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Chapter Solutions: Class 11 Hindi (UP Board) - Shabdon Mein शब्दों में सूक्ष्म अंतर
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नवीनतम पाठयक्रम में शब्द-रचना के अन्तर्गत शब्दों के सूक्ष्म अन्तर को सम्मिलित किया गया है, जिसके लिए विभिन्न प्रकार के शब्द-युग्मों का अध्ययन किया जाना चाहिए । इसके लिए 2 अंक निर्धारित हैं।
शब्द-युग्म से अभिप्राय है-शब्दों का जोड़ा । विभिन्न प्रकार के शब्दों के जोड़े बनाकर शब्द-रचना की जाती है। शब्द-युग्म में दो स्वतन्त्र अर्थ वाले शब्द होते हैं, जो अलग-अलग रहने पर तो पृथक्-पृथक् अर्थ देते हैं, किन्तु जब उन शब्दों का युग्म बनाकर एक शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है तो वे शब्द अपने अर्थों से भिन्न अर्थ देने लगते हैं; उदाहरणार्थ- 'दिन' और 'रात दो पृथक्-पृथक् अर्थ रखने वाले शब्द हैं, किन्तु जब इन शब्दों का युग्म बनाकर एक शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है, तो ये दोनों शब्द अपने-अपने अर्थ को त्यागकर एक नवीन अर्थ का बोध कराने लगते हैं; जैसे-
1. लोग दिन में जागते हैं और रात को सोते हैं।
2. दिनेश ने रात-दिन कड़ी मेहनत की है।
यहाँ प्रथम वाक्य में 'रात' और 'दिन' अपने वास्तविक अर्थ को व्यक्त कर रहे हैं, किन्तु द्वितीय वाक्य में जब वे युग्म के रूप में प्रयुक्त हुए हैं तो वे अपने मूल अर्थ को छोड़कर एक नवीन अर्थ को व्यक्त कर रहे हैं। यहाँ 'रात-दिन' शब्द 'निरन्तरता’ को व्यक्त कर रहा है। इस प्रकार शब्द-युग्म के रूप में एक नवीन अर्थबोधक शब्द की रचना हो गयी है। शब्द-युग्मों की रचना-शब्द-युग्मों की रचना निम्नलिखित सात प्रकारों से की जाती है-
1. एक ही शब्द की पुनरुक्ति द्वारा,
2. सजातीय या समानार्थक शब्दों के द्वारा,
3. विलोम शब्दों के द्वारा,
4. सार्थक और निरर्थक शब्दों के द्वारा,
5. निरर्थक शब्दों के द्वारा,
6. परसर्गों के साथ शब्द की पुनरावृत्ति द्वारा,
7. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों के द्वारा ।। उपर्युक्त विधियों द्वाय निर्मित शब्द-युग्म जिन नवीन अर्थों का बोध कराते हैं, उन्हें वाक्य प्रयोग द्वारा भली प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है।
(1) एक ही शब्द की पुनरुक्ति द्वारा
पुनरुक्ति = पुनः + उक्ति; अर्थात् एक ही शब्द को फिर से कहना उस शब्द की पुनरुक्ति कहलाता है। पुनरुक्ति भी शब्द-युग्म बनाने का प्रमुख तत्त्व है। इसमें एक ही शब्द को प्रायः एक बार दोहराकर शब्द-युग्म बनाया जाता है, किन्तु जब किसी ध्वनि के द्वारा किसी क्रिया को बताया जाता है, तब ध्वनिवाचक शब्द की एक बार से अधिक आवृत्ति की जाती है। साहित्य में इसे ध्वन्यर्थ अलंकार के नाम से जाना जाता है। एक और अनेक आवृत्ति द्वारा शब्द-युग्म बनाने की प्रक्रिया को निम्नवत् समझा जा सकता है-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. अंग-अंग | माँ ने अपने बेटे का अंग-अंग चूम डाला। |
| 2. अपना-अपना | आज सभी अपना-अपना राग अलापने में लगे हैं। |
| 3. कोना-कोना | कस्तूरी की सुगन्ध से वन का कोना-कोना महक उठा। |
| 4. खाली-खाली | बच्चों के बिना घर खाली-खाली लगता है। |
| 5. गाँव-गाँव | आज गाँव-गाँव में बिजली पहुँच गयी है। |
| 6. गाते-गाते | गाते-गाते रात कट गयी। |
| 7. घर-घर | घर-घर में सास-बहू की एक ही कहानी है। |
| 8. छिपते-छिपते | सूरज के छिपते-छिपते मैं घर पहुँच गया। |
| 9. तार-तार | उसके तन के कपड़े तार-तार हो गये। |
| 10. पानी-पानी | अपनी गलती पर वह शर्म से पानी-पानी हो गयी। |
| 11. बूंद-बूंद | कल लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएँगे। |
| 12. मचल-मचल | कश्मीर के सौन्दर्य पर मन मचल-मचल जाता है। |
| 13. रटते-रटते | तुम्हें एक ही बात रटते-रटते दो घण्टे हो गये। |
| 14. रोम-रोम | श्रीराम को देखकर हनुमान् जी का रोम-रोम पुलकित हो गया। |
| 15. लम्बी-लम्बी | ईदगाह पर नमाजियों की लम्बी-लम्बी कतारें लगती हैं। |
| 16. सहते-सहते | पति के अत्याचार सहते-सहते, अन्ततः निर्मला टूट ही गयी। |
| 17. साफ-साफ | मैं साफ-साफ कहने में विश्वास रखता हूँ। |
| 18. हँसते-हँसते | दुःखों का हँसते-हँसते ही सामना करना चाहिए। |
| 19. छम-छम-छम | उसके पैरों के घुँघरू छम-छम-छम कर बज उठे। |
| 20. झम-झम-झम | देखते-ही-देखते झम-झम-झम वर्षा होने लगी। |
| 21. गुन-गुन-गुन | गुन-गुन-गुन भौरे गाते हैं। |
(2) सजातीय या समानार्थक शब्दों के द्वारा
सजातीय अथवा समानार्थक लगने वाले दो शब्दों को मिलाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इसमें दोनों ही शब्द मिलते-जुलते अर्थ देने वाले होते हैं, किन्तु दोनों को अर्थ एक नहीं होता; जैसे-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. ईर्ष्या-द्वेष | मन में ईर्ष्या-द्वेष रखकर कोई सुखी नहीं रह सकता है। |
