UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 Water Sources Utilisation and Purification

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 10 Home Science. Our expert-created answers for Class 10 Home Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण UP Board Solutions for Class 10 Home Science

For Class 10 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Home Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण solutions will improve your exam performance.

Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 7 घरेलू विधियों से जल को शुद्ध करना

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. शुद्ध तथा अशुद्ध जल के लक्षणों या गुणों को स्पष्ट कीजिए। जल किस प्रकार से दूषित हो जाता है?
या
जल किस प्रकार दूषित होता है ? आप अशुद्ध जल को कैसे शुद्ध करेंगी?
या
जल में पाई जाने वाली मुख्य अशुद्धियों का वर्णन कीजिए।
या
जल अशुद्ध होने के क्या कारण हैं?

Answer: शुद्ध जल के गुण या लक्षण यह एक सर्वविदित तथ्य है कि हमारी पृथ्वी पर थल की तुलना में जल का भाग बहुत अधिक है। जल के मुख्य स्रोत समुद्र, नदियाँ, झीलें, तालाब, झरने तथा भूमिगत जल हैं। जल की अत्यधिक मात्रा उपलब्ध होने पर भी विश्व को पेयजल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का मूल कारण यह है कि हमारे लिए केवल शुद्ध जल ही उपयोगी होता है। अशुद्ध जल या दूषित जल न तो पिया जा सकता है और न ही भोजन पकाने तथा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस स्थिति में शुद्ध जल के आवश्यक गुणों एवं लक्षणों की पहचान की समुचित जानकारी होना आवश्यक है। शुद्ध जल वह सरल यौगिक है जो हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से बनता है। शुद्ध जल स्वादरहित, रंगरहित, गन्धरहित द्रव्य होता है। शुद्ध अवस्था में जल साफ, स्वच्छ एवं पूर्ण रूप से पारदर्शी होता है। शुद्ध जल में एक प्रकार की प्राकृतिक चमक भी होती है।

अशुद्ध जल के गुण या लक्षण

जल एक अत्यधिक उत्तम विलायक है। अनेक वस्तुएँ एवं लवण जल में शीघ्र ही घुल जाते हैं। इसीलिए पूर्ण शुद्ध अवस्था में जल मुश्किल से ही प्राप्त होता है। कोई-न-कोई लवण जल में घुल जाता है अथवा कुछ अशुद्धियों या गन्दगी का जल-स्रोतों में समावेश हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप जल अशुद्ध हो जाता है। अशुद्ध जल के गुणों या लक्षणों का उल्लेख करने से पूर्व कहा जा सकता है कि वह जल अशुद्ध है जिसमें शुद्ध जल के आवश्यक किसी एक गुण या सभी गुणों को अभाव होता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि अशुद्ध जल में किसी-न-किसी प्रकार का स्वाद पाया जाता है। यह खारा भी हो सकता है तथा मीठा भी। अशुद्ध जल में गन्ध या दुर्गन्ध का पाया जाना भी एक लक्षण है। प्रायः अशुद्ध जल मटमैला भी हो सकती है। अशुद्ध जल में कुछ अशुद्धियाँ तैरती हुई भी दिखाई दे सकती हैं। अशुद्ध जल अर्द्ध-पारदर्शी होता है तथा उसमें शुद्ध जल की प्राकृतिक चमक का भी प्रायः अभाव ही होता है।

जल का दूषित होना

प्रकृति ने हमें शुद्ध जल ही प्रदान किया था, परन्तु विभिन्न कारणों से जल क्रमशः दूषित होता जा रहा है। जल को अधिक दूषित करने में सर्वाधिक योगदान सभ्य व औद्योगिक एवं नगरीय मानव समाज का ही है। विभिन्न अति विकसित एवं आधुनिक मानवीय गतिविधियों के कारण ही जल क्रमशः दूषित होता जा रहा है। जल को दूषित करने वाले कुछ मुख्य कारकों का संक्षिप्त विवरण अग्रवर्णित है
(1) घरेलू वाहित मल (सीवेज): इसमें मल-मूत्र, घरेलू गन्दगी तथा कपड़ों को धोने के बाद का जल आदि सम्मिलित होते हैं। सामान्य रूप से इस प्रकार का दूषित जल, घर की नालियों तथा बड़े नालों के माध्यम से बहता हुआ मुख्य जल-स्रोतों में मिल जाता है तथा इन स्रोतों के जल को भी प्रदूषित कर देता है। इसके परिणामस्वरूप नदियों के किनारे, झील आदि के जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। वाहित मल से अनेक प्रकार के कीटाणु जल में आ जाते हैं, जिसके कारण जल का अत्यधिक क्लोरीनीकरण करना आवश्यक हो जाता है।
(2) वर्षा का जल: वर्षा का जल खेतों की मिट्टी की ऊपरी परत को बहाकर नदियों, झीलों तथा समुद्र तक पहुँचा देता है। इसके साथ अनेक प्रकार के खाद (नाइट्रोजन एवं फॉस्फेट के यौगिक) एवं कीटनाशक पदार्थ भी जल में पहुँच जाते हैं तथा जल क्रमशः दूषित हो जाता है।
(3) औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ: इनमें अनेक विषैले पदार्थ (अम्ल, क्षार, सायनाइड आदि), रंग-रोगन व कागज उद्योग द्वारा विसर्जित पारे (मरकरी) के यौगिक, रसायन एवं पेस्टीसाइड उद्योग द्वारा विसर्जित सीसे (लैड) के यौगिक तथा कॉपर वे जिंक के यौगिक प्रमुख हैं। इन सभी पदार्थों के जल में मिल जाने से जल दूषित एवं हानिकारक हो जाता है।
(4) तैलीय (ऑयल) प्रदुषण: इस प्रकार का प्रदूषण समुद्र के जल में होता है। समुद्र में यह प्रदूषण या तो जहाजों द्वारा तेल विसर्जित करने से होता है अथवा समुद्र के किनारे स्थित तेल-शोधक संस्थानों के कारण होता है।
(5) रेडियोधर्मी पदार्थ: नाभिकीय विखण्डन के फलस्वरूप अनेक रेडियोधर्मी पदार्थ जल को दूषित कर देते हैं। इस प्रकार का प्रदूषण प्रायः समुद्र के जल में होता है।

