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Class 10 Sanskrit Chapter 6 ज्ञानम पुतातरम सदा Textbook Solutions with Answers
परिचय
संस्कृत कथा-साहित्य के शिरोमणि, कश्मीरी पण्डित सोमदेव की अनुपम रचना 'कथासरित्सागर' है। इनके स्थिति-काल और परिवार का कोई भी परिचय अद्यावधि उपलब्ध नहीं है। इन्हें कश्मीर के राजा अनन्त का आश्रित माना जाता है तथा उन्हीं के स्थिति-काल से इनके स्थिति-काल का भी अनुमान किया जाता है। 'कथासरित्सागर' नाम से ही इस ग्रन्थ में अनेक कथाओं का होना स्पष्ट है। इसकी अधिकांश कथाएँ गुणाढ्य की 'बृहत्कथा' से ली गयी हैं। 'कथासरित्सागर' में 18 लम्बक, 124 तरंग और 21,389 पद्य हैं। 'पञ्चतन्त्र' और 'हितोपदेश' के समान ही इसकी कथाओं में भी मुख्य कथा के भीतर अनेक छोटी-छोटी अन्तर्कथाएँ निहित हैं। इसमें पशु-पक्षियों, भूत-पिशाचों, मायावी कन्याओं, जादू-टोने, राजाओं, राज्यतन्त्र के षड्यन्त्रों इत्यादि विषयों को लेकर अनेकानेक कथाएँ लिखी गयी हैं, जिनमें से कुछ सत्य पर आधारित हैं तो कुछ नितान्त कपोल-कल्पित । रचना की भाषा-शैली के रोचक, सरल और प्रवाहपूर्ण होने के कारण कहानियाँ व तत्सम्बन्धित ज्ञान हृदयग्राही हैं।
पाठ-सारांश
दीपकर्णि को शंकर द्वारा पुत्र-प्राप्ति का उपाय बताना
प्राचीनकाल में दीपकर्णि नाम के एक पराक्रमी राजा थे। उनकी शक्तिमती नाम की पत्नी थी। एक दिन उपवन में सोते हुए उनको साँप ने काट लिया और उनकी मृत्यु हो गयी। प्राणों से अधिक प्रिय रानी के दुःख से दुःखी होकर पुत्रहीन होने पर भी दीपकर्ण ने दूसरा विवाह नहीं किया। एक बार स्वप्न में भगवान् शंकर ने उसे आदेश दिया कि “दीपकर्णि वन में घूमते हुए सिंह पर सवार जिस बालक को तुम देखोगे, उसे लेकर घर आ जाना। वही तुम्हारा पुत्र होगा।”
राजा को पुत्र की प्राप्ति
एक दिन वह राजा शिकार खेलने के लिए जंगल गया। वहाँ उसने सूर्य के समान तेजस्वी एक बालक को सिंह पर आरूढ़ देखा। राजा ने स्वप्न के अनुसार जल पीने के इच्छुक उस सिंह को बाण से मार दिया। तब सिंह उस शरीर को छोड़कर पुरुष की आकृति का हो गया।
पुरुषाकृति द्वारा राजा को अपना वृत्तान्त सुनाना
राजा के पूछने पर उसने बताया कि मैं कुबेर का मित्र 'सात' नाम का यक्ष हूँ। मैंने पहले एक ऋषि कन्या को गंगा के समीप देखा था और उससे गान्धर्व विधि से विवाह कर अपनी पत्नी बना लिया। उसके बन्धुओं ने क्रोध में आकर शाप दिया कि तुम दोनों सिंह हो जाओ। उसके शाप से हम दोनों सिंह हो गये। सिंहनी तो पुत्र को जन्म देते ही मृत्यु को प्राप्त हो गयी। मैंने इस पुत्र का दूसरी सिंहनियों के दूध से पालन किया है। अब आपका बाण लगने से मैं भी शाप-मुक्त हो गया हूँ। अब आप इस पुत्र को स्वीकार कीजिए, यह कहकर वह यक्ष अन्तर्हित हो गया।
बालक का नामकरण
राजा उस बालक को लेकर घर आ गया और सात नामक यक्ष पर आरूढ़ होने के कारण उसका नाम सातवाहन रख दिया। कालान्तर में दीपकर्णि के वन चले जाने पर अर्थात् वानप्रस्थाश्रम में प्रवेश करने पर सातवाहन सार्वभौम राजा हो गया।
रानी द्वारा सातवाहन का अपमान
