UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 Dinabandhu JyotibaPhule

Here are reliable UP Board Solutions for Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले matching the 2026 27 academic session standards. Built around recent UP Board textbook frameworks for Class 10 Sanskrit, these expert answers help students learn quickly and are ready for free PDF download.

Download Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले UP Board Answers

Check out these UP Board textbook questions for Class 10 to strengthen your basic knowledge. Our Class 10 Sanskrit solutions offer structured, step-by-step answers that clarify every concept. Practicing these Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले solutions guarantees better results in school tests.

Get Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले UP Board Solution PDF for Class 10 Sanskrit

कक्षा 10 संस्कृत पाठ 16 हिंदी अनुवाद दीनबन्धु ज्योतिबाफुले के प्रश्न उत्तर यूपी बोर्ड

पाठ का सारांश

ग्यारह अप्रैल, सन् 1827 ई. में पुणे नामक स्थान पर जन्मे ज्योतिबा फुले एक भारतीय विचारक, समाज-सेवक, लेखक, दार्शनिक और क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्होंने महाराष्ट्र में सत्यशोधक संस्था को संगठित किया था। दलित स्त्रियों के उत्थान के लिए अनेक कार्यों को करने वाले ज्योतिबा फुले का विचार था कि भारतीय समाज में सभी शिक्षित हों ।

ज्योतिबा फुले के पूर्वज सतारा से पुणे आकर फूलों की माला बेचकर जीवन-यापन करते थे। इसी कारण से ये 'फुले' नाम से विख्यात हुए। आरम्भ काल में मराठी भाषा का अध्ययन करने वाले फुले की शिक्षा बीच में ही रुक गयी। इक्कीस वर्ष की अवस्था में उन्होंने अंग्रेजी भाषा से सातवीं कक्षा की शिक्षा पूरी की। 1840 में इनका विवाह सावित्री नाम की कन्या के साथ हुआ। पत्नी के साथ मिलकर इन्होंने स्त्री-शिक्षा के लिए कार्य किया। उन्होंने विधवा तथा अन्य स्त्रियों के साथ-साथ कृषकों की दशा को सुधारने का प्रयत्न किया। 1848 में स्त्रियों के लिए प्रथम विद्यालय संचालित किया। इस प्रयत्न में उच्चवर्गीय लोगों ने अवरोध भी उत्पन्न किया किन्तु वे उनके आगे टिक न सके ।

फुले के मन में सन्तों के प्रति अगाध श्रद्धा थी। दलितों की सहायता के लिए 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की। इनके सेवा कार्य को देखकर इन्हें मुम्बई की एक सभा में 'महात्मा' की उपाधि दी गई। ज्योतिबा ने बिना ब्राह्मण के विवाह कराने की मान्यता मुम्बई न्यायालय से दिलाई। उन्होंने तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी आदि अनेक ग्रन्थों की रचना की। ज्योतिबा फुले क्रान्तिकारी विचारक, समाजसेवक, दार्शनिक और लेखक थे। अस्पृश्यता के दुःख के उन्मूलन में इनकी भूमिका अकथनीय रही है। इन महापुरुष का स्वर्गवास 28 नवम्बर, 1890 ई. में पुणे में हुआ था। माली समाज के महात्मा ज्योतिबा फुले एक ऐसे महामानव थे जिन्होंने निम्न जाति को समानता का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन कार्य किया। हमारे देश के इतिहास में सावित्री फुले को प्रथम दलित शिक्षिका का गौरव प्राप्त हुआ था।

गद्यांशों का ससन्दर्भ अनुवाद

ज्योतिराव गोविन्दराव इत्याख्यस्य जन्म अप्रैलमासस्य एकादशदिनाङ्के सप्तविंशत्याधिके अष्टादशखीष्टाब्दे पुणे नामके स्थानेऽभवत्। अयं महात्मा फुले एवं ज्योतिबा फुले नाम्ना प्रचलितो एको महान् भारतीय विचारकः, समाजसेवकः, लेखकः, दार्शनिकः क्रान्तिकारी कार्यकर्ता चासीत् । त्रयोधिकसप्ततिः अष्टादशशते ख्रीष्टाब्दे अयं महाराष्ट्र 'सत्यशोधक समाज' नामक संस्थां संगठितवान्। नारीणां दलितानाञ्चोत्थानायायमनेकानि कार्याण्यकरोत्। ‘भारतीयाः मानवाः सर्वे शिक्षिताः स्युः', अस्य एतत् चिन्तनमासीत्।।

