UP Board Solutions Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties of matter

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Detailed Chapter 11 पदार्थ के ऊष्मीय गुण UP Board Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 11 पदार्थ के ऊष्मीय गुण UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Physics Chapter 11 Thermal Properties Of Matter (द्रव्य के तापीय गुण)

अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

Question 1. निऑन तथा CO2 के त्रिक बिन्दु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
Answer: हल-
यहाँ \(T_{Ne} = 24.57\) K तथा \(T_{CO2} = 216.55\) K
परन्तु \((t + 273.15) = T \implies t = (T - 273.15)^\circ C\)
\(\therefore t_{Ne} = T_{Ne} - 273.15 = (24.57 - 279.15)^\circ C = -248.58^\circ C\)
\(t_{Co2} = T_{Co2} -273.15 = (216.55 - 273.15) = -56.6^\circ C\)
In simple words: यह प्रश्न निऑन और कार्बन डाइऑक्साइड के त्रिक बिन्दुओं के केल्विन तापमानों को सेल्सियस और फारेनहाइट स्केल में बदलने के लिए मानक तापमान रूपांतरण सूत्रों का उपयोग करता है।

🎯 Exam Tip: तापमान के विभिन्न पैमानों (केल्विन, सेल्सियस, फारेनहाइट) के बीच रूपांतरण सूत्र याद रखना और उनका सही उपयोग करना इस प्रकार के प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिन्दु को 200A तथा 350B द्वारा परिभाषित किया गया है। TA तथा TB में क्या सम्बन्ध है?
Answer: हल-
दिया है कि दोनों परम ताप मापक्रम हैं अर्थात् दोनों का शून्य, परम शून्य ताप से सम्पाती है। प्रश्नानुसार प्रथम पैमाने पर परम शून्य से जल के त्रिक बिन्दु (ताप 273.15K) तक के ताप को 200 भागों में तथा दूसरे पैमाने पर 350 भागों में विभाजित किया गया है।
अतः \(200A - 0A = 350B - 0B = 273.16\) K - Ok
या \(200A = 350B = 273.16\) K
In simple words: यह प्रश्न दो भिन्न परम तापमान पैमानों A और B के बीच संबंध स्थापित करता है, जहाँ जल का त्रिक बिंदु एक संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न तापमान पैमानों की तुलना करते समय, संदर्भ बिंदुओं (जैसे त्रिक बिंदु) और प्रति डिग्री अंतराल के मानों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है \(R = R_0 [1+ \alpha (T -T_0)]\) यदि तापमापी का जल के त्रिक बिन्दु 273.16K पर प्रतिरोध \(101.6 \Omega\) तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5K) पर प्रतिरोध \(165.5 \Omega\) है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध \(123.4 \Omega\) है।
Answer: हल-
यहाँ \(T_1 = 273.16\) K पर \(R_1 = 101.6 \Omega\)
\(T_2 = 600.5\)K पर \(R_2 = 165.5 \Omega\)
माना \(T_3 = ?\) पर \(R_3 = 123.4 \Omega\)
In simple words: यह प्रश्न प्रतिरोध-तापमान संबंध सूत्र का उपयोग करके अज्ञात तापमान की गणना करता है, जब दिए गए प्रतिरोध मानों और संदर्भ तापमानों पर प्रतिरोध ज्ञात होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध तापमापी के सूत्र का सही अनुप्रयोग, जिसमें प्रतिरोध और तापमान के बीच संबंध शामिल है, ऐसे संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. निम्नलिखित के उत्तर दीजिए :
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु एक मानक नियत बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत-बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था ।) क्या दोष है?
(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्द थे। जिनको क्रमशः \(0^\circ C\) तथा \(100^\circ C\) संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?
(c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) T तथा सेल्सियस मापक्रम पर ताप t¢ में सम्बन्ध इस प्रकार है: \(t_c =T -273.15\) इस सम्बन्ध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(d) उस.परमताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अन्तराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अन्तराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्या होगा?
Answer: उत्तर-
(a) क्योकि जल का त्रिक बिन्दु एक अद्वितीय बिन्दु है, जिसके संगत ताप 273.16 K अद्वितीय है, जबकि हिम का गलनांक तथा जल का क्वथनांक नियत नहीं है ये दाब परिवर्तित करने पर बदल जाते हैं।
(b) केल्विन मापक्रम पर अन्य नियत बिन्दु, परम शून्य ताप है जिस पर सभी गैसों का दाब शून्य हो जाता है।
(c) सेल्सियस पैमाने पर \(0^\circ C\), सामान्य दाब पर बर्फ का गलनांक है जिसके संगत केल्विन ताप 273.15 K है न कि 273.15 K। इस प्रकार प्रत्येक परम ताप, संगत सेल्सियस ताप से 273.15K ऊँचा है इसीलिए उक्त सम्बन्ध में 273.15 का प्रयोग किया गया है।
(d) हम जानते हैं कि \(32^\circ F = 273.15\) K तथा \(212^\circ F = 273.15\) K
\(\therefore 212^\circ F - 32^\circ F = (373.15 - 273.15)\) K या \(180^\circ F = 100\) K
In simple words: यह प्रश्न तापमान पैमानों, विशेष रूप से जल के त्रिक बिंदु के महत्व और सेल्सियस तथा केल्विन पैमानों के बीच संबंध पर आधारित विभिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट करता है।

🎯 Exam Tip: त्रिक बिंदु, परम शून्य और विभिन्न तापमान पैमानों के बीच संबंध जैसे अवधारणात्मक प्रश्नों के लिए स्पष्ट और सटीक परिभाषाएँ महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 5. दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं:
(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठयांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?
(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अन्तर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठयांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
Answer: हल-
(a) तापमापी A के लिए।
(b) दोनों तापमापियों के पाठयांकों में अन्तर इसलिए है क्योंकि प्रयोग की गई गैसें आदर्श नहीं हैं। विसंगति को दूर करने के लिए पाठयांक कम दाब पर लेने चाहिए जिससे कि गैसें आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करें ।
In simple words: यह प्रश्न आदर्श गैस तापमापियों की सीमाएं और वास्तविक गैसों के आदर्श व्यवहार से विचलन के कारण पाठ्यांकों में अंतर को बताता है, जिसका समाधान निम्न दाब पर प्रयोग करके किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस अवधारणा की सीमाओं और वास्तविक गैसों के व्यवहार पर दाब के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब तापमान माप उपकरणों पर विचार किया जाता है।

 

Question 6. किसी 1 m लम्बे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन \(27.0^\circ C\) पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप \(45^\circ C\) था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई क्या थी? जिस दिन ताप \(27.0^\circ C\) होगा उस दिन इसी छड़ की लम्बाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = \(1.20 \times 10^{-5}\) K\(^{-1}\).
Answer: हल-
जब ताप \(27^\circ C\) से बढ़कर \(45^\circ C\) हो जाती है तो ताप में वृद्धि \(\triangle T = (45-27)^\circ C = 18\)K; माना \(27^\circ C\) पर अंशांकित स्टील के फीते पर इस ताप वृद्धि के कारण इसकी \(l_1 = 1\) सेमी लम्बाई बढ़कर \(l_2\), हो जाती है तो
अतः यदि स्टील का फीता \(45^\circ C\) पर 1 सेमी मापता है तो छड़ की वास्तविक लम्बाई \(1.000216\) सेमी होगी। परन्तु यहाँ \(45^\circ C\) परं यह 63 सेमी मापता है। अतः स्टील छड़ की वास्तविक लम्बाई = \(63 \times 1.000216\) सेमी = \(63.0136\) सेमी
जिस दिन ताप \(27^\circ C\) होगा उस दिन स्टील फीते पर 1 सेमी चिह्न की वास्तविक लम्बाई 1 सेमी ही होगी चूंकि यह फीता इसी ताप पर अंशांकित किया गया है। अत: \(27^\circ C\) पर छड़ की वास्तविक लम्बाई = \(63.0 \times 1\) सेमी = \(63.0\) सेमी ही होगी ।'
In simple words: यह प्रश्न तापमान परिवर्तन के कारण स्टील के फीते की लंबाई में परिवर्तन और उससे मापी गई वस्तु की वास्तविक लंबाई पर इसके प्रभाव की गणना करता है।

🎯 Exam Tip: रेखीय प्रसार गुणांक का उपयोग करके तापमान के साथ लंबाई में परिवर्तन की गणना करते समय, विभिन्न तापमानों पर अंशांकन और मापन की शर्तों पर ध्यान दें।

 

Question 7. किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। \(27^\circ C\) पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केन्द्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ (ठोस Co2) द्वारा धुरी को ठण्डा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है। \(\alpha_{\text{स्टील}} = 1.20 \times 10^{-5}\) K\(^{-1}\).
Answer: हल-
\(T_1 = 27^\circ C = (27 + 273)\) K = 300K पर धुरी का व्यास \(D_1 = 8.70\) सेमी ।
माना धुरी को \(T_2\)K तक ठण्डा किया गया है ताकि इसका व्यास सिकुड़कर पहिए के केन्द्रीय छिद्र के व्यास \(D_2 = 8.69\) सेमी के बराबर हो जाये जिससे कि पहिया धुरी पर चढ़ सके ।
In simple words: इस प्रश्न में एक स्टील की धुरी को ठंडा करके उसके व्यास को कम करने के लिए आवश्यक तापमान की गणना की जाती है, ताकि वह एक पहिए के केंद्रीय छिद्र में फिट हो सके, जो थर्मल संकुचन के सिद्धांत पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: थर्मल विस्तार/संकुचन के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए, यह सुनिश्चित करने के लिए अंतिम व्यास की गणना करने में सटीकता महत्वपूर्ण है कि दो घटक ठीक से फिट हों।

 

Question 8. ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। \(27.0^\circ C\) पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को \(227^\circ C\) तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = \(1.70 \times 10^{-5}\)K\(^{-1}\).
Answer: हल-
In simple words: यह प्रश्न तांबे की चादर में एक छिद्र के व्यास में होने वाले परिवर्तन की गणना करता है जब उसे गर्म किया जाता है, जो तांबे के रेखीय प्रसार गुणांक का उपयोग करके थर्मल विस्तार के सिद्धांत पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि धातु की चादर में छिद्र का विस्तार उसी तरह होता है जैसे कि चादर का विस्तार होता है, और रेखीय प्रसार गुणांक का उपयोग करके व्यास में परिवर्तन की गणना की जा सकती है।

 

Question 9. \(27^\circ C\) पर 1.8 cm लम्बे किसी ताँबे के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को \(-39^\circ C\) ताप तक शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0 mm है। पीतल को रेखीय प्रसार गुणांक = \(2.0 \times 10^{-5}\) k\(^{-1}\), पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = \(0.91 \times 10^{11}\)Pa,
Answer: हल-
दिया है : \(T_1 = 27^\circ C, T_2 = -39^\circ C,\)
ताप परिवर्तन \(\triangle T = [27 -(-39)] = 66^\circ C\) या 66 K, तार की लम्बाई \(L = 1.8\) cm
तार का व्यास \(2r = 2.0\) mm
त्रिज्या \(r = 1.0 \times 10^{-3}\)m
In simple words: यह प्रश्न तांबे के तार में उत्पन्न तनाव की गणना करता है जब उसे ठंडा किया जाता है, जो तार के थर्मल संकुचन और यंग प्रत्यास्थता गुणांक के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: थर्मल तनाव की गणना करते समय रेखीय प्रसार गुणांक और यंग प्रत्यास्थता गुणांक दोनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, और यह सुनिश्चित करना कि तापमान परिवर्तन की गणना सही ढंग से की गई है।

 

Question 10. 50 cm लम्बी तथा 3.0 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लम्बाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लम्बाइयाँ \(40^\circ C\) पर हैं तो \(250^\circ C\) पर संयुक्त छड़ की लम्बाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या सन्धि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (पीतल तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः \(2.0 \times 10^{-5}\) k\(^{-1}\) तथा \(1.2 \times 10^{-5}\) \(\times\) k\(^{-1}\) हैं ।)
Answer: हल-
प्रत्येक छड़ का ताप \(T_1 = 40^\circ C\) पर लम्बाई \(L_1 = 50\) सेमी
संयुक्त छड़ का अन्तिम ताप \(T_2 = 250^\circ C\)
अतः प्रत्येक छड़ के ताप में वृद्धि
\(\triangle T = T_2 - T_1 = (250 -40)^\circ C = 210^\circ C = 210\)K
(.' सेल्सियस तथा केल्विन पैमाने पर 1 डिग्री को आकार बराबर होता है)
\(\therefore\) पीतल की छड़ की लम्बाई में वृद्धि
\((\triangle L)_{\text{पीतल}} = L_1 \cdot \alpha_{\text{पीतल}} \times \triangle T\)
\(= 50\) सेमी \(\times 2.0 \times 10^{-5}\) K\(^{-1} \times 210\)K
\(= 0.21\)
सेमी स्टील की छड़ की लम्बाई में वृद्धि \((\triangle L)_{\text{स्टील}} = L_1 \times \alpha_{\text{स्टील}} \times \triangle T\)
\(= 50\) सेमी \(\times 1.2 \times 10^{-5}\) K\(^{-1} \times 210\)K \(= 0.126\) सेमी \(\approx 0.13\) सेमी
\(\therefore\) संयुक्त छड़ की लम्बाई में वृद्धि = \((\triangle L)_{\text{पीतल}} + (\triangle L)_{\text{स्टील}}\)
\(= 0.21\) सेमी \(+ 0.13\) सेमी \(= 0.34\) सेमी
चूँकि छड़ों के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है, अतः संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होगा।
In simple words: यह प्रश्न पीतल और स्टील की संयुक्त छड़ के थर्मल विस्तार की गणना करता है, प्रत्येक धातु के रेखीय प्रसार गुणांक का उपयोग करके उनकी लंबाई में वृद्धि को निर्धारित करता है, और यह भी जाँचता है कि मुक्त सिरों के कारण कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होता है या नहीं।

