UP Board Solutions Class 11 Physics Chapter 2 Units and Measurements

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Detailed Chapter 2 इकाइयाँ और माप UP Board Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 2 इकाइयाँ और माप UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Physics Chapter 2 Units And Measurements

UP Board Solutions For Class 11 Physics Chapter 2 Units And Measurements (मात्रक एवं मापन)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

Question 1. रिक्त स्थान भरिए
(a) किसी 1 cm भुजा वाले घन का आयतन.....m³ के बराबर है।
(b) किसी 2 cm त्रिज्या व 10 cm ऊँचाई वाले सिलिण्डर का पृष्ठ क्षेत्रफल.....(mm)² बराबर है।
(c) कोई गाड़ी 18 km/h की चाल से चल रही है तो यह 1s में....m चलती है।
(d) सीसे का आपेक्षिक घनत्व 11.3 है। इसका घनत्व.......g cm⁻³ या .... kg m⁻³ है।
Answer:
हल:
(a) :: घन का आयतन = (भुजा)³ = (1 cm)³
= \( \left(\frac{1}{100}\right)^3 \) m³ = (10⁻² m)³ [ 1cm = \( \frac{1}{100} \) = 10⁻² m]
= 10⁻⁶ m³

(b) सिलिण्डर का पृष्ठ क्षेत्रफल = वक्र पृष्ठ का क्षेत्रफल + दोनों वृत्तीय सिरों का क्षेत्रफल
= 2πrh + 2πr²
= 2π (h +r) = 2 x 3.14 x 2 cm (10 cm + 2 cm)
= 4 x 3.14 x 12cm² = 150.72 cm²
= 150.72 x (10mm)² (1 cm = 10 mm)
= 150.72 x 100(mm)² = 1.5 x 10⁴ (mm)²

(c) गाड़ी की चाल = 18km/h
= 18x \( \frac{5}{18} \) m/s = 5 m s⁻¹
.: 1s में तय दूरी = चाल x समय = 5ms⁻¹ x 1 s = 5 m

(d) सीसे का घनत्व = सीसे का आपेक्षिक-घनत्व x जल का घनत्व
= 11.3 x 1 g cm⁻³ = 11.3 g cm⁻³
[:'जल का घनत्व = 1 g cm⁻³ या 10 kg m³]
या सीसे का घनत्व = 11.3 x 10³ kg m⁻³
= 1.13 x 10⁴ kg m⁻³
In simple words: This question involves converting units of volume, area, and speed, and calculating density using relative density. It demonstrates the importance of unit conversion in physics problems.

🎯 Exam Tip: Pay close attention to unit conversions (e.g., cm to m, km/h to m/s, cm² to mm²) and significant figures for accurate calculations in physics problems.

Question 2. रिक्त स्थानों को मात्रकों के उचित परिवर्तन द्वारा भरिए
(a) 1 kg m² s⁻²= ......g cm² s⁻²
(b) 1 m = .........1y
(c) 3.0 m s⁻² = ......... km h⁻²
(d) G= 6.67x 10⁻¹¹ Nm (kg)⁻² =......... (cm)³ s⁻² g⁻¹
Answer:
हलः
(a) 1 kg m²s⁻² = 1 kg x 1m²s⁻²
= (1000 g)x (100 cm)²x 1s⁻²
= 1000 x 10000 g (cm)² s⁻²
= 10⁷g (cm)² s⁻²

(b) \( 1 \text{ ly} = 9.46 \times 10^{15} \text{ m} \)
\( 1 \text{ m} = \frac{1}{9.46 \times 10^{15}} \text{ ly} = 1.06 \times 10^{-16} \text{ ly} \)

(c) \( 3.0 \text{ m s}^{-2} = 3.0 \text{ m} \times (1 \text{ s})^{-2} \)
\( = 3.0 \text{ m} \times \left(\frac{1}{60 \times 60 \text{ h}}\right)^2 \)
\( = 3.0 \text{ m} \times (60 \times 60 \text{ h}^{-1})^2 \)
\( = \frac{3.0}{1000} \text{ km} \times (60 \times 60 \times 60 \times 60 \text{ h}^{-2}) \)
\( = 3.9 \times 10^4 \text{ km h}^{-2} \)

(d) \( \text{G} = 6.67 \times 10^{-11} \text{ Nm}^2 (\text{kg})^{-2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \text{ N} \times 1 \text{ m}^2 \times (1 \text{ kg})^{-2} \)
\( = (6.67 \times 10^{-11} \text{ kg m s}^{-2}) \times 1 \text{ m}^2 \times \left(\frac{1}{\text{kg}}\right)^2 \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \text{ kg m}^3 \text{ s}^{-2} \times \frac{1}{(\text{kg})^2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{1}{\text{kg}} \text{ m}^3 \text{ s}^{-2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{1}{1000 \text{ g}} \times (100 \text{ cm})^3 \times \text{ s}^{-2} \)
\( = \frac{6.67 \times 10^{-11} \times (10^2)^3}{1000} (\text{cm})^3 \text{ s}^{-2} \times \text{ g}^{-1} \)
\( = 6.67 \times 10^{-8} (\text{cm})^3 \text{ s}^{-2} \text{ g}^{-1} \)
In simple words: This question demonstrates complex unit conversions, converting values between different systems (e.g., MKS to CGS) and composite units like gravitational constant. It highlights the algebraic manipulation of units.

🎯 Exam Tip: When converting units, ensure each component unit is converted correctly and raised to the appropriate power. For constants like G, all units must be consistent in the final expression.

Question 3. ऊष्मा या ऊर्जा का मात्रक कैलोरी है और यह लगभग 4.2J के बराबर है, जहाँ 1J =1 kg m² s⁻² मान लीजिए कि हम मात्रकों की कोई ऐसी प्रणाली प्रयोग करते हैं जिसमें द्रव्यमान का मात्रक a kg के बराबर है, लम्बाई का मात्रक βm के बराबर है, समय का मात्रक γs के बराबर है तो यह प्रदर्शित कीजिए कि नए मात्रकों के पदों में कैलोरी का परिमाण 4.2 α⁻¹ β⁻² γ² है।
Answer:
हलः
1 कैलोरी = 4.2 J = 4.2 kg-m²S⁻²
ऊर्जा का विमीय सूत्र = [ML²T⁻²]
माना दी गई दो मापन पद्धतियों में द्रव्यमान, लम्बाई तथा समय के मात्रक क्रमशः M₁,L₁, T₁, तथा M₂, L₂, T₂, हैं ।
तब, M₁ = 1 kg, L₁ = 1 m, T₁ = 1 s
तथा M₂ = α kg, L₂ = β m, T₂ = γs
अतः \( u_1 = [\text{M}_1 \text{L}_1^2 \text{T}_1^{-2}] \), \( u_2 = [\text{M}_2 \text{L}_2^2 \text{T}_2^{-2}] \)
\( n_1 = 4.2 \), \( n_2 =? \)
.:. सूत्र \( n_1u_1 = n_2u_2 \) से, \( n_2 = n_1 \frac{u_1}{u_2} \)
अतः
\( n_2 = n_1 \left[ \frac{\text{M}_1}{\text{M}_2} \right]^1 \left[ \frac{\text{L}_1}{\text{L}_2} \right]^2 \left[ \frac{\text{T}_1}{\text{T}_2} \right]^{-2} \)
\( = 4.2 \left[ \frac{1 \text{ kg}}{\alpha \text{ kg}} \right]^1 \left[ \frac{1 \text{ m}}{\beta \text{ m}} \right]^2 \left[ \frac{1 \text{ s}}{\gamma \text{ s}} \right]^{-2} \)
\( = 4.2 \times \frac{1}{\alpha} \times \frac{1}{\beta^2} \times \gamma^2 \)
\( = 4.2 \alpha^{-1} \beta^{-2} \gamma^2 \)
अर्थात् दूसरी पद्धति में 1 कैलोरी का मान \( 4.2 \alpha^{-1} \beta^{-2} \gamma^2 \) है।
In simple words: This problem involves converting the value of an energy unit (calorie) from one system of units to another by using dimensional analysis. We apply the principle that the magnitude of a physical quantity remains constant regardless of the unit system, allowing us to find the new numerical value based on given conversion factors for mass, length, and time.

🎯 Exam Tip: Remember the formula for unit conversion \( n_2 = n_1 \left( \frac{M_1}{M_2} \right)^a \left( \frac{L_1}{L_2} \right)^b \left( \frac{T_1}{T_2} \right)^c \) where a, b, c are the dimensions of the physical quantity in mass, length, and time respectively.

Question 4. इस कथन का स्पष्ट व्याख्या कीजिए : तुलना के मानक का विशेष उल्लेख किए बिना “किसी विमीय राशि को 'बड़ा या छोटा कहना अर्थहीन है।" इसे ध्यान में रखते हुए नीचे दिए गए कथनों को जहाँ कहीं भी आवश्यक हो, दूसरे शब्दों में व्यक्त कीजिए
(a) परमाणु बहुत छोटे पिण्ड होते हैं।
(b) जेट वायुयान अत्यधिक गति से चलता है।
(c) बृहस्पति का द्रव्यमान बहुत ही अधिक है।
(d) इस कमरे के अन्दर वायु में अणुओं की संख्या बहुत अधिक है।
(e) इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन से बहुत भारी होता है।
(f) ध्वनि की गति प्रकाश की गति से बहुत ही कम होती है।
Answer:
उत्तरः
सामान्यतया कहा जाता है कि परमाणु बहुत छोटा गोलीय पिण्ड है, परन्तु हम जानते हैं कि इलेक्ट्रॉन परमाणु से भी छोटा कण है, तब यह कहा जा सकता है कि इलेक्ट्रॉन की तुलना में परमाणु एक बड़ा पिण्ड है। इसके विपरीत क्रिकेट की गेंद की तुलना में परमाणु एक बहुत छोटा पिण्ड है। इस प्रकार हम देखते हैं कि परमाणु को किसी एक वस्तु की तुलना में बहुत छोटा कहा जा सकता है जबकि किसी अन्य वस्तु की तुलना में उसे बड़ा कहा जा सकता है। यही बात किसी विमीय राशि के विषय में भी लागू होती है। कोई विमीय राशि, किसी दूसरी समान विमीय राशि की तुलना में बड़ी हो सकती है जबकि किसी अन्य, समान विमीय राशि से छोटी हो सकती है। अतः किसी विमीय राशि को छोटा या बड़ा कहना तब तक अर्थहीन है जब तक कि तुलना के मानक को स्पष्ट उल्लेख ने किया गया हो।
(a) चीनी के एक दाने की तुलना में परमाणु बहुत छोटे पिण्ड होते हैं।
(b) जेट वायुयान, रेलगाड़ी की तुलना में अत्यधिक गति से चलता है।
(c) बृहस्पति का द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान की तुलना में बहुत ही अधिक है।
(d) इस कमरे के अन्दर वायु में अणुओं की संख्या, एक ग्राम-अणु गैस में उपस्थित अणुओं की संख्या ' से बहुत अधिक है।
कथनों
(e) तथा
(f) को बदलने की आवश्यकता नहीं है।
In simple words: This question highlights the principle of relativity in measurement: "big" or "small" are relative terms and require a clear reference for comparison. The examples demonstrate how descriptions of size, speed, and quantity become meaningful only when a standard of comparison is specified.

🎯 Exam Tip: Always provide a clear reference or comparison standard when describing physical quantities as 'large' or 'small' to avoid ambiguity and ensure scientific accuracy.

Question 5. लम्बाई का कोई ऐसा नया मात्रक चुना गया है जिसके अनुसार निर्वात में प्रकाश की चाल 1 है। लम्बाई के नए मात्रक के पदों में सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी कितनी है, प्रकाश इस दूरी को तय करने में 8 min और 20 s लगाता है।
Answer:
हलः
प्रकाश की चाल = 1 मात्रक S⁻¹
जबकि प्रकाश द्वारा लिया गया समय है t = 8 min 20 s
= (8x 60 + 20) s = 500s
.: सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी = प्रकाश की चाल x लगा समय
= 1 मात्रक s⁻¹ x 500 s = 500 मात्रक
In simple words: This problem defines a new unit of length where the speed of light in vacuum is 1 unit per second. By converting the given time for light to travel from the Sun to Earth into seconds, we can directly calculate the distance in this new unit of length.

