UP Board Solutions Class 10 Social Science Chapter 7 Urja Sansadhan

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Detailed Chapter 7 ऊर्जा संसाधन UP Board Solutions for Class 10 Social Science

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Class 10 Social Science Chapter 7 ऊर्जा संसाधन UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारत में कोयले का वितरण एवं उपयोग का वर्णन कीजिए।
या
कोयले का महत्त्व स्पष्ट करते हुए भारत में इसके उत्पादन का वर्णन कीजिए। [2013]
या
भारत में कोयले का उत्पादन एवं वितरण का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
या
भारत में कोयला उत्पादन के किन्हीं दो प्रमुख राज्यों का वर्णन कीजिए। [2016]
या
भारत में कोयले के उत्पादन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए। [2016]
या
कोयले का संरक्षण क्यों आवश्यक है? तीन कारक बताइए। [2018]

Answer:

कोयले का उपयोग या महत्त्व

कोयला शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण साधन है और ऊर्जा का एक मुख्य स्रोत है। किसी भी देश की तरक्की के लिए कोयले का उत्पादन और उपयोग बहुत जरूरी है। इसकी तीन खास बातें हैं: यह भाप बनाने, गर्मी देने और कठोर धातुओं को पिघलाने में मदद करता है। इसलिए, यह आज की औद्योगिक दुनिया का आधार बन गया है। कोयले से मिलने वाली शक्ति खनिज तेल से दुगुनी, प्राकृतिक गैस से पाँच गुनी और जल-विद्युत शक्ति से आठ गुनी ज़्यादा होती है। इससे स्टीम कोक यानी ताप ऊर्जा मिलती है। भारत में पैदा होने वाले कुल कोयले का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा उद्योगों और बिजली बनाने में इस्तेमाल होता है, जबकि एक-चौथाई हिस्सा ट्रेनों को चलाने और दूसरे कामों में आता है। कोयले की इसी अहमियत के कारण इसे 'काला हीरा' भी कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है जो सदियों से ऊर्जा का प्रमुख स्रोत रहा है।

संचित मात्रा

कोयले के भण्डारों के मामले में भारत दुनिया में छठे स्थान पर है। भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने अनुमान लगाया है कि देश में 250 अरब टन कोयले का भण्डार है। लिग्नाइट का अनुमानित भण्डार 24 अरब टन है। कुल कोयले के भण्डार का 78.3% हिस्सा दामोदर घाटी में पाया जाता है।

उत्पादन एवं वितरण

भारत में कोयला उत्पादन के दो मुख्य क्षेत्र हैं:

(1) गोंडवाना कोयला क्षेत्र

भारत में कुल 113 कोयला क्षेत्र हैं, जिनमें से 80 गोंडवाना काल की चट्टानों से संबंधित हैं। इन चट्टानों में 96% कोयले का भण्डार है और 98% उत्पादन इन्हीं से मिलता है। इस क्षेत्र का क्षेत्रफल 90,650 वर्ग किमी है। कोयला उत्पादन में ये क्षेत्र खास हैं:

  • गोदावरी घाटी क्षेत्र: यह आंध्र प्रदेश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ देश का 10% कोयला निकाला जाता है। यहाँ गोदावरी नदी की घाटी में सिंगरेनी, तन्दूर और सस्ती जैसी खदानें हैं। अदिलाबाद, पश्चिमी गोदावरी, करीम नगर, खम्माम और वारंगल यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हैं।
  • महानदी घाटी क्षेत्र: यह कोयला क्षेत्र ओडिशा राज्य में फैला हुआ है। वेंकानाल, सुन्दरगढ़ और सम्भलपुर मुख्य कोयला उत्पादक जिले हैं।
  • उत्तरी दामोदर घाटी क्षेत्र: यह झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में फैला है। यहाँ राजमहल की पहाड़ियों में कोयले के सबसे बड़े भण्डार मिलते हैं।
  • दामोदर घाटी क्षेत्र: यह भारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है। यह झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में फैला है।
  • झारखंड: यह राज्य भारत के लगभग 36% कोयले का उत्पादन करके देश में पहले स्थान पर है। यहाँ झरिया, बोकारो, राजमहल, उत्तरी-दक्षिणी कर्णपुरा, डाल्टनगंज और गिरिडीह जैसी प्रमुख कोयले की खदानें हैं। झरिया यहाँ की सबसे बड़ी खदान है, जो 436 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है।
  • पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल देश का 13% कोयला उत्पन्न करके तीसरे स्थान पर है। यहाँ रानीगंज कोयले की प्रमुख खदान है, जो 1,536 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है।
  • छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश: यह क्षेत्र कोयला उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश राज्यों से मिलकर 28% कोयला निकाला जाता है। यहाँ पेंच घाटी, सोहागपुर, उमरिया, सिंगरौली, रामगढ़, रामकोला, तातापानी, कोरबा और बिलासपुर में कोयले की खदानें हैं।
  • सोन और उसकी सहायक नदी-घाटियों का क्षेत्र: यह कोयला क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य में फैला है। यह क्षेत्र उमरिया, सोहागपुर और सिंगरौली में विस्तृत है।
  • सतपुड़ा कोयला क्षेत्र: यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में फैला है। नरसिंहपुर जिले में मोहपानी, कान्हन घाटी, पेंच घाटी और बैतूल जिले में पाथरखेड़ा क्षेत्र खास हैं।
  • गोदावरी-वर्धा घाटी क्षेत्र: इस क्षेत्र में महाराष्ट्र के चन्द्रपुर, बलारपुर, बरोरा, यवतमाल, नागपुर आदि जिले तथा आंध्र प्रदेश के सिंगरेनी, सस्ती और तन्दूर क्षेत्र शामिल हैं। देश के 3% भण्डार यहाँ सुरक्षित हैं।

(2) टर्शियरी कोयला क्षेत्र

यह कोयला प्रायद्वीप के बाहरी हिस्सों में पाया जाता है। पूरे भारत का 2% कोयला टर्शियरी काल की चट्टानों से मिलता है। यह लिग्नाइट प्रकार का है, जिसमें कार्बन की मात्रा 30 से 50% तक होती है। इसका उपयोग ताप-विद्युत, कृत्रिम तेल और ब्रिकेट बनाने में किया जाता है। देश में इस कोयले के 23.1 करोड़ टन के सुरक्षित भण्डार का अनुमान है। इसके मुख्य उत्पादक क्षेत्र ये हैं:

  • राजस्थान: राजस्थान में कोयला बीकानेर के दक्षिण-पश्चिम में 20 किमी की दूरी पर पालना और उसके आस-पास के मढ़, चनेरी, गंगा-सरोवर और खारी क्षेत्रों में मिलता है।
  • असोम: यहाँ पर कोयला पूर्वी नागा पर्वत के उत्तर-पश्चिमी ढाल पर लखीमपुर तथा शिवसागर जिलों में पाया जाता है। यहाँ माकूम सबसे बड़ा कोयला उत्पादक क्षेत्र है।
  • मेघालय: मेघालय में मिकिर की पहाड़ियों में 1 से 2 मीटर मोटी परत वाला हल्की श्रेणी का कोयला मिलता है। यहाँ पर गारो, खासी और जयन्तिया पहाड़ियों में कोयला मिलता है।
  • जम्मू-कश्मीर: दक्षिण-पश्चिमी कश्मीर में करेवा चट्टानों में घटिया किस्म का कोयला मिलता है।

In simple words: कोयला भारत के लिए ऊर्जा का एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसे 'काला हीरा' भी कहते हैं। इसके बड़े भण्डार दामोदर घाटी जैसे क्षेत्रों में हैं और झारखंड सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसका उपयोग बिजली बनाने, उद्योगों और रेलगाड़ियों में होता है, लेकिन यह एक सीमित संसाधन है जिसे बचाना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: जब कोयले के वितरण और उपयोग पर प्रश्न हो, तो विभिन्न प्रकार के कोयले, प्रमुख उत्पादक राज्यों और उनके उपयोगों का उल्लेख करें। संरक्षण के महत्व को भी स्पष्ट करना जरूरी है।

 

Question 2. ऊर्जा या शक्ति के संसाधन से आप क्या समझते हैं? भारत में खनिज तेल के क्षेत्रीय वितरण को समझाइट । [2013]
या
खनिज तेल का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) क्षेत्र, (ख) भावी सम्भावनाएँ तथा (ग) तेलशोधक कारखाने
या
ऊर्जा संसाधन के रूप में खनिज तेल का महत्त्व बताइए। भारत में पाये जाने वाले खनिज तेल के दो क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए। [2010, 11]
या
बॉम्बे-हाई क्यों प्रसिद्ध है ? इस पर प्रकाश डालिए।
या
भारत में खनिज तेल के उत्पादन क्षेत्रों का वर्णन कीजिए। [2016]
या
भारत में खनिज तेल के वितरण एवं उपयोग का वर्णन कीजिए। [2016]

Answer:

ऊर्जा या शक्ति के संसाधन

जिन चीज़ों से इंसानों को अपने अलग-अलग काम करने और गतिविधियों को चलाने के लिए ताकत मिलती है, उन्हें ऊर्जा या शक्ति के संसाधन कहते हैं। ऊर्जा हमारे दैनिक जीवन में लगभग हर काम के लिए आवश्यक है, चाहे वह घर में हो या उद्योग में।

