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Detailed Chapter 6 आर्थिक नियोजन UP Board Solutions for Class 10 Social Science
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Class 10 Social Science Chapter 6 आर्थिक नियोजन UP Board Solutions PDF
विरतृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भारत की पंचवर्षीय योजनाओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ देश के समग्र विकास के लिए स्वतंत्रता के बाद शुरू की गईं। अब तक दस योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और ग्यारहवीं योजना चल रही है। इन योजनाओं के मुख्य उद्देश्य और उपलब्धियाँ नीचे दिए गए हैं:
प्रथम योजना (1951-56 ई०)
यह योजना तीन मुख्य लक्ष्यों के साथ शुरू की गई थी:
1. देश के बँटवारे के कारण हुई आर्थिक समस्याओं को सुलझाना।
2. देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित बनाना।
3. उत्पादन बढ़ाकर लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करना और धन के वितरण में समानता लाना।
इस योजना में कृषि के विकास को सबसे पहले रखा गया था। इस दौरान देश की आर्थिक प्रगति अच्छी रही। राष्ट्रीय आय उम्मीद से ज्यादा बढ़ी। कृषि उत्पादन भी भूमि सुधार कार्यक्रमों के कारण बढ़ा। औद्योगिक उत्पादन में 40% की वृद्धि हुई। चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवहन के क्षेत्र में भी विकास हुआ, जिससे औद्योगिक विकास की नींव तैयार हुई।
In simple words: भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू हुई। इसका मुख्य लक्ष्य कृषि को बढ़ावा देना, देश को आर्थिक रूप से स्थिर करना और लोगों का जीवन स्तर सुधारना था। यह योजना काफी सफल रही।
🎯 Exam Tip: जब भी आप किसी योजना का विवरण दें, उसके उद्देश्य, प्राथमिकताएँ और मुख्य उपलब्धियाँ ज़रूर बताएँ।
द्वितीय योजना (1956-61 ई०)
इस योजना में औद्योगिक विकास पर खास जोर दिया गया। इसमें बड़े और बुनियादी उद्योगों की स्थापना की गई। रोजगार बढ़ाना और आर्थिक असमानताओं को कम करना इसके अन्य लक्ष्य थे। हालांकि, इस दौरान खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। राष्ट्रीय आय भी उम्मीद से कम बढ़ी, और भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। इस योजना ने देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया।
In simple words: दूसरी योजना का मुख्य ध्यान उद्योग बढ़ाने पर था, खासकर बड़े उद्योगों पर। यह रोजगार भी बढ़ाना चाहती थी, लेकिन खाद्यान्न उत्पादन कम रहा और देश को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
🎯 Exam Tip: दूसरी योजना को अक्सर 'उद्योग योजना' के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसने भारी उद्योगों पर बहुत जोर दिया था।
तृतीय योजना (1961-66 ई०)
इस योजना का लक्ष्य खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाना, बुनियादी उद्योगों का विस्तार करना, मशीनरी उद्योग स्थापित करना और बेरोजगारी को दूर करना था। हालांकि, ये सभी लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं हो सके। चीन और पाकिस्तान के हमलों के कारण देश का विकास रुकावटों से भरा रहा। इस योजना काल में कुछ ही सफलताएँ मिल पाईं।
In simple words: तीसरी योजना में भारत खुद अनाज पैदा करना चाहता था, उद्योग बढ़ाना चाहता था और बेरोजगारी खत्म करना चाहता था। लेकिन युद्धों के कारण ये लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए, जिससे बहुत कम सफलता मिली।
🎯 Exam Tip: यह योजना युद्धों और सूखे जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करने के कारण अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पाई थी।
तीन वार्षिक योजनाएँ (1966-69 ई०)
सन् 1966 से 1969 तक तीन साल के लिए पंचवर्षीय योजनाओं को रोक दिया गया था और तीन वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं। इन वार्षिक योजनाओं के दौरान संसाधनों की कमी रही, जिससे विकास की गति धीमी हो गई।
In simple words: 1966 से 1969 तक पंचवर्षीय योजनाएँ रुक गईं और तीन एक साल की योजनाएँ बनीं। इस समय पैसों की कमी थी, जिससे देश का विकास धीमा हो गया।
🎯 Exam Tip: 'योजना अवकाश' (Plan Holiday) इसी अवधि को कहा जाता है, जो मुख्य रूप से युद्ध और सूखे के कारण हुआ था।
चौथी योजना (1969-74 ई०)
इस योजना के लक्ष्य विकास की गति को तेज करना, कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव को कम करना, विदेशी मदद पर निर्भरता घटाना, लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठाना, गरीब लोगों की स्थिति सुधारना और धन तथा आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना था। हालांकि, ये सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। निर्यात के क्षेत्र में कुछ वृद्धि जरूर हुई। इस योजना ने आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
In simple words: चौथी योजना का उद्देश्य तेजी से विकास करना, कृषि को स्थिर करना, विदेशी निर्भरता कम करना और गरीबी हटाना था। कुछ लक्ष्यों में सफलता मिली, जैसे निर्यात बढ़ाना, लेकिन सभी लक्ष्य पूरे नहीं हुए।
🎯 Exam Tip: चौथी योजना का मुख्य नारा 'स्थिरता के साथ विकास' था, जिसका अर्थ था कि विकास के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को लाभ मिले।
पाँचवीं योजना (1974-79 ई०)
इस योजना के मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों का जीवन स्तर सुधारना, महंगाई को नियंत्रित करना और राष्ट्रीय आय बढ़ाना था। यह योजना एक साल पहले ही, यानी 1978 में समाप्त कर दी गई। इसका मुख्य कारण देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल था। गरीबी उन्मूलन (गरीबी हटाओ) इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
In simple words: पाँचवीं योजना का मकसद देश को आत्मनिर्भर बनाना और गरीबों का जीवन स्तर सुधारना था। राजनीतिक अस्थिरता के कारण इसे एक साल पहले ही खत्म कर दिया गया।
🎯 Exam Tip: यह योजना 'गरीबी हटाओ' के नारे के लिए प्रसिद्ध थी, जिसने भारत की सामाजिक-आर्थिक नीतियों पर गहरा असर डाला।
दो वार्षिक योजनाएँ (1978-79 एवं 1979-80)
इन दो वार्षिक योजनाओं के जरिए पिछले लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश की गई।
In simple words: 1978 और 1979 में दो एक साल की योजनाएँ बनाई गईं ताकि पिछले लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
🎯 Exam Tip: ये योजनाएँ पांचवीं योजना के जल्दी समाप्त होने के बाद बनाई गईं और इन्हें 'रोलिंग प्लान' भी कहा जाता है।
छठी योजना (1980-85 ई०)
इस योजना में कृषि और उद्योगों के बुनियादी ढांचे को एक साथ विकसित करना, रोजगार के अवसर पैदा करना, गरीबी दूर करना, परिवार नियोजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना लक्ष्य था। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर अधिक ध्यान दिया गया। संतुलित आर्थिक विकास के कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन जनसंख्या की तेज वृद्धि के कारण ये सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। इस योजना ने सातवीं पंचवर्षीय योजना के लिए एक अच्छा माहौल तैयार किया।
In simple words: छठी योजना का लक्ष्य कृषि और उद्योग को बढ़ाना, रोजगार देना, गरीबी हटाना और जनसंख्या नियंत्रण था। जनसंख्या बढ़ने के कारण सभी लक्ष्य पूरे नहीं हुए।
🎯 Exam Tip: छठी योजना ने गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिला।
सातवीं योजना (1985-90 ई०)
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य थे: सुनियोजित विकास, लोगों के जीवन स्तर में सुधार, उत्पादन में वृद्धि, कमजोर वर्गों की सुरक्षा, गरीबी दूर करना, रोजगार बढ़ाना, निर्यात बढ़ाना, पर्यावरण प्रदूषण कम करना, ऊर्जा, परिवहन, संचार जैसे क्षेत्रों का विस्तार करना और आवासों के निर्माण में वृद्धि करना। यह योजना निश्चित रूप से सफल रही।
In simple words: सातवीं योजना ने व्यवस्थित विकास, लोगों का जीवन स्तर सुधारने, उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया। यह योजना काफी सफल रही।
🎯 Exam Tip: सातवीं योजना में भोजन, कार्य और उत्पादकता पर जोर दिया गया था, जिसने समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया।
दो वार्षिक योजनाएँ (1990-91 एवं 1991-92)
आठवीं पंचवर्षीय योजना को ध्यान में रखते हुए ये वार्षिक योजनाएँ तैयार की गईं। इनका मुख्य उद्देश्य अधिकतम रोजगार प्रदान करना और सामाजिक बदलाव पर जोर देना था।