शब्दार्थ: इत्याख्यस्य = इस नाम वाले । स्थानेऽभवत् = स्थान पर हुआ । संगठितवान् = संगठित किया। दलितानाञ्चोत्थानायायमनेकानि = और दलितों के उत्थान के लिए अनेक, सर्वे शिक्षिताः स्युः = सभी शिक्षित हों ।।

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत' के गद्य-खण्ड 'गद्य-भारती' में संकलित 'दीनबंधु ज्योतिबा फुले' शीर्षक पाठ से उद्धृत है।

 

Question 1. इस गद्यांश में ज्योतिबा फुले के जन्म और उनके गुणों के विषय में बताया गया है।
Answer: ज्योतिराव गोविन्दराव का जन्म पुणे नामक स्थान पर 11 अप्रैल 1827 ई. को हुआ था। वे महात्मा फुले और ज्योतिबा फुले नामों से प्रसिद्ध थे। वे एक महान भारतीय विचारक, समाजसेवक, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। 1873 ई. में उन्होंने महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' नामक संस्था बनाई। उन्होंने स्त्रियों और दलितों के उत्थान के लिए बहुत काम किया। उनका मानना था कि सभी भारतीय लोगों को शिक्षित होना चाहिए। इस विचार ने समाज में बड़ा बदलाव लाया।
In simple words: ज्योतिराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। वह एक महान विचारक, समाजसेवक और क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' बनाया और स्त्रियों व दलितों की शिक्षा तथा उत्थान के लिए बहुत काम किया।

🎯 Exam Tip: प्रसंग में दिए गए विषय के अनुसार, अनुवाद को सीधे और स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत करें, जिसमें सभी मुख्य जानकारी शामिल हो।

तस्य पूर्वजाः पूर्वं सतारातः आगत्य पुणे नगरं प्रत्यागत्य पुष्पमालां गुम्फयन् स्वजीवनं निर्वापयामास । परिणामस्वरूपे मालाकारस्य कार्ये संलग्नाः इमे 'फुले' नाम्ना विख्याताः अभवन् । महानुभावोऽयं प्रारम्भिककाले मराठीभाषां अपठत् किन्तु दैववशात् अस्य शिक्षा मध्येऽवरुद्धा संजाता। सः पुनः पठितुं मनसि विचार्य एकविंशतिं वर्षस्यावस्थायां आंग्लभाषायाः सप्तम्याः कक्षायाः शिक्षा पूरितवान्। चत्वारिंशत् अधिकाष्टादशशतमे (1840) खीष्टाब्दे अस्य विवाहः सावित्री नाम्न्याः कन्यया साकमभवत् । अस्य भार्यापि स्वयमपि एका प्रसिद्ध समाजसेविका संजाता। समाजस्योन्नतये स्वभार्यया सह मिलित्वाऽयं दलितोत्थानाय स्त्रीशिक्षायै च कार्यमकरोत् । ।

शब्दार्थ: सतारातः आगत्य = सतारा से आकर पुष्पमालां गुम्फयन् = फूलमाला बनाते हुए। मालाकारस्य कार्ये संलग्नाः = माली के काम में लगे होने से। दैववशात् = भाग्यवश होकर। मनसि विचार्य = मन से सोचकर। भार्यापि = पत्नी भी। स्त्रीशिक्षायै = स्त्री-शिक्षा के लिए।

 

Question 2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक दीनबंधु ज्योतिबा के उपनाम तथा शिक्षा के विषय में बताते हुए लिखता है।
Answer: ज्योतिबा फुले के पूर्वज पहले सतारा से पुणे आकर फूलमाला बनाने का काम करके जीवन जीते थे। इस कारण से वे 'फुले' नाम से जाने गए। शुरुआत में उन्होंने मराठी भाषा पढ़ी, लेकिन उनकी पढ़ाई बीच में रुक गई। 21 साल की उम्र में उन्होंने फिर से पढ़ने का मन बनाया और अंग्रेजी में सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। साल 1840 में उनकी शादी सावित्री नाम की लड़की से हुई। उनकी पत्नी भी एक प्रसिद्ध समाजसेविका बनीं। समाज की भलाई के लिए, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर दलितों के उत्थान और स्त्रियों की शिक्षा के लिए काम किया। यह उनके सामाजिक सुधारों की नींव थी।
In simple words: ज्योतिबा फुले के परिवार ने फूलमाला बनाकर जीवन चलाया, इसलिए उनका उपनाम 'फुले' पड़ा। उनकी पढ़ाई बीच में रुक गई थी, लेकिन 21 साल की उम्र में उन्होंने अंग्रेजी में सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 1840 में सावित्रीबाई फुले से शादी की और अपनी पत्नी के साथ मिलकर दलितों और स्त्रियों की शिक्षा के लिए काम किया।

