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Detailed Chapter 6 फैलाव के उपाय UP Board Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 6 फैलाव के उपाय UP Board Solutions PDF
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. किसी बारम्बारता वितरण के समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है।' टिप्पणी करें।
Answer: परिक्षेपण यह दर्शाता है कि वितरण का मान उसके औसत मान से कितना भिन्न है। केन्द्रीय माप अथवा औसत प्रतिनिधि माप तो होता है किन्तु यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता है। दूसरे शब्दों में, औसत वितरण के केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् यह मूल्यों का एक प्रतिनिधि आकार है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए मूल्यों अथवा मानों के प्रसरण को जानना अत्यन्त आवश्यक है। इसके विपरीत, परिक्षेपण के माप आँकड़ों में बिखराव अथवा फैलाव के बारे में बताते हैं और वितरण के मामले में बेहतर जानकारी प्रदान करते हैं। अतः परिक्षेपण की माप आँकड़ों के वितरण को समझने में केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप का एक अच्छा सम्पूरक है।
In simple words: Dispersion measures how much values in a distribution vary from the average. Central tendency gives a representative value, but dispersion reveals the spread, offering a complete understanding of data distribution.
🎯 Exam Tip: Students should focus on explaining the complementary nature of dispersion measures to central tendency, detailing how each reveals different aspects of a dataset.
Question 2. परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
Answer: परिक्षेपण के चार प्रमुख माप हैं
(क) परास (विस्तर),
(ख) चतुर्थक विचलन,
(ग) माध्य विचलन तथा
(घ) प्रमाप मानक विचलन । उपर्युक्त में से कोई भी परिक्षेपण की माप-सीमाओं से परे नहीं है। प्रत्येक परिक्षेपण माप' की अपनी विशेषताएँ एवं कमियाँ हैं। फिर भी मानक विचलन परिक्षेपण की मापों में सर्वाधिक उपयुक्त माप है, क्योंकि
- यह सभी मानों पर आधारित होता है। इसलिए किसी भी माने में परिवर्तन, मानक विचलन के मान को प्रभावित करता है।
- यह उद्गम से स्वतन्त्र है परन्तु पैमाने से नहीं।
- यह कुछ उच्च सांख्यिकीय विधियों में भी प्रयुक्त होता है।
- इसका बीजगणितीय विवेचन सम्भव है।
In simple words: Standard deviation is considered the best measure of dispersion because it considers all data points, is less affected by extreme values than range, and has algebraic properties useful for further statistical analysis.
🎯 Exam Tip: When asked to identify the 'best' measure, always argue for standard deviation by listing its key advantages, especially its reliance on all data points and mathematical tractability.
Question 3. 'परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं, लेकिन कुछ, केन्द्रीय मान से | मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?
Answer: परिक्षेपण के माप दो प्रकार के होते हैं-
1. परिक्षेपण के निरपेक्ष माप तथा
2. परिक्षेपण के सापेक्ष माप ।
1. परिक्षेपण के निरपेक्ष माप - ये हैं-विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन और प्रमाप विचलन । ये माप उसी इकाई में होते हैं जिसमें मौलिक मूल्य होते हैं। इसलिए जब मूल्यों में ज्यादा बिखराब पाया जाता है तो ये माप आँकड़ों के वितरण के बारे में भ्रम पैदा कर सकते हैं।
2. परिक्षेपण के सापेक्ष माप - ये हैं-विस्तार गुणांक, चतुर्थक विचलन गुणांक, माध्य विचलन गुणांक, मानक विचलन गुणांक एवं विचरण गुणांक । इन मूल्यों की इकाई नहीं होती । परिक्षेपण के निरपेक्ष माप आँकड़ों के बिखराव से प्रभावित होते हैं जबकि परिक्षेपण के सापेक्ष माप केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचरण को मापते हैं।
In simple words: Yes, this statement is true. Absolute measures of dispersion (like range, standard deviation) depend on the spread of values themselves, while relative measures (like coefficient of variation) calculate variance relative to a central value, allowing for comparison between different datasets.
🎯 Exam Tip: Distinguishing between absolute and relative measures of dispersion is crucial. Focus on explaining how relative measures allow for comparison across different datasets, unlike absolute measures.
Question 4. एक कस्बे में 25% लोग हैं 45,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिए।
Answer: अर्जित आय का अधिकतम मूल्य = Rs. 45,000 अर्जित आय का न्यूनतम मूल्य = 18,000 विस्तार = L -S = 45,000-18,000 = Rs. 27,000 विस्तार गुणांक = \( \frac{I-S}{I-S} = \frac{45,000-18,000}{45,000+18,000} \) = \( \frac{27,000}{63,000} \) or \( \frac{27}{63} \) or \( \frac{3}{7} \) =0.43 परिक्षेपण का निरपेक्ष मान = Rs. 27,000 परिक्षेपण का सापेक्ष मान = 0.43.
In simple words: Given the maximum (Rs. 45,000) and minimum (Rs. 18,000) income, the absolute measure of dispersion (range) is Rs. 27,000, and the relative measure (coefficient of range) is 0.43.
🎯 Exam Tip: Remember to clearly differentiate between absolute (range) and relative (coefficient of range) measures, and show the calculations for both, replacing the Rupee symbol with "Rs.".
Question 5. एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल फसल की उपज निम्नवत है|
| जिले | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गेहूँ | 12 | 10 | 15 | 19 | 21 | 16 | 18 | 9 | 25 | 10 |
| चावल | 22 | 29 | 12 | 23 | 18 | 15 | 12 | 34 | 18 | 12 |
प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें (क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से माध्य विचलन
(घ) मध्यिका से माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) किस फसल में अधिक विचरण है?
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों के मानों की तुलना कीजिए ।
Answer:
(क) परास
(i) गेहूँ वितरण का अधिकतम मूल्य (L) = 25 वितरण का न्यूनतम मूल्य (S) = 9 परास = L-S = 25 – 9 = 16 .. गेहूं की फसल का परास = 16,
(ii) चावल वितरण का अधिकतम मूल्य (L) = 34 वितरण का न्यूनतम मूल्य (S) = 12 परास = L – S = 25 – 12 = 22 .. चावल की फसल को परास = 22
(ख) चतुर्थक विचलन
(i) गेहूँ
गेहूं के उत्पादन का बढ़ता क्रम
9, 10, 10, 12, 15, 16, 18, 19, 21, 25
\[ Q1 = \frac{N+1}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = \frac{10+1}{4} \text{वाँ पद or} \frac{11}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = 2.75\text{वाँ पद} \] \[ = 10 \] \[ Q3 = \frac{3(N + 1)}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = \frac{3(10 + 1)}{4} \text{वाँ पद or} \frac{33}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = 8.25 \text{वाँ पद} \] \[ = 21 \] \[ \text{चतुर्थक विचलन} = \frac{Q3 - Q1}{2} = \frac{21-10}{2} = \frac{11}{2} = 5.5 \] (ii) चावल
चावल के उत्पादन का बढ़ता क्रम
12, 12, 12, 15, 18, 18, 22, 23, 29, 34
\[ Q1 = \frac{N+1}{4} \text{वाँ पद} = \frac{(10 + 1)}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = \frac{11}{4} \text{वाँ पद} = 2.75\text{वाँ पद} = 12 \] \[ Q3 = \frac{3(N + 1)}{4} \text{वाँ पद} = \frac{3(10 + 1)}{4} \text{वाँ पद} = \frac{33}{4} \text{वाँ पद} \] \[ = 8.25 \text{वाँ पद} \] \[ = 29 \] \[ \text{चतुर्थक विचलन} = \frac{Q3- Q1}{2} = \frac{29-12}{2} = \frac{17}{2} = 8.5 \] (ग) माध्य से माध्य विचलन
(i) गेहूँ
A = 15 (कल्पित माध्य)
| गेहूँ का उत्पादम | \( | d | = (x – मध्यिका) \) |
|---|---|
| 9 | 6 |
| 10 | 5 |
| 10 | 5 |
| 12 | 3 |
| 15 | 0 |
| 16 | 1 |
| 18 | 3 |
| 19 | 4 |
| 21 | 10 |
| 25 | |
| \( \Sigma X = 155 \) | \( d = 43 \) |
A = 18 (कल्पित माध्य)
| चावल का उत्पादन (X) | \( | d | = [X – मध्यिका] \) |
|---|---|
| 12 | 6 |
| 12 | 6 |
| 12 | 6 |
| 15 | 3 |
| 18 | 0 |
| 18 | 0 |
| 22 | 4 |
| 23 | 5 |
| 29 | 11 |
| 34 | 16 |
| \( \Sigma X = 195 \) | \( \Sigma|d| = 57 \) |
(i) गेहूँ
A = 15 (कल्पित माध्य)
| गेहूँ का उत्पादन (X) | \( |d| = [X-A] \) |
|---|---|
| 09 | 6 |
| 10 | 5 |
| 10 | 5 |
| 12 | 3 |
| 15 = A | 0 |
| 16 | 1 |
| 18 | 3 |
| 19 | 4 |
| 21 | 6 |
| 25 | 10 |
| \( \Sigma X = 155 \) | \( \Sigma|d| = 43 \) |
| चावल का उत्पादन (X) | \( | d | = [X-A] \) |
|---|---|
| 12 | 6 |
| 12 | 6 |
| 12 | 6 |
| 15 | 3 |
| 18 | .0 |
| 18 | 0 |
| 22 | 4 |
| 23 | 5 |
| 29 | 11 |
| 34 | 16 |
| \( \Sigma|d| = 57 \) |
(ङ) मानक विचलन
(i) गेहूँ
AX = 15
| गेहूँ का उत्पादन (X) | \( d = [X - A_X] \) | \( d^2 \) |
|---|---|---|
| 9 | -6 | 36 |
| 10 | -5 | 25 |
| 10 | -5 | 25 |
| 12 | -3 | 9 |
| 15 | 0 | 0 |
| 16 | +1 | 1 |
| 18 | +3 | 9 |
| 19 | +4 | 16 |
| 21 | +6 | 36 |
| 25 | +10 | 100 |
| \( \Sigma d = 5 \) | \( \Sigma d^2 = 257 \) |
Ax = 18
| चावल का उत्पादन (X) | \( d = [X – मध्यिका] \) | \( d^2 \) |
|---|---|---|
| 12 | -6 | 36 |
| 12 | -6 | 36 |
| 12 | -6 | 36 |
| 15 | -3 | 9 |
| 18 Ax | 0 | 0 |
| 18. | 0 | 0 |
| 22 | 4 | 16 |
| 23 | 5 | 25 |
| 29 | 11 | 121 |
| 34 | 16 | 256 |
| \( \Sigma d = 15 \) | \( \Sigma d^2 = 535 \) |
- गेहूँ के लिए = 4.94
- चावल के लिए = 7.16
(i) गेहूँ- \[ C.V. = \frac{\text{मानक विचलन}}{\text{माध्य}} \times 100 \] \[ = \frac{4.94}{15.5} \times 100 \] \[ \implies 31.87 \] (ii) चावल- \[ C.V. = \frac{\text{मानक विचलन}}{\text{माध्य}} \times 100 \] \[ = \frac{7.16}{19.5} \times 100 \] \[ \implies \frac{716}{19.5} \] \[ \implies 36.72 \] अतः चावल की उपज में विचरण अधिक है। (छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों के मानों की तुलना
| माप | गेहूँ | चावल | तुलना |
|---|---|---|---|
| (क) परास | 16 | 22 | चावल की फसल का विस्तार अधिक है। |
| (ख) चतुर्थक विचलन | 5.5 | 8.5 | चावल की फसल के लिए चतुर्थक विचलन अधिक है। |
| (ग) माध्य से माध्य विचलन | 4.3 | 6 | माध्य से माध्य विचलन चावल की फसल के लिए अधिक है। |
| (घ) मध्यिका से माध्य विचलन | 4.3 | 5.7 | मध्यिका से माध्य विचलन चावल की फसल के लिए अधिक है। |
| (ङ) मानक विचलन | 4.94 | 7.16 | मानक विचलन चावल के लिए अधिक है। |
| (च) विचरण गुणांक | 31.87 | 36.72 | चावल उत्पादन का विचरण गुणांक ज्यादा है। |
In simple words: This question involves calculating various measures of dispersion - range, quartile deviation, mean deviation (from mean and median), standard deviation, and coefficient of variation - for both wheat and rice crop yields, and then comparing them to determine which crop has more variation.
🎯 Exam Tip: For comprehensive questions like this, organize your calculations clearly for each crop and each measure. The comparison table is an excellent way to summarize findings and secure full marks.