In simple words: 1990-92 में दो एक साल की योजनाएँ बनीं, जिनका मकसद ज्यादा रोजगार देना और समाज में सुधार लाना था, ताकि आठवीं योजना की तैयारी हो सके।
🎯 Exam Tip: ये योजनाएँ भारत के आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के दौर में बनी थीं, जिससे भविष्य की नीतियों को आकार मिला।
आठवीं योजना (1992-97 ई०)
इस योजना में मानव संसाधन विकास पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए गाँवों में पीने का पानी उपलब्ध कराना, सिर पर मैला ढोने की प्रथा को खत्म करना, पर्यावरण को स्वच्छ रखना, परिवहन, ऊर्जा, सिंचाई का प्रसार करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार तथा समाज कल्याण की योजनाओं का विकास करना मुख्य लक्ष्य थे। हालांकि, ये लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं हो सके। गरीबों और दलितों को उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिल पाया। क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ीं और कृषि विकास के बावजूद पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सका। अन्य बुनियादी क्षेत्रों के लक्ष्य भी अधूरे रहे।
In simple words: आठवीं योजना ने मानव विकास पर बहुत ध्यान दिया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार शामिल थे। हालांकि, सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए, और गरीबों को पूरा लाभ नहीं मिला।
🎯 Exam Tip: आठवीं योजना ने उदारीकरण और वैश्वीकरण के दौर में मानव विकास को प्राथमिकता दी, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव था।
Question 2. भारत में आर्थिक नियोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत में आर्थिक नियोजन देश के तेजी से आर्थिक विकास के लिए किया गया। इसका मकसद देश के सीमित संसाधनों का सही इस्तेमाल करके निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करना है। भारत में आर्थिक नियोजन के मुख्य उद्देश्य ये हैं:
- उपलब्ध सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम प्रयोग: भारत में प्राकृतिक संसाधन बहुत हैं, लेकिन उनका अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं हुआ है। आर्थिक नियोजन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारे सभी संसाधनों का सही और सबसे अच्छा इस्तेमाल हो सकेगा।
- राष्ट्रीय आय में वृद्धि: भारत एक घनी आबादी वाला देश है। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से यह दुनिया के गरीब देशों में आता है। राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए आर्थिक नियोजन बहुत ज़रूरी है।
- धन का समान वितरण: भारत में राष्ट्रीय आय के वितरण में क्षेत्रीय असमानताएँ ज्यादा हैं। योजनाबद्ध विकास से धन का न्यायपूर्ण और समान वितरण संभव है। समाजवादी नियोजन आर्थिक समानता के सिद्धांत पर आधारित होता है।
- आत्मनिर्भरता: हालाँकि दुनिया का कोई भी देश पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है, फिर भी भारत आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। यह काम आर्थिक नियोजन के ज़रिए ही संभव है। जब देश खुद अपने संसाधनों पर निर्भर करता है, तो वह ज्यादा मजबूत बनता है।
In simple words: आर्थिक नियोजन का मतलब है देश के पास जो संसाधन हैं, उनका सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना। इसके मुख्य उद्देश्य हैं देश की आय बढ़ाना, संसाधनों को सही से बाँटना, और देश को किसी और पर निर्भर न होकर खुद के पैरों पर खड़ा करना।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन के उद्देश्यों को याद रखने के लिए, आप 'चार मुख्य स्तंभ' – संसाधन उपयोग, आय वृद्धि, समानता और आत्मनिर्भरता – पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
Question 3. दसवीं पंचवर्षीय योजना पर एक लेख लिखिए।
Answer:
दसवीं पंचवर्षीय योजना (सन् 2002-2007 ई०)
राष्ट्रीय विकास परिषद् (NDC) ने 1 सितंबर, 2001 को अपनी 49वीं बैठक में दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007 ई०) के लिए अपनी मंजूरी दी। इस योजना के मुख्य उद्देश्य (प्राथमिकताएँ) नीचे दिए गए हैं:
- सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GDP) की वार्षिक वृद्धि दर का लक्ष्य 8% प्राप्त करना।
- उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर 10% वार्षिक करना।
- गरीबी अनुपात को 2007 तक 20% और 2012 तक 10% पर लाना।
- वर्ष 2007 तक सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना।
- 2001-11 के दशक में जनसंख्या की दशकीय वृद्धि को 16.2% तक सीमित रखना।
- साक्षरता दर को 2007 तक 72% और 2012 तक 80% करना।
- सन् 2012 तक सभी गाँवों में स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था करना।
- श्रम-शक्ति को लाभकारी रोजगार उपलब्ध कराना।
- शिशु मृत्यु दर को प्रति हजार जीवित जन्मों पर 45 तक कम करना।
- वनों और वृक्षों से घिरे क्षेत्र को 25% तक बढ़ाना।
- सभी मुख्य नदियों की सफाई करना।
- सकल बजटीय समर्थन में 18.3% वार्षिक वृद्धि करना, ताकि 2007 तक यह GDP के 5% तक पहुँच सके।
- GDP के प्रतिशत के रूप में सकल कर राजस्व (डीजल उपकर सहित) को 2001-02 के 9.16% से बढ़ाकर 2006-07 तक 11.7% करना।
- 'सेवा कर' के दायरे को बढ़ाना।
- विनिवेश में वृद्धि करना (2002-05 की अवधि में 16-17 हजार करोड़ रुपये की वार्षिक निवेश प्राप्तियाँ)।
- राजकोषीय घाटे को GDP के 5% से घटाकर 2.5% तक लाना।
In simple words: दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007) का लक्ष्य देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाना, गरीबी और बेरोजगारी कम करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ाना था। यह योजना कई क्षेत्रों में सफल रही, जैसे उद्योगों और सेवाओं में वृद्धि, लेकिन कृषि में गिरावट आई।
🎯 Exam Tip: दसवीं योजना के लक्ष्यों और उपलब्धियों को याद करते समय, GDP वृद्धि दर, गरीबी घटाने के लक्ष्य और शिक्षा तथा स्वास्थ्य के उद्देश्यों पर विशेष ध्यान दें।
Question 4. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
Answer: भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का मुख्य लक्ष्य स्वतंत्रता के बाद देश को तेजी से आर्थिक रूप से विकसित करना था। इसके लिए 1950 में योजना आयोग की स्थापना की गई। भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इसके अध्यक्ष थे। भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1951 को शुरू हुई। भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्य निम्नलिखित रहे हैं:
- उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग: भारत के पास सीमित संसाधन हैं जिनका पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। इसलिए, योजनाओं का मुख्य पहलू यह है कि इन संसाधनों का अधिकतम और सबसे अच्छा उपयोग हो।
- राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि: देश से गरीबी मिटाने के लिए हर योजना में राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
- जनसंख्या-वृद्धि पर नियंत्रण: देश में तेजी से बढ़ती आबादी विकास में सबसे बड़ी रुकावट है। इसलिए, हर योजना में जनसंख्या वृद्धि को रोकने की कोशिश की गई है।
- लोगों के जीवन स्तर में सुधार: राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर और जन्म दर कम करके लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठाना योजनाओं का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा है। इससे समाज में खुशहाली आती है।
- समाजवादी समाज की स्थापना: भारत की पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य एक समाजवादी समाज बनाना था। इसका मतलब यह था कि आर्थिक विकास का लाभ कुछ लोगों तक ही सीमित न रहे, बल्कि समाज के गरीब और पिछड़े लोगों को ज्यादा से ज्यादा मिले।
- सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार: भारत सरकार की नीति सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा देने की रही है। सरकारी क्षेत्र में इस्पात, रसायन, उर्वरक, तेल जैसे कारखाने स्थापित किए गए। परिवहन और संचार सेवाएँ, सिंचाई, सरकारी खरीद-बिक्री, बैंक और बीमा की सरकारी सेवाएँ भी इसी उद्देश्य से प्रदान की गईं।
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि: नियोजन के दौरान नए उद्योग स्थापित करके, पुराने उद्योगों और कृषि को सुधारकर, सरकारी कारखानों की संख्या बढ़ाकर और कुटीर उद्योगों का विस्तार करके रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया, ताकि बेरोजगारी कम हो।
