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Detailed Chapter 5 स्थलाकृतिक मानचित्र UP Board Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 5 स्थलाकृतिक मानचित्र UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
(i) स्थलाकृतिक मानचित्र क्या होते हैं ?
Answer: स्थलाकृतिक मानचित्र को सामान्य उपयोग वाले मानचित्रों के नाम से भी जाना जाता है । इन मानचित्रों में किसी छोटे आकार के क्षेत्र को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया जाता है । इन मानचित्रों में महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक लक्षणों का प्रदर्शन किया जाता है ।
In simple words: Topographical maps are large-scale maps that show detailed natural and cultural features of a small area, making them highly informative.
🎯 Exam Tip: Focus on the definition of topographical maps and their primary purpose of showing detailed natural and cultural features on a large scale.
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भारत के स्थलाकृतिक मानचित्रों के संवर्ग (श्रेणी) को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न ग्रिड और संख्यात्मक प्रणालियों का उपयोग करके भौगोलिक क्षेत्रों को विभाजित किया गया है। यह मानचित्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा निर्धारित मापनी और अक्षांशीय-देशांतरीय विस्तार को दिखाता है, जिससे छात्र मानचित्रण की संरचना को समझ सकते हैं।
(ii) भारत की स्थलाकृतिक मानचित्र बनाने वाली संस्था का नाम बताइए तथा इसके मानचित्रों में प्रयुक्त मापनी के विषय में बताइए ।
Answer: भारत में 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' पूरे देश के लिए स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार करने वाली संस्था है । ये मानचित्र विभिन्न मापनियों पर तैयार किए जाते हैं । इसलिए दी हुई श्रृंखला के सभी मानचित्रों में एक ही प्रकार के सन्तुल बिन्दु एवं मापनी का प्रयोग किया जाता है । सामान्य रूप में स्थलाकृतिक मानचित्रों में 1 : 50,000 एवं 1 : 63,360 मापक का प्रयोग किया जाता है ।
In simple words: The Survey of India creates topographical maps for the entire country, using consistent control points and scales like 1:50,000 and 1:63,360 across its map series.
🎯 Exam Tip: Remember the name 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' (Survey of India) and the common map scales (1:50,000 and 1:63,360) used for topographical maps in India.
(iii) भारतीय सर्वेक्षण विभाग हमारे देश के मानचित्रण में किन मापनियों का उपयोग करता है ?
Answer: भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा अपने देश के मानचित्र- 1 : 10,00,000; 1 : 22,50,000; 1:1,25,000; 1 : 50,000 तथा 1 : 25,000 की मापनी पर तैयार किए जाते हैं जिसमें अक्षांशीय एवं देशान्तरीय विस्तार क्रमश: 4° X 4°, 1° X 1°, 30" X 30", 15" X 15" तथा 5" X 7"30' होते हैं । इनमें से प्रत्येक मानचित्र की संख्यात्मक प्रणाली को चित्र 5.1 में प्रदर्शित किया गया है ।
In simple words: The Survey of India uses various scales like 1:1,000,000, 1:250,000, 1:125,000, 1:50,000, and 1:25,000 for mapping India, with specific latitudinal and longitudinal extents for each map.
🎯 Exam Tip: Be aware of the different scales (e.g., 1:1,000,000 to 1:25,000) and corresponding latitudinal/longitudinal extents used by the Survey of India for map creation.
(iv) समोच्च रेखाएँ क्या हैं ?
Answer: समोच्च रेखा माध्य समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले बिन्दुओं को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा होती है । उच्चावच लक्षणों को दर्शाने के लिए समोच्च रेखा एक अत्यन्त लोकप्रिय विधि है ।
In simple words: Contour lines are imaginary lines connecting points of equal elevation above mean sea level, commonly used to represent relief features on maps.
🎯 Exam Tip: Define contour lines as imaginary lines connecting points of equal height above mean sea level, emphasizing their role in depicting relief features.
(v) समोच्च रेखाओं के अन्तराल क्या दर्शाते हैं ?
Answer: समोच्च रेखाओं का अन्तराल इन रेखाओं की दूरी (ऊँचाई) को दर्शाता है । दो समोच्च रेखाओं के बीच ऊँचाईपर अन्तर समान रहता है । समोच्च रेखाएँ भिन्न-भिन्न अन्तर पर खींची जाती हैं, जैसे 20, 50, 100 मीटर आदि ।
In simple words: Contour interval refers to the vertical distance or difference in elevation between two consecutive contour lines, which remains constant on a given map and indicates height variation.
🎯 Exam Tip: Explain that contour interval represents the vertical difference in height between two adjacent contour lines, and it is a fixed value for a specific map.
Question 2. संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(vi) रूढ़ चिह्न क्या हैं ?
Answer: स्थलाकृतिक मानचित्रों में विभिन्न भौतिक और सांस्कृतिक लक्षणों को भिन्न-भिन्न संकेतों की सहायता से प्रकट किया जाता है, जिन्हें रूढ़ या परम्परागत चिह्न कहते हैं । चित्र 5.4 व 5.5 में विभिन्न प्रकार के रूढ़ चिह्नों को प्रदर्शित किया गया है ।
In simple words: Conventional signs are standardized symbols used on topographical maps to represent various natural and cultural features, allowing for universal understanding of map information.
🎯 Exam Tip: Understand that conventional signs are standardized symbols for representing diverse features on maps, ensuring clarity and ease of interpretation.
(क) समोच्च रेखाएँ
Answer: समोच्च रेखाएँ उन कल्पित रेखाओं को कहते हैं जो समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाते हुए खींची जाती हैं । प्रत्येक समोच्च रेखा के एक छोर पर उसकी ऊँचाई मीटर या फुट में अंकित कर दी जाती है, परन्तु प्रत्येक समोच्च रेखा के मध्य का अन्तर समान रहती है । (देखिए चित्र 5.2)
1. समोच्च रेखाओं की विशेषताएँ- समोच्च रेखाओं में निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं
2. समोच्च रेखाएँ मानचित्रों में समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाते हुए खींची जाती हैं ।
3. दो समोच्च रेखाओं के मध्य का अन्तर सदैव समान रहता है ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र समोच्च रेखा विधि को दर्शाता है, जहाँ गोलाकार रेखाएँ विभिन्न ऊँचाई स्तरों को प्रदर्शित करती हैं। सबसे बाहरी रेखा कम ऊँचाई (10 मीटर) और भीतरी रेखाएँ बढ़ती हुई ऊँचाई (50 मीटर) को दिखाती हैं, जिससे एक शंक्वाकार पहाड़ी का आभास होता है और ढलान को समझा जा सकता है।
दो समोच्च रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती हैं । 4. प्रत्येक समोच्च रेखा उस स्थान की वास्तविक ऊँचाई को प्रकट करती है । 5. समोच्च रेखाएँ पूर्ण होती हैं । इन्हें खण्ड रेखाओं के रूप में प्रदर्शित नहीं किया जाता है । 6. सामान्यतया जब एक समोच्च रेखा किसी भी दिशा की ओर मुड़ जाती है तो प्राय: दूसरी समोच्च रेखा भी उसका ही अनुसरण करती हुई दिखाई पड़ती है । 7. समोच्च रेखाओं से पार्श्व चित्र खींचकर वास्तविक भू-आकृतियों को पुनः निर्मित किया जा सकता है । 8. समोच्च रेखाओं की तीव्रता द्वारा किसी भी स्थान के ढाल को सुगमता से ज्ञान प्राप्त हो जाता है । 9. सभी समोच्च रेखाओं का मान इन रेखाओं के मध्य में अंकों द्वारा माप की विभिन्न इकाइयों में अंकित कर दिया जाता है । 10. पास-पास खींची हुई समोच्च रेखाएँ तीव्र ढाल को प्रकट करती हैं, जबकि दूर-दूर खींची हुई समोच्च रेखाएँ मन्द ढाल को प्रकट करती हैं ।
In simple words: Contour lines are imaginary lines connecting points of equal elevation, characterized by never intersecting, representing actual height, closing to form shapes, and indicating steepness by their spacing (closely spaced for steep slopes, widely spaced for gentle slopes).
