UP Board Solutions Class 10 Science Chapter 16 Management of Natural Resources

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Step-by-Step UP Board Solutions: Class 10 Science Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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पाठगत हल प्रश्न

खंड 16.1 (पृष्ठ संख्या 302)

 

Question 1. पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं?
Answer: निम्न आदतों में परिवर्तन लाकर हम पर्यावरण मित्र बन सकते हैं –
- पॉलिथीन बैग के स्थान पर कपड़े या जूट के बैग का प्रयोग करके ।
- बिजली के पंखे, टी.वी. एवं बल्ब को अनावश्यक तरीके से उपयोग नहीं करके ।
- पेपर, प्लास्टिक, शीशा तथा धातुओं से बनी वस्तुओं को पुनः चक्रण के लिए भेज कर ।
- प्रतिवर्ष कुछ वृक्ष लगाने का संकल्प लेकर ।
- वन्य जीवों से प्राप्त सामानों का बहिष्कार करके ।
- कम दूरी जैसे : स्कूल की स्थिति में पैदल चलकर/साइकिल का प्रयोग करके ।
- पानी के अनावश्यक बहाव तथा खर्च को कम करके ।
- कचरे को सड़क के किनारे न फेंककर।।
In simple words: पर्यावरण के प्रति मित्रवत बनने के लिए हमें अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाना चाहिए, जैसे प्लास्टिक की जगह कपड़े के बैग का उपयोग करना, बिजली-पानी बचाना, कचरा सही जगह फेंकना और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक आदतें पूछी गई हैं, जिन्हें बिंदुओं में स्पष्ट रूप से लिखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य के परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं?
Answer: संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि वाली परियोजनाएँ वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इससे तत्काल भोजन, पानी तथा ऊर्जा की पूर्ति होती है, परंतु यह परियोजना पर्यावरण को क्षति पहुँचा सकती है।
In simple words: कम अवधि की परियोजनाएँ वर्तमान जरूरतों को पूरा करती हैं, जैसे भोजन और पानी, लेकिन इनसे पर्यावरण को नुकसान हो सकता है।

🎯 Exam Tip: कम अवधि की परियोजनाओं के तात्कालिक लाभ और संभावित पर्यावरणीय नुकसान दोनों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. यह लाभ, लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं का उद्देश्य संपोषित विकास तथा पर्यावरण संरक्षण की संकल्पना पर आधारित है। संपोषित विकास में मनुष्य की वर्तमान आधारभूत आवश्यकताओं के साथ-साथ भावी संतति के लिए संसाधनों का संरक्षण भी निहित होता है। प्रदूषण नियंत्रण पर भी ध्यान रखा जाता है।
In simple words: लंबी अवधि की परियोजनाएँ भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को बचाते हुए सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित होती हैं, जबकि कम अवधि की परियोजनाएँ केवल वर्तमान जरूरतों पर ध्यान देती हैं।

🎯 Exam Tip: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों पर जोर देना, लंबी अवधि की परियोजनाओं की मुख्य विशेषता है।

 

Question 4. क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं?
Answer: हाँ, संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति को इसका लाभ मिले, चाहे वे अमीर हों या गरीब । सभी को सस्ते तथा सुगम तरीके से संसाधन उपलब्ध हो सकें। संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कुछ मुट्ठीभर अमीर एवं ताकतवर लोग हैं, जो इसका दोहन अपने निजी लाभ के लिए करना चाहते हैं।
In simple words: संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ताकि सभी को लाभ मिले, लेकिन कुछ अमीर और शक्तिशाली लोग अपने निजी फायदे के लिए इसके खिलाफ कार्य कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: समान वितरण के लाभ और इसके खिलाफ काम करने वाले निहित स्वार्थों (जैसे अमीर और ताकतवर लोग) को उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

खंड 16.2 (पृष्ठ संख्या 306)

 