🎯 Exam Tip: उपनाम और शिक्षा से संबंधित मुख्य बिंदुओं को क्रम से लिखें, जिसमें महत्वपूर्ण वर्ष और व्यक्ति के नाम स्पष्ट हों।

ज्योतिबा फुले भारतीयसमाजे प्रचलिताः जात्याः आधारिताः विभाजनस्य पक्षौ नाऽसीत् । सः वैधव्ययुक्तानां नारीणाम् एवम् अपराणां नारीणां कृते महत्त्वपूर्ण कार्यं कृतवान् । कृषकाणां दशां वीक्ष्य दुःखितोऽयं तेषाम् उद्धाराय सतत् प्रयत्नशीलः आसीत्। 'स्त्रीणामसफलतायाः कारणं तेषामशिक्षैव विद्यते' इति विचार्य सः अष्टाचत्वरिंशत् अधिकाष्टदशखष्टाब्दे एकः विद्यालयः संचालितवान् अस्य कार्याय देशस्यायं प्रथमो विद्यालयः आसीत् । बालिका शिक्षायै शिक्षिकायाः स्वल्पतां दृष्ट्वा सः स्वयमेव शिक्षकस्य भूमिका निर्वहत् । अनन्तरं स्वभार्या शिक्षिकारूपेण नियुक्तवान्। उच्च सवंर्गीयाः जनाः प्रारम्भ कालादेव तस्य कार्ये बाधां स्थापयितु कटिबद्धाः आसन् । परञ्च अयं स्वकार्ये प्रयतमानः अग्रगण्यः अभवत् । तं अग्रे गतिशीलं दृष्ट्वा ते दुर्जनाः तस्य पितरं प्रति अशोभनीयं कथनमुक्ता। दम्पत्तिं स्वगृहात् बहिः प्रेषितवान्। स्वगृहात् बर्हिगमने सतितस्य कार्यावरुद्धं संजातम् परंच शीघ्रातिशीघ्रमेव सः बलिकाशिक्षायै त्रयोः विद्यालयाः उदघाटितवान्।

शब्दार्थ: प्रचलितजात्याधारितविभाजनस्य = प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन के। वैधव्ययुक्तानां नारीणाम् = विधवा स्त्रियों के। अपराणां नारीणाम् = अन्य (दूसरी) नारियों के। वीक्ष्य = देखकर/जानकर/समझकर। स्त्रीणामसफलतायाः कारणम् = स्त्रियों की असफलता का कारण। स्वल्पता दृष्ट्वा = अपनी कमी को जानकर। कार्ये बाधां स्थापयितुम = कार्य में अड़चन डालने के लिए। प्रयतमानः = प्रयास में लगे रहने वाले।

 

Question 3. इस गद्यांश में समाजसेवी ज्योतिराव गोविन्दराव फुले के द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों का उल्लेख किया गया है।
Answer: ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव के खिलाफ थे। उन्होंने विधवा स्त्रियों और अन्य नारियों के लिए महत्वपूर्ण काम किए। किसानों की खराब हालत देखकर वे बहुत दुखी होते थे और उनके सुधार के लिए लगातार कोशिश करते रहे। उनका मानना था कि स्त्रियों की असफलता का मुख्य कारण उनकी अशिक्षा है। इसी सोच के साथ उन्होंने 1848 ई. में एक स्कूल खोला, जो देश का पहला ऐसा स्कूल था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की कमी होने पर उन्होंने खुद शिक्षक का काम संभाला। बाद में उन्होंने अपनी पत्नी को शिक्षिका बनाया। शुरुआत में ऊँची जाति के लोगों ने उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश की, लेकिन वे अपने काम में आगे बढ़ते रहे। उनकी प्रगति देखकर उन बुरे लोगों ने उनके पिता के खिलाफ भी गलत बातें कहीं, जिसके कारण पति-पत्नी को घर से निकाल दिया गया। घर से बाहर निकलने से उनका काम कुछ समय के लिए रुक गया, पर जल्द ही उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए तीन और स्कूल खोल दिए। यह उनके दृढ़ निश्चय को दर्शाता है।
In simple words: ज्योतिबा फुले ने जातिगत भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने विधवाओं और किसानों के लिए काम किया। उनका मानना था कि स्त्रियों की अशिक्षा ही उनकी असफलता का कारण है, इसलिए उन्होंने 1848 में पहला स्कूल खोला। उच्च जाति के लोगों ने उनका विरोध किया और उन्हें घर से निकाल दिया, लेकिन उन्होंने तीन और लड़कियों के स्कूल खोल दिए।