🎯 Exam Tip: When a new unit system is introduced, redefine fundamental constants like the speed of light within that system. Distance is always the product of speed and time, irrespective of the unit system.

Question 6. लम्बाई मापने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सबसे परिशुद्ध यन्त्र है
(a) एक वर्नियर कैलीपर्स जिसके वर्नियर पैमाने पर 20 विभाजन हैं।
(b) एक स्क्रूगेज जिसका चूडी अन्तराल 1 mm और वृत्तीय पैमाने पर 100 विभाजन हैं।
(c) कोई प्रकाशिक यन्त्र जो प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की सीमा के अन्दर लम्बाई माप सकता है।
Answer:
हलः
(a) यहाँ वर्नियर कैलीपर्स का अल्पतमांक
\( = \frac{\text{मुख्य पैमाने के एक छोटे खाने का मान}}{\text{वर्नियर पैमाने पर विभाजनों को संख्या}} \)
\( = \frac{0.1 \text{ cm}}{20} = 0.005 \text{ cm} \)

(b) स्क्रूगेज का अल्पतमांक
\( = \frac{\text{चूड़ी अन्तराल}}{\text{वृत्तीय पैमाने पर विभाजनों की संख्या}} \)
\( = \frac{1 \text{ mm}}{100} = 0.001 \text{ cm} \)

(c) प्रकाशिक यन्त्र प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (10⁻⁷m की कोटि की) की सीमा के अन्दर लम्बाई माप सकता है; अतः इसका अल्पतमांक = 10⁻⁷ m = 10⁻⁵ cm
= 0.00001 cm
.: प्रकाशिक यन्त्र का अल्पतमांक सबसे कम है; अतः यह सर्वाधिक परिशुद्ध यन्त्र है।
In simple words: This question compares the precision of three different measuring instruments by calculating their least count. The instrument with the smallest least count (the optical instrument in this case) is the most precise for measuring length.

🎯 Exam Tip: The precision of a measuring instrument is determined by its least count; a smaller least count implies higher precision. Always calculate the least count for each instrument to compare their precision effectively.

Question 7. कोई छात्र 100 आवर्धन के एक सूक्ष्मदर्शी के द्वारा देखकर मनुष्य के बाल की मोटाई मापता है। वह 20 बार प्रेक्षण करता है और उसे ज्ञात होता है कि सूक्ष्मदर्शी के दृश्य क्षेत्र में बाल की औसत मोटाई 3.5 mm है। बाल की मोटाई का अनुमान क्या है?
Answer:
हलः
सूक्ष्मदर्शी का आवर्धन \( = \frac{\text{सूक्ष्मदर्शी द्वारा मापी गई मोटाई}}{\text{वास्तविक मोटाई}} \)
वास्तविक मोटाई \( = \frac{3.5 \text{ mm}}{100} = 0.035 \text{ mm} \)
.: बाल की मोटाई का अनुमान = 0.035 mm
In simple words: This problem involves using the magnification of a microscope to determine the actual thickness of a human hair. By dividing the observed magnified thickness by the magnification factor, we can find the hair's true thickness.

🎯 Exam Tip: Magnification relates the observed (magnified) size to the actual size. Remember the formula: Actual Size = Observed Size / Magnification.

Question 8. निम्नलिखित के उत्तर दीजिए
(a) आपको एक धागा और मीटर पैमाना दिया जाता है। आप धागे के व्यास का अनुमान किस प्रकार लगाएँगे?
(b) एक स्क्रूगेज का चूड़ी अन्तराल 1.0 mm है और उसके वृत्तीय पैमाने पर 200 विभाजन हैं। क्या आप यह सोचते हैं कि वृत्तीय पैमाने पर विभाजनों की संख्या स्वेच्छा से बढ़ा देने पर स्क्रूगेज की यथार्थता में वृद्धि करना संभव है?
(c) वर्नियर कैलीपर्स द्वारा पीतल की किसी पतली छड़ का माध्य व्यास मापा जाना है। केवल 5 मापनों के समुच्चय की तुलना में व्यास के 100 मापनों के समुच्चय के द्वारा अधिक विश्वसनीय अनुमान प्राप्त होने की सम्भावना क्यों है?
Answer:
उत्तर:
(a) इसके लिए हम एक बेलनाकार छड के ऊपर धागे को इस प्रकार लपेटेंगे कि धागे के फेरे एक-दूसरे से सटे रहें। धागे के फेरों द्वारा घेरी गई छड़ की लम्बाई l को मीटर पैमाने की सहायता से नाप लेंगे। अब लपेटे गए फेरों की संख्या n को गिन लिया जाएगा।
तब धागे का व्यास \( = \frac{\text{धागे के फेरों द्वारा घेरी गई छड़ की लम्बाई (l)}}{\text{फेरों की संख्या (n)}} \)
इस प्रकार धागे का व्यास ज्ञात हो जाएगा।

(b) स्क्रूगेज का अल्पतमांक \( = \frac{\text{चूड़ी अन्तराल}}{\text{वृत्तीय पैमाने पर विभाजनों की संख्या}} \)
उपर्युक्त सूत्र से स्पष्ट है कि वृत्तीय पैमाने पर विभाजनों की संख्या बढ़ाने से, स्क्रूगेजं का अल्पतमांक कम होगा; अतः स्क्रूगेज की यथार्थता बढ़ेगी।

(c) प्रेक्षणों की माध्य निरपेक्ष त्रुटि \( \Delta a = \frac{|\Delta a_1|+|\Delta a_2|+....+|\Delta a_n|}{\text{प्रेक्षणों की संख्या (n)}} \)
इस सूत्र से स्पष्ट है कि प्रेक्षणों की संख्या के बढ़ने से माध्य निरपेक्ष त्रुटि घटेगी; अतः अधिक प्रेक्षणों द्वारा प्राप्त छड़ का माध्य व्यास अधिक विश्वसनीय होगा।
In simple words: This question covers practical aspects of measurement: how to measure small diameters with simple tools (thread method), how screw gauge precision can be improved, and why taking more readings increases the reliability of measurements by reducing average absolute error.

🎯 Exam Tip: For practical measurements, using indirect methods (like the thread method) is effective for small dimensions. Increasing the number of observations reduces random errors and improves the reliability of the mean value, crucial for accurate experimental results.

Question 9. किसी मकान का फोटोग्राफ 35 mm स्लाइड पर 1.75 cm² क्षेत्र घेरता है। स्लाइड को किसी स्क्रीन पर प्रक्षेपित किया जाता है और स्क्रीन पर मकान का क्षेत्रफल 1.55 m² है। प्रक्षेपित्र-परदा व्यवस्था का रेखीय आवर्धन क्या है?
Answer:
हलः
स्लाइड पर मकान का क्षेत्रफल = 1.75 cm²
स्क्रीन पर मकान का क्षेत्रफल = 1.55 m² = 1.55 (100 cm)² = 1.55x 10000 cm²
.: प्रक्षेपित्र परदा व्यवस्था का क्षेत्रीय आवर्धन \( = \frac{\text{परदे पर मकान का क्षेत्रफल}}{\text{स्लाइड पर मकान का क्षेत्रफल}} \)
\( = \frac{1.55 \times 10000 \text{cm}^2}{1.75 \text{ cm}^2} = 8857.14 \)
रेखीक्ष्य आवर्धन = \( \sqrt{\text{क्षेत्रीय आवर्धन}} \)
\( = \sqrt{8857.14} = 94.1 \)
In simple words: This problem calculates the linear magnification of a projector-screen system using the ratio of areas. First, convert all area units to be consistent, then find the area magnification, and finally take its square root to get the linear magnification.

🎯 Exam Tip: Remember that area magnification is the square of linear magnification. Ensure all units are consistent (e.g., cm² to m² or vice versa) before performing calculations. Significant figures should be handled carefully.

Question 10. निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या लिखिए
(a) 0.007 m²
(b) 2.64 x 10²⁴ kg
(c) 0.2370 cm⁻³
(d) 6.320 J
(e) 6.032 Nm⁻²
(f) 0.0006032 m²
Answer:
उत्तर: (a) 1, (b) 3, (c) 4, (d) 4, (e) 4, (f) 4.
In simple words: This question asks to identify the number of significant figures in various measurements. Leading zeros are not significant, trailing zeros after a decimal point are significant, and zeros between non-zero digits are significant.

🎯 Exam Tip: Master the rules for identifying significant figures: Non-zero digits are always significant. Zeros between non-zero digits are significant. Leading zeros (before non-zero digits) are not significant. Trailing zeros are significant only if the number contains a decimal point.

Question 11. धातु की किसी आयताकार शीट की लम्बाई, चौड़ाई व मोटाई क्रमशः 4.234 m, 1.005 m व 2.01 cm है। उचित सार्थक अंकों तक इस शीट का पृष्ठीय क्षेत्रफल व आयतन ज्ञात कीजिए।
Answer:
हलः
यहाँ लम्बाई l = 4.234 m, चौड़ाई b = 1.005 m
तथा मोटाई c = 2.01 cm = 0.0201 m
स्पष्ट है कि लम्बाई व चौड़ाई में 4-4 सार्थक अंक हैं जबकि मोटाई में 3 सार्थक अंक हैं।
.: पृष्ठीय क्षेत्रफल तथा आयतन दोनों का अधिकतम 3 सार्थक अंकों में पूर्णांकन करना होगा ।
अब शीट का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2x (lb + bc + cl)
= 2x [4.234 x 1.005 + 1.005 x 0.0201 + 0.0201 x 4.234] m²
= 2x [4.25517 + 0.0202005 + 0.0851034] m²
= 2 x 4.3604739 m = 8.7209478 m = 8.72 m²
जबकि शीट का आयतन = l x b x c
= 4.234 m x 1.005 m x 0.0201 m
= 0.085528917 m³
= 0.0855 m³
In simple words: This problem requires calculating the surface area and volume of a rectangular sheet, ensuring the final answers are rounded to the correct number of significant figures, determined by the least precise measurement in the input data (which is 3 significant figures for thickness).

🎯 Exam Tip: When performing calculations with numbers having different significant figures, the result should be rounded to the least number of significant figures present in the original measurements. Always convert all units to be consistent before calculation.

Question 12. पंसारी की तुला द्वारा मापे गए डिब्बे का द्रव्यमान 2.300 kg है। सोने के दो टुकड़े जिनका द्रव्यमान क्रमशः 20.15 g व 20.17 g है, डिब्बे में रखे जाते हैं
(a) डिब्बे का कुल द्रव्यमान कितना है,
(b) उचित सार्थक अंकों तक टुकड़ों के द्रव्यमानों में कितना अन्तर है?
Answer:
हलः
(a) दिया है : डिब्बे का द्रव्यमान = 2.300 kg पहले टुकड़े का द्रव्यमान = 20.15 g = 0.02015 kg दूसरे टुकड़े का द्रव्यमान = 20.17 g = 0.02017 kg
.: टुकड़े रखने के बाद डिब्बे का कुल द्रव्यमान = 2.300 kg + 0.02015 kg + 0.02017kg = 2.34032 kg
:: तीनों मांपों में डिब्बे के द्रव्यमान में सबसे कम सार्थक अंक (4 अंक) हैं; अतः डिब्बे के कुल द्रव्यमान का अधिकतम चार सार्थक अंकों में पूर्णांकन करना होगा ।
.: डिब्बे का कुल द्रव्यमान = 2.340 kg

(b) सोने के टुकड़ों के द्रव्यमानों में प्रत्येक में 4 सार्थक अंक हैं; अतः इनके अन्तर का अधिकतम दशमलव के दूसरे स्थान तक पूर्णांकन करना होगा। टुकड़ों के द्रव्यमानों का अन्तर = 20.17 g - 20.16 g = 0.02 g
In simple words: This problem involves calculating total mass and the difference between two masses, adhering to rules of significant figures for addition/subtraction. For total mass, the result is rounded based on the decimal places of the least precise measurement. For the difference, it's rounded to the least number of decimal places of the values being subtracted.