Question 6. पूर्ववर्ती प्रश्न में, विचरण के सापेक्ष मापों को परिकलित कीजिए और वह मान बताइए जो आपके विचार से सर्वाधिक विश्वसनीय हो ।
Answer:
(A) पिछले प्रश्न में, गेहूं की फसल के लिए विभिन्न परिक्षेपण के सापेक्ष माप एवं विचरण निम्न प्रकार हैं।
(i) L = 25, S = 9
\[ \text{विस्तार गुणांक} = \frac{L-S}{L+S} \]
\[ \implies \frac{25-9}{25+9} \]
\[ \implies \frac{16}{34} \implies 0.47 \]
(ii) \( Q_1 = 10 \), \( Q_3 = 21 \)
\[ \text{चतुर्थक विचलन गुणांक} = \frac{Q_3 - Q_1}{Q_3 + Q_1} \]
\[ = \frac{21-10}{21+10} \]
\[ \implies \frac{11}{31} \text{ or } 0.35 \]
(iii) \( \overline{X} = 15.5, M.D._{\overline{X}} = 4.3 \)
\[ M.D._{\overline{X}} \text{ गुणांक} = \frac{MD_{\overline{X}}}{\overline{X}} \]
\[ = \frac{4.3}{15.5} \]
\[ \implies 0.28 \]
(iv) \( M = 15.5, MD_M = 4.3 \)
\[ MD_M \text{ गुणांक} = \frac{MD_M}{M} \]
\[ \implies \frac{4.3}{15.5} \]
\[ \implies 0.28 \]
(v) SD = 4.94, \( \overline{X} = 15.5 \)
\[ \text{विचरण गुणांक} = \frac{SD}{\overline{X}} \times 100 \]
\[ = \frac{4.94}{15.5} \times 100 \]
\[ = \frac{494}{15.5} \]
\[ \implies 31.87 \]
(B) पिछले प्रश्न में, चावल की फसल के लिए विभिन्न परिक्षेपण के सापेक्ष माप एवं विचरण निम्नांकित हैं-
(i) L = 34, S = 12
\[ \text{विस्तार गुणांक} = \frac{L-S}{L+S} \]
\[ \implies \frac{34-12}{34+12} \]
\[ \implies \frac{22}{46} \]
\[ \implies 0.48 \]
(ii) \( Q_1 = 12, Q_3 = 29 \)
\[ \text{चतुर्थक विचलन गुणांक} = \frac{Q_3 - Q_1}{Q_3 + Q_1} \]
\[ = \frac{29-12}{29+12} \]
\[ \implies \frac{17}{41} \]
\[ \implies 0.41 \]
(iii) \( \overline{X} = 19.5, MD_{\overline{X}} = 6 \)
\[ MD_{\overline{X}} \text{ गुणांक} = \frac{MD_{\overline{X}}}{\overline{X}} \]
\[ \implies \frac{6}{19.5} \]
\[ \implies 0.31 \]
(iv) \( M = 18, MD_M = 5.7 \)
\[ MD_M \text{ गुणांक} = \frac{MD_M}{M} \]
\[ \implies \frac{5.7}{18} \]
\[ \implies 0.32 \]
(ν) \( \sigma = 7.16, \overline{X} = 19.5 \)
\[ \text{विचरण गुणांक} = \frac{\sigma}{\overline{X}} \times 100 \]
\[ = \frac{7.16}{19.5} \times 100 \]
\[ \implies \frac{716}{19.5} \]
\[ \implies 36.72 \]
.. मानक विचलन से विचरण गुणांक ज्यादा विश्वसनीय है।
In simple words: This question asks for the calculation of relative measures of dispersion (coefficient of range, quartile deviation, mean deviation, and variation) for both wheat and rice yields, as done in the previous question, and to identify the most reliable measure.
🎯 Exam Tip: When asked to calculate relative measures, remember they are unit-free and allow for direct comparison between different datasets. The coefficient of variation, based on standard deviation, is generally considered the most reliable due to its mathematical properties.
Question 7. किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन x और y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है जो निम्नवत् है
| x: | 25 | 85 | 40 | 80 | 120 |
|---|---|---|---|---|---|
| y: | 50 | 70 | 65 | 45 | 80 |
किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिए
(क) अधिक रन स्कोर करने वाले को, या
(ख) अधक भरोसेमन्द बल्लेबाज को ।
Answer:
बल्लेबाज 'x' के लिए
| x | \( d=x-\overline{X} \) | \( d^2 \) |
|---|---|---|
| 25 | -45 | 2025 |
| 85 | +15 | 225 |
| 40 | -30 | 900 |
| 80 | +10 | 100 |
| 120 | +50 | 2500 |
| \( \Sigma x = 350 \) | \( \Sigma d = 0 \) | \( \Sigma d^2 = 5750 \) |
सूत्र \( \overline{X} = \frac{\Sigma x}{N} \) से,
\( N = 5, \Sigma x = 350 \)
\( \overline{X} = \frac{350}{5} = 70 \)
सूत्र \( \sigma = \sqrt{\frac{\Sigma d^2}{N}} \)
\( \sigma = \sqrt{\frac{5750}{5}} = \sqrt{1150} = 33.91 \)
\( C.V. = \frac{\sigma}{\overline{X}} \times 100 = \frac{33.91}{70} \times 100 \)
\( = \frac{3391}{70} \implies 48.44 \)
बल्लेबाज 'y' के लिए
| y | \( d=y-\overline{Y} \) | \( d^2 \) |
|---|---|---|
| 50 | -12 | 144 |
| 70 | 8 | 64 |
| 65 | 3 | 9 |
| 45 | -17 | 289 |
| 80 | 18 | 324 |
| \( \Sigma y = 310 \) | \( \Sigma d = 0 \) | \( \Sigma d^2 = 830 \) |
\( \overline{Y} = \frac{\Sigma Y}{N} = \frac{310}{5} = 62 \)
\( \sigma = \sqrt{\frac{\Sigma d^2}{N}} = \sqrt{\frac{830}{5}} = \sqrt{166} = 12.88 \)
\( C.V. = \frac{\sigma}{\overline{Y}} \times 100 \implies \frac{12.88}{62} \times 100 \)
\( = \frac{1288}{62} \implies 20.77 \)
(क) 'x' का औसत स्कोर बल्लेबाज y की तुलना में ज्यादा है। अतः अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में 'x का चयन होना चाहिए ।
(ख) विचरण गुणांक बल्लेबाज 'x की तुलना में y का अधिक है। अतः विश्वसनीयता के आधार पर y का चयन किया जाना चाहिए ।
In simple words: To select a batsman, we compare their average scores and consistency (measured by Coefficient of Variation). Batsman 'x' scores more runs on average, while batsman 'y' is more reliable due to a lower coefficient of variation. The choice depends on whether the team prioritizes higher scores or greater consistency.
🎯 Exam Tip: In selection problems, clearly state the criteria (average for high scores, Coefficient of Variation for reliability). Lower C.V. indicates higher consistency/reliability, while a higher mean indicates more runs.
Question 8. दो ब्राण्डों के बल्बों की गुणवत्ता जाँचने के लिए, ज्वलन अवधि घण्टों में उनके जीवन-काल को, प्रत्येक ब्राण्ड के 100 बल्बों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है-
| जीवनकाल (घण्टों में) | बल्बों की संख्या | |
|---|---|---|
| ब्राण्ड 'क' | ब्राण्ड 'ख' | |
| 0-50 | 15 | 2 |
| 50-100 | 20 | 8 |
| 100-150 | 18 | 60 |
| 150-200 | 25 | 25 |
| 200-250 | 22 | 5 |
| 100 | 100 |
(क) किस ब्राण्ड का जीवनकाल अधिक है?
(ख) कौन-सा ब्राण्ड अधिक भरोसेमन्द है?
Answer:
ब्राण्ड 'क' के लिए
| जीवनकाल (घण्टों में) | बल्बों की संख्या (f) | माध्य मूल (x) | \( D=x-A \) (A = 125) | \( d=\frac{D}{i} \) | fd | \( fd^2 \) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 0-50 | 15 | 25 | -100 | -2 | -30 | 60 |
| 50-100 | 20 | 75 | -50 | -1 | -20 | 20 |
| 100-150 | 18 | 125 | 0 | 0 | 0 | 0 |
| 150-200 | 25 | 175 | 50 | 1 | 25 | 25 |
| 200-250 | 22 | 225 | 100 | 2 | 44 | 88 |
| \( \Sigma f = 100 \) | \( \Sigma fd = 19 \) | \( \Sigma fd^2 = 193 \) |
\[ \overline{X}_A = A + \frac{\Sigma fd}{\Sigma f} \times i \] \[ = 125 + \frac{19 \times 50}{100} \] \[ \implies 125 + 9.5 \] \[ \implies 134.5 \] \[ \sigma_A = \sqrt{\frac{\Sigma fd^2}{\Sigma f} - (\frac{\Sigma fd}{\Sigma f})^2} \times i \] \[ \implies \sqrt{\frac{193}{100} - (\frac{19}{100})^2} \times 50 \] \[ \implies \sqrt{1.93 - 0.0361} \times 50 \] \[ \implies \sqrt{1.8939} \times 50 \] \[ \implies 1.37 \times 50 \] \[ \implies 68.5 \] \[ C.V._A = \frac{\sigma_A}{\overline{X}_A} \times 100 \] \[ = \frac{68.5}{134.5} \times 100 \] \[ = \frac{6850}{134.5} \] \[ \implies 50.93 \] ब्राण्ड 'ख' के लिए
| जीवनकाल (घण्टों में) | माध्य मूल (x) | बल्बों की संख्या (f) | \( D=x-A \) (A = 125) | \( d=\frac{D}{i} \) | fd | \( fd^2 \) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 0-50 | 25 | 2 | -100 | -2 | -4 | 8 |
| 50-100 | 75 | 8 | -50 | -1 | -8 | 8 |
| 100-150 | 125 | 60 | 0 | 0 | 0 | 0 |
| 150-200 | 175 | 25 | 50 | 1 | 25 | 25 |
| 200-250 | 225 | 5 | 100 | 2 | 10 | 20 |
| \( \Sigma f = 100 \) | \( \Sigma fd = 23 \) | \( \Sigma fd^2 = 61 \) |
- औसत जीवनकाल बल्ब 'क' का ज्यादा है।
- विचरण गुणांक का मान बल्ब 'ख' के लिए कम है; अतः बल्ब 'क' की तुलना में बल्ब 'ख' ज्यादा विश्वसनीय है।
In simple words: To determine which brand of bulb has a longer lifespan and is more reliable, we calculate the average lifespan (mean) and the consistency (coefficient of variation) for both Brand A and Brand B. Brand B is more reliable due to a lower coefficient of variation, indicating less variability in its lifespan, even though Brand A has a slightly higher average lifespan.
🎯 Exam Tip: To assess reliability, always use the Coefficient of Variation (C.V.). A lower C.V. signifies greater consistency and reliability. For average performance, compare the means.
Question 10. पूर्ववर्ती प्रश्न में, यदि प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाए, तो माध्य एवं मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: पूर्ववर्ती प्रश्न में, औसत मजदूरी = Rs. 200 मानक मजदूरी = Rs. 40 मजदूरी में वृद्धि = Rs. 200 का 10% = 200 \( \times \frac{10}{100} \) = Rs. 20 माध्य तथा मानक विचलन पर वही प्रभाव पड़ेगा जो पिछले प्रश्न में पड़ा था ।
In simple words: यदि प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाती है, तो औसत मजदूरी 200 से बढ़कर 220 हो जाएगी, और मानक विचलन 40 ही रहेगा, क्योंकि यह केवल मानों के पैमाने में परिवर्तन से प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: औसत मजदूरी में वृद्धि के साथ मानक विचलन के मान की स्थिरता पर ध्यान दें, क्योंकि विचलन पर मूल डेटा के निरपेक्ष मान का प्रभाव नहीं पड़ता।
Question 11. निम्नलिखित वितरण के लिए, माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन कीजिए
| वर्ग | बारम्बारता |
|---|---|
| 20-40 | 3 |
| 40-80 | 6 |
| 80-100 | 20 |
| 100-120 | 12 |
| 120-140 | 9 |
| 50 |
Answer:
हल-
| वर्ग | माध्य मूल (x) | (f) | D=x-A (A=90) | d = D/i i = 10 | fd | fd\(^2\) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 20-40 | 30 | 3 | -60 | -6 | -18 | 108 |
| 40-80 | 60 | 6 | -30 | -3 | -18 | 54 |
| 80-100 | 90 | 20 | 0 | 0 | 0 | 0 |
| 100-120 | 110 | 12 | + 20 | 2 | 24 | 48 |
| 120-140 | 130 | 9 | + 40 | 4 | 36 | 144 |
| \( \Sigma \)f = 50 | \( \Sigma \)fd = 24 | \( \Sigma \)fd\(^2\) = 354 |
\( \implies \overline{X} = 90 + \frac{24}{50} \times 10 \)
\( \implies \overline{X} = 90 + \frac{240}{50} \)
\( \implies \overline{X} = 90 + 4.8 \)
\( \implies \overline{X} = 94.8 \)
मानक विचलन \( \sigma = \sqrt{\frac{\Sigma fd^2}{\Sigma f} - \left( \frac{\Sigma fd}{\Sigma f} \right)^2} \times i \)
\( \implies \sigma = \sqrt{\frac{354}{50} - \left( \frac{24}{50} \right)^2} \times 10 \)
\( \implies \sigma = \sqrt{7.08 - (0.48)^2} \times 10 \)
\( \implies \sigma = \sqrt{7.08 - 0.2304} \times 10 \)
\( \implies \sigma = \sqrt{6.8496} \times 10 \)
\( \implies \sigma = 2.617 \times 10 \)
\( \implies \sigma = 26.17 \)
माध्य = 94.8 मानक विचलन = 26.17
In simple words: वितरण के लिए, माध्य 94.8 है और मानक विचलन 26.17 है।
🎯 Exam Tip: सतत श्रृंखला में माध्य और मानक विचलन की गणना के लिए मध्य-मूल्यों और कल्पित माध्य विधि का उपयोग करें। वर्गों के मध्य बिंदुओं को सही ढंग से निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।
Question 12. 10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात कीजिए ।
Answer:
मानों की संख्या (N) = 10
10 मानों का योग = 100
माध्य \( = \frac{\text{मानों का योग}}{\text{मानों की संख्या}} = \frac{100}{10} = 10 \)
वर्गों का योग = 1090
वर्गित मूल्यों का माध्य \( = \frac{1090}{10} = 109 \)
मानक विचलन \( = \sqrt{109} = 10.44 \)
माध्य = 10
मानक विचलन = 10.44
In simple words: दिए गए मानों का माध्य 10 है और उनका मानक विचलन 10.44 है।
🎯 Exam Tip: विचरण गुणांक की गणना के लिए माध्य और मानक विचलन की सही गणना महत्वपूर्ण है। सूत्र \(\sigma = \sqrt{\frac{\Sigma X^2}{N} - (\overline{X})^2}\) का उपयोग करके मानक विचलन प्राप्त करें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. “अपकिरण पदों के विचरण या अंतर को माप है।” यह परिभाषा किसने दी है?