जल में पाई जाने वाली मुख्य अशुद्धियाँ

दूषित जल में मुख्य रूप से दो प्रकार की अशुद्धियाँ पायी जाती हैं जिन्हें क्रमशः घुलित अशुद्धियाँ तथा अघुलित अथवा तैरने वाली अशुद्धियाँ कहा जाता है। इन दोनों प्रकार की अशुद्धियों को । संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है
(1) घुलित अशुद्धियाँ: जल एक उत्तम विलायक है; अतः इसके सम्पर्क में आने वाले विभिन्न पदार्थ शीघ्र घुलकर इसमें समा जाते हैं। इस प्रकार जल में समा जाने वाले विजातीय तत्त्वों को जल की घुलित अशुद्धियाँ कहा जाता है। इस प्रकार की अशुद्धियाँ प्रायः दो प्रकार की होती हैं। प्रथम वर्ग की घुलित अशुद्धियाँ कुछ लवण होते हैं। मुख्य रूप से जल के कुछ सल्फेट, कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट घुल जाया करते हैं। ये लवण घुलकर पानी को कठोर बना देते हैं। कठोर जल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। लवणों के अतिरिक्त कुछ गैसें भी जल में घुल जाती हैं। ये गैसें मुख्य रूप से सल्फ्यूरेटेड हाइड्रोजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड होती हैं। इन गैसों से युक्त जल भी हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होता है।
(2) अघुलित अथवा तैरने वाली अशुद्धियाँ: अशुद्ध जल में कुछ ऐसी अशुद्धियाँ भी पाई जाती हैं जो जल में नहीं घुलतीं, परन्तु इनका जल में अस्तित्व ही जल को दूषित एवं हानिकारक बना देता है। इस प्रकार की अशुद्धियों को तैरने वाली अशुद्धियाँ भी कहा जाता है। जल में पाई जाने वाली इस प्रकार की मुख्य अशुद्धियाँ निम्नलिखित हो सकती हैं। ”
1. धूल-मिट्टी के कण एवं विभिन्न प्रकार का कूड़ा-करकट । पत्ते, घास, तिनके तथा बाल आदि इसी प्रकार की अशुद्धियाँ मानी जाती हैं।
2. विभिन्न रोगों के रोगाणु भी जल को अशुद्ध बनाते हैं। अशुद्ध जल में हैजा, पेचिश, मोतीझरा आदि रोगों के कीटाणु पाए जाते हैं।
3. अशुद्ध जल में अनेक प्रकार के कीड़े, कीड़ों के बच्चे तथा अण्डे भी पाए जाते हैं।
4. जल को अशुद्ध बनाने वाली कुछ अशुद्धियाँ पशुजनित भी होती हैं। पशुओं द्वारा जल में मल-मूत्र विसर्जित कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके शरीर के बाल एवं अन्य अशुद्धियाँ भी जल को अशुद्ध बना देती हैं।
In simple words: शुद्ध जल गंधहीन, रंगहीन और पारदर्शी होता है, जबकि अशुद्ध जल में स्वाद, गंध और रंग होता है, साथ ही उसमें हानिकारक कण और कीटाणु भी होते हैं। जल दूषित होने के मुख्य कारण घरेलू कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट, वर्षा का बहाव और रेडियोधर्मी पदार्थ हैं।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल के गुणों और अशुद्ध जल के दूषित होने के कारणों को विस्तृत रूप से समझाना उच्च अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. अशुद्ध जल को शुद्ध करने की घरेलू विधियों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
या
अशुद्ध जल को शुद्ध करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किन्हीं दो विधियों का वर्णन कीजिए।
या
अशुद्ध जल का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? जत की अशुद्धियों को किस प्रकार दूर कर सकते हैं?
या
घर पर जल शुद्ध करने की कोई एक रासायनिक विधि लिखिए।
या
अशुद्ध जल को (चित्र सहित) चार घड़ों द्वारा शुद्ध करने की विधि लिखिए ।
या
जल कितने प्रकार से दूषित होता है? जल में पाई जाने वाली अशुद्धियों को दूर करने के उपाय बताइए।
या
घर पर जल शुद्ध करने की विधियाँ लिखिए ।

Answer:

अशुद्ध जल को शुद्ध करने की घरेलू विधियाँ

अनेक प्रकार के घुलित एवं अघुलित कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थों तथा अनेक प्रकार के कीटाणुओं की उपस्थिति के कारण जल अशुद्ध अथवा दूषित हो जाता है। इस प्रकार के जल का सेवन स्वास्थ्य को कुप्रभावित करता है तथा अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण बन सकता है। अतः इन अशुद्धियों को दूर कर शुद्ध जल प्राप्त करना अत्यन्त आवश्यक है। इस प्रकार जनसाधारण के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से जल के शुद्धिकरण की घरेलू विधियों का ज्ञान और भी महत्त्वपूर्ण है। घरेलू विधियों द्वारा जल को शुद्ध करने के विभिन्न उपायों को निम्नलिखित तीन वर्गों में रखा जा सकता है (क) भौतिक विधियाँ, (ख) यान्त्रिक विधियाँ एवं (ग) रासायनिक विधियाँ।

(क) भौतिक विधियाँ: जल-शोधन की कुछ प्रमुख भौतिक विधियाँ निम्नलिखित हैं

(1) जल को उबालकर शुद्ध करनाः

उबालने से जल के अधिकांश कीटाणु नष्ट हो जाते हैं, जल में घुली गैसें निकल जाती हैं तथा अनेक घुलित लवण अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार उबालने से जल की अनेक अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और यह पीने योग्य हो जाता है। । उबालने के उपरान्त जल को निथार कर अथवा छानकर उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उबालना अशुद्ध जल को शुद्ध करने की एक उत्तम विधि है, परन्तु इस विधि द्वारा केवल सीमित मात्रा में ही जल को शुद्ध किया जा सकता है।
In simple words: जल को उबालने से उसमें मौजूद अधिकतर कीटाणु मर जाते हैं, घुली हुई गैसें निकल जाती हैं और लवण नीचे बैठ जाते हैं, जिससे जल पीने योग्य हो जाता है।

