UP Board Solutions Class 11 Physics Chapter 3 Motion in a Straight Line

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Detailed Chapter 3 सीधी रेखा में गति UP Board Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 3 सीधी रेखा में गति UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 11 Physics Chapter 3 Motion in a Straight Line (सरल रेखा में गति)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

Question 1. नीचे दिए गए गति के कौन-से उदाहरणों में वस्तु को लगभग बिन्दु वस्तु माना जा सकता है
(a) दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोई रेलगाड़ी।
(b) किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ति के ऊपर बैठा कोई बन्दर ।
(c) जमीन से टकराकर तेजी से मुड़ने वाली क्रिकेट की कोई फिरकती गेंद ।
(d) किसी मेज के किनारे से फिसलकर गिरा कोई बीकर।
Answer:
(a) रेलगाड़ी दो स्टेशनों के बीच बिना झटके के चल रही है; अतः दोनों स्टेशनों के बीच की दूरी को रेलगाड़ी की लम्बाई की तुलना में अधिक माना जा सकता है। इसलिए रेलगाड़ी को बिन्दु वस्तु माना जाएगा।
(b) चूंकि बन्दर द्वारा यथोचित समय में तय की गई दूरी अधिक है; अतः बन्दर को बिन्दु वस्तु माना जाएगा।
(c) चूंकि गेंद का मुडना सरल नहीं है; अतः यथोचित समय में गेंद द्वारा तय की गई दूरी अधिक नहीं है। इसलिए गेंद को बिन्दु वस्तु नहीं माना जा सकत
(d) चूंकि बीकर मेज के किनारे से फिसलकर गिरता है; अतः यथोचित समय में इसके द्वारा तय की गई दूरी अधिक नहीं है। इसलिए इसे बिन्दु वस्तु नहीं माना जा सकता।
In simple words: एक वस्तु को बिन्दु वस्तु तब माना जा सकता है जब वह अपने आकार की तुलना में बहुत अधिक दूरी तय करती हो या उसकी गति जटिल न हो। इस प्रश्न में रेलगाड़ी और बन्दर अपनी गति के दौरान बिन्दु वस्तु के रूप में व्यवहार करते हैं।

🎯 Exam Tip: बिन्दु वस्तु की अवधारणा सापेक्ष होती है और यह वस्तु के आकार तथा उसकी गति के विश्लेषण की आवश्यकता पर निर्भर करती है।

 

Question 2. दो बच्चे A व B अपने विद्यालय से लौटकर अपने-अपने घर मे क्रमशः P तथा २ को जा रहे हैं। उनके स्थिति-समय (x-t) + ग्राफ चित्र-3.1 (a) में दिखाए गए हैं। नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रविष्टियों को चुनिए
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ दो बच्चों A और B की स्थिति (X-अक्ष पर) को समय (t-अक्ष पर) के सापेक्ष दर्शाता है। दोनों ग्राफ मूल बिंदु (विद्यालय) से शुरू होते हैं और क्रमशः P तथा Q घरों की ओर बढ़ते हुए दर्शाए गए हैं। ग्राफ A और B एक दूसरे को काटते हैं, जो किसी निश्चित समय पर उनकी स्थिति का मिलान दर्शाता है।
(a) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से निकट रहता है।
(b) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से पहले चलता है।
(c) B/A की तुलना में A/B तेज चलता है।
(d) A और B घर (एक ही/भिन्न) समय पर पहुँचते हैं।
(e) A/B सड़क पर B/A से (एक बार/दो बार) आगे हो जाते हैं।
Answer:
(a) B की तुलना में A विद्यालय से निकट रहता है, क्योंकि B अधिक दूरी तय करता है [OP< OQ]
(b) B की तुलना में A विद्यालय से पहले चलता है, क्योंकि A के लिए गति प्रारम्भ का समय t = 0 है परन्तु B के गति प्रारम्भ के लिए समय हैं का निश्चित धनात्मक मान है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ दो बच्चों A और B की स्थिति (X-अक्ष पर) को समय (t-अक्ष पर) के सापेक्ष दर्शाता है, जिसमें बच्चा B, A की तुलना में अधिक ढलान (गति) दर्शाता है और एक बिंदु X पर A को पार करता है।
(c) A की तुलना में B तेज चलता है, क्योकि B के ग्राफ का ढाल A के ग्राफ के ढाल से अधिक है।
(d) A और B घर भिन्न समय पर पहुँचते हैं।
(e) B सड़क और A से एक बार आगे हो जाता है (प्रतिच्छेद बिन्दु X के बाद) ।
In simple words: स्थिति-समय ग्राफ का विश्लेषण करके हम बच्चों की गति, उनकी विद्यालय से दूरी, कौन पहले चलता है, किसकी चाल अधिक है और वे कब एक-दूसरे को पार करते हैं, यह सब निर्धारित कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: x-t ग्राफ में ढलान वेग को दर्शाता है, और ग्राफ पर उच्चतर ढलान का मतलब अधिक वेग होता है। दो ग्राफों का प्रतिच्छेद बिंदु दर्शाता है कि उस समय और स्थिति पर दोनों वस्तुएँ मिलती हैं।

 

Question 3. एक महिला अपने घर से प्रातः 9.00 बजे 2.5 km दूर अपने कार्यालय के लिए सीधी सड़क पर 5 kmh-1 चाल से चलती है। वहाँ वह सायं 5.00 बजे तक रहती है और 25 kmh-1 की चाल से चल रही किसी ऑटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है। उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का x-t ग्राफ खीचिए।
Answer:
महिला द्वारा घर से कार्यालय तक पहुँचने में लिया गया समय,
\(t_1 = \frac{दूरी}{चाल} = \frac{2.5 किमी}{5.0 किमी/घण्टा} = \frac{1}{2}\) घण्टा = 0.5 घण्टा = 30 मिनट
महिला के कार्यालय पहुँचने का समय = 9.00 + 0.30 = 9.30 प्रातः
कार्यालय में ठहरने का समय = 9.30 प्रातः से 5.00 सायं
महिला द्वारा कार्यालय से घर तक वापस लौटने में लिया गया समय-
\(t_2 = \frac{दूरी}{ऑटो रिक्शा की चाल} = \frac{2.5 किमी}{25 किमी/घण्टा} = \frac{1}{10}\) घण्टा = 6 मिनट
महिला के घर पहुँचने का समय = 5.06 सायं
पैमाना - X-अक्ष पर : 10 खाने = 1 घण्टा
Y-अक्ष पर : 20 खाने = 1 किमी
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह स्थिति-समय (x-t) ग्राफ एक महिला की गति को दर्शाता है। यह ग्राफ दिखाता है कि महिला 9:00 बजे घर से निकलती है, 9:30 बजे कार्यालय पहुँचती है (2.5 किमी दूर), शाम 5:00 बजे तक कार्यालय में रहती है, और फिर 5:06 बजे घर लौट आती है।
In simple words: महिला पहले 2.5 किमी की दूरी 5 km/h की चाल से तय करती है, फिर 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक कार्यालय में रुकती है, और फिर 25 km/h की चाल से घर लौट आती है, जिससे उसकी कुल यात्रा का स्थिति-समय ग्राफ बनता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में समय की गणना और चाल-समय ग्राफ की प्लॉटिंग करते समय विभिन्न गतियों (पैदल चलना, रुकना, ऑटो रिक्शा) के लिए सही पैमाने और समय-अंतराल का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. कोई शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद फिर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है। उसका हर कदम 1m लम्बा है और 1s समय लगता है। उसकी गति का x-t ग्राफ खीचिए। ग्राफ से तथा किसी अन्य विधि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहाँ से चलना प्रारम्भ करता है वहाँ से 13 m दूर किसी गड्ढे में कितने समय पश्चात गिरता है?
Answer:
ग्राफ (चित्रे 3.3) से स्पष्ट है कि शराबी गति आरम्भ करने के स्थान से 13 किमी दूर गड्ढे में 37 सेकण्ड बाद गिरेगा । (13 मी के संगत ग्राफ से समय-अक्ष पर समय 37 सेकण्ड है।)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह स्थिति-समय (x-t) ग्राफ एक शराबी की ज़िग-ज़ैग गति को दर्शाता है, जहाँ वह 5 कदम आगे (5 मीटर, 5 सेकंड में) बढ़ता है और फिर 3 कदम पीछे (3 मीटर, 3 सेकंड में) आता है, जिससे कुल विस्थापन हर 8 सेकंड में 2 मीटर होता है। ग्राफ में कई बिन्दु दिखाए गए हैं जो समय के साथ उसकी स्थिति को दर्शाते हैं, जैसे (5, 5), (8, 2), (13, 7), (16, 4) इत्यादि, और अंत में (37, 13) पर शराबी गड्ढे में गिर जाता है।
गणना: प्रथम 8 कदम अर्थात् 8 सेकण्ड में शराबी का गत्यारम्भ के स्थान से विस्थापन अर्थात् उसके द्वारा तय नेट दूरी = (5 - 3) मी = 2 मी इस प्रकार अगले 8 कदम तक (16 कदमों में) अर्थात् 16 सेकण्ड में नेट दूरी = (2+ 2) मी = 4 मी 24 कदमों में अर्थात् 24 सेकण्ड में नेट दूरी = (2+2+ 2) मी = 6 मी 32 कदमों में अर्थात् 32 सेकण्ड में नेट दूरी । = (2+2+ 2 + 2) मी = 8 मी 37 कदमों में अर्थात् 37 सेकण्ड में नेट दूरी = 8 मी + 5 मी = 13 मी अतः गत्यारम्भ के स्थान से 13 मी दूर स्थित गड्ढे में गिरने में शराबी द्वारा लिया गया समय = 37 कदमों का समय = 37 सेकण्ड
In simple words: शराबी 5 कदम आगे और 3 कदम पीछे चलता है, जिससे हर 8 सेकंड में 2 मीटर का शुद्ध विस्थापन होता है। 13 मीटर दूर गड्ढे तक पहुँचने के लिए उसे कुल 37 सेकंड लगेंगे, क्योंकि वह अंत में 8 मीटर पर पाँच कदम आगे बढ़कर 13 मीटर तक पहुँच जाएगा।

🎯 Exam Tip: x-t ग्राफ की ढलान वेग को दर्शाती है। यदि गति में परिवर्तन (त्वरण) हो, तो ग्राफ वक्रित होगा। जटिल गति वाले प्रश्नों को हल करने के लिए चरणों को क्रमबद्ध रूप से विभाजित करना सबसे प्रभावी तरीका है।

 

Question 5. कोई जेट वायुयान 500 kmh-1 की चाल से चल रहा है और यह जेट वायुयान के सापेक्ष 1500 kmh-1 की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है। जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी?
Answer:
जेट का वेग = \(v_J\) = - 500 km h-1 (प्रेक्षक से दूर)
जेट के सापेक्ष दहन उत्पाद बाहर निकालने का आपेक्षिक वेग = \(v_{eJ}\) = 1500 km h-1
यदि बाहर निकलने वाले उत्पादों का वेग \(v_e\) हो तो \(v_{eJ} = v_e - v_J\)
या
\(v_e = v_{eJ} + v_J\) = 1500+ (- 500) = 1000 km/h
In simple words: जब जेट विमान उड़ रहा होता है और अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है, तो जमीन पर खड़े व्यक्ति को उत्पादों की चाल जेट की चाल और उत्पादों के निष्कासन की आपेक्षिक चाल के योग के बराबर महसूस होगी, बशर्ते वे विपरीत दिशाओं में हों।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक वेग के प्रश्नों में, संदर्भ फ्रेम (जैसे- जमीन पर खड़ा प्रेक्षक या गतिमान वस्तु) को सही ढंग से पहचानना और वेग के चिह्नों (दिशा) का उचित रूप से उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. सीधे राजमार्ग पर कोई कार126 kmh-1 की चाल से चल रही है। इसे 200 m की दूरी पर रोक दिया जाता है। कार के मन्दन को एकसमान मानिए और इसका मान निकालिए। कार को रुकने में कितना समय लगा?
Answer:
कार की प्रारम्भिक चाल, u = 126 किमी/घण्टा
1 किमी/घण्टा = \(\frac{1000 मी}{3600 से}\) = \(\frac{5}{18}\) मी/से
u = 126 x \(\frac{5}{18}\) = 35 मी/से
कार की अन्तिम चाल, v = 0, तय की गई दूरी, s = 200 मीटर
सूत्र \(v^2 = u^2 + 2as\) से,
त्वरण (a) = \(\frac{v^2 - u^2}{2s}\) = \(\frac{0-(35)^2}{2 \times 200}\)
= - 3.06 मी/से\(^2\)
कार का मन्दन = 3.06 मी/से\(^2\)
यदि कार द्वारा लिया गया समय t हो, तो सूत्र
\(v = u + at\) से
\(0 = 35 - 3.06t\)
\( \implies 3.06t = 35\)
\(t = \frac{35}{3.06}\) = 11.4 सेकण्ड
In simple words: एक कार 126 km/h की चाल से चल रही है और 200 m में रुक जाती है। उसके त्वरण (मंदन) की गणना गति के समीकरणों का उपयोग करके की जाती है, और फिर रुकने में लगा समय निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों (v=u+at, s=ut+1/2at^2, v^2=u^2+2as) का प्रयोग करते समय इकाइयों को S.I. पद्धति (मीटर, सेकंड) में बदलना आवश्यक है। मंदन के लिए त्वरण का मान ऋणात्मक होता है।

 

Question 7. दो रेलगाड़ियाँ A व B दो समान्तर पटरियों पर 72 kmh-1 की एकसमान चाल से एक ही दिशा में चल रही हैं। प्रत्येक गाड़ी 400 m लम्बी है और गाड़ी A गाड़ी B से आगे है। B का चालक A से आगे निकलना चाहता है तथा 1 ms-2 से इसे त्वरित करता है। यदि 50s के बाद B को गार्ड A के चालक से आगे हो जाता है तो दोनों के बीच आरम्भिक दूरी कितनी थी?
Answer:
रेलगाड़ियों की प्रारम्भिक तथा अन्तिम स्थितियाँ चित्र 3.4 में दिखायी गयी हैं।
प्रत्येक गाड़ी की प्रारम्भिक चाल \((v_0)\) = 72 किमी/घण्टा = 20 मी/से
A गाड़ी की चाल नियत है तथा B गाड़ी का त्वरण a = 1 मी/से\(^2\)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो रेलगाड़ियों A और B की सापेक्ष गति को दर्शाता है। गाड़ी A आगे है और गाड़ी B उसके पीछे। दोनों एक ही दिशा में चल रही हैं। चित्र में गाड़ियों की लंबाई (400 मीटर), उनके बीच की आरंभिक दूरी (x) और चालक व गार्ड की सापेक्ष स्थिति दिखाई गई है।
चित्र में D ड्राइवर तथा G. गार्ड का संकेत है। t = 50 सेकण्ड में रेलगाड़ी A द्वारा नियत चाल से तय की गयी दूरी
\(S_A = (v_0) \times t\) = 20 × 50 मी = 1000 मी
तथा B द्वारा त्वंरित गति से तय की गयी दूरी
\(S_B = (v_0)xt + \frac{1}{2}at^2\)
= [20 × 50 + \(\frac{1}{2}\) × 1 × (50)\(^2\)] मी = 2250 मी
चित्र में x = प्रारम्भ में गाड़ियों के बीच की दूरी। चित्र से स्पष्ट है कि
\(S_B = x + 400 + S_A + 400\)

\( \implies x = S_B - S_A - 800\)
= (2250 - 1000 - 800) मी = 450 मी
यह प्रारम्भ में A रेलगाड़ी के गार्ड तथा B रेलगाड़ी के ड्राइवर के बीच की दूरी है।
In simple words: रेलगाड़ी A नियत चाल से चलती है जबकि B त्वरित होती है। 50 सेकंड में B, A को पार कर जाती है। दोनों द्वारा तय की गई दूरियों और उनकी लम्बाइयों को ध्यान में रखते हुए, हम उनकी प्रारंभिक दूरी की गणना कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक गति के प्रश्नों में, सभी दूरियों को एक ही संदर्भ बिंदु से मापना और प्रत्येक वस्तु की गति के लिए उचित समीकरणों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करें कि आप प्रारंभिक दूरी, गाड़ियों की लंबाई और तय की गई अतिरिक्त दूरी को ध्यान में रखें।

 

Question 8. दो लेन वाली किसी सड़क पर कार A 36 kmh-1 की चाल से चल रही है। एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में चलती दो कारें B वा C जिनमें से प्रत्येक की चाल 54 kmh-1 है, कार A तक पहुँचना चाहती है। किसी क्षण जब दूरी AB दूरी AC के बराबर है तथा दोनों 1 km हैं, कार B का चालक यह निर्णय करता है कि कार C के कार A तक पहुँचने के पहले ही वह कार A से आगे निकल जाए। किसी दुर्घटना से बचने के लिए कार B का कितना न्यूनतम त्वरण जरूरी है?
Answer:
कार A की चाल = (36 x 5/18) मी/से = 10 मी/से
कार B तथा कार C दोनों की चाल एकसमान है, अर्थात्,
\(V_B = V_C\) = 54 किमी/घण्टा = (54 × 5/18) मी/से = 15 मी/से
A के सापेक्ष कार B का आपेक्षिक वेग \(V_{BA} = V_B - V_A\)
= (15 - 10) मी/से = 5 मी/से
A के सापेक्ष कार C का आपेक्षिक वेग
\(V_{CA} = (V_C + V_A)\) = (10+15) मी/से
= 25 मी/से
AB = AC = 1 किमी (दिया है)
माना कार C द्वारा दूरी AC तय करने में लगा समय 't' है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक सड़क पर तीन कारों A, B और C की स्थितियों को दर्शाता है। कार A बीच में है, जबकि B और C विपरीत दिशाओं से कार A की ओर बढ़ रही हैं। कारों के बीच की दूरी 1 किमी है, जो सापेक्ष स्थिति को समझने में मदद करती है।
चूँकि कार C का वेग नियत है, अतः सूत्र \(x = u \times t\) से,
AC=\(V_{CA}\)xt

\( \implies t = \frac{AC}{V_{CA}} = \frac{1000 मी}{25 मी/से} = 40\) सेकण्ड
माना कार B का त्वरण 'a' है तथा यह t = 40 सेकण्ड में BA = 1 किमी या 1000 मी दूरी तय करेगी।
... सूत्र- \(x_t - x_0 = (v_0)t + \frac{1}{2}at^2\) से,
\(AB=V_{BA}Xt + \frac{1}{2}at^2\)

\(1000 = 5 \times 40 + \frac{1}{2} \times a \times 40^2\)
या
\(1000 = 200 + 800a\)

\( \implies \alpha = \frac{(1000-200)}{800} मी/से^2 = 1 मी/से^2\)
In simple words: कार B को कार A से टकराने से पहले कार C को पार करना है। इसके लिए, कार C को A तक पहुँचने में लगने वाले समय (40 सेकंड) का उपयोग करके, कार B को 1 किमी की दूरी तय करने के लिए आवश्यक न्यूनतम त्वरण की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक गति के प्रश्नों में, सभी वेगों को एक ही संदर्भ फ्रेम (जैसे- जमीन) के सापेक्ष व्यक्त करना और वेगों को उनकी दिशाओं के आधार पर चिह्नों के साथ जोड़ना या घटाना महत्वपूर्ण है। दुर्घटना से बचने के लिए न्यूनतम त्वरण की गणना करने के लिए गति के समीकरणों का उपयोग करें।

 