🎯 Exam Tip: When describing contour lines, highlight their key characteristics: they connect points of equal elevation, never cross, and their spacing indicates the gradient of the slope (close for steep, far for gentle).
(ख) स्थलाकृतिक शीट में उपात्त सूचनाएँ
Answer: स्थलाकृतिक शीट में निम्नलिखित सूचनाएँ प्रदर्शित की जाती हैं
1. प्राथमिक सूचनाएँ – इनके अन्तर्गत-
• राज्य का नाम, जिले का नाम तथा अक्षांशीय एवं देशान्तरीय विस्तार दिया जाता है;
• सर्वेक्षण वर्ष एवं प्रकाशन की तिथि;
• पत्रक (शीट) की संख्या;
• पत्रक का मापक;
• ग्रिड तथा चुम्बकीय दिक्पात;
• पत्रक की स्थिति, विस्तार एवं बसाव स्थल;
• प्रशासनिक विभाग;
• अभिसांयमिक या परम्परागत चिह्न ।
2. उच्चावच एवं जल-प्रवाह ।
3. प्राकृतिक वनस्पति ।
4. सिंचाई के साधन ।
5. यातायात के साधन ।
6. जनसंख्या का वितरण ।
7. मानव अधिवास ।
8. उद्योग-धन्धे ।
9. सभ्यता एवं संस्कृति ।
10. ऐतिहासिक स्वरूप ।
In simple words: Topographical sheets contain comprehensive data including primary information like state/district names, survey year, map scale, and grid details, alongside details on relief, drainage, vegetation, irrigation, transport, population distribution, settlements, industries, culture, and historical features.
🎯 Exam Tip: List both primary information (metadata like scale, survey date, grid) and thematic details (relief, drainage, vegetation, settlements, transport, etc.) found on a topographical sheet.
(ग) भारतीय सर्वेक्षण विभाग
Answer: भारत में भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 1767 ई० में की गई थी । इसका मुख्यालय देहरादून में है । यह विभाग भारत के स्थलाकृतिक मानचित्र विभिन्न मापकों पर तैयार करके प्रकाशित करता है । यह विभाग स्थलाकृतिक मानचित्रों को दो श्रृंखलाओं में तैयार करता था- (i) भारत एवं पड़ोसी देश तथा
(ii) विश्व के अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्रों की संख्या । 1937 ई० में दिल्ली सर्वेक्षण सम्मेलन के बाद अब भारतीय सर्वेक्षण विभाग केवल विश्व के अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्रों वाली श्रृंखला के विनिर्देशों के आधार पर भारत के स्थलाकृतिक मानचित्रों का निर्माण एवं प्रकाशन करता है ।
In simple words: Established in 1767 with headquarters in Dehradun, the Survey of India is responsible for preparing and publishing topographical maps of India, initially in two series, and now primarily based on international specifications.
🎯 Exam Tip: Mention the establishment year (1767), headquarters (Dehradun), and primary function (preparing and publishing topographical maps) of the Survey of India.
Question 3. स्थलाकृतिक मानचित्र को अर्थ क्या है तथा इसकी विधि क्या है? इसकी विवेचना कीजिए ।
Answer: स्थलाकृतिक मानचित्र का अर्थ इन मानचित्रों को पढ़ना, समझना या व्याख्या (Interpretation) करना है । टोपोशीट या स्थलाकृतिक मानचित्र को पढ़ना अत्यन्त रोचक होता है, इसलिए इनको भौगोलिक ज्ञान की कुंजी कहा जाता है । स्थलाकृतिक मानचित्र के अध्ययन की विधि अत्यन्त सरल होती है । स्थलाकृतिक मानचित्र को दिए गए । निर्देशों या सूचनाओं के आधार पर समझा जा सकता है अर्थात् मानचित्र में दिए गए प्रकार की भौतिक व सांस्कृतिक विशेषताओं के लिए रूढ़ चिह्न होते हैं जिनके आधार पर कोई भी व्यक्ति इन मानचित्रों का अध्ययन सरलतापूर्वक कर सकता है । इस विधि को निम्नलिखित शीर्षकों से स्पष्ट रूप में समझा जा सकता है
1. प्राथमिक सूचना – इसके अन्तर्गत मानचित्र में राज्य, जिला, संख्या, वर्ष, मापक, दिक्पात । स्थिति एवं परम्परागत चिह्न आदि दिए होते हैं, जिसके आधार पर स्थलाकृतिक मानचित्र की समस्त प्रारम्भिक सूचनाओं को सरलता से समझा लिया जाता है ।
2. उच्चावच एवं जल-प्रवाह – भू-पत्रकों में समोच्च रेखाओं द्वारा धरातल की संरचना तथा ढाल प्रकट किया जाता है । ढाल द्वारा जल-प्रवाह तथा नदी-घाटियों के आकार का ज्ञान प्राप्त हो जाता है ।
3. प्राकृतिक वनस्पति – भू-पत्रकों पर विभिन्न रंगों द्वारा वनस्पति के विभिन्न प्रकार एवं उनका विवरण प्रकट किया जाता है । पीले रंग से कृषि क्षेत्र तथा हरे रंग से प्राकृतिक वनस्पति; यथा-घास, झाड़ियाँ तथा वृक्ष आदि प्रदर्शित किए जाते हैं ।
4. सिंचाई के साधन – भू-पत्रकों में झील, तालाब, कुएँ, नदियों तथा नहरों का चित्रण प्राय: नीले रंग से किया जाता है जिससे सिंचाई साधनों का ज्ञान हो जाता है । यदि पत्रक में सिंचाई के साधन नहीं दिए गए हैं तो इसका यह अर्थ हुआ कि कृषि वर्षा पर ही निर्भर करती है ।
5. यातायात के साधन – इन पत्रकों में रेलमार्गों, सड़क-मार्गों, पगडण्डियों तथा वायुमार्गों को परम्परागत चिह्नों द्वारा प्रकट किया जाता है जिनके द्वारा क्षेत्र-विशेष में यातायात मार्गों एवं उन संचालित परिवहन साधनों का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।
6. जनसंख्या का वितरण – भू-पत्रकों में नगरीय तथा ग्रामीण अधिवासों की व्यापकता को देखकर जनसंख्या के वितरण को समझा जा सकता है ।
7. मानव अधिवास – भू-पत्रकों में बस्तियों की स्थिति से मानव-अधिवास के ढंग का सामान्य ज्ञान प्राप्त हो जाता है । सघन एवं विरल जनसंख्या द्वारा ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों का अध्ययन किया जा सकता है ।
8. उद्योग-धन्धे – भू-पत्रकों के अध्ययन द्वारा मानवीय क्रियाकलापों; जैसे-कृषि, पशुचारण तथा कला-कौशल का ज्ञान भी प्राप्त होता है । इनके अध्ययन से स्पष्ट होता है कि किस क्षेत्र के लोग कृषि करते हैं, वनों का शोषण करते हैं, खनन कार्य करते हैं, मछली पकड़ते हैं या भारी उद्योग-धन्धे चलाते हैं । इसी प्रकार खनिज पदार्थों के अध्ययन द्वारा उद्योगों के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।
9. सभ्यता एवं संस्कृति – इन भू-पत्रकों में विद्यालय, मन्दिर, गिरजाघर, गुरुद्वारा, चिकित्सालय, रेलवे स्टेशन, निरीक्षण भवन, धर्मशालाएँ आदि परम्परागत चिह्नों की सहायता से दर्शाए जाते हैं । इन्हें देखकर इस क्षेत्र की सभ्यता एवं संस्कृति का सहज ही ज्ञान प्राप्त हो जाता है ।
10. ऐतिहासिक स्वरूप – इन भू-पत्रकों में युद्ध-स्थल, किला, राजधानियाँ, ऐतिहासिक स्थलों तथा । अन्य महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों का बोध होता है ।
In simple words: Topographical map interpretation involves understanding various physical and cultural features using conventional signs and systematic analysis of elements like primary information, relief, drainage, vegetation, irrigation, transport, population, settlements, industries, and cultural-historical aspects.