🎯 Exam Tip: जल को उबालने की विधि सबसे सरल और प्रभावी घरेलू शुद्धिकरण तरीकों में से एक है, जिसे समझाना आसान है।

 

(2) आसवन विधि द्वारा जल का शुद्धीकरणः


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र आसवन विधि द्वारा जल को शुद्ध करने की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें एक फ्लास्क में अशुद्ध जल को गर्म किया जाता है, जिससे भाप बनती है। यह भाप एक संघनित्र से होकर गुजरती है जहाँ यह ठंडी होकर शुद्ध जल के रूप में एक प्राप्तकर्ता पात्र में एकत्र हो जाती है।

इस विधि में अशुद्ध जल को उबाला जाता है। तथा परिणामस्वरूप बनी जल-वाष्पे को एक स्वच्छ बर्तन में एकत्रित कर ठण्डा करके शुद्ध जल प्राप्त किया जाता है। इस विधि में जल की अशुद्धियाँ उबालने वाले बर्तन में ही रह जाती हैं। आसवन विधि द्वारा शुद्ध किए गए जल को आसुत जल कहते हैं। आसुत जल उत्तम कोटि का शुद्ध जल होता है जिसे पीने में तथा औषधियों के विलायक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इस विधि द्वारा भी केवल सीमित मात्रा में ही जल को शुद्ध किया जा सकता है।
In simple words: आसवन विधि में अशुद्ध जल को उबालकर भाप बनाया जाता है, फिर उस भाप को ठंडा करके शुद्ध पानी इकट्ठा किया जाता है, जिससे सभी अशुद्धियाँ पीछे रह जाती हैं।

🎯 Exam Tip: आसवन विधि की वैज्ञानिक प्रक्रिया और आसुत जल के उपयोगों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, खासकर सीमित मात्रा में शुद्धिकरण के संदर्भ में।

 

(3) परा-बैंगनी अथवा अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों से जल का शुद्धिकरणः

प्राचीनकाल से ही जल को शुद्ध करने के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता रहा है। सूर्य के प्रकाश में पाई जाने वाली पराबैंगनी किरणें जल के कीटाणुओं को नष्ट कर देती हैं। आजकल यन्त्रों द्वारा दूषित जल में परा-बैंगनी किरणें डालकर जल को शुद्ध किया जाता है।
In simple words: पराबैंगनी (अल्ट्रा-वॉयलेट) किरणों का उपयोग जल में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है, जिससे जल पीने योग्य बन जाता है।

🎯 Exam Tip: पराबैंगनी किरणों के कीटाणुनाशक प्रभाव को उजागर करना और इसके आधुनिक अनुप्रयोग को समझाना स्कोरिंग के लिए महत्वपूर्ण है।

 

(ख) यान्त्रिक विधियाँ: आजकल दूषित जल को शुद्ध करने के लिए अनेक यान्त्रिक साधन अपनाये जाते हैं। ये जल को पीने के योग्य बनाने गन्दा पानी के लिए सरल उपकरण हैं। इनमें से कुछ प्रमुख यान्त्रिक साधन निम्नलिखित हैं

(1) चार घड़ों की विधिः


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र चार घड़ों की विधि को दर्शाता है, जिसमें अशुद्ध जल को शुद्ध करने के लिए घड़ों को एक के ऊपर एक रखा जाता है। सबसे ऊपर गंदा पानी होता है, फिर पानी, फिर कोयले का चूरा, फिर कंकड़ तथा बालू की परतें होती हैं, और सबसे नीचे स्वच्छ जल एकत्र होता है, जिससे पानी छनकर शुद्ध हो जाता है।

यह विधि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी । अधिक प्रचलित है। इसमें चार घड़ों को लकड़ी के स्टैण्ड पर कोयले का चूरा एक के ऊपर एक रख दिया जाता है। ऊपर के तीन घड़ों की तली में एक छिद्र होता है। सबसे ऊपर के घड़े में अशुद्ध जल पानी भर दिया जाता है। दूसरें घड़े में कोयला पीसकर रख देते हैं तथा कंकड़ तथा बालू तीसरे घड़े में ऊपर की ओर बालू तथा नीचे की ओर कंकड़ अथवा बजरी रख देते हैं। प्रत्येक छिद्र में थोड़ी रूई लगा देना लाभकर रहता है। अब सबसे ऊपर के घड़े का जल धीरे-धीरे । शेष घड़ों से छनकर गुजरता हुआ नीचे के घड़े में एकत्रित होता रहता है। इस विधि में जल में तैरती हुई अघुलित अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं तथा जल पीने योग्य हो जाता है।
In simple words: चार घड़ों की विधि में पानी को विभिन्न परतों जैसे कोयले, कंकड़ और बालू से छानकर अशुद्धियों को दूर किया जाता है, जिससे स्वच्छ और पीने योग्य जल प्राप्त होता है।

🎯 Exam Tip: चार घड़ों की विधि की संरचना और प्रत्येक परत की भूमिका का स्पष्टीकरण, खासकर ग्रामीण उपयोग के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।

 

(2) आधुनिक निस्यन्दक अथवा फिल्टर द्वारा जल का शुद्धीकरणः


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक फिल्टर द्वारा जल शोधन की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें एक बाहरी बर्तन होता है जिसके भीतर एक सिलेण्डर (क्ले या पोर्सलीन का बना) लटका होता है। गंदा पानी ऊपरी सिलेण्डर से छनकर नीचे के बर्तन में स्वच्छ जल के रूप में एकत्र होता है, जिसे टोटी से निकाला जा सकता है।