(क) मार्शल
(ख) प्रो० एली
(ग) डॉ० बाउले
(घ) कॉनर
Answer: (ग) डॉ०. बाउले ।
In simple words: अपकिरण की परिभाषा डॉ. बाउले ने दी है, जिसके अनुसार यह डेटा के विचरण या अंतर को मापता है।
🎯 Exam Tip: सांख्यिकी में महत्वपूर्ण परिभाषाओं और उनके प्रणेताओं को याद रखना अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में सहायक होता है।
Question 2. किसी समंकमाला में सबसे बड़े पद' तथा 'सबसे छोटे पद' के मूल्य के अंतर को क्या कहते हैं?
(क) विस्तार
(ख) प्रमाप
(ग) विचरण
(घ) बहुलक
Answer: (क) विस्तार ।
In simple words: किसी डेटा सेट में सबसे बड़े और सबसे छोटे मान के बीच के अंतर को विस्तार (Range) कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: यह अपकिरण का सबसे सरल माप है और इसकी गणना में अधिकतम और न्यूनतम मानों का अंतर शामिल होता है।
Question 3. 'प्रथम अपकिरण घात' कहते हैं
(क) बहुलक को
(ख) माध्य विचलन को
(ग) समान्तर माध्य को
(घ) अपकिरण को
Answer: (ख) माध्य विचलन को ।
In simple words: माध्य विचलन को 'प्रथम अपकिरण घात' कहा जाता है क्योंकि यह केंद्रीय प्रवृत्ति से मानों के औसत विचलन को मापता है।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन (Mean Deviation) केंद्रीय प्रवृत्ति से मानों के औसत निरपेक्ष विचलन को मापता है।
Question 4. प्रमाप विचलन का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
(क) कार्ल पियर्सन ने
(ख) प्रो० माल्थस ने
(ग) मिल ने
(घ) प्रो० मार्शल ने
Answer: (क) कार्ल पियर्सन ने ।
In simple words: कार्ल पियर्सन ने सर्वप्रथम प्रमाप विचलन की अवधारणा का प्रयोग किया।
🎯 Exam Tip: कार्ल पियर्सन को प्रमाप विचलन के विकास का श्रेय दिया जाता है, जो सांख्यिकी में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 5. 'लॉरेंज वक्र का प्रयोग सर्वप्रथम किस अर्थशास्त्री ने किया था?
(क) प्रो० मार्शल ने
(ख) कार्ल पियर्सन ने
(ग) आरूकेण्ड्यू पिट ने
(घ) डॉ० मैक्स लॉरेंज ने
Answer: (घ) डॉ० मैक्स लॉरेंज ने ।
In simple words: डॉ. मैक्स लॉरेंज ने आय और धन के वितरण में असमानता को दर्शाने के लिए लॉरेंज वक्र का सर्वप्रथम प्रयोग किया।
🎯 Exam Tip: लॉरेंज वक्र का उपयोग आय या धन वितरण में असमानता को ग्राफिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. अपकिरण की परिभाषा दीजिए ।
Answer: “अपकिरण मदों के विचरण का माप है।”
In simple words: अपकिरण वह सांख्यिकीय माप है जो किसी डेटा सेट में मानों के फैलाव या भिन्नता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: अपकिरण को डेटा मानों के केंद्रीय प्रवृत्ति से फैलाव के रूप में परिभाषित करना मुख्य मूल्यांकन बिंदु है।
Question 2. औसत व अपकिरण में क्या अंतर है?
Answer: औसत किसी श्रेणी की केन्द्रीय प्रवृत्ति है जबकि अपकिरण विभिन्न मदों तथा केन्द्रीय प्रवृत्ति के बिखराव के विस्तार को मापता है।।
In simple words: औसत डेटा के केंद्र को बताता है, जबकि अपकिरण बताता है कि डेटा कितना फैला हुआ है।
🎯 Exam Tip: औसत केंद्रीय मान को दर्शाता है, जबकि अपकिरण डेटा के फैलाव या भिन्नता को मापता है, यह मुख्य अंतर है।
Question 3. अपकिरण के निरपेक्ष माप से क्या आशय है?
Answer: अपकिर का निरपेक्ष माप वह होता है जो श्रृंखला की मौलिक इकाई में ही व्यक्त किया जाता है।
In simple words: निरपेक्ष माप डेटा की मूल इकाइयों में फैलाव को दिखाता है, जैसे कि रुपये या किलोग्राम में।
🎯 Exam Tip: निरपेक्ष माप की पहचान उसकी मूल इकाई में होने से होती है, जो इसे सीधे तुलना के लिए अनुपयुक्त बना सकता है।
Question 4. अपकिर के सापेक्ष माप से क्या आशय है?
Answer: अपकिर क; सापेक्ष माप वह होता है जिसमें आँकड़ों के अंतर को अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
In simple words: सापेक्ष माप डेटा के फैलाव को अनुपात या प्रतिशत के रूप में दर्शाता है, जिससे विभिन्न डेटा सेट की तुलना करना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष माप इकाइयों से मुक्त होता है (जैसे प्रतिशत), जो विभिन्न डेटा सेटों की तुलना के लिए उपयोगी होता है।
Question 5. विस्तार (Range) किसे कहते हैं?
Answer: किसी श्रेणी के सबसे बड़े मूल्य (L) और सबसे छोटे मूल्य (S) के अंतर को विस्तार कहते हैं। (L - S)
In simple words: विस्तार किसी डेटा सेट के उच्चतम और निम्नतम मान के बीच का अंतर होता है।
🎯 Exam Tip: विस्तार की गणना 'उच्चतम मान - न्यूनतम मान' सूत्र से होती है, जो सबसे सरल अपकिरण माप है।
Question 6. विस्तार गुणांक (Coefficient of Range) क्या है?
Answer: विस्तार गुणांक श्रेणी के सबसे बड़े मूल्य तथा सबसे छोटे मूल्य के अंतर तथा इनके योग का अनुपात है। \( \frac{L-S}{L+S} \)
In simple words: विस्तार गुणांक, विस्तार (उच्चतम और न्यूनतम मान का अंतर) और उच्चतम तथा न्यूनतम मानों के योग का अनुपात होता है, जिसे सापेक्ष माप के रूप में उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: विस्तार गुणांक एक सापेक्ष माप है जो डेटा के फैलाव की तुलना विभिन्न इकाइयों वाले सेटों में करने में मदद करता है।
Question 7. अंतर चतुर्थक विस्तार (InterQuartile Range) किसे कहते हैं?
Answer: किसी श्रेणी के तृतीय (Q3) तथा प्रथम चतुर्थक Q5) के अंतर को अंतर चतुर्थक विस्तार कहते हैं। (Q3 - Q1)
In simple words: अंतर चतुर्थक विस्तार डेटा के तीसरे चतुर्थक (Q3) और पहले चतुर्थक (Q1) के बीच का अंतर है, जो मध्य 50% डेटा का फैलाव दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: यह चरम मानों से कम प्रभावित होता है और केंद्रीय डेटा के फैलाव को बेहतर ढंग से दर्शाता है।
Question 8. चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या है?
Answer: चतुर्थक विचलन अंतर चतुर्थक विस्तार का आधा होता है। \( \frac{Q_3-Q_1}{2} \)
In simple words: चतुर्थक विचलन अंतर चतुर्थक विस्तार का आधा होता है, जो डेटा के मध्य भाग के औसत फैलाव को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: इसे अर्ध-अंतर चतुर्थक विस्तार भी कहते हैं और यह चरम मानों से अप्रभावित रहता है।
Question 9. चतुर्थक विचलने गुणांक (CoefficientofQuartile Deviation) किसे कहते हैं?
Answer: यह अपकिरण की सापेक्ष माप है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक श्रेणी पदों की तुलना के लिए किया जाता है। \( \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \)
In simple words: चतुर्थक विचलन गुणांक चतुर्थक विचलन की सापेक्ष माप है, जो दो डेटा सेटों के विचलन की तुलना करने के लिए उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: चतुर्थक विचलन गुणांक एक इकाई-रहित माप है, जिससे विभिन्न डेटा सेटों के फैलाव की तुलना करना आसान हो जाता है।
Question 10. माध्य विचलने (Mean Deviation) की परिभाषा दीजिए ।
Answer: “श्रृंखला के किसी सांख्यिकीय माध्य (समान्तर माध्य, मध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गए विभिन्न मूल्यों के विचलनों के समान्तर माध्य को उसका माध्य विचलन कहा जाता है।”
In simple words: माध्य विचलन, केंद्रीय मान (माध्य, मध्यिका या बहुलक) से डेटा मानों के निरपेक्ष विचलनों का औसत होता है।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन केंद्रीय प्रवृत्ति से डेटा मानों के औसत फैलाव को मापता है, लेकिन यह निरपेक्ष मानों का उपयोग करता है।
Question 11. माध्य विचलन का गुणांक कैसे निकाला जाता है?
Answer: माध्य विचलन का गुणांक निकालने के लिए माध्य विचलन को उसके औसत से भाग कर दिया जाता है।
In simple words: माध्य विचलन का गुणांक निकालने के लिए, माध्य विचलन को उस केंद्रीय मान से विभाजित करते हैं जिससे विचलन लिया गया था (जैसे माध्य या मध्यिका)।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन गुणांक एक सापेक्ष माप है, जो विभिन्न डेटा सेटों की तुलना के लिए उपयोगी होता है।
पश्न 12. माध्य विचलन को प्रमुख दोष बताइए ।
Answer: इसमें श्रेणी के औसत मूल्य से प्राप्त सभी विचलनों को धनात्मक मान लिया जाता है जबकि कुछ विचलन ऋणात्मक भी होते हैं।
In simple words: माध्य विचलन का मुख्य दोष यह है कि यह गणना करते समय ऋणात्मक चिन्हों को धनात्मक मानता है, जिससे गणितीय सटीकता प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन का यह दोष इसे बीजगणितीय हेरफेर के लिए अनुपयुक्त बनाता है, जो मानक विचलन के विपरीत है।
Question 13. प्रमाप विचलन को परिभाषित कीजिए ।
Answer: “प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से श्रृंखला के विभिन्न मूल्यों के विचलनों के वर्गों के माध्य को वर्गमूल है।”
In simple words: प्रमाप विचलन, माध्य से लिए गए डेटा मानों के विचलनों के वर्गों के औसत का वर्गमूल है, जो फैलाव का सबसे विश्वसनीय माप है।
🎯 Exam Tip: प्रमाप विचलन डेटा के फैलाव का सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला और गणितीय रूप से सटीक माप है।
Question 14. प्रमाप विचलन का गुणांक (Coefficient of Standard Deviation) क्या है?
Answer: प्रमाप विचलन का गुणांक प्रमाप विचलन तथा समान्तर माध्य का अनुपात है। \( \frac{\sigma}{\overline{X}} \)
In simple words: प्रमाप विचलन का गुणांक, प्रमाप विचलन को माध्य से विभाजित करने पर प्राप्त होता है, जिससे यह डेटा के सापेक्ष फैलाव को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: यह एक इकाई-रहित माप है जो विभिन्न डेटा सेटों की तुलना में मदद करता है, भले ही उनकी इकाइयाँ अलग-अलग हों।
Question 15. विचरण गुणांक (Coefficient of variation) क्या है?
Answer: विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है। \( \frac{\sigma}{\overline{X}} \times 100 \)
In simple words: विचरण गुणांक, प्रमाप विचलन और माध्य के अनुपात को 100 से गुणा करके प्रतिशत के रूप में व्यक्त करता है, जिससे डेटा के सापेक्ष परिवर्तनशीलता का पता चलता है।
🎯 Exam Tip: विचरण गुणांक दो या दो से अधिक डेटा सेटों की स्थिरता या परिवर्तनशीलता की तुलना करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है।
Question 16. विचरण गुणांक और प्रमाप विचलन में क्या अंतर है?
Answer: विचरण गुणंक माध्य में होने वाला प्रतिशत विचरण है जबकि प्रमाप विचलन माध्य में होने वाला कुल विचरण है।
In simple words: प्रमाप विचलन डेटा के फैलाव का एक निरपेक्ष माप है, जबकि विचरण गुणांक डेटा के सापेक्ष फैलाव का प्रतिशत माप है, जिससे विभिन्न डेटा सेटों की तुलना करना आसान होता है।
🎯 Exam Tip: प्रमाप विचलन की इकाई वही होती है जो डेटा की होती है, जबकि विचरण गुणांक एक इकाई-रहित प्रतिशत होता है, जो उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।
Question 17. लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve) क्या है?
Answer: लॉरेंज वक्र समान वितरण रेखा से वास्तविक वितरण के विचलन का बिन्दुरेखीय माप है।
In simple words: लॉरेंज वक्र एक ग्राफिकल उपकरण है जो आय या धन जैसे वितरण में असमानता को दर्शाता है, जिसमें डेटा की संचयी प्रतिशतता को दर्शाया जाता है।
🎯 Exam Tip: लॉरेंज वक्र जितना अधिक समवितरण रेखा से दूर होता है, वितरण में असमानता उतनी ही अधिक होती है।
Question 18. समान वितरण रेखा किसे कहते हैं?
Answer: OX अक्ष के O मापदण्ड को OY अक्ष के मापदण्ड से मिलाने से जो रेखा खींची जाती है, उसे समान वितरण रेखा कहते हैं।
In simple words: समान वितरण रेखा एक ग्राफ पर एक सीधी विकर्ण रेखा होती है जो बिल्कुल समान वितरण को दर्शाती है, जहाँ आबादी का X% धन या आय का X% प्राप्त करता है।
🎯 Exam Tip: समान वितरण रेखा पूर्ण समानता को दर्शाती है, जिसके सापेक्ष लॉरेंज वक्र असमानता की मात्रा को मापता है।
Question 19. लॉरेंज वक्र का दूसरा क्या नाम है?
