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Detailed Chapter 19 उत्सर्जी उत्पाद और उनका निष्कासन UP Board Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 19 उत्सर्जी उत्पाद और उनका निष्कासन UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 11 Biology Chapter 19 Excretory Products And Their Elimination (उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन)
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
Question 1. गुच्छीय निस्पंद दर (GFR) को परिभाषित कीजिए।
Answer: वृक्कों द्वारा प्रति मिनट निस्यंदित की गई मूत्र की मात्रा गुच्छीय नियंद दर (GFR) कहलाती है। एक स्वस्थ व्यक्ति में यह 125 ml/मिनट अथवा 180 ली प्रतिदिन होती है।
In simple words: Glomerular Filtration Rate (GFR) is the volume of fluid filtered by the kidneys per minute. A healthy individual's GFR is approximately 125 ml/minute or 180 liters per day.
🎯 Exam Tip: Remember the exact values for GFR (125 ml/min or 180 L/day) as they are frequently tested.
Question 2. गुच्छीय निस्पंद दर (GFR) की स्वनियमन क्रियाविधि को समझाइए।
Answer: गुच्छीय निस्पंद की दर के नियमन के लिए गुच्छीय आसन्न उपकरण द्वारा एक अति सूक्ष्म क्रियाविधि सम्पन्न की जाती है। यह विशेष संवेदी उपकरण अभिवाही तथा अपवाही धमनिकाओं के सम्पर्क स्थल पर दूरस्थ संकलित नलिका की कोशिकाओं में रूपान्तरण से बनता है। गुच्छ निस्यंदन दर में गिरावट इन आसन्न गुच्छ कोशिकाओं को रेनिन के स्रावण के लिए सक्रिय करती है जो वृक्कीय रक्त का प्रवाह बढ़ाकर गुच्छनियंद दर को पुनः सामान्य कर देती है।
In simple words: GFR is self-regulated by the juxtaglomerular apparatus (JGA), which releases renin when GFR falls. Renin increases renal blood flow, restoring GFR to normal levels.
🎯 Exam Tip: Focus on the role of the juxtaglomerular apparatus (JGA) and renin in GFR regulation.
Question 3. निम्नलिखित कथनों को सही अथवा गलत में इंगित कीजिए
(अ) मूत्रण प्रतिवर्ती क्रिया द्वारा होता है।
(ब) ए०डी०एच० मूत्र को अल्पपरासरणी बनाते हुए जल के निष्कासन में सहायक होता है।
(स) बोमेन संपुट में रक्त प्लाज्मा से प्रोटीन रहित तरल निस्पंदित होता है।
(द) हेनले लूप मूत्र के सांद्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(य) समीपस्थ संवलित नलिका (PCT) में ग्लूकोस सक्रिय रूप से पुनः अवशोषित होता है।
Answer:
(अ) सही
(ब) गलत
(स) सही
(द) सही
(य) सही
In simple words: Micturition is a reflex, ADH helps concentrate urine, Bowman's capsule filters protein-free fluid, Henle's loop concentrates urine, and glucose is actively reabsorbed in PCT.
🎯 Exam Tip: Understanding the function of each part of the nephron and hormonal influences on urine formation is key for these types of questions.
Question 4. प्रतिधारा क्रियाविधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
Answer:
प्रतिधारा क्रियाविधि
शरीर में जैल की कमी हो जाने पर वृक्क सान्द्र मूत्र उत्सर्जित करने लगते हैं। इसमें जल की मात्रा बहुत कम और उत्सर्जी पदार्थों की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। ऐसा मूत्र रक्त की तुलना में 4-5 गुना अधिक गाढ़ा हो सकता है। इसकी परासरणीयता 1200 से 1400 मिली ऑस्मोल/लीटर हो सकती है। मूत्र के सान्द्रण की प्रक्रिया में जक्स्टा मेडयूलरी (juxta medullary) वृक्क नलिकाओं की विशेष भूमिका हो जाती है; क्योंकि हेनले के लूप तथा परिजालिका केशिकाओं (वासा रेक्टा-vasa recta) के लूप पेल्विस तक फैले होते हैं। यह प्रक्रिया ADH के नियन्त्रण में तथा पिरैमिड्स के ऊतक द्रव्य में वल्कुट भाग से पेल्विस तक क्रमिक उच्च परासरणीयता बनाए रखने पर निर्भर करती है। वृक्कों के वल्कुट भाग में ऊतक तरल की परासरणीयता 300 मिली ऑस्मोल/लीटर जल होती है। मध्यांश (medulla) भाग के पिरेमिड्स में यह परासरणीयता क्रमशः बढ़कर पेल्विस तक 1200 से 1400 मिली ऑस्मोल/लीटर जल हो जाती है। ऊतक तरल की परासरणीयता मुख्यतः Na⁺ व CI¯ आयन तथा यूरिया पर निर्भर करती है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वृक्क के नेफ्रॉन में प्रतिधारा क्रियाविधि को दर्शाता है, जिसमें समीपस्थ नलिका, दूरस्थ नलिका, संग्रह नलिका, वासा रेक्टा और हेनले के लूप के विभिन्न भाग शामिल हैं। यह मध्यांश और वल्कुट के बीच परासरणीयता प्रवणता को दिखाता है, जो मूत्र को सांद्रित करने में मदद करती है, जहां आयनों (Na+, Cl-) और जल (H₂O) का विनिमय सांद्रता बढ़ाने के लिए होता है।
Na⁺, CI¯ आयन्स का परिवहन हेनले लूप की आरोही भुजा द्वारा होता है जिसका हेनले लुप की अवरोही भुजा के साथ विनिमय किया जाता है। सोडियम क्लोराइड ऊतक द्रव्य को वासा रेक्टा की आरोही भुजा द्वारा लौटा दिया जाता है। इसी प्रकार यूरिया की कुछ मात्रा हेनले लूप के सँकरे आरोही भाग में विसरण द्वारा पहुँचती है जो संग्रह नलिका द्वारा ऊतक द्रव्य को पुनः लौटा दी जाती है। हेनले लूप तथा वासो रेक्टा द्वारा इन पदार्थों के परिवहन को प्रतिधारा क्रियाविधि द्वारा सुगम बनाया जाता है। इसके फलस्वरूप मध्यांश के ऊतक द्रव्य की प्रवणता बनी रहती है। यह प्रवणता संग्रहनलिका द्वारा जल के अवशोषण में सहायता करती है और नियंद का सान्द्रण करती है। प्रतिधारा क्रियाविधि जल के ह्रास को रोकने की प्रमुख विधि है।
In simple words: The counter-current mechanism in the kidney concentrates urine by establishing an osmotic gradient in the renal medulla, primarily involving the loops of Henle and vasa recta, and regulated by ADH, leading to water reabsorption and concentrated urine formation.