पाश्चर चैम्बरलेन फिल्टर तथा वर्कफील्ड फिल्टर द्वारा जल को प्रभावी ढंग से छानकर शुद्ध किया जाता है। इसका निर्माण क्ले तथा पोर्सलीन मिट्टी से किया जाता है। इसमें नीचे की ओर एक बाहरी बर्तन । टोंटी लगी होती है तथा अन्दर की ओर एक दूसरा बर्तन ऊपर लटका होता है जिसकी तली में क्ले मिट्टी का बना सिलेण्डर होता है। सिलेण्डर का पतला भाग दूसरे बर्तन में निकला होता है। यह सिलेण्डर सिलेण्डर – ही जल को शुद्ध करने का कार्य करता है। इस सिलेण्डर को पोर्सलीन का – समय-समय पर स्वच्छ कराते रहना चाहिए। इस फिल्टर द्वारा जल भीतरी बर्तन तेजी से छनता है तथा पूर्णरूप से शुद्ध होता है। घरेलू उपयोग के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। आजकल बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ; जैसे बजाज, क्रॉम्पटन, बलसारा इत्यादि; विभिन्न क्षमता के फिल्टर बना रही हैं, जिनको बाजार से क्रय किया जा सकता है।
In simple words: आधुनिक फिल्टर, जैसे पाश्चर चैम्बरलेन, क्ले और पोर्सलीन से बने होते हैं और पानी को छानकर उसमें से अशुद्धियों और कीटाणुओं को प्रभावी ढंग से हटाकर पीने योग्य बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के आधुनिक फिल्टरों के नाम, उनकी कार्यप्रणाली और घरेलू उपयोग में उनके महत्व को समझाना अच्छे अंक दिला सकता है।

 

(ग) रासायनिक विधियाँ: जल-शोधन की प्रमुख रासायनिक विधियाँ निम्नलिखित हैं

(1) अवक्षेपक द्वाराः

अशुद्ध जल में फिटकरी डालने से जल में निलम्बित पदार्थ अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाते हैं। इस जल में थोड़ी मात्रा में चूना मिला देने से जल और शुद्ध हो जाता है। इसके अतिरिक्त निर्मली नामक एक फल भी जल की अशुद्धियों को अवक्षेपित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अवक्षेपण के उपरान्त जल को निथार अथवा छान कर अशुद्धियों से रहित किया जा सकता है।
In simple words: फिटकरी या चूना जैसे अवक्षेपकों का उपयोग पानी में घुली हुई अशुद्धियों को नीचे बिठाने के लिए किया जाता है, जिससे पानी साफ और शुद्ध हो जाता है।

🎯 Exam Tip: फिटकरी और चूने जैसे अवक्षेपकों के कार्य को उनके रासायनिक सिद्धांत के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।

 

(2) कीटाणुनाशक पदार्थों द्वाराः विभिन्न प्रकार के जीवाणु व कीटाणु जल की अशुद्धि का एक महत्त्वपूर्ण कारण होते हैं। अशुद्ध जल को पीने योग्य बनाने के लिए इनको नष्ट किया जाना अति. आवश्यक है। जल को शुद्ध करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य कीटाणुनाशकों का सामान्य परिचय निम्नवर्णित है

(i) पोटैशियम परमैंगनेटः

यह लाल दवा के नाम से भी प्रसिद्ध है। गाँवों में तालाबों व कुओं के जल को शुद्ध करने में इसका प्रयोग किया जाता है। 1000 लीटर जल में पाँच ग्राम लाल दवा डाली जाने पर जल में उपस्थित अधिकांश कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
In simple words: पोटैशियम परमैंगनेट, जिसे लाल दवा भी कहते हैं, जल में कीटाणुओं को मारने और उसे शुद्ध करने के लिए उपयोग किया जाता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम परमैंगनेट की पहचान, उपयोग और मात्रा का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

(ii) तूतिया अथवा कॉपर सल्फेटः

इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में यह मनुष्यों के लिए भी विषैला प्रभाव रखता है। दो लाख भाग जल में एक भाग तूतिया डालने से जल पीने योग्य हो जाता है।
In simple words: कॉपर सल्फेट का उपयोग जल को शुद्ध करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी सही मात्रा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिक मात्रा हानिकारक हो सकती है।

🎯 Exam Tip: कॉपर सल्फेट के उपयोग के साथ उसकी सावधानी और अनुपात का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

(iii) आयोडीनः

200 भाग जल में एक भाग पोटैशियम आयोडाइड डालने से जल के अनेक प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
In simple words: पोटैशियम आयोडाइड की थोड़ी मात्रा जल में डालने से उसमें मौजूद कई प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: आयोडीन के कीटाणुनाशक गुण और उसके सही अनुपात को समझाना महत्वपूर्ण है।

 

(iv) ब्लीचिंग पाउडर:

एक लाख गैलन जल में 250 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालने से अनेक प्रकार के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
In simple words: ब्लीचिंग पाउडर एक प्रभावी कीटाणुनाशक है, जिसका उपयोग बड़ी मात्रा में जल को शुद्ध करने और जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ब्लीचिंग पाउडर की प्रभावशीलता और उसके उपयोग की मात्रा का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

(v) क्लोरीन:

यह एक उपयोगी कीटाणुनाशक गैस है। प्रायः सार्वजनिक जल आपूर्ति संस्थाओं द्वारा जल के कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए जल का क्लोरीनीकरण किया जाता है। चार हजार भाग जल में एक भाग क्लोरीन विलेय करने से जल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं तथा जल पीने योग्य हो जाता है। अब क्लोरीन की गोलियाँ भी उपलब्ध है, जिन्हे घरेलू स्तर पर जल के शुद्धिकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकती है।
In simple words: क्लोरीन एक शक्तिशाली कीटाणुनाशक गैस है जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर जल को शुद्ध करने के लिए किया जाता है, अब यह गोलियों के रूप में भी घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध है।

