Get the most accurate UP Board Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 11 Chemistry. Our expert-created answers for Class 11 Chemistry are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ UP Board Solutions for Class 11 Chemistry
For Class 11 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 11 Chemistry solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ solutions will improve your exam performance.
Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ UP Board Solutions PDF
पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए-
(i) H2O
(ii) CO2
(iii) CH4
Answer:
(i) H2O का मोलर द्रव्यमान = \( (2\times 1.008) + (1600) \) = 18.016 amu
(ii) CO2 का मोलर द्रव्यमान = \( 12.01+ (2\times 1600) \) = 44.01 amu
(iii) CH4 का मोलर द्रव्यमान = \( 12.01+ (4\times 1.008) \) = 16.042 amu
In simple words: मोलर द्रव्यमान किसी पदार्थ के एक मोल का द्रव्यमान होता है, जिसकी गणना उसके घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग से की जाती है।
🎯 Exam Tip: मोलर द्रव्यमान की गणना करते समय प्रत्येक परमाणु के सही परमाणु द्रव्यमान और उनकी संख्या का ध्यान रखें।
Question 2. सोडियम सल्फेट (Na2SO4) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।
Answer:
सोडियम सल्फेट (Na2SO4) का ग्राम आणविक द्रव्यमान
= \( (2\times 22.99) + 32.06+ (4\times 16.00) \)
= 142.04 g mol\(^{-1}\)
तत्त्व की द्रव्यमान प्रतिशतता = \( \frac{\text{यौगिक के एक मोल में तत्त्व का भार}}{\text{यौगिक का ग्राम आणविक द्रव्यमान}} \times 100 \)
सोडियम की द्रव्यमान प्रतिशतता = \( \frac{22.99 \times 2}{142.04} \times 100 \) = 32.37%
सल्फर की द्रव्यमान प्रतिशतता = \( \frac{32.06}{142.04} \times 100 \) = 22.57%
ऑक्सीजन की द्रव्यमान प्रतिशतता = \( \frac{16.00 \times 4}{142.04} \times 100 \) = 45.06%
In simple words: द्रव्यमान प्रतिशत किसी यौगिक में प्रत्येक तत्व के द्रव्यमान के अनुपात को कुल यौगिक के द्रव्यमान के प्रतिशत के रूप में दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान प्रतिशत की गणना करते समय, यौगिक का कुल मोलर द्रव्यमान और प्रत्येक तत्व का कुल द्रव्यमान सही ढंग से निकालें।
Question 3. आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।
Answer:
मूलानुपाती सूत्र की गणना
| तत्व | प्रतिशत | परमाणु द्रव्यमान | परमाणुओं की आपेक्षिक संख्या | सरल अनुपात | पूर्णांक अनुपात |
|---|---|---|---|---|---|
| Fe | 69.9 | 56 | \( \frac{69.9}{56} \) = 1.25 | \( \frac{1.25}{1.25} \) = 1 | 2 |
| O | 30.1 | 16 | \( \frac{30.1}{16} \) = 1.88 | \( \frac{1.88}{1.25} \) = 1.5 | 3 |
मूलानुपाती सूत्र = Fe2O3
In simple words: मूलानुपाती सूत्र एक यौगिक में परमाणुओं के सबसे सरल पूर्ण संख्या अनुपात को दर्शाता है, जिसे तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत से गणना करके प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मूलानुपाती सूत्र की गणना करते समय, परमाणुओं की आपेक्षिक संख्या निकालने के बाद सबसे छोटी संख्या से भाग देकर सरल अनुपात प्राप्त करें, और फिर पूर्णांक अनुपात तक पहुंचाएं।
Question 4. प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए। जब-
(i) 1 मोल कार्बन को हवा में जलाया जाता है और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16 g ऑक्सीजन में जलाया जाता है।
Answer:
ऑक्सीजन/वायु में कार्बन निम्न प्रकार से जलता है-
(i) हवा में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा है। इस कारण से ज्वलन पूर्ण होता है। अतः 1 मोल कार्बन के दहन से उत्पन्न CO2 = 44 g
(ii) इस स्थिति में ऑक्सीजन एक सीमांत अभिकर्मक है। केवल 0.5 मोल कार्बन के जलेंगे।
\( \implies \) 32 g ऑक्सीजन से उत्पन्न CO2 = 44g
\( \implies \) 16 g ऑक्सीजन से उत्पन्न CO2= \( \frac{44}{32} \times 16 \) = 22 g
In simple words: कार्बन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। हवा में प्रचुर ऑक्सीजन होती है, जबकि सीमित मात्रा में ऑक्सीजन होने पर उत्पाद की मात्रा सीमित अभिकर्मक द्वारा निर्धारित होती है।
🎯 Exam Tip: सीमांत अभिकर्मक की अवधारणा को समझें, क्योंकि यह रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पाद की अधिकतम मात्रा निर्धारित करता है।
Question 5. सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) का 500 mL, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.0245 g mol\(^{-1}\) है।
Answer:
जलीय विलयन की मोलरता निम्न समीकरण से व्यक्त की जा सकती है-
w= \( \frac{MM'V}{1000} \)
प्रश्नानुसार, M = 0.375, M' = 82.0245, V = 500 mL, w = ?
मान प्रतिस्थापित करने पर, w= \( \frac{0.375 \times 82.0245 \times 500}{1000} \) = 15.38 g
अतः सोडियम ऐसीटेट के द्रव्यमान की आवश्यक मात्रा = 15.38 g
In simple words: विलयन की मोलरता का उपयोग करके, ज्ञात मोलरता और आयतन के लिए आवश्यक विलेय का द्रव्यमान निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मोलरता सूत्र (M = n/V) और द्रव्यमान-मोल संबंध (n = द्रव्यमान/मोलर द्रव्यमान) का सही उपयोग सुनिश्चित करें।
Question 6. सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लीटर में सान्द्रता का परिकलन कीजिए जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g mL\(^{-1}\) हो।।
Answer:
दिया गया प्रतिदर्श 69% है अर्थात् 100 g विलयन में केवल 69 g नाइट्रिक अम्ल है। नाइट्रिक अम्ल का मोलर द्रव्यमान =1+14+ \( (3\times 16) \) = 63g mol\(^{-1}\)
\( \implies \) 69 g शुद्ध नाइट्रिक अम्ल (जो विलयन के 100 g में उपस्थित है) में उपस्थित मोलों की संख्या = \( \frac{69}{63} \) =1.095
100 g HNO3 विलयन का आयतन = \( \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{घनत्व}} \) = \( \frac{100}{1.41} \) = 70.92 mL
अतः नाइट्रिक अम्ल विलयन की सान्द्रता = \( \frac{1.095}{0.07092} \) = 15.44 mol/L = 15.44 M
In simple words: किसी विलयन की मोलरता निकालने के लिए, पहले उसके विलेय के मोलों की संख्या और विलयन का आयतन लीटर में ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: घनत्व और द्रव्यमान प्रतिशत जैसे दिए गए आंकड़ों का उपयोग करके मोलों की संख्या और विलयन का आयतन सही ढंग से परिकलित करें।
Question 7. 100 g कॉपर सल्फेट (CuSO4) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?
Answer:
CuSO4 का मोलर द्रव्यमान = 63.5 + 32+ \( (4\times 16) \) = 159.5 g mol\(^{-1}\)
1 मोल (159.5 g) CuSO4 में Cu का 1 ग्राम परमाणु (63.5g) उपस्थित रहता है।
\( \implies \) 100 g कॉपर सल्फेट से प्राप्त कॉपर की मात्रा = \( \frac{63.5}{159.5} \times 100 \) = 39.81 g.
In simple words: कॉपर सल्फेट के ज्ञात द्रव्यमान से कॉपर की मात्रा निकालने के लिए, कॉपर सल्फेट में कॉपर के द्रव्यमान प्रतिशत का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में तत्वों के परमाणु द्रव्यमान और यौगिक के मोलर द्रव्यमान का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 8. आयरन के ऑक्साइड का आण्विक सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत क्रमशः 69.9 g तथा 30.1 g है।
Answer:
हल
मूलानुपाती सूत्र की गणना के लिए प्रश्न 3 का हल देखिये।
मूलानुपाती सूत्र [Fe2O3] का द्रव्यमान = \( (2\times 55.85) + (3\times 16.00) \) = 159.7 g mol\(^{-1}\)
n = \( \frac{\text{मोलर द्रव्यमान}}{\text{मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान}} \) = \( \frac{159.8}{159.7} \) = 1
अतः दिये गये ऑक्साइड का आणविक सूत्र = Fe2O3
In simple words: आण्विक सूत्र किसी यौगिक में परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है, जिसे मूलानुपाती सूत्र और मोलर द्रव्यमान से प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आण्विक सूत्र की गणना करने के लिए पहले मूलानुपाती सूत्र ज्ञात करें और फिर मोलर द्रव्यमान के साथ n-फैक्टर का उपयोग करें।
Question 9. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए-
| % | प्राकृतिक बाहुल्यता | मोलर द्रव्यमान (g) |
|---|---|---|
| \(^{35}\)Cl | 75.77 | 34.9689 |
| \(^{37}\)Cl | 24.23 | 36.9659 |
Answer:
क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान
= \( (34.9689 \times \frac{75.77}{100}) + (36.9659 \times \frac{24.23}{100}) \)
= \( 26.4959 + 8.9568 \)
= 35.4527 g
In simple words: औसत परमाणु द्रव्यमान समस्थानिकों के द्रव्यमान और उनकी प्राकृतिक प्रचुरता का भारित औसत होता है।
🎯 Exam Tip: औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना में, प्रत्येक समस्थानिक के द्रव्यमान को उसकी प्रतिशत प्रचुरता से गुणा करके सभी मानों को जोड़ते हैं।
Question 10. एथेन (C2H6) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए-
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या ।
Answer:
1. 1 मोल एथेन में कार्बन परमाणुओं के 2 मोल हैं।
\( \implies \) 3 मोल एथेन में उपस्थित कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या = \( 3\times 2 \) = 6
2. 1 मोल एथेन में हाइड्रोजन परमाणुओं के 6 मोल हैं।
\( \implies \) 3 मोल एथेन में उपस्थित हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या = \( 3\times 6 \) = 18
3. 1 मोल एथेन में उपस्थित अणु = \( 6.022\times 10^{23} \) (आवोगाद्रो संख्या)।
\( \implies \) 3 मोल एथेन में उपस्थित अणुओं की संख्या = \( 3\times 6.022\times 10^{23} \) = \( 18.066\times 10^{23} \)
In simple words: एथेन जैसे यौगिक के मोलों की संख्या से उसके घटक परमाणुओं के मोलों की संख्या और कुल अणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या का उपयोग करके प्राप्त की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: अणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए आवोगाद्रो संख्या (6.022 x 10\(^{23}\)) का सही उपयोग करें और परमाणुओं की संख्या के लिए यौगिक के रासायनिक सूत्र का ध्यान रखें।
Question 11. यदि 20 g चीनी (C12H22O11) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2L हो जाए तो चीनी के इस विलयन की सान्द्रता क्या होगी?
Answer:
चीनी का मोलर द्रव्यमान = \( (12\times 12)+ (1\times 22) + (11\times 16) \) = 342 g mol\(^{-1}\)
20g चीनी में उपस्थित मोलों की संख्या = \( \frac{20}{342} \) = 0.0585
\( \implies \) चीनी के विलयन की मोलर सान्द्रता = \( \frac{\text{विलयित चीनी के मोलों की संख्या}}{\text{विलयन का आयतन लीटर में}} \) = \( \frac{0.0585}{2} \) = 0.02925 mol L\(^{-1}\)
In simple words: विलयन की मोलर सांद्रता ज्ञात करने के लिए, विलेय के मोलों की संख्या को विलयन के कुल आयतन (लीटर में) से विभाजित करते हैं।
🎯 Exam Tip: मोलर सांद्रता की गणना करते समय, विलेय का मोलर द्रव्यमान सही ढंग से परिकलित करें और विलयन का आयतन हमेशा लीटर में व्यक्त करें।
Question 12. यदि मेथेनॉल का घनत्व 0.793 kgL\(^{-1}\) हो तो इसके 0.25 M के 2.5L विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी?