Question 1. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
Answer: वनों का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि यह हमारे लिए अनेक प्रकार से उपयोगी है
- वनों से हमें इमारती लकड़ी (टिम्बर), गोंद, कागज़, लाख, दवाई तथा खेल के उद्योगों को कच्चे माल प्राप्त होते हैं।
- वन मृदा अपरदन (soil erosion) तथा बाढ़ (flood) को रोकने में सहायता करता है।
- जलचक्र बनाए रखने तथा वर्षा कराने में वन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।
- वन प्राकृतिक रूप से जंगली जानवरों, पक्षियों आदि को निवास स्थान (habital) प्रदान करता है।
- जैव विविधता तथा पर्यावरण संतुलन के लिए वनों का योगदान महत्त्वपूर्ण होता है।
वन्य जीव संरक्षण आवश्यक है क्योंकि-
- पर्यावरण संतुलन कायम करता है।
- जंगली मांसाहारी जानवर शाकाहारी जानवरों को खाते हैं, जिससे घास एवं छोटे पौधों का अस्तित्व कायम रहता है तथा वन एवं वनस्पति के रहने से पर्याप्त वर्षा होती है।
- जंगलों को साफ़ रखने तथा बीजों को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाने में सहायता करता है, जिससे नए पौधे वृद्धि करते हैं।
- घास चरने से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
- विभिन्न स्पीशीज़ के जीव-जंतुओं से जैव विविधता आती है, जो पारिस्थितिक स्थायित्व के लिए जरूरी होता है।
In simple words: वनों और वन्य जीवन का संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि वन हमें कई उत्पाद प्रदान करते हैं, मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकते हैं, जलचक्र बनाए रखते हैं, और जीवों को आवास देते हैं, जबकि वन्य जीव पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: वनों और वन्य जीवन के प्रत्यक्ष लाभों (उत्पाद, आवास) और अप्रत्यक्ष लाभों (पर्यावरण संतुलन, मृदा संरक्षण) दोनों को विस्तार से बताएं।

 

Question 2. वनों के संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए ।
Answer: वनों के संरक्षण के कुछ उपाय निम्न हैं –
- टिम्बर तथा जलावन की लकड़ी के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा देनी चाहिए तथा इसे एक दंडनीय अपराध के अंतर्गत लाना चाहिए।
- जंगलों में लगने वाले आग को रोकने तथा नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
- स्थानीय समुदायों को जंगलों के संरक्षण के लिए शामिल करना चाहिए। इससे उन्हें रोजगार भी मिलेगा तथा वनों का संरक्षण भी होगा ।
- स्टेकहोल्डरों (दावेदारों) को वनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारीपूर्वक आगे आना चाहिए ।
- राष्ट्रीय उद्यान एवं वनों में भेड़ एवं अन्य जानवरों को चराने (grazing) पर रोक लगानी चाहिए।
- अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।
- जीवाश्म ईंधन का कम से कम उपयोग करें ।
In simple words: वनों को बचाने के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक, आग पर नियंत्रण, स्थानीय लोगों की भागीदारी, दावेदारों की जिम्मेदारी, चराई पर प्रतिबंध, अधिक पेड़ लगाना और जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग जैसे उपाय अपनाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: वनों के संरक्षण के लिए सरकार, स्थानीय समुदाय और व्यक्तिगत स्तर पर किए जा सकने वाले उपायों को सूचीबद्ध करें।

 

खंड 16.3 (पृष्ठ संख्या 310)

 

Question 1. अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत पद्धति का पता लगाइए।
Answer: भारत वर्ष के विभिन्न राज्यों में जल संग्रहण की पद्धति (तरीका) भिन्न-भिन्न होती है। यहाँ कुछ राज्यों की पद्धतियाँ निम्न हैं
- महाराष्ट्र – बंधारस एवं ताल
- कर्नाटक, – कट्टा
- बिहार – अहार तथा पाइन
- MP और UP – बंधिस
- हिमाचल प्रदेश – कुल्ह
- राजस्थान – खादिन, बड़े पात्र, एवं नाड़ी
- दिल्ली – बावड़ी तथा तालाब
- जम्मू के काँदी क्षेत्र में – तालाब
- केरल – सुरंगम ।
- तमिलनाडु – एरिस (Tank)
In simple words: भारत के विभिन्न राज्यों में जल संग्रहण की अपनी-अपनी पारंपरिक विधियाँ हैं, जैसे महाराष्ट्र में बंधारस, हिमाचल में कुल्ह, राजस्थान में खादिन, और दिल्ली में बावड़ी तथा तालाब।