🎯 Exam Tip: Be sure to explain the roles of the Loop of Henle, Vasa Recta, and collecting duct, and how the osmotic gradient is maintained.
Question 5. उत्सर्जन में यकृत, फुफ्फुस तथा त्वचा का महत्त्व बताइए।
Answer: मनुष्य तथा अन्य कशेरुकियों में वृक्क के अतिरिक्त यकृत, फुफ्फुस तथा त्वचा का उत्सर्जन में महत्त्व है। ये सहायक उत्सर्जी अंगों की तरह कार्य करते हैं।
(i) यकृत (Liver) : यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है। यूरिया अमोनिया की तुलना में कम हानिकारक होता है। यकृत कोशिकाएँ हीमोग्लोबिन के विखण्डन से पित्त वर्णक बिलिरुबिन (bilirubin), बिलिवर्डिन (biliverdin) बनाती हैं। इसके अतिरिक्त पित्त में उत्सर्जी पदार्थ कोलेस्टेरॉल (cholesterol), कुछ निम्नीकृत स्टीरॉयड हॉर्मोन्स, औषधियाँ आदि होती हैं। ये उत्सर्जी पदार्थ यकृत के पित्त द्वारा ग्रहणी में पहुँच जाते हैं और मल के साथ शरीर से त्याग दिए जाते हैं।
(ii) फुफ्फुस (Lungs) :
श्वसन क्रिया के फलस्वरूप मुक्त CO2 (18 L/day) एवं जलवाष्प फेफड़ों (फुफ्फुस) द्वारा शरीर से निष्कासित होती है।
(iii) त्वचा (Skin) : जलीय प्राणियों में अमोर्निया का उत्सर्जन त्वचा द्वारा होता है। स्थलीय जन्तुओं, में त्वचा की स्वेद ग्रन्थियों (sweat glands) द्वारा जल, खनिज तथा सूक्ष्म मात्रा में यूरिया, लैक्टिक अम्ल आदि पसीने के रूप में उत्सर्जित होता है। त्वचा की तेल ग्रन्थियाँ (oil glands) सीबम (sebum) के साथ कुछ हाइड्रोकार्बन्स, मोम (wax), स्टेरॉल (sterol), वसीय अम्ल (fatty acids) आदि उत्सर्जित होते हैं।
In simple words: Liver converts ammonia to urea and excretes bile pigments; lungs remove CO2 and water vapor; skin excretes water, salts, urea, and other substances through sweat and sebum.
🎯 Exam Tip: Clearly list the specific excretory products handled by each accessory excretory organ (liver, lungs, skin).
Question 6. मूत्रण की व्याख्या कीजिए।
Answer: मृत्रण मूत्र वृक्क में बनकर मूत्राशय में एकत्र होता रहता है। सामान्यतः अन्तःमूत्रीय तथा बाह्यमूत्रीय संकोचक पेशियों के संकुचन के कारण मूत्रमार्ग बन्द रहता है। मूत्राशय से मूत्र त्याग तभी होता है जब मूत्रमार्ग की दोनों प्रकार की संकोचक पेशियाँ शिथिल हो जाएँ। अन्तःमूत्रीय संकोचक में अरेखित पेशी तथा बाह्य मूत्रीय संकोचक में रेखित पेशी तन्तु होते हैं, इसलिए अन्तःमूत्रीय संकोचक का शिथिलन स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के नियन्त्रण में होने वाली अनैच्छिक और बाह्य मूत्रीय पेशियों का शिथिलन एक ऐच्छिक प्रतिक्रिया होती है। मूत्रण वास्तव में अनैच्छिक तथा ऐच्छिक प्रतिक्रियाओं के सहप्रभाव से होता है। ऐच्छिक नियन्त्रण के कारण हम इच्छानुसार मूत्र त्याग करते हैं।
In simple words: Micturition is the process of urinating, involving the collection of urine in the bladder and its controlled release through the relaxation of internal (involuntary) and external (voluntary) urethral sphincters, mediated by a reflex.
🎯 Exam Tip: Highlight the distinction between voluntary and involuntary control over micturition, involving both smooth and skeletal muscles.