🎯 Exam Tip: यह समझने के लिए कि क्या तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि क्या घटक स्वतंत्र रूप से विस्तार करने के लिए प्रतिबंधित हैं या मुक्त हैं।

 

Question 11. ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक \(49 \times 10^{-5}\) K\(^{-1}\) है। ताप में \(30^\circ C\) की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
Answer: हल-
In simple words: यह प्रश्न ग्लिसरीन के तापमान में वृद्धि के कारण उसके घनत्व में आंशिक परिवर्तन की गणना करता है, जो आयतन प्रसार गुणांक के सिद्धांत पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: घनत्व में आंशिक परिवर्तन की गणना करते समय आयतन प्रसार गुणांक और प्रारंभिक आयतन में परिवर्तन के बीच संबंध को सही ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें।

 

Question 12. 8.0 kg द्रव्यमान के किसी ऐलुमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10 kw की बरमी का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी? यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बरमी को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। ऐलुमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = \(0.91\) J g\(^{-1}\)K\(^{-1}\) है।
Answer: हल-
बरमी की शक्ति \(P = 10\) किलोवाट = \(10^4\) वाट = \(10^4\) जूल/सेकण्ड
समय \(t = 2.5\) मिनट = \(2.5 \times 60\) सेकण्ड = 150 सेकण्ड
\(\therefore\) बरमी द्वारा प्रयुक्त ऊर्जा \(w = P \times T = (10^4\) जूल/सेकण्ड) \(\times 150\) सेकण्ड
\(= 1.5 \times 10^6\) जूल ।
\(m = 8.0\) किग्रा के ऐल्युमीनियम के छोटे ब्लॉक द्वारा बरमी की प्रयुक्त ऊर्जा से ली गयी ऊर्जा
In simple words: यह प्रश्न एल्यूमीनियम ब्लॉक में तापमान वृद्धि की गणना करता है, जो ड्रिलिंग के लिए उपयोग की जाने वाली बरमी द्वारा उत्पादित ऊर्जा और एल्यूमीनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता पर आधारित है, यह मानते हुए कि आधी ऊर्जा ब्लॉक द्वारा अवशोषित होती है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा ऊर्जा की गणना करते समय दक्षता कारकों (जैसे कि 50% शक्ति का उपयोग) और इकाइयों (जैसे किलोवाट को जूल/सेकंड) के रूपांतरण पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 13. 2.5 kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में \(500^\circ C\) तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम-ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = \(0.39\) J g\(^{-1}\) K\(^{-1}\); बर्फ की संगलन ऊष्मा = \(335\) Jg\(^{-1}\).
Answer: हल-
यहाँ गुटके का द्रव्यमान \(m = 2.5\)
किग्रा गुटके की विशिष्ट ऊष्माधारिता \(s = 0.39\) जूल-ग्राम\(^{-1}\)-K\(^{-1}\)
\(= 0.39 \times 10^3\) जूल-किग्रा\(^{-1}{}^\circ C^{-1}\)
गुटके का प्रारम्भिक ताप \(T_1 = 500^\circ C,\)
अन्तिम ताप \(T_2 =\) बर्फ का ताप = \(0^\circ C\)
\(\therefore\) गुटके के ताप में कमी \(\triangle T = (T_1 - T_2) = 500^\circ C\)
माना गलित होने वाले बड़े हिम ब्लॉक की मात्रा = \(m_{\text{बर्फ}}\)
बर्फ के संगलन की ऊष्मा \(L = 335\) जूल-ग्राम\(^{-1} = 335 \times 10^3\) जूल-किग्रा\(^{-1}\)
ऊष्मामिति के सिद्धान्त से,
गुटके द्वारा दी गयी ऊष्मा = बर्फ द्वारा गलने में ली गयी ऊष्मा
In simple words: यह प्रश्न ऊष्मामिति के सिद्धांत का उपयोग करके तांबे के गर्म गुटके द्वारा बर्फ को पिघलाने के लिए दी गई ऊर्जा से पिघलने वाली बर्फ की अधिकतम मात्रा की गणना करता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत (दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा) का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को \(150^\circ C\) पर तप्त करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक = 0.025 kg) जिसमें \(27^\circ C\) का 150 cm³ जल भरा है, में गिराया जाता है। अन्तिम ताप \(40^\circ C\) है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
Answer: हल-
धातु के गुटके का द्रव्यमान \(m = 0.20\) किग्री
माना इसकी विशिष्ट ऊष्मा = \(s\)
जल तथा ऊष्मामापी की ताप \(T_2 = 27^\circ C\)
मिश्रण को प्रारम्भिक ताप \(T_1 = 150^\circ C\)
मिश्रण का अन्तिम ताप \(T = 40^\circ C\)
ऊष्मामापी का तुल्यांक \(W = M_s = 0.025\) किग्रा ।
जल का आयतन = 150 सेमी\(^3 = 150 \times 10^{-6}\) मी\(^3\)
जल का घनत्व = \(10^3\) किग्रा/मी\(^3\)
\(\therefore\) जले का द्रव्यमान \(M =\) आयतन \(\times\) घनत्व
\(= 150 \times 10^{-6}\) मी\(^3 \times 10^3\) किग्रा/मी\(^3 = 0.150\) किग्रा
धातु के गुटके द्वारा दी गयी ऊष्मा = \(m \times s \times (T_1 - T)\)
\(= 0.20 \times s \times (150-40) = 0.20 \times 110 \times s\)
(ऊष्मामापी + जल) द्वारा ली गयी ऊष्मा = \((m_{\text{जल}} \times S_{\text{जल}} + W) \times (T - T_2)\)
\( = (0.150 \times 1+ 0.025) \times (40-27)\)
\(= (0.175 \times 13)\) किलो कैलोरी
कैलोरीमिति के सिद्धान्त से,
दी गयी ऊष्मा = ली गयी ऊष्मा
\(\therefore 0.20 \times 110 \times s = 0.175 \times 13\)
किलो कैलोरी/किग्रा-\(^\circ C = 0.103\) किलो कैलोरी/किग्रा-K
In simple words: यह प्रश्न एक कैलोरीमीटर में धातु के गुटके की विशिष्ट ऊष्मा धारिता की गणना करता है, जो ऊष्मामिति के सिद्धांत का उपयोग करता है कि गर्म वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा ठंडी वस्तुओं द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी द्रव्यमान और तापमान परिवर्तन की गणना सही ढंग से की गई है, और यह समझना कि यदि परिवेश में ऊष्मा का क्षय नगण्य नहीं है तो वास्तविक मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

Question 15. कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं। इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप में किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal/mol K होती है। इस अन्तर का स्पष्टीकरण कीजिए। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
Answer: उत्तर-
एक परमाणुक गैसों के अणुओं में केवल स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है जबकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं में स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त घूर्णी गतिज ऊर्जा भी होती है। ऐसा इसलिए सम्भव है क्योंकि द्विपरमाणुक गैसों के अणु अन्तराणविक अक्ष के लम्बवत् दो अक्षों के परितः घूर्णन भी कर सकते हैं। जब किसी गैस को ऊष्मा दी जाती है तो यह ऊष्मा अणुओं की सभी प्रकार की ऊर्जाओं में समान वृद्धियाँ करती है। अब चूँकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं की ऊर्जा के प्रकार अधिक होते हैं इसीलिए इनकी मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ भी अधिक होती हैं। क्लोरीन की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता की अधिक होना यह प्रदर्शित करता है कि इसके अणु स्थानान्तरीय तथा घूर्णी गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त कम्पनिक गतिज ऊर्जा भी रखते हैं।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं में अंतर की व्याख्या करता है, जो अणुओं की स्थानान्तरीय, घूर्णी और कंपन गतिज ऊर्जा के प्रकारों में भिन्नता के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता में अंतर को समझने के लिए स्वतंत्रता की कोटि और विभिन्न प्रकार की आणविक गतियों (स्थानान्तरीय, घूर्णी, कंपन) के बीच संबंध को याद रखें।

 

Question 16. CO2 के p-T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किस ताप व दाब पर co2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती हो सकती
(b) co2 के गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब में कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?
(c) co2 के लिए क्रान्तिक ताप तथा दाब क्या हैं? इनको क्या महत्त्व है?
(d)

(a) \(- 70^\circ C\) ताप व 1 atm दाब,
(b) \(- 60^\circ C\) ताप व 10 atm दाब,
(c) \(15^\circ C\) ताप व 56 atm दाब पर co2 ठोस, द्रव अथवा गैस में किस अवस्था में होती है?
Answer: उत्तर-
(a) \(- 56.6^\circ C\) ताप तथा 5.11 atm दाब पर (त्रिक बिन्दु के संगत)।
(b) दाब में कमी होने पर दोनों घटते हैं।
(c) बिन्दु \(\epsilon\) के संगत, क्रान्तिक ताप = \(31.1^\circ C\) तथा क्रान्तिक दाब = 73.0 atm इससे उच्च ताप पर CO2 द्रवित नहीं होगी, चाहे उस पर कितना भी अधिक दाब आरोपित किया जाए।
(d) (a) वाष्प अर्थात् गैसीय अवस्था में, (b) ठोस अवस्था में, (c) द्रव अवस्था में।
In simple words: यह प्रश्न CO2 के p-T प्रावस्था आरेख पर विभिन्न बिंदुओं पर उसकी अवस्थाओं को समझने में मदद करता है, जिसमें त्रिक बिंदु, गलनांक, क्वथनांक पर दाब का प्रभाव और क्रांतिक बिंदु शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: p-T प्रावस्था आरेख पर त्रिक बिंदु, क्रांतिक बिंदु और विभिन्न क्षेत्रों (ठोस, द्रव, गैस) की स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है ताकि विभिन्न तापमान और दाब पर पदार्थ की अवस्था का सही निर्धारण किया जा सके।

 

Question 17. CO2 के p-T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) 1 atm दाब तथा \(-60^\circ C\) ताप पर CO2 का समतापी सम्पीडन किया जाता है? क्या यह द्रव प्रावस्था में जाएगी?
(b) क्या होता है जब 4 atm दाब पर CO2 का दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतन किया जाता है।
(c) 10 atm दाब तथा \(-65^\circ C\) ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO2 को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
(d) CO2 को \(70^\circ C\) तक तप्त तथा समतापी सम्पीडित किया जाता है। आप प्रेक्षण के लिए इसके किन गुणों में अन्तर की अपेक्षा करते हैं?
Answer: उत्तर-
(a) समतापी सम्पीडन का अर्थ है कि गैस को \(-60^\circ C\) ताप पर दाब अक्ष के समान्तर ऊपर को ले जाया जाता है। इसके लिए हम \(-60^\circ C\) ताप पर दाब अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देख सकते हैं। कि यह रेखा गैसीय क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है और द्रव क्षेत्र से नहीं गुजरती ।| इसका अर्थ यह है कि गैस बिना द्रवित हुए ठोस में बदल जाएगी।
(b) इस बार हम 4 atm दाब पर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। हम देखते हैं कि यह रेखा वाष्प क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है। इसका अर्थ है गैस, द्रव अवस्था में आए बिना ही ठोस अवस्था में संघनित हो जाएगी।
(c) इस बार हम 10 atm दाब तथा \(-65^\circ C\) ताप से प्रारम्भ करके ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं। यह रेखा ठोस क्षेत्र से द्रव क्षेत्र तथा द्रव क्षेत्र से वाष्प क्षेत्र में प्रवेश करेगी । इसका अर्थ यह है कि 10 atm दाब तथा \(-65^\circ C\) ताप पर गैस ठोस अवस्था में होगी। गर्म किए जाने पर धीरे-धीरे यह द्रव अवस्था में आ जाएगी तथा और गर्म किए जाने पर गैसीय अवस्था में आ जाएगी। द्रव्य के तापीय गुण 309
(d): \(70^\circ C\) ताप गैस के क्रान्तिक ताप से अधिक है; अतः इसे समतापी सम्पीडन द्वारा द्रवित नहीं किया जा सकता; अतः चिर स्थायी गैसों की भाँति दाब बढ़ाते जाने पर इसका आयतन कम होता जाएगा।
In simple words: यह प्रश्न CO2 के p-T प्रावस्था आरेख का उपयोग करके विभिन्न दाब और तापमान पर CO2 के व्यवहार का वर्णन करता है, विशेष रूप से समतापी संपीड़न और शीतलन के दौरान होने वाले चरण परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करता है।