🎯 Exam Tip: To effectively explain topographical map interpretation, describe the systematic process of analyzing primary data, relief, drainage, vegetation, irrigation, transport, population, settlements, and cultural-historical elements using conventional signs.
Question 4. यदि आप स्थलाकृतिक शीट के सांस्कृतिक लक्षणों की व्याख्या कर रहे हैं तो आप किस प्रकार की सूचनाएँ लेना पसन्द करेंगे तथा इन सूचनाओं को कैसे प्राप्त करेंगे? उपयुक्त उदाहरण की सहायता से विवेचना करें ।
Answer: किसी क्षेत्र के सांस्कृतिक लक्षण कई हैं-अधिवास, रेल तथा सड़क मार्ग, भवन (मन्दिर, मस्जिद आदि) एवं संचार साधन होते हैं । ये सभी लक्षण उस क्षेत्र के विकास और समस्याओं को इंगित करते हैं । इन सूचनाओं की जानकारी टोपोशीट से प्राप्त हो जाती है, फिर भी नवीनतम सूचनाओं के लिए क्षेत्र का भ्रमण उपयोगी होता है । सांस्कृतिक लक्षणों की व्याख्या हम देहरादून-टिहरी-गढ़वाल (टोपोशीट) के उदाहरण द्वारा भली प्रकार कर सकते हैं ।
देहरादून-टिहरी-गढ़वाल के सांस्कृतिक लक्षण
(स्थलाकृतिक मानचित्र के आधार पर)1. यातायात के साधन – इस पत्रक का अधिकांश भाग पर्वतीय है, जहाँ रेलपटरियाँ तथा सड़कों का निर्माण बहुत ही कठिन है; अत: इस पत्र में परिवहन मार्गों का विकास बहुत ही कम हुआ है । इस क्षेत्र का धरातल विषम एवं उबड़-खाबड़ होने के कारण यहाँ का परिवहन का विकास बहुत ही कम हुआ है और न ही अधिक सड़क मार्ग का । पत्रक के दक्षिणी भाग में परिवहन पथ अधिक दिखाई पड़ रहे हैं । दून घाटी में सड़कें अपेक्षाकृत अधिक दिखाई पड़ती हैं । यहाँ एक रेलमार्ग भी अंकित है जो देहरादून से ऋषिकेश-हरिद्वार की ओर जाता है । पर्वतीय क्षेत्र में बिखरे हुए गाँवों को जोड़ने के लिए पगडण्डी (पैदल पथ) मार्ग विकसित हुए हैं (चित्र 5.3) ।
2. प्रमुख परिवहन मार्ग –
• उत्तरी रेलवे-यह रेलमार्ग दिल्ली को देहरादून से जोड़ता है । ऋषिकेश, हरिद्वार, लक्षर, सहारनपुर, देवबन्द, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मोदीनगर, गाजियाबाद इस मार्ग के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं ।
• देहरादून-हरिद्वार सड़क मार्ग ।
• देहरादून-मसूरी सड़क मार्ग ।
• देहरादून-सहारनपुर सड़क मार्ग ।
• देहरादून-विक्रासनगर सड़क मार्ग ।
• कच्ची सड़कें तथा पगडण्डियाँ ।
3. मानव आवास तथा जन-विन्यास – भू-पत्रक को देखने से ज्ञात होता है कि इस क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व अत्यन्त कम है । पर्वतीय क्षेत्र में अधिवासों का वितरण भी बहुत विरल है । केवल दून घाटी में सघन जनसंख्या निवास करती है, जबकि शेष भाग में दूर-दूर बिखरे हुए गाँव स्थित हैं । देहरादून, दून घाटी का प्रमुख नगर है । इसके अतिरिक्त, यहाँ
रायगढ़, भाजोरा, भानमोहरा तथा कालागाँव आदि कस्बे भी विकसित हुए हैं । मसूरी इस पत्रक का दूसरा महत्त्वपूर्ण नगर है । इसे ‘पर्वतीय नगरों की रानी’ कहा जाता है । ग्रीष्म ऋतु में यह नगर प्राकृतिक सुषमा एवं स्वास्थ्यवर्द्धक तथा उत्तम जलवायु के कारण पर्यटकों का आकर्षण केन्द्र बन जाता है । मसूरी सड़क मार्ग द्वारा देहरादून नगर से जुड़ा हुआ है । इस सड़क मार्ग के साथ-साथ छोटे-छोटे गाँव स्थित हैं । पर्वतीय पर कृषि किये हुए प्रतिरूप में पाए जाते हैं । देहरादून भारत का प्रमुख नगर उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी तथा शिक्षा का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है । सर्वे ऑफ इण्डिया, वन अनुसन्धानशाला, सुदूर संवेदन संस्थान तथा तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग के कार्यालय भी इसी नगर में स्थित हैं ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र देहरादून-टिहरी-गढ़वाल क्षेत्र के स्थलाकृतिक भू-पत्रक (टोपोशीट) को दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएं, जल निकासी पैटर्न, वनस्पति, सड़कें, रेलमार्ग और बस्तियों जैसे विभिन्न भौगोलिक और मानव निर्मित लक्षण विस्तृत रूप से दिखाए गए हैं। छात्र इस मानचित्र का उपयोग करके इस पर्वतीय क्षेत्र की स्थलाकृति और सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन कर सकते हैं।
4. मानव व्यवसाय – असमतल धरातल के कारण यहाँ कृषि योग्य भूमि का अभाव पाया जाता है । समतल क्षेत्र होने के कारण दून घाटी में कृषि का विकास अधिक हुआ है । यह क्षेत्र बासमती चावल के लिए प्रसिद्ध है । यहाँ पर्वतीय ढालों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर चावल तथा चाय की कृषि की जाती है । देहरादून के निकटवर्ती क्षेत्रों में चाय के अनेक बाग विकसित हुए हैं । इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में आम, लीची तथा आडू आदि फल भी उगाए जाते हैं । दालू पहाड़ी क्षेत्रों में अदरक, आलू तथा हरी मिर्च आदि सब्जियाँ उत्पन्न की जाती हैं ।
वनों पर आश्रित उद्योग भी इस क्षेत्र में पर्याप्त विकसित हो गए हैं । वनों से लकड़ी काटना यहाँ का दूसरा महत्त्वपूर्ण उद्यम है । इसी कारण देहरादून लकड़ी चीरने, फर्नीचर तथा खेल का सामान बनाने के महत्त्वपूर्ण केन्द्र के रूप में विकसित हुआ है । यह नगर लकड़ी व्यवसाय का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है । वन-अनुसन्धानशाला इस उद्योग में विशेष सहायता पहुँचाती है ।
इस क्षेत्र में प्राकृतिक साधनों की प्रचुरता है; अत: इस क्षेत्र में भावी विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ विद्यमान हैं । धरातलीय विषमता इस क्षेत्र की प्रगति में बाधक है । राज्य सरकार ने यातायात के साधनों का समुचित विकास कर इस क्षेत्र की प्रगति के द्वार खोल दिए हैं ।
In simple words: To interpret cultural features on a topographical sheet like Dehradun-Tehri-Garhwal, information on settlements, transportation (rail, road, footpaths), and economic activities (agriculture, forestry) is gathered from the map's conventional signs and symbols, supplemented by fieldwork for updated data.
🎯 Exam Tip: When analyzing cultural features, prioritize identifying settlements, transport networks, and economic activities using conventional symbols, illustrating with specific examples from the given topographical sheet.
