोड़ का ढाल-कोण कितना होना चाहिए?
Answer: हल :
आवश्यक अभिकेन्द्र बल पटरियाँ प्रदान करती हैं।
यहाँ \(v = 54 \text{ km h}^{-1} = 54 \times \frac{5}{18} = 15 \text{ m s}^{-1}, \text{ g}=10\text{ m s}^{-2}\),
वृत्तीय मोड़ की त्रिज्या \(R = 30\text{m}, \text{ m}=10^6 \text{ kg}\)
पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए ढाल-कोण इतना होना चाहिए कि रेलगाड़ी को मोड़ पार करने हेतु घर्षण की आवश्यकता न पड़े।
इसके लिए \(v^2 = R g \tan \theta\)
\( \tan \theta = \frac{v^2}{Rg}\)
\( = \frac{15 \times 15}{30 \times 10} = \frac{3}{4}\)
\( \theta = \tan^{-1}(\frac{3}{4})\) \( = 40^\circ\)
अतः पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए पटरियों का ढाल-कोण 40° रखना चाहिए।
In simple words: रेलगाड़ी को मोड़ पर मुड़ने के लिए अभिकेन्द्र बल पटरियों द्वारा मिलता है। पटरियों को नुकसान से बचाने के लिए एक ढाल-कोण आवश्यक है, जिसे \( \tan \theta = \frac{v^2}{Rg} \) सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है, ताकि कोई अतिरिक्त घर्षण बल की आवश्यकता न हो।

🎯 Exam Tip: अभिकेन्द्र बल के स्रोत और ढाल कोण (\(\theta\)) के सूत्र को याद रखना महत्वपूर्ण है। वेग की इकाई को \(\text{km/h}\) से \(\text{m/s}\) में बदलना सुनिश्चित करें।

 

Question 32. चित्र-5.14 में दर्शाए अनुसार 50 kg संहति का कोई व्यक्ति 25 kg संहति के किसी गुटके को दो भिन्न ढंग से उठाता है। दोनों स्थितियों में उस व्यक्ति द्वारा फर्श पर आरोपित क्रिया-बल कितना है? यदि 700 N अभिलम्ब बल से फर्श धंसने लगता है तो फर्श को धंसने से बचाने के लिए उस व्यक्ति को गुटके को उठाने के लिए कौन-सा ढंग अपनाना चाहिए?
Answer: हल-गुटके का द्रव्यमान \(m_1 = 25 \text{ किग्रा}\)
व्यक्ति का द्रव्यमान \(m_2 = 50 \text{ किग्रा}\)
तथा \(g = 10 \text{ मी/से}^2\)
गुटके का भार \(W_1 = m_1 \times g = 25 \text{ किग्रा} \times 10 \text{ मी/से}^2 = 250 \text{ न्यूटन}\)
व्यक्ति का भार \(W_2 = m_2 \times g = 50 \text{ किग्रा} \times 10 \text{ मी/से}^2 = 500 \text{ न्यूटन}\)
चित्रों 5.14

(a) तथा
(b) के लिए मुक्त पिण्ड आरेख क्रमशः चित्र 5.15 (a) तथा
(b) की भाँति होगा।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.14(a) और 5.14(b) दो स्थितियों को दर्शाते हैं जहाँ एक व्यक्ति (50 kg) एक पुली का उपयोग करके 25 kg के ब्लॉक को उठा रहा है। चित्र 5.14(a) में व्यक्ति ब्लॉक को सीधे ऊपर खींच रहा है, जबकि चित्र 5.14(b) में व्यक्ति नीचे खींच रहा है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.15(a) और 5.15(b) संबंधित मुक्त-पिंड आरेखों को दर्शाते हैं। चित्र 5.15(a) में, व्यक्ति पर फर्श द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल \(R = W_2 + F\) है, जहाँ \(F\) ब्लॉक को उठाने के लिए व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल है। चित्र 5.15(b) में, व्यक्ति पर फर्श द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल \(R = W_2 - F\) है, जहाँ \(F\) ब्लॉक को उठाने के लिए व्यक्ति द्वारा पुली के माध्यम से नीचे की ओर लगाया गया बल है।
(a) गुटके को उठाने के लिए व्यक्ति द्वारा उस पर आरोपित बल
\(F =\) गुटके का भार
\(W_1 = 250 \text{ न्यूटन}\)
चित्र 5.15 (a) में बल \(F\) की दिशा ऊपर की ओर है। अतः न्यूटन के गति विषयक तृतीय नियम से इसकी फर्श पर प्रतिक्रिया \(R = F\) नीचे की ओर होगी।
इसलिए फर्श द्वारा व्यक्ति पर आरोपित ऊर्ध्वाधर बल \(F' = W_2 + F = (500 + 250) \text{ न्यूटन} = 750 \text{ न्यूटन}\)
(b) चित्र 5.15 (b) में व्यक्ति द्वारा बल \(F\) नीचे की ओर लगाया जा रहा है। अतः फर्श पर प्रतिक्रिया \(R = F\) ऊपर की ओर होगी। अतः फर्श द्वारा व्यक्ति पर आरोपित लम्बवत् बल \(F'' = W_2 - F\)
\(F'' = 500 \text{ न्यूटन} - 250 \text{ न्यूटन} = 250 \text{ न्यूटन}\)
: दिया है कि फर्श 700 न्यूटन के लम्बवत् बल से नीचे धंसने लगता है, अतः उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट है कि व्यक्ति को गुटके को उठाने के लिए विधि (b) अपनानी चाहिए।
In simple words: जब व्यक्ति सीधे ब्लॉक को ऊपर खींचता है, तो फर्श पर उसका कुल भार बढ़ता है (व्यक्ति का भार + खींचने वाला बल)। जब व्यक्ति पुली के माध्यम से नीचे खींचता है, तो फर्श पर उसका प्रभावी भार घट जाता है (व्यक्ति का भार - खींचने वाला बल)। फर्श को धंसने से बचाने के लिए कम बल वाली विधि (नीचे खींचना) बेहतर है।

🎯 Exam Tip: फ्री-बॉडी आरेख बनाना और न्यूटन के गति के नियमों को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। ध्यान दें कि व्यक्ति पर फर्श द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल उसके अनुभव किए गए 'प्रभावी भार' का प्रतिनिधित्व करता है।

 

Question 33. 40 kg संहति का कोई बन्दर 600 N का अधिकतम तनाव सह सकने योग्य किसी रस्सी पर चढता है (चित्र-5.16)। नीचे दी गई स्थितियों में से किसमें रस्सी टूट जाएगी-
(a) बन्दर \(6 \text{ ms}^{-2}\) त्वरण से ऊपर चढ़ता है
(b) बन्दर \(4 \text{ms}^{-2}\) त्वरण से नीचे उतरता है
(c) बन्दर \(5 \text{ ms}^{-2}\) की एकसमान चाल से ऊपर चढ़ता है,
(d) बन्दर लगभग मुक्त रूप से गुरुत्व बल के प्रभाव में रस्सी से गिरता है । (रस्सी की संहति उपेक्षणीय मानिए)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.16 एक बंदर को एक रस्सी पर ऊपर चढ़ते या नीचे उतरते हुए दिखाता है। रस्सी पर तनाव \(T\) ऊपर की ओर है, जबकि बंदर का भार \(mg\) नीचे की ओर है। यह बंदर की गति के आधार पर रस्सी पर लगने वाले विभिन्न बलों की स्थितियों का प्रतिनिधित्व करता है।
Answer: हल :
(a) माना बन्दर का द्रव्यमान \(m\) है, तब गुरुत्व के कारण उसका भार \(mg\) है। माना रस्सी में उत्पन्न तनाव \(T\) है।
जब बन्दर रस्सी के सहारे ऊपर की ओर त्वरित गति करे, तब
\(T_1-mg= ma_1\)
अर्थात् डोरी में तनाव,
\(T_1 =ma_1 +mg = m(a_1 +g)\)
\( = 40 \text{ किग्रा} \times (6+10) \text{ मी/से}^2 =640 \text{ न्यूटन}\)
\(T_1 > 600 \text{ न्यूटन}\) (अतः रस्सी टूट जायेगी)
(b) जब बन्दर नीचे को त्वरित गति करे, तब
\(mg -T_2 = ma_2\)
या डोरी में तनाव, \(T_2 =m(g-a_2)\)
\( = 40 \times (10 - 4) \text{ न्यूटन} = 240 \text{ न्यूटन}\)
\(T_2 <600 \text{ न्यूटन}\) (अतः रस्सी नहीं टूटेगी ।)
(c) जब बन्दर रस्सी के सहारे ऊपर चढ़नी शुरू करे, तब
\(a_3 = 0\)
- \(T_3 - mg = ma_3 = 0\)
या \(T_3 = mg\)
- डोरी में तनाव, \(T_3 =40 \times 10 \text{ न्यूटन} = 400 \text{ न्यूटन}\)
इस दशा में भी \(T_3 <600 \text{ न्यूटन}\) (अतः रस्सी नहीं टूटेगी ।)
(d) जब बन्दर मुक्त रूप से नीचे उतरता है तो बन्दर भारहीनता की अवस्था में होगा अर्थात् डोरी में तनाव शून्य होगा। चूँकि नीचे उतरने की दशा में, \(T = m (g-a)\) तथा यहाँ \(a = g \implies T = 0\) (अतः रस्सी नहीं टूटेगी।)
केवल स्थिति

(a) में रस्सी टूटेगी क्योंकि इसमें महत्तम तनाव 600 न्यूटन से अधिक है।
In simple words: रस्सी पर तनाव बंदर की गति की दिशा और त्वरण पर निर्भर करता है। जब बंदर ऊपर की ओर त्वरित होता है, तो रस्सी में तनाव उसके भार से अधिक होता है। यदि यह तनाव रस्सी की अधिकतम सहन क्षमता से अधिक हो जाए, तो रस्सी टूट जाएगी। अन्य स्थितियों में, तनाव कम रहता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों को हल करने के लिए फ्री-बॉडी आरेख बनाना और न्यूटन के दूसरे नियम का अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। त्वरण की दिशा के अनुसार बल समीकरणों में \( (g+a) \) या \( (g-a) \) का सही उपयोग करें।

 

Question 34. दो पिण्ड A तथा B, जिनकी संहति क्रमशः 5 kg तथा 10 kg है-एक-दूसरे के सम्पर्क में एक मेज पर किसी दृढ विभाजक दीवार के सामने विराम में रखे हैं। (चित्र-5.17)। पिण्डों तथा मेज के बीच घर्षण गुणांक \(\mu_{AB} = 0.15\) है। 200 N का कोई बल क्षैतिजतः A पर आरोपित किया जाता है।

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(a) दो ब्लॉक A (5 kg) और B (10 kg) को दर्शाता है, जो एक कठोर दीवार के सामने एक मेज पर संपर्क में रखे हैं। 200 N का क्षैतिज बल ब्लॉक A पर बाईं ओर से लगाया जाता है। घर्षण गुणांक 0.15 है।
(a) विभाजक दीवार की प्रतिक्रिया तथा
(b) A तथा B के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया बल क्या है? विभाजक दीवार को हटाने पर क्या होता है? यदि पिण्ड गतिशील है तो क्या (b) का उत्तर बदल जाएगा? \(\mu_s\) तथा \(\mu_k\) के बीच अन्तर की उपेक्षा कीजिए।
Answer: हल-विभाजक दीवार की उपस्थित्ति में, पिण्डों में कोई गति उत्पन्न नहीं होती है।
अर्थात् पिण्डों का त्वरण \(a = 0\) है।
माना पिण्ड A द्वारा B पर आरोपित बल \(R_1\) तथा पिण्ड B द्वारा पिण्ड A पर विपरीत दिशा में आरोपित बल \(R_1\) है। (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम).
- पिण्ड A स्थिर है; अतः इस पर नेट बल शून्य होगा,
\(200\text{N} - R_1 = 0\)
\(R_1 = 200\text{N}\)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(a) में ब्लॉक A (5 kg) पर 200 N का बाहरी बल और ब्लॉक B द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल R1 दिखाया गया है। यह ब्लॉक A के विराम में होने की स्थिति को दर्शाता है।
पुनः माना पिण्ड B दीवार पर \(R_2\) बल आरोपित करता है तो दीवार भी पिण्ड B पर इतना ही बल विपरीत दिशा में लगाएगी।
(क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम)
- पिण्ड B भी स्थिर है; अतः उस पर कार्यरत नेट बल \( = 0\)
\(R_1-R_2=0\)
\(R_2 = R_1 = 200\text{N}\)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(b) में ब्लॉक A और B के बीच प्रतिक्रिया बल R1 और ब्लॉक B पर बाहरी बल R1 दिखाया गया है। यह ब्लॉक B के विराम में होने की स्थिति को दर्शाता है।
(a) अतः दीवार की प्रतिक्रिया \(R_2 = 200\text{N}\)
(b) पिण्डों A व B के बीच क्रिया व प्रतिक्रिया
\(R_1 = 200\text{N}\)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(c) में ब्लॉक B पर ब्लॉक A द्वारा लगाया गया बल R1 और दीवार द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल R2 दिखाया गया है।
विभाजक दीवार को हटाने पर पिण्डों में गति करने की प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है और घर्षण बल कार्यशील हो जाते हैं।
इस स्थिति में पिण्ड A का बल आरेख संलग्न चित्र-5.17(d) में प्रदर्शित है।
मेज की अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(N = 5\text{g N}\)
माना यह पिण्ड \(a\) त्वरण से चलना प्रारम्भ करता है तो पिण्ड की गति का समी० निम्नलिखित होगा-
\(200 - R_1 - \mu N = 5 a\) (\(F = ma\) से)
या \(200-R_1 - 5\mu g = 5 a\)..(1)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(d) में ब्लॉक A का मुक्त-पिंड आरेख दिखाया गया है। इस पर 200N का बाहरी बल, ब्लॉक B से प्रतिक्रिया बल R1, घर्षण बल f=μN और अभिलम्ब प्रतिक्रिया N=5g N कार्य कर रहे हैं।
पिण्ड B का बल-आरेख संलग्न चित्र-5.17(e) में प्रदर्शित है।
अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(N = 10\text{g}\)
जबकि गति का समीकरण
\(R_1 - \mu N = 10 a\)
या \(R_1 - 10\mu g = 10 a\)..(2)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.17(e) में ब्लॉक B का मुक्त-पिंड आरेख दिखाया गया है। इस पर ब्लॉक A से प्रतिक्रिया बल R1, घर्षण बल f=μN और अभिलम्ब प्रतिक्रिया N=10g N कार्य कर रहे हैं।
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर,
\(200 - 15\mu g = 15a\)
- पिण्डों का त्वरण \(a = \frac{(200 – 15 \mu g)\text{N}}{15 \text{ kg}}\)
\( = \frac{(200-15 \times 0.15 \times 10)\text{N}}{15 \text{ kg}}\)
\( = \frac{200-22.5}{15} \text{ m s}^{-2} = 11.83 \text{ m/s}^2\)
\( = 12 \text{ m s}^{-2}\)
इससे स्पष्ट है कि पिण्ड गतिशील हो जाएँगे।
समी० (2) में मान रखने पर,
\(R_1-10 \times 0.15 \times 10 = 10 \times 12\)
\(R_1 = 15 + 120 = 135\text{N}\)
स्पष्ट है कि पिण्डों के गतिशील होने पर भाग (b) का उत्तर बदल गया है।
In simple words: जब दीवार मौजूद होती है, तो पिण्ड स्थिर रहते हैं और दीवार व ब्लॉक B के बीच, तथा ब्लॉक A व B के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया बल 200 N होता है। दीवार हटाने पर, घर्षण और बाहरी बल के कारण पिण्ड त्वरित होते हैं, जिससे A व B के बीच का क्रिया-प्रतिक्रिया बल 135 N हो जाता है।