🎯 Exam Tip: p-T आरेख पर समतापी (नियत तापमान) और समदाबी (नियत दाब) प्रक्रियाओं का पता लगाना सीखें ताकि यह समझा जा सके कि कोई पदार्थ किन अवस्थाओं से गुजरता है।

 

Question 18. \(101^\circ F\) ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरिन (ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर \(98^\circ F\) तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि ऊष्मा ह्रास का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान 30 kg है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal g\(^{-1}\) है।
Answer: हल-
बच्चे का द्रव्यमान \(M = 30\) किग्रा
उसके ताप में कमी
In simple words: यह प्रश्न बच्चे के शरीर से तापमान गिरने पर वाष्पीकरण के माध्यम से खोई हुई अतिरिक्त ऊष्मा की गणना करता है, जो बच्चे के द्रव्यमान, विशिष्ट ऊष्मा और जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा का उपयोग करता है।

🎯 Exam Tip: तापमान परिवर्तनों में ऊष्मा हानि या लाभ की गणना करते समय विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा के सूत्रों का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 19. थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स विशेषकर गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भण्डारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। 30 cm भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई 5.0 cm है। यदि इस बॉक्स में 4.0 kg हिम रखा है तो 6h के पश्चात बचे हिम की मात्रा का आकलन कीजिए। बाहरी ताप \(45^\circ C\) है तथा थर्मोकोल की. ऊष्मा चालकता \(0.01\) Js\(^{-1}\)m\(^{-1}\)k\(^{-1}\) है। (हिम की संगलन ऊष्मा = \(335 \times 10^3\)Jkg\(^{-1}\))
Answer: हल-
हिम बॉक्स की भुजा \(a = 30\) cm = \(0.3\) m, बॉक्स की मोटाई \(l = 5.0\) cm = \(0.05\) m
बाहरी ताप \(T_1 = 45^\circ C\), अन्दर (बर्फ) का ताप \(T_2 = 0^\circ C\)
समय \(t = 6\)h = \(6 \times 60 \times 60\) s, बर्फ का द्रव्यमान = \(4.0\) kg
माना ईसे ऊष्मा को प्राप्त करके \(m\) द्रव्यमान बर्फ पिघल जाती है। इस प्रक्रिया में बर्फ द्वारा अवशोषित ऊष्मा
In simple words: यह प्रश्न थर्मल चालकता और बर्फ की गुप्त ऊष्मा का उपयोग करके एक हिम बॉक्स में पिघलने वाली बर्फ की मात्रा की गणना करता है, जो बाहरी और आंतरिक तापमान अंतर के कारण ऊष्मा हस्तांतरण पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा चालकता, तापमान अंतर और समय को ध्यान में रखते हुए ऊष्मा हस्तांतरण की दर की गणना करने और इसे गुप्त ऊष्मा से संबंधित करने में सावधान रहें।

 

Question 20. किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल \(0.15\) m\(^2\) तथा मोटाई 1.0 cm है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/min की दर से जल उबलता है। बॉयलर के सम्पर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = \(109\) Js\(^{-1}\)m\(^{-1}\)K\(^{-1}\); जल की वाष्पन ऊष्मा = \(2256 \times 10^3\) Jkg\(^{-1}\)है।
Answer: हल-
पेंदी का क्षेत्रफल \(A = 0.15\) m\(^2\), मोटाई \(l = 1.0\) cm = \(0.01\) m,
पीतल की ऊष्मा चालकता \(K = 109\) Js\(^{-1}\)m\(^{-1}\)K\(^{-1}\),
जल की वाष्पन ऊष्मा \(L = 2256 \times 10^3\) J kg\(^{-1}\),
जल उबलने की दर = \(6.0\) kg/min
मानी ज्वाला का ताप \(T_1\) है जबकि बॉयलर का आन्तरिक ताप \(T_2 = 100^\circ C\)
\(t = 1\) min या 60 s में बॉयलर के भीतर प्रविष्ट होने वाली ऊष्मा
In simple words: यह प्रश्न ऊष्मा चालन और गुप्त ऊष्मा के सिद्धांतों का उपयोग करके बॉयलर के संपर्क में ज्वाला के तापमान की गणना करता है, जब जल एक निश्चित दर पर उबल रहा हो।

🎯 Exam Tip: ऊष्मा हस्तांतरण दर के सूत्र (Q/t = KAΔT/l) का उपयोग करते समय, वाष्पीकरण के लिए आवश्यक कुल ऊष्मा की गणना करने और तापमान अंतर के लिए हल करने में सटीक रहें।

 

Question 21. स्पष्ट कीजिए कि क्यों
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिण्ड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कंपकंपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं। तो वह ताप का सही मान मापता है?
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
Answer: उत्तर-
(a) हम जानते हैं कि उच्च परावर्तकता वाले पिण्ड अपने ऊपर गिरने वाले अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देते हैं अर्थात् वे अल्प अवशोषक होते हैं, इसीलिए वे अल्प उत्सर्जक भी होते हैं।
(b) लकड़ी की ट्रे ऊष्मा की कुचालक होती है जबकि पीतल का गिलास ऊष्मा का सुचालक है। यद्यपि कंपकंपी वाले दिन दोनों ही समान ताप पर होंगे, परन्तु हाथ से छूने पर गिलास हमारे हाथ से तेजी व्य के तापीय गुण 311 से ऊष्मा लेता है जबकि लकड़ी की ट्रे बहुत कम ऊष्मा लेती है। यही कारण है कि पीतल का गिलास लकड़ी की ट्रे की तुलना में अधिक ठण्डा लगता है ।|
(c) इसका कारण यह है कि खुले में रखे तप्त लोहे का गोला तेजी से ऊष्मा खोता है और ऊष्मा धारिता कम होने के कारण तेजी से ठण्डा होता जाता है, इससे उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण ऊर्जा लगातार नहीं मिल पाती। इसके विपरीत भट्ठी में रखने पर गोले का ताप स्थिर बना रहता है और वह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता रहता है।
(d) हम जानते हैं कि वायु ऊष्मा की कुचालक होती है, यही कारण है कि पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल एक कम्बल की भाँति कार्य करता है और पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरणों को वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देता है। वायुमण्डल की अनुपस्थिति में पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरण सीधे सुदूर अन्तरिक्ष में चले जाते तथा पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाती।
(e). हम जानते हैं कि 1g जलवाष्प, \(100^\circ C\) के 1g जल की तुलना में 540 cal अतिरिक्त ऊष्मा रखती है। इससे स्पष्ट है कि जलवाष्प आधारित तापन निकाय, तप्त जल आधारित तापन निकाय से अधिक दक्ष हैं।
In simple words: यह प्रश्न ऊष्मा हस्तांतरण के विभिन्न सिद्धांतों को बताता है, जिसमें उत्सर्जकता और परावर्तकता, विभिन्न सामग्रियों की चालकता, विकिरण के माध्यम से ऊष्मा हानि, वायुमंडल का इन्सुलेटिंग प्रभाव और भाप-आधारित हीटिंग सिस्टम की दक्षता शामिल है।

🎯 Exam Tip: यह महत्वपूर्ण है कि आप परावर्तन, उत्सर्जन, चालन और संवहन जैसे ऊष्मा हस्तांतरण के विभिन्न तरीकों को समझें, साथ ही विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा के अनुप्रयोगों को भी समझें।

 

Question 22. किसी पिण्ड का ताप 5 min में \(80^\circ C\) से \(50^\circ C\) हो जाता है। यदि परिवेश का ताप \(20^\circ C\) है। तो उस समय को परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप \(60^\circ C\) से \(30^\circ C\) हो जाएगा।
Answer: हल- \(80^\circ C\) तथा \(50^\circ C\) का माध्य \(65^\circ C\) है इसका परिवेश ताप से अन्तर \((65-20) = 45^\circ C\) है।
In simple words: यह प्रश्न न्यूटन के शीतलन नियम का उपयोग करके यह निर्धारित करने के लिए आवश्यक समय की गणना करता है कि किसी वस्तु का तापमान एक निश्चित सीमा तक कितना गिरेगा, बशर्ते परिवेश का तापमान और एक प्रारंभिक शीतलन दर ज्ञात हो।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के शीतलन नियम को लागू करते समय, वस्तु और परिवेश के बीच औसत तापमान अंतर की गणना करने में सटीक रहें।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

Question 1. ताप जो सेल्सियस और फारेनहाइट पैमाने पर समान पाठ देता है, वह है ।
(i) \(0^\circ\)
(ii) \(30^\circ\)
(iii) \(40^\circ\)
(iv) \(50^\circ\)
Answer: (iii) 40°
In simple words: यह एक ज्ञात तथ्य है कि \(40^\circ\) सेल्सियस और \(40^\circ\) फारेनहाइट दोनों पैमानों पर समान मान दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: सेल्सियस और फारेनहाइट पैमानों पर तापमान रूपांतरण सूत्र को याद रखें और उस बिंदु को पहचानें जहां दोनों पैमाने बराबर होते हैं।

 

Question 2. केल्विन पैमाने पर पानी का हिमांक होता है।
(i) 0 K
(ii) 100 K
(iii) 273 K
(iv) 373 K
Answer: (iii) 273 K
In simple words: केल्विन पैमाने पर पानी का हिमांक बिंदु \(273\) K है, जो \(0^\circ C\) के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: केल्विन और सेल्सियस तापमान पैमानों के बीच रूपांतरण (K = \(^\circ C\) + 273.15) को याद रखें और पानी के प्रमुख संदर्भ बिंदुओं (हिमांक और क्वथनांक) को जानें।

 

Question 3. \(0^\circ\), केल्विन पैमाने का मान होता है।
(i) 272 K
(ii) 273 K
(iii) 274 K
(iv) 275 K
Answer: (ii) 273 K
In simple words: \(0^\circ C\) केल्विन पैमाने पर \(273\) K के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: सेल्सियस से केल्विन में रूपांतरण (सेल्सियस तापमान में 273 जोड़ना) तापमान के प्रश्नों के लिए एक मूलभूत अवधारणा है।

 

Question 4. सेल्सियस तथा फारेनहाइट पैमाने में सम्बन्ध है।
(i) \(^\circ C = (^\circ F - 32)\)
Answer: (i) °C = (°F - 32)
In simple words: यह समीकरण सेल्सियस और फारेनहाइट तापमान पैमानों के बीच संबंध को दर्शाता है, जिससे एक से दूसरे में मानों को परिवर्तित किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: सेल्सियस और फारेनहाइट के बीच रूपांतरण सूत्र को याद रखना महत्वपूर्ण है: \(C/5 = (F-32)/9\), जिससे दिए गए विकल्प को भी हल किया जा सकता है।

 

Question 5. केल्विन पैमाने पर पानी का क्वथनांक होता है।
(i) 373 K
(ii) 273 K
(iii) 100 K
(iv) 230 K
Answer: (i) 373 K
In simple words: पानी का क्वथनांक बिंदु केल्विन पैमाने पर \(373\) K है, जो \(100^\circ C\) के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: केल्विन और सेल्सियस पैमानों पर पानी के हिमांक और क्वथनांक दोनों को याद रखें।

 

Question 6. एक आदर्श गैस थर्मामीटर द्वारा मापा गया ताप व्यंजक द्वारा दिया जाता है, तो ताप \(0^\circ\) है।
(i) केल्विन
(ii) फारेनहाइट
(iii) रयूमर
(iv) सेल्सियस
Answer: (iv) सेल्सियस
In simple words: यह प्रश्न उस तापमान पैमाने की पहचान करता है जिसका उपयोग आदर्श गैस थर्मामीटर के व्यंजक में आमतौर पर किया जाता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस थर्मामीटर के संदर्भ में, तापमान पैमाने और उसके संदर्भ बिंदुओं को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. आदर्श गैस के रुद्रोष्म प्रक्रम में ताप T तथा दाब P में सम्बन्थ है
(i) नियतांक
Answer: (i) नियतांक
In simple words: आदर्श गैस के लिए रुद्रोष्म प्रक्रम में, दाब और आयतन के बीच संबंध एक स्थिरांक के बराबर होता है, और इसी तरह दाब और तापमान के बीच भी।