इसके बाद किसी समय सातवाहन देवी के उद्यान में बहुत समय तक घूमता हुआ जल-क्रीड़ा करने के लिए वापी में उतर गया। वहाँ पत्नी के साथ परस्पर जल डालकर क्रीड़ा करता रहा। उसकी एक कोमलांगी रानी जल-क्रीड़ा करती हुई थक गयी और राजा से बोली-राजन्! 'मोदकै ताडय' (मुझे जल से मत मारो)। राजा ने इसका अर्थ 'मुझे लड्डुओं से मारो' समझकर बहुत-से लड्डू मँगवाये। तब रानी हँसकर बोली-राजन्! जल में लड्डुओं का क्या काम? मैंने तो 'मुझे जल से मत मारो' ऐसा कहा था। तुम कैसे अल्पज्ञ हो, जो 'मा' और 'उदकैः' की सन्धि और प्रकरण भी नहीं जानते हो। यह सुनकर राजा अत्यधिक लज्जित हुआ और उसी क्षण जल-क्रीड़ा छोड़कर घर आ गया और पूछने पर कुछ भी नहीं बोला। मैं पाण्डित्य या मृत्यु को प्राप्त करूंगा, इस प्रकार सोचते हुए वह दुःखी हो गया ।
गुणाढ्य और शर्ववर्मा का राजा के पास जाना
राजा की ऐसी दशा देखकर सब सेवक घबरा गये । गुणाढ्य और शर्ववर्मा उसकी उस दशा को जान गये। उन्होंने राजहंस नाम के सेवक को भेजकर अन्य रानियों से कारण जान लिया कि विष्णुशक्ति की पुत्री ने उसकी यह दशा की है। यह सुनकर शर्ववर्मा ने सोचते हुए जान लिया कि राजा के सन्ताप का कारण बुद्धिमान न होना है। वह हमेशा पाण्डित्य चाहता रहा है। इसी कारण राजा अपमानित है। इस प्रकार आपस में विचार करते हुए शर्ववर्मा और गुणाढ्य प्रातः होते ही राजा के भवन में गये और उसके पास बैठकर उसकी उदासी का कारण पूछा ।
शर्ववर्मा द्वारा प्रतिज्ञा करना
राजा के उत्तर न देने पर शर्ववर्मा ने कहा कि मैंने आज स्वप्न में आकाश से गिरे हुए एक कुसुम में से निकल कर श्वेतवस्त्रधारिणी एक सुन्दर स्त्री को आपके मुख में प्रवेश करते देखी है। मुझे तो वह साक्षात् सरस्वती जान पड़ी। निश्चय ही आप शीघ्र विद्वान् हो जाएँगे । मन्त्री गुणाढ्य ने कहा कि “राजन्! मनुष्य सभी विद्याओं में प्रमुख व्याकरण का बारह वर्षों में ज्ञाता हो जाता है। परन्तु मैं आपको छः वर्षों में ही इसका ज्ञान करा सकता हूँ।” ऐसा सुनकर वहीं पर खड़े शर्ववर्मा ने छः महीने में ही सिखाने को कहा। यह सुनकर क्रोध से गुणाढ्य ने कहा कि यदि महाराज को तुमने छः महीने में ही शिक्षित कर दिया तो मैं संस्कृत, प्राकृत और देशभाषा तीनों का व्यवहार नहीं करूंगा। शर्ववर्मा ने कहा कि यदि मैं छः महीने में न सिखा सका तो बारह वर्ष तक आपकी खड़ाऊँ ढोऊँगा। शर्ववर्मा ने अपनी उस कठोर प्रतिज्ञा को अपनी पत्नी से बताया।
राजा का विद्वान् होना
अपनी पत्नी की सलाह पर शर्ववर्मा मौन धारण करके कार्तिकेय के मन्दिर में जाकर कठोर तपस्या करने लगा। कार्तिकेय ने प्रसन्न होकर वरदान दिया। उसने राजा को समस्त विद्याएँ प्रदान कर दीं। राजा विद्वान् हो गया और उसने प्रसन्न होकर शर्ववर्मा को भरुकच्छ प्रदेश का राज्य दे दिया। विष्णुशक्ति की पुत्री को भी उसने अपनी प्रधान रानी बना लिया।
चरित्र-चित्रण
शर्ववर्मा
परिचय शर्ववर्मा राजा सातवाहन का विश्वासपात्र मन्त्री है। वह राजा का कल्याण चाहने वाला, विद्याओं में निपुण एवं बुद्धिमान व्यक्ति है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. राजा का शुभचिन्तक