| 2. उद्योग-धन्धे | सरकार को उद्योग-धन्धों पर विशेष बल देना चाहिए। |
| 3. ऋद्धि-सिद्धि | भगवान् की भक्ति ही सभी ऋद्धि-सिद्धि देने वाली होती है। |
| 4. खेल-तमाशा | अब खेल-तमाशों का समय नहीं रहा है। |
| 5. चमक-दमक | व्यक्ति को बाहरी चमक-दमक से बचना चाहिए। |
| 6. जादू-टोना | जादू-टोना अब गुजरे हुए कल की बातें हैं। |
| 7. झाड़-पोंछ | किसी भी सामान की झाड़-पोंछ आवश्यक है। |
| 8. तोड़-फोड़ | उपद्रवियों ने पूरे शहर में अत्यधिक तोड़-फोड़ की। |
| 9. दीन-हीन | दीन-हीन को सताना अच्छी बात नहीं है। |
| 10. धन-दौलत | धन-दौलत से सुख नहीं खरीदा जा सकता। |
| 11. फल-फूल | उपवास में महाराज जी केवल फल-फूल ही खाते हैं। |
| 12. मार-पीट | बच्चों को मार-पीट कर नहीं सुधारा जा सकता। |
| 13. रीति-रिवाज | रीति-रिवाज हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। |
| 14. विधि-विधान | सभी कार्य विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न हुए। |
| 15. साधु-सन्त | कबीर सदैव साधु-सन्तों की संगत में रहते थे। |
| 16. हँसी-खुशी | सभी के दिन हँसी-खुशी से बीतें। |
(3) विलोम शब्दों के द्वारा
दो विलोम शब्दों को मिलाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इस प्रकार के शब्द-युग्मों से युक्त वाक्य प्रायः सूक्तिपरक और नैतिकता से ओत-प्रोत होते हैं; जैसे-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. आगे-पीछे | लोग नेताओं के आगे-पीछे घूमते-फिरते हैं। |
| 2. आना-जाना | उनका बाहर आना-जाना लगा ही रहता है। |
| 3. उचित-अनुचित | मनुष्य को उचित-अनुचित का ध्यान रखना ही चाहिए। |
| 4. गुण-दोष | मित्रों के गुण-दोष की परख विपत्ति में ही होती है। |
| 5. रात-दिन | रात-दिन पढ़ाई में जुटकर मैंने प्रथम श्रेणी पायी है। |
| 6. धर्म-अधर्म | धर्म-अधर्म को सभी धर्मग्रन्थों ने एक समान रूप में परिभाषित किया है। |
| 7. न्याय-अन्याय | व्यक्ति को प्रत्येक कार्य में न्याय-अन्याय का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। |
| 8. मान-अपमान | सज्जन मान-अपमान को एक समान लेते हैं। |
| 9. शुभ-अशुभ | कर्मशील व्यक्ति शुभ-अशुभ का विचार नहीं करते। |
| 10. सवाल-जवाब | इन व्यर्थ के सवाल-जवाब का क्या औचित्य है ? |
| 11. साधु-असाधु | किसी व्यक्ति के कार्य ही उसे साधु-असाधु की श्रेणी में रखते हैं। |
| 12. सोते-जागते | उसे सोते-जागते कमाने की ही धुन सवार रहती है। |
| 13. होनी-अनहोनी | होनी-अनहोनी दोनों ही नहीं टलतीं। |
| 14. ज्ञान-अज्ञान | ज्ञान-अज्ञान को जानने वाला ही विद्वान् है। |
(4) सार्थक और निरर्थक शब्दों के द्वारा
यद्यपि निरर्थक शब्दों को भाषा में शब्द ही नहीं माना जाता और इसी कारण उनको अध्ययन भी भाषा के अन्तर्गत नहीं किया जाता, तथापि इन निरर्थक शब्दों का भी भाषा में बड़ा महत्त्व है। सार्थक शब्दों के साथ मिलाकर जब इनसे शब्द-युग्म की रचना की जाती है तो ये सार्थक हो उठते हैं। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि शब्द-युग्म द्वारा जब ये निरर्थक शब्द सार्थक हो उठते हैं, तब भी उनके अर्थ को सार्थक शब्द के अर्थ से पृथक् करके नहीं देखा जा सकता। इनकी सार्थकता सदैव अपने साथ प्रयुक्त होने वाले सार्थक शब्दों पर ही निर्भर करती है। इस प्रकार के शब्द-युग्मों में सार्थक शब्द पहले अथवा बाद में कहीं भी आ सकता है; जैसे-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. आमने-सामने | जरा-सी बात पर दोनों भाई आमने-सामने आ गये। |
| 2. आस-पास | हमारे आस-पास का वातावरण बड़ा सुहावना था। |
| 3. उल्टा-पुल्टा | बच्चों ने जरा-सी देर में सब-कुछ उल्टा-पुल्टा कर दिया। |
| 4. खाना-वाना | बहुत देर हो गयी है अब खाना-वाना खाना है या नहीं। |
| 5. घर-वर | अब घर-वर चलोगे या नहीं। |
| 6. चाय-शाय | अरे भई गौरव को चाय-शाय पिलायी या नहीं ? |
| 7. चिट्ठी-विट्ठी | नीरज कोई चिट्ठी-विट्ठी नहीं लिखता। |
| 8. ठीक-ठाक | घर पर सब ठीक-ठाक है। |
| 9. देख-भाल | बच्चों की उचित देख-भाल एक पढ़ी-लिखी माँ ही कर सकती है। |
| 10. बचा-खुचा | मैंने बचा-खुचा सामान भिखारी को दे दिया। |
| 11. भीड़-भाड़ | आजकल शहरों में सभी जगह भीड़-भाड़ है। |
| 12. मिठाई-विठाई | बच्चों को ज्यादा मिठाई-विठाई नहीं खानी चाहिए। |
| 13. चाकू-वाकू | मैंने कोई चाकू-वाकू नहीं देखा। |
| 14. गुम-सुम | वह अकसर गुम-सुम रहता है। |
| 15. तोल-ताल | सामान को जल्दी से तोल-ताल पर छुट्टी करो। |
| 16. मार-धाड़ | अब मार-धाड़ वाली फिल्में ही अधिक बनती हैं। |
| 17. ठाट-बाट | दिनेश के ठाट-बाट देखते ही बनते हैं। |
| 18. पीट-पाट | अब तुम यहाँ से तुरन्त चले जाओ नहीं तो कोई पीट-पाट देगा। |
(5) निरर्थक शब्दों के द्वारा
साधारण बोलचाल की भाषा में दो निरर्थक शब्दों को मिलाकर उनसे शब्द-युग्म की रचना करके एक विशेष अर्थ की अभिव्यक्ति की जाती है; जैसे-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. अफरा-तफरी | अचानक मंत्री जी के आने की खबर सुनकर कार्यालय में अफरा-तफरी मच गयी। |