Answer: लॉरेंज वक्र का दूसरा नाम 'संचयी प्रतिशत वक्र' है।
In simple words: लॉरेंज वक्र को 'संचयी प्रतिशत वक्र' भी कहा जाता है क्योंकि यह संचयी प्रतिशतता का उपयोग करता है।
🎯 Exam Tip: यह वैकल्पिक नाम वक्र की कार्यप्रणाली को दर्शाता है जो संचयी आवृत्तियों और मूल्यों पर आधारित होती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. अपकिरण किसे कहते हैं? अपकिरण की माप के उद्देश्य बताइए ।
Answer:
अपकिरण
अपकिरण शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है। प्रथम अर्थ में, अपकिरण से तात्पर्य समंक श्रेणी के सीमांत मूल्यों के अंतर या सीमा विस्तार से है। दूसरे अर्थ में- “अपकिरण श्रेणी के माध्य से निकाले गए विभिन्न पदों के विचलनों का माध्य है।” डॉ. बाउले के अनुसार – “अपकिरण पदों के विचरण या अंतर का माप है।”
अपकिरण की माप के उद्देश्य
अपकिरण की माप के निम्नलिखित उद्देश्य हैं
- श्रेणी के माध्य से विभिन्न पद मूल्यों की औसत दूरी ज्ञात करना;
- श्रेणी की बनावट के बारे में सूचना प्राप्त करना;
- पद मूल्यों का सीमा विस्तार ज्ञात करना;
- तुलनात्मक अध्ययन द्वारा यह जानना कि किसमें विचरण की मात्रा अधिक है;
- यह देखना कि माध्य द्वारा श्रेणी का किस सीमा तक प्रतिनिधित्व होता है।
In simple words: अपकिरण डेटा के फैलाव या बिखराव को मापता है, और इसका उद्देश्य औसत दूरी, डेटा की संरचना, सीमा विस्तार, विभिन्न सेटों में विचरण की तुलना करना और यह जांचना है कि माध्य डेटा का कितना प्रतिनिधित्व करता है।
🎯 Exam Tip: अपकिरण की परिभाषा और उसके उद्देश्य, विशेष रूप से माध्य से औसत दूरी और तुलनात्मक अध्ययन जैसे बिंदु, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 2. परास या विस्तार (Range) क्या है? इसके गुण व दोष बताइए ।
Answer: किसी समंकमाला के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अंतर को विस्तार या परास (Range) कहते हैं। इसमें श्रेणी के अधिकतम मूल्य और न्यूनतम मूल्य ज्ञात किए जाते हैं। सूत्र रूप में R = L -S यहाँ, R = परास या विस्तार L = श्रेणी का अधिकतम मूल्य S = श्रेणी का निम्नतम मूल्य
विस्तार के गुण
- यह अपकिरण की सबसे सरल माप है।
- यह उन सीमाओं को स्पष्ट कर देता है जिसके मध्य ही समंकमाला के समस्त मूल्य फैले रहते हैं।
- गुण नियंत्रण, मूल्यों के उच्चावचन तथा भौगोलिक अध्ययनों में यह बहुत उपयोगी है।
विस्तार के दोष
- इससे समंकमाला के केवल उच्चतम और न्यूनतम मूल्य पर ही ध्यान दिया जाता है तथा अन्य मूल्यों की उपेक्षा की जाती है।
- यह अपकिरण की एक संतोषजनक माप नहीं है।
- इसके द्वारा श्रेणी की बनावट के बारे में जानकारी नहीं होती है।
- यह अपकिरण की एक अस्थिर माप है।
In simple words: विस्तार (Range) किसी डेटा सेट के सबसे बड़े और सबसे छोटे मान के बीच का अंतर होता है; यह सरल, सीमाओं को स्पष्ट करने वाला और गुणवत्ता नियंत्रण में उपयोगी है, लेकिन यह केवल चरम मानों पर ध्यान केंद्रित करने और अन्य मूल्यों की उपेक्षा करने के कारण अस्थिर और असंतोषजनक हो सकता है।
🎯 Exam Tip: विस्तार के गुण (सरलता, सीमाओं का स्पष्टीकरण) और दोष (केवल चरम मानों पर निर्भरता, अस्थिरता) दोनों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये इसकी उपयुक्तता का निर्धारण करते हैं।
Question 3. निम्नलिखित का अर्थ एवं गुणन क्रिया समझाइए
(i) अंतर चतुर्थक विस्तार,
(ii) चतुर्थक विचलन,
(iii) चतुर्थक विचलन गुणांक ।
Answer:
(i) अंतर चतुर्थक विस्तार
समंक श्रेणी के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के अंतर को 'अंतर चतुर्थक विस्तार' कहते हैं। गणन क्रिया निम्नलिखित प्रकार से है
- पहले दोनों चतुर्थक ज्ञात किए जाते हैं।
- निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है I.R. =Q3 - Q1
(ii) चतुर्थक विचलन
तृतीय चतुर्थक वः प्रथम चतुर्थक के अंतर के आधे को चतुर्थक विचलन' (Quartile deviation) या 'अर्द्ध-अंतर चतुर्थक विस्तार' (Semi-inter quartile range) कहते हैं। सूत्र रूप में QD = Q3 - Q1
(iii) चतुर्थक विचलन गुणांक
विभिन्न श्रेणियों के चतुर्थक विचलन की तुलना करने के लिए इसका सापेक्ष माप निकाला जाता है। यह सापेक्ष माप चतुर्थक विचलन गुणांक' कहलाता है। सूत्र निम्न प्रकार है Coeffi. of QD = \( \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \)
In simple words: अंतर चतुर्थक विस्तार (IQR) Q3 और Q1 का अंतर है, चतुर्थक विचलन (QD) IQR का आधा है, और चतुर्थक विचलन गुणांक (CQD) QD का एक सापेक्ष माप है जो विभिन्न डेटा सेटों की तुलना के लिए उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: चतुर्थक विस्तार और विचलन चरम मानों से प्रभावित नहीं होते हैं, जो उन्हें कुछ स्थितियों में विस्तार से बेहतर बनाते हैं। इनके सूत्रों और गणना प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. माध्य विचलन (Mean Deviation) किसे कहते हैं? माध्य विचलन के गुण व दोष बताइए ।
Answer:
किसी श्रेणी का माध्य विचलन श्रेणी के सभी पद मूल्यों के वास्तविक माध्य से लिए गए विचलनों कैं। समान्तर माध्य होता है। मूल्यों के विचलन निकालते समय + चिह्नों को छोड़ दिया जाता है।
माध्य विचलन के गुण-
- माध्य विचलन एक उत्तम विधि है क्योंकि यह किसी भी माध्य द्वारा निकाला जा सकता है।
- यह विचलन ज्ञात करने की एक सरल विधि है।
- माध्य विचलन श्रेणी के सभी पदों पर आधारित होने के कारण अन्य मापों से श्रेष्ठ होता है।
- इस माध्य द्वारा श्रेणी की बनावट के बारे में भी मालूम किया जा सकता है।
- यह प्रमाप विचलने की तुलना में चरम मूल्यों से कम प्रभावित होता है।
- यह वितरण के महत्त्व को स्पष्ट करने वाली माप है।
- इसका प्रयोग आर्थिक, व्यापारिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में पर्याप्त होता है।
माध्य विचलन के दोष-
- चूँकि यह विभिन्न माध्यों से ज्ञात किया जाता है; अतः यह एक अनिश्चित माप है।
- इसमें (+) और (-) चिह्नों को छोड़ दिया जाता है, इसलिए यह माप गणितीय दृष्टि से अशुद्ध है।
- इसका बीजीय विवेचन संभव नहीं है।
- विभिन्न माध्यों से ज्ञात माध्य विचलनों में समानता नहीं होती।
In simple words: माध्य विचलन, केंद्रीय मान से डेटा मानों के औसत निरपेक्ष विचलन को मापता है; यह एक सरल, सभी मूल्यों पर आधारित और चरम मूल्यों से कम प्रभावित माप है, लेकिन यह चिन्हों की उपेक्षा करने के कारण गणितीय रूप से अशुद्ध और अस्थिर होता है।
🎯 Exam Tip: माध्य विचलन के गुण और दोष को समझना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से निरपेक्ष मानों का उपयोग करने का प्रभाव और इसकी गणितीय अशुद्धता।
Question 5. प्रमाप विचलन किसे कहते हैं? प्रमाप विचलन की विशेषताएँ बताइए ।
Answer:
प्रमाप विचलन अपकिरण की एक आदर्श माप है। इसका आशय उसा माप से होता है जो कि पदों के समान्तर माध्य से लिए गए विचलनों के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है । विशेषताएँ-
- इसके अंतर्गत विचलन सदैव समान्तर माध्य से ही लिए जाते हैं क्योंकि यह माध्य से केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वश्रेष्ठ माप समझा जाता है।
- इस माप के अंतर्गत बीजगणितीय चिह्न (+) तथा (-) को छोड़ा नहीं जाता बल्कि मूल्यों का वर्ग करने पर वे स्वयं ही धनात्मक हो जाते हैं।
- विचलनों के वर्गों के योग में पदों की संख्या का भाग दिया जाता है तथा प्राप्त मूल्य का वर्गमूल निकाला जाता है। यही प्रमाप विचलन होता है।
In simple words: प्रमाप विचलन केंद्रीय माध्य से डेटा मानों के विचलनों के वर्गों के औसत का वर्गमूल है, जो एक आदर्श अपकिरण माप है क्योंकि यह सभी मूल्यों का उपयोग करता है, बीजगणितीय रूप से सटीक है, और चिन्हों को बनाए रखता है।
🎯 Exam Tip: प्रमाप विचलन को अपकिरण का सबसे विश्वसनीय माप माना जाता है, इसकी गणना विधि (वर्ग, औसत, वर्गमूल) और बीजगणितीय गुणों पर ध्यान दें।
Question 6. प्रमाप विचलन के गुण व दोष बताइए ।
Answer:
प्रेमाप विचलन के गुण-
1. यह श्रेणी के सभी मूल्यां पर आधारित होता है।
2. यह विशुद्ध गणितीय विधि पर आधारित है; अत: उच्चतर गणितीय रीतियों में इसका काफी प्रयोग होता है।
3. अपकिरण की अन्य मापों की अपेक्षा प्रमाप विचलन पर निदर्शन परिवर्तनों का सबसे कम प्रभाव होता है।
4. यह अपकिरण का एक स्पष्ट और निश्चित माप है जो प्रत्येक स्थिति में ज्ञात किया जा सकता है।
5. इसके द्वारा सामान्य वक्र के क्षेत्र का निर्धारण स्पष्ट रूप से हो जाता है।
6. इसका बीजीय विवेचन संभव है।
7. अपकिरण का निम्नलिखित क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोग किया जाता है
- विभिन्न समूहों के विचरण की तुलना करने में।
- दैव न्यादर्शों में विभिन्न मापों की अर्थपूर्णता की जाँच करने में।
- प्रसामान्य वक्र के अधीनस्थ क्षेत्रफल की जाँच करने में।
- सहसंबंध विश्लेषण में ।
- श्रेणी में मूल्य वितरण की सीमाएँ निर्धारित करने में।
प्रमाप विचलन के दोष-
- अन्य मापों की अपेक्षा समझने में यह कठिन है।
- यह चरम मूल्यों को अत्यधिक महत्त्व देता है।
In simple words: प्रमाप विचलन एक गणितीय रूप से सटीक, विश्वसनीय और सभी मूल्यों पर आधारित माप है जो विभिन्न सांख्यिकीय विश्लेषणों में उपयोगी है, लेकिन इसकी गणना थोड़ी जटिल है और यह चरम मानों को अधिक महत्व देता है।
🎯 Exam Tip: प्रमाप विचलन के व्यापक उपयोग और गणितीय शुद्धता के गुणों पर जोर दें, जबकि इसकी गणना की जटिलता और चरम मानों के प्रति संवेदनशीलता को दोष के रूप में हाइलाइट करें।
Question 7. लॉरेज वक्र क्या है? इसके गुण व दोष बताइए ।
Answer:
लॉरेंज वक्र अपकिरण ज्ञात करने की एक बिंदुरेखीय रीति है। इसे संचयीप्रतिशत वक्र भी कहते हैं।
गुण -
- यह आकर्षक व प्रभावशाली होता है।
- यह समझने में सरल है।
- इसकी सहायता से दो या दो से अधिक श्रेणियों की अपकिरण की मात्रा की तुलना की जा सकती है।
- इससे मस्तिष्क पर बोझिल अंकों का भार नहीं पड़ता ।
दोष -
- इससे अपकिरण का अंकात्मक माप ज्ञात नहीं होता।
- इसे बनाने की क्रिया कठिन है और इसे बनाने से पहले श्रेणी में काफी संशोधन करना पड़ता है।
In simple words: लॉरेंज वक्र आय या धन के वितरण में असमानता को ग्राफिक रूप से दर्शाने वाला एक आकर्षक और समझने में सरल उपकरण है जो तुलनात्मक अध्ययन में मदद करता है, लेकिन यह संख्यात्मक माप प्रदान नहीं करता और इसकी गणना प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
🎯 Exam Tip: लॉरेंज वक्र के दृश्य प्रतिनिधित्व और तुलनात्मक लाभों पर ध्यान दें, साथ ही इसके संख्यात्मक मूल्य की कमी और तैयारी की जटिलता को दोषों के रूप में इंगित करें।
Question 8. विचरण गुणांक क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
Answer:
विचरण गुणांक, Coefficient of Variation)-दो या दो से अधिक श्रेणियों में विचलन की तुलना करने के लिए विचरण गुणांक का प्रयोग किया जाता है। यह माप विचलन गुणांक का प्रतिशत रूप है। दूसरे शब्दों में, प्रमाप विचलन को समान्तर माध्य से भाग देकर भजनफल में 100 की गुणा करने से प्राप्त प्रतिशत ही 'विचरण गुणांक' होता है। सूत्र रूप में
Coeffi. of V. = \( \frac{\sigma}{\overline{X}} \times 100 \)
निर्वचन – जिस समंक श्रेणी का विचरण गुणांक अधिक होता है उसमें विचरण अधिक होता है और वह श्रेणी अधिक अस्थिर व असंगत मानी जाती है। इसके विपरीत, जिस श्रेणी में विचरण गुणांक कम होता है, वह अधिक स्थिर व संगत मानी जाती है।
In simple words: विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है, जो दो या अधिक डेटा सेटों के सापेक्ष फैलाव की तुलना करने के लिए उपयोग किया जाता है; उच्च विचरण गुणांक अधिक अस्थिरता दर्शाता है, जबकि कम गुणांक अधिक स्थिरता।
🎯 Exam Tip: विचरण गुणांक (CV) एक सापेक्ष माप है जो विभिन्न डेटा सेटों की तुलना के लिए महत्वपूर्ण है। सूत्र और इसका निर्वचन (उच्च CV अधिक परिवर्तनशीलता) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. अपकिरण अथवा परिक्षेपण का क्या अर्थ है? अपकिरण को माप करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
या
अपकिरण का अर्थ एवं उददेश्य बताइए। सापेक्ष व निरपेक्ष अपकिरण से क्या आशय है?