Question 7. स्तम्भ । के बिन्दुओं का खण्ड स्तम्भ II से मिलान कीजिए
स्तम्भ । - स्तम्भ ||
(i) अमोनियोत्सर्जन - (स) अस्थिल मछलियाँ
(ii) बोमेन सम्पुट - (य) वृक्क नलिका
(iii) मूत्रण - (द) मूत्राशय
(iv) यूरिक अम्ल उत्सर्जन - (अ) पक्षी
(v) ए०डी०एच० - (ब) जल का पुनः अवशोषण
Answer:
(i) अमोनियोत्सर्जन - (स) अस्थिल मछलियाँ
(ii) बोमेन सम्पुट - (य) वृक्क नलिका
(iii) मूत्रण - (द) मूत्राशय
(iv) यूरिक अम्ल उत्सर्जन - (अ) पक्षी
(v) ए०डी०एच० - (ब) जल का पुनः अवशोषण
In simple words: This matching exercise connects different excretory processes or organs with their corresponding functions or characteristic organisms.
🎯 Exam Tip: Knowing the primary excretory product of different animal groups and the functions of key renal structures is crucial for matching questions.
Question 8. परासरण नियमन का अर्थ बताइए ।
Answer: परासरण नियमन वृक्क शरीर से हानिकारक पदार्थों को मूत्र के रूप में शरीर से निरन्तर बाहर निकालते रहते हैं। इसके अतिरिक्त ऊतक तरल में लवणों और जल की मात्रा का नियन्त्रण भी करते हैं। शरीर में जल की मात्रा के बढ़ जाने अर्थात् शरीर के तरल की परासरणीयता (osmotality) के कम हो जाने पर मूत्र पतला (तनु) हो जाता है और उसकी मात्रा बढ़ जाती है। शरीर में जल की कमी होने पर अर्थात् शरीर के ऊतक तरल की परासरणीयता के बढ़ जाने पर मूत्र गाढ़ा हो जाता है और इसकी मात्रा कम हो जाती है। मूत्र की मात्रा का नियन्त्रण मुख्यतः ऐल्डोस्टेरॉन (aldosterone) तथा एण्टीडाइयूरेटिक (antidiuretic hormone, ADH) द्वारा होता है। ऐल्डोस्टेरॉन Na⁺ के पुनरावशोषण को बढ़ाता है, जिससे अन्तःवातावरण में Na⁺ की उपयुक्त मात्रा बनी रहे। एण्टीडाइयूरेटिक (ADH) या वैसोप्रेसिन (vasopressin) मूत्र के तनुकरण या सान्द्रण का प्रमुख नियन्त्रक होता है। परासरण नियमन प्रक्रिया द्वारा जीवधारी के शरीर में परासरणीयता (osmotality) को नियन्त्रित रखा जाता है।
In simple words: Osmoregulation is the process of maintaining the constant osmotic pressure of the body fluids by controlling water and salt balance, primarily managed by the kidneys and hormones like ADH and aldosterone.
🎯 Exam Tip: Understand the roles of ADH (vasopressin) and aldosterone in regulating water and sodium reabsorption, respectively, and how they affect urine concentration.
Question 9. स्थलीय प्राणी सामान्यतया यूरिया उत्सर्जी या यूरिक अम्ल उत्सर्जी होते हैं तथा अमोनिया उत्सर्जी नहीं होते हैं, क्यों?
Answer: प्रोटीन्स के पाचन के फलस्वरूप ऐमीनो अम्ल प्राप्त होते हैं। जीवधारी आवश्यकता से अधिक ऐमीनो अम्लों का विअमोनीकरण या अमीनोहरण (deamination) करते हैं। इससे कीटो समूह (Keto group) एवं ऐमीनो समूह से अमोनिया (ammonia) प्राप्त होती है। कीटो समूह का उपयोग अपचय (catabolism) के अन्तर्गत ऊर्जा उत्पादन में हो जाता है। अमोनिया को जलीय जन्तुओं में उत्सर्जित कर दिया जाता है। यह जल में घुलनशील और विषैली होती है। इसको उत्सर्जित करने के लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है। इसी कारण अमोनिया जलीय प्राणियों का मुख्य उत्सर्जी पदार्थ है। अमोनिया उत्सर्जी स्थलीय जन्तुओं में अमोनिया को यकृत द्वारा यूरिया में बदल दिया जाता है। यूरिया जल में घुलनशील और अमोनिया की तुलना में बहुत कम विषैला या हानिकारक होता है। अतः अधिकांश स्थलीय जन्तु यूरिया उत्सर्जी (ureotelic) होते हैं। जैसे-अनेक उभयचर तथा स्तनी प्राणी।। शुष्क परिस्थितियों में रहने वाले जन्तु; जैसे- सरीसृप एवं पक्षी वर्ग के सदस्यों में जल की कमी बनी रहती है। जल संचय के लिए ये प्राणी यूरिया को यूरिक अम्ल (uric acid) के रूप में उत्सर्जित करते हैं। यूरिक अम्ल जल में अघुलनशील होता है। यह विषैला नहीं होता। इसे मल के साथ त्याग दिया जाता है। सरीसृप, पक्षी, कीट आदि यूरिक अम्ल उत्सर्जी (uricotelic) होते हैं।
In simple words: Terrestrial animals convert highly toxic ammonia to less toxic urea or insoluble uric acid to conserve water, as ammonia excretion requires large amounts of water which is scarce on land.