| 2. इक्के-दुक्के | रात में इक्के-दुक्के लोग ही पार्क में घूमते हैं। |
| 3. ऊल-जलूल | उसकी ऊल-जलूल बातों पर कौन ध्यान देता है? |
| 4. चूँ-चपड़ | जाओ अब अपना रास्ता देखो, ज्यादा चूँ-चपड़ मत करो। |
| 5. हक्का-बक्का | भाई की मृत्यु का समाचार सुनकर वह हक्का-बक्का रह गया। |
| 6. हट्टा-कट्टा | वैभव देखने में हट्टा-कट्टा लगता है। |
(6) परसर्गों के साथ शब्द की पुनरावृत्ति द्वारा
पुनरावृत्ति द्वारा बने शब्द-युग्मों के मध्य परसर्ग लगाकर भी शब्द-युग्म की रचना की जाती है। इस प्रकार के शब्द-युग्म में परसर्ग के दोनों ओर संयोजक चिह्न लगाते हैं; जैसे-
| शब्द-युग्म | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| 1. अपनी-ही-अपनी | सब अपनी-ही-अपनी चलाते हैं, दूसरों की कोई नहीं सुनता। |
| 2. आगे-ही-आगे | चोर पुलिस के आगे-ही-आगे दौड़ता हुआ गायब हो गया। |
| 3. ऊपर-ही-ऊपर | झीलों में बर्फ ऊपर-ही-ऊपर जमती है। |
| 4. और-ही-और | लक्ष्मी के जन्म से गिरधर की हालत और-ही-और होती चली गयी। |
| 5. कभी-न-कभी | कभी-न-कभी तो उसके दिन भी फिरेंगे। |
| 6. कहीं-न-कहीं | यह दवाई ढूँढ़ने पर कहीं-न-कहीं मिल ही जाएगी। |
| 7. कुछ-का-कुछ | डर के मारे वह कुछ-का-कुछ कहने लगा। |
| 8. ढेर-का-ढेर | खलिहान में गेहूँ का ढेर-का-ढेर जलकर राख हो गया। |
| 9. नीचे-ही-नीचे | वह नदी में नीचे-ही-नीचे तैर लेता है। |
| 10. लोग-ही-लोग | संगम पर जहाँ तक दृष्टि जाती है, लोग-ही-लोग दिखते हैं। |
(7) समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों के द्वारा
जो शब्द उच्चारण में लगभग समान प्रतीत होते हैं, परन्तु उनके अर्थ भिन्न होते हैं, उन्हें समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द-युग्म भी कहा जाता है; यथा-
| शब्द-युग्म | अर्थ | शब्द-युग्म | अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1. अम्ब | माता | 18. अथक | जिसमें थकान न लगे |
| अम्बु | जल | अकथ | जो कहने योग्य नहीं है |
| 2. अशक्त | शक्तिहीन | 19. अगम | जहाँ पहुँचा न जा सके |
| आसक्त | मोहित | अगोचर | इन्द्रियों से परे हो |
| 3. अपकार | बुरा करना | 20. अचल | स्थिर |
| उपकार | भला करना | अंचल | सीमा |
| 4. अनुरोध | प्रार्थना | 21. अभिज्ञ | जानकार |
| अवरोध | रुकावट, बाधा | अनभिज्ञ | अनजान |
| 5. अनल | आग | 22. अमिट | अटल |
| अनिल | वायु | अमित | अत्यधिक |
| 6. अंस | कंधा | 23. अर्घ | मूल्य |
| अंश | भाग | अर्घ्य | पूजा का द्रव्य |
| 7. अनिष्ठ | बुरा | 24. अतुल | जिसकी तुलना न हो सके |
| अनिष्ठ | निष्ठारहित | अतल | गहरा |
| 8. अवधि | काल-सीमा | 25. अशित | खाया हुआ |
| अवधी | भाषा का नाम | असित | काला |
| 9. अवलम्ब | सहारा | 26. अजर | जो वृद्ध न हो |
| अविलम्ब | शीघ्र | अजिर | आँगन |
| 10. अपेक्षा | आशा, इच्छा | 27. अगम | अगम्य |
| उपेक्षा | निरादर, अनदेखी | आगम | भविष्य |
| 11. अन्त | समाप्त | 28. अचार | अचार, मुरब्बा |
| अन्त्य | अन्त का, नीच | आचार | आचरण |
| 12. अनु | पीछे, उपसर्ग | 29. अपमान | बेइज्जती |
| अणु | छोटा | उपमान | सदृश वस्तु |
| 13. अन्न | अनाज | 30. अमल | खट्टा, तेजाब |
| अन्य | दूसरा | अम्ल | नशा, क्रियान्वयन |
| 14. अभय | निर्भय | 31. अनुसरण | पीछे चलना |
| उभय | दोनों | अनुकरण | नकल करना |
| 15. अभिराम | सुन्दर | 32. अंश | भाग (हिस्सा) |
| अविराम | निरन्तर | अंशु | सूर्य |
| 16. अयस् | लोहा | 33. अब्ज | कमल |
| अयश | अपकीर्ति | अब्द | वर्ष |
| 17. अलि | भौंरा | 34. अधूत | भयरहित |
| आली | सखी | अवधूत | योगी |
| 35. अपर | दूसरा | 56. कंगाल | दरिद्र |
| अपार | असीम (अत्यधिक) | कंकाल | अस्थि-पंजर |
| 36. अरि | शत्रु | 57. केसर | घोड़े या सिंह की गरदन का बाल |
| आरी | काटने वाली आरी | केशर | पराग |
| 37. आचरण | व्यवहार | 58. कृत | किया हुआ |
| आवरण | परदा | कृति | रचना |
| 38. आकर | खजाना | 59. कँटीला | काँटेदार |
| आकार | रूप | कटीला | धारदार |
| 39. आयत | चौकोर | 60. कच | केश |
| आयात | बाहर से मँगाना | कुच | स्तन |
| 40. आदि | प्रारम्भ | कूच | प्रस्थान |
| आधि | मानसिक दुःख | 61. कर्ण | कान |
| आदी | अभ्यस्त | करण | साधन-इन्द्रिय |
| 41. आवास | निवास | 62. कृपण | कंजूस |
| आभास | प्रतीति | कृपाण | कटार |
| 42. इत | इधर | 63. कान | कर्ण |
| ईति | प्राकृतिक प्रकोप | कानि | मर्यादा |
| 43. उपयुक्त | उचित | 64. केश | सिर के बाल |
| उपर्युक्त | ऊपर कहा गया | केस | डिब्बा |
| 44. उत्कर्ष | उत्थान | 65. खेचर | आकाशचारी पक्षी |
| अपकर्ष | पतन | खच्चर | गधे जैसा पशु |
| 45. उद्धत | चंचल, उद्दण्ड | 66. गृह | घर |
| उद्यत | तैयार | ग्रह | नक्षत्र |
| 46. उपहार | भेंट | 67. गर्व | घमण्ड, अहंकार |