🎯 Exam Tip: विभिन्न राज्यों और उनकी विशिष्ट जल संग्रहण पद्धतियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. इस पद्धति की पेय जल व्यवस्था (पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना कीजिए।
Answer: पर्वतीय क्षेत्रों में जल व्यवस्था मैदानी क्षेत्रों से बिलकुल भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नहर सिंचाई की स्थानीय प्रणाली (व्यवस्था) का विकास हुआ जिसे कुल्ह कहा जाता है। झरनों से बहने वाले जल को मानव-निर्मित छोटी-छोटी नालियों से पहाड़ी पर स्थित निचले गाँवों तक ले जाया जाता है। कूल्हों में बहने वाले पानी का प्रबंधन गाँवों के निवासियों की आपसी सहमति से किया जाता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत कृषि के मौसम में जल सबसे दूरस्थ गाँव को दिया जाता है। फिर उत्तरोत्तर ऊँचाई पर स्थित गाँव उस जल का उपयोग करते हैं। परंतु समतल (मैदानी) भूभाग में जल संग्रहण चेक डैम' तलाबों, ताल तथा बंधिस में किया जाता है।
In simple words: पर्वतीय क्षेत्रों में जल व्यवस्था (जैसे हिमाचल में कुल्ह) में झरनों के पानी को नालियों से गाँवों तक पहुंचाया जाता है और ग्रामीण सहमति से प्रबंधित किया जाता है, जबकि मैदानी या पठारी क्षेत्रों में चेक डैम, तालाब और बंधिस का उपयोग जल संग्रहण के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की जल संग्रहण प्रणालियों में अंतर और उनके प्रबंधन के तरीके को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 3. अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है?
Answer: हमारे क्षेत्र में जले के मुख्य स्रोत हैं (i) भौमजल या भूमिगत जल (ii) जल बोर्ड द्वारा आपूर्तित जल (ground water) नहीं, गर्मी के दिनों में पानी की कमी हो जाती है तथा सभी लोगों को जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाता है, क्योंकि गर्मियों में भौमजल का स्तर नीचे खिसक जाता है तथा नदियाँ सूख जाती हैं। इन्हीं स्रोतों से जल बोर्डों को भी जल प्राप्त होते हैं।
In simple words: मेरे क्षेत्र में मुख्य जल स्रोत भूमिगत जल और जल बोर्ड द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला जल है, लेकिन गर्मियों में भूमिगत जल स्तर घटने और नदियाँ सूखने के कारण सभी को पर्याप्त जल नहीं मिल पाता है।

🎯 Exam Tip: जल स्रोतों की पहचान करें और यह भी बताएं कि क्या सभी को पर्याप्त जल मिल पाता है या नहीं, साथ ही पानी की कमी के कारणों का भी उल्लेख करें।

 

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न

 

Question 1. अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं?
Answer: अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए हम तीन R का प्रयोग करेंगे।
1. कम उपयोग (Reduce) – इसका अर्थ है कि आपको कम से कम वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए; जैसे – बिजली के पंखे एवं बल्ब का स्विच बंद कर देना, खराब नल की मरम्मत करना, ताकि जल व्यर्थ न टपके आदि।
2. पुनः चक्रण (Recycle) – इसका अर्थ है कि आपको प्लास्टिक, कागज़, काँच, धातु की वस्तुओं को कचरे के साथ नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि पुनः चक्रण के लिए देना चाहिए।
3. पुनः उपयोग (Reuse) – यह पुनःचक्रण से भी अच्छा तरीका है क्योंकि उसमें भी कुछ ऊर्जा व्यय होती है। यह एक तरीका है, जिसमें किसी वस्तु का उपयोग बार-बार किया जाता है। जैसे-लिफाफों को फेंकने की अपेक्षा फिर से उपयोग करना, प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बों का उपयोग रसोई में करना, खराब बाल्टी से गमला बनाना, बोतलों तथा डिब्बों से कलमदान एवं सजावटी सामान बनाना इत्यादि ।
उपर्युक्त तरीकों के अलावा भी कुछ तरीके निम्न हैं
- सौर ऊर्जा का उपयोग करना; जैसे-सौर जल ऊष्मक, सौर कुकर सौर पैनल इत्यादि ।
- बल्ब के स्थान पर CFLs का उपयोग करना।
- अपने घर के आस-पास जल संग्रह नहीं होने दें तथा कूड़ा-कचरा सड़क के किनारे न फेकें ।
In simple words: अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए 'तीन R' (कम उपयोग, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग) के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, साथ ही सौर ऊर्जा का प्रयोग करना, CFLs का उपयोग करना और कचरे का सही निपटान करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: 'तीन R' के सिद्धांतों को विस्तार से समझाएं और प्रत्येक के लिए व्यावहारिक उदाहरण दें। अतिरिक्त पर्यावरण-मित्र तरीकों का भी उल्लेख करें।

 