🎯 Exam Tip: Focus on the toxicity levels and water requirements for excreting ammonia, urea, and uric acid, and relate them to the habitat (aquatic vs. terrestrial) of the organisms.
Question 10. वृक्क के कार्य में जक्सटा गुच्छ उपकरण (JGA) का क्या महत्त्व है?
Answer: जक्सटा गुच्छ उपकरण (Juxta glomerular apparatus, JGA) की उत्सर्जन में जटिल नियमनकारी भूमिका है। JGA की विशिष्ट कोशिकाएँ केशिकागुच्छ नियंदन का स्वनियमन स्वयं वृक्क द्वारा उत्पन्न दाबक क्रियाविधि (renal pressure mechanism) की उपस्थिति के कारण होता है। इसकी खोज टाइगरस्टीट और बर्गमन (Tigersteat and Bergman) ने की। JGA की विशिष्ट कोशिकाओं से रेनिन हॉर्मोन स्रावित होता है। Na⁺ की कम सान्द्रता या निम्न केशिकागुच्छ निस्पंदन दर या निम्न केशिकागुच्छ दाब (glomerular pressure) के कारण रेनिन रक्त में उपस्थित एन्जियोटेंसिनोजन (angiotensinogen) को एन्जियोटेन्सिन-I (angiotensin-I) और बाद में एन्जियोटेन्सिन-II (angiotensin-II) में बदलता है। एन्जियोटेन्सिन-II एक प्रभावकारी वाहिका संकीर्णक (vasoconstrictor) का कार्य करता है, जो गुच्छीय रुधिर दाब तथा जी०एफ०आर० (glomeruler filtration rate, GFR) को बढ़ा देता है। एन्जियोटेन्सिन-II अधिवृक्क वल्कुट को ऐल्डोस्टेरॉन (aldosterone) हॉर्मोन के स्रावण को प्रेरित करता है। ऐल्डोस्टेरॉन स्रावी नलिका के दूरस्थ भाग में Na⁺ तथा जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है। इससे रक्त दाब तथा जी०एफ०आर० में वृद्धि होती है। यह जटिल क्रियाविधि रेनिन एन्जियोटेन्सिन (renin angiotensin mechanism) कहलाती है।
In simple words: The Juxtaglomerular Apparatus (JGA) plays a crucial role in regulating GFR and blood pressure through the Renin-Angiotensin-Aldosterone System (RAAS), releasing renin in response to low GFR or Na+ levels.
🎯 Exam Tip: Detail the steps of the Renin-Angiotensin-Aldosterone System (RAAS) and the specific function of JGA cells in initiating this cascade.
Question 11. नाम का उल्लेख कीजिए
(अ) एक कशेरुकी जिसमें ज्वाला कोशिकाओं द्वारा उत्सर्जन होता है।
(ब) मनुष्य के वृक्क के वल्कुट के भाग जो मध्यांश के पिरामिड के बीच धंसे रहते हैं।
(स) हेनले लूप के समानान्तर उपस्थित केशिका का लूप ।
Answer:
(अ) सेफेलोकॉडेंट (एम्फीऑक्सस)
(ब) बर्टिनी के स्तम्भ
(स) वासा रेक्टा ।
In simple words: Amphioxus uses flame cells for excretion, columns of Bertini are cortical extensions in the medulla, and vasa recta are capillaries parallel to Henle's loop.
🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with specific anatomical structures and their functions across different organisms relevant to excretion.
Question 12. रिक्त स्थान भरिए
(अ) हेनले लूप की आरोही भुजा जल के लिए............... जबकि अवरोही भुजा इसके लिए है।
(ब) वृक्क नलिका के दूरस्थ भाग द्वारा जल का पुनरावशोषण............... हार्मोन द्वारा होता है।
(स) अपोहन द्रव में............... पदार्थ के अलावा रक्त प्लाज्मा के अन्य सभी पदार्थ उपस्थित होते हैं।
(द) एक स्वस्थ वयस्क मनुष्य द्वारा औसतन ग्राम यूरिया का प्रतिदिन उत्सर्जन होता
Answer:
(अ) अपारगम्य, पारगम्य
(ब) ADH
(स) नाइट्रोजनी व्यर्थ
(द) 25-30
In simple words: The ascending limb of Henle's loop is impermeable to water, ADH regulates water reabsorption in the distal tubule, dialysis fluid contains all plasma substances except nitrogenous waste, and healthy adults excrete 25-30 grams of urea daily.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the permeability characteristics of different nephron segments and the hormonal control of water balance.
परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. अमोनिया से यूरिया का संश्लेषण कहाँ होता है?
(क) वृक्क में
(ख) रुधिर में
(ग) वृक्क नलिकाओं में
(घ) यकृत में
Answer: (घ) यकृत में
In simple words: The liver is the primary organ responsible for synthesizing urea from ammonia through the urea cycle.
🎯 Exam Tip: Remember that the liver is central to detoxification and metabolic conversions, including the urea cycle.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. केशिकागुच्छ कहाँ पाये जाते हैं? इनका प्रमुख कार्य क्या है?
Answer: केशिकागुच्छ बोमैन सम्पुट के मध्य स्थित होते हैं। यह रक्त केशिकाओं से बना जाल होता है। इसमें परानिस्यन्दन की क्रिया होती है। इसके फलस्वरूप ग्लोमेरुलर निस्यन्दन बनता है।
In simple words: Glomeruli are networks of capillaries located within Bowman's capsule, where ultrafiltration of blood occurs to form the glomerular filtrate.