| उपचार | इलाज | गर्भ | भीतर, गर्भाशय |
| 47. उधार | ऋण | 68. गणना | गिनती |
| उद्धार | मुक्त | गड़ना | चुभना |
| 48. उत्साह | जोश | 69. गुरु | शिक्षक |
| साहस | हिम्मत, धैर्य | गुर | उपाय |
| 49. ओर | तरफ | 70. ग्रन्थ | पुस्तक |
| और | दूसरा | ग्रन्थि | गाँठ |
| 50. कपिश | मटमैला | 71. गेय | गाने योग्य |
| कपीश | सुग्रीव | ज्ञेय | जानने योग्य |
| 51. कल्पित | कल्पना किया हुआ | 72. घाम | गर्मी |
| कल्पान्त | प्रलय, सृष्टि का अन्त | धाम | घर, निवास स्थान |
| 52. कुल | वंश | 73. चिर | देर |
| कूल | किनारा | चीर | एक वस्त्र |
| 53. कोष | खजाना | 74. चरण | पैर |
| कोश | शब्द-संग्रह | चारण | भाट |
| कोस | दूरी की माप | 75. चर | सजीव |
| 54. कटि | कमर | अचर | निर्जीव |
| कीट | कीड़ा | 76. चतुष्पद | पशु, चौपाया |
| 55. कान्ति | आभा, चमक | चतुष्पथ | चार मार्ग, चौराहा |
| क्रान्ति | उथल-पुथल, विद्रोह | 77. छात्र | विद्यार्थी |
| क्षात्र | क्षत्रिय का | ||
| 78. छत्र | छतरी | 100. धरा | पृथ्वी |
| क्षत्र | क्षत्रिय | धारा | पानी का प्रवाह |
| 79. छल | कपट | 101. नीर | जल |
| छाल | वृक्ष का छिलका | नीड़ | घोंसला |
| 80. जघन | जाँघ | 102. नीरद | बादल |
| जघन्य | गर्हित | नीरज | कमल |
| 81. जलद | बादल | 103. नग | पर्वत, वृक्ष, रत्न |
| जलज | कमल | नाग | हाथी, सर्प |
| 82. जरा | बुढ़ापा | 104. नारी | स्त्री |
| ज़रा | तनिक | नाड़ी | नब्ज, नस |
| 83. जव | वेग | 105. निर्माण | बनाना |
| यव | जौ | निर्वाण | मोक्ष |
| 84. तरणि | सूर्य | 106. निधन | मृत्यु |
| तरुणी | युवती स्त्री | निर्धन | गरीब |
| तरणी | नाव | 107. निश्चित | तय |
| 85. तप | तपस्या | निश्चिन्त | बेफिक्र |
| ताप | कष्ट | 108. नियन्त्रण | काबू |
| 86. तर्क | बहस | निमन्त्रण | न्यौता |
| तक्र | मट्ठा | 109. निर्जर | देवता |
| 87. तव | तेरा | निर्जन | सूनसान |
| तब | उसी समय | 110. नियत | निश्चित |
| 88. तरंग | लहर | नियति | भाग्य |
| तुरंग | घोड़ा | 111. परीक्षक | 'जाँच करने वाला |
| 89. तरण | तैरना | निरीक्षक | (जाँचने वाला) |
| तरुण | युवा | निरीक्षण करने वाला (देख-भाल करने वाला) | |
| 90. देव | देवता | 112. प्रसाद | कृपा, भोग |
| दैव | भाग्य | प्रासाद | महल |
| 91. दिन | दिन (दिवस) | 113. पथ | मार्ग |
| दीन | गरीब | पथ्य | रोगी का भोजन |
| 92. द्रव्य | धन | 114. परिणाम | नतीजा, फल |
| द्रव | तरल पदार्थ | परिमाण | मात्रा |
| 93. दूत | सन्देशवाहक | 115. प्रमाण | साक्ष्य |
| द्यूत | जुआ | प्रयाण | जाना |
| 94. देश | राज्य | प्रणाम | नमन |
| द्वेष | ईर्ष्या, जलन | 116. पुरुष | आदमी |
| 95. द्विप | हाथी | परुष | कठोर |
| द्वीप | टापू | 117. पवन | हवा |
| दीप | दीपक | पावन | पवित्र |
| 96. दंशन | दाँत | पावक | आग |
| देशन | काटना | 118. प्रणय | प्रेम, प्रीतियुक्त, |
| 97. दार | पत्नी | परिणय | विवाह |
| द्वार | दरवाजा | 119. पाणि | हाथ |
| 98. दोष | विकार, त्रुटि | पानी | जल |
| दूषित | विकारयुक्त, त्रुटियुक्त | 120. प्रवाह | बहाव |
| 99. दश | संख्या विशेष | परवाह | चिन्ता |
| दंश | डंक | ||
| 121. प्रण | प्रतिज्ञा | 144. मनोज | कामदेव |
| पण | बाजी, पैसा | मनोज्ञ | सुन्दर |
| 122. प्रपात | झरना | 145. मत | राय, सलाह |
| प्रताप | तेज | मति | बुद्धि |
| 123. प्रलाप | व्यर्थ की बात | 146. यन्त्रणा | कष्ट |
| विलाप | रोना | मन्त्रणा | विचार-विमर्श |
| 124. पण्डित | विद्वान् | 147. यति | संन्यासी |
| पाण्डित्य | विद्वत्ता | येती | हिममानव |
| 125. प्रताप | पराक्रम | 148. यूक | जूँ |
| परिताप | दुःख | यूप | बलि का स्थान जहाँ बाँधते हैं |
| 126. पाहन | पत्थर | 149. रज | धूल |
| पाहुन | अतिथि | रजक | धोबी |
| 127. पुष्ट | मोटा-ताजा | 150. रस | आनन्द, अर्क |
| पुष्टि | समर्थन | रास | लगाम, नृत्य-क्रीड़ा |
| 128. प्रसिद्ध | ख्याति प्राप्त | 151. रुचिर | सुन्दर |
| प्रसिद्धि | ख्याति | रुधिर | रक्त |
| 129. पास | निकट | 152. लक्ष्य | निशाना, उद्देश्य |
| पाश | बन्धन, जाल | लक्ष | लाख (संख्या) |
| 130. प्रधान | मुख्य | 153. लंक | कमर |
| परिधान | वस्त्र | लंका | देश-विशेष |
| 131. प्रतिमा | मूर्ति | 154. विधि | ब्रह्मा |
| प्रतिभा | विलक्षण बुद्धि | विधु | चन्द्रमा |
| 132. प्रहार | आघात | 155. वारिद | बादल |
| प्रहर | आठ घड़ी समय | वारिधि | समुद्र |
| 133. प्रकार | तरीका, किस्म | 156. वसुदेव | कृष्ण के पिता |
| प्राकार | परकोटा, प्राचीर | वासुदेव | कृष्ण |
| 134. प्रभाव | असर | 157. वरण | चुनना |
| पराभव | हार | वर्ण | रंग, जाति, अक्षर |
| 135. बदन | शरीर | 158. व्रत | उपवास |
| वदन | मुख | वृत्त | घेरा |
| 136. बात | बातचीत, वचन | वित्त | धन |
| वात | वायु | 159. वसन | वस्त्र |
| 137. बद्ध | बँधा हुआ | व्यसन | बुरी आदत |