Question 2. क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं, जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके?
Answer:
- विद्यालय परिसर में अधिक से अधिक पेड़ लगाना चाहिए।
- वर्षा जल संग्रहण (Rain water harvesting) करना।
- स्कूल बस CNG से चलाना चाहिए न कि डीज़ल से ।
- विद्यालय परिसर में बागवानी को बढ़ावा देना चाहिए तथा वृक्ष से गिरी पत्तियों, भोजन के अपशिष्ट आदि से कम्पोस्ट बनाकर इस्तेमाल करना चाहिए।
- छात्रों में 3R के प्रति जागरूकता लानी चाहिए, ताकि वे बिजली, पानी का अनावश्यक उपयोग न करें। कागज़ को कूड़े में न फेंककर पुनः चक्रण के लिए एकत्र करना चाहिए।
- जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय कूड़े को अलग करना चाहिए तथा छात्रों को अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों को बहिष्कार करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
In simple words: विद्यालय को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए पेड़ लगाना, वर्षा जल संग्रहण, CNG बसों का उपयोग, कम्पोस्ट बनाना, छात्रों में '3R' की जागरूकता बढ़ाना और कचरे का उचित पृथक्करण जैसे बदलाव किए जा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: विद्यालय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं (वृक्षारोपण, ऊर्जा, जल, कचरा प्रबंधन, जागरूकता) को शामिल करें।

 

Question 3. इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं? आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
Answer: वन एवं वन्य जंतुओं के चारों दावेदारों में से वन के अंदर एवं इसके निकट रहने वाले स्थानीय लोग सर्वाधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि वे सदियों से वनों का उपयोग संपोषित तरीकों से करते चले आ रहे हैं। वे वृक्षों के ऊपर चढ़कर कुछ शाखाएँ एवं पत्तियाँ ही काटते हैं, जिससे समय के साथ-साथ उनका पुनः पूरण भी होता रहता है। इसके अनेक प्रमाण भी समाने आए हैं; जैसे-वनों के संरक्षण के लिए विश्नोई समुदाय का प्रयास, अराबाड़ी का सालवन समृद्ध हो गया तथा बेकार कहे जाने वाले वन का मूल्य 12.5 करोड़ आँका गया ।
In simple words: वन उत्पाद प्रबंधन के लिए स्थानीय लोगों को निर्णय लेने के अधिकार दिए जाने चाहिए, क्योंकि वे सदियों से वनों का सतत उपयोग करते आए हैं और उनके संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसा कि विश्नोई समुदाय और अराबाड़ी सालवन के उदाहरणों से स्पष्ट है।

🎯 Exam Tip: स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता देने के कारणों (जैसे सतत उपयोग और संरक्षण के उदाहरण) को विस्तार से बताएं।

 

Question 4. अकेले व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबंधन में क्या योगदान दे सकते हैं।
(a) वन एवं वन्य जंतु
(b) जल संसाधन
(c) कोयला एवं पेट्रोलियम
Answer:
(a) वन एवं वन्य जंतु – कम से कम कागज का प्रयोग करके, कागज़ बर्बाद न करके, वनों एव वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बने नियम का पालन करके, जानवरों के खाल (skin), हड्डियों (bons), सींग (horm), बाल (fur) तथा दाँतों (teeth) से बनी वस्तुओं को प्रयोग न करके इत्यादि ।
(b) जल संसाधन – बहते हुए जल में मुँह धोना, स्नान करना आदि का परित्याग करके, स्नान करते समय फव्वारों की जगह बाल्टी या मग का प्रयोग करके, वाशिंग मशीन के जल का बाथरूम में प्रयोग करके, ख़राब नल को तुरंत ठीक करवा कर आदि ।
(c) कोयला एवं पेट्रोलियम – बिजली के पंखे, बल्ब को अनावश्यक न चलने दें, स्विच ऑफ कर दें, कम दूरी के लिए स्कूटर, कार के स्थान पर साइकिल/पैदल का प्रयोग करके, CFLS (बल्ब की जगह) उपयोग करके, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करके, रेड लाइट पर वाहनों को बंद करके, CNG का प्रयोग करके, निजी वाहनों के स्थान पर बसों, मेट्रो, रेल आदि का प्रयोग करके, AC तथा हीटर का प्रयोग कम करके इत्यादि ।
In simple words: एक व्यक्ति के रूप में, हम कागज का कम उपयोग करके वन और वन्य जीवों की रक्षा कर सकते हैं; पानी बचाने के लिए फव्वारे की जगह बाल्टी का उपयोग कर सकते हैं और खराब नलों को ठीक करवा सकते हैं; तथा बिजली बचाने और जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग करने के लिए CFLs, सार्वजनिक परिवहन और ऊर्जा कुशल उपकरणों का प्रयोग कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक संसाधन के प्रबंधन के लिए व्यावहारिक और दैनिक जीवन में लागू होने वाले व्यक्तिगत प्रयासों को सूचीबद्ध करें।

 

