UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions

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Detailed Chapter 8 रेडॉक्स अभिक्रियाएँ UP Board Solutions for Class 11 Chemistry

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Class 11 Chemistry Chapter 8 रेडॉक्स अभिक्रियाएँ UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions (अपचयोपचय अभिक्रियाएँ)

पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्नलिखित स्पीशीज में प्रत्येक रेखांकित तत्व की ऑक्सीकरण संख्या का निर्धारण कीजिए-
(क) NaH2PO4
(ख) Na HSO4
(ग) H4P2O7
(घ) K2MnO4
(ङ) CaO2
(च) NaBH4
(छ) H2S2O7
(ज) KAl(SO4).12H2O


Answer:
(क) माना P की ऑक्सीकरण संख्या x है। अणु में उपस्थित सभी तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या लिखने पर NaH2PO4 में Na की +1, H की +1, P की x और O की -2 है। किसी एक उदासीन अणु में उपस्थित सभी तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्याओं का योग शून्य होता है।
अतः \( (+1) + [(+1) \times 2] + (x) + [(-2) \times 4] = 0 \)
\( x = +8 - 3 \)
\( x = +5 \)
इस प्रकार, NaH2PO4 में P की ऑक्सीकरण संख्या +5 है।
(ख) NaHSO4 में Na की +1, H की +1, S की x और O की -2 है।
\( (+1) + (+1) + (x) + [(-2) \times 4] = 0 \)
\( x = +8 - 2 \)
\( x = +6 \)
अतः NaHSO4 में S की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
(ग) H4P2O7 में H की +1, P की x और O की -2 है।
\( [(+1) \times 4] + [(x) \times 2] + [(-2) \times 7] = 0 \)
\( 2x + 14 - 4 = +10 \)
\( x = +5 \)
.:. H2P2O7 में P की ऑक्सीकरण संख्या +5 है।
(घ) K2MnO4 में K की +1, Mn की x और O की -2 है।
\( [(+1) \times 2] + (x) + [(-2) \times 4] = 0 \)
\( x = +8 - 2 \)
\( x = +6 \)
.:. K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
(ङ) CaO2 में Ca की +2 और O की x है।
\( (+2) + 2(x) = 0 \)
\( x = -1 \)
.:. CaO2 में O की ऑक्सीकरण संख्या -1 है।
(च) NaBH4 में, हाइड्रोजन H- आयनिक अवस्था में पाई जाती है क्योंकि यह एक हाइड्राइड है। अतः NaBH4 में H की ऑक्सीकरण संख्या -1 है। Na की +1, B की x और H की -1 है।
\( (+1) + (x) + [(-1) \times 4] = 0 \)
\( x = +4 - 1 \)
\( x = +3 \)
.:. NaBH4 में B की ऑक्सीकरण संख्या +3 है।
(छ) H2S2O7 में H की +1, S की x और O की -2 है।
\( [(+1) \times 2] + [(x) \times 2] + [(-2) \times 7] = 0 \)
\( 2x + 14 - 2 = +12 \)
\( x = +6 \)
.. H2S2O7 में S की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
(ज) KAl(SO4)2.12H2O में K की +1, Al की +3, S की x, O की -2 और H की +1 है।
\( (+1) + (+3) + [(x) + (-2) \times 4] \times 2 + [(+1) \times 2 + (-2)] \times 12 \)
\( +4 - 2x - 16 + 24 - 24 = 0 \)
\( 2x + 16 - 4 = +12 \)
\( x = +6 \)
.. KAl(SO4)2.12H2O में S की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
In simple words: ऑक्सीकरण संख्या, किसी अणु में किसी तत्व पर मौजूद आवेश की मात्रा होती है जब उसके सभी बॉन्डों को आयनिक मान लिया जाए। यह गणना तत्वों के मानक ऑक्सीकरण संख्याओं के योग के शून्य होने के सिद्धांत पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, विभिन्न तत्वों (जैसे H, O, F, क्षार धातुएं) की सामान्य ऑक्सीकरण संख्याओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। यदि परिणाम भिन्नात्मक आता है, तो संरचनात्मक विचार आवश्यक हो सकते हैं।

 

Question 2. निम्नलिखित यौगिकों के रेखांकित तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या क्या है तथा इन परिणामों को आप कैसे प्राप्त करते हैं?
(क) KI3
(ख) H2S4O6
(ग) Fe3O4
(घ) CH3CH2OH
(ङ) CH3COOH


Answer:
(क) KI3 में K की ऑक्सीकरण संख्या +1 है। अतः I की औसत ऑक्सीकरण संख्या \( -\frac{1}{3} \) होगी। चूँकि औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है, अतः इसकी निम्न संरचना पर विचार करना आवश्यक है-
K+[I-I-I]-
उपर्युक्त संरचना के अनुसार I2 अणु और I- आयन के मध्य उप-सहसंयोजक बन्ध बनता है। चूँकि I2 एक उदासीन अणु है, I2 अणु में उपस्थित प्रत्येक I परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होगी। I- आयन में I की ऑक्सीकरण संख्या -1 है। अतः
K+[I(0)-I(0)-I(-1)]-
(ख) H2S4O6 में S की औसत ऑक्सीकरण संख्या x निम्न प्रकार ज्ञात की जा सकती है- H2S4O6 में H की +1, S की x, O की -2 है।
\( [(+1) \times 2] + [(x) \times 4] + [(-2) \times 6] = 0 \)
\( 4x = 12 - 2 \)
\( 4x = 10 \)
\( x = +\frac{10}{4} = +2.5 \)
चूँकि S की औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है, अतः इसकी निम्न संरचना पर विचार करना आवश्यक है-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह H2S4O6 की संरचना है, जिसमें चार सल्फर परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हुए हैं। प्रत्येक बाहरी सल्फर परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु के साथ एकल बंधन और एक अन्य ऑक्सीजन परमाणु के साथ दोहरा बंधन बनाता है, और ये ऑक्सीजन परमाणु हाइड्रोजन से जुड़े होते हैं। बीच के दो सल्फर परमाणु केवल सल्फर-सल्फर एकल बंधन बनाते हैं। ऑक्सीकरण संख्याएँ बाहरी सल्फर परमाणुओं पर +5 और बीच के दो सल्फर परमाणुओं पर 0 हैं।
यदि H2S4O6 की संरचना पर विचार किया जाये तो दिखाये गये S परमाणु (2) और (3) में प्रत्येक की ऑक्सीकरण संख्या शून्य है क्योंकि ये दोनों ओर से समान परमाणुओं से जुड़े हैं। यदि उपरोक्त प्रकार से गणना की जाये तो संरचना में दर्शाये गये S परमाणु (1) और (4) में प्रत्येक की ऑक्सीकरण संख्या +5 होगी।
(ग) Fe3O4 में Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या निम्न प्रकार ज्ञात की जा सकती है- Fe3O4 में Fe की x और O की -2 है।
\( [(x) \times 3] + [(-2) \times 4] = 0 \)
\( 3x = 8 \)
\( x = +\frac{8}{3} \)
चूँकि Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है, अतः हमें अणु की स्ट्रॉइकियोमीटरी पर विचार करना होगा।
Fe3O4 एक मिश्रित ऑक्साइड है। यह दो ऑक्साइडों (FeO, Fe2O3) का मिश्रण है। FeO में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +2 तथा Fe2O3 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 है।
(घ) CH3CH2OH में C की औसत ऑक्सीकरण संख्या निम्न प्रकार ज्ञात की जा सकती है- CH3CH2OH में C की x, H की +1, O की -2 है।
\( (x) + [(+1) \times 3] + x + [(+1) \times 2] + (-2) + (+1) = 0 \)
\( 2x + 3 + 2 - 2 + 1 = 0 \)
\( 2x = -4 \)
\( x = -2 \)
यदि CH3CH2OH की नीचे दी गई संरचना पर विचार किया जाये,

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एथेनॉल (CH3CH2OH) की संरचना है जिसमें दो कार्बन परमाणु एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कार्बन परमाणु (1) -CH2OH समूह से जुड़ा है, जबकि कार्बन परमाणु (2) -CH3 समूह से जुड़ा है। कार्बन परमाणु (1) से दो हाइड्रोजन और एक -OH समूह जुड़े हैं, जबकि कार्बन परमाणु (2) से तीन हाइड्रोजन परमाणु जुड़े हैं।
तो संरचना में दिखाया गया कार्बन परमाणु (2) तीन ओर से H परमाणु से जुड़ा है जिनकी वैद्युत ऋणात्मकता (electronegativity) C परमाणु से कम है तथा एक ओर से CH2OH ग्रुप (O.N. = -1) से जुड़ा है इसकी वैद्युत ऋणात्मकता कार्बन परमाणु से अधिक है। अतः इस कार्बन के लिए
\( [3 \times (+1)] + x + (-1) = 0 \)
\( x = -2 \)
संरचना में दिखाया गया कार्बन परमाणु (1) एक ओर से -OH ग्रुप (O.N. = -1) तथा दूसरी ओर से एक -CH3 ग्रुप (O.N. = +1) से जुड़ा है। अतः इस कार्बन के लिए
\( (+1) + [(+1) \times 2] + (x) + (-1) = 0 \)
\( x = -2 \)
(ङ) CH3COOH में C की औसत ऑक्सीकरण संख्या निम्न प्रकार ज्ञात की जा सकती है- CH3COOH में C की x, H की +1, O की -2 है।
\( (x) + [(+1) \times 3] + (x) + [(-2) \times 2] + (+1) = 0 \)
\( 2x + 3 - 4 + 1 = 0 \)
\( 2x = 0 \)
\( x = 0 \)
यदि CH3COOH की निम्न संरचना पर विचार किया जाये,

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह एसिटिक एसिड (CH3COOH) की संरचना है जिसमें दो कार्बन परमाणु एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कार्बन परमाणु (1) एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरे बंधन और एक -OH समूह से एकल बंधन द्वारा जुड़ा है, जबकि कार्बन परमाणु (2) तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा है।
तो संरचना में दिखाया गया कार्बन परमाणु (2) तीन H परमाणु (O.N. = +1) तथा एक -COOH ग्रुप (O.N. = -1) से जुड़ा है।
.. इस कार्बन के लिए \( [(+1) \times 2] + (x) + (-1) = 0 \)
\( x = -2 \)
कार्बन परमाणु (1) एक -OH ग्रुप (O.N. = -1) एक O परमाणु (O.N. = -2) और एक -CH3 ग्रुप (O.N. = +1) से जुड़ा है।
.. इस कार्बन के लिए \( (+1) + (x) + (-2) + (-1) = 0 \)
\( x = +2 \)
In simple words: तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या की गणना सामान्यतः अणु में प्रत्येक परमाणु पर आवेश के आधार पर की जाती है। यदि औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक आती है, तो अणु की वास्तविक संरचना पर विचार करना आवश्यक होता है ताकि प्रत्येक परमाणु की सही ऑक्सीकरण संख्या निर्धारित की जा सके।

🎯 Exam Tip: औसत ऑक्सीकरण संख्या हमेशा वास्तविक नहीं होती है, खासकर जब एक ही तत्व के परमाणु अलग-अलग बॉन्डिंग वातावरण में हों। संरचनात्मक सूत्र का उपयोग करके प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करना अधिक सटीक होता है।

 

Question 3. निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अपचयोपचय अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करने का प्रयास कीजिए-
(क) CuO(s)+ H2(g) + Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2B2H6(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2K+F- (s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)


Answer:
इस अभिक्रिया में, Cu की ऑक्सीकरण अवस्था +2 (CuO में) से घटकर शून्य (Cu में) हो जाती है जबकि H की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य (H2 में) से बढ़कर +1 (H2O में) हो जाती है। इसलिए अभिक्रिया में CuO का अपचयन तथा H का ऑक्सीकरण हो रहा है। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में, Fe2O3 का अपचयन हो रहा है क्योंकि Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +3 (Fe2O3 में) से घटकर शून्य (Fe में) हो जाती है। CO का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि C की ऑक्सीकरण अवस्था +2 (CO में) से बढ़कर +4 (CO2 में) हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया (redox reaction) है।
इस अभिक्रिया में, BCl3 का अपचयन हो रहा है क्योकि B की ऑक्सीकरण अवस्था +3 (BCl3 में) से घटकर -3 (B2H6 में) हो जाती है तथा LiAlH4 का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योकि H की ऑक्सीकरण अवस्था -1 (LiAlH4 में) से बढ़कर +1 (B2H6 में) हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय (redox) अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में, K का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य से बढ़कर +1 हो जाती है तथा F को अपचयन हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य से घटकर -1 हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में, NH3 को ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था -3 से बढ़कर +2 हो जाती है तथा O2 का अपचयन हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था शून्य से घटकर -2 (H2O में) हो जाती है। अतः यह एक अपचयोपचय (redox) अभिक्रिया है।
In simple words: अपचयोपचय अभिक्रियाएं वे होती हैं जिनमें एक पदार्थ ऑक्सीकृत होता है (ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है) और दूसरा पदार्थ अपचयित होता है (ऑक्सीकरण संख्या घटती है)। इन सभी अभिक्रियाओं में, ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन होता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि वे रेडॉक्स अभिक्रियाएं हैं।

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं की पहचान करने के लिए प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण संख्या को अभिकारक और उत्पाद दोनों में निर्धारित करें। यदि ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन होता है, तो वह रेडॉक्स अभिक्रिया है।

 

Question 4. फ्लुओरीन बर्फ से अभिक्रिया करके यह परिवर्तन लाती है
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
इस अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित कीजिए।


Answer:
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
इस अभिक्रिया में, F2 का अपचयन के साथ-साथ ऑक्सीकरण भी हो रहा है क्योंकि यह H (वैद्युत धनात्मक तत्त्व) को जोड़कर HF बनाती है तथा O (एक वैद्युत ऋणात्मक तत्त्व) को जोड़कर HOF बनाती है। अतः यह एक ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रिया (redox reaction) है।
In simple words: इस अभिक्रिया में, फ्लुओरीन (F2) स्वयं का ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों करता है। यह हाइड्रोजन के साथ मिलकर HF बनाता है (F का अपचयन), और ऑक्सीजन के साथ मिलकर HOF बनाता है (F का ऑक्सीकरण)। इसलिए, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।

🎯 Exam Tip: यह एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया का उदाहरण है, जहाँ एक ही तत्व (फ्लुओरीन) एक साथ ऑक्सीकृत और अपचयित होता है। ऑक्सीकरण संख्याओं में परिवर्तन की पहचान करके इसे आसानी से सिद्ध किया जा सकता है।

 

Question 5. H2SO5, Cr2O2-7 तथा NO-3 में सल्फर, क्रोमियम तथा नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा इसमें हेत्वाभास | (fallacy) का स्पष्टीकरण दीजिए।


Answer:
(i) H2SO5 में S की ऑक्सीकरण संख्या :
\( (+1) \times 2 + (x) + [(-2) \times 5] = 0 \)
\( 2 + x - 10 = 0 \)
\( x = +8 \)
S की ऑक्सीकरण संख्या +8 सम्भव नहीं है क्योंकि S के बाह्य कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं और उसकी अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या +6 हो सकती है। अतः H2SO5 में दो ऑक्सीजन परमाणुओं को एक-दूसरे से जुड़ा होना चाहिए। इस हेत्वाभास (fallacy) को H2SO5 की निम्नलिखित संरचना द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह H2SO5 (परॉक्सोमोनोसल्फ्यूरिक एसिड) की संरचना है। इसमें एक सल्फर परमाणु केंद्र में है, जो दो ऑक्सीजन परमाणुओं से दोहरे बंधन और दो -OH समूहों से एकल बंधन द्वारा जुड़ा है। एक -OH समूह और एक -O-O-H परॉक्साइड लिंकेज बनाते हैं। संरचना में O-S-O-O-H लिंकेज के माध्यम से एक परॉक्साइड बंधन (-O-O-) उपस्थित है।
उपर्युक्त संरचना के अनुसार, S की ऑक्सीकरण अवस्था निम्न होगी- H2SO5 में H की +1, S की x, डबल बांडेड O की -2 और परॉक्साइड लिंकेज में O की -1 है।
\( (+1) + (-2) + x + [(-2) \times 2] + [(-1) \times 2] + (+1) = 0 \)
\( +1 - 2 + x - 4 - 2 + 1 = 0 \)
\( x = +6 \)
(ii) Cr2O72- में Cr की ऑक्सीकरण संख्या : Cr2O72- में Cr की x और O की -2 है।
\( 2x + 7(-2) = -2 \)
\( 2x - 14 = -2 \)
\( 2x = 12 \)
\( x = +6 \)
प्राप्त ऑक्सीकरण संख्या का मान सही है।
Cr2O72- की संरचना निम्न प्रकार है-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह डाइक्रोमेट आयन (Cr2O72-) की संरचना है, जिसमें दो क्रोमियम परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु द्वारा जुड़े हुए हैं। प्रत्येक क्रोमियम परमाणु तीन अन्य ऑक्सीजन परमाणुओं से भी जुड़ा है, जिनमें से दो पर एकल बंधन और एक पर दोहरा बंधन होता है। संरचना के बाहरी ऑक्सीजन परमाणुओं पर ऋण आवेश होता है।
(iii) NO3- में N की ऑक्सीकरण संख्या : NO3- में N की x और O की -2 है। (क्योंकि NO3- पर -1 आवेश होता है)
\( (x) + [(-2) \times 3] = -1 \)
\( x - 6 = -1 \)
\( x = +5 \)
NO3- की संरचना निम्न प्रकार है-

ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह नाइट्रेट आयन (NO3-) की संरचना है। इसमें एक नाइट्रोजन परमाणु केंद्र में है, जो एक ऑक्सीजन परमाणु से दोहरे बंधन द्वारा और दो अन्य ऑक्सीजन परमाणुओं से एकल बंधन द्वारा जुड़ा है। एकल बंधन वाले ऑक्सीजन परमाणुओं पर ऋण आवेश होता है।
उपर्युक्त संरचना के अनुसार, N की O.S. (ऑक्सीकरण अवस्था) निम्न है- NO3- में N की x, डबल बांडेड O की -2, सिंगल बांडेड O की -1 है।
\( [(-2) \times 2] + (x) + (-1) = 0 \)
\( x = +5 \)
अतः यह संरचना NO3- में N की सामान्य ऑक्सीकरण-संख्या प्रदर्शित करती है। अतः कोई हेत्वाभास नहीं है।
In simple words: ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, कुछ यौगिकों में परॉक्साइड लिंकेज या मिश्रित ऑक्सीकरण अवस्थाएं हो सकती हैं, जिसके कारण प्रारंभिक गणना से प्राप्त औसत ऑक्सीकरण संख्या गलत हो सकती है। ऐसी स्थिति में, यौगिक की संरचनात्मक जानकारी का उपयोग करके प्रत्येक परमाणु की वास्तविक ऑक्सीकरण संख्या निर्धारित करना आवश्यक हो जाता है।

🎯 Exam Tip: जब किसी तत्व की परिकलित ऑक्सीकरण संख्या उसकी अधिकतम या न्यूनतम संभव ऑक्सीकरण संख्या से अधिक या कम हो, तो यह एक "हेत्वाभास" का संकेत है, जिसका अर्थ है कि यौगिक में परॉक्साइड या अन्य असामान्य लिंकेज मौजूद हो सकते हैं। इस स्थिति में संरचना पर विचार करें।

 

Question 6. निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(क) मर्करी (II) क्लोराइड
(ख) निकिल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (II) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड


Answer:
(क) HgCl2
(ख) NiSO4
(ग) SnO2
(घ) Tl2SO4
(ङ) FeSO4
(च) Cr2O3
In simple words: दिए गए तत्वों की रोमन संख्या में ऑक्सीकरण अवस्था के आधार पर, संबंधित आयनों को संयोजित करके उनके रासायनिक सूत्र लिखे जाते हैं, जिससे यौगिक उदासीन हो सके।

🎯 Exam Tip: यौगिकों के सूत्र लिखते समय, धातु की ऑक्सीकरण अवस्था (रोमन अंकों में दी गई) और अधातु या पॉलीएटॉमिक आयन की सामान्य संयोजकता को ध्यान में रखें। सुनिश्चित करें कि कुल धनात्मक और ऋणात्मक आवेश संतुलित हों।

 

Question 7. उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए जिनमें कार्बन-4 से +4 तक की तथा नाइट्रोजन-3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।


Answer:
कार्बन के यौगिक (Compounds of Carbon)कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था (O.S. of C)नाइट्रोजन के यौगिक (Compounds of Nitrogen)N की ऑक्सीकरण अवस्था (O.S. of N)
CH4-4NH3-3
CH3-CH3-3NH2-NH2-2
CH3Cl-2NH2OH-1
CH≡CH-1N20
CH2Cl20N2O+1
CHCl3+2NO+2
CCl4+4N2O3+3
NO2+4
N2O5+5

In simple words: कार्बन और नाइट्रोजन विभिन्न यौगिकों में विस्तृत ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं, जो उनके रासायनिक वातावरण और बंधने के तरीके पर निर्भर करती हैं।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या एक तत्व की रासायनिक प्रवृत्ति और प्रतिक्रियाशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। विभिन्न यौगिकों में एक ही तत्व की ऑक्सीकरण संख्या अलग-अलग हो सकती है, जो उसकी बहुमुखी रासायनिक प्रकृति को दर्शाती है।

 

Question 8. अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक-दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?