Question 5. निम्नलिखित लक्षणों के लिए रूढ़ चिह्नों एवं संकेतों की बनाइए ।
(अ) अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखाएँ
(ख) तल चिह्न
(ग) गाँव
(घ) पक्की सड़क
(ङ) पुल सहित पगडण्डी
(च) पूजा करने के स्थान
(छ) रेल लाइन
Answer: निम्नांकित चित्र 5.4 का अवलोकन करें
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र स्थलाकृतिक मानचित्रों में प्रयुक्त विभिन्न पारंपरिक प्रतीकों और संकेतों की एक कुंजी प्रस्तुत करता है। इसमें घर, चर्च, मंदिर, मस्जिद, किले, टीले, खदान, पुल, कुएं, सड़कें, रेलवे लाइनें, नदियाँ, नहरें, तालाब, वनस्पति, और विभिन्न प्रकार की सीमा रेखाएं (अंतर्राष्ट्रीय, राज्य, जिला) जैसे कई भौगोलिक और मानव निर्मित विशेषताओं को दर्शाया गया है। यह कुंजी छात्रों को मानचित्र पढ़ने और समझने में सहायता करती है।
In simple words: Conventional signs are standardized symbols used on topographical maps to represent various features like international boundaries, spot heights, villages, metalled roads, footpaths with bridges, places of worship, and railway lines, as illustrated in the provided diagram.
🎯 Exam Tip: For this question, you need to either draw or describe the specific conventional symbols for each listed feature (international boundary, spot height, village, metalled road, footpath with bridge, place of worship, railway line).
अभ्यास (क)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र समोच्च रेखा प्रतिरूप (कन्टूर पैटर्न) को दर्शाता है, जिसमें एक सपाट शीर्ष वाला उठा हुआ भू-भाग दिखाया गया है। बाहरी समोच्च रेखाएं व्यापक रूप से फैली हुई हैं, जो एक धीमी ढलान का सुझाव देती हैं, जबकि आंतरिक रेखाएं एक अपेक्षाकृत सपाट ऊपरी सतह को इंगित करती हैं, जो एक पठार की स्थलाकृति के अनुरूप है।
Question 1. समोच्च रेखाओं से निर्मित स्थलाकृति का नाम लिखें ।
Answer: पठार ।
In simple words: The landform represented by the contour lines shown is a plateau, characterized by a relatively flat top and often steep sides.
🎯 Exam Tip: Identify plateaus by their characteristic contour pattern: widely spaced contours at the base, becoming closer on the slopes, and widely spaced or absent contours on the flat top.
Question 2. मानचित्र में समोच्च अन्तराल का पता लगाएँ ।
Answer: 100 मीटर ।
In simple words: The contour interval, which is the vertical distance between consecutive contour lines, is 100 meters in this map.
🎯 Exam Tip: To find the contour interval, choose two adjacent contour lines with marked elevations and calculate their difference. This value is constant for the entire map.
Question 3. मानचित्र पर E एवं F के बीच की दूरी की धरातल पर की दूरी में बदलें ।
Answer: यदि मानचित्र पर E एवं F की दूरी मापने पर 2 सेमी है तथा मापक 1 सेमी = 2 किमी को दर्शाता है । तो धरातल
की दूरी 4 किमी होगी ।
In simple words: If the map distance between E and F is 2 cm and the scale is 1 cm = 2 km, then the actual ground distance between E and F would be 4 km.
🎯 Exam Tip: To convert map distance to ground distance, measure the distance on the map and multiply it by the scale factor (e.g., if 1 cm = 2 km, then 2 cm = 4 km).
Question 4. A तथा B, C तथा D एवं E तथा F के बीच के ढालों के प्रकार का नाम लिखें ।
Answer: A तथा B–मन्द ढाल; C तथा D–सर्पील ढाल; E तथा F–तीव्र ढाल ।
In simple words: Between A and B, the slope is gentle; between C and D, it's undulating; and between E and F, the slope is steep.
🎯 Exam Tip: Identify slopes by contour spacing: widely spaced contours indicate a gentle slope, uneven spacing suggests an undulating slope, and closely spaced contours denote a steep slope.
Question 5. G से E, D तथा F की दिशाओं को बताएँ ।
Answer: G से E–पश्चिमी; D तथा F–उत्तर एवं दक्षिण ।
In simple words: From G, E is to the west. From D, F is to the north and south.
🎯 Exam Tip: Use the compass rose or standard cardinal directions (North, South, East, West) to accurately determine the direction of one point relative to another on the map.
अभ्यास (ख)
Question 1.1: 50,000 को साधारण कथन में बदलें ।
Answer: 1 सेमी = 50,000/1,00,000 = 1/2 किमी अर्थात् 1 सेमी = 1/2 किमी ।
In simple words: A representative fraction (RF) scale of 1:50,000 means that 1 cm on the map represents 50,000 cm on the ground, which simplifies to 1 cm representing 0.5 kilometers.
🎯 Exam Tip: To convert an RF scale to a verbal statement, convert the ground unit (e.g., cm) to a more practical unit like meters or kilometers. Remember 100,000 cm = 1 km.
Question 2. क्षेत्र की मुख्य बस्तियों के नाम लिखें ।
Answer: कछवा (Kachhwa), महजावन (Majhwan), बारानी (Baraini) आदि ।
In simple words: The main settlements in the area include Kachhwa, Majhwan, and Baraini.
🎯 Exam Tip: Look for settlement symbols and their associated names on the topographical sheet to identify the main villages or towns.
Question 3. गंगा नदी के बहाव की दिशा क्या है?
Answer: दक्षिण-पूर्व ।
In simple words: The Ganga river flows in a south-easterly direction.
🎯 Exam Tip: Determine river flow direction by observing the V-shape of contours where they cross a river; the apex of the 'V' points upstream, so the river flows in the opposite direction.
Question 4. गंगा नदी के कौन-से किनारे पर भली बस्ती स्थित है?
Answer: पूर्वी किनारे के निकट ।
In simple words: The settlement of Bhali is located near the eastern bank of the Ganga river.
🎯 Exam Tip: Locate the settlement and the river on the map, then use cardinal directions to specify which bank the settlement is on relative to the river's flow.
Question 5. गंगा नदी के किनारे ग्रामीण बस्तियाँ किस प्रकार अवस्थित हैं?
Answer: प्रकीर्ण अथवा बिखरे हुए रूप में ।
In simple words: Rural settlements along the Ganga river are dispersed or scattered.
🎯 Exam Tip: Observe the distribution pattern of settlement symbols; if they are spread out with significant distances between individual units, it indicates a dispersed pattern.
Question 6. उन गाँवों/बस्तियों के नाम लिखें, जहाँ डाकघर एवं तारघर स्थित हैं ।
Answer: कछवा (डाकघर), गहरुआ (तारघर) ।
In simple words: Kachhwa has a post office, and Gahrua has a telegraph office.
🎯 Exam Tip: Look for the conventional symbols for post office (PO) and telegraph office (TO) on the map and identify the settlement names associated with them.
Question 7. क्षेत्र में पीला रंग क्या दर्शाता है?
Answer: कृषि क्षेत्र ।
In simple words: Yellow color on the map represents agricultural land.
🎯 Exam Tip: Remember that different colors on topographical maps represent specific features; yellow typically indicates cultivated areas or agricultural land.
Question 8. भली गाँव के लोगों के द्वारा नदी को पार करने के लिए परिवहन के किस साधन का उपयोग किया जाता है?
Answer: नाव का ।
In simple words: The people of Bhali village use boats to cross the river.
🎯 Exam Tip: Look for symbols indicating river crossings or common transportation methods across water bodies, such as ferry points or boat symbols, if available, or infer from the absence of bridges.
अभ्यास (ग)
Question 1. मानचित्र के सबसे उच्च बिन्दु की ऊँचाई ज्ञात करें ।
Answer: 174 मीटर (राजघाट) ।
In simple words: The highest point on the map is 174 meters, located at Rajghat.
🎯 Exam Tip: The highest point is usually indicated by a spot height with its elevation marked, or by the innermost contour line with the highest value.
Question 2. जमतडिहवा नदी मानचित्र के किस भाग से होकर बह रही है?
Answer: दक्षिण-पूर्व ।
In simple words: The Jamtadihwa river flows through the south-eastern part of the map.
🎯 Exam Tip: Trace the path of the river and use the compass directions to determine which part of the map it traverses, usually from a higher elevation to a lower one.
Question 3. कुरदयी नाले के पूरब में कौन-सी मुख्य बस्ती अवस्थित है?
Answer: कोटवा (Kotwa) ।
In simple words: Kotwa is the main settlement located to the east of the Kurdayi Nala.