शर्ववर्मा अपने स्वामी राजा सातवाहन का कल्याण चाहने वाला सच्चा शुभचिन्तक मन्त्री है। यही कारण है कि वह राजा की अस्वस्थता का समाचार सुनते ही प्रधान अमात्य गुणाढ्य के साथ राजा के पास पहुँच जाता है। राजा की आन्तरिक पीड़ा को समझकर कमल में से सरस्वती के निकलने और राजा के मुख में प्रवेश करने का स्वप्न सुनाकर राजा को विद्वान् होने के लिए पूर्ण आश्वस्त कर देता है। उसकी इस सान्त्वना से राजा की चिन्ता दूर हो जाती है।
2. बुद्धिमान्
शर्ववर्मा अत्यन्त बुद्धिमान है। उसकी बुद्धि दुरूह विषयों को भी सरलता से हल कर देती है। वह मानव-मनोविज्ञान का पारंगत वेत्ता मन्त्री है। वह राजा की चिन्ता का कारण उसका विद्वान् न होना जान लेता है। जैसा कि उसके कथन-"अहं जानाम्यस्य राज्ञः मौख्खु तापतः मन्युः" से स्पष्ट होता है। वह बुद्धि के बल पर राजा को छः मास में संस्कृत व्याकरण का ज्ञान कराकर उसे श्रेष्ठ विद्वानों की श्रेणी में बिठाता है।
3. तपस्वी एवं कर्मनिष्ठ
राजा को विद्वान् बनाने के लिए शर्ववर्मा कार्तिकेय के मन्दिर में मौन धारण करके निराहार कठोर तपस्या करता है और कार्तिकेय के वरदान से प्राप्त समस्त विद्याओं के ज्ञान को वह राजा सातवाहन को प्रदत्त कर देता है।
4. दृढ़-प्रतिज्ञ
शर्ववर्मा राजा को छः मास में ही विद्वान् बनाने की कठोर प्रतिज्ञा करता है और अपनी प्रतिज्ञा की पूर्ति के लिए कार्तिकेय के मन्दिर में घोर तपस्या करता है तथा छः माह के अन्दर राजा को समस्त विद्याएँ सिखाकर अपनी प्रतिज्ञा का पालन करता है।
5. साहसी
शर्ववर्मा सारी विद्याएँ राजा को छः माह में सिखाने की बात कहकर अपूर्व साहस का परिचय देता है। वह नम्रतापूर्वक सारी बात अपनी पत्नी से बताता है और उसके बताये उपाय के अनुसार निराहार रहकर कार्तिकेय के मन्दिर में तपस्या करता है। उसकी यह घोषणा कि वह राजा को छः माह में ही विद्वानों की श्रेणी में ला देगा, उसके अपूर्व साहस का ही परिचायक है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि शर्ववर्मा राजा का शुभचिन्तक; योग्य मन्त्री, दृढ़-प्रतिज्ञ, विद्वान्, साहसी और कर्मनिष्ठ व्यक्ति है।
सातवाहन
परिचय सात नामक यक्ष को अपना वाहन बनाये जाने के कारण इसका नाम सातवाहन रखा गया था। यह वीर, साहसी और लोक-व्यवहार में निपुण था, किन्तु इसे संस्कृत भाषा का कोई विशेष ज्ञान नहीं था। इसके चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ दृष्टिगत होती हैं
1. वीर और साहसी
बचपन में सिंह आदि वन्यप्राणियों के मध्य पाले जाने के कारण राजा सातवाहन परम वीर और साहसी है। अपने इसी साहस और वीरता के कारण वह आगे चलकर सार्वभौम राजा बनता है। कथा में उसके सार्वभौम राजा होने का वर्णन इस प्रकार किया गया है-"भूपतिः सातवाहनः सार्वभौमो संवृत्तः ।”
2. प्राकृत भाषा का ज्ञाता
राजा सातवाहन के राज्य की अधिकांश प्रजा प्राकृत भाषा बोलती है; अतः राजा सातवाहन भी इसी भाषा में पारंगत है। संस्कृत भाषा का उसे बहुत अधिक ज्ञान नहीं है। यही कारण है। कि मोदकैः' का शुद्ध विच्छेद नहीं कर पाने के कारण वह अपनी रानी के द्वारा अपमानित होता है।
3. प्रेमी