Answer:
SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या +4 होती है। S अपनी अभिक्रियाओं में -2 और +6 के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण-संख्या दर्शा सकता है। अतः SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या घट सकती है और बढ़ भी सकती है; अर्थात् इसका ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों सम्भव है। इस कारण SO2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करती है। H2O2 की स्थिति भी समान प्रकार की है। H2O2 में, O की ऑक्सीकरण अवस्था -1 होती है। ऑक्सीजन -2 और 0 (शून्य) के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है (+2 भी जब F से जुड़ा होता है) अतः H2O2 में ऑक्सीजन अपनी ऑक्सीकरण संख्या घटा तथा बढ़ा सकता है। इस कारण H2O2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करता है।
O3 में, ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है। यह अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को -1 तथा -2 तक घटा सकता है परन्तु अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को बढ़ा नहीं सकता। अतः O3 केवल एक ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करती है। HNO3 में, N की ऑक्सीकरण-अवस्था +5 होती है जो N की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है। अतः N केवल अपनी ऑक्सीकरण अवस्था घटा सकता है। इस कारण HNO3 केवल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है।
In simple words: कोई पदार्थ ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में तभी कार्य कर सकता है जब उसमें उपस्थित केंद्रीय परमाणु अपनी वर्तमान ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक या कम ऑक्सीकरण अवस्था में जा सके। यदि केंद्रीय परमाणु पहले से ही अपनी अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था में है, तो वह केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करेगा, क्योंकि वह केवल अपनी ऑक्सीकरण अवस्था घटा सकता है।

🎯 Exam Tip: एक पदार्थ की ऑक्सीकारक या अपचायक क्षमता उसके केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था और उस तत्व की अधिकतम और न्यूनतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था से संबंधित होती है। मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था वाले तत्व दोनों तरह से कार्य कर सकते हैं।

 

Question 9. इन अभिक्रियाओं को देखिए
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6 (aq) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
(क) 6CO2(g) + 12H2O(l) → C6H12O6 (aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)
(ख) O2(g) + H2O2(l) → H2O(l) + O2(g) + O2(g)
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रियाओं (क) तथा (ख) के अन्वेषण की विधि सुझाइए।


Answer:
(क) यह प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की अभिक्रिया है जो कि एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और अनेक चरणों में सम्पन्न होती है। इस अभिक्रिया में, 12H2O अणु क्लोरोफिल (chlorophyll) की उपस्थिति में पहले अपघटित होकर H2 तथा O2 देते हैं। इस प्रकार निर्मित H2CO2 को अपचयित कर C2H12O6 का निर्माण करती है। अतः अभिक्रिया को एक सरल रूप में अभिक्रिया निम्न प्रकार दिखाया जा सकता है।
\( 12H2O(l) \rightarrow 12H2(g) + 6O2(g) \). . .(i)
\( 6CO2(g) + 12H2(l) \rightarrow C6H12O6(s) + 6H2O(l) \). . .(ii)
\( 6CO2(g) + 12H2O(l) \rightarrow C6H12O6(s) + 6H2O(l) + 6O2(g) \). . .(iii)
इसलिए इस अभिक्रिया को समीकरण (iii) की भाँति लिखना ज्यादा उचित है। इस निरूपण में 12H2O अणु भाग लेते हैं तथा 6H2O अणु उत्पन्न होते हैं।
(ख) दी गई अभिक्रिया का वास्तविक प्रारूप निम्न प्रकार है-
\( O3(g) \rightarrow O2(g) + O(g) \). . .(i)
\( H2O2(l) + O(g) \rightarrow H2O(l) + O2(g) \). . .(ii)
\( O3(g) + H2O2(l) \rightarrow H2O(l) + O2(g) + O2(g) \). . .(iii)
समीकरण (iii) प्रदर्शित करती है कि O2 का एक अणु O3 से प्राप्त होता है, जबकि दूसरा H2O2 से प्राप्त होता है। इसलिए, समीकरण को प्रदर्शित करने की यह विधि अधिक उपयुक्त है। समीकरण (क) तथा (ख) का अन्वेषण ट्रेसर तकनीक (tracer technique) के द्वारा किया जा सकता है। समीकरण (क) में H2O18 तथा समीकरण (ख) में H2O18 (या O183) का प्रयोग कर अभिक्रिया के पथ को निर्धारित किया जा सकता है।
In simple words: रासायनिक अभिक्रियाओं के अधिक विस्तृत या संतुलित रूप, अभिकारकों और उत्पादों की वास्तविक भागीदारी को बेहतर ढंग से दर्शाते हैं, खासकर जब कोई अभिकारक केवल आंशिक रूप से खर्च होता है या उत्पाद भी अभिक्रिया में भाग लेते हैं। ट्रेसर तकनीक का उपयोग करके अभिक्रिया के मार्ग को निर्धारित किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: अभिक्रियाओं को संतुलित करने और उनके तंत्र को समझने के लिए सटीक स्टोइकियोमेट्री और परमाणु संतुलन आवश्यक है। समस्थानिक ट्रेसर तकनीकें उन जटिल अभिक्रियाओं के मार्ग को उजागर करने में बहुत उपयोगी होती हैं जहाँ अणु के विभिन्न हिस्से उत्पाद में योगदान करते हैं।

 

Question 10. AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों?


Answer:
AgF2 में, Ag की ऑक्सीकरण-अवस्था +2 होती है जो Ag की अत्यधिक अस्थायी अवस्था है। इसलिए, यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद शीघ्रता से अपचयित होकर स्थायी ऑक्सीकरण-अवस्था +1 प्राप्त कर लेता है।
\[ Ag^{2+} + e^- \rightarrow Ag^+ \]
ऑक्सीकरण-अवस्था = +2 (अस्थायी) ऑक्सीकरण-अवस्था = +1 (स्थायी)
इसी कारण AgF2 (यदि प्राप्त हो जाये) एक अत्यन्त प्रबल ऑक्सीकारक की भाँति व्यवहार करता है।
In simple words: AgF2 में सिल्वर (Ag) +2 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, जो इसकी अस्थिर ऑक्सीकरण अवस्था है। सिल्वर अधिक स्थिर +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्राप्त करने के लिए आसानी से एक इलेक्ट्रॉन स्वीकार कर लेता है, और इस प्रक्रिया में यह अन्य पदार्थों को ऑक्सीकृत करता है, इसलिए यह एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।

🎯 Exam Tip: यौगिकों की स्थिरता और ऑक्सीकारक/अपचायक गुणों का सीधा संबंध उसमें मौजूद तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं से होता है। यदि कोई तत्व एक अस्थिर या उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में है, तो वह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अधिक स्थिर अवस्था में जाने की प्रवृत्ति रखता है, जिससे वह प्रबल ऑक्सीकारक बन जाता है।

 

Question 11. “जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया सम्पन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है। इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।


Answer:
दिये गये वक्तव्य का औचित्य निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है
(क)
\( 2C(s) + O2(g) \rightarrow 2CO(g) \) . . .(i)
(reducing agent) Excess (oxidising agent) compound of lower O.S.
\( C(s) + O2(g) \rightarrow CO2(g) \) . . .(ii)
(reducing agent) (oxidising agent) Excess compound of higher O.S
अभिक्रिया (i) में अपचायक (reducing agent) कार्बन अधिकता में है, जबकि अभिक्रिया (ii) में ऑक्सीकारक (oxidising agent) O2 अधिकता में है। अभिक्रिया (i) में CO (कार्बन की O.S.= +2) तथा अभिक्रिया (ii) में CO2 (कार्बन की O.S. = +4) का निर्माण होता है।
(ख)
\( 4Na(s) + O2(g) \rightarrow Na2O(g) \) . . .(i)
(reducing agent) Excess (oxidising agent) compound of lower O.S.
\( 2Na(s) + 2O2(g) \rightarrow Na2O2(g) \) . . .(ii)
(reducing agent) (oxidising agent) Excess compound of higher O.S
(ग)
\( P4(s) + 6Cl2(g) \rightarrow 4PCl3(l) \)
(reducing agent) Excess (oxidising agent) compound of lower O.S.
\( P4(s) + 10Cl2(g) \rightarrow 4PCl5(s) \)
(reducing agent) (oxidising agent) Excess compound of higher O.S.
In simple words: एक रेडॉक्स अभिक्रिया में, अभिकारकों की सापेक्षिक मात्रा उत्पादों की ऑक्सीकरण अवस्था को प्रभावित करती है। जब अपचायक अधिकता में होता है, तो उत्पाद में केंद्रीय परमाणु निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, जबकि ऑक्सीकारक के अधिकता में होने पर, उत्पाद में केंद्रीय परमाणु उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में होता है।

🎯 Exam Tip: यह सिद्धांत अभिकर्मकों की स्टोइकियोमेट्रिक अनुपात और उनकी ऑक्सीकरण/अपचयन क्षमता के आधार पर अभिक्रिया उत्पादों की भविष्यवाणी करने में सहायक है। अभिकारकों की सापेक्षिक मात्राओं को नियंत्रित करके वांछित ऑक्सीकरण अवस्था वाले उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं।

 

Question 12. इन प्रेक्षणों की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?
(क) यद्यपि क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट दोनों ही ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलूईन से बेन्जोइक अम्ल बनाने के लिए हम ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं? इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित अपचयोपचय समीकरण दीजिए।
(ख) क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गन्ध वाली HCl गैस प्राप्त होती है, परन्तु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?


Answer:
(क) यदि टॉलूईन का ऑक्सीकरण क्षारीय अथवा अम्लीय KMnO4 द्वारा किया जाये तो ऑक्सीकरण को नियन्त्रित करना कठिन होगा। इसमें मुख्य उत्पाद बेंजोइक ऐसिड (benzoic acid) के साथ-साथ सह अभिक्रियाओं (side reactions) द्वारा दूसरे उत्पाद भी प्राप्त होंगे। इसलिए टॉलूईन के ऑक्सीकरण के लिये क्षारीय अथवा अम्लीय KMnO4 के स्थान पर ऐल्कोहॉलिक KMnO4 को वरीयता दी जाती है। अपचयोपचय (redox reaction) अभिक्रिया नीचे दी गई है-
\( C6H5CH3 + 2KMnO4 \rightarrow 2KOH + 2MnO2 + C6H5COOH \)
Toluene (O.S. of C in CH3 = -3) → Benzoic acid (O.S. of C in COOH = +4)
(ख) जब सान्द्र H2SO4 को क्लोराइडयुक्त एक अकार्बनिक मिश्रण में मिलाया जाता है, तो कम वाष्पशील अम्ल H2SO4 अधिक वाष्पशील अम्ल HCl को विस्थापित करता है और HCl गैस की तीक्ष्ण गन्ध आती है।
\( 2NaCl (s) + H2SO4 (l) \rightarrow 2NaHSO4 (s) + 2HCl(g) \)
HCl एक दुर्बल अपचायक है। यह H2SO4 को SO2 में अपचयित करने में असमर्थ है। जब मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित होता है तो अधिक उड़नशील अम्ल HBr विस्थापित होता है। HBr एक अधिक प्रबल अपचायक है और H2SO4 को SO2 में अपचयित कर देता है। यह स्वयं ऑक्सीकृत होकर ब्रोमीन देता है जो लाल वाष्प के रूप में प्राप्त होती है।
\( 2NaBr + H2SO4 \rightarrow 2NaHSO4 + 2HBr \)
\( 2HBr + H2SO4 \rightarrow SO2 + 2H2O + Br2 (g) \)
लाल वाष्प
In simple words: टॉलूईन के ऑक्सीकरण में ऐल्कोहॉलिक KMnO4 का उपयोग नियंत्रित अभिक्रिया के लिए किया जाता है ताकि अवांछित उप-उत्पादों से बचा जा सके। क्लोराइडों के साथ सल्फ्यूरिक अम्ल HCl गैस देता है क्योंकि HCl एक दुर्बल अपचायक है, लेकिन ब्रोमाइडों के साथ यह HBr बनाता है जो एक प्रबल अपचायक होने के कारण H2SO4 को अपचयित करके ब्रोमीन गैस देता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक की शक्ति और अभिक्रिया के माध्यम का चुनाव (जैसे अम्लीय, क्षारीय, या उदासीन) उत्पादों और अभिक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है। हैलाइड आयनों की अपचायक क्षमता में भिन्नता के कारण उनकी प्रतिक्रियाएं सान्द्र H2SO4 के साथ अलग-अलग होती हैं।

 

Question 13. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-
(क) 2AgBr(s) + C6H6O2(aq) → 2Ag(s) + 2HBr (aq) + C6H4O2(aq)
(ख) HCHO(7) +2[Ag(NH3)2]+ (aq) + 3OH- (aq) → 2Ag(s)+ HCOO-7 (aq) +4NH3(aq) +2H2O(7)
(ग) HCHO(1) + 2Cu2+(aq) + 5OH- (aq) → Cu2O(s)+ HCOO- (aq) +3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O(l) → N2(g)+ 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s)+ 2HSO4 (aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)


Answer:
ऑक्सीकृत पदार्थअपचयित पदार्थऑक्सीकारकअपचायक
(क)C6H6O2 (aq)AgBr (s)AgBr (s)C6H6O2 (aq)
(ख)HCHO (aq)[Ag(NH3)2]+[Ag(NH3)2]+HCHO (aq)
(ग)HCHO(aq)Cu2+(aq)Cu2+ (aq)HCHO(aq)
(घ)N2H4 (l)H2O2 (l)H2O2 (l)N2H4 (l)
(ङ)Pb(s)PbO2 (s)PbO2 (s)Pb (s)

In simple words: एक रेडॉक्स अभिक्रिया में, ऑक्सीकृत पदार्थ वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है, और अपचयित पदार्थ वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है। ऑक्सीकारक वह अभिकर्मक होता है जो दूसरे को ऑक्सीकृत करता है (स्वयं अपचयित होता है), जबकि अपचायक वह अभिकर्मक होता है जो दूसरे को अपचयित करता है (स्वयं ऑक्सीकृत होता है)।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकृत और अपचयित पदार्थों की पहचान करने के लिए, अभिक्रिया में प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण संख्या को अभिकारकों और उत्पादों दोनों में निर्धारित करें। ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि ऑक्सीकरण को दर्शाती है, जबकि कमी अपचयन को।

 

Question 14. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?
\( 2S2O3^{2-} (aq) + I2(s) \rightarrow S4O6^{2-}(aq) + 2I^- (aq) \)
\( S2O3^{2-} (aq) + 2Br2(l) + 5H2O(l) \rightarrow 2SO4^{2-} (aq) + 4Br^- (aq) + 10H^+ (aq) \)


Answer:
प्रस्तुत स्पीशीज (species) में S की ऑक्सीकरण संख्या निम्न है-
S2O32- = +2, S4O62- = 2.5, SO42- = +6
ब्रोमीन, आयोडीन से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। इसलिये यह S2O32- (S की O.S. = +2) को SO42- (S की O.S. = +6) में ऑक्सीकृत कर देता है; जिसमें S उच्च-ऑक्सीकरण अवस्था में है। I2 एक दुर्बल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है। यह S2O32- को S4O62- (S की O.S. = 2.5) में ऑक्सीकृत करता है, जिसमें S की ऑक्सीकरण-अवस्था कम है। यही कारण है कि S2O32-, Br2 से I2 से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया करता है।
In simple words: थायोसल्फेट (S2O32-) की अभिक्रिया आयोडीन (I2) और ब्रोमीन (Br2) से अलग-अलग होती है क्योंकि ब्रोमीन आयोडीन की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। ब्रोमीन थायोसल्फेट को उच्च ऑक्सीकरण अवस्था (+6) तक ऑक्सीकृत करता है, जबकि आयोडीन इसे केवल मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था (+2.5) तक ऑक्सीकृत करता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक की प्रबलता अपचायक पदार्थ के ऑक्सीकरण की सीमा को निर्धारित करती है। प्रबल ऑक्सीकारक अपचायक को उसकी उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत करते हैं, जबकि दुर्बल ऑक्सीकारक उसे निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था तक ही ऑक्सीकृत कर पाते हैं।