खनिज तेल की उपयोगिता/महत्त्व

खनिज तेल ऊर्जा का दूसरा बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसे पेट्रोलियम भी कहते हैं। यह करोड़ों सालों में प्राकृतिक पेड़-पौधों और जीवों के कीचड़, मिट्टी, बालू आदि में दबने और उन पर गर्मी, दबाव, रासायनिक और जीवाणु क्रियाओं के कारण बनता है। जमीन से निकलने वाला खनिज तेल कच्चा होता है, जिसमें कई अशुद्धियाँ मिली होती हैं। इसलिए इसे इस्तेमाल से पहले तेल-शोधनशालाओं में साफ किया जाता है। इसे साफ करने के बाद पेट्रोल, ईथर, बेंजीन, गैसोलीन, मिट्टी का तेल, मशीनों को चिकना करने वाला तेल, मोम, फिल्म, प्लास्टिक, वार्निश, पॉलिश, मोमबत्ती, वैसलीन जैसे लगभग 5,000 अलग-अलग पदार्थ मिलते हैं। इनका उपयोग मोटरगाड़ियों, हवाई जहाजों, पानी के जहाजों, रेलों और उद्योगों में ईंधन के रूप में होता है। पेट्रोलियम को तरल सोना कहा जाता है क्योंकि यह आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

खनिज तेल उत्पादक-क्षेत्र

1. असोम-

  • डिगबोई तेल-क्षेत्र: यह तेल-क्षेत्र टीपम पहाड़ियों के उत्तर-पूर्व में लखीमपुर जिले में 13 किमी लंबा और 1 किमी चौड़ा है। यहाँ 300 से 1,200 मीटर की गहराई पर 800 तेल के कुएँ हैं। तेल निकालने का काम असम तेल कंपनी करती है। मुख्य तेल के कुएँ बप्पापाँग, हस्सापाँग, डिगबोई और पानीटोला हैं।
  • सुरमा नदी-घाटी तेल-क्षेत्र: इस नदी घाटी में हल्के तेल दक्षिण में बदरपुर और पथरिला में निकाले जाते हैं। दूसरा मुख्य क्षेत्र मसीमपुर में है, जहाँ लगभग 18,000 मीटर की गहराई से तेल निकाला जा रहा है।
  • नाहरकटिया तेल-क्षेत्र: इस क्षेत्र में 1953 से तेल का उत्पादन शुरू हुआ था। यह डिगबोई से 40 किमी दक्षिण-पश्चिम में दिहिंग नदी के किनारे है। यहाँ 4,000 से 5,000 मीटर की गहराई तक तेल के कुएँ खोदे गए हैं, जिनसे 25 लाख टन तेल निकलता है। इस क्षेत्र में अब तक 80 से ज़्यादा कुएँ खोदे जा चुके हैं, जिनमें से 60 से तेल मिला है और 4 से गैस मिली है।
  • हुगरीजन-मोरेन तेल-क्षेत्र: यह नाहरकटिया से 40 किमी दक्षिण-पश्चिम में है। यहाँ 29 में से 22 कुओं में तेल के साथ प्राकृतिक गैस भी मिलती है।
  • रुद्रसागर एवं लकवा तेल-क्षेत्र: यह तेल-क्षेत्र मोरेन तेल क्षेत्र के दक्षिण में शिवसागर जिले में है। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग और ऑयल इंडिया ने ब्रह्मपुत्र नदी घाटी में 1961 में रुद्रसागर और 1965 में लकवा में तेल की खोज की। रुद्रसागर का वार्षिक उत्पादन 4 लाख टन और लकवा का 6 लाख टन अनुमानित है।

2. गुजरात-

  • अंकलेश्वर तेल-क्षेत्र: इस तेल-क्षेत्र का पता 1958 में चला। यह नर्मदा नदी पर वड़ोदरा से 44 किमी दक्षिण-पश्चिम में है। यहाँ लगभग 1,200 मीटर की गहराई पर तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है। इसका वार्षिक उत्पादन 20 लाख टन है। इसमें मिट्टी का तेल और गैसोलीन ज़्यादा होता है।
  • खम्भात या लुनेज तेल-क्षेत्र: यह तेल-क्षेत्र खम्भात की खाड़ी के ऊपरी सिरे पर वड़ोदरा से 60 किमी पश्चिम में बाडसर में है। यहाँ 1969 तक 62 कुओं की खुदाई हुई, जिनमें से 43 से तेल और 19 से गैस मिली। इस क्षेत्र से हर दिन 6 लाख घन मीटर प्राकृतिक गैस मिलती है।
  • अहमदाबाद-कलोल-तेल-क्षेत्र: इस तेल-क्षेत्र की स्थिति अहमदाबाद के पश्चिम में है। कलोल, नवगाँव, कोसम्बा, कोथना, मेहसाना, सानन्द, बेचराजी, बकरोल, कादी, वासना, धोलका, बावेल, ओल्पाद्, सोभासन आदि स्थानों पर तेल मिला है।

3. अपतटीय क्षेत्र-

  • अलियाबेट तेल-क्षेत्र: सौराष्ट्र में भावनगर से 45 किमी दूर अरब सागर में स्थित अलियाबेट द्वीप में नए तेल-भण्डार मिले हैं। खम्भात के पास गैस भी मिली है।
  • बॉम्बे-हाई तेल-क्षेत्र: यह महाराष्ट्र राज्य में महाद्वीपीय समुद्रमग्न तटीय क्षेत्र पर मुंबई महानगर से उत्तर-पश्चिम में 176 किमी की दूरी पर अरब सागर में है। यहाँ 1976 से तेल का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है। यहाँ 'सागर सम्राट' नामक जापानी जल मंच (Platform) की मदद से 1,415 मीटर की गहराई से तेल निकाला जाता है। यह देश का सबसे बड़ा तेल उत्पादन-क्षेत्र है, जो देश के 60% से ज़्यादा तेल का उत्पादन करता है।
  • बेसीन तेल-क्षेत्र: इसकी स्थिति बॉम्बे-हाई के दक्षिण में है। इसका पता हाल ही में चला है। यहाँ पर 1,900 मीटर की गहराई से तेल मिला है।

4. नवीन तेल-क्षेत्र: सन् 1980 के दशक में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) और ऑयल इंडिया लि० (OIL) के प्रयासों से कावेरी तथा कृष्णा-गोदावरी बेसिनों और अपतटीय क्षेत्रों में तेल मिला। गुजरात के गान्धार तेल-क्षेत्र तथा मुंबई अपतटीय क्षेत्रों में हीरा, पन्ना, ताप्ती, दमन अपतटीय, दक्षिणी बेसिन तथा नीलम क्षेत्रों में भी तेल मिला। 1987-89 के दौरान असोम में बोरबिल, दिरोई तथा हपजन में तेल और अरुणाचल प्रदेश में कुमचई में तेल तथा गैस मिली है।

भावी सम्भावनाएँ

ऊर्जा के संसाधनों में खनिज तेल का बहुत महत्व है, क्योंकि इसमें कोयले से कई गुना ज़्यादा ताप-शक्ति होती है। आजकल कारखानों में इंजन चलाने, भट्टियों को गर्म करने, मोटरगाड़ियों, रेलगाड़ियों, पानी के जहाजों और हवाई जहाजों को चलाने के लिए खनिज तेल का उपयोग दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। ओ०एन०जी०सी० और ओ०आई०एल० की स्थापना के बाद उनके अलग-अलग और मिलकर किए गए प्रयासों से असोम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, बॉम्बे हाई, खम्भात की खाड़ी आदि के अलावा कई नए तेल भण्डार खोजे गए हैं। फिर भी, देश की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत को हर साल बड़ी मात्रा में तेल आयात करना पड़ रहा है। भारत के कुल आयात व्यापार का लगभग 40% खनिज तेल ही होता है। देश में तेल की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए नए तेल-क्षेत्रों की खोज जारी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों, राजस्थान तथा गांगेय घाटी में दूर संवेदी तकनीक का उपयोग करके तेल की खोज चल रही है। तेल एक सीमित संसाधन है, इसलिए इसके विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है।

तेलशोधक कारखाने

जमीन से मिलने वाला कच्चा खनिज तेल अशुद्ध होता है। इसे तेलशोधनशालाओं में साफ किया जाता है। आज़ादी से पहले देश में केवल डिगबोई में ही एक तेलशोधनशाला थी। वर्तमान में देश में 18 तेलशोधनशालाएँ हैं, जो देश में मिलने वाले और विदेशों से आयात किए गए कच्चे तेल को साफ करती हैं। इनमें से 17 सार्वजनिक क्षेत्र में और 1 रिलायंस इंडस्ट्रीज लि० निजी क्षेत्र में है। ये डिगबोई (असोम), गुवाहाटी (गौहाटी), बोंगई गाँव (असोम), ट्रॉम्बे-I एवं II (महाराष्ट्र), विशाखापत्तनम् (आंध्र प्रदेश), चेन्नई (तमिलनाडु), बरौनी (बिहार), कोयली (गुजरात), कोच्चि (केरल), नूनामती (असोम), नुमालीगढ़ (असोम), कावेरी (तमिलनाडु), हल्दिया (प० बंगाल), मथुरा (उत्तर प्रदेश), करनाल (हरियाणा) तथा मंगलौर (कर्नाटक) में स्थापित हैं। बरौनी, नूनामती, बोंगई गाँव, कोयली, डिगबोई और ट्रॉम्बे की तेलशोधनशालाएँ देश में उत्पादित तेल को साफ करती हैं और बाकी विदेशों से आयात किए गए तेल को।