राजा सातवाहन सच्चे प्रेमी हैं। वे अपनी प्रिय रानी की इच्छा को पूर्ण करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उसके मुख से किसी बात के निकलने के साथ ही राजा उसे पूर्ण करने का उपक्रम कर देते हैं। यही कारण है कि स्नान के समय रानी के द्वारा "मौदकै परिताडय” कहते ही राजा तुरन्त लड्डू मँगवाते हैं।
4. भावुक और मानी
भावुक व्यक्ति को मान-अपमान की बातें अधिक लगती हैं। यही स्थिति राजा सातवाहन की भी है। अपनी रानी द्वारा उपहास का पात्र बनाये जाने पर वे उसी समय प्रतिज्ञा करते हैं कि या तो संस्कृत में पाण्डित्य प्राप्त करूंगा या मृत्यु का वरण कर लूंगा और अन्ततः वे पाण्डित्य प्राप्त करके अपनी प्रतिज्ञा को पूर्ण करते हैं। यह घटना उनके भावुक और मानी होने की परिचायक है।
5. कुशाग्रबुद्धि
राजा सातवाहन कुशाग्रबुद्धि हैं, यही कारण है कि वे संस्कृत व्याकरण जैसे कठिन विषय में भी छ: माह में पाण्डित्य प्राप्त कर लेते हैं, जब कि विद्वानों का मानना है कि सतत अध्ययन करने पर व्यक्ति बारह वर्ष में संस्कृत व्याकरण में निपुणता प्राप्त कर लेता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कुशाग्रबुद्धि, वीर, साहसी और स्वाभिमानी होने के साथ-साथ राजा सातवाहन में एक श्रेष्ठ व्यक्ति के समस्त गुण विद्यमान हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. स्वप्ने भगवानिन्दुशेखरः राजानं किमादिदेश?
Answer: भगवान् इन्दुशेखर ने स्वप्न में राजा को आदेश दिया कि तुम वन में घूमते हुए सिंह पर सवार जिस बालक को देखो, उसे घर ले आओ। वही तुम्हारा पुत्र होगा। प्राचीन ग्रंथों में सपने अक्सर भविष्य की घटनाओं का संकेत देते हैं।
In simple words: भगवान इन्दुशेखर ने राजा से स्वप्न में कहा कि जंगल में सिंह पर बैठे एक बालक को घर लाओ, वही उसका पुत्र होगा।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के उत्तर में घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से और संक्षिप्त रूप में बताना महत्वपूर्ण है।
Question 2. सिंहः राजानं किमवदत्?
Answer: सिंह ने राजा से कहा कि "हे भूपति! मैं धनद (कुबेर) का मित्र 'साती' नामक यक्ष हूँ।" यक्षों को अक्सर प्रकृति के संरक्षक या खजाने के रखवाले के रूप में दर्शाया जाता है।
In simple words: सिंह ने राजा को बताया कि वह कुबेर का मित्र, साती नाम का यक्ष है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के नाम और उनके सम्बन्धों को ध्यान से याद रखें, क्योंकि ये कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 3. सिंहारूढं बालकं दृष्ट्वा राजा किमकरोत् ।
Answer: राजा ने सिंह पर बैठे बालक को देखकर सिंह को बाण से मार दिया। प्राचीन कथाओं में, अप्रत्याशित कार्य भी कभी-कभी भविष्यवाणी किए गए परिणामों की ओर ले जाते हैं।
In simple words: सिंह पर बैठे बालक को देखकर राजा ने सिंह पर बाण चला दिया।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों के उत्तर में कार्य-कारण सम्बन्ध को सही ढंग से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 4. 'मोदकैर्देव' इत्यस्य कोऽभिप्रायः?