 

Question 15. अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजनों में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहैलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।


Answer:
हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता का घटता हुआ क्रम निम्न है- F2 > Cl2 > Br2 > I2। F2 एक प्रबल ऑक्सीकारक है तथा यह Cl-, Br- तथा I- आयनों का ऑक्सीकर कर देती है। Cl2 केवल Br- तथा I- आयनों को और Br2 केवल I- आयनों को ही ऑक्सीकृत कर पाती है। I2 इनमें से किसी को भी ऑक्सीकृत करने में असमर्थ है। अभिक्रियायें नीचे दी गई हैं-
F2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-
\( F2(g) + 2Cl^-(aq) \rightarrow 2F^-(aq) + Cl2(g) \)
\( F2(g) + 2Br^-(aq) \rightarrow 2F^-(aq) + Br2(l) \)
\( F2(g) + 2I^-(aq) \rightarrow 2F^-(aq) + I2(s) \)
Cl2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-
\( Cl2(g) + 2Br^-(aq) \rightarrow 2Cl^-(aq) + Br2(l) \)
\( Cl2(g) + 2I^-(aq) \rightarrow 2Cl^-(aq) + I2(l) \)
I2 की ऑक्सीकारक अभिक्रियाएँ-
\( Br2(l) + 2I^-(aq) \rightarrow 2Br^-(aq) + I2(s) \)
इस प्रकार F2 सबसे अच्छा ऑक्सीकारक है। हाइड्रोलिक अम्लों की अपचायक क्षमता का घटता हुआ क्रम निम्न प्रकार है-
HI > HBr > HCl > HF
HI और HBr सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) को SO2 में अपचयित कर देते हैं, जबकि HCl व HF ऐसा नहीं कर पाते।
\( 2HBr + H2SO4 \rightarrow SO2 + 2H2O + Br2 \)
\( 2HI + H2SO4 \rightarrow SO2 + 2H2O + I2 \)
HCl, MnO2 को Mn2+ में अपचयित कर देता है परन्तु HF ऐसा करने में असमर्थ है। यह दर्शाता है। कि HCl की ऑक्सीकृत क्षमता HBr से अधिक है।
\( MnO2 + 4HCl \rightarrow MnCl2 + Cl2 + 2H2O \)
\( MnO2 + 4HF \rightarrow \) कोई अभिक्रिया नहीं
अतः हाइड्रोलिक अम्लों में HI प्रबलतम अपचायक है।
In simple words: फ्लुओरीन सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि यह आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और अन्य हैलोजनों को ऑक्सीकृत कर देता है। दूसरी ओर, हाइड्रोआयोडिक अम्ल (HI) सबसे प्रबल अपचायक है क्योंकि यह आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागता है और अन्य पदार्थों को अपचयित करता है, विशेषकर सल्फ्यूरिक अम्ल को।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक/अपचायक शक्ति का निर्धारण मानक इलेक्ट्रोड विभवों (standard electrode potentials) से किया जा सकता है। जितना अधिक धनात्मक अपचयन विभव, उतनी ही अधिक ऑक्सीकारक शक्ति। इसके विपरीत, जितना अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव, उतनी ही अधिक अपचायक शक्ति।

 

Question 16. निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?
\( XeO6^{4-}(aq) + 2F^-(aq) + 6H^+(aq) \rightarrow XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l) \)
यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग XeO64- है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?


Answer:
इस अभिक्रिया में XeO64- को XeO3 में अपचयन तथा F- का F2 में ऑक्सीकरण हो रहा है। यह अभिक्रिया इसलिये सम्पन्न होती है क्योंकि XeO64-, F2 से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। चूंकि XeO64- F2 की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है, अत: Na4XeO6 एक प्रबल ऑक्सीकारक होगा।
In simple words: यह अभिक्रिया इसलिए होती है क्योंकि XeO64- एक बहुत प्रबल ऑक्सीकारक है और F- को F2 में ऑक्सीकृत करने की क्षमता रखता है, जबकि स्वयं XeO3 में अपचयित हो जाता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि Na4XeO6 एक अति प्रबल ऑक्सीकारक है।

🎯 Exam Tip: एक ऑक्सीकारक की प्रबलता उसकी इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति से निर्धारित होती है। यदि एक पदार्थ दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करता है और स्वयं अपचयित हो जाता है, तो यह दर्शाता है कि ऑक्सीकृत करने वाला पदार्थ अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है।

 

Question 17. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में-
(क) H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) → H2PO4(aq) + 4Ag(s) +4HNO3(aq)
(ख) H3PO2(aq) + 2CuSO4 (aq) + 2H2O(l)→ H3PO4 (aq) + 2Cu(s) +2H2SO4 (aq)
(ग) C2H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH- (aq) → C6H5COO- (aq) +2Ag(s) +4NH3(aq) +2H2O(l)
(घ) C6H5CHO(l) +2Cu2+ (aq) + 5OH- (aq) कोई परिवर्तन नहीं।
इन अभिक्रियाओं से A+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।


Answer:
ये अभिक्रिया दर्शाती है कि Ag+, Cu2+ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह निम्न तथ्यों से स्पष्ट है-
1. अभिक्रिया (क) और (ख) दर्शाती है कि Ag+ और Cu2+ दोनों आयन H3PO2 को H3PO4 में ऑक्सीकृत कर सकते हैं। अतः दोनों ऑक्सीकारक हैं।
2. अभिक्रिया (ग) दर्शाती है कि [Ag(NH3)2]+ आयन C6H5CHO को C6H2COOH में ऑक्सीकृत कर सकता है, परन्तु अभिक्रिया (घ) के अनुसार Cu2+ आयन ऐसा करने में असमर्थ है।
अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यद्यपि Ag+ और Cu2+ दोनों ऑक्सीकारक अभिकर्मक हैं, परन्तु Ag+, Cu2+ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है।
In simple words: इन अभिक्रियाओं से पता चलता है कि Ag+ और Cu2+ दोनों ही ऑक्सीकारक हैं, लेकिन Ag+ आयन Cu2+ आयन की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक हैं। Ag+ विभिन्न पदार्थों को ऑक्सीकृत कर सकता है, जबकि Cu2+ कुछ विशिष्ट अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण करने में असमर्थ रहता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक की सापेक्षिक शक्ति का निर्धारण यह देखकर किया जा सकता है कि कौन सा आयन दूसरे आयन की तुलना में एक व्यापक श्रृंखला के पदार्थों को ऑक्सीकृत कर सकता है। एक प्रबल ऑक्सीकारक अधिक पदार्थों को ऑक्सीकृत कर पाएगा।

 

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन दर्शाई गई विधि द्वारा करते हैं।
\(2I^- (aq) \longrightarrow I_2 (s) + 2e^-\)
\(MnO_4^- (aq) + 2H_2O(l) + 3e^- \longrightarrow MnO_2(s) + 4OH^- (aq)\)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या को एकसमान बनाने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 3 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 2 से गुणा करते हैं-
\(6I^- (aq) \longrightarrow 3I_2 (s) + 6e^-\)
\(2MnO_4^- (aq) + 4H_2O(l) +6e^- \longrightarrow 2MnO_2 (s)+8OH^- (aq)\)
पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(6I^-(aq) + 2MnO_4^- (aq) + 4H_2O(l) \longrightarrow 3I_2 (s) + 2MnO_2 (s) +8OH^-(aq)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps detail balancing the redox reaction using the ion-electron method in a basic medium. First, the half-reactions for oxidation and reduction are identified. Then, atoms other than oxygen and hydrogen are balanced. Next, oxygen atoms are balanced by adding water molecules, and hydrogen atoms by adding H+ ions. Since the reaction is in a basic medium, OH- ions are added to neutralize H+ ions, forming water. Finally, electrons are added to balance the charges in each half-reaction, and the number of electrons is made equal before adding the two half-reactions together to get the final balanced equation.
In simple words: This process balances a chemical reaction by breaking it into two parts: one where electrons are lost (oxidation) and one where electrons are gained (reduction). Water and hydroxide ions are added to balance atoms and charges in a basic environment.

🎯 Exam Tip: Mastering the step-by-step procedure for balancing redox reactions, especially in different mediums (acidic/basic), is crucial. Pay close attention to balancing atoms and charges at each step to avoid errors.

Question 18. (ख) पद 1. पहले हम ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(MnO_4^- (aq) + SO_2 (g) \longrightarrow Mn^{2+} (aq) + HSO_4^-(aq)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : \(SO_2(g)\) \(\implies\) \(HSO_4^- (aq)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(MnO_4^-(aq)\) \(\implies\) \(Mn^{2+} (aq)\)
पद 3. ऑक्सीजन परमाणु के सन्तुलन के लिए हम ऑक्सीकरण अभिक्रिया में बाईं ओर 2 जल अणु जोड़ते हैं-
\(SO_2(g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(HSO_4^- (aq)\)
हाइड्रोजन परमाणु के सन्तुलन के लिए हम ऑक्सीकरण अभिक्रिया में दाईं ओर 3H+ आयन जोड़ देते हैं-
\(SO_2 (g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(HSO_4^- (aq) + 3H^+ (aq)\)
पद 4. ऑक्सीजन परमाणु के सन्तुलन के लिए हम अपचयन अभिक्रिया में दाईं ओर चार जल-अणु जोड़ते हैं-
\(MnO_4^-(aq)\) \(\implies\) \(Mn^{2+} (aq) + 4H_2O(l)\)
हाइड्रोजन परमाणु के सन्तुलन के लिए हम अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में बाईं ओर 8H+ आयन जोड़ देते हैं-
\(MnO_4^-(aq) + 8H^+ (aq)\) \(\implies\) \(Mn^{2+} (aq) + 4H_2O(l)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन दर्शाई गई विधि द्वारा करते हैं।
\(SO_2(g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(HSO_4^- (aq)+3H^+ (aq) + 2e^-\)
\(MnO_4^- (aq) + 8H^+ (aq)+5e^- \implies Mn^{2+} (aq) + 4H_2O(l)\)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान बनाने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 5 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 2 से गुणा करते हैं-
\(5SO_2(g) + 10H_2O(l)\) \(\implies\) \(5HSO_4^- (aq)+15H^+(aq)+10e^-\)
\(2MnO_4^- (aq) + 16H^+(aq)+10e^- \implies 2Mn^{2+} (aq) + 8H_2O(l)\)
पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(2MnO_4^- (aq) + 5SO_2(g) + 2H_2O(l) + H^+ (aq) \longrightarrow 5HSO_4^- (aq) + 2Mn^{2+} (aq)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps illustrate balancing the redox reaction \(MnO_4^- (aq) + SO_2 (g) \longrightarrow Mn^{2+} (aq) + HSO_4^-(aq)\) using the ion-electron method in an acidic medium. The oxidation and reduction half-reactions are first separated. Atoms are balanced, followed by oxygen atoms using water molecules and hydrogen atoms using H+ ions. Electrons are added to balance charges in each half-reaction. The number of electrons is then equalized before combining the two half-reactions to obtain the final balanced equation.
In simple words: This method balances an equation by splitting it into electron-losing and electron-gaining parts. It then balances atoms and charges, adding H+ and water for acidic conditions, to combine them into a final balanced reaction.

🎯 Exam Tip: For balancing redox reactions in acidic medium, remember to add H+ ions to balance hydrogen and H2O molecules to balance oxygen. Ensure the final equation has both mass and charge balanced.

Question 18. (ग) पद 1. पहले हम ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(H_2O_2 (aq) + Fe^{2+} (aq) \longrightarrow Fe^{3+} (aq) + H_2O(l)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : \(Fe^{2+} (aq)\) \(\implies\) \(Fe^{3+} (aq)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(H_2O_2(aq)\) \(\implies\) \(H_2O(l)\)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में Fe परमाणु का सन्तुलन करने पर हम लिखते हैं-
\(Fe^{2+} (aq)\) \(\implies\) \(Fe^{3+} (aq)\)
पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम समीकरण को इस प्रकार लिखते हैं-
\(H_2O_2 (aq)\) \(\implies\) \(2H_2O(l)\)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम बाईं ओर दो H⁺ आयन जोड़ देते हैं-
\(H_2O_2 (aq)+2H^+ (aq)\) \(\implies\) \(2H_2O(l)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन दर्शाई गई विधि द्वारा करते हैं-
\(Fe^{2+} (aq)\) \(\implies\) \(Fe^{3+} (aq)+e^-\)
\(H_2O_2 (aq) + 2H^+(aq)+2e^- \implies 2H_2O(l)\)
इलेक्ट्रॉन की संख्या को एकसमान बनाने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 2 से गुणा करते हैं-
\(2Fe^{2+} (aq)\) \(\implies\) \(2Fe^{3+} (aq) + 2e^-\)
\(H_2O_2 (aq)+2H^+ (aq)+2e^- \implies 2H_2O(l)\)
पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(H_2O_2(aq) + 2Fe^{2+} (aq) + 2H^+ (aq) \longrightarrow 2H_2O(l) + 2Fe^{3+} (aq)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps demonstrate balancing the redox reaction \(H_2O_2 (aq) + Fe^{2+} (aq) \longrightarrow Fe^{3+} (aq) + H_2O(l)\) using the ion-electron method. The oxidation half-reaction involves Fe2+ becoming Fe3+, and the reduction half-reaction involves H2O2 becoming H2O. Atoms are balanced first, followed by oxygen and hydrogen atoms using water and H+ ions respectively. Electrons are then added to balance the charges in each half-reaction. The number of electrons is equalized before combining the two half-reactions to get the final balanced equation.
In simple words: This process balances an equation by separating it into oxidation and reduction parts, then balancing all atoms and charges using H+ and water molecules, finally combining them after equalizing electrons.

🎯 Exam Tip: Hydrogen peroxide often acts as both an oxidizing and reducing agent; in this reaction, it acts as an oxidizing agent. Ensure you correctly identify the half-reactions and the medium for accurate balancing.

Question 18. (घ) पद 1. पहले हम ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(Cr_2O_7^{2-} (aq) + SO_2 (g) \longrightarrow Cr^{3+} (aq) + SO_4^{2-} (aq)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: \(SO_2 (g)\) \(\implies\) \(SO_4^{2-}(aq)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(Cr_2O_7^{2-} (aq)\) \(\implies\) \(Cr^{3+} (aq)\)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-
\(SO_2(g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(SO_4^{2-} (aq)\)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दाईं ओर 4H+ आयन जोड़ देते हैं-
\(SO_2(g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(SO_4^{2-} (aq) + 4H^+ (aq)\)
पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दाईं ओर सात जल अणु" जोड़ते हैं तथा Cr परमाणु को भी सन्तुलित करते हैं-
\(Cr_2O_7^{2-} (aq)\) \(\implies\) \(2Cr^{3+} (aq) + 7H_2O(l)\)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम बाईं ओर चौदह H+ आयन जोड़ देते हैं-
\(Cr_2O_7^{2-}(aq) + 14H^+ (aq)\) \(\implies\) \(2Cr^{3+} (aq) + 7H_2O(l)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन इस प्रकार करते हैं-
\(SO_2(g) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(SO_4^{2-}(aq) + 4H^+ (aq) + 2e^-\)
\(Cr_2O_7^{2-}(aq) + 14H^+ (aq)+6e^- \implies 2Cr^{3+} (aq) + 7H_2O(l)\)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान बनाने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 3 से गुणा करते हैं-
\(3SO_2 (g) + 6H_2O(l)\) \(\implies\) \(3SO_4^{2-} (aq) + 12H^+ (aq)+ 6e^-\)
\(Cr_2O_7^{2-}(aq)+14H^+(aq)+6e^- \implies 2Cr^{3+} (aq) + 7H_2O(l)\)
पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(Cr_2O_7^{2-}(aq)+3SO_2(g)+2H^+(aq) \longrightarrow 2Cr^{3+} (aq)+3SO_4^{2-}(aq) +H_2O(l)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps outline balancing the redox reaction \(Cr_2O_7^{2-} (aq) + SO_2 (g) \longrightarrow Cr^{3+} (aq) + SO_4^{2-} (aq)\) using the ion-electron method. The reaction is broken into oxidation and reduction half-reactions. Atoms other than oxygen and hydrogen are balanced. Oxygen atoms are balanced by adding water molecules, and hydrogen atoms by adding H+ ions. Electrons are added to balance charges in each half-reaction, and their numbers are equalized before the half-reactions are combined to form the final balanced equation.
In simple words: This process balances a chemical equation by separating it into two parts: one where electrons are lost and one where electrons are gained. It then balances all atoms and charges using H+ and water, and combines the parts after making electron counts equal.

🎯 Exam Tip: Remember that in dichromate reactions, chromium undergoes a change from +6 to +3 oxidation state. Always balance Cr atoms first, then oxygen with water, and then hydrogen with H+ ions, before balancing charges with electrons.

 

Question 19. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरणों को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा सन्तुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए-
(क) \(P_4(s) + OH^- (aq) \longrightarrow PH_3(g) + H_2PO_2^- (aq)\)
(ख) \(N_2H_4(l) + ClO_3^- (aq) \longrightarrow NO(g) + Cl^- (g)\)
(ग) \(Cl_2O_7(g) + H_2O_2(aq) \longrightarrow ClO_2^- (aq) + O_2(g) + H^+(aq)\)
Answer:
(क) आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(P_4(s)+OH^-(aq) \longrightarrow PH_3 (g) + H_2PO_2^- (aq)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : \(P_4(s)\) \(\implies\) \(H_2PO_2^- (aq)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(P_4(s)\) \(\implies\) \(PH_3 (g)\)
(P ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों की भाँति कार्य करता है)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में पहले P परमाणुओं को सन्तुलित करके O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम बाईं ओर आठ जल अणु जोड़ते हैं।
\(P_4 (s) + 8H_2O(l) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq)\)
इस अभिक्रिया में H-परमाणु सन्तुलित करने के लिए आठ H+ आयन दाईं ओर जोड़ते हैं।
\(P_4 (s) + 8H_2O(l) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq)+8H^+(aq)\)
अब चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः दोनों ओर OH- आयन जोड़ते हैं---
\(P_4(s)+8H_2O(l)+8OH^-(aq) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq)+8H^+(aq)+8OH^-(aq)\)
या \(P_4 (s) + 8H_2O(l) +8OH^-(aq) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq) + 8H_2O(l)\)
या \(P_4(s)+8OH^-(aq) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq)\)
पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में P परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं—
\(P_4(s) \implies 4PH_3 (g)\)
H-परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम उपर्युक्त अभिक्रिया में बाईं ओर बारह H+ आयन जोड़ देते हैं-
\(P_4(s)+12H^+(aq) \longrightarrow 4PH_3 (g)\)
क्योंकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः 12H+ आयनों के लिए 12OH- आयन समीकरण के दोनों ओर जोड़ते हैं-
\(P_4(s)+12H^+(aq)+12OH^-(aq) \longrightarrow 4PH_3 (g)+12OH^-(aq)\)
H+ तथा OH- के संयोग से जल अणु बनने के कारण परिणामी समीकरण निम्नलिखित प्रकार होगी-
\(P_4 (s) +12H_2O(l) \longrightarrow 4PH_3 (g)+12OH^-(aq)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
\(P_4(s)+8OH^-(aq) \longrightarrow 4H_2PO_2^- (aq) + 4e^-\)
\(P_4(s) +12H_2O(l) +12e^- \implies 4PH_3 (g)+12OH^-(aq)\)
पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(4P_4 (s) + 12H_2O (l) +12OH^-(aq) \longrightarrow 4PH_3 (g) + 12H_2PO_2^-(aq)\)
या \(P_4(s) + 3H_2O(l) + 3OH^- (aq) \longrightarrow PH_3(g)+3H_2PO_2^-(aq)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण में दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps meticulously balance the disproportionation reaction of P4 in a basic medium using the ion-electron method. P4 acts as both the oxidizing and reducing agent, forming PH3 (reduction) and H2PO2- (oxidation). Each half-reaction is balanced for atoms (including O and H with H2O and OH- due to the basic medium) and charge (with electrons). The number of electrons is then equalized, and the two half-reactions are summed to yield the final balanced equation.
In simple words: This process balances a reaction where one element both gains and loses electrons by separating it into two halves, balancing each part for atoms and charge in a basic solution, and then combining them after equalizing electrons.