In simple words: ऊर्जा संसाधन वे पदार्थ हैं जिनसे हमें काम करने की शक्ति मिलती है। खनिज तेल, जिसे पेट्रोलियम भी कहते हैं, ऊर्जा का एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है, खासकर परिवहन और उद्योगों के लिए। यह भारत में असोम, गुजरात और बॉम्बे-हाई जैसे क्षेत्रों में मिलता है। कच्चे तेल को साफ करने के लिए तेलशोधनशालाएँ होती हैं, और भारत में अभी भी तेल की बड़ी मांग है, इसलिए नए भण्डारों की खोज जारी है।

🎯 Exam Tip: खनिज तेल के महत्व, उत्पादन क्षेत्रों और शोधनशालाओं का वर्णन करते समय, प्रमुख भौगोलिक स्थानों और उनकी विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 3. भारत में परमाणु शक्ति के उत्पादन का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए
(क) उत्पादन केन्द्र तथा (ख) महत्त्व ।
या
भारत के किन्हीं पाँच परमाणु ऊर्जा केन्द्रों का वर्णन कीजिए। [2010, 11]
या
भारत में परमाणु ऊर्जा केन्द्र कहाँ-कहाँ स्थापित हैं ? [2011]

Answer:

(क) उत्पादन केन्द्र

भारत में पहला परमाणु रिएक्टर 'अप्सरा' 4 अगस्त, 1956 को शुरू हुआ था। दूसरा रिएक्टर, कनाडा-भारत रिएक्टर, जून 1959 से काम करने लगा था, जिसकी उत्पादन क्षमता 40 मेगावाट थी। 'ध्रुव' नामक एक और रिएक्टर 100 मेगावाट की उत्पादन क्षमता के साथ अगस्त 1985 में पूरा हुआ। भारत में बिजली उत्पादन में परमाणु शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है:

1. महाराष्ट्र: सन् 1960 में मुंबई के पास तारापुर में एक परमाणु शक्ति-गृह बनाया गया। यहाँ 2 X 160 मेगावाट क्षमता के बिजली घर हैं।

2. राजस्थान: इस राज्य में कोटा के रावतभाटा में 440 मेगावाट क्षमता वाले दो रिएक्टर लगाए गए हैं। इनमें यूरेनियम और भारी जल का उपयोग होता है।

3. तमिलनाडु: तमिलनाडु राज्य में चेन्नई के पास कलपक्कम में एक परमाणु केंद्र स्थापित किया गया है। इसमें दो इकाइयाँ हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता 470 मेगावाट है।

4. उत्तर प्रदेश: इस राज्य में बुलन्दशहर जिले के नरौरा में 470 मेगावाट क्षमता वाले दो रिएक्टर लगाए गए हैं।

5. एक और रिएक्टर का निर्माण गुजरात के काकरापारा में किया गया, जिसकी उत्पादन क्षमता 470 मेगावाट है और इसमें दो रिएक्टरों ने काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा कर्नाटक के कैगा में भी 470 मेगावाट क्षमता का परमाणु शक्ति-गृह स्थापित किया गया है। वर्तमान में देश में कुल 14 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन-क्षमता 2,720 मेगावाट है। यह स्वच्छ ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

(ख) महत्त्व

भारत में अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले और खनिज तेल की कमी है। इसलिए परमाणु शक्ति इस कमी को पूरा कर सकती है। परमाणु शक्ति एक अच्छा विकल्प है, जिससे प्रदूषण की समस्या भी नहीं होती है। भारत कुछ परमाणु-खनिजों से भरपूर है। बिहार के सिंहभूम और राजस्थान के कुछ हिस्सों में यूरेनियम की खदानें हैं। केरल के तट पर मिलने वाली मोनोजाइट बालू परमाणु ऊर्जा का स्रोत है। भारत में परमाणु विद्युत उत्पादन में वृद्धि संतोषजनक है। देश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में अभी नाभिकीय ऊर्जा का हिस्सा केवल 3% है, लेकिन इसकी भविष्य की संभावनाएँ बहुत ज़्यादा हैं। कुल विद्युत उत्पादन संयंत्रों में नाभिकीय संयंत्रों का हिस्सा 4% है। परमाणु ऊर्जा केंद्र उन जगहों पर भी आसानी से लगाए जा सकते हैं, जहाँ शक्ति के दूसरे संसाधन या तो हैं ही नहीं या बहुत कम हैं। भारत परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों, जैसे-चिकित्सा और कृषि के लिए प्रतिबद्ध है।


In simple words: भारत में परमाणु शक्ति ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, खासकर जब कोयले और तेल की कमी हो। तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरौरा (उत्तर प्रदेश) और काकरापारा (गुजरात) जैसे कई परमाणु ऊर्जा केंद्र बिजली पैदा करते हैं। यह पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए ऊर्जा देती है।

🎯 Exam Tip: परमाणु ऊर्जा के उत्पादन केंद्रों के नाम और उनकी क्षमता के साथ-साथ उनके महत्व को भी याद रखें, खासकर स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में।

 

Question 4. परम्परागत ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं ? परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के स्रोतों का वर्णन कीजिए।
या
परम्परागत ऊर्जा के संसाधन क्या हैं? इनके दो प्रमुख संसाधनों का वर्णन भी कीजिए ।

Answer:

परम्परागत ऊर्जा संसाधन

परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं, जो एक बार इस्तेमाल होने के बाद खत्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें अनव्यकरणीय, समापनीय या क्षयशील स्रोत भी कहते हैं। ये संसाधन लाखों सालों में बनते हैं और इनकी मात्रा सीमित होती है।

परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के परम्परागत साधनों या स्रोतों का विवरण निम्नलिखित है:

1. कोयला: भारत विश्व के कोयला उत्पादक देशों में छठे स्थान पर है। अनुमान है कि भारत में 250 अरब टन कोयले के सुरक्षित भण्डार हैं। भारत का पूरा कोयला गोंडवाना क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश) तथा टर्शियरी क्षेत्र (कच्छ, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान) में पाया जाता है। कोयला बिजली उत्पादन और उद्योगों के लिए मुख्य ईंधन है।

2. खनिज तेल (पेट्रोलियम): आज के भौतिक युग की मुख्य शक्ति पेट्रोलियम ही है। खनिज तेल के उत्पादन में भारत दुनिया में बारहवें स्थान पर है। यहाँ दुनिया का केवल 0.5% खनिज तेल ही उत्पन्न होता है। भारत में मुख्य रूप से असोम, गुजरात तथा बॉम्बे-हाई में तेल-क्षेत्र स्थित हैं। वर्तमान में भारत में तेल की 18 तेलशोधक इकाइयाँ (रिफाइनरी) काम कर रही हैं। पेट्रोलियम एक बहुमुखी ऊर्जा स्रोत है जिसका उपयोग परिवहन से लेकर प्लास्टिक उत्पादन तक में होता है।

3. जल-विद्युत शक्ति: भारत में शक्ति के साधनों में जल-विद्युत का विशेष महत्व है। यहाँ जल-शक्ति का असीमित भण्डार है। अनुमान है कि जल-शक्ति से भारत में 4 करोड़ किलोवाट से ज़्यादा विद्युत शक्ति उत्पन्न हो सकती है।

क्षेत्र: भारत में जल-विद्युत शक्ति उत्पादक क्षेत्रों का विवरण निम्नलिखित है:

  • महाराष्ट्र: यह जल-विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। टाटा जलविद्युत (तीन शक्ति-गृह), भिवपुरी, खोपोली, मीरा, कोयना, पूर्णा, वैतरणा, भटनगर-बीड़ आदि मुख्य जल-विद्युत केंद्र हैं।
  • कर्नाटक: विद्युत शक्ति का उत्पादन सबसे पहले इसी राज्य में हुआ था। कावेरी पर शिवसमुद्रम्, शिमला, जोग, तुंगभद्रा, शरावती आदि प्रमुख जल-विद्युत योजनाएँ हैं।
  • तमिलनाडु: पायकारा, कावेरी पर मेट्टूर, ताम्रपर्णी पर पापानासम्, मोयार, कुण्डा, पेरियार, परम्बिकुलम्, अलियार प्रमुख परियोजनाएँ हैं।
  • पंजाब व हिमाचल प्रदेश: मण्डी, गंगुछाल, कोटला, भाखड़ा तथा II, बैरासिडल, चमेरा आदि।
  • केरल: पल्लीवासल, सेंगुलम्, शोलयार, पोरिंगलकुथु, नेरियामंगलम्, पोन्नियार, शबरीगिरि, इडुक्की, कट्टियाडी आदि प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ हैं।
  • उत्तर प्रदेश: ऊपरी गंग नहर पर 'गंगा इलेक्ट्रिक ग्रिड' महत्वपूर्ण है, जिसके तहत पथरी, मुहम्मदपुर, निरगाजनी, चितौरा, सलावा, भोला, पल्हेड़, सुमेरा आदि स्थानों पर कृत्रिम बाँध बनाकर जल-विद्युत का विकास किया गया है। रिहन्द, माताटीला, यमुना हाइडिल, रामगंगा जल विद्युत परियोजनाएँ भी खास हैं।
  • जम्मू-कश्मीर: सिन्ध, झेलम, सलाल, चेनानी, दुलहत्री आदि मुख्य जल-विद्युत परियोजनाएँ हैं।

4. अणु शक्ति या परमाणु बिजली: जिन खनिजों में रेडियोधर्मी तत्व पाए जाते हैं, उन्हें 'परमाणु खनिज' कहते हैं, जैसे- यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, रेडियम आदि। इन खनिजों में परमाणुओं और अणुओं के टूटने से एक तरह की गर्मी या शक्ति उत्पन्न होती है, जिसे 'परमाणु शक्ति' कहते हैं। यह सीमित संसाधनों की कमी को पूरा करने में मदद करती है।