🎯 Exam Tip: सामाजिक कार्यों का वर्णन करते समय, प्रमुख घटनाओं, उनकी प्रेरणा और विरोधों का सामना करने के तरीके को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

अस्य हृदि सन्त-महात्मानं प्रति बहुरुचिरासीत्। तस्य विचारेषु ‘ईश्वस्य सम्मुखे नर-नारी सर्वे समानाः सन्ति, तेषु श्रेष्ठता लघुता अशोभनीया विद्यते । दलितजनानामसहायञ्च न्यायार्थं महापुरुषोऽयं 'सत्यशोधक समाजम्' स्थापितवान्। अस्य सामाजिक सेवाकार्य विलोक्य अष्टाशीति अष्टादशशतख्रीष्टाब्दे मुम्बईनगरस्य एका विशाला सभा तं 'महात्मा' इत्युपाधिना अलङ्कृतवान् । ज्योतिबा महोदयेन ब्राह्मणेन पुरोहितेन बिनैव विवाहसंस्कारमकारयत् । अस्य संस्कारस्य मुम्बई न्यायालयात् मान्यता संप्राप्ता । सः तु बालविवाहस्य विरोधं एवञ्च विधवाविवाहस्य समर्थकः आसीत् ।

शब्दार्थ: हृदि = हृदय में। विचारेषु = विचारों में। दलितजनानामसहायांनाञ्च = दलितों और असहाय लोगों का। विलोक्य = देखकर।

 

Question 4. इस गद्यांश में लेखक ज्योतिबा फुले की रुचियों का ज्ञान तथा उनको मिली उपाधि आदि के विषय में चर्चा करता हुआ कहता है।
Answer: ज्योतिबा फुले को संत-महात्माओं पर बहुत विश्वास था। उनके विचार थे कि भगवान के सामने सभी स्त्री-पुरुष समान हैं; उनमें कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने दलितों और असहाय लोगों को न्याय दिलाने के लिए 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की। उनके समाज सेवा के काम को देखकर 1888 ई. में मुंबई की एक बड़ी सभा में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई। ज्योतिबा फुले ने बिना ब्राह्मण या पुरोहित के विवाह संस्कार कराए, जिसे मुंबई न्यायालय से मान्यता मिली। वे बाल विवाह के खिलाफ थे और विधवा विवाह का समर्थन करते थे। उनका पूरा जीवन सामाजिक समानता के लिए समर्पित था।
In simple words: ज्योतिबा फुले संतों में विश्वास रखते थे और मानते थे कि सभी लोग भगवान के सामने बराबर हैं। उन्होंने दलितों के लिए 'सत्यशोधक समाज' बनाया और 1888 में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि मिली। उन्होंने बिना ब्राह्मण के विवाह कराए और बाल विवाह का विरोध कर विधवा विवाह का समर्थन किया।

🎯 Exam Tip: ज्योतिबा फुले के विचारों, सामाजिक कार्यों और उन्हें मिली उपाधियों को स्पष्ट रूप से लिखें, साथ ही उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं का भी उल्लेख करें।