🎯 Exam Tip: क्लोरीन के व्यापक उपयोग और घरेलू स्तर पर इसकी उपलब्धता का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. अशुद्ध जल से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिए।
Answer: व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए केवल शुद्ध जल ही उपयोगी है। अशुद्ध जल अनेक प्रकार से हानिकारक होता है। अशुद्ध जल से अनेक रोग होने की आशंका रहती है। मुख्य रूप से अशुद्ध जल के निरन्तर सेवन से पाचन क्रिया बिगड़ जाती है, भूख घट जाती है तथा जी मिचलाने लगता है। कै होना, कब्ज हो जाना आदि रोग भी अशुद्ध जल पीने से ही हुआ करते हैं। इसके अतिरिक्त हैजा, मियादी बुखार, पेचिश, अतिसार आदि रोग भी अशुद्ध जल के सेवन से हो सकते हैं। कुछ रासायनिक तत्त्वों से अशुद्ध हुए जल के सेवन से कैन्सर जैसे घातक रोग भी हो सकते हैं।
In simple words: अशुद्ध जल पीने से पाचन संबंधी समस्याएं, भूख में कमी, और उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, साथ ही यह हैजा, टाइफाइड, पेचिश और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण भी बन सकता है।

🎯 Exam Tip: अशुद्ध जल के सेवन से होने वाली बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

Question 2. कठोर जल किसे कहते हैं? कठोरता कितने प्रकार की होती है?
या
कठोर जल की क्या पहचान है?
या
जल में कितने प्रकार की कठोरता पाई जाती है? जल की कठोरता कैसे दूर की जा सकती है?
या
जल की कठोरता को दूर करने के उपाय लिखिए।

Answer: कठोर जल: साबुन के साथ सरलता से झाग उत्पन्न न करने वाला जल कठोर कहलाता है। जल में कठोरता इसमें उपस्थित लवणों के कारण होती है। जल की कठोरता दो प्रकार की होती है
(क) अस्थायी कठोरताः
यह वह कठोरता है जिसे आसानी से उबालकर जल से दूर किया जा सकता है।
(ख) स्थायी कठोरताः
यह वह कठोरता है जिसे उबालकर दूर नहीं किया जा सकता हैं। यह जल कपड़े धोने एवं दैनिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होता है।
जल की अस्थायी कठोरता कैल्सियम व मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों के कारण होती है तथा स्थायी कठोरता कैल्सियम व मैग्नीशियम के क्लोराइड अथवा सल्फेट के कारण। अस्थायी कठोरता को सरलता से दूर किया जा सकता है, किन्तु स्थायी कठोरता का निवारण कठिन है। जल की अस्थायी कठोरता को जल उबालकर समाप्त किया जा सकता है; किन्तु स्थायी कठोरता का निवारण कठिन है। स्थायी कठोरता के निवारण के लिए कठोर जल में कपड़े धोने का सोडा अल्प मात्रा में मिलाया जाता है। अथवा सोडे एवं चूने का मिश्रण मिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त परम्यूटिट विधि द्वारा भी स्थायी करता को संमाप्त किया जा सकता है।
In simple words: कठोर जल वह है जो साबुन के साथ झाग नहीं देता, और यह दो प्रकार का होता है - अस्थायी कठोरता जिसे उबालकर दूर किया जा सकता है, और स्थायी कठोरता जिसे उबालने से भी दूर नहीं किया जा सकता।

🎯 Exam Tip: कठोर जल की परिभाषा, उसके प्रकार (अस्थायी और स्थायी), और प्रत्येक प्रकार को दूर करने के उपायों का स्पष्टीकरण करें।

 

Question 3. कठोर जल से क्या हानियाँ होती हैं।
Answer: जिस जल में विभिन्न प्रकार के अनावश्यक तत्त्व घुलित अवस्था में होते हैं, उसे कठोर जल कहते हैं। कठोर जल में साबुन कम झाग उत्पन्न करता है। यह पीने में तो स्वादिष्ट होता है किन्तु भोजन पकाने व वस्त्र धोने के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसके उपयोग से तल-जम जाने के कारण बॉयलर शीघ्र ही खराब हो जाते हैं। इसमें घुले कई रासायनिक पदार्थ कई बार हानिकारक मात्रा में घुले होते हैं। तो वे ऐसा जल पीने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं जिससे एक स्वस्थ मनुष्य के बीमार पड़ने का खतरा भी होता है।
In simple words: कठोर जल साबुन का कम झाग बनाता है, भोजन पकाने और कपड़े धोने के लिए उपयुक्त नहीं होता, बॉयलर को नुकसान पहुंचाता है, और इसमें हानिकारक रासायनिक तत्व होने के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा भी पैदा करता है।

🎯 Exam Tip: कठोर जल के दैनिक उपयोग (साबुन, खाना पकाना) और औद्योगिक उपयोग (बॉयलर) पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बताएं।

 

Question 4. मृद एवं कठोर जल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
या
मृदु जल किसे कहते हैं?

Answer: स्थायी एवं अस्थायी कठोरता से रहित जल को मृदु जल कहा जाता है और यह जल ही सेवन योग्य होता है। कठोर जल तथा मृदु जले में विद्यमान अन्तरों को निम्नांकित तालिका द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

क्र०सं०मृदु जलकठोर जल
1.यह सरलता से साबुन के साथ झाग उत्पन्न करता है।यह साबुन के साथ कठिनाई से व कम झाग देता है।
2.इसका स्वाद अच्छा होता है।यह पीने में स्वादिष्ट होता है।
3.भोजन पकाने व वस्त्र धोने के लिए यह जल ही उपयुक्त रहता है।भोजन पकाने व वस्त्र धोने के लिए यह जल अधिक उपयुक्त नहीं होता है।
4.इसके उपयोग से बॉयलर अधिक समय तक ठीक रहते हैं।इसके उपयोग से तलछट जम जाने के कारण बॉयलर शीघ्र ही खराब हो जाते हैं।
5.इसमें कठोरता उत्पन्न करने वाले रासायनिक पदार्थ नहीं होते हैं।इसमें कठोरता उत्पन्न करने वाले रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं। ये विभिन्न प्रकार के लवण हैं।
6.इसके उदाहरण हैं- आसुत जल व वर्षा का जल आदि।इसके उदाहरण हैं- झरने, नदी व कुएँ का जल।