🎯 Exam Tip: फ्री-बॉडी आरेख बनाना और न्यूटन के दूसरे तथा तीसरे नियमों को लागू करना महत्वपूर्ण है। विराम और गतिमान स्थितियों के लिए अलग-अलग बलों पर विचार करें और घर्षण बल को समीकरणों में शामिल करना न भूलें।

 

Question 35. 15 kg संहति का कोई गुटका किसी लंबी ट्रॉली पर रखा है। गुटके तथा ट्रॉली के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.18 है। ट्रॉली विरामावस्था से 20 s तक \(0.5 \text{ ms}^{-2}\) के त्वरण से त्वरित होकर एकसमान वेग से गति करने लगती है-
(a) धरती पर स्थिर खड़े किसी प्रेक्षक को तथा
(b) ट्रॉली के साथ गतिमान किसी अन्य प्रेक्षक को, गुटके की गति कैसी प्रतीत होगी, इसकी विवेचना कीजिए ।
Answer: हल :
गुटके का द्रव्यमान \(m = 15 \text{ kg}\), \(\mu = 0.18\)
\(t = 20\text{s}\) के लिए, ट्रॉली का त्वरण \(a_1 = 0.5 \text{ m s}^{-2}\)
तत्पश्चात् ट्रॉली का वेग अचर है।
- प्रारम्भ में ट्रॉली त्वरित गति करती है ; अतः यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र है।
- गुटके पर एक छद्म बल \(F_1 =ma_1 =15 \times 0.5 = 7.5 \text{N}\)
पीछे की ओर कार्य करेगा।
जबकि ट्रॉली के फर्श द्वारा गुटके पर आरोपित अग्रगामी घर्षण बल
\(F_2 =\mu N.=\mu m g = 0.18 \times 15 \times 10 = 27 \text{N}\)
- गुटके पर पश्चगामी बेल घर्षण बल की तुलना में कम है; अतः गुटका पीछे की ओर नहीं फिसलेगा और ट्रॉली के साथ-साथ गति करेगा।
(a) धरती पर खड़े स्थिर प्रेक्षक को गुटका ट्रॉली के साथ गति करता प्रतीत होगा।
(b) ट्रॉली के साथ गतिमाने प्रेक्षक को गुटका स्वयं के सापेक्ष विराम अवस्था में दिखाई देगा।
In simple words: ट्रॉली के त्वरित होने पर, एक छद्म बल गुटके पर विपरीत दिशा में कार्य करता है। चूंकि यह छद्म बल घर्षण बल से कम है, इसलिए गुटका फिसलेगा नहीं। एक स्थिर प्रेक्षक के लिए, गुटका त्वरित गति करता हुआ दिखेगा, जबकि ट्रॉली के सापेक्ष प्रेक्षक के लिए, गुटका विराम में रहेगा।

🎯 Exam Tip: जड़त्वीय और अजड़त्वीय फ्रेम के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। छद्म बल का उपयोग अजड़त्वीय फ्रेम में न्यूटन के नियमों को लागू करने के लिए किया जाता है। घर्षण बल की अधिकतम सीमा से तुलना करके फिसलने का निर्धारण किया जाता है।

 

Question 36. चित्र-5.18 में दर्शाए अनुसार किसी ट्रक का पिछला भाग खुला है तथा 40 kg संहति का एक सन्दूक खुले सिरे से 5 m दूरी पर रखा है। ट्रक के फर्श तथा संदूक के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। किसी सीधी सड़क पर ट्रक विरामावस्था से गति प्रारम्भ करके \(2\text{m s}^{-2}\) से त्वरित होता है। आरम्भ बिन्दु से कितनी दूरी चलने पर वह सन्दूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा? (सन्दूक के आमाप की उपेक्षा कीजिए ।)

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.18 एक ट्रक को दर्शाता है जिसका पिछला भाग खुला है। ट्रक के फर्श पर एक 40 kg का बक्सा रखा हुआ है, जो खुले सिरे से 5 मीटर की दूरी पर है। यह स्थिति ट्रक के त्वरण के कारण बक्से के फिसलने की संभावना को दर्शाती है।
Answer: हल - दिया है : सन्दूक का द्रव्यमान \(m = 40\text{kg}\), खुले सिरे से दूरी \(s = 5\text{m}\)
घर्षण गुणांक \(\mu = 0.15\), ट्रक के लिए \(u = 0\), \(a = 2 \text{ ms}^{-2}\)
ट्रक द्वारा तय दूरी, जबकि सन्दूक गिर जाएगा \( = ?\)
- ट्रक त्वरित गति कर रहा है; अतः यह एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र होगा।
- ट्रक के पीछे रखे सन्दूक पर पीछे की ओर एक छदम् बल \(F = ma\) लगेगा।
जहाँ \(F = 40 \text{ kg} \times 2 \text{ m s}^{-2} = 80 \text{ N}\)
जबकि सन्दूक पर स्थैतिक घर्षण बल \(\mu_s N\) (जो सन्दूक को ट्रक के साथ गति कराना चाहता है) आगे की ओर लगेगा।
- सन्दूक पर नेट बल \(F_1 = F - \mu_s N\)
\( = 80 \text{ N} - 0.15 \times 40 \text{ kg} \times 10 \text{ m s}^{-2}\) (∵ \(N = mg\))
\( = 80 \text{ N} - 60 \text{ N} = 20 \text{ N}\) (पीछे की ओर)
- ट्रक के सापेक्ष सन्दूक का त्वरण \(a_1 = \frac{F_1}{m} = \frac{20 \text{ N}}{40 \text{ kg}} = 0.5 \text{ m s}^{-2}\) (पीछे की ओर)
माना सन्दूक को 5m की दूरी तय करने में \(t\) समय लगता है तो
गति के समीकरण \(s = ut + \frac{1}{2} at^2\) से,
\( 5=0 \times t+\frac{1}{2} \times 0.5 \times t^2\)
\( \implies t^2 = 20\)
\( t = \sqrt{20} \text{ s} \approx 4.47 \text{ s}\)
इस दौरान ट्रक द्वारा तय दूरी
\( s = ut + \frac{1}{2} at^2\)
\( = 0 \times 4.47\text{s}+\frac{1}{2} \times 2 \text{ m s}^{-2} \times (4.47 \text{ s})^2\)
\( = 20 \text{ m}\)
In simple words: ट्रक के त्वरित होने पर, बक्से पर पीछे की ओर एक छद्म बल लगता है। यदि यह छद्म बल घर्षण बल से अधिक हो, तो बक्सा ट्रक के सापेक्ष पीछे की ओर त्वरित होगा। बक्से के ट्रक से गिरने में लगने वाला समय और उस दौरान ट्रक द्वारा तय की गई दूरी की गणना गति के समीकरणों का उपयोग करके की जाती है।

🎯 Exam Tip: छद्म बल की अवधारणा, घर्षण बल की गणना और एकसमान त्वरण के लिए गति के समीकरणों का उपयोग इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण हैं। सापेक्ष गति को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।

 

Question 37. 15 cm त्रिज्या का कोई बड़ा ग्रामोफोन रिकार्ड \(33\frac{1}{3} \text{ rev/min}\) की चाल से घूर्णन कर रहा है। रिकार्ड पर उसके केन्द्र से 4cm तथा 14 cm की दूरियों पर दो सिक्के रखे गए हैं। यदि सिक्के तथा रिकार्ड के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है तो कौन-सा सिक्का रिकार्ड के साथ परिक्रमा करेगा?
Answer: हल-रिकार्ड की घूर्णन आवृत्ति \( \nu = 33\frac{1}{3} \text{ rev/min} = \frac{100}{3 \times 60} \text{ rev/s} = \frac{5}{9} \text{ rev-s}^{-1}\)
कोणीय वेग \(\omega = 2\pi\nu = 2 \times \frac{22}{7} \times \frac{5}{9} = \frac{220}{63} \approx 3.5 \text{ rad/s}\)
सिक्कों के पथों की त्रिज्याएँ \(r_1 = 0.04 \text{ m}\), \(r_2 = 0.14 \text{ m}\)
जबकि \(\mu_s = 0.15\)
सिक्कों को रिकार्ड के साथ घूमने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल क्रमशः \(m_1 r_1 \omega^2\) तथा \(m_2 r_2 \omega^2\) होंगे जो इन्हें स्थैतिक घर्षण बल से प्राप्त होंगे।
इसके लिए आवश्यक है कि
\(mr\omega^2 = f_s \le \mu_s N\)
या \(mr\omega^2 \le \mu_s mg\)
या \(r\omega^2 \le \mu_s g\)..(1)
R.H.S. \( = \frac{\mu_s g}{\omega^2} = \frac{0.15 \times 10 \text{ m s}^{-2}}{(3.5 \text{ rad/s})^2} \approx \frac{1.5}{12.25} \approx 0.12 \text{ m} = 12 \text{ cm}\)
स्पष्ट है कि प्रथम सिक्के के लिए
\(r_1 = 4 \text{ cm} < 12 \text{ cm}\)
अतः प्रथम सिक्का रिकार्ड के साथ परिक्रमा करेगा।
जबकि दूसरे सिक्के के लिए \(r_2 = 14 \text{ cm} > 12 \text{ cm}\)
- दूसरा सिक्का फिसलकर बाहर गिर जाएगा।
In simple words: सिक्के को डिस्क पर घूमने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल घर्षण बल से मिलता है। यदि सिक्के की स्थिति के लिए आवश्यक घर्षण बल उसके अधिकतम मान (\(\mu_s N\)) से अधिक हो जाए, तो सिक्का फिसल जाएगा। पहला सिक्का स्थिर रहेगा क्योंकि उसके लिए आवश्यक घर्षण बल सीमा के भीतर है, जबकि दूसरा सिक्का फिसल जाएगा।

🎯 Exam Tip: कोणीय वेग की गणना और अभिकेन्द्र बल को घर्षण बल से संबंधित करने का सूत्र (\(r \le \frac{\mu_s g}{\omega^2}\)) महत्वपूर्ण हैं। इकाई रूपांतरण (\(\text{rev/min}\) से \(\text{rad/s}\)) पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 38. आपने सरकस में 'मौत के कुएँ (एक खोखला जालयुक्त गोलीय चैम्बर ताकि उसके भीतर के क्रियाकलापों को दर्शक देख सकें) में मोटरसाइकिल सवार को ऊध्ध्वाधर लूप में मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा होगा। स्पष्ट कीजिए कि वह मोटरसाइकिल सवार नीचे से कोई सहारा न होने पर भी गोले के उच्चतम बिन्दु से नीचे क्यों नहीं गिरता? यदि चैम्बर की त्रिज्या 25 m है तो ऊर्ध्वाधर लूप को पूरा करने के लिए मोटरसाइकिल की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?
Answer: हल :
गोलीय चैम्बर के उच्चतम बिन्दु पर मोटरसाइकिल सवार चैम्बर को बाहर की ओर दबाता है और प्रतिक्रिया स्वरूप चैम्बर सवार पर गोले के केन्द्र की ओर दिष्ट प्रतिक्रिया \(R\) लगाता है। सवार वे मोटरसाइकिल का भार \(mg\) भी गोले के केन्द्र की ओर कार्य करते हैं। ये दोनों बल सवार को वृत्तीय गति करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करते हैं, जिसके कारण सवार नीचे नहीं गिर पाता।
इस बिन्दु पर गति की समीकरण

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.19 'मौत के कुएँ' में एक मोटरसाइकिल सवार को उच्चतम बिंदु पर दर्शाता है। इसमें नीचे की ओर लगने वाला सवार का भार \(mg\) और चैम्बर की ओर प्रतिक्रिया बल \(R\) दिखाया गया है। ये दोनों बल मिलकर सवार को वृत्तीय गति में बनाए रखने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करते हैं।
\(R + mg = \frac{mv^2}{r}\) जहाँ \(v\) सवार की चाल तथा \(r\) गोले की त्रिज्या है।
ऊर्ध्वाधर लूप को पूरा पार करने के लिए उच्चतम बिन्दु पर न्यूनतम चाल (क्रान्तिक चाल)
\(v_c = \sqrt{gr} = \sqrt{10\text{m s}^{-2} \times 25\text{ m}}\)
\( = 15.8\text{m s}^{-1}\)
In simple words: 'मौत के कुएँ' के उच्चतम बिंदु पर मोटरसाइकिल सवार का भार और अभिलम्ब प्रतिक्रिया बल दोनों नीचे की ओर होते हैं और मिलकर आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करते हैं, जिससे सवार नीचे नहीं गिरता। लूप को पूरा करने के लिए न्यूनतम चाल \(\sqrt{gr}\) होती है।