| वध | मारना | 160. विनियम | विशेष नियम |
| 138. बाल | बालक | विनिमय | अदल-बदल |
| वृद्ध | बूढ़ा | 161. शशधर | चन्द्रमा |
| 139. भवन | घर | शशिधर | शिव |
| भुवन | संसार | 162. शुल्क | फीस |
| 140. मृत्यु | मौत | शुक्ल | सफेद |
| मर्त्य | मनुष्य | 163. शस्त्र | हथियार |
| 141. मूल | जड़ | शास्त्र | ज्ञान से पूर्ण ग्रन्थ |
| मूल्य | कीमत | 164. शकल | टुकड़ा |
| 142. मलिन | मैला | शक्ल | आकृति |
| मालिन्य | मैलापन | सकल | सम्पूर्ण |
| 143. मात्र | केवल | 165. शोक | दुःख |
| मातृ | माता | शौक | व्यसन |
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न (क) निम्नलिखित शब्द-युग्मों में से किसी एक शब्द-युग्म में बताइए कि उसका कौन-सा अर्थ सही है-
Question 1. अनल-अनिल - (क) पृथ्वी और आकाश
(ख) अग्नि और वायु
(ग) जल और वायु
(घ) पानी और आग
Answer: (ख) अग्नि और वायु
In simple words: 'अनल' का अर्थ अग्नि है और 'अनिल' का अर्थ वायु है, जो समान ध्वनित होते हुए भी भिन्न अर्थ रखते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में शब्दों की ध्वनियों पर ध्यान दें, लेकिन उनके सही अर्थों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. सकल-शकल - (क) कला और कृति
(ख) सन् और सम्वत्
(ग) सम्पूर्ण और अंश
(घ) सबल और निर्बल
Answer: (ग) सम्पूर्ण और अंश
In simple words: 'सकल' का मतलब पूरा या सम्पूर्ण होता है, जबकि 'शकल' का अर्थ किसी वस्तु का एक टुकड़ा या अंश होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों के सूक्ष्म अंतर को समझने के लिए उनके मूल अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. पुरुष-परुष – (क) नर और नारी
(ख) आदमी और फरसा
(ग) पुरुष और पैसा
(घ) आदमी और कठोर
Answer: (घ) आदमी और कठोर
In simple words: 'पुरुष' का अर्थ मनुष्य या आदमी होता है, और 'परुष' का अर्थ कठोर या निर्दय होता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे युग्मों में एक शब्द का अर्थ व्यक्ति से संबंधित होता है और दूसरे का उसके गुण से।
Question 4. गृह-ग्रह – (क) घर और नक्षत्र
(ख) घर और गृहस्थी
(ग) गिरोह और घर
(घ) गाँव और घर
Answer: (क) घर और नक्षत्र
In simple words: 'गृह' का अर्थ रहने का स्थान या घर है, जबकि 'ग्रह' खगोलीय पिंड जैसे मंगल या शनि को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: समान ध्वनि वाले शब्दों के बीच के छोटे-छोटे अंतर को पहचानना भाषा कौशल का परीक्षण करता है।
Question 5. वृत्त-वित्त - (क) चरित्र और धन
(ख) धन और दौलत
(ग) गिरोह और घर
(घ) गाँव और घर
Answer: (क) चरित्र और धन
In simple words: 'वृत्त' का अर्थ किसी व्यक्ति का चरित्र या आचरण होता है, जबकि 'वित्त' का अर्थ धन या संपत्ति है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों का सही अर्थ जानने से वाक्यों में उनके उचित प्रयोग में मदद मिलती है।
Question 6. बात-वात - (क) भात और दोल
(ख) बातचीत और वायु
(ग) हवा और पानी
(घ) बाट और तराजू,
Answer: (ख) बातचीत और वायु
In simple words: 'बात' का अर्थ किसी से संवाद या चर्चा करना होता है, जबकि 'वात' का अर्थ हवा या वायु होता है।
🎯 Exam Tip: शब्द-युग्मों के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए शब्दों के मूल संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 7. कपट-कपाट - (क) कप और प्लेट
(ख) किवाड़ और खिड़की
(ग) धोखा और दरवाजा
(घ) पर्दा और किवाड़
Answer: (ग) धोखा और दरवाजा
In simple words: 'कपट' का मतलब छल या धोखा देना होता है, जबकि 'कपाट' का अर्थ घर या किसी चीज़ का दरवाजा होता है।
🎯 Exam Tip: छोटे अक्षर परिवर्तन बड़े अर्थ परिवर्तनों को दर्शाते हैं, इसलिए सावधानी से अर्थों को याद करें।
Question 8. पतन-पत्तन - (क) गिरना और उठना
(ख) पत्ता और फूल
(ग) गिरना और बन्दरगाह
(घ) पर्दा और किवाड़
Answer: (ग) गिरना और बन्दरगाह
In simple words: 'पतन' का अर्थ नीचे गिरना या अवनति होता है, जबकि 'पत्तन' एक बंदरगाह या व्यापारिक नगर को कहते हैं।
🎯 Exam Tip: भिन्नार्थक शब्दों को याद करते समय उनके मूल धातुओं और उनसे बने अन्य शब्दों पर भी विचार करें।
Question 9. सुत-सूत - (क) पुत्र और पिता
(ख) पुत्र और सारथी
(ग) पुत्र और माता
(घ) पुत्र और पत्नी ।
Answer: (ख) पुत्र और सारथी
In simple words: 'सुत' का अर्थ बेटा या पुत्र होता है, जबकि 'सूत' का अर्थ सारथी (रथ हाँकने वाला) या धागा भी होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों में स्वर और मात्रा का अंतर महत्वपूर्ण है, जो अर्थ को पूरी तरह से बदल देता है।
Question 10. अभिराम-अविराम - (क) सुन्दर और लगातार
(ख) राम और लक्ष्मण
(ग) अब और तब
(घ) सुन्दर और मजबूत ।
Answer: (क) सुन्दर और लगातार
In simple words: 'अभिराम' का अर्थ सुन्दर या आकर्षक होता है, जबकि 'अविराम' का अर्थ बिना रुके या लगातार होता है।