🎯 Exam Tip: रुद्रोष्म प्रक्रम के लिए आदर्श गैस के नियमों (PV^\(\gamma\) = नियतांक, TV^\(\gamma\)-1 = नियतांक, P^\(1-\gamma\)T^\(\gamma\) = नियतांक) को याद रखें।

 

Question 8. किसी ताप पर आदर्श गैस के अणुओं में होती है।
(i) केवल गतिज ऊर्जा ।
(ii) केवल स्थितिज ऊर्जा
(iii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं ।
Answer: (i) केवल गतिज ऊर्जा
In simple words: आदर्श गैसों के अणुओं में केवल गतिज ऊर्जा होती है क्योंकि उनके बीच कोई अंतराण्विक आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होते हैं।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस की प्रमुख विशेषताओं में से एक यह है कि उसके अणुओं के बीच कोई अंतराण्विक बल नहीं होता है, जिसका अर्थ है कि उनकी कुल ऊर्जा केवल गतिज ऊर्जा से बनी होती है।

 

Question 9. आदर्श गैस के लिए \(\gamma = C_p/C_u\) अतः
उत्तर-
(ii)
In simple words: आदर्श गैस के लिए \(\gamma\) (गामा) मान विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात है।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैसों के लिए विशिष्ट ऊष्मा अनुपात (\(\gamma\)) की परिभाषा और उसका महत्व, विशेषकर एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक और बहुपरमाणुक गैसों के लिए उसके मान याद रखें।

 

Question 10. हीलियम गैस के लिए Cy तथा C, का अनुपात है
(i) 5/7
(ii) 7/5
(iii) 3/5
(iv) 5/3
Answer: (iv) 5/3
In simple words: हीलियम एक एकपरमाणुक गैस है, और एकपरमाणुक गैसों के लिए विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात \(\gamma = C_p/C_v\) का मान \(5/3\) होता है।

🎯 Exam Tip: एकपरमाणुक गैसों के लिए स्वतंत्रता की कोटि (3) और विशिष्ट ऊष्माओं (\(C_v = 3R/2\), \(C_p = 5R/2\)) के मान याद रखें।

 

Question 11. एक मोल गैस की 7 ताप पर आन्तरिक ऊर्जा है।
(i) Cp x T
(ii) Cu x T
(iii) (Cp - Cu)xT
(iv)Cp/Cu x T
Answer: (iii) (Cp - Cu)xT
In simple words: आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा उसके तापमान और विशिष्ट ऊष्मा पर निर्भर करती है, और \(C_p - C_v = R\) संबंध आंतरिक ऊर्जा की गणना में उपयोगी होता है।

🎯 Exam Tip: मेयर के सूत्र (\(C_p - C_v = R\)) और आंतरिक ऊर्जा के सूत्र (\(U = C_v T\)) को समझना आवश्यक है।

 

Question 12. किसी पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक 0.0002 प्रति \(^\circ C\) है। उसका रेखीय प्रसार गुणांक होगा !
(i) 0.0001 प्रति \(^\circ C\)
(ii) 0.0002 प्रति \(^\circ C\)
(iii) 0.0004 प्रति \(^\circ C\)
(iv) 0.0003 प्रति \(^\circ C\)
Answer: (i) 0.0001 प्रति °C
In simple words: क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) रेखीय प्रसार गुणांक (α) का दोगुना होता है, यानी \(\beta = 2\alpha\)।

🎯 Exam Tip: रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांकों (\(\alpha, \beta, \gamma\)) के बीच संबंध को याद रखें: \(\beta = 2\alpha\) और \(\gamma = 3\alpha\)।

 

Question 13. द्रव के वास्तविक एवं आभासी प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध प्रदर्शित करने का सही व्यंजक है
(i) \(Y_r = Y_a + Y_g\)
(ii) \(Y_g = Y_r + Y_a\)
(iii) \(Y_a = Y_r + Y_g\)
(iv) \(Y_r = Y_a - Y_g\)
Answer: (i) Yr = Ya + Yg
In simple words: किसी द्रव का वास्तविक प्रसार गुणांक उसके आभासी प्रसार गुणांक और बर्तन के प्रसार गुणांक का योग होता है।

🎯 Exam Tip: वास्तविक, आभासी और बर्तन के प्रसार गुणांकों के बीच संबंध द्रव के तापीय प्रसार से संबंधित समस्याओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूत्र है।

 

Question 14. वास्तविक प्रसार गुणांक का सूत्र होता है।
Answer: उत्तर-
(i) द्रव का वास्तविक प्रसार गुणांक =
In simple words: वास्तविक प्रसार गुणांक द्रव के आयतन में वास्तविक परिवर्तन को दर्शाता है, जिसे प्रारंभिक आयतन और तापमान परिवर्तन के संबंध में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: द्रव के वास्तविक प्रसार गुणांक की परिभाषा और उसके घटकों (आभासी और बर्तन के प्रसार) को समझना आवश्यक है।

 

Question 15. पानी का घनत्व अधिकतम होगा, यदि उसका ताप है।
(i) \(0^\circ C\)
(ii) \(4^\circ C\)
(iii) \(32^\circ C\)
(iv) \(100^\circ C\)
Answer: (ii) 4°C
In simple words: पानी का घनत्व \(4^\circ C\) पर अधिकतम होता है, जो पानी के असामान्य प्रसार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: पानी के असामान्य प्रसार की अवधारणा और \(4^\circ C\) पर इसके अधिकतम घनत्व को याद रखना प्राकृतिक घटनाओं और जलीय जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. ठण्डे देशों में झील के पानी के जम जाने पर भी मछलियाँ जीवित रहती हैं, क्योंकि
(i) वे अधिक ठण्ड सहन कर सकती हैं।
(ii) वे अपने अन्दर आवश्यक ऑक्सीजन संचय करती हैं।
(iii) झील के पानी की जमी हुई सतह के नीचे पानी द्रव के रूप में \(4^\circ C\) पर रहता है।
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (iii) झील के पानी की जमी हुई सतह के नीचे पानी द्रव के रूप में 4°C पर रहता है।
In simple words: ठंडी जलवायु में, पानी का असामान्य प्रसार यह सुनिश्चित करता है कि झील की सतह के नीचे \(4^\circ C\) पर तरल पानी रहता है, जो जलीय जीवन को बर्फ से बचाता है।

🎯 Exam Tip: पानी के अद्वितीय असामान्य प्रसार को समझना महत्वपूर्ण है, विशेषकर \(0^\circ C\) और \(4^\circ C\) के बीच, क्योंकि यह प्राकृतिक दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 17. विशिष्ट ऊष्मा का SI मात्रक होता है।
(i) जूल/किग्रा-\(^\circ C\)
(ii) जूल/किग्रा-\(^\circ F\)
(iii) जूल ग्राम-\(^\circ C\)
(iv) जूल/किग्रा
Answer: (i) जूल/किग्रा-°C
In simple words: विशिष्ट ऊष्मा एक इकाई द्रव्यमान के पदार्थ के तापमान को एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा है, और इसका SI मात्रक जूल प्रति किलोग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस है।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट ऊष्मा के लिए SI मात्रक और उसकी परिभाषा को याद रखें।

 

Question 18. मोलर विशिष्ट ऊष्मा का सूत्र होता है।
Answer: उत्तर-
(ii) मोलर विशिष्ट ऊष्मा
In simple words: मोलर विशिष्ट ऊष्मा एक मोल पदार्थ के तापमान को एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा है।

🎯 Exam Tip: मोलर विशिष्ट ऊष्मा और द्रव्यमान विशिष्ट ऊष्मा के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे विभिन्न संदर्भों में उपयोग होते हैं।

 

Question 19. मोटर गाड़ी के इंजन को ठण्डा करने के लिए जल प्रयोग में लाया जाता है, क्योंकि
(i) जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता उच्च होती है।
(ii) यह निम्न ताप पर उपलब्ध है।
(iii) यह निम्न घनत्व पर होता है।
(iv) यह आसानी से उपलब्ध है।
Answer: (i) जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता उच्च होती है।
In simple words: पानी की उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता इसे एक प्रभावी शीतलक बनाती है क्योंकि यह अपने तापमान में बड़ी वृद्धि के बिना बड़ी मात्रा में ऊष्मा को अवशोषित कर सकता है।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट ऊष्मा की अवधारणा और इसके वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों (जैसे शीतलक के रूप में पानी का उपयोग) को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. \(0^\circ C\) पर स्थित पानी की कुछ मात्रा में उसी ताप पर स्थित बर्फ की कुछ मात्रा मिला दी। जाती है। अब ताप ।
(i) घटेगा ।
(ii) बढ़ेगा ।
(iii) वही रहेगा
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (iii) वही रहेगा
In simple words: \(0^\circ C\) पर पानी और \(0^\circ C\) पर बर्फ का मिश्रण तब तक उसी तापमान पर रहेगा जब तक कि सभी बर्फ पिघल न जाए, क्योंकि गलनांक पर ऊष्मा का आदान-प्रदान गुप्त ऊष्मा के रूप में होता है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि चरण परिवर्तनों (जैसे गलनांक) के दौरान, पदार्थ का तापमान तब तक स्थिर रहता है जब तक कि पूरा चरण परिवर्तन पूरा न हो जाए, जबकि गुप्त ऊष्मा का आदान-प्रदान होता है।

 

Question 21. जल की विशिष्ट ऊष्मा 1 कैलोरी/ग्राम \(^\circ C\) है। इसका मान जूल/किग्रा \(^\circ C\) में होगा
(i)
(ii) \(4.2 \times 10^3\)
(iii) \(8.4 \times 10^3\)
(iv) \(4.1 \times 10^3\)
Answer: (ii) 4.2×103
In simple words: 1 कैलोरी प्रति ग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस 4.2 जूल प्रति ग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है, और इसे किलोग्राम में बदलने पर \(4.2 \times 10^3\) जूल प्रति किलोग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस हो जाता है।

🎯 Exam Tip: कैलोरी और जूल के बीच रूपांतरण कारक (1 कैलोरी = 4.2 जूल) को याद रखें और इकाइयों (ग्राम से किलोग्राम) को परिवर्तित करते समय सावधानी बरतें।

 

Question 22. भाप की विशिष्ट गुप्त ऊष्मा का मान है।
(i) 80 किलो कैलोरी/किग्रा
(ii) 536 किलो कैलोरी/किग्रा
(iii) 4.2 किलो कैलोरी/किग्रा
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ii) 536 किलो कैलोरी/किग्रा
In simple words: जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा 536 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम होती है, जिसका अर्थ है कि एक किलोग्राम जल को भाप में बदलने के लिए इतनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: जल के वाष्पीकरण और गलन की गुप्त ऊष्मा के विशिष्ट मानों को याद रखना ऊष्मागतिकी के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. किसी पदार्थ को गुप्त ऊष्मा देने पर
(i) गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
(ii) स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।
(iii) स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती है।
(iv) दोनों प्रकार की ऊर्जाएँ अप्रभावित रहती हैं।
Answer: (ii) स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।
In simple words: गुप्त ऊष्मा के माध्यम से ऊर्जा जोड़ने पर पदार्थ के अणुओं की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे चरण परिवर्तन होता है जबकि तापमान स्थिर रहता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि गुप्त ऊष्मा गतिज ऊर्जा को नहीं बढ़ाती (इसलिए तापमान नहीं बढ़ता), बल्कि यह अणुओं की स्थितिज ऊर्जा को बढ़ाती है जिससे उनके बीच की दूरी बढ़ती है और चरण परिवर्तन होता है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न :

Question 1. सेल्सियस पैमाने के उच्चतम बिन्दु का मान क्या होता है?
Answer: उत्तर- सेल्सियस पैमाने के उच्चतम बिन्दु का मान \(100^\circ C\) होता है।
In simple words: सेल्सियस पैमाने पर पानी \(100^\circ C\) पर उबलना शुरू होता है, जिसे इस पैमाने का उच्चतम निश्चित बिंदु माना जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न तापमान पैमानों के परिभाषित बिंदुओं (जैसे हिमांक और क्वथनांक) को याद रखें।

 

Question 2. त्रिक बिन्दु के संगत दाब तथा ताप के मान बताइए।
Answer: उत्तर- दाब 4.58 मिमी तथा ताप \(0.01^\circ C\).
In simple words: जल का त्रिक बिंदु वह विशिष्ट तापमान और दाब है जहाँ जल ठोस, द्रव और गैसीय अवस्थाओं में सह-अस्तित्व में होता है।

🎯 Exam Tip: त्रिक बिंदु की परिभाषा और जल के लिए इसके विशिष्ट दाब और तापमान मानों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. तापमापी में जल का उपयोग क्यों नहीं किया जाता? तीन कारण लिखिए।
Answer: उत्तर-
(i) जल पारदर्शी है,
(ii) काँच से चिपकता है तथा
(iii) इसका ऊष्मीय प्रसार असमान है।
In simple words: पानी अपनी भौतिक विशेषताओं के कारण तापमापी में पारा या अल्कोहल जैसे अन्य तरल पदार्थों जितना उपयुक्त नहीं है।