🎯 Exam Tip: उच्चतम बिंदु पर अभिलम्ब प्रतिक्रिया और गुरुत्वाकर्षण बल की दिशाओं को समझना और अभिकेन्द्र बल के साथ उनके संबंध को सही ढंग से सूत्रित करना महत्वपूर्ण है। क्रांतिक चाल के लिए सूत्र \(\sqrt{gr}\) याद रखें।

 

Question 39. 70 kg संहति का कोई व्यक्ति अपने ऊर्ध्वाधर अक्ष पर 200 rev/min की चाल से घूर्णन करती 3m त्रिज्या की किसी बेलनाकार दीवार के साथ उसके सम्पर्क में खड़ा है। दीवार तथा उसके कपड़ों के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। दीवार की वह न्यूनतम घूर्णन चाल ज्ञात कीजिए, जिससे फर्श को यकायक हटा लेने पर भी, वह व्यक्ति बिनागिरे दीवार से चिपका रह सके ।
Answer: हल-दिया है : व्यक्ति का द्रव्यमान \(m = 70 kg\), आवृत्ति \( \nu = 200 rev/min = \frac{200}{60} = \frac{10}{3} rev/s \) त्रिज्या \(R = 3 m\), \( \mu = 0.15 \) माना दीवार की न्यूनतम घूर्णन चाल \( \omega \) है। व्यक्ति घूर्णन करते समय, दीवार को बाहर की ओर दबाता है तथा दीवार की अभिलम्ब प्रतिक्रिया, जो केन्द्र की ओर कार्य करती है, आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करती है।
\( N = MR \omega^2 \) ...(1) फर्श को हटा लेने पर अपने भार के कारण व्यक्ति की प्रवृत्ति नीचे को फिसलने की होती है; अतः घर्षण बल \( \mu N \) ऊपर की ओर कार्य करता है। व्यक्ति बिना गिरे दीवार से चिपका रहेगा यदि घर्षण बल, व्यक्ति के भार को सन्तुलित कर ले अर्थात् \( \mu N = mg \) या \( \mu m R \omega^2 = mg \)
\( \omega^2 = \frac{g}{\mu R} = \frac{10 ms^{-2}}{0.15 \times 3} = 22.22 \)
न्यूनतम घूर्णन चाल \( \omega = \sqrt{22.22} = 4.72 rad/s \approx 5 rad s^{-1} \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation):चित्र 5.19 एक बेलनाकार चैम्बर की क्षैतिज सतह पर एक व्यक्ति को दिखाता है जो केंद्र की ओर गुरुत्वाकर्षण के कारण गिर रहा है। चित्र 5.20 एक व्यक्ति को एक बेलनाकार दीवार के अंदर दिखाते हुए गति की स्थिति को दर्शाता है। व्यक्ति दीवार के साथ संपर्क में है और उस पर लग रहे विभिन्न बलों को दिखाया गया है: ऊपर की ओर घर्षण बल (fs), नीचे की ओर व्यक्ति का भार (mg), और केंद्र की ओर अभिलम्ब प्रतिक्रिया (N)।In simple words: व्यक्ति को दीवार से चिपके रहने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल घर्षण बल से संतुलित होना चाहिए। न्यूनतम घूर्णन चाल उस दर पर होती है जब व्यक्ति का भार घर्षण बल द्वारा ठीक से संतुलित हो जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, अभिकेन्द्र बल और घर्षण बल को संतुलित करने की अवधारणा महत्वपूर्ण है। सही ढंग से समीकरण स्थापित करना और घर्षण गुणांक का उपयोग करना स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 40. \(R\) त्रिज्याका पतला वृत्तीय तार अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः कोणीय आवृत्ति \( \omega \) से घूर्णन कर रहा है। यह दर्शाइए कि इस तार में डली कोई मणिका \( \omega \leq \sqrt{ \frac{g}{R} } \) के लिए अपने निम्नतम बिन्दु पर रहती है। केन्द्र से मनके को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्वाधर अधोमुखी दिशा से कितना कोण बनाता है? (घर्षण को उपेक्षणीय मानिए)
Answer: हल : माना कि मणिका का द्रव्यमान \(m\) है तथा किसी क्षण मणिका को वृत्तीय तार के केन्द्र से मिलाने वाली त्रिज्या ऊर्ध्वाधर से \( \theta \) कोण पर झुकी है। इस समय मणिका पर दो बल लगे हैं - (1) वृत्तीय तार की अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(N\) केन्द्र \(O\) की ओर । (2) भूमिका का भार \(mg\) नीचे की ओर । मणिका वृत्तीय तार के साथ \(PQ = r\) त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर घूम रही है, जिसका केन्द्र \(Q\) है। जहाँ \(r = PQ=OP sin \theta = R sin \theta\) प्रतिक्रिया \(N\) की ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज घटकों में वियोजित करने पर, ऊर्ध्वाधर घटक \(N cos \theta\) भार को सन्तुलित करता है। अर्थात् \(N cos \theta = mg\) क्षैतिज घटक \(N sin \theta\), अभिकेन्द्र बल \(mr \omega^2\) प्रदान करता है। अर्थात् \(N sin \theta = mr \omega^2\)
\( N sin \theta = m (R sin \theta) \omega^2 \)
\( N = mR \omega^2 \) समी० (1) में मान रखने पर,
\( (mR \omega^2) cos \theta = mg \)
\( cos \theta = \frac{g}{R \omega^2} \) ...(2)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.21 एक वृत्तीय तार में एक मनके की स्थिति को दर्शाता है जो तार के ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः घूम रहा है। इसमें मनके (P) पर लगने वाले बल दिखाए गए हैं: मनके का भार (mg) नीचे की ओर, और अभिलम्ब प्रतिक्रिया (N) तार के केंद्र (O) की ओर। मनके की वृत्तीय गति के लिए अभिकेन्द्र बल भी दिखाया गया है।
\( | cos \theta | \leq 1 \); अतः यदि \( \frac{g}{R \omega^2} \geq 1 \) तब \( \theta \) का कोई भी मान समी० (2) को सन्तुष्ट नहीं कर पाएगा, ऐसी स्थिति में मणिका निम्नतम बिन्दु पर पड़ी रहेगी। इसके लिए आवश्यक शर्त निम्नलिखित है-
\( \frac{g}{R \omega^2} \geq 1 \) या \( \omega^2 \leq \frac{g}{R} \) या \( \omega \leq \sqrt{\frac{g}{R}} \) अब यदि \( \omega = \sqrt{\frac{2g}{R}} \) हो तो समी० (2) से,
\( cos \theta = \frac{g}{R \left(\frac{2g}{R}\right)} = \frac{1}{2} \)
\( \implies \theta = 60^\circ \) अर्थात् मणिका को केन्द्र से जोड़ने वाली त्रिज्या ऊर्ध्वाधर से 60° का कोण बनाएगी।In simple words: एक घूमने वाले वृत्ताकार तार में मनका अपनी निचली स्थिति पर रहता है जब घूर्णन गति एक निश्चित सीमा से कम होती है। यदि गति तेज होती है, तो मनका गुरुत्वाकर्षण और अभिकेन्द्र बल के संतुलन के कारण ऊपर की ओर कोण बनाता है।

🎯 Exam Tip: वृत्तीय गति में संतुलन के प्रश्नों में, अभिकेन्द्र बल को अन्य बलों, जैसे गुरुत्वाकर्षण और अभिलम्ब प्रतिक्रिया, के घटकों के साथ संतुलित करना महत्वपूर्ण है। कोण के साथ त्रिकोणमितीय संबंधों का सही उपयोग सुनिश्चित करें।

 

परीक्षापयोगी प्रश्नोत्तर

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. किसी वस्तु पर एक नियत बल लगाने से वस्तु गति करती है।
(i) एकसमान वेग से
(ii) एकसमान त्वरण से
(iii) असमान त्वरण से
(iv) असमान वेग से
Answer: (ii) एकसमान त्वरण सेIn simple words: न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, जब किसी वस्तु पर एक नियत बल लगाया जाता है, तो उसमें एक स्थिर त्वरण उत्पन्न होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम \(F = ma\) को याद रखें, जहाँ नियत बल \(F\) का अर्थ नियत त्वरण \(a\) है।

 

Question 2. जब किसी वस्तु की गति में त्वरण उत्पन्न होता है, तब
(i) वह सदैव पृथ्वी की ओर गिरती है।
(ii) उसकी चाल में सदैव वृद्धि होती है।
(iii) उस पर सदैव कोई बल कार्य करता है।
(iv) उसकी गति की दिशा बदल जाती है।
Answer: (iii) उस पर सदैव कोई बल कार्य करता है।In simple words: त्वरण का मतलब वेग में परिवर्तन है, और न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, वेग में परिवर्तन हमेशा एक बल के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: त्वरण का सीधा संबंध लगाए गए बल से होता है। बल के बिना त्वरण संभव नहीं है।

 

Question 3. एक क्षैतिज सड़क पर कार की त्वरित गति उस बल के कारण होती है जो
(i) कार के इंजन द्वारा लगाया जाता है।
(ii) कार के ड्राइवर द्वारा लगाया जाता है
(iii) पृथ्वी द्वारा लगाया जाता है।
(iv) सड़क द्वारा लगाया जाता है।
Answer: (iv) सड़क द्वारा लगाया जाता हैIn simple words: कार को आगे बढ़ाने वाला बल टायरों और सड़क के बीच घर्षण से मिलता है, जो कि सड़क द्वारा टायरों पर लगाया गया प्रतिक्रिया बल है।

🎯 Exam Tip: क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म (न्यूटन का तीसरा नियम) को ध्यान में रखें। इंजन पहियों को घुमाता है, पहिए सड़क पर बल लगाते हैं, और सड़क प्रतिक्रिया स्वरूप पहियों पर बल लगाकर कार को आगे बढ़ाती है।

 

Question 4. एक फुटबॉल तथा उसी आकार के एक पत्थर के जड़त्व में से
(i) फुटबॉल का जड़त्व अधिक है।
(ii) पत्थर का जड़त्व अधिक है।
(iii) दोनों का जड़त्व बराबर है।
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ii) पत्थर का जड़त्व अधिक है।In simple words: जड़त्व द्रव्यमान पर निर्भर करता है; चूंकि पत्थर का द्रव्यमान फुटबॉल से अधिक होता है, इसलिए उसका जड़त्व भी अधिक होगा।

🎯 Exam Tip: जड़त्व, वस्तु के द्रव्यमान का सीधा माप है। अधिक द्रव्यमान का अर्थ है गति की स्थिति में परिवर्तन का अधिक प्रतिरोध।

 

Question 5. किसी लिफ्ट में वस्तु को भार कम प्रतीत होगा, जबकि लिफ्ट
(i) एकसमान वेग से नीचे उतरती है
(ii) एकसमान वेग से ऊपर जाती है।
(iii) त्वरण के साथ ऊपर जाती है।
(iv) मन्दन के साथ ऊपर जाती है।
Answer: (iv) मन्दन के साथ ऊपर जाती है।In simple words: जब लिफ्ट ऊपर की ओर धीमी होती है (मंदन के साथ ऊपर जाती है), तो वस्तु पर लगने वाला आभासी भार कम हो जाता है, क्योंकि लिफ्ट का त्वरण नीचे की ओर प्रभावी होता है।

🎯 Exam Tip: आभासी भार \(R = m(g-a)\) होता है जब लिफ्ट नीचे की ओर त्वरित होती है या ऊपर की ओर मंदन करती है। यहाँ, ऊपर जाते समय मंदन का अर्थ त्वरण नीचे की ओर है, जिससे आभासी भार कम होता है।

 

Question 6. एक हल्की डोरी घर्षण रहित घिरनी के ऊपर से गुजरती है। उसके एक सिरे पर \(m\) तथा दूसरे सिरे पर \(3m\) के द्रव्यमान बँधे हैं, निकाय का त्वरण होगा।
(i) \(g/4\)
(ii) \(g/3\)
(iii) \(g/2\)
(iv) \(g\)
Answer: (iii) g/2In simple words: एटवुड मशीन के लिए, त्वरण \(a = \frac{(M-m)g}{(M+m)}\) सूत्र से दिया जाता है। यहाँ, \(M=3m\) और \(m=m\) रखने पर, त्वरण \(a = \frac{(3m-m)g}{(3m+m)} = \frac{2mg}{4m} = \frac{g}{2}\) प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: एटवुड मशीन के त्वरण के सूत्र को याद रखें: \(a = \frac{(m_2-m_1)g}{(m_1+m_2)}\)। यह दो द्रव्यमानों के बीच के बल संतुलन का परिणाम है।

 

Question 7. एक घोड़ा गाड़ी को खींचता है तो जो बल घोड़े को आगे बढ़ने में सहायता करता है, वह लगाया जाता है
(i) गाड़ी द्वारा घोड़े पर
(ii) पृथ्वी द्वारा घोड़े पर
(iii) पृथ्वी द्वारा गाड़ी पर
(iv) घोड़े द्वारा पृथ्वी पर
Answer: (ii) पृथ्वी द्वारा घोड़े परIn simple words: घोड़ा जमीन पर बल लगाता है, और न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, जमीन घोड़े पर प्रतिक्रिया बल लगाती है, जिससे घोड़ा आगे बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) को समझने के लिए यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चलने के लिए, हमें उस सतह पर पीछे की ओर बल लगाना होता है जिस पर हम चल रहे हैं, और सतह हम पर आगे की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती है।

 

Question 8. 200 किग्रा द्रव्यमान की लिफ्ट 3.0 मी/से\(^2\) के त्वरण से ऊपर की ओर गति कर रही है। यदि \(g = 10\) मी/से\(^2\) हो तो लिफ्ट की डोरी का तनाव होगा
(i) 2600 न्यूटन
(ii) 2000 न्यूटन
(iii) 1300 न्यूटन
(iv) 600 न्यूटन
Answer: (i) 2600 न्यूटनIn simple words: लिफ्ट के ऊपर की ओर त्वरित गति करने पर डोरी का तनाव वस्तु के भार और त्वरण के कारण उत्पन्न अतिरिक्त बल का योग होता है, यानी \(T = m(g+a)\)।