🎯 Exam Tip: Locate Kurdayi Nala and then use cardinal directions to find the prominent settlement situated to its east.
Question 4. इस क्षेत्र में किस प्रकार की बस्ती है?
Answer: प्रकीर्ण प्रकार की ।
In simple words: The settlement pattern in this area is dispersed.
🎯 Exam Tip: Observe how houses or settlement symbols are spread across the map; if they are far apart, it's a dispersed pattern.
Question 5. शिशु नदी के बीच सफेद धब्बे किस प्रकार की भौगोलिक स्थलाकृति को दर्शाते हैं?
Answer: नदीनोड के साथ बालू का जमाव ।
In simple words: The white patches in the Shishu river represent sand deposits along with river bends or meanders.
🎯 Exam Tip: White patches within a river channel typically indicate sandbanks or shoals, which are common fluvial features, especially in meandering rivers.
Question 6. कुरदयी के बहाव की दिशा क्या है?
Answer: दक्षिण-पूर्व ।
In simple words: The Kurdayi Nala flows in a south-easterly direction.
🎯 Exam Tip: Similar to rivers, determine the flow direction of nalas (streams) by observing the V-shape of contours pointing upstream, implying downstream flow in the opposite direction.
Question 7. निचला खजुरी डैम स्थलाकृतिक शीट के किस भाग में अवस्थित है?
Answer: उत्तरी-पश्चिमी ।
In simple words: The Lower Khajuri Dam is located in the north-western part of the topographical sheet.
🎯 Exam Tip: Divide the map into quadrants (NW, NE, SW, SE) and locate the dam to specify its position accurately.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित भू-आकृतियों को समोच्च रेखाओं सहित प्रदर्शित कीजिए
1. मन्द ढाल
Answer: मन्द ढाल-जब किसी भू-आकृति का ढाल या कोण बहुत कम होता है तो वह मन्द ढाल कहलाता है । इस प्रकार की स्थलाकृति को समोच्च रेखाओं के बीच की बहुत अधिक दूरी से पहचाना जाता है (चित्र 5.6) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मन्द ढाल (Gentle Slope) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ दूर-दूर खींची गई हैं, जो कम ढलान और समतल भूमि का संकेत देती हैं, जिससे ऊँचाई में धीरे-धीरे परिवर्तन समझ में आता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र खड़ी ढाल (Steep Slope) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से प्रदर्शित करता है। इसमें समोच्च रेखाएँ एक-दूसरे के बहुत पास-पास खींची गई हैं, जो ऊँचाई में तीव्र परिवर्तन और खड़ी ढलान का संकेत देती हैं।
In simple words: A gentle slope is a landform where the angle of inclination is very low, identified on maps by widely spaced contour lines, indicating a gradual change in elevation.
🎯 Exam Tip: For gentle slopes, remember that contour lines are widely spaced, indicating a gradual change in elevation. Drawing widely spaced, parallel contours is key for representation.
2. खड़ी ढाल
Answer: खड़ी ढाल – इस स्थलाकृति में ढाल का कोण अधिक होता है । इसकी समोच्च रेखाएँ सामान्यत: किनारों पर पास-पास तथा भीतर की ओर दूर-दूर होती हैं (चित्र 5.7) ।
In simple words: A steep slope is a landform with a high angle of inclination, represented by closely spaced contour lines on a map, indicating a rapid change in elevation.
🎯 Exam Tip: For steep slopes, contour lines are closely packed, signifying a sharp change in elevation. Ensure your drawing or description highlights this close spacing.
3. अवतल ढाल
Answer: अवतल ढाल – इसे नतोदर ढाल भी कहते हैं । इस प्रकार के उच्चावच में निचला भाग मन्द ढाल । वाला एवं ऊपरी भाग खड़ी ढाल वाला होता है । इसकी समोच्च रेखा निचले भाग में दूर-दूर तथा ऊपर की ओर पास-पास होती है (चित्र 5.8) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र अवतल ढाल (Concave Slope) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें निचली समोच्च रेखाएँ दूर-दूर और ऊपरी समोच्च रेखाएँ पास-पास होती हैं, जो यह संकेत देता है कि निचला भाग मन्द ढाल वाला और ऊपरी भाग खड़ी ढाल वाला है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र उत्तल ढाल (Convex Slope) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से प्रदर्शित करता है। इसमें निचली समोच्च रेखाएँ पास-पास और ऊपरी समोच्च रेखाएँ दूर-दूर होती हैं, जो यह दर्शाता है कि निचला भाग खड़ी ढाल वाला और ऊपरी भाग मन्द ढाल वाला है।
In simple words: A concave slope, also known as a uniform slope, features a gentle lower section and a steep upper section, with contour lines spaced widely at the bottom and progressively closer towards the top.
🎯 Exam Tip: A concave slope is characterized by contours that are widely spaced at the bottom and increasingly closer towards the top, indicating a gentle-to-steep gradient. This is also called a uniform slope.
4. उत्तल ढाल
Answer: उत्तल ढाल – इसे उन्नतोदर ढाल भी कहा जाता है । इसमें अवतल ढाल के विपरीत ऊपरी भाग मन्द एवं निचला भाग खड़ी ढाल वाला होता है । इसकी समोच्च रेखा ऊपरी भाग में दूर-दूर तथा । निचले भाग में पास-पास होती है (चित्र 5.9) ।
In simple words: A convex slope, also known as an uneven slope, has a steep lower section and a gentle upper section, shown by closely spaced contour lines at the bottom and widely spaced lines towards the top.
🎯 Exam Tip: A convex slope is depicted by closely spaced contours at the base, gradually widening towards the top, signifying a steep-to-gentle gradient. This is also known as an uneven slope.
5. शंक्वाकार पहाड़ी
Answer: शंक्वाकार पहाड़ी – शंक्वाकार पहाड़ी का प्रदर्शन मानचित्र पर बन्द गोलाकार समोच्च रेखाओं के द्वारा किया जाता है, जिसका मान अन्दर की ओर अधिक होता है (चित्र 5.10) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक शंक्वाकार पहाड़ी (Conical Hill) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें लगभग गोलाकार समोच्च रेखाएँ एक-दूसरे के पास-पास हैं, और केंद्रीय, उच्चतम ऊँचाई की रेखाएं अंदर की ओर हैं, जो एक नुकीली चोटी वाली पहाड़ी का संकेत देती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक पठार (Plateau) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से प्रदर्शित करता है। इसमें बाहरी समोच्च रेखाएं पास-पास हैं जो खड़ी ढलानों को दर्शाती हैं, जबकि भीतरी समोच्च रेखाएं दूर-दूर और लगभग समानांतर हैं, जो एक सपाट शीर्ष सतह का संकेत देती हैं।
In simple words: A conical hill is a landform represented on a map by closed, circular contour lines that become progressively higher towards the center, indicating a peak.
🎯 Exam Tip: For a conical hill, draw concentric, closed circular contours that progressively increase in elevation towards the center, with closer spacing for steeper slopes.
6. पठार
Answer: पठार – यह धरातल का चपटा उठा हुआ भू-भाग है । इसको दर्शाने वाली समोच्च रेखाएँ सामान्यत: किनारों पर पास-पास तथा भीतर की ओर दूर-दूर होती हैं (चित्र 5.11) ।
In simple words: A plateau is an elevated flat-topped landform, shown by closely spaced contours on its sides (indicating steep slopes) and widely spaced or absent contours on its flat summit.
🎯 Exam Tip: A plateau is shown by closely spaced contours at the edges (indicating steep sides) and widely spaced or almost parallel contours on the flat top. Emphasize the flat summit and steep edges.