क्षेत्र: भारत में अणु शक्ति केंद्र निम्नलिखित हैं—

  • ट्रॉम्बे अणु शक्ति केंद्र,
  • तारापुर परमाणु शक्ति केंद्र,
  • कोटा परमाणु शक्तिगृह,
  • इंदिरा गांधी अणु शक्ति केंद्र, कलपक्कम (चेन्नई),
  • नरौरा परमाणु शक्ति केंद्र,
  • काकरापारा परमाणु शक्ति केंद्र (गुजरात)।

In simple words: परम्परागत ऊर्जा संसाधन वे हैं जो एक बार इस्तेमाल होने के बाद खत्म हो जाते हैं, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस। जल-विद्युत भी एक परम्परागत स्रोत है जो पानी के बहाव से बनती है। भारत में ये संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और इनका उपयोग कई कामों में होता है।

🎯 Exam Tip: परम्परागत ऊर्जा संसाधनों को परिभाषित करते समय, उनके 'अनव्यकरणीय' या 'समापनीय' स्वभाव पर जोर दें और प्रत्येक स्रोत के उदाहरण, वितरण और उपयोग को स्पष्ट करें।

 

Question 5. गैर-परम्परागत ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा के संसाधनों का वर्णन कीजिए । [2014, 17]
या
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का क्या अभिप्राय है? इन स्रोतों के दो महत्त्व लिखिए।
या
किन्हीं दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
या
ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का महत्त्व लिखिए।
या
गैर-परम्परागत ऊर्जा के दो स्रोत बताइए । [2016, 17]

Answer:

गैरपरम्परागत ऊर्जा संसाधन

गैर-परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं जिनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है। इसलिए इन्हें नवीकरणीय या असमापनीय स्रोत भी कहते हैं, क्योंकि ये कभी खत्म नहीं होते और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाते हैं।

गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों या स्रोतों का विवरण निम्नलिखित है:

1. सौर ऊर्जा: यह प्रदूषण मुक्त है। इसमें सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा में बदला जाता है। सौर ऊर्जा का उपयोग खाना बनाने, पानी गर्म करने, फसल सुखाने और गाँवों में बिजली पहुंचाने में होता है। 31 मार्च, 1998 तक 3.80 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सौर ऊर्जा उपलब्ध कराई जा चुकी थी। सौर ऊर्जा के उपयोग से हर साल 15 करोड़ किलोवाट घंटे ऊर्जा की बचत हो रही है। सूर्य की रोशनी हमेशा उपलब्ध रहती है, जो इसे एक टिकाऊ ऊर्जा स्रोत बनाती है।

2. पवन ऊर्जा: भारत में पवन ऊर्जा की अनुमानित क्षमता 2 हज़ार मेगावाट है। ऊर्जा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 1999 तक देश में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 1,025 मेगावाट थी। पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु राज्य इस ऊर्जा उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। पवनचक्कियाँ हवा की गति से बिजली बनाती हैं।

3. बायो गैस: देश में मार्च, 1999 तक 2,850 लाख बायो गैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके थे, जो हर साल 410 लाख टन जैविक खाद का निर्माण कर रहे हैं। बायो गैस उत्पादन की तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए कोयम्बटूर, पूसा आदि में प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा और खाद दोनों प्रदान करता है।

4. भूतापीय ऊर्जा: भूतापीय ऊर्जा प्राकृतिक गर्म पानी के झरने या तालाब से संयंत्र लगाकर प्राप्त की जाती है। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले के मणिकर्ण नामक स्थान पर भूतापीय ऊर्जा की पायलट परियोजना सफल रही है। पृथ्वी की आंतरिक गर्मी का उपयोग ऊर्जा के लिए किया जाता है।

5. नगरीय तथा औद्योगिक कूड़े-कचरे से ऊर्जा: नगरीय तथा औद्योगिक कूड़ा-कचरा पर्यावरण को दूषित करता है। इससे दिल्ली तथा मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऊर्जा तैयार की जाती है। यह अपशिष्ट प्रबंधन का एक अच्छा तरीका भी है।

6. ज्वारीय ऊर्जा: अनुमान है कि देश में ज्वारीय शक्ति से 8,000 से 9,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा सुन्दरवन इसके संभावित ऊर्जा क्षेत्र हैं। समुद्री ज्वार-भाटा से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।

7. लहर ऊर्जा: समुद्री लहरों से देश में 40,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त करने की संभावना का आकलन किया गया है। केरल में तिरुवनन्तपुरम के पास विजिंगम में 150 मेगावाट क्षमता का संयंत्र (प्लांट) लगाया गया है। यह तटीय क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है।

ऊर्जा के गैर-परम्परागत संसाधनों का महत्त्व निम्नलिखित कारणों से है-

  • भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। यहाँ साल के अधिकांश भाग में उच्च तापमान रहता है। इसलिए सौर ऊर्जा के विकास की अच्छी संभावनाएँ हैं। इसका उपयोग घरों और सड़कों पर प्रकाश-व्यवस्था, पानी गर्म करने, खाना पकाने, फसलें सुखाने आदि में किया जा सकता है।
  • भारत की तटरेखा लंबी है। यहाँ ज्वारीय तथा लहर ऊर्जा का विकास संभव है। तटीय भागों में इस ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।
  • कृषि उत्पादन अधिक होने से बायो गैस ऊर्जा का विकास संभव है। गन्ने की खोई तथा चावल के भूसे को ऊर्जा-स्रोत के रूप में बदला जा सकता है।
  • घनी आबादी और ज़्यादा जनसंख्या होने के कारण देश में गोबर, मलमूत्र, कूड़े-कचरे आदि की अधिकता है। बड़े शहरों में इसका व्यापक प्रयोग संभव है।

In simple words: गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन वे हैं जो कभी खत्म नहीं होते और जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो गैस, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और लहर ऊर्जा। भारत के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत हैं, जो देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों को परिभाषित करते समय, उनके 'नवीकरणीय' स्वभाव पर जोर दें। प्रत्येक स्रोत का संक्षिप्त विवरण, उसके लाभ और भारत में उसके संभावित क्षेत्रों का उल्लेख करें।

 

Question 6. परमाणु ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? इसकी किन्हीं पाँच विशेषताओं की विवेचना | कीजिए। [2013, 17]
Answer:

परमाणु ऊर्जा

भारत में कोयले और पेट्रोलियम के भण्डार सीमित हैं। इसलिए देश को आणविक खनिजों की खोज करके ऊर्जा के नए साधन ढूँढने की ज़रूरत महसूस हुई। जिन पदार्थों में रेडियोधर्मी तत्व होते हैं, उन्हें परमाणु खनिज (Atomic Mineral) कहते हैं। जैसे-यूरेनियम, थोरियम, बेरिलियम, ज़िरकॉन, ग्रेफाइट, एण्टीमनी, प्लूटोनियम, चेरलाइट, ज़िरकोनियम, इल्मेनाइट आदि। इन खनिज पदार्थों में अणुओं और परमाणुओं के टूटने से एक प्रकार की ऊर्जा निकलती है जिसे 'परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy)' कहते हैं। एक पौंड यूरेनियम से उतनी ऊर्जा मिलती है जितनी 12 किग्रा कोयले से मिलती है। देश में ऊर्जा की बढ़ती खपत के कारण परमाणु शक्ति बोर्ड ने विभिन्न स्थानों पर परमाणु ऊर्जा केंद्रों की स्थापना की है। यह ऊर्जा का एक बहुत शक्तिशाली और केंद्रित रूप है।

परमाणु ऊर्जा का महत्त्व

परमाणु ऊर्जा की निम्न विशेषताओं के कारण इसका महत्त्व बढ़ गया है:

  • परमाणु ऊर्जा में अपार क्षमता और शक्ति होती है। इसका मतलब है कि थोड़ी सी मात्रा से बहुत ज़्यादा ऊर्जा पैदा की जा सकती है।
  • परमाणु ऊर्जा के केंद्र उन स्थानों पर बनाए जाते हैं जहाँ परमाणु ऊर्जा का ईंधन उपलब्ध नहीं है। यह ऊर्जा उत्पादन को भौगोलिक बाधाओं से मुक्त करता है।
  • परमाणु ऊर्जा का सर्वव्यापी उपयोग संभव है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन से लेकर चिकित्सा और कृषि तक कई क्षेत्रों में होता है।
  • ऊर्जा के अन्य साधनों की कमी को परमाणु ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है। यह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती है।
  • चिकित्सा और कृषि के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में भारत का अग्रणी स्थान है।

In simple words: परमाणु ऊर्जा वह शक्ति है जो रेडियोधर्मी खनिजों के परमाणुओं को तोड़कर पैदा होती है, जैसे यूरेनियम। इसकी बहुत ज़्यादा क्षमता है, इसे कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है, और यह ऊर्जा के दूसरे स्रोतों की कमी को पूरा कर सकती है। भारत इसका उपयोग बिजली बनाने, दवा और खेती में करता है।

🎯 Exam Tip: परमाणु ऊर्जा की परिभाषा देते समय 'रेडियोधर्मी तत्वों' और 'अणुओं के विखंडन' को शामिल करें। इसकी विशेषताओं में 'उच्च क्षमता', 'कम प्रदूषण', और 'दूरस्थ स्थानों पर उपयोगिता' पर जोर दें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. शक्ति के संसाधन के रूप में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
Answer:

खनिज तेल (पेट्रोलियम)

शक्ति के संसाधन के रूप में खनिज तेल का बहुत ज़्यादा महत्व है। कोयले से पैदा हुई ऊर्जा का उपयोग कारखानों और घरों में हो सकता है, लेकिन परिवहन के साधनों के लिए खनिज तेल ज़्यादा उपयोगी है। पेट्रोलियम का मतलब है 'चट्टानी तेल'। यह ज़मीन के अंदर की चट्टानों से निकाला जाता है। इसकी उत्पत्ति ज़मीन में दबे पेड़-पौधों और जल-जीवों के रासायनिक बदलाव से हुई है। यह तलछटी चट्टानों में पाया जाता है। ज़मीन से निकलने वाला कच्चा तेल अशुद्ध होता है। इन अशुद्धियों को तेलशोधनशालाओं में रासायनिक प्रक्रियाओं से साफ किया जाता है। भारत में खनिज तेल के भण्डार सीमित हैं। भारत हर साल लगभग 30 मिलियन मी टन अशुद्ध खनिज तेल का उत्पादन करता है, जो कुल ज़रूरत का सिर्फ 60% पूरा कर पाता है। इसलिए भारत को हर साल खनिज तेल के आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। यह आधुनिक युग का महत्वपूर्ण ईंधन है।

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस के भण्डार आमतौर पर तेल-क्षेत्रों के साथ ही मिलते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटों से दूर तेल-क्षेत्रों में भी प्राकृतिक गैस के भण्डार मिले हैं। लेकिन तेल-क्षेत्रों से अलग केवल प्राकृतिक गैस के भण्डार त्रिपुरा और राजस्थान में खोजे गए हैं। इसका उपयोग खाना पकाने की गैस के रूप में, उर्वरक उद्योग तथा बिजली बनाने में किया जाता है। 2006-07 में देश में 30,792 मिलियन घन मीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ। ऊर्जा संसाधनों की कमी वाले देशों के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता एक अनमोल उपहार है। यह एक स्वच्छ ईंधन है।


In simple words: खनिज तेल (पेट्रोलियम) और प्राकृतिक गैस ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। पेट्रोलियम परिवहन और उद्योगों में ज़्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि प्राकृतिक गैस खाना पकाने और बिजली बनाने में। दोनों ही सीमित मात्रा में हैं और भारत को अपनी ज़रूरतों के लिए इन्हें आयात करना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: खनिज तेल और प्राकृतिक गैस के विवरण में, उनके स्रोत (भूगर्भीय चट्टानें), मुख्य उपयोग और भारत में उनके वितरण क्षेत्रों को ज़रूर बताएं।

 

Question 2. पवन ऊर्जा से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: पवन ऊर्जा केवल उन्हीं क्षेत्रों में मिल सकती है, जहाँ हवा तेज़ चलती हो और उसका बहाव लगातार रहता हो, नहीं तो पवन पंखों की गति रुक सकती है। पवन-पंखों से बिजली बनाई जा सकती है, पवन-चक्कियाँ चलाई जा सकती हैं, पानी खींचा जा सकता है और खेतों की सिंचाई भी की जा सकती है। पवन ऊर्जा एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।

भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु राज्य पवन-ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त और महत्वपूर्ण जगहें हैं। भारत में लगभग 2,000 पवन-चक्कियाँ लगाई जा चुकी हैं और इस समय 3.63 मेगावाट बिजली की स्थापित क्षमता वाले 5 पवन-क्षेत्र काम कर रहे हैं। इनसे अब तक 5 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो चुका है। पवन ऊर्जा संयंत्रों का स्थान हवा की उपलब्धता पर निर्भर करता है।


In simple words: पवन ऊर्जा वह शक्ति है जो तेज़ और लगातार चलने वाली हवा से पैदा होती है। पवन-चक्कियों का उपयोग करके इससे बिजली बनाई जाती है, जिसका इस्तेमाल सिंचाई और दूसरे कामों में भी होता है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य भारत में इसके बड़े उत्पादक हैं।

🎯 Exam Tip: पवन ऊर्जा के बारे में बताते समय, इसके लिए ज़रूरी भौगोलिक स्थितियों (तेज़ और लगातार हवा) और इसके विभिन्न उपयोगों का उल्लेख ज़रूर करें। प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम भी बताएं।

 

Question 3. सौर ऊर्जा के विषय में आप क्या जानते हैं ? इसके किन्हीं दो लाभों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
या
सौर ऊर्जा क्या है ? इसके विकास पर अधिक बल क्यों दिया जा रहा है ?

Answer: सौर ऊर्जा, ऊर्जा का एक बहुत बड़ा, आसानी से मिलने वाला और नवीकरणीय स्रोत है। यह भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है। इस संदर्भ में सौर चूल्हों का विकास एक बड़ी उपलब्धि है। इनसे लगभग बिना किसी खर्च के खाना बनाया जा सकता है। देश भर में लाखों सौर चूल्हे इस्तेमाल हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए छोटे और मध्यम आकार के सौर बिजली घरों की भी योजना बनाई जा रही है। यह भविष्य की ऊर्जा का स्रोत है, क्योंकि खनिज तेल जैसे जीवाश्म ईंधन तो खत्म हो जाएंगे। सूर्य की ऊर्जा लगभग असीमित है।

सौर ऊर्जा के दो लाभ निम्नलिखित हैं:

  • सौर ऊर्जा का उपयोग खाना पकाने, पानी गर्म करने, फसल सुखाने, घरों में रोशनी करने और दूसरे कामों में किया जाता है।
  • यह ऊर्जा का नवीकरणीय, अक्षय और प्रदूषण-मुक्त स्रोत है। इन्हीं कारणों से सौर ऊर्जा के विकास पर बहुत ज़ोर दिया जा रहा है।

In simple words: सौर ऊर्जा सूरज की रोशनी से मिलने वाली ऊर्जा है, जो कभी खत्म नहीं होती और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती। इसका उपयोग खाना बनाने, पानी गर्म करने और बिजली पैदा करने में होता है, और यह भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: सौर ऊर्जा के लाभों में 'नवीकरणीय' और 'प्रदूषण-मुक्त' विशेषताओं को प्रमुखता से बताएं। इसके व्यावहारिक उपयोगों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 4. शक्ति के संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?
या
हमारे देश में खनिज संसाधनों के संरक्षण की क्या आवश्यकता है ? इनके संरक्षण के क्या-क्या उपाय हैं ?
या
ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण भारत में क्यों आवश्यक है? कोई तीन कारण बताइट । [2017]

Answer: देश के औद्योगीकरण के लिए खनिज और ऊर्जा के संसाधनों की ज़रूरत होती है। उद्योगों के बढ़ने के कारण खनिज और ऊर्जा के संसाधनों का तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है। निस्संदेह खनिज हमारी राष्ट्रीय सम्पदा हैं। देश के आर्थिक विकास के लिए उनका उपयोग ज़रूरी है, लेकिन ये सभी साधन खत्म होने वाले हैं। अगर उनका उपयोग इसी तरह जारी रहा तो वे हमेशा के लिए खत्म हो जाएँगे। ऐसी स्थिति में खनिज संसाधनों का अंधाधुंध शोषण रोकना चाहिए और उनका उपयोग इस तरह करना चाहिए, जिससे वे ज़्यादा से ज़्यादा समय तक उपलब्ध रहें। इसी प्रक्रिया को संरक्षण कहते हैं। संसाधनों का सही उपयोग भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

देश में शक्ति संसाधनों की उपलब्धता, संचित भण्डार और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उनका संरक्षण करना बहुत ज़रूरी है। इस संरक्षण के लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:

1. भारत में शक्ति संसाधनों के भण्डार बहुत सीमित हैं। इसलिए इनका उपयोग ज़रूरी कामों में ही होना चाहिए। मशीनों की नियमित ग्रीसिंग करने से तेल की खपत कम होती है। अगर ज़रूरी हो, तो पुरानी मशीनें बदलकर नई मशीनें लगाई जानी चाहिए।

2. शक्ति संसाधनों; कोयला, खनिज तेल और प्राकृतिक गैस; की लगातार खोज करते रहना चाहिए। नए भण्डारों का पता लगाना भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

3. शक्ति संसाधन बहुत ज़्यादा ज्वलनशील पदार्थ होते हैं; इन्हें आग से बचाने के उपाय किए जाने चाहिए। सुरक्षा उपाय न करने पर बड़े नुकसान हो सकते हैं।

4. कोयले की खुदाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चूरा कम-से-कम हो। चूरे की टिकुलियाँ बनाकर उन्हें उपयोग में लाया जाना चाहिए। इससे कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाएगा।

5. कृषि, उद्योग और परिवहन साधनों तथा घरेलू कामों में शक्ति संसाधनों की मांग लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। इसलिए वैज्ञानिकों को वैकल्पिक शक्ति संसाधनों की खोज करने के प्रयास लगातार करते रहना चाहिए।

6. पेट्रोलियम पदार्थ ढोने वाले टैंकरों और पाइप लाइनों की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। अनुमान है कि एक-एक बूंद के रिसाव से हर साल 500 लीटर तक तेल बर्बाद हो जाता है। छोटे-छोटे रिसाव भी बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।

7. कोयला खदानों में खंभों के रूप में काफी कोयला बेकार छोड़ दिया जाता है; इसलिए खदानों से पूरा कोयला निकालना चाहिए। अगर ज़रूरी हो, तो उसकी टिकुली बना देनी चाहिए।