🎯 Exam Tip: Disproportionation reactions are common. Always identify the element undergoing both oxidation and reduction, then meticulously balance each half-reaction in the specified medium (basic in this case, using OH- and H2O) before combining them. Pay attention to the state of P (P4 molecule).

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-
\(P_4 (s) + OH^-(aq) \longrightarrow PH_3 (g)+H_2PO_2^- (aq)\)
पद 2. अभिक्रिया में P की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
\(P_4 (s) + OH^-(aq) \longrightarrow PH_3 (g) + H_2PO_2^- (aq)\)
यह इस बात का सूचक है कि P ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों रूपों में कार्य करता है।
पद 3. P की ऑक्सीकरण अवस्था 3 घटती है तथा 1 बढ़ती है। अतः हमें H2PO₂ की गुणा 3 से करनी होगी।
\(P_4(s)+ OH^- (aq) \longrightarrow PH_3 (g) + 3H_2PO_2^- (aq)\)
पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा दोनों ओर के आयनों का आवेश एकसमान नहीं है। अतः हम बाईं ओर दो OH 'आयन जोड़ेंगे जिससे आवेश एकसमान हो जाए।
\(P_4(s)+3OH^- (aq) \longrightarrow PH_3 (g) + 3H_2PO_2^- (aq)\)
पद 5. इस पद में हाइड्रोजन आयनों को सन्तुलित करने के लिए हम तीन जल अणुओं को बाईं ओर जोड़ते हैं-
\(P_4(s)+3OH^-(aq) + 3H_2O(l) \longrightarrow PH_3(g) + 3H_2PO_2^- (aq)\)
यह सन्तुलित अभिक्रिया है।


Answer: The provided steps balance the disproportionation reaction of P4 using the oxidation number method in a basic medium. By assigning oxidation numbers, it's identified that P undergoes both reduction (to PH3, -3) and oxidation (to H2PO2-, +1). The changes in oxidation numbers are made equal by stoichiometric coefficients. Since the reaction is in a basic medium, OH- ions and H2O molecules are added to balance charges and hydrogen atoms, respectively, leading to the final balanced equation.
In simple words: This method balances a reaction where one element changes its oxidation state in two directions by equalizing the total change in oxidation numbers and then balancing the atoms with OH- and water.

🎯 Exam Tip: When using the oxidation number method for disproportionation, identify the oxidation state changes for the same element. Balance these changes, then add water and hydroxide ions in basic medium to balance oxygen and hydrogen atoms.

Question 19. (ख) आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(N_2H_4 (l)+ ClO_3^- (aq) \longrightarrow NO(g) + Cl^- (g)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : \(N_2H_4 (l)\) \(\implies\) \(NO(g)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(ClO_3^- (aq)\) \(\implies\) \(Cl^-(g)\)
(N₂H₄ अपचायक तथा ClO₃ ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है।)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में N-परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं-
\(N_2H_4(l)\) \(\implies\) \(2NO(g)\)
अब O परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-
\(N_2H_4(l)+2H_2O(l)\) \(\implies\) \(2NO(g)\)
अब H परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में दाईं ओर 8H+ जोड़ते हैं-
\(N_2H_4 (l) + 2H_2O(l)\) \(\implies\) \(2NO(g)+8H^+(aq)\)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है; अतः समीकरण के दोनों ओर 8 OH- आयन जोड़ते हैं-
\(N_2H_4(l) + 2H_2O(l) +8OH^- (aq) \longrightarrow 2NO(g)+8H^+ +8OH^-(aq)\)
H+ तथा OH- आयनों के संयोग पर जल अणु बनने के कारण समीकरण निम्नवत् होगी -
\(N_2H_4(l)+8OH^-(aq) \longrightarrow 2NO(g) + 6H_2O(l)\)
पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए समीकरण के दाईं ओर तीन जल अणु जोड़ते हैं-
\(ClO_3^-(aq)\) \(\implies\) \(Cl^-(g)+3H_2O(l)\)
H-परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण के बाईं ओर छह H+ आयन जोड़ते हैं-
\(ClO_3^-(aq) + 6H^+(aq) \longrightarrow Cl^-(g)+3H_2O(l)\)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः समीकरण में दोनों ओर छह OH- आयन जोड़ते हैं-
\(ClO_3^-(aq) + 6H^+ (aq)+6OH^-(aq) \longrightarrow Cl^-(g) + 3H_2O(l) + 6OH^-(aq)\)
H+ तथा OH- के संयोग से जल अणु बनने पर,
\(ClO_3^- (aq) + 3H_2O(l) \longrightarrow Cl^-(g)+6OH^-(aq)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं के आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
\(N_2H_4 (l)+8OH^- (aq) \longrightarrow 2NO(g) + 6H_2O(l) + 8e^-\)
\(ClO_3^-(aq) + 3H_2O(l) + 6e^- \implies Cl^-(g)+6OH^-(aq)\)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 3 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 4 से गुणा करते हैं-
\(3N_2H_4 (l)+24OH^-(aq) \longrightarrow 6NO(g)+18H_2O(l) +24e^-\)
\(4ClO_3^-(aq) + 12H_2O(l) +24e^- \implies 4Cl^-(g)+24OH^-(aq)\)
पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(3N_2H_4 (l) + 4ClO_3^-(aq) \longrightarrow 6NO(g)+4Cl^- (g) + 6H_2O(l)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि उपर्युक्त समीकरण परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है।


Answer: The provided steps detail balancing the redox reaction \(N_2H_4 (l) + ClO_3^- (aq) \longrightarrow NO(g) + Cl^- (g)\) using the ion-electron method in a basic medium. N2H4 acts as the reducing agent (oxidized to NO), and ClO3- acts as the oxidizing agent (reduced to Cl-). Each half-reaction is balanced for atoms (N, Cl, O, H), including the addition of H2O and OH- due to the basic environment. Charges are balanced by adding electrons. The number of electrons in both half-reactions is then made equal, and the two half-reactions are combined to yield the final balanced equation.
In simple words: This process balances a redox reaction by separating it into two halves, one for oxidation and one for reduction, then balancing all atoms and charges using water and hydroxide ions in a basic solution, and finally combining them after making electron counts equal.

🎯 Exam Tip: When balancing reactions in basic medium, remember that for every H+ added to balance hydrogen, an equal number of OH- ions must be added to both sides of the equation to convert H+ to H2O.

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-
\(N_2H_4 (l) + ClO_3^- (aq) \longrightarrow NO(g) + Cl^- (g)\)
पद 2. अभिक्रिया में N तथा C1 की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
\(N_2H_4 (l) + ClO_3^- (aq) \longrightarrow NO(g) + Cl^- (g)\)
स्पष्ट है कि N2H4 अपचायक तथा ClO₃ ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं।
पद 3. ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली वृद्धि तथा कमी की गणना करते हैं तथा इन्हें एकसमान बनाते हैं।
\(3N_2H_4 (l) + 4ClO_3^- (aq) \longrightarrow 6NO(g)+4Cl^- (g)\)
पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा अभिक्रिया आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है; अतः ० तथा H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए अभिक्रिया में दाईं ओर 6 जल अणु जोड़ देने पर पूर्णतया सन्तुलित समीकरण प्राप्त हो जाएगी।
\(3N_2H_4 (l)+4ClO_3^-(aq) \longrightarrow 6NO(g)+4Cl^- (g)+ 6H_2O(l)\)
यह सन्तुलित समीकरण है।


Answer: The provided steps balance the redox reaction using the oxidation number method in a basic medium. N2H4 is identified as the reducing agent and ClO3- as the oxidizing agent. The changes in oxidation numbers for N and Cl are calculated, and coefficients are applied to make the total increase and decrease in oxidation numbers equal. Finally, water molecules are added to balance oxygen and hydrogen atoms, ensuring the equation is fully balanced.
In simple words: This method balances a redox reaction by tracking changes in oxidation numbers, making the total change equal, and then adjusting water to balance the remaining atoms.

🎯 Exam Tip: For the oxidation number method, ensure you correctly identify the oxidation states of all relevant elements. The key is to make the total increase in oxidation number equal to the total decrease in oxidation number by adjusting stoichiometric coefficients.

Question 19. (ग) आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं—
\(Cl_2O_7(g)+H_2O_2 (aq) \longrightarrow ClO_2^- (aq) + O_2(g)+H^+(aq)\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: \(H_2O_2 (aq)\) \(\implies\) \(O_2 (g)\)
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया: \(Cl_2O_7 (g)\) \(\implies\) \(ClO_2^- (aq)\)
(H2O2 अपचायक तथा C1207 ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करते हैं।)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दो H+ दाईं ओर जोड़ते हैं-
\(H_2O_2 (aq)\) \(\implies\) \(O_2(g)+2H^+(aq)\)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में सम्पन्न होती है; अतः दोनों ओर OH- आयन जोड़ने पर —
\(2OH^-(aq) + H_2O_2 (aq) \longrightarrow O_2(g)+2H^+ (aq) + 2OH^-(aq)\)
H+ तथा OH™ आयन के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामी समीकरण निम्नवत् होगी -
\(H_2O_2 (aq) + 2OH^- (aq) \longrightarrow O_2(g) + 2H_2O(l)\)
पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में सर्वप्रथम C1 परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं-
\(Cl_2O_7(g)\) \(\implies\) \(2ClO_2^- (aq)\)
O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दाईं ओर तीन जल-अणु जोड़ते हैं-
\(Cl_2O_7(g)\) \(\implies\) \(2ClO_2^- (aq) + 3H_2O(l)\)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम 6H+ बाईं ओर जोड़ते हैं-
\(Cl_2O_7 (g)+6H^+(aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) + 3H_2O(l)\)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में सम्पन्न होती है; अतः 6H+ के लिए दोनों ओर 6OH- जोड़ते हैं-
\(Cl_2O_7(g)+6H^+(aq) + 6OH^- (aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) + 3H_2O(l) + 6OH^-(aq)\)
H+ तथा OH- के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामी समीकरण निम्नवत् होगी -
\(Cl_2O_7 (g) + 3H_2O(l)\) \(\implies\) \(2ClO_2^- (aq) + 6OH^- (aq)\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
\(H_2O_2 (aq) + 2OH^- (aq) \longrightarrow O_2(g) + 2H_2O(l) + 2e^-\)
\(Cl_2O_7 (g)+3H_2O(l) +8e^- \implies 2ClO_2^- (aq) + 6OH^-(aq)\)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया की गुणा 4 से करते हैं।
\(4H_2O_2 (aq)+8OH^-(aq) \longrightarrow 4O_2(g) + 8H_2O(l) + 8e^-\)
\(Cl_2O_7 (g) + 3H_2O(l) +8e^- \implies 2ClO_2^- (aq) + 6OH^-(aq)\)
पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर -
\(Cl_2O_7 (g)+4H_2O_2 (aq) + 2OH^- (aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) + 4O_2(g)+5H_2O(l)\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण में दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।


Answer: The provided steps illustrate balancing the redox reaction \(Cl_2O_7(g)+H_2O_2 (aq) \longrightarrow ClO_2^- (aq) + O_2(g)+H^+(aq)\) using the ion-electron method in a basic medium. H2O2 is oxidized to O2, and Cl2O7 is reduced to ClO2-. Each half-reaction is balanced for atoms (Cl, O, H) by adding H2O and OH- ions, as appropriate for a basic medium. Charges are balanced by adding electrons. The number of electrons is then equalized, and the two half-reactions are combined to get the final balanced equation.
In simple words: This process balances a complex reaction by breaking it into electron-losing and electron-gaining parts. It then balances all atoms and charges, using hydroxide and water molecules for basic conditions, to get the final balanced equation.

🎯 Exam Tip: Pay careful attention when an element is part of a polyatomic ion, ensuring all atoms in that ion are considered during balancing. Always double-check the final equation for both mass and charge balance.

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना -
पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-
\(Cl_2O_7 (g)+H_2O_2 (aq) \longrightarrow ClO_2^- (aq) + O_2(g)+H^+(aq)\)
पद 2. अभिक्रिया में CI तथा O की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
\(Cl_2O_7(g)+H_2O_2 (aq) \longrightarrow ClO_2^- (aq) + O_2(g)+H^+(aq)\)
स्पष्ट है कि H2O2 अपचायक तथा C1207 ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं।
पद 3. ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली कमी तथा वृद्धि की गणना करते हैं तथा इन्हें एकसमान बनाते हैं-
\(Cl_2O_7 (g)+4H_2O_2 (aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) + 4O_2(g)\)
पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा दोनों ओर के आयनों का आवेश एकसमान नहीं है; अतः हम दो OH- आयन बाईं ओर जोड़ देते हैं-
\(Cl_2O_7 (g)+4H_2O_2 (aq) + 2OH^-(aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) + 4O_2 (g)\)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए दाईं ओर पाँच जल-अणु जोड़ते हैं।
\(Cl_2O_7 (g)+4H_2O_2 (aq) + 2OH^-(aq) \longrightarrow 2ClO_2^- (aq) +4O_2(g) + 5H_2O(l)\)
यह सन्तुलित समीकरण है।


Answer: The provided steps balance the given redox reaction using the oxidation number method in a basic medium. H2O2 acts as the reducing agent, and Cl2O7 acts as the oxidizing agent. The changes in oxidation numbers are balanced by adjusting stoichiometric coefficients. Then, in a basic medium, OH- ions and H2O molecules are added to balance the charges and hydrogen/oxygen atoms respectively, resulting in the final balanced equation.
In simple words: This method balances a redox reaction by calculating oxidation number changes, making them equal, and then adjusting water and hydroxide ions to balance remaining atoms and charges.

🎯 Exam Tip: When using the oxidation number method, ensure you calculate the change in oxidation state for *all* atoms of an element if its coefficient changes. In basic media, H2O and OH- are used to balance oxygen and hydrogen, respectively.

 

Question 20. निम्नलिखित अभिक्रिया से आप कौन-सी सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं-
\( (CN)_2(g) + 2OH^- (aq) \longrightarrow CN^- (aq) + CNO^- (aq) + H_2O(l)\)
Answer: यह एक असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है। इसमें (CN)2 एक ही समय में CN¯ में अपचयित और CNO¯ में ऑक्सीकृत होता है। यह अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है।
In simple words: This reaction is a disproportionation where one substance, (CN)2, is both reduced to CN- and oxidized to CNO- simultaneously in a basic solution.

🎯 Exam Tip: Disproportionation reactions are easily identified when a single element in a reactant undergoes both an increase and a decrease in its oxidation state to form two different products.

 

Question 21. Mn3+ आयन विलयन में अस्थायी होता है तथा असमानुपातन द्वारा Mn2+, MnO2 और H⁺ आयन देता है। इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित आयनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
समीकरण का मूल प्रारूप निम्न है -
\(Mn^{3+} (aq) \longrightarrow Mn^{2+} (aq) + MnO_2 (s) + H^+ (aq)\)
उपर्युक्त अभिक्रिया को निम्न प्रकार सन्तुलित किया जा सकता है-
(i) सभी परमाणुओं पर ऑक्सीकरण-संख्या लिखने पर, यह स्पष्ट हो जाता है, कि Mn 3+ का एक ही समय में Mn 2+ में अपचयन तथा MnO2 में ऑक्सीकरण हो रहा है।
(ii) अभिक्रिया को ऑक्सीकरण तथा अपचयन दो अर्द्ध अभिक्रियाओं के रूप में लिखने पर -
\(Mn^{3+} (aq) \longrightarrow Mn^{2+} (aq)\) (अपचयन अर्द्धक्रिया)
\(Mn^{3+} (aq) \longrightarrow MnO_2 (s)\) (ऑक्सीकरण अर्द्धक्रिया)
(iii) अपचयन अर्द्धक्रिया को सन्तुलित करना -
(क) अभिक्रिया में दोनों ओर Mn परमाणु की संख्या समान है।
(ख) अभिक्रिया में कोई भी परमाणु नहीं है।
(ग) इलेक्ट्रॉन जोड़कर आवेश को सन्तुलित करने पर
\(Mn^{3+}(aq)+ e^- \longrightarrow Mn^{2+} (aq)\) (अपचयन अर्द्धक्रिया)
(iv) ऑक्सीकरण अर्द्धक्रिया को सन्तुलित करना-
(क) अभिक्रिया में दोनों ओर Mn परमाणु की संख्या समान है।
(ख) चूँकि अभिक्रिया अम्लीय माध्यम में होती है, इसलिए ऑक्सीजन-परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए बायीं ओर दो (H₂O) अणु जोड़कर O परमाणुओं को सन्तुलित किया जा सकता है।
\(Mn^{3+} (aq) + 2H_2O(l) \longrightarrow MnO_2 (s)\)
H परमाणु को सन्तुलित करने पर
\(Mn^{3+} (aq) + 2H_2O(l) \longrightarrow MnO_2(s) + 4H^+\)
(ग) इलेक्ट्रॉन जोड़कर आवेश को सन्तुलित करने पर
\(Mn^{3+} (aq) + 2H_2O(l) \longrightarrow MnO_2 (s) + 4H^+ + e^-\)
(सन्तुलित ऑक्सीकरण अर्द्धक्रिया)
(घ) दोनों अर्द्धक्रियाओं को जोड़ने पर
\(Mn^{3+} (aq) + e^- \longrightarrow Mn^{2+} (aq)\)
\(Mn^{3+} (aq) + 2H_2O(l) \longrightarrow MnO_2 (s) + 4H^+ + e^-\)
\(2Mn^{3+} (aq) + 2H_2O(l) \longrightarrow Mn^{2+}(aq) + MnO_2 (s) + 4H^+\)
यह दी गई अभिक्रिया के लिये सन्तुलित आयनिक समीकरण है।
In simple words: This process balances the disproportionation of Mn3+ by separating it into reduction (to Mn2+) and oxidation (to MnO2) half-reactions. Each half-reaction is then balanced for atoms and charges using water and H+ ions in the acidic medium, and finally, electrons are equalized and the halves combined.

