UP Board Solutions Class 10 Sanskrit Chapter 12 Lokmanya Tilak

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लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. लोकमान्य तिलक के प्रारम्भिक जीवन के विषय में लिखिए। या तिलक के पिता का क्या नाम था? या तिलक का जन्म कब और कहाँ पर हुआ था?
Answer: लोकमान्य तिलक का जन्म विक्रम संवत् 1913 में आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को रत्नगिरि जिले के 'चिरबल' गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रामचन्द्र गंगाधर राव और माता का नाम पार्वतीबाई था। छोटी उम्र में ही माता-पिता के निधन के कारण उनका शुरुआती जीवन बहुत मुश्किलों भरा रहा। मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। संस्कृत और गणित उनके पसंदीदा विषय थे, और वे गणित के कठिन सवालों को भी मुँह ज़बानी हल कर लेते थे। उन्होंने बी.ए. की पढ़ाई 20 साल की उम्र में और एल-एल.बी. की पढ़ाई 23 साल की उम्र में पूरी की थी। सरकारी नौकरी और वकालत छोड़कर उन्होंने देश सेवा और पीड़ित भारतीयों की मदद के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा कठिनाइयों के बावजूद भी जारी रखनी चाहिए।
In simple words: लोकमान्य तिलक का जन्म 1913 विक्रम संवत् में रत्नगिरि के 'चिरबल' गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता बचपन में ही चल बसे थे, जिससे उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और 20 साल में बी.ए. और 23 साल में एल.एल.बी. की डिग्री पूरी की। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर देश सेवा को चुना।

🎯 Exam Tip: जब किसी प्रश्न के कई भाग 'या' के साथ दिए हों, तो उत्तर में उन सभी भागों को शामिल करते हुए एक विस्तृत जवाब दें। जन्म तिथि, स्थान और माता-पिता का नाम जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को सही ढंग से याद रखें।

 

Question 2. तिलक जी द्वारा लिखी गयी प्रमुख पुस्तकों के नाम लिखिए। या 'गीता-रहस्य' किसकी रचना है? या लोकमान्य के गीता भाष्य का क्या नाम है?
Answer: साल 1908 में, ब्रिटिश सरकार ने तिलक जी को राजद्रोह के आरोप में छह साल के लिए मांडले जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए, उन्होंने 'श्रीमद्भगवद्गीता' पर आधारित 'गीता-रहस्य' नाम का एक महत्वपूर्ण भाष्य (टीका) लिखा। इसके अलावा, उन्होंने 'वेदों का काल-निर्णय' और 'आर्यों का मूल निवासस्थान' जैसी पुस्तकें भी लिखीं। इन सभी पुस्तकों ने भारतीय दर्शन और इतिहास को गहराई से समझने में मदद की।
In simple words: तिलक जी ने मांडले जेल में 'गीता-रहस्य' लिखी। उनकी अन्य प्रमुख किताबें 'वेदों का काल-निर्णय' और 'आर्यों का मूल निवासस्थान' हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यक्तित्वों की रचनाओं और उनके लेखकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर इतिहास और साहित्य से जुड़े प्रश्नों में।

 

Question 3. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में तिलक जी के योगदान को 'लोकमान्य तिलकः' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। या लोकमान्य तिलक के कार्यों का उल्लेख कीजिए। या तिलक के सामाजिक कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद भी, तिलक जी ने सरकारी नौकरी और वकालत का लालच छोड़कर देश सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने कई आंदोलन चलाए और कई बार जेल भी गए। तिलक जी ने भारतीयों को आज़ादी का पाठ सिखाया, और उनका प्रसिद्ध नारा था, "स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।" लोगों को राजनीतिक रूप से जगाने के लिए उन्होंने 'केसरी' (मराठी में) और 'मराठा' (अंग्रेजी में) नाम के दो अख़बार शुरू किए। इन अख़बारों के ज़रिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार की कड़ी आलोचना की, भारतीयों को राष्ट्रीयता की शिक्षा दी, और विदेशी चीज़ों का बहिष्कार करके स्वदेशी चीज़ों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भारत की भलाई के लिए जो काम किए, वे भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में हमेशा लिखे रहेंगे। उनका योगदान देश को आज़ादी दिलाने में बहुत अहम था।
In simple words: तिलक जी ने सरकारी नौकरी छोड़कर देश सेवा की। उन्होंने 'स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा दिया। उन्होंने 'केसरी' और 'मराठा' अख़बारों से लोगों को जागरूक किया, ब्रिटिश शासन की आलोचना की, और स्वदेशी अपनाने को बढ़ावा दिया।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर आधारित प्रश्नों में उनके प्रमुख नारों, आंदोलनों और प्रकाशनों का उल्लेख करना आवश्यक है ताकि पूरे अंक मिलें।