🎯 Exam Tip: For addition and subtraction, the result should have the same number of decimal places as the measurement with the fewest decimal places. For multiplication and division, the result should have the same number of significant figures as the measurement with the fewest significant figures.

Question 13. कोई भौतिक राशि P, चार प्रेक्षण-योग्य राशियों a, b, c तथा d से इस प्रकार
a, b, c तथा d के मापने में प्रतिशत त्रुटियाँ क्रमशः 1%, 3%, 4% तथा 2% हैं। राशि P में प्रतिशत त्रुटि कितनी है?
यदि उपर्युक्त सम्बन्ध का उपयोग करके P का परिकलित मान 3. 763 आता है तो आप परिणाम का किस मान तक निकटन करेंगे?
Answer:
हलः
\( \text{P} = \frac{a^3b^2}{\sqrt{cd}} \)
.: P के मान में प्रतिशत त्रुटि
\( \frac{\Delta P}{P} \times 100 = 3 \times \frac{\Delta a}{a} \times 100 + 2 \times \frac{\Delta b}{b} \times 100 + \frac{1}{2} \times \frac{\Delta c}{c} \times 100 + \frac{\Delta d}{d} \times 100 \)
\( = 3 \times 1\% + 2 \times 3\% + \frac{1}{2} \times 4\% + 2\% = 13\% \)
.: \( \frac{\Delta P}{P} \times 100 = 13 \)
\( \Delta P = \frac{13 \times P}{100} \)
.: P के मान में त्रुटि,
\( \Delta P = \frac{13 \times 3.763}{100} \)
\( = 0.4891 \)
\( = 0.489 \)
(उचित सार्थक अंकों तक)
P के मान में त्रुटि 0.489 से स्पष्ट है कि P के मान में दशमलव के पहले स्थान पर स्थित अंक ही संदिग्ध है; अतः P के मान को दशमलव के दूसरे स्थान तक लिखना व्यर्थ है। अतः P के मान का. दशमलव के पहले स्थान तक पूर्णांकन करना होगा। अतः P का निकटतम मान = 3.763 = 3.8
In simple words: This problem calculates the percentage error in a physical quantity P, which depends on other quantities with known percentage errors, using the rules for error propagation. It then uses this error to round the calculated value of P to the appropriate number of significant figures, considering that the first uncertain digit determines the precision of the final result.

🎯 Exam Tip: Remember that in propagation of errors, powers are multiplied by the percentage error, and for products/quotients, percentage errors add up. For square roots, the error is halved. The final result should only have significant figures up to the place where the error starts.

Question 14. किसी पुस्तक में, जिसमें छपाई की अनेक त्रुटियाँ हैं, आवर्त गति कर रहे किसी कण के विस्थापन के चार भिन्न सूत्र दिए गए हैं
(a) \( y = a \sin \frac{2\pi t}{T} \)
(b) \( y = a \sin vt \)
(c) \( y = a \sin \frac{t}{a} \)
(d) \( y = (a\sqrt{2}) \sin \left(\frac{2\pi t}{T} + \cos \frac{2\pi t}{T}\right) \)
(a = कण का अधिकतम विस्थापन, v = कण की चाल, T = गति का आवर्तकाल)।
विमीय आधारों पर गलत सूत्रों को निकाल दीजिए।
Answer:
उत्तर: किसी त्रिकोणमितीय फलन का कोण एक विमाहीन राशि होती है। सूत्र (b) तथा (c) में कोण vt तथा \( \frac{t}{a} \) विमाहीन नहीं हैं; अतः उपर्युक्त दोनों सूत्र सही नहीं हैं। शेष दोनों सूत्र (a) तथा (d) सही हैं।
In simple words: This question asks to identify dimensionally incorrect equations for displacement in simple harmonic motion. The core principle is that the argument of trigonometric functions must be dimensionless, and both sides of an equation must have the same dimensions.

🎯 Exam Tip: Always apply the principle of homogeneity of dimensions: the dimensions of terms on both sides of an equation must be the same, and the arguments of trigonometric, logarithmic, and exponential functions must be dimensionless.

Question 15. भौतिकी का एक प्रसिद्ध सम्बन्ध किसी कण के चल द्रव्यमान (moving mass) m, विराम द्रव्यमान (rest mass) m₀, इसकी चाल v और प्रकाश c की चाल के बीच है। (यह सम्बन्ध सबसे पहले अल्बर्ट आइन्स्टाइन के विशेष आपेक्षिकता के सिद्धान्त के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुआ था ।) कोई छात्र इस सम्बन्ध को लगभग सही याद करता है। लेकिन स्थिरांक c को लगाना भूल जाता है। वह लिखता है
\( m = \frac{m_0}{(1 - v^2)^{1/2}} \)
अनुमान लगाइए कि c कहाँ लगेगा?
Answer:
उत्तर:
दिया गया सम्बन्ध है।
\( m = \frac{m_0}{(1 - v^2)^{1/2}} \) या \( (1 - v^2)^{1/2} = \frac{m_0}{m} \)
इस सम्बन्ध का दायाँ पक्ष विमाहीन है; अतः सूत्र के सही होने के लिए बायाँ पक्ष भी विमाहीन होना चाहिए जबकि ऐसा तभी हो पाएगा जबकि बायाँ पक्ष \( (1 - v^2)^{1/2} \) के स्थान पर \( (1 - v^2/c^2)^{1/2} \) हो।
अतः सही सूत्र होगा \( m = \frac{m_0}{(1 - v^2/c^2)^{1/2}} \)
In simple words: This problem demonstrates dimensional analysis to correct a famous physics equation, specifically Einstein's mass-energy relation. The argument inside the square root must be dimensionless, requiring the velocity term \(v^2\) to be divided by the square of the speed of light \(c^2\).

🎯 Exam Tip: In expressions involving \(1 - \text{something}\), the 'something' must be dimensionless. This is a common way to use dimensional analysis to verify or correct formulas, especially when constants are missing.

Question 16. परमाण्विक पैमाने पर लम्बाई का सुविधाजनक मात्रक ऍग्स्ट्रॉम है और इसे \( \text{Å} \) (1 \( \text{Å} \) = 10⁻¹⁰m) द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। हाइड्रोजन के परमाणु का आमाप लगभग 0.5 \( \text{Å} \) है। हाइड्रोजन परमाणुओं के एक मोल का m³ में कुल आण्विक आयतन कितना होगा?
Answer:
हलः
हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या, r = 0.5 \( \text{Å} \) = \( 0.5 \times 10^{-10} \) मीटर
प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु का आयतन \( = \frac{4}{3} \pi r^3 \) मी³
\( = \frac{4}{3} \times 3.14 \times (0.5 \times 10^{-10} \text{ मी})^3 \)
\( = 5.233 \times 10^{-31} \text{ मी}^3 \)
आवोगाद्रो की परिकल्पना से,
हाइड्रोजन के 1 मोल में परमाणुओं की संख्या \( N = 6.023 \times 10^{23} \)
हाइड्रोजेन परमाणु के 1 मोल के परमाणुओं का आयतन
\( V = N \times V \)
\( = 6.023 \times 10^{23} \times 5.233 \times 10^{-31} \)
\( = 3.15 \times 10^{-7} \text{ मी}^3 \)
In simple words: This problem calculates the total atomic volume of one mole of hydrogen atoms. It involves first finding the volume of a single atom using its given radius and then multiplying by Avogadro's number to get the molar volume.

🎯 Exam Tip: Remember to convert all units to SI (meters) before calculation. Avogadro's number is key for converting between properties of single atoms/molecules and molar quantities.

Question 17. किसी आदर्श गैस का एक मोल (ग्राम अणुक) मानक ताप व दाब पर 22.4L आयतन (ग्राम अणुक आयतन) घेरता है। हाइड्रोजन के ग्राम अणुक आयतन तथा उसके एक मोल के परमाण्विक आयतन का अनुपात क्या है? (हाइड्रोजन के (की आमाप लगभग 1\( \text{Å} \) मानिए)। यह अनुपात इतनी अधिक क्यों है?
Answer:
हलः
एक मोल हाइड्रोजन गैस का आयतन = 22.4 L = 22.4 x 10⁻³ m³
जबकि 1 मोल हाइड्रोजन गैस का परमाण्विक आयतन = 3.15 x 10⁻⁷ m³ (प्रश्न 16 के परिणाम से)
.: \( \frac{\text{1 मोल हाइड्रोजन गैस का आयतन}}{\text{1 मोल हाइड्रोजेन गैस का परमाण्विक आयतन}} = \frac{22.4 \times 10^{-3} \text{ m}^3}{3.15 \times 10^{-7} \text{ m}^3} \)
\( = 7.11 \times 10^4 \)
इसे अनुपात का मान इतना अधिक होने का अर्थ है कि गैस का आयतन उसमें उपस्थित अणुओं के वास्तविक आयतन की तुलना में बहुत अधिक होता है। इसका अन्य अर्थ यह है कि गैस के अणुओं के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है।
In simple words: This problem compares the macroscopic volume of one mole of hydrogen gas with the actual total volume of its atoms. The large ratio signifies that gas molecules occupy only a tiny fraction of the total volume, implying a vast amount of empty space between them.

🎯 Exam Tip: This question highlights the difference between the volume occupied by a gas and the actual volume of its constituent particles. The large ratio is a characteristic property of gases, indicating high compressibility and significant intermolecular spacing.

Question 18. इस सामान्य प्रेक्षण की स्पष्ट व्याख्या कीजिए : यदि आप तीव्र गति से गतिमान किसी रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर देखें तो समीप के पेड़, मकान आदि रेलगाड़ी की गति की विपरीत दिशा में तेजी से गति करते प्रतीत होते हैं, परन्तु दूरस्थ पिण्ड (पहाड़ियाँ, चन्द्रमा, तारे आदि) स्थिर प्रतीत होते हैं। (वास्तव में क्योंकि आपको ज्ञात है कि आप चल रहे हैं, इसलिए ये दूरस्थ वस्तुएँ आपको अपने साथ चलती हुई प्रतीत होती हैं।)
Answer:
उत्तर: किसी वस्तु का हमारे सापेक्ष गति करते हुए प्रतीत होना, हमारे सापेक्ष वस्तु के कोणीय वेग पर निर्भर करता है न कि उसके रेखीय वेग पर। यद्यपि गाड़ी से यात्रा करते समय सभी वस्तुएँ समान वेग से हमारे पीछे की ओर गति करती हैं, परन्तु समीप स्थित वस्तुओं का हमारे सापेक्ष कोणीय वेग अधिक होता है; अतः वे तेजी से पीछे जाती प्रतीत होती हैं जबकि दूर स्थित वस्तुओं का हमारे सापेक्ष कोणीय वेग बहुत ही कम होता है; अतः वे हमें लगभग स्थिर प्रतीत होती हैं।
In simple words: This explanation describes the phenomenon of apparent motion based on angular velocity. Nearby objects appear to move fast in the opposite direction because their angular velocity relative to the observer is high, while distant objects appear nearly stationary due to their much smaller relative angular velocity.

🎯 Exam Tip: Understand that apparent motion is governed by the angular velocity of the observed object relative to the observer. Objects closer to the observer have a larger angular velocity for the same linear speed, leading to a faster perceived movement.