Question 9. दो नगर A व B नियमित बस सेवा द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं और प्रत्येक मिनट के बाद दोनों तरफ बसें चलती हैं। कोई व्यक्ति साइकिल से 20 kmh-1 की चाल से A से B की तरफ जा रहा है और यह नोट करता है कि प्रत्येक 18 मिनट के बाद एक बस उसकी गति की दिशा में तथा प्रत्येक 6 मिनट बाद उसके विपरीत दिशा में गुजरती है। बस सेवाकाल T कितना है और बसें सड़क पर किस चाल (स्थिर मानिए) से चलती हैं?
Answer:
माना \(v_b\) = प्रत्येक बस की चाल
तथा \(v_c\) = साइकिल-सवार की चाल
साइकिल सवार की गति की दिशा में चल रही बसों की आपेक्षिक चाल = \(v_b - v_c\)
साइकिल सवार की गति की दिशा में प्रत्येक 18 min या \([latex]\frac { 18 }{ 60 }[/latex]\) h बाद एक बस गुजरती है।
... पार की गई दूरी \((v_b - v_c) \times \frac{18}{60}\) है।
चूँकि बसें प्रत्येक 'T' मिनट बाद चलती हैं, इसलिए दूरी \(v_b \times \frac{T}{60}\) के तुल्य होगी।
... \((v_b - v_c) \times \frac{18}{60} = v_b \times \frac{T}{60}\) ...(1)
साइकिल-सवार से विपरीत दिशा में प्रत्येक 6 min के बाद गुजरने वाली बसों का आपेक्षिक वेग \((v_b + v_c)\) है।
... चली गई दूरी \((v_b + v_c) \times \frac{6}{60}\) है।
... \((v_b + v_c) \times \frac{6}{60} = v_b \times \frac{T}{60}\) ...(2)
समीकरण (1) को समीकरण (2) से भाग देने पर,
\(\frac{v_b - v_c}{v_b + v_c} \times \frac{18}{6} = 1\)
हल करने पर,
\(\frac{v_b - v_c}{v_b + v_c} = \frac{1}{3}\)
\(3v_b - 3v_c = v_b + v_c\)
\(2v_b = 4v_c\)
\( \implies v_b = 2v_c\)
परन्तु
\(v_c\) = 20 km h-1
बसों की चाल \(v_b\) = 40 km h-1
समीकरण (1) से,
\((40-20) \times \frac{18}{60} = 40 \times \frac{T}{60}\)

\( \implies T = 9\) min
In simple words: साइकिल सवार की आपेक्षिक चाल का उपयोग करके बस के गुजरने के समय अंतराल को समीकरणों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इन समीकरणों को हल करके बसों की चाल और बस सेवाकाल T ज्ञात किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के आपेक्षिक गति के प्रश्नों में, आपेक्षिक वेगों के लिए सही समीकरण स्थापित करना और उन्हें हल करने के लिए बीजगणितीय विधियों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। विपरीत दिशाओं में गति के लिए वेग जुड़ते हैं और समान दिशाओं में घटते हैं।

 

Question 10. कोई खिलाड़ी एक गेंद को ऊपर की ओर आरम्भिक चाल 29 ms-1 से फेंकता है,
(i) गेंद की ऊपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा क्या होगी?
(ii) इसकी गति के उच्चतम बिन्दु पर गेंद के वेग व त्वरण क्या होंगे?
(iii) गेंद के उच्चतम बिन्दु पर स्थान के समय को x= 0 व t = 0 चुनिए, ऊध्वाधर नीचे की ओर की दिशा को X-अक्ष की धनात्मक दिशा मानिए। गेंद की ऊपर की व नीचे की ओर गति के दौरान स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न बताइए ।
(iv) किस ऊँचाई तक गेंद ऊपर जाती है और कितनी देर के बाद गेंद खिलाड़ी के हाथों में आ जाती है?

Answer:
(i) गेंद गुरुत्व के कारण त्वरण का प्रभाव अनुभव करती है जो सदैव ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करता है।
(ii) उच्चतम बिन्दु पर वेग = शून्य
उच्चतम बिन्दु पर त्वरण g = 9.8 m s-2 (ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर)
(iii) ऊपर की ओर गति के लिए, (a) स्थिति धनात्मक (b) वेग ऋणात्मक (c) त्वरण धनात्मक
नीचे की ओर गति के लिए,
(a) स्थिति धनात्मक (b) वेग धनात्मक (c) त्वरण धनात्मक
(iv) ऊपर की ओर गति के दौरान,
u = - 29 ms-1, a = 9.8 m s-2, v = 0
समीकरण \(v^2 = u^2+2as\) से,
\(0^2 = (-29)^2 + 2 \times 9.8 \times s\)
\(s = \frac{- (-29)^2}{2 \times 9.8} = - 42.91\) m
इसके अतिरिक्त \(v = u + at\) से,
\(0 = (-29) + 9.8 t\)
\(t = \frac{29}{9.8} = 2.96\) s
कुल समय = 2.96 s + 2.96 s
= 5.92s
[ ऊपर जाने में लगा समय = नीचे आने में लगा समय]
अर्थात् गेंद 42.91m की ऊँचाई तक ऊपर जाती है तथा फेंकने के क्षण से 5.92 s बाद खिलाड़ी के हाथों में आ जाती है।
In simple words: जब एक गेंद ऊपर फेंकी जाती है, तो त्वरण हमेशा नीचे की ओर होता है। उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य होता है, लेकिन त्वरण गुरुत्वाकर्षण के कारण 9.8 m/s² नीचे की ओर रहता है। गति के दौरान स्थिति, वेग और त्वरण के चिह्नों को दिशा के आधार पर निर्धारित किया जाता है। गेंद की अधिकतम ऊँचाई और हवा में रहने का कुल समय गति के समीकरणों का उपयोग करके गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति के प्रश्नों में, दिशाओं के लिए सही चिह्न परिपाटी (जैसे- ऊपर धनात्मक, नीचे ऋणात्मक या इसके विपरीत) का पालन करना महत्वपूर्ण है। उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य होता है, लेकिन त्वरण कभी नहीं।

 

Question 11. नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढिए और कारण बताते हुए व उदाहरण देते हुए बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य, एकविमीय गति में किसी कण की
(a) किसी क्षण चाल शून्य होने पर भी उसका त्वरण अशून्य हो सकता है।
(b) चाल शून्य होने पर भी उसका वेग अशून्य हो सकता है।
(c) चाल स्थिर हो तो त्वरण अवश्य ही शून्य होना चाहिए।
(d) चाल अवश्य ही बंढती रहेगी, यदि उसका त्वरण धनात्मक हो।

Answer:
(a) सत्य, सरल आवर्त गति करते कण की महत्तम विस्थापन की स्थिति में कण की चाल शून्य होती है, जबकि त्वरण महत्तम (अशून्य) होता है।
(b) असत्य, चाल शून्य होने का अर्थ है कि कण के वेग का परिमाण शून्य है।
(c) असत्य, एकसमाने वृत्तीय गति करते हुए कण की चाल स्थिर रहती है तो भी उसकी गति में। अभिकेन्द्र त्वरण कार्य करता है।
(d) असत्य, यह केवल जब सत्य हो सकता है जबकि चुनी गई धनात्मक दिशा गति की दिशा के अनुदिश हो ।
In simple words:
(a) एक वस्तु का वेग क्षणिक रूप से शून्य हो सकता है (जैसे ऊपर फेंकी गई गेंद उच्चतम बिंदु पर), लेकिन गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण गैर-शून्य रहता है।
(b) चाल वेग का परिमाण है, इसलिए यदि चाल शून्य है, तो वेग भी शून्य होगा।
(c) स्थिर चाल का मतलब शून्य त्वरण नहीं होता; उदाहरण के लिए, वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय त्वरण होता है।
(d) धनात्मक त्वरण हमेशा चाल नहीं बढ़ाता; यदि त्वरण वेग की विपरीत दिशा में हो तो चाल घट सकती है।

🎯 Exam Tip: चाल और वेग के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है (वेग एक सदिश राशि है)। त्वरण की दिशा और वेग की दिशा को ध्यान में रखकर कथनों का विश्लेषण करें। सरल आवर्त गति और वृत्तीय गति इसके अच्छे उदाहरण हैं।

 

Question 12. किसी गेंद को 90 m की ऊँचाई से फर्श पर गिराया जाता है। फर्श के साथ प्रत्येक टक्कर में गेंद की चाल 1/10 कम हो जाती है। इसकी गति का t= 0 से 12s के बीच चाल-समय ग्राफ खीचिए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चाल-समय (v-t) ग्राफ एक गेंद की गति को दर्शाता है जिसे 90 मीटर की ऊँचाई से गिराया जाता है। ग्राफ में गेंद की चाल में परिवर्तन दिखाया गया है, जिसमें प्रत्येक टक्कर के बाद चाल 1/10 कम हो जाती है। ग्राफ विभिन्न समयों पर चाल के मानों को दर्शाता है, जैसे 42 m/s पहली टक्कर से पहले और 37.8 m/s पहली टक्कर के बाद।
यहाँ
\(U_1\) = 0, \(S_1\) = 90 m, \(a_1\) = 9.8 ms\(^{-2}\)
\(v_1^2 = u_1^2 + 2a_1s_1\) द्वारा,
\(v_1^2 = 0 + 2 \times 9.8 \times 90\)
या
\(v_1 = \sqrt{1764}\) ms\(^{-1}\) = 42 ms\(^{-1}\)
तथा
\(v_1 = u_1 + a_1t_1\)
\(42 - 0 = 9.8 \times t_1\)
\( \implies t_1 = \frac{42}{9.8} \approx 4.2\) s
पुनः
\(U_2 = \frac{v_1}{10} = \frac{42}{10} = 4.2\) (टक्कर के बाद की चाल)
अब, \(U_2\) = 4.2 ms\(^{-1}\)
\(v_2\) = 0 (उच्चतम बिन्दु पर), \(a_2 = -g = -9.8\) ms\(^{-2}\)
अतः \(v_2 = u_2 + a_2t_2\)
\(0 = 4.2 - 9.8 \times t_2\)
\(t_2 = \frac{4.2}{9.8} \approx 0.42\) s (पहली टक्कर के बाद ऊपर जाने का समय)
\(v_{टकराव} = u_2 + a_2 t_{उतरना}\)
\(v_{टकराव}\) = 4.2 + 9.8 × 0.42 = 8.316 m/s (दूसरी टक्कर से पहले की चाल)
दूसरी टक्कर के बाद चाल = \(8.316 - \frac{8.316}{10}\) = \(8.316 \times 0.9\) = 7.48 m/s
प्रत्येक उछाल के लिए समय और वेग की गणना इसी तरह की जाती है। ग्राफ में इसे कई त्रिभुजों के रूप में दिखाया गया है, जहाँ प्रत्येक उछाल के बाद अधिकतम चाल कम होती जाती है।
अतः t = \(t_1 + t_2\) = (4.2+3.9) = 8.1s पर चाल \(v_2\) = 0
जैसा कि हम जानते हैं कि ऊपर जाने का समय = नीचे आने का समय = 3.9s
... \(t_3 = t_2\) = 3.9
वह वेग जिससे गेंद फर्श पर टकराती है = \(u_3 = u_2\) = 37.8 m s-l
अतः t = \((t_1+t_2)+t_3\) = (8.1 +3.9) s = 12s पर चाल \(v\) = 37.8 ms-1
चित्र-3.6, t = 0 से t=12s (= 4.2+3.9+3.9) के बीच चाल-समय ग्राफ प्रदर्शित करता है।
In simple words: एक गेंद को 90 मीटर से गिराया जाता है और प्रत्येक टक्कर के बाद उसकी चाल 1/10 कम हो जाती है। चाल-समय ग्राफ बनाने के लिए, प्रत्येक टक्कर से पहले और बाद की चाल और ऊपर जाने-नीचे आने के समय की गणना की जाती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के ग्राफ-आधारित प्रश्नों में, गति के समीकरणों का उपयोग करके प्रत्येक चरण (गिरना, उछलना) के लिए वेग और समय की गणना करें। टक्कर के बाद ऊर्जा हानि के कारण वेग में कमी को ध्यान में रखें।

 

Question 13. उदाहरण सहित निम्नलिखित के बीच के अन्तर को स्पष्ट कीजिए
(a) किसी समय अन्तराल में विस्थापन के परिमाण (जिसे कभी-कभी दूरी भी कहा जाता है)। और किसी कण द्वारा उसी अन्तराल के दौरान तय किए गए पथ की कुल लम्बाई ।
(b) किसी समय अन्तराल में औसत वेग के परिमाण और उसी अन्तराल में औसत चाल (किसी समय अंतराल में किसी कण की औसत चाल को समय अन्तराल द्वारा विभाजित की गई कुल पथ-लम्बाई के रूप में परिभाषित किया जाता है। प्रदर्शित कीजिए कि (a) व (b) दोनों में ही दूसरी राशि-पहली से अधिक या उसके बराबर है। समता का | चिह्न कब सत्य होता है? (सरलता के लिए केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए ।)

Answer:
(a) विस्थापन के परिमाण का अर्थ है सीधी रेखा की कुल लम्बाई अर्थात् गति के प्रारम्भिक व अन्तिम बिन्दुओं के बीच की दूरी । कण द्वारा किसी समय अन्तराल में तय किए गए निश्चित पथ की कुल लम्बाई, उसी अन्तराल में गति के प्रारम्भिक व अन्तिम बिन्दुओं के बीच की दूरी भिन्न हो सकती है, जैसे चित्र-3.7 में A से B तक पहुँचने में पंथ
(1), दूरी अर्थात् पथ की लम्बाई को तथा पथ
(2) विस्थापन के परिमाण को प्रदर्शित करता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह ग्राफ दो पथों को दर्शाता है जो बिंदु A से बिंदु B तक जाते हैं। पथ (1) एक वक्रित पथ है जो अधिक दूरी तय करता है, जबकि पथ (2) एक सीधी रेखा है जो विस्थापन के परिमाण को दर्शाता है। बिंदु C भी पथ (1) पर स्थित है।
(b) औसत चाल = \(\frac{कुल दूरी}{कुल समय}\)
उपर्युक्त पथ (1) पर विचार करने पर,
औसत चाल = \(\frac{दूरी (पथ ACB)}{t}\)
पथ (2) के लिए
औसत चाल = \(\frac{दूरी (पथ AB)}{t}\)
स्पष्ट है कि औसत चाल का मान औसत वेग के परिमाण से भिन्न है। तथा औसत चाल का मान \(\ge\) औसत वेग को परिमाण
यदि A व B के बीच गति केवल पथ (2) पर हो तब औसत चाल = | औसत वेग | अतः स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थिति में | औसत चाल | \(\ge\) | औसत वेगे |
In simple words: दूरी पथ की कुल लम्बाई है (अदिश), जबकि विस्थापन प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के बीच की सबसे छोटी सीधी रेखा की दूरी है (सदिश)। दूरी हमेशा विस्थापन के परिमाण से बड़ी या उसके बराबर होती है। इसी प्रकार, औसत चाल कुल तय की गई दूरी को कुल समय से विभाजित करती है, जबकि औसत वेग कुल विस्थापन को कुल समय से विभाजित करता है। औसत चाल का परिमाण हमेशा औसत वेग के परिमाण से बड़ा या उसके बराबर होता है। समता तभी होती है जब वस्तु सीधी रेखा में एक ही दिशा में गति करती है।

🎯 Exam Tip: दूरी और विस्थापन, साथ ही चाल और वेग के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है। दूरी और चाल अदिश राशियाँ हैं, जबकि विस्थापन और वेग सदिश राशियाँ हैं। यह हमेशा याद रखें कि दूरी \(\ge\) |विस्थापन| और औसत चाल \(\ge\) |औसत वेग|।

 

Question 14. कोई व्यक्ति अपने घर से सीधी सड़क पर 5 kmh-1 की चाल से 2.5 km दूर बाजार तक पैदल जाता है। परन्तु बाजार बन्द देखकर वह उसी क्षण वापस मुड़ जाता है तथा 7.5 km h ! की चाल से घर लौट आता है। समय अन्तराल
(i) 0-30 मिनट,
(ii) 0-50 मिनट,
(iii) 0-40 मिनट की अवधि में उस व्यक्ति
(a) के माध्य वेग का परिमाण तथा
(b) की माध्य चाल क्या है? (नोट- आप इस उदाहरण से समझ सकेंगे कि औसत चाल को औसत-वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित करने की अपेक्षा समय द्वारा विभाजित कुल पथ-लम्बाई के रूप में परिभाषित करना अधिक अच्छा क्यों है? आप थककर घर लौटे उस व्यक्ति को यह बताना नहीं चाहेंगे कि उसकी औसत चाल शून्य थी ।)

Answer:
व्यक्ति को घर से बाजार, तक जाने में लगा समय,
\(t_1 = \frac{दूरी}{चाल} = \frac{2.5 किमी}{5.0 किमी/घण्टा} = \frac{1}{2}\) घण्टा = 30 मिनट
व्यक्ति को बाजार से घर तक वापस आने में लगा समय,
\(t_2 = \frac{दूरी}{चाल} = \frac{2.5 किमी}{7.5 किमी/घण्टा} = \frac{1}{3}\) घण्टा = 20 मिनट
(i) 0-30 मिनट समयान्तराल में,
(a) व्यक्ति के माध्य वेग का परिमाण = बाजार पहुँचने के क्षण उसके वेग का परिमाण = 5 किमी/घण्टा
(b) माध्य चाल = बाजार पहुँचने के क्षण वेग का परिमाण = 5 किमी/घण्टा
(ii) 0-50 मिनट समयान्तराल में,
व्यक्ति द्वारा लिया गया कुल समय = \(t_1 + t_2\) = (30 + 20) मिनट = 50 मिनट
= \(\frac{50}{60}\) घण्टा = \(\frac{5}{6}\) घण्टा
व्यक्ति द्वारा तय की गयी दूरी (पथ की लम्बाई) = 2.5 किमी + 2.5 किमी = 5.0 किमी
तथा व्यक्ति का विस्थापन = 2.5 किमी - 2.5 किमी = 0
(a) औसत वेग का परिमाण = \(\frac{विस्थापन}{कुल समय} = \frac{0}{(5/6) घण्टा} = 0\)
(b) माध्य चाल = \(\frac{कुल पथ की लम्बाई}{कुल समय} = \frac{5 किमी}{(5/6) घण्टा} = 6\) किमी/घण्टा
(iii) 0-40 मिनट के समय-अन्तराल में,
गति आरम्भ से \(t_1\) = 30 मिनट में तय की दूरी = 2.5 किमी (बाजार की ओर) अर्थात्
शेष \(t_2\) = (40 - 30) = 10 मिनट में तय की गयी दूरी = चाल × समय
= 7.5 किमी/घण्टा x \(\frac{10}{60}\) घण्टा = 1.25 किमी (घर की ओर)
... (a) औसत वेग का परिमाण = \(\frac{विस्थापन}{समय} = \frac{2.5 किमी - 1.25 किमी}{(\frac{1}{2} + \frac{1}{6}) घण्टा}\)
= (15/8) किमी/घण्टा = 1.875 किमी/घण्टा
(b) औसत चाल = \(\frac{कुल दूरी}{कुल समय} = \frac{2.5 किमी + 1.25 किमी}{(\frac{1}{2} + \frac{1}{6}) घण्टा}\)
= 45/8 किमी/घण्टा = 5.625 किमी/घण्टा
In simple words: व्यक्ति पहले बाजार तक पैदल जाता है, फिर लौट आता है। विभिन्न समय अंतरालों के लिए माध्य वेग (कुल विस्थापन/कुल समय) और माध्य चाल (कुल दूरी/कुल समय) की गणना की जाती है। विस्थापन सदिश राशि होने के कारण दिशा पर निर्भर करता है, जबकि दूरी अदिश राशि है।

🎯 Exam Tip: औसत वेग और औसत चाल की गणना करते समय, विस्थापन और दूरी के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें। वेग के लिए विस्थापन और चाल के लिए तय की गई कुल दूरी का उपयोग करें। समय के अंतरालों को ध्यान से विभाजित करें।