7. V-आकार की घाटी
Answer: V-आकार की घाटी – इस घाटी का तल गहरा होता है । इसमें समोच्च रेखाएँ अंग्रेजी V की उल्टी आकृति ( Λ) में होती हैं । इन रेखाओं के बीच की दूरी प्राय: नीचे से ऊपर की ओर घटती जाती है, जबकि इनकी ऊँचाई बढ़ती जाती है (चित्र 5.12) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र V-आकार की घाटी (V-shaped Valley) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दिखाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ 'V' अक्षर के उल्टे आकार (/\) में होती हैं, जहाँ 'V' का शीर्ष ऊँचाई में वृद्धि की दिशा में इंगित करता है और नीचे की ओर रेखाएं अधिक करीब होती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र U-आकार की घाटी (U-shaped Valley) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ 'U' अक्षर के उल्टे आकार (∩) में होती हैं, जो विस्तृत और सपाट तल वाली घाटी का संकेत देती हैं, और रेखाएं किनारे की ओर समानांतर और पास-पास होती हैं।
In simple words: A V-shaped valley, typically formed by river erosion, is depicted by contour lines forming an inverted 'V' (Λ) where the apex points upstream, and the contours are closer together at the bottom of the valley.
🎯 Exam Tip: For V-shaped valleys, ensure the contours form inverted 'V' shapes, with the 'V' pointing upstream. The contours should be closer at the valley floor, indicating steepness.
8. U-आकार की घाटी
Answer: U-आकार की घाटी – इस घाट का निर्माण उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिमनदों के अपरदनद्वारा होता है । इसकी समोच्च रेखाएँ अंग्रेजी अक्षर U के उल्टे आकार की भाँति होती हैं । ये रेखाएँ तल के निकट समानान्तर तथा किनारे पर पास-पास होती हैं (चित्र 5.13) ।
In simple words: A U-shaped valley, typically formed by glacial erosion in high mountains, is shown by contour lines forming an inverted 'U' shape, which are relatively parallel and closely spaced near the valley floor.
🎯 Exam Tip: U-shaped valleys are characterized by contours that form an inverted 'U' shape, which are nearly parallel and closely spaced near the valley floor, indicating a broad, flat bottom and steep sides.
9. महाखड्ड (गॉर्ज)
Answer: महाखड्ड (गॉर्ज) – यह गहरी और संकरी घाटी है । इसका निर्माण पर्वतीय क्षेत्र में अधिक ऊँचाई । पर नदियों द्वारा ऊर्ध्वाकार अपरदन से होता है । इसकी समोच्च रेखाएँ बहुत समीप बनाई जाती हैं । जिसमें भीतरी समोच्च रेखाओं के बीच का अन्तर बहुत कम होता है जो इसके दोनों किनारों को दिखाता है (चित्र 5.14) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक महाखड्ड (Gorge) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ बहुत करीब-करीब खींची गई हैं, जो अत्यंत खड़ी ढलानों और घाटी के भीतर ऊँचाई में तेजी से गिरावट का संकेत देती हैं, जिससे इसकी गहरी और संकरी प्रकृति स्पष्ट होती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक पर्वतकन्ध (Spur) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से प्रदर्शित करता है। इसमें समोच्च रेखाएँ घाटी की ओर झुकी हुई उल्टे 'V' के आकार (Λ) में होती हैं, जहाँ 'V' का शीर्ष निचले ढलान की ओर इंगित करता है, जो घाटी में प्रवेश करते हुए एक रिज या पहाड़ी के विस्तार को दर्शाता है।
In simple words: A gorge is a deep and narrow valley, typically found in mountainous regions, formed by intense vertical erosion by rivers, and characterized by extremely closely spaced contour lines indicating very steep sides.
🎯 Exam Tip: Gorges are identified by very closely spaced, almost vertical, contour lines in a narrow area, signifying extremely steep-sided, deep valleys. The contours will show a sharp V-shape.
10. पर्वतकन्ध
Answer: पर्वतकन्ध – पर्वत-श्रृंखलाओं से घाटी की ओर झुकी हुई ढाल वाली आकृति को स्तर या पर्वतकन्ध कहते हैं । इसकी समोच्च रेखाएँ उल्टे V-आकार ( Λ) की तरह होती हैं । (Λ) के दोनों । किनारे ऊँचाई वाले भाग को दिखाते हैं (चित्र 5.15) ।
In simple words: A spur is a landform that projects out from a mountain range into a valley, characterized by contour lines forming an inverted 'V' (Λ) shape, with the apex pointing away from the higher ground.
🎯 Exam Tip: A spur is shown by 'V' shaped contours where the apex of the 'V' points towards the lower ground or valley, indicating a projecting ridge from a higher elevation.
11. भूगु
Answer: भूगु – यह तीन ढाल वाली भू-आकृति है । इसकी समोच्च रेखाएँ पास-पास बनी रहती हैं जो आपस में जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं (चित्र 5.16) ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक 'भूगु' नामक तीन ढाल वाली भू-आकृति को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ एक-दूसरे के बहुत पास-पास हैं और आपस में जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं, जो एक तीव्र और जटिल ढलान संरचना का संकेत देती हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक जलप्रपात (Waterfall) को समोच्च रेखाओं के माध्यम से दर्शाता है। इसमें समोच्च रेखाएँ नदी के मार्ग में एक बिंदु पर आपस में मिलती हुई दिखाई देती हैं, जो पानी के अचानक और तीव्र गिरावट का संकेत देती हैं। रैपिड्स को दूर-दूर की समोच्च रेखाओं द्वारा दिखाया गया है।
In simple words: A 'Bhugu' is a three-sided landform characterized by closely spaced and seemingly connected contour lines, indicating steep and intricate slopes.
🎯 Exam Tip: To represent a 'Bhugu', draw closely spaced contour lines that appear to converge or intertwine, indicating multiple steep slopes that define the three sides of this landform.
12. जलप्रपात
Answer: जलप्रपात – यह नदी के द्वारा निर्मित प्रमुख स्थलाकृति है । इसकी समोच्च रेखाएँ एक स्थान पद परस्पर मिल जाती हैं, अर्थात् नदी को एक स्थान पर काटती हुई दिखाई देती हैं । रैपिड की समोच्च रेखाएँ अपेक्षाकृत दूर-दूर होती हैं (चित्र 5.17) ।
In simple words: A waterfall is a prominent river-formed landform where contour lines converge or appear to cut across the river at a single point, indicating a sharp drop in elevation, while rapids show more widely spaced contours.
🎯 Exam Tip: A waterfall is represented by contour lines that merge or cross at a single point along a river, showing a sudden, sharp drop in elevation. Rapids show wider spacing of contours compared to a waterfall.
Question 2. भू-पत्रक मानचित्र से आप क्या समझते हैं? भारतीय भू-पत्रक मानचित्रों में संख्यांकन किस प्रकार किया जाता है?