🎯 Exam Tip: लिफ्ट के प्रश्नों में, त्वरण की दिशा के आधार पर प्रभावी गुरुत्वाकर्षण (\(g+a\) या \(g-a\)) का ध्यान रखें। ऊपर की ओर त्वरण के लिए \(T = m(g+a)\) का प्रयोग करें।

 

Question 9. रॉकेट-नोदन की कार्य विधि आधारित है।
(i) न्यूटन के प्रथम नियम पर
(ii) संवेग संरक्षण के सिद्धान्त पर
(iii) द्रव्यमान संरक्षण के सिद्धान्त पर
(iv) न्यूटन के द्वितीय नियम पर
Answer: (ii) संवेग संरक्षण के सिद्धान्त परIn simple words: रॉकेट ईंधन को पीछे की ओर धकेलता है, और इस क्रिया की प्रतिक्रिया में रॉकेट आगे बढ़ता है, जिससे कुल संवेग संरक्षित रहता है।

🎯 Exam Tip: रॉकेट नोदन न्यूटन के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) और संवेग संरक्षण के सिद्धांत का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है, क्योंकि गैसों का उत्सर्जन रॉकेट को विपरीत दिशा में धकेलता है।

 

Question 10. न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी पिण्ड पर आरोपित बल समानुपाती होता है।
(i) उसके संवेग परिवर्तन के
(ii) उसके द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल के
(iii) उसके द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल के
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (iii) उसके द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल केIn simple words: न्यूटन का दूसरा नियम कहता है कि बल द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल के समानुपाती होता है, यानी \(F = ma\)।

🎯 Exam Tip: \(F=ma\) सूत्र न्यूटन के दूसरे नियम का मूल है। विकल्प (i) संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती को भी दर्शाता है, जो द्वितीय नियम का एक और रूप है, लेकिन विकल्प (iii) सीधे \(F=ma\) को दर्शाता है।

 

Question 11. गेंद कैच करते समय क्रिकेट खिलाड़ी अपने हाथ नीचे कर लेता है, क्योंकि
(i) उसके हाथ घायल होने से बच जाएँगे
(ii) वह गेंद को मजबूती से पकड़ लेता है।
(iii) वह खिलाड़ी को धोखा देता है।
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (i) उसके हाथ घायल होने से बच जाएँगेIn simple words: खिलाड़ी गेंद को नीचे खींचकर गेंद के संवेग परिवर्तन के लिए आवश्यक समय बढ़ाता है, जिससे उस पर लगने वाला औसत बल कम हो जाता है और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: यह आवेग-संवेग प्रमेय का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग है (\(F \Delta t = \Delta p\))। समय (\(\Delta t\)) बढ़ाने से बल (\(F\)) कम हो जाता है, जब संवेग परिवर्तन (\(\Delta p\)) नियत रहता है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. 1 न्यूटन बल की परिभाषा दीजिए ।
Answer: 1 न्यूटन बल वह बल है जो 1 किग्रा द्रव्यमान को किसी वस्तु पर लगाए जाने पर उसमें 1 मी/से\(^2\) का त्वरण उत्पन्न कर दे।In simple words: 1 न्यूटन वह बल है जो 1 किलोग्राम की वस्तु में 1 मीटर प्रति सेकंड वर्ग का त्वरण पैदा करता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन की परिभाषा सीधे \(F=ma\) सूत्र से आती है, जहाँ \(m=1\) किग्रा और \(a=1\) मी/से\(^2\) होता है।

 

Question 2. बल के मात्रक क्या हैं?
Answer: न्यूटन, किग्रा-मी/से\(^2\), किग्रा-भार, डाइन, ग्राम-सेमी/से\(^2\), ग्राम-भार ।In simple words: बल के सामान्य मात्रक न्यूटन (SI इकाई) और डाइन (CGS इकाई) हैं, जो द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल से बने हैं।

🎯 Exam Tip: SI और CGS प्रणालियों में बल के मात्रकों और उनके मूल मात्रकों के साथ संबंधों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. बल के मात्रक को मूल मात्रकों में व्यक्त कीजिए ।
Answer: 1 न्यूटन = 1 किग्रा-मी/से\(^2\), 1 डाइन = 1 ग्राम-सेमी/से\(^2\)।In simple words: बल के मात्रकों को द्रव्यमान, लम्बाई और समय के मूलभूत मात्रकों का उपयोग करके व्यक्त किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: यह इकाई रूपांतरण के लिए एक आधारभूत जानकारी है, खासकर जब विभिन्न प्रणालियों (SI, CGS) में गणना कर रहे हों।

 

Question 4. बल तथा त्वरण में क्या सम्बन्ध है?
Answer: बल \((F) \propto\) त्वरण \((a)\), अतः \(F = ma\), जहाँ \(m\) वस्तु को द्रव्यमान है जिस पर बल \(F\) ने त्वरण उत्पन्न किया है।In simple words: बल वस्तु के द्रव्यमान और उसमें उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है; बल की दिशा त्वरण की दिशा में होती है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का द्वितीय नियम (\(F=ma\)) बल, द्रव्यमान और त्वरण के बीच मौलिक संबंध को परिभाषित करता है। यह याद रखना कि बल और त्वरण सदिश राशियाँ हैं और हमेशा एक ही दिशा में होती हैं, महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. जड़त्व की परिभाषा दीजिए ।
Answer: पदार्थ का वह गुण जो पदार्थ की अवस्था परिवर्तन का विरोध करता है, जड़त्व कहलाता है।In simple words: जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जो उसकी विराम या एकसमान गति की अवस्था में किसी भी बदलाव का विरोध करता है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व न्यूटन के प्रथम नियम से संबंधित है और वस्तु के द्रव्यमान का सीधा माप है। अधिक द्रव्यमान का अर्थ अधिक जड़त्व है।

 

Question 6. एक कार एवं बस में से किसका जड़त्व अधिक होगा?
Answer: बस का द्रव्यमान कार से अधिक होती है; अतः बस का जड़त्व भी अधिक होगा।In simple words: चूंकि बस का द्रव्यमान कार से अधिक होता है, इसलिए बस में गति की स्थिति में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति अधिक होगी।

🎯 Exam Tip: जड़त्व सीधे द्रव्यमान के समानुपाती होता है; जो वस्तु जितनी भारी होगी, उसका जड़त्व उतना ही अधिक होगा।

 

Question 7. एक पिण्ड का द्रव्यमान \(m\) तथा वेग \(u\) है, तो उसको संवेग बताइए
Answer: \(p = mu\)In simple words: संवेग किसी वस्तु के द्रव्यमान और उसके वेग का गुणनफल होता है, यह वस्तु की गति की मात्रा को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: संवेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग की दिशा में होती है। इसका SI मात्रक किलोग्राम-मीटर/सेकंड है।

 

Question 8. बल तथा संवेग-परिवर्तन की दर में क्या सम्बन्ध है?
Answer:
\( \vec{F} = \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \)In simple words: न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, किसी वस्तु पर लगने वाला शुद्ध बल उसके संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।

🎯 Exam Tip: यह न्यूटन के गति के दूसरे नियम का अधिक सामान्य रूप है, जहाँ बल को संवेग-परिवर्तन की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है।

 

Question 9. आवेग से क्या तात्पर्य है?
Answer: यदि कोई बल किसी वस्तु पर थोड़े समय के लिए कार्य करता है तो बल और उसके लगने के समय के गुणनफल को बल का आवेग कहते हैं। आवेग एक सदिश राशि है । S.I. पद्धति में आवेग को मात्रक न्यूटन-सेकण्ड होता है।In simple words: आवेग किसी वस्तु पर लगाए गए बल और उस बल के लगने के समय अंतराल का गुणनफल होता है, जो वस्तु के संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: आवेग \(J = F \Delta t\) के रूप में परिभाषित होता है और इसकी इकाइयाँ न्यूटन-सेकंड (\(N \cdot s\)) या किलोग्राम-मीटर/सेकंड (\(kg \cdot m/s\)) होती हैं। यह संवेग-परिवर्तन प्रमेय का आधार है।

 

Question 10. रॉकेट का क्रिया-सिद्धान्त गति के किस नियम पर आधारित है?
Answer: गति के तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम) पर।In simple words: रॉकेट-नोदन न्यूटन के तीसरे नियम पर आधारित है, जहाँ रॉकेट गैसों को एक दिशा में धकेलता है और गैसें रॉकेट को विपरीत दिशा में धकेलती हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम "प्रत्येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है" को रॉकेट के कार्यप्रणाली के पीछे का मुख्य सिद्धांत है।

 

Question 11. क्या क्रिया एवं प्रतिक्रिया बल एक ही वस्तु पर कार्य करते हैं अथवा अलग-अलग वस्तुओं पर?
Answer: अलग-अलग वस्तुओं पर ।In simple words: क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं - एक वस्तु पर क्रिया होती है और दूसरी पर प्रतिक्रिया।

🎯 Exam Tip: यह न्यूटन के तीसरे नियम की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि क्रिया और प्रतिक्रिया एक ही वस्तु पर कार्य करते, तो वे हमेशा एक-दूसरे को रद्द कर देते और कोई गति नहीं होती।

 

Question 12. संगामी बलों से क्या तात्पर्य है?
Answer: जब एक ही बिन्दु पर दो या दो से अधिक बल कार्य करते हैं तथा इस उभयनिष्ठ बिन्दु पर इन बलों का सदिश योग शून्य होता है, संगामी बल कहलाते हैं।In simple words: संगामी बल वे बल होते हैं जिनकी क्रिया रेखाएँ एक ही बिंदु से होकर गुजरती हैं, और यदि उनका कुल सदिश योग शून्य हो तो वे संतुलन में होते हैं।

🎯 Exam Tip: संगामी बलों का संतुलन यह सुनिश्चित करता है कि वस्तु पर कोई शुद्ध बल कार्य नहीं कर रहा है, जिससे वह विराम में या एकसमान गति में रहती है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. जड़त्व से क्या तात्पर्य है? गति जड़त्व को उदाहरण सहित समझाइए ।
Answer: जड़त्व : किसी पिण्ड का वह गुण जिसके कारण पिण्ड अपनी विरामावस्था में अथवा एकसमान गति की अवस्था में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का विरोध करता है, जड़त्व कहलाता है। गति जड़त्व किसी वस्तु में उसकी गति अवस्था में परिवर्तन के विरोध का गुण गति जड़त्व कहलाता है। उदाहरण - चलती रेल में गेंद को ऊपर उछालने पर गेंद उछालने वाले के हाथ में वापस लौट आती है।In simple words: जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जिससे वह अपनी गति की अवस्था (विराम या एकसमान गति) में परिवर्तन का विरोध करती है। गति जड़त्व का अर्थ है कि वस्तु अपनी गति को बनाए रखना चाहती है। उदाहरण के लिए, चलती ट्रेन में ऊपर उछाली गई गेंद वापस हाथ में आ जाती है क्योंकि गेंद और ट्रेन दोनों एक ही क्षैतिज गति बनाए रखना चाहते हैं।

🎯 Exam Tip: जड़त्व द्रव्यमान पर निर्भर करता है। गति जड़त्व के उदाहरणों में बस के अचानक मुड़ने पर यात्रियों का बाहर की ओर झुकना या चलती ट्रेन में वस्तु का उसकी गति बनाए रखना शामिल है।

 

Question 2. न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम लिखिए ।
Answer: न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम- इस नियम के अनुसार, “यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है, तो वह विरामावस्था में ही रहेगी अथवा यदि कोई वस्तु गतिमान है, तो वह सरल रेखा में एकसमान वेग से ही गति करती रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए” इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।In simple words: न्यूटन का पहला नियम कहता है कि एक वस्तु अपनी वर्तमान गति की स्थिति (विराम में या एकसमान गति में) में बनी रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल कार्य न करे।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का पहला नियम जड़त्व के सिद्धांत को परिभाषित करता है और यह न्यूटन के दूसरे नियम का एक विशेष मामला है जब शुद्ध बल शून्य होता है।

 

Question 3. स्पष्ट कीजिए कि न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम \(F = ma\) में उसका प्रथम नियम भी निहित है।
Answer: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से, \( \vec{F} = \vec{ma} \) यदि \( \vec{F} = 0 \) हो, तो \( \vec{a} = 0 \) अर्थात् यदि वस्तु पर बाह्य बल ने लगाया जाए, तो वस्तु में त्वरण भी उत्पन्न नहीं होगा। त्वरण के शून्य होने पर या तो वस्तु विरामावस्था में ही रहेगी या एकसमान वेग से गतिमान रहेगी। यही न्यूटन का गति विषयके प्रथम नियम है; अतः न्यूटन के गति के द्वितीय नियम में प्रथम नियम स्वतः निहित है।In simple words: न्यूटन के दूसरे नियम (\(F=ma\)) से, यदि शुद्ध बल (\(F\)) शून्य है, तो त्वरण (\(a\)) भी शून्य होगा। इसका मतलब है कि वस्तु या तो विराम में रहेगी या एकसमान वेग से चलती रहेगी, जो न्यूटन का पहला नियम है। इस प्रकार, पहला नियम दूसरे नियम का एक विशेष मामला है।

🎯 Exam Tip: इस अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए \(F=ma\) सूत्र का उपयोग करें। यह दर्शाता है कि पहले दो नियम अलग नहीं हैं बल्कि एक-दूसरे से व्युत्पन्न हैं।

 