Answer: 'मोदकैर्देव' का अभिप्राय है- “हे देव! जल से (उदकैः) नहीं (मा) मारो।” शब्दों की गलतफहमी, खासकर वे जो समान ध्वनि वाले होते हैं, कभी-कभी हास्यपूर्ण या शर्मनाक स्थिति पैदा कर सकती हैं।
In simple words: 'मोदकैर्देव' का मतलब है "हे देव! मुझे पानी से मत मारो।"
🎯 Exam Tip: संस्कृत में शब्दों के अर्थ और उनके प्रयोग को समझना बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर जब शब्द एक जैसे लगते हों।
Question 5. शर्ववर्मणः भार्या स्वपतये किं न्यवेदयत्?
Answer: शर्ववर्मा की पत्नी ने अपने पति से निवेदन किया कि “हे प्रभो! इस संकट में भगवान् कार्तिकेय (स्वामिकुमार) के बिना आपकी कोई और गति (रास्ता) नहीं दिखती है।” परिवार से मिली समझदारी भरी सलाह अक्सर चुनौतीपूर्ण समय में दिशा प्रदान करती है।
In simple words: शर्ववर्मा की पत्नी ने अपने पति से कहा कि इस मुश्किल में भगवान कार्तिकेय के बिना और कोई उपाय नहीं है।
🎯 Exam Tip: जब कोई विशेष व्यक्ति या देवता उल्लेखित हो, तो उसका नाम सही ढंग से लिखें।
Question 6. राजा सातवाहनः कथं सर्वाः विद्याः प्राप्तवान्?
Answer: राजा सातवाहन ने शर्ववर्मा के माध्यम से और परमेश्वर (कार्तिकेय) की कृपा से सभी विद्याएँ प्राप्त कीं। समर्पण और ईश्वरीय आशीर्वाद व्यक्तियों को सीखने के महान कार्य करने में सशक्त कर सकते हैं।
In simple words: राजा सातवाहन को सारी विद्याएँ शर्ववर्मा की मदद से और भगवान के आशीर्वाद से मिलीं।
🎯 Exam Tip: सीखने में गुरु की भूमिका और ईश्वरीय कृपा के महत्व को उजागर करें।
Question 7. दीपकर्ण कस्मात् हेतोः अटवीं गतः?
Answer: दीपकर्णि पुत्र प्राप्त करने के उद्देश्य से वन में गए थे। प्राचीन शासक अक्सर अपनी वंश परंपरा को जारी रखने के लिए ईश्वरीय हस्तक्षेप या कठिन कार्य करते थे।
In simple words: दीपकर्णि पुत्र पाने के लिए वन में गए थे।
🎯 Exam Tip: 'कस्मात् हेतोः' जैसे प्रश्न में कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
Question 8. सिंहः कः आसीत्?
Answer: सिंह धनद (कुबेर) का मित्र 'सात' नामक एक यक्ष था। पशु रूप में परिवर्तन पौराणिक कहानियों में एक सामान्य विषय है।
In simple words: सिंह कुबेर का मित्र 'सात' नामक एक यक्ष था।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पात्रों की वास्तविक पहचान को उजागर करना आवश्यक है।
Question 9. राजानं मूर्ख कथितवती राज्ञी कस्या तनया आसीत्?
Answer: राजा को मूर्ख कहने वाली रानी विष्णुशक्ति की पुत्री थी। अनजाने में किए गए अपमान भी कभी-कभी आत्म-सुधार की तीव्र इच्छा जगा सकते हैं।
In simple words: राजा को मूर्ख कहने वाली रानी विष्णुशक्ति की बेटी थी।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों में दिए गए विशिष्ट सम्बन्धों (जैसे 'कस्या तनया') पर ध्यान दें।
Question 10. कः राजानं सातवाहनं विद्यायुक्तं चकार?
Answer: शर्ववर्मा ने राजा सातवाहन को विद्यायुक्त (ज्ञानी) बनाया। एक अच्छा शिक्षक किसी भी छात्र को सीखने की चुनौती से पार पाने में मदद कर सकता है।
In simple words: शर्ववर्मा ने राजा सातवाहन को ज्ञानी बनाया।
🎯 Exam Tip: प्रश्न में किए गए कार्य के कर्ता (किसने किया) को सही ढंग से पहचानें और उत्तर में उसका उल्लेख करें।
Question 11. दीपक भार्यायाः किं नाम आसीत्? या 'दीपकणिः' इति प्राज्यविक्रमस्य राज्ञः भार्यानाम किम्?