- आर्थिक समानता लाना: योजनाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि उनका लाभ समाज के पिछड़े और गरीब लोगों तक ज्यादा से ज्यादा पहुँचे। इससे आर्थिक असमानता कम होगी, क्योंकि सरकार ही कमजोर वर्गों का कल्याण कर सकती है।
- जन-सुविधाओं का विस्तार: आर्थिक समानता लाने के लिए देश के पिछड़े क्षेत्रों, गाँवों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए अच्छी भोजन, वस्त्र, मकान, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पक्की सड़कें जैसी जन-सुविधाओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
- कल्याणकारी राज्य की स्थापना: देश की योजनाओं का उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य स्थापित करना है। खासकर पाँचवीं और छठी योजना में न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम पर जोर दिया गया था, ताकि गरीबों को उचित मूल्य पर वस्तुएँ मिलें, मजदूरी और कीमतों में संतुलन रहे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने का पानी, आवास और वृद्धावस्था जैसी समस्याओं में सहायता मिले।
- आत्मनिर्भरता की प्राप्ति: योजना की शुरुआत से ही देश में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का उद्देश्य रहा है। तीसरी योजना के दौरान इस पर विशेष जोर दिया गया कि देश बिना विदेशी सहायता के अपने पैरों पर खड़ा होकर आर्थिक विकास करे।
In simple words: पंचवर्षीय योजनाओं का लक्ष्य देश के संसाधनों का सही इस्तेमाल करके राष्ट्रीय आय बढ़ाना, जनसंख्या को नियंत्रित करना और लोगों का जीवन स्तर सुधारना है। साथ ही, समाजवादी समाज बनाना, सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ाना, रोजगार देना, आर्थिक समानता लाना, जन-सुविधाएँ बढ़ाना और देश को आत्मनिर्भर बनाना भी इसके मुख्य उद्देश्य हैं।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यों में आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता जैसे पहलू भी शामिल हैं, इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. आर्थिक नियोजन की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
Answer: आर्थिक नियोजन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- निश्चित उद्देश्य के लिए: आर्थिक नियोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह हमेशा सोच-समझकर किया जाता है और इसका एक निश्चित उद्देश्य होता है। ये उद्देश्य अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे आर्थिक विकास की गति तेज करना या पूर्ण रोजगार प्राप्त करना।
- केन्द्रीय नियोजन सत्ता: नियोजन के लिए यह आवश्यक है कि देश में एक केंद्रीय सत्ता हो, जो योजना का काम करे। भारत में योजना आयोग यह काम करता था, जो अब नीति आयोग बन गया है।
- संपूर्ण नियोजन: नियोजन पूरी अर्थव्यवस्था का होता है। यह केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, यानी नियोजन आंशिक नहीं होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि सभी क्षेत्र एक साथ विकसित हों।
- साधनों का विवेकपूर्ण विभाजन: आर्थिक नियोजन के तहत देश के सीमित संसाधनों को इस तरह से बांटा जाता है, जिससे समाज का कल्याण अधिक से अधिक हो। यह संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करता है।
- नियोजन उत्पादन तक ही सीमित नहीं: एक नियोजित अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साथ-साथ वितरण का भी नियोजन किया जाता है। नियोजन जहाँ यह तय करता है कि क्या और कितना उत्पन्न किया जाए, वहीं यह भी तय करता है कि वह किसके बीच बांटा जाए।
- नियंत्रण आवश्यक: अपने उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में नियंत्रण लगाना जरूरी है। यह सुनिश्चित करता है कि योजनाएँ सही रास्ते पर चलें।
- जनसहयोग आवश्यक: आर्थिक नियोजन की सफलता के लिए जनता का सहयोग बहुत ज़रूरी है। जनता के सहयोग के बिना आर्थिक नियोजन की प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती। लोगों की भागीदारी इसे मजबूत बनाती है।
- दीर्घकालीन प्रक्रिया: आर्थिक नियोजन एक लंबी प्रक्रिया है। यह तभी सफल होती है, जब इसकी योजना लगातार और लंबे समय के लिए बनाई जाए। इसमें भविष्य की सोच शामिल होती है।
In simple words: आर्थिक नियोजन की खास बातें हैं कि इसके तय लक्ष्य होते हैं, एक केंद्रीय संस्था इसे चलाती है, यह पूरी अर्थव्यवस्था के लिए होता है, संसाधनों का सही बंटवारा करता है, उत्पादन और वितरण दोनों को देखता है, नियंत्रण रखता है, लोगों का सहयोग चाहता है और यह एक लंबी प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन की विशेषताओं को याद करते समय, 'दीर्घकालीन सोच' और 'जनसहयोग' जैसे पहलुओं पर जोर देना न भूलें, क्योंकि ये इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 6. नवीं पंचवर्षीय योजना के उद्देश्य, वित्त-व्यवस्था एवं उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
Answer:
नवीं पंचवर्षीय योजना (सन् 1997-2002 ई०)
नवीं पंचवर्षीय योजना 1997 में शुरू हुई और 2002 तक चली। इस योजना के उद्देश्य (प्राथमिकताएँ) निम्नलिखित थे:
- पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करना।
- कृषि एवं ग्रामीण विकास करना।
- गरीबी खत्म करना।
- सभी के लिए स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराना।
- प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना।
- सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करना।
- आवास सुविधाओं सहित न्यूनतम आवश्यकताओं की समय पर आपूर्ति।
- जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण रखना।
- महिलाओं व दलित वर्ग का उत्थान करना।
- कीमतों में स्थिरता बनाए रखना।
- आठवीं पंचवर्षीय योजना में सकल घरेलू उत्पाद की दर लगभग 6.7% थी, जो नवीं योजना में घटकर 5.35% हो गई।
- नवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास दर आठवीं पंचवर्षीय योजना के 4.7% से घटकर 2.1% रह गई, जबकि संशोधित लक्ष्य 3.7% का था।
- नवीं योजना में सार्वजनिक क्षेत्र में खर्च का आकार 18% घटा दिया गया।
- नवीं योजना में विनिर्माण क्षेत्र में विकास-दर आठवीं योजना के 7.6% से घटकर 4.5% रह गई, जबकि लक्ष्य 8.2% का था।
- नवीं योजना बचत एवं निवेश के लक्ष्यों को भी प्राप्त नहीं कर सकी। सकल घरेलू उत्पाद में बचत-दर 23.3% रही, जबकि लक्ष्य 26.3% का था। इसी प्रकार सकल घरेलू उत्पाद में निवेश-दर 24.2% रही, जबकि लक्ष्य 28.3% का था।
- नवीं योजना में बेरोजगारी की दर में भी वृद्धि हुई।
- नवीं योजना में कर और सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में कमी आई, परन्तु खर्च और सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में तुलनात्मक रूप से अधिक वृद्धि हुई।
- नवीं योजना निर्यात-क्षेत्र में भी असफल रही। 11.8% वृद्धि के लक्ष्य की तुलना में निर्यातों में मात्र 5% की वृद्धि हुई।
In simple words: नवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) का उद्देश्य रोजगार पैदा करना, गरीबी हटाना और ग्रामीण विकास था। हालांकि, यह योजना अपने कई लक्ष्यों को पूरा करने में असफल रही, खासकर GDP वृद्धि, कृषि विकास और निर्यात के मामले में।
🎯 Exam Tip: नवीं योजना की विफलताओं को याद करते समय, कृषि विकास दर में गिरावट और बेरोजगारी में वृद्धि जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 7. भारतीय आर्थिक नियोजन की उपलब्धियों पर निबन्ध लिखिए।
Answer: भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-52 में शुरू हुई थी। नियोजित विकास के वर्षों के दौरान देश के आर्थिक विकास के प्रमुख तथ्य निम्नलिखित हैं:
- विकास दर: कुछ पंचवर्षीय योजनाओं को छोड़कर, हमने निर्धारित विकास दर को प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। पहली योजना के दौरान विकास दर 3.6% वार्षिक थी, जबकि लक्ष्य 2.1% वार्षिक का था। इसी प्रकार नवीं योजना में प्राप्त आर्थिक विकास की दर का लक्ष्य 9 प्रतिशत था। योजनाओं ने देश को धीरे-धीरे एक मजबूत आर्थिक आधार दिया है।
- राष्ट्रीय आय: शुद्ध राष्ट्रीय आय में 6.8 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2010-11 में राष्ट्रीय आय (चालू मूल्यों पर) ₹ 64,66,860 करोड़ थी। इस प्रकार, पूरे योजना-काल में शुद्ध राष्ट्रीय आय में लगातार वृद्धि हुई है।
- प्रति व्यक्ति आय: इसमें चार गुना वृद्धि हुई है। जनसंख्या में तेज वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि-दर उम्मीद से कम ही रही है।
- सकल घरेलू उत्पाद: सकल घरेलू उत्पाद में 6.9 गुना वृद्धि हुई है।
- खाद्यान्न उत्पादन: यह 1950-51 में 550 लाख टन से बढ़कर 2003-04 में 2,135 लाख टन हो गया है। वाणिज्यिक फसलों में भी उम्मीद से ज्यादा वृद्धि हुई है।