🎯 Exam Tip: When dealing with disproportionation of an unstable ion, such as Mn3+, remember to write separate half-reactions for its reduction and oxidation products. Always specify the medium (acidic here) to correctly balance H and O atoms.

 

Question 22. Cs, Ne, I तथा F में ऐसे तत्व की पहचान कीजिए, जो
(क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(घ) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
Answer:
(क) F : यह सर्वाधिक वैद्युत ऋणात्मक तत्त्व है और सदैव -1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) Cs : यह एक क्षार धातु है जो अत्यधिक वैद्युत धनात्मक है। यह सदैव +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) I: यह एक हैलोजन है। इसके संयोजक कोश में सात इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं। इसलिये यह -1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। 4-कोश (orbitals) की उपस्थिति के कारण यह +1, +3, +5, और +7 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करता है।
(घ) Ne: यह एक उत्कृष्ट गैस (noble gas) है तथा किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेती है। इसलिए, यह न तो धनात्मक ऑक्सीकरण-अवस्था में पाई जाती है और न ही ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था में।
In simple words: Fluorine only shows -1, Cesium only shows +1, Iodine can show both negative (-1) and positive (+1, +3, +5, +7) oxidation states, and Neon, being a noble gas, shows neither negative nor positive oxidation states in stable compounds.

🎯 Exam Tip: Understanding the electron configuration and electronegativity of elements is key to predicting their possible oxidation states. Halogens, especially I, are good examples of elements with multiple oxidation states due to the availability of d-orbitals.

 

Question 23. जल के शुद्धिकरण में क्लोरीन को प्रयोग में लाया जाता है। क्लोरीन की अधिकता हानिकारक होती है। सल्फर डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करके इस अधिकता को दूर किया जाता है। जल में होने वाले इस अपचयोपचय परिवर्तन के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए।
Answer: क्लोरीन तथा सल्फर डाइऑक्साइड की अभिक्रिया निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त की जा सकती है
\(Cl_2 + SO_2 \longrightarrow Cl^- + SO_4^{2-}\)
इस अपचयोपचय अभिक्रिया को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से निम्नांकित पदों में सन्तुलित करते हैं- पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\(Cl_2 + SO_2 \longrightarrow Cl^-+ SO_4^{2-}\)
पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं-
1. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया : \(SO_2 \longrightarrow SO_4^{2-}\)
2. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया : \(Cl_2 \longrightarrow Cl^-\)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-
\(SO_2 + 2H_2O \longrightarrow SO_4^{2-} +4H^+\)
पद 4. सन्तुलित अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया निम्नवत् होगी ।-
\(Cl_2 \longrightarrow 2Cl^-\)
पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन इस प्रकार करेंगे-
\(SO_2 + 2H_2O \longrightarrow SO_4^{2-} +4H^+ +2e^-\)
\(Cl_2 +2e^- \longrightarrow 2Cl^-\)
पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-
\(Cl_2 + SO_2 + 2H_2O \longrightarrow 2Cl^- + SO_4^{2-} +4H^+\)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण परमाणुओं की संख्या एवं आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है।
In simple words: This reaction shows how excess chlorine in water is removed by sulfur dioxide. Chlorine is reduced to chloride, while sulfur dioxide is oxidized to sulfate. The process is balanced by separating it into oxidation and reduction half-reactions, then balancing atoms and charges using water and H+ ions.

🎯 Exam Tip: When balancing redox reactions in water purification contexts, identify the role of each reactant. Remember that Cl2 often acts as an oxidizing agent and SO2 as a reducing agent in aqueous solutions.

 

Question 24. आवर्त सारणी की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) सम्भावित अधातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन की अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
(ख) किन्हीं तीन धातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
Answer:
(क) P4, Cl2 और S हैं।
(ख) Cu, Ga और In| इनकी असमानुपातन की अभिक्रियाएँ निम्न हैं-
\(2Cu^+ (aq) \longrightarrow Cu^{2+}(aq) + Cu (s)\)
\(3Ga^+ (aq) \longrightarrow Ga^{3+}(aq) + 2Ga(s)\)
\(3In^+ (aq) \longrightarrow In^{3+}(aq) + 2In (3)\)
ये धातु तीन ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पायी जाती हैं, जो निम्न हैं-
Cu: +2, 0, +1 Ga: +3, 0, +1 In : +3, 0, +1
In simple words: Non-metals like P4, Cl2, and S can undergo disproportionation, and metals like Cu, Ga, and In, which exhibit multiple oxidation states (e.g., +1 and +3 for Ga and In, or +1 and +2 for Cu), can also disproportionate.

🎯 Exam Tip: Disproportionation is characteristic of elements that can exist in at least three oxidation states, where the intermediate state can be oxidized and reduced simultaneously. Group 13 elements (like Ga, In) often show +1 and +3 due to the inert pair effect.

 

Question 25. नाइट्रिक अम्ल निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि के प्रथम पद में अमोनिया गैस के ऑक्सीजन गैस द्वारा ऑक्सीकरण से नाइट्रिक ऑक्साइड गैस तथा जलवाष्प बनती है। 10.0 ग्राम अमोनिया तथा 20.00 ग्राम ऑक्सीजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड की कितनी अधिकतम मात्रा प्राप्त हो सकती है?
Answer: प्रक्रम की रासायनिक समीकरण निम्न है-
समीकरण के अनुसार 68 ग्राम NH3 के ऑक्सीकरण के लिए 160 ग्राम O2 की आवश्यकता होती है।
\( \implies \) 10 ग्राम NH3 के ऑक्सीकरण के लिए होगी O2 की आवश्यकता। प्रक्रम में केवल 20g O2 का प्रयोग किया गया है। अत: O2 सीमान्त अभिकर्मक है।
\( \therefore \) 160g O2 से प्राप्त होती है, NO = 120g
\( \therefore \) 20g O2 से प्राप्त होगी, NO = \( \frac{120 \times 20}{160} \) = 15g
In simple words: Based on the stoichiometry of the reaction, 10g of ammonia would require more oxygen than the 20g available. Therefore, oxygen is the limiting reactant, and it will produce 15g of nitric oxide.

🎯 Exam Tip: For stoichiometry problems involving multiple reactants, always identify the limiting reagent first. All calculations for product yield must be based on the amount of the limiting reagent.

 

Question 26. पाठ्य-पुस्तक की सारणी 8:1 में दिए गए मानक विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या इन अभिकारकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(क) Fe3+ तथाI- (aq)
(ख) Ag+ तथा Cu(s)
(ग) Fe3+ (aq) तथा Br- (aq)
(घ) Ag(s) तथा Fe3+(aq)
(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+
Answer:
(क) सम्भव है- \(2Fe^{3+} (aq) + 2I^- (aq) \longrightarrow 2Fe^{2+} (aq) + I_2(s)\)
(ख) सम्भव है- \(Cu (s) + 2Ag^+ (aq) \longrightarrow Cu^{2+} (aq) + 2Ag (s)\)
(ग) सम्भव है- \(Cu (s) + 2Fe^{3+} (aq) \longrightarrow Cu^{2+} (aq) + 2Fe^{2+} (aq)\)
(घ) सम्भव नहीं है।
(ङ) सम्भव है - \(Br_2 (aq) +2Fe^{2+}(aq) \longrightarrow 2Br^- (aq) + 2Fe^{3+}(aq)\)
In simple words: A redox reaction is possible if the oxidizing agent has a higher standard reduction potential than the reducing agent. Reactions (a), (b), (c), and (e) are possible based on standard electrode potentials, while (d) is not.

🎯 Exam Tip: To predict reaction spontaneity, compare standard reduction potentials (E°). A reaction is spontaneous if E°(cathode) - E°(anode) is positive. Oxidizing agents have higher E° values, and reducing agents have lower E° values.

 

Question 27. निम्नलिखित में से प्रत्येक के विद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पादों के नाम बताइए-
(क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO का जलीय विलयन
(ख) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO का जलीय विलयन
(ग) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ H,SO4 का तनु विलयन ।
(घ) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl2 का जलीय विलयन ।
Answer:
(क) कैथोड पर Ag प्राप्त होती है। ऐनोड घुलकर Ag+ आयन देगा।
(ख) कैथोड पर Ag, ऐनोड पर O2।
(ग) कैथोड पर H2, ऐनोड पर O2
(घ) कैथोड पर Cu, यदि विलयन सान्द्र है तो ऐनोड पर Cl2 अन्यथा O2।
In simple words: During electrolysis, the products depend on the electrode material and the nature of the electrolyte. For silver electrodes with AgNO3, Ag deposits at the cathode and the anode dissolves. With platinum electrodes, Ag deposits at the cathode and O2 forms at the anode from water. For H2SO4, H2 forms at the cathode and O2 at the anode. For CuCl2, Cu forms at the cathode, and Cl2 or O2 can form at the anode depending on concentration.

🎯 Exam Tip: Remember the order of discharge of ions at electrodes. At the cathode, metal ions with higher reduction potential get reduced. At the anode, anions with lower oxidation potential get oxidized, or water gets oxidized if no suitable anion is present (e.g., in dilute solutions).

 

Question 28. निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए-
Al, Cu, Fe, Mg तथा Zn
Answer: Mg > Al> Zn > Fe>Cu
In simple words: The order of displacement capacity from their salt solutions, from highest to lowest, is Magnesium, Aluminum, Zinc, Iron, and Copper. This order reflects their activity series or reduction potentials, where more reactive metals can displace less reactive ones.

🎯 Exam Tip: Metal displacement capacity is directly related to the metal's position in the electrochemical series or its standard reduction potential. A metal higher in the activity series (more negative reduction potential) can displace a metal lower in the series from its salt solution.

 

Question 29. नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए-
\(K^+/K= -2.93V, Ag^+/Ag= 0.80 V, Hg^{2+}/Hg= 0.79V Mg^{2+}/Mg = -2.37 V, Cr^{3+}/Cr = -0-74V\)
Answer: Ag < Hg < Cr < Mg < K
In simple words: The reducing strength of a metal increases as its standard reduction potential becomes more negative. Therefore, ordering the given metals by increasing negative potential gives the order of increasing reducing ability: Ag, Hg, Cr, Mg, K.

🎯 Exam Tip: A lower (more negative) standard reduction potential indicates a stronger reducing agent. Therefore, arranging metals in increasing order of their standard reduction potentials gives the order of increasing reducing power.

 

Question 30. उस गैल्वेनी सेल कों चित्रित कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है
\(Zn(s) +2Ag^+ (aq) \longrightarrow Zn^{2+} (aq) + 2Ag(s)\)
अब बताइए कि-
(क) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है?
(ख) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन हैं?
(ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ क्या हैं?
Answer:
Zn (s)|Zn2+ (aq) || Ag+ (aq)| Ag (5)
(क) Zn/ Zn2+ इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है।
(ख) बाह्य परिपथ में वैद्युत धारा के वाहक इलेक्ट्रॉन हैं जिनका प्रवाह Zn इलेक्ट्रोड से Ag इलेक्ट्रोड की ओर होता है।
(ग) ऐनोड पर : \(Zn (s) \longrightarrow Zn^{2+} (aq) +2e^-\)
कैथोड पर : \(2Ag^+ (aq) + 2e^- \longrightarrow 2Ag (s)\)
In simple words: In this galvanic cell, the zinc electrode is negative because it undergoes oxidation (loses electrons). Electrons flow from the zinc electrode to the silver electrode through the external circuit. At the anode (zinc), zinc metal oxidizes to zinc ions, and at the cathode (silver), silver ions reduce to silver metal.

🎯 Exam Tip: In a galvanic cell, the anode is where oxidation occurs and is typically the negative terminal, while the cathode is where reduction occurs and is the positive terminal. Electrons always flow from anode to cathode in the external circuit.

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. CHC2 में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है
(i) 0
(ii) + 2
(iii) -2
(iv) +4
Answer: (ii) +2
In simple words: To find the oxidation number of carbon in CHC2, consider the oxidation states of hydrogen (+1) and chlorine (-1). With two hydrogens and two chlorides, carbon must balance the charges to maintain neutrality, resulting in an oxidation state of +2.

🎯 Exam Tip: Remember to assign standard oxidation states to common elements (like H as +1 and Cl as -1 in most compounds) and then use the overall charge of the compound (or ion) to calculate the unknown oxidation state.

 

Question 2. NaOCI तथा NaClO3 में क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 1, +2
(ii) +1, +5
(iii) -1, +5
(iv) -1,-5
Answer: (ii) +1, +5
In simple words: In NaOCl, sodium is +1 and oxygen is -2, so chlorine must be +1 to balance. In NaClO3, sodium is +1 and oxygen is -2 (total -6 for three oxygens), so chlorine must be +5 to balance the overall neutral charge.

🎯 Exam Tip: Always assign standard oxidation states to Group 1 metals (+1) and oxygen (-2) first, unless it's a peroxide or superoxide. Then, solve for the unknown oxidation state of the central atom by ensuring the sum of oxidation states equals the overall charge of the compound.

 

Question 3.OF2 एवं H2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या है
(i) – 2,- 1
(ii) + 2, - 1
(iii) + 2, + 1
(iv) – 2,+ 1
Answer: (ii) +2,-1
In simple words: ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या OF2 में +2 और H2O2 में -1 होती है क्योंकि फ्लोरीन ऑक्सीजन से अधिक विद्युतऋणी होता है और परऑक्साइड में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्न-भिन्न यौगिकों में भिन्न हो सकती है, विशेषकर फ्लोरीन के साथ बने यौगिकों और परऑक्साइडों में।

 

Question 4.S4O2-6 एवं S2O2-8 में S की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 2.5,+ 6
(ii) + 2.5,+7
(iii) – 2.5, + 6
(iv) + 2.5,-6
Answer: (i) + 2.5,+ 6
In simple words: S4O6^2- में सल्फर की औसत ऑक्सीकरण संख्या +2.5 है, जबकि S2O8^2- में यह +6 है, क्योंकि इसमें परऑक्साइड लिंकेज मौजूद होता है।

🎯 Exam Tip: परऑक्साइड लिंकेज वाले यौगिकों में तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय लिंकेज को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, अन्यथा परिणाम गलत हो सकता है।

 

Question 5.CH2O में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) -2
(ii) +2
(iii) 0
(iv) +4
Answer: (iii) 0
In simple words: CH2O (फॉर्मेल्डिहाइड) में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है, क्योंकि यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों से जुड़ा होता है और कुल आवेश शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक यौगिकों में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, प्रत्येक परमाणु से जुड़े विद्युतऋणात्मकता अंतर को ध्यान में रखना चाहिए।

 

Question 6.CH2Cl2 में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +2
(ii) +1
(iii) 0
(iv) +4
Answer: (iii) 0
In simple words: CH2Cl2 (डाइक्लोरोमीथेन) में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या 0 है, क्योंकि दो हाइड्रोजन परमाणु (-1) और दो क्लोरीन परमाणु (+1) के योगदान का संतुलन होता है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक यौगिकों में, कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या निकालने के लिए, उससे जुड़े सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का योग शून्य होना चाहिए (यदि यौगिक उदासीन हो)।

 

Question 7.H2S2O8 में S की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +4
(ii) +5
(iii) +6
(iv) +7
Answer: (iii) +6
In simple words: H2S2O8 (परऑक्सोडाइसल्फ्यूरिक एसिड) में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या +6 है, जिसमें दो सल्फर परमाणु परऑक्साइड लिंकेज के कारण उच्च ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।

🎯 Exam Tip: H2S2O8 में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, परऑक्साइड लिंकेज (-O-O-) को ध्यान में रखना आवश्यक है, क्योंकि ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है, जो औसत गणना को प्रभावित करती है।

 

Question 8.ऑक्सीजन की सर्वाधिक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करने वाला यौगिक है
(i) H2O2
(ii) F2O
(iii) Cl2O2-7
(iv) NaOCl
Answer: (ii) F2O
In simple words: F2O में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या सर्वाधिक (+2) होती है क्योंकि फ्लोरीन ऑक्सीजन से अधिक विद्युतऋणात्मक होता है और ऑक्सीजन पर धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या होती है।

🎯 Exam Tip: फ्लोरीन ही एकमात्र तत्व है जो ऑक्सीजन से अधिक विद्युतऋणात्मक होता है, जिसके कारण ऑक्सीजन फ्लोरीन के साथ यौगिकों में धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करता है।

 

Question 9.H2SO4, H2SO4 तथा SO2Cl2 में s की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः हैं-
(i) +6, +4, +6
(ii) +6, +6, +4
(iii) +6, -6 +4
(iv) -4, +6, +6
Answer: (i) +6, +4, +6
In simple words: H2SO4 में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या +6, H2SO3 में +4 और SO2Cl2 में +6 होती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न यौगिकों में एक ही तत्व की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करने के लिए, यौगिक के उदासीन होने पर सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का योग शून्य करें।

 

Question 10.निम्नलिखित यौगिकों में से किसमें Mn की ऑक्सीकरण संख्या अधिकतम है?-
(i) Mn2O3
(ii) KMnO4
(iii) K2MnO4
(iv) MnO2
Answer: (ii) KMnO4
In simple words: KMnO4 में मैंगनीज की ऑक्सीकरण संख्या +7 है, जो दिए गए अन्य सभी यौगिकों में मैंगनीज की ऑक्सीकरण संख्या से अधिक है।

🎯 Exam Tip: मैंगनीज एक संक्रमण धातु है और +2 से +7 तक विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकता है; KMnO4 में यह अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में होता है।

 