🎯 Exam Tip: Focus on the location (Bowman's capsule) and primary function (ultrafiltration) of the glomerulus.
Question 2. ग्लोमेरुलस का एक प्रमुख कार्य लिखिए ।
Answer: ग्लोमेरुलस (glomerulus) में मूत्र निर्माण की परानिस्यन्दन (ultrafiltration) क्रिया सम्पन्न होती है।
In simple words: The main function of the glomerulus is ultrafiltration, which is the initial step in urine formation.
🎯 Exam Tip: The key takeaway is that the glomerulus is the site of the first step of urine formation, i.e., ultrafiltration.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. बहिःक्षेपण तथा उत्सर्जन में अन्तर लिखिए।
Answer:
बहिःक्षेपण व उत्सर्जन के बीच अन्तर
| बहिःक्षेपण/मल परित्याग | उत्सर्जन |
|---|---|
| • यह अपचित भोजन या मल पदार्थ का निष्कासन है। | • यह उपापचित अपशिष्ट उत्पादों व अतिरिक्त उपापचित पदार्थ का निष्कासन है। |
| • मल परित्याग के पदार्थ अधिकतर सेल्यूलोज, मृत सूक्ष्म-जीवधारियों व पाचन से बचे उत्पाद होते हैं। | • उत्सर्जी उत्पाद अधिकतर खनिज लवणों, वर्णकों, औषधियों तथा नाइट्रोजन युक्त होते हैं। |
| • बहिःक्षेपण अर्द्धठोस रूप में होता है। | • यह अधिकांश जन्तुओं में विलयन रूप में व सरीसृप, पक्षी व कुछ आर्थोपोडा में ठोस रूप में निष्कासित होता है। |
| • यह पाचन तन्त्र का घटक है। | • यह उत्सर्जन या मूत्र सम्बन्धी तन्त्र का घटक है। |
| • मल परित्याग गुदा या अवस्कर द्वार द्वारा होता है। | • उत्सर्जन मूत्र सम्बन्धी छिद्र, अवस्कर, स्वेद छिद्रों आदि द्वारा होता है। |
In simple words: Egestion is the removal of undigested food (feces) from the digestive tract, while excretion is the removal of metabolic waste products from the body fluids.
🎯 Exam Tip: Distinguish clearly between indigestible matter (egestion) and cellular metabolic waste (excretion) for full marks.
Question 2. एमनिओटेलिज्म से आप क्या समझते हैं? यह किन जीवों में होता है? इसमें भाग लेने वाले अंगों की कार्यविधि लिखिए ।
Answer: कुछ जीव विलेयशील अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं ऐसे जीव अमोनोटेलिक तथा यह प्रक्रिया एमनिओटेलिज्म कहलाती है। इस प्रक्रिया में यकृत की कोशिकाएँ डीएमीनेशन की क्रिया में अमीनो अम्लों को अपघटित करके अमोनिया बनाती हैं, जिसका सीधे ही उत्सर्जन हो जाता है। अमोनोटेलिक जन्तुओं के अन्तर्गत प्रोटोजोअन, क्रस्टेशियन, प्लेटीहेल्मिन्थीस, नीडेरियन, पोरीफेरन्स, इकाइनोडर्स तथा अन्य जलीय अकशेरुकीय जीव सम्मिलित होते हैं। इन जन्तुओं में अमोनिया का उत्सर्जन त्वचा, जल-क्लोम अथवा वृक्कों द्वारा होता है।
In simple words: Ammonotelism is the excretion of ammonia as the primary nitrogenous waste product, mainly seen in aquatic organisms like protozoans, crustaceans, and bony fish, where ammonia is released through the body surface, gills, or kidneys.
🎯 Exam Tip: Emphasize that ammonotelism is typical for aquatic animals due to ammonia's high toxicity and solubility, requiring ample water for dilution.
Question 3. मनुष्य के एक प्रारूपी वृक्क (नेफ्रॉन) का सम्पूर्ण पृष्ठीय, स्पष्ट, भली-भाँति नामांकित आरेखी चित्र खीचिए (वर्णन अनापेक्षित)। या मनुष्य की वृक्क नलिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए ।
Answer:
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मनुष्य के वृक्क नलिका (नेफ्रॉन) की संरचना को दर्शाता है, जिसमें डिस्टल कनवोल्यूटेड ट्यूबुल, प्रोक्सिमल कनवोल्यूटेड ट्यूबुल, बोमैन कैप्सूल, मैल्पीघियन कॉर्पसकल, रेनल कैप्सूल, पेरिट्यूबुलर कैपिलरी नेटवर्क, हेनले के लूप की आरोही और अवरोही भुजाएँ, संग्रह नलिका, और गुच्छिका शामिल हैं। यह विभिन्न भागों के माध्यम से रक्त प्रवाह और निस्पंदन को स्पष्ट रूप से चित्रित करता है।
In simple words: A typical nephron diagram shows the Bowman's capsule, glomerulus, proximal and distal convoluted tubules, and the loop of Henle, highlighting the structural components involved in urine formation.
🎯 Exam Tip: Practice drawing and labeling all parts of a nephron accurately, including afferent/efferent arterioles, glomerulus, Bowman's capsule, PCT, Loop of Henle, DCT, and collecting duct.