अपकिरण के माप द्वितीय श्रेणी के माध्य क्यों कहलाते हैं?
Answer:
अपकिरण का अर्थ एवं परिभाषा
अपकिरण शब्द का दो अर्थों में प्रयोग किया जाता है। प्रथम अर्थ में, अपकिरण से तात्पर्य समंक श्रेणी के सीमान्त मूल्यों के अन्तर या सीमा विस्तार से है। दूसरे अर्थ में, अपकिरण श्रेणी के मध्य से निकाले गए विभिन्न पदों के विचलनों का माध्य' है। अपकिरण की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं
1. डॉ० बाउले के अनुसार-“अपकिरण पदों के विचरण या अन्तर का माप है।”
2. कॉनर के अनुसार-“जिस सीमा तक व्यक्तिगत पद मूल्यों में भिन्नता होती है, उसके माप को अपकिरण कहते हैं।'
द्वितीय श्रेणी के माध्य – अपकिरण के माप ज्ञात करते समय पहले श्रेणी का सांख्यिकीय माध्य निकाला जाता है, फिर उस माध्य से विभिन्न मूल्यों के विचलनों का माध्य ज्ञात किया जाता है। माध्य से निकाले गए विचलनों का माध्य होने के कारण अपकिरण माप 'द्वितीय श्रेणी के माध्य' कहलाते हैं।
निरपेक्ष व सापेक्ष अपकिरण
जब किसी श्रेणी के विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उस श्रेणी की इकाई में ही ज्ञात किया जाता है तो वह अपकिरण का निरपेक्ष माप कहलाता है। इस निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग देने पर जो अनुपात या प्रतिशत आता है, वह 'अपकिरण का सापेक्ष माप' कहलाता है।
अपकिरण के उद्देश्य
अपकिरण के माप के निम्नलिखित उद्देश्य हैं
- श्रेणी के माध्य से विभिन्न पद मूल्यों की औसत दूरी ज्ञात करना।
- श्रेणी की बनावट के बारे में सूचना प्राप्त करना।
- पद मूल्यों का सीमा विस्तार ज्ञात करना।
- तुलनात्मक अध्ययन द्वारा यह जानना कि किसमें विचरण की मात्रा अधिक हैं।
- यह देखना कि माध्य द्वारा श्रेणी का किस सीमा तक प्रतिनिधित्व होता है।
अपकिरण ज्ञात करने की रीतियाँ
अपकिरण ज्ञात करने की निम्नलिखित रीतियाँ हैं (अ) सीमा रीति (Methods of limits)-
1. विस्तार या परास (Range),
2. अन्तर चतुर्थक विस्तार (Inter quartile range),
3. शतमक विस्तार (Percentile range)।
In simple words: अपकिरण डेटा के फैलाव या बिखराव का माप है, जिसका उद्देश्य डेटा की केंद्रीय प्रवृत्ति से औसत दूरी, संरचना और सीमा विस्तार को समझना है। इसे निरपेक्ष (मूल इकाई में) और सापेक्ष (अनुपात/प्रतिशत में) दोनों तरह से मापा जा सकता है, और इसे 'द्वितीय श्रेणी के माध्य' भी कहते हैं क्योंकि इसकी गणना माध्य से विचलनों पर आधारित होती है।
🎯 Exam Tip: अपकिरण की परिभाषा, उसके उद्देश्यों, निरपेक्ष और सापेक्ष मापों के बीच के अंतर, और विभिन्न गणना विधियों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
(ब) विचलन माध्य रीति (Method of averaging deviations)
1. चतुर्थक विचलन (Quartile deviation),
2. माध्य विचलन (Mean deviation),
3. प्रमाप विचलन (Standard deviation),
4. विचरण गुणांक (Coefficient of variation)।
(स) बिन्दुरेखीय रीति (Graphic method), लॉरेंज वक्र (Lorenz curve)।
Question 2. विस्तार (परास) एवं विस्तार गुणांक क्या है? उदाहरणों की सहायता से इसकी गणन प्रक्रिया को समझाइए ।
Answer:
विस्तार अथवा परास (Range)
किसी समंकमाला में 'सबसे बड़े पद' तथा 'सबसे छोटे पद' के मूल्य के अन्तर को 'विस्तार' कहते हैं। यह अपकिरण की प्रारम्भिक माप है। इसे दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है-
- समंकमाला के सबसे अधिक मूल्य तथा सबसे कम मूल्य के अन्तर के रूप में अथवी
- समंकमाला के सबसे अधिक तथा सबसे कम मूल्य के रूप में।
उदाहरण के लिए, एक फार्म में 50 कर्मचारी कार्य करते हैं जिनके मासिक वेतन 1200 से लेकर Rs. 400 तक हैं, तो कहा जा सकता है कि वेतनों का विस्तार 1200 - 400 = Rs. 800 है। सूत्र रूप में विस्तार = अधिकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य (Range = Largest Value - Smallest Value) अर्थात् R = L - S = 1200 - 400 = 800
विस्तार गुणांक (Coefficient of Range) – विस्तार अपकिरण की निरपेक्ष माप है जबकि विस्तार गुणांक अपकिरण की सापेक्ष माप है। विस्तार गुणांक श्रृंखलाओं को तुलनीय बनाता है। यह श्रृंखला के सबसे बड़े मूल्य (L) तथा सबसे छोटे मूल्य (S) के अन्तर (L - S) तथा इनके योग (L+ S) का अनुपात है। इसका सूत्र निम्न प्रकार है
विस्तार गुणांक (CR) – \( \frac{L-S}{L+S} \)
यहाँ, L = श्रृंखला का अधिकतम मूल्य
S = श्रृंखला का न्यूनतम मूल्य
उपर्युक्त उदाहरण के अनुसार,
CR = \( \frac{1200-400}{1200+400} = \frac{800}{1600} = 0.5 \)
CR=0.5
विभिन्न सांख्यिकीय श्रृंखलाओं के विस्तार तथा विस्तार गुणांक की गणना 1. व्यक्तिगत श्रृंखला और विस्तार - सबसे बड़ी संख्या तथा सबसे छोटी संख्या का अंतर ही विस्तार (Range) कहलाता है।
उदाहरण 1. निम्नलिखित समंकों में विस्तार व विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए
10 72 36 85 35 52 76
हल :
विस्तार (R) = L - S यहाँ, L = 85, S = 35 अतः विस्तार = 85 -35 = 50 R=50 विस्तार गणंख (CR) = \( \frac{L-S}{L+S} = \frac{85-35}{85+35} = \frac{50}{120} = 0.417 \)
CR = 0.417
In simple words: विस्तार डेटा के उच्चतम और निम्नतम मान का अंतर है, जबकि विस्तार गुणांक इस अंतर का उच्चतम और निम्नतम मानों के योग से अनुपात है, जो विभिन्न डेटा सेटों की सापेक्ष परिवर्तनशीलता की तुलना करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विस्तार की गणना सरल है (L-S), लेकिन विस्तार गुणांक (L-S)/(L+S) सापेक्ष तुलना के लिए अधिक उपयोगी है; दोनों की गणना प्रक्रिया और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
2. खण्डित आवृत्ति श्रृंखला और विस्तार इसमें सबसे बड़ी मद (Items) एवं सबसे छोटी मद का अंतर निकाला जाता है। इसमें आवृत्तियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
उदाहरण 2. निम्नलिखित श्रेणी से विस्तार और विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए
आकार : 4.5 5.5 6.5 7.5 8.5 9.5 10.5
आवृत्ति : 4 5 7 10 8 9 3
हल-सूत्र : R = L - S
यहाँ, L = 10.5,
S = 4.5
= 10.5-4.5 = 6
R = 6
CR \( = \frac{L-S}{L+S} = \frac{10.5-4.5}{10.5+4.5} = \frac{6}{15} = 0.4 \)
3. अखण्डित श्रृंखला में विस्तार – इस श्रृंखला में विस्तार ज्ञात करने के लिए दो विधियों का प्रयोग किया जाता है
(अ) प्रथम विधि – इस विधि में सर्वप्रथम मदों के वर्गांतर के मध्य मूल्य को ज्ञात किया जाता है। मध्य मूल्यों की अधिकतम तथा न्यूनतम संख्याओं का अंतर ही विस्तार कहलाता है।
उदाहरण 3. निम्नलिखित श्रेणी में विस्तार व विस्तार गुणक ज्ञात कीजिए
आकार : 0-10 10-20 20-30 30-40 40-50 50-60 60-70
आवृत्ति : 1 3 5 12 8 4 2
हल-
| आकार | मध्य मूल | आवृत्ति |
|---|---|---|
| 0-10 | 5 | 1 |
| 10-20 | 15 | 3 |
| 20-30 | 25 | 5 |
| 30-40 | 35 | 12 |
| 40-50 | 45 | 8 |
| 50-60 | 55 | 4 |
| 60-70 | 65 | 2 |
R = L-S = 65-5 = 60
R = 60
CR \( = \frac{L-S}{L+S} = \frac{65-5}{65+5} = \frac{60}{70} = 0.857 \)
CR = 0.857
(ब) द्वितीय विधि - इसमें आवृत्ति वितरण की प्रथम वर्गांतर की निचली सीमा तथा अन्तिम वर्गातर की. उच्चतम सीमा का अंतर निकाल लिया जाता है। इन दोनों सीमाओं के अंतर को विस्तार कहते हैं।
उदाहरण 3 के अनुसार -
R = L-S = 70-0 = 70
R = 70
CR \( = \frac{L-S}{L+S} = \frac{70-0}{70+0} = \frac{70}{70} = 1 \)
CR = 1
In simple words: खंडित और अखंडित श्रृंखला में विस्तार की गणना सबसे बड़े और सबसे छोटे मानों का उपयोग करके की जाती है, जबकि विस्तार गुणांक इन मानों के अंतर और योग का अनुपात होता है, जिसे विभिन्न विधियों से परिकलित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: खंडित और अखंडित श्रृंखला के लिए विस्तार और विस्तार गुणांक की गणना में मध्य मूल्यों या वर्ग सीमाओं का उपयोग कैसे किया जाता है, इस पर ध्यान दें, विशेष रूप से विभिन्न विधियों को समझना महत्वपूर्ण है।
नोट – खण्डित तथा अखण्डित श्रेणी में विस्तार व विस्तार गुणांक ज्ञात करने के लिए आवृत्तियों का उपयोग नहीं होता। यदि अखण्डित श्रेणी समावेशी आधार पर दी हुई है तो उसे पहले समावेशी बना लेनी चाहिए।
Question 3. अंतर चतुर्थक विस्तार (QR), चतुर्थक विचलन (QD) तथा चतुर्थक विचलन गुणांक (CQD) क्या हैं? उदाहरणों की सहायता से इनकी गणन प्रक्रिया समझाइए ।
Answer:
अंतर चतुर्थक विस्तार (Inter Quartile Range)
सूत्र – IQR = Q3 - Q1
यहाँ, IQR = अंतर चतुर्थक विस्तार
Q3 = तृतीय चतुर्थक
Q1 = प्रथम चतुर्थक
गणन विधि -
- सर्वप्रथम तृतीय व प्रथम चतुर्थक ज्ञात किए जाते हैं।
- उपर्युक्त सूत्र का प्रयोग करके अंतर चतुर्थक विस्तार ज्ञात किया जाता है।
चतुर्थक विचलन
चतुर्थक विचलन श्रेणी के चतुर्थ मूल्यों (तृतीय, चतुर्थक एवं प्रथम चतुर्थक) पर आधारित एक माप है। यह श्रेणी के तृतीय व प्रथम चतुर्थक के अंतर का आधा होता है । \( QD = \frac{Q_3-Q_1}{2} \)
चतुर्थक विचलन गुणांक
चतुर्थक विचलन गुणांक अपकिरण की सापेक्ष माप है। इसे ज्ञात करने के लिए तीसरे तथा पहले चतुर्थकों के अंतर के आधे को इनके योग के आधे से भाग कर देते हैं। \( CQD = \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \)
चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक की विभिन्न
सांख्यिकीय श्रृंखलाओं में गणना
1. व्यक्तिगत श्रृंखला – व्यक्तिगत श्रृंखला में चतुर्थक विचलन निकालने के लिए पहले प्रथम चतुर्थक तथा तृतीय चतुर्थक को निम्नलिखित सूत्रों की सहायता से ज्ञात किया जाता है
\( Q1 = \text{Size of } \frac{(N+1)}{4} \text{th item} \)
\( Q3 = \text{Size of } \frac{3(N+1)}{4} \text{th item} \)
इसके पश्चात् निम्नलिखित सूत्रों की सहायता से चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक ज्ञात किया जाता है
In simple words: अंतर चतुर्थक विस्तार (IQR) Q3 और Q1 के बीच का अंतर है। चतुर्थक विचलन (QD) इस अंतर का आधा है। चतुर्थक विचलन गुणांक (CQD) QD का एक सापेक्ष माप है, जो Q3 और Q1 के अंतर को उनके योग से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है, और यह डेटा सेट की तुलना करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: IQR, QD और CQD की परिभाषाओं और उनके गणना सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये चरम मानों से अप्रभावित फैलाव के महत्वपूर्ण माप हैं।
\( QD = \frac{Q_3-Q_1}{2} \)
\( CQD = \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \)
उदाहरण 1. निम्नलिखित आँकड़ों का अंतर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक ज्ञात कीजिए
आकार: 15 12 9 8 6 14 10
हल :
सर्वप्रथम श्रेणी को आरोही या अवरोही क्रम में रखेंगे और उसके उपरांत गणन क्रिया आरंभ करेंगे। अतः