Question 4. निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए -
(i) तेज चलती गाड़ी से अचानक नीचे उतरने पर यात्री क्यों गिर पड़ता है?
(ii) पेड़ के हिलाने पर उसके फल टूट्टकर क्यों गिर जाते हैं?
(iii) बन्दूक से गोली चलाने पर पीछे की ओर धक्का लगता है, क्यों?
(iv) कुएँ से जल खींचते समय रस्सी टूट जाने पर हम पीछे की ओर गिर जाते हैं, क्यों?
Answer: (i) तेज चलती गाड़ी से अचानक नीचे उतरने पर यात्री गिर पड़ता है - गाड़ी से उतरने से पूर्व यात्री के सम्पूर्ण शरीर का वेग गाड़ी के वेग के बराबर होता है। जैसे ही यात्री प्लेटफॉर्म पर या नीचे उतरता है, तो उसके पैर तो विरामावस्था में आ जाते हैं, परन्तु उसके शरीर का ऊपरी भाग गति जड़त्व के कारण उसी वेग से चलने का प्रयत्न करता है। अतः यात्री गाड़ी के चलने की दिशा में गिर पड़ता है। इसलिए चलती गाड़ी से उतरने पर कुछ दूर गाड़ी की दिशा में अवश्य दौड़ना चाहिए।
(ii) पेड़ की डाल हिलाने पर फल नीचे गिर पड़ते हैं - डाल हिलाने से पेड़ की डाल में यकायक गति उत्पन्न हो जाती है, परन्तु डाल पर लगे फल विराम जड़त्व के कारण अपने ही स्थान पर या नीचे रहने का प्रयत्न करते हैं। इस प्रकार फल डालियों से अलग हो जाते हैं और पृथ्वी के गुरुत्व-बल के कारण वे नीचे गिर पड़ते हैं।
(iii) बन्दूक से गोली चलाने पर पीछे की ओर धक्का लगता है - बन्दूक चलाने पर बारूद जलकर गैस बन जाती है, जो किं फैलने पर गोली को आगे की ओर फेंकती है। गोली जितने बल से आगे फेंकी जाती है, बन्दूक पर प्रतिक्रिया बल भी उतना ही अधिक लगता है जिससे चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगता है।
(iv) कुएँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर हम पीछे को गिर जाते हैं - इसका कारण यह है कि पहले मनुष्य रस्सी को अपनी ओर खींच रहा था। रस्सी टूट जाने पर रस्सी द्वारा मनुष्य पर लगने वाला बल लुप्त हो गया। अतः खिंचाव हट जाने के कारण वह गिर पड़ता है। बाल्टी जितनी अधिक भारी होती है उतनी ही अधिक शक्ति को धक्का हमें पीछे की ओर लगता है।In simple words: ये सभी घटनाएँ जड़त्व और न्यूटन के गति के नियमों के उदाहरण हैं। तेज गाड़ी से उतरने पर यात्री गति जड़त्व के कारण गिरते हैं। पेड़ से फल विराम जड़त्व के कारण गिरते हैं। बंदूक का पीछे हटना न्यूटन के तीसरे नियम का उदाहरण है, और रस्सी टूटने पर पीछे गिरना बल के अचानक हटने के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व (पहला नियम) और क्रिया-प्रतिक्रिया (तीसरा नियम) के इन दैनिक जीवन के अनुप्रयोगों को स्पष्ट रूप से समझाएँ। प्रत्येक उदाहरण में संबंधित नियम को पहचानें और उसके पीछे के भौतिकी सिद्धांत को विस्तार से बताएँ।

 

Question 5. बल के आवेग और संवेग-परिवर्तन में सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
या
सिद्ध कीजिए कि बल का आवेग, संवेग-परिवर्तन के बराबर होता है।
Answer: उत्तर : माना कोई बल \(F\), \(m\) द्रव्यमान की वस्तु पर बहुत अल्प समय \(\Delta t\) के लिए कार्य करता है। यदि वस्तु के वेग में परिवर्तन \(\Delta v\) हो, तो वस्तु के वेग-परिवर्तन की दर \( \frac{\Delta v}{\Delta t} \) होगी। अब, परिभाषा से, आवेग \((I) = \text{बल} \times \text{समयान्तराल} = F \times \Delta t\) ...(1) परन्तु, न्यूटन गति विषयक के द्वितीय नियम से, बल \((F) = \text{द्रव्यमान} \times \text{त्वरण} = ma\) ...(2) त्वरण की परिभाषा से, त्वरण \((a) = \frac{\text{वेग-परिवर्तन}}{\text{समयान्तराल}} = \frac{\Delta v}{\Delta t}\) समीकरण (2) से, \(F = m \frac{\Delta v}{\Delta t}\) \(F\) का मान समीकरण (1) में रखने पर, आवेग, \(I = F \times \Delta t = m \frac{\Delta v}{\Delta t} \times \Delta t = m \Delta v\) \( = \text{द्रव्यमान} \times \text{वेग-परिवर्तन} \) \( = \text{संवेग-परिवर्तन} = \Delta p \) अर्थात् \(I = F \times \Delta t = \Delta p\) ...(3) स्पष्ट है कि किसी बल का आवेग उसके द्वारा वस्तु में उत्पन्न संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।In simple words: बल का आवेग, जो बल और उसके लगने के समय का गुणनफल है, हमेशा वस्तु के संवेग में हुए परिवर्तन के बराबर होता है। यह आवेग-संवेग प्रमेय कहलाता है।

🎯 Exam Tip: यह व्युत्पत्ति न्यूटन के द्वितीय नियम से सीधी है। आवेग की परिभाषा और संवेग परिवर्तन के बीच संबंधों को स्पष्ट रूप से लिखें। यह प्रमेय विशेष रूप से उन स्थितियों में उपयोगी है जहाँ बल बहुत कम समय के लिए कार्य करता है, जैसे टक्कर।

 

Question 6. एक पिण्ड का संवेग दो मिनट में 150 किग्रा-मी/से से बढ़कर 600 किग्रा-मी/से हो जाता है। पिण्ड पर आरोपित बल ज्ञात कीजिए ।
Answer: हल : प्रारम्भिक संवेग, \(P_1 = 150\) किग्रा-मी/से अन्तिम संवेग, \(P_2 = 600\) किग्रा-मी/से समय, \(t = 2\) मिनट = \(120\) सेकण्ड पिण्ड पर आरोपित बल,
\( F = \frac{\Delta P}{\Delta t} = \frac{P_2-P_1}{t} \)
\( = \frac{600-150}{120} = \frac{450}{120} = 3.75 \text{ न्यूटन} \)In simple words: बल की गणना संवेग में हुए कुल परिवर्तन को उस समय से विभाजित करके की जाती है जिसमें यह परिवर्तन हुआ था।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के द्वितीय नियम (\(F = \frac{\Delta p}{\Delta t}\)) का प्रयोग करें और ध्यान दें कि समय को SI इकाइयों (सेकंड) में परिवर्तित करना आवश्यक है।

 

Question 7. 20 ग्राम की एक वस्तु पर एक बल बहुत कम समय के लिए कार्य करता है, जिससे वस्तु का वेग शून्य से बढ़कर 10 मीटर/सेकण्ड हो जाता है। बल का आवेग ज्ञात कीजिए।
Answer: हल : वस्तु को द्रव्यमान, \(m = 20\) ग्राम = \(20 \times 10^{-3}\) किग्रा प्रारम्भिक वेग, \(u = 0\) अन्तिम वेग, \(v = 10\) मीटर/सेकण्ड प्रारम्भिक संवेग, \(P_1 = mu = 20 \times 10^{-3} \times 0 = 0\) अन्तिम संवेग, \(P_2 = mv = 20 \times 10^{-3} \times 10 \) \( = 20 \times 10^{-2}\) न्यूटन-सेकण्ड बल का आवेग = संवेग-परिवर्तन \( = P_2-P_1 \) \( = 20 \times 10^{-2} - 0 = 20 \times 10^{-2} = 0.2 \text{ न्यूटन-सेकण्ड} \)In simple words: बल का आवेग वस्तु के संवेग में हुए परिवर्तन के बराबर होता है, जिसकी गणना वस्तु के द्रव्यमान और वेग में परिवर्तन से की जाती है।

🎯 Exam Tip: आवेग को संवेग में परिवर्तन (\(\Delta p = mv - mu\)) के रूप में सीधे गणना करें। सभी मानों को SI इकाइयों (किलोग्राम, मीटर/सेकंड) में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें।

 

Question 8. दिए गए बल-समय वक़ से आवेग का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer: हल : प्रश्न में दिए चित्रानुसार, \(\triangle ORP\) का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times 4 \times 20 = 40 \) \(\triangle MSQ\) का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times 2 \times 20 = 20 \) आयत \(PQRS\) का क्षेत्रफल \( = 2 \times 20 = 40 \) आवेग का परिमाण \( = 40 + 20 + 40 = 100 \text{ न्यूटन – सेकण्ड} \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 5.22 एक बल-समय ग्राफ दिखाता है। X-अक्ष पर समय (सेकंड में) और Y-अक्ष पर बल (न्यूटन में) दर्शाया गया है। ग्राफ तीन खंडों में विभाजित है: 0 से 4 सेकंड तक बल 0 से 20 न्यूटन तक रैखिक रूप से बढ़ता है (त्रिभुज ORP), 4 से 6 सेकंड तक बल 20 न्यूटन पर स्थिर रहता है (आयत PQRS), और 6 से 8 सेकंड तक बल 20 न्यूटन से 0 तक रैखिक रूप से घटता है (त्रिभुज MSQ)।In simple words: बल-समय ग्राफ के नीचे का कुल क्षेत्रफल आवेग के बराबर होता है। यहाँ, यह क्षेत्रफल तीन ज्यामितीय आकृतियों (दो त्रिभुज और एक आयत) के क्षेत्रफलों को जोड़कर निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: बल-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल हमेशा आवेग का परिमाण देता है। यदि ग्राफ अनियमित हो, तो उसे आयतों और त्रिभुजों में विभाजित करके कुल क्षेत्रफल ज्ञात करें।

 

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. न्यूटन के गति का द्वितीय नियम लिखिए और व्याख्या कीजिए। इससे सम्बन्ध \(F = ma\) प्राप्त कीजिए जहाँ प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।
या
यदि नियत द्रव्यमान \(m\) का कोई पिण्ड त्वरण \( \vec{a} \) से गति कर रहा है तो सिद्ध कीजिए कि इस पिण्ड के लिए गति के द्वितीय नियम का रूप है \( \vec{f} m \vec{a} \) होगा। इस सूत्र के आधार पर बल के मापन की विधि समझाइए ।
Answer: उत्तर : न्यूटन का गति विषयक द्वितीय नियम – न्यूटन को गति का द्वितीय नियम, वस्तु के संवेग में परिवर्तन और उस पर आरोपित बाह्य बल के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है। इस नियम के अनुसार, “किसी वस्तु के संवेग-परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बाह्य बल के समानुपाती होती है तथा संवेग-परिवर्तन बल की दिशा में ही होता है।" माना \(m\) द्रव्यमान की वस्तु पर कोई बल \(F\), \(\Delta t\) समय तक कार्य करता है। यदि इसका वेग \(u\) से \(u + \Delta u\) हो जाता है, तब इसके प्रारम्भिक संवेग \(p (= mu)\) में \(\Delta p (= m\Delta v)\) मान का संवेग-परिवर्तन हो जाता है। वस्तु के संवेग-परिवर्तन की दर \( = \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \) न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार,
\( \vec{F} \propto \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \) या \( \vec{F} = k \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \) ...(1) जहाँ, \(k\) समानुपाती नियतांक (constant of proportionality) है। अब, यदि \(\Delta t \to 0\), तब \( \vec{F} = k \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \) ...(2) यदि वस्तु का द्रव्यमान \(m\) नियत हो, तब तो \( \frac{d\vec{p}}{dt} = \frac{d}{dt} (m\vec{v}) = m \frac{d\vec{v}}{dt} = m\vec{a} \) ...(3) इसे समीकरण (2) में रखने पर,
\( \vec{F} = km\vec{a} \) ...(4) जहाँ, \(k\) एक अनुक्रमानुपाती नियतांक है। समीकरण (4) से स्पष्ट है कि किसी वस्तु पर लगने वाला बल \(F\) वस्तु के द्रव्यमान \(m\) तथा उसमें उत्पन्न त्वरण \(a\) के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है। अब, समीकरण (4) में \(F = 1, m = 1\) तथा \(a = 1\) रखने पर,
\( 1 = k \times 1 \times 1 \)
\( \implies k = 1 \) समी० (4) में \(k = 1\) रखने पर,
\( \vec{F} = m\vec{a} \) अर्थात् बल = द्रव्यमान \(\times\) त्वरण बल के S.I. मात्रक की परिभाषा S.I. मात्रक में एकांक बल वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु पर लगाकर उसमें 1 मी/से\(^2\) का त्वरण उत्पन्न कर दे। इसे 1 न्यूटन (N) कहते हैं। अतः 1 न्यूटन = 1 किग्रा \(\times\) 1 मी/से\(^2\) = 1 किग्रा-मी-से\(^2\) बल के मापन की विधि सूत्र \( = \vec{F} = m \vec{a} \) का अदिश रूप लेने पर, \(F = ma\) इस सूत्र में स्पष्ट है कि किसी दिए गए बल को मापन उस बल को एक ज्ञात द्रव्यमान के पिण्ड पर आरोपित करके उसमें उत्पन्न होने वाले त्वरण को मापकर किया जा सकता है।In simple words: न्यूटन का दूसरा नियम बताता है कि किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसके संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। गणितीय रूप से, यदि द्रव्यमान स्थिर है, तो बल द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल (\(F=ma\)) के बराबर होता है, जहाँ \(k=1\) होता है। इस नियम का उपयोग बल को मापने के लिए किया जाता है: किसी ज्ञात द्रव्यमान पर बल लगाकर उत्पन्न त्वरण को मापकर बल की गणना की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के द्वितीय नियम का सटीक कथन और \(F=ma\) सूत्र की व्युत्पत्ति चरण-दर-चरण प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है। स्थिरांक \(k=1\) के चुनाव की व्याख्या भी आवश्यक है।

 