Question 5. अकेले व्यक्ति के रूप में आप विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं?
Answer: प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम निम्न तरीकों से की जा सकती है
- बल्ब की जगह CFLs का प्रयोग कर (इससे कोयले की खपत कम होगी)।
- अनावश्यक पंखे, बल्ब आदि का स्विच ऑफ करके, लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करके भी बिजली की खपत कम कर सकते हैं।
- सौर कुकर, सौर जल ऊष्मक का प्रयोग करके कोयले, केरोसीन तथा LPG की बचत की जा सकती है।
- छोटी दूरियों के लिए कार तथा स्कूटर की बजाय पैदल या साइकिल का उपयोग कर पेट्रोल की बचत की जा सकती है।
- टपकने वाले नलों की मरम्मत कर हम पानी की बचत कर सकते हैं।
- रेड लाइट पर कार या अन्य वाहनों को बंद करके पेट्रोल/डीजल की बचत की जा सकती है।
- कागज, प्लास्टिक, धातुओं का पुनः चक्रण (Recyle) कर तथा पुनः उपयोग (Reuse) करके ।
In simple words: प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए व्यक्ति ऊर्जा दक्ष उपकरणों (जैसे CFLs, सौर उपकरण) का उपयोग कर सकता है, बिजली और पानी की बचत कर सकता है, छोटी दूरियों के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग कर सकता है, और '3R' (पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग) के सिद्धांतों का पालन कर सकता है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, परिवहन विकल्पों और '3R' जैसे विभिन्न क्षेत्रों में खपत कम करने के उपायों को विस्तार से बताएं।

 

Question 6. निम्न से संबंधित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ।
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।
Answer:
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए मैंने निम्न कार्य किए
- वृक्षारोपण पर ध्यान दिया।
- विद्यालय जाने के लिए साइकिल का प्रयोग किया या पैदल गया।
- पानी, बिजली के अनावश्यक खपत को रोका ।
- कागज़ के लिफाफों, बोतलों, डिब्बों आदि का दोबारा प्रयोग किया।
- पॉलीथीन बैग का प्रयोग बंद किया तथा पुनःचक्रण वाली वस्तुओं को एकत्र किया।
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव निम्न तरीकों से बढ़ाया
- स्नान करने के समय बाल्टी या मग के स्थान पर फव्वारे का इस्तेमाल ।
- ठंड के दिनों में कमरा गर्म रखने के लिए हीटर तथा गर्मी के दिनों में AC का प्रयोग करना न कि सौर ऊर्जा का।
- स्कूल जाने के लिए स्कूटर या कार का उपयोग किया।
- व्यर्थ पंखे, बल्ब, TV आदि चलते रहने के कारण।
- अपने घर के आस-पास के पेड़-पौधों को काटकर।
In simple words: पिछले सप्ताह मैंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, साइकिल का उपयोग, पानी-बिजली बचाना, और वस्तुओं का पुनः उपयोग/पुनर्चक्रण किया। वहीं, फव्वारे से स्नान, हीटर/AC का उपयोग, स्कूटर/कार का उपयोग, अनावश्यक बिजली जलाना और पेड़ काटना जैसे कार्यों से दबाव बढ़ाया।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत अनुभवों को सूचीबद्ध करते समय, संरक्षण और दबाव बढ़ाने वाले कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बिंदुओं में प्रस्तुत करें।

 

Question 7. इस अध्याय में उठाई गई समस्याओं के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे, जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को प्रोत्साहन मिल सके ?
Answer: हमें अवश्य ही अपनी जीवन-शैली में 3R की संकल्पना पर ध्यान देना होगा एवं लागू करना होगा। ये तीन R है
- कम उपयोग (Reduce)
- पुनः चक्रण (Recycle)
- पुनः उपयोग (Reuse)
इसके आलावा भी कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाने की आवश्यकता है जो निम्न हैं
- CNG का प्रयोग
- CFLs का प्रयोग ।
- सौर ऊर्जा का प्रयोग
- जानवरों की त्वचा, बाल एवं सींग से बनी वस्तुओं का बहिष्कार
- पॉलिथीन के स्थान पर जूट, कपड़े के बैग का इस्तेमाल
- वृक्षारोपण पर बल देना इत्यादि ।
In simple words: संसाधनों के संपोषण के लिए अपनी जीवन-शैली में '3R' (कम उपयोग, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग) को अपनाना चाहिए, साथ ही CNG, CFLs और सौर ऊर्जा का प्रयोग करना, वन्यजीव उत्पादों का बहिष्कार करना और पॉलीथीन की जगह कपड़े के बैग का इस्तेमाल करके वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।

🎯 Exam Tip: '3R' सिद्धांतों को प्रमुखता दें और साथ ही अन्य ऊर्जा-दक्षता, प्रदूषण-नियंत्रण और संरक्षण के उपायों को शामिल करें।

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