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. उत्सर्जन किसे कहते हैं? जन्तुओं के मुख्य उत्सर्जी उत्पाद क्या है? उत्सर्जन क्यों आवश्यक है? मानव में मूत्र निर्माण की क्रियाविधि को समझाइए। “या अमोनोटेलिक उत्सर्जन किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए। या अमोनिया उत्सर्गी, यूरिक अम्ल उत्सर्गी तथा यूरिया उत्सर्गी प्राणियों से आप क्या समझते हैं? मानव वृक्क में मूत्र निर्माण का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer:
[संकेत-उत्सर्जन की परिभाषा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 2 के उत्तर में देखें ।]
जन्तुओं के मुख्य उत्सर्जी उत्पाद
1. अमीनो अम्ल (Amino Acids) : ये प्रोटीन के निम्नीकरण से बनते हैं। कुछ जन्तुओं में इनका सीधे ही उत्सर्जन हो जाता है।
2. अमोनिया (Ammonia) : यकृत की कोशिकाएँ डीएमीनेशन (deamination) की क्रिया में अमीनो अम्लों को अपघटित करके अमोनिया बनाती हैं। यह काफी विषैला पदार्थ है। ऐसे जन्तुओं को अमोनिया उत्सर्गी (ammonotelic) कहते हैं। इन जन्तुओं में अमोनिया का सीधे ही उत्सर्जन हो जाता है।
उदाहरणार्थ : अलवेणजलीय मछलियाँ।
3. यूरिया (Urea) : यकृत कोशिकाएँ अमीनो अम्लों के अपघटन से प्राप्त अमोनिया को अपेक्षाकृत कम विषैले यूरिया में बदलती हैं। यूरियो जल में विलेय होता है। अतः मूत्र के रूप में इसका उत्सर्जन स्तनियों में प्रमुख रूप से होता है। ऐसे जन्तु यूरिया उत्सर्गी (ureotelic) कहलाते हैं।
4. यूरिक अम्ल (Uric Acids) : अनेक जन्तुओं में यह प्रमुख उत्सर्जी पदार्थ होता है; जैसे-छिपकलियों तथा पक्षियों में । यह भी कम विषैला पदार्थ है। अमोनिया से इसका निर्माण होता है। यह जल में अविलेय होता है। अतः ठोस रूप में इसका उत्सर्जन होता है। ऐसे जन्तुओं को यूरिक अम्ल उत्सर्गी (uricotelic) कहते हैं। मनुष्य में प्यूरीन्स के विखण्डन से भी यूरिक अम्ल का निर्माण होता है।
5. ट्राइमेथिल एमीन ऑक्साइड (Trimethyl Amine Oxide) : यह प्रमुखतः समुद्री जन्तुओं का उत्सर्जी पदार्थ होता है।
6. ग्वानीन (Guanine) : यह अघुलनशील है। कुछ जन्तुओं; जैसे-मकड़ियों, केचुओं आदि, में यह उत्सर्जी पदार्थ होता है।
7. अन्य उत्सर्जी पदार्थ : प्यूरीन (purine), हिप्यूरिक अम्ल (hippuric acid), ऑर्निथिक अम्ल (ornithic acid), क्रिएटिन (creatine), क्रिएटिनी (creatinine) आदि भी नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ हैं जिनकी कुछ मात्रा रुधिर में रहती है किन्तु अधिक मात्रा मूत्र या पसीने के रूप में शरीर से बाहरउत्सर्जित की जाती है।
8. एलेनीन (Alanine) : यह मनुष्य में पिरीमिडीन्स के अपघटन से बनता है।
उत्सर्जन की आवश्यकता
शरीर की कोशिकाओं में, उपापचय (metabolism) के फलस्वरूप, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जल, अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल, रंगाएँ, लवण आदि कई ऐसे अपजात या अपशिष्ट (waste) पदार्थ बनते रहते हैं जो शरीर के लिए अनावश्यक ही नहीं, वरन् हानिकारक भी होते हैं। अतः कोशिकाएँ इन्हें निरन्तर अपने बाह्यकोशिकीय द्रव्य में विसर्जित करती रहती हैं। फिर इन अपशिष्ट पदार्थों को शरीर के बाहरी वातावरण में विसर्जित कर दिया जाता है। इनमें से CO2 का विसर्जन मुख्यतः श्वसन-क्रिया के अन्तर्गत, गैसीय-विनिमय (gaseous exchange) में हो जाता है। शेष अपशिष्ट पदार्थों में मुख्यतः प्रोटीन-विघटन से व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं। इन सब पदार्थों को उत्सर्जी पदार्थ (excretory substances) कहते हैं। वातावरण में इनके विसर्जन को उत्सर्जन (excretion) कहते हैं। क्योकि उत्सर्जी पदार्थों का विसर्जन जल में घुली अवस्था में होता है, जल सन्तुलन अर्थात् परासरण नियन्त्रण-osmoregulation) भी उत्सर्जन का महत्त्वपूर्ण पहलू होता है।
मानव में मूत्र निर्माण की क्रियाविधि
[संकेत-उत्तर के लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 का उत्तर देखें ।]
In simple words: Excretion is the process of removing metabolic waste products and excess substances from the body, crucial for maintaining homeostasis and osmoregulation, with diverse forms of nitrogenous wastes like ammonia, urea, and uric acid excreted by different animals based on their habitat and water availability.
🎯 Exam Tip: For comprehensive answers, define excretion, list various excretory products with examples of animals, and explain the physiological need for excretion, linking it to osmoregulation.