- सिंचाई क्षमता: 1950-51 में बड़ी, मझोली और छोटी योजनाओं की कुल क्षमता 2 करोड़ 26 लाख हेक्टेयर थी, जो दसवीं योजना की मध्यावधि तक 8 करोड़ 93 लाख 10 हजार हेक्टेयर तक पहुँच गई।
- विद्युत उत्पादन-क्षमता: 11वीं योजना में 62,374 मेगावाट के संशोधित क्षमता निर्माण के लक्ष्य के मुकाबले 54,964 मेगावाट क्षमता बढ़ाई जा चुकी है, जिसमें केंद्रीय क्षेत्र में 15,220 मेगावाट, राज्य क्षेत्र में 16,732 मेगावाट और निजी क्षेत्र में 23,012 मेगावाट रहा। यह 10वीं योजना के मुकाबले ढाई गुना अधिक है। 2012 में प्रतिस्थापित विद्युत क्षमता 1400 मेगावाट थी जो 31 मई, 2012 को बढ़कर 20297.03 मेगावाट हो गई, जिसमें 39,060.40 मेगावाट जल विद्युत, 134,635.18 मेगावाट तापीय (गैस और डीजल सहित) बिजली, 4780.00 मेगावाट परमाणु ऊर्जा और 24,503.45 मेगावाट पवन सहित नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है।
- औद्योगिक विकास: 1948 में औद्योगिक नीति प्रस्ताव के साथ औद्योगिक विकास कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया। 1956 की औद्योगिक नीति में भी सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई, और निजी क्षेत्र के विकास की व्यवस्था की गई। 1993 की औद्योगिक नीति के बाद भारतीय उद्योगों को मजबूती मिली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की प्रक्रिया तेज हुई। 2001 से औद्योगिक नीति को अधिक उदार बनाया जा रहा है। अधिकांश उद्योगों में लाइसेंस व्यवस्था खत्म कर दी गई है। रक्षा, पेट्रोलियम, परमाणु, खनिज और रेल क्षेत्रों को छोड़कर सभी उद्योगों को लाइसेंस मुक्त कर दिया गया है। विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा मिला है, जिसके परिणामस्वरूप सभी उद्योगों में उत्पादन बढ़ा है।
- परिवहन एवं संचार: परिवहन और संचार के क्षेत्र में योजना-काल में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रेलवे लाइनों की लंबाई 76,197 किमी, सड़कों की लंबाई 33 लाख किमी और जहाजरानी की क्षमता 6.28 लाख G.R.T. हो गई है। हवाई परिवहन, बंदरगाहों की स्थिति और आंतरिक जलमार्गों को भी विकसित किया गया है। संचार-व्यवस्था के अंतर्गत डाकखानों, टेलीफोन, टेलीग्राफ, रेडियो स्टेशन और प्रसारण केंद्रों की संख्या में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ: योजना-काल में शिक्षा का भी व्यापक प्रसार हुआ है। भारत में साक्षरता की दर 1951 में 16.7% थी, जो 2011 में 74.04% हो गई। इसी प्रकार योजना-काल में देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- बैंकिंग संरचना: योजना-काल में बैंकिंग संरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 30 जून, 1969 को व्यापारिक बैंकों की शाखाओं की संख्या 8,262 थी, जो 30 जून, 2004 को बढ़कर 67,283 हो गई। राष्ट्रीयकरण के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग शाखाओं का व्यापक विस्तार हुआ है।
- आत्मनिर्भरता: हमारा देश योजना-काल में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। पहले जिन वस्तुओं का आयात किया जाता था, आज वे वस्तुएँ हमारे देश में ही बनने लगी हैं। खाद्यान्न उत्पादन में हमारा देश लगभग आत्मनिर्भर हो चुका है और विदेशी सहायता में भी कमी आई है।
- सामाजिक न्याय: हमारे देश में आर्थिक नियोजन का लक्ष्य 'सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास' रहा है। योजना-काल में समाज के गरीब वर्ग के उत्थान के लिए और गरीबी व बेरोजगारी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएँ चलाई गई हैं, जिनके अच्छे परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं।
In simple words: भारतीय आर्थिक नियोजन ने देश की विकास दर, राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय और सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाया है। खाद्यान्न, सिंचाई, बिजली, उद्योग, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण तरक्की हुई है। देश आत्मनिर्भर बना है और सामाजिक न्याय की दिशा में भी काम हुआ है।
🎯 Exam Tip: उपलब्धियों का वर्णन करते समय, प्रमुख आर्थिक संकेतकों (जैसे GDP, राष्ट्रीय आय) और महत्वपूर्ण क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, शिक्षा) में हुई प्रगति को आंकड़ों के साथ प्रस्तुत करें।
Question 8. बारहवीं पंचवर्षीय योजना का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
Answer: बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) भारत की यह योजना अक्टूबर 2011 में तब शुरू हुई जब इसके 'दृष्टि पत्र' (Approach Paper) को राष्ट्रीय विकास परिषद् (NDC) ने मंजूरी दी। यह योजना 1 अप्रैल, 2012 से शुरू हुई। इस दृष्टि पत्र को योजना आयोग की 20 अगस्त, 2011 की बैठक में स्वीकार किया गया था और केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने इसे 15 सितंबर, 2011 को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विकास परिषद् की नई दिल्ली में 22 अक्टूबर, 2011 को हुई 56वीं बैठक में इस दृष्टि पत्र को कुछ शर्तों के साथ स्वीकार किया गया। राज्यों द्वारा सुझाए गए कुछ बदलावों को योजना दस्तावेज बनाते समय योजना आयोग द्वारा शामिल किया जाना था। 12वीं पंचवर्षीय योजना में वार्षिक विकास दर का लक्ष्य 9 प्रतिशत रखा गया है। प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में राज्यों के सहयोग की उम्मीद जताई है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कृषि, उद्योग और सेवाओं के क्षेत्र में क्रमशः 4.0 प्रतिशत, 9.6 प्रतिशत और 10.0 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 38.7 प्रतिशत निवेश दर होना चाहिए। बचत की दर GDP के 36.2 प्रतिशत प्राप्त करने का लक्ष्य दृष्टि पत्र में निर्धारित किया गया है। पिछली 11वीं पंचवर्षीय योजना में निवेश की दर 36.4 प्रतिशत और बचत की दर 34.0 प्रतिशत रहने का अनुमान था। 11वीं पंचवर्षीय योजना में वार्षिक विकास दर 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। 11वीं पंचवर्षीय योजना में थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) में औसत वार्षिक वृद्धि लगभग 6.0 प्रतिशत अनुमानित थी, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में 4.5 – 5.0 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य है। योजना अवधि में केंद्र सरकार को औसत वार्षिक राजकोषीय घाटा GDP के 3.25 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य इस योजना के दृष्टि पत्र में निर्धारित किया गया है। यह योजना समावेशी और सतत विकास को प्राथमिकता देती है।
In simple words: बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) का लक्ष्य 9% वार्षिक विकास दर प्राप्त करना था। इसमें कृषि, उद्योग और सेवाओं में वृद्धि के साथ-साथ उच्च निवेश और बचत दर हासिल करने पर जोर दिया गया था। योजना में महंगाई और राजकोषीय घाटे को भी नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा गया था।
🎯 Exam Tip: 12वीं पंचवर्षीय योजना के मुख्य लक्ष्य 'तेज, अधिक समावेशी और सतत विकास' थे। इसके प्रमुख लक्ष्यों में वृद्धि दर, निवेश, बचत और महंगाई नियंत्रण शामिल थे।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. आर्थिक नियोजन से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: नियोजन का शाब्दिक अर्थ 'पहले से योजना बनाना' है। यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सही आर्थिक विकास और सबसे अधिक सामाजिक कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करना है। आर्थिक नियोजन को इस प्रकार समझाया जा सकता है: आर्थिक नियोजन का मतलब है पहले से तय सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए देश के सभी हिस्सों को एक साथ मिलाकर, संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करने की योजना बनाना और उस पर केंद्रीय नियंत्रण रखना। यह एक तरह का रोडमैप है जो देश को प्रगति के रास्ते पर ले जाता है।
In simple words: आर्थिक नियोजन का मतलब है देश के सभी संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करने की योजना बनाना ताकि आर्थिक विकास हो और सबका भला हो। यह एक तय लक्ष्य के साथ किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन की परिभाषा में 'निश्चित उद्देश्य', 'संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग' और 'केन्द्रीय नियंत्रण' जैसे शब्द शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. पंचवर्षीय योजनाओं से देश को क्या लाभ हुआ है ?