 

Question 15. हमने अभ्यास प्रश्न 13तथा 14 में औसत चाल व औसत वेग के परिमाण के बीच के अन्तर को स्पष्ट किया है। यदि हम तात्क्षणिक चाल व वेग के परिमाण पर विचार करते हैं तो इस तरह का अन्तर करना आवश्यक नहीं होता । तात्क्षणिक चाल हमेशा तात्क्षणिक वेग के बराबर होती है। क्यों?
Answer:
जब हम यादृच्छिक समय अन्तरालों पर विचार करते हैं, विस्थापन का परिमाण सदैव दूरी के परिमाण के तुल्य होता है। अन्य शब्दों में,
तात्क्षणिक वेग, \(V_{inst} = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta s}{\Delta t}\) (s = विस्थापन)
अत्यन्त लघु
तात्क्षणिक चाल, \(v = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta x}{\Delta t}\) (x = दूरी)
समय अन्तरालों (\(\Delta t \to 0\)) में वस्तु की गंति की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं माना जाता; अतः कुल पथ-लम्बाई (दूरी) तथा विस्थापन के परिमाण में कोई अन्तर नहीं होता। इस प्रकार तात्क्षणिक चाल सदैव तात्क्षणिक वेग के परिमाण के तुल्य होती है।
In simple words: तात्क्षणिक चाल और तात्क्षणिक वेग बराबर होते हैं क्योंकि बहुत छोटे समय अंतराल (\(\Delta t \to 0\)) के लिए, वस्तु की गति की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं होता, इसलिए तय की गई दूरी और विस्थापन का परिमाण समान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: तात्क्षणिक चाल और वेग के बीच के संबंध को समझने के लिए "डेल्टा t शून्य की ओर अग्रसर" की अवधारणा महत्वपूर्ण है। यह सूक्ष्म समय अंतराल में दिशा के अपरिवर्तित रहने पर आधारित है।

 

Question 16. चित्र-8.8 में (a) से (d) तक के ग्राफों को ध्यान से देखिए और देखकर बताइए कि इनमें से कौन-सा ग्राफ एकविमीय गति को सम्भवतः नहीं दर्शा सकता?
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation):
(a) यह एक स्थिति-समय (x-t) ग्राफ है जिसमें एक ही समय पर वस्तु की दो अलग-अलग स्थितियाँ दिखाई गई हैं।
(b) यह एक वेग-समय (v-t) ग्राफ है जिसमें एक ही समय पर वस्तु के धनात्मक और ऋणात्मक दोनों वेग दिखाए गए हैं।
(c) यह एक चाल-समय ग्राफ है जिसमें चाल का मान ऋणात्मक दिखाया गया है।
(d) यह एक पथ-लम्बाई (कुल दूरी)-समय ग्राफ है जिसमें पथ की लम्बाई घटती हुई दिखाई गई है।
Answer:
(a) यह ग्राफ एकविमीय गति प्रदर्शित नहीं करता, चूंकि किसी एक क्षण पर कण की दो स्थितियाँ एकविमीय गति में सम्भव नहीं होतीं।
(b) यह ग्राफ एकविमीय गति प्रदर्शित नहीं करता, चूँकि किसी क्षण पर कण का वेग धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों दिशाओं में है, जो एकविमीय गति में सम्भव नहीं है।
(c) यह ग्रफ भी एकविमीय गति प्रदर्शित नहीं करता, चूँकि यह ग्राफ कण की ऋणात्मक चाल व्यक्त कर रहा है तथा कण की चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती ।
(d) यह ग्राफ भी एकविमीय गति प्रदर्शित नहीं करता, चूँकि यह प्रदर्शित कर रहा है कि कुल पथ की लम्बाई एक निश्चित समय के पश्चात् घट रही है, परन्तु गतिमान कण की कुल पथ-लम्बाई कभी भी समय के साथ नहीं घटती।।
In simple words: एकविमीय गति में, एक समय पर एक ही स्थिति हो सकती है, वेग की केवल एक दिशा हो सकती है, चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती, और तय की गई कुल दूरी कभी घट नहीं सकती। दिए गए सभी ग्राफ इन नियमों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए वे एकविमीय गति को नहीं दर्शा सकते।

🎯 Exam Tip: एकविमीय गति की मूल विशेषताओं को याद रखें: एक समय पर एक ही स्थिति, चाल हमेशा गैर-ऋणात्मक, और तय की गई दूरी (पथ-लम्बाई) कभी घटती नहीं। x-t ग्राफ में ऊर्ध्वाधर रेखाएँ या v-t ग्राफ में समान समय पर विपरीत वेग एकविमीय गति के लिए अमान्य हैं।

 

Question 17. चित्र 3:9 में किसी कण की एकविमीय गति का ग्राफ दिखाया गया है। ग्राफ से क्या यह कहना ठीक होगा कि यह कण है t<0 के लिए किसी सरल रेखा में और है t > 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है। यदि नहीं, तो ग्राफ के संगत किसी उचित भौतिक सन्दर्भ का सुझाव दीजिए।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह स्थिति-समय (x-t) ग्राफ एक कण की एकविमीय गति को दर्शाता है। t=0 पर स्थिति x=0 है। t<0 के लिए ग्राफ एक सीधी रेखा है, जबकि t>0 के लिए यह एक वक्रित (परवलीय) पथ दर्शाता है।
Answer:
यह कहना ठीक नहीं होगा कि यह कण है t<0 के लिए किसी सरल रेखा में और t > 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है, चूंकि x-t ग्राफ कण का पथ प्रदर्शित नहीं कर सकता।
ग्राफ द्वारा t = 0 पर x= 0 प्रदर्शित है; अतः ग्राफ गुरुत्व के अन्तर्गत गिरती हुई किसी वस्तु की गति प्रदर्शित कर सकता है।
In simple words: x-t ग्राफ पथ को नहीं दर्शाता, बल्कि समय के साथ स्थिति को दर्शाता है। यह ग्राफ गुरुत्वाकर्षण के तहत गिरने वाली वस्तु की गति का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जहां t<0 के लिए वेग स्थिर है (एक सीधी रेखा) और t>0 के लिए त्वरण के कारण वेग बदल रहा है (एक परवलीय वक्र)।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि स्थिति-समय (x-t) ग्राफ वस्तु के पथ को नहीं दर्शाता, बल्कि समय के सापेक्ष उसकी स्थिति को दर्शाता है। ग्राफ की ढलान वेग को दर्शाती है। वक्रित x-t ग्राफ का मतलब है कि वस्तु त्वरित गति में है।

 

Question 18. किसी राजमार्ग पर पुलिस की कोई गाड़ी 30 km/h की चाल से चल रही है और यह उसी दिशा में 192 km/h की चाल से जा रही किसी चोर की कार पर गोली चलाती है। यदि गोली की नाल मुखी चाल 150 ms-1 है तो चोर की कार को गोली किस चाल के साथ आघात करेगी? (नोट-उस चाल को ज्ञात कीजिए जो चोर की कार को हानि पहुँचाने में प्रासंगिक हो ।)
Answer:
चोर की कार की चाल \(v_t\) = 192 किमी/घण्टा = (192 x 5/18) मी/से = (160/3) मी/से
पुलिस की कार की चाल \(v_p\) = 30 किमी/घण्टा = (30×5/18) मी/से = (25/3) मी/से
पुलिस की कार (चाल) के सापेक्ष गोली की चाल, \(V_{bp}\) = 150 मी/से
पुलिस की कार के सापेक्ष चोर की कार की आपेक्षिक चाल
चोर की कार से गोली के टकराने की चाल = पुलिस की कार के सापेक्ष गोली की आपेक्षिक चाल – पुलिस की कार के सापेक्ष चोर की कार की चाल = \(v_{bp} - v_{tp}\) = 150 मी/से – \((160/3 - 25/3)\) मी/से = 150 - 135/3 = 150 - 45 = 105 मी/से
In simple words: गोली की चाल पुलिस की कार के सापेक्ष 150 m/s है। चोर की कार पुलिस की कार के सापेक्ष (192-30) km/h = 162 km/h = 45 m/s की चाल से चल रही है। चोर की कार से टकराने पर गोली की चाल, गोली की आपेक्षिक चाल और चोर की कार की आपेक्षिक चाल के अंतर के बराबर होगी।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक वेग की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी वेगों को एक ही इकाई प्रणाली (जैसे- SI इकाइयाँ) में परिवर्तित किया गया है। समान दिशा में गतिमान वस्तुओं के लिए आपेक्षिक वेग घटाया जाता है।

 

Question 19. चित्र 3.10 में दिखाए गए प्रत्येक ग्राफ के लिए किसी उचित भौतिक स्थिति का सुझाव दीजिए
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation):
(a) यह एक स्थिति-समय (x-t) ग्राफ है जो दर्शाता है कि वस्तु पहले आगे बढ़ती है, रुकती है, फिर पीछे आती है और रुक जाती है।
(b) यह एक वेग-समय (v-t) ग्राफ है जिसमें वेग लगातार दिशा बदलता हुआ दिखाया गया है, जिसका आयाम बढ़ता और घटता रहता है।
(c) यह एक त्वरण-समय (a-t) ग्राफ है जो दर्शाता है कि वस्तु को एक बहुत ही छोटे समय अंतराल के लिए त्वरित किया जाता है, फिर त्वरण शून्य हो जाता है।
Answer:
(a) x-t ग्राफ प्रदर्शित कर रहा है कि प्रारम्भ में x शून्य है, फिर यह एक स्थिर मान प्राप्त करता है, पुनः यह शून्य हो जाता है तथा फिर यह विपरीत दिशा में बढ़कर अन्त में एक स्थिर मान (विरामावस्था) प्राप्त कर लेता है। अतः यह ग्राफ इस प्रकार की भौतिक स्थिति व्यक्त कर सकता है जैसे एक गेंद को विरामावस्था से फेंका जाता है और वह दीवार से टकराकर लौटती है तथा कम चाल से उछलती है तथा यह क्रम इसके विराम में पहुँचने तक चलता रहता है।
(b) यह ग्राफ प्रदर्शित कर रहा है कि वेग समय के प्रत्येक अन्तराल के साथ परिवर्तित हो रहा है तथा प्रत्येक बार इसका वेग कम होता जा रहा है। इसलिए यह ग्राफ एक ऐसी भौतिक स्थिति को व्यक्त कर सकता है जिसमें एक स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई गेंद (फेंके जाने पर) धरती से टकराकर कम चाल से पुनः उछलती है तथा प्रत्येक बार धरती से टकराने पर इसकी चाल कम होती जाती है।
(c) यह ग्राफ प्रदर्शित करता है कि वस्तु अल्प समय में ही त्वरित हो जाती है। अतः यह ग्राफ एक ऐसी भौतिक स्थिति को व्यक्त कर सकता है जिसमें एकसमान चाल से चलती हुई गेंद को अत्यल्प समयान्तराल में बल्ले द्वारा टकराया जाता है।
In simple words:
(a) x-t ग्राफ दीवार से टकराकर लौटने वाली और कम चाल से उछलने वाली गेंद की गति को दर्शाता है।
(b) v-t ग्राफ मुक्त रूप से गिरने वाली गेंद को दर्शाता है जो प्रत्येक उछाल पर अपनी चाल कम करती जाती है।
(c) a-t ग्राफ बल्ले से टकराई हुई गेंद की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ बहुत कम समय के लिए उच्च त्वरण लगता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के गति-समय ग्राफों (x-t, v-t, a-t) का विश्लेषण करते समय, उनकी ढलान और क्षेत्रफल के भौतिक महत्व को याद रखें। प्रत्येक ग्राफ एक विशिष्ट वास्तविक-विश्व गति स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें विराम, एकसमान वेग, त्वरण और मन्दन शामिल हैं।

 

Question 20. चित्र 3.11 में किसी कण की एकविमीय सरल आवर्ती गति के लिए x-t ग्राफ दिखाया गया है। (इस गति के बारे में आप अध्याय 14 में पढ़ेंगे) समय t = 0.3s, 1.2 s, - 1.2s पर कण के स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न क्या होंगे?


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.11 एक x-t ग्राफ को दर्शाता है जो एक कण की एकविमीय सरल आवर्ती गति (Simple Harmonic Motion) को प्रदर्शित करता है। इसमें समय (t) को क्षैतिज अक्ष पर और स्थिति (x) को ऊर्ध्वाधर अक्ष पर दर्शाया गया है, जिसमें एक ज्यावक्रीय वक्र बना हुआ है जो कण की आवर्ती गति को दर्शाता है और विभिन्न समय बिंदुओं पर उसकी स्थिति को दिखाया गया है।
Answer: सरल आवर्ती गति में, त्वरण, \(a= -\omega^2 x\) जहाँ \(\omega\) नियतांक (कोणीय आवृत्ति) है।
समय \(t = 0.3\text{s}\) पर, \(x\) ऋणात्मक है, x-t ग्राफ का ढाल ऋणात्मक है; अतः स्थिति एवं वेग ऋणात्मक हैं। चूंकि \(a = -\omega^2 x\));
अतः त्वरण धनात्मक है। समय \(t = 1.2\text{ s}\) पर, \(x\) धनात्मक है, x-t ग्राफ का ढाल भी धनात्मक है; अतः स्थिति एवं वेग धनात्मक हैं। चूंकि \(a = \omega^2 x\); अतः त्वरण ऋणात्मक है। समय \(t = -1.2\text{s}\) पर, \(x\) ऋणात्मक है, x-t ग्राफ का ढाल भी धनात्मक है; अतः वेग धनात्मक है। अन्त में त्वरण ‘a' भी धनात्मक है।
In simple words: This question asks for the signs of position, velocity, and acceleration for a particle in simple harmonic motion at specific times, given its x-t graph.

🎯 Exam Tip: For SHM graphs, understand that the slope of the x-t graph gives velocity, and the concavity (or second derivative) gives acceleration. Remember the relationship \(a = -\omega^2 x\).

 

Question 21. चित्र 3.12 में किसी कण की एकविमीय गति का है ग्राफ दर्शाता है। इसमें तीन समान अन्तराल दिखाए गए हैं। किस अन्तराल में औसत चाल अधिकतम है और किसमें न्यूनतम है? प्रत्येक अन्तराल के लिए औसत वेग का चिह्न बताइए ।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.12 एक x-t ग्राफ को दर्शाता है, जिसमें एक कण की एकविमीय गति को समय के साथ उसकी स्थिति (x) के परिवर्तन के रूप में दिखाया गया है। ग्राफ में तीन विशिष्ट समान समय अंतराल (1, 2, 3) चिह्नित हैं, जो विभिन्न ढालों को प्रदर्शित करते हैं और कण की गति की प्रकृति में परिवर्तन दिखाते हैं।
Answer: हम जानते हैं कि लघु अन्तरालों में x-t ग्राफ का ढाल उस अन्तराल में कण की औसत चाल व्यक्त करता है। ग्राफ से यह स्पष्ट है कि अन्तराल (3) में ग्राफ का ढाल अधिकतम है, परन्तु अन्तराल (2) में न्यूनतम है। अतः औसत चाल अन्तराल (3) में अधिकतम तथा अन्तराल (2) में न्यूनतम होगी। इसके अतिरिक्त अन्तराल (1) तथा (2) में ढाल धनात्मक है परन्तु अन्तराल (3) में ऋणात्मक; अतः अन्तराल (1) व (2) में औसत वेग धनात्मक है परन्तु अन्तराल (3) में ऋणात्मक।
In simple words: The average speed is determined by the slope of the x-t graph. Interval (3) has the steepest slope, indicating maximum average speed, while interval (2) has the least steep slope, indicating minimum average speed. The sign of average velocity is determined by the sign of the slope (positive for upward, negative for downward).

🎯 Exam Tip: For x-t graphs, the slope represents velocity. A steeper slope means higher speed. A positive slope indicates positive velocity, and a negative slope indicates negative velocity.

 

Question 22. चित्र-3.13 में किसी नियत (स्थिर) दिशा के अनुदिश चल रहे कण.का चाल-समय ग्राफ दिखाया गया है। इसमें तीन समान समय अन्तराल दिखाए गए हैं। किस अन्तराल में औसत त्वरण का परिमाण अधिकतम होगा? किस अन्तराल में औसत चाल अधिकतम होगी? धनात्मक दिशा को गति की स्थिर दिशा चुनते हुए तीनों अन्तरालों में v तथा a के चिह्न बताइए। A, B, C व D बिन्दुओं पर त्वरण क्या होंगे?


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.13 एक चाल-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है, जिसमें एक कण की गति को तीन समान समय अंतरालों में दिखाया गया है। ग्राफ में चाल (v) ऊर्ध्वाधर अक्ष पर और समय (t) क्षैतिज अक्ष पर है, जिसमें वक्र के शिखर और घाटियों के साथ-साथ A, B, C, D बिंदु चिह्नित हैं, जो गति में परिवर्तन दर्शाते हैं।
Answer: (i) हम जानते हैं कि लघु अन्तरालों में v-t ग्राफ के ढाल का परिमाण कण के औसत त्वरण को परिमाण देता है। दिए गए चित्र से स्पष्ट है कि ढाल का परिमाण (2) में अधिकतम तथा (3) में न्यूनतम है। अतः औसत त्वरण का परिमाण अन्तराल (2) में अधिकतम तथा (3) में न्यूनतम होगा। (ii) चित्र से स्पष्ट है कि औसत चाल अन्तराल (3) में अधिकतम तथा अन्तराल (1) में न्यूनतम है। (iii) सभी तीनों अन्तरालों में चाल v धनात्मक है । पुनः अन्तराल (1)
में (v-t) ग्राफ का ढाल धनात्मक है, जबकि अन्तराल (2) में ढाल (त्वरण a) ऋणात्मक
है। चूंकि अन्तराल (3) में, v-t ग्राफ समय-अक्ष के समान्तर है; अतः इस अन्तराल में a शून्य है। (iv) A, B, C तथा
D. बिन्दुओं पर, v-t ग्राफ समय-अक्ष के समान्तर है। इसलिए सभी चारों बिन्दुओं पर 'a' शून्य है।
In simple words: This question asks to analyze a v-t graph for a particle in constant direction. Average acceleration is found from the slope's magnitude, and average speed from the magnitude of velocity. The signs of velocity and acceleration are determined by their direction on the graph and slope, respectively. Acceleration at points where the graph is parallel to the time-axis is zero.

🎯 Exam Tip: For v-t graphs, the slope gives acceleration, and the area under the curve gives displacement. A positive velocity means moving in the positive direction, and a positive slope means positive acceleration.

Additional Practice

 

Question 23. कोई तीन पहिये वाला स्कूटर अपनी विरामावस्था से गति प्रारम्भ करता है। फिर 10 s तक किसी सीधी सड़क पर 1m s-2 के एकसमान त्वरण से चलता है। इसके बाद वह एकसमान वेग से चलता है। स्कूटर द्वारा नावें सेकण्ड (n= 1, 2, 3, ......) में तय की गई दूरी को n के सापेक्ष आलेखित कीजिए। आप क्या आशा करते हैं कि त्वरित गति के दौरान यह ग्राफ कोई सरल रेखा या कोई परवलय होगा?