Question 2. उत्सर्जन, परानिस्यन्दन, वरणात्मक पुनः अवशोषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। मानव मूत्र में सामान्यतया कौन-से घटक, कितनी प्रतिशत मात्रा में मौजूद रहते हैं? या मूत्र बनने की प्रक्रिया अथवा वृक्क नलिका में पुनरावशोषण की क्रिया को चित्र की सहायता से समझाइए। या उत्सर्जन किसे कहते हैं? किसी स्तनधारी की एक मूत्रजन नलिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए एवं इसकी कार्य-विधि भी समझाइए । या वरणात्मक पुनरावशोषण (selective reabsorption) किसे कहते हैं? मनुष्य में यह कहाँ व कैसे होता है? या वृक्क नलिका में पुनरावशोषण की क्रिया को चित्र की सहायता से समझाइए। या मूत्र का रासायनिक संघटन लिखिए। मानव वृक्क नलिका के वरणात्मक पुनरावशोषण को नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए। या परानिस्यन्दन एवं चयनात्मक पुनरावशोषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। या एक वृक्क नलिका की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए तथा परानिस्यन्दन एवं चयनात्मक पुनरावशोषण समझाइए । या मनुष्य की एक वृक्क नलिका का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा मूत्र निर्माण की क्रियाविधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए ।
Answer:
उत्सर्जन
प्रत्येक जीव में कोशिकीय उपापचयी क्रियाओं (metabolic activities) के फलस्वरूप कई प्रकार के अपशिष्ट उत्पाद (waste products) बनते हैं, जो उसके शरीर के लिये निरर्थक एवं हानिकारक होते हैं। इन अपशिष्ट उत्पादों को शरीर से निष्कासित करने की जैव-क्रिया को उत्सर्जन (excretion) कहते हैं। निम्न श्रेणी के अनेकानेक जन्तु अपशिष्ट पदार्थों को शरीर की सतह से विसरण द्वारा उत्सर्जित करते हैं। अनेक उच्च श्रेणी के अकशेरुकी तथा कशेरुकी प्राणियों में इन अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के लिए विशिष्ट अंग पाये जाते हैं, जो सम्मिलित रूप से सम्बन्धित प्राणि में उत्सर्जन तन्त्र (excretory system) का निर्माण करते हैं।
मूत्र निर्माण : क्रिया-विधि
मूत्र निर्माण वृक्क नलिकाओं में होता है। मूत्र निर्माण की सम्पूर्ण क्रिया निम्नलिखित तीन चरणों में पूर्ण होती है
1. परानिस्यन्दन
2. वरणात्मक या चयनात्मक पुनरावशोषण
3. स्रावण
1. परानिस्यन्दन वृक्कों में रुधिर परिसंचरण शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा काफी अधिक होता है । प्रत्येक वृक्क नलिका का सम्बन्ध दो प्रकार के रुधिर केशिकीय जालों (blood capillary networks) से होता है
1. बोमैन सम्पुट में स्थित ग्लोमेरुलस एक चौड़ी अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) द्वारा बनता है।
2. परिनलिका केशिका जाल (peritubular capillary network) ग्लोमेरुलस से आने वाली एक अपवाही धमनिका (efferent arteriole) द्वारा बनता है।
अपवाही धमनिका अपेक्षाकृत सँकरी होती है; अतः ग्लोमेरुलस से रुधिर का निष्कासन अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है। ग्लोमेरुलस में रुधिर को उच्च दाब (लगभग 60 mm. Hg) बना रहता है। इसका पुरिणाम यह होता है कि ग्लोमेरुलस की कोशिकाओं की पतली भित्ति से तरल प्लाज्मा छनकर बाहर आता रहता है। ग्लोमेरुलस के साथ बोमैन सम्पुट की महीन व छिद्रिले (perforated) भित्ति, जो पोडोसाइट्स कोशिकाओं (podocytes cells) की बनी होती है, एक अधिक पारगम्य ग्लोमेरुलर कला (glomerular membrane) का निर्माण करती है। ग्लोमेरुलस की रुधिर केशिकाओं से प्लाज्मा इस कला के द्वारा छनकर ही बोमैन सम्पुट में पहुँच पाता है। इस तरल को ग्लोमेरुलर निस्यन्द (glomerular filtrate) तथा छनने की इस प्रकिया को परानिस्यन्दन (ultrafiltration) कहते हैं। ग्लोमेरुलर निस्यन्द में रुधिराणु व प्लाज्मा प्रोटीन्स के अतिरिक्त रुधिर के लगभग सभी घटक पाये जाते हैं। इनमें जल, लवण, अमीनो अम्ल, यूरिक अम्ल, यूरिया, ग्लूकोज, क्रिटिनीन आदि उल्लेखनीय हैं।
2. वरणात्मक या चयनात्मक पुनरावशोषण
बोमैन सम्पुट के निस्यन्द में प्लाज्मा प्रोटीन्स को छोड़कर अन्य पदार्थ; जैसे-ग्लूकोज, यूरिया, लवण, अमीनो अम्ल आदि रुधिर के समान मात्रा में ही पाये जाते हैं। इस प्रकार यह प्रोटीन रहित प्लाज्मा के समपरासरणी (isotonic) होता है। समीपस्थ कुण्डलित नलिकाओं की भित्ति का भीतरी तल माइक्रोविलाई (microvilli) की उपस्थिति के कारण अत्यधिक विस्तृत होता है। इस क्षेत्र की कोशिकाएँ निस्यन्द के लगभग 80% भाग तक का पुनरावशोषण (reabsorption) कर उसे परिनलिका केशिका जाल के रुधिर में वापस पहुँचा देती हैं। इस क्रिया में ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, विटामिन्स आदि तथा Na+, CI¯, K+, Ca++,, आदि को सक्रिय स्थानान्तरण (active transport) होता है। इस क्रिया के बाद निस्यन्द का जल सामान्य परासरण द्वारा रुधिर में चला जाता है।