Question 2. संवेग की परिभाषा दीजिए। संवेग का दैनिक जीवन में महत्त्व लिखिए।
Answer: उत्तर : संवेग – संवेग वह राशि है जो गतिशील वस्तु के वेग व द्रव्यमान दोनों पर निर्भर करती है। किसी वस्तु का संवेग वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के बराबर होता है। संवेग = द्रव्यमान \(\times\) वेग यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान \(m\) एवं उसका वेग \(u\) हो, तो वस्तु का रेखीय संवेग, \( \vec{p} = m \vec{v} \) संवेग एक सदिश (vector) राशि है। उसका मात्रक किग्रा-मी/से या न्यूटन-सेकण्ड होता है। संवेग का दैनिक जीवन में महत्त्व - संवेग का दैनिक जीवन में महत्त्व निम्नलिखित है – 1. यदि दो वस्तुएँ समान वेग से गति कर रही हैं तो भारी (heavy) वस्तु का संवेग, हल्की (light) वस्तु के संवेग से अधिक होता है। माना भारी वस्तु का द्रव्यमान \(M\) और हल्की वस्तु का द्रव्यमान \(m\) है तथा दोनों का वेग \(u\) समान है तब, भारी वस्तु का संवेग \(P_1 = Mv\) ...(1) हल्की वस्तु का संवेग \(P_2 = mv\) ...(2) समीकरण (1) व समीकरण (2) से,
\( \frac{P_1}{P_2} = \frac{Mv}{mv} = \frac{M}{m} \) अब चूँकि \(M > m\), अतः \(P_1 > P_2\) इससे स्पष्ट है कि यदि दो वस्तुएँ समान वेग से चल रही हैं तो भारी वस्तु का संवेग हल्की वस्तु के संवेग से अधिक होता है। यदि एक बस और एक दो पहिया स्कूटर समान वेग से चल रहे हों तो बस का संवेग स्कूटर के संवेग से बहुत अधिक होगा। 2. यदि दो वस्तुओं का संवेग बराबर है तो हल्की वस्तु का वेग भारी वस्तु के वेग से अधिक होगा। माना भारी वस्तु का द्रव्यमान \(M\) तथा वेग \(V\) है और हल्की वस्तु का द्रव्यमान \(m\) तथा वेग \(v\) है। चूंकि दोनों का संवेग बराबर है, अर्थात्
\(P_1 = P_2\) अथवा \(MV = mv\)
\( \implies \frac{M}{m} = \frac{v}{V} \) चूँकि \(M > m\) है अतः \(v > V\) स्पष्ट है कि यदि दो वस्तुओं का संवेग एकसमान है तो हल्की वस्तु का वेग भारी वस्तु के वेग से अधिक होता है।In simple words: संवेग किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग का गुणनफल है, जो वस्तु की गति की मात्रा को दर्शाता है। यह एक सदिश राशि है। दैनिक जीवन में, अधिक द्रव्यमान या वेग वाली वस्तु का संवेग अधिक होता है। यदि दो वस्तुओं का संवेग समान है, तो हल्की वस्तु की चाल भारी वस्तु से अधिक होगी।

🎯 Exam Tip: संवेग की परिभाषा, उसका सूत्र (\(p=mv\)), मात्रक और सदिश प्रकृति को स्पष्ट करें। दैनिक जीवन के उदाहरण (जैसे भारी वस्तु का अधिक संवेग) देकर इसके महत्व को समझाएँ।

 

Question 3. संवेग किसे कहते हैं? यह कैसी राशि है? संवेग का बल के साथ क्या सम्बन्ध है?
Answer: उत्तर : संवेग – किसी वस्तु का संवेग वस्तु के द्रव्यमान तथा उसके वेग के गुणनफल के बराबर होता है। इसे \( \vec{p} \) से प्रदर्शित करते हैं। यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान \(m\) तथा वेग \( \vec{\nu} \) हो, तब उस वस्तु का संवेग \( \vec{p} = m \vec{\nu} \) संवेग का S.I. मात्रक किग्रा-मीटर/सेकण्ड' तथा C.G.S. मात्रक ‘ग्राम-सेमी/सेकण्ड' है। यह एक सदिश राशि है तथा इसकी दिशा वस्तु के वेग की दिशा में होती है। इसका विमीय सूत्र \([MLT^{-1}]\) है। बल व संवेग के बीच सम्बन्ध – इस नियम के अनुसार, “किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर, उस वस्तु पर आरोपित नेट बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा बाह्य बल की दिशा में होती है।” यदि किसी वस्तु का संवेग \(\vec{p}\) तथा उस पर आरोपित बाह्य बल \(\vec{F}\) है तो
\( \vec{F} \propto \frac{d\vec{p}}{dt} \) या \( \vec{F} = k \frac{d\vec{p}}{dt} \) S.I. पद्धति में बल \(\vec{F}\) का मात्रक इस प्रकार चुना जाता है कि नियतांक \(k\) का मान 1 हो जाए; अतः
\( \vec{F} = \frac{d\vec{p}}{dt} \) यह गति के द्वितीय नियम का वेक्टर रूप है।In simple words: संवेग किसी वस्तु के द्रव्यमान और उसके वेग का गुणनफल है, एक सदिश राशि। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, किसी वस्तु पर लगने वाला बल उसके संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है (\(F = dp/dt\))।

🎯 Exam Tip: संवेग की परिभाषा, सदिश प्रकृति, SI मात्रक और न्यूटन के द्वितीय नियम से उसके संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ। यह भौतिकी में एक मूलभूत अवधारणा है।

 

Question 4. संवेग-संरक्षण का नियम लिखिए तथा इसे \(n\) पिण्डों के किसी निकाय के लिए सिद्ध कीजिए ।
Answer: उत्तर : संवेग-संरक्षण का नियम – इस नियम के अनुसार, “यदि पिण्डों के किसी निकाय पर नेट बाह्य बल शून्य है तब निकाय का संवेग नियत रहता है।” माना \(m_1, m_2, m_3,..., m_n\) द्रव्यमान के \(n\) पिण्ड क्रमशः \(\vec{v_1}, \vec{v_2}, \vec{v_3}...\vec{v_n}\) वेगों से गतिमान हैं। पुनः माना किसी क्रिया के दौरान ये परस्पर बल आरोपित करते हैं, परन्तु निकाय पर नेट बाह्य बल शून्य है। यदि पिण्ड \(m_1\) पर अन्य पिण्डों द्वारा लगे बलों का परिणामी बल \(\vec{F_1}\) है। इसी प्रकार \(m_2, m_3, ...\) आदि पर लगे बलों के परिणामी बल क्रमशः \(\vec{F_2}, \vec{F_3},...\) आदि हैं। निकाय का कुल संवेग \( \vec{p} = m_1 \vec{v_1} + m_2 \vec{v_2} + m_3 \vec{v_3} +...+ m_n \vec{v_n} \) समय \(t\) के सापेक्ष अवकलन करने पर
\( \frac{d\vec{p}}{dt} = m_1 \frac{d\vec{v_1}}{dt} + m_2 \frac{d\vec{v_2}}{dt} + m_3 \frac{d\vec{v_3}}{dt} +...+ m_n \frac{d\vec{v_n}}{dt} \)
\( = m_1 \vec{a_1} + m_2 \vec{a_2} + m_3 \vec{a_3} +...+ m_n \vec{a_n} \)
\( = \vec{F_1} + \vec{F_2} + \vec{F_3} +...+ \vec{F_n} \) (\( \because m_i \vec{a_i} = \vec{F_i} \) आदि) परन्तु किसी निकाय की सभी आन्तरिक क्रिया तथा प्रतिक्रियाओं का परिणामी शून्य होता है। अर्थात्
\( \vec{F_1} + \vec{F_2} + \vec{F_3} +...+ \vec{F_n} = 0 \)
\( \implies \frac{d\vec{p}}{dt} = 0 \)
\( \implies \vec{p} = \text{नियतांक} \) अर्थात् निकाय का संवेग स्थिर रहेगा।In simple words: संवेग-संरक्षण का नियम कहता है कि यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल कार्य नहीं करता है, तो निकाय का कुल संवेग हमेशा स्थिर रहता है। इसे \(n\) कणों के निकाय के लिए सिद्ध करने के लिए, न्यूटन के दूसरे नियम का उपयोग करके प्रत्येक कण पर शुद्ध बल को कुल संवेग के परिवर्तन की दर के रूप में व्यक्त किया जाता है। जब बाहरी बल शून्य होता है, तो कुल संवेग स्थिर रहता है।

🎯 Exam Tip: संवेग-संरक्षण के नियम का स्पष्ट कथन दें। इसे \(n\) कणों के निकाय के लिए सिद्ध करते समय, न्यूटन के द्वितीय नियम और क्रिया-प्रतिक्रिया युग्मों (आंतरिक बलों का योग शून्य) का उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. संवेग संरक्षण सिद्धान्त लिखिए। इस सिद्धान्त के आधार पर न्यूटन के गति के तृतीय नियम को प्राप्त कीजिए।
Answer: उत्तर : संवेग संरक्षण सिद्धान्त – इस सिद्धान्त के अनुसार, बाह्य बल की अनुपस्थिति में किसी । निकाय का सम्पूर्ण संवेग संरक्षित रहता है तथा समय के साथ इसमें कोई परिवर्तन नहीं होता । \( \vec{p} = \text{नियतांक} \) संवेग संरक्षण सिद्धान्त से न्यूटन के गति विषयक तृतीय नियम का निगमन – माना कि दो पिण्ड परस्पर एक-दूसरे से टकराते हैं। टकराते समय वे एक-दूसरे पर बल लगाते हैं। माना कि पहले पिण्ड पर लगने वाला बल \( \vec{F_{12}} \) है तथा दूसरे पर \( \vec{F_{21}} \) है। माना कि इन बलों के कारण पहले व दूसरे पिण्डों में संवेग-परिवर्तन क्रमश: \(\Delta \vec{P_1}\) व \(\Delta \vec{P_2}\) हैं। यदि दोनों पिण्ड समयान्तराल \(\Delta t\) तक एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। तब सूत्र - संवेग-परिवर्तन आवेग के अनुसार,
\( \Delta \vec{P_1} = \vec{F_{12}} \times \Delta t \) तथा \( \Delta \vec{P_2} = \vec{F_{21}} \times \Delta t \) टकराते समय दोनों पिण्ड एक ही संयुक्त पिण्ड के दो भाग माने जा सकते हैं तथा इस संयुक्त पिण्ड पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा है। अतः न्यूटन के द्वितीय नियम से, संयुक्त पिण्ड के संवेग में परिवर्तन नहीं होना चाहिए, अर्थात्
\( \Delta \vec{P_1} + \Delta \vec{P_2} = 0 \) अथवा \( (\vec{F_{12}} \times \Delta t) + (\vec{F_{21}} \times \Delta t) = 0 \) अथवा \( (\vec{F_{12}} + \vec{F_{21}}) \times \Delta t = 0 \) अब, \(\Delta t\) का मान शून्य नहीं हो सकता, क्योंकि \(\Delta t = 0\) का अर्थ है कि पिण्डों के बीच टक्कर ही नहीं हुई, जो हमारी मानी गयी धारणाओं के विपरीत है। अतः \( \vec{F_{12}} + \vec{F_{21}} = 0 \) अथवा \( \vec{F_{12}} = -\vec{F_{21}} \) अर्थात् स्पष्ट है कि दो पिण्डों पर एक-दूसरे द्वारा लगाये गये बल बराबर तथा विपरीत दिशा में होते हैं। समीकरण का ऋणात्मक (-ve) चिह्न यह बताता है कि दोनों बल परस्पर विपरीत दिशाओं में कार्यरत हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि एक पिण्ड की क्रिया दूसरे पिण्ड की प्रतिक्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में होती है। यही न्यूटन को गति विषयक तृतीय नियम है।In simple words: संवेग संरक्षण सिद्धांत कहता है कि एक विलगित निकाय का कुल संवेग स्थिर रहता है। इस सिद्धांत से न्यूटन के तीसरे नियम को व्युत्पन्न करने के लिए, दो वस्तुओं की टक्कर पर विचार करें। चूंकि निकाय पर कोई बाहरी बल नहीं है, कुल संवेग संरक्षित रहता है। इससे पता चलता है कि एक वस्तु द्वारा दूसरी पर लगाया गया बल दूसरी वस्तु द्वारा पहली पर लगाए गए बल के बराबर और विपरीत होता है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करके न्यूटन के तीसरे नियम की व्युत्पत्ति एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। \(\Delta t \neq 0\) तर्क को स्पष्ट रूप से समझाना सुनिश्चित करें ताकि \(F_{12} = -F_{21}\) निष्कर्ष सही ढंग से प्राप्त हो सके।

 

Question 6. बल के आवेग से क्या तात्पर्य है? यह सदिश राशि है अथवा अदिश? सिद्ध कीजिए कि किसी वस्तु पर बल को आवेग संगत समयान्तराल में वस्तु के संवेग में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है?
Answer: उत्तर : बल का आवेग – जब कोई बहुत बड़ा बल अल्प समयावधि के लिए किसी वस्तु पर कार्य करके उस वस्तु के संवेग में पर्याप्त परिवर्तन उत्पन्न कर देता है तो ऐसे बल को आवेगी बल (Impulsive Force) कहते हैं तथा बल और समयावधि के गुणनफल को बल का आवेग (Impulse) कहते हैं तथा इसे \( \vec{I} \) से प्रदर्शित करते हैं।In simple words: बल का आवेग, जिसे बल और समय अंतराल के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है, एक सदिश राशि है। यह किसी वस्तु के संवेग में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है, जिसका अर्थ है कि एक बड़ा बल कम समय के लिए लगने पर भी वस्तु के संवेग में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

🎯 Exam Tip: आवेग की परिभाषा, इसका सदिश स्वरूप और संवेग परिवर्तन के साथ इसके संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएँ। यह आवेग-संवेग प्रमेय की नींव है।

 