8. खाना पकाने की गैस (L.PG.), मिट्टी के तेल और बिजली का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग करना चाहिए क्योंकि पेट्रोलियम के भण्डार सीमित हैं। इससे 15% तक पेट्रोल की बचत हो सकती है।

9. कोयला और पेट्रोलियम के भण्डार के उन्नत तरीकों को अपनाकर 15% तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है। ऊर्जा संसाधनों के उपयोग की प्रौद्योगिकी में सुधार कर उपयोग को सीमित किया जा सकता है।

10. यद्यपि ऊर्जा के वैकल्पिक और स्थानापन्न संसाधनों को खोजने के वैज्ञानिक प्रयास किए गए हैं; परन्तु अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं खोजा जा सका है। इसलिए इस ओर खोज और अनुसन्धानों को लगातार जारी रखने की आवश्यकता है।


In simple words: शक्ति के संसाधनों को बचाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वे सीमित हैं और खत्म हो सकते हैं। हमें उनका सही इस्तेमाल करना चाहिए, नए विकल्पों की तलाश करनी चाहिए और उन्हें बर्बाद होने से बचाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वे उपलब्ध रहें।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर प्रश्न होने पर, 'सीमित भण्डार', 'बढ़ती मांग' और 'भविष्य की आवश्यकता' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें। संरक्षण के उपायों को स्पष्ट और बिंदुवार तरीके से बताएं।

 

Question 5. खनिज तेल संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है ?
या
खनिज तेल के संसाधनों के संरक्षण पर टिप्पणी लिखिए।

Answer:

खनिज तेल के संरक्षण के उपाय

खनिज तेल के संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

  • खनन और शोधन के ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जिससे खनिजों की कम से कम हानि हो। इससे संसाधनों की बर्बादी कम होती है।
  • जहाँ तक हो सके, खत्म होने वाले संसाधनों के विकल्पों का प्रयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, सौर या पवन ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना।
  • खनिज तेल और कोयले के विकल्प के रूप में जल-विद्युत तथा परमाणु ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए। ये नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत हैं।
  • खनिज तेल के उपयोग की प्रौद्योगिकी में सुधार कर तेल के उपयोग करने की ऐसी विधि विकसित की जानी चाहिए, जिससे इसकी प्रयोग-क्षमता बढ़ जाए; यानी उतने ही खनिज तेल की ऊर्जा से वर्तमान से ज़्यादा काम हो सके।
  • पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा के स्रोतों के भण्डारण के उन्नत तरीकों को अपनाकर 15% तक ऊर्जा बचाई जा सकती है। अमेरिका, इंग्लैंड, जापान आदि देशों ने इसमें सफलता पाई है।
  • ज़मीन के अंदर और समुद्र तल से खनिज तेल को निकालने के समय होने वाली इसकी बर्बादी को रोका जा सकता है। तेल के शोधन में उन्नत तकनीक का उपयोग करके भी तेल की बर्बादी को रोका जा सकता है।
  • तेल के टैंकों और तेल की पाइप लाइनों को नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए कि कहीं से तेल का रिसाव तो नहीं हो रहा है, क्योंकि बूंद-बूंद तेल के रिसाव से भी एक साल में 500 लीटर तक तेल बर्बाद हो जाता है। तेल के विकल्पों की खोज करने के भी प्रयास होने चाहिए। अगर तेल का कोई पूरक मिल जाए तो तेल का संरक्षण खुद ही हो जाएगा।

In simple words: खनिज तेल को बचाने के लिए हमें इसे कम बर्बाद करना चाहिए, बेहतर तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए, और इसकी जगह जल-विद्युत या परमाणु ऊर्जा जैसे दूसरे ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: खनिज तेल के संरक्षण के उपायों पर लिखते समय, तकनीकी सुधार, वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग और रिसाव रोकने जैसे बिंदुओं को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 6. भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास का विवरण दीजिए।
Answer: भारत में परमाणु ऊर्जा के जनक डॉ० होमी जहाँगीर भाभा थे। सन् 1948 में देश में परमाणु ऊर्जा आयोग का गठन किया गया। सन् 1954 में ट्रॉम्बे (महाराष्ट्र) में भाभा परमाणु शोध संस्थान की स्थापना की गई। यह संस्थान परमाणु ऊर्जा अनुसंधान का केंद्र बना।

भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास के तीन चरण हैं:

  • प्रथम चरण (1948-56 ई०): इसमें 'अप्सरा' नामक रिएक्टर की स्थापना की गई।
  • द्वितीय चरण (1956-66 ई०): इसमें कई तकनीकी सुविधाएँ विकसित की गईं।
  • तृतीय चरण (1966 ई० के बाद): इसमें देश के अलग-अलग स्थानों पर परमाणु शक्ति केंद्र स्थापित किए गए।

देश का पहला परमाणु शक्ति केंद्र मुंबई के पास तारापुर (महाराष्ट्र) में 1969 में स्थापित किया गया। दूसरा परमाणु शक्ति केंद्र कोटा के पास रावतभाटा (राजस्थान) में स्थापित किया गया। तीसरा केंद्र चेन्नई के पास कलपक्कम (तमिलनाडु) में और चौथा केंद्र बुलन्दशहर के पास नरौरा (उत्तर प्रदेश) में स्थापित किया गया। काकरापारा (गुजरात) और कैगा (कर्नाटक) में भी परमाणु शक्ति केंद्र काम कर रहे हैं। वर्तमान समय में देश में कुल चौदह परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन-क्षमता 2,720 मेगावाट है। ये केंद्र देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


In simple words: भारत में परमाणु ऊर्जा का विकास डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने शुरू किया। देश में पहला रिएक्टर 'अप्सरा' था, और अब तारापुर, रावतभाटा, कलपक्कम, नरौरा जैसे कई केंद्र काम कर रहे हैं, जो कुल 2,720 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास का विवरण देते समय, प्रमुख व्यक्तियों (डॉ. भाभा), महत्वपूर्ण वर्षों (आयोग की स्थापना, प्रमुख रिएक्टरों की शुरुआत) और प्रमुख केंद्रों के नामों का उल्लेख करें।

 

Question 7. शक्ति के प्राचीन संसाधन'कोयले के संरक्षण के लिए क्या उपाय अपनाये जाने चाहिए?
Answer: ऊर्जा के संसाधनों में कोयला एक बहुत पुराना संसाधन है। सैकड़ों सालों से कोयले का उपयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा रहा है, जबकि दुनिया में इसके भण्डार सीमित हैं। इसलिए इसके संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए:

  • कोयले की खानों में आग लगने, खान की छत गिरने या खान में पानी भरने से कोयले के भण्डारों को भारी नुकसान होता है। इसलिए खनन-तकनीक में सुधार करके इन हानियों को रोका जा सकता है।
  • कोयले से गर्मी और ऊर्जा प्राप्त करने की तकनीकी को और ज़्यादा विकसित करके इसका संरक्षण किया जा सकता है। बेहतर दक्षता से कम कोयले में ज़्यादा ऊर्जा मिलेगी।
  • कभी-कभी कोयले की खानों में गैसें भरने के कारण विस्फोट हो जाते हैं। अगर इन विस्फोटों से खानों को बचाने के उपाय विकसित किए जाएँ तो कोयले के भण्डार सुरक्षित रहेंगे।
  • जल-विद्युत कभी न खत्म होने वाला ऊर्जा संसाधन है। इसलिए इसका उपयोग बढ़ाकर कोयले का उपयोग सीमित किया जाए। उदाहरण के लिए, पहले ट्रेनें कोयले और डीज़ल से चलती थीं, लेकिन अब कई रास्तों पर जल-विद्युत से ट्रेनें चलाई जाती हैं।
  • ईंधन के रूप में भी कोयले का उपयोग घटाकर उसकी जगह सौर ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और गोबर गैस का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
  • कोयले की खुदाई करते समय ऐसा प्रयास करना चाहिए कि चूरा कम-से-कम हो। कोयले के चूरे को भी उपयोग में लाना चाहिए।
  • खदानों में कोयला खंभों के रूप में पर्याप्त मात्रा में छोड़ दिया जाता है। खदानों से कोयले की ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा का खनन कर लेना चाहिए।
  • कोयले की दहन-भट्टियाँ खुली नहीं होनी चाहिए और उनकी चिमनियाँ ऊंची होनी चाहिए। कोयले से तापीय ऊर्जा प्राप्त करने की तकनीकी को भी और उन्नत करके कोयले का संरक्षण किया जा सकता है।

In simple words: कोयले को बचाने के लिए हमें खनन के तरीकों में सुधार करना चाहिए, ऊर्जा पैदा करने की तकनीकों को बेहतर बनाना चाहिए, जल-विद्युत और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों का ज़्यादा उपयोग करना चाहिए, और कोयले की बर्बादी को रोकना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कोयले के संरक्षण के उपायों पर लिखते समय, खनन सुरक्षा, तकनीकी दक्षता, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और बर्बादी रोकने जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 8. ऊर्जा के परम्परागत तथा गैर-परम्परागत साधनों की तुलना कीजिए।
Answer: परम्परागत तथा गैर-परम्परागत साधनों की तुलना निम्नवत् है:

क्र० सं०परम्परागत साधनगैर-परम्परागत साधन
1.मानव, पशु, ईंधन (लकड़ी), कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत शक्ति, ऊर्जा के परम्परागत साधन हैं।सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो ऊर्जा (कूड़ा-कचरा, मल-मूत्र, गोबर आदि से निर्मित) ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन हैं।
2.ऊर्जा के परम्परागत साधनों को मानव प्राचीन काल से ही उपयोग में ला रहा है।ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का विकास वैज्ञानिक तकनीकी विकास के साथ-साथ हुआ है।
3.जल-विद्युत शक्ति को छोड़कर, अन्य सभी साधन एक बार उपभोग कर लिए जाने के उपरान्त सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं, अर्थात् ये क्षयी संसाधन हैं।ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन नवीकरणीय होते हैं। इनका निरंतर उपयोग किया जाता रहेगा; जैसे-जब तक ब्रह्मांड में सूर्य रहेगा, सौर ऊर्जा अनवरत रूप से प्राप्त होती रहेगी, अर्थात् ये 'अक्षयी संसाधन' हैं।
4.ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग विश्व में व्यापक स्तर पर किया जाता है।ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों की उपलब्धता तो पर्याप्त है, परन्तु उनका उपयोग व्यापक नहीं है।
5.ऊर्जा के ये साधन पर्यावरण-प्रदूषण अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल-विद्युत इसका अपवाद है।ऊर्जा के ये साधन प्रदूषण नहीं फैलाते।

In simple words: परम्परागत ऊर्जा स्रोत (जैसे कोयला, तेल) वे हैं जो खत्म हो जाते हैं और सदियों से उपयोग हो रहे हैं, अक्सर प्रदूषण फैलाते हैं। वहीं, गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत (जैसे सौर, पवन, बायो गैस) कभी खत्म नहीं होते, नए वैज्ञानिक तरीकों से विकसित हुए हैं, और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते।

🎯 Exam Tip: परम्परागत और गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों की तुलना करते समय, 'नवीकरणीय बनाम अनवीकरणीय', 'प्रदूषण', 'उपयोग का इतिहास' और 'तकनीकी विकास' जैसे मुख्य अंतरों पर ध्यान दें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. ऊर्जा संसाधन का क्या महत्त्व है ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जिन पदार्थों से मनुष्य को अपने विभिन्न कार्यों और गतिविधियों को चलाने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है, उन्हें ऊर्जा संसाधन कहते हैं। मनुष्य का कोई भी कार्य ऊर्जा संसाधनों के बिना पूरा नहीं हो सकता। ऊर्जा हमारे जीवन के हर पहलू में महत्वपूर्ण है, चाहे वह घर में बिजली जलाना हो या उद्योग चलाना हो। ये आर्थिक विकास की रीढ़ हैं।


In simple words: ऊर्जा संसाधन वे चीज़ें हैं जिनसे हमें काम करने की शक्ति मिलती है। ये बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके बिना इंसान कोई भी काम नहीं कर सकता, और ये जीवन के हर क्षेत्र के लिए ज़रूरी हैं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संसाधन के महत्व को बताते समय, यह स्पष्ट करें कि वे मनुष्य के दैनिक जीवन और आर्थिक विकास के लिए कितने ज़रूरी हैं।

 

Question 2. ऊर्जा या शक्ति के संसाधन से क्या अभिप्राय है ? [2009, 17]
Answer: जिन पदार्थों से मनुष्य को ऊर्जा की प्राप्ति होती है; यानी ऐसे पदार्थ जिनसे परिवहन व उद्योगों को चलाने की शक्ति प्राप्त होती है; ऊर्जा या शक्ति के साधन कहलाते हैं। ये स्रोत हमारी आधुनिक जीवनशैली का आधार हैं।


In simple words: ऊर्जा या शक्ति के संसाधन वे पदार्थ हैं जिनसे हमें काम करने, वाहन चलाने और उद्योग चलाने के लिए ताकत मिलती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा या शक्ति के संसाधन की परिभाषा में, 'पदार्थ' और 'कार्य शक्ति' (परिवहन, उद्योग) जैसे शब्दों का सटीक उपयोग करें।

 

Question 3. ऊर्जा के चार परम्परागत स्रोतों के नाम लिखिए।
या
ऊर्जा के किन्हीं दो संसाधनों पर प्रकाश झलिए। [2013]

Answer: ऊर्जा के चार परम्परागत स्रोतों के नाम हैं—

  • कोयला,
  • पेट्रोलियम,
  • परमाणु खनिज तथा
  • जल-शक्ति ।

In simple words: ऊर्जा के चार पुराने या परम्परागत स्रोत कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु खनिज और जल-विद्युत हैं।

🎯 Exam Tip: परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के नाम याद करते समय, सबसे आम जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) और प्रमुख नवीकरणीय (जल-शक्ति) और परमाणु ऊर्जा को शामिल करें।

 

Question 4. ऊर्जा के चार गैर-परम्परागत स्रोतों के नाम लिखिए।
Answer: ऊर्जा के चार गैर-परम्परागत स्रोतों के नाम हैं -

  • सौर ऊर्जा,
  • भू-तापीय ऊर्जा,
  • पवन ऊर्जा तथा
  • ज्वारीय ऊर्जा ।

In simple words: ऊर्जा के चार नए या गैर-परम्परागत स्रोत सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा हैं, जो पर्यावरण के लिए अच्छे हैं।

🎯 Exam Tip: गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के नाम याद करते समय, उन स्रोतों पर ध्यान दें जो नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल हैं, जैसे सूर्य, हवा, पृथ्वी की गर्मी और समुद्र की लहरें।

 

Question 5. सौर ऊर्जा के दो गुण लिखिए। या सौर ऊर्जा के दो महत्त्व बताइट । [2015]
Answer: सौर ऊर्जा के दो गुण निम्नलिखित हैं—

  • यह ऊर्जा का अक्षय स्रोत तथा नवीकरण योग्य साधन है, यानी यह कभी खत्म नहीं होता और इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • यह प्रदूषण-मुक्त है, यानी इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता और यह स्वच्छ ऊर्जा है।

In simple words: सौर ऊर्जा के दो फायदे हैं: यह कभी खत्म नहीं होती और इससे कोई प्रदूषण नहीं होता।

🎯 Exam Tip: सौर ऊर्जा के गुणों पर प्रश्न होने पर, 'अक्षय/नवीकरणीय' और 'प्रदूषण-मुक्त' गुणों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं।

 

Question 6. भारत के पूर्वी तट पर स्थित दो तेलशोधनशालाओं के नाम लिखिए।
Answer: भारत के पूर्वी तट पर स्थित दो तेलशोधनशालाएँ हैं-

  • डिगबोई (असोम) तथा
  • हल्दिया (पश्चिम बंगाल)।

In simple words: भारत के पूर्वी तट पर डिगबोई (असोम) और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) नाम की दो तेलशोधनशालाएँ हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के पूर्वी तट पर स्थित तेलशोधनशालाओं के नाम याद करते समय, राज्यों के साथ उनके स्थानों को भी याद रखें।

 

Question 7. भारत के चार परमाणु शक्ति केन्द्रों के नाम बताइए। वे किन राज्यों में स्थित हैं? [2011]
या
भारत में किन्हीं दो परमाणु ऊर्जा केन्द्रों के नाम लिखिए। [20:6, 18]

Answer: भारत के चार परमाणु शक्ति केंद्र निम्नलिखित हैं:

  • तारापुर-महाराष्ट्र
  • रावतभाटा-राजस्थान
  • कलपक्कम-तमिलनाडु
  • नरौरा-उत्तर प्रदेश ।

In simple words: भारत में चार मुख्य परमाणु शक्ति केंद्र हैं: तारापुर महाराष्ट्र में, रावतभाटा राजस्थान में, कलपक्कम तमिलनाडु में और नरौरा उत्तर प्रदेश में।

🎯 Exam Tip: परमाणु शक्ति केंद्रों के नाम और उनके संबंधित राज्यों को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।

 

Question 11. भारत के खनिज तेल उत्पादन के दो क्षेत्रों का नाम व स्थिति सहित उल्लेख कीजिए।
या
भारत में पेट्रो-रसायन के किन्हीं दो केन्द्रों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में खनिज तेल उत्पादन के दो मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:
• बॉम्बे हाई अपतटीय क्षेत्र: यह मुम्बई से लगभग 120 किमी दूर गहरे सागर में स्थित है। यह भारत का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है।
• अंकलेश्वर: यह गुजरात राज्य में नर्मदा नदी पर बड़ौदा से 44 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह गुजरात का एक महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र है।
In simple words: भारत में तेल निकालने के दो बड़े इलाके बॉम्बे हाई और अंकलेश्वर हैं. बॉम्बे हाई समुद्र के अंदर है जबकि अंकलेश्वर गुजरात में है.

🎯 Exam Tip: जब भी किसी क्षेत्र का नाम पूछा जाए, तो उसकी सटीक स्थिति या भौगोलिक पहचान भी बताएँ ताकि उत्तर पूरा लगे।

 

Question 12. 'काला सोना' और 'तरल सोना' किसे कहते हैं ?
Answer: कोयले को 'काला सोना' कहा जाता है क्योंकि यह गहरे काले रंग का होता है और ऊर्जा का एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है, जैसे सोना कीमती होता है। खनिज तेल (पेट्रोलियम) को 'तरल सोना' कहा जाता है क्योंकि यह भी बहुत मूल्यवान ऊर्जा स्रोत है और तरल अवस्था में पाया जाता है। ये दोनों ही देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान देते हैं।
In simple words: कोयला काले रंग का और बहुत कीमती ऊर्जा देता है, इसलिए इसे 'काला सोना' कहते हैं. खनिज तेल भी बहुत कीमती है और तरल होता है, इसलिए इसे 'तरल सोना' कहते हैं.