Answer: दीपक की भार्या (पत्नी) का नाम शक्तिमती था। शाही परिवारों में रानी अक्सर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, भले ही इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख न किया गया हो।
In simple words: दीपक की पत्नी का नाम शक्तिमती था।
🎯 Exam Tip: नाम और सम्बन्धों को याद रखना कहानी को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. 'ज्ञानं पूततरं सदा' नामक कथा लोककथा साहित्य के किस ग्रन्थ से संकलित है?
(क) 'कथासरित्सागर' से
(ख) 'जातकमाला' से
(ग) 'पञ्चतन्त्रम्' से
(घ) “हितोपदेशः' से
Answer: (क) 'कथासरित्सागर' से
In simple words: 'ज्ञानं पूततरं सदा' कहानी 'कथासरित्सागर' नामक लोककथा संग्रह से ली गई है। 'कथासरित्सागर' भारतीय किंवदंतियों, परियों की कहानियों और लोककथाओं का एक विशाल संग्रह है।
🎯 Exam Tip: कहानी के स्रोत ग्रंथ को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके सांस्कृतिक संदर्भ को दर्शाता है।
Question 2. 'कथासरित्सागर' के रचयिता का क्या नाम है?
(क) बल्लाल सेन
(ख) सोमदेव
(ग) विष्णु शर्मा
(घ) विद्यापति
Answer: (ख) सोमदेव
In simple words: 'कथासरित्सागर' के लेखक का नाम सोमदेव है। सोमदेव एक कश्मीरी लेखक थे, और उनका काम प्राचीन भारतीय कहानी कहने की परंपराओं में एक महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के लेखकों के नाम याद रखना आवश्यक है।
Question 3. कश्मीर के निवासी सोमदेव किस राजा के आश्रित कवि थे?
(क) पृथ्वीराज चौहान के
(ख) जयसिंह के
(ग) हर्षवर्द्धन के
(घ) अनन्त के
Answer: (घ) अनन्त के
In simple words: सोमदेव, जो कश्मीर के रहने वाले थे, राजा अनन्त के आश्रित कवि थे। राजाओं का संरक्षण प्राचीन भारत में कई विद्वानों और कवियों को अपने साहित्यिक कार्यों के लिए समर्पित होने का अवसर देता था।
🎯 Exam Tip: कवियों और लेखकों के आश्रयदाता राजाओं के बारे में जानकारी उनके काल और प्रभाव को समझने में मदद करती है।
Question 4. “तं स्वप्ने भगवानन्दुशेखरः इत्यादिदेश ।” में भगवानिन्दुशेखरेः' से कौन संकेतित हैं?
(क) भगवान् इन्द्र
(ख) भगवान् विष्णु
(ग) भगवान् शंकर
(घ) भगवान् ब्रह्मा
Answer: (ग) भगवान् शंकर
In simple words: "तं स्वप्ने भगवानिन्दुशेखरः इत्यादिदेश" वाक्य में 'भगवानिन्दुशेखरेः' का अर्थ भगवान शंकर है। भगवान शिव को अक्सर कई नामों से पुकारा जाता है, जिनमें से प्रत्येक एक अलग विशेषता या रूप को उजागर करता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत में देवताओं के विभिन्न नामों और उनके पर्यायवाची शब्दों को जानना आवश्यक है।
Question 5. “तत्रनन्दने महेन्द्रइव सुचिरं विहरन्”:”।" वाक्य में' महेन्द्र' से किसका अर्थबोध होता है?
(क) सातवाहन का
(ख) इन्द्रका
(ग) दीपकर्ण का
(घ) शंकर का
Answer: (ख) इन्द्रका
In simple words: "तत्रनन्दने महेन्द्रइव सुचिरं विहरन्" वाक्य में 'महेन्द्र' का मतलब इन्द्र है। संस्कृत साहित्य में, शक्तिशाली और राजसी व्यक्तियों की तुलना अक्सर देवताओं के राजा, इन्द्र से की जाती है।
🎯 Exam Tip: उपमाओं और अलंकारों को समझना संस्कृत पाठों में गहरा अर्थ निकालने में मदद करता है।
Question 6. राजमहिषी द्वारा कहे गये' मौदकैर्देव मां परिताडय।” कथन में 'मोदकैः' का क्या अर्थ है?