| क्रम संख्या : | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आकार : | 6 | 8 | 9 | 10 | 12 | 14 | 15 |
\( \text{प्रथम चतुर्थक } Q1 = \text{Size of } \frac{(N+1)}{4} \text{th item} \)
\( = \text{Size of } \frac{(7+1)}{4} \text{th item} \)
\( = \text{Size of 2nd item} = 8 \)
Q1 = 8
\( \text{तृतीय चतुर्थक } Q3 = \text{Size of } \frac{3(N+1)}{4} \text{th item} \)
\( = \text{Size of } \frac{3(7+1)}{4} \text{th item} \)
\( = \text{Size of } \frac{24}{4} \text{th item} \)
\( = \text{6th item} = 14 \)
Q3 = 14
अंतर चतुर्थक विस्तार (IQR) = Q3 - Q1
= 14 - 8 = 6
IQR = 6
चतुर्थक विचलन (QD) \( = \frac{Q3-Q1}{2} = \frac{14-8}{2} = \frac{6}{2} = 3 \)
QD = 3
चतुर्थक विचलन गुणांक (CQD) \( = \frac{Q3-Q1}{Q3+Q1} = \frac{14-8}{14+8} = \frac{6}{22} = 0.272 \)
CQD = 0.272
2. खण्डित आवृत्ति श्रृंखला – खण्डित श्रृंखला में Q तथा Q5 संचयी आवृत्तियों की सहायता से ज्ञात की जाती हैं। सूत्र व्यक्तिगत श्रृंखला की भाँति ही है।
उदाहरण 2. निम्नलिखित समंकों से अंतर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक ज्ञात कीजिए
प्राप्तांक : 15 16 17 18 19 20 21
विद्यार्थियों की संख्या : 4 6 10 15 11 9 5
In simple words: दिए गए डेटा सेटों के लिए, IQR Q3 और Q1 के बीच का अंतर है, QD IQR का आधा है, और CQD Q3 और Q1 के अंतर को उनके योग से विभाजित करने पर प्राप्त होता है, जो डेटा के फैलाव का माप प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: चतुर्थकों की गणना करते समय डेटा को आरोही क्रम में व्यवस्थित करना और N+1/4 सूत्र का सही ढंग से उपयोग करना महत्वपूर्ण है। खंडित श्रृंखला में, संचयी आवृत्ति का उपयोग करके चतुर्थक स्थिति का निर्धारण किया जाता है।
उदाहरण 3. निम्नलिखित समंकों में अंतर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक ज्ञात कीजिए
हल :
सर्वप्रथम संचयी आवृत्ति ज्ञात की जाएगी।
| प्राप्तांक x | विद्यार्थियों की संख्या (आवत्ति f) | संचयी आवृत्ति (c.f.) |
|---|---|---|
| 15 | 4 | 4 |
| 16 | 6 | 10 |
| 17 | 10 | 20 |
| 18 | 15 | 35 |
| 19 | 11 | 46 |
| 20 | 9 | 55 |
| 21 | 5 | 60 |
\[ Q_1 = \text{Size of } \frac{N+1}{4} \text{ th item} \]
\[ = \text{Size of } \frac{60+1}{4} \text{ th item} \]
= 15.25 th item जो संचयी आवृत्ति 20 में आता है। अतः इसके सामने वाला पद 17 ही Q1 है।
अतः Q1 = 17
Q1 = 17
\[ Q_3 = \text{Size of } \frac{3(N+1)}{4} \text{ th item} \]
\[ = \text{Size of } \frac{3(60+1)}{4} \text{ th item} \]
= 45.75 th item जो संचयी आवृत्ति 46 में आता है। अतः इसके सामने वाला पद 19 ही Q3 है।
अतः Q3 = 19
(i) IQR = Q3 - Q1
= 19-17=2
IQR = 2
(ii) \[ QD = \frac{Q_3-Q_1}{2} \]
\[ = \frac{19-2}{2} \]
= 1
QD = 1
(iii) \[ CQD = \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \]
\[ = \frac{19-17}{19+17} \]
\[ = \frac{2}{36} \]
= 0.055
CQD = 0.055
3. अखण्डित श्रृंखला - इसकी प्रक्रिया को निम्नांकित उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया गया है
उदाहरण 3. निम्नलिखित समंकों में अंतर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक ज्ञात कीजिए
हल :
| वर्ग-अन्तराल (Class Interval) | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (c.f.) |
|---|---|---|
| 0-10 | 5 | 5 |
| 10-20 | 3 | 8 |
| 20-30 | 7 | 15 |
| 30-40 | 5 | 20 |
| 40-50 | 10 | 30 |
| 50-60 | 3 | 33 |
| 60-70 | 2 | 35 |
| N = 35 |
= 8.75th item
चूँकि यह 20-30 वर्गान्तर में है; अतः
\[ Q_1 = l_1 + \frac{\frac{N}{4}-c.f.}{f} \times i \] \[ = 20 + \frac{8.75-8}{7} \times 10 \] \[ = 20 + \frac{0.75 \times 10}{7} \] \[ = 20 + \frac{7.5}{7} \] = 20 +1.07 = 21.07
Q1 = 21.07
\[ Q_3 = \text{Size of } \frac{3(N)}{4} \text{ th item} \] \[ = \text{Size of } \frac{3 \times 35}{4} \text{ th item} \] \[ = \frac{105}{4} \] = 26.25 th item
चूँकि यह 40-50 वर्गान्तर में है; अतः
\[ Q_3 = l_1 + \frac{\frac{3(N)}{4}-c.f.}{f} \times i \] \[ = 40 + \frac{26.25-20}{10} \times 10 \] \[ = 40 + \frac{6.25 \times 10}{10} \] = 40 + 6.25 = 46.25
Q3 = 46.25
IR = Q3- Q1
= 46.25-21.07
= 25.18
IR = 25.18
\[ QD = \frac{Q_3-Q_1}{2} \] \[ = \frac{46.25-21.07}{2} \] \[ = \frac{25.18}{2} \] = 12.59
QD = 12.59
\[ CQD = \frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1} \] \[ = \frac{46.25-21.07}{46.25+21.07} \] \[ = \frac{25.18}{67.32} \] = 0.374
CQD = 0.374
Question 4. माध्य विचलन (Mean Deviation) व माध्य विचलन गुणांक (Coeff. of Mean Deviation) किसे कहते हैं? उदाहरणों की सहायता से माध्य विचलन की प्रक्रिया को समझाइए ।
Answer: माध्य विचलन (Mean Deviation)
माध्य विचलने का अभिप्राय विचलनों के समान्तर माध्य से होता है। जब किसी श्रेणी या समूह के किसी औसत (माध्य, मध्यिका या भूयिष्ठक) से उस श्रेणी के व्यक्तिगत पदों के विचलन लिए जाते हैं और विचलनों का समान्तर माध्य ज्ञात किया जाता है तो उसे 'माध्य विचलन' कहते हैं। माध्य विचलन को 'प्रथम अपकिरण घात' (First movement of dispersion) भी कहते हैं। क्लार्क तथा शैकाडे के अनुसार-"श्रृंखला के किसी सांख्यिकीय माध्य (समान्तर माध्य, मध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गए विभिन्न मूल्यों के विचलनों के समान्तर माध्य को उसका माध्य विचलन कहा जाता है।" नोट - माध्य विचलन की गणन के लिए सभी विचलनों को धनात्मक माना जाता है।
सूत्र -
(i) \( \text{MD}_M = \frac{\Sigma|d_m|}{N} \) (मध्यिका से विचलन)
(ii) \( \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma|d_x|}{N} \) (समान्तर माध्य से विचलन)
(iii) \( \text{MD}_Z = \frac{\Sigma|d_z|}{N} \) (भूयिष्ठक से विचलन)
माध्य विचलन गुणांक
माध्य विचलन गुणांक अपकिरण की सापेक्ष माप है। इसकी गणना के लिए माध्य विचलने को उसके माध्य या मध्यिका या भूयिष्ठक से भाग कर दिया जाता है। जिसके द्वारा माध्य विचलन की गणना की जाती है। सूत्रे - माध्य से माध्य विचलन गुणांक
(i) C. of \( \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\text{MD}_{\overline{X}}}{\overline{X}} \)
(ii) C. of \( \text{MD}_M = \frac{\text{MD}_M}{M} \)
(iii) C. of \( \text{MD}_Z = \frac{\text{MD}_Z}{Z} \)
विभिन्न श्रृंखलाओं में माध्य विंचलन व माध्य विचलन गुणांक की गणना
1. व्यक्तिगत श्रेणी
व्यक्तिगत श्रेणी में माध्य विचलन ज्ञात करने की प्रक्रिया निम्नवत् है
• सर्वप्रथम उस श्रेणी का समान्तर माध्य, मध्यिका या भूयिष्ठक निकाला जाता है।
• प्राप्त माध्यों में से किसी भी माध्य द्वारा श्रेणी के व्यक्तिगत पदों से विचलन लिए जाते हैं।
• विचलन लेते समय + और - चिह्नों को छोड़ दिया जाता है अर्थात् निरपेक्ष विचलन ज्ञात किए जाते हैं।
• सभी विचलनों के योग को श्रेणी के पदों की संख्या से विभाजित कर दिया जाता है। यही माध्य विचलन कहलाता है।
• सूत्रानुसार
(a) \( \text{MD}_M = \frac{\Sigma d_M}{N} \)
(b) \( \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma d_{\overline{X}}}{N} \)
(c) \( \text{MD}_Z = \frac{\Sigma d_Z}{N} \)
नोट - सुविधा की दृष्टि से माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए मध्यिका (Median) का ही प्रयोग करना चाहिए।
माध्य विचलन गुणांक
माध्य विचलन के निरपेक्ष माप को उसी माध्य से भाग देने पर जिससे कि विचलन लिए गए हैं, माध्य विचलन गुणांक प्राप्त हो जाता है। सूत्रानुसार
(i) समान्तर माध्य से माध्य विचलन गुणांक = \( \frac{\text{MD}_{\overline{X}}}{\overline{X}} \)
(ii) मध्यिका से माध्य विचलन गुणांक = \( \frac{\text{MD}_M}{M} \)
(iii) बहुलक से माध्य विचलन गुणांक = \( \frac{\text{MD}_Z}{Z} \)
उदाहरण 1. निम्नलिखित वेतनों में मध्य विचलन और इसके गुणांक की गणना कीजिए-
103, 50, 68, 110, 108, 105, 174, 103, 150, 200, 200, 225 103
हल :
सर्वप्रथम इन मूल्यों को आरोही क्रम में लिखा जाएगा
| क्रमांक | वेतन (Rs. में) | मध्यिका से विचलन 108 (± ignored) |
|---|---|---|
| 1 | 50 | 58 |
| 2 | 68 | 40 |
| 3 | 103 | 5 |
| 4 | 103 | 5 |
| 5 | 103 | 5 |
| 6 | 105 | 3 |
| 7 | 108 | 0 |
| 8 | 110 | 2 |
| 9 | 150 | 42 |
| 10 | 174 | 66 |
| 11 | 200 | 92 |
| 12 | 200 | 92 |
| 13 | 225 | 117 |
| \( \Sigma (d_M) = 527 \) |
= 108
M = 108
\[ \text{MD}_M = \frac{\Sigma d_M}{N} \] \[ = \frac{527}{13} \] = 40.54
MDM = 40.54
\[ \text{Coeffi. of MD}_M = \frac{\text{MD}_M}{M} \] \[ = \frac{40.54}{108} \] = 0.375
Coeffi. of MDM = 0.375
लघु रीति - व्यक्तिगत श्रेणी में माध्य विचलन लघु रीति द्वारा भी ज्ञात किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है
मध्यिका से माध्य विचलन निकालना
• सर्वप्रथम मध्यिका की गणना की जाती है जिससे विचलन लेने हैं।
• मध्यिका मूल्य से अधिक मूल्यों का योग (\( \Sigma X_A \)) ज्ञात कर लिया जाता है। इसी प्रकार मध्यिका पद से कम मूल्यों का योग (\( \Sigma X_B \)) ज्ञात कर लिया जाता है।
• निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है \( \text{MD}_M = \frac{\Sigma X_A - \Sigma X_B}{N} \)
मध्यिका के बाद के मूल्यों का योग मध्यिका से पहले के मूल्यों का योग
समान्तर माध्य विचलन निकालना
• सर्वप्रथम समान्तर माध्य (\( \overline{X} \)) ज्ञात किया जाता है।
• समान्तर माध्य से अधिक आकार वाले मूल्यों का जोड़ (EXA) तथा उससे कम आकार वाले मूल्यों का जोड़ (EXp) ज्ञात किया जाता है।
• समान्तर माध्य से अधिक आकार वाले पदों की संख्या (NA) तथा उससे कम आकार वाले पदों की संख्या (Ng) ज्ञात की जाती है। सूत्रानुसार - \( \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma X_A - \Sigma X_B - (N_A-N_B)\overline{X}}{N} \)
उदाहरण 2. निम्नलिखित कीमतों के लिए माध्य और मध्यिका से माध्य विचलन तथा इसका गुणांक ज्ञात कीजिए
210 220 225 225 225 235 240 250 270 280
हल :
| मूल्य (X) | माध्य से विचलन (dX) from 238 | मध्यिका से विचलन (dM) from 230 |
|---|---|---|
| 210 | 28 | 20 |
| 220 | 18 | 10 |
| 225 | 13 | 5 |
| 225 | 13 | 5 |
| 225 | 13 | 5 |
| 235 | 3 | 5 |
| 240 | 2 | 10 |
| 250 | 12 | 20 |
| 270 | 32 | 40 |
| 280 | 42 | 50 |
| N = 10, \( \Sigma X = 2,380 \) | \( \Sigma|d_{\overline{X}}| = 176 \) | \( \Sigma|d_M| = 170 \) |
\[ \text{मध्यिका (M) value of } \frac{N+1}{2} \text{ th item} = \text{value of } \frac{10+1}{2} \text{ th item} \] \[ = \text{value of } 5.5. \text{th item} \] \[ = \frac{225+235}{2} \] = 230