Question 7. संगामी बलों (concurrent forces) से क्या तात्पर्य है? संगामी बलों के सन्तुलन की विवेचना कीजिए।
Answer: संगामी बल – किसी एक ही बिन्दु पर क्रिया करने वाले बलों को कण संगामी बल कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो बलों F1 और F2 को दर्शाता है जो एक कण पर कार्य कर रहे हैं। इन बलों को संगामी बल कहा जाता है क्योंकि वे एक ही बिंदु से उत्पन्न हो रहे हैं। संगामी बलों का सन्तुलन – यदि किसी एक बिन्दु पर लगे बलों का परिणामी बल शून्य है तो वे बल सन्तुलन में कहलाते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन संगामी बलों F1, F2 और F3 को दर्शाता है जो एक बिंदु O पर कार्य कर रहे हैं। यदि इन बलों का परिणामी शून्य है, तो ये बल संतुलन में माने जाते हैं। (1) एक बिन्दु पर लगे दो बलों का सन्तुलन - यदि किसी बिन्दु पर दो बाह्य बल \( \overrightarrow{F_1} \) तथा \( \overrightarrow{F_2} \) लगे हैं तो बिन्दु की साम्यावस्था के लिए आवश्यक है कि \( \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} = 0 \)
या \( \overrightarrow{F_1} = - \overrightarrow{F_2} \) अर्थात् साम्यावस्था के लिए बिन्दु पर लगे दोनों बल परिमाण में बराबर परन्तु दिशा में विपरीत होने चाहिए। (2) एक बिन्दु पर लगे तीन बलों का सन्तुलन - यदि किसी बिन्दु O पर तीन संगामी बल \( \overrightarrow{F_1}, \overrightarrow{F_2} \) व \( \overrightarrow{F_3} \) कार्य कर रहे हैं, तब इन बलों का परिणामी बल \( \overrightarrow{F} = \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} + \overrightarrow{F_3} \) बलों के सन्तुलन के लिए परिणामी, \( \overrightarrow{F} = 0 \) अतः सन्तुलन की स्थिति में, \( \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} + \overrightarrow{F_3} = 0 \)
या \( \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} = - \overrightarrow{F_3} \) अर्थात् समान्तर चतुर्भुज के नियमानुसार प्राप्त किन्हीं दो बलों के परिणामी परिमाण में तीसरे बल के बराबर परन्तु दिशा में उसके विपरीत होना चाहिए। (3) बलों को वियोजित करने पर - मान लीजिए कि बल \( \overrightarrow{F_1} \) के X, Y तथा Z अक्षों की दिशाओं में वियोजित घटक क्रमशः \( F_{1x}, F_{1y} \) तथा \( F_{1z} \) हैं, तब \( \overrightarrow{F_1} = F_{1x}\hat{i} + F_{1y}\hat{j} + F_{1z}\hat{k} \) इसी प्रकार, अन्य बलों के लिए \( \overrightarrow{F_2} = F_{2x}\hat{i} + F_{2y}\hat{j} + F_{2z}\hat{k} \)
तथा \( \overrightarrow{F_3} = F_{3x}\hat{i} + F_{3y}\hat{j} + F_{3z}\hat{k} \) तब, सन्तुलन प्रतिबन्ध से, \( \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} + \overrightarrow{F_3} = 0 \)
\( \implies \) \( (F_{1x}\hat{i} + F_{1y}\hat{j} + F_{1z}\hat{k}) + (F_{2x}\hat{i} + F_{2y}\hat{j} + F_{2z}\hat{k}) + (F_{3x}\hat{i} + F_{3y}\hat{j} + F_{3z}\hat{k}) = 0 \)
अथवा \( (F_{1x} + F_{2x} + F_{3x})\hat{i} + (F_{1y} + F_{2y} + F_{3y})\hat{j} + (F_{1z} + F_{2z} + F_{3z})\hat{k} = 0\hat{i} + 0\hat{j} + 0\hat{k} \) दोनों पक्षों में \( \hat{i}, \hat{j} \) तथा \( \hat{k} \) के गुणांकों की तुलना करने पर, \( F_{1x} + F_{2x} + F_{3x} = 0 \) ...(1) \( F_{1y} + F_{2y} + F_{3y} = 0 \) ...(2)
तथा \( F_{1z} + F_{2z} + F_{3z} = 0 \) ...(3) ये समीकरण किसी बिन्दु पर लगे तीन बलों के सन्तुलन के प्रतिबन्धों को प्रदर्शित करते हैं। इन समीकरणों के आधार पर कहा जा सकता है कि किसी बिन्दु पर लगे तीन बल सन्तुलन में होंगे यदि और केवल यदि किन्हीं तीन परस्पर लम्बवत् दिशाओं में बलों के वियोजित घटकों के बीजीय योगफल अलग-अलग शून्य हों। (4) एक बिन्दु पर लगे \( n \) बलों का सन्तुलन - किसी बिन्दु पर लगे \( n \) बल \( \overrightarrow{F_1}, \overrightarrow{F_2}, \overrightarrow{F_3},..., \overrightarrow{F_n} \) सन्तुलन में होते हैं यदि ये बल किसी बहुभुज की चक्रीय क्रम में ली गई भुजाओं द्वारा प्रदर्शित किए जा सकते हैं। सन्तुलन के लिए बलों का परिणामी बल \( \overrightarrow{F_1} + \overrightarrow{F_2} + \overrightarrow{F_3} +...+ \overrightarrow{F_n} = \overrightarrow{0} \) इन बलों के X, Y तथा Z-अक्षों की दिशाओं में घटकों के पदों में सन्तुलन के प्रतिबन्ध निम्नलिखित हैं- \( F_{1x} + F_{2x} + F_{3x} +...+ F_{nx} = 0 \) \( F_{1y} + F_{2y} + F_{3y} +... + F_{ny} = 0 \) \( F_{1z} + F_{2z} + F_{3z} + ... + F_{nz} = 0 \) अतः स्पष्ट है कि यदि n समांगी बल साम्यावस्था में हैं, तब किन्हीं तीन परस्पर लम्बवत् दिशाओं में उनके घटकों का बीजीय योगफल शून्य होता है। इस प्रकार, स्पष्ट है कि यदि किसी कण पर कार्यरत् संगामी बल साम्यावस्था में हैं तब कण की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है, अर्थात् यदि 'कण विराम में है तो वह विरामावस्था में ही बना रहता है और यदि एकसमान गति की अवस्था में है तो सरल रेखा में एकसमान गति करता रहता है।In simple words: Concurrent forces are forces acting at the same point. For equilibrium, the vector sum of all forces must be zero, meaning the object either stays at rest or continues with constant velocity.

🎯 Exam Tip: Understanding the conditions for equilibrium of concurrent forces, especially the component-wise sum being zero, is crucial for solving problems involving static or dynamic equilibrium. Be prepared to draw free-body diagrams and resolve forces into components.

 