हेनले लूप में पहुँचने पर इसकी अवरोही भुजा (descending limb) से निस्यन्द का जल काफी मात्रा में बाहरी ऊतक द्रव्य में जाता रहता है। परिणाम यह होता है कि निस्यन्द धीरे-धीरे रुधिर के प्लाज्मा के उच्चपरासरणी (hypertonic) हो जाता है। अब निस्यन्द हेनले लूप की आरोही भुजा (ascending limb) में पहुँचता है। इसकी भित्ति जल के लिए लगभग अपारगम्य, परन्तु NaCl व यूरिया के लिए कुछ सीमा तक पारगम्य होती है। वृक्क के वल्कलीय भाग के ऊतक द्रव्य में इन आयन्स की संख्या कम होती है। आरोही भुजा में उपस्थित निस्यन्द से Na+ व CI¯ आयन्स सामान्य प्रसरण द्वारा बाहरी ऊतक द्रव्य में निकलने लगते हैं। इससे निस्यन्द की मात्रा पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ता, परन्तु यह रुधिर प्लाज्मा के समपरासरणी (isotonic) हो जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वृक्क नलिका में वरणात्मक पुनरावशोषण की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें ग्लोमेरुलस से रक्त का निस्पंदन होता है, फिर समीपस्थ नलिका में ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, NaCl और जल का पुनरावशोषण दिखाया गया है। हेनले के लूप में NaCl और जल के विनिमय से सांद्रण होता है, जबकि दूरस्थ नलिका और संग्रह नलिका में जल, NaCl, यूरिया, और H+/K+ आयनों का नियमन ADH और एल्डोस्टेरोन के प्रभाव में होता है, जिससे मूत्र का सांद्रण और निष्कासन होता है।
हेनले लूप की आरोही भुजा का मोटा भोग तथा दूरस्थ कुण्डलित नलिका मिलकर वृक्क नलिका का तनुकरण खण्ड (diluting segment) बनाते हैं। उपर्युक्त दोनों भागों की भित्तियाँ मोटी तथा जल व यूरिया के लिए अपारगम्य होती हैं। इस भाग में निस्यन्द के पहुंचने पर इसमें से Na⁺ व CI¯ आयन्स बाहर ऊतक द्रव्य में चले जाते हैं, जिससे कि निस्यन्द प्लाज्मा से निम्नपरासरणी (hypotonic) हो जाता है। अब निस्यन्द दूरस्थ कुण्डलित नलिका से संग्रह नलिका में पहुँचता है। संग्रह नलिका का ऊपरी भाग केवल जल के लिए तथा निचला भाग जल व यूरिया दोनों के लिए पारगम्य होता है। उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि ऊतक द्रव्य की परासरणीयता में निरन्तर वृद्धि होती रहती है। इसके सन्तुलन के लिए संग्रह नलिका के निस्यन्द से जल की आवश्यक मात्रा तथा कुछ यूरिया का पुनरावशोषण होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वृक्क नलिका में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें अभिवाही और अपवाही धमनिकाओं से रक्त प्रवाह, ग्लोमेरुलस में अल्ट्राफिल्ट्रेशन, बोमैन कैप्सूल में आइसोटोनिक ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेट का निर्माण, समीपस्थ और दूरस्थ संवलित नलिकाओं में पुनरावशोषण, हेनले के लूप में हाइपरटोनिक और आइसोटोनिक फिल्ट्रेट का निर्माण, और अंत में संग्रह नलिका से हाइपरटोनिक मूत्र का उत्पादन दिखाया गया है। यह मूत्र निर्माण के तीन मुख्य चरणों को स्पष्ट करता है।
3. स्रावण
वृक्क नलिका की भित्ति की कोशिकाएँ परिनलिका जाल की रुधिर केशिकाओं के रुधिर से कुछ पदार्थों; जैसे-यूरिक अम्ल, K+ H+, आदि का अवशोषण कर उन्हें निस्यन्द में स्रावित करती रहती हैं।
मूत्र (Urine) :
संग्रह नलिकाओं में निस्यन्द पूर्ण रूप से मूत्र में परिवर्तित हो जाता है। मूत्र के घटेक (components of urine) प्रायः इस प्रकार होते हैं95% जल, 2% अनावश्यक लवणों के आयन, 2.6% यूरिया, 0.3% यूरिक अम्ल तथा 0.1% अन्य अनावश्यक एवं अवशिष्ट पदार्थ । मूत्र थोड़ा अम्लीय (pH-6.00) होता है। [ संकेत- वृक्क नलिका के चित्र के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न 3 का उत्तर देखें]
In simple words: Urine formation involves three steps: ultrafiltration in the glomerulus, selective reabsorption of essential substances in the renal tubules, and tubular secretion of waste products, resulting in the final composition of urine, which is mostly water, urea, and salts.
🎯 Exam Tip: Systematically explain each stage (ultrafiltration, reabsorption, secretion), mentioning where each occurs and what substances are involved, and remember the normal composition and pH of urine.
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