Answer: हलः
हम जानते हैं कि
-हम जानते हैं कि
\(s_n\) वाँ \( = u + \frac{a}{2}(2n - 1) \)
जब
\(u = 0, a = 1 \text{ m s}^{-2}\)
\(s_n\) वाँ \( = 0 + \frac{1}{2}(2 n - 1) \)
\( = \frac{1}{2}(2n - 1) \)
\(n = 1, 2, 3, \ldots\) के लिए
\(s_1 = \frac{1}{2}(2 \times 1 - 1) = 0.5 \text{ m} \)
\(s_2 = \frac{1}{2}(2 \times 2 - 1) = 1.5 \text{ m} \)
\(s_3 = \frac{1}{2}(2 \times 3 - 1) = 2.5 \text{ m} \)
\(s_4 = \frac{1}{2}(2 \times 4 - 1) = 3.5 \text{ m} \)
\(s_5 = \frac{1}{2}(2 \times 5 - 1) = 4.5 \text{ m} \)
\(s_6 = \frac{1}{2}(2 \times 6 - 1) = 5.5 \text{ m} \)
\(s_7 = \frac{1}{2}(2 \times 7 - 1) = 6.5 \text{ m} \)
\(s_8 = \frac{1}{2}(2 \times 8 - 1) = 7.5 \text{ m} \)
\(s_9 = \frac{1}{2}(2 \times 9 - 1) = 8.5 \text{ m} \)
\(s_{10} = \frac{1}{2}(2 \times 10 - 1) = 9.5 \text{ m} \)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.14 एक दूरी-समय (s-t) ग्राफ को दर्शाता है, जिसमें स्कूटर द्वारा नावें सेकण्ड (n) में तय की गई दूरी को दिखाया गया है। ग्राफ में, दूरी (s) को ऊर्ध्वाधर अक्ष पर और समय (t) को क्षैतिज अक्ष पर दर्शाया गया है। यह एक सीधी रेखा के रूप में है जो त्वरित गति के दौरान दूरी में एकसमान वृद्धि को प्रदर्शित करती है।
चित्र-3.14 में प्रदर्शित ग्राफ से स्पष्ट है कि त्वरित गति के दौरान हमें एक सरल रेखा प्राप्त होती है।
In simple words: For uniformly accelerated motion starting from rest, the distance covered in the nth second is given by \(s_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1)\). Since \(u=0\) and \(a=1 \text{ m/s}^2\), this simplifies to \(s_n = \frac{1}{2}(2n-1)\). Plotting this will result in a straight line, not a parabola.

🎯 Exam Tip: For uniformly accelerated motion starting from rest, the distance covered in successive equal time intervals will follow an arithmetic progression, leading to a linear graph for distance covered in the nth second versus n.

 

Question 24. किसी स्थिर लिफ्ट में (जो ऊपर से खुली है) कोई बालक खड़ा है। वह अपने पूरे जोर से एक गेंद ऊपर की ओर फेंकता है जिसकी प्रारम्भिक चाल 49 ms-1 है। उसके हाथों में गेंद के वापस आने में कितना समय लगेगा? यदि लिफ्ट ऊपर की ओर 5 m s-1 की एकसमान चाल से गति करना प्रारम्भ कर दे और वह बालक फिर गेंद को अपने पूरे जोर से फेंकता तो कितनी देर में गेंद उसके हाथों में लौट आएगी?


Answer: हलः
- यहाँ \(v_0 = 49\) मी/से, \(a = -g = -9.8 \text{ मी/से}^2\) तथा विस्थापन, \(y_t - y_0 = 0\)
अतः समी० \(y_t - y_0 = v_0 t + \frac{1}{2} a t^2\) से
\(0 = (49) t - \frac{1}{2} (9.8)t^2 \)
सरल करने पर
\(t = 10\) सेकण्ड
जब लिफ्ट ऊपर की
ओर 5 मी/से की चाल से गति आरम्भ करे तो भी गेंद अब भी पूर्व की भाँति 10 सेकण्ड ही लेगी, चूंकि गेंद की बालक के सापेक्ष आपेक्षिक गति जब भी 49 मी/से ही होगी ।
In simple words: When a boy throws a ball vertically upwards in a stationary lift, it takes 10 seconds to return to his hands. If the lift moves with a constant upward velocity, the relative velocity of the ball with respect to the boy remains unchanged, so the time taken for the ball to return to his hands will still be 10 seconds.

🎯 Exam Tip: Relative motion is key. If the reference frame (the lift) moves at a constant velocity, the relative velocity between the boy and the ball doesn't change, meaning the time of flight for the ball with respect to the boy also doesn't change.

 

Question 25. क्षैतिज में गतिमान कोई लम्बा पट्टा (चित्र-3.15) 4 km/h की चाल से चल रहा है। एक बालक इस पर (पट्टे के सापेक्ष) 9 km/h की चाल से कभी आगे, कभी पीछे अपने माता-पिता के बीच दौड़ रहा है। माता व पिता के बीच 50 m की दूरी है। बाहर किसी स्थिर प्लेटफार्म पर खड़े एक प्रेक्षक के लिए, निम्नलिखित का मान प्राप्त करिए
(a) पट्टे की गति की दिशा में दौड़ रहे बालक की चाल,
(b) पट्टे की गति की दिशा के विपरीत दौड़ रहे बालक की चाल,
(c) बच्चे द्वारा (a) व (b) में लिया गया समय यदि बालक की गति का प्रेक्षण उसके माता या पिता करें तो कौन-सा उत्तर बदल जाएगा?


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.15 एक क्षैतिज गतिमान पट्टे को दर्शाता है जिस पर एक बच्चा अपने माता-पिता के बीच दौड़ रहा है। पट्टे की गति 4 km/h है। चित्र में 'पिता', 'बच्चा' और 'माता' की स्थितियाँ और एक 'स्थिर प्रेक्षक' दिखाया गया है, जो इस सापेक्ष गति की विभिन्न स्थितियों को समझने में मदद करता है।
Answer: हलः
माना \(v_B\) = पट्टे का वेग = 4 km h-1 (बाएँ से दाएँ)
\(v_{CB}\) = पट्टे के सापेक्ष बालक का वेग
(a) जब बालक पट्टे की गति की दिशा में दौड़ता है-
पट्टे के सापेक्ष बालक का वेग = 9 km h-1 (बाएँ से दाएँ)
यदि बालक का वेग, प्लेटफार्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष \(v_C\) हो तो
\(v_{CB} = v_C - v_B\)

\( \implies v_C = v_{CB} + v_B \)
\(v_C = 9 + 4 = 13 \text{ km h}^{-1}\) (बाएँ से दाएँ)
(b) जब बालक पट्टे की गति की दिशा के विपरीत दौड़ता है-
\(v_{CB} = -9 \text{ km h}^{-1}\) (बाएँ से दाएँ)
यदि बालक का वेग किसी स्थिर प्रेक्षक के सापेक्ष \(v_C\) है तो
\(v_{CB} = v_C - v_B\)

\( \implies v_C = v_{CB} + v_B \)
\(v_C = (-9) + 4 = - 5 \text{ km h}^{-1}\)
ऋणात्मक चिह्न बालक की विपरीत दिशा (दाएँ से बाएँ) को व्यक्त करता है।
(c) स्थिति (a) अथवा (b) में लगने वाला समय
\(t = \frac{\text{माता-पिता के. बीच की दूरी}}{\text{बालंक की चाल}} = \frac{50 \times 60 \times 60}{1000 \times 9} = 20 \text{ s} \)
समय 20s रह जाएगा यदि माता या पिता बालक की गति का प्रेक्षण करते हैं।
In simple words: This problem involves relative velocities. We calculate the boy's speed relative to a stationary observer when he runs with and against the conveyor belt's motion. Then, we find the time taken to cover 50m. If the parents observe, the boy's relative speed to them is just his running speed on the belt, so the time remains the same.

🎯 Exam Tip: For relative velocity problems, correctly identify the reference frames and apply vector addition/subtraction. Time to cover a distance depends on the relative speed between the object and the observer, if the observer is also moving.

 

Question 26. किसी 200 m ऊँची खड़ी चट्टान के किनारे से दो पत्थरों को एक साथ ऊपर की ओर 15 m s-1 तथा 30 m s-1 की प्रारम्भिक चाल से फेंका जाता है। इसका सत्यापन कीजिए कि संलग्न ग्राफ (चित्र-3.16) पहले पत्थर के सापेक्ष दूसरे पत्थर की आपेक्षिक स्थिति का समय के साथ परिवर्तन को प्रदर्शित करता है। वायु के प्रतिरोध को नगण्य मानिए और यह मानिए कि जमीन से टकराने के बाद पत्थर ऊपर की ओर उछलते नहीं। मान लीजिए g = 10 m s-2 ग्राफ के रेखीय व वक्रीय भागों के लिए समीकरण लिखिए।


Answer: हलः
पहले पत्थर के लिए,
\(x(0) = 200 \text{ m}, v(0) = 15 \text{ ms}^{-1}, a = -10 \text{ m s}^{-2}\)
अतः \(t\) समय पर पहले पत्थर की स्थिति
\(x_1(t) = x(0) + v(0) t + \frac{1}{2} a t^2 = 200 + 15 t - 5 t^2 \) ...(1)
जब पहला पत्थर जमीन से टकराता है,
\(x_1(t) = 0\)

\( \implies - 5 t^2 + 15t + 200 = 0 \) ...(2)
इसी प्रकार दूसरे पत्थर के लिए,
\(x(0) = 200 \text{ m}, v(0) = 30 \text{ ms}^{-1}, a = -10 \text{ m s}^{-2}\)
अतः \(t\) समय पर दूसरे पत्थर की स्थिति
\(x_2(t) = x(0) + v(0) t + \frac{1}{2} a t^2 = 200 + 30 t - 5 t^2 \) ...(3)
दूसरे पत्थर की पहले पत्थर के सापेक्ष आपेक्षिक स्थिति समीकरण (1) को समीकरण (3) में से
घटाकर निम्नवत् दी जा सकती है-
\(x_2(t) - x_1(t) = 15 t \) ...(4)
या
\(x = 15 t \) ...(5)
जहाँ, \(x = x_2(t)- x_1(t)\), दोनों पत्थरों के बीच पृथक्करण है।
स्पष्ट है कि \(x \propto t\) अर्थात् जब तक दोनों पत्थर गति करते रहेंगे, उनके बीच पृथक्करण बढ़ता
जाएगा।
चूँकि \(x_2(t) - x_1(t)\) तथा \(t\) के बीच एक रेखीय सम्बन्ध है, इसलिए ग्राफ एक सीधी रेखा होगा।
समीकरण (2) को हल करने पर \(t = 8\text{s}\)
अर्थात् 8s बाद पहला पत्थर पृथ्वी पर गिर जाएगा। इसके बाद केवल एक ही. पत्थर गति की
अवस्था में होगा, अतः इस क्षण (t = 8s पर) दोनों के बीच पृथक्करण अधिकतम होगा।
अतः समीकरण (4) में \(t = 8\text{s}\) रखने पर अधिकतम पृथक्करण 120 m है।
8s बाद, केवल दूसरा पत्थर मति की अवस्था में होगा; अतः ग्राफ द्विघाती समीकरण के अनुसार
परवलयाकार होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.16 एक ग्राफ को दर्शाता है जो समय के साथ दूसरे पत्थर की पहले पत्थर के सापेक्ष आपेक्षिक स्थिति में परिवर्तन को दिखाता है। ग्राफ में एक रेखीय भाग है जो प्रारंभिक अवस्था में दोनों पत्थरों के बीच की सापेक्ष दूरी को दर्शाता है, और फिर एक परवलयाकार भाग आता है जब पहला पत्थर जमीन पर गिर जाता है और केवल दूसरा पत्थर गति में रहता है, जिससे सापेक्ष स्थिति में एक नॉन-लीनियर परिवर्तन आता है।
In simple words: We calculate the positions of two stones thrown upwards from a cliff. The relative position of the second stone with respect to the first is found to be linear with time (\(x = 15t\)) until the first stone hits the ground. After the first stone lands, only the second stone is in motion, and the relative position becomes quadratic (parabolic) because the first stone's position is constant.

🎯 Exam Tip: For relative motion problems under gravity, remember that the relative acceleration between two objects is zero if both are moving under gravity alone. This simplifies the relative position equation to a linear one. Once one object stops, the relative motion becomes non-uniform with respect to that object.

 

Question 27. किसी निश्चित दिशा के अनुदिश चल रहे किसी कण का चाल-समय ग्राफ चित्र-3.17 में दिखाया गया है। कण द्वारा
(a) t = 0s से t= 10 s,
(b) t = 2s से 6s के बीच तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
(a) तथा (b) में दिए गए अन्तरालों की अवधि मेंकण की औसत चाल क्या है?


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.17(a) और (b) एक चाल-समय ग्राफ को दर्शाता है जो किसी कण की एक निश्चित दिशा में गति को दिखाता है। ऊर्ध्वाधर अक्ष पर चाल (ms-1) और क्षैतिज अक्ष पर समय (s) है। ग्राफ एक त्रिभुज के आकार का है, जिसकी चाल t=0 पर 0 से शुरू होकर t=5s पर 12 ms-1 तक बढ़ती है और फिर t=10s पर वापस 0 ms-1 हो जाती है, जो कण की त्वरण और मंदन गति को दर्शाता है।
Answer: (a) \(t = 0\) से \(t = 10\) सेकण्ड के बीच कण द्वारा तय की गयी दूरी = △OAB का क्षेत्रफल
\( = \frac{1}{2} \times OB \times EA \)
\( = \frac{1}{2} \times (10 \text{ सेकण्ड}) \times (12-0) \text{ मी/सेकण्ड} \)
\( = 60 \text{ मीटर} \)
(b) समान कोणिक AOCD तथा AOEA से,
\( \frac{CD}{EA} = \frac{OC}{OE} \)
या
\( CD = \frac{OC}{OE} \times EA \)
\( = \frac{2 \text{ सेकण्ड}}{5 \text{ सेकण्ड}} \times 12 \text{ मी/से} \)
\( = 4.8 \text{ मी/से} \)
समान कोणिक AFGB तथा AEAB से,
\( \frac{FG}{EA} = \frac{FB}{EB} \)
या
\( FG = \frac{FB}{EB} \times EA \)
\( = \frac{(10-6) \text{ सेकण्ड}}{(10-5) \text{ सेकण्ड}} \times 12 \text{ मी/से} = 9.6 \text{ मी/से} \)
t = 2 सेकण्ड से t = 6 सेकण्ड के बीच कण द्वारा तय की गयी दूरी
= समलम्ब चतुर्भुज CDAE का क्षेत्रफल + समलम्ब चतुर्भुज EAGF का क्षेत्रफल
\( = \frac{1}{2} (CD + EA) \times CE + \frac{1}{2} (EA + FG) \times EF \)
\( = \frac{1}{2} [(4.8+12) \text{ मी/से} \times (5-2) \text{ से}] + \frac{1}{2} [(12 + 9.6) \text{ मी/से} \times (6-5) \text{ से}] \)
\( = (25.2 + 10.8) \text{ मी} = 36.0 \text{ मीटर} \)
(a) \(t = 0\) सेकण्ड से \(t = 10\) सेकण्ड के बीच औसत चाल
\( = \frac{\text{तय की गयी दूरी}}{\text{समयान्तराल}} = \frac{60 \text{ मीटर}}{10 \text{ सेकण्ड}} = 6 \text{ मी/से} \)
(b) \(t = 2\) सेकण्ड से \(t = 6\) सेकण्ड के बीच औसत चाल
\( = \frac{\text{तय की गयी दूरी}}{\text{समयान्तराल}} = \frac{36 \text{ मीटर}}{4 \text{ सेकण्ड}} = 9 \text{ मी/से} \)
In simple words: The distance covered by the particle is the area under its speed-time graph. For the 0-10s interval, it's the area of the entire triangle (60m). For the 2-6s interval, it's the area of two trapezoids, which requires calculating speeds at 2s and 6s using similar triangles, resulting in 36m. Average speed is then total distance divided by total time.

🎯 Exam Tip: The area under a speed-time graph gives the distance covered. For non-linear segments, break the area into simpler geometric shapes like triangles and trapezoids. Similar triangles can be used to find intermediate speed values.

 

Question 28. एकविमीय गति में किसीकण का वेग-समय ग्राफ चित्र-3.18 में दिखाया गया है-नीचे दिए सूत्रों में t₁ से t2 तक के समय अन्तराल की अवधि में कण की गति का वर्णन करने के लिए कौन-से सूत्र सही हैं
(i) \(x(t_2) = x(t_1) + v(t_1) (t_2 - t_1) + (1/2) a (t_2-t_1)^2\)
(ii) \(v(t_2) = v(t_1) + a (t_2-t_1)\)
(iii) \(v_{average} = [x(t_2) - x(t_1)]/(t_2-t_1)\)
(iv) \(a_{average} = [v(t_2) - v(t_1)]/(t_2-t_1)\)
(v) \(x(t_2) = x(t_1) + v_{average} (t_2 - t_1)+(1/2) a_{average} (t_2-t_1)^2\)
(vi) \(x(t_2) - x(t_1)\) = t-अक्ष तथा दिखाई गई बिन्दुकित रेखा के बीच दर्शाए गए वक्र के
अन्तर्गत आने वाला क्षेत्रफल।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.18 एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है जो एक कण की एकविमीय गति को दिखाता है। इसमें वेग (v) ऊर्ध्वाधर अक्ष पर और समय (t) क्षैतिज अक्ष पर है, और वक्र एक गैर-रेखीय गति को प्रदर्शित करता है, जिसमें \(t_1\) से \(t_2\) तक के समय अंतराल को चिह्नित किया गया है।
Answer: उत्तरः
(i) यह सही नहीं है, क्योंकि \(t_1\), तथा \(t_2\), के बीच अन्तराल में \(a\) स्थिर नहीं है। (ii) यह सूत्र भी सही नहीं है। यहाँ भी \(a\)
स्थिर नहीं है। (iii) यह सूत्र सही है। (iv) यह सूत्र सही है। (v) यह सूत्र सही नहीं है, क्योंकि इसमें औसत त्वरण को
प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। (vi) यह सूत्र सही है।
In simple words: This question asks to identify the correct kinematic equations for a particle with non-uniform acceleration over a time interval \(t_1\) to \(t_2\) given its v-t graph. Only the definitions of average velocity and average acceleration, and the displacement as the area under the v-t graph, are universally correct for non-uniform acceleration.

🎯 Exam Tip: For motion with non-uniform acceleration, standard kinematic equations (like those involving constant 'a') do not apply directly. Use definitions of average velocity and acceleration. Displacement is always the area under the v-t graph.

Exam-Oriented Questions

Multiple Choice Questions

 

Question 1. यदि कोई वस्तु पृथ्वी की ओर मुक्त रूप से गिरती है, तो वस्तु की गति होगी
(i) एकविमीय
(ii) द्विविमीय गति
(iii) त्रिविमीय गुति
(iv) इनमें से कोई नहीं


Answer: (i) एकविमीय
In simple words: When an object falls freely towards Earth, it moves only along a single straight line path (vertically downwards). This is an example of one-dimensional motion.

🎯 Exam Tip: One-dimensional motion occurs when an object moves only along a straight line, which can be described using a single coordinate axis.

 

Question 2. एक वस्तु द्वारा चली गई दूरी समय के अनुक्रमानुपाती है। इसका अर्थ है कि वस्तु
(i) समान चाल से चल रही है ।
(ii) की चाल शून्य है।
(iii) समान वेग से चल रही है।
(iv) समान त्वरण से चल रही है।


Answer: (iii) समान वेग से चल रही है।
In simple words: If the distance traveled by an object is directly proportional to time (distance = k * time), it implies that the object is moving with a constant speed. In one-dimensional motion, constant speed in a given direction means constant velocity.

🎯 Exam Tip: When distance is directly proportional to time, it means constant speed. For motion in a straight line without changing direction, constant speed implies constant velocity.

 

Question 3. एक वस्तु का चाल-समय ग्राफ X-अक्ष के समानान्तर एक रेखा है। इसका अर्थ है।
(i) वस्तु समान गति से चल रही है।
(ii) वस्तु असमान गति से चल रही है।
(iii) वस्तु स्थिर है।
(iv) वस्तु त्वरित गति से चल रही है।


Answer: (i) वस्तु समान गति से चल रही है।
In simple words: A speed-time graph parallel to the X-axis (time axis) means that the speed value remains constant over time. This indicates that the object is moving with uniform speed.