🎯 Exam Tip: तापमापी तरल पदार्थों (जैसे पारा और अल्कोहल) के गुणों और पानी की कमियों को याद रखें।

 

Question 4. स्थिर-आयतन वायु तापमापी का सिद्धान्त बताइए ।
Answer: उत्तर- सिद्धान्त किसी गैस का स्थिर आयतन पर दाब गैस के ताप के साथ बदलता है। यदि गैस के एक निश्चित द्रव्यमान के, स्थिर आयतन पर, \(0^\circ C, 100^\circ C\) तथा एक अज्ञात ताप t पर दाब क्रमशः \(P_0, P_{100}\) तथा \(P_t\) हों तो
In simple words: एक स्थिर-आयतन वायु तापमापी गैस के दाब-ताप संबंध का उपयोग करता है, जहां स्थिर आयतन पर गैस का दाब उसके तापमान के सीधे आनुपातिक होता है।

🎯 Exam Tip: स्थिर-आयतन गैस तापमापी के सिद्धांत को समझें, विशेषकर गैसीय कानूनों के संबंध में।

 

Question 5. प्रतिरोध तापमापी में प्लेटिनम का तार क्यों प्रयुक्त किया जाता है?
Answer: उत्तर- प्लेटिनम के तार का प्रतिरोध ताप के बढ़ने पर (\(200^\circ C\) से \(1200^\circ C\) तक) एकसमान रूप से बढ़ता है, गलनांक ऊँचा होता है तथा यह अन्य पदार्थों से रासायनिक क्रिया नहीं करता।
In simple words: प्लेटिनम को प्रतिरोध तापमापी में उसके उच्च गलनांक, रासायनिक निष्क्रियता और तापमान के साथ प्रतिरोध में स्थिर और अनुमानित परिवर्तन के कारण उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्लेटिनम के गुणों और प्रतिरोध तापमापी में इसके अनुप्रयोग को याद रखें।

 

Question 6. समीकरण \(R_t = R_0(1 + \alpha t)\) में R प्रतिरोध तथाt ताप है। \(\alpha\) का मात्रक बताइए।
Answer: उत्तर- प्रति\(^\circ C\)
In simple words: \(\alpha\) (अल्फा) तापमान गुणांक है, और यह प्रति डिग्री सेल्सियस में मापा जाता है, क्योंकि यह प्रतिरोध के आनुपातिक परिवर्तन को प्रति डिग्री तापमान में दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: तापमान गुणांक के मात्रक को याद रखें और प्रतिरोध तापमापी के सूत्र में विभिन्न मापदंडों का अर्थ समझें।

 

Question 7. मानव शरीर का सामान्य ताप क्या होता है?
Answer: उत्तर- मानव शरीर का सामान्य ताप \(37^\circ C (98.4^\circ F)\) होता है।
In simple words: स्वस्थ मानव शरीर का औसत तापमान \(37^\circ C\) या \(98.4^\circ F\) होता है।

🎯 Exam Tip: मानव शरीर के सामान्य तापमान को सेल्सियस और फारेनहाइट दोनों पैमानों में याद रखें।

 

Question 8. सार्वत्रिक गैस नियतांक R का मान क्या होता है?
Answer: उत्तर- सार्वत्रिकं गैस नियतांक \(R = 8.31\) जूल\(^{-1}\) मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\)
In simple words: सार्वत्रिक गैस नियतांक R आदर्श गैस नियम में एक मौलिक स्थिरांक है, जो ऊर्जा और तापमान के बीच संबंध को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: सार्वत्रिक गैस नियतांक (R) के मान और उसकी इकाइयों को याद रखें।

 

Question 9. एक परमाणुक गैस के लिए Cu, का मान कितना होता है?
Answer: उत्तर- 3/2R.
In simple words: एकपरमाणुक गैसों के लिए, स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा \(C_v\) का मान \((3/2)R\) होता है, क्योंकि उनकी स्वतंत्रता की कोटि 3 होती है।

🎯 Exam Tip: एकपरमाणुक गैसों के लिए स्वतंत्रता की कोटि और उनके \(C_v\) मान के बीच संबंध को याद रखें।

 

Question 10. आदर्श गैस की स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा Cp की परिभाषा दीजिए।
Answer: उत्तर-
ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा-गैस के 1 ग्राम अणु को मोल कहते हैं। 1 मोल गैस का द्रव्यमान M ग्राम होता है, जहाँ M गैस का अणुभार है। गैस के 1 ग्राम अणु अथवा 1 मोल को स्थिर आयतन पर तथा स्थिर दाब पर \(1^\circ C\) ताप बढ़ाने के लिए क्रमशः \(M_{cu}\) तथा \(M_{cp}\) ऊष्मा की आवश्यकता होगी। ऊष्मा की इन मात्राओं को ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं तथा इन्हें क्रमश: \(C_u\) तथा \(C_p\) से व्यक्त करते हैं।
In simple words: स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (Cp) एक मोल गैस का तापमान स्थिर दाब पर एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा है।

🎯 Exam Tip: \(C_p\) और \(C_v\) की परिभाषाओं और उनके बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर आदर्श गैसों के संदर्भ में।

 

Question 11. किसी धातु के रेखीय प्रसार गुणांक तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक में सम्बन्ध लिखिए।
Answer: उत्तर- \(\beta = 2\alpha\).
In simple words: किसी धातु का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक उसके रेखीय प्रसार गुणांक का दोगुना होता है, जिसका अर्थ है कि एक सतह दो आयामी रूप से फैलती है।

🎯 Exam Tip: रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांकों (\(\alpha, \beta, \gamma\)) के बीच के सीधे संबंधों को याद रखें।

 

Question 12. किसी ठोस के रेखीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध लिखिए।
Answer: उत्तर- \(\gamma = 3\alpha\)
In simple words: किसी ठोस का आयतन प्रसार गुणांक उसके रेखीय प्रसार गुणांक का तीन गुना होता है, क्योंकि आयतन तीन आयामी रूप से फैलता है।

🎯 Exam Tip: प्रसार गुणांकों के बीच संबंध (\(\beta = 2\alpha\) और \(\gamma = 3\alpha\)) को सही ढंग से लागू करना थर्मल विस्तार समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में क्या सम्बन्ध है?
Answer: उत्तर- \(\alpha\): \(\beta\): \(\gamma = 1:2:3\).
In simple words: रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांक एक दूसरे से 1:2:3 के अनुपात में संबंधित हैं, जो दर्शाता है कि सामग्री कैसे एक, दो या तीन आयामों में फैलती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रसार गुणांकों के बीच अनुपातिक संबंध को याद रखें, क्योंकि यह थर्मल विस्तार की बुनियादी अवधारणा है।

 

Question 14. ठोस के लिए ऊष्मीय प्रसंगर गुणांक नियत नहीं होता है। क्यों?
Answer: उत्तर- ऊष्मीय प्रसार गुणांक ताप के साथ परिवर्तित होता है क्योंकि कोई भी ठोस वस्तु ऊष्मा पाकर फैल जाती है तथा ठण्डा होने पर सिकुड़ जाती है। इसीलिए किसी भी ठोस वस्तु के लिए ऊष्मीय प्रसार गुणांक नियत नहीं रहता है।
In simple words: ठोसों का थर्मल विस्तार गुणांक स्थिर नहीं होता क्योंकि सामग्री का विस्तार या संकुचन तापमान के साथ बदलता रहता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि कई भौतिक गुण, जिनमें थर्मल प्रसार गुणांक भी शामिल है, तापमान के साथ भिन्न होते हैं।

 

Question 15. साधारण काँच की प्लेट अधिक गर्म करने पर चटक जाती है। क्यों?
Answer: उत्तर- साधारण काँच की प्लेट का आयतन प्रसार गुणांक अधिक होता है, इसलिए अधिक गर्म करने पर यह चटक जाती है।
In simple words: साधारण कांच में उच्च थर्मल विस्तार और खराब थर्मल शॉक प्रतिरोध होता है, जिससे तापमान में तेजी से बदलाव होने पर आंतरिक तनाव के कारण यह चटक जाता है।

🎯 Exam Tip: सामग्रियों के थर्मल विस्तार गुणांक और थर्मल शॉक प्रतिरोध को समझना उनकी संरचनात्मक अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. विशिष्ट ऊष्मा किसकी सबसे अधिक होती है तथा किसकी सबसे कम?
Answer: उत्तर- जल की सर्वाधिक तथा पारे की सबसे कम ।।
In simple words: पानी में सभी सामान्य पदार्थों में सबसे अधिक विशिष्ट ऊष्मा होती है, जो इसे एक उत्कृष्ट ताप भंडारण और शीतलक बनाती है, जबकि पारे की विशिष्ट ऊष्मा सबसे कम होती है।

🎯 Exam Tip: पानी और पारे जैसे सामान्य पदार्थों की विशिष्ट ऊष्मा के मानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ऊष्मागतिकी के अनुप्रयोगों में प्रमुख हैं।

 

Question 17. पानी की विशिष्ट ऊष्मा जूल के पदों में कितनी होती है।
Answer: उत्तर- \(4.18 \times 10^3\) जूल/किग्रा \(^\circ C\)
In simple words: पानी की विशिष्ट ऊष्मा, जूल में व्यक्त की गई, एक किलोग्राम पानी का तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा है।

🎯 Exam Tip: पानी की विशिष्ट ऊष्मा के मान को कैलोरी और जूल दोनों इकाइयों में याद रखें और रूपांतरण कारक (1 कैलोरी = 4.18 जूल) को समझें।

 

Question 18. ऊष्माधारिता का सूत्र लिखिए।
Answer: उत्तर- ऊष्माधारिता = द्रव्यमान \(\times\) विशिष्ट ऊष्मा।
In simple words: ऊष्माधारिता वह गुण है जो यह बताता है कि किसी वस्तु के तापमान को एक इकाई बढ़ाने के लिए कितनी ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: ऊष्माधारिता (या ऊष्मा क्षमता) और विशिष्ट ऊष्मा के बीच अंतर को समझना और उनके सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 19. स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा Cu की परिभाषा दीजिए।
Answer: उत्तर- स्थिर आयतन पर किसी गैस के 1 ग्राम द्रव्यमान का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस गैस की स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा Cu कहते हैं।
In simple words: स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा \(C_v\) वह ऊष्मा ऊर्जा है जो एक इकाई द्रव्यमान वाली गैस के तापमान को स्थिर आयतन बनाए रखते हुए एक डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाती है।

🎯 Exam Tip: स्थिर आयतन और स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्माओं की परिभाषाओं और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 20. बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा का मान बताइए।
Answer: उत्तर- 80 कैलोरी/ग्राम ।
In simple words: बर्फ की गुप्त ऊष्मा वह ऊर्जा है जो एक इकाई द्रव्यमान बर्फ को \(0^\circ C\) पर तरल पानी में बदलने के लिए आवश्यक होती है, बिना तापमान बढ़ाए।

🎯 Exam Tip: बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा के मान को याद रखें, क्योंकि यह चरण परिवर्तन की गणना में एक महत्वपूर्ण स्थिरांक है।

 

Question 21. जल की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा का मान बताइए।
Answer: उत्तर- 536 कैलोरी/ग्राम ।।
In simple words: जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा वह ऊर्जा है जो एक इकाई द्रव्यमान जल को \(100^\circ C\) पर भाप में बदलने के लिए आवश्यक होती है, बिना तापमान बढ़ाए।

🎯 Exam Tip: पानी के गलनांक और वाष्पन की गुप्त ऊष्मा के मानों को याद रखना ऊष्मागतिकी और चरण परिवर्तन की समस्याओं के लिए आवश्यक है।

 

Question 22. बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा 80 कैलोरी/ग्राम है। इसका मान जूल/किग्रा में लिखिए।
Answer: उत्तर- \(3.36 \times 10^5\) जूल/किग्रा ।
In simple words: बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा को कैलोरी से जूल में और ग्राम से किलोग्राम में बदलने पर, यह \(3.36 \times 10^5\) जूल प्रति किलोग्राम होती है।

🎯 Exam Tip: इकाइयों के रूपांतरण, विशेष रूप से कैलोरी से जूल और ग्राम से किलोग्राम में, सटीकता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 23. गलनांक पर अपद्रव्यों का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: उत्तर- गलनोक कम हो जाता है।
In simple words: किसी शुद्ध पदार्थ में अशुद्धियाँ मिलाने से उसका गलनांक कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: गलनांक पर अशुद्धियों के प्रभाव (गलनांक का कम होना) को याद रखें, जो चरण परिवर्तन की अवधारणा का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

 