🎯 Exam Tip: उपसर्गों के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में कैसे बदलाव आता है, इसे समझना महत्वपूर्ण है।
Question 11. पास-पाश - (क) उत्तीर्ण और निकट
(ख) निकट और जाल
(ग) निकट और ऊँचा
(घ) समीप और दूर
Answer: (ख) निकट और जाल
In simple words: 'पास' का अर्थ समीप या निकट होता है, जबकि 'पाश' का अर्थ बंधन या जाल होता है।
🎯 Exam Tip: एक ही उच्चारण वाले भिन्नार्थक शब्दों में, उनके लेखन और संदर्भ पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. पंथ-पथ - (क) पथिक और रास्ता
(ख) सम्प्रदाय और मार्ग
(ग) चलना और बैठना
(घ) मार्ग और कार्य
Answer: (ख) सम्प्रदाय और मार्ग
In simple words: 'पंथ' का अर्थ कोई विशेष धार्मिक या वैचारिक समुदाय (सम्प्रदाय) होता है, जबकि 'पथ' का अर्थ चलने का मार्ग या रास्ता होता है।
🎯 Exam Tip: ये शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन 'पंथ' एक विचारधारा या समूह को संदर्भित करता है, जबकि 'पथ' भौतिक रास्ते को।
Question 13. अभय-उभय - (क) निडर और दोनों
(ख) भयरहित और निडर
(ग) निर्भय और कायर
(घ) आभायुक्त और अन्य
Answer: (क) निडर और दोनों
In simple words: 'अभय' का अर्थ निडर या भय रहित होता है, जबकि 'उभय' का अर्थ दोनों या युग्म होता है।
🎯 Exam Tip: यह युग्म उपसर्गों (अ- और उ-) के प्रभाव को दर्शाता है, जो शब्दों के अर्थ को बदल देते हैं।
Question 14. अंबुज-अंबुद - (क) कमल और बादल
(ख) जल और कमल
(ग) बादल और समुद्र
(घ) समुद्र और कमल
Answer: (क) कमल और बादल
In simple words: 'अंबुज' का अर्थ कमल होता है, क्योंकि वह जल (अंबु) में जन्म लेता है, जबकि 'अंबुद' का अर्थ बादल होता है, क्योंकि वह जल (अंबु) देता है।
🎯 Exam Tip: 'ज' का अर्थ 'जन्म लेने वाला' और 'द' का अर्थ 'देने वाला' होता है, जो इन शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करता है।
Question 15. मेघ-मेध - (क) बादल और कील
(ख) बादल और यज्ञ
(ग) काला और बुद्धि
(घ) बादल और चर्बी
Answer: (ख) बादल और यज्ञ
In simple words: 'मेघ' का अर्थ बादल होता है, जो वर्षा लाता है, जबकि 'मेध' का अर्थ यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठान होता है।
🎯 Exam Tip: 'घ' और 'ध' के सूक्ष्म अंतर पर ध्यान दें, क्योंकि यह अर्थ में बड़ा बदलाव लाता है।
Question 16. अंस-अंश - (क) अंकुर और हिस्सा
(ख) हिस्सा और अंकुर
(ग) कंधा और हिस्सा
(घ) हिस्सा और कंधा
Answer: (ग) कंधा और हिस्सा
In simple words: 'अंस' का अर्थ कंधा होता है, जो शरीर का एक अंग है, जबकि 'अंश' का अर्थ भाग या टुकड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: श और स के प्रयोग से अर्थ में अंतर आता है, यह याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17. जलज-जलद - (क) बादल और कमल
(ख) कमल और बादल
(ग) कमल और तालाब
(घ) तालाब और कमल
Answer: (ख) कमल और बादल
In simple words: 'जलज' का अर्थ कमल है क्योंकि यह जल में जन्म लेता है, और 'जलद' का अर्थ बादल है क्योंकि यह जल देता है।
🎯 Exam Tip: 'ज' (जन्म लेने वाला) और 'द' (देने वाला) प्रत्यय इन युग्मों के अर्थ को समझने की कुंजी हैं।
Question 18. अन्न-अन्य - (क) अनाज और दूसरा
(ख) भोजन और अनेक
(ग) गेहूँ और वह
(घ) बेकार और दूसरों
Answer: (क) अनाज और दूसरा
In simple words: 'अन्न' का अर्थ अनाज या भोजन होता है, जबकि 'अन्य' का अर्थ दूसरा या कोई और होता है।
🎯 Exam Tip: ये शब्द सामान्यतः उपयोग किए जाते हैं; उनके अर्थ को सही ढंग से समझना महत्वपूर्ण है।
Question 19. उपकार-अपकार- (क) दूसरे का कार्य और बुरी'
(ख) पुकार और न बोलना।
(ग) भलाई और बुराई
(घ) अच्छी और दुष्ट
Answer: (ग) भलाई और बुराई
In simple words: 'उपकार' का अर्थ किसी का भला करना या मदद करना होता है, जबकि 'अपकार' का अर्थ किसी का बुरा करना या नुकसान पहुंचाना होता है।
🎯 Exam Tip: 'उप' और 'अप' उपसर्गों का विपरीत अर्थ दर्शाने वाला प्रभाव यहां स्पष्ट होता है।
Question 20. अचार-आचर - (क) बुरा आचरण और अच्छा
(ख) मुरब्बा और आचरण
(ग) स्थिर और चल
(घ) आम और चारों
Answer: (ख) मुरब्बा और आचरण
In simple words: 'अचार' एक प्रकार का खाद्य पदार्थ (मुरब्बा) है, जबकि 'आचर' (आचरण) का अर्थ व्यवहार या बर्ताव होता है।
🎯 Exam Tip: 'अचार' और 'आचरण' के अर्थ में स्पष्ट अंतर है, जो उनके उपयोग के संदर्भ से समझा जा सकता है।
Question 21. भित्ति-भीतं - (क) भक्ति और भाग्य
(ख) द्वार और दीवार
(ग) दीवार और डरा हुआ।
(घ) बाहर और भीतर
Answer: (ग) दीवार और डरा हुआ।
In simple words: 'भित्ति' का अर्थ दीवार या भीत होता है, जबकि 'भीत' का अर्थ डरा हुआ या भयभीत होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों में मात्रा का सूक्ष्म अंतर अर्थ को पूरी तरह बदल देता है, ध्यान से पहचानें।
Question 22. अमूल्य-अमूल - (क) मूल-रहित और दूध