🎯 Exam Tip: In a speed-time graph, a horizontal line indicates constant speed. A zero speed means the object is at rest.

 

Question 4. वेग अथवा चाल का मात्रक है।
(i) मीटर-सेकण्ड
(ii) मीटर/सेकण्ड
(iii) मीटर/सेकण्ड\(^2\)
(iv) मीटर-सेकण्ड\(^2\)


Answer: (ii) मीटर/सेकण्ड
In simple words: Speed and velocity are both defined as distance or displacement per unit time. The standard SI unit for distance and displacement is meters, and for time is seconds, so the unit for speed/velocity is meters per second.

🎯 Exam Tip: Always remember the SI units for fundamental physical quantities: length (meter), mass (kilogram), time (second). Derived units like speed (\(m/s\)) and acceleration (\(m/s^2\)) are built from these.

 

Question 5. दो रेलगाड़ियाँ क्रमश \(u\) तथा \(v\) वेग से विपरीत दिशाओं में चल रही हैं। पहली गाड़ी के सापेक्ष दूसरी गाड़ी का वेग होगा
(i) \(v-u\)
(ii) \(v+u\)
(iii) \(u-v\)
(iv) शून्य


Answer: (ii) \(u+v\)
In simple words: When two objects move in opposite directions, their relative speed is the sum of their individual speeds. If the first train has speed \(u\) and the second has speed \(v\), and they move towards each other, an observer on the first train would see the second train approaching at a speed of \(u+v\).

🎯 Exam Tip: For relative velocity, if objects move in the same direction, subtract their speeds. If they move in opposite directions, add their speeds.

 

Question 6. पृथ्वी तल से ऊध्वाधर ऊपर की ओर फेंका गया पिण्ड जब महत्तम ऊँचाई पर होता है, तो उसका
(i) वेग अधिकतम होता है।
(ii) त्वरण शून्य होता है।
(iii) त्वरण अधिकतम होता है।
(iv) वेग शून्य होता है।


Answer: (iv) वेग शून्य होता है
In simple words: When an object is thrown vertically upwards, its velocity continuously decreases due to gravity. At the highest point of its trajectory, the object momentarily stops before falling back down, meaning its instantaneous velocity is zero. However, the acceleration due to gravity is still acting downwards.

🎯 Exam Tip: At the maximum height of a projectile, the vertical component of velocity is zero, but the acceleration due to gravity is still \(g\) (downwards).

 

Question 7. एक वस्तु विरामावस्था से \(h\)ऊँची मीनार की चोटी से गिरती है। पृथ्वी पर पहुँचने पर उसका वेग होगा


Answer: (iii) \( \sqrt{2gh} \)
In simple words: For an object falling from rest from a height \(h\) under gravity, its final velocity can be found using the kinematic equation \(v^2 = u^2 + 2as\). Since \(u=0\), \(a=g\), and \(s=h\), the final velocity \(v = \sqrt{2gh}\).

🎯 Exam Tip: Remember the three equations of motion for constant acceleration. For free fall, initial velocity is often zero, and acceleration is \(g\).

 

Question 8. दो पत्थर परस्पर 3:5 के अनुपात के वेगों से ऊध्वाधरतः ऊपर की ओर फेंके जाते हैं। यदि वे क्रमश \(h_1\) व \(h_2\) ऊँचाई तक जाएँ तो \(h_1: h_2\) बराबर होगा
(i) 3: 5
(ii) 5:3
(iii) 15: 1
(iv) 9: 25


Answer: (iv) 9:25
In simple words: For an object thrown vertically upwards, the maximum height reached (\(h\)) is given by \(h = \frac{u^2}{2g}\). So, \(h\) is proportional to \(u^2\). If the ratio of initial velocities is 3:5, then the ratio of maximum heights will be \(3^2 : 5^2\), which is 9:25.

🎯 Exam Tip: Understand the relationship between initial velocity and maximum height for vertical motion under gravity. \(h \propto u^2\) is a common and useful relation.

 

Question 9. एक कण का प्रारम्भिक वेग 10 मीटर/सेकण्ड तथा मन्दन 2 मीटर/सेकण्ड है। कण द्वारा 5वें सेकण्ड में चली गई दूरी है।
(i) 1 मीटर
(ii) 19 मीटर
(iii) 5 मीटर
(iv) 75 मीटर


Answer: (i) 1 मीटर
In simple words: To find the distance covered in the 5th second, we use the formula \(S_n = u + \frac{a}{2}(2n-1)\). Given \(u = 10 \text{ m/s}\), retardation (\(a = -2 \text{ m/s}^2\)), and \(n = 5\). Plugging these values, \(S_5 = 10 + \frac{-2}{2}(2 \times 5 - 1) = 10 - 1(9) = 10 - 9 = 1 \text{ meter}\).

🎯 Exam Tip: For distance in the nth second, use the specific formula \(S_n = u + \frac{a}{2}(2n-1)\). Be careful with the sign of acceleration for retardation.

 

Question 10. मीनार की चोटी से छोड़ा गया पत्थर पृथ्वी पर 4 सेकण्ड में पहुँचता है। मीनार की ऊँचाई है
(i) 20 मीटर
(ii) 40 मीटर
(iii) 80 मीटर
(iv) 160 मीटर


Answer: (iii) 80 मीटर
In simple words: For an object dropped from rest, the distance fallen is \(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\). Since \(u=0\), \(h = \frac{1}{2}gt^2\). Using \(g \approx 10 \text{ m/s}^2\) and \(t=4 \text{ s}\), we get \(h = \frac{1}{2} \times 10 \times 4^2 = 5 \times 16 = 80 \text{ meters}\).

🎯 Exam Tip: When an object is "dropped" or "released from rest", its initial velocity (\(u\)) is zero. Use \(g = 9.8 \text{ m/s}^2\) or \(10 \text{ m/s}^2\) as specified or appropriate for calculations.

 

Question 11. एक पिण्ड को पृथ्वी से ऊपर की ओर 100 मी/सेकण्ड के वेग से फेंका जाता है। वह वापस पृथ्वी पर पहुँचने में समय लेगा
(लगभग)
(i) 10 सेकण्ड
(ii) 20 सेकण्ड
(iii) 15 सेकण्ड
(iv) 5 सेकण्ड


Answer: (ii) 20 सेकण्डे
In simple words: The time taken to reach the maximum height is \(t_{up} = \frac{u}{g}\). The total time of flight for an object thrown upwards and returning to its starting point is \(T = 2 t_{up} = \frac{2u}{g}\). Given \(u=100 \text{ m/s}\) and \(g \approx 10 \text{ m/s}^2\), \(T = \frac{2 \times 100}{10} = 20 \text{ seconds}\).

🎯 Exam Tip: For vertical projectile motion, the time of ascent equals the time of descent if air resistance is negligible, and the object returns to its initial level.

 

Question 12. एक पिण्ड X-अक्ष की दिशा में इस प्रकार चलता है कि निर्देशांक \(x\), समय \(t\) (सेकण्ड) के साथ समीकरण \( = 2- 5t + 6t^2\) मीटर के अनुसार परिवर्तित होता है। पिण्ड का प्रारम्भिक वेग है।
(i) – 5 मी/से
(ii)-3 मी/से
(iii) 6 मी/से
(iv) 3 मी/से


Answer: (i) -5 मी/से ।
In simple words: The position of the particle is given by \(x(t) = 2 - 5t + 6t^2\). To find the velocity, we differentiate position with respect to time: \(v(t) = \frac{dx}{dt} = -5 + 12t\). The initial velocity is when \(t=0\), so \(v(0) = -5 + 12(0) = -5 \text{ m/s}\).

🎯 Exam Tip: Velocity is the first derivative of position with respect to time, and acceleration is the second derivative. Initial velocity is found by setting \(t=0\) in the velocity equation.

 

Question 13. 1000 किग्रा द्रव्यमान की एक कार 40 मी/से की चाल से गति कर रही है। इसे रोकने के लिए ब्रेक लगाया जाता है। यदि ब्रेक का बल 4000 न्यूटन हो, तो कार को रोकने में आवश्यक समय होगा।
(i) 5 सेकण्ड
(ii) 10 सेकण्ड
(iii) 15 सेकण्ड
(iv) 20 सेकण्ड


Answer: (ii) 10 सेकण्ड
In simple words: First, find the acceleration (retardation) using Newton's second law, \(F = ma\), so \(a = F/m\). Then use the kinematic equation \(v = u + at\) to find the time \(t\). Given \(m=1000 \text{ kg}\), \(u=40 \text{ m/s}\), \(v=0\), and \(F=-4000 \text{ N}\).
\(a = \frac{-4000}{1000} = -4 \text{ m/s}^2\).
\(0 = 40 + (-4)t \implies 4t = 40 \implies t = 10 \text{ seconds}\).

🎯 Exam Tip: Remember to use the correct sign for force and acceleration when dealing with retardation (negative values). Combine Newton's laws with kinematic equations.

 

Question 14. 2000 किग्रा द्रव्यमान की एक कार 20 मी/से की चाल से गति कर रही है। ब्रेक का प्रयोग कर कार को रोका जाता है।
यदि मन्दक बल 2000 N हो, तो कार को रोकने में आवश्यक समय होगा।
(i) 5 सेकण्ड
(ii) 10 सेकण्ड
(iii) 15 सेकण्ड
(iv) 20 सेकण्ड


Answer: (iv) 20 सेकण्ड
In simple words: Similar to the previous question, calculate acceleration from \(F=ma\). Given \(m=2000 \text{ kg}\), \(u=20 \text{ m/s}\), \(v=0\), and \(F=-2000 \text{ N}\).
\(a = \frac{-2000}{2000} = -1 \text{ m/s}^2\).
\(0 = 20 + (-1)t \implies t = 20 \text{ seconds}\).

🎯 Exam Tip: Ensure consistency in units and signs. Retardation means negative acceleration, so the force is in the opposite direction to velocity.

 

Question 15. एक कार सर्वप्रथम 5 किमी दूरी पूर्व दिशा में तय करती है उसके बाद 12 किमी दूरी उत्तर दिशा में तय करती है। कार द्वारा
तय की गई कुल दूरी तथा विस्थापन होगा
(i) 17 किमी, 13 किमी.
(ii) 15 किमी, 40 किमी
(iii) 50 किमी, 35 किमी
(iv) 5 किमी, 35 किमी


Answer: (i) 17 किमी, 13 किमी.
In simple words: Total distance is the sum of the magnitudes of individual paths: \(5 \text{ km} + 12 \text{ km} = 17 \text{ km}\). Displacement is the shortest straight-line distance from start to end. Since the movements are perpendicular (East then North), use the Pythagorean theorem: Displacement \( = \sqrt{5^2 + 12^2} = \sqrt{25 + 144} = \sqrt{169} = 13 \text{ km}\).

🎯 Exam Tip: Distance is a scalar (total path length), while displacement is a vector (shortest path from start to end). For perpendicular movements, displacement calculation often involves the Pythagorean theorem.

 

Question 16. M.K.S. पद्धति में त्वरण का मात्रक है।
(i) मीटर/सेकण्ड
(ii) न्यूटन/मीटर
(iii) मीटर/सेकण्ड\(^2\)
(iv) किग्रा-मीटर/सेकण्ड


Answer: (iii) मीटर/सेकण्ड\(^2\)
In simple words: Acceleration is the rate of change of velocity. Since velocity is in meters per second (\(m/s\)) and time is in seconds (\(s\)), acceleration is expressed in meters per second per second, or meters per second squared (\(m/s^2\)).

🎯 Exam Tip: Know the base units in the MKS (meter-kilogram-second) system. Acceleration is a derived unit.

 

Question 17. चाल-समय ग्राफ का ढाल प्रदर्शित करता है।
(i) चाल
(ii) त्वरण
(iii) विस्थापन
(iv) द्वेग


Answer: (ii) त्वरण
In simple words: In a speed-time graph, the slope represents the rate of change of speed, which is acceleration.

🎯 Exam Tip: Understand that the slope of a position-time graph gives velocity, and the slope of a velocity-time graph (or speed-time graph) gives acceleration. The area under a velocity-time graph gives displacement.

 

Question 18. एक गतिमान वस्तु द्वारा तय की गयी दूरी समय के वर्ग के अनुक्रमानुपाती है। वस्तु का त्वरण
(i) बढ़ रहा है।
(ii) घट रहा है।
(iii) शून्य है
(iv) नियत है।


Answer: (iv) नियत है।
In simple words: If distance \(s \propto t^2\), then \(s = kt^2\) for some constant \(k\). Comparing this with \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\), if \(u=0\), then \(\frac{1}{2}a = k\), so \(a = 2k\). This means acceleration is a constant value.

🎯 Exam Tip: For \(s \propto t^2\), it indicates motion with constant acceleration starting from rest (or zero initial velocity). If \(s \propto t\), it indicates constant velocity (zero acceleration).

 

Question 19. जड़त्वीय निर्देश तन्त्र में त्वरण \(a\) का मान शून्य होता है, जब
(i) \(F > 1\)
(ii) \(F<1\)
(iii) \(F =1\)
(iv) \(F = 0\)


Answer: (iv) \(F = 0\)
In simple words: According to Newton's second law, \(F=ma\). In an inertial frame of reference, if the net external force \(F\) acting on an object is zero, then its acceleration \(a\) must also be zero (assuming \(m \neq 0\)). This means the object is either at rest or moving with constant velocity.

🎯 Exam Tip: An inertial frame is one where Newton's first law (and thus second law) holds. Zero net force implies zero acceleration, meaning constant velocity (which includes zero velocity).

Very Short Answer Questions

 

Question 1. विस्थापन से क्या तात्पर्य है?


Answer: किसी गतिशील वस्तु की प्रारभिक और अन्तिम स्थितियों के बीच न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं। यह एक सदिश राशि है।
In simple words: Displacement is the shortest straight-line distance between an object's initial and final positions, including its direction.

🎯 Exam Tip: Displacement is a vector quantity, meaning it has both magnitude and direction. It can be zero even if the distance traveled is non-zero.

 

Question 2. दूरी तथा विस्थापन में से कौन सदिश राशि है?


Answer: विस्थापन ।
In simple words: Displacement is a vector quantity, as it has both magnitude and direction, while distance is a scalar quantity, only having magnitude.

🎯 Exam Tip: Distinguish between scalar quantities (like distance, speed, mass) and vector quantities (like displacement, velocity, force) and vector quantities (like acceleration).

 

Question 3. वेग-समय ग्राफ तथा समय-अक्ष के बीच का क्षेत्रफल क्या प्रदर्शित करता है?


Answer: विस्थापन ।
In simple words: The area under a velocity-time graph (between the graph line and the time axis) represents the displacement of the object during that time interval.

🎯 Exam Tip: Slope of x-t graph is velocity, slope of v-t graph is acceleration, area under v-t graph is displacement.

 

Question 4. क्या किसी वस्तु का वेग नियत तथा चाल परिवर्ती हो सकती है?


Answer: नहीं।
In simple words: No, because velocity includes both speed and direction. If velocity is constant, it means both the speed and direction are constant, so speed cannot be variable.

🎯 Exam Tip: Constant velocity implies constant speed and constant direction. Constant speed does not necessarily imply constant velocity (e.g., uniform circular motion).

 

Question 5. स्थिति-समय ग्राफ का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?


Answer: वेग ।
In simple words: The slope (gradient) of a position-time graph gives the rate of change of position, which is the velocity of the object.

🎯 Exam Tip: Differentiating position with respect to time gives velocity, and graphically, this is the slope of the x-t graph.

 

Question 6. एक वस्तु ऊध्वधर ऊपर की ओर फेंकी जाती है तथा वह \(h\) ऊँचाई तक जाकर प्रेक्षण बिन्दु पर लौट आती है। वस्तु द्वारा
तय की गई दूरी व विस्थापन के मान बताइए ।


Answer: दूरी = \(2h\), विस्थापन = \(0\).
In simple words: If an object is thrown upwards to a height \(h\) and returns to its starting point, the total distance traveled is \(h\) (up) + \(h\) (down) = \(2h\). However, since the final position is the same as the initial position, its displacement is zero.

🎯 Exam Tip: Distance accumulates path length, while displacement only cares about the start and end points.

 

Question 7. एक मीनार की चोटी से एक गेंद किसी निश्चित वेग से ऊध्वधर ऊपर की ओर तथा दूसरी गेंद उसी वेग से ठीक नीचे की
ओर प्रक्षेपित की जाती हैं, कौन-सी गेंद को पृथ्वी से टकराने पर
वेग अधिक होगा?


Answer: दोनों गेंदें साथ-साथ टकरायेंगी, क्योंकि ऊध्वाधर दिशा में दोनों गेंदों के प्रारम्भिक
वेग शून्य हैं, तथा दोनों पर त्वरण का मान \(g\) है।
In simple words: When a ball is thrown upwards from a height and another is thrown downwards from the same height with the same initial speed, they both reach the ground with the same final speed. This is because the ball thrown upwards will return to the initial height with the same speed it was launched (but in the opposite direction), and from that point, its motion is identical to the ball thrown downwards.

🎯 Exam Tip: For motion under gravity, if an object passes a certain point with a specific speed, it will pass the same point again (on its way down, if thrown up) with the same speed. The final speed at the ground only depends on the initial speed and the height, not the initial direction of throw.

 

Question 8. एक कण प्रारम्भ में 3 मीटर पूर्व एवं फिर 4 मीटर उत्तर की दिशा में चलकर अपनी यात्रा पूर्ण करता है। गणना कीजिए
(i) कण द्वारा चली गयी दूरी,
(ii) कण का विस्थापन ।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 3.19 एक कण की गति को दर्शाता है। कण बिंदु A से शुरू होता है, 3 मीटर पूर्व दिशा में बिंदु B तक चलता है, और फिर बिंदु B से 4 मीटर उत्तर दिशा में बिंदु C तक जाता है। यह एक समकोण त्रिभुज बनाता है जहां विस्थापन AC कर्ण होगा।
Answer: हलः
(i) चित्र 3.19 से स्पष्ट है कि कण द्वारा चली गयी।
सम्पूर्ण दूरी = AB+ BC = 3+ 4 मीटर = 7 मीटर
(ii) कण का प्रारम्भिक बिन्दु A'से
कुल विस्थापन \( = AC = \sqrt{AB^2 + BC^2} \)
\( = \sqrt{3^2 + 4^2} \text{ मीटर} = 5 \text{ मीटर} \)
In simple words: The total distance is the sum of the magnitudes of each path segment: \(3 \text{ m} + 4 \text{ m} = 7 \text{ m}\). The displacement is the straight-line distance from the starting point to the final point. Since the movements are perpendicular (East then North), we use the Pythagorean theorem: Displacement \( = \sqrt{3^2 + 4^2} = 5 \text{ m}\).

🎯 Exam Tip: Distance is scalar; displacement is vector. For orthogonal movements, displacement calculation often involves the Pythagorean theorem.

 

Question 9. अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र क्या है?


Answer: वे निर्देश तन्त्र, जिसमें न्यूटन के गति विषयक नियमों का पालन नहीं होता है, अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र कहलाते हैं।
In simple words: Non-inertial frames of reference are those in which Newton's laws of motion do not hold true without introducing fictitious forces (like centrifugal force or Coriolis force). These frames are accelerating relative to an inertial frame.

🎯 Exam Tip: An inertial frame is at rest or moves with constant velocity. A non-inertial frame is accelerating.