Question 19. समीपी तारों की दूरियाँ ज्ञात करने के लिए लम्बन के सिद्धान्त का प्रयोग किया जाता है। सूर्य के परितः अपनी कक्षा में छः महीनों के अन्तराल पर पृथ्वी की अपनी, दो स्थानों को मिलाने वाली, आधार रेखा AB है। अर्थात आधार रेखा पृथ्वी की कक्षा के व्यास≈ 3x 10¹¹ m के लगभग बराबर है। लेकिन चूंकि निकटतम तारे भी इतने अधिक दूर हैं। कि इतनी लम्बी आधार रेखा होने पर भी वे चाप के केवल 1" (सेकण्ड, चाप का) की कोटि का लम्बन प्रदर्शित करते हैं। खगोलीय पैमाने पर लम्बाई का सुविधाजनक मात्रक पारसेक है। यह किसी पिण्ड की वह दूरी है जो पृथ्वी से सूर्य तक की दूरी के बराबर आधार रेखा के दो विपरीत किनारों से चाप के 1' का लम्बन प्रदर्शित करती है। मीटरों में एक पारसेक कितना होता है?
Answer:
हलः

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सूर्य (S) और पृथ्वी (E) की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ बिंदु O पृथ्वी से 1 पारसेक की दूरी पर स्थित एक खगोलीय वस्तु है। यह एक त्रिभुज बनाता है जिसका आधार पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या (SE) है और O पर 1" (आर्कसेकंड) का कोण अंतरित होता है, जो लम्बन विधि को समझने में मदद करता है।

पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या SE \( = \frac{\text{व्यास}}{2} \)
या SE \( = \frac{3 \times 10^{11} \text{ m}}{2} = 1.5 \times 10^{11} \text{ m} \)
प्रश्नानुसार, रेखाखण्ड SE, बिन्दु O पर 1" (चाप का) कोण अन्तरित करता है।
अतः \( \angle SOE = 1'' \)
\( = \frac{1}{60 \times 60} \text{ डिग्री} \)
\( = \frac{1}{60 \times 60} \times \frac{\pi}{180} \text{ rad} \) [:: 180° = \( \pi \) rad]
:: \( \angle SOE \) बहुत छोटा है; अतः दिशाएँ OS तथा OE लगभग सम्पाती होंगी।
.: दूरी SE को वृत्तीय चाप तथा दूरी OE को त्रिज्या व O को केन्द्र माना जा सकता है।
\( \angle SOE \) (rad. में) \( = \frac{\text{चाप SE}}{\text{त्रिज्या OE}} \)
या \( 1 \text{ पारसेक} = \frac{1.5 \times 10^{11} \text{ m}}{\frac{1}{60 \times 60} \times \frac{\pi}{180}} \)
\( 1 \text{ पारसेक} = \frac{1.5 \times 10^{11} \times 60 \times 60 \times 180}{\pi} \text{ m} \)
\( = \frac{1.5 \times 10^{11} \times 60 \times 60 \times 180}{3.14} \text{ m} \)
\( = 309.55 \times 10^{14} \text{ m} \)
अतः 1 पारसेक = \( 3.0 \times 10^{16} \) m के बराबर होता है।
In simple words: This question defines the parsec, a unit of distance used in astronomy, based on the parallax method. It explains that a parsec is the distance at which the radius of Earth's orbit (the baseline) subtends an angle of one arcsecond, and then calculates its equivalent value in meters.

🎯 Exam Tip: The parallax method is a fundamental way to measure stellar distances. Remember that 1 parsec corresponds to a parallax angle of 1 arcsecond, and be familiar with the conversion between arcseconds and radians for calculations.

Question 20. हमारे सौर परिवार से निकटतम तारा 4.29 प्रकाश वर्ष दूर है। पारसेक में यह दूरी कितनी है? यह तारा (ऐल्फा सेटौरी नामक) तब कितना लम्बन प्रदर्शित करेगा जब इसे सूर्य के परितः अपनी कक्षा में पृथ्वी के दो स्थानों से जो छः महीने के अन्तराल पर हैं, देखा, जाएगा?
Answer:
हलः
दिया है, दूरी s = 4.29 प्रकाश वर्ष
= 4.29 x \( 9.46 \times 10^{15} \) मीटर ( 1 प्रकाश वर्ष = \( 9.46 \times 10^{15} \) मीटर)
परन्तु 1 पारसेक = \( 3.08 \times 10^{16} \) मीटर
अतः दूरी s \( = \frac{4.29 \times 9.46 \times 10^{15}}{3.08 \times 10^{16}} \) पारसेक = 1.32 पारसेक
वांछित लम्बन = (2s) x चाप का 1 सेकण्ड
= 2 x 1.32 x चाप का 1 सेकण्ड = 2.64 चाप का 1 सेकण्ड
In simple words: This problem converts a star's distance from light-years to parsecs and then calculates the parallax angle it would exhibit. It uses the relationship between distance, baseline (Earth's orbital diameter), and parallax angle to determine the star's apparent shift over a six-month observation period.

🎯 Exam Tip: To convert light-years to parsecs, use the conversion factor 1 parsec \( \approx \) 3.26 light-years. The total parallax angle observed over six months (the annual parallax) is twice the parallax due to the Earth-Sun distance (s).

Question 21. भौतिक राशियों का परिशुद्ध मापन विज्ञान की आवश्यकताएँ हैं। उदाहरण के लिए, किसी शत्रु के लड़ाकू जहाज की चाल सुनिश्चित करने के लिए बहुत ही छोटे समयान्तरालों पर इसकी स्थिति का पता लगाने की कोई यथार्थ विधि होनी चाहिए। द्वितीय विश्वयुद्ध में रेडार की खोज के पीछे वास्तविक प्रयोजन यही था। आधुनिक विज्ञानं के उन भिन्न उदाहरणों को सोचिए जिनमें लम्बाई, समय, द्रव्यमान आदि के परिशुद्ध मापन की आवश्यकता होती है। अन्य जिस किसी विषय में भी आप बता सकते हैं, परिशुद्धता की मात्रात्मक धारणा दीजिए।
Answer:
उत्तरः
लम्बाई का मापनः विभिन्न यौगिकों के क्रिस्टलों में परमाणुओं के बीच की दूरी का मापन करते समय लम्बाई के परिशुद्ध मापन की आवश्यकता होती है।
समय का मापन: फोको की विधि द्वारा किसी माध्यम में प्रकाश की चाल ज्ञात करने के प्रयोग में समय के परिशुद्ध मापन की आवश्यकता होती है।
द्रव्यमान का मापनः द्रव्यमान स्पेक्ट्रमलेखी में परमाणुओं के द्रव्यमान का परिशुद्ध मापन किया जाता है।
In simple words: This question emphasizes the crucial role of precise measurement in science. It provides examples where high precision in length (atomic distances), time (speed of light), and mass (atomic masses) is essential for scientific advancement and practical applications like radar technology.

🎯 Exam Tip: Precision in measurement is vital across all scientific disciplines. Be ready to provide specific examples of where highly accurate measurements of length, mass, or time are critical, such as in crystallography, spectroscopy, or determining fundamental constants.

Question 22. जिस प्रकार विज्ञान में परिशुद्ध मापन आवश्यक है, उसी प्रकार अल्पविकसित विचारों तथा सामान्य प्रेक्षणों को उपयोग करने वाली राशियों के स्थूल आकलन कर सकना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। उन उपायों को सोचिए जिनके द्वारा आप निम्नलिखित का अनुमान लगा सकते हैं-(जहाँ अनुमान लगाना कठिन है वहाँ राशि की उपरिसीमा पता लगाने का प्रयास कीजिए)
(a) मानसून की अवधि में भारत के ऊपर वर्षाधारी मेघों का कुल द्रव्यमान।
(b) किसी हाथी का द्रव्यमान।।
(c) किसी तूफान की अवधि में वायु की चाल ।
(d) आपके सिर के बालों की संख्या ।
(e) आपकी कक्षा के कमरे में वायु के अणुओं की संख्या ।
Answer:
उत्तरः
(a) सर्वप्रथम मौसम विभाग से पूरे भारत में हुई कुल वर्षा की माप की जानकारी लेंगे और वर्षा जल के आयतन को जल के घनत्व से गुणा करके वर्षा जल के द्रव्यमान की गणना कर लेंगे। इससे मेघों का द्रव्यमान ज्ञात हो जाएगा।
(b) ट्रक आदि का द्रव्यमान मापने वाले काँटे पर खड़ा करके हाथी को द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।
(c) किसी तूफान की अवधि में वायु द्वारा उत्पन्न दाब को मापकर, वायु की चाल का आकलन किया जा सकता है।
(d) सिर के 1cm² क्षेत्रफल में स्थित बालों को गिन लिया जाएगा। तत्पश्चात् सिर के क्षेत्रफल का आकलन करके इस क्षेत्रफल से 1cm² क्षेत्रफल में स्थित बालों की संख्या को गुणा करके सिर के बालों की संख्या का आकलन किया जा सकता है।
(e) कक्षा के कमरे में उपस्थित वायु का घनत्व नापकर 1cm³ आयतन में उपस्थित अणुओं की संख्या की गणना की जा सकती है। तत्पश्चात् कमरे के आयतन से गुणा करके कक्षा के कमरे में उपस्थित वायु के अणुओं की गणना की जा सकती है।
In simple words: This question explores estimation techniques for large or difficult-to-measure quantities. It illustrates how one can approximate total cloud mass from rainfall data, elephant mass using a weighing scale for large vehicles, wind speed from pressure, hair count from density and scalp area, and the number of air molecules in a room using air density and molecular mass.

🎯 Exam Tip: Estimation often involves breaking down a complex problem into simpler, measurable components. Utilize known densities, average values, and proportional scaling to make reasonable approximations for quantities that are hard to measure directly.

Question 23. सूर्य एक ऊष्म प्लैज्मा (आयनीकृत पदार्थ) है जिसके आन्तरिक क्रोड का ताप 10⁷K से अधिक और बाह्य पृष्ठ का ताप लगभग 6000 K है। इतने अधिक ताप पर कोई भी पदार्थ ठोस या तरल प्रावस्था में नहीं रह सकता। आपको सूर्य का द्रव्यमान घनत्व किस परिसर में होने की आशा है? क्या यह ठोसों, तरलों या गैसों के घनत्वों के परिसर में है? क्या आपका अनुमान सही है, इसकी जाँच आप निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर कर सकते हैं- सूर्य का द्रव्यमान = \( 2.0 \times 10^{30} \) kg सूर्य की त्रिज्या = \( 7.0 \times 10^8 \) m.
Answer:
हलः
यहाँ द्रव्यमान M = \( 2.0 \times 10^{30} \) kg व त्रिज्या r = \( 7.0 \times 10^8 \) m
.: सूर्य का आयतन V \( = \frac{4}{3} \pi r^3 \)
\( = \frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times (7.0 \times 10^8 \text{ m})^3 \)
\( = \frac{4 \times 22 \times 7.0 \times 7.0 \times 10^{24}}{3} \text{ m}^3 \)
\( = 1.44 \times 10^{27} \text{ m}^3 \)
सूर्य का घनत्व \( = \frac{\text{द्रव्यमान (M)}}{\text{आयतन (V)}} \)
\( = \frac{2.0 \times 10^{30} \text{ kg}}{1.44 \times 10^{27} \text{ m}^3} \)
\( = 1.39 \times 10^3 \text{ kg/m}^3 = 1.4 \times 10^3 \text{ kg/m}^3 \)
सूर्य का द्रव्यमान घनत्व द्रव-ठोस के घनत्व परिसर में होता है।
In simple words: This problem asks for an estimation of the Sun's average density and compares it to densities of solids, liquids, and gases. By calculating the Sun's volume from its radius and using its given mass, we find its density to be comparable to that of liquids or solids, despite its plasma state, due to immense gravitational compression.

🎯 Exam Tip: The average density of a spherical body like the Sun can be calculated using its total mass and volume formula \( V = \frac{4}{3}\pi r^3 \). The surprising result that a plasma can have a density similar to solids/liquids highlights the extreme conditions (pressure and gravity) inside stars.