Answer: पंचवर्षीय योजनाओं से देश को निम्नलिखित लाभ हुए हैं:
- उपलब्ध सीमित संसाधनों का सबसे अच्छा और पूरा उपयोग संभव हुआ है।
- कृषि, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उसका विकास हुआ है। कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ने से देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन सका है। वाणिज्यिक फसलों का उत्पादन बढ़ने से कृषि से जुड़े उद्योगों में भी वृद्धि हुई है।
- उद्योगों का विकास हुआ है, जिससे देश की आर्थिक समृद्धि बढ़ी है।
- उद्योगों के योजनाबद्ध विकास से विदेशी व्यापार भी बढ़ा है।
- देश में परिवहन और संचार के साधन, साथ ही ऊर्जा उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
- आर्थिक विकास के कारण रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
- शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी क्षेत्रों में प्रगति के कारण देश का सामाजिक विकास संभव हुआ है।
- देशवासियों का जीवन स्तर ऊँचा उठा है।
- नियोजन के समय में भारत में राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय दोनों में वृद्धि हुई है। इस प्रकार पंचवर्षीय योजनाओं के कारण भारत में तेज आर्थिक विकास हुआ है।
- देश में निवेश की मात्रा और निवेश-दर में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे देश का आर्थिक विकास हुआ है।
- नियोजन के समय में देश के बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई और उसका व्यापक विस्तार हुआ।
- गाँवों का विद्युतीकरण, जल-व्यवस्था और गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों को ऊपर उठाने के प्रयास किए गए, जिसका लाभ समाज के कमजोर लोगों को मिला है।
In simple words: पंचवर्षीय योजनाओं से देश के संसाधनों का सही उपयोग हुआ, कृषि और उद्योगों का विकास हुआ, रोजगार के अवसर बढ़े, परिवहन और संचार मजबूत हुए, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार हुआ। इससे राष्ट्रीय आय बढ़ी, लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठा और देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं के लाभों को बताते समय, आर्थिक (जैसे आय वृद्धि, औद्योगिक विकास) और सामाजिक (जैसे शिक्षा, जीवन स्तर) दोनों तरह की प्रगति को शामिल करें।
Question 3. विभिन्न योजना-काल की प्राथमिकताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत की विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में विकास का उद्देश्य एक समान रहा है, लेकिन अलग-अलग योजनाओं में प्राथमिकताओं को बदला गया। ये प्राथमिकताएँ निम्नलिखित हैं:
- पहली योजना में कृषि विकास को सबसे ऊँची प्राथमिकता दी गई।
- दूसरी योजना में औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई।
- तीसरी योजना में कृषि और उद्योग दोनों को प्राथमिकता दी गई।
- चौथी योजना में कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सबसे ऊँची प्राथमिकता दी गई।
- पाँचवीं योजना में गरीबी उन्मूलन, औद्योगिक विकास और खनन को प्राथमिकता दी गई।
- छठी योजना में गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता को मुख्य लक्ष्य रखा गया।
- सातवीं योजना में बुनियादी वस्तुओं के उत्पादन को प्राथमिकता दी गई।
- आठवीं योजना में रोजगार वृद्धि को प्राथमिकता दी गई।
- नवीं योजना में मानव संसाधनों के विकास पर विशेष बल दिया गया।
- दसवीं योजना में सभी को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
- ग्यारहवीं योजना का मुख्य उद्देश्य सभी गाँवों को फोन और ब्रॉडबैंड सुविधा देना था।
- बारहवीं योजना में वार्षिक विकास दर का लक्ष्य 9% रखा गया है।
In simple words: भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में अलग-अलग समय पर अलग-अलग चीजों को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया। शुरुआत में कृषि, फिर उद्योग, फिर गरीबी हटाना, रोजगार बढ़ाना और अंत में मानव संसाधन विकास और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया गया।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक योजना की मुख्य प्राथमिकता को संक्षेप में याद रखना उपयोगी होता है, जैसे 'पहली योजना - कृषि', 'दूसरी योजना - उद्योग', 'पाँचवीं योजना - गरीबी हटाओ'।
Question 4. आर्थिक नियोजन के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों का वर्णन कीजिए।
Answer: हालाँकि ग्यारह पंचवर्षीय योजनाएँ और सात एक साल की योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और बारहवीं पंचवर्षीय योजना चल रही है, फिर भी हम नियोजन के लक्ष्यों को पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाए हैं। देश में आर्थिक नियोजन के रास्ते में मुख्य कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं:
- जनसंख्या में तेज वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की गति धीमी रही है।
- कीमतों में तेज और लगातार वृद्धि ने योजनाओं की लागत को तेजी से बढ़ाया है।
- सार्वजनिक उद्यमों का काम घटिया और अक्षम रहा है।
- श्रम-शक्ति में वृद्धि के अनुपात में रोजगार के अवसरों में वृद्धि नहीं हो पाई है।
- आर्थिक असमानताओं की बढ़ती खाई ने 'सामाजिक न्याय' के लक्ष्य को कमजोर कर दिया है।
- सरकार की नियंत्रण नीति में खामियाँ रही हैं। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि लगभग सभी योजनाएँ बहुत बड़ी थीं। इनका निर्माण भी गलत धारणाओं पर आधारित रहा है और योजनाओं की सफलता को सिर्फ आंकड़ों के माध्यम से दिखाने की कोशिश की गई है। नियोजन को लागू करने में नौकरशाही और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी भी एक चुनौती रही है।
In simple words: आर्थिक नियोजन के रास्ते में कई मुश्किलें आईं, जैसे बढ़ती जनसंख्या, महंगाई, सरकारी कंपनियों का खराब प्रदर्शन, पर्याप्त रोजगार पैदा न कर पाना, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों में कमी। इन सभी कारणों से योजनाएँ पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन की कठिनाइयों को बताते समय, जनसंख्या वृद्धि और असमानता जैसे सामाजिक-आर्थिक कारकों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये अक्सर मुख्य चुनौतियाँ होते हैं।
Question 5. आर्थिक नियोजन को सफल बनाने के लिए आप क्या सुझाव देंगे ?
Answer: भारत में आर्थिक नियोजन को सफल बनाने के लिए कुछ सुझाव दिए जा सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और उनके मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाना चाहिए।
- शिक्षा-प्रणाली को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए ताकि लोग रोजगार पा सकें।
- आर्थिक नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
- जनता का पूरा सहयोग प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों में उचित तालमेल स्थापित किया जाना चाहिए।
- गाँवों में गैर-कृषि क्षेत्रों (जैसे दुग्ध उद्योग, मुर्गीपालन, कुटीर उद्योग) का विकास किया जाना चाहिए।
- केंद्र और राज्यों के बीच उचित संबंध स्थापित किए जाने चाहिए, जिससे पूरे देश का समन्वित आर्थिक विकास तेज हो सके।
- योजनाओं का निर्माण संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि वे वास्तविक और प्राप्त करने योग्य हों।
- प्रशासकीय व्यवस्था को चुस्त और दुरुस्त किया जाना चाहिए।
- वित्त-प्रधान योजनाओं के साथ-साथ भौतिक योजनाओं की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि केवल पैसों पर नहीं, बल्कि वास्तविक विकास पर भी जोर दिया जाए।
In simple words: आर्थिक नियोजन को सफल बनाने के लिए ज़रूरी है कि महंगाई को नियंत्रित किया जाए, शिक्षा को रोजगारपरक बनाया जाए, सरकारी नीतियाँ ठीक से लागू हों, जनता का सहयोग मिले, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हो, और केंद्र-राज्य संबंध मजबूत हों।
🎯 Exam Tip: सुझाव देते समय, व्यावहारिक और लागू करने योग्य समाधानों पर ध्यान दें, जो जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकें।
Question 6. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Answer: ग्यारहवीं योजना (2007-2012)- 19 दिसंबर, 2007 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद् की 54वीं बैठक में 11वीं पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई।
प्रमुख लक्ष्य
- 2012 तक सभी गाँवों को टेलीफोन और ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना।
- सभी गाँवों और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को 2009 तक बिजली और योजना के अंत तक 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराना।
- 2012 तक सभी भूमिहीनों को घर और जमीन उपलब्ध कराना।
- 0-3 वर्ष के बच्चों में कुपोषण को घटाकर आधा करना।
- प्रजनन दर को घटाकर 2-1 करना।
- वर्ष 2009 तक सभी को पीने का पानी उपलब्ध कराना।
- मातृ मृत्यु दर को घटाकर 2 प्रतिशत करना और मातृ मृत्यु-अनुपात को एक हजार पर एक करना।
- विकास दर का लक्ष्य 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष प्राप्त करना।
- 5.8 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा करना।
- 2011-2012 तक प्राथमिक शिक्षा में बीच में स्कूल छोड़ने वालों की संख्या में 52.2 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत की कटौती करना।
- उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना।
- महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं में सीधे तौर पर 33 प्रतिशत आरक्षण करना।
In simple words: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) का लक्ष्य विकास दर को 9% तक बढ़ाना था। इसमें गाँव-गाँव में कनेक्टिविटी, बिजली और पानी पहुँचाना, गरीबी, कुपोषण और मातृ मृत्यु दर कम करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और शिक्षा को बढ़ावा देना शामिल था।
🎯 Exam Tip: ग्यारहवीं योजना को 'तेज और अधिक समावेशी विकास की ओर' के रूप में जाना जाता है। इसके सामाजिक लक्ष्यों, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।
Question 7. भारत में योजना आयोग की स्थापना क्यों की गयी ? दो कारण दीजिए।
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध और स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद भारत की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई थी। सरकार के सामने कई समस्याएँ और कठिनाइयाँ खड़ी थीं। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए 1950 में भारत में योजना आयोग की स्थापना की गई थी। योजना आयोग की स्थापना के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक संसाधनों के उचित प्रयोग के लिए: भारत में प्राकृतिक संसाधन भरपूर मात्रा में हैं, लेकिन उनका अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं हुआ था। आर्थिक नियोजन का सबसे बड़ा फायदा यह था कि हमारे प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों का विवेकपूर्ण और सबसे अच्छा उपयोग हो सकेगा।
- राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिए: भारत एक घनी आबादी वाला देश है। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से यह दुनिया के गरीब देशों में गिना जाता था। राष्ट्रीय और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए आर्थिक नियोजन की बहुत आवश्यकता थी, जिसके लिए एक केंद्रीय संस्था की ज़रूरत थी।
In simple words: भारत में योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी क्योंकि देश की आर्थिक हालत खराब थी और उसे सुधारना था। इसका मुख्य मकसद देश के संसाधनों का सही इस्तेमाल करके राष्ट्रीय आय को बढ़ाना था, ताकि देश विकास कर सके।
🎯 Exam Tip: योजना आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य देश के संसाधनों का इष्टतम उपयोग करके तेजी से आर्थिक विकास सुनिश्चित करना था।
Question 8. तृतीय पंचवर्षीय योजना की वित्त-व्यवस्था लिखिए ।
Answer: तीसरी योजना के लक्ष्यों में खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना, बुनियादी उद्योगों का विस्तार करना, मशीनरी उद्योग स्थापित करना, बेरोजगारी दूर करना, आर्थिक असमानताओं को जितना संभव हो सके कम करना, राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना आदि शामिल थे। हालांकि, इन लक्ष्यों में भी वांछित सफलता नहीं मिली। चीन (1962 ई०) और पाकिस्तान (1965 ई०) के हमलों के कारण देश का विकास बाधित रहा। इन युद्धों के कारण महंगाई में 25% की वृद्धि हुई, विदेशी मुद्रा की कमी हुई और अर्थव्यवस्था पर वित्तीय बोझ बढ़ा। इस दौरान दो बार सूखा पड़ा, जिससे खाद्यान्न उत्पादन पहले जैसा ही रहा और विदेशों से अनाज का भारी आयात करना पड़ा। तीसरी योजना का समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कठिनाइयों भरा रहा। अधिक खर्च के बाद भी इस योजना की प्रगति निराशाजनक रही। परिणामस्वरूप इस योजना-काल में कुछ ही सफलताएँ मिलीं। यह योजना बाहरी झटकों और आंतरिक कमजोरियों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही थी।
तीन वार्षिक योजनाएँ (1966-69 ई०)
सन् 1966 से 1969 तक तीन वर्षों के लिए योजनाओं को रोक दिया गया था। इसके मुख्य कारण थे (i) तीसरी योजना के दौरान हुए दो युद्ध और (ii) वर्ष 1966-67 के दौरान पड़े दो सूखे। इन वार्षिक योजनाओं का मुख्य उद्देश्य खुद से विकास करना, पूर्ण रोजगार देना और आर्थिक असमानताओं को खत्म करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करना था। हालाँकि इन वार्षिक योजनाओं के दौरान संसाधनों की कमी रही, जिससे विकास की गति धीमी रही; फिर भी इन योजनाओं ने चौथी पंचवर्षीय योजना को एक ठोस आधार प्रदान किया।
In simple words: तीसरी पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य खाद्यान्न उत्पादन, औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाना था। लेकिन 1962 और 1965 के युद्धों, सूखे और महंगाई के कारण यह योजना सफल नहीं हो पाई और देश को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बाद तीन एक साल की योजनाएँ बनानी पड़ीं।
🎯 Exam Tip: तीसरी योजना की विफलता के कारणों में युद्ध और सूखे जैसे बाहरी कारक महत्वपूर्ण थे, जो इसकी वित्तीय स्थिति को बहुत प्रभावित किया।
Question 9. आठवीं पंचवर्षीय योजना के प्रमुख लक्ष्य क्या थे ?
Answer: आठवीं योजना में मानव संसाधन विकास पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए गाँवों में पीने का पानी उपलब्ध कराना, सिर पर मैला ढोने की प्रथा को खत्म करना, पर्यावरण को स्वच्छ रखना, परिवहन, ऊर्जा, सिंचाई का प्रसार करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार तथा समाज कल्याण की योजनाओं का विकास करना, खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता पैदा करना, 15-35 वर्ष के आयु-वर्ग के सभी लोगों को साक्षर बनाना आदि मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। लेकिन ये लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं हो सके। गरीबों और दलितों को उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिल पाया, क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ीं और कृषि विकास के बावजूद पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सका। अन्य बुनियादी क्षेत्रों के लक्ष्य भी अधूरे रहे। इस योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार रहीं: साधन-लागत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर लक्ष्य से अधिक रही। कृषि क्षेत्र में विकास की औसत वृद्धि दर और औद्योगिक क्षेत्र में औसत वृद्धि दर लक्ष्य से अधिक रही। सेवा-क्षेत्र में भी औसत वार्षिक वृद्धि दर लक्ष्य से अधिक रही। इस योजना ने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण दिशा प्रदान की।
In simple words: आठवीं पंचवर्षीय योजना के मुख्य लक्ष्य मानव विकास, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और साक्षरता थे। कुछ क्षेत्रों में, जैसे GDP वृद्धि और कृषि-उद्योग में, लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन हुआ, लेकिन सभी सामाजिक लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए।
🎯 Exam Tip: आठवीं योजना ने मानव संसाधन विकास को एक केंद्रीय बिंदु बनाया, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण था।
Question 10. महिला समृद्धि योजना पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: ग्रामीण महिलाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 2 अक्टूबर 1993 को महिला समृद्धि योजना शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं में बचत की आदत डालना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था। हालाँकि शुरुआत के दो सालों में इस योजना का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, लेकिन वर्तमान में यह योजना सफल हो रही है। इस योजना के तहत 18 वर्ष से ऊपर की महिलाएँ अपना बचत खाता निकटतम डाकघर में न्यूनतम धनराशि के साथ खोल सकती हैं। यदि खाताधारक महिला पहले साल में धनराशि नहीं निकालती है, तो सरकार उसे जमा धन की 25% राशि प्रोत्साहन के रूप में देती है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है।
In simple words: महिला समृद्धि योजना 1993 में शुरू की गई थी ताकि ग्रामीण महिलाओं को बचत करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सके। इस योजना में महिलाएं डाकघर में खाता खोल सकती हैं और अगर वे एक साल तक पैसे नहीं निकालती हैं, तो सरकार उन्हें 25% अतिरिक्त राशि देती है।
🎯 Exam Tip: महिला समृद्धि योजना महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेश का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके उद्देश्य और कार्यप्रणाली को याद रखें।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. प्रथम पंचवर्षीय योजना की कार्य-अवधि क्या थी ?
Answer: 1 अप्रैल, 1951 ई० से 31 मार्च, 1956 ई० तक।
In simple words: पहली पंचवर्षीय योजना 1951 से 1956 तक चली थी।
🎯 Exam Tip: सभी पंचवर्षीय योजनाओं की अवधि याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे सीधे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 2. भारत की कौन-सी पंचवर्षीय योजना एक वर्ष पूर्व समाप्त हो गयी थी ?
Answer: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना को एक वर्ष पूर्व समाप्त कर दिया गया।
In simple words: भारत की पाँचवीं पंचवर्षीय योजना अपने तय समय से एक साल पहले ही खत्म हो गई थी।
🎯 Exam Tip: पाँचवीं योजना की समाप्ति राजनीतिक उथल-पुथल के कारण हुई थी, यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Question 3. दसवीं पंचवर्षीय योजना की समयावधि क्या थी ?
Answer: 1 अप्रैल, 2002 से 31 मार्च, 2007 तक।
In simple words: दसवीं पंचवर्षीय योजना 2002 से 2007 तक चली।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं की सही समय-सीमा याद रखना अतिलघु प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की कार्य-अवधि क्या थी?
Answer: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 2007 से 31 मार्च, 2012 तक चली।
In simple words: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007 से 2012 तक लागू रही।
🎯 Exam Tip: योजनाओं की अवधि याद रखने से आप उनके लक्ष्यों और उपलब्धियों को सही संदर्भ में रख सकते हैं।
Question 5. भारत में योजना आयोग की स्थापना कब और क्यों हुई ? एक उद्देश्य लिखिए।
Answer: भारत में योजना आयोग की स्थापना सन् 1950 में हुई थी। इसका एक उद्देश्य देश में रोजगार के अवसरों का विस्तार करना था। आजादी के बाद देश के आर्थिक विकास की योजना बनाने के लिए इसकी स्थापना की गई थी।
In simple words: योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी। इसका मकसद देश में लोगों को ज्यादा काम देना था।
🎯 Exam Tip: योजना आयोग की स्थापना का वर्ष और उसका मुख्य कार्य (योजना बनाना) याद रखें।
Question 6. आर्थिक नियोजन के किन्हीं दो लाभों को लिखिए।
Answer: आर्थिक नियोजन के दो लाभ निम्नलिखित हैं:
- उपलब्ध सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया जाता है।
- आर्थिक नियोजन के द्वारा आर्थिक विकास की गति को तेज किया जा सकता है।
In simple words: आर्थिक नियोजन से देश के संसाधनों का सही इस्तेमाल होता है और विकास तेजी से होता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन के लाभों को बताते समय, 'संसाधनों का उपयोग' और 'विकास दर में वृद्धि' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 7. भारतीय आर्थिक आयोजन की किन्हीं तीन असफलताओं की ओर संकेत कीजिए ।
Answer: भारतीय आर्थिक आयोजन की तीन असफलताएँ इस प्रकार हैं:
- प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में संतोषजनक प्रगति नहीं हुई।
- धन और आय की असमानता में वृद्धि हुई।
- जनसंख्या पर नियंत्रण और बेरोजगारी की समस्या को सुलझाने में असफलता मिली।
In simple words: भारतीय आर्थिक नियोजन की तीन बड़ी कमियाँ थीं कि लोगों की आय उतनी नहीं बढ़ी जितनी उम्मीद थी, अमीर-गरीब का अंतर बढ़ा और बेरोजगारी व बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित नहीं कर पाए।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन की असफलताओं में 'आय असमानता', 'धीमी प्रति व्यक्ति आय वृद्धि' और 'बेरोजगारी' जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल करें।
Question 8. पंचवर्षीय योजना क्या है ?