 

Question 10. एक कार किसी दूरी के आधे भाग को 40 किमी/घण्टा तथा शेष बचे हुए भाग को 60 किमी/घण्टा की चाल से तय करती
है। कार की औसत चाल की गणना कीजिए ।


Answer: हलः
माना कुल दूरी \(x\) है तथा आधी-आधी दूरियों के समय क्रमशः \(t_1\) एवं \(t_2\) हैं।
तब,
समय \(t_1 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{x/2}{40} = \frac{x}{80}\) घण्टा
इसी प्रकार
समय \(t_2 = \frac{x/2}{60} = \frac{x}{120}\) घण्टा
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{x}{\frac{x}{80} + \frac{x}{120}} \)
\( = \frac{x}{\frac{3x + 2x}{240}} = \frac{x}{\frac{5x}{240}} = \frac{240x}{5x} \)
\( = 48 \text{ किमी/घण्टा} \)
In simple words: To find the average speed, divide the total distance by the total time. If the total distance is \(x\), the time for the first half is \(t_1 = \frac{x/2}{40}\) and for the second half is \(t_2 = \frac{x/2}{60}\). Total time is \(t_1 + t_2\). Then, average speed \( = \frac{x}{t_1 + t_2}\), which calculates to 48 km/h.

🎯 Exam Tip: Average speed is not simply the average of speeds unless the time intervals are equal. It's always total distance / total time.

 

Question 11. ऊर्ध्वाधर दिशा में दागी गई एक गोली पुनः उसी बिन्दु पर आ गिरती है। उसके द्वारा तय की गई दूरी कितनी होगी?


Answer: गोली पहले ऊपर की ओर जाकर फिर वापस नीचे की ओर उसी बिन्दु पर आकर गिरती है जिस बिन्दु से गोली छोड़ी
गई थी। अतः गोली द्वारा चली गई दूरी उसके द्वारा तय की गई ऊंचाई की दोगुनी होगी ।
In simple words: If a bullet is fired vertically upwards and returns to its starting point, it first travels up to a certain maximum height and then falls back down the same height. Therefore, the total distance covered is twice the maximum height it achieved.

🎯 Exam Tip: Distance is the total path length. If an object goes up and comes back down to the same level, the distance is \(2 \times (\text{maximum height})\), while the displacement is zero.

 

Question 12. तात्क्षणिक वेग क्या है?


Answer: किसी क्षण विशेष पर गतिशील पिण्ड का जो चेग होता है, उसे तत्क्षणिक वेग कहते हैं। इसे \(dt\) द्वारा प्रदर्शित करते
हैं।
In simple words: Instantaneous velocity is the velocity of an object at a specific moment in time. It is defined as the limit of the average velocity as the time interval approaches zero.

🎯 Exam Tip: Instantaneous velocity is the derivative of position with respect to time (\(v = \frac{dx}{dt}\)).

 

Question 13. विस्थापन-समय ग्राफ समय-अक्ष के समान्तर सरल रेखा है। वेग तथा त्वरण के मान क्या होंगे?


Answer: दोनों शून्य ।
In simple words: If a displacement-time graph is a straight line parallel to the time axis, it means the displacement is constant, and the object's position is not changing. Therefore, its velocity and acceleration are both zero (the object is at rest).

🎯 Exam Tip: A horizontal line on a position-time graph signifies zero velocity. Zero velocity implies zero acceleration.

 

Question 14. वेग-समय ग्राफ का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?


Answer: त्वरण ।
In simple words: The slope (gradient) of a velocity-time graph represents the rate of change of velocity, which is acceleration.

🎯 Exam Tip: Remember the graphical interpretations: slope of x-t is v, slope of v-t is a, area under v-t is displacement.

 

Question 15. यदि त्वरण का S.I. मात्रक मी से 2 है, तो मन्दन का S.I. मात्रक क्या होगा?


Answer: मी से 2।
In simple words: Retardation (मन्दन) is simply negative acceleration. While it describes a specific type of acceleration (decreasing speed), its physical dimension and SI unit remain the same as acceleration, which is meters per second squared (\(m/s^2\)).

🎯 Exam Tip: Retardation is a vector quantity (acceleration) acting opposite to the direction of motion. Its unit is identical to that of acceleration.

 

Question 16. ऋणात्मक त्वरण से क्या तात्पर्य है?


Answer: वेग घटने की समय दर ऋणात्मक त्वरण कहलाती है।
In simple words: Negative acceleration means that the velocity of an object is decreasing in the direction of motion, or increasing in the opposite direction. If we define positive velocity in one direction, then negative acceleration means the object is slowing down if moving in the positive direction, or speeding up if moving in the negative direction. It is also known as retardation or deceleration when it causes a decrease in speed.

🎯 Exam Tip: Negative acceleration doesn't always mean slowing down. It means acceleration is in the negative direction. If velocity is also negative, the object speeds up.

 

Question 17. बताइए पृथ्वी पर वर्षा की बूंदें एकसमान वेग से गिरती हैं या एकसमान त्वरण से ।


Answer: एकसमान त्वरण से।
In simple words: Assuming air resistance is negligible, raindrops fall under the constant acceleration due to gravity, which is a uniform acceleration.

🎯 Exam Tip: In introductory physics, free-fall problems often neglect air resistance, implying constant acceleration due to gravity.

 

Question 18. वेग-परिवर्तन की समय दर को क्या कहते हैं?


Answer: त्वरण ।
In simple words: The rate at which the velocity of an object changes over time is defined as acceleration.

🎯 Exam Tip: This is the fundamental definition of acceleration.

 

Question 19. त्वरण-समय ग्राफ तथा समय-अक्ष के बीच का क्षेत्रफल क्या प्रदर्शित करता है?


Answer: वेग-परिवर्तन ।
In simple words: The area under an acceleration-time graph (between the graph line and the time axis) represents the change in velocity (or velocity-change) of the object during that time interval.

🎯 Exam Tip: Area under a-t graph gives \(\Delta v\). Area under v-t graph gives \(\Delta x\) (displacement).

 

Question 20. एक बच्चा एकसमान वेग से चलती हुई ट्रेन, जो सीधी पटरियों पर गतिमान है, में बैठा है, वह एक गेंद हवा में उछालता है,
थोड़े समय बाद गेंद कहाँ गिरेगी?


Answer: उसके हाथ में ।
In simple words: If the train is moving at a constant velocity, both the child and the ball (after being thrown) have the same horizontal velocity as the train. When the child throws the ball straight up, it retains this horizontal velocity. Because there is no horizontal acceleration, the ball moves forward horizontally with the train and falls back into the child's hands.

🎯 Exam Tip: This is an example of relative motion and the independence of horizontal and vertical motion. If the horizontal velocity of the system (train + child + ball) is constant, the ball will land in the child's hands.

 

Question 21. एक मीनार की चोटी से एक गेंद क्षैतिज दिशा में किसी निश्चित वेग से फेंकी जाती है, उसी क्षण दूसरी गेंद वहीं से ऊर्ध्वाधर
नीचे की ओर मुक्त रूप से गिरने के लिए छोड़ी जाती है, कौन-सी गेंद पृथ्वी पर पहले टकराएगी?


Answer: दोनों गेंदें साथ-साथ टकरायेंगी, क्योंकि ऊध्वाधर दिशा में दोनों गेंदों के प्रारम्भिक
वेग शून्य हैं, तथा दोनों पर त्वरण का मान \(g\) है।
In simple words: Both balls will hit the ground simultaneously. The vertical motion of a projectile is independent of its horizontal motion. Both balls start at the same height with zero initial vertical velocity and accelerate downwards under gravity at the same rate \(g\). Thus, they will take the same time to fall to the ground.

🎯 Exam Tip: The time of flight for a projectile launched horizontally from a height is the same as for an object dropped from rest from the same height, assuming no air resistance.

 

Question 22. एकसमान त्वरित गति करने वाले एक पिण्ड द्वारा 7वें तथा 9वें सेकण्ड में तय की गई दूरियाँ क्रमशः 20 मी तथा 24मी हैं, तो वह पिण्ड 15वें सेकण्ड में कितनी दूरी तय करेगा?


Answer:

हलः
7वें सेकण्ड में चली गयी दूरी = 20 मी
\[ u + \frac{1}{2}a(2 \times 7-1)= 20 \] \[ 2u+13a = 40 \quad ...(1) \] 9वें सेकण्ड में चली गयी दूरी = 24 मी
\[ u+\frac{1}{2}a(2 \times 9-1)= 24 \] \[ 2u+17a = 48 \quad ...(2) \] समी० (1) व (2) को हल करने पर,
\[ a = 2 \text{ मी/से}^2 \] तथा \[ u = 7 \text{ मी/से} \] अतः 15वें सेकण्ड में चली गई दूरी
\[ S_{15} = u + \frac{a}{2}(2n - 1) \] \[ S_{15} = 7 + \frac{2}{2}(2 \times 15 - 1) = 7 + 1(29) = 36 \text{ मी} \]In simple words: इस प्रश्न में, एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु द्वारा 7वें और 9वें सेकंड में तय की गई दूरियों का उपयोग करके प्रारंभिक वेग और त्वरण की गणना की गई है। फिर, इन मानों का उपयोग करके 15वें सेकंड में तय की गई दूरी ज्ञात की गई।

🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि nवें सेकण्ड में चली गई दूरी का सूत्र `\( S_n = u + \frac{a}{2}(2n-1) \)` होता है, और इसे कुल दूरी के सूत्र `\( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \)` से अलग समझें।

 

Question 23. क्या कोई वस्तु जिसका वेग शून्य हो, त्वरित हो सकती है?


Answer: हाँ, जब वस्तु अपनी गति की दिशा को उत्क्रमित (Reversal) करती है, तो क्षण भर के लिए उसका वेग शून्य हो जाता है, अपितु उस पर अब भी -a परिमाण को त्वरण कार्य करता है।In simple words: हाँ, यह संभव है कि किसी वस्तु का वेग शून्य हो लेकिन उसका त्वरण अशून्य हो, जैसे कि ऊपर की ओर फेंकी गई गेंद अपनी अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचने पर, या सरल आवर्त गति में अपनी चरम स्थिति पर।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है जो तात्क्षणिक वेग और त्वरण के बीच के अंतर का परीक्षण करता है।

 

Question 24. एक चलती हुई मोटरगाड़ी को ब्रेक लगाकर कुछ दूरी पर रोक लिया जाता है इसके लिए गति का समीकरण लिखिए।


Answer: \[ u^2 = 2ax \], जहाँ `\( a \)` = त्वरण (मन्दन), `\( x \)` = दूरी तथा `\( u \)` = प्रारम्भिक वेग ।In simple words: एक वाहन को रोकने के लिए, ब्रेक लगने के बाद उसकी प्रारंभिक वेग का वर्ग दोगुने त्वरण (मंदन) और तय की गई दूरी के गुणनफल के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: गति के तीसरे समीकरण `\( v^2 = u^2 + 2as \)` को समझें और इसे विराम स्थिति में आने वाले निकाय के लिए कैसे लागू करें (`\( v=0 \)` लेकर)।

 

Question 25. आपेक्षिक वेग से क्या तात्पर्य है?


Answer: जब दो वस्तुएँ किसी वेग से गतिमान होती हैं तो प्रति सेकण्ड उनके बीच के विस्थापन में होने वाले परिवर्तन को आपेक्षिक वेग कहते हैं।In simple words: आपेक्षिक वेग वह दर है जिससे दो गतिमान वस्तुओं के बीच की दूरी समय के साथ बदलती है।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक वेग की परिभाषा और अवधारणा को अच्छी तरह से समझें, क्योंकि यह कई भौतिकी समस्याओं का आधार है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. दूरी तथा विस्थापन में अंतर लिखिए।


Answer:
दूरीविस्थापन
• यह एक अदिश राशि है।• यह एक सदिश राशि है।
• यह किसी निश्चित समयान्तराल में पिण्ड द्वारा तय किए गए पथ की लम्बाई के बराबर होती है।• यह किसी निश्चित समयान्तराल में पिण्ड द्वारा तय किए गए पथ की प्रारम्भिक स्थिति से अन्तिम स्थिति तक की सरल रेखीय दूरी के बराबर होता है।
• यह पिण्ड के पथ की आकृति पर निर्भर करती है।• यह पिण्ड के पथ की आकृति पर निर्भर नहीं करता है।
• इसका मान विस्थापन के परिमाण के बराबर या उससे बड़ा होता है।• इसका परिमाण दूरी के बराबर या उससे छोटा होता है।
• यह आवश्यक नहीं है कि पिण्ड का विस्थापन शून्य होने पर उसके द्वारा चली गई दूरी भी शून्य हो।• पिण्ड द्वारा चली गई दूरी शून्य होने पर उसका विस्थापन भी शून्य होता है।
• यह सदैव धनात्मक होती है।• यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
In simple words: दूरी किसी वस्तु द्वारा तय किए गए कुल रास्ते की लम्बाई है, जबकि विस्थापन प्रारंभिक और अंतिम बिंदु के बीच की न्यूनतम सीधी रेखा दूरी है।

🎯 Exam Tip: दूरी एक अदिश राशि है (केवल परिमाण), जबकि विस्थापन एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों)। इन दोनों के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें।

 

Question 2. चाल तथा वेग में अंतर लिखिए।


Answer:चाल-किसी गतिशील वस्तु की चाल यह दर्शाती है कि वह वस्तु उस क्षण कितनी तेज चल रही है। किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में चली गई दूरी को वस्तु की चाल कहते हैं। यह एक अदिश राशि है। वेगः कोई वस्तु एकांक समयान्तराल में किसी दिशा में जितनी विस्थापित होती है, उसे उस दिशा में वस्तु का वेग कहते हैं। वेग एक सदिश राशि है।In simple words: चाल बताती है कि कोई वस्तु कितनी तेज़ चल रही है, जबकि वेग बताता है कि वह कितनी तेज़ चल रही है और किस दिशा में।

🎯 Exam Tip: चाल एक अदिश राशि है और वेग एक सदिश राशि है; यह अंतर भौतिकी में मूलभूत है।

 

Question 3. परिवर्ती चाल तथा औसत चाल से क्या तात्पर्य है?


Answer:परिवर्ती चाल-यदि कोई वस्तु समान समयान्तरालों में भिन्न-भिन्न दूरियाँ तय करती है तो वस्तु की चाल असमान या परिवर्ती कहलाती है। औसत चाल-अधिकतरे गतिशील वस्तुओं की चाल परिवर्तित होती रहती है तथा यह कई बार अपनी गति की दिशा भी बदलती है ऐसी अवस्था में उसकी औसत चाल ज्ञात की जाती है। अर्थात् किसी गतिमान वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी तथा लिए गये कुल समय के अनुपात को औसत चाल कहते हैं। अर्थात् \[ \text{औसत चाल}, u_{av} = \frac{\text{कुल तय की गई दूरी}}{\text{कुल समय}} \] यदि \[ \Delta t \] समयान्तराल में वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी \[ \Delta s \] हो, तो औसत चाल \[ = \frac{\Delta s}{\Delta t} \]In simple words: परिवर्ती चाल तब होती है जब वस्तु की गति की दर बदलती रहती है, जबकि औसत चाल कुल तय की गई दूरी को कुल समय से विभाजित करके निकाली जाती है।

🎯 Exam Tip: औसत चाल और औसत वेग के बीच का अंतर याद रखें; औसत चाल कुल दूरी पर आधारित होती है, जबकि औसत वेग कुल विस्थापन पर आधारित होता है।

 

Question 4. क्या एक गतिशील वस्तु के लिए यह सम्भव है कि उसकी कुछ औसत चाल हो लेकिन औसत वेग शुन्य हो?


Answer: हाँ, यह सम्भव है। उदाहरण-यदि कोई व्यक्ति किसी वृत्ताकार ट्रैक पर किसी स्थान से चलकर कुछ निश्चित समय पश्चात् उसी ट्रैक के उसी स्थान पर वापस लौट आता है, तो उसके द्वारा चली गयी दूरी = ट्रैक की परिधि तथा उसका विस्थापन = शून्य । अतः उसकी औसत चाल = दूरी/समय । तथा औसत वेग = विस्थापन/समयं = 0 /समय = 0In simple words: हाँ, यदि कोई वस्तु अपनी यात्रा के बाद उसी प्रारंभिक बिंदु पर लौट आती है, तो उसका कुल विस्थापन शून्य होगा, जिससे औसत वेग शून्य हो जाएगा, भले ही उसने कुछ दूरी तय की हो और उसकी औसत चाल अशून्य हो।

🎯 Exam Tip: यह स्थिति औसत चाल और औसत वेग की परिभाषाओं के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को स्पष्ट करती है।

 

Question 5. 10 ग्राम तथा 100 ग्राम वाली भिन्न द्रव्यमान की दो वस्तुएँ एकसमान ऊँचाई से गिराई जाती हैं। क्या वे एक समय पर पृथ्वी पर पहुँचेंगी? अपना उत्तर व्याख्या सहित लिखिए।


Answer: दोनों वस्तुओं को प्रारम्भिक वेग = शून्य तथा दोनों के द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने में तय की गयी दूरी के भी समान है। इस सूत्र में द्रव्यमान नहीं आ रहा है। अतः g नियत होने के कारण दोनों के लिए है समान होगा। यदि वायु का प्रतिरोध नगण्य मान लिया जाये जो द्रव्यमान पर निर्भर करता है, अतः दोनों वस्तुएँ एक समय पर पृथ्वी पर पहुँचेगी ।In simple words: हाँ, यदि वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाए, तो अलग-अलग द्रव्यमान की वस्तुएं एक ही ऊँचाई से गिराने पर एक ही समय पर पृथ्वी पर पहुँचेंगी क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

🎯 Exam Tip: गैलीलियो के मुक्त पतन के सिद्धांत को याद रखें, जो बताता है कि निर्वात में सभी वस्तुएँ समान त्वरण से गिरती हैं, चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो।

 

Question 6. एक कण को 20 मी/से के प्रारम्भिक वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। 3.0 सेकण्ड बाद कण द्वारा तय की गयी दूरी तथा विस्थापन की गणना कीजिए। \[ (g=10 \text{ मी/से}^2) \]


Answer:हल:
दिया है, \[ u = 20 \text{ मी/से} \], \[ t=3 \text{ सेकण्ड} \]
गति की समी० से,
\[ v = u - gt \]
\[ 0 = 20 - 10 \times t \]
\[ 10t = 20 \]
\[ \implies t = 2 \text{ सेकण्ड} \]
कण द्वारा प्राप्त ऊँचाई \[ v^2 = u^2 - 2gh \] से,
\[ (0)^2 = (20)^2 - 2 \times 10 \times h \]
\[ h = \frac{400}{20} = 20 \text{ मी} \]
महत्तम ऊँचाई से 1 सेकण्ड में लौटने पर चली गई दूरी
\[ s = ut + \frac{1}{2}gt^2 \] \[ s = \frac{1}{2} \times 10 \times (1)^2 \] \[ s = 5 \text{ मी} \]
कण द्वारा कुल तय की गई दूरी = 20 + 5 = 25 मी
कण का विस्थापन = 20 - 5 = 15 मीIn simple words: गेंद को अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में 2 सेकंड लगे और वह 20 मीटर की ऊँचाई तक गई। अगले 1 सेकंड में वह 5 मीटर नीचे गिरी। इस प्रकार, कुल तय की गई दूरी 25 मीटर और कुल विस्थापन 15 मीटर था।

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वाधर गति के प्रश्नों में, अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लगने वाला समय, कुल तय की गई दूरी और विस्थापन के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. सिद्ध कीजिए कि \[ v = u + at \]