Question 24. जब बृहस्पति ग्रह पृथ्वी से 8247 लाख किलोमीटर दूर होता है तो इसके व्यास की कोणीय माप 35.72' का चाप है। बृहस्पति का व्यास परिकलित कीजिए।
Answer:
हलः
दिया है, बृहस्पति ग्रह की पृथ्वी से दूरी
s = 8247 लाख किलोमीटर = \( 8247 \times 10^5 \) किमी
व्यास का कोणीय माप \( \theta = 35.72' \)
\( = \frac{35.72}{60 \times 60} \times \frac{\pi}{180} \) रेडियन
.: \( \theta = b/s \)
.: व्यास b = s \( \times \theta \)
\( = 8247 \times 10^5 \times \frac{35.72 \times \pi}{60 \times 60 \times 180} \) किमी
\( = \frac{8247 \times 35.72 \times 10^{-2} \times 3.14}{36 \times 18} \) किमी
\( = 1.43 \times 10^5 \) किमी = \( 1.43 \times 10^8 \) मी
In simple words: This problem calculates the diameter of Jupiter using the small-angle approximation. Given the distance to Jupiter and its angular diameter, we convert the angular measure from arcminutes to radians and then use the formula \( \text{diameter} = \text{distance} \times \text{angular diameter (in radians)} \).

🎯 Exam Tip: For very small angles (less than about 10 degrees), the angle in radians is approximately equal to the ratio of the arc length (or diameter) to the radius (or distance). Always convert angular measurements to radians before using this formula.

अतिरिक्त अभ्यास

Question 25. वर्षा के समय में कोई व्यक्ति चाल) के साथ तेजी से चला जा रहा है। उसे अपने छाते को टेढ़ा करके ऊर्ध्व के साथ \( \theta \) कोण बनाना पड़ता है। कोई विद्यार्थी कोण \( \theta \) व \( \phi \) के बीच निम्नलिखित सम्बन्ध व्युत्पन्न करता है-tan \( \theta = v \) और वह इस सम्बन्ध के औचित्य की सीमा पता लगाता है: जैसी कि आशा की जाती है। यदि \( v \to 0 \) तो \( \theta \to 0 \) (हम यह मान रहे हैं कि तेज हवा नहीं चल रही है और किसी खड़े व्यक्ति के लिए वर्षा ऊध्वधरतः पड़ रही है)। क्या आप सोचते हैं कि यह सम्बन्ध सही हो सकता है? यदि ऐसा नहीं है तो सही सम्बन्ध का अनुमान लगाइए ।
Answer:
उत्तरः
दिए गए सम्बन्ध में,
बाएँ पक्ष की विमाएँ = [L⁰]
[: \( \tan \theta = \frac{\text{लम्ब}}{\text{आधार}} = \frac{[\text{L}]}{[\text{L}]} = [\text{L}^0] \)]
जबकि दाएँ पक्ष की विमाएँ = [LT⁻¹]
.: दोनों पक्षों की विमाएँ परस्पर समान नहीं हैं; अतः यह सम्बन्ध सही नहीं हो सकता। स्पष्ट है कि सही सम्बन्ध में दाएँ पक्ष की विमाएँ भी [L⁰] होनी चाहिए। माना वर्षा की बूंदें u वेग से ऊर्ध्वाधरतः नीचे गिर रही हैं, तब दाएँ पक्ष को विमाहीन करने के लिए v को u से भाग देना चाहिए।
In simple words: This problem uses dimensional analysis to check the correctness of an equation relating the angle of an umbrella to a person's speed in rain. The equation is incorrect because the left side (tan \( \theta \)) is dimensionless, while the right side (v, speed) has dimensions of [LT⁻¹]. The corrected formula would involve a ratio of speeds, making the right side dimensionless.

🎯 Exam Tip: The principle of dimensional homogeneity is a powerful tool for checking the validity of physical equations. If an equation is correct, the dimensions of all terms on both sides must be identical. Arguments of trigonometric functions must always be dimensionless.

 

Question 30. जल के नीचे वस्तुओं को ढूंढने व उनके स्थान का पता लगाने के लिए सोनार (SONAR) में पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग होता है। कोई पनडुब्बी सोनार से सुसज्जित है। इसके द्वारा जनित अन्वेषी तरंग और शत्रु की पनडुब्बी से परावर्तित इसकी प्रतिध्वनि की प्राप्ति के बीच काल विलम्ब 77.0 s है। शत्रु की पनडुब्बी कितनी दूर है? (जल में ध्वनि की चाल = 1450 m s-1)


Answer:

हलः
-दिया है, \(v = 1450\) मी/से तथा \(t = 77.0\) सेकण्ड
\( \therefore \) पनडुब्बी की दूरी \(d = \frac{v \times t}{2}\)
\( = \frac{(1450 \text{ मी/सेकण्ड}) \times (77.0 \text{ सेकण्ड})}{2}\)
\( = 55825 \) मी \( = 55.825\) किमी

In simple words: पनडुब्बी की दूरी निकालने के लिए, ध्वनि की चाल को समय से गुणा करके दो से विभाजित किया जाता है, क्योंकि ध्वनि को जाने और वापस आने में कुल समय लगता है।

🎯 Exam Tip: दूरी गणना में ध्वनि की चाल और कुल समय का सही उपयोग सुनिश्चित करें, खासकर जब ध्वनि को दो बार यात्रा करनी हो (जैसे प्रतिध्वनि में)।

 

Question 31. हमारे विश्व में आधुनिक खगोलविदों द्वारा खोजे गए सर्वाधिक दूरस्थ पिण्ड इतनी दूर हैं। कि उनके द्वारा उत्सर्जित प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में अरबों वर्ष लगते हैं। इन पिण्डों (जिन्हें क्वासर Quasar' कहा जाता है) के कई रहस्यमय लक्षण हैं जिनकी अभी तक सन्तोषजनक व्याख्या नहीं की जा सकी है। किसी ऐसे क्वासर की km में दूरी ज्ञात कीजिए जिससे उत्सर्जित प्रकाश को हम तक पहुँचने में 300 करोड़ वर्ष लगते हों।


Answer:

हलः
दिया है, \(t = 3 \times 10^9\) वर्ष \( = 3 \times 10^9 \times 365.25 \times 24 \times 60 \times 60\)
प्रकाश का वेग \(c = 3 \times 10^5\) किमी/सेकण्ड
\( \therefore \) दूरी \((d) = c \times t = 3 \times 10^5 \times 3 \times 10^9 \times 365.25 \times 24 \times 60 \times 60\)
\( = 2840184 \times 10^{16}\) किमी
\( = 2.84 \times 10^{22}\) किमी

In simple words: क्वासर की दूरी ज्ञात करने के लिए, प्रकाश की गति को अरबों वर्षों में प्रकाश द्वारा तय की गई कुल समय अवधि से गुणा करते हैं, जिससे यह पता चलता है कि ये खगोलीय पिण्ड कितनी दूर हैं।

🎯 Exam Tip: समय और प्रकाश की चाल को उचित इकाइयों में परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है (जैसे वर्ष को सेकंड में और किमी/सेकंड को किमी/वर्ष में) ताकि सटीक दूरी गणना की जा सके।

 

Question 32. यह एक विख्यात तथ्य है कि पूर्ण सूर्यग्रहण की अवधि में चन्द्रमा की चक्रिका सूर्य की चक्रिका को पूरी तरह ढक लेती है। चन्द्रमा का लगभग व्यास ज्ञात कीजिए।
(पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी = \(3.84 \times 10^8\) m सूर्य का कोणीय व्यास = 1920')


Answer:

हलः
माना कि चन्द्रमा का कोणीय व्यास = \(d\)

In simple words: चूंकि पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, इससे यह पता चलता है कि चंद्रमा का कोणीय व्यास सूर्य के कोणीय व्यास के समान होता है, जिससे चंद्रमा का व्यास पृथ्वी से उसकी दूरी और ज्ञात कोणीय व्यास के आधार पर निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: कोणीय व्यास और वास्तविक व्यास के बीच संबंध को समझने के लिए त्रिकोणमितीय सिद्धांतों का उपयोग करें। कोणीय माप को रेडियन में बदलना गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 33. जब बृहस्पति ग्रह पृथ्वी से 8247 लाख किलोमीटर दूर होता है तो इसके व्यास की कोणीय माप 35.72' का चाप है। बृहस्पति का व्यास परिकलित कीजिए।


Answer:

हलः
दिया है, बृहस्पति ग्रह की पृथ्वी से दूरी
\(s = 8247\) लाख किलोमीटर \( = 8247 \times 10^5\) किमी
व्यास का कोणीय माप \(\theta = 35.72' = \frac{35.72}{60 \times 60} \times \frac{\pi}{180}\) रेडियन
\( \therefore \theta = b/s \)
\( \implies \) व्यास \(b = s \times \theta\)
\( = 8247 \times 10^5 \times \frac{35.72 \times \pi}{60 \times 60 \times 180}\) किमी
\( = \frac{8247 \times 35.72 \times 10^{-2} \times 314}{36 \times 18}\) किमी
\( = 1.43 \times 10^5\) किमी \( = 1.43 \times 10^8\) मी

In simple words: बृहस्पति का व्यास ज्ञात करने के लिए, पृथ्वी से उसकी दूरी और उसके कोणीय व्यास का उपयोग किया जाता है। कोणीय माप को रेडियन में बदलकर, दूरी को कोणीय माप से गुणा करने पर बृहस्पति का वास्तविक व्यास मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: कोणीय माप को रेडियन में परिवर्तित करना (मिनट और सेकंड से) और सही दूरी सूत्र (वृत्त के चाप की लंबाई) का उपयोग करना इस प्रकार की खगोलीय गणनाओं में सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सा S.I. मात्रक नहीं है?
(i) ऐम्पियर
(ii) केण्डिला
(iii) न्यूटन
(iv) केल्विन


Answer: (iii) न्यूटनIn simple words: न्यूटन एक व्युत्पन्न मात्रक है जो SI मूल मात्रकों (किलोग्राम, मीटर, सेकंड) से बनता है, जबकि ऐम्पियर, केण्डिला और केल्विन SI के सात मूल मात्रकों में से हैं।

🎯 Exam Tip: SI मूल मात्रकों और व्युत्पन्न मात्रकों के बीच अंतर को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भौतिकी के मौलिक सिद्धांतों को समझने में मदद करता है।

 

Question 2. निम्नलिखित में से कौन दूरी का मात्रक नहीं है?
(i) ऐंग्स्ट्रॉम
(ii) फर्मी
(iii) बार्न
(iv) पारसेक


Answer: (iii) बार्नIn simple words: बार्न परमाणु भौतिकी में प्रभावी क्रॉस-सेक्शन का मात्रक है, जबकि ऐंग्स्ट्रॉम, फर्मी और पारसेक सभी लंबाई या दूरी को मापने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न इकाइयों के उपयोग और वे किस भौतिक राशि को मापते हैं, इसकी स्पष्ट समझ रखें। दूरी, क्षेत्रफल और समय के मात्रकों को भ्रमित न करें।

 

Question 3. पारसेक मात्रक है।
(i) समय का
(ii) दूरी को
(iii) आवृत्ति का
(iv) कोणीय संवेग का


Answer: (ii) दूरी काIn simple words: पारसेक एक लंबी दूरी की खगोलीय इकाई है जिसका उपयोग तारों और आकाशगंगाओं के बीच की दूरी को मापने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: खगोलीय दूरियों के मात्रकों (जैसे पारसेक और प्रकाश वर्ष) को याद रखें और उन्हें समय या अन्य भौतिक राशियों के मात्रकों से अलग पहचानें।

 

Question 4. प्रकाश वर्ष मात्रक है।
(i) समय का
(ii) दूरी का
(iii) वेग का
(iv) प्रकाश की तीव्रता का


Answer: (ii) दूरी काIn simple words: प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है, इसलिए यह समय नहीं बल्कि दूरी का मात्रक है।

🎯 Exam Tip: 'वर्ष' शब्द के कारण 'प्रकाश वर्ष' को समय का मात्रक समझने की गलती से बचें; यह हमेशा दूरी का मात्रक होता है।

 