Answer: भू-पत्रक मानचित्र
भू-पत्रक मानचित्र किसी क्षेत्र-विशेष का विस्तृत अध्ययन करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं । इन्हें स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Maps) भी कहते हैं । इनमें विभिन्न विवरण परम्परागत चिह्नों (Conventional Signs) के द्वारा प्रकट किए जाते हैं । इन क्षरा-पत्रकों में किसी क्षेत्र के भौगोलिक तथ्यों (भौतिक एवं सांस्कृतिक) का विशद विवरण प्रस्तुत किया जाता है । टोपोग्राफी (Topography) ग्रीक भाषा का शब्द है, जो टोपो (Topo) तथा 'ग्रापीन' (Graphein) शब्दों से मिलकर बना है । 'टोपो' का अर्थ है 'स्थल' तथा 'ग्राफीन' का अर्थ है 'वर्णन करना' । इस प्रकार भू-पत्रक मानचित्रों का अर्थ है-किसी स्थान का वर्णन करना ।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भारतीय भू-पत्रकों के संख्यांकन (Index Numbering) प्रणाली को दर्शाता है। इसमें भारत और आसपास के देशों को 136 ग्रिड में विभाजित किया गया है, जहां प्रत्येक ग्रिड को एक विशिष्ट संख्या (1-136) दी गई है। यह प्रणाली मानचित्रों को व्यवस्थित करने और आसानी से खोजने में मदद करती है, खासकर जब छात्र किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के लिए मानचित्र ढूंढ रहे हों।
स्थलाकृतिक अथवा भू-पत्रक मानचित्रों का निर्माण डीप मापक पर किया जाता है । विधिवत सर्वेक्षण के पश्चात इन मानचित्रों में भौतिक व सांस्कृतिक विवरणों को परम्परागत चिह्नों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है । इन मानचित्रों के अध्ययन से मानव एवं उसके पर्यावरण के सम्बन्ध स्पष्ट हो जाते हैं तथा इनकी व्याख्या सुगम हो जाती है ।
भारतीय मानचित्रों में संख्यांकन ।
भारत में धरातलीय पत्रकों का प्रकाशन भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इण्डिया) द्वारा किया जाता है । इस विभाग को प्रधान कार्यालय हाथीबड़कला, देहरादून (उत्तराखण्ड) में स्थित है । भारत के प्रत्येक भू-पत्रक पर संख्यांकन होता है । यह उनका सूचकांक (Index Number) कहलाता है । भारत एवं समीपवर्ती देशों की माता के भू-पत्रकों की कुल संख्या 136 है, जो भारत तथा उसके पड़ोसी देशों को घेरे हुए हैं । प्रत्येक भारतवर्षीय पत्रक का विस्तार 4° अक्षांश तथा 4° देशान्तर के मध्य होता है । इनका मापक 1 : 10,00,000 होता है । भारत के सम्पूर्ण धरातलीय पत्रकों की संख्या 39 से 92 तक है । भारत व समीपवर्ती देशों के पत्रकों की क्रमांक संख्या 1 से 136 तक है । इन्हें सूची संख्या (Index Number) भी कहते हैं (देखिए चित्र 5.18) ।
प्रत्येक पत्रक को 16 वर्गों में विभक्त किया गया है जिनमें अंग्रेजी के A से P तक अक्षर लिखे जाते हैं । यह प्रत्येक भाग 1° अक्षांश तथा 1° देशान्तर के विस्तार को प्रकट करता है, इसीलिए इन्हें एक अंश भू-पत्रक भी कहते हैं । पुनः प्रत्येक एक अंश पत्रक को 16 भागों में बाँटा जाता है तथा प्रत्येक भाग में 1 से 16 तक संख्याएँ लिख दी जाती हैं । इस प्रकार प्राप्त भू-पत्रक 15 मिनट अक्षांश एवं 15 मिनट देशान्तर को प्रकट करता है । इनका मापक एक इंच बराबर एक मील होता है, जिससे इन्हें इंच भू-पत्रक भी कहते हैं । वर्तमान में मीट्रिक प्रणाली के अन्तर्गत इन मानचित्रों का मापक 1 : 50,000 अर्थात् 2 सेमी = 1 किमी कर दिया गया है । चित्र 5.19 में K (के) चित्र 5.19 : धरातल पत्रक । अंश पत्रक का निर्धारण 63K/1 से 63K/16 तक नामकरण दिया । है । कभी-कभी एक डिग्री भू-पत्रकों को 16 भागों में न बाँटकर केवल 4 भागों में ही बाँटा जाता है, तब उनका नामकरण दिशा के आधार पर करते हैं; जैसे-63M/Nw, 63M/Sw, 63M/Ne तथा 63M/Se । प्राय: प्रत्येक अंश पत्रक का उस क्षेत्र के बड़े नगर के नाम से पुकारा जाता है (देखिए चित्र 5.20 एवं 5.21) ।
In simple words: Topographical maps, or topo-sheets, provide detailed descriptions of specific areas, using conventional signs for physical and cultural features. The Survey of India numbers these maps, dividing each sheet into 16 sections (A-P) with a 1°x1° extent, further subdivided into 16 parts (1-16) for 15-minute sheets.
🎯 Exam Tip: Define topo-sheets as detailed area descriptions using conventional signs. Explain the numbering system: whole sheets (e.g., 63), subdivisions into 1°x1° parts (e.g., 63K), and further into 15'x15' parts (e.g., 63K/1-16), indicating the scale for each.
भौतिक परीक्षा के लिए प्रश्नोत्तर
Question 1. धरातलीय पत्रक क्या है?
Answer: किसी स्थान-विशेष के प्राकृतिक पर्यावरण एवं सांस्कृतिक तथ्यों के विस्तृत अध्ययन हेतु अभिलेखामिक चिह्नों से निर्मित मानचित्रों को ‘धरातलीय पत्रक’ कहते हैं।
In simple words: धरातलीय पत्रक ऐसे मानचित्र होते हैं जो किसी विशेष स्थान के प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने के लिए बनाए जाते हैं, जिनमें विशेष चिह्नों का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: धरातलीय पत्रक की परिभाषा याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थलाकृतिक मानचित्रों का आधार है।
Question 2. भारत में भू-पत्रकों का प्रकाशन किसके द्वारा किया जाता है?
Answer: भारत में भू-पत्रकों का प्रकाशन सर्वे ऑफ इण्डिया, हाथीबड़कला, देहरादून (उत्तराखण्ड) द्वारा किया जाता है।
In simple words: भारत में स्थलाकृतिक मानचित्रों का प्रकाशन सर्वे ऑफ इण्डिया नामक सरकारी विभाग करता है, जिसका मुख्यालय देहरादून में है।
🎯 Exam Tip: प्रकाशनकर्ता एजेंसी का नाम अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है; 'सर्वे ऑफ इण्डिया' को याद रखें।
Question 3. सर्वे ऑफ इण्डिया क्या है? इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?
Answer: सर्वे ऑफ इण्डिया भारत सरकार का मानचित्र प्रकाशन एवं सर्वेक्षण विभाग है। इसका मुख्यालय हाथीबड़कला, देहरादून (उत्तराखण्ड) में स्थित है।
In simple words: सर्वे ऑफ इण्डिया भारत सरकार का वह विभाग है जो मानचित्रों को बनाता और प्रकाशित करता है, और इसका मुख्य कार्यालय देहरादून के हाथीबड़कला में है।
🎯 Exam Tip: सर्वे ऑफ इण्डिया का कार्य और उसके मुख्यालय का स्थान दोनों ही भूगोल से संबंधित सामान्य ज्ञान के प्रश्न हैं।
Question 4. भारतीय भू-पत्रकों की संख्या बताइए।
Answer: भारत एवं उसके समीपवर्ती देशों में धरातलीय भू-पत्रकों की संख्या 136 है, परन्तु भारत में पत्रक संख्या 39 से 92 तक के भू-पत्रक ही सम्मिलित हैं।
In simple words: भारत और पड़ोसी देशों के लिए कुल 136 भू-पत्रक हैं, लेकिन भारत के अंदर केवल 39 से 92 तक के भू-पत्रक शामिल किए गए हैं।
🎯 Exam Tip: भू-पत्रकों की कुल संख्या और भारत में शामिल संख्या के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 5. धरातलीय पत्रकों का महत्त्व बताइए।
Answer: धरातलीय पत्रकों से किसी क्षेत्र का सूक्ष्म अध्ययन किया जा सकता है। इनसे भावी विकास योजनाएँ निर्धारित की जाती हैं तथा सैन्य-संचालन एवं युद्ध के समय में भी ये प्रयुक्त किए जाते हैं।
In simple words: धरातलीय पत्रक किसी क्षेत्र का गहन अध्ययन करने, भविष्य की योजनाएँ बनाने और सेना के अभियानों में मदद करने के लिए बहुत उपयोगी होते हैं।
🎯 Exam Tip: धरातलीय पत्रकों के महत्व को बिंदुवार याद रखें, विशेषकर योजना और सैन्य उपयोगिता के संदर्भ में।
Question 6. अभिलेखामिक या परम्परागत चिह्न क्या है?
Answer: मानचित्रों में विभिन्न प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक लक्षणों को प्रस्तुत करने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें अभिलेखामिक या परम्परागत चिह्न अथवा रूढ़ चिह्न कहते हैं।
In simple words: मानचित्रों पर प्राकृतिक और मानवीय विशेषताओं को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष प्रतीकों को अभिलेखामिक या परम्परागत चिह्न कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परम्परागत चिह्नों की परिभाषा और उनके उपयोग को समझना स्थलाकृतिक मानचित्रों को पढ़ने के लिए आवश्यक है।
Question 7. उच्चावच किसे कहते हैं?