\[ \text{MD(Mean)} = \frac{\Sigma|d_{\overline{X}}|}{N} \] \[ = \frac{176}{10} \] = 17.6
\[ \text{MD}_M = \frac{\Sigma|d_M|}{N} \] \[ = \frac{170}{10} \] = 17
\[ \text{Coeffi. of MD}_{\overline{X}} = \frac{\text{M.D.}_{\overline{X}}}{\overline{X}} \] \[ = \frac{17.6}{238} \] = 0.074
\[ \text{Coeffi. of MD}_M = \frac{\text{MD}_M}{\text{Median}} \] \[ = \frac{17}{230} \] = 0.074
उदाहरण 3. लघु रीति द्वारा माध्य विचलन ज्ञात कीजिए
हल :
| क्रमांक | भार (X) | मध्यिका से विचलन 108 (± ignored) |
|---|---|---|
| 1 | 45 | |
| 2 | 47 | |
| 3 | 47 | |
| 4 | 49 | |
| 5 | 50 | |
| 6 | 53 | |
| 7 | 58 | |
| 8 | 59 | |
| 9 | 60 | |
| 468 |
M = 50
\[ \overline{X} = \frac{\Sigma X}{N} = \frac{468}{9} = 52 \] \( \overline{X}=52 \)
मध्यिका से माध्य विचलन-
M = 50
\( \Sigma X_A = 53 + 58 +59 + 60 = 230 \)
\( \Sigma X_B = 49 + 47 +47 + 45 = 188 \)
\[ \text{MD}_M = \frac{\Sigma X_A - \Sigma X_B}{N} \] \[ = \frac{230-188}{9} \]
\[ = \frac{42}{9} \] = 4.67
MDM = 4.67
माध्य से माध्य विचलन-
\( \overline{X} = 52 \)
\( \Sigma X_A = 53 + 58 +59 + 60 = 230 \)
\( \Sigma X_B = 50 + 59 +47 +47 + 45 = 238 \)
NA = 4
NB = 5
\[ \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma X_A - \Sigma X_B - (N_A-N_B)\overline{X}}{N} \] \[ = \frac{230-238-(4-5)52}{9} \] \[ = \frac{230-238+52}{9} \] \[ = \frac{-8+52}{9} \] \[ = \frac{44}{9} \] = 4.89
MDx = 4.89
2. खण्डित अथवा विच्छिन्न श्रेणी में माध्य विचलन ज्ञात करना
प्रत्यक्ष रीति - गणन क्रिया निम्नलिखित प्रकार से है
• सर्वप्रथम वह माध्य ज्ञात किया जाता है जिससे विचलन निकालना है।
• उस माध्य से प्रत्येक आकार को चिह्न रहित विचलन निकाल लिया जाता है। (| dM |) या (| dX |)
• विचलनों में आवृत्तियों की गुणा करके योग [\( \Sigma f |dM| \) या \( \Sigma f |dX| \)] लगा लिया जाता है।
• अंत में निम्नलिखित सूत्र को प्रयोग किया जाता है
(a) \( \text{MD}_M = \frac{\Sigma f|d_M|}{N} \)
(b) \( \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma f|d_{\overline{X}}|}{N} \)
(c) \( \text{MD}_Z = \frac{\Sigma f|d_Z|}{N} \)
माध्य विचलन गुणांक - माध्य विचलन गुणांक निकालने के लिए निरपेक्ष माप को उस माध्य से भाग दे दिया जाता है जिससे विचलन ज्ञात किए गए हैं; यथा
(i) \( \text{Coeffi. of MD}_M = \frac{\text{MD}_M}{M} \)
(ii) \( \text{Coeffi. of MD}_{\overline{X}} = \frac{\text{DM}_{\overline{X}}}{\overline{X}} \)
(iii) \( \text{Coeffi. of MD}_Z = \frac{\text{MD}_Z}{Z} \)
उदाहरण 4. निम्नलिखित समंकों से-
• अपकिरण का मध्यिका गुणांक (Median coefficient of dispersion) तथा
• अपकिरण का माध्य गुणांक (Mean coefficient of dispersion) निकालिए
हल :
प्रत्यक्ष रीति - सर्वप्रथम मध्यिका तथा समान्तर माध्य का परिगणन किया जाएगा
| पद का आकार (X) | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (c.f.) | आवृत्ति × आकार (f x X) |
|---|---|---|---|
| 4 | 2 | 2 | 8 |
| 6 | 4 | 6 | 24 |
| 8 | 5 | 11 | 40 |
| 10 | 3 | 14 | 30 |
| 12 | 2 | 16 | 24 |
| 14 | 1 | 17 | 14 |
| 16 | 4 | 21 | 64 |
| N = 21 | \( \Sigma fX = 204 \) |
M = 8
\[ \overline{X} = \frac{\Sigma X}{N} = \frac{204}{21} = 9.71 \] \( \overline{X} = 9.71 \)
माध्य विचलन की गणना
| X | f | M = 8 (ignoring ±) dM | f x |dM| | \( \overline{X} \) = 9.71 (ignoring ±) |d\( \overline{X} \)| | f x |d\( \overline{X} \)| |
|---|---|---|---|---|---|
| 4 | 2 | 4 | 8 | 5.71 | 11.42 |
| 6 | 4 | 2 | 8 | 3.71 | 14.84 |
| 8 | 5 | 0 | 0 | 1.71 | 8.55 |
| 10 | 3 | 2 | 6 | 0.29 | 0.87 |
| 12 | 2 | 4 | 8 | 2.29 | 4.58 |
| 14 | 1 | 6 | 6 | 4.29 | 4.29 |
| 16 | 4 | 8 | 32 | 6.29 | 25.16 |
| N = 21 | \( \Sigma f|d_M| = 68 \) | \( \Sigma f|d_{\overline{X}}| = 69.71 \) |
\[ \text{MD}_M = \frac{\Sigma f|d_M|}{N} \] \[ = \frac{68}{21} \] = 3.24
MDM = 3.24
मध्यिका से माध्य विचलन गुणांक-
\[ \text{Coefficient of MD}_M = \frac{\text{MD}_M}{M} \] \[ = \frac{3.24}{8} \] = 0.405
Coeffi. of MDM = 0.405
समान्तर माध्य-
\[ \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma f|d_{\overline{X}}|}{N} \] \[ = \frac{69.71}{21} \] = 3.32
MD\( \overline{X} \) = 3.32
समान्तर माध्य से माध्य विचलन गुणांक-
\[ \text{Coefficient of MD}_{\overline{X}} = \frac{\text{MD}_{\overline{X}}}{\overline{X}} \] \[ = \frac{3.32}{9.71} \] = 0.342
Coeffi. of MD\( \overline{X} \) = 0.342
लघु रीति द्वारा माध्य विचलन की गणना
| X | f | f x X | M = 8 \( \Sigma X_B = 6 \) | \( \overline{X} \) = 9.71 \( \Sigma fX_B = 6 \) |
|---|---|---|---|---|
| 4 | 2 | 8 | ||
| 6 | 4 | 24 | \( \Sigma fX_B = 32 \) | \( \Sigma fX_B = 72 \) |
| 8 | 5 | 40 | ||
| 10 | 3 | 30 | ||
| 12 | 2 | 24 | \( \Sigma fX_A = 132 \) | \( \Sigma fX_A = 132 \) |
| 14 | 1 | 14 | \( \Sigma f_A = 10 \) | \( \Sigma f_A = 10 \) |
| 16 | 4 | 64 | ||
| N = 21 |
MDM = 3.24
\[ \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma fX_A - \Sigma fX_B - (\Sigma f_A - \Sigma f_B)\overline{X}}{N} \] \[ = \frac{132-72-(10-11)9.71}{21} \] \[ = \frac{60+9.71}{21} \] \[ = \frac{69.71}{21} \] = 3.32
MD\( \overline{X} \) = 3.32
3. अविच्छिन्न श्रेणी
उदाहरण 5. 500 पात्रों के निम्न प्राप्तांक बंटन की सहायता से-
• माध्यिका से और
• समान्तर माध्य से माध्य विचलन ज्ञात कीजिए
हल :
सर्वप्रियम समांतर व माधियक की गणना की जाएगी
| प्राप्तांक | मध्य बिंदु (X) | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (c.f.) | आवृत्ति × आकार (f x X) |
|---|---|---|---|---|
| 5-15 | 10 | 3 | 3 | 30 |
| 15-25 | 20 | 8 | 11 | 160 |
| 25-35 | 30 | 15 | 26 | 450 |
| 35-45 | 40 | 20 | 46 | 800 |
| 45-55 | 50 | 25 | 71 | 1250 |
| 55-65 | 60 | 10 | 81 | 600 |
| 65-75 | 70 | 9 | 90 | 630 |
| 75-85 | 80 | 6 | 96 | 480 |
| 85-95 | 90 | 4 | 100 | 360 |
| N = 100 | \( \Sigma fX = 4760 \) |
यह 45-55 मध्यिका वर्ग में है।
\[ M = l_1 + \frac{\frac{N}{2}-c.f.}{f} \times i \] \[ = 45 + \frac{50-46}{25} \times 10 \] \[ = 45 + \frac{4 \times 10}{25} \] \[ = 45 + \frac{40}{25} \] = 45 + 1.6 = 46.60
M = 46.60
\[ \overline{X} = \frac{\Sigma X}{N} = \frac{4760}{100} = 47.60 \] \( \overline{X} = 47.60 \)
प्रत्यक्ष रीति द्वारा माध्य विचलन की गणना
| प्राप्तांक | मध्य बिंदु (X) | आवृत्ति (f) | M = 46.6 ± ignored |dM| | f x |dM| | \( \overline{X} \) = 47.6 ± ignored |d\( \overline{X} \)| | f x |d\( \overline{X} \)| |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 5-15 | 10 | 3 | 36.6 | 109.8 | 37.6 | 112.8 |
| 15-25 | 20 | 8 | 26.6 | 212.8 | 27.6 | 220.8 |
| 25-35 | 30 | 15 | 16.6 | 249.0 | 17.6 | 264.0 |
| 35-45 | 40 | 20 | 6.6 | 132.0 | 7.6 | 152.0 |
| 45-55 | 50 | 25 | 3.4 | 85.0 | 2.4 | 60.0 |
| 55-65 | 60 | 10 | 13.4 | 134.0 | 12.4 | 124.0 |
| 65-75 | 70 | 9 | 23.4 | 210.0 | 22.4 | 201.6 |
| 75-85 | 80 | 6 | 33.4 | 200.0 | 32.4 | 194.4 |
| 85-95 | 90 | 4 | 43.4 | 173.6 | 42.4 | 169.6 |
| N = 100 | \( \Sigma f|d_M| = 1506.2 \) | \( \Sigma f|d_{\overline{X}}| = 1499.2 \) |
MDM = 15.06
\[ \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma f|d_{\overline{X}}|}{N} \] \[ = \frac{1499.2}{100} \] = 14.99
MD\( \overline{X} \) = 14.99
लघु रीति द्वारा माध्य विचलन की गणना
| प्राप्तांक | मध्य बिंदु (X) | आवृत्ति (f) | आवृत्ति × आकार (f x X) | M = 46.6 \( \Sigma fX_B = 1440 \) | समान्तर माध्य से माध्य विचलन \( \overline{X} \) = 47.6 \( \Sigma fX_B = 1440 \) |
|---|---|---|---|---|---|
| 5-15 | 10 | 3 | 30 | ||
| 15-25 | 20 | 8 | 160 | \( \Sigma f_B = 46 \) | \( \Sigma f_B = 46 \) |
| 25-35 | 30 | 15 | 450 | ||
| 35-45 | 40 | 20 | 800 | ||
| 45-55 | 50 | 25 | 1250 | ||
| 55-65 | 60 | 10 | 600 | \( \Sigma f_A = 54 \) | \( \Sigma f_A = 54 \) |
| 65-75 | 70 | 9 | 630 | \( \Sigma fX_A = 3320 \) | \( \Sigma fX_A = 3320 \) |
| 75-85 | 80 | 6 | 480 | ||
| 85-95 | 90 | 4 | 360 | ||
| N = 100 |
\[ \text{MD}_M = \frac{\Sigma fX_A - \Sigma fX_B - (\Sigma f_A - \Sigma f_B)M}{N} \] \[ = \frac{3320-1440-(54-46)46.6}{100} \] \[ = \frac{1880-372.8}{100} \] \[ = \frac{1507.2}{100} \] = 15.07
MDM = 15.07
समान्तर माध्य से माध्य विचलन -
\[ \text{MD}_{\overline{X}} = \frac{\Sigma fX_A - \Sigma fX_B - (\Sigma f_A - \Sigma f_B)\overline{X}}{N} \] \[ = \frac{3320-1440-(54-46)47.6}{100} \] \[ = \frac{1880-380.8}{100} \] \[ = \frac{1499.2}{100} \] = 14.99
MD\( \overline{X} \) = 14.99
Question 5. विचरण गुणांक (Coefficient of variation) किसे कहते हैं? उदाहरण की सहायता से इसकी गणना विधि को समझाइए ।
Answer: विचरण गुणांक
विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है। यह किसी श्रृंखला पर आधारित अपकिरण गुणांक का 100 गुना होता है। दो या दो से अधिक श्रेणियों में अपकिरण की तुलना करने के लिए विचरण गुणांक का सहारा लिया जाता है। प्रमाप विचलन को समान्तर माध्य से भाग देकर भजनफल में 100 की गुणा करने से प्राप्त प्रतिशत विचरण गुणांक होता है।
कार्ल पियरसन के शब्दों में - "विचरण गुणांक माध्य में होने वाला प्रतिशत विचरण है। इसके लिए निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
C.V. = \( \frac{\sigma}{\overline{X}} \times 100 \)
C.V. = Coeffi. of ox 100
नोट - जिस समंक श्रेणी का विचरण गुणांक अधिक होता है, उसमें विचरण अधिक होता है और वह श्रेणी अधिक अस्थिर अथवा असंगत मानी जाती है। इसके विपरीत, जिस श्रेणी में विचरण गुणांक कम होता है, वह अधिक स्थिर, एकरूप, सजातीय अथवा संगत मानी जाती है। प्रमाप विचलन के विभिन्न उदाहरणों में दी गई तालिका के आधार पर हम विचरण
In simple words: Coefficient of Variation is a relative measure of dispersion, expressed as a percentage. It helps compare the variability between two or more datasets, indicating consistency: a lower CV suggests higher consistency.