Answer:
मेथेनॉल का मोलर द्रव्यमान (CH3OH)= 32 g mol\(^{-1}\)
दिये गये विलयन को तैयार करने के लिए आवश्यक मेथेनॉल का भार, जो निम्नवत् है-
w = \( \frac{MM'V}{1000} \) = \( \frac{0.25 \times 32 \times 2500}{1000} \) = 20 g = 0.02 kg
\( \implies \) (V = 2.5 L = 2500 mL)
0.793 kg मेथेनॉल प्रतिदर्श के 1 लीटर में उपस्थित है।
\( \implies \) 0.02 kg मेथेनॉल उपस्थित होगी \( \frac{1}{0.793} \) \( \times \) 0.02 = 0.02522 L or 25.22 mL प्रतिदर्श में।
अतः आवश्यक मेथेनॉल प्रतिदर्श का आयतन = 25.22 mL
In simple words: ज्ञात मोलरता और आयतन के विलयन को बनाने के लिए आवश्यक विलेय का द्रव्यमान घनत्व का उपयोग करके उसके आयतन में परिवर्तित किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मोलरता, मोलर द्रव्यमान, घनत्व और आयतन के बीच संबंधों को स्पष्ट रूप से समझें ताकि सही गणना की जा सके।
Question 13. दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। दाब का S.I. मात्रक पास्कल नीचे दिया गया है-
1 Pa=1Nm\(^{-2}\)
यदि समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm\(^{-2}\) हो तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए।
Answer:
दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया गया है।
समुद्रतल पर हवा का भार = \( m \times g \) = \( 1034\times 98 \) = 10.1332 kg ms\(^{-2}\)
\( \implies \) \( (m = 1034 \text{ g} = 1.034 \text{ kg}; g = 9.8 \text{ ms}^{-2}) \)
दाब = \( \frac{\text{भार}}{\text{क्षेत्रफल}} \) = \( \frac{10.1332 \text{ kg ms}^{-2}}{10^{-4} \text{ m}^2} \) = 101332 kg m\(^{-1}\)s\(^{-2}\)
\( \implies \) \( (1 \text{ cm}^2 = 0.01\times 0.01=10^{-4}\text{m}^2) \)
1 पास्कल = 1Nm\(^{-2}\) = \( \frac{1N}{m^2} \) = \( \frac{1\text{kg ms}^{-2}}{m^2} \) = 1kg m\(^{-1}\)s\(^{-2}\)
\( \implies \) हवा का दाब = 101332 kg m\(^{-1}\)s\(^{-2}\) = 101332 Pa = \( 1.01332 \times 10^5 \) Pa
In simple words: दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है, और इसका S.I. मात्रक पास्कल है।
🎯 Exam Tip: दाब की गणना में इकाइयों का सही रूपांतरण (जैसे ग्राम से किलोग्राम, cm\(^{2}\) से m\(^{2}\)) महत्वपूर्ण है।
Question 14. द्रव्यमान का S.I. मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
Answer: द्रव्यमान का S.I. मात्रक किलोग्राम (kg) है। पेरिस के निकट सैवरेस में 0°C पर रखी प्लैटिनम-इरीडियम मिश्र-धातु की एक विशेष छड़ अथवा टुकड़े का द्रव्यमान 1 मानक किलोग्राम माना गया है।
In simple words: द्रव्यमान का S.I. मात्रक किलोग्राम है, जिसे एक मानक प्लैटिनम-इरीडियम मिश्र-धातु के द्रव्यमान के रूप में परिभाषित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: S.I. मात्रकों की परिभाषाएँ याद रखना बुनियादी वैज्ञानिक ज्ञान के लिए आवश्यक है।
Question 15. निम्नलिखित पूर्व-लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइए-
| पूर्व-लग्न | गुणांक |
|---|---|
| (i) माइक्रो | 10\(^{6}\) |
| (ii) डेका | 10\(^{9}\) |
| (iii) मेगा | 10\(^{-6}\) |
| (iv) गीगा | 10\(^{-15}\) |
| (v) फेम्टो | 10 |
Answer:
1. माइक्रो - 10\(^{-6}\),
2. डेका - 10,
3. मेगा - 10\(^{6}\),
4. गीगा - 10\(^{9}\),
5. फेम्टो - 10\(^{-15}\)
In simple words: पूर्व-लग्न वैज्ञानिक संकेतन में संख्याओं को संक्षिप्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जैसे माइक्रो 10\(^{-6}\) और मेगा 10\(^{6}\) का प्रतिनिधित्व करता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पूर्व-लग्नों और उनसे संबंधित गुणांकों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. सार्थक अंकों से आप क्या समझते हैं?
Answer: उन अंकों की संख्या को, जिनके द्वारा किसी राशि को निश्चित रूप से व्यक्त किया जाता है. सार्थक अंक कहते हैं।
In simple words: सार्थक अंक वे अंक होते हैं जो किसी माप की विश्वसनीयता को दर्शाते हैं, जिसमें निश्चित अंक और एक अनुमानित अंक शामिल होता है।
🎯 Exam Tip: सार्थक अंकों के नियम (जैसे शून्य की स्थिति, दशमलव बिंदु) को समझें ताकि माप की सटीकता को सही ढंग से व्यक्त किया जा सके।
Question 17. पेय जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म, जो कैन्सरजन्य है, से अत्यधिक संदूषित पाया गया। संदूषण का स्तर 15 Ppm (द्रव्यमान के रूप में था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए ।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।
Answer:
(i) 15 ppm (द्रव्यमान द्वारा) का अर्थ है कि क्लोरोफॉर्म के 15 भाग (द्रव्यमान से) पानी के 10\(^{6}\) भाग (द्रव्यमान से) में उपस्थित हैं।
\( \implies \) द्रव्यमान प्रतिशतता = \( \frac{15}{10^6} \times 100 \) = \( 1.5 \times 10^{-3} \) %
(ii) CHCl3 का मोलर द्रव्यमान = \( 12+1+[3\times 35.5] \) = 119.5 g mol\(^{-1}\)
\( \implies \) 10\(^{6}\) g प्रतिदर्श में क्लोरोफॉर्म की मात्रा = 15g
\( \implies \) 10\(^{3}\) g (1 kg) प्रतिदर्श में क्लोरोफॉर्म की मात्रा होगी = \( \frac{15}{10^6} \times 10^3 \) = \( 1.5\times 10^{-2} \) g
\( \implies \) 1 kg प्रतिदर्श में उपस्थित क्लोरोफॉर्म के मोलों की संख्या = \( \frac{1.5 \times 10^{-2}}{119.5} \) = \( 1.255 \times 10^{-4} \) मोल
मोललता = \( 1.255 \times 10^{-4} \) M
In simple words: ppm को द्रव्यमान प्रतिशत में बदलने के लिए 100 से गुणा और 10\(^{6}\) से भाग करते हैं, जबकि मोललता विलेय के मोलों की संख्या को विलायक के द्रव्यमान (kg में) से विभाजित करके प्राप्त की जाती है।
🎯 Exam Tip: ppm, द्रव्यमान प्रतिशत और मोललता के बीच के रूपांतरण सूत्रों को याद रखें और इकाइयों का सही उपयोग करें।
Question 18. निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए-
(i) 0.0048
(ii) 234.000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
Answer:
(i) \( 4.8\times 10^{-3} \),
(ii) \( 2.34\times 10^{5} \),
(iii) \( 8.008\times 10^{3} \),
(iv) \( 5.000\times 10^{2} \),
(v) \( 6.0012\times 10^{0} \)
In simple words: वैज्ञानिक संकेतन संख्याओं को 1 और 10 के बीच की संख्या और 10 की घात के गुणनफल के रूप में व्यक्त करने का एक मानक तरीका है।
🎯 Exam Tip: दशमलव बिंदु को स्थानांतरित करते समय 10 की घात को सही ढंग से समायोजित करें, और यह सुनिश्चित करें कि सामने वाली संख्या 1 से 10 के बीच हो।
Question 19. निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या बताइए-
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.00
(vi) 2.0034
Answer:
(i) 2,
(ii) 3,
(iii) 4,
(iv) 6,
(v) 5,
(vi) 5
In simple words: सार्थक अंक किसी मापन में महत्वपूर्ण अंकों की संख्या को दर्शाते हैं, जिसमें सभी गैर-शून्य अंक और कुछ शून्य शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: सार्थक अंकों के नियमों को याद रखें, जैसे कि अग्रणी शून्य (leading zeros) सार्थक नहीं होते हैं, जबकि मध्यवर्ती शून्य (captive zeros) और ट्रेलिंग शून्य (trailing zeros) दशमलव बिंदु के साथ सार्थक होते हैं।
Question 20. निम्नलिखित को तीन सार्थक अंकों तक निकटित कीजिए-
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
Answer:
(i) 34.2,
(ii) 10.4,
(iii) 0.0460,
(iv) 2810
In simple words: किसी संख्या को सार्थक अंकों तक निकटित करने का अर्थ है उसे आवश्यक संख्या में महत्वपूर्ण अंकों के साथ लिखना, गोलाई के नियमों का पालन करते हुए।
🎯 Exam Tip: निकटित करते समय, यदि अंतिम सार्थक अंक के बाद वाला अंक 5 या उससे अधिक है, तो अंतिम सार्थक अंक को एक से बढ़ा दें; यदि यह 5 से कम है, तो उसे अपरिवर्तित रखें।
Question 21. (क) जब डाइनाइट्रोजन और डाइऑक्सीजन अभिक्रिया द्वारा भिन्न यौगिक बनाती हैं। तो निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त होते हैं-
| नाइट्रोजन का द्रव्यमान | ऑक्सीजन का द्रव्यमान |
|---|---|
| (i) 14 g | 16 g |
| (ii) 14 g | 32 g |
| (iii) 28 g | 32 g |
| (iv) 28 g | 80 g |
ये प्रायोगिक आँकड़े रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप हैं? बताइए ।
(ख) निम्नलिखित में रिक्त स्थान को भरिए-
(i) 1 km = ...... mm = ...... pm
(ii) 1 mg = ...... kg = ...... ng
(iii) 1 mL = ...... L = ...... dm\(^{3}\)
Answer:
(क) यदि नाइट्रोजन का द्रव्यमान 28 g स्थिर माना जाये तो इन चारों स्थितियों में ऑक्सीजन का द्रव्यमान क्रमशः 32 g, 64 g, 32 g और 80 g प्राप्त होता है, जो सरल पूर्ण संख्या अनुपात \( 2:4:2:5 \) में हैं। अतः दिये गये आँकड़े गुणित अनुपात के नियम का पालन करते हैं।
(ख) (i)
1 km = \( 1 \text{ km} \times \frac{1000\text{m}}{1\text{km}} \times \frac{100\text{cm}}{1\text{m}} \times \frac{10\text{mm}}{1\text{cm}} \) = \( 10^{6} \)mm
1 km = \( 1\text{km} \times \frac{1000\text{m}}{1\text{km}} \times \frac{1\text{pm}}{10^{-12}\text{m}} \) = \( 10^{15} \)pm
(ii)
1 mg = \( 1\text{mg} \times \frac{1\text{g}}{1000\text{mg}} \times \frac{1\text{kg}}{1000\text{g}} \) = \( 10^{-6} \)kg
1 mg = \( 1\text{mg} \times \frac{1\text{g}}{1000\text{mg}} \times \frac{1\text{ng}}{10^{-9}\text{g}} \) = \( 10^{6} \)ng
(iii)
1 mL = \( 1\text{mL}\times \frac{1\text{L}}{1000\text{mL}} \) = \( 10^{-3} \)L
1 mL = \( 1\text{cm}^3 \) = \( 1\text{cm}^3 \times \frac{1\text{dm}}{10\text{cm}} \times \frac{1\text{dm}}{10\text{cm}} \times \frac{1\text{dm}}{10\text{cm}} \) = \( 10^{-3} \)dm\(^{3}\)
In simple words: (क) गुणित अनुपात का नियम कहता है कि जब दो तत्व एक से अधिक यौगिक बनाने के लिए संयोजित होते हैं, तो एक तत्व के द्रव्यमान जो दूसरे तत्व के एक निश्चित द्रव्यमान के साथ संयोजित होते हैं, वे छोटे पूर्ण संख्या अनुपात में होते हैं। (ख) मात्रकों को परिवर्तित करने के लिए मानक रूपांतरण कारकों का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: गुणित अनुपात के नियम के साथ-साथ लंबाई, द्रव्यमान और आयतन के लिए सभी S.I. मात्रक रूपांतरणों को याद रखें।
Question 22. यदि प्रकाश का वेग \( 3.00 \times 10^8 \text{ ms}^{-1} \) हो तो 2.00 ns में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?