Answer:माना किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग \[ u \] है, जो \[ t \] समयान्तराल के बाद \[ v \] हो जाता है। त्वरण की परिभाषा से,
\[ \text{त्वरण (a)} = \frac{\text{वेग-परिवर्तन}}{\text{समयान्तराल}} \]
\[ a = \frac{\text{अन्तिम वेग - प्रारम्भिक वेग}}{\text{समयान्तराल}} \] \[ a = \frac{v-u}{t} \]
\[ \implies v-u = at \]
\[ \implies v = u + at \]In simple words: यह गति के पहले समीकरण का गणितीय व्युत्पत्ति है, जो बताती है कि अंतिम वेग, प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय के योग के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों की मूल परिभाषाओं से व्युत्पत्ति को समझना भौतिकी में एक मूलभूत कौशल है।

 

Question 8. असमान अथवा परवर्ती त्वरण से क्या तात्पर्य है ? धनात्मक तथा ऋणात्मक त्वरण क्या है।


Answer:असमान या परिवर्तीत्वरण-यदि समान समयान्तरालों में वस्तु के वेग में परिवर्तन असमान हो, तो वस्तु का त्वरण असमान अथवा परिवर्ती कहा जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र तीन अलग-अलग गति-समय ग्राफ (x-t ग्राफ) दिखाता है। पहला ग्राफ धनात्मक त्वरण (a > 0) को दर्शाता है, जहाँ वक्र ऊपर की ओर खुलता है। दूसरा ग्राफ ऋणात्मक त्वरण (a < 0) को दर्शाता है, जहाँ वक्र नीचे की ओर खुलता है। तीसरा ग्राफ शून्य त्वरण (a = 0) को दर्शाता है, जहाँ वक्र एक सीधी क्षैतिज रेखा है, जो दर्शाता है कि वेग स्थिर है। है तो उसमें उत्पन्न त्वरण धनात्मक कहलाता है और यदि वस्तु का वेग घटता है तो उत्पन्न त्वरण ऋणात्मक कहलाता है। ऋणात्मक त्वरण को मन्दन (retardation) भी कहते हैं।In simple words: असमान त्वरण का मतलब है कि वस्तु का वेग समान समय अंतरालों में असमान रूप से बदलता है। धनात्मक त्वरण वेग में वृद्धि दर्शाता है, जबकि ऋणात्मक त्वरण (मंदन) वेग में कमी दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: समान और असमान त्वरण के बीच अंतर करें, और समझें कि त्वरण का संकेत वेग परिवर्तन की दिशा से कैसे संबंधित है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सरल रेखा में गतिमान किसी कण के स्थिति-समय ग्राफ से क्या तात्पर्य है? ये कितने प्रकार के होते हैं? स्थिति-समय ग्राफ की सहायता से गतिमान कण के वेग का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।


Answer:स्थिति-समय ग्राफ-समय के सापेक्ष, सरल रेखा में गतिमान किसी कण की स्थिति को प्रदर्शित करने वाला ग्राफ वस्तु का स्थिति-समय ग्राफ कहलाता है। स्थिति समय ग्राफ अग्र दो प्रकार का होता है (i) एकसमान गति का स्थिति-समय ग्राफ तथा (ii) असमान गति का स्थिति-समय ग्राफ । सरल रेखा में गतिमान किसी कण की गति को उसके स्थिति-समय ग्राफ द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। इसके लिए समय (t) को X-अक्ष पर तथा कण की स्थिति (x) को Y-अक्ष पर लेते हैं। एकसमान गति के लिए स्थिति-समय ग्राफ-एकसमान गति (एकसमान वेग से गति) के लिए स्थिति-समय ग्राफ, समय-अक्ष के साथ एक निश्चित कोण पर झुकाव लिए सरल रेखा प्राप्त होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक स्थिति-समय (x-t) ग्राफ को दर्शाता है। इसमें X-अक्ष पर समय (t) और Y-अक्ष पर स्थिति (x) है। ग्राफ OAB एक सीधी रेखा है जो समय-अक्ष के साथ एक कोण \( \theta \) बनाती है, जो एकसमान गति को इंगित करता है। बिंदु A पर स्थिति \( x_1 \) और बिंदु B पर स्थिति \( x_2 \) है, और उनके संगत समय \( t_1 \) और \( t_2 \) हैं। स्थिति-समय ग्राफ से वेग का निर्धारण:
मान लीजिए एक, \( x, ... \) सरल रेखा में एकसमान गति करते हुए कण का स्थिति-समय ग्राफ चित्र 3.21 में प्रदर्शित सरल रेखा OAB है। माना कि क्षणों \[ t_1 \] तथा \[ t_2 \] के संगत कण की स्थितियाँ क्रमशः \[ x_1 \] व \[ x_2 \] हैं, तब समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] के लिए कण का स्थिति परिवर्तन
अथवा
\[ \text{वस्तु का वेग (v)} = \frac{\text{विस्थापन}}{\text{समयान्तराल}} = \frac{x_2 - x_1}{t_2 - t_1} \] परन्तु \[ \frac{x_2 - x_1}{t_2 - t_1} = \frac{BC}{AC} \]
\[ \implies \text{वस्तु का वेग (v)} = \frac{BC}{AC} \] और \[ \frac{BC}{AC} = \text{स्थिति-समय वक्र का ढाल} = \tan \theta \]
\[ \implies \text{वस्तु का वेग} = \text{स्थिति-समय वक्र का ढाल} \] अतः सरल रेखा में एकसमान गतिं करते कण का वेग, कण के स्थिति-समय ग्राफ के ढाल के बराबर होता है।
असमान गति के लिए स्थिति-समय ग्राफ असमान गति । (परिवर्ती वेग से गति) के लिए स्थिति-समय ग्राफ एक वक्र (curve) के रूप में प्राप्त होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक स्थिति-समय (x-t) ग्राफ को दर्शाता है जहाँ वक्र OAB दर्शाता है कि वस्तु असमान गति (परिवर्ती वेग) में है। X-अक्ष पर समय (t) और Y-अक्ष पर स्थिति (x) है। बिंदु A पर स्थिति \( x_1 \) और बिंदु B पर स्थिति \( x_2 \) है, और उनके संगत समय \( t_1 \) और \( t_2 \) हैं। रेखा AB एक जीवा है जो औसत वेग को दर्शाती है। स्थिति-समय ग्राफ से औसत वेग का निर्धारण-मान लीजिए कि सरल रेखा में असमान गति से गतिमान कण का स्थिति-समय ग्राफ चित्र 3.22 में प्रदर्शित वक्र OAB है। माना कि क्षणों \[ t_1 \] वे \[ t_2 \] के संगत कण की स्थितियाँ क्रमशः
अथवा
\[ \text{वस्तु का वेग (v)} = \frac{\text{विस्थापन}}{\text{समयान्तराल}} = \frac{x_2 - x_1}{t_2 - t_1} \] परन्तु \[ \frac{x_2 - x_1}{t_2 - t_1} = \frac{BC}{AC} \]
\[ \implies \text{वस्तु का वेग (v)} = \frac{BC}{AC} \] और \[ \frac{BC}{AC} = \text{स्थिति-समय वक्र का ढाल} = \tan \theta \] अतः किसी निश्चित समयान्तराल में वस्तु का औसत वेग उसके स्थिति-समय ग्राफ में उस निश्चित समयान्तराल के संगत वस्तु की स्थितियों को मिलाने वाली जीवा की प्रवणता के बराबर होता है। इस प्रकार, असमान गति के लिए प्राप्त स्थिति-समय ग्राफ के किन्हीं दो बिन्दुओं को मिलाने वाली जीवा की प्रवणता, उस समयान्तराल के लिए औसत वेग को प्रदर्शित करती है।
स्थिति-समय, ग्राफ से तात्क्षणिक वेग का निर्धारणः
यदि समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] सूक्ष्म हो तब ग्राफ पर बिन्दु B, बिन्दु A के निकट आ जाता है। समयान्तराल \[ \Delta t \] के अत्यन्त सूक्ष्म \[ (\Delta t \implies 0) \] होने पर बिन्दु A व B लगभग सम्पाती होकर ग्राफ को बिन्दु A पर स्पर्श करते हैं तथा जीवा AB, बिन्दु A पर स्पर्श रेखा में परिवर्तित हो जाती है।
अतः समय \[ t_1 \] पर वस्तु का तात्क्षणिक वेग = बिन्दु A पर स्पर्श रेखी की प्रवणता = \[ \tan \alpha \]In simple words: स्थिति-समय ग्राफ किसी वस्तु की स्थिति को समय के साथ दर्शाता है। ग्राफ की ढलान वस्तु का वेग देती है। सीधी रेखा एकसमान वेग को, जबकि वक्र परिवर्ती वेग को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: स्थिति-समय ग्राफ की ढलान वेग का प्रतिनिधित्व करती है, और एक सीधी रेखा निरंतर वेग को इंगित करती है, जबकि एक वक्र वेग में परिवर्तन को इंगित करता है।

 

Question 2. वेग-समय ग्राफ से गतिशील वस्तु का विस्थापन तथा दूरी उदाहरण सहित ज्ञात कीजिए।


Answer:वेग-समय ग्राफ से गतिशील वस्तु का विस्थापन तथा दूरी ज्ञात करना-कोई वस्तु जब गति में आती है तो उसका वेग बढ़ता है - तथा जब वस्तु को रोकना शुरू करते हैं तो वेग घटता है। स्पष्ट है कि वस्तु का वेग धनात्मक, ऋणात्मक व शून्य हो सकती है। वेग धनात्मक होने पर वेग-समय ग्राफ (OP) अक्ष के ऊपर की ओर तथा वेग ऋणात्मक होने पर ग्राफ (QR) अक्ष से नीचे की ओर होगा।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है जहाँ Y-अक्ष पर वेग (v) और X-अक्ष पर समय (t) है। ग्राफ का OP भाग दर्शाता है कि वेग धनात्मक है (अक्ष के ऊपर), जबकि QR भाग दर्शाता है कि वेग ऋणात्मक है (अक्ष के नीचे)। ग्राफ के विभिन्न हिस्से वेग के बढ़ने या घटने को भी इंगित करते हैं। वेग-समय ग्राफ (v-t) तथा समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल तय की गई दूरी को बताता है। यदि क्षेत्रफल समय अक्ष के ऊपर है, तो यह मूल बिन्दु से दूरी को दर्शाता है, परन्तु यदि क्षेत्रफल समय-अक्ष के नीचे है, तो यह मूल बिन्दु की ओर दूरी को दर्शाता है। अतः कुल दूरी ज्ञात करने के लिए सभी क्षेत्रफलों को जोड़ देते हैं, जबकि विस्थापन ज्ञात करने के लिए समय-अक्ष के ऊपर के क्षेत्रफल धनात्मक व समय-अक्ष के नीचे के क्षेत्रफल ऋणात्मक लेते हैं। उदाहरण-एक कार की, गति का वेग-समय ग्राफ चित्र 3.24 में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए (i) 5 सेकण्ड में विस्थापन तथा (ii) 5 सेकण्ड में चलित दूरी।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है, जिसमें X-अक्ष पर समय (सेकण्ड में) और Y-अक्ष पर वेग (मी/से में) है। ग्राफ में एक त्रिभुज OAB है (वेग 0 से 10 मी/से तक बढ़ता है, फिर स्थिर रहता है), और फिर एक आयत BCDE (वेग 10 मी/से पर स्थिर रहता है) और एक त्रिभुज EFD (वेग 10 मी/से से -10 मी/से तक घटता है)। यह एक कार की गति को दर्शाता है। हल: (i) 5 सेकण्ड में विस्थापन = क्षेत्रफल OABC- क्षेत्रफल CDEF = \[ 3 \times 10 - 10 \times 2 = 30 - 20 = 10 \text{ मीटर} \], (ii) 5 सेकण्ड में चलित दूरी = क्षेत्रफल OABC+ क्षेत्रफल CDEF = \[ 30 + 20 = 50 \text{ मीटर} \]In simple words: वेग-समय ग्राफ में, विस्थापन ग्राफ के नीचे का कुल क्षेत्रफल (दिशा सहित) होता है, जबकि तय की गई दूरी सभी क्षेत्रों के परिमाण का योग होती है (दिशा को अनदेखा करके)।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफलों को विस्थापन और दूरी में बदलने में धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रों को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. किसी गतिमान वस्तु के वेग-समय ग्राफ से क्या तात्पर्य है। वेग-समय ग्राफ से वस्तु का विस्थापन तथा वस्तु का त्वरण किस प्रकार ज्ञात किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।


Answer:वेग-समय ग्राफ: किसी गतिमान वस्तु के वेग तथा समय के बीच खींचे गए ग्राफ को वस्तु का वेग-समय ग्राफ कहते हैं। अतः स्पष्ट है कि किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ, समय के साथ वस्तु के वेग में होने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित करता है।
एकसमान गति के लिए वेग-समय ग्राफः एकसमान गति (एकसमान वेग से गति) के लिए वेग-समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा प्राप्त होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है जहाँ Y-अक्ष पर वेग (v) और X-अक्ष पर समय (t) है। ग्राफ AB एक क्षैतिज सीधी रेखा है जो दर्शाती है कि वेग समय के साथ स्थिर है, जो एकसमान गति को इंगित करता है। C और D बिंदु t1 और t2 समय पर संगत वेग को दर्शाते हैं। वेग-समय ग्राफ से विस्थापन का निर्धारण-किसी निश्चित समयान्तराल में वस्तु का विस्थापन, उसके वेग-समय वक्र तथा समय अक्ष के बीच घिरे क्षेत्रफल के बराबर होता है। एकसमान वेग से गति के लिए वेग-समय ग्राफ, सरल रेखा AB प्राप्त होती है। समय \[ t_1 \] व \[ t_2 \] पर वस्तु
का वेग \[ v \] है तथा वेग-समय ग्राफ पर इसके संगत बिन्दु C व D हैं।
\[ \text{समयान्तराल} = t_2 - t_1 = EF \] \[ \text{वेग} = v = FC \] \[ \text{वस्तु का विस्थापन} = \text{वेग} \times \text{समयान्तराल} \] \[ = v \times (t_2 - t_1) \] \[ = FC \times EF \] \[ = \text{आकृति CDEF का क्षेत्रफल} \]
\[ \implies \text{वस्तु का विस्थापन} = \text{वेग-समय ग्राफ तथा समय-अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल} \] एकसमान त्वरित गति के लिए वेग-समय ग्राफः एकसमान त्वरित गति के लिए वेग-समय ग्राफ समय-अक्ष के साथ एक निश्चित क्रोण पर झुकाव लिए सरल रेखा के रूप में होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है, जहाँ X-अक्ष पर समय (t) और Y-अक्ष पर वेग (v) है। ग्राफ OAB एक सीधी रेखा है जिसका ढाल सकारात्मक है, जो एकसमान त्वरित गति को इंगित करता है। बिंदु A पर वेग \( v_1 \) और बिंदु B पर वेग \( v_2 \) है, और उनके संगत समय \( t_1 \) और \( t_2 \) हैं। वेग-समय ग्राफ से त्वरण ज्ञात करना - मान लीजिए कि एकसमान त्वरण से गतिमान किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ एक सरल रेखा OAB है जिसे चित्र 3.26 में प्रदर्शित किया गया है।
यदि समय \[ t_1 \] व \[ t_2 \] के संगत वस्तु के वेग क्रमशः \[ v_1 \] व \[ v_2 \] हों, तब समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] के लिए वस्तु का
वेग परिवर्तन \[ = (v_2 - v_1) = DB - DC = BC \] तथा \[ t_2 - t_1 = OD - OE = ED = AC \]
\[ \implies \text{वस्तु का त्वरण} = \frac{\text{वेग-परिवर्तन}}{\text{समयान्तराल}} \] \[ a = \frac{v_2 - v_1}{t_2 - t_1} = \frac{BC}{AC} \] परन्तु \[ \frac{BC}{AC} = \text{वेग-समय वक्र की प्रवणता} = \tan \theta \]
\[ \implies \text{वस्तु का त्वरण} = \text{वेग-समय वक्र की प्रवणता} \] असमान त्वरित गति के लिए वेग-समय ग्राफ एक वक्र के रूप में होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है जिसका उपयोग औसत और तात्क्षणिक त्वरण को समझाने के लिए किया गया है। वक्र A'B' दर्शाता है कि वस्तु असमान त्वरित गति में है। X-अक्ष पर समय (t) और Y-अक्ष पर वेग (v) है। जीवा AB औसत त्वरण देती है, जबकि बिंदु A पर स्पर्श रेखा तात्क्षणिक त्वरण देती है। वेग-समय ग्राफ से औसत त्वरण ज्ञात करना - माना
समय \[ t_1 \] व \[ t_2 \] के संगत वस्तु के वेग क्रमशः \[ v_1 \] व \[ v_2 \] हैं, तब
समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] में
वस्तु का वेग-परिवर्तन \[ = (v_2 - v_1) = DB - DC = BC \] तथा \[ t_2 - t_1 = OD - OE = ED = AC \] समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] के लिए वस्तु का औसत त्वरण \[ a_{av} = \frac{v_2 - v_1}{t_2 - t_1} = \frac{BC}{AC} \] परन्तु \[ \frac{BC}{AC} = \text{वेग-समय वक्र के बिन्दुओं A व B को मिलाने वाली रेखा की प्रवणता} = \tan \theta \]
\[ \implies \] किसी निश्चित समयान्तराल में वस्तु का औसत त्वरण, उस निश्चित समयान्तराल के संगत वेग-समय वक्र पर स्थित बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा की प्रवणता के बराबर होता है।
असमान त्वरित गति के लिए वेग-समय वक्र से तात्क्षणिक त्वरण ज्ञात करना - यदि समयान्तराल \[ (t_2 - t_1) \] अत्यन्त सूक्ष्म हो तब वक्र पर बिन्दु B, बिन्दु A से निकट होगा। समयान्तराल \[ \Delta t \] के अत्यन्त सूक्ष्म होने पर \[ (\Delta t \implies 0) \] बिन्दु A व B लगभग सम्पाती होंगे तथा रेखा AB वक्र के बिन्दु A पर स्पर्श रेखा में परिवर्तित हो जाएगी।
अतः बिन्दु A के संगत समय \[ t_1 \] पर वस्तु का तात्क्षणिक वेग = बिन्दु A पर स्पर्श रेखा की प्रवणता = \[ \tan \alpha \]In simple words: वेग-समय ग्राफ समय के साथ वेग में परिवर्तन को दर्शाता है। ग्राफ के तहत का क्षेत्रफल विस्थापन बताता है, और ग्राफ की ढलान त्वरण को इंगित करती है।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ की ढलान त्वरण देती है और ग्राफ के तहत का क्षेत्रफल विस्थापन देता है। इन अवधारणाओं को अच्छी तरह से समझें।

 

Question 4. ग्राफीय विधि द्वारा एकसमान त्वरित गति से गतिमान वस्तु की गति की समीकरणे व्युत्पन्न कीजिए ।
या
एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए, ग्राफीय विधि से निम्नलिखित सम्बन्ध स्थापित कीजिए