Question 5. नाभिकीय त्रिज्या \(10^{-15}\) मीटर कोटि की है। इसे व्यक्त करने के लिए उपयुक्त मात्रक है
(i) माइक्रोन
(ii) मिमी
(iii) ऐंग्स्ट्राम
(iv) फर्मी


Answer: (iv) फर्मीIn simple words: फर्मी, जिसे फेम्टोमीटर भी कहते हैं, नाभिकीय आकार की अत्यधिक छोटी दूरियों को मापने के लिए उपयुक्त मात्रक है क्योंकि यह \(10^{-15}\) मीटर के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक पैमानों के लिए उपयुक्त मात्रकों को जानें, विशेष रूप से परमाणु और नाभिकीय स्तर पर जहाँ बहुत छोटी दूरियों को फर्मी या ऐंग्स्ट्रॉम जैसी इकाइयों में व्यक्त किया जाता है।

 

Question 6. निम्नलिखित में से व्युत्पन्न मात्रक है।
(i) केण्डिला
(ii) किग्रा
(iii) न्यूटन
(iv) मीटर


Answer: (iii) न्यूटनIn simple words: न्यूटन बल का मात्रक है, जो किलोग्राम, मीटर और सेकंड जैसे मूल मात्रकों से व्युत्पन्न होता है, जबकि केण्डिला, किलोग्राम और मीटर स्वयं मूल मात्रक हैं।

🎯 Exam Tip: SI मूल मात्रकों (मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल, केण्डिला) को अच्छी तरह याद रखें ताकि व्युत्पन्न मात्रकों की आसानी से पहचान की जा सके।

 

Question 7. 1 मीटर तुल्य है।
(i) \(10^{10}\) [latex]\mathring { A }[/latex]
(ii) \(10^8\) [latex]\mathring { A }[/latex]
(iii) \(10^6\) [latex]\mathring { A }[/latex]
(iv) \(10^5\) [latex]\mathring { A }[/latex]


Answer: (i) \(10^{10}\) [latex]\mathring { A }[/latex]In simple words: चूंकि 1 ऐंग्स्ट्रॉम \(10^{-10}\) मीटर के बराबर होता है, इसलिए 1 मीटर \(10^{10}\) ऐंग्स्ट्रॉम के बराबर होगा।

🎯 Exam Tip: विभिन्न मात्रकों के बीच रूपांतरण कारकों को याद रखें, खासकर ऐंग्स्ट्रॉम और मीटर जैसे आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मात्रकों के लिए।

 

Question 8. एक माइक्रोन (μ) होता है।
(i) \(10^{-9}\) मी
(ii) \(10^{-12}\) मी
(iii) \(10^{-6}\) मी
(iv) \(10^{-15}\) मी


Answer: (iv) \(10^{-15}\) मीIn simple words: एक माइक्रोन, जिसे माइक्रोमीटर भी कहते हैं, \(10^{-6}\) मीटर के बराबर होता है, जो बहुत छोटी दूरियों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: मीट्रिक उपसर्गों (जैसे माइक्रो-, नैनो-, पिको-, फर्मी-) और उनके संबंधित घातांकों को याद रखना विभिन्न पैमानों पर इकाइयों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. एक नैनोमीटर तुल्य है ।
(i) \(10^{-9}\) मिमी
(ii) \(10^{-6}\) सेमी
(iii) \(10^{-7}\) सेमी
(iv) \(10^{-9}\) सेमी


Answer: (iii) \(10^{-7}\) सेमीIn simple words: एक नैनोमीटर \(10^{-9}\) मीटर के बराबर होता है, और चूंकि 1 मीटर में 100 सेंटीमीटर होते हैं, इसलिए एक नैनोमीटर \(10^{-7}\) सेंटीमीटर के बराबर होगा।

🎯 Exam Tip: मात्रकों के बीच रूपांतरण करते समय घातों का सही ढंग से उपयोग करें; उदाहरण के लिए, मीटर से सेंटीमीटर में बदलते समय 100 से गुणा करना याद रखें।

 

Question 10. 1 सेकण्ड तुल्य है।
(i) क्रिप्टॉन घड़ी के 1650763.73 आवर्गों के
(ii) क्रिप्टॉन घड़ी के 652189.63 आवर्ती के
(iii) सीजियम घड़ी के 1650763.73 आवर्ती के
(iv) सीजियम घड़ी के 91926317770 आवर्ती के


Answer: (iv) सीजियम घड़ी के 91926317770 आवर्ती केIn simple words: अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (SI) में, 1 सेकंड को सीजियम-133 परमाणु द्वारा उत्सर्जित विशेष विकिरण के 9,192,631,770 आवर्तकालों की अवधि के रूप में परिभाषित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: समय की SI इकाई की सटीक परिभाषा को याद रखें, जो सीजियम परमाणु की विशिष्ट आवृत्तियों पर आधारित है, क्योंकि यह एक मौलिक मानक है।

 

Question 11. 1 मीटर में Kr86 की कितनी तरंगदैर्ध्य होती है?
(i) 1553164.13
(ii) 1650763.73
(iii) 2348123.73
(iv) 652189.63


Answer: (ii) 1650763.73In simple words: 1 मीटर की परिभाषा पहले क्रिप्टॉन-86 परमाणु द्वारा उत्सर्जित नारंगी-लाल प्रकाश की एक विशिष्ट संख्या में तरंगदैर्ध्यों पर आधारित थी।

🎯 Exam Tip: मूल SI इकाइयों की ऐतिहासिक परिभाषाओं को याद रखें, विशेष रूप से वे जो प्राकृतिक स्थिरांक या विशिष्ट परमाणु स्पेक्ट्रा पर आधारित थीं, क्योंकि यह मात्रकों के विकास को दर्शाता है।

 

Question 12. एक प्रकाश वर्ष दूरी बराबर है।
(i) \(9.46 \times 10^{10}\) किमी
(ii) \(9.46 \times 10^{12}\) किमी
(iii) \(9.46 \times 10^{12}\) मीटर
(iv) \(9.46 \times 10^{15}\) सेमी


Answer: (ii) \(9.46 \times 10^{12}\) किमीIn simple words: एक प्रकाश वर्ष लगभग \(9.46 \times 10^{12}\) किलोमीटर के बराबर होता है, जो प्रकाश द्वारा एक वर्ष में निर्वात में तय की गई दूरी है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश वर्ष के मान और इसकी इकाई (दूरी) को याद रखें। किलोमीटर और मीटर के बीच सही रूपांतरण का उपयोग करें।

 

Question 13. \(10^6\) डाइन/सेमी\(^2\) का दाब किसके बराबर है?
(i) \(10^7\) न्यूटन/मीटर\(^2\)
(ii) \(10^6\) न्यूटन/मीटर\(^2\)
(iii) \(10^5\) न्यूटन/मीटर\(^2\)
(iv) \(10^4\) न्यूटन/मीटर\(^2\)


Answer: (iii) \(10^5\) न्यूटन/मीटर\(^2\),In simple words: डाइन/सेमी\(^2\) को न्यूटन/मीटर\(^2\) में बदलने के लिए, यह याद रखना चाहिए कि 1 डाइन \(10^{-5}\) न्यूटन और 1 सेमी\(^2\) \(10^{-4}\) मीटर\(^2\) के बराबर होता है, जिससे रूपांतरण \(10^5\) न्यूटन/मीटर\(^2\) आता है।

🎯 Exam Tip: बल (डाइन से न्यूटन) और क्षेत्रफल (सेमी\(^2\) से मीटर\(^2\)) के मात्रकों के बीच सही रूपांतरण कारकों को याद रखें ताकि दाब इकाइयों को सटीक रूप से परिवर्तित किया जा सके।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. किसी भौतिक राशि के मापन से क्या तात्पर्य है?


Answer: किसी भौतिक राशि की इसके मात्रक से तुलना करना ही मापन कहलाता है।In simple words: मापन का अर्थ है किसी अज्ञात भौतिक राशि की तुलना उसकी एक ज्ञात मानक इकाई (मात्रक) से करना, यह जानने के लिए कि अज्ञात राशि उस मात्रक का कितना गुना है।

🎯 Exam Tip: मापन की परिभाषा स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। तुलना और मात्रक जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. किसी राशि की माप को पूर्णतया व्यक्त करने के लिए किन-किन बातों का ज्ञान होना आवश्यक है?


Answer: किसी राशि की माप को पूर्णतया व्यक्त करने के लिए निम्नलिखित बातों का ज्ञान होना आवश्यक है
1. मात्रकः जिसमें वह भौतिक राशि मापी जाती है।
2. आंकिक मानः यह उस राशि के परिमाण को प्रदर्शित करता है अर्थात् यह बताता है कि उस राशि की माप में उसका मात्रक कितनी बार सम्मिलित है।In simple words: किसी भी भौतिक राशि की माप को पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए हमें दो चीजों की आवश्यकता होती है: एक मात्रक (जैसे मीटर या किलोग्राम) और एक आंकिक मान (जैसे 5 या 10), जो बताता है कि मात्रक को कितनी बार शामिल किया गया है।

🎯 Exam Tip: मात्रक और आंकिक मान, मापन के दो अनिवार्य घटक हैं। इनके बिना कोई भी माप अधूरा माना जाता है।

 

Question 3. मात्रक कितने प्रकार के होते हैं?


Answer: मात्रक दो प्रकार के होते हैं- (i) मूल मात्रक, (ii) व्युत्पन्न मात्रक ।In simple words: मात्रक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: मूल मात्रक (जो स्वतंत्र होते हैं, जैसे मीटर) और व्युत्पन्न मात्रक (जो मूल मात्रकों से बनते हैं, जैसे न्यूटन)।

🎯 Exam Tip: मूल मात्रक और व्युत्पन्न मात्रक की अवधारणा भौतिकी के मापन प्रणाली का आधार है। इन दोनों प्रकार के मात्रकों के उदाहरण भी याद रखें।

 

Question 4. S.I. प्रणाली क्या है?


Answer: सात मूल मात्रकों तथा दो पूरक मूल मात्रकों पर आधारित माप की प्रणाली S.I. प्रणाली कहलाती है।।In simple words: SI प्रणाली, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मात्रक प्रणाली भी कहते हैं, एक वैश्विक मापन प्रणाली है जो सात मूल मात्रकों (जैसे मीटर, किलोग्राम, सेकंड) और दो पूरक मात्रकों (जैसे रेडियन) पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: SI प्रणाली की परिभाषा और इसके मूल तथा पूरक मात्रकों की संख्या को याद रखें, क्योंकि यह मानक मापन प्रणाली है।

 

Question 5. MKS प्रणाली के मूल मात्रकों के नाम लिखिए।


Answer: MKS प्रणाली के मूल मात्रक मीटर, किग्रा, सेकण्डे, ऐम्पियर, केण्डिला तथा केल्विन होते हैं।In simple words: MKS प्रणाली में, मूल मात्रक मीटर (लंबाई), किलोग्राम (द्रव्यमान), और सेकंड (समय) होते हैं, साथ ही कुछ अन्य मात्रक जैसे ऐम्पियर, केण्डिला और केल्विन भी इसमें शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: MKS प्रणाली के मूल मात्रकों को SI प्रणाली के मूल मात्रकों के साथ भ्रमित न करें, हालाँकि उनमें से कई समान हैं। MKS मुख्य रूप से यांत्रिक मात्रकों पर केंद्रित था।

 

Question 6. शेक किस भौतिक राशि का मात्रक है?


Answer: यह समय का मात्रक है तथा 1 शेक = \(10^{-8}\) सेकण्ड ।In simple words: शेक समय की एक बहुत छोटी इकाई है, जिसका उपयोग अक्सर नाभिकीय भौतिकी में बहुत कम समय अंतरालों को दर्शाने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: समय की छोटी इकाइयों जैसे शेक और माइक्रोसेकंड के मानों को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर विशिष्ट वैज्ञानिक संदर्भों में उपयोग किए जाते हैं।

 

Question 7. नाभिक के आकार को व्यक्त करने के लिए कौन-सा मात्रक प्रयुक्त किया जाता है? इसका मीटर से क्या सम्बन्ध है?