(क) पानी से नहीं
(ख) पानी द्वारा
(ग) लड्डूओं से
(घ) लड्डूओं से नहीं
Answer: (ख) पानी द्वारा
In simple words: रानी के कथन "मौदकैर्देव मां परिताडय" में 'मोदकैः' का अर्थ 'पानी द्वारा' है। शास्त्रीय संस्कृत साहित्य में अक्सर ऐसे शब्द-खेल और दोहरे अर्थ होते हैं, जिससे हास्यपूर्ण गलतफहमियां हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: कहानी के सन्दर्भ में शब्दों के वास्तविक और इच्छित अर्थ के बीच के अंतर को पहचानें।
Question 7. गुणाढ्य ने राजा सातवाहन को कितने वर्षों में व्याकरण सिखाने की बात कही?
(क) चार वर्ष में
(ख) पाँच वर्ष में
(ग) छः वर्ष में
(घ) सात वर्ष में
Answer: (ग) छः वर्ष में
In simple words: गुणाढ्य ने राजा सातवाहन को छः वर्षों में व्याकरण सिखाने की बात कही। उन्नत व्याकरण सीखने के लिए पर्याप्त समय और लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए संख्यात्मक तथ्यों और समय-सीमाओं को ठीक से याद रखें।
Question 8. शर्ववर्मा ने राजा सातवाहन को कितने मासों में व्याकरण सिखाने की बात कही?
(क) चार मास में
(ख) पाँच मास में
(ग) छः मास में
(घ) सात मास में
Answer: (ग) छः मास में
In simple words: शर्ववर्मा ने राजा सातवाहन को छः महीनों में व्याकरण सिखाने की बात कही। शर्ववर्मा का महत्वाकांक्षी वादा उनकी विधि और समर्पण में उनके गहरे आत्मविश्वास को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: दो अलग-अलग पात्रों द्वारा दिए गए समय-सीमाओं की तुलना करें और अंतर को समझें।
Question 9. सातवाहन ने मन्त्री शर्ववर्मा को कहाँ का राजा बनाया?
(क) प्रयाग का
(ख) धारानगरी का
(ग) उज्जयिनी का
(घ) भरुकच्छ का
Answer: (घ) भरुकच्छ का
In simple words: राजा सातवाहन ने मन्त्री शर्ववर्मा को भरुकच्छ का राजा बनाया। प्राचीन राज्यों में वफादार और प्रतिभाशाली मंत्रियों को राज्यपाल बनाना एक सामान्य प्रथा थी।
🎯 Exam Tip: पुरस्कार के रूप में दिए गए स्थान या राज्य का नाम याद रखना कहानी के महत्वपूर्ण विवरणों में से एक है।
Question 10. “तं ................................ भगवानिन्दुशेखरः इत्यादिदेश ।” वाक्य के रिक्त-स्थान की पूर्ति के लिए उचित शब्द है
(क) उद्याने
(ख) अटव्यां
(ग) प्रासादे
(घ) स्वप्ने
Answer: (घ) स्वप्ने
In simple words: वाक्य "तं ................................ भगवानिन्दुशेखरः इत्यादिदेश" में रिक्त स्थान के लिए सही शब्द "स्वप्ने" (सपने में) है। 'स्वप्ने' जैसे अव्यय या अधिकरण कारक का वाक्य के आरम्भ में प्रयोग अक्सर घटना की सेटिंग पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए पूरे वाक्य के सन्दर्भ और व्याकरणिक रूप पर ध्यान दें।
Question 11. 'अयं मया अन्यासां सिंहीनां ................................ वर्धितो ।” वाक्य में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी
(क) पयसा'
(ख) रक्तेन'
(ग) “वयसेन'
(घ) “पयसेन'
Answer: (घ) “पयसेन'
In simple words: वाक्य "अयं मया अन्यासां सिंहीनां ................................ वर्धितो" में रिक्त स्थान के लिए सही शब्द "पयसेन" (दूध द्वारा) है। एक वाक्य में शब्द का चुनाव उसके अर्थ को पूरी तरह से बदल सकता है, सही संदेश देने के लिए सावधानीपूर्वक चयन की आवश्यकता होती है।
🎯 Exam Tip: कहानी के आधार पर उचित कारक विभक्ति और शब्द का चयन करें।
Question 12. अद्य त्वया बाणाहतोऽहं ................................ विमुक्तोऽस्मि ।
(क) “तापाद्'
(ख) “शापाद्'
(ग) व्याध्यात्'
(घ) 'पीडात्'
Answer: (ख) “शापाद्'
In simple words: वाक्य "अद्य त्वया बाणाहतोऽहं ................................ विमुक्तोऽस्मि" में रिक्त स्थान के लिए सही शब्द "शापाद्" (शाप से) है। कई भारतीय कहानियों में, शाप शक्तिशाली होते हैं और उन्हें केवल विशिष्ट कार्यों या घटनाओं से ही तोड़ा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए प्रमुख घटनाक्रमों और उनके परिणामों को याद रखें, जैसे शाप मुक्ति।