Answer:
तय दूरी = वेग \( \times \) समय = \( 3.0\times 10^8 \text{ ms}^{-1}\times 200 \text{ ns} \)
= \( 3.0\times 10^8 \text{ ms}^{-1}\times 200\text{ns}\times \frac{10^{-9}\text{s}}{1\text{ns}} \) = \( 6.00\times 10^{-1}\text{m} \) = 0.600 m
In simple words: प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी उसकी गति और यात्रा में लगने वाले समय का गुणनफल होती है, जिसे समान इकाइयों में व्यक्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: समय की इकाइयों को (जैसे नैनोसेकंड को सेकंड में) सही ढंग से परिवर्तित करना सुनिश्चित करें ताकि गणना में कोई त्रुटि न हो।
Question 23. किसी अभिक्रिया A+B2\( \implies \)AB, में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमान्त अभिकर्मक, (यदि कोई हो तो) ज्ञात कीजिए-
(i) A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
(ii) 2 मोल A+3 मोल B
(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
(iv) A के 5 मोल + B के 2-5 मोल
(v) A के 25 मोल+ B के 5 मोल
Answer:
1. दी गई अभिक्रिया के अनुसार, A + B2 \( \implies \) AB2 A का एक परमाणु AB के एक अणु से अभिक्रिया करता है।
\( \implies \) पूर्ण अभिक्रिया में A के 300 परमाणुओं के लिए, B के 300 अणुओं की आवश्यकता होगी। क्योंकि B के केवल 200 अणु उपस्थित हैं, अतः 100 अणुओं की कमी है। इस प्रकार A अधिकता में है। इसलिए B एक सीमान्त अभिकर्मक है।
2. A के 1 मोल, B के 1 मोल से अभिक्रिया करते हैं।
\( \implies \) A के 2 मोल, B के 2 मोल से अभिक्रिया करेंगे B के 3 मोल उपस्थित हैं जो अधिकता में हैं। इस प्रकार A एक सीमान्त अभिकर्मक है।
3. A के 100 परमाणु B के 100 अणुओं से पूरी तरह अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकार दोनों प्रयुक्त हो जायेंगे । अतः इस स्थिति में कोई सीमान्त अभिकर्मक नहीं होगा।
4. B के 2.5 मोल, A के 2.5 मोल के साथ अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकार A अधिकता में बचा रहेगा। अतः, B एक सीमान्त अभिकर्मक है।
5. A के 2.5 मोल B के 2.5 मोल के साथ अभिक्रिया करेंगे। इस प्रकारे B अधिकता में बचा रहेगा। अतः A एक सीमान्त अभिकर्मक है।
In simple words: सीमान्त अभिकर्मक वह होता है जो अभिक्रिया में पूरी तरह से उपयोग हो जाता है और उत्पाद की मात्रा को सीमित करता है; अधिकता वाला अभिकर्मक अभिक्रिया के बाद बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: सीमान्त अभिकर्मक को पहचानने के लिए, स्टॉइकियोमीट्रिक अनुपात की तुलना उपलब्ध अभिकर्मकों की मात्रा से करें।
Question 24. डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैं-
N2(g) + 3H2(g) \( \implies \) 2NH3(g)
(i) यदि \( 2.00\times 10^3 \)g डाइनाइट्रोजन \( 1.00\times 10^3 \) g डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिकर्मक शेष बचेगा?
(iii) यदि हाँ, तो कौन-सा उसका द्रव्यमान क्या होगा?
Answer:
(i)
N2 + 3H2 \( \implies \) 2NH3
1 मोल 3 मोल 2 मोल
28g \( 3\times 2 \) = 6g \( 2\times 17 \) = 34 g
\( \implies \) 28 g डाइनाइट्रोजन (N2) अभिक्रिया करती है = 6g डाइहाइड्रोजन से
\( \implies 200\times 10^3 \) g डाइनाइट्रोजन (N2) अभिक्रिया करेगी = \( \frac{6}{28} \times 200 \times 10^3 \)
= 428.57g डाइहाइड्रोजन से
स्पष्ट है, डाइहाइड्रोजन अधिकता में है तथा डाइनाइट्रोजन एक सीमान्त अभिकर्मक है।
\( \implies \) 28 g डाइनाइट्रोजन से उत्पन्न अमोनिया = 34g
अमोनिया का द्रव्यमान = \( \frac{34}{28} \times 200 \times 10^3 \) = \( 2.428 \times 10^5 \) g
(ii) डाइहाइड्रोजन शेष बचेगा ।
(iii) शेष H2 का द्रव्यमान = \( 1.00\times 10^3 - 428.57 \) = 571.43 g
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया में, सीमांत अभिकर्मक वह होता है जो पूरी तरह से उपयोग हो जाता है और उत्पाद की मात्रा को निर्धारित करता है, जबकि दूसरा अभिकर्मक अधिकता में बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरण के स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांकों का उपयोग करके प्रत्येक अभिकर्मक की आवश्यक मात्रा की गणना करें और उपलब्ध मात्रा से तुलना करके सीमांत अभिकर्मक की पहचान करें।
Question 25. 0.5 मोल Na2CO3 और 0.50 M Na2CO3 में क्या अन्तर है?
Answer:
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = \( (2\times 23) +12+ (3\times 16) \) = 106
0.5 मोल Na2CO3 से तात्पर्य है-
\( 0.5\times 106 \) = 53g Na2CO3
यह केवल द्रव्यमान को सन्दर्भित करता है।
0.50 M Na2CO3 से तात्पर्य है 0.50 मोलर, अर्थात् Na2CO3 के 53 gm 1 लीटर विलयन में उपस्थित हैं। इस प्रकार यह विलयन के सान्द्रण को बताता है।
In simple words: 0.5 मोल Na2CO3 केवल पदार्थ के द्रव्यमान को इंगित करता है, जबकि 0.50 M Na2CO3 एक विलयन की सांद्रता को दर्शाता है (1 लीटर विलयन में 0.5 मोल विलेय)।
🎯 Exam Tip: 'मोल' पदार्थ की मात्रा को संदर्भित करता है, जबकि 'मोलरता' (M) प्रति लीटर विलयन में मोलों की सांद्रता को संदर्भित करता है।
Question 26. यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतनों के साथ अभिक्रिया करें तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे?
Answer:
हाइड्रोजन (H2) के दो आयतन ऑक्सीजन (O2) के एक आयतन के साथ अभिक्रिया करके जल वाष्प (H2O) के दो आयतन उत्पन्न करते हैं।
इस प्रकार H2 के 10 आयतन पूर्णतः O2, के 5 आयतन के साथ अभिक्रिया करके जलवाष्प के 10 आयतन उत्पन्न करेंगे।
In simple words: गैसों की अभिक्रिया में, आयतन सीधे उनके स्टॉइकियोमीट्रिक अनुपात में संयोजित होते हैं, और उत्पाद का आयतन सीमांत अभिकर्मक द्वारा निर्धारित होता है।
🎯 Exam Tip: गै-लुसैक के गैसीय आयतन के नियम को याद रखें: समान ताप और दाब पर, रासायनिक अभिक्रिया में गैसें सरल आयतन अनुपात में अभिक्रिया करती हैं।
Question 27. निम्नलिखित को मूल मात्रकों में परिवर्तित कीजिए-
(i) 28.7 pm
(ii) 15.15 us
(iii) 25365 mg
Answer:
(i) 28.7 pm = \( 28.7 \text{ pm} \times \frac{10^{-12} \text{ m}}{1\text{pm}} \) = \( 2.87 \times 10^{-11} \) m
(ii) 15.15 \( \mu \)s = \( 15.15\mu\text{s} \times \frac{10^{-6}\text{s}}{1\mu\text{s}} \) = \( 1.515 \times 10^{-5} \)s
(iii) 25365 mg = \( 25365 \text{ mg} \times \frac{1\text{g}}{1000\text{mg}} \times \frac{1\text{kg}}{1000\text{g}} \) = \( 2.5365\times 10^{-2} \) kg
In simple words: मूल मात्रकों में परिवर्तन विभिन्न इकाइयों के बीच रूपांतरण कारकों का उपयोग करके किया जाता है, जैसे कि पिकोमीटर को मीटर में, माइक्रोसेकंड को सेकंड में, और मिलीग्राम को किलोग्राम में।
🎯 Exam Tip: SI उपसर्गों (prefix) को याद रखें और प्रत्येक परिवर्तन के लिए सही गुणांकों का उपयोग करें।
Question 28. निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1g Au(s)
(ii) 1 g Na(s)
(iii) 1g Li(s)
(iv) 1 g Cl2(g)
Answer:
(i) 1 g Au = \( \frac{1}{197} \) मोल = \( \frac{1}{197} \times 6.022 \times 10^{23} \) परमाणु = \( 3.057 \times 10^{21} \) परमाणु
(ii) 1 g Na = \( \frac{1}{23} \) मोल = \( \frac{1}{23} \times 6.022 \times 10^{23} \) परमाणु = \( 2.618 \times 10^{22} \) परमाणु
(iii) 1 g Li = \( \frac{1}{7} \) मोल = \( \frac{1}{7} \times 6.022 \times 10^{23} \) परमाणु = \( 8.603 \times 10^{22} \) परमाणु
(iv) 1 g Cl2 = \( \frac{1}{71} \) मोल = \( \frac{1}{71} \times 6022 \times 10^{23} \) परमाणु = \( \frac{1}{71} \times 6022 \times 10^{23} \times 2 \) परमाणु
= \( 1.696 \times 10^{22} \) परमाणु
इस प्रकार एक ग्राम लीथियम में परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक है।
In simple words: परमाणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए, पदार्थ के द्रव्यमान को उसके मोलर द्रव्यमान से विभाजित करके मोलों की संख्या ज्ञात की जाती है, फिर उसे आवोगाद्रो संख्या से गुणा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक पदार्थ के मोलों की संख्या की सही गणना करें, फिर आवोगाद्रो संख्या का उपयोग करके परमाणुओं की संख्या ज्ञात करें।
Question 29. एथेनॉल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए जिसमें एथेनॉल का मोल-अंश 0.040 है।
Answer:
एक लीटर जल में उपस्थित मोलों की संख्या = \( \frac{1000}{18} \) = 55.55
माना कि दिया गया विलयन तनु है। अतः, विलयन के 1 लीटर में एथेनॉल का मोल अंश
= \( \frac{\text{एथेनॉल की मोल संख्या}}{\text{एथेनॉल की मोल संख्या + जल की मोल संख्या}} \)
या \( 0.040 = \frac{\text{एथेनॉल की मोल संख्या}}{\text{एथेनॉल की मोल संख्या + 55.55}} \)
या एथेनॉल की मोल संख्या = \( \frac{55.55 \times 0.040}{(1-0.040)} \) = 2.314
इस प्रकार एक लीटर विलयन में एथेनॉल के 2.314 मोल उपस्थित हैं। अतः दिये गये विलयन की मोलरता = 2.314 M
In simple words: मोल-अंश से मोलरता की गणना करने के लिए, विलायक के मोलों की संख्या का उपयोग करके विलेय के मोलों की संख्या ज्ञात की जाती है, और फिर विलयन के आयतन (लीटर में) से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मोल-अंश, मोलरता और विलायक के मोलों की संख्या के बीच संबंधों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 30. एक \( ^{12}\text{C} \) कार्बन परमाणु का ग्राम (g) में द्रव्यमान क्या होगा?
Answer:
\( ^{12}\text{C} \) के एक मोल अर्थात् \( 6.022\times 10^{23} \) परमाणुओं का द्रव्यमान 12g होता है।
\( \implies \) एक \( ^{12}\text{C} \) कार्बन परमाणु का द्रव्यमान = \( \frac{12 \text{ g}}{6.022\times 10^{23}} \) = \( 1.9926\times 10^{-23} \) g
In simple words: एक कार्बन परमाणु का द्रव्यमान उसके मोलर द्रव्यमान को आवोगाद्रो संख्या से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मोलर द्रव्यमान और आवोगाद्रो संख्या के बीच के संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 31. निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक होने चाहिए?