Question 24. कैलोरीमिति का क्या सिद्धान्त है?
Answer: उत्तर- ऊष्मा का प्रवाह सदैव ऊँचे ताप वाली वस्तु से नीचे ताप वाली वस्तु में होता है और यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि दोनों वस्तुओं के ताप समान नहीं हो जाते। इस क्रिया में बाहर से ऊष्मा का आदान-प्रदान न हो तो एक वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा, दूसरी वस्तु द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर होगी। यही कैलोरीमिति का सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार, गर्म वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा = ठण्डी वस्तु द्वारा ली गई ऊष्मा।
In simple words: कैलोरीमिति का सिद्धांत कहता है कि एक बंद प्रणाली में, गर्म वस्तुओं द्वारा खोई गई ऊष्मा ठंडी वस्तुओं द्वारा प्राप्त ऊष्मा के बराबर होती है जब तक कि तापीय संतुलन प्राप्त न हो जाए।

🎯 Exam Tip: ऊष्मामिति के सिद्धांत (ऊष्मा का संरक्षण) को याद रखना और यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसे विभिन्न ऊष्मा विनिमय समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

Question 1. रेखीय प्रसार गुणांक की परिभाषा तथा मात्रक लिखिए। या रेखीय प्रसार गुणांक (\(\alpha\)) का अर्थ समझाइए ।
Answer: उत्तर- रेखीय प्रसार गुणांक (Coefficient of linear expansion)-माना किसी छड़ की एक निश्चित ताप \(t\) पर लम्बाई L है तथा उसके ताप में \(\triangle T\) की वृद्धि करने पर लम्बाई में \(\triangle L\) की वृद्धि हो जाती है। किसी ठोस वस्तु को गर्म करने पर उसकी लम्बाई में वृद्धि निम्न बातों पर निर्भर करती है-
(i) छड़ की प्रारम्भिक लम्बाई पर-लम्बाई में वृद्धि छड़ की प्रारम्भिक लम्बाई (L) के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात् \(\triangle L \propto L\)
(ii) छड़ के ताप में वृद्धि पर-लम्बाई में वृद्धि \(\triangle L\) छड़ के ताप में वृद्धि \(\triangle T\) के अनुक्रमानुपाती होती अर्थात \(\triangle L \propto \triangle L\)
उपर्युक्त दोनों तथ्यों को एक साथ लिखने पर, \(\triangle L \propto L\triangle T\) अथवा \(\triangle L = \alpha L\triangle T\) ...(1) जहाँ \(\alpha\) (ऐल्फा) एक नियतांक है। यह छड़ के पदार्थ का “रेखीय प्रसार गुणांक" कहलाता
किसी पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक, लम्बाई में उस वृद्धि के बराबर होता है, जब उसकी एकांक लम्बाई का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाते हैं। यह छड़ के पदार्थ पर भी निर्भर करता है। यदि विभिन्न पदार्थों की समान छड़ों को समान ताप तक गर्म किया जाये तो उनकी लम्बाई में वृद्धि भिन्न-भिन्न होती है। उपर्युक्त सूत्र (2) से रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक =
अतः रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है।
In simple words: रेखीय प्रसार गुणांक यह मापता है कि तापमान में प्रति इकाई वृद्धि के लिए किसी सामग्री की लंबाई में कितना बदलाव होता है, और इसकी इकाई प्रति डिग्री सेल्सियस है।

🎯 Exam Tip: रेखीय प्रसार गुणांक की परिभाषा, उसके सूत्र और उसकी इकाई को याद रखें। यह भी समझें कि यह पदार्थ के प्रकार पर कैसे निर्भर करता है।

 

Question 2. आयतन प्रसार गुणांक की परिभाषा दीजिए तथा जल के असंगत प्रसार की व्याख्या कीजिए।
Answer: उत्तर- आयतन प्रसार गुणांक-- किसी वस्तु का आयतन प्रसार गुणांक उसके आयतन में वृद्धि के बराबर होता है जब उसके एकांक आयतन का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाया जाता है। आयतन प्रसार गुणांक को मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 11.1

(a) जल के आयतन में वृद्धि को तापमान के फलन के रूप में दर्शाता है, जिसमें \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) तक आयतन घटता है और फिर बढ़ता है, जबकि चित्र 11.1
(b) जल के घनत्व को तापमान के फलन के रूप में दर्शाता है, जिसमें \(4^\circ C\) पर अधिकतम घनत्व होता है।
जल का असंगत प्रसार–प्रायः सभी द्रवों का आयतन ताप बढ़ने से बढ़ता है परन्तु जब जल को \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) तक गर्म किया जाता है, तो उसका आयतन (बढ़ने की बजाय घटता है तथा \(4^\circ C\) के पश्चात् फिर जल का आयतन बढ़ने लगता है। 4C पर जल का आयतन न्यूनतम होता है; अतः \(4^\circ C\) पर जल का घनत्व अधिकतम होता है। जल के अधिकतम घनत्व का मान \(1.0000 \times 10^3\) किग्रा/मीटर\(^3\) है। जल के घनत्व तथा ताप का ग्राफ चित्र 11.1(b) में प्रदर्शित है।
स्पष्टतः \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) तक जल का प्रसार असामान्य होता है, परन्तु \(4^\circ C\) से ऊपर के तापों पर इसका प्रसार सामान्य होता है।
In simple words: आयतन प्रसार गुणांक बताता है कि तापमान बढ़ने पर किसी पदार्थ का आयतन कैसे बदलता है, जबकि जल का असामान्य प्रसार यह समझाता है कि \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) के बीच जल ठंडा होने पर फैलता है, जो सामान्य व्यवहार के विपरीत है।

🎯 Exam Tip: आयतन प्रसार गुणांक की परिभाषा और जल के असामान्य प्रसार के पीछे के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें \(4^\circ C\) पर अधिकतम घनत्व शामिल है।

 

Question 3. रेखीय प्रसार गुणांक (\(\alpha\)) तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (\(\beta\)) में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer: उत्तर- रेखीय प्रसार गुणांक (\(\alpha\)) तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (\(\beta\)) में सम्बन्ध- माना किसी वस्तु की एक वर्गाकार पटल ABCD है, जिसकी प्रत्येक भुजा की लम्बाई 1 मीटर है। इसका प्रारम्भिक क्षेत्रफल 1 मीटर होगा। पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक \(\alpha\) है। माना वर्गाकार पटल के ताप में \(1^\circ C\) की वृद्धि की जाती है। तब इस नये ताप पर
In simple words: क्षेत्रीय प्रसार गुणांक किसी वस्तु के रेखीय प्रसार गुणांक से दोगुना होता है, क्योंकि सतह का विस्तार दो आयामों में होता है।

🎯 Exam Tip: यह संबंध (\(\beta = 2\alpha\)) थर्मल विस्तार के सिद्धांतों में एक मूलभूत अवधारणा है और इसे व्युत्पन्न करने या याद रखने में सक्षम होना चाहिए।

 

Question 4. वास्तविक तथा आभासी प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer: उत्तर- वास्तविक तथा आभासी-प्रसार-गुणांकों में सम्बन्ध- माना कि काँच के एक बर्तन में कोई द्रव भरा है जिसका आयतन V है। माना कि बर्तन को गर्म करके द्रव के ताप में \(\triangle t\) की वृद्धि की जाती है। तब अतः किसी द्रव को वास्तविक प्रसार गुणांक उस द्रव के आभासी-प्रसार गुणांक तथा बर्तन के पदार्थ के आयतन प्रसार गुणांक के योग के बराबर होता है।
In simple words: किसी द्रव का वास्तविक प्रसार गुणांक उसके आभासी प्रसार गुणांक और उस बर्तन के आयतन प्रसार गुणांक का योग होता है जिसमें वह द्रव रखा है।

🎯 Exam Tip: द्रव के वास्तविक और आभासी प्रसार गुणांकों के बीच संबंध को समझें, क्योंकि बर्तन के थर्मल विस्तार को अक्सर गणना में शामिल करना होता है।

 

Question 5. ठण्डे प्रदेशों में तालाबों के जम जाने पर भी उसमें मछलियाँ जीवित कैसे रहती हैं?
Answer: उत्तर- ठण्डे प्रदेशों में सर्दी के दिनों में वायुमण्डल का ताप OC से भी कम रहता है। अतः वहाँ तालाबों में जल जमने लगता है परन्तु \(4^\circ C\) पर जल का घनत्व अधिकतम होने के कारण नीचे को जल \(4^\circ C\) बना रहता है। तापमान के \(0^\circ C\) पहुँचने पर तालाब की ऊपरी सतह पर बर्फ जम जाती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): चित्र 11.3 एक जमे हुए तालाब का खंड-दृश्य दर्शाता है। यह दर्शाता है कि ऊपरी सतह पर बर्फ की परत कैसे बनती है जबकि \(4^\circ C\) पर सघन तरल पानी नीचे रहता है, जिससे जलीय जीवन बचा रहता है।
बर्फ के सम्पर्क में जो जले होता है, उसका ताप \(0^\circ C\) रहता है। बर्फ ऊष्मा की कुचालक है; अतः नीचे से ऊष्मा ऊपर की ओर अत्यन्त ॐ मछलियाँ । धीरे-धीरे संचरित होती है, फलस्वरूप नीचे का ताप भी । \(4^\circ C\) ही बना रहता है। इस प्रकार इस जल में मछलियाँ तथा अन्य जल के जन्तु जीवित रहते हैं।
In simple words: पानी के असामान्य प्रसार के कारण, ठंडे क्षेत्रों में झील की सतह जम जाती है, लेकिन नीचे का पानी \(4^\circ C\) पर तरल रहता है, जो बर्फ की एक इन्सुलेटिंग परत के तहत जलीय जीवन को जीवित रहने की अनुमति देता है।

🎯 Exam Tip: पानी के असामान्य प्रसार की अवधारणा और यह जलीय पारिस्थितिक तंत्रों को कैसे प्रभावित करता है, यह समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. रेल की पटरियों के बीच खाली स्थान क्यों छोड़ा जाता है?
Answer: उत्तर- रेल की पटरियों को बिछाते समय उनके बीच कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिया जाता है, जिससे कि गर्मी के दिनों में ताप बढ़ने पर पटरियों को फैलने के लिए स्थान मिल सके । यदि पटरियाँ सटाकर बिछा दी जाएँ, तो गर्मियों में फैलने के कारण पटरियाँ तिरछी हो जायेंगी, जिससे रेल दुर्घटना हो सकती है।
In simple words: रेल की पटरियों को थर्मल विस्तार के लिए जगह देने के लिए उनके बीच अंतराल छोड़ दिए जाते हैं, जिससे गर्मी में पटरियों को मुड़ने से रोका जा सके।

🎯 Exam Tip: थर्मल विस्तार की अवधारणा और इंजीनियरिंग में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों (जैसे पुलों और रेलवे ट्रैक में विस्तार जोड़ों) को याद रखें।

 

Question 7. सर्दियों की रातों में जल के पाइप कभी-कभी फट जाते हैं, क्यों?
Answer: उत्तर- क्योंकि \(0^\circ C\) पर बर्फ का आयतन जल के आयतन से अधिक होता है, अतः सर्दी की रातों में जब वायुमण्डल का ताप \(0^\circ C\) से कम हो जाता है, तो पाइप में उपस्थित जल जमकर बर्फ में बदल जाता है। बर्फ बनने पर आयतन बढ़ता है, परन्तु आयतन प्रसार के लिए स्थान उपलब्ध न होने के कारण पाइप की सतह पर अन्दर से दबाव बढ़ता है, जिससे वे फट जाते हैं।
In simple words: सर्दियों में पानी के पाइप फट जाते हैं क्योंकि पानी जमने पर फैलता है, जिससे पाइप के भीतर अत्यधिक दबाव उत्पन्न होता है।

🎯 Exam Tip: पानी के असामान्य प्रसार और ठोस से द्रव अवस्था में बदलने पर इसके घनत्व में कमी के सिद्धांत को समझें।

 

Question 8. समतापीय तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों में क्या अन्तर है?
Answer: उत्तर- समतापीय तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों में अन्तर ।
In simple words: समतापी प्रक्रिया में तापमान स्थिर रहता है जबकि रुद्रोष्म प्रक्रिया में कोई ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: समतापी और रुद्रोष्म प्रक्रियाओं की परिभाषाओं, उनकी विशेषताओं और आदर्श गैसों के लिए उनके संबंधित समीकरणों को याद रखें।

 

Question 9. वाष्पन तथा क्वथन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: उत्तर- घाष्पन तथा क्वथन में अन्तर
In simple words: वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर सतह से होता है, जबकि क्वथन एक निश्चित क्वथनांक पर पूरे तरल पदार्थ में होता है।

🎯 Exam Tip: वाष्पन और क्वथन के बीच मुख्य अंतरों (जैसे तापमान, होने का स्थान और ऊर्जा आवश्यकताएं) को समझना महत्वपूर्ण है।

 