Answer: फर्मी, जहाँ 1 फर्मी (F) = \(10^{-15}\) मीटर ।In simple words: नाभिक के अत्यंत छोटे आकार को मापने के लिए फर्मी नामक मात्रक का उपयोग किया जाता है, जो 10 की घात -15 मीटर के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: फर्मी (या फेम्टोमीटर) नाभिकीय भौतिकी में लंबाई की मानक इकाई है, और इसका मीटर से संबंध (1 फर्मी = \(10^{-15}\) मीटर) याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. चन्द्रशेखर सीमा किस यौगिक राशि का मात्रक है?


Answer: यह द्रव्यमान का मात्रक है तथा 1 CS.L.= \(1.4 \times\) सूर्य का द्रव्यमान।।In simple words: चंद्रशेखर सीमा एक विशेष द्रव्यमान का मात्रक है जो सफेद बौने तारों के अधिकतम द्रव्यमान को परिभाषित करता है।

🎯 Exam Tip: चंद्रशेखर सीमा जैसी विशिष्ट खगोलीय अवधारणाओं को याद रखें और वे किस भौतिक राशि (जैसे द्रव्यमान) से संबंधित हैं, साथ ही उनके अनुमानित मान भी।

 

Question 9. AU तथा [latex]\mathring { A }[/latex] क्या हैं? इनमें पारस्परिक सम्बन्ध क्या हैं?


Answer: AU तथा [latex]\mathring { A }[/latex] लम्बाई के ही भिन्न-भिन्न मात्रक हैं। AU लम्बाई का खगोलीय मात्रक है तथा A लम्बाई की छोटा मात्रक है।।
1 AU =1.496 x \(10^{21}\) [latex]\mathring { A }[/latex]In simple words: AU (खगोलीय इकाई) सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी है, जबकि ऐंग्स्ट्रॉम परमाणु पैमाने पर बहुत छोटी दूरियों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है; ये दोनों लंबाई के मात्रक हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न पैमानों पर उपयोग की जाने वाली लंबाई की इकाइयों (जैसे AU और ऐंग्स्ट्रॉम) को समझें और उनके संख्यात्मक संबंध को याद रखें।

 

Question 10. स्लग (Slug) क्या है? 1 स्लग में मीट्रिक टनों की संख्या कितनी होगी?


Answer:

हलः
स्लग (Slug) बड़े द्रव्यमान मापने का एक मात्रक है।
तथा 1 स्लग = 14.59 किग्रा
\( \therefore \) 1 मीट्रिक टन = 1000 किग्रा
\( \therefore \) 1 स्लग = \(\frac{14.59}{1000}\) मीट्रिक टन
\( = 14.59 \times 10^{-3}\) मीट्रिक टन

In simple words: स्लग द्रव्यमान की एक इकाई है, जो मुख्य रूप से इंपीरियल प्रणाली में उपयोग की जाती है और लगभग 14.59 किलोग्राम के बराबर होती है; इसे मीट्रिक टन में बदलने के लिए इसे 1000 से विभाजित करना होगा।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान की विभिन्न प्रणालियों (जैसे इंपीरियल और मीट्रिक) की इकाइयों को जानें और उनके बीच रूपांतरण कारकों को याद रखें।

 

Question 11. क्या प्रकाश वर्ष समय का मात्रक है?


Answer: नहीं, प्रकाश वर्ष दूरी का मात्रक है।In simple words: प्रकाश वर्ष समय का मात्रक नहीं है, बल्कि यह वह दूरी है जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है।

🎯 Exam Tip: 'प्रकाश वर्ष' में 'वर्ष' शब्द के बावजूद, इसे समय की इकाई के रूप में गलत समझने से बचें; यह हमेशा दूरी की इकाई है।

 

Question 12. माइक्रोसेकण्ड तथा शेक में क्या सम्बन्ध है?


Answer:

हलः
-1 माइक्रोसेकण्ड = \(10^{-6}\) सेकण्ड
शेक (Shake) भी समय का छोटा मात्रक है।
जहाँ
\( \therefore \) 1 शेक = \(10^{-8}\) सेकण्ड
\( \implies \frac{1 \text{ माइक्रोसेकण्ड}}{1 \text{ शेक}} = \frac{10^{-6}}{10^{-8}} = 10^2\)
अतः
1 माइक्रोसेकण्ड = \(10^2\) शेक

In simple words: एक माइक्रोसेकंड (10\(^{-6}\) सेकंड) शेक (10\(^{-8}\) सेकंड) से 100 गुना बड़ा होता है, यानी 1 माइक्रोसेकंड में 100 शेक होते हैं।

🎯 Exam Tip: समय की छोटी इकाइयों और उनके घातांकों को याद रखें ताकि उनके बीच आसानी से रूपांतरण किया जा सके।

 

Question 13. प्रकाश वर्ष को परिभाषित कीजिए ।


Answer: 1 प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश निर्वात् में 1 वर्ष में तय करता है।
\( \therefore \) 1 प्रकाश वर्ष = \(9.46 \times 10^{15}\) मीटर
या निर्वात् में 1 प्रकाश वर्ष = \(9.46 \times 10^{13}\) मीटर

In simple words: प्रकाश वर्ष खगोलीय दूरी का एक मात्रक है जो प्रकाश द्वारा एक वर्ष में निर्वात में तय की गई कुल दूरी को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश वर्ष की परिभाषा को याद रखें, विशेष रूप से यह कि यह दूरी का मात्रक है न कि समय का, और इसका संख्यात्मक मान भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. 1 सेकण्ड माध्य-सौर-दिवस का कौन-सा भाग होता है?


Answer: 1 सेकण्ड माध्य-सौर-दिवस का 86,400वाँ भाग होता है।In simple words: एक माध्य-सौर-दिवस में 24 घंटे या 86,400 सेकंड होते हैं, इसलिए 1 सेकंड इस पूरे समय का 86,400वाँ हिस्सा होता है।

🎯 Exam Tip: 1 माध्य-सौर-दिवस में सेकंड की संख्या (86,400) याद रखें, क्योंकि यह समय के रूपांतरण में एक मानक संदर्भ बिंदु है।

 

Question 15. एक मीटर में कितने प्रकाश-वर्ष होते हैं?


Answer:

उत्तरः
हम जानते हैं कि,
1 प्रकाश वर्ष = \(9.46 \times 10^{15}\) मीटर
\( \therefore \) 1 मीटर = \(\frac{1}{9.46 \times 10^{15}}\) प्रकाश वर्ष
\( = 1.06 \times 10^{-16}\) प्रकाश वर्ष

In simple words: एक मीटर बहुत छोटी इकाई है जब इसे प्रकाश वर्ष से तुलना की जाती है, जो कि \(1.06 \times 10^{-16}\) प्रकाश वर्ष के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश वर्ष और मीटर के बीच व्युत्क्रम संबंध को समझें और गणना करते समय सही घातांक का उपयोग करें।

 

Question 16. पृथ्वी से प्रेषित एक लेसर पुंज चन्द्रमा से परावर्तन के पश्चात पृथ्वी पर 2.6 सेकण्ड बाद वापस लौटता है। पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी ज्ञात कीजिए ।


Answer:

हलः
यहाँ, समय \(t = 2.6\) सेकण्ड,
लेसर पुंज का वेग \(c = 3 \times 10^8\) मी/से
अतः पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी \(d = \frac{ct}{2}\)
\( = \frac{(3 \times 10^8) \times (2.6)}{2}\) मीटर
\( = 3.9 \times 10^8\) मीटर \( = 3.9 \times 10^5\) किमी

In simple words: चंद्रमा की दूरी ज्ञात करने के लिए, प्रकाश की गति को परावर्तन के लिए लिए गए कुल समय के आधे से गुणा किया जाता है, क्योंकि प्रकाश को चंद्रमा तक जाने और वापस आने में बराबर समय लगता है।

🎯 Exam Tip: दूरी-समय-चाल के सूत्र का उपयोग करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप कुल यात्रा के समय को आधा कर दें यदि आपको केवल एकतरफा दूरी की गणना करनी है (जैसे कि प्रतिध्वनि या परावर्तन में)।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मूल मात्रक क्या हैं? इनके चार गुण लिखिए।


Answer: मूल राशियों के वे मात्रक जो एक-दूसरे से पूर्णतया स्वतन्त्र होते हैं तथा इनमें से किसी एक मात्रक को किसी अन्य मात्रक से बदला अथवा उससे सम्बन्धित नहीं किया जा सकता है, मूल मात्रक कहलाते हैं। लम्बाई, द्रव्यमान, समय, वैद्युतधारा, ऊष्मागतिक ताप, ज्योति तीव्रता तथा पदार्थ की मात्रा मूल मात्रक हैं। मूल. मात्रकों के गुण निम्नलिखित हैं
1. यह बाह्य कारकों से अप्रभावित रहना चाहिए।
2. यह सुपरिभाषित होना चाहिए।
3. इसे सरलतापूर्वक निर्मित किया जाना चाहिए।
4. इसका उपयोग सरल होना चाहिए।In simple words: मूल मात्रक वे बुनियादी इकाइयाँ हैं जो अन्य इकाइयों से स्वतंत्र होती हैं, जैसे लंबाई के लिए मीटर; इनके मुख्य गुण हैं कि वे बाहरी प्रभावों से मुक्त होते हैं, स्पष्ट रूप से परिभाषित होते हैं, आसानी से बनाए जा सकते हैं और उपयोग में सरल होते हैं।

🎯 Exam Tip: SI प्रणाली के सात मूल मात्रकों को याद रखें और उनके गुणों को भी समझें। यह व्युत्पन्न मात्रकों और विभिन्न मापन प्रणालियों के आधार को समझने में मदद करता है।

 

Question 2. व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं? किसी एक भौतिक राशि का व्युत्पन्नमात्रक प्राप्त कीजिए।


Answer: मूल राशियों के अतिरिक्त अन्य सभी भौतिक राशियों के मात्रक एक अथवा अधिक मूल मात्रकों पर उपयुक्त घातें लगाकर प्राप्त किये जा सकते हैं। ऐसे मात्रकों को व्युत्पन्न मात्रक (derived units) कहते हैं। बल का व्युत्पन्न
मात्रक निम्न प्रकार से प्राप्त कर सकते हैं
बलु = द्रव्यमान x त्वरण
बल का मात्रक = किग्रा x मीटर/सेकण्ड\(^2\)
= किग्रा-मीटर सेकण्ड\(^{-2}\)
परन्तु S.I. प्रणाली में बल का व्यावहारिक मात्रक न्यूटन होता है।
\( \therefore \) 1 न्यूटन = 1 किग्रा-मीटर सेकण्ड\(^{-2}\)

In simple words: व्युत्पन्न मात्रक वे होते हैं जो एक या अधिक मूल मात्रकों को मिलाकर बनाए जाते हैं, जैसे बल का मात्रक न्यूटन (किलोग्राम, मीटर और सेकंड से बनता है)।

🎯 Exam Tip: व्युत्पन्न मात्रकों की परिभाषा को मूल मात्रकों से उनके संबंध के संदर्भ में समझें। बल, कार्य या ऊर्जा जैसे आम व्युत्पन्न मात्रकों के उदाहरण याद रखें।

 

Question 3. गुरुत्वीय द्रव्यमान और जड़त्वीय द्रव्यमान में अन्तर स्पष्ट कीजिए।


Answer: किसी वस्तु पर कार्यरतु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल तथा पृथ्वी की ओर मुक्त रूप से गिरती वस्तु के गुरुत्वीय जनित त्वरण का अनुपात, वस्तु का गुरुत्वीय द्रव्यमान कहलाता हैं, जबकि किसी वस्तु पर लगाए गए कुल बाह्य बल तथा उसके कारण वस्तु में उत्फन त्वरण का अनुपात वस्तु का जड़त्वीय द्रव्यमान कहलाता है।In simple words: गुरुत्वीय द्रव्यमान किसी वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण बल की माप है, जबकि जड़त्वीय द्रव्यमान किसी वस्तु द्वारा उसके वेग में परिवर्तन का विरोध करने की माप है, और ये दोनों प्रायोगिक रूप से समान पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय द्रव्यमान और जड़त्वीय द्रव्यमान दोनों की परिभाषाओं को याद रखें। यह भी ध्यान रखें कि आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत के अनुसार, ये दोनों द्रव्यमान प्रायोगिक रूप से समतुल्य होते हैं।