Answer: पंचवर्षीय योजना आर्थिक योजना का वह प्रारूप है जिसकी अवधि 5 वर्ष होती है। इसका मतलब है कि इसमें लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 5 साल की समय-सीमा रखी जाती है। ये योजनाएँ देश के लिए एक दीर्घकालिक विकास की रणनीति का हिस्सा होती हैं।
In simple words: पंचवर्षीय योजना एक 5 साल की सरकारी योजना होती है, जिसमें देश के विकास के लिए लक्ष्य तय किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजना की मुख्य पहचान उसकी 5 साल की अवधि है, जिसमें देश के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की रूपरेखा तैयार की जाती है।
Question 9. छठवीं पंचवर्षीय योजना का प्रारम्भ कब हुआ ?
Answer: छठवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1980 ई० को शुरू हुई थी। यह योजना भारत के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम थी।
In simple words: भारत में छठवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1980 को शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत और समाप्ति की तारीखें याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्रमुख योजनाओं की।
Question 10. आठवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि लिखिए ।
Answer: आठवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 1 अप्रैल, 1992 से 31 मार्च, 1997 ई० तक थी। इस योजना में मानव संसाधन विकास पर जोर दिया गया था।
In simple words: आठवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1992 से 31 मार्च, 1997 तक चली।
🎯 Exam Tip: योजनाओं की अवधि याद रखने से आपको भारत के आर्थिक विकास के ऐतिहासिक क्रम को समझने में मदद मिलती है।
Question 11. आठवीं योजना के दो मुख्य उद्देश्य लिखिए ।
Answer: आठवीं योजना के दो मुख्य उद्देश्य थे:
1. जनसंख्या-वृद्धि दर को नियंत्रित करना।
2. रोजगार के अधिक-से-अधिक अवसर पैदा करना। इन उद्देश्यों का लक्ष्य देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना था।
In simple words: आठवीं योजना का मुख्य लक्ष्य जनसंख्या को बढ़ने से रोकना और लोगों के लिए ज्यादा नौकरियां बनाना था।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक पंचवर्षीय योजना के मुख्य उद्देश्यों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे सवाल के रूप में पूछे जाते हैं।
Question 12. देश की कौन-सी पंचवर्षीय योजना केवल चार वर्ष चली ?
Answer: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना केवल चार वर्ष चली थी। यह योजना 1974 से 1978 तक चली और राजनीतिक अस्थिरता के कारण इसे एक साल पहले ही समाप्त कर दिया गया था।
In simple words: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना सिर्फ चार साल चली थी।
🎯 Exam Tip: यह एक विशेष तथ्य है; ऐसी योजनाओं को याद रखें जो अपनी सामान्य अवधि से अलग हों।
Question 13. नवीं योजना का कार्यकाल क्या था ?
Answer: नवीं योजना का कार्यकाल 1 अप्रैल, 1997 से 31 मार्च, 2002 ई० तक था। इस योजना का मुख्य जोर सामाजिक न्याय और समानता पर था।
In simple words: नवीं योजना 1 अप्रैल, 1997 से 31 मार्च, 2002 तक चली।
🎯 Exam Tip: योजनाओं के कार्यकाल को सटीकता से याद रखें, क्योंकि ये सीधे प्रश्न के रूप में आ सकते हैं।
Question 14. नवीं पंचवर्षीय योजना में उद्योगों के विकास पर व्यय हेतु कितनी धनराशि प्रस्तावित की गयी है ?
Answer: नवीं पंचवर्षीय योजना में उद्योग और खनिज क्षेत्रों पर ₹ 69,972 करोड़ का व्यय प्रस्तावित किया गया था। इस धन का उद्देश्य औद्योगिक विकास को गति देना था।
In simple words: नवीं पंचवर्षीय योजना में उद्योगों और खनिज पर 69,972 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव था।
🎯 Exam Tip: योजनाओं में विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवंटित धनराशियां महत्वपूर्ण होती हैं, खासकर जब आपसे विशिष्ट क्षेत्रों के बारे में पूछा जाए।
Question 15. दसवीं योजना के प्रमुख उद्देश्य क्या थे ?
Answer: दसवीं योजना का प्रमुख उद्देश्य विकास दर बढ़ाना और सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को प्राप्त करना था। इस योजना में कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया, क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है।
In simple words: दसवीं योजना का लक्ष्य तेजी से विकास करना, सामाजिक न्याय लाना और खेती को बढ़ावा देना था।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी योजना के उद्देश्य पूछे जाएं, तो मुख्य लक्ष्यों और जिन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया, उन्हें बताएं।
Question 16. भारत में योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष कौन होता है ?
Answer: भारत में योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है। यह पद देश की योजना प्रक्रिया में प्रधानमंत्री की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करता है।
In simple words: भारत का प्रधानमंत्री योजना आयोग का मुखिया होता है।
🎯 Exam Tip: संवैधानिक या संस्थागत पदों और उनके प्रमुखों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें याद रखें।
Question 17. आर्थिक नियोजन के दो उद्देश्य लिखिए । [2010, 12, 15, 18]
Answer: आर्थिक नियोजन के दो मुख्य उद्देश्य हैं:
1. देश को आत्मनिर्भर बनाना।
2. देश में रोजगार के अवसरों का विस्तार करना। आत्मनिर्भरता का अर्थ है कि देश अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सके और रोजगार से लोगों को काम मिल सके।
In simple words: आर्थिक नियोजन का लक्ष्य देश को खुद पर निर्भर बनाना और लोगों के लिए ज्यादा नौकरियां पैदा करना है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन के बुनियादी उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सभी पंचवर्षीय योजनाओं का आधार होते हैं।
Question 18. बारहवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि लिखिए। [2013]
Answer: बारहवीं पंचवर्षीय योजना 2012 से 2017 ई० तक चली। यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।
In simple words: बारहवीं पंचवर्षीय योजना 2012 से 2017 तक लागू थी।
🎯 Exam Tip: अंतिम पंचवर्षीय योजना की अवधि को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद नियोजन की रणनीति में बदलाव आया।
Question 19. भारतीय योजना आयोग के चार कार्य लिखिए। [2013]
या
योजना आयोग के दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए। [2009, 10, 11, 13]
Answer: भारतीय योजना आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. देश में मौजूद सभी भौतिक, आर्थिक और मानवीय संसाधनों का अनुमान लगाना।
2. सभी संसाधनों का सबसे अच्छा और संतुलित उपयोग करने के लिए योजना बनाना।
3. योजना को लागू करने के लिए एक प्रशासनिक तंत्र की रूपरेखा बनाना।
4. योजना के हर चरण पर उसके काम की समीक्षा करना। ये कार्य देश के आर्थिक विकास की दिशा तय करने में मदद करते थे।
In simple words: योजना आयोग देश के संसाधनों का हिसाब लगाता था, उनके अच्छे इस्तेमाल की योजना बनाता था, योजनाओं को लागू करने का तरीका बताता था और उनकी जांच करता था।
🎯 Exam Tip: योजना आयोग के कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने भारत के आर्थिक विकास की नींव रखी।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. योजना आयोग कब गठित किया गया? [2009, 10, 14, 15, 16, 17]
(क) 1947 ई० में
(ख) 1948 ई० में
(ग) 1949 ई० में
(घ) 1950 ई० में
Answer: (घ) 1950 ई० में
In simple words: योजना आयोग की स्थापना साल 1950 में हुई थी ताकि देश के विकास के लिए योजनाएं बनाई जा सकें।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की तारीखें सीधे सवाल के रूप में आ सकती हैं; इन्हें याद रखना चाहिए।
Question 2. भारत में अब तक कुल कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ लागू हो चुकी हैं? [2015, 16]
(क) दस
(ख) ग्यारह
(ग) बारह
(घ) तेरह
Answer: (ग) बारह
In simple words: भारत में अब तक कुल बारह पंचवर्षीय योजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं की कुल संख्या एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है, जिसे हमेशा याद रखना चाहिए।
Question 3. इस समय कौन-सी पंचवर्षीय योजना चल रही है?
(क) आठवीं
(ख) नवीं
(ग) दसवीं
(घ) बारहवीं
Answer: (घ) बारहवीं
In simple words: फिलहाल, बारहवीं पंचवर्षीय योजना चल रही थी जब यह सामग्री लिखी गई थी, जो भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।
🎯 Exam Tip: समय-समय पर यह प्रश्न बदल सकता है, इसलिए हमेशा वर्तमान संदर्भ के अनुसार सबसे हाल की या चल रही योजना को जानें।
Question 4. किस पंचवर्षीय योजना में प्रथम बार उद्योगों के विकास पर बल दिया गया?