Question 11.Mn की ऑक्सीकरण संख्या K2MnO4 तो MSO4 में क्रमशः है-
(i) +7 और 12
(ii) +6 और +2
(iii) + 5 और +2
(iv) +2 और +6
Answer: (ii) +6 और +2
In simple words: K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या +6 है, और सामान्य धातु सल्फेट (MSO4) में धातु आयन (M) की ऑक्सीकरण संख्या +2 होती है, जो MnSO4 के लिए भी लागू होगी।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, ज्ञात तत्वों (जैसे K, O, SO4) की ऑक्सीकरण संख्याओं को आधार के रूप में उपयोग करें और अज्ञात तत्व के लिए समीकरण हल करें।

 

Question 12.पोटैशियम डाइक्रोमेट में क्रोमियम की ऑपलीकरण संख्या है-
(i) +2
(ii) + 3
(iii) +4
(iv) +6
Answer: (iv) + 6
In simple words: पोटैशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) में क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या +6 होती है, जो क्रोमियम की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं में से एक है।

🎯 Exam Tip: डाइक्रोमेट आयन में क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या निकालने के लिए, पोटैशियम (+1) और ऑक्सीजन (-2) की ज्ञात ऑक्सीकरण संख्याओं का उपयोग करें और आयन पर कुल आवेश को शून्य के बराबर सेट करें।

 

Question 13.निम्नलिखित में से किसमें नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है?
(i) N2H4
(ii) Ca3N2
(iii) HN3
(iv) N2F2
Answer: (iii) HN3
In simple words: HN3 (हाइड्रोजोइक अम्ल) में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक होती है (-1/3), क्योंकि इसमें एक जटिल संरचना होती है जहां नाइट्रोजन परमाणु अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाओं में होते हैं।

🎯 Exam Tip: जब किसी अणु में एक ही तत्व के कई परमाणु होते हैं और उनकी संरचना समरूप नहीं होती, तो औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक हो सकती है; संरचना पर विचार करके वास्तविक ऑक्सीकरण संख्याएँ निर्धारित की जा सकती हैं।

 

Question 14.एक अभिक्रिया में एक धातु आयन M2+ से दो इलेक्ट्रॉनों के निष्कासित होने के बाद ऑक्सीकरण संख्या हो जाती है-
(i) शून्य
(ii) +2
(iii) +1
(iv) +4
Answer: (iv) +4
In simple words: जब एक M2+ आयन से दो इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, तो इसकी ऑक्सीकरण संख्या +2 से बढ़कर +4 हो जाती है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या इलेक्ट्रॉनों के त्यागने पर बढ़ती है और इलेक्ट्रॉनों के ग्रहण करने पर घटती है; प्रत्येक इलेक्ट्रॉन त्यागने से ऑक्सीकरण संख्या में एक इकाई की वृद्धि होती है।

 

Question 15.क्लोरीन की सर्वाधिक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करने वाला यौगिक है-
(i) ClO2
(ii) Cl2O
(iii) Cl2O7
(iv) NaClO3
Answer: (iii) Cl2O7
In simple words: Cl2O7 (डाइक्लोरीन हेप्टाऑक्साइड) में क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या +7 है, जो क्लोरीन की उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था है।

🎯 Exam Tip: क्लोरीन के ऑक्सीकरण संख्याएँ -1 से +7 तक हो सकती हैं, और यह आमतौर पर ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या बढ़ने के साथ बढ़ती जाती है।

 

Question 16.Sg, S2F2 और H2S में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या के मान क्रमशः हैं।
(i) + 2, + 1 तथा -2
(ii) -2,-1 तथा + 2
(iii) 0, + 1 तथा + 2
(iv) 0, + 1 तथा – 2
Answer: (iv) 0, + 1 तथा – 2
In simple words: S8 में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या 0 है (मुक्त अवस्था), S2F2 में +1 है, और H2S में -2 है।

🎯 Exam Tip: मुक्त अवस्था में किसी भी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है। फ्लोरीन के साथ सल्फर यौगिकों में सल्फर धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित करता है, जबकि हाइड्रोजन के साथ ऋणात्मक।

 

Question 17.Cl2 NaOCl तथा ClO-3 में Cl की क्रमशः ऑक्सीकरण संख्याओं के मान हैं-
(i) +2, 0, +5
(ii) 0, + 2, +5
(iii) +2, +, +5
(iv) 0, + 1, +5
Answer: (iv) 0, +1, +5
In simple words: Cl2 में क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या 0 है, NaOCl में +1 है और ClO3- में +5 है।

🎯 Exam Tip: आणविक क्लोरीन (Cl2) में परमाणु अपनी मौलिक अवस्था में होते हैं, इसलिए ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है। ऑक्सीजन और सोडियम की ज्ञात ऑक्सीकरण संख्याओं का उपयोग करके बाकी की गणना की जा सकती है।

 

Question 18.Na2S4O6 की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) + 2
(ii) + 3
(iii) + 15
(iv) + 2.5
Answer: (iv) + 2.5
In simple words: Na2S4O6 में सल्फर की औसत ऑक्सीकरण संख्या +2.5 है, जो इसकी जटिल संरचना के कारण एक भिन्नात्मक मान है।

🎯 Exam Tip: पॉलिथायोनेट आयनों जैसे जटिल यौगिकों में औसत ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक हो सकती है, जिसका अर्थ है कि उस तत्व के परमाणु अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाओं में मौजूद होते हैं।

 

Question 19.Ni(CO)4 में Ni की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) 0
(ii) 4
(iii) 8
(iv) 2
Answer: (i) 0
In simple words: Ni(CO)4 (निकल टेट्राकार्बोनिल) में निकल की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है, क्योंकि कार्बोनिल (CO) एक उदासीन लिगेंड है और निकल परमाणु कोई आवेश नहीं रखता।

🎯 Exam Tip: धातु कार्बोनिल यौगिकों में, धातु परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या अक्सर 0 होती है क्योंकि कार्बोनिल लिगेंड उदासीन होते हैं।

 

Question 20.सोडियम नाइट्रोपुसाइड में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +3
(ii) +2
(iii) +4
(iv) 0
Answer: (ii) +2
In simple words: सोडियम नाइट्रोपुसाइड (Na2[Fe(CN)5NO]) में आयरन की ऑक्सीकरण संख्या +2 है, जिसमें नाइट्रोसिल लिगेंड को सामान्यतः तटस्थ माना जाता है।

🎯 Exam Tip: जटिल यौगिकों में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, लिगेंड के आवेशों (जैसे CN- का -1 और NO का 0) पर सावधानी से विचार करें।

 

Question 21.निम्नलिखित में Mn की न्यूनतम ऑक्सीकरण संख्या वाला यौगिक है-
(i) KMnO4
(ii) MnO2
(iii) KaMnO4
(iv) Mn2O3
Answer: (iv) Mn2O3
In simple words: Mn2O3 में मैंगनीज की ऑक्सीकरण संख्या +3 है, जो दिए गए विकल्पों में सबसे कम है।

🎯 Exam Tip: मैंगनीज के विभिन्न ऑक्साइडों में, ऑक्सीजन की संख्या बढ़ने के साथ मैंगनीज की ऑक्सीकरण संख्या भी बढ़ती है, लेकिन Mn2O3 में यह अपेक्षाकृत कम होती है।

 

Question 22.O3 तथा H2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या के मान क्रमशः हैं-
(i) 0, -1
(ii) 0, +1
(iii) 0-2
(iv) -2,-1
Answer: (i) 0, -1
In simple words: O3 (ओजोन) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है क्योंकि यह एक मौलिक अवस्था में है, जबकि H2O2 (हाइड्रोजन परऑक्साइड) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी मौलिक अणु (जैसे O3) में परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। परऑक्साइड यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या सामान्यतः -2 के बजाय -1 होती है।

 

Question 23.निम्न में कौन-सी रेडॉक्स अभिक्रिया है?
(i) AgNO3 + HCl → AgCl + HNO3
(ii) BaO2 + H2SO4 → BaSO4 + H2O2
(iii) SO2 + 2H2S → 2H2O+ 3s
(iv) CaC2O4 +2HCl → CaCl2 + H2C2O4
Answer: (iii) SO2 + 2H2S→ 2H2O+ 3s
In simple words: SO2 + 2H2S → 2H2O + 3S एक रेडॉक्स अभिक्रिया है क्योंकि सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या SO2 में +4 से बदलकर 0 (S) हो जाती है और H2S में -2 से बदलकर 0 (S) हो जाती है।

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रिया वह होती है जिसमें अभिकारकों की ऑक्सीकरण संख्याओं में परिवर्तन होता है, यानी एक अभिकारक ऑक्सीकृत होता है और दूसरा अपचयित होता है।

 

Question 24.निम्नलिखित अभिक्रिया में ऑक्सीकारक है-
2CrO2-2 + 2H+ → Cr2O2-7 + H2O
(i) H+
(ii) CrO2-
(iii) Cr+3
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer: (iv) इनमें से कोई नहीं
In simple words: दी गई अभिक्रिया में, CrO2^2- से Cr2O7^2- बनता है, जहाँ क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या +3 से +6 में बदल रही है, जिसका मतलब यह ऑक्सीकृत हो रहा है, इसलिए यह अपचायक है। कोई स्पष्ट ऑक्सीकारक नहीं दिया गया है जो क्रोमियम को अपचयित करे।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक वह पदार्थ होता है जो स्वयं अपचयित होता है (अपनी ऑक्सीकरण संख्या घटाता है) और दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करता है।

 

Question 25.निम्न अभिक्रिया में अपचयित होने वाला पदार्थ है-
2CusO4+ 4KI→ Cu2l2 + 2K2SO4+12
(i) CuSO4
(ii) KI
(iii) Cu2l2
(iv) I2
Answer: (i) CuSO4
In simple words: इस अभिक्रिया में CuSO4 में कॉपर की ऑक्सीकरण संख्या +2 से बदलकर Cu2I2 में +1 हो जाती है, जिसका अर्थ है कि CuSO4 अपचयित हो रहा है।

🎯 Exam Tip: अपचयित होने वाला पदार्थ वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है, जो इलेक्ट्रॉनों के ग्रहण करने के कारण होता है।

 

Question 26.हाइड्रोजन द्वारा अपचयित होने वाला ऑक्साइड है
(i) MnO2
(ii) MgO
(iii) CaO
(iv) CoO
Answer: (iv) CoO
In simple words: CoO हाइड्रोजन द्वारा अपचयित हो सकता है क्योंकि कोबाल्ट की क्रियाशीलता हाइड्रोजन से कम होती है, जिससे यह आसानी से धातु में परिवर्तित हो सकता है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन आमतौर पर उन धातु ऑक्साइडों को अपचयित करता है जहाँ धातु की क्रियाशीलता हाइड्रोजन से कम होती है (विद्युतरासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे)।

 

Question 27.4Fe + 3O2 → 4Fe3+ + 6O2- अभिक्रिया में निम्न में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) रेडॉक्स अभिक्रिया है।
(ii) Fe अपचायक है।
(iii) Fe का अपचयन Fe3+ में हुआ है।
(iv) ऑक्सीजन का अपचयन हुआ है।
Answer: (iii) Fe का अपचयन Fe3+ में हुआ है।
In simple words: इस अभिक्रिया में Fe (ऑक्सीकरण संख्या 0) से Fe3+ (ऑक्सीकरण संख्या +3) बन रहा है, जिसका अर्थ है कि Fe का ऑक्सीकरण हो रहा है, न कि अपचयन।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है, जबकि अपचयन में ऑक्सीकरण संख्या घटती है। Fe से Fe3+ बनना ऑक्सीकरण का उदाहरण है।

 

Question 28.298 K पर अर्द्ध अभिक्रियाओं के मानक अपचयन विभव हैं
(i) Zn2+ +2e- → Zn (s); - 0.762
(ii) Cr3++ 3e → Cr (3);- 0.740
(iii) 2H+ +2e- → H2 (g);- 0.000
(iv) Fe3+ + e- → Fe2+(aq); + 0.770
कौन-सा प्रबलतम अपचायक है।
(i) Zn (s)
(ii) Cr (s)
(iii) H2 (g)
(iv) Fe2+ (aq)
Answer: (i) Zn (s)
In simple words: प्रबलतम अपचायक वह होता है जिसका मानक अपचयन विभव सबसे कम (अधिक ऋणात्मक) होता है, और दिए गए विकल्पों में Zn का अपचयन विभव -0.762 V है, जो सबसे कम है।

🎯 Exam Tip: मानक अपचयन विभव जितना अधिक ऋणात्मक होता है, संबंधित तत्व या आयन उतना ही प्रबल अपचायक होता है क्योंकि उसकी इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होती है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1.रेडॉक्स अभिक्रिया की व्याख्या एक उदाहरण सहित कीजिए।
Answer: परमाणु या आयन जिस अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन त्यागता है, उसे ऑक्सीकरण और जिसमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, उसे अपचयन कहते हैं। ऑक्सीकरण तथा अपचयन क्रियाएँ साथ-साथ चलती हैं क्योंकि जब कोई परमाणु या आयन एक इलेक्ट्रॉन त्यागेगा तो उसको ग्रहण करने वाला कोई अन्य परमाणु या आयन ही होगा अर्थात् जब किसी अभिक्रिया में एक पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है। तो दूसरे किसी अन्य पदार्थ का अपचयन भी होता है। स्पष्ट है कि ऑक्सीकरण व अपचयन क्रियाएँ साथ-साथ होती हैं। इन ऑक्सीकरण व अपचयन अभिक्रियाओं को सम्मिलित रूप से ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया या रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरणार्थ- 2HgCl2 + SnCl2 → Hg2Cl2 + SnCl4 उपर्युक्त अभिक्रिया में HgCl2 का Hg2Cl2 में अपचयन होता है और HgCl2, SnCl2 को SnCl4 में ऑक्सीकृत कर देता है।
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रिया वह है जिसमें एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत होता है और दूसरा पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होता है, ये दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं। जैसे, 2HgCl2 में Hg का अपचयन और SnCl2 का SnCl4 में ऑक्सीकरण।

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करें - ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि ऑक्सीकरण है और कमी अपचयन है।

 

Question 2.ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर ऑक्सीकारक तथा अपचायक की पहचान किस प्रकार की जाती है? एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए ।
Answer: ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर, ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है, जबकि अपचायक पदार्थ की ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है। उदाहरणार्थ-ऑ०सं. प्रति परमणु लिखने पर, \[ \text{SnCl}_2^{+\text{2-1}} + \text{2FeCl}_3^{+\text{3-1}} \longrightarrow \text{SnCl}_4^{+\text{4-1}} + \text{2FeCl}_2^{+\text{2-1}} \] अपचायक ऑक्सीकारक उपर्युक्त अभिक्रिया में SnCl2 में Sn की ऑक्सीकरण संख्या +2 है तथा उत्पाद SnCl4 में +4 है। Sn की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि हो रही है।
`\(\implies\)` SnCl2 अपचायक है जबकि FeCl3 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 व FeCl2 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +2 है, अतः FeCl3 ऑक्सीकारक है।
In simple words: ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है, जबकि अपचायक वह पदार्थ है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है। उदाहरण के लिए, SnCl2 (Sn की ऑक्सीकरण संख्या +2 से +4 होती है) अपचायक है, और FeCl3 (Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 से +2 होती है) ऑक्सीकारक है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या विधि एक सरल तरीका है जिससे आप रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक और अपचायक की पहचान कर सकते हैं।

 

Question 3.निम्नलिखित अभिक्रिया की दो अर्द्ध अभिक्रियाएँ लिखिए। यह भी उल्लेख कीजिए कि कौन-सी अर्द्ध अभिक्रिया ऑक्सीकरण व कौन-सी अपचयन अभिक्रिया है? SnCl2 + 2HgCl2 → SnCl4 + Hg2Cl2
Answer: प्रश्न में उल्लिखित अभिक्रिया को दो अर्द्ध अभिक्रियाओं में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं-
1. SnCl2 + Cl2 → SnCl4 (ऑक्सीकरण अभिक्रिया)
2. 2HgCl2 → Hg2Cl2 + Cl2 `\(\uparrow\)` (अपचयन अभिक्रिया) इस अभिक्रिया में HgCl2 में Hg की ऑक्सीकरण संख्या +2 है तथा Hg2Cl2 में Hg की ऑक्सीकरण संख्या 0 है। चूंकि ऑक्सीकरण संख्या में कमी हो रही है, अतः Hg2Cl2 ऑक्सीकारक है।
In simple words: अभिक्रिया SnCl2 + 2HgCl2 → SnCl4 + Hg2Cl2 में SnCl2 से SnCl4 का बनना ऑक्सीकरण (Sn की ऑक्सीकरण संख्या +2 से +4) है, जबकि 2HgCl2 से Hg2Cl2 का बनना अपचयन (Hg की ऑक्सीकरण संख्या +2 से +1) है।

🎯 Exam Tip: अर्द्ध-अभिक्रियाएँ लिखते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक में इलेक्ट्रॉनों का त्याग या ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाया गया हो, और ऑक्सीकरण संख्याओं में परिवर्तन को सही ढंग से दर्शाया गया हो।

 

Question 4.कारण सहित बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रिया में कौन ऑक्सीकारक तथा कौन अपचायक है? 2KI + Cl2 → 2KCI + I2
Answer: चूंकि KI में I की ऑक्सीकरण संख्या -1 तथा I2 में 0 है, अर्थात् I की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि हो रही है, अतः KI अपचायक है। इसके विपरीत, Cl2 में Cl की ऑक्सीकरण संख्या 0 है तथा KCl में -1 है। चूंकि ऑक्सीकरण संख्या में कमी हो रही है, अतः Cl2 ऑक्सीकारक है।
In simple words: अभिक्रिया 2KI + Cl2 → 2KCl + I2 में KI अपचायक है क्योंकि आयोडाइड (I-) ऑक्सीकृत होकर आयोडीन (I2) बनाता है, जबकि Cl2 ऑक्सीकारक है क्योंकि यह अपचयित होकर क्लोराइड (Cl-) बनाता है।

🎯 Exam Tip: एक पदार्थ जो इलेक्ट्रॉनों को त्यागता है और अपनी ऑक्सीकरण संख्या बढ़ाता है, वह अपचायक होता है। एक पदार्थ जो इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है और अपनी ऑक्सीकरण संख्या घटाता है, वह ऑक्सीकारक होता है।

 