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

Question 1. क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (\(\beta\)) तथा आयतन प्रसार गुणांक (\(\gamma\)) का अर्थ समझाइए । \(\alpha\) \(\beta\) एवं \(\gamma\) में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer: उत्तर- क्षेत्रीय प्रसार गुणांक-माना किसी आयताकार पटल का क्षेत्रफल A है तथा गर्म करके, इसके ताप में \(\triangle T\) की वृद्धि करने पर क्षेत्रफल में वृद्धि \(\triangle A\) होती है। प्रयोगों द्वारा यह पाया गया है कि क्षेत्रफल में वृद्धि
(i) प्रारम्भिक क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \(\triangle A \propto A\)
(ii) ताप में वृद्धि के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \(\triangle A \propto \triangle T\)
उपर्युक्त दोनों तथ्यों को एक साथ लिखने पर । \(\triangle A \propto A\triangle T\) अथवा \(\triangle A = \beta. A\triangle T...\) (1) यहाँ \(\beta\) (बीटा) एक नियतांक है जिसे पटल के पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक कहते हैं। इसका मान अन्य किसी राशि (जैसे-आकार या आकृति) पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
अतः किसी पदार्थ के पटल (lamina) के एकांक क्षेत्रफल का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने पर उसके क्षेत्रफल में जो वृद्धि होती है उसे उसे पदार्थ का क्षेत्रीय प्रसार गुणांक कहते हैं। क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (\(\beta\)) का मात्रक भी प्रति \(^\circ C\) होता है।
आयतन प्रसार गुणांक- प्रयोगों द्वारा पाया गया कि किसी ठोस के आयतन में वृद्धि
(i) उसके प्रारम्भिक आयतन \(v\) के तथा
(ii) ताप में वृद्धि \(\triangle t\) के अनुक्रमानुपाती होती है
अर्थात् यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक आयतन V हो तथा उसके ताप में \(\triangle T\) वृद्धि करने पर उसके आयतन में \(\triangle V\) की वृद्धि हो, तो उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर
अतः किसी वस्तु का आयतन प्रसार गुणांक उसके आयतन में वृद्धि के बराबर होता है जब उसके एकांक आयतन का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाया जाता है। आयतन प्रसार गुणांक को मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस होता है। रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध हम जानते हैं कि \(\beta = 2\alpha, \gamma = 3\alpha\)
अतः \(\alpha : \beta : \gamma = \alpha : 2\alpha : 3\alpha \implies \alpha : \beta : \gamma = 1 : 2:3\)
In simple words: यह प्रश्न रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांकों को परिभाषित करता है और उनके बीच 1:2:3 का संबंध स्थापित करता है, जो बताता है कि तापमान बढ़ने पर कोई सामग्री क्रमशः लंबाई, क्षेत्रफल और आयतन में कैसे विस्तारित होती है।

🎯 Exam Tip: तीनों प्रसार गुणांकों की परिभाषाओं, उनके सूत्रों, इकाइयों और उनके बीच के आनुपातिक संबंधों को याद रखें।

 

Question 2. इस्पात तथा ताँबे की छड़ों की लम्बाइयाँ क्या होनी चाहिए जिससे कि सभी तापों पर इस्पात की छड़ ताँबे की छड़ से 5 सेमी बड़ी हो? इस्पात का रेखीय-प्रसार-गुणांक \(1.1 \times 10^5\) \(^\circ C^{-1}\) तथा ताँबे का \(1.7 \times 10^{-5}\) \(^\circ C^{-1}\) है।
Answer: हल-
माना इस्पात की छड़ की लम्बाई \(l_s\) तथा ताँबे की छड़ की लम्बाई \(l_c\) है। सभी तापों पर,
\(l_s - l_c = 5\)
सेमी ऐसा तब ही सम्भव है, जब किसी भी ताप-परिवर्तन \(\triangle T\) के लिए, दोनों छड़ों में परिवर्तन समान हो अर्थात्
In simple words: यह प्रश्न थर्मल विस्तार के सिद्धांतों का उपयोग करके स्टील और तांबे की छड़ों की लंबाई निर्धारित करता है, ताकि तापमान भिन्न होने पर भी वे एक निश्चित अंतर को बनाए रखें।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करने के लिए कि लंबाई का अंतर स्थिर रहे, रेखीय प्रसार गुणांकों को शामिल करते हुए, लंबाई में परिवर्तन के लिए समीकरणों का सही ढंग से अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. रुद्धोष्म प्रक्रम क्या है? रुद्रोष्म प्रक्रम में आदर्श गैस के लिए परमताप 'T' एवं दाब 'P' में सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
Answer: उत्तर- रुद्धोष्म प्रक्रम-जब किसी ऊष्मागतिक निकाय में परिवर्तन इस प्रकार होता है कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय तथा बाह्य वातावरण के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता तो इस प्रकार के प्रक्रम को ‘रुद्धोष्म अथवा स्थिरोष्म प्रक्रम' कहते हैं। आदर्श गैस के लिए परमताप T एवं दाब P में सम्बन्धमाना आदर्श गैस के 1 ग्राम-अणु (1 मोल) का दाब P, परमताप T तथा आयतन V है। माना कि गैस में बहुत थोड़ा-सा 'रुद्धोष्म' प्रसार होता है जिसमें कि यह बाह्य कार्य करती हैं। चूँकि गैस के भीतर बाहर से ऊष्मा को नहीं आने दिया जाता है, अतः बाह्य कार्य करने के लिए गैस अपनी ऊष्मा (आन्तरिक ऊर्जा) को ही प्रयुक्त करेगी। फलतः, किसी किए गये कार्य के तुल्य गैस की आन्तरिक ऊर्जा कम हो जायेगी जिससे गैस का ताप गिर जायेगा। अतः यदि गैस की आन्तरिक ऊर्जा में होने वाली कमी dU हो तथा किया गया बाह्य कार्य dW हो, तो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, \(dU + dW = 0\) ...(1) माना कि रुद्धोष्म प्रसार के कारण गैस का आयतन V से \(V + dV\) तक बढ़ जाता है तथा ताप T से \(T - dT\) तक गिर जाता है (गैस के दाब P को स्थिर मान सकते हैं क्योंकि आयतन में परिवर्तन बहुत कम हुआ है)। तब, गैस द्वारा किया गया बाह्य कार्य \(dW = P dV\) ... (2) चूँकि एक आदर्श गैस के अणु परस्पर आकर्षित नहीं करते, अतः इसकी आन्तरिक ऊर्जा पूर्णतया अणुओं की गतिज ऊर्जा ही है तथा केवल गैस के ताप पर निर्भर करती है। अतः गैस का ताप dT गिरने पर इसकी आन्तरिक ऊर्जा में होने वाली कमी गैस से ली गई ऊष्मा के तुल्य होगी, अर्थात् । \(dU = C_u dT\) ... (3) जहाँ, \(C_u\) गैस की स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा है। समी० (2) तथा (3) से dW तथा dU के मान समी० (1) में रखने पर,
In simple words: एक रुद्रोष्म प्रक्रिया में, एक प्रणाली और उसके परिवेश के बीच कोई ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है, जिससे गैस का दाब और तापमान एक विशिष्ट संबंध के अनुसार बदलते हैं।

🎯 Exam Tip: रुद्रोष्म प्रक्रिया की परिभाषा, ऊष्मागतिकी के पहले नियम का अनुप्रयोग और आदर्श गैसों के लिए दाब-ताप संबंध को समझने पर ध्यान दें।

 

Question 4. Cp तथा Cv का अर्थ समझाइए । किसी आदर्श गैस के लिए सिद्ध कीजिए कि \(C_p - C_u = R\), जहाँ प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।
Answer: उत्तर- साधारणतः किसी गैस की दो विशिष्ट ऊष्माएँ होती हैं। एक । तो वह जो गैस को ऊष्मा देते समय उसका आयतन स्थिर रखकर उसके दाब को बढ़ने दिया गया हो (अर्थात् गैस का प्रसार न होने दिया गया हो) तथा दूसरी वह जो ऊष्मा देते समय गैस का दाब स्थिर रखकर उसके आयतन को बढ़ने दिया गया हो (अर्थात् गैस का स्थिर दाब पर प्रसार होने दिया गया हो)। इन्हें क्रमशः गैस की 'स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा' तथा 'स्थिर दाबे पर विशिष्ट ऊष्मा' कहते हैं।
स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (\(C_p\)) – स्थिर दाब पर, किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने के। लिए जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है, उसे स्थिर दाब पर गैस की ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (\(C_p\)) कहते हैं।
\(C_p = M C_p\) (जहाँ, M = अणुभार)
स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुळे विशिष्ट ऊष्मा (\(C_u\))-स्थिर आयतन पर किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस गैस की स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (\(C_u\)) कहते हैं।
\(C_u = M C_u\) (जहाँ M = अणुभार)
मेयर के सूत्र \(C_p - C_u = R\) की व्युत्पत्ति-माना आदर्श गैस के 1 ग्राम-अणु या एक मोल का दाब, ताप व आयतन क्रमशः P, T व V हैं। गैस की यह अवस्था ताप T पर खींचे गए एक समतापीय वक्र के बिन्दु A से प्रदर्शित है। माना गैस का आयतन स्थिर रखते हुए उसका ताप \(\triangle T\) बढ़ाया गया, जिसके कारण यह अवस्था A से C में चली जाती है। ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से प्रक्रम \(A \rightarrow C\) में गैस की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
\(U_C - U_A = \triangle U = Q - W\)
जहाँ Q गैस द्वारा ली गई ऊष्मा तथा W गैस द्वारा कृत-कार्य है। चूंकि इस प्रक्रम में आयतन नियत है।
\((\triangle V = 0)\), अतः \(W = P \times \triangle V = 0\) तथा \(Q = C_u \triangle T\)
इसलिए \(U_C - U_A = C_u \triangle T\) ...(1)
माना गैस को पुनः अवस्था A में वापस लाया जाता है फिर नियत दाब पर इसका ताप T से \(T + \triangle T\) कर दिया जाता है, जिससे कि गैस अवस्था A से B में चली जाती है। अत: \(A \rightarrow B\) में आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
\(U_B - U_A = \triangle U = Q - W\)
चूँकि इस प्रक्रम में आयतन में परिवर्तन \(\triangle V\) होता है। अतः इस प्रक्रम में किया गया कार्य \(W = P \triangle V\)
तथा \(Q = C_p t\)
\(U_B - U_A = C_p \triangle T - P \triangle V\) ..(2)
प्रक्रम \(A \rightarrow B\) के लिए प्रारम्भिक अवस्था A में गैस का आयतन V व परमताप T है तथा अन्तिम अवस्था B में गैस का आयतन \((V + \triangle V)\) तथा परमताप \((T + \triangle T)\) हो जाता है, जबकि दाब P नियत रहता है। अतः अवस्था A व B के लिए आदर्श गैस समीकरण से
\(PV = RT\) (अवस्था A के लिए) ... (3)
\(P(V + \triangle V) = R(T + \triangle T)\) (अवस्था B के लिए) ..(4)
समी० (4) में से समी० (3) को घटाने पर,
\(P\triangle V = R\triangle T\) ...(5)
In simple words: यह प्रश्न बताता है कि \(C_p\) (स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्मा) और \(C_v\) (स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मा) क्या हैं, और मेयर के सूत्र \(C_p - C_v = R\) को व्युत्पन्न करता है, जो ऊष्मागतिकी का एक मौलिक संबंध है।