(ख) मूलरहित और जड़ रहित
(ग) मूल्य सहित और मूलभूत
(घ) अधिक मूल्यवाला और मूर्ख
Answer: (घ) अधिक मूल्यवाला और मूर्ख
In simple words: 'अमूल्य' का अर्थ जिसका कोई मूल्य न हो या जो बहुत कीमती हो, जबकि 'अमूल' का अर्थ जड़ रहित या बिना आधार का होता है।
🎯 Exam Tip: 'अमूल्य' का मतलब 'बहुमूल्य' जबकि 'अमूल' 'निराधार' से संबंधित है, यह अंतर याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 23. भारती-भारतीय - (क) सरस्वती और भारत का रहने वाला
(ख) भार ढोने वाली और भर्ती करने वाला
(ग) भार में लगी हुई और चुनाव,
(घ) एक जाति और एक व्यक्ति
Answer: (क) सरस्वती और भारत का रहने वाला
In simple words: 'भारती' का अर्थ विद्या की देवी सरस्वती होता है, जबकि 'भारतीय' का अर्थ भारत देश का निवासी होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों का सही अर्थ जानने से साहित्यिक और सामान्य संदर्भों में उनका उचित प्रयोग सुनिश्चित होता है।
Question 24. श्रान्त-आन्ति - (क) थकान और खिन्नता
(ख) शान्ति और खिन्नता
(ग) खेिल और थकान
(घ) शस्त और अशान्त ।
Answer: (क) थकान और खिन्नता
In simple words: 'श्रान्त' का अर्थ थका हुआ या परिश्रमी होता है, जबकि 'आन्ति' का अर्थ खिन्नता या उदासी होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों के भावार्थ को समझना उनके सही प्रयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 25. प्रारम्भ-संरब्ध - (क) आरम्भ और योजना
(ख) अथ और इति
(ग) आरम्भु और भाग्य
(घ) शुरू करने की स्थिति और समाप्ति
Answer: (ग) आरम्भु और भाग्य
In simple words: 'प्रारम्भ' का अर्थ किसी कार्य की शुरुआत या आरम्भ होता है, जबकि 'संरब्ध' का अर्थ भाग्य या प्रारब्ध होता है।
🎯 Exam Tip: यह युग्म शब्दों की ध्वनि समानता के बावजूद उनके बिल्कुल भिन्न अर्थों को दर्शाता है।
Question 26. छात्र-क्षात्र- (क) छतरीधारी और विद्यार्थी
(ख) विद्यार्थी और नेता
(ग) क्षेत्रियधर्म और विद्यार्थी
(घ) विद्यार्थी और क्षत्रियोचित
Answer: (घ) विद्यार्थी और क्षत्रियोचित
In simple words: 'छात्र' का अर्थ विद्यार्थी या शिष्य होता है, जबकि 'क्षात्र' का अर्थ क्षत्रिय से संबंधित या क्षत्रियोचित होता है।
🎯 Exam Tip: वर्णमाला के अक्षरों में सूक्ष्म अंतर भी अर्थ में बड़ा बदलाव ला सकता है, जैसा कि 'त्र' और 'क्षत्र' में है।
Question 27. नियत-नियति - (क) निश्चित और भाग्य
(ख) आदत और भाग्य
(ग) प्रकृति और गणना ।
(घ) आदत और गणना
Answer: (क) निश्चित और भाग्य
In simple words: 'नियत' का अर्थ निर्धारित या निश्चित होता है, जबकि 'नियति' का अर्थ भाग्य या तकदीर होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों के सही प्रयोग के लिए उनके अर्थों में अंतर को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
Question 28. वहन-बहन - (क) टोना-भागिनी
(ख) बहना-बहिनी
(ग) ढोना-बहना
(घ) ढोना-ढहाना
Answer: (क) टोना-भागिनी
In simple words: 'वहन' का अर्थ ढोना या उठाना होता है, जबकि 'बहन' का अर्थ भाई की स्त्री संबंधी या सहोदरा होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों के अर्थों में अंतर उनकी ध्वनि और संदर्भ के कारण आता है।
Question 29. आय-आयु - (क) आना-उम्र
(ख) आमदनी-उम्र
(ग) आना-आज्ञा
(घ) आमदनी-आना
Answer: (ख) आमदनी-उम्र
In simple words: 'आय' का अर्थ आमदनी या कमाई होता है, जबकि 'आयु' का अर्थ जीवनकाल या उम्र होता है।
🎯 Exam Tip: ये शब्द वित्तीय और जैविक संदर्भों में उपयोग होते हैं; उनके उपयोग को सही ढंग से समझना महत्वपूर्ण है।
Question 30. श्रवण-श्रमण - (क) पप और पुण्य
(ख) सज्जन और दुर्जन
(ग) कान और भिक्षु
(घ) सावन और परिश्रमी
Answer: (ग) कान और भिक्षु
In simple words: 'श्रवण' का अर्थ सुनने की क्रिया या कान होता है, जबकि 'श्रमण' का अर्थ भिक्षु या तपस्वी होता है।
🎯 Exam Tip: यह युग्म एक क्रिया और एक व्यक्ति के विशेषण के बीच के अंतर को दर्शाता है।
Question 31. अंश-अंशु - (क) भाग और सूर्य
(ख) सूर्य और भाग
(ग) भाग और किरण
(घ) भाग और वरुण
Answer: (क) भाग और सूर्य
In simple words: 'अंश' का अर्थ भाग या हिस्सा होता है, जबकि 'अंशु' का अर्थ सूर्य या उसकी किरण होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों में 'स' और 'श' का अंतर अर्थ को पूरी तरह से बदल देता है।
Question 32. कटिबंध-कटिबद्ध - (क) फेंटा और तैयार
(ख) करधनी और तैयार
(ग) तैयार और बाजूबन्दै
(घ) उद्यत और उद्धत
Answer: (ख) करधनी और तैयार
In simple words: 'कटिबंध' का अर्थ कमर में बाँधने वाला वस्त्र या करधनी होता है, जबकि 'कटिबद्ध' का अर्थ किसी कार्य के लिए तैयार या प्रतिबद्ध होना होता है।
🎯 Exam Tip: 'बंध' (पट्टा) और 'बद्ध' (तैयार) का अंतर समझने से इन शब्दों के अर्थ स्पष्ट होते हैं।
Question 33. निहत-निहित - (क) डरा हुआ और छिपा हुआ
(ख) छिपा हुआ और डरा हुआ