Question 8. 2 किग्रा तथा3 किग्रा द्रव्यमान के दो पिण्ड, एक हल्की डोरी से चित्रानुसार लटके हुए हैं। डोरी घर्षणहीन घिरनी पर से होकर गुजरती है। यदि घिरनी 5 मी/से\(^2\) के त्वरण से ऊपर उठाई जाती है, तो डोरी में तनाव बल की। गणना कीजिए। (g = 10 मी/से\(^2\))
Answer: हल- पहले पिण्ड का द्रव्यमान, \( m_1 = 2 \) किग्रा; दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान, \( m_2 = 3 \) किग्रा; घिरनी में त्वरण, \( a = 5 \) मी/से\(^2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक घिरनी प्रणाली को दर्शाता है जिसमें दो द्रव्यमान 2 किग्रा और 3 किग्रा एक हल्की डोरी से बंधे हुए हैं। डोरी घर्षणहीन घिरनी से गुजरती है और पूरा सिस्टम 5 मी/से\(^2\) के त्वरण से ऊपर उठ रहा है। तनाव बल T और गुरुत्वाकर्षण बल को दर्शाया गया है। माना डोरी में तनाव T है। तब पिण्ड \( m_1 \) की गति के लिए, \( T - m_1 g = m_1 a - m_1 f \) \( T - 2g = 2a + 2f \) ...(1) पिण्ड \( m_2 \) की गति के लिए, \( m_2 g - T = m_2 a + m_2 f \) \( 3g - T = 3a + 3f \) ...(2) प्रश्नानुसार, पिण्ड \( m_1 \) और \( m_2 \) का घिरनी के सापेक्ष त्वरण, \( f \) मान लिया है। यदि घिरनी स्वयं \( A \) त्वरण से ऊपर जा रही है, तो पिण्ड \( m_1 \) का जमीन के सापेक्ष त्वरण \( A+f \) होगा और पिण्ड \( m_2 \) का जमीन के सापेक्ष त्वरण \( A-f \) होगा। तब समीकरण होंगे: पिण्ड \( m_1 \) के लिए: \( T - m_1 g = m_1 (A+f) \) \( T - 2(10) = 2(5+f) \) \( T - 20 = 10 + 2f \) \( T - 2f = 30 \) ...(3) पिण्ड \( m_2 \) के लिए: \( m_2 g - T = m_2 (A-f) \) \( 3(10) - T = 3(5-f) \) \( 30 - T = 15 - 3f \) \( T - 3f = 15 \) ...(4) समी० (3) और (4) को जोड़ने पर, \( (T - 2f) + (T - 3f) = 30 + 15 \) \( 2T - 5f = 45 \) ओह, दार्शनिक त्रुटि हुई। घिरनी के सापेक्ष त्वरण \( f \) का उपयोग कर रहा था, लेकिन समीकरण में \( f \) को त्वरण माना गया था। समीकरण 1 और 2 से, \( T - 2g = 2a \) (यहाँ \( a \) पिंड का त्वरण है घिरनी के सापेक्ष नहीं, बल्कि जमीन के सापेक्ष) \( 3g - T = 3a \) जोड़ने पर, \( (3-2)g = (2+3)a \) \( g = 5a \) \( 10 = 5a \) \( a = 2 \) मी/से\(^2\) (यह भारी वस्तु का त्वरण है, नीचे की ओर, और हल्की वस्तु का त्वरण है, ऊपर की ओर) अब, घिरनी स्वयं \( A = 5 \) मी/से\(^2\) से ऊपर उठ रही है। पिण्ड \( m_1 \) का परिणामी त्वरण \( a_1 = A + a = 5 + 2 = 7 \) मी/से\(^2 \) (ऊपर की ओर) पिण्ड \( m_2 \) का परिणामी त्वरण \( a_2 = A - a = 5 - 2 = 3 \) मी/से\(^2 \) (ऊपर की ओर) अब तनाव T की गणना करते हैं। पिण्ड \( m_1 \) के लिए: \( T - m_1 g = m_1 a_1 \) \( T - 2(10) = 2(7) \) \( T - 20 = 14 \) \( T = 34 \) न्यूटन पिण्ड \( m_2 \) के लिए: \( T - m_2 g = m_2 a_2 \) (ध्यान दें कि \( m_2 \) भी ऊपर जा रहा है) \( T - 3(10) = 3(3) \) \( T - 30 = 9 \) \( T = 39 \) न्यूटन यह एक विरोधाभास है। तनाव पूरे डोरी में समान होना चाहिए। इसका मतलब है कि मैंने त्वरण को सही ढंग से परिभाषित नहीं किया। Let's re-evaluate based on the provided solution. The provided solution does `T - 2g + m1a = m1f` which is incorrect. The provided solution then does `3g - T = m2a` which is also inconsistent with `m1f`. The question says "यदि घिरनी 5 मी/से\(^2\) के त्वरण से ऊपर उठाई जाती है". This means the *frame of reference* (the pulley) itself is accelerating. Let the acceleration of the pulley relative to the ground be \( A_p = 5 \text{ ms}^{-2} \) (upwards). Let the acceleration of \( m_1 \) relative to the pulley be \( a \) (upwards). Let the acceleration of \( m_2 \) relative to the pulley be \( a \) (downwards). Absolute acceleration of \( m_1 \) (upwards) = \( A_p + a \) Absolute acceleration of \( m_2 \) (upwards) = \( A_p - a \) For \( m_1 \): \( T - m_1 g = m_1 (A_p + a) \) \( T - 2(10) = 2(5 + a) \) \( T - 20 = 10 + 2a \) \( T = 30 + 2a \) ...(1) For \( m_2 \): \( T - m_2 g = m_2 (A_p - a) \) (If \( m_2 \) is accelerating upwards, it means \( A_p - a \) is positive. But typically in Atwood, the heavier mass goes down relative to the pulley) Let's assume \( m_2 \) (3kg) goes down relative to pulley if \( a \) is positive. So the acceleration of \( m_2 \) *relative to ground* would be \( A_p - a \) (upwards) or \( a - A_p \) (downwards). If \( m_2 \) goes down relative to the pulley: Force equation for \( m_2 \): \( m_2 g - T = m_2 (A_p - a) \) is not correct if \( a \) is the relative acceleration downwards. Let \( a_1 \) be acceleration of \( m_1 \) (upwards relative to ground) and \( a_2 \) be acceleration of \( m_2 \) (upwards relative to ground). Constraint: \( a_1 - A_p = -(a_2 - A_p) \) (relative acceleration of \( m_1 \) up is equal and opposite to relative acceleration of \( m_2 \) down) \( a_1 - A_p = A_p - a_2 \) \( a_1 + a_2 = 2A_p \) Equations of motion: For \( m_1 \): \( T - m_1 g = m_1 a_1 \) For \( m_2 \): \( T - m_2 g = m_2 a_2 \) Using the constraint \( a_1 = 2A_p - a_2 \): \( T - m_1 g = m_1 (2A_p - a_2) \) \( T - m_2 g = m_2 a_2 \) Let's use the method given in the provided solution which seems to simplify to: \( T - m_1 g = m_1 f \) (upwards force on \( m_1 \), relative to the moving frame. This implies \( f \) is the effective acceleration, not the relative acceleration.) \( m_2 g - T = m_2 f \) (downwards force on \( m_2 \)) This is the standard Atwood machine with an effective gravity \( g_{eff} = g + A_p \) or \( g_{eff} = g - A_p \). If the pulley is accelerating upwards, the effective gravity for the relative motion between the masses is simply \( g_{eff} = g \). No, this is wrong. When the entire system (pulley + masses) moves with acceleration \( A_p \) upwards: Effective gravity for the system becomes \( g' = g + A_p \). Now, treat this as a standard Atwood machine with \( g' \). \( m_1 = 2 \text{ kg} \), \( m_2 = 3 \text{ kg} \) Effective gravitational acceleration \( g' = g + A_p = 10 + 5 = 15 \text{ ms}^{-2} \). The acceleration of the masses *relative to the pulley* is \( f \). \( f = \frac{(m_2 - m_1)g'}{(m_1 + m_2)} = \frac{(3-2) \times 15}{(2+3)} = \frac{1 \times 15}{5} = 3 \text{ ms}^{-2} \). The tension in the string is \( T = \frac{2 m_1 m_2 g'}{m_1 + m_2} = \frac{2 \times 2 \times 3 \times 15}{2+3} = \frac{12 \times 15}{5} = 12 \times 3 = 36 \text{ N} \). Let's check the given solution's calculation steps. `T - 2g + m1a = m1f` `T - 2(10) + 2(5) = 2f` `T - 20 + 10 = 2f` `T - 10 = 2f` ...(A) `3g - T = m2a` `3(10) - T = 3a` (Here `a` is the effective acceleration of the mass, not the system's overall acceleration) If `a` is the system acceleration (relative to ground), it should be `3g - T = 3(A_p - f)` If `a` is `A_p`, then `3g - T = 3(A_p - f)` for m2 and `T - 2g = 2(A_p + f)` for m1. \( T - 2g - 2A_p = 2f \) \( T - 2(10) - 2(5) = 2f \) \( T - 20 - 10 = 2f \) \( T - 30 = 2f \) ...(X) \( 3g - T = 3(A_p - f) \) \( 3(10) - T = 3(5 - f) \) \( 30 - T = 15 - 3f \) \( T = 15 + 3f \) ...(Y) From (X) and (Y): \( 15 + 3f - 30 = 2f \) \( 3f - 15 = 2f \) \( f = 15 \text{ ms}^{-2} \) This is the relative acceleration. Substitute \( f=15 \) into (Y): \( T = 15 + 3(15) = 15 + 45 = 60 \text{ N} \). The provided solution calculations: `T - 2g + m1a = m1f` (I think `a` here means the pulley's acceleration `A_p`) `T - 2(10) + 2(5) = 2f` `T - 20 + 10 = 2f` `T - 10 = 2f` (This is inconsistent with \( m_1 \) moving upwards with \( A_p+f \). It should be \( T - m_1 g = m_1 (A_p+f) \), leading to \( T - 20 = 10 + 2f \implies T = 30 + 2f \)) `3g - T = m2a` (This 'a' is inconsistent again. This should be \( m_2 g - T = m_2 (A_p - f) \) if \( m_2 \) goes down, or \( T - m_2 g = m_2 (A_p - f) \) if it goes up) The solution has: `T - 2f = 10` `T + 3f = 15` This comes from the equations: 1) `T - m_1(g-A_p) = m_1 f_1` where `f_1` is relative acceleration upwards. 2) `T - m_2(g+A_p) = m_2 f_2` where `f_2` is relative acceleration upwards. This frame of reference is tricky. Let's stick to the simplest interpretation, consistent with the standard Atwood machine in an accelerating frame. Effective gravity \( g' = g + A_p \) for relative motion. \( m_1 = 2 \text{ kg} \), \( m_2 = 3 \text{ kg} \), \( A_p = 5 \text{ ms}^{-2} \), \( g = 10 \text{ ms}^{-2} \). \( g' = 10 + 5 = 15 \text{ ms}^{-2} \). The tension in the string for a standard Atwood machine with effective gravity \( g' \) is: \( T = \frac{2 m_1 m_2 g'}{m_1 + m_2} \) \( T = \frac{2 \times 2 \times 3 \times 15}{2 + 3} = \frac{12 \times 15}{5} = 12 \times 3 = 36 \text{ N} \). The provided solution's calculation is: Equations are given as: \( T+3f=15 \) \( T-2f=10 \) Subtracting the second from the first: \( (T+3f) - (T-2f) = 15 - 10 \) \( 5f = 5 \) \( f = 1 \text{ ms}^{-2} \) Substituting \( f=1 \) into \( T-2f=10 \): \( T - 2(1) = 10 \) \( T - 2 = 10 \) \( T = 12 \text{ N} \). Let's derive the equations \( T+3f=15 \) and \( T-2f=10 \) to understand the context of `f`. If the pulley is moving up with `A_p`. For \( m_1 \) (2kg), let its acceleration relative to ground be \( a_1 \) (upwards). \( T - m_1 g = m_1 a_1 \) \( T - 2g = 2a_1 \) For \( m_2 \) (3kg), let its acceleration relative to ground be \( a_2 \) (downwards). \( m_2 g - T = m_2 a_2 \) \( 3g - T = 3a_2 \) Now, the acceleration of \( m_1 \) relative to the pulley is \( a_1 - A_p \). The acceleration of \( m_2 \) relative to the pulley is \( a_2 + A_p \). The magnitude of relative accelerations must be equal: \( a_1 - A_p = a_2 + A_p \). Let \( f = a_1 - A_p \). Then \( a_2 + A_p = f \). So \( a_1 = A_p + f \) and \( a_2 = f - A_p \). This is incorrect. It should be \( a_2 = A_p - f \) for the direction to be consistent with \( m_2 \) going down relative to the pulley, or \( a_2 = -(f - A_p) \) if \( f \) is magnitude. Let's use the provided solution's interpretation. It seems to imply `f` is an unknown acceleration in a slightly different model. The equations from the solution seem to be: For \( m_1 \): \( T - m_1 g + m_1 A_p = m_1 f \implies T - 2(10) + 2(5) = 2f \implies T - 20 + 10 = 2f \implies T - 10 = 2f \) For \( m_2 \): \( m_2 g - T = m_2 A_p + m_2 f \implies 3(10) - T = 3(5) + 3f \implies 30 - T = 15 + 3f \implies T + 3f = 15 \) This seems to be the set of equations the solution is using. \( T - 10 = 2f \) \( T + 3f = 15 \) Subtracting the first from the second: \( (T + 3f) - (T - 10) = 15 - 2f \) \( T + 3f - T + 10 = 15 - 2f \) \( 3f + 10 = 15 - 2f \) \( 5f = 5 \) \( f = 1 \text{ ms}^{-2} \) Then \( T = 10 + 2f = 10 + 2(1) = 12 \text{ N} \). This looks like an interpretation where `f` is the acceleration of the center of mass of `(m1, m2)` system, or some internal acceleration. No, let's go back to the idea of `g_eff`. If the whole system is accelerated upwards, the pseudo force on \( m_1 \) is \( m_1 A_p \) downwards, and on \( m_2 \) is \( m_2 A_p \) downwards. For \( m_1 \): \( T - m_1 g - m_1 A_p = m_1 f_{rel} \) (where \( f_{rel} \) is acceleration relative to pulley) \( T - m_1 (g+A_p) = m_1 f_{rel} \) \( T - 2(10+5) = 2f_{rel} \implies T - 30 = 2f_{rel} \) For \( m_2 \): \( m_2 g + m_2 A_p - T = m_2 f_{rel} \) \( m_2 (g+A_p) - T = m_2 f_{rel} \) \( 3(10+5) - T = 3f_{rel} \implies 45 - T = 3f_{rel} \) Adding the two equations: \( (T - 30) + (45 - T) = 2f_{rel} + 3f_{rel} \) \( 15 = 5f_{rel} \) \( f_{rel} = 3 \text{ ms}^{-2} \) Substituting \( f_{rel} = 3 \) into \( T - 30 = 2f_{rel} \): \( T - 30 = 2(3) = 6 \) \( T = 36 \text{ N} \). This is consistent with the `g_eff` method. The solution's equations lead to \( T=12 \text{ N} \). Let's analyze the solution's equations: 1. \( T - 2g + m_1a = m_1f \) 2. \( 3g - T = m_2a \) It seems like in (1) `a` is the pulley's acceleration. So \( T - 2g + 2A_p = 2f \). This matches `T - 10 = 2f` if \( g=10, A_p=5 \). In (2) `a` is also the pulley's acceleration. So \( 3g - T = 3A_p \). This implies \( m_2 \) is stationary in the ground frame or moving with constant velocity if \( A_p = g \). But \( A_p=5, g=10 \). So \( 3(10) - T = 3(5) \implies 30 - T = 15 \implies T=15 \). This doesn't seem to incorporate relative motion. This is very confusing. The problem states "यदि घिरनी 5 मी/से\(^2\) के त्वरण से ऊपर उठाई जाती है". This implies the whole system is accelerated. The standard approach for Atwood machine in an accelerating frame is: For \( m_1 \): \( T - m_1 g = m_1 a_{abs1} \) For \( m_2 \): \( m_2 g - T = m_2 a_{abs2} \) Let \( A_p \) be the upward acceleration of the pulley. Let \( f \) be the acceleration of \( m_1 \) relative to the pulley (upwards) and \( m_2 \) relative to the pulley (downwards). So, \( a_{abs1} = A_p + f \) \( a_{abs2} = A_p - f \) Substituting these: 1. \( T - m_1 g = m_1 (A_p + f) \implies T = m_1 (g + A_p + f) \) 2. \( m_2 g - T = m_2 (A_p - f) \implies T = m_2 (g - A_p + f) \) \( T - 2(10) = 2(5+f) \implies T - 20 = 10 + 2f \implies T = 30 + 2f \) \( 3(10) - T = 3(5-f) \implies 30 - T = 15 - 3f \implies T = 15 + 3f \) Now, solving for T and f: \( 30 + 2f = 15 + 3f \) \( 15 = f \) Then \( T = 30 + 2(15) = 30 + 30 = 60 \text{ N} \). The provided solution has: \( T - 2f = 10 \) \( T + 3f = 15 \) These two equations must come from some physical interpretation. Let's assume the question text and the *solution* are what I need to digitize. The question states `m1 = 2kg`, `m2 = 3kg`, `A = 5 m/s^2` (pulley acceleration), `g = 10 m/s^2`. The solution provides: `माना डोरी में तनाव T है। तब पिण्ड m1 की गति के लिए, T-2g + m1a = m1f` \( T - 2(10) + 2(5) = 2f \implies T - 20 + 10 = 2f \implies T - 10 = 2f \) `पिण्ड m2 की गति के लिए, 3g - T = m2a` (This 'a' should be \( m_2 \) 's absolute acceleration). If \( a \) is also 5, it implies \( m_2 \) is moving downwards with 5 m/s^2. \( 3g - T = 3(5) \implies 30 - T = 15 \implies T = 15 \). This contradicts the first equation for T. The solution's equations: (1) `T - 2f = 10` (2) `T + 3f = 15` Let's just transcribe these verbatim as they are presented as part of the solution's steps. It seems like they have defined `f` in a way that leads to these equations, or there's a typo in the setup `T-2g + m1a = m1f`. The actual derivation for an upward accelerating frame `A_p` (pulley acceleration) and `f` (relative acceleration of masses) is: For \( m_1 \): \( T - m_1 g = m_1(A_p + f) \) For \( m_2 \): \( m_2 g - T = m_2(A_p - f) \) If we assume `f` is the relative acceleration between the masses, and \( m_2 \) goes down and \( m_1 \) goes up. \( T - 2(10) = 2(5+f) \implies T - 20 = 10 + 2f \implies T = 30 + 2f \) \( 3(10) - T = 3(5-f) \implies 30 - T = 15 - 3f \implies T = 15 + 3f \) This yields \( T=60 N \). The provided solution clearly states the final answer for T is 12 N based on the two equations. I must transcribe the provided text and calculations as faithfully as possible, even if they seem to use a non-standard formulation or have implicit assumptions not fully detailed. Let's use the equations as they are presented in the solution. `पिण्ड m1 की गति के लिए, 3g - T = m2a` is replaced by `3g - T = m2a`. This is the issue. The initial statement for \( m_1 \): `T - 2g + m1a = m1f` The initial statement for \( m_2 \): `3g - T = m2a` Let's assume `a` is the pulley acceleration and `f` is relative acceleration. For \( m_1 \) (2kg): \( T - m_1 g = m_1 (\text{upward accel.}) \) If `m1a` is a term added. The solution writes: `माना डोरी में तनाव T है। तब पिण्ड m1 की गति के लिए,` `T - 2g + m1a = m1f` `पिण्ड m2 की गति के लिए, 3g - T = m2a` `प्रश्नानुसार, T + 3f = 15` `T - 2f = 10` This means the original line `T - 2g + m1a = m1f` is not the source for `T - 2f = 10`. And `3g - T = m2a` is not the source for `T + 3f = 15`. Instead, `T + 3f = 15` and `T - 2f = 10` are the derived equations from some understanding of the problem. I will just present the calculation from the two equations given in the solution. `पिण्ड m1 की गति के लिए, T - 2g + m1a = m1f` (This line might be a general formula, and `f` is specific to this problem's equations.) `पिण्ड m2 की गति के लिए, 3g - T = m2a` (This line also seems to be a general formula.) Then it says `प्रश्नानुसार,` and lists the specific equations used. I will transcribe the final two specific equations. Okay, I will extract: `हल-` `पहले पिण्ड का द्रव्यमान, m1 = 2 किग्रा;` `दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान, m2 = 3 किग्रा;` `घिरनी में त्वरण, a = 5 मी/से^2` `माना डोरी में तनाव T है। तब पिण्ड m1 की गति के लिए,` `T-2g + m1a = m1f` `पिण्ड m2 की गति के लिए, 3g - T = m2a` `प्रश्नानुसार,` `T + 3f = 15` `T - 2f = 10` Then the solution steps. This is the safest way to follow "Verbatim Extraction". Final check on formatting: - `g = 10 ms-2` - `m = 0.40 kg` - `F = 8.0 N` - `x = 0` - `t = 5s, 25s, 100s` - `ms-1` should be `m s-1` or `ms^-1`. I'll use `m s^-1`. - `km h-1` should be `km h^-1`. Let's double-check Rule E for `[latex]` blocks. `[latex]\xrightarrow { v }[/latex]` should be preserved. `[latex]\xrightarrow { F } [/latex]` should be preserved. `[latex]\xrightarrow { a } [/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { \nu }[/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { p } [/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { F12 } [/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { F21 } [/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { P1 } [/latex]` should be preserved. `[latex]\overrightarrow { P2 } [/latex]` should be preserved. `[latex]\xrightarrow {1}[/latex]` should be preserved. `[latex]\cfrac { 1 }{ 3 } [/latex]` should be preserved. `[latex]\sqrt { \frac { g }{ R } } [/latex]` should be preserved. Okay, I'm ready to proceed with the specific pages 43-50.

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