🎯 Exam Tip: \(C_p\) और \(C_v\) की परिभाषाओं, मेयर के सूत्र की व्युत्पत्ति और आदर्श गैस समीकरणों का उपयोग करके उनके अनुप्रयोगों को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. समतापी एवं रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए दाब-आयतन ग्राफ खीचिए। इनमें किस वक़ का ढलान अधिक होता है? इसका कारण दीजिए।
Answer: उत्तर- समतापी एवं रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए दाब-आयतन ग्राफ-
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र 11.5 एक आदर्श गैस के दाब-आयतन ग्राफ को दर्शाता है, जिसमें दो समतापी वक्र (T1 और T2 पर) और एक रुद्धोष्म वक्र (A से B तक) दिखाए गए हैं। समतापी वक्र गैस के तापमान को स्थिर रखते हुए प्रसार या संपीड़न को दर्शाते हैं, जबकि रुद्धोष्म वक्र ऊष्मा के आदान-प्रदान के बिना प्रसार या संपीड़न दिखाते हैं। चित्र 11.6 (a) और (b) गैस के प्रसार और संकुचन में समतापी और रुद्धोष्म वक्रों की सापेक्ष स्थिति को दिखाते हैं। चित्र 11.5 में किसी आदर्श गैस के एक निश्चित द्रव्यमान के लिए, दो स्थिर तापों T1 व T2 पर समतापी वक्र खींचे गये हैं। माना कि गैस के प्रारम्भिक दाब, आयतन व ताप क्रमशः P1,V1 व T1, हैं। गैस की यह अवस्था चित्र 11.5 में बिन्दु A के द्वारा प्रदर्शित है जो कि T1 ताप वाले समतापी वक्र पर स्थित है। यदि हम गैस के ताप को T1 पर ही स्थिर रखते हुए इसका 'समतापी' प्रसार (isothermal expansion) करें तो इसकी अवस्थाएँ इसी वक्र पर विभिन्न बिन्दुओं द्वारा प्रदर्शित होंगी। रुद्धोष्म वक्र परन्तु यदि गैस का अवस्था A से रुद्धोष्म प्रसार करें (जिससे कि यह बाहर से ऊष्मा नहीं ले सकती) तो दाब के साथ-साथ इसका ताप भी गिर जायेगा। माना कि गैस के अन्तिम आयतन व ताप क्रमशः P2, V2, व T2, हो जाते हैं। गैस की यह अवस्था बिन्दु B द्वारा प्रदर्शित होगी जो कि ताप T2, वाले । समतापी वक्र पर स्थित है। चूंकि गैस की अवस्था A से अवस्था B तक रुद्धोष्म प्रसार हुआ है, अतः बिन्दु A व B को मिलाने वाला वक्र AB रुद्धोष्म वक्र होगा। यदि हम गैस के दाब को स्थिर रखते हुए उसे गर्म करें तो गैस का प्रसार चार्ल्स के नियम के अनुसार होगा। इस दशा में गैस का दाब-आयतन वक्र (P-V curve) एक सरल रेखा के रूप में होगा। इसे ‘समदाबी रेखा' कहते हैं तथा यह आयतन-कक्ष के समान्तर होती है। (चित्र 11.5)। दूसरे शब्दों में, समदाबी रेखा का आयतन-अक्ष से ढलान (slope) शून्य है। समतापी तथा रुद्धोष्म वक्रों की तुलना से यह स्पष्ट है कि रुद्धोष्म वक्र का ढलान समतापी वक्र के ढलान से अधिक है। इसका कारण यह है कि गैस के समतापी तथा रुद्धोष्म दोनों प्रसारों में गैस का दाब गिरता है, परन्तु गैस के दाब में होने वाली. उतनी ही गिरावट के लिए, गैस के आयतन में रुद्धोष्म प्रसार के समय होने वाली वृद्धि, समतापी प्रसार के समय होने वाली वृद्धि की अपेक्षा कम होती है क्योंकि रुद्धोष्म प्रसार में गैस का ताप भी गिर जाता है। आदर्श गैस के लिए, रुद्धोष्म वक्र का ढलान समतापी वक्र के ढलान से \( \gamma \) गुना अधिक होता है- आदर्श गैस के समतापी वक्र की समीकरण निम्न है \( \gamma \) का मान सदैव 1 से अधिक होता है, एक-परमाणुक गैस के लिए 1.67, द्वि-परमाणुक गैस के लिए 1.41. तथा बहुपरमाणुक गैस के लिए 1.33. अतः किसी बिन्दु पर रुद्धोष्म वक्र ढलान उस बिन्दु पर समतापी वक्र के ढलान से अधिक होता है। किसी रुद्धोष्म प्रक्रम में \( \gamma \) का मान जितना अधिक होगा, रुद्धोष्म वक्र का ढलान उतना ही अधिक होगा। द्वि-परमाणुक गैस की अपेक्षा, एक-परमाणुक गैस के रुद्धोष्म वक्र का ढलान अधिक होता है। ढलान अधिक होने के कारण (i) गैस के प्रसार में रुद्धोष्म वक्र समतापी वक्र के नीचे होगा [चित्र 11.6 (a)]। (ii) गैस के संकुचन में रुद्धोष्म वक्र समतापी वक्र से ऊपर होगा [चित्र 11.6 (b)]]In simple words: समतापी और रुद्धोष्म प्रक्रम के दाब-आयतन ग्राफ भिन्न होते हैं। रुद्धोष्म प्रक्रम में ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता, इसलिए तापमान बदलता है, जिससे इसका ढलान समतापी प्रक्रम से अधिक होता है जहाँ तापमान स्थिर रहता है। यह अंतर गैस के व्यवहार और ऊर्जा परिवर्तन को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: दाब-आयतन वक्रों को सटीक रूप से बनाना और समतापी तथा रुद्धोष्म प्रक्रमों के बीच के अंतर को \( \gamma \) (विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात) के संदर्भ में समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. समतापीय प्रक्रम की एक अवस्था A(P1, V1) से दूसरी अवस्था B(P2, V2) तक परिवर्तन में कृत कार्य का व्यंजक लिखिए।
Answer: उत्तर- समतापीय प्रक्रम-जब किसी ऊष्मागतिक निकाय में कोई भौतिक परिवर्तन इस प्रकार हो कि सम्पूर्ण प्रक्रम में निकाय का ताप स्थिर बना रहे, समतापीय प्रक्रम कहलाता है। समतापीय प्रक्रम में आदर्श गैस द्वारा कृत कार्य (Work done by an ideal gas in isothermal process)- जब किसी गैस के आयतन में समतापी प्रसार होता है तो गैस द्वारा कार्य किया जाता है। माना कि \( n \) मोल आदर्श गैस एक स्थिर परमताप T पर प्रारम्भिक आयतन \( V_1 \) से अन्तिम आयतन \( V_2 \) तक प्रसारित होती है। तब, गैस द्वारा किया गया बाह्य कार्य \[ W = nRT \ln \left( \frac{V_2}{V_1} \right) \]In simple words: समतापी प्रक्रम वह है जहाँ तापमान स्थिर रहता है। इस प्रक्रम में गैस द्वारा किया गया कार्य उसके मोलों की संख्या, गैस नियतांक, तापमान और आयतन में परिवर्तन के लघुगणक पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: समतापी प्रक्रम में कार्य के सूत्र को याद रखना और उसके प्रत्येक पद का अर्थ समझना महत्वपूर्ण है। व्यंजक को गणितीय रूप से सही ढंग से प्रस्तुत करें।

 

Question 7. 0.20 किग्रा द्रव्यमान के एक धातु के गोले को 150°C तक गर्म करने के पश्चात 27°C के 150 सेमी\(^3\) जल से भरे ताँबे के ऊष्मामापी (जिसका जल-तुल्यांक 0.025 किग्रा है) में डाला जाता है। स्थायी अवस्था में अन्तिम ताप 40°C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात कीजिए। जल का घनत्व 10\(^3\) किग्रा/मी\(^3\) तथा विशिष्ट ऊष्मा 4.2 x 10\(^3\) जूल किग्रा\(^{-1}\)°C\(^{-1}\). यदि बाह्य परिवेश में ऊष्मा ह्रास नगण्य नहीं है, तब आपका उत्तर विशिष्ट ऊष्मा के वास्तविक मान से कम होगा या अधिक ।
Answer: हल- माना धातु की विशिष्ट ऊष्मा \( s \) है, तब धातु के गोले द्वारा दी गई ऊष्मा \( Q_{धातु} = m_{धातु} s \Delta T_{धातु} \) यहाँ \( m_{धातु} = 0.20 \text{ kg} \), \( \Delta T_{धातु} = (150 - 40)^\circ C = 110^\circ C \) \( Q_{धातु} = 0.20 \times s \times 110 = 22s \) जल का द्रव्यमान \( m_{जल} = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} = 150 \times 10^{-6} \text{ m}^3 \times 10^3 \text{ kg/m}^3 = 0.150 \text{ kg} \) जल की विशिष्ट ऊष्मा \( s_{जल} = 4.2 \times 10^3 \text{ J kg}^{-1} ^\circ\text{C}^{-1} \) जल द्वारा ली गई ऊष्मा \( Q_{जल} = m_{जल} s_{जल} \Delta T_{जल} \) \( \Delta T_{जल} = (40 - 27)^\circ C = 13^\circ C \) \( Q_{जल} = 0.150 \times 4.2 \times 10^3 \times 13 = 8190 \text{ J} \) ऊष्मामापी का जल-तुल्यांक \( W = 0.025 \text{ kg} \) ऊष्मामापी द्वारा ली गई ऊष्मा \( Q_{ऊष्मामापी} = W s_{जल} \Delta T_{जल} \) \( Q_{ऊष्मामापी} = 0.025 \times 4.2 \times 10^3 \times 13 = 1365 \text{ J} \) ऊष्मामिति के सिद्धांत से: दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा \( Q_{धातु} = Q_{जल} + Q_{ऊष्मामापी} \) \( 22s = 8190 + 1365 \) \( 22s = 9555 \) \( s = \frac{9555}{22} \approx 434.32 \text{ J kg}^{-1} ^\circ\text{C}^{-1} \) यदि बाह्य परिवेश में ऊष्मा का ह्रास नगण्य नहीं है, तब ली गई ऊष्मा कम होगी। अतः गणना की गई विशिष्ट ऊष्मा \( s \) का मान वास्तविक मान से **कम होगा** क्योंकि गणना में यह माना गया है कि सारी ऊष्मा जल और ऊष्मामापी द्वारा ली गई है, जबकि कुछ ऊष्मा परिवेश में भी खो गई होगी।In simple words: इस प्रश्न में ऊष्मामिति के सिद्धांत का उपयोग करके एक धातु की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात की गई है। धातु द्वारा दी गई ऊष्मा, जल और ऊष्मामापी द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर मानी जाती है। यदि परिवेश में ऊष्मा की हानि होती है, तो गणना की गई विशिष्ट ऊष्मा का मान वास्तविक मान से कम होगा क्योंकि कुछ ऊष्मा वातावरण में चली गई होगी।

🎯 Exam Tip: ऊष्मामिति के सिद्धांत (दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा) का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। जल के द्रव्यमान की गणना और विशिष्ट ऊष्मा के मानों को सही इकाइयों में रखना सुनिश्चित करें। परिवेश में ऊष्मा ह्रास के प्रभाव को समझना भी आवश्यक है।

 

Question 8. 100 ग्राम जल का ताप 24°C से 90°C बढ़ाने के लिए उसमें कुछ भाप घोली गई। आवश्यक भाप के द्रव्यमान की गणना कीजिए। भाप की गुप्त ऊष्मा 540 कैलोरी ग्राम\(^{-1}\) । जल की विशिष्ट ऊष्मा 1.0 कैलोरी/(ग्राम°c) है।
Answer: हल- माना आवश्यक भाप का द्रव्यमान \( m \) है। भाप की गुप्त ऊष्मा \( L = 540 \text{ कैलोरी/ग्राम} \) जल की विशिष्ट ऊष्मा \( c = 1.0 \text{ कैलोरी/(ग्राम°C)} \) जल का द्रव्यमान \( M_{जल} = 100 \text{ ग्राम} \) जल के ताप में वृद्धि \( \Delta T_{जल} = 90^\circ C - 24^\circ C = 66^\circ C \) जल द्वारा ली गई ऊष्मा \( Q_{जल} = M_{जल} c \Delta T_{जल} \) \( Q_{जल} = 100 \text{ ग्राम} \times 1.0 \text{ कैलोरी/(ग्राम°C)} \times 66^\circ C = 6600 \text{ कैलोरी} \) भाप 100°C पर संघनित होती है और फिर 90°C तक ठंडी होती है। भाप द्वारा संघनन में दी गई ऊष्मा \( Q_{संघनित} = m L = m \times 540 \text{ कैलोरी} \) संघनित जल द्वारा 100°C से 90°C तक ठंडे होने में दी गई ऊष्मा \( Q_{ठंडा} = m c \Delta T_{ठंडा} \) \( \Delta T_{ठंडा} = 100^\circ C - 90^\circ C = 10^\circ C \) \( Q_{ठंडा} = m \times 1.0 \text{ कैलोरी/(ग्राम°C)} \times 10^\circ C = 10m \text{ कैलोरी} \) कुल दी गई ऊष्मा \( Q_{दी गई} = Q_{संघनित} + Q_{ठंडा} = 540m + 10m = 550m \text{ कैलोरी} \) ऊष्मामिति के सिद्धांत से: दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा \( 550m = 6600 \) \( m = \frac{6600}{550} = 12 \text{ ग्राम} \)In simple words: इस प्रश्न में जल के तापमान को बढ़ाने के लिए आवश्यक भाप की मात्रा की गणना की गई है। भाप पहले संघनित होकर ऊष्मा देती है, फिर संघनित जल ठंडा होकर अतिरिक्त ऊष्मा देता है। दी गई कुल ऊष्मा को जल द्वारा ली गई ऊष्मा के बराबर रखकर भाप का द्रव्यमान निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, भाप द्वारा दी गई कुल ऊष्मा के दो घटकों (संघनित होने की गुप्त ऊष्मा और संघनित जल के ठंडा होने की ऊष्मा) को शामिल करना न भूलें। इकाइयों का सही ढंग से उपयोग करें और गणना में सावधानी बरतें।

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