🎯 Exam Tip: Understanding Coefficient of Variation is crucial for comparing consistency or variability across different datasets, a common application in statistical analysis questions. Ensure you know its formula and interpretation.
विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है। यह किसी श्रृंखला पर आधारित अपकिरण गुणांक का 100 गुना होता है। दो या दो से अधिक श्रेणियों में अपकिरण की तुलना करने के लिए विचरण गुणांक का सहारा लिया जाता है। प्रमाप विचलन को समान्तर माध्य से भाग देकर भजनफल में 100 की गुणा करने से प्राप्त प्रतिशत विचरण गुणांक होता है। कार्ल पियरसन के शब्दों में – “विचरण गुणांक माध्य में होने वाला प्रतिशत विचरण है। इसके लिए निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है C.V. = \( \frac { \sigma }{ \overline { X } } \times 100 \) C.V. = Coeffi. of ox 100 नोट – जिस समंक श्रेणी का विचरण गुणांक अधिक होता है, उसमें विचरण अधिक होता है और वह श्रेणी अधिक अस्थिर अथवा असंगत मानी जाती है। इसके विपरीत, जिस श्रेणी में विचरण गुणांक कम होता है, वह अधिक स्थिर, एकरूप, सजातीय अथवा संगत मानी जाती है। प्रमाप विचलन के विभिन्न उदाहरणों में दी गई तालिका के आधार पर हम विचरण गुणांक की गणना इस प्रकार कर सकते हैं सूत्र- C.V. = \( \frac { \sigma }{ \overline { X } } \times 100 \) उदाहरण 1- C.V. = \( \frac { 6.78 }{ 15 } \times 100 = 45.2 \) उदाहरण 2- C.V. = \( \frac { 5.97 }{ 51 } \times 100 = 11.7 \) उदाहरण 3- C.V. = \( \frac { 3.25 }{ 16.5 } \times 100 = 19.7 \) उदाहरण 4- C.V. = \( \frac { 3.25 }{ 16.5 } \times 100 = 19.7 \) उदाहरण 5- C.V. = \( \frac { 19.76 }{ 35.16 } \times 100 = 56.2 \)In simple words: The Coefficient of Variation (CV) measures how much dispersion there is relative to the mean. It helps compare variability between different datasets. A higher CV means more variability, while a lower CV means more consistency.
🎯 Exam Tip: Remember that Coefficient of Variation is a relative measure of dispersion, making it useful for comparing datasets with different units or means.
Question 6. उदाहरण 6. A तथा B टीम ने फुटबॉल मैच में निम्न प्रकार गोल किए
अपने खेल में कौन-सी टीम अधिक स्थिर है? हल :
Answer:
| गोलों की संख्या | खेले गए मैच | |
|---|---|---|
| टीम A | टीम B | |
| 0 | 27 | 17 |
| 1 | 9 | 9 |
| 2 | 8 | 6 |
| 3 | 5 | 5 |
| 4 | 4 | 3 |
| गोलों की संख्या (X) | विचलन A=2 (dx) | टीम A | टीम B | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आवृत्ति (f) | आवृत्ति \( \times \) विचलन (fd) | आवृत्ति \( \times \) विचलन वर्ग (fd\(^2\)) | आवृत्ति (f) | आवृत्ति \( \times \) विचलन (fd) | आवृत्ति \( \times \) विचलन वर्ग (fd\(^2\)) | ||
| 0 | -2 | 27 | -54 | 108 | 17 | -34 | 68 |
| 1 | -1 | 9 | -9 | 9 | 9 | -9 | 9 |
| 2 | 0 | 8 | 0 | 0 | 6 | 0 | 0 |
| 3 | +1 | 5 | +5 | 5 | 5 | +5 | 5 |
| 4 | +2 | 4 | +8 | 16 | 3 | +6 | 12 |
| \( \Sigma \)f = 53 | \( \Sigma \)fd = -50 | \( \Sigma \)fd\(^2\) = 138 | \( \Sigma \)f = 40 | \( \Sigma \)fd = -32 | \( \Sigma \)fd\(^2\) = 94 |
टीम A. समान्तर माध्य- \( \overline{X} = A + \frac{ \Sigma fd }{ N } \)
\( = 2 + \frac{ -50 }{ 53 } = 1.06 \)
प्रमाप विचलन - \( \sigma = \sqrt{ \frac{ \Sigma fd^2 }{ N } - \left( \frac{ \Sigma fd }{ N } \right)^2 } \)
\( = \sqrt{ \frac{ 138 }{ 53 } - \left( \frac{ -50 }{ 53 } \right)^2 } \)
\( = \sqrt{ 2.604 - 0.8899 } \)
\( = \sqrt{ 1.7141 } \)
\( = 1.31 \)
विचरण गुणांक - Coeffi. of V. = \( \frac{ \sigma }{ \overline{X} } \times 100 \)
\( = \frac{ 1.31 }{ 1.06 } \times 100 \)
\( = 123.6\% \)
टीम B. समान्तर माध्य- \( \overline{X} = A + \frac{ \Sigma fd }{ N } \)
\( = 2 + \frac{ -32 }{ 40 } = 1.2 \)
प्रमाप विचलन - \( \sigma = \sqrt{ \frac{ \Sigma fd^2 }{ N } - \left( \frac{ \Sigma fd }{ N } \right)^2 } \)
\( = \sqrt{ \frac{ 94 }{ 40 } - \left( \frac{ -32 }{ 40 } \right)^2 } \)
\( = \sqrt{ 2.35 - 0.64 } \)
\( = \sqrt{ 1.71 } \)
\( = 1.308 \)
विचरण गुणांक - Coeffi. of V. = \( \frac{ \sigma }{ \overline{X} } \times 100 \)
\( = \frac{ 1.308 }{ 1.2 } \times 100 \)
\( = 109\% \) अतः टीम B अपने खेल में अधिक स्थिर है।In simple words: To find which team is more consistent, we calculate the coefficient of variation (CV) for their scores. The team with the lower CV is considered more stable because their scores are less dispersed relative to their average. Here, Team B has a lower CV, indicating more stable performance.
🎯 Exam Tip: When comparing the consistency or variability of two different datasets, always use the Coefficient of Variation (CV) as it provides a relative measure, unlike standard deviation which is an absolute measure.
Question 7. लॉरेंज वक्र किसे कहते हैं? इसके गुण व दोष बताइए। एक उदाहरण की सहायता से उसकी गणन क्रिया व निर्माण विधि को समझाइए ।
Answer:लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve)
लॉरेंज वक्र अपकिरण ज्ञात करने की एक बिंदुरेखीय रीति है। इसे संचयी प्रतिशत वक्र (Cumulative Percentage Curve) भी कहते हैं। इसका प्रयोग सर्वप्रथम डॉ० मैक्स लॉरेंज ने आय और धन के वितरण का अध्ययन करने के लिए किया था।
गणन क्रिया व निर्माण विधि
(i) मूल्यों या मध्ये मूल्यों के संचयी योग ज्ञात करते हैं। फिर अन्तिम संचयी योग को 100 मानकर प्रत्येक संचयी मूल्य
को प्रतिशत में बदल देते हैं।
(ii) आवृत्तियों के संचयी योग ज्ञात करते हैं। फिर अन्तिम संचयी योग को 100 मानकर सभी आवृत्तियों को प्रतिशत में
बदल देते हैं।
(iii) संचयी मूल्यों के प्रतिशत y-axis पर तथा संचयी आवृत्तियों के प्रतिशत x-axis पर रखे जाते हैं।
(iv) y-axis का माप 0-100 तक तथा x-axis का माप 100-0 तक लिखा जाता है।
(v) x-axis के 0 तथा y-axis के 100 को एक सीधी रेखा द्वारा मिला दिया जाता है। इसे समान वितरण की रेखा
(Line of Equal Distribution) कहते हैं।
(vi) संचयी आवृत्तियों के प्रतिशत और संचयी मूल्यों के प्रतिशत बिन्दुओं को मिला दिया जाता है। इस प्रकार जो वक्र
तैयार होता है, उसे लॉरेंज वक्र कहते हैं।
निर्वचन (Interpretation) – लॉरेंज वक्र समान वितरण की रेखा से जितना अधिक दूर होगा, अपकिरण या वितरण में
असमानता उतनी ही अधिक होगी। इसके विपरीत, यह वक्र समान वितरण की रेखा से जितना अधिक निकट होगा,
अपकिरण की मात्रा उतनी ही कम होगी ।
गुण -
(i) यह आकर्षक व प्रभावशाली होता है।
(ii) यह समझने में सरल है।
(iii) इसकी सहायता से दो या दो से अधिक श्रेणियों की अपकिरण की मात्रा की तुलना की जा सकती है।
(iv) इससे मस्तिष्क पर बोझिल अंकों का भार नहीं पड़ता।
दोष -
(i) इससे अपकिरण का अंकात्मक माप ज्ञात नहीं होता।
(ii) इसे बनाने की क्रिया कठिन है और इसे बनाने से पहले श्रेणी में काफी संशोधन करना पड़ता है।
उदाहरण 1. दो कारखानों में मजदूरी वितरण की असमानताओं की तुलना करने के लिए लॉरेंज वक्र की रचना कीजिए
| आय (Rs. में) | कारखाना (A) | कारखाना (B) |
|---|---|---|
| 50 से कम | 600 | 500 |
| 50-100 | 425 | 450 |
| 100-200 | 360 | 480 |
| 200-300 | 150 | 220 |
| 300-400 | 65 | 150 |
हल-
| आय (MV) | संचयी योग | संचयी प्रतिशत (%) | कारखाना (A) | कारखाना (B) | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कर्मचारी | संचयी आवृत्ति (f) | संचयी प्रतिशत (%) | कर्मचारी | संचयी आवृत्ति (f) | संचयी प्रतिशत (%) | |||
| 25 | 25 | 3 | 600 | 600 | 37 | 500 | 500 | 28 |
| 75 | 100 | 12 | 425 | 1025 | 64 | 450 | 950 | 53 |
| 150 | 250 | 30 | 360 | 1385 | 87 | 480 | 1430 | 79 |
| 250 | 500 | 59 | 150 | 1535 | 96 | 220 | 1650 | 92 |
| 350 | 850 | 100 | 65 | 1600 | 100 | 150 | 1800 | 100 |
निर्वचन (Interpretation) - आय वितरण की दृष्टि से फैक्ट्री B अधिक समानता लिए हुए है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह आरेख लॉरेंज वक्र को दर्शाता है, जिसमें x-अक्ष पर कर्मचारियों का संचयी प्रतिशत और y-अक्ष पर आय का संचयी प्रतिशत दिखाया गया है। 'समवितरण रेखा' (Line of Equal Distribution) एक सीधी रेखा है जो पूर्ण समानता को दर्शाती है। दो वक्र - कारखाना A और कारखाना B के लिए - समवितरण रेखा से उनके विचलन को दिखाते हैं, जिससे आय वितरण में असमानता का पता चलता है। जो वक्र समवितरण रेखा के जितना करीब होता है, आय वितरण में उतनी ही अधिक समानता होती है।In simple words: The Lorenz Curve graphically represents income or wealth distribution. It plots the cumulative percentage of income against the cumulative percentage of the population. A curve closer to the line of perfect equality (a 45-degree diagonal line) indicates more equal distribution.
🎯 Exam Tip: When interpreting a Lorenz Curve, remember that the closer the curve is to the line of equality, the more equitable the distribution (e.g., income, wealth) is in that population or dataset. The area between the curve and the line of equality (Gini coefficient) quantifies this inequality.
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