(i) \( \frac{0.02856\times 298.15\times 0.112}{0.5785} \)
(ii) \( 5\times 5.364 \)
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215
Answer:
(i) न्यूनतम यथार्थ परक संख्या (0.112) में तीन सार्थक अंक हैं। अतः उत्तर में तीन सार्थक अंक होने चाहिए ।
(ii) पाँच पूर्ण संख्या हैं। दूसरी संख्या अर्थात् 5.364 में 4 सार्थक अंक है। अतः उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिए ।
(iii) उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिए क्योंकि दशमलव स्थानों की न्यूनतम संख्या 4 है।
In simple words: गुणन/भाग में परिणाम में सबसे कम सार्थक अंकों वाले इनपुट के बराबर सार्थक अंक होते हैं, जबकि जोड़/घटाव में परिणाम में सबसे कम दशमलव स्थानों वाले इनपुट के बराबर दशमलव स्थान होते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणन/भाग और जोड़/घटाव के लिए सार्थक अंकों के नियमों को ध्यान से लागू करें।
Question 32. प्रकृति में उपलब्ध ऑर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में-
| समस्थानिक | समस्थानिक मोलर द्रव्यमान | प्रचुरता |
|---|---|---|
| \(^{36}\)Ar | 35.96755 g mol\(^{-1}\) | 0.337% |
| \(^{38}\)Ar | 37.96272 g mol\(^{-1}\) | 0.063% |
| \(^{40}\)Ar | 39.9624 g mol\(^{-1}\) | 99.600% |
Answer:
ऑर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान
= \( \frac{(35.96755 \times 0.337) + (37.96272\times 0.063) + (39.9624 \times 99.600)}{0.337+0.063 + 99.600} \)
= \( \frac{12.1158 + 2.3916 + 3980.24}{100} \)
= \( \frac{3994.7474}{100} \) = 39.947474
= 39.948 g mol\(^{-1}\)
In simple words: औसत मोलर द्रव्यमान की गणना प्रत्येक समस्थानिक के मोलर द्रव्यमान और उसकी प्रतिशत प्रचुरता को गुणा करके और फिर सभी उत्पादों को जोड़कर की जाती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिशत प्रचुरता को दशमलव रूप में (जैसे 0.337) या \( \frac{\text{प्रतिशत}}{100} \) के रूप में उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 33. निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52u He
(iii) 52 g He
Answer:
(i) ऑर्गन का 1 मोल = \( 6.022\times 10^{23} \) परमाणु
\( \implies \) ऑर्गन के 52 मोल = \( 52\times 6.022\times 10^{23} \) परमाणु = \( 3.131\times 10^{25} \) परमाणु
(ii) He के 4u = He का एक परमाणु
\( \implies \) He के 52u = \( \frac{52}{4} \) = 13 परमाणु
(iii) He के एक मोल अर्थात् इसके 4 g में \( 6.022\times 10^{23} \) परमाणु उपस्थित होते हैं।
अतः 52 g He में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = \( \frac{6.022\times 10^{23}}{4} \times 52 \)
= \( 3.131\times 10^{25} \) परमाणु
In simple words: मोलों की संख्या को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करके परमाणुओं की संख्या प्राप्त की जाती है, जबकि परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) का उपयोग करके सीधे परमाणुओं की संख्या की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: 'मोल', 'u' (परमाणु द्रव्यमान इकाई), और 'ग्राम' के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और प्रत्येक स्थिति में सही रूपांतरण का उपयोग करें।
Question 34. एक वेल्डिंग ईंधन गैस में केवल कार्बन और हाइड्रोजन उपस्थित हैं। इसके नमूने की कुछ मात्रा ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.690 g जल के अतिरिक्त और कोई उत्पाद नहीं बनाती। इस गैस के 10.0L (STP पर मापित) आयतन का द्रव्यमान 11.69 g पाया गया। इसके-
(i) मूलानुपाती सूत्र
(ii) अणु द्रव्यमान और
(iii) अणुसूत्र की गणना कीजिए।
Answer:
3.38 g CO2 में कार्बन की मात्रा = \( \frac{12}{44} \times 3.38 \) = 0.9218 g
0.690 g H2O में हाइड्रोजन की मात्रा = \( \frac{2}{18} \times 0.690 \) = 0.0767 g
ईंधन गैस में केवल कार्बन तथा हाइड्रोजन हैं,
अतः जलने वाली गैस का कुल द्रव्यमान = \( 0.9218+0.0767 \) = 0.9985g
\( \implies \) ईंधन गैस में कार्बन (C) की प्रतिशतता = \( \frac{0.9218}{0.9985} \times 100 \) = 92.318
ईंधन गैस में हाइड्रोजन की प्रतिशतता = \( \frac{0.0767}{0.9985} \times 100 \) = 7.682
(i) मूलानुपाती सूत्र की गणना
| तत्त्व | परमाणु द्रव्यमान | प्रतिशतता | मोलों की सापेक्ष संख्या | सरलतम मोल अनुपात | पूर्णांक अनुपात |
|---|---|---|---|---|---|
| C | 12 | 92.318 | \( \frac{92.318}{12} \) = 7.693 | \( \frac{7.693}{7.682} \) = 1.0 | 1 |
| H | 1 | 7.682 | \( \frac{7.682}{1} \) = 7.682 | \( \frac{7.682}{7.682} \) = 1.0 | 1 |
मूलानुपाती सूत्र = CH
(ii) मोलर द्रव्यमान की गणना
\( \implies \) STP पर 10.0 L गैस का भार = 11.69 g
\( \implies \) STP पर 22.4 L गैस का भार होगा = \( \frac{11.69}{10.0} \times 22.4 \) = 26.2016 g \( \approx \) 26g
\( \implies \) गैस का मोलर द्रव्यमान = 26 g mol\(^{-1}\)
(iii) आणविक सूत्र की गणना
n = \( \frac{\text{मोलर द्रव्यमान}}{\text{मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान}} \) = \( \frac{26}{12+1} \) = \( \frac{26}{13} \) = 2
\( \implies \) गैस का अणु सूत्र = \( 2 \times (\text{CH}) \) = C2H2
In simple words: मूलानुपाती सूत्र तत्वों के सबसे सरल अनुपात को दर्शाता है, मोलर द्रव्यमान STP पर आयतन और द्रव्यमान से प्राप्त होता है, और आण्विक सूत्र वास्तविक परमाणु संख्या को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: मूलानुपाती सूत्र, मोलर द्रव्यमान और आण्विक सूत्र की गणना में प्रत्येक चरण को सावधानीपूर्वक करें और सही रूपांतरण कारकों का उपयोग करें।
Question 35. CaCO3 जलीय HCI के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया कर CaCl2 और CO2 बनाता है।
CaCO3(s) + 2HCl(g) \( \implies \) CaCl2(aq) + C02(g) + H2O(l) 0.75 M-HCI के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
Answer:
विलयन की मोलरता (M) निम्न सम्बन्ध से प्राप्त की जा सकती है-
w = \( \frac{MM'V}{1000} \)
प्रश्नानुसार, M = 0.75, M'=1+35.5=36.5, V = 25 mL, w = ?
मान प्रतिस्थापित करने पर, w = \( \frac{0.75 \times 36.5 \times 25}{1000} \) = 0.6844 g
अतः दिये गये विलयन में HCI का द्रव्यमान 0.6844 g है।
दी गई समीकरण निम्नवत् है -
CaCO3 (s) + 2HCl(aq) \( \implies \) CaCl2 (aq) + CO2(g) + H2O(l)
1 मोल 2 मोल
100 g \( 2\times 36.5 \) = 73 g
\( \implies \) अभिक्रिया को पूर्ण करने के लिए 73 g HCl के लिए आवश्यक CaCO3 का द्रव्यमान (मात्रा) = 100g
\( \implies \) 0.6844 g HCl के लिए आवश्यक CaCO3 का द्रव्यमान = \( \frac{100}{73} \times 0.6844 \) = 0.938 g
In simple words: स्टॉइकियोमीट्रिक गणनाओं का उपयोग करके एक अभिकर्मक की ज्ञात मात्रा से दूसरे अभिकर्मक की आवश्यक मात्रा का पता लगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: संतुलित रासायनिक समीकरण और प्रत्येक पदार्थ के मोलर द्रव्यमान का सही उपयोग करें।
Question 36. प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) की जलीय HCI विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित समीकरण के अनुसार किया जाता है | 4HCl(aq) + MnO2(s) \( \implies \) 2H20(l) + MnCl2(aq) + Cl2(g)
5.0 g मैंगनीज डाइऑक्साइड के साथ HCI के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
Answer:
दी गई समीकरण निम्नवत् है-
4HCl (aq) + MnO2 (s) \( \implies \) 2H2O(l) + MnCl2 (aq) + Cl2 (g)
4 मोल 1 मोल
\( 4\times 36.5 \) = 146 g \( 55+32 \) = 87 g
\( \implies \) MnO2 के 87 g द्वारा अभिकृत HCI का द्रव्यमान = 146g
\( \implies \) MnO2 के 5.0 g द्वारा अभिकृत HCI का द्रव्यमान = \( \frac{146}{87} \times 5.0 \) = 8.39 g
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया में, एक अभिकर्मक की ज्ञात मात्रा का उपयोग करके दूसरे अभिकर्मक की आवश्यक मात्रा की गणना करने के लिए स्टॉइकियोमीट्रिक अनुपात महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: दिए गए रासायनिक समीकरण को संतुलित करें और मोलर द्रव्यमान का सही उपयोग करें।
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. जल तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड निम्नलिखित में कौन-सा नियम दर्शाते हैं?
(i) स्थिर अनुपात का नियम
(ii) व्युत्क्रमानुपाती नियम ।
(iii) रासायनिक तुल्यता का नियम
(iv) गुणित अनुपात का नियम
Answer: (iv) गुणित अनुपात का नियम
In simple words: जल (H2O) और हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2) गुणित अनुपात के नियम का उदाहरण हैं क्योंकि ऑक्सीजन का द्रव्यमान (16:32) एक सरल पूर्ण संख्या अनुपात में होता है जब हाइड्रोजन का द्रव्यमान स्थिर होता है।
🎯 Exam Tip: गुणित अनुपात के नियम की परिभाषा को याद रखें और पहचानें कि कैसे दो तत्व एक से अधिक यौगिक बनाते हैं।
Question 2. आवोगाद्रो संख्या अणुओं की वह संख्या है जो उपस्थित रहती है।
(i) NTP पर 22.4 ली गैस में
(ii) किसी पदार्थ के 1 मोल में
(iii) पदार्थ के 1 ग्राम अणुभार
(iv) ये सभी
Answer: (iv) ये सभी
In simple words: आवोगाद्रो संख्या (6.022 x 10\(^{23}\)) किसी पदार्थ के 1 मोल में अणुओं, परमाणुओं या आयनों की संख्या को दर्शाती है, जो NTP पर 22.4 लीटर गैस के लिए भी मान्य है।
🎯 Exam Tip: आवोगाद्रो संख्या की व्यापकता और इसका विभिन्न रासायनिक गणनाओं में उपयोग समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 1 परमाण्विक द्रव्यमान इकाई (amu) का मान होता है।
(i)127 MeV
(ii) 9310 MeV
(iii) 931 MeV
(iv) 937 MeV
Answer: (iii) 931 Mev
In simple words: एक परमाण्विक द्रव्यमान इकाई (amu) ऊर्जा के संदर्भ में 931 MeV के बराबर होती है, जो आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण \( E=mc^2 \) से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) और MeV के बीच संबंध को याद रखना नाभिकीय रसायन और भौतिकी के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. 1.12 लीटर नाइट्रोजन का STP पर लगभग द्रव्यमान है।
(i) 0.7 ग्राम
(ii) 2.8 ग्राम
(iii) 1.4 ग्राम
(iv) 3.0 ग्राम
Answer: (iii) 1.4 ग्राम
In simple words: STP पर किसी गैस के 1 मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है, इसलिए ज्ञात आयतन से मोल और फिर द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: NTP/STP पर मोलर आयतन (22.4 लीटर) और गैसों के मोलर द्रव्यमान का सही उपयोग करें।
Question 5. ऑक्सीजन के एक परमाणु का भार होगा
(i) 16 amu
(ii) \( \frac{16}{6.023 \times 10^{23}} \) ग्राम
(iii) \( \frac{32}{6023 \times 10^{23}} \) ग्राम
(iv) \( \frac{1}{6023 \times 10^{23}} \) ग्राम
Answer: (ii) \( \frac{16}{6.023 \times 10^{23}} \) ग्राम