Question. 5.ऑक्सीकरण संख्या को उदाहरण सहित समझाइए । या ऑक्सीकरण संख्या पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: किसी यौगिक या आयन में तत्त्व के एक परमाणु पर स्थित धन या ऋण आवेशों की संख्या उस तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या कहलाती है, जबकि उस अणु या आयन में उपस्थित अन्य परमाणुओं को उनके सम्भावित आयनों के रूप में पृथक् कर दिया जाता है। यह संख्या धनात्मक व ऋणात्मक दोनों प्रकार की हो सकती है। उदाहरणार्थ-NaCl में Na की ऑक्सीकरण संख्या +1 और Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 है, क्योंकि Na पर इकाई धनावेश तथा Cl पर इकाई ऋणावेश है।
In simple words: ऑक्सीकरण संख्या किसी यौगिक में एक परमाणु पर लगने वाले काल्पनिक आवेश को बताती है, जब सभी बंधों को आयनिक मान लिया जाए; यह धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती है। उदाहरण के लिए, NaCl में Na की ऑक्सीकरण संख्या +1 और Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या रासायनिक बंधों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो रेडॉक्स अभिक्रियाओं को पहचानने में मदद करता है।

 

Question 6.शून्य, -1 तथा +1 ऑक्सीकरण संख्या से क्या तात्पर्य है?
Answer: एक यौगिक में किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य (0) से तात्पर्य है कि तत्त्व के परमाणु पर धन या ऋण आवेश नहीं है अर्थात् परमाणु विद्युत उदासीन है। तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या +1 से तात्पर्य यह है कि तत्त्व के परमाणु पर इकाई धन आवेश है, जिसे उदासीन करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की आवश्यकता होती है। तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या -1 से तात्पर्य है कि तत्त्व के ” परमाणु पर इकाई ऋणावेश है, जिसे उदासीन करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन त्यागने की आवश्यकता होती है।
In simple words: 0 ऑक्सीकरण संख्या का मतलब है कि परमाणु उदासीन है; +1 का मतलब है कि परमाणु ने एक इलेक्ट्रॉन खोया है या खोने की प्रवृत्ति रखता है; और -1 का मतलब है कि परमाणु ने एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त किया है या प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या का मान किसी तत्व के रासायनिक व्यवहार और उसकी रेडॉक्स क्षमता को दर्शाता है।

 

Question 7.ब्लू परक्रोमेट में Cr की ऑ०सं० ज्ञात कीजिए ।
Answer: ब्लू परक्रोमेट की संरचना
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह डायग्राम ब्लू परक्रोमेट (CrO5) की संरचना को दर्शाता है। इसमें एक केंद्रीय क्रोमियम (Cr) परमाणु है, जो एक ऑक्सीजन परमाणु से डबल बॉन्ड से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त, क्रोमियम परमाणु दो परऑक्साइड लिंकेज (-O-O-) के माध्यम से चार ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़ा है, जिससे कुल पाँच ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
इसमें दो परॉक्साइड बन्ध हैं। माना Cr की ऑ०सं० x है, तब x+4(-1)-2=0
`\(\implies\)` x = + 6
In simple words: ब्लू परक्रोमेट (CrO5) में क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या +6 होती है, क्योंकि इसमें दो परऑक्साइड बंध होते हैं जहाँ ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

🎯 Exam Tip: असामान्य संरचनाओं जैसे परऑक्साइड बंध वाले यौगिकों में ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, प्रत्येक परमाणु के बंध और उसकी विद्युतऋणात्मकता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8.सम्बन्धित तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए
(i) KMnO4 में Mn की
(ii) ClO-3 में Cl की
(iii) NaOCl में Cr की
(iv) H2S2O6 में S की
(v) Cl2 में Cl की
Answer: (i) KMnO4 - माना Mn की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{K}^{+1}\text{Mn}^{x}\text{O}_4^{-2} \] (+1)+x-8=0
`\(\implies\)` x-7=0
`\(\implies\)` x=+7
(ii) ClO-3- माना Cl की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{Cl}^{x}\text{O}_3^{-2} \] x + (-2)x3=0
`\(\implies\)` x-6=-1
`\(\implies\)` x = +5
(iii) NaOCl-माना Cl की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{Na}^{+1}\text{O}^{-2}\text{Cl}^{x} \] +1-2+x=0
`\(\implies\)` x=+1
(iv) H2S2O8-माना S की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{H}_2^{+1}\text{S}_2^{x}\text{O}_8^{-2} \] 2(+1)+2x+2(-1)+6(-2)=0 (इसमें दो ऑक्सीजन परमाणु परॉक्साइड बन्ध से जुड़े हैं।) 2+2x-2-12=0
`\(\implies\)` 2x=+12
`\(\implies\)` x = + 6
(v) शून्य।
In simple words: KMnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या +7, ClO3- में Cl की +5, NaOCl में Cl की +1, H2S2O8 में S की +6 और Cl2 में Cl की 0 है।

🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक में तत्व की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करते समय, ज्ञात तत्वों (जैसे K, Na, H, O) की सामान्य ऑक्सीकरण संख्याओं का उपयोग करें और यौगिक के कुल आवेश (या उदासीन होने पर शून्य) के बराबर सेट करें।

 

Question 9.निम्नलिखित यौगिकों में s (सल्फर) की ऑक्सीकरण संख्या बताइए-
(i) Na2S4O6,
(ii) SO2Cl2
Answer: (i) Na2S4O6-माना S की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{Na}_2^{+1}\text{S}_4^{x}\text{O}_6^{-2} \] 2(+1)+4(x)+6(-2) = 0 2+4x-12=0 4x=10
`\(\implies\)` x=2.5
(ii) SO2Cl2-माना S की ऑक्सीकरण संख्या x है। अतः \[ \text{S}^{x}\text{O}_2^{-2}\text{Cl}_2^{-1} \] x+2(-2)+2(-1)=0 x-4-2=0
`\(\implies\)` x=+6
In simple words: Na2S4O6 में सल्फर की औसत ऑक्सीकरण संख्या +2.5 है, जबकि SO2Cl2 में यह +6 है।

🎯 Exam Tip: पॉलीथायोनेट जैसे जटिल यौगिकों में सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, औसत मान भिन्नात्मक हो सकता है, लेकिन यह विभिन्न सल्फर परमाणुओं की अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाओं को दर्शाता है।

 

Question 10.K2FeO4 में Fe तथा NH4 में N की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए ।
Answer: माना K2FeO4 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या x है। \[ \text{K}_2^{+1}\text{Fe}^{x}\text{O}_4^{-2} \] 2(+1)+x+4(-2)= 0 2+x-8=0
`\(\implies\)` x = +6 पुनः माना NH4 में N की ऑक्सीकरण संख्या x है, तब \[ \text{N}^{x}\text{H}_4^{+1} \] x + 4 (+1)= +1 x+4=1
`\(\implies\)` x=-3
In simple words: K2FeO4 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +6 है, और NH4+ आयन में N की ऑक्सीकरण संख्या -3 है।

🎯 Exam Tip: किसी आयन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का योग आयन के कुल आवेश के बराबर होना चाहिए।

 

Question 11.I-Cl में Cl तथा H-H में H की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए । कारण भी दीजिए ।
Answer: I-Cl में Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 होगी; क्योंकि Cl की विद्युत ऋणात्मकता I से अधिक है, जबकि H-H में H की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होगी क्योंकि समान परमाणु वाले यौगिक के अणुओं में तत्त्वों के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।
In simple words: I-Cl में Cl की ऑक्सीकरण संख्या -1 है क्योंकि Cl, I से अधिक विद्युतऋणात्मक है। H-H में H की ऑक्सीकरण संख्या 0 है क्योंकि यह एक मौलिक अणु है।

🎯 Exam Tip: एक ही तत्व के दो परमाणुओं के बीच बने सहसंयोजक बंध में, प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। जब विभिन्न तत्वों के बीच बंध होता है, तो अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व को ऋणात्मक ऑक्सीकरण संख्या मिलती है।

 

Question 12.S8 अणु में S की संयोजकता तथा ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
Answer: S8 में S की संयोजकता 2 है, जबकि ऑक्सीकरण संख्या शून्य है।
In simple words: S8 अणु में सल्फर की संयोजकता 2 होती है (प्रत्येक सल्फर परमाणु दो अन्य सल्फर परमाणुओं से जुड़ा होता है), और इसकी ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है क्योंकि यह एक मौलिक तत्व है।

🎯 Exam Tip: मौलिक तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या हमेशा शून्य होती है, भले ही वे जटिल आणविक संरचनाओं में मौजूद हों।

 

Question 13.निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित एवं पूर्ण कीजिए- SO2+ MnO4+...... → SO2-4 + Mn2+ +.....
Answer: दी गई आयनिक अभिक्रिया समीकरण को अर्द्ध-अभिक्रिया समीकरण के रूप में लिखने पर, \[ \text{SO}_2 \longrightarrow \text{SO}_4^{2-} \quad ...(\text{i}) \] \[ \text{MnO}_4^{-} \longrightarrow \text{Mn}^{2+} \quad ...(\text{ii}) \] समी० (i) से, \[ \text{SO}_2 + \text{2H}_2\text{O} \longrightarrow \text{SO}_4^{2-} + \text{4H}^{+} + \text{2e}^{-} \quad ...(\text{iii}) \] समी० (ii) से, \[ \text{8H}^{+} + \text{MnO}_4^{-} + \text{5e}^{-} \longrightarrow \text{Mn}^{2+} + \text{4H}_2\text{O} \quad ...(\text{iv}) \] समी० (iii) `\(\times\)` 5 तथा समी० (iv) `\(\times\)` 2 करके जोड़ने पर, \[ \text{5SO}_2 + \text{10H}_2\text{O} + \text{16H}^{+} + \text{2MnO}_4^{-} + \text{10e}^{-} \longrightarrow \text{5SO}_4^{2-} + \text{20H}^{+} + \text{10e}^{-} + \text{2Mn}^{2+} + \text{8H}_2\text{O} \]
`\(\implies\)` 5SO2 + 2H2O + 2MnO4 →5SO4 + 4H+ + 2Mn2+ यही सन्तुलित समीकरण है।
In simple words: इस रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित करने के लिए, SO2 को SO4^2- में ऑक्सीकृत किया जाता है और MnO4- को Mn2+ में अपचयित किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप कुल संतुलित समीकरण 5SO2 + 2H2O + 2MnO4- → 5SO4^2- + 4H+ + 2Mn2+ है।

🎯 Exam Tip: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि का उपयोग करते समय, प्रत्येक अर्द्ध-अभिक्रिया को संतुलित करना और फिर इलेक्ट्रॉनों की संख्या को बराबर करके उन्हें जोड़ना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14.आयनिक समीकरण Br2 + OH- → Br- + BrO3 + H2O को सन्तुलित कीजिए तथा ऑक्सीकारक और अपचायक बताइए ।
Answer: दी गई आयनिक अभिक्रिया समीकरण को अर्द्ध अभिक्रिया समीकरण के रूप में लिखने पर, Br2 → Br-...(i) Br2 → BrO3-...(ii) समी० (i) से, [Br2 +2e- → 2Br-]x 5 समी० (ii) से, Br2 + 12OH- → 2BrO3- + 6H2O +10e- 5Br2 + 10e- + Br2 + 12OH- → 10Br- + 2BrO3- + 6H2O+10e- 6Br2 + 12OH- → 10Br- + 2BrO3- + 6H2O
`\(\implies\)` 3Br2 + 6OH- → 5Br- + BrO3- + 3H2O Br2 ही ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों का कार्य करता है।
In simple words: Br2 + OH- → Br- + BrO3- + H2O अभिक्रिया में, Br2 स्वयं ऑक्सीकृत और अपचयित होता है, इसलिए यह ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है। संतुलित समीकरण 3Br2 + 6OH- → 5Br- + BrO3- + 3H2O है।

🎯 Exam Tip: असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रियाओं में, एक ही पदार्थ ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है, जो इलेक्ट्रॉनों के त्यागने और ग्रहण करने दोनों को दर्शाता है।

 

Question 15.(i) Cl2O7 में Cl की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए।
(ii) 2FeCl3 + H2S → 2FeCl2 + 2HCl+S इस अभिक्रिया में ऑक्सीकारक और अपचायक का नाम लिखिए ।
Answer: (i) माना Cl की ऑ०सं० Cl2O7 में x है, 2x + 7(-2)= 0 2x=+14
`\(\implies\)` x= +7
(ii) 2FeCl3 + H2S → 2FeCl2 + 2HCl + S \[ \text{FeCl}_3^{+3-1} \quad \text{H}_2\text{S}^{-2} \quad \text{FeCl}_2^{+2-1} \quad \text{S}^{0} \] ऑ०सं० में कमी = 1 ऑक्सीकारक = FeCl3 अपचायक = H2S
In simple words: (i) Cl2O7 में Cl की ऑक्सीकरण संख्या +7 है। (ii) अभिक्रिया 2FeCl3 + H2S → 2FeCl2 + 2HCl + S में, FeCl3 ऑक्सीकारक है क्योंकि Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 से +2 हो रही है, और H2S अपचायक है क्योंकि S की ऑक्सीकरण संख्या -2 से 0 हो रही है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है, और अपचायक वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है।

 

Question 16.निम्न में से किसमें Mn की ऑक्सीकरण संख्या सबसे अधिक है और क्यों? MnO2, MnO, Mn2O3, K2MnO4
Answer: K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या सबसे अधिक (+6) है, क्योंकि इसमें ऑक्सीजन परमाणुओं का आपेक्षिक अनुपात बाकी अणुओं से अधिक है।
In simple words: K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या (+6) सबसे अधिक है क्योंकि यह Mn की उच्च ऑक्सीकरण अवस्था को दर्शाता है, जबकि अन्य यौगिकों में Mn की ऑक्सीकरण संख्या कम होती है (MnO2 में +4, MnO में +2, Mn2O3 में +3)।

🎯 Exam Tip: मैंगनीज एक संक्रमण धातु है जो कई ऑक्सीकरण अवस्थाएं दिखाती है। अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था अक्सर उन यौगिकों में पाई जाती है जहाँ यह अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणुओं (जैसे ऑक्सीजन) से जुड़ा होता है।

 

Question 17.निम्नलिखित समीकरण को सन्तुलित कीजिए। Fe2+ + NO3 + H+ —> Fe3+ + NO + H2O
Answer: ऑक्सीकरण की अर्द्ध-अभिक्रिया \[ [\text{Fe}^{2+} \longrightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{e}^{-}] \text{ x 3} \] अपचयन की अर्द्ध-अभिक्रिया \[ [\text{NO}_3^{-} + \text{4H}^{+} + \text{3e}^{-} \longrightarrow \text{NO} + \text{2H}_2\text{O}] \text{ x 1} \]
`\(\implies\)` सन्तुलित समीकरण है 3Fe2+ + NO3 + 4H+ `\(\implies\)` 3Fe3+ + NO + 2H2O
In simple words: Fe2+ + NO3 + H+ → Fe3+ + NO + H2O समीकरण को संतुलित करने पर 3Fe2+ + NO3- + 4H+ → 3Fe3+ + NO + 2H2O प्राप्त होता है, जहाँ Fe2+ ऑक्सीकृत होता है और NO3- अपचयित होता है।

🎯 Exam Tip: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि का उपयोग करते समय, ऑक्सीकरण और अपचयन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को अलग-अलग संतुलित करें, फिर इलेक्ट्रॉनों की संख्या को बराबर करके समीकरणों को जोड़ दें।

 

Question 18.विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर F, Cl, Br तथा I की ऑक्सीकारक क्षमता को समझाइए। या कारण देते हुए समझाइए कि हैलोजन ऑक्सीकारक के रूप में क्यों कार्य करते हैं?
Answer: हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता उनके इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। जिस हैलोजन की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है वह अधिक प्रबल ऑक्सीकारक होता है। अधिक प्रबल ऑक्सीकारक के रेडॉक्स युग्म का मानक अपचयन विभव अधिक धनात्मक होता है। हैलोजनों (X2) की ऑक्सीकारक क्षमता उनके रेडॉक्स युग्मों (X2/X-) के मानक अपचयन विभवों के मान बढ़ने के क्रम में बढ़ती है। \[ \begin{array}{|l|l|l|l|l|} \hline \textbf{हैलोजन (X}_2\textbf{)} & \textbf{F}_2 & \textbf{Cl}_2 & \textbf{Br}_2 & \textbf{I}_2 \\ \hline \textbf{मानक अपचयन विभव} & +2.87 & +1.36 & +1.06 & +0.54 \\ \hline \end{array} \] ऑक्सीकारक क्षमता बढ़ने का क्रम
In simple words: हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं क्योंकि उनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की तीव्र प्रवृत्ति होती है। उनकी ऑक्सीकारक क्षमता का क्रम F2 > Cl2 > Br2 > I2 है, जो उनके मानक अपचयन विभवों के मान (जितना अधिक धनात्मक, उतना प्रबल ऑक्सीकारक) से निर्धारित होता है।

🎯 Exam Tip: विद्युत रासायनिक श्रेणी में, ऊपर से नीचे जाने पर मानक अपचयन विभव घटता है, जिसका अर्थ है कि ऊपर के तत्व अधिक प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं और नीचे के तत्व अधिक प्रबल अपचायक होते हैं।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1.इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: ऑक्सीकरण-किसी परमाणु, अणु या आयन के इलेक्ट्रॉनों का पृथक् होना ऑक्सीकरण कहलाता है। इसके फलस्वरूप धनात्मक संयोजकता बढ़ती है तथा ऋणात्मक संयोजकता घटती है जो कि त्यागे गये इलेक्ट्रॉन संख्या के बराबर होती है। चूंकि इस क्रिया में इलेक्ट्रॉन त्यागे जाते हैं अतः इसे इलेक्ट्रॉन वियोजन भी कहते हैं। उदाहरणार्थ- (i) Fe2+ → Fe3+ +e- (धनात्मक संयोजकता का बढ़ना) (ii) 2Cl- → Cl2 + 2e- (ऋणात्मक संयोजकता का घटना) अपचयन-किसी परमाणु, अणु या आयन से इलेक्ट्रॉनों का जुड़ना अपचयन कहलाता है। इसके फलस्वरूप धनात्मक संयोजकता घटती है तथा ऋणात्मक संयोजकता बढ़ती है जो कि ग्रहण किये गये इलेक्ट्रॉन संख्या के बराबर होती है। चूंकि इस विभव में इलेक्ट्रॉन ग्रहण किये जाते हैं अतः इसे इलेक्ट्रॉनीकरण भी कहते हैं। उदाहरणार्थ- (i) Fe3+ + e- → Fe2+ (धनात्मक संयोजकता का घटना) (iii) Cl2 +2e- → 2Cl- (ऋणात्मक संयोजकता का बढ़ना)
In simple words: इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के अनुसार, ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागता है (ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है), जबकि अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (ऑक्सीकरण संख्या घटती है)।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ होते हैं - एक इलेक्ट्रॉन त्यागता है और दूसरा उसे ग्रहण करता है।

 