Question 13. 'तत्छुत्वा राजा द्रुतं बहून् ................................ आनयनादिदेश ।' वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति होगी –
(क) 'मिष्टान्न'
(ख) 'पक्वान्न'
(ग) मोदकान्'
(घ) “मूलान्'
Answer: (ग) मोदकान्'
In simple words: वाक्य "तत्छुत्वा राजा द्रुतं बहून् ................................ आनयनादिदेश" में रिक्त स्थान के लिए सही शब्द "मोदकान्" (लड्डू) है। राजा का 'मोदक' के लिए त्वरित आदेश अपनी रानी को खुश करने की उसकी उत्सुकता को दर्शाता है, भले ही यह एक गलतफहमी पर आधारित हो।
🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण संवादों और उनके परिणामों को याद रखें, विशेषकर जहाँ गलतफहमी हुई हो।
Question 14. 'तस्य राजचेटस्य मुखादेतत् श्रुत्वा ................................ संशयादित्यचिन्तयत् ।” वाक्य-पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द है -
(क) दीपकर्ण
(ख) शक्तिमती
(ग) गुणाढय
(घ) शर्ववर्मा
Answer: (घ) शर्ववर्मा
In simple words: वाक्य "तस्य राजचेटस्य मुखादेतत् श्रुत्वा ................................ संशयादित्यचिन्तयत्" में रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द "शर्ववर्मा" है। मूल समस्या को समझना समाधान खोजने की दिशा में पहला कदम है, एक ऐसा गुण जो शर्ववर्मा अच्छी तरह से प्रदर्शित करते हैं।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनकी प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखें।
Question 15. “सङ्कटेऽस्मिन् ................................ विना तव गतिरन्या न दृश्यते ।” वाक्य-पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द है।
(क) स्वामिकुमारेण
(ख) स्वामीन्द्रेण
(ग) स्वामिस्कन्देन
(घ) स्वामिलम्बोदरेण
Answer: (क) स्वामिकुमारेण
In simple words: वाक्य "सङ्कटेऽस्मिन् ................................ विना तव गतिरन्या न दृश्यते" में रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द "स्वामिकुमारेण" (भगवान् कार्तिकेय द्वारा) है। जब असंभव लगने वाली चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो दैवीय हस्तक्षेप या एक शक्तिशाली देवता की मदद लेना एक सामान्य प्रथा है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट देवी-देवताओं या शक्तिशाली व्यक्तियों के नामों को उनके सही रूपों में पहचानें।
Question 16. पुरा .............. इति ख्यातो प्राज्य विक्रमः राजाभूत्।
(क) गुणाढयः
(ख) दीपकणिः
(ग) शर्ववर्मा
(घ) वीरवरः
Answer: (ख) दीपकणिः
In simple words: वाक्य "पुरा .............. इति ख्यातो प्राज्य विक्रमः राजाभूत्" में रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द "दीपकर्णिः" है। किसी कथा को "पुरा" (प्राचीनकाल में) से शुरू करना ऐतिहासिक या पौराणिक राजाओं का परिचय देने का एक पारंपरिक तरीका है।
🎯 Exam Tip: कथा के आरम्भ और मुख्य पात्रों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17. राजा सिंहारूढं ................................ अपश्यत् ।
(क) पुरुषं
(ख) बालकम्
(ग) नारीम्
(घ) नारीम्
Answer: (ख) बालकम्
In simple words: वाक्य "राजा सिंहारूढं ................................ अपश्यत्" में रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द "बालकम्" (बालक को) है। सिंह पर सवार एक बालक का दृश्य आश्चर्यजनक और महत्वपूर्ण रहा होगा, जो उसके असामान्य भाग्य का संकेत देता है।
🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख दृश्यों और उनमें शामिल पात्रों को ठीक से पहचानें।
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