(क) प्रथम
(ख) द्वितीय
(ग) तृतीय
(घ) चतुर्थ
Answer: (ख) द्वितीय
In simple words: उद्योगों को पहली बार बढ़ावा द्वितीय पंचवर्षीय योजना में दिया गया था।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक योजना के विशिष्ट फोकस क्षेत्रों को याद रखना आपको संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने में मदद करेगा।
Question 5. किस पंचवर्षीय योजना में गरीबी उन्मूलन को प्राथमिकता दी गई?
(क) तृतीय
(ख) चतुर्थ
(ग) पाँचवीं
(घ) छठी
Answer: (ग) पाँचवीं
In simple words: गरीबी को खत्म करने पर सबसे पहले पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में ध्यान दिया गया था।
🎯 Exam Tip: "गरीबी हटाओ" जैसे नारों और उनके संबंधित योजनाओं को याद रखना अक्सर परीक्षा में मददगार होता है।
Question 6. रोजगार तथा पर्यावरण विकास किस पंचवर्षीय योजना की प्राथमिकता थे?
(क) आठवीं
(ख) सातवीं
(ग) छठी
(घ) नवीं
Answer: (ग) छठी
In simple words: नौकरी के अवसर पैदा करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना छठी पंचवर्षीय योजना के मुख्य लक्ष्य थे।
🎯 Exam Tip: एक ही योजना के कई उद्देश्यों को एक साथ याद रखने का प्रयास करें, क्योंकि वे अक्सर जुड़े होते हैं।
Question 7. आठवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) 1990-95 ई०
(ख) 1991-96 ई०
(ग) 1992-97 ई०
(घ) 1993-98 ई०
Answer: (ग) 1992-97 ई०
In simple words: आठवीं पंचवर्षीय योजना 1992 से 1997 तक चली थी।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं की अवधियों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।
Question 8. योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है [2009, 11, 12, 14, 15]
(क) योजना मन्त्री
(ख) राष्ट्रपति
(ग) उपराष्ट्रपति
(घ) प्रधानमन्त्री
Answer: (घ) प्रधानमन्त्री
In simple words: भारत का प्रधानमंत्री ही योजना आयोग का मुख्य होता है।
🎯 Exam Tip: संवैधानिक पदों और उनके पदेन अधिकारियों से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान का हिस्सा होते हैं।
Question 9. नवीं पंचवर्षीय योजना में कितने प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि-दर निर्धारित की गई थी?
(क) 6%
(ख) 8%
(ग) 7%
(घ) 5%
Answer: (क) 6%
In simple words: नवीं पंचवर्षीय योजना में देश की आर्थिक बढ़ोतरी का लक्ष्य 6% रखा गया था।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक योजना के लिए निर्धारित वृद्धि दरों को याद रखना तुलनात्मक अध्ययन में सहायक होता है।
Question 10. दसवीं पंचवर्षीय योजना में कितने प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि-दर निर्धारित की गई थी?
(क) 6%
(ख) 8%
(ग) 7%
(घ) 9%
Answer: (ख) 8%
In simple words: दसवीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास की दर 8% तय की गई थी।
🎯 Exam Tip: योजनाओं की लक्ष्य वृद्धि दरों को याद रखें; ये अक्सर उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद करते हैं।
Question 11. निम्नलिखित में से कौन-सी पंचवर्षीय योजना निर्धारित समय से पहले समाप्त हो गई? [2015]
(क) तृतीय
(ख) चतुर्थ
(ग) पंचम
(घ) सातवीं
Answer: (ग) पंचम
In simple words: पाँचवीं पंचवर्षीय योजना को उसके तय समय से पहले ही रोक दिया गया था।
🎯 Exam Tip: उन योजनाओं को विशेष रूप से याद रखें जो अपनी अवधि पूरी नहीं कर पाईं और उनके पीछे के कारणों को जानें।
Question 12. भारत की किस पंचवर्षीय योजना में प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक रही?
(क) द्वितीय
(ख) प्रथम
(ग) चतुर्थ
(घ) तृतीय
Answer: (ख) प्रथम
In simple words: पहली पंचवर्षीय योजना में प्रति व्यक्ति आय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी।
🎯 Exam Tip: पहली योजना की सफलता अक्सर एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु होती है; इसके परिणामों को याद रखें।
Question 13. भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि क्या थी?
(क) 1995-2000 ई०
(ख) 1999-2004 ई०
(ग) 2001-2006 ई०
(घ) 2002-2007 ई०
Answer: (घ) 2002-2007 ई०
In simple words: दसवीं पंचवर्षीय योजना साल 2002 से 2007 तक चली थी।
🎯 Exam Tip: योजनाओं की शुरुआत और समाप्ति की तारीखें अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में आती हैं; इन्हें अच्छे से याद करें।
Question 14. प्रधानमन्त्री रोजगार योजना कब आरम्भ की गई?
(क) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में
(ख) सातवीं पंचवर्षीय योजना में
(ग) आठवीं पंचवर्षीय योजना में
(घ) नवीं पंचवर्षीय योजना में
Answer: (ग) आठवीं पंचवर्षीय योजना में
In simple words: प्रधानमन्त्री रोजगार योजना आठवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू की गई थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न योजनाओं और उनके तहत शुरू किए गए प्रमुख कार्यक्रमों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर जोड़े में पूछे जाते हैं।
Question 15. आर्थिक नियोजन का अर्थ है [2015, 18]
(क) प्रत्येक व्यक्ति की आय को बराबर करना
(ख) संसाधनों का उचित उपयोग करना।
(ग) आर्थिक प्रतियोगिता को प्रोत्साहित करना
(घ) साम्प्रदायिक सद्भावना उत्पन्न करना
Answer: (ख) संसाधनों का उचित उपयोग करना।
In simple words: आर्थिक नियोजन का मतलब है देश के सभी साधनों का सही और सबसे अच्छा इस्तेमाल करना।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन की परिभाषा को सरल शब्दों में समझना और उसके मुख्य उद्देश्य को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. भारत में आर्थिक नियोजन का प्रमुख उद्देश्य है
(क) देश की सामाजिक कुरीतियों को दूर करना
(ख) हिन्दू धर्म का प्रसार करना
(ग) समाजवादी समाज की स्थापना करना
(घ) साम्प्रदायिक सद्भावना पैदा करनी
Answer: (ग) समाजवादी समाज की स्थापना करना
In simple words: भारत में आर्थिक नियोजन का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा समाज बनाना था जहां सभी बराबर हों और कोई बड़ा-छोटा न हो।
🎯 Exam Tip: भारत के नियोजन के सामाजिक-आर्थिक दर्शन को समझना उसके लक्ष्यों को याद रखने में मदद करेगा।
Question 17. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की समयावधि क्या थी?
(क) 2008-13
(ख) 2007-12
(ग) 2006-11
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) 2007-12
In simple words: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007 से 2012 तक चली थी।
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं की अवधियां एक महत्वपूर्ण तथ्य हैं; इन्हें याद रखना आपके अंक बढ़ा सकता है।
Question 18. बारहवीं पंचवर्षीय योजना की समयावधि क्या है? [2013]
(क) 2011-16
(ख) 2012-17
(ग) 2013-18
(घ) 2010-15
Answer: (ख) 2012-17
In simple words: बारहवीं पंचवर्षीय योजना 2012 से 2017 तक की अवधि के लिए थी।
🎯 Exam Tip: भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना के रूप में, इसकी अवधि और लक्ष्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
Question 19. निम्नलिखित में से कौन-सा आर्थिक नियोजन का प्रमुख उद्देश्य है? [2015, 18]
(क) आर्थिक प्रतियोगिता को प्रोत्साहित करना
(ख) संसाधनों का जनकल्याण में समुचित उपयोग करना
(ग) सामुदायिक सद्भाव उत्पन्न करना
(घ) राजनैतिक लक्ष्य प्राप्त करना।
Answer: (ख) संसाधनों का जनकल्याण में समुचित उपयोग करना
In simple words: आर्थिक नियोजन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी साधनों का उपयोग लोगों की भलाई के लिए सही तरीके से किया जाए।
🎯 Exam Tip: आर्थिक नियोजन का सबसे मूलभूत उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना और देश के संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग करना है।
Question 20. 'योजना आयोग' के स्थान पर किस आयोग का गठन वर्ष 2015 में किया गया? [2018]
(क) वाणिज्य आयोग
(ख) नीति आयोग
(ग) वित्त आयोग
(घ) सूचना आयोग
Answer: (ख) नीति आयोग
In simple words: साल 2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण और हालिया बदलाव है; नई संस्था का नाम और उसकी स्थापना का वर्ष याद रखें।
Question 21. राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति आयोग) का अध्यक्ष कौन होता है? [2018]
(क) भारत का राष्ट्रपति
(ख) प्रधानमंत्री
(ग) वित्तमंत्री
(घ) मानव संसाधन विकास मंत्री
Answer: (ख) प्रधानमंत्री
In simple words: नीति आयोग का अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है।
🎯 Exam Tip: नीति आयोग के अध्यक्ष का पद हमेशा भारत के प्रधानमंत्री के पास होता है, यह एक पदेन पद है।
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