 

Question 4. मापन की यथार्थता तथा परिशुद्धता में अन्तर स्पष्ट कीजिए।


Answer:
1. किसी मापन की यथार्थता वह मान है जो हमें यह बताती है कि किसी राशि का मापित मान उसके वास्तविक मान के कितना निकट है, जबकि किसी मापन की परिशुद्धता यह बताती है कि वह राशि किस सीमा या विभेदन तक मापी गई है।
2. किसी भी मापक यन्त्र की यथार्थती उस यन्त्र में विद्यमान उसकी क्रमबद्ध त्रुटि पर निर्भर करती है, जबकि किसी भी मापक यन्त्र की परिशुद्धता यादृच्छिक त्रुटियों पर निर्भर करती है।In simple words: यथार्थता यह दर्शाती है कि आपका मापा गया मान वास्तविक मान के कितना करीब है, जबकि परिशुद्धता यह बताती है कि आपके माप कितने सुसंगत और दोहराने योग्य हैं, चाहे वे सही हों या नहीं।

🎯 Exam Tip: यथार्थता और परिशुद्धता के बीच के अंतर को स्पष्ट उदाहरणों के साथ समझें। याद रखें कि यथार्थता वास्तविक मान से निकटता से संबंधित है, जबकि परिशुद्धता माप की दोहराने योग्यता से संबंधित है।

 

Question 5. किसी राशि के परिमाण की कोटि से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित समझाइये ।


Answer: यदि किसी राशि के परिमाण को उसके निकटतम 10 की पूर्णाक घात के रूप में लिखा जाए, तो प्राप्त परिमाण को इस राशि को कोटिमान (कोटि) कहते हैं।
उदाहरणः
किसी राशि \(0.0025 = 2.5 \times 10^{-3}\) में 2.5, 3.16 से छोटा है, तो इस राशि का कोटिमान \(10^{-3}\) होगा, जबकि एक अन्य राशि \(0.0035 = 3.5 \times 10^{-3}\) में 3.5, 3.16 से बड़ा है, तो इस राशि का कोटिमान \(10^{-3+1} = 10^{-2}\) होगा।In simple words: किसी संख्या के परिमाण की कोटि उसकी निकटतम 10 की घात होती है, जिसे वैज्ञानिक संकेतन में व्यक्त करते समय उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: परिमाण की कोटि की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप संख्या को वैज्ञानिक संकेतन में व्यक्त करें और फिर 10 की घात को देखें, खासकर जब संख्या 3.16 (\( \sqrt{10} \)) से बड़ी या छोटी हो।

 

Question 6. पृथ्वी के व्यास के दो विपरीत छोरों से किसी आकाशीय पिण्ड का विस्थापनाभास (parallax) 60 सेकण्ड है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या \(64 \times 10^6\) मीटर हो, तो पृथ्वी के केन्द्र से आकाशीय पिण्ड की दूरी ज्ञात कीजिए। इस दूरी को खगोलीय मात्रक में परिवर्तित कीजिए। (1 A.U.= \(1.5 \times 10^{11}\) मीटर)


Answer:

हलः
दिया है, पृथ्वी की त्रिज्या, \(R = 6.4 \times 10^6\) मीटर
\( \therefore \) पृथ्वी का व्यास, \(2 \times R = 2 \times 6.4 \times 10^6\) मीटर
\( = 12.8 \times 10^6\) मीटर.
तथा विस्थापनाभास, \(\theta = 60\) सेकण्ड \( = \frac{60}{3600} \times \frac{1}{60}\) रेडियन
\( = \frac{1}{180} \times \frac{\pi}{60}\) रेडियन
\( \therefore \) आकाशीय पिण्ड की पृथ्वी से दूरी,
\(r = \frac{\text{D}}{ \theta} = \frac{12.8 \times 10^6}{ \frac{1}{180} \times \frac{\pi}{60}}\)
\( = \frac{12.8 \times 180 \times 60 \times 10^6}{\pi}\) मीटर
\( = \frac{12.8 \times 180 \times 60 \times 10^6}{3.14}\)
\( = 4.403 \times 10^{10}\) मीटर
\( = \frac{4.403 \times 10^{10}}{1.5 \times 10^{11}}\) A.U. \( = 0.294\) A.U.

In simple words: खगोलीय पिंड की दूरी ज्ञात करने के लिए, पृथ्वी के व्यास को उसके मापे गए विस्थापनाभास कोण (रेडियन में परिवर्तित) से विभाजित किया जाता है, फिर इस दूरी को खगोलीय इकाई (AU) में परिवर्तित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लंबी दूरियों की गणना में कोणों को रेडियन में परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है। खगोलीय इकाई (AU) और मीटर के बीच रूपांतरण कारक को याद रखें।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. लम्बन तथा लम्बनकोण से क्या तात्पर्य है? पृथ्वी के निकट स्थित तारे की दूरी ज्ञात करने के लिए लम्बन विधि का वर्णन कीजिए ।


Answer: लम्बन तथा लम्बनकोण-जब हम किसी दीवार पर अंकित किसी चिह्न P को पहले अपनी बायीं आँख A (दायीं आँख B बन्द रखते हुए) देखते हैं और फिर उसी बिन्दु को अपनी दायीं आँख B से (बायीं आँख A बन्द रखते हुए) देखते हैं तो दीवार के सापेक्ष चिह्न की स्थिति में आभासी विस्थापन दिखायी देता है। इस आभासी विस्थापन को ही लम्बन कहते हैं दूरी AB को आधार दूरी कहते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 2.2 में एक बिंदु P को दो अलग-अलग आँखों A और B से देखा जा रहा है। आँखों के बीच की दूरी b है। बिंदु P पर बनने वाला कोण \(\theta\) लम्बनकोण कहलाता है, जो यह दर्शाता है कि अवलोकन बिंदु बदलने पर वस्तु की स्थिति कितनी बदलती हुई प्रतीत होती है।
पृथ्वी के निकट स्थित तारे की दूरी ज्ञात करना — दिए गए चित्र 2.3 में सूर्य S के परितः पृथ्वी की परिक्रमण कक्षा का व्यास AB है। N एक तारा है जो पृथ्वी के निकट स्थित है तथा इस तारे N की ही पृथ्वी से दूरी ज्ञात करनी है। चित्र 2.3 में F एक अन्य तारा है जो पृथ्वी से काफी दूरी पर स्थित है। माना किसी क्षण पृथ्वी की अपनी कक्षा में स्थिति A है। खगोलीय दूरदर्शी द्वारा \(\angle\)FAN = \(\theta\), ज्ञात कर । लिया जाता है। में \(\angle\)ANS =\(\angle\) FAN = 0.6 माह के समयान्तराल पर पृथ्वी अपनी कक्षा में स्थिति A के ठीक सामने स्थिति B में होगी। अब खगोलीय दूरदर्शी द्वारा \(\angle\)NBF = \(\delta\)ज्ञात कर लिया जाता है।
\(\angle\)BNS =\(\angle\) NBF = \(\theta\), तथा \(\angle\)ANB=\(\angle\)ANS + \(\angle\)BNS = \(\theta_1 + \theta_2\). यह कोण तारे N द्वारा पृथ्वी के व्यास AB पर शीर्षाभिमुख बनने वाला कोण है।
कोण \( = \frac{\text{चाप}}{\text{त्रिज्या}}\)
अतः \(\angle\text{ANB} = \frac{\text{AB}}{\text{AN}}\)
\( \implies \text{AN} = \frac{\text{AB}}{\theta_1 + \theta_2}\) ...(1)
बिन्दु AB = \(2 \times\) AS = 2AU
\( = 2 \times (1.5 \times 10^{11})\) मीटर
\( = 3 \times 10^{11}\) मीटर
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 2.3 में सूर्य (S) के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा दिखाई गई है। पृथ्वी दो स्थितियों A और B पर है, जो छह महीने के अंतराल पर ली गई हैं, और तारे N को देखने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। तारे F एक दूरस्थ संदर्भ बिंदु है। \(\theta_1\) और \(\theta_2\) वे कोण हैं जो तारे N को A और B से देखने पर बनते हैं।
अत: AB का मान मीटर में तथा \((\theta_1 + \theta_2)\) का मान रेडियन में ज्ञात होने पर उपर्युक्त सूत्र (1) द्वारा पृथ्वी से इसके निकटतम तारे N की दूरी मीटर में ज्ञात कर ली जाती है।In simple words: लम्बन तब होता है जब अवलोकन बिंदु बदलने पर किसी वस्तु की स्थिति बदलती हुई प्रतीत होती है, और लम्बनकोण वह कोण है जिससे वस्तु को देखा जाता है। लम्बन विधि का उपयोग पृथ्वी की कक्षा को आधार मानकर निकट के तारों की दूरी ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लम्बन विधि को समझने के लिए आधार रेखा (पृथ्वी की कक्षा का व्यास) और लम्बनकोण (रेडियन में) का सही उपयोग महत्वपूर्ण है। ज्यामितीय अवधारणाओं और मात्रक रूपांतरण पर ध्यान दें।

 

Question 2. आवोगाद्रो विधि द्वारा परमाणु के आकार का आकलन किस प्रकार किया जा सकता है? समझाइए ।


Answer: आवोगाद्रो के अनुसार, पदार्थ के एक ग्राम-परमाणु में \(6023 \times 10^{23}\) परमाणु होते हैं, जो पदार्थ का लगभग दो-तिहाई आयतेन घेरते हैं। माना पदार्थ का द्रव्यमान m, पदार्थ का परमाणु भार M, पदार्थ द्वारा घेरा गया आयतन V, परमाणु की त्रिज्या तथा आवोगाद्रो संख्या N है। तब,
1 ग्राम पदार्थ में परमाणुओं की संख्या \( = \frac{N}{M}\)
m ग्राम पदार्थ में परमाणुओं की संख्या \( = m \left( \frac{N}{M} \right)\)
एक परमाणु द्वारा घेरा गया आयतन \( = \frac{4}{3} \pi r^3\)
पदार्थ के सभी परमाणुओं द्वारा घेरा गया आयतन \( = m \left( \frac{N}{M} \right) \times \frac{4}{3} \pi r^3\)
चूंकि आयतन V,
परन्तु आवोगाद्रो की परिकल्पना के अनुसार,
परमाणुओं द्वारा घेरा गया आयतन \( = \frac{2}{3} V\)
तब,
\( m \times \frac{N}{M} \times \frac{4}{3} \pi r^3 = \frac{2}{3} V\)
अथवा
\( r^3 = \frac{VM}{2\pi Nm}\)
अथवा
\( r = \left( \frac{VM}{2\pi Nm} \right)^{1/3}\)
परमाणु भार M, आवोगाद्रो संख्या N तथा पदार्थ का द्रव्यमान m ज्ञात हैं, अतः परमाणु की त्रिज्या । नापी जा सकती है, जिसका मान लगभग \(10^{-10}\) मीटर की कोटि का होता है।In simple words: आवोगाद्रो विधि से परमाणु के आकार का आकलन करने के लिए, पदार्थ के कुल द्रव्यमान और आयतन को आवोगाद्रो संख्या और परमाणु भार का उपयोग करके संबंधित किया जाता है, जिससे एक व्यक्तिगत परमाणु की त्रिज्या का अनुमान लगाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: आवोगाद्रो संख्या, परमाणु भार, पदार्थ का द्रव्यमान और आयतन के बीच संबंधों को समझें। यह विधि परमाणुओं के गोलाकार मॉडल पर आधारित है।

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