 

Question 4. तिलक का पूरा नाम व उनकी घोषणा लिखिए।
Answer: तिलक जी का पूरा नाम "लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक" था। उनका जन्म का नाम 'केशवराव' था, लेकिन वे 'बलवन्तराव' के नाम से भी जाने जाते थे। उनकी मुख्य घोषणा थी, "स्वराज्यम् अस्माकं जन्मसिद्धः अधिकारः", जिसका मतलब है कि "स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है"। यह नारा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
In simple words: तिलक का पूरा नाम लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक था। उनका जन्म का नाम केशवराव था, और वे बलवंतराव नाम से भी प्रसिद्ध थे। उनकी घोषणा थी "स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है"।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति के पूरे नाम, उपनाम और उनके प्रमुख नारों को याद रखना परीक्षा में सटीक उत्तर देने में सहायक होता है।

 

Question 5. 'गीतारहस्यम्' कस्य रचना अस्ति?
Answer: 'गीतारहस्यम्' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की रचना है। उन्होंने इसे मांडले जेल में अपने कारावास के दौरान लिखा था, जिसमें उन्होंने भगवद्गीता के कर्मयोग दर्शन की व्याख्या की है। यह उनकी गहरी विद्वत्ता का प्रमाण है।
In simple words: 'गीतारहस्यम्' लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने लिखी थी।

🎯 Exam Tip: लेखकों और उनकी प्रमुख कृतियों के बीच सही संबंध याद रखें, खासकर जब किसी विशेष पुस्तक के लेखक के बारे में पूछा जाए।

 

Question 6. तिलक का स्वभाव कैसा था? या तिलक जी के जीवन पर किनका प्रभाव था?
Answer: तिलक का स्वभाव बहुत धीर, गंभीर और निडर था। उनके जीवन पर वीर मराठा योद्धाओं का गहरा प्रभाव था, जिसने उन्हें मजबूत और साहसी बनाया। वे अपने सिद्धांतों पर अटल रहते थे और किसी भी चुनौती से डरते नहीं थे।
In simple words: तिलक का स्वभाव शांत, गंभीर और बहादुर था। उनके जीवन पर वीर मराठाओं का बहुत असर था।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के स्वभाव और उस पर पड़े प्रभावों का वर्णन करते समय, प्रमुख विशेषताओं और प्रेरणा स्रोतों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 7. तिलक के किस पत्र के लेखों से कुपित अंग्रेजों ने उनको 18 मास का सश्रम कारावास दिया था?
Answer: तिलक जी के मराठी भाषा के अख़बार 'केसरी' में छपे तीखे लेखों के कारण ब्रिटिश सरकार उन पर बहुत क्रोधित हुई थी। इसी वजह से उन्हें अठारह महीने की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। इस सज़ा के विरोध में पूरे देश में जगह-जगह सभाएँ और आंदोलन हुए थे। 'केसरी' अख़बार ब्रिटिश नीतियों की कड़ी आलोचना करता था।
In simple words: तिलक के 'केसरी' अख़बार में छपे लेखों के कारण अंग्रेज़ों ने उन्हें 18 महीने की जेल दी थी। इस पर देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाओं और उनसे संबंधित व्यक्तियों के प्रकाशनों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. ‘स्वराज्यमस्माकं जन्मसिद्धोऽधिकारः' का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: "स्वराज्यम् अस्माकं जन्मसिद्धोऽधिकारः" का अर्थ है "स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है"। लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने यह नारा भारतीयों को जगाने और उनमें आज़ादी की भावना भरने के लिए दिया था। उनका मानना था कि भगवान ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है और सभी को स्वतंत्रता का अधिकार जन्म से ही मिलता है। इसलिए, कोई भी व्यक्ति या सरकार हम पर शासन नहीं कर सकती। तिलक जी का मानना था कि यह प्राकृतिक अधिकार है, और हर भारतीय को इसे हर हाल में हासिल करना चाहिए। यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान बन गया।
In simple words: इस नारे का मतलब है "स्वराज्य हमारा जन्म से मिला अधिकार है"। तिलक ने यह नारा भारतीयों को जगाने और यह बताने के लिए दिया था कि स्वतंत्रता भगवान से मिला एक प्राकृतिक अधिकार है, जिसे हर किसी को पाना ही चाहिए।

🎯 Exam Tip: किसी भी प्रसिद्ध नारे या कहावत का अर्थ समझाते समय, उसके मूल भाव और उसके पीछे के दर्शन को सरल शब्दों में व्यक्त करें।

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