स्वजीवनकाले स तु अनेकानि पुस्तकानि अलिखत्, यथा— तृतीयरत्नं, छत्रपतिशिवाजी, राजाभोसले इत्याख्यस्य पँवाडा, ब्राह्मणानां चातुर्यम्, कृषकस्य कशा अस्पृश्यानां समाचारं इत्यादयः । महात्मा ज्योतिबा एवं तस्य संगठनस्य संघर्ष कारणात् सर्वकारेण 'एग्रीकल्चरएक्ट' इति स्वीकृतम्। धर्मसमाजस्य परम्परायाः सत्यं सर्वेर्षां सम्मुखमानेतुं तेन अन्यानि अपराणि पुस्तकानि-रचितानि । ज्योतिबा बुद्धिमान् महान् क्रान्तिकारी-भारतीयविचारकः समाजसेवकः लेखकः दार्शनिकश्चासीत्। महाराष्ट्रनगरे धार्मिकसंशोधनमान्दोलनं प्रचलनासीत्। जातिप्रथामुन्मूलनार्थमेकेश्वरवादं स्वीकर्ते 'प्रार्थना समाजस्य स्थापना संजाता। अस्य प्रमुखः गोविन्द रानाडे आरजी भण्डारकरश्चासीत्। अयं महान् समाजसेवकः अस्पृश्यानां उद्धाराय सत्यशोधक समाजस्य स्थापनाम् अकरोत् । महात्मा ज्योतिबा फुले (ज्योतिराव गोविन्दराव फुले) महोदयस्य मृत्युः नवम्बर मासस्य अष्ट विंशति दिनांके नवत्यधिक अष्टादशशततमे खीष्टाब्दे (28 नवम्बर, 1890 ई.) पुणे नगरे अभवत् ।।

शब्दार्थ: स्वजीवनकाले = अपने जीवनकाल में। कृषकस्य कशाः = किसानों का कोड़ा। अस्पृश्यानां समाचारम् = अछूतों की कैफियत। सर्वेषां सम्मुखमानेतुम् = सभी के सामने लाने के लिए। जातिप्रथामुन्मूलनार्थम् = जाति प्रथा को जड़ से मिटाने के लिए।

 

Question 5. प्रस्तुत गद्यांश में महात्मा ज्योतिबा फुले के लेखन कार्य के द्वारा दी गई समाज-सेवा का उल्लेख किया गया है।
Answer: ज्योतिबा फुले ने अपने जीवनकाल में कई किताबें लिखीं, जैसे 'तृतीयरत्न', 'छत्रपति शिवाजी', 'राजा भोसले' की कविताएँ, 'ब्राह्मणों की चालाकी', 'किसानों का कोड़ा' और 'अछूतों की कैफियत'। महात्मा ज्योतिबा और उनके संगठन के संघर्षों के कारण सरकार ने 'एग्रीकल्चर एक्ट' को स्वीकार किया। उन्होंने धर्म समाज की सच्चाई को सबके सामने लाने के लिए भी कई किताबें लिखीं। ज्योतिबा एक बुद्धिमान, महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवक, लेखक और दार्शनिक थे। महाराष्ट्र में धार्मिक सुधार आंदोलन चल रहा था। जाति प्रथा को खत्म करने और एक ईश्वर को मानने के लिए 'प्रार्थना समाज' की स्थापना हुई। इसके मुख्य नेता गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर थे। इन महान समाजसेवकों ने अछूतों को ऊपर उठाने के लिए 'सत्यशोधक समाज' भी बनाया। महात्मा ज्योतिबा फुले का निधन 28 नवंबर, 1890 को पुणे में हुआ। उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
In simple words: ज्योतिबा फुले ने 'तृतीयरत्न' और 'छत्रपति शिवाजी' जैसी कई किताबें लिखीं। उनके प्रयासों से 'एग्रीकल्चर एक्ट' बना। वे एक महान विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने 'प्रार्थना समाज' और 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की। उनका देहांत 28 नवंबर, 1890 को पुणे में हुआ।

🎯 Exam Tip: उनके लेखन कार्यों का उल्लेख करते समय, महत्वपूर्ण कृतियों के नाम और उनके सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव को संक्षेप में बताएं।

अस्पृश्यनां दुःखेनोन्मूलने अस्य भूमिका अकथनीया विद्यते । पुणेनगरे दलितानां गृतिः शोचनीयासीत्। उच्चजातीनां कुपात् जलं नेतुं ते मुक्ताः नासन् । ते दलितानामेतादृशीं दुर्दशां दृष्ट्वा दृष्ट्वा तस्य हृदयं विदीर्णोजातः तदैव सः स्वमनसि विचारयामास यत् एषाम् दुःखम् दूरीकरणीयम् । अयं महापुरुषः तेषाम् । अमानवीयव्यवहारं दृष्ट्वा सः स्वगृहस्य जलसंचय कूपम् अपृश्यानां कृते मुक्तं कृतवान्। सः नगरपालिकायाः सदस्यः आसीत् अतः तेषां कृते सार्वजनिकस्थाने जलसंचय कूपं स्यात् एतत् प्रबन्धनं कृतम्। मालाकारसमाजस्य महात्मा ज्योतिबा फुले एव एतादृशः महामानवः आसीत् यः निम्नजातीनां जनानां कृते समानतायाः अधिकारस्य आजीवनं कार्यमकरोत् ।।