In simple words: मृदु जल आसानी से साबुन के साथ झाग बनाता है, खाना पकाने और कपड़े धोने के लिए उपयुक्त होता है, जबकि कठोर जल झाग बनाने में कठिनाई पैदा करता है और इन कार्यों के लिए कम उपयुक्त होता है।

🎯 Exam Tip: मृदु और कठोर जल के बीच के अंतर को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना तुलनात्मक विश्लेषण के लिए उच्च अंक दिलाता है।

 

Question 5. शुद्ध तथा अशुद्ध जल में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Answer:

क्र०सं०शुद्ध (पेय) जलअशुद्ध जल
1.शुद्ध जल स्वादहीन, गन्धहीन, रंगहीन एवं पारदर्शी होता है।अशुद्ध जल गन्धयुक्त तथा रंगीन होता है। वह मीठा अथवा खारा हो सकता है।
2.शुद्ध जल स्वास्थ्य को कुप्रभावित नहीं करता है।यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है तथा इसके सेवन से अनेक रोग भी हो सकते हैं।
3.शुद्ध जल पीने योग्य होता है।इसे पेय जल के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता।
4.शुद्ध जल में किसी भी प्रकार की अशुद्धियाँ नहीं होतीं।इसमें घुलित एवं अघुलित अशुद्धियों के साथ-साथ कीटाणु भी पाये जाते हैं।
5.इसके साथ रगड़ने पर साबुन भरपूर झाग देता है।अशुद्ध जल के साथ रगड़ने पर साबुन कम झाग देता है।

In simple words: शुद्ध जल स्वाद, गंध और रंग से रहित, पारदर्शी और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होता है, जबकि अशुद्ध जल में ये सभी गुण होते हैं और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध और अशुद्ध जल के बीच के महत्वपूर्ण अंतरों को तालिकाबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना उच्च अंक प्राप्त करने में सहायक होता है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. शुद्ध जल की क्या पहचान है?
या
शुद्ध जल के क्या गुण हैं?
या
सुरक्षित पीने के पानी की व्याख्या कीजिए।

Answer: शुद्ध जल स्वादहीन, गन्धहीन, रंगहीन, पारदर्शी तथा एक प्रकार की प्राकृतिक चमक से युक्त होता है। इसमें किसी रोग के कीटाणु नहीं होते। यह पीने के लिए सुरक्षित होता है।
In simple words: शुद्ध जल स्वाद, गंध और रंग से रहित होता है, पारदर्शी होता है, उसमें एक प्राकृतिक चमक होती है और वह किसी भी रोग के कीटाणुओं से मुक्त होने के कारण पीने के लिए सुरक्षित होता है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल के भौतिक गुणों (स्वाद, गंध, रंग, पारदर्शिता) और स्वास्थ्य सुरक्षा पहलुओं का उल्लेख करें।

 

Question 2. जल में कितने प्रकार की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं?
Answer: जल में दो प्रकार की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं, जिन्हें क्रमशः जल की घुलित अशुद्धियाँ तथा जल की अघुलित अथवा तैरने वाली अशुद्धियाँ कहा जाता है।
In simple words: जल में मुख्य रूप से दो प्रकार की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं - घुलित अशुद्धियाँ (जो पानी में घुल जाती हैं) और अघुलित या तैरने वाली अशुद्धियाँ (जो पानी में घुलती नहीं हैं)।

🎯 Exam Tip: घुलित और अघुलित अशुद्धियों के रूप में जल में पाई जाने वाली अशुद्धियों के प्रकारों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. अशुद्ध जल को शुद्ध करने की भौतिक विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: अशुद्ध जल को शुद्ध करने की तीन भौतिक विधियाँ हैं-उबालना, आसवन तथा अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों का प्रभाव ।।
In simple words: अशुद्ध जल को शुद्ध करने की मुख्य भौतिक विधियाँ उबालना, आसवन और पराबैंगनी (अल्ट्रा-वॉयलेट) किरणों का उपयोग हैं।

🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण की तीनों प्रमुख भौतिक विधियों के नाम याद रखना और उन्हें संक्षेप में बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. कठोर जल किसे कहते हैं? इसकी पहचान क्या है?
Answer: जिस जल में विभिन्न अनावश्यक पदार्थ घुलित अवस्था में विद्यमान होते हैं, उस जल को कठोर जल कहते हैं। कठोर जल साबुन के साथ कम झाग उत्पन्न करता है।
In simple words: कठोर जल वह होता है जिसमें अनावश्यक घुलित पदार्थ होते हैं और इसकी पहचान यह है कि यह साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं बनाता।

🎯 Exam Tip: कठोर जल की परिभाषा और साबुन के साथ झाग न बनाने वाले उसके प्रमुख पहचान चिह्न पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 5. जल की कठोरता को दूर करने के दो उपाय लिखिए।
Answer: जल की अस्थायी कठोरता जल को उबालकर दूर की जा सकती है। जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए जल में सोड़े तथा चूने का मिश्रण मिलाया जाता है।
In simple words: अस्थायी कठोरता को उबालकर दूर किया जा सकता है, जबकि स्थायी कठोरता को सोडा और चूने के मिश्रण से ठीक किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अस्थायी और स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए प्रत्येक के विशिष्ट उपायों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 6. आसुत जल किस जल को कहते हैं?
या
आसुत जल की उपयोगिता लिखिए।
या
आसुत जल क्या है? इसका प्रयोग कब किया जाता है?