In simple words: एक ऑक्सीजन परमाणु का द्रव्यमान उसके मोलर द्रव्यमान (16 ग्राम/मोल) को आवोगाद्रो संख्या से विभाजित करके ग्राम में प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आवोगाद्रो संख्या का उपयोग ग्राम में एक परमाणु के द्रव्यमान को मोलर द्रव्यमान से संबंधित करने के लिए किया जाता है।
Question 6. किसी गैस के 0.1 ग्राम का NTP पर आयतन 28 मिली है। इस गैस का अणुभार है
(i) 56
(ii) 40
(iii) 80
(iv) 60
Answer: (iii) 80
In simple words: NTP पर गैस के आयतन और द्रव्यमान का उपयोग करके मोलों की संख्या और फिर अणुभार की गणना की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: NTP पर मोलर आयतन (22.4 लीटर या 22400 मिलीलीटर) का सही ढंग से उपयोग करें।
Question 7. 7.1 ग्राम क्लोरीन गैस में क्लोरीन के मोलों की संख्या है।
(i) 0.01
(ii) 0.1
(iii) 0.05
(iv) 0.5
Answer: (ii) 0.1
In simple words: क्लोरीन गैस (Cl2) के मोलों की संख्या ज्ञात करने के लिए, दिए गए द्रव्यमान को उसके मोलर द्रव्यमान (35.5 x 2 = 71 ग्राम/मोल) से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: डायटोमिक गैसों के लिए मोलर द्रव्यमान की गणना करते समय दो परमाणुओं के द्रव्यमान को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 12. पानी में H :0 को भारात्मक अनुपात है।
(i) 1:1
(ii) 1:2
(iii) 1:8
(iv) 1: 16
Answer: (iii) 1:8
In simple words: पानी (H2O) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 1:8 होता है क्योंकि दो हाइड्रोजन परमाणुओं का द्रव्यमान 2 और एक ऑक्सीजन परमाणु का द्रव्यमान 16 होता है (2:16 को सरल करने पर 1:8)।
🎯 Exam Tip: जल में तत्वों के द्रव्यमान अनुपात की गणना करते समय, परमाणुओं की संख्या और उनके परमाणु द्रव्यमान दोनों को ध्यान में रखें।
Question 13. आसुत (distilled) जल की मोलरता है
(i) 55.56
(ii) 18.00
(iii) 49.87
(iv) 81.00
Answer: (i) 55.56
In simple words: आसुत जल की मोलरता 55.56 M होती है, जो 1 लीटर जल में जल के मोलों की संख्या के बराबर है (1000g जल / 18 g/mol जल)।
🎯 Exam Tip: आसुत जल की मोलरता एक मानक मान है; इसे याद रखना या इसकी गणना विधि को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 14. यूरिया के जलीय विलयन की मोललता 4.44 मोल/किग्रा है। विलयन में यूरिया का मोल प्रभाज है।
(i) 0.074
(ii) 0.00133
(iii) 0.008
(iv) 0.0044
Answer: (i) 0.074
In simple words: विलयन की मोललता का उपयोग करके, यूरिया और जल के मोलों की संख्या ज्ञात की जाती है, फिर यूरिया का मोल प्रभाज उसके मोलों को कुल मोलों से विभाजित करके निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: मोललता और मोल प्रभाज के बीच संबंध को समझने के लिए विलायक (जल) के मोलों की गणना करना आवश्यक है, जो आमतौर पर 1000g विलायक के आधार पर की जाती है।
Question 15. H3PO4 के 1 M विलयन की नॉर्मलता है।
(i) 0.5 N
(ii) 1N
(iii) 2 N
(iv) 3 N
Answer: (iv) 3 N
In simple words: H3PO4 एक ट्राइबैसिक अम्ल है, जिसका अर्थ है कि यह प्रति मोल 3 H+ आयन दे सकता है; इसलिए इसकी नॉर्मलता मोलरता से तीन गुना अधिक होती है।
🎯 Exam Tip: नॉर्मलता की गणना के लिए अम्ल या क्षार की बेसिसिटी/एसिडिटी जानना आवश्यक है, जो प्रति मोल दिए गए H+ या OH- आयनों की संख्या होती है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. दो तत्वों के नाम लिखिए जो उपधातुओं के रूप में कार्य करते हैं।
Answer: आर्सेनिक व ऐण्टीमनी ।
In simple words: आर्सेनिक और ऐण्टीमनी ऐसे तत्व हैं जो धातुओं और अधातुओं दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं, इसलिए उन्हें उपधातु कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: उपधातुओं के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे आवर्त सारणी में एक विशेष संक्रमण श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Question 2. सेल्सियस तथा फारेनहाइट में सम्बन्ध बताइए ।
Answer: सेल्सियस तथा फारेनहाइट में सम्बन्ध इस प्रकार है : \(^{\circ}F = \frac { 9 }{ 5 } (^{\circ}C)+32\)
In simple words: यह सूत्र सेल्सियस तापमान को फारेनहाइट तापमान में बदलने के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ सेल्सियस मान को 9/5 से गुणा करके 32 जोड़ा जाता है।
🎯 Exam Tip: तापमान पैमाने के रूपांतरण सूत्र को सही ढंग से याद रखना और लागू करना गणना में सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. स्थिर अनुपात का नियम किस वैज्ञानिक ने दिया था?
Answer: स्थिर अनुपात का नियम फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसफ प्राउस्ट ने सन् 1779 में दिया था।
In simple words: जोसफ प्राउस्ट ने यह नियम प्रतिपादित किया कि किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित अनुपात में मौजूद होते हैं।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनके द्वारा प्रतिपादित नियम को याद रखना रसायन विज्ञान के इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. कौन-सा नियम गैसीय अभिकारकों तथा गैसीय उत्पादों के अनुपात से सम्बन्धित है?
Answer: गै-लुसैक का नियम गैसीय अभिकारकों तथा गैसीय उत्पादों के अनुपात से सम्बन्धित है।
In simple words: गै-लुसैक का गैसीय आयतन का नियम बताता है कि एक ही ताप और दाब पर, गैसीय अभिकारकों और उत्पादों के आयतन एक सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं।
🎯 Exam Tip: गैसों के संयोजन के नियमों को याद रखें और समझें, खासकर जब वे आयतन से संबंधित हों।
Question 5. 1 मोल पदार्थ को परिभाषित कीजिए ।
Answer: मोल पदार्थ की मात्रा का मात्रक है। 1 मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही मूल कण होते हैं जितने की 0.012 किग्रा कार्बन-12 में परमाणु होते हैं।
In simple words: एक मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें 6.022 x 1023 कण (परमाणु, अणु, या आयन) होते हैं, जो कार्बन-12 के 12 ग्राम में परमाणुओं की संख्या के बराबर है।
🎯 Exam Tip: मोल की परिभाषा और आवोगाद्रो संख्या का मान दोनों को याद रखना रासायनिक गणनाओं के लिए मूलभूत है।
Question 6. CaCO3 के 20 ग्राम में मोलों की संख्या की गणना कीजिए।
Answer: CaCO3 का मोलर द्रव्यमान = 40 + 12 + (3×16) = 100 g/mol
मोलों की संख्या = \( \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{20 \text{ g}}{100 \text{ g/mol}} = 0.2 \text{ मोल}\)
In simple words: कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) के मोलों की संख्या निकालने के लिए, दिए गए द्रव्यमान (20 ग्राम) को उसके मोलर द्रव्यमान (100 ग्राम/मोल) से विभाजित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मोलों की गणना के लिए सबसे पहले यौगिक का मोलर द्रव्यमान सही ढंग से ज्ञात करें, फिर दिए गए द्रव्यमान को मोलर द्रव्यमान से विभाजित करें।
Question 7. 4.4 ग्राम CO2 में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या क्या होगी?
Answer: 4.4 ग्राम CO2 में मोलों की संख्या = \(\frac { 4.4 }{ 44 } = 0.1\) मोल
0.1 मोल CO2 में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या
\( = 0.1 \times 2 \times N = 0.1 \times 2 \times 6.023 \times 10^{23}\)
\( = 1.2046 \times 10^{23}\)
In simple words: 4.4 ग्राम CO2 में 0.1 मोल CO2 होते हैं, और चूंकि एक CO2 अणु में दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं, इसलिए कुल ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या 0.1 मोल को 2 से गुणा करके आवोगाद्रो संख्या से गुणा करने पर प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: किसी यौगिक में परमाणुओं की संख्या की गणना करते समय, पहले यौगिक के मोलों की संख्या ज्ञात करें, फिर सूत्र में उस तत्व के परमाणुओं की संख्या से गुणा करें और अंत में आवोगाद्रो संख्या से गुणा करें।
Question 8. C12 के 12 ग्राम में परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए ।
Answer: C12 के मोलों की संख्या =\(\frac { 12 }{ 12 } =1\) मोल
अतः 1 मोल C12 में परमाणुओं की संख्या = \(6.023 \times 10^{23}\) C12 परमाणु
In simple words: कार्बन-12 के 12 ग्राम में एक मोल परमाणु होते हैं, जो आवोगाद्रो संख्या (\(6.023 \times 10^{23}\)) के बराबर है।
🎯 Exam Tip: किसी तत्व के ग्राम परमाणु द्रव्यमान में हमेशा एक मोल परमाणु और आवोगाद्रो संख्या के बराबर परमाणु होते हैं।
Question 9. CaCl2.2H2O का प्रतिशत संघटन निकालिए।
[Ca = 40, CI= 35.5, H = 1, O = 16]
Answer: CaCl2.2H2O का अणुभार = \(1 \times Ca + 2 \times Cl + 2 [2 \times H + 1 \times O]\)
\( = 1 \times 40 + 2 \times 35.5 + 2 [2 \times 1 + 1 \times 16]\)
\( = 40 + 71 + 36 = 147\)
Ca का प्रतिशत \( = \frac{40 \times 100}{147} = 27.21\%\)
Cl का प्रतिशत \( = \frac{2 \times 35.5 \times 100}{147} = 48.30\%\)
H2O का प्रतिशत \( = \frac{2 \times 18 \times 100}{147} = 24.49\%\)
In simple words: किसी यौगिक का प्रतिशत संघटन ज्ञात करने के लिए, पहले यौगिक का कुल मोलर द्रव्यमान निकाला जाता है, फिर प्रत्येक तत्व या समूह के द्रव्यमान को कुल द्रव्यमान से विभाजित करके 100 से गुणा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिशत संघटन की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप सभी परमाणुओं के द्रव्यमान का सही ढंग से योग कर रहे हैं और प्रत्येक घटक के योगदान को कुल द्रव्यमान से विभाजित करके प्रतिशत निकाल रहे हैं।
Question 10. मूलानुपाती सूत्र से आप क्या समझते हैं?
Answer: वह सूत्र जो किसी यौगिक के अणु में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं के सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात को दर्शाता है, यौगिक का मूलानुपाती सूत्र कहलाता है।
In simple words: मूलानुपाती सूत्र एक रासायनिक यौगिक में परमाणुओं की सबसे सरल पूर्णांक संख्या अनुपात को दर्शाता है, जिससे उसके संगठन की मूल संरचना का पता चलता है।
🎯 Exam Tip: मूलानुपाती सूत्र आणविक सूत्र से भिन्न हो सकता है, लेकिन यह किसी यौगिक के सरलतम संगठन को व्यक्त करता है।
Question 11. मूलानुपाती सूत्र तथा आणविक सूत्र में सम्बन्ध बताइए ।
Answer: आणविक सूत्र = n \(\times\) मूलानुपाती सूत्र (जहाँ \(n\) = 1, 2, 3, 4, 5,........)
In simple words: आणविक सूत्र, मूलानुपाती सूत्र का एक पूर्णांक गुणक होता है, जहाँ 'n' का मान यौगिक के आणविक द्रव्यमान और मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान के अनुपात के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: इस संबंध का उपयोग करके किसी यौगिक का आणविक सूत्र ज्ञात करने के लिए मूलानुपाती सूत्र और आणविक द्रव्यमान दोनों आवश्यक होते हैं।
Question 12. स्टॉइकियोमीट्रिक (रससमीकरणमिती) गुणांक क्या है?