शब्दार्थ: दलितानां गतिः = दलितों की स्थिति। हृदयं विदीर्णोजातः = मन दुःखी हो जाता था। जलसंचय कूपम् = पानी की हौज।

 

Question 6. अछूत जातियों के दुःख के उन्मूलन में इनकी भूमिका का वर्णन इस गद्यांश में किया गया है।
Answer: अछूत जातियों के दुखों को खत्म करने में ज्योतिबा फुले की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। पुणे शहर में दलितों की हालत बहुत खराब थी। उन्हें ऊँची जाति के कुओं से पानी लेने की आजादी नहीं थी। उनकी ऐसी बुरी हालत देखकर ज्योतिबा फुले का मन बहुत दुखी हो जाता था। उन्होंने अपने मन में सोचा कि उनके दुखों को दूर करना होगा। इस महान व्यक्ति ने उनके साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार को देखकर अपने घर के पानी के कुएँ को अछूतों के लिए खोल दिया। वे नगरपालिका के सदस्य भी थे, इसलिए उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर पानी के कुएँ बनवाने का इंतजाम किया। माली समाज के महात्मा ज्योतिबा फुले ऐसे महान व्यक्ति थे जिन्होंने निचले तबके के लोगों को समानता का अधिकार दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका काम आज भी प्रेरणा देता है।
In simple words: ज्योतिबा फुले ने अछूतों के दुख दूर करने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने पुणे में दलितों की खराब हालत देखी और उन्हें अपने घर का कुआँ उपयोग करने दिया। नगरपालिका सदस्य होने के नाते, उन्होंने सार्वजनिक कुएँ भी बनवाए। उन्होंने निचले वर्ग के लोगों को समानता दिलाने के लिए जीवन भर काम किया।

🎯 Exam Tip: अछूतों के उत्थान में उनकी भूमिका का वर्णन करते समय, उनके द्वारा उठाए गए ठोस कदमों, जैसे कुआँ खुलवाना और सार्वजनिक सुविधाओं का इंतजाम करना, पर जोर दें।

अस्य सहधर्मचारिणी सावित्रीबाई अस्य कार्येण प्रभाविता आसीत्। अतः सा नारी शिक्षयितुं कटिबद्धासीत्। यदा सा नारी पाठयितुं प्रारब्धवती तदैव दलितविरोधिनः उच्चस्वरैः विरोधं प्रकटयन उक्तवन्तः यत् एकाहिन्दूनारी शिक्षिका भूता समाजस्य धर्मस्य च विरोधं कर्तुं शक्नोति । नारी जातेः पठनं पाठनं वा धर्मविरुद्धं वर्तते । सावित्रीबाई यदा विद्यालयं गच्छति स्म तदा तस्योपरि मृत्तिका-गोमय-प्रस्तरखण्डान् नारीशिक्षाविरोधिनः प्रक्षेपयन्ति स्म एवञ्च व्यंग्यबाणैः अपीड़यन् तथापि सा स्वकर्तव्यात् विमुखा न सजाता | मराठी शिक्षकः शिवराम भवालकरः अस्याः प्रशिक्षकः आसीत् । इयं उपेक्षितानां दलितनारीणां कृते बहुविद्यालयं संचालितवती ।।

शब्दार्थ: सहधर्मचारिणी = धर्मपत्नी। पाठयितुं प्रारब्धवती = पढ़ाना शुरू किया। उच्चस्वरैः = ऊँची आवाजों में। उक्तवन्तः = कहने लगे। गोमयम् = गोबर। व्यंग्यबाणैः = उपहास के बाणों से।

 