Answer: धरातल के विषम, उबड़-खाबड़ एवं असमान स्वरूप को उच्चावच कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी की सतह की ऊँची-नीची, असमान और खुरदरी विशेषताओं को उच्चावच कहते हैं।
🎯 Exam Tip: उच्चावच एक मूलभूत भौगोलिक अवधारणा है; इसकी सरल और सटीक परिभाषा याद रखें।
Question 8. उच्चावच प्रदर्शन की विधियाँ बताइए।
Answer: उच्चावच प्रदर्शन की निम्नलिखित विधियाँ हैं -
• कित्रीय विधि,
• गणितीय विधि एवं
• मिश्रित विधि।
In simple words: उच्चावच को दर्शाने के लिए तीन मुख्य तरीके हैं: चित्रात्मक, गणितीय, और इन दोनों का मिश्रण।
🎯 Exam Tip: उच्चावच प्रदर्शन की विधियों के नाम याद रखें और प्रत्येक विधि का एक संक्षिप्त विवरण भी तैयार रखें।
Question 9. समोच्च रेखाओं से आप क्या समझते हैं?
Answer: मानचित्रों पर समुद्रतल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाते हुए खींची जाने वाली कल्पित रेखाओं को ‘समोच्च रेखाएँ’ कहते हैं।
In simple words: समोच्च रेखाएँ वे काल्पनिक रेखाएँ हैं जो मानचित्र पर समान ऊँचाई वाले स्थानों को आपस में जोड़ती हैं, जिनकी ऊँचाई समुद्र तल से मापी जाती है।
🎯 Exam Tip: समोच्च रेखाओं की परिभाषा स्थलाकृतिक मानचित्रों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है; इसे अच्छी तरह से याद करें।
Question 10. हैश्यूर क्या है?
Answer: सामान्य ढाल की दिशा में खींची गई छोटी-छोटी खण्डित रेखाएँ हैश्यूर कहलाती हैं।
In simple words: हैश्यूर छोटी और टूटी हुई रेखाएँ होती हैं जो मानचित्र पर ढाल की दिशा को दिखाती हैं।
🎯 Exam Tip: हैश्यूर का उपयोग ढाल की दिशा और तीव्रता को दर्शाने के लिए किया जाता है, इसकी सरल परिभाषा महत्वपूर्ण है।
Question 11. निर्देशक (बेंच मार्क) क्या है?
Answer: किसी स्थान की समुद्रतल से वास्तविक ऊँचाई जिस चिह्न द्वारा प्रदर्शित की जाती है, उसे निर्देशक (बेंच मार्क) कहते हैं।
In simple words: निर्देशक या बेंच मार्क एक ऐसा चिह्न है जो किसी जगह की समुद्र तल से सही ऊँचाई को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: बेंच मार्क स्थलाकृतिक सर्वेक्षण में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है; इसकी परिभाषा याद रखें।
Question 12. क्षैतिज समतुल्यक किसे कहते हैं?
Answer: दो समोच्च रेखाओं के मध्य के क्षैतिज अन्तर को क्षैतिज समतुल्यक या क्षैतिज तुल्यमान (Horizontal Equivalent-H.E.) कहते हैं। इससे उस स्थान के ढाल का ज्ञान होता है।
In simple words: क्षैतिज समतुल्यक दो समोच्च रेखाओं के बीच की क्षैतिज दूरी होती है, जिससे हमें उस जगह के ढाल के बारे में पता चलता है।
🎯 Exam Tip: क्षैतिज समतुल्यक और ढाल के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 13. उच्चान्तर (Vertical Interval) किसे कहते हैं?
Answer: दो समोच्च रेखाओं के मध्य के लम्बवत् अन्तराल को उच्चान्तर या उच्च अन्तराल कहते हैं?।
In simple words: उच्चान्तर दो समोच्च रेखाओं के बीच की ऊर्ध्वाधर दूरी को कहते हैं, यानी ऊँचाई का अंतर।
🎯 Exam Tip: उच्चान्तर समोच्च रेखाओं के बीच की ऊँचाई का अंतर होता है, इसकी परिभाषा और इसका महत्व याद रखें।
Question 14. समोच्च रेखाओं से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
Answer: समोच्च रेखाओं द्वारा मानचित्रों में ऊँचाई, गहराई, ढाल तथा विभिन्न स्थलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाती हैं।
In simple words: समोच्च रेखाएँ मानचित्र पर किसी क्षेत्र की ऊँचाई, गहराई, ढाल और विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियों को दिखाती हैं।
🎯 Exam Tip: समोच्च रेखाओं के प्रमुख उपयोगों को सूचीबद्ध करना एक अच्छा अभ्यास है, विशेषकर ऊँचाई और ढाल के प्रदर्शन को।
Question 15. पार्श्व-चित्रण क्या है?
Answer: पार्श्व-चित्रण धरातल (भू-आकृतियों) की वास्तविक दशा को प्रदर्शित करने की एक विधि है। इसे खण्ड-चित्रण भी कहते हैं। इस विधि द्वारा समोच्च रेखाओं की सहायता से विभिन्न भू-आकृतियों को चित्रित किया जाता है।
In simple words: पार्श्व-चित्रण एक तरीका है जिससे ज़मीन की वास्तविक बनावट (भू-आकृतियाँ) को दिखाया जाता है। इसे खण्ड-चित्रण भी कहते हैं और इसमें समोच्च रेखाओं का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: पार्श्व-चित्रण की परिभाषा और इसका दूसरा नाम (खण्ड-चित्रण) याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. पार्श्व-चित्रण में कौन-कौन से मापक प्रयुक्त किए जाते हैं?
Answer: पार्श्व-चित्रण में क्षैतिज तथा लम्बवत् मापकों का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: पार्श्व-चित्रण में क्षैतिज (चौड़ाई) और लम्बवत् (ऊँचाई) दोनों प्रकार के मापकों का इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: पार्श्व-चित्रण में उपयोग होने वाले दो प्रकार के मापकों- क्षैतिज और लम्बवत् को याद रखें।
Question 17. पार्श्व-चित्रण कितने प्रकार का होता है?
Answer: पार्श्व-चित्रण दो प्रकार का होता है
1. सामान्य पार्श्व-चित्रण तथा
2. तिर्यक पार्श्व-चित्रण।
In simple words: पार्श्व-चित्रण दो मुख्य प्रकार का होता है: सामान्य पार्श्व-चित्रण और तिर्यक पार्श्व-चित्रण।
🎯 Exam Tip: पार्श्व-चित्रण के दो प्रकारों के नाम याद रखें।
Question 18. अन्तर्द्रश्यता क्या है?
Answer: किसी स्थलरूप पर दो स्थानों का परस्पर अदृश्यता कहलाता है।
In simple words: अन्तर्द्रश्यता का अर्थ है जब किसी भू-आकृति पर दो स्थानों से एक-दूसरे को देख पाना संभव न हो।
🎯 Exam Tip: अन्तर्द्रश्यता एक विशिष्ट भौगोलिक अवधारणा है; इसकी परिभाषा को सरल शब्दों में समझें।
Question 19. मिश्रित विधि किसे कहते हैं?
Answer: उच्चावच प्रदर्शन में जब दो या दो से अधिक विधियों को एक-साथ प्रयुक्त किया जाता है तो उसे मिश्रित विधि कहते हैं; जैसे – समोच्च रेखाओं के साथ खण्ड रेखाओं (Form lines) का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: मिश्रित विधि वह होती है जब उच्चावच को दिखाने के लिए दो या उससे ज़्यादा तरीकों को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है, जैसे समोच्च रेखाओं के साथ खण्ड रेखाएँ।
🎯 Exam Tip: मिश्रित विधि की परिभाषा और एक उदाहरण याद रखें, जैसे समोच्च रेखाएँ और खण्ड रेखाएँ।
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UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 5 स्थलाकृतिक मानचित्र
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Benefits of using Geography Class 11 Solved Papers
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FAQs
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Yes, we provide bilingual support for Class 11 Geography. You can access UP Board Solutions Class 11 Geography Chapter 5 स्थलाकृतिक मानचित्र in both English and Hindi medium.
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