2KCIO3 \( \implies \) 2KCl+3O2
अभिक्रिया के लिए स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक लिखिए ।
Answer: स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक सन्तुलित रासायनिक समीकरण में अभिकारकों तथा उत्पादों के मोलों की संख्या को स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक कहते हैं।
2KCIO3 \( \implies \) 2KCI+3O2
उपर्युक्त अभिक्रिया में KCIO3 के 2 मोल गर्म करने पर 2 मोल KCI तथा 3 मोल O2 उत्पन्न हो रहा है। अतः उपर्युक्त अभिक्रिया का स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक 2, 2 व 3 है ।
In simple words: स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक रासायनिक समीकरण में प्रत्येक अभिकारक और उत्पाद के सामने लिखा गया संख्यात्मक मान है, जो रासायनिक अभिक्रिया में उनके सापेक्ष मोलों की संख्या को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक संतुलित रासायनिक समीकरणों में ही लागू होते हैं और यह प्रतिक्रिया में पदार्थों के बीच मात्रात्मक संबंधों को समझने में मदद करते हैं।
Question 13. स्टॉइकियोमीट्रिक तथा अन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिकों में अन्तर बताइए ।
Answer: वे यौगिक जिनमें विद्यमान तत्वों का संघटन निश्चित होता है, स्टॉइकियोमीट्रिक कहलाते हैं; जैसे-H20, NH3 CH4, CO2 आदि । जबकि वे यौगिक जिनमें विद्यमान तत्वों का संघटन संयोग करने वाले अवयवों की संयोजकताओं के अनुरूप नहीं होता है तथा परिवर्तनीय होता है, जैसे-अन-स्टॉइकियोमीट्रिक कहलाते हैं; Fe0.98O, Cu1.7S आदि ।
In simple words: स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिकों में तत्व निश्चित अनुपात में होते हैं, जबकि अन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिकों में तत्वों का अनुपात निश्चित नहीं होता और यह उनकी संयोजकता के नियमों का पालन नहीं करते।
🎯 Exam Tip: स्टॉइकियोमीट्रिक और अन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिकों के बीच का अंतर रासायनिक संघटन के नियमों के पालन पर आधारित है।
Question 14. रासायनिक अभिक्रिया की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए।
Answer: रासायनिक अभिक्रिया रसायन विज्ञान में विभिन्न रसायनों की एक-दूसरे से होने वाली अभिक्रिया रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है। किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को अभिकारक तथा उस अभिक्रिया में बनने वाले पदार्थों को उत्पाद कहते हैं। रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्यतः निम्न प्रकार की होती हैं।
1. अम्ल-क्षार अभिक्रियाएँ
2. ऑक्सीकारक-अपचयन अभिक्रियाएँ
3. अवक्षेपण अभिक्रियाएँ
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें एक या अधिक पदार्थ, अभिकारक, नए पदार्थों, उत्पादों में परिवर्तित होते हैं, और इनके मुख्य प्रकार अम्ल-क्षार, ऑक्सीकरण-अपचयन और अवक्षेपण अभिक्रियाएं हैं।
🎯 Exam Tip: रासायनिक अभिक्रिया की परिभाषा, अभिकारकों और उत्पादों की पहचान, और विभिन्न प्रकार की अभिक्रियाओं को उनके उदाहरणों के साथ समझना आवश्यक है।
Question 15. मोल प्रभाज को संक्षेप में परिभाषित कीजिए ।
Answer: मोल प्रभाज “विलयन में उपस्थित किसी एक अवयव का मोल प्रभाज उस विलयन में उपस्थित उस अवंयव के मोलों (ग्राम-अणुओं) की संख्या तथा विलयन में उपस्थित इन सभी अवयवों के मोलों की कुल संख्या का अनुपात होता है।”
[नोट : विलयन में उपस्थित सभी अवयवों के मोल प्रभाज का योग सदैव एक होता है तथा अवयवों के मोल प्रभाज ताप परिवर्तन पर अपरिवर्तित रहते हैं।
In simple words: मोल प्रभाज किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन में मौजूद सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या का अनुपात है, और इसका मान हमेशा 0 से 1 के बीच होता है तथा यह तापमान पर निर्भर नहीं करता।
🎯 Exam Tip: मोल प्रभाज की गणना में यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी घटकों के मोल प्रभाज का योग हमेशा 1 होता है।
Question 16. विलयन की मोलरता क्या व्यक्त करती है?
Answer: किसी विलयन के एक लीटर आयतन में उपस्थित विलेय पदार्थ के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता कहते हैं। इस प्रकार यह विलयन के प्रति लीटर में विलेय की सान्द्रता व्यक्त करती है।
In simple words: मोलरता किसी विलयन के प्रति लीटर में विलेय के मोलों की संख्या को व्यक्त करती है, जो विलयन की सांद्रता का एक माप है।
🎯 Exam Tip: मोलरता की गणना में विलयन का आयतन लीटर में और विलेय के मोलों की संख्या को सही ढंग से उपयोग करना सुनिश्चित करें।
Question 17. मोललता की परिभाषा लिखिए तथा इसकी इकाई भी बताइए ।
Answer: किसी विलायक के 1 किग्रा में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या मोललता कहलाती है। इसे \(m\) से निरूपित करते हैं। इसकी इकाई (मात्रक) मोल/किग्रा है।
In simple words: मोललता विलायक के प्रति किलोग्राम में विलेय के मोलों की संख्या को परिभाषित करती है, और इसकी इकाई मोल प्रति किलोग्राम है।
🎯 Exam Tip: मोललता की गणना में विलायक के द्रव्यमान को किलोग्राम में लेना और विलेय के मोलों की संख्या का सही उपयोग करना आवश्यक है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए
(i) द्रव्य,
(ii) तत्त्व,
(iii) यौगिक,
(iv) मिश्रण,
(v) परमाणु तथा
(vi) अणु
Answer:
1. द्रव्य-वह पदार्थ जो स्थान घेरता है, जिसमें भार होता है तथा जिसका ज्ञान हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा कर सकते हैं, द्रव्य कहलाता है।
2. तत्त्व-ऐसे द्रव्य जिनको किसी भी विधि द्वारा दो या दो से अधिक विभिन्न द्रव्यों में अपघटित न किया जा सके, तत्त्व कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-लोहा, ताँबा, चाँदी आदि ।
3. यौगिक-शुद्ध समांगी द्रव्य (पदार्थ) जो दो या दो से अधिक तत्त्वों के निश्चित अनुपात में पारस्परिक रासायनिक संयोग से बनता है, यौगिक कहलाता है। उदाहरणार्थ-सोडियम क्लोराइड, चीनी, जल आदि ।
4. मिश्रण-वे द्रव्य जो दो या दो से अधिक पदार्थों (तत्त्वों अथवा यौगिकों) को किसी भी अनुपात में मिला देने पर बनते हैं, मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-चीनी और रेत का मिश्रण, चीनी का जल में मिश्रण आदि ।
5. परमाणु-तत्त्व का वह सूक्ष्मतम कण जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है, परमाणु कहलाता है।
6. अणु-किसी पदार्थ (तत्त्व अथवा यौगिक) का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतन्त्र रूप में रह सकता है, अणु कहलाता है।
In simple words: द्रव्य वह है जिसमें द्रव्यमान हो और जो स्थान घेरता हो; तत्व सबसे शुद्ध रूप है; यौगिक निश्चित अनुपात में तत्वों से बनता है; मिश्रण अनिश्चित अनुपात में पदार्थों का संयोजन है; परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाला सबसे छोटा कण है; और अणु स्वतंत्र रूप से मौजूद रहने वाला सबसे छोटा कण है।
🎯 Exam Tip: इन मूलभूत रासायनिक अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है, क्योंकि ये रसायन विज्ञान की आगे की पढ़ाई के लिए आधारभूत हैं।
Question 2. मिश्रण और यौगिक में अन्तर बताइए ।
Answer: मिश्रण और यौगिक में अन्तर निम्नलिखित हैं-
| मिश्रण | यौगिक |
|---|---|
| मिश्रण दो या दो से अधिक शुद्ध पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिलाने से बनता है। | यौगिक दो या दो से अधिक तत्त्वों के निश्चित अनुपात में संयोग करने से बनता है। |
| मिश्रण में इसके अवयवों के गुण विद्यमान रहते हैं। | यौगिक के गुण इसके अवयवों के गुण से सर्वथा भिन्न होते हैं। |
| इसके अवयवों को भौतिक रीतियों द्वारा पृथक् किया जा सकता है। | इसके अवयवों को भौतिक रीतियों द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता है। |
| मिश्रण प्रायः विषमांग होते हैं। | यौगिक समांग होते हैं। |
| मिश्रण के बनने में ऊष्मा और प्रकाश न तो उत्पन्न होता है और न ही अवशोषित । | यौगिक के बनने में ऊष्मा व प्रकाश सम्बन्धी परिवर्तन होते हैं। |
| मिश्रण बनने में कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं होता है। | यौगिक बनने में रासायनिक परिवर्तन होता है। |
| मिश्रण के गलनांक, क्वथनांक आदि निश्चित नहीं होते हैं। | यौगिक के गलनांक, क्वथनांक आदि निश्चित होते हैं। |
In simple words: मिश्रण में पदार्थ किसी भी अनुपात में मिलकर भौतिक गुणों को बनाए रखते हैं, जबकि यौगिकों में तत्व निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़कर नए गुणधर्मों वाले पदार्थ बनाते हैं जिन्हें भौतिक विधियों से अलग नहीं किया जा सकता।
🎯 Exam Tip: मिश्रण और यौगिक के बीच के प्रमुख अंतरों को उदाहरणों के साथ याद रखें, खासकर संघटन, गुणों और पृथक्करण विधियों के संदर्भ में।
Question 3. द्रव्य की कणिक प्रकृति पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: हम जानते हैं कि सभी भौतिक वस्तुएँ द्रव्य से बनी हुई हैं परन्तु द्रव्य किससे बना हुआ है? इस प्रश्न का उत्तर मानव प्राचीनकाल से ही खोजता आया है। ईसा से 500 वर्ष पूर्व भारतीय महर्षि कणाद ने यह विचार व्यक्त किया था कि द्रव्य असतत हैं अर्थात् द्रव्य अतिसूक्ष्म अभिकारक कणों से बना हुआ है। ईसा से पूर्व पाँचवीं शताब्दी में यूनानी दार्शनिक डेमोक्रेटस ने तथा ईसा से पूर्व प्रथम शताब्दी में रोम के दार्शनिक ल्यूक्रिटस ने भी यही विचार व्यक्त किये थे कि द्रव्य अतिसूक्ष्म अविभाज्य कणों से बना हुआ है। इस प्रकार यह सिद्ध हुआ कि द्रव्य की प्रकृति कणिक होती है। 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में भी कुछ रसायनशास्त्रियों ने द्रव्य की कणिक प्रकृति सम्बन्धी परिकल्पनाएँ दी। परन्तु 19 वीं शताब्दी से पूर्व तक द्रव्य की रचना के सम्बन्ध में व्यक्त किये गये विचार केवल सपना मात्र थे। सन् 1803 में जॉन डॉल्टन ने सर्वप्रथम परमाणु परिकल्पना के आधार पर द्रव्य की कणिक प्रकृति को सिद्ध किया। अभी यह परमाणु परिकल्पना प्रयोगों और प्रेक्षणों के परिणामों पर आधारित थी। इस प्रकार सिद्ध हुआ कि द्रव्य की प्रकृति कृणिक होती है अर्थात् यह अविन्यास कणों (परमाणुओं) से निर्मित होता है।
In simple words: द्रव्य की कणिक प्रकृति का अर्थ है कि सभी पदार्थ छोटे, अविभाज्य कणों (जैसे परमाणु) से बने होते हैं, इस अवधारणा को प्राचीन दार्शनिकों ने प्रस्तावित किया था और जॉन डाल्टन ने अपनी परमाणु परिकल्पना से इसे वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया।
🎯 Exam Tip: द्रव्य की कणिक प्रकृति के ऐतिहासिक विकास और डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के योगदान को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. S.I. पद्धति के मूल मात्रक कौन-कौन से हैं? ये किन भौतिक राशियों से सम्बन्धित हैं?