Answer: आसवन विधि द्वारा शुद्ध किए गए जल को आसुत जल कहते हैं। यह जल पूर्ण रूप से शुद्ध होता है। इसका पेयजल के रूप में तथा दवाओं में प्रयोग किया जाता है।
In simple words: आसुत जल वह शुद्ध पानी है जो आसवन विधि से प्राप्त होता है, और यह पीने तथा दवाओं में उपयोग के लिए अत्यंत शुद्ध माना जाता है।

🎯 Exam Tip: आसुत जल की परिभाषा, शुद्धता का स्तर और उसके प्रमुख उपयोग (पेयजल, दवाएँ) का उल्लेख करें।

 

Question 7. जल को छानकर किस प्रकार की अशुद्धियों से मुक्त किया जा सकता है?
Answer: जल को छानकर अघुलित अथवा तैरने वाली अशुद्धियों से मुक्त किया जा सकता है।
In simple words: छानने की प्रक्रिया से जल में मौजूद वे अशुद्धियाँ हटाई जा सकती हैं जो घुलती नहीं बल्कि तैरती रहती हैं।

🎯 Exam Tip: छानने की विधि द्वारा केवल अघुलित या तैरने वाली अशुद्धियों को ही हटाया जा सकता है, यह स्पष्ट करें।

 

Question 8. ग्रामीण क्षेत्रों में जल को कीटाणु मुक्त करने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा का नाम बताइए।
Answer: ग्रामीण क्षेत्रों में जल को कीटाणु मुक्त करने के लिए लाल दवा या पोटैशियम परमैंगनेट नामक दवा इस्तेमाल की जाती है।
In simple words: ग्रामीण क्षेत्रों में जल को कीटाणु रहित करने के लिए आमतौर पर लाल दवा या पोटैशियम परमैंगनेट का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ग्रामीण क्षेत्रों में जल शुद्धिकरण के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्य दवा (पोटैशियम परमैंगनेट) का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. जल के कीटाणओं को मारने के लिए कौन-सी गैस इस्तेमाल की जाती है?
Answer: जल के कीटाणुओं को मारने के लिए क्लोरीन नामक गैस इस्तेमाल की जाती है।
In simple words: जल में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए क्लोरीन गैस का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: जल के व्यापक कीटाणुशोधन में क्लोरीन गैस की भूमिका को पहचानें।

 

Question 10. जल के शुद्धिकरण के लिए प्रयोग किये जाने वाले जीवाणुनाशक पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: जल के शुद्धिकरण के लिए सामान्य रूप से अपनाये जाने वाले मुख्य जीवाणुनाशक पदार्थ हैं ब्लीचिंग पाउडर, नीला थोथा, पोटैशियम परमैंगनेट तथा क्लोरीन ।
In simple words: जल को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर, नीला थोथा, पोटैशियम परमैंगनेट और क्लोरीन जैसे जीवाणुनाशक पदार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण में उपयोग होने वाले विभिन्न जीवाणुनाशक पदार्थों के नामों की सूची याद रखें।

 

Question 11. जल को उबालने से किस प्रकार की कठोरता दूर होती है?
Answer: जल को उबालने से केवल उसकी अस्थायी कठोरता ही दूर हो सकती है।
In simple words: जल को उबालने से केवल अस्थायी कठोरता ही दूर होती है, स्थायी कठोरता नहीं।

🎯 Exam Tip: स्पष्ट करें कि उबालने से केवल जल की अस्थायी कठोरता दूर होती है, स्थायी कठोरता नहीं।

 

Question 12. अशुद्ध जल की पहचान लिखिए।
Answer: अशुद्ध जल का रंग मटमैला या गंदला होता है। इसका स्वाद खारा तथा यह अर्द्ध-पारदर्शी होता है।
In simple words: अशुद्ध जल को उसके मटमैले या गंदले रंग, खारे स्वाद और अर्द्ध-पारदर्शी प्रकृति से पहचाना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: अशुद्ध जल के दृश्य और स्वाद संबंधी पहचान चिह्नों का उल्लेख करें।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न: निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

 

Question 1. शुद्ध जल में अभाव होता है
(क) गन्ध को
(ख) स्वाद का
(ग) रंग का
(घ) इन सभी को
Answer: (घ) इन सभी को
In simple words: शुद्ध जल में गंध, स्वाद और रंग तीनों का अभाव होता है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल के मूल गुणों को याद रखें, जिसमें गंध, स्वाद और रंग का अभाव शामिल है।

 

Question 2. शुद्ध जल कौन-सा होता है?
(क) वायु रहित
(ख) रंग रहित
(ग) स्वाद रहित
(घ) नाइट्रोजन रहित
Answer: (ग) स्वाद रहित
In simple words: शुद्ध जल स्वाद रहित होता है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल की विशिष्ट पहचान उसके स्वाद रहित होने से है।

 

Question 3. जल दूषित कैसे होता है?
(क) हाथ की गन्दगी से
(ख) पात्र की गन्दगी से
(ग) कुएँ की गन्दगी से
(घ) सभी स्रोतों से
Answer: (घ) सभी स्रोतों से
In simple words: जल हाथ की गंदगी, पात्र की गंदगी और कुएँ की गंदगी जैसे विभिन्न स्रोतों से दूषित होता है।

🎯 Exam Tip: जल के दूषित होने के कई स्रोत होते हैं, जिनमें व्यक्तिगत स्वच्छता से लेकर पर्यावरणीय कारक शामिल हैं।

 

Question 4. घर पर शुद्ध पेय जल प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम उपाय है
(क) जल का आसवन करना
(ख) जल को उबालना
(ग) जल का अवक्षेपण करना
(घ) जल का क्लोरीनीकरण करना
Answer: (ख) जल को उबालना
In simple words: घर पर पीने के पानी को शुद्ध करने का सबसे अच्छा और सरल तरीका उसे उबालना है।

🎯 Exam Tip: घरेलू स्तर पर जल शुद्धिकरण के लिए उबालना सबसे प्रभावी और सुलभ तरीका माना जाता है।

 