🎯 Exam Tip: इन शब्दों का उपयोग उनके गुणों और आर्थिक महत्व को दर्शाने के लिए किया जाता है, हमेशा उनके विशिष्ट गुणों के साथ इनका उल्लेख करें।

 

Question 13. परमाणु खनिज किसे कहते हैं ?
Answer: जिन खनिजों से परमाणु शक्ति पैदा होती है, उन्हें परमाणु खनिज कहते हैं। ये खनिज रेडियोधर्मी तत्व होते हैं, जिनके परमाणुओं के विघटन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यूरेनियम और थोरियम इसके मुख्य उदाहरण हैं।
In simple words: जिन पत्थरों से परमाणु ऊर्जा निकलती है, उन्हें परमाणु खनिज कहते हैं. ये ऐसे खनिज होते हैं जो बिजली बनाने या शक्ति पैदा करने के काम आते हैं.

🎯 Exam Tip: परमाणु खनिज ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनकी परिभाषा देते समय 'परमाणु शक्ति की उत्पत्ति' शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य है।

 

Question 14. दो शक्ति के संसाधनों के नामों का उल्लेख कीजिए।
Answer: शक्ति के दो प्रमुख संसाधन निम्नलिखित हैं:
• कोयला
• पेट्रोलियम पदार्थ (खनिज तेल)
ये दोनों ही जीवाश्म ईंधन हैं और ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं, जिनका उपयोग बिजली बनाने, वाहनों को चलाने और उद्योगों में होता है।
In simple words: बिजली पैदा करने और गाड़ियों को चलाने के लिए कोयला और पेट्रोलियम दो मुख्य चीजें हैं.

🎯 Exam Tip: शक्ति के संसाधनों में कोयला और पेट्रोलियम सबसे सामान्य और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले उदाहरण हैं, जिन्हें याद रखना आसान है।

 

Question 15. खनिज तेल को शोधनशालाओं में किन-किन साधनों से भेजा जाता है?
Answer: खनिज तेल को शोधनशालाओं तक मुख्य रूप से टैंकरों और पाइप लाइनों के द्वारा भेजा जाता है। टैंकर बड़े-बड़े जहाज होते हैं जो समुद्र के रास्ते तेल ले जाते हैं, जबकि पाइप लाइनें जमीन के अंदर बिछाई जाती हैं जो सीधे तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती हैं।
In simple words: कच्चा तेल साफ करने की जगहों तक बड़े जहाजों (टैंकरों) और लंबी पाइप लाइनों से पहुंचाया जाता है.

🎯 Exam Tip: तेल परिवहन के इन दो मुख्य साधनों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे कच्चे तेल को बड़े पैमाने पर और कुशलता से ले जाने के प्राथमिक तरीके हैं।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. ऊर्जा का नवीकरण संसाधन है,
(क) परमाणु ऊर्जा
(ख) जल विद्युत
(ग) कोयला
(घ) पेट्रोलियम
Answer: (ख) जल विद्युत
In simple words: जल विद्युत ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है जो कभी खत्म नहीं होता क्योंकि पानी का चक्र लगातार चलता रहता है.

🎯 Exam Tip: नवीकरण संसाधन वे होते हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा लगातार फिर से बन जाते हैं या जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

Question 2. रानीगंज कोयले की खान किस प्रदेश में है? [2011]
(क) बिहार में
(ख) प- बंगाल में
(ग) ओडिशा में
(घ) मध्य प्रदेश में
Answer: (ख) प- बंगाल में
In simple words: रानीगंज की कोयला खदान पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है, जो भारत के पुराने कोयला खनन क्षेत्रों में से एक है.

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों और उनके संबंधित राज्यों को याद रखना अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में सहायक होता है।

 

Question 3. जीवाश्म ईंधन का उदाहरण है
(क) कोयला
(ख) परमाणु खनिज
(ग) जल ऊर्जा
(घ) भूतापीय ऊर्जा
Answer: (क) कोयला
In simple words: कोयला लाखों साल पहले दबे हुए पेड़-पौधों से बनता है, इसलिए इसे जीवाश्म ईंधन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: जीवाश्म ईंधन वे ऊर्जा स्रोत होते हैं जो करोड़ों साल पहले पृथ्वी के नीचे दबे हुए जीवों और वनस्पतियों के अवशेषों से बनते हैं।

 

Question 4. पवन ऊर्जा का उत्पादन किस राज्य में होता है?
(क) गुजरात
(ख) हरियाणा
(ग) पंजाब
(घ) उत्तर प्रदेश
Answer: (क) गुजरात
In simple words: गुजरात भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ पवन ऊर्जा बहुत ज्यादा बनती है क्योंकि यहाँ तेज़ हवाएं चलती हैं.

🎯 Exam Tip: भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे तटीय राज्य बहुत महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 5. कोटा परमाणु शक्ति केन्द्र किस प्रदेश में स्थित है?
(क) राजस्थान
(ख) तमिलनाडु
(ग) महाराष्ट्र
(घ) गुजरात
Answer: (क) राजस्थान
In simple words: कोटा में रावतभाटा नामक जगह पर राजस्थान का परमाणु शक्ति केंद्र बना हुआ है, जो बिजली बनाने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख परमाणु शक्ति केंद्रों के स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे तारापुर (महाराष्ट्र), कलपक्कम (तमिलनाडु) और नरोरा (उत्तर प्रदेश)।

 

Question 6. डिगबोई तेल क्षेत्र किस राज्य में है?
(क) त्रिपुरा
(ख) असोम
(ग) गुजरात
(घ) महाराष्ट्र
Answer: (ख) असोम
In simple words: डिगबोई, जो भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र है, असोम राज्य में स्थित है.

🎯 Exam Tip: डिगबोई भारत में तेल उत्पादन का ऐतिहासिक केंद्र है, और इसका संबंध असोम राज्य से हमेशा याद रखें।

 

Question 7. कलपक्कम में निम्नलिखित में से क्या स्थापित है? [2012]
(क) तेलशोधन केन्द्र
(ख) जल-विद्युत केन्द्र
(ग) परमाणु ऊर्जा केन्द्र
(घ) तापविद्युत केन्द्र
Answer: (ग) परमाणु ऊर्जा केन्द्र
In simple words: कलपक्कम में एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है जो बिजली बनाने के लिए परमाणु शक्ति का उपयोग करता है.

🎯 Exam Tip: परमाणु ऊर्जा केंद्र अक्सर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं जहाँ पानी की उपलब्धता अच्छी होती है, क्योंकि रिएक्टर को ठंडा करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है।

 

Question 8. अंकलेश्वर प्रसिद्ध है [2012]
(क) कोयले के लिए ।
(ख) खनिज तेल के लिए।
(ग) परमाणु ऊर्जा के लिए
(घ) जल-विद्युत के लिए
Answer: (ख) खनिज तेल के लिए।
In simple words: अंकलेश्वर गुजरात में खनिज तेल के उत्पादन के लिए जाना जाता है, जो देश के महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों में से एक है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न खनिज क्षेत्रों को उनकी विशेषता (किस खनिज के लिए वे प्रसिद्ध हैं) के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. झरिया प्रसिद्ध है [2010, 16]
(क) कोयले के लिए
(ख) ताँबे के लिए ।
(ग) बॉक्साइट के लिए,
(घ) लौह-अयस्क के लिए
Answer: (क) कोयले के लिए
In simple words: झरिया, जो झारखंड में है, अपने बड़े कोयला भंडार और खनन के लिए प्रसिद्ध है.

🎯 Exam Tip: झरिया भारत की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है, इसलिए इसका संबंध कोयला उत्पादन से याद रखें।

 

Question 10. निम्नलिखित में से किससे मुम्बई हाई' सम्बन्धित है? [2013]
(क) पर्वत शिखर
(ख) बन्दरगाह
(ग) खनिज तेल
(घ) पर्यटन
Answer: (ग) खनिज तेल
In simple words: मुंबई हाई अरब सागर में स्थित एक जगह है जहाँ से भारत के लिए बहुत सारा खनिज तेल निकाला जाता है.

🎯 Exam Tip: 'बॉम्बे हाई' या 'मुंबई हाई' का नाम सुनते ही आपको खनिज तेल उत्पादन क्षेत्र याद आना चाहिए, जो भारत का एक प्रमुख ऑफशोर तेल क्षेत्र है।

 

Question 11. भारत में कोयला उत्पादन में प्रथम स्थान है [2017]
(क) झारखण्ड का
(ख) बिहार का
(ग) मध्य प्रदेश का
(घ) आन्ध्र प्रदेश का
Answer: (क) झारखण्ड का
In simple words: झारखंड राज्य भारत में सबसे ज्यादा कोयला पैदा करता है.

🎯 Exam Tip: राज्यों के हिसाब से प्रमुख खनिज उत्पादकों को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा संसाधन नहीं है? [2017]
(क) जल
(ख) पेट्रोलियम
(ग) कोयला
(घ) मैंगनीज
Answer: (घ) मैंगनीज
In simple words: मैंगनीज एक धातु है जिसका उपयोग इस्पात बनाने में होता है, यह सीधे ऊर्जा का स्रोत नहीं है.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संसाधन वे होते हैं जिनसे सीधे ऊर्जा प्राप्त होती है, जबकि मैंगनीज जैसे खनिज अन्य उद्योगों में उपयोग होते हैं।

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