Answer: S.I. पद्धति के मूल मात्रक, उनसे संम्बन्धित भौतिक राशियों तथा उनके प्रतीकों को निम्नांकित सारणी में दर्शाया गया है-
| भौतिक राशियाँ | भौतिक राशियों के प्रतीक | मूल मात्रक | मूल मात्रक का प्रतीक |
|---|---|---|---|
| लम्बाई | \(l\) | मीटर | m |
| द्रव्यमान | m | किलोग्राम | kg |
| समय | t | सेकण्ड | s |
| विद्युत धारा | I | ऐम्पियर | A |
| ऊष्मागतिक तापक्रम | T | केल्विन | K |
| पदार्थ की मात्रा | n | मोल | mol |
| ज्योति-तीव्रता | Iv | केण्डिला | cd |
In simple words: S.I. पद्धति में सात मूल मात्रक हैं- लम्बाई के लिए मीटर, द्रव्यमान के लिए किलोग्राम, समय के लिए सेकण्ड, विद्युत धारा के लिए ऐम्पियर, ऊष्मागतिक तापक्रम के लिए केल्विन, पदार्थ की मात्रा के लिए मोल, और ज्योति-तीव्रता के लिए केण्डिला।
🎯 Exam Tip: S.I. मूल मात्रकों और उनसे संबंधित भौतिक राशियों तथा उनके प्रतीकों को याद रखना वैज्ञानिक गणनाओं और संचार के लिए आवश्यक है।
Question 5. द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है? एक प्रयोग द्वारा दर्शाइए कि रासायनिक परिवर्तन के लिए भी यह नियम सत्य है।
Answer: इस नियम के अनुसार, “किसी रासायनिक अथवा भौतिक परिवर्तन में, उत्पादों का कुल द्रव्यमान अभिकारकों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। प्रयोग जब 100 ग्राम मरक्यूरिक ऑक्साइड को एक बन्द नली में लेकर गर्म किया जाता है तो 92.6 ग्राम मरक्यूरी और 7.4 ग्राम ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
यहाँ उत्पादों का कुल द्रव्यमान (92.6 ग्राम + 7.4 ग्राम = 100 ग्राम) अभिकारक के द्रव्यमान (100 ग्राम) के बराबर है।।
In simple words: द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है कि किसी भी रासायनिक या भौतिक परिवर्तन में द्रव्यमान न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट; कुल द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है, जैसा कि मरक्यूरिक ऑक्साइड के अपघटन के उदाहरण से सिद्ध होता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान संरक्षण के नियम को स्पष्ट उदाहरण के साथ समझाना महत्वपूर्ण है, और यह सुनिश्चित करना कि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर हो।
Question 6. स्थिर अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।
Answer: इस नियम के अनुसार, “एक रासायनिक यौगिक में एक ही प्रकार के तत्त्व भारानुसार एक निश्चित अनुपात में जुड़े रहते हैं।' उदाहरणार्थ – कार्बन डाइऑक्साइड किसी भी विधि से बनाई जाए (वायु में कोयले को गर्म करके, सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करके अथवा कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करके) उसमें सदैव 1 कार्बन परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं तथा ये दोनों सदैव भारानुसार 12 : 32 अथवा 3: 8 के अनुपात में जुड़े रहते हैं।
In simple words: स्थिर अनुपात का नियम बताता है कि एक दिए गए रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित अनुपात में मौजूद होते हैं, जैसे CO2 में कार्बन और ऑक्सीजन का अनुपात हमेशा 12:32 या 3:8 होता है।
🎯 Exam Tip: स्थिर अनुपात के नियम को स्पष्ट रूप से समझने के लिए एक सामान्य यौगिक (जैसे जल या कार्बन डाइऑक्साइड) के उदाहरण का उपयोग करें।
Question 7. गुणित अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।
Answer: इस नियम के अनुसार, “जब दो तत्त्वे परस्पर संयोग करके एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तब उनमें एक तत्त्व के विभिन्न भार जो दूसरे तत्त्व के एक निश्चित भार से संयोग करते हैं परस्पर सरल अनुपात में होते हैं। उदाहरणार्थ-सल्फर, ऑक्सीजन के साथ संयोग करके दो यौगिक सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड बनाता है। सल्फर डाइऑक्साइड में सल्फर के 32 भाग, ऑक्सीजन के 32 भागों (भारानुसार) से संयोग करते हैं जबकि सल्फर ट्राइऑक्साइड में सल्फर के 32 भाग ऑक्सीजन के 48 भागों (भारानुसार) से संयोग करते हैं। ऑक्सीजन के विभिन्न भारों, जो सल्फर के निश्चित भार (32 भाग) से संयोग करते हैं, का अनुपात 32:48 अथवा 2:3 हैं जो कि एक सरल अनुपात हैं।
In simple words: गुणित अनुपात का नियम कहता है कि जब दो तत्व एक से अधिक यौगिक बनाने के लिए संयोजन करते हैं, तो एक तत्व के द्रव्यमान जो दूसरे तत्व के निश्चित द्रव्यमान के साथ संयोजित होते हैं, हमेशा एक सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणित अनुपात के नियम को समझाने के लिए दो भिन्न यौगिकों (जैसे SO2 और SO3) में तत्वों के द्रव्यमान अनुपात की तुलना करें।
Question 8. व्युत्क्रम अनुपात के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।
Answer: इस नियम के अनुसार, “जब दो तत्त्व किसी तीसरे तत्त्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं, तो उनके भारों का अनुपात या तो वही रहता है या उन भारों के अनुपात का अपवर्त्य होता है जिसमें वे आपस में संयोग करते हैं। उदाहरणार्थ-कार्बन, सल्फर और ऑक्सीजन तीन तत्त्व हैं। कार्बन और सल्फर ऑक्सीजन से अलग-अलग संयोग करके क्रमशः कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड बनाते हैं। सल्फर और कार्बन आपस में संयोग करके कार्बन डाइसल्फाइड बनाते हैं। कांर्बन डाइऑक्साइड (CO2) में कार्बन के 12 भाग ऑक्सीजन के 32 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं जबकि सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) में सल्फर के 32 भाग ऑक्सीजन के 32 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं। अब ऑक्सीजन के निश्चित भार (32 भाग) से संयोग करने वाले कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात 12 : 32 अथवा 3 : 8 कार्बन डाइसल्फाइड (CS2) में कार्बन के 12 भाग सल्फर के 64 भागों से संयोग (भारानुसार) करते हैं। CS2 में कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात 12:64 अथवा 3 : 16
ऊपर दिए गए अनुपातों में अनुपात \(\frac { 3 }{ 8 } : \frac { 3 }{ 16 }\) अथवा 2 : 1.
अत: ऑक्सीजन के निश्चित भार के साथ संयोग करने वाले कार्बन और सल्फर के भारों में अनुपात, भारों के उस अनुपात का सरल अपवर्त्य होता है जिसमें कार्बन और सल्फर आपस में संयोग करते हैं। इस प्रकार यह उदाहरण व्युत्क्रम अनुपात के नियम की पुष्टि करता है।
In simple words: व्युत्क्रम अनुपात का नियम बताता है कि जब दो तत्व एक तीसरे तत्व के निश्चित द्रव्यमान से संयोजित होते हैं, तो उन दोनों तत्वों के द्रव्यमान का अनुपात या तो वही होता है या उस अनुपात का एक सरल गुणक होता है जिसमें वे आपस में संयोजित होते हैं।
🎯 Exam Tip: व्युत्क्रम अनुपात के नियम को स्पष्ट करने के लिए तीन तत्वों (जैसे C, S, O) और उनसे बनने वाले यौगिकों (CO2, SO2, CS2) के द्रव्यमान अनुपातों की तुलना करें।
Question 9. गै-लुसैक के नियम को एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।
Answer: इस नियम के अनुसार, “जब दो गैसें परस्पर संयोग या रासायनिक अभिक्रिया करती हैं, तो समान ताप व दाब पर अभिकारक तथा उत्पाद गैसों के आयतन सरल अनुपात में होते हैं।'
उदाहरणार्थ -एक आयतन हाइड्रोजन (H2), एक आयतन क्लोरीन (Cl2) के साथ संयोग करके 2 आयतन हाइड्रोजन क्लोराइड गैस (HCI) देती है।
अतः अभिकारक तथा उत्पाद गैसों का अनुपात 1: 1 : 2 है।
In simple words: गै-लुसैक का नियम कहता है कि रासायनिक अभिक्रियाओं में, समान ताप और दाब पर गैसीय अभिकारकों और उत्पादों के आयतन हमेशा एक सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं, जैसे हाइड्रोजन और क्लोरीन मिलकर हाइड्रोजन क्लोराइड बनाते हैं (1:1:2 का आयतन अनुपात)।
🎯 Exam Tip: गै-लुसैक के नियम को समझने के लिए गैसीय अभिक्रियाओं के आयतन अनुपातों पर ध्यान दें, विशेष रूप से समान ताप और दाब की शर्तों पर।
Question 10. 42.47 ग्राम सिल्वर नाइट्रेट प्रति लीटर वाले विलयन के 10 मिली से कितने ग्राम सिल्वर क्लोराइड प्राप्त होगी? (Ag = 108, N=14, O = 16, CI= 35.5, H = 1)
Answer: अभिक्रिया समीकरण निम्नवत् है
AgNO3 + HCl \( \implies \) AgCl + HNO3
108+14+48=170 ग्राम 108+35.5= 143.5 ग्राम
\(\therefore\) 1000 मिली विलयन में AgNO3 की मात्रा = 42.47 ग्राम
\(\therefore\) 10 मिली विलयन में AgNO3 की मात्रा \( = \frac{42.47 \times 10}{1000} = 0.4247\) ग्राम
उपर्युक्त अभिक्रिया समीकरण से,
\(\therefore\) 170 ग्राम AgNO3 से प्राप्त AgCl = 143.5 ग्राम
\(\therefore\) 0.4247 ग्राम AgNO3 से प्राप्त AgCl \( = \frac{143.5 \times 0.4247}{170} = 0.3585\) ग्राम
In simple words: सिल्वर नाइट्रेट और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से सिल्वर क्लोराइड बनता है; विलयन की सांद्रता का उपयोग करके सिल्वर नाइट्रेट की मात्रा ज्ञात की जाती है, फिर स्टॉइकियोमीट्री से प्राप्त सिल्वर क्लोराइड की मात्रा निकाली जाती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की गणनाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण, मोलर द्रव्यमान, और सांद्रता की अवधारणाओं को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 11. सामान्य ताप एवं दाब पर 2.4 लीटर ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए कितना KCIO3 आवश्यक है? (K= 39, CI= 35.5)
Answer: KCIO3 को गर्म करने पर O2 गैस तथा KCI प्राप्त होता है
2KClO3 \( \xrightarrow{\Delta} \) 2KCl + 3O2
2(39+35.5+48) = 245 ग्राम
3 \(\times\) 22.4 = 67.2 लीटर
67.2 लीटर O2 प्राप्त होती है = 245 ग्राम KCIO3 से
\(\therefore\) 2.4 लीटर O2 प्राप्त होगी \( = \frac{245 \times 2.4}{67.2} = 3.75\) ग्राम KCIO3 से
In simple words: ऑक्सीजन गैस की आवश्यक मात्रा प्राप्त करने के लिए, पहले KClOx का मोलर द्रव्यमान और ऑक्सीजन के आयतन के बीच स्टॉइकियोमीट्रिक संबंध का उपयोग करके आवश्यक KClOx की द्रव्यमान की गणना की जाती है।
🎯 Exam Tip: गैसों के आयतन (STP पर 22.4 लीटर/मोल) और स्टॉइकियोमीट्रिक गणनाओं का सही उपयोग करें।
Question 12. 1.7 ग्राम अमोनिया (अणुभार = 17) में मोलों और अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: NH3 के मोलों की संख्या \( = \frac{1.7}{17} = 0.1\) मोल NH3
\(\therefore\) 1 मोल NH3 में NH3 के अणुओं की संख्या \( = 6.023 \times 10^{23}\) NH3 अणु
\(\therefore\) 0.1 मोल NH3 में NH3 के अणुओं की संख्या \( = 0.1 \times 6.023 \times 10^{23}\)
\( = 6.023 \times 10^{22}\) NH3 अणु
In simple words: 1.7 ग्राम अमोनिया में, उसके मोलर द्रव्यमान (17) से भाग देकर मोलों की संख्या 0.1 मोल प्राप्त होती है, और इस 0.1 मोल में अणुओं की संख्या 0.1 को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करने पर 6.023 x 1022 अणु होती है।
🎯 Exam Tip: किसी भी पदार्थ के मोलों और अणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए मोलर द्रव्यमान और आवोगाद्रो संख्या का सही अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है।
Question 13. 1 ग्राम हीलियम (He) में परमाणुओं की संख्या और NTP पर आयतन की गणना कीजिए।
Answer: He के मोलों की संख्या \( = \frac{\text{भार}}{\text{परमाणु भार}} = \frac{1}{4} = 0.25\) मोल He
\(\therefore\) 1 मोल He में परमाणुओं की संख्या \( = 6.023 \times 10^{23}\) He परमाणु
\(\therefore\) 0.25 मोल He में परमाणुओं की संख्या \( = 0.25 \times 6.023 \times 10^{23}\) He परमाणु
\( = 1.5057 \times 10^{23}\) He परमाणु
\(\therefore\) 1 मोल He का NTP पर आयतन = 22.4 लीटर
\(\therefore\) 0.25 मोल He का NTP पर आयतन \( = 22.4 \times 0.25 = 5.6\) लीटर
In simple words: 1 ग्राम हीलियम में, मोलों की संख्या 0.25 मोल होती है, जिसमें 1.5057 x 1023 परमाणु होते हैं, और NTP पर इसका आयतन 5.6 लीटर होता है।