Question 2.ऑक्सीकरण संख्या तथा संयोजकता में क्या अन्तर है? उदाहरण देकर समझाइए ।
Answer: 1. किसी तत्त्व की संयोजकता उसके एक परमाणु द्वारा स्थानान्तरित या साझे में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या को कहते हैं, जबकि किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या उसे तत्त्व के किसी यौगिक में उसके एक परमाणु पर उपस्थित आवेश को कहते हैं। 2. किसी तत्त्व की संयोजकता सदैव पूर्णाक होती है, जबकि किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक भी हो सकती है।
In simple words: संयोजकता एक परमाणु की रासायनिक बंध बनाने की क्षमता को दर्शाती है और हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है, जबकि ऑक्सीकरण संख्या एक परमाणु पर काल्पनिक आवेश को दर्शाती है (यह मानकर कि सभी बंध आयनिक हैं) और यह पूर्णांक या भिन्नात्मक हो सकती है।

🎯 Exam Tip: संयोजकता केवल बंधों की संख्या को बताती है, जबकि ऑक्सीकरण संख्या बंधों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण की दिशा और संख्या को दर्शाती है।

 

Question 3.निम्नलिखित समीकरण को ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर सन्तुलित कीजिए। सूत्रों के ऊपर सम्बन्धित तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित है।
Answer: इस अभिक्रिया में कॉपर और नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन हुआ है। कॉपर की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि = 2 यूनिट प्रति परमाणु Cu नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या में कमी = 1 यूनिट प्रति अणु HNO3 सन्तुलित समीकरण में ऑक्सीकरण संख्या में हुई कुल वृद्धि और कुल कमी दोनों का बराबर होना आवश्यक है, अतः समीकरण में HNO3 को 2 से तथा Cu को 1 से गुणा करना आवश्यक है। ऐसा करने पर निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होती है Cu+2HNO3 →Cu(NO3)2 + 2NO2 + H2O Cu(NO3)2 में एक कॉपर परमाणु से दो नाइट्रेट मूलक संयुक्त हैं, अतः समीकरण को सन्तुलित करने के लिए HNO3 के दो और अणुओं की आवश्यकता पड़ेगी तथा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या सन्तुलित करने के लिए H2O अणु को 2 से गुणा करना आवश्यक है। Cu+4HNO3 →Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O यह समीकरण सन्तुलित है।
In simple words: ऑक्सीकरण संख्या विधि से Cu + HNO3 → Cu(NO3)2 + NO2 + H2O को संतुलित करने पर, Cu की ऑक्सीकरण संख्या में +2 की वृद्धि और N की ऑक्सीकरण संख्या में -1 की कमी को बराबर करने के लिए, HNO3 को 4 से गुणा करते हैं, जिससे अंतिम संतुलित समीकरण Cu + 4HNO3 → Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या विधि में, ऑक्सीकरण संख्या में कुल वृद्धि और कुल कमी को बराबर करना महत्वपूर्ण है, जिसके लिए उचित गुणांकों का उपयोग किया जाता है।

 

Question 4.निम्नलिखित अभिक्रिया को ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा पूर्ण एवं संतुलित कीजिए I2 + HNO3 → NO2 + HIO3
Answer: I2 + HNO3 → NO2 + HIO3 ऑ०सं० प्रति परमाणु लिखने पर ऑ०सं० में कमी = 1 \[ \text{I}_2^{0} + \text{H}^{+1}\text{N}^{+5}\text{O}_3^{-2} \longrightarrow \text{N}^{+4}\text{O}_2^{-2} + \text{H}^{+1}\text{I}^{+5}\text{O}_3^{-2} \] ऑ०सं० में वृद्धि = 5
`\(\implies\)` ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि = 5 प्रति परमाणु I = 5 `\(\times\)` 2 प्रति अणु I2 ऑ० सं० में हुई कमी तथा वृद्धि को बराबर करने पर I2 + 10HNO3 → 10NO2 + HIO3 I2 + 10HNO3 → 10NO2 + 2HIO3 परमाणुओं की संख्या दोनों ओर बराबर करने पर 10HNO3 + I2 `\(\implies\)` 10NO2 + 4H2O + 2HIO3 यही सन्तुलित समीकरण है।
In simple words: अभिक्रिया I2 + HNO3 → NO2 + HIO3 को संतुलित करने के लिए, आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या 0 से +5 तक बढ़ती है (वृद्धि 5), जबकि नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या +5 से +4 तक घटती है (कमी 1)। कमी और वृद्धि को बराबर करने के बाद, संतुलित समीकरण I2 + 10HNO3 → 10NO2 + 4H2O + 2HIO3 प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण संख्या विधि में, इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए ऑक्सीकरण संख्या में कुल वृद्धि और कुल कमी को बराबर करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5.निम्नलिखित अभिक्रिया को सन्तुलित कीजिए- Zn + HNO3 → Zn(NO3)2 + NO2 + H2O
Answer: `\[ \text{Zn}^{0} + \text{H}^{+1}\text{N}^{+5}\text{O}_3^{-2} \longrightarrow \text{Zn}^{+2}(\text{N}^{+5}\text{O}_3)_{2}^{-2} + \text{N}^{+4}\text{O}_2^{-2} + \text{H}_2^{+1}\text{O}^{-2} \]` दी हुई समीकरण को अर्द्ध समीकरणों में लिखने पर \[ \text{Zn}^{0} \longrightarrow \text{Zn}^{+2}(\text{N}\text{O}_3)_2 \quad (\text{ऑक्सीकरण}) \] \[ \text{H}\text{N}\text{O}_3^{+5} \longrightarrow \text{N}\text{H}_4^{-3}\text{N}\text{O}_3 \quad (\text{अपचयन}) \] ऑ० सं० में कमी तथा वृद्धि को बराबर करने के लिए Zn को 4 से गुणा करने पर \[ [\text{Zn}^{0} \longrightarrow \text{Zn}^{+2}(\text{N}\text{O}_3)_2] \text{ x 4} \] \[ \text{H}\text{N}\text{O}_3 \longrightarrow \text{N}\text{H}_4\text{N}\text{O}_3 + \text{H}_2\text{O} \] `\(\implies\)` 4Zn+ HNO3 → 4Zn (NO3)2 + NH4NO3 + H2O
In simple words: Zn + HNO3 → Zn(NO3)2 + NO2 + H2O अभिक्रिया को संतुलित करने पर, 4Zn + 10HNO3 → 4Zn(NO3)2 + N2O + 5H2O (यह मानते हुए कि NO2 के बजाय N2O बनती है, जैसा कि आम तौर पर Zn की HNO3 से अभिक्रिया में होता है, या 4Zn + 8HNO3 → 4Zn(NO3)2 + N2O + 4H2O)। यदि NO2 बनती है, तो 3Zn + 8HNO3 → 3Zn(NO3)2 + 2NO + 4H2O।

🎯 Exam Tip: HNO3 की धातुओं के साथ अभिक्रिया में बनने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड का प्रकार HNO3 की सांद्रता और धातु की क्रियाशीलता पर निर्भर करता है। सुनिश्चित करें कि आप उत्पाद के प्रकार के अनुसार समीकरण को संतुलित करें।

 

Question 6. आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा अम्लीय माध्यम में निम्न अभिक्रिया की समीकरण सन्तुलित कीजिए MnO\(_4\)\(^{-}\)(aq) + Fe\(^{2+}\)(aq) → Fe\(^{3+}\)(aq) + Mn\(^{2+}\)(aq) + H\(_2\)O
Answer: सर्वप्रथम समीकरण के ऑक्सीकारकों तथा अपचायकों की अर्द्ध-अभिक्रियाएँ पृथक्-पृथक् सन्तुलित की जाती हैं; जैसे- प्रथम अर्द्ध-अभिक्रिया । MnO\(_4\)\(^{-}\) → Mn\(^{2+}\) (अपचयन) ऑक्सीजन सन्तुलित करने के लिए 4H\(_2\)O दाईं तरफ जोड़े जाते हैं । अतः MnO\(_4\)\(^{-}\) → Mn\(^{2+}\) + 4H\(_2\)O फिर हाइड्रोजन सन्तुलित करने के लिए 8H\(^{+}\) बाईं तरफ जोड़े जाते हैं । अतः MnO\(_4\)\(^{-}\) + 8H\(^{+}\) → Mn\(^{2+}\) + 4H\(_2\)O अब समीकरण में दोनों तरफ आवेश सन्तुलित करने के लिए 5e\(- \) बाईं तरफ जोड़ने पर निम्नलिखित समीकरण मिलती है- MnO\(_4\)\(^{-}\) + 8H\(^{+}\) + 5e\(- \) → Mn\(^{2+}\) + 4H\(_2\)O .....(i) दूसरी अर्द्ध-अभिक्रिया Fe\(^{2+}\) → Fe\(^{3+}\) (ऑक्सीकरण) आवेश सन्तुलित करने के लिए दाईं तरफ 1e\(- \) जोड़ने पर, Fe\(^{2+}\) → Fe\(^{3+}\) + e\(- \) ...(ii) अब समीकरण (ii) में 5 की गुणा करके, इसे समीकरण (i) में जोड़ने पर निम्नलिखित समीकरण प्राप्त होती है- MnO\(_4\)\(^{-}\) + 8H\(^{+}\) + 5Fe\(^{2+}\) + 5e\(- \) → 5Fe\(^{3+}\) + Mn\(^{2+}\) + 4H\(_2\)O+ 5e\(- \) इस समीकरण में दोनों तरफ से 5e\(- \) कट जाते हैं । अतः MnO\(_4\)\(^{-}\) + 8H\(^{+}\) + 5Fe\(^{2+}\) → 5Fe\(^{3+}\) + Mn\(^{2+}\) + 4H\(_2\)O यही सन्तुलित समीकरण है।In simple words: This question demonstrates how to balance a redox reaction in an acidic medium using the ion-electron method. It involves separating the reaction into oxidation and reduction half-reactions, balancing atoms (O with H\(_2\)O, H with H\(^{+}\)), and then balancing charge by adding electrons. Finally, the half-reactions are combined to form the complete balanced equation.

🎯 Exam Tip: Accurately balancing atoms and charges in each half-reaction is crucial. Pay close attention to the medium (acidic or basic) as it dictates how H and O atoms are balanced.

 

Question 7. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया की समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से सन्तुलित कीजिए- K\(_2\)Cr\(_2\)O\(_7\) + H\(_2\)SO\(_4\) + FeSO\(_4\)→ Fe\(_2\)(SO\(_4\))\(_3\) + Cr\(_2\)(SO\(_4\))\(_3\)+ K\(_2\)SO\(_4\) + H\(_2\)O
Answer: प्रश्न में उल्लिखित समीकरण को आयनिक रूप में लिखने पर, Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) + Fe\(^{2+}\) → Cr\(^{3+}\) + Fe\(^{3+}\) ऑक्सीकरण की अर्द्ध-अभिक्रिया Fe\(^{2+}\) → Fe\(^{3+}\) दायीं ओर एक e\(- \) जोड़ने पर दोनों ओर कुल आवेश बराबर हो जाता है ।
\( \implies \) Fe\(^{2+}\) → Fe\(^{3+}\) + e\(- \) ...(i) अपचयन की अर्द्ध-अभिक्रिया Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) → Cr\(^{3+}\) 1. Cr परमाणुओं को दोनों ओर सन्तुलित करने पर,
\( \implies \) Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) → 2Cr\(^{3+}\) 2. ऑक्सीजन परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए दायीं ओर 7H\(_2\)O जोड़ते हैं ।
\( \implies \) Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) → 2Cr\(^{3+}\) + 7H\(_2\)O 3. H\(^{+}\) को सन्तुलित करने के लिए बायीं ओर 14H\(^{+}\) जोड़ते हैं ।
\( \implies \) Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) + 14H\(^{+}\) → 2Cr\(^{3+}\) + 7H\(_2\)O दोनों ओर कुल आवेश बराबर करने के लिए बायीं ओर 6e\(- \) जोड़ते हैं ।
\( \implies \) Cr\(_2\)O\(_7\)\(^{2-}\) + 14H\(^{+}\) + 6e\(- \) → 2Cr\(^{3+}\) + 7H\(_2\)O ...(ii) दोनों अर्द्ध समीकरणों में इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या बराबर करने के लिए समी० (i) को 6 से और (ii) को 1 से गुणा करके जोड़ने पर, \[ \begin{array}{l} 6 \mathrm{Fe}^{2+} \longrightarrow 6 \mathrm{Fe}^{3+}+6 \mathrm{e}^{-} \\ \mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}+14 \mathrm{H}^{+}+6 \mathrm{e}^{-} \longrightarrow 2 \mathrm{Cr}^{3+}+7 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O} \\ \hline 6 \mathrm{Fe}^{2+}+\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}+14 \mathrm{H}^{+} \longrightarrow 6 \mathrm{Fe}^{3+}+2 \mathrm{Cr}^{3+}+7 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O} \end{array} \] इस सन्तुलित आयनिक समीकरण को निम्नांकित प्रकार से आणविक समीकरण में परिवर्तित कर सकते हैं- K\(_2\)Cr\(_2\)O\(_7\) + 6FeSO\(_4\) + 7H\(_2\)SO\(_4\) → K\(_2\)SO\(_4\) + Cr\(_2\)(SO\(_4\))\(_3\) + 3Fe\(_2\)(SO\(_4\))\(_3\) + 7H\(_2\)OIn simple words: This solution demonstrates how to balance a complex redox reaction using the ion-electron method in an acidic environment. It involves breaking down the overall reaction into oxidation and reduction half-reactions, balancing all atoms (including O with H\(_2\)O and H with H\(^{+}\)), and then balancing the charges with electrons. Finally, the balanced half-reactions are combined to form the complete molecular equation.

🎯 Exam Tip: When converting from ionic to molecular equations, ensure all spectator ions (like K\(^{+}\) and SO\(_4\)\(^{2-}\) in this example) are correctly added back to maintain charge neutrality and the original compound structures.

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. ऑक्सीकरण संख्या को निर्धारित करने के नियम लिखिए।
Answer: ऑक्सीकरण संख्या को निर्धारित करने के नियम किसी यौगिक/आयन में किसी तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या का मान जानने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। ये नियम निम्नवत् हैं-
1. स्वतन्त्र अथवा तात्त्विक अवस्था में उपस्थित किसी तत्त्व के प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या सदैव शून्य होती है। उदाहरणार्थ- He, H\(_2\), O\(_2\), Cl\(_2\), O\(_3\), P\(_4\), S\(_8\), Na, Mg तथा Al में प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या शून्य है।
2. किसी तत्त्व के अपररूपों की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है। उदाहरणार्थ-C के अपररूप हीरा तथा ग्रेफाइट दोनों की ऑक्सीकरण संख्या शून्य होती है।
3. किसी एकपरमाणुक आयन (monoatomic ion) की ऑक्सीकरण संख्या उस पर उपस्थित आवेश के बराबर होती है। उदाहरणार्थ-Na\(^{+}\), Mg\(^{2+}\), Fe\(^{3+}\), Cl\(- \), O\(^{2-}\) आयनों की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः 1, 2, 3, -1 तथा -2 हैं।
4. अधातुओं के साथ यौगिकों में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है। धात्विक हाइड्राइडों - (जैसे- NaH, MgH\(_2\), LiH, CaH\(_2\) आदि) में हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।
5. अधिकांश यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -2 होती है। परॉक्साइडों (जैसे H\(_2\)O\(_2\), BaO\(_2\) आदि) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। सुपर ऑक्साइडों (जैसे-KO\(_2\), RbO\(_2\) आदि) में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु के लिए ऑक्सीकरण संख्या -1/2 निर्धारित की गई है। एक अन्य अपवादस्वरूप ऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड (OF\(_2\)) तथा डाइऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड (O\(_2\)F\(_2\)) जैसे यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या क्रमशः +2 तथा +1 है।
6. सभी क्षार धातुओं की अनेक यौगिकों में ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है तथा सभी क्षारीय मृदा धातुओं की ऑक्सीकरण संख्या +2 होती है। ऐलुमिनियम की उसके यौगिकों में ऑक्सीकरण संख्या सामान्यतः +3 होती है।
7. सभी यौगिकों में फ्लुओरीन की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है। यौगिकों में क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या साधारणतः -1 होती है, परन्तु जिन यौगिकों में ये तत्त्व ऑक्सीजन से जुड़े होते हैं उन यौगिकों में इन तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या कोई धनात्मक संख्या होती है।
8. दो अधातु परमाणुओं वाले यौगिकों में अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या ऋणात्मक होती हैं जबकि कम विद्युत ऋणात्मक तत्त्व के परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक होती है। उदाहरणार्थ-NH\(_2\) तथा NI\(_2\) में N कम विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा है इसीलिए इसको -3 ऑक्सीकरण संख्या दी जाती है, परन्तु जब यह NF\(_2\) में अधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़ा होता है, तब इसे +3 ऑक्सीकरण संख्या दी जाती है।
9. उदासीन यौगिकों में सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का बीजीय योग शून्य होता है। उदाहरणार्थ-CH\(_4\) में सभी परमाणुओं का बीजीय योग शून्य है।
10. जटिल तथा बहुपरमाणुक आयनों में, आयन के सभी परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्याओं का बीजीय योग आयन पर उपस्थित आवेश के बराबर होता है। धात्विक तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक होती है तथा अधात्विक तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या धनात्मक या ऋणात्मक होती है। संक्रमण धातु तत्त्व अनेक धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते । हैं। p-ब्लॉक के तत्त्वों के लिए उनकी उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या उनकी वर्ग संख्या के बराबर होती है। s-ब्लॉक के तत्त्वों (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर) के लिए उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या उनकी वर्ग संख्या में से 10 घटाकर प्राप्त की जाती है। यद्यपि p-ब्लॉक के तत्त्वों के लिए उच्चतम ऋणात्मक ऑक्सीकरण संख्या 8 में से संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या घटाकर प्राप्त की जा सकती है। इसका अर्थ है कि आवर्त सारणी के किसी आवर्त में उच्चतम धनात्मक ऑक्सीकरण संख्या सामान्यतः बढ़ती है। आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त में ऑक्सीकरण संख्या +1 से +7 तक बढ़ती है।In simple words: Oxidation number rules define how to assign a charge to an element in a compound or ion. Key principles include elements in their free state having an oxidation number of zero, monatomic ions matching their charge, hydrogen typically being +1 (except in metal hydrides where it's -1), and oxygen typically being -2 (with exceptions in peroxides, superoxides, and compounds with fluorine). The sum of oxidation numbers in a neutral compound is zero, and in a polyatomic ion, it equals the ion's charge.

🎯 Exam Tip: Remember the exceptions to common oxidation states (e.g., oxygen in OF\(_2\), hydrogen in NaH). Mastering these rules is fundamental for balancing redox reactions and understanding chemical properties.

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