Question 5. आसवन विधि द्वारा शुद्ध किए गए जल का नाम है
(क) कठोर जल
(ख) आसुत जल
(ग) प्राकृतिक जल
(घ) मृदु जल
Answer: (ख) आसुत जल
In simple words: आसवन विधि से शुद्ध किए गए जल को आसुत जल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आसवन प्रक्रिया से प्राप्त जल को 'आसुत जल' के नाम से जाना जाता है।

 

Question 6. आसुत जल का प्रयोग होता है
(क) दवाओं में
(ख) खाना बनाने में
(ग) पीने में
(घ) सफाई करने में
Answer: (क) दवाओं में
In simple words: आसुत जल का प्रमुख उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है क्योंकि यह अत्यंत शुद्ध होता है।

🎯 Exam Tip: आसुत जल की उच्च शुद्धता के कारण इसका विशेष रूप से दवाओं में प्रयोग होता है।

 

Question 7. कपड़ों की धुलाई के लिए कौन-सा जल उत्तम होता है?
(क) मृदु
(ख) कठोर
(ग) ठण्डा
(घ) गर्म
Answer: (क) मृदु
In simple words: कपड़ों की धुलाई के लिए मृदु जल सबसे अच्छा होता है क्योंकि यह साबुन के साथ अधिक झाग बनाता है।

🎯 Exam Tip: मृदु जल साबुन के साथ बेहतर झाग बनाता है, जिससे कपड़े धोने में अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 8. कठोर जल में कौन-से लवण घुले रहते हैं?
(क) लौह लवण
(ख) कैल्सियम
(ग) फॉस्फोरस
(घ) पोटैशियम
Answer: (ख) कैल्सियम
In simple words: कठोर जल में मुख्य रूप से कैल्सियम के लवण घुले रहते हैं।

🎯 Exam Tip: कठोरता के लिए जिम्मेदार प्रमुख तत्वों में से एक कैल्सियम है।

 

Question 9. जल की अघुलित अशुद्धियों को जल से अलग किया जा सकता है
(क) अवक्षेपण क्रिया द्वारा
(ख) आसवन क्रिया द्वारा
(ग) उबालने की क्रिया द्वारा
(घ) छानने की क्रिया द्वारा
Answer: (घ) छानने की क्रिया द्वारा
In simple words: जल में तैरती या अघुलित अशुद्धियों को छानने की प्रक्रिया से आसानी से अलग किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: छानने की विधि केवल अघुलित अशुद्धियों को हटाने के लिए प्रभावी है, घुलित अशुद्धियों के लिए नहीं।

 

Question 10. व्यापक स्तर पर जल को कीटाणुरहित करने का उत्तम उपाय है
(क) उबालना
(ख) आसवन
(ग) ब्लीचिंग पाउडर अथवा क्लोरीन का इस्तेमाल
(घ) कुछ भी करना व्यर्थ है।
Answer: (ग) ब्लीचिंग पाउडर अथवा क्लोरीन का इस्तेमाल
In simple words: बड़े पैमाने पर जल को कीटाणुरहित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर या क्लोरीन का इस्तेमाल सबसे प्रभावी तरीका है।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक जल आपूर्ति में कीटाणुशोधन के लिए ब्लीचिंग पाउडर या क्लोरीन का उपयोग एक मानक तरीका है।

 

Question 11. जल की घुलित अशुद्धियों को अलग करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है
(क) क्लोरीन का
(ख) तूतिया का
(ग) फिटकरी का
(घ) लाल दवा का
Answer: (ग) फिटकरी का
In simple words: जल में घुली हुई अशुद्धियों को नीचे बिठाने और उन्हें अलग करने के लिए फिटकरी का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: फिटकरी अवक्षेपण के माध्यम से घुलित अशुद्धियों को हटाने में मदद करती है।

 

Question 12. आसुत जल किस विधि द्वारा तैयार होता है?
(क) उबालकर
(ख) आसवन द्वारा
(ग) एक्वागार्ड द्वारा
(घ) छानकर
Answer: (ख) आसवन द्वारा
In simple words: आसुत जल को आसवन नामक विशेष विधि से तैयार किया जाता है।

🎯 Exam Tip: आसुत जल के उत्पादन की विधि 'आसवन' को याद रखें।

 

Question 13. कुएँ के जल को शुद्ध करने के लिए उसमें डालते हैं
(क) पोटैशियम परमैंगनेट
(ख) ब्लीचिंग पाउडर
(ग) गन्धक
(घ) डी० डी० टी० पाउडर
Answer: (क) पोटैशियम परमैंगनेट
In simple words: कुएँ के जल को शुद्ध करने और कीटाणुओं को मारने के लिए पोटैशियम परमैंगनेट का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं के जल शुद्धिकरण के लिए पोटैशियम परमैंगनेट का उपयोग एक सामान्य तरीका है।

 

Question 14. जल शुद्धिकरण के लिए किसका प्रयोग किया जाता है?
(क) सोडियम परमैंगनेट
(ख) ब्लीचिंग पाउडर
(ग) पोटैशियम परमैंगनेट
(घ) जिंक ऑक्साइड
Answer: (ख) ब्लीचिंग पाउडर
In simple words: जल को शुद्ध करने के लिए आमतौर पर ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: ब्लीचिंग पाउडर जल शुद्धिकरण में एक व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला रसायन है।

 

Question 15. पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग जल के शुद्धिकरण के लिए कहाँ किया जाता है?
(क) समुद्र में
(ख) नदी में
(ग) बरसात में
(घ) कुएँ में
Answer: (घ) कुएँ में
In simple words: पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग मुख्य रूप से कुओं के जल को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम परमैंगनेट के विशिष्ट अनुप्रयोग क्षेत्र, जैसे कुएँ, को याद रखना चाहिए।

UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Home Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Home Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Home Science Class 10 Solved Papers

Using our Home Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Home Science are as per latest UP Board curriculum.

Are the Home Science UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Home Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Home Science. You can access UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Home Science UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 7 जल स्रोतों का उपयोग और शुद्धिकरण in printable PDF format for offline study on any device.