🎯 Exam Tip: मोल अवधारणा का उपयोग करके द्रव्यमान, परमाणुओं की संख्या और NTP पर गैसों के आयतन के बीच संबंध को समझने में दक्षता प्राप्त करें।
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. मानव जीवन में रसायन विज्ञान के महत्व एवं विस्तार का वर्णन कीजिए।
Answer: आधुनिक जीवन में रसायन विज्ञान का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह लगभग सभी क्षेत्रों में मानव-समाज की सेवा कर रहा है और मानव जीवन को सुखी, स्वस्थ, सुरक्षित एवं समृद्ध बना रहा है। राष्ट्रीय अर्थ-व्यवस्था में भी रसायन विज्ञान का महत्त्वपूर्ण योगदान है। देश की विकास योजनाओं की सफलत बहुत कुछ रसायन-विज्ञान के अनुप्रयोग पर निर्भर करती है। सभी लघु और बड़े उद्योगों में रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता पड़ती है। अम्ल, क्षार और लवणों का उपयोग धातु-निष्कर्षण, धातु-शोधन, पेट्रोलियम शोधन तथा काँच, साबुन, कागज, कपड़ा, उर्वरक, विस्फोटक, रंजक, औषधियों आदि के उत्पादन में होता है। सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, अमोनिया, कॉस्टिक सोडा और क्लोरीन उद्योगों के स्तम्भ हैं। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, जिंक, निकिल आदि धातुओं, पीतल तथा स्टील अनेक प्रकार की मिश्र-धातुओं का उपयोग उद्योग-धन्धों और दैनिक जीवन की अनेकों वस्तुएँ बनाने में होता है। प्लास्टिक, टेफ्लॉन, पॉलिथीन, कृत्रिम रबर व अन्य बउत्तरकों से अनेक प्रकार की उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। कृत्रिम रेशम, ऊन तथा धागों से वस्त्र बनाए जाते हैं।
कीटनाशी, पीड़कनाशी आदि रसायन फसल की रक्षा करते हैं। औषधियाँ स्वास्थ्य तथा जीवन की रक्षा करती हैं। तेल, वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लवण और विटामिन हमारे भोजन के आवश्यक अंग हैं। संक्षेप में रसायन विज्ञान के महत्त्व को निम्नवत् स्पष्ट किया जा सकता है-
1. कृषि : उर्वरक, कीटनाशी, पीड़कनाशी आदि।
2. वस्त्र : कृत्रिम रेशम, ऊन, कृत्रिम धागे आदि।
3. भवन और सड़क-निर्माण : सीमेन्ट, स्टील, टार आदि।
4. स्वास्थ्य तथा जीवन : औषधियाँ, विटामिन्स, प्रति जैविक आदि।
5. ईंधन : पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन, सी०एन०जी०, गैसीय ईंधन, एल०पी०जी आदि।
6. उद्योग :, सीमेन्ट, काँच, वस्त्र, पेन्ट, रबर, प्लास्टिक, चमड़ा, स्टील, चीनी, उर्वरक आदि। लगभग सभी उद्योगों में विभिन्न रसायनों का उपयोग होता है।
7. युद्ध सामग्री : विस्फोटक ।
8. शक्ति-उत्पादन : परमाणु ऊर्जा, बैटरी, शुष्क सेल, आदि।
9. धातुकर्म : धातु-निष्कर्षण, धातु-शोधन, मिश्र-धातुएँ आदि।
10. मनोरंजन : फोटो फिल्म, फोटोग्राफी, सिनेमा, रंगीन फिल्म, टेप, सीडी आदि।
11. सुन्दरता के प्रसाधन : तेल, इत्र, क्रीम, पाउडर, लिपस्टिक, नेल पॉलिश, साबुन, शैम्पू आदि।
12. निर्मलक : साबुन, अपमार्जक, कार्बनिक विलायक आदि।
13. खाद्य : खाद्य परिरक्षक, कृत्रिम मधुरक आदि।
14. प्रशीतन और वातानुकूलन: प्रशीतक, फ्रेऑन आदि।
In simple words: रसायन विज्ञान मानव जीवन के लगभग हर पहलू में महत्वपूर्ण है, कृषि से स्वास्थ्य, ऊर्जा उत्पादन से लेकर निर्माण और दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक, यह विभिन्न उद्योगों और प्रौद्योगिकियों को चलाने वाले मूल पदार्थों और प्रक्रियाओं को प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: रसायन विज्ञान के महत्व का वर्णन करते समय, विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग, आदि) से विशिष्ट उदाहरण प्रदान करें और समझाएं कि रसायन विज्ञान कैसे आधुनिक जीवन को प्रभावित करता है।
Question 2. डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त क्या है? इसके प्रमुख बिन्दु लिखिए। इसके दोषों का भी वर्णन कीजिए।
Answer: डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त-एक अंग्रेज अध्यापक जॉन डाल्टन ने सन् 1808 में द्रव्य की रचना के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जिसे डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त कहते हैं। इस परमाणु सिद्धान्त के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं-
1. द्रव्य अत्यन्त सूक्ष्म अविभाज्य कणों का बना होता है जिन्हें परमाणु (atoms) कहते हैं।
2. एक ही तत्त्व के परमाणु सभी प्रकार से समान होते हैं अर्थात् उनका भार, आकृति आदि समान होते हैं।
3. विभिन्न तत्त्वों के परमाणुओं के आकार, भार, रासायनिक गुण आदि भिन्न-भिन्न होते हैं ।
4. परमाणु न तो नष्ट किए जा सकते हैं और न ही उत्पन्न अर्थात् ये अविनाशी होते हैं।
5. एक परमाणु वह सूक्ष्मतम कण है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है अर्थात् पूर्ण परमाणु न कि उनके भिन्न (fractions) रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं।
6. एक ही अथवा विभिन्न तत्त्वों के परमाणु संयुक्त होकर यौगिक परमाणु (compound atoms) बनाते हैं जिन्हें अब अणु (molecules) कहा जाता है।
7. जब परमाणु संयुक्त होकर यौगिक परमाणु बनाते हैं तो उनकी संख्याओं में सरल पूर्ण संख्या अनुपात (1 : 1, 1 : 2, 2 : 1, 2: 3) होता है।
8. दो तत्त्वों के परमाणु विभिन्न अनुपातों में संयोग करके एक से अधिक यौगिक बना सकते हैं। उदाहरणार्थ-सल्फर ऑक्सीजन से संयोग करके सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO) बनाता है जिनमें सल्फर और ऑक्सीजन का अनुपात क्रमशः 1:2 और 1: 3 होता है।
9. परमाणु रासायनिक परिवर्तन में अपनी निजी सत्ता (individuality) बनाए रखते हैं।
डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त के दोष डाल्टन के परमाणु सिद्धान्तं ने द्रव्य की आंतरिक रचना के बारे में काफी सटीक और सही जानकारी दी। साथ ही उससे रासायनिक संयोजन के नियमों की भी सही व्याख्या हुई परन्तु इस सिद्धान्त के कुछ दोष भी पाए गए जो निम्नवत् हैं-
1. यह बता नहीं सका कि विभिन्न तत्त्वों के परमाणु किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न होते हैं अर्थात् उसने परमाणु की आंतरिक संरचना के बारे में कुछ नहीं बताया।
2. यह गे-लुसैक के गैसीय आयतन के नियम की व्याख्या करने में असफल रहा।
3. यह स्पष्ट नहीं कर सका कि परमाणु क्यों और कैसे जुड़कर यौगिक परमाणु बनाते हैं।
4. यह अणु में परमाणुओं को बाँधे रखने वाले बल की प्रकृति के विषय में कुछ नहीं बता सका।
5. यह अभिक्रिया में भाग लेने वाले तत्त्व के मूल कण (परमाणु) और स्वतन्त्र अवस्था में पाए जा सकने वाले मूल कण (अणु) में विभेद नहीं कर सका।
In simple words: डाल्टन के परमाणु सिद्धांत ने कहा कि पदार्थ अविभाज्य परमाणुओं से बने हैं जो तत्वों के लिए समान हैं लेकिन विभिन्न तत्वों के लिए भिन्न हैं, और रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु संरक्षित रहते हैं; हालांकि, इसके दोषों में परमाणु की आंतरिक संरचना की व्याख्या करने में असमर्थता और गे-लुसैक के नियम की व्याख्या न करना शामिल था।
🎯 Exam Tip: डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के प्रमुख बिंदुओं और उसकी सीमाओं (दोषों) दोनों को समझना रसायन विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों की ऐतिहासिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. मोल संकल्पना का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
Answer: परमाणुओं के निरपेक्ष द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए यह अनिवार्य है कि हमें पदार्थ की निश्चित मात्रा में उपस्थित परमाणुओं अथवा अणुओं की संख्या ज्ञात हो । अध्ययन से यह पता चला है कि किसी भी तत्त्व के एक ग्राम परमाणु में समान संख्या में परमाणु होते हैं। इसी प्रकार किसी भी पदार्थ के एक ग्राम अणु में समान संख्या में अणु होते हैं। प्रयोगों द्वारा यह संख्या \(6.023 \times 10^{23}\) ज्ञात हुई है। इस संख्या को 'आवोगाद्रो संख्या' या 'आवोगाद्रो स्थिरांक' कहते हैं तथा इसे NA द्वारा प्रदर्शित करते। हैं। किसी पदार्थ की वह मात्रा जिसमें \(6.023 \times 10^{23}\) तात्विक कण पाये जाते हैं, एक मोल (mole) कहलाती है। दूसरे शब्दों में, एक मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही तात्विक कण पाये जाते हैं जितने कि कार्बन-12 के 12 g(0.012 kg) में होते हैं। 'मोल' पद का प्रयोग परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्रॉन आदि किसी के लिए भी किया जा सकता है। मोल परमाणुओं, अणुओं, आयनों आदि को गिनने का एक मात्रक है। जिस प्रकार एक दर्जन का तात्पर्य 12 वस्तुओं और एक स्कोर का तात्पर्य 20 वस्तुओं से है, ठीक उसी प्रकार मोल का तात्पर्य \(6.023 \times 10^{23}\) कणों से है। इसका कणों की प्रकृति से कोई सम्बन्ध नहीं है।
एक मोल \( = 6.023 \times 10^{23}\) कण
1 मोल हाइड्रोजन परमाणु \( = 6.023 \times 10^{23}\) हाइड्रोजन परमाणु
1 मोल ऑक्सीजन परमाणु \( = 6.023 \times 10^{23}\) ऑक्सीजन परमाणु
1 मोल नाइट्रोजन अणु \( = 6.023 \times 10^{23}\) नाइट्रोजन अणु
1 मोल क्लोराइड आयन \( = 6.023 \times 10^{23}\) क्लोराइड आयन
1 मोल सोडियम क्लोराइड = सोडियम क्लोराइड की \(6.023 \times 10^{23}\) सूत्र इकाइयाँ
1 मोल इलेक्ट्रॉन \( = 6.023 \times 10^{23}\) इलेक्ट्रॉन
1 मोल ऐल्फा कण \( = 6.023 \times 10^{23}\) ऐल्फा कण
किसी पदार्थ के एक मोल के ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान को उसका मोलर द्रव्यमान (molar mass) कहते हैं। परमाणुओं की स्थिति में यह ग्राम परमाणु द्रव्यमान (gram atomic mass) और अणुओं की स्थिति में यह ग्राम आणविक द्रव्यमान (gram molecular mass) के समान होता है। इसे हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि किसी तत्त्व के \(6.023 \times 10^{23}\) परमाणुओं का ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान उसके ग्राम परमाणु द्रव्यमान अथवा एक ग्राम परमाणु के समान होता है। इसी प्रकार किसी तत्त्व अथवा यौगिक के \(6.023 \times 10^{23}\) अणुओं का ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान उसके ग्राम आणविक द्रव्यमान अथवा एक ग्राम अणु के समान होता है।
उदाहरणार्थ-\(6.023 \times 10^{23}\) ऑक्सीजन परमाणुओं का द्रव्यमान = 16 g
\(6.023 \times 10^{23}\) ऑक्सीजन अणुओं का द्रव्यमान = 32 g
\(6.023 \times 10^{23}\) जल अणुओं का द्रव्यमान = 18 g
यदि पदार्थ परमाणवीय (atomic) है तो मोलर द्रव्यमान \(6.023 \times 10^{23}\) (आवोगाद्रो संख्या) परमाणुओं को द्रव्यमान होता है। ऐसे में हम मोलर द्रव्यमान को आवोगाद्रो संख्या से भाग देकर एक परमाणु का निरपेक्ष द्रव्यमान (absolute mass) ज्ञात कर सकते हैं। इसी प्रकार हम आणविक पदार्थों के एक अणु का निरपेक्ष द्रव्यमान भी ज्ञात कर सकते हैं।
In simple words: मोल संकल्पना आवोगाद्रो संख्या (\(6.023 \times 10^{23}\)) के बराबर कणों की मात्रा को परिभाषित करती है, जो कार्बन-12 के 12 ग्राम में मौजूद परमाणुओं की संख्या के बराबर है, जिससे द्रव्यमान को कणों की संख्या से संबंधित किया जाता है।
🎯 Exam Tip: मोल संकल्पना, आवोगाद्रो संख्या, और मोलर द्रव्यमान के बीच के संबंधों को पूरी तरह से समझना रासायनिक गणनाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Free study material for Chemistry
UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Chemistry textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Chemistry chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Chemistry Class 11 Solved Papers
Using our Chemistry solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Chemistry are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Chemistry concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Chemistry. You can access UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ बुनियादी अवधारणाएँ in printable PDF format for offline study on any device.