(ग) मरा हुआ और छिपा हुआ ।
(घ) हारा हुआ और मरा हुआ
Answer: (ग) मरा हुआ और छिपा हुआ ।
In simple words: 'निहत' का अर्थ मारा हुआ या मृत होता है, जबकि 'निहित' का अर्थ किसी के अंदर छिपा हुआ या समाहित होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों का प्रयोग अलग-अलग संदर्भों में होता है, इसलिए उनके अर्थ को सावधानी से याद करें।
Question 34. बिहग-बिहंग - (क) पक्षी और बालक
(ख) पक्षी और तोता
(ग) पक्षी और आकाश
(घ) आकाश और पक्षी
Answer: (घ) आकाश और पक्षी
In simple words: 'बिहग' का अर्थ पक्षी होता है, क्योंकि वह आकाश में गमन करता है, जबकि 'बिहंग' का अर्थ आकाश या अंतरिक्ष होता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत मूल के इन शब्दों में 'ग' और 'ंग' का अंतर अर्थ में बड़ा बदलाव लाता है, ध्यान से समझें।
Question 35. अतिथि-अतिथेय- (क) जिसके आने की कोई तिथि न हो-अतिथि सेवा करने वाला,
(ख) अधिक तिथि-आने वाली तिथि
(ग) अतिथिविहीन-तिथि सहित
(घ) जिसके आने की तिथि हो-जो निश्चित तिथि पर आये
Answer: (क) जिसके आने की कोई तिथि न हो-अतिथि सेवा करने वाला,
In simple words: 'अतिथि' वह होता है जिसके आने की कोई निश्चित तिथि न हो, जबकि 'अतिथेय' का अर्थ अतिथि की सेवा करने वाला या सत्कार करने वाला होता है।
🎯 Exam Tip: ये शब्द क्रमशः 'मेहमान' और 'मेहमान नवाजी' के भाव को दर्शाते हैं।
Question 36. अग-अघ - (क) आगे-पीछे
(ख) अचल-पाप
(ग) नया-पुराना
(घ) सम्पूर्ण-पुण्य
Answer: (ख) अचल-पाप
In simple words: 'अग' का अर्थ अचल या पर्वत होता है, जबकि 'अघ' का अर्थ पाप या अपराध होता है।
🎯 Exam Tip: 'ग' और 'घ' के सूक्ष्म अंतर पर ध्यान दें, यह अर्थ को पूरी तरह बदल देता है।
Question 37. आरत-आराति - (क) आरती और आरती करने वाला
(ख) प्रेमी और प्रेम से रहित
(ग) दुःख और शत्रु
(घ) रात्रि के पहले और रात्रि के बाद
Answer: (ग) दुःख और शत्रु
In simple words: 'आरत' का अर्थ दुःखी या पीड़ित होता है, जबकि 'आराति' का अर्थ शत्रु या दुश्मन होता है।
🎯 Exam Tip: इन शब्दों में 'त' और 'ति' का अंतर उनके अर्थों में भिन्नता लाता है।
Question 38. जलद-जलधि - (क) कमल और समुद्र
(ख) बादल और समुद्र
(ग) सिन्धु और आकाश
(घ) जलना और जो जला न हो
Answer: (ख) बादल और समुद्र
In simple words: 'जलद' का अर्थ बादल होता है (जल देने वाला), जबकि 'जलधि' का अर्थ समुद्र होता है (जल को धारण करने वाला)।
🎯 Exam Tip: 'द' (देना) और 'धि' (धारण करना) प्रत्यय इन शब्दों के अर्थ को समझने में मदद करते हैं।
Question 39. श्वपच-स्वपच- (क) दुष्ट और सज्जन
(ख) चाण्डाल और स्वयंपाकी
(ग) स्वयंपाकी और चाण्डाल
(घ) दुर्जन और साधु
Answer: (ख) चाण्डाल और स्वयंपाकी
In simple words: 'श्वपच' का अर्थ चाण्डाल या नीच जाति का व्यक्ति होता है, जबकि 'स्वपच' का अर्थ स्वयं भोजन बनाने वाला या स्वयंपाकी होता है।
🎯 Exam Tip: शब्दों की संरचना में छोटे बदलाव उनके अर्थ को पूरी तरह से परिवर्तित कर देते हैं।
Question 40. आतप-आपात - (क) धूप और संकट
(ख) संकट और धूप
(ग) धूप और छाया
(घ) उजाला और अँधेरा
Answer: (क) धूप और संकट
In simple words: 'आतप' का अर्थ धूप या तेज गर्मी होता है, जबकि 'आपात' का अर्थ अचानक आया हुआ संकट या विपत्ति होता है।
🎯 Exam Tip: 'तप' और 'पात' के अंतर पर ध्यान दें, जो क्रमशः गर्मी और गिरने/संकट से संबंधित हैं।
Question 41. आभरण-आमरण - (क) भरण और पोषण
(ख) जीवन और मरण
(ग) आभूषण और मृत्यु तक
(घ) जीवन और मोक्ष
Answer: (ग) आभूषण और मृत्यु तक
In simple words: 'आभरण' का अर्थ गहना या आभूषण होता है, जबकि 'आमरण' का अर्थ मृत्यु पर्यंत या मृत्यु तक होता है।
🎯 Exam Tip: ये शब्द 'धारण करने' और 'समय की अवधि' से संबंधित हैं, इसलिए उनका अर्थ संदर्भानुसार याद रखें।
Question. (ख). निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्द-युग्मों के सूक्ष्म अन्तर को स्पष्ट कीजिए
1. अविराम-अभिराम,
2. अवलम्ब-अविलम्ब,
3. ग्रह-गृह,
4. कुल-कूल,
5. अभिज्ञ-अनभिज्ञ,
6. क्षात्र-छात्र,
7. पुरुष-परुष ।
Answer:
1. अविराम-अभिराम का अर्थ है-निरन्तर-सुन्दर,
2. अवलम्ब-अविलम्ब का अर्थ है-सहारा-शीघ्र,
3. ग्रह-गृह का अर्थ है-नक्षत्र-घर,
4. कुल-कूल का अर्थ है-वंश-किनारा,
5. अभिज्ञ-अनभिज्ञ का अर्थ है— जानकार-अनजान,
6. क्षात्र-छात्र का अर्थ है-क्षत्रिय-विद्यार्थी,
7. पुरुष-परुष का अर्थ है-मनुष्य-कठोर ।
In simple words: यह खंड विभिन्न शब्द-युग्मों के बीच सूक्ष्म अर्थगत अंतर को स्पष्ट करता है, जहाँ प्रत्येक युग्म में शब्दों का उच्चारण समान होने पर भी उनके अर्थ भिन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: इन प्रश्नों में शब्दों के सटीक अर्थों को जानना और उन्हें स्पष्ट रूप से व्यक्त करना महत्वपूर्ण है। यह आपकी शब्द-ज्ञान क्षमता का परीक्षण करता है।
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