Answer:उत्तरः ग्राफ द्वारा गति के समीकरण स्थापित करना
माना कोई वस्तु प्रारम्भिक वेग \[ u \] तथा अचर त्वरण \[ a \] से चलना प्रारम्भ करती है और \[ t \] समय पश्चात् वस्तु का वेग \[ v \] हो जाता है। यदि समय को X-अक्ष पर तथा वेग को Y-अक्ष पर निरूपित किया जाए, तो वस्तु का समय-वेग ग्राफ पर झुकी हुई सरल रेखा BA के रूप में प्राप्त होली है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है जिसका उपयोग गति के समीकरणों को व्युत्पन्न करने के लिए किया जाता है। X-अक्ष पर समय (t) और Y-अक्ष पर वेग (v) है। रेखा BA एकसमान त्वरण को दर्शाती है। बिंदु B पर प्रारंभिक वेग (u) और बिंदु A पर अंतिम वेग (v) है, जो t समय के बाद होता है। आकृति BOEC एक आयत है और ABC एक त्रिभुज है। इसकी सहायता से गति के समीकरणों को निम्न प्रकार से ज्ञात करते हैं
(i) गति का प्रथम समीकरण-माना \[ t = 0 \] समय पर वस्तु का प्रारम्भिक वेग \[ u = OB = EC \]
समय \[ t \] माना समय पश्चात् वस्तु का अन्तिम वेग \[ v = EA \]
वेग-परिवर्तन में प्रयुक्त समय \[ (t) = OE = BC \]
हम जानते हैं कि, वस्तु का त्वरण समय-वेग ग्राफ की रेखा के ढाल से ज्ञात होता है।
अतः वस्तु का त्वरण \[ (a) = \text{रेखा BA को ढाल} \]
\[ a = \frac{CA}{BC} = \frac{EA - EC}{BC} \] \[ a = \frac{\text{अन्तिम वेग - प्रारम्भिक वेग}}{\text{समय}} = \frac{v-u}{t} \] अथवा \[ v-u=at \] अतः \[ v = u + at \]
(ii) गति का द्वितीय समीकरण:
माना \[ t = 0 \] से \[ t \] समय तक वस्तु \[ s \] दूरी तय करती है। यह दूरी \[ t=0 \] से \[ t \] समय तक वस्तु के समय-वेग ग्राफ तथा समये-अक्ष के बीच घिरे भाग का क्षेत्रफल के बराबर होती है। अतः वस्तु द्वारा चली गई दूरी
\[ s = \text{समलम्ब चतुर्भुज AEOB का क्षेत्रफल} \] \[ = \text{आयत BOEC का क्षेत्रफल} + \text{समकोण } \triangle \text{ABC का क्षेत्रफल} \] \[ = OB \times OE + \frac{1}{2} \times AC \times BC \] \[ = \text{प्रारम्भिक वेग} \times \text{समय} + \frac{1}{2} \times (EA - EC) \times OE \] \[ = \text{प्रारम्भिक वेग} \times \text{समय} + \frac{1}{2} \times (\text{वेग-परिवर्तन}) \times \text{समय} \] (वेग-परिवर्तन, \[ v - u = at \])
\[ = ut + \frac{1}{2}at \times t \] अतः \[ s = ut + \frac{1}{2}at^2 \]
(iii) गति का तृतीय समीकरण
गति के प्रथम समीकरण \[ v = u + at \] से,
\[ t = \frac{v-u}{a} \] वस्तु द्वारा \[ t \] समय में चली गई दूरी
\[ s = \text{समलम्ब चतुर्भुज AEOB का क्षेत्रफल} \] \[ = \frac{1}{2} \times (\text{समान्तर भुजाओं का योग}) \times \text{लम्बवत् दूरी} \] \[ = \frac{1}{2} \times (OB + EA) \times OE \] \[ = \frac{1}{2} \times (\text{प्रारम्भिक वेग} + \text{अन्तिम वेग}) \times \text{समय} \] \[ = \frac{1}{2}(u + v) \times t \] \[ s = \frac{1}{2}(u+v) \times \left(\frac{v-u}{a}\right) \] (समीकरण \[ t = \frac{v-u}{a} \] से) \[ 2as = (u+v)(v-u) \] \[ 2as = v^2 - u^2 \] \[ v^2 = u^2 + 2as \]In simple words: ग्राफीय विधि में, `\( v = u + at \)` वेग-समय ग्राफ की ढलान से, `\( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \)` ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल से, और `\( v^2 = u^2 + 2as \)` इन दोनों समीकरणों के संयोजन से प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: यह व्युत्पत्ति एक महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा प्रश्न है। वेग-समय ग्राफ के विभिन्न भागों (आयत और त्रिभुज) का उपयोग करके विस्थापन और त्वरण की गणना करने का अभ्यास करें।

 

Question 5. कलन विधि से एकसमान त्वरित गति के समीकरणों की स्थापना कीजिए।


Answer:उत्तरः कलन विधि से एकसमान त्वरित गति के समीकरणों की स्थापना-माना एक वस्तु एक सरल रेखा में एकसमान त्वरण \[ a \] से गति कर रही है; समय \[ t=0 \] पर इसका प्रारम्भिक वेग \[ u \] तथा समय पश्चात् यह \[ v \] हो जाता है। माना इस \[ t \] समय में वस्तु का विस्थापन \[ s \] है।
(i) प्रथम समीकरण- माना गतिशील वस्तु के वेग में अति अल्प समय \[ \Delta t \] में परिवर्तन \[ \Delta v \] है।
\[ t \] समय पर वस्तु का त्वरण ।
\[ v = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta s}{\Delta t} = \frac{ds}{dt} \] अथवा \[ ds = v dt \]
समीकरण (3) से \[ v \] का मान रखने पर
\[ ds = (u + at) dt = u dt + at dt \]
समाकलन करने पर
\[ \int ds = \int u dt + \int at dt \] \[ = u \int dt + a \int t dt \] ( \[ u \] तथा \[ a \] नियतांक हैं।) \[ s = ut + a \frac{t^2}{2} + C_2 \quad ...(4) \] माना \[ t = 0 \] पर, वस्तु की प्रारम्भिक स्थिति \[ s = 0 \] है तो समीकरण (4) में रखने पर,
\[ 0 = u \times 0 + \frac{1}{2}a \times 0^2 + C_2 \] \[ C_2 = 0 \] अतः \[ s = ut + \frac{1}{2}at^2 \quad ...(5) \] यह एकसमान त्वरित गति का द्वितीय समीकरण है।
(ii) द्वितीय समीकरण-माना गतिशील वस्तु का विस्थापन अल्प समयान्तराल \[ \Delta t \] में \[ \Delta s \] है तो क्षण \[ t \] पर
\[ a = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta v}{\Delta t} = \frac{dv}{dt} \]
\[ \implies dv = a dt \]
दोनों पक्षों का समाकलन करने पर,
\[ \int dv = \int a dt = a \int dt \] (चूँकि \[ a \] नियत है, अतः)
\[ v = at + C_1 \quad ....(2) \] जहाँ \[ C_1 \] समाकलन नियतांक है।
\[ t = 0 \] पर वेग \[ v = u = \] प्रारम्भिक वेग
समीकरण (2) से,
\[ u = a \times 0 + C_1 \]
\[ \implies C_1 = u \] पुनः समीकरण (2) से,
\[ v = at + u \] या \[ v = u + at \quad ...(3) \] यह गति का प्रथम समीकरण है।
(iii) तृतीय समीकरण-हम जानते हैं कि
परन्तु \[ a = \frac{dv}{dt} \], त्वरण है
अतः \[ a = \frac{dv}{ds} \frac{ds}{dt} \] \[ a = v \frac{dv}{ds} \] \[ v dv = a ds \]
समाकलन करने पर,
\[ \int v dv = \int a ds \] \[ \int v dv = a \int ds \] ( \[ \because a \] नियतांक है) \[ \frac{v^2}{2} = as + C_3 \quad ...(6) \] जहाँ \[ C_3 \] समाकलन नियतांक है।
परन्तु समय \[ t = 0 \] पर, \[ s = 0 \] तथा \[ v = u \], प्रारम्भिक वेग, इन्हें समीकरण (6) में रखने पर,
\[ \frac{u^2}{2} = a \times 0 + C_3 \] \[ C_3 = \frac{u^2}{2} \] यह मान समीकरण (6) में रखने पर,
\[ \frac{v^2}{2} = as + \frac{u^2}{2} \]
\[ \implies v^2 = 2as + u^2 \] या \[ v^2 = u^2 + 2as \] यही गति की तृतीय समीकरण है।In simple words: कलन विधि का उपयोग करके गति के समीकरणों को व्युत्पन्न करने के लिए, वेग और त्वरण की परिभाषाओं को समाकलित किया जाता है। `\( v = u + at \)` को `\( a = dv/dt \)` से, `\( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \)` को `\( v = ds/dt \)` और `\( v = u + at \)` से, और `\( v^2 = u^2 + 2as \)` को `\( a = v dv/ds \)` से समाकलित करके प्राप्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कलन विधि आधारित व्युत्पत्तियाँ अधिक कठोर होती हैं और गतिकी की गहरी समझ दर्शाती हैं। निरंतर त्वरण के लिए समाकलन तकनीकों में निपुण हों।

 

Question 6. एकसमान त्वरण से गति करते हुए किसी वस्तु द्वारा किसी विशेष सेकण्ड में चली गई दूरी के लिए व्यजंक प्राप्त कीजिए।


Answer:उत्तरः माना सरल रेखीय गति करते हुए पिण्ड की \[ n \] वें सेकण्ड में दूरी ज्ञात करनी है, तो पिण्ड द्वारा \[ n \] सेकण्ड में चली गई दूरी में से \[ (n - 1) \] सेकण्ड में चली गई दूरी को घटा दिया जाता है। माना किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग \[ u \] है जो एकसमान त्वरण
\[ a \] से चलकर \[ t \] सेकण्ड में \[ s \] दूरी तय करती है, तब गति के सूत्र से
\[ s = ut + \frac{1}{2}at^2 \quad ...(1) \] तब, \[ n \] सेकण्ड में चली गई दूरी होगी, (अर्थात् \[ t = n \] रखने पर)
\[ s_n = un + \frac{1}{2}an^2 \quad ...(2) \] इसी प्रकार \[ (t = n - 1) \] रखने पर, वस्तु द्वारा \[ (n - 1) \] वें सेकण्ड में चली गई दूरी,
\[ s_{n-1} = u(n - 1) + \frac{1}{2}a(n - 1)^2 \quad ...(3) \] समीकरण (2) में से समीकरण (3) को घटाने पर, \[ n \] वें सेकण्ड में तय की गई दूरी,
\[ S = s_n - s_{n-1} \] \[ = \left(un + \frac{1}{2}an^2\right) - \left(u(n-1) + \frac{1}{2}a(n-1)^2\right) \] \[ = un + \frac{1}{2}an^2 - u(n-1) - \frac{1}{2}a(n-1)^2 \] \[ = un + \frac{1}{2}an^2 - un + u - \frac{1}{2}a(n^2 - 2n + 1) \] \[ = u + \frac{1}{2}a[n^2 - (n^2 - 2n + 1)] \] \[ = u + \frac{1}{2}a[n^2 - n^2 + 2n - 1] \] \[ S = u + \frac{a}{2}(2n - 1) \]In simple words: यह व्युत्पत्ति एकसमान त्वरण के तहत किसी वस्तु द्वारा nवें सेकंड में तय की गई दूरी के लिए एक सूत्र प्रदान करती है, जिसे n सेकंड में तय की गई कुल दूरी में से (n-1) सेकंड में तय की गई कुल दूरी को घटाकर प्राप्त किया जाता है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र उन समस्याओं के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ कुल दूरी के बजाय nवें सेकंड में तय की गई दूरी पूछी जाती है।

 

Question 7. निम्न चित्र में प्रदर्शित समय-वेग ग्राफ से ज्ञात कीजिए
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वेग-समय (v-t) ग्राफ को दर्शाता है। X-अक्ष पर समय (सेकण्ड में) और Y-अक्ष पर वेग (मी/से में) है। ग्राफ में एक त्रिभुज है जिसमें वेग 0 से 2 मी/से तक 10 सेकण्ड में बढ़ता है, फिर 10 से 30 सेकण्ड तक 2 मी/से पर स्थिर रहता है, और फिर 30 से 40 सेकण्ड तक 2 मी/से से 0 मी/से तक घटता है। (i) 0 से 10 सेकण्ड का औसत त्वरण
(ii) 40 सेकण्ड में चली गई दूरी तथा विस्थापन


Answer: हल: (इस प्रश्न का पूरा हल पृष्ठ 43 पर जारी है, जो प्रदान की गई पृष्ठ सीमा से बाहर है। इसलिए, यहां केवल प्रश्न और आंशिक जानकारी प्रदान की गई है।)

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ से औसत त्वरण ढलान (वेग परिवर्तन/समय) से और विस्थापन/दूरी ग्राफ के तहत क्षेत्रफल से ज्ञात की जा सकती है।

 

Question 8. ट्रैफिक सिग्नल के हरा होते ही एक कार 2 मी/से\(^2\) के त्वरण से गति प्रारम्भ करती है। उसी क्षण एक ट्रक 10 मी/से की नियत चाल से कार को क्रॉस करता है।
(i) यात्रा के प्रारम्भिक बिन्दु से कार कितनी दूरी पर ट्रक को क्रॉस करेगी?
(ii) इस क्षण कार कितनी तेज चल रही होगी?
(iii) प्रत्येक गाड़ी के लिए विस्थापन-समय वक्र खीचिए।

Answer: हलः
दिया है, कार का त्वरण \( (a) = 2 \) मी/से\(^2 \), प्रारम्भिक वेग \( (u) = 0 \), ट्रक की नियत चाल \( (u) = 10 \) मी/से
(i) ट्रक को क्रॉस करने के लिए, कार द्वारा चली गई दूरी, टूक द्वारा चली गई दूरी के बराबर होगी। माना कार t सेकण्ड बाद ट्रक को क्रॉस करेगी इसलिए t सेकण्ड में ट्रैक द्वारा चली गई दूरी \( = u’t = 10 \times t \) ...(1) तथा t सेकण्ड में त्वरित कार द्वारा चली गई दूरी
\( x = ut + \frac{1}{2}at^2 = 0 + \frac{1}{2} \times 2 \times t^2 = t^2 \) ...(2)
समी० (1) तथा समी० (2) से,
\( 10 \times t = t^2 \)

\( \implies t = 10 \) सेकण्ड
अतः यात्रा के प्रारम्भिक बिन्दु से ट्रक को क्रॉस करने में कार द्वारा चली गई दूरी \( x = t^2 = 100 \) मी
(ii) 10 सेकण्ड बाद कार की चाल, \( v = u + at = 0 + 2 \times 10 = 20 \) मी/से
(iii) (a) कार के लिए विस्थापन-समय वक्र

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक कार के विस्थापन-समय ग्राफ को दर्शाता है। ग्राफ मूल बिंदु (0,0) से शुरू होकर एक परवलयिक वक्र के रूप में विस्थापन को दर्शाता है, जो त्वरित गति का संकेत देता है। 5 सेकंड पर विस्थापन 25 इकाई है और 10 सेकंड पर विस्थापन 100 इकाई है।

समय \( (t) \)विस्थापन \( x = \frac{1}{2}at^2 \)
\( a = 2 \) मी/से\(^2 \) पर
525
10100

(b) ट्रक के लिए विस्थापन-समय वक्र

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक ट्रक के विस्थापन-समय ग्राफ को दर्शाता है। ग्राफ मूल बिंदु से शुरू होकर एक सीधी रेखा के रूप में विस्थापन को दर्शाता है, जो स्थिर वेग से गति का संकेत देता है। 5 सेकंड पर विस्थापन 50 इकाई है और 10 सेकंड पर विस्थापन 100 इकाई है।
समय \( (t) \)विस्थापन \( x = ut \)
\( u = 10 \) मी/से (नियत चाल)
550
10100

In simple words: इस प्रश्न में, एक कार त्वरित गति से चलती है जबकि एक ट्रक स्थिर गति से चलता है। कार ट्रक को 10 सेकंड में 100 मीटर की दूरी पर पार करती है, उस समय कार की गति 20 मी/से होती है। दोनों वाहनों के लिए विस्थापन-समय ग्राफ खींचे गए हैं, जहां कार के लिए एक परवलयिक वक्र और ट्रक के लिए एक सीधी रेखा है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सुनिश्चित करें कि आप त्वरण और नियत चाल के लिए गति के समीकरणों का सही ढंग से उपयोग करें और विस्थापन-समय ग्राफ को सही ढंग से प्लॉट करें।

 

Question 9. आपेक्षिक वेग से आप क्या समझते हैं? आपेक्षिक वेग के लिए सूत्र का निगमन कीजिए।
Answer: उत्तरः
आपेक्षिक वेग-जब दो वस्तुएँ A तथा B क्रमश: \( \xrightarrow { { V }_{ A } } \) तथा \( \xrightarrow { {V}_{B} } \) वेग से गतिमान होती हैं तो प्रति सेकण्ड उनके बीच के विस्थापन में होने वाले परिवर्तन को आपेक्षिक वेग कहते हैं।
सूत्र का निगमन - जब दो वस्तुएँ समान वेग से एक दिशा में जाती रहती हैं तो वे दोनों एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर (विराम में) प्रतीत होती हैं। माना कि दो वस्तुएँ A और B समरूप वेग क्रमशः \( v_1 \) और \( v_2 \) से एक दिशा में गतिशील हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र दो वस्तुओं A और B की प्रारंभिक स्थितियों को दर्शाता है, जिन्हें क्रमशः x1 और x2 पर रखा गया है। यह आरेख सापेक्ष विस्थापन की अवधारणा को समझने में सहायता करता है, जहाँ दोनों वस्तुएं एक ही दिशा में गतिमान हैं।
(चित्र 3.33)। माना \( t = 0 \) पर प्रारम्भिक स्थितियाँ \( x_1(0) \) व \( x_2(0) \) हैं तथा \( t \) समय पश्चात् यह स्थितियाँ \( x_1 \) व \( x_2 \) हैं।
वस्तु A के लिए \( x_1 = x_1(0) + v_1t \)
\( t \) समय पश्चात् वस्तु A का विस्थापन
\( s_1 = x_1 - x_1(0) = v_1t \) ...(1)
वस्तु B के लिए \( x_2 = x_2(0) + v_2t \)
\( t \) समय पश्चात् वस्तु B का विस्थापन
\( s_2 = x_2 - x_2(0) = v_2t \) ...(2)
समीकरण (1) को (2) में से घटाने पर
\( s_2 - s_1 = (v_2 - v_1)t \) ...(3)
यह वस्तु B का A के सापेक्ष विस्थापन है, जिसे आपेक्षिक विस्थापन कहते हैं। यहाँ राशि \( (v_2 - v_1) \) को वस्तु B का A के सापेक्ष आपेक्षिक वेग कहते हैं। समीकरण (3) से
\( v_2 - v_1 = \frac{s_2 - s_1}{t} \) ....(4)
स्पष्ट है कि एक वस्तु का दूसरी वस्तु के सापेक्ष आपेक्षिक वेग आपेक्षिक विस्थापन परिवर्तन की दर है। आपेक्षिक विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक व शून्य हो सकता है।
स्पष्टतः A के सापेक्ष B का आपेक्षिक वेग
\( v_{BA} = v_2 - v_1 = \) वस्तु B का वेग - वस्तु A का वेग
यदि \( v_2 > v_1 \), तो आपेक्षिक वेग धनात्मक है।
यदि \( v_2 < v_1 \), तो आपेक्षिक वेग ऋणात्मक है।
यदि \( v_2 = v_1 \), तो आपेक्षिक वेग शून्य है।
[विशेष - सरल रेखीय गति में B के सापेक्ष A का वेग \( = v_A - v_B \);
A के सापेक्ष B का वेग \( = v_B - v_A \), यदि वस्तुएँ A व B विपरीत दिशाओं में गति करें तो उनके वेग \( v_A \) व \( v_B \) विपरीत चिह्नों के होंगे।]
In simple words: आपेक्षिक वेग वह वेग है जिससे एक वस्तु दूसरी वस्तु के सापेक्ष गति करती हुई प्रतीत होती है। यह दो वस्तुओं के वेगों का अंतर होता है। सापेक्ष विस्थापन को समय से विभाजित करके आपेक्षिक वेग की गणना की जा सकती है, और यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है, जो वस्तुओं की सापेक्ष गति पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक वेग के सूत्र को निगमित करते समय, वस्तुओं की प्रारंभिक स्थितियों और समय के साथ उनके विस्थापन को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों का उपयोग दिशा को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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