Question 7. इस गद्यांश में ज्योतिबा फुले की धर्मपत्नी सावित्रीबाई के स्वभाव और सामाजिक कार्यों का वर्णन किया गया है।
Answer: ज्योतिबा फुले की पत्नी सावित्रीबाई उनके कामों से बहुत प्रभावित थीं और उन्होंने नारी शिक्षा देने का पक्का मन बना लिया था। जब उन्होंने महिलाओं को पढ़ाना शुरू किया, तो दलित विरोधी लोगों ने ऊँची आवाज में विरोध करते हुए कहा कि एक हिन्दू महिला शिक्षिका बनकर समाज और धर्म के खिलाफ कैसे जा सकती है। उनका मानना था कि महिलाओं का पढ़ना-पढ़ाना धर्म के खिलाफ है। सावित्रीबाई जब स्कूल जाती थीं, तो नारी शिक्षा विरोधी लोग उन पर मिट्टी, गोबर और पत्थर के टुकड़े फेंकते थे और व्यंग्य बाणों से उन्हें परेशान करते थे। फिर भी, वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटीं। मराठी शिक्षक शिवराम भवालकर उनके प्रशिक्षक थे। उन्होंने उपेक्षित दलित स्त्रियों के लिए कई स्कूल खोले। उनका संघर्ष समाज के लिए एक मिसाल है।
In simple words: सावित्रीबाई फुले अपने पति के काम से प्रभावित होकर नारी शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध थीं। जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा और लोग उन पर गोबर-पत्थर फेंकते थे। फिर भी, वह अपने कर्तव्य से नहीं हटीं और उपेक्षित दलित महिलाओं के लिए कई स्कूल चलाए।

🎯 Exam Tip: सावित्रीबाई के सामाजिक कार्यों का वर्णन करते समय, उनके समर्पण, बाधाओं और उनके शिक्षकों का उल्लेख करें।

द्विपंचाशताधिकाष्टादशखीष्टाब्दे फरवरीमासस्य सप्तदशदिनाङ्के अस्य विद्यालयस्य निरीक्षणं सजातम् परिणामस्वरूपे अस्य अष्टादशविद्यालयाः संचालिताः अभवन्। नवम्बरमासस्य षोडशदिनाङ्के 'विश्रामबाडा' इति स्थाने सार्वजनिव-अभिनन्दनसमारोहे अस्याः अभिनन्दनं सम्पन्नम्। अस्माकं देशस्य इतिहासे सावित्री फूले प्रथमा दलिताशिक्षिकायाः गौरवेणालङ्कृता ।

शब्दार्थ: निरीक्षणं सञ्जातम् = निरीक्षण किया गया। इति स्थाने = इस नाम वाले स्थान पर। देशस्य इतिहासे = देश के इतिहास में।

 

Question 8. इस गद्यांश में ज्योतिबा फुले की धर्मपत्नी सावित्रीबाई के द्वारा शिक्षा जगत् के लिए किया गया प्रयास और उनकी सफलता का वर्णन किया गया है।
Answer: 17 फरवरी, 1852 को उनके स्कूल का निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण के बाद, उनके अठारह स्कूल चल रहे थे। 16 नवंबर को 'विश्रामबाडा' नामक जगह पर एक सार्वजनिक अभिनंदन समारोह में उनका सम्मान किया गया। हमारे देश के इतिहास में सावित्री फुले को पहली दलित शिक्षिका होने का गौरव मिला। उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी बना दिया।
In simple words: 17 फरवरी, 1852 को सावित्रीबाई के स्कूल की जाँच हुई। इसके बाद, उनके अठारह स्कूल चलने लगे। 16 नवंबर को 'विश्रामबाडा' में उनका अभिनंदन हुआ। उन्हें भारत की पहली दलित शिक्षिका होने का सम्मान मिला।

🎯 Exam Tip: शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई की उपलब्धियों, जैसे स्कूलों की संख्या और उन्हें मिली उपाधियों को स्पष्ट और क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले

Chapter-wise Textbook Answers for Class 10

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Sanskrit textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Mastering Theoretical & Practical Questions

Our faculty has formulated detailed, step-by-step explanations for challenging problems across the Class 10 Sanskrit chapter. Beyond giving direct outcomes, we break down the underlying theories to foster genuine topic comprehension. Ideal for Class 10 learners tackling both theoretical and numerical questions, reviewing these UP Board Questions and Answers significantly strengthens fundamental concepts.

Complete Preparation Kit for Class 10 Exams

Regular utilization of our Sanskrit solutions sharpens critical reasoning and boosts calculation speed. Serving as a dependable companion for self-paced study and daily homework, these Class 10 materials pair exceptionally well with our dedicated Revision Notes and Sample Papers for Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले to deliver a well-rounded exam preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Sanskrit are as per latest UP Board curriculum.

Are the Sanskrit UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Sanskrit. You can access UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 16 दीनबंधु ज्योतिबा फुले in printable PDF format for offline study on any device.