UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 22 Sponging Fomentation Vaporization and Use of Ice Bag

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Detailed Chapter 22 स्पंजिंग, सेंक, वाष्पीकरण और बर्फ की थैली का उपयोग UP Board Solutions for Class 10 Home Science

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Class 10 Home Science Chapter 22 स्पंजिंग, सेंक, वाष्पीकरण और बर्फ की थैली का उपयोग UP Board Solutions PDF

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. किसी रोगी को स्नान तथा स्पंज किस प्रकार कराया जाता है?
या
सविस्तार वर्णन कीजिए। या। स्पंज करना किसे कहते हैं? रोगी का कब और क्यों स्पंज किया जाता है?
या
स्पंज करना क्या है? स्पंज करने की विधि लिखिए।
या
स्पंज कराने से क्या तात्पर्य है? स्पंज कराते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
या
किस प्रकार के रोगी को स्पंज कराते हैं? इसके लाभ लिखिए।

Answer: रोगी को स्नान कराना
शरीर से पसीने आदि की दुर्गन्ध दूर करने के लिए त्वचा की सफाई करना आवश्यक है। यदि रोगी चलने-फिरने योग्य है, तो उसके स्नानघर जाने से पूर्व निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है
1. रोगी को स्नान कराने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श अवश्य ही कर लेना चाहिए।
2. रोगी के वस्त्र, तौलिया, साबुन व तेल इत्यादि स्नानघर में तैयार रखे होने चाहिए।
3. स्नानघर का दरवाजा अन्दर की ओर से बन्द नहीं किया जाना चाहिए।
4. रोगी को अधिक समय तक स्नान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
5. रोगी के स्नान करते समय परिचारिका को स्नानघर के पास ही रहना चाहिए।
6. स्नान कराने से पूर्व ही परिचारिका को रोगी के दाँत व नाखून आदि साफ कर देने चाहिए ।
7. रोगी यदि स्नानघर में जाने योग्य न हो तो उसे कमरे में ही स्नान करा देना उचित रहता है।
8. रोगी में यदि दुर्बलता अधिक है, तो परिचारिका को उसे स्नान कराने में सहायता करनी चाहिए।
रोगी को स्पंज कराना
कुछ दशाओं में रोगग्रस्त अथवा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को खुले पानी से स्नान कराना उचित नहीं माना जाता। इन दशाओं में व्यक्ति की शारीरिक सफाई के लिए स्नान के विकल्प के रूप में एक अन्य उपाय को अपनाया जाता है। शारीरिक सफाई के इस उपाय को स्पंज कराना कहा जाता है। इसके अतिरिक्त कभी-कभी तीव्र ज्वर की दशा में भी शरीर के तापमान को कम करने के लिए ठण्डे जल से स्पंज कराया जाता है। रोगी को स्पंज कराने का कार्य परिचारिका अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है। स्पंज कराने की विधियों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
(1) सामान्य विधिः इसमें आवश्यकतानुसार ठण्डा या गर्म पानी प्रयोग में लाया जाता है। यदि साबुन का प्रयोग करना है, तो उसे रोगी के तौलिए पर ही लगाना होता है। स्पंज कराने के लिए तौलिए को पानी में भिगोकर निचोड़ लिया जाता है तथा इससे धीरे-धीरे रोगी के शरीर की सफाई की जाती है। स्पंज का प्रारम्भ रोगी के चेहरे से किया जाता है। बाद में गर्दन, बाँह, हाथ-पैर आदि को क्रमिक रूप से स्पंज करना चाहिए। इसके बाद रोगी के शरीर पर कोई अच्छा पाउडर छिड़ककर धुले हुए वस्त्र पहना देने चाहिए। स्पंज कराने के बाद रोगी का बिस्तर भली-भाँति साफ कर देना चाहिए। रोगी को पीने के लिए कोई गर्म पेय देना चाहिए। स्पंज कराने के तुरन्त बाद रोगी को कोई उपयुक्त कपड़ा ओढ़ाना चाहिए। अन्त में रोगी को आराम करने के लिए अथवा सो जाने के लिए निर्देश करना उपयुक्त रहता है।
(2) ठण्डे पानी से स्पंज कराना: यह विधि रोगी के शरीर का तापमान अधिक होने की अवस्था में प्रयोग में लाई जाती है। रोगी के शरीर का ताप कम करने के लिए उसके शरीर को ठण्डे पानी में भीगे तौलिए से कई बार पोंछा जाता है। इस कार्य को करते समय रोगी के नीचे रबर-शीट अथवा मोमजामे का टुकड़ा बिछाया जाता है। रोगी के लगभग सभी कपड़ों को उतारकर उसे कम्बल ओढ़ा दिया जाता है और तौलिए को भली-भाँति निचोड़कर रोगी के शरीर पर फैलाकर ढक देना चाहिए। यह तौलिया थोड़ी देर में गर्म हो जाता है और फिर इसे उसी प्रकार ठण्डे पानी में भिगोकर तथा निचोड़कर यही क्रिया अपनानी चाहिए। यह क्रिया रोगी के शरीर का ताप सामान्य होने तक दोहराई जाती है। अब रोगी के शरीर को स्वच्छ एवं सूखे तौलिए से पोंछकर कम्बल से ढक देते हैं। अब बिस्तर को भली-भाँति साफ एवं व्यवस्थित कर रोगी को आराम करने एवं सोने का निर्देश देना चाहिए।
In simple words: रोगी को स्नान कराने का मतलब है जब वह खुद चल-फिर सके तो बाथरूम में और अगर नहीं तो बिस्तर पर ही सफाई करना। स्पंज कराने का मतलब है जब रोगी खुले पानी से स्नान न कर सके, तो कपड़े से पोछकर शरीर साफ करना, खासकर बुखार में शरीर का तापमान कम करने के लिए।

🎯 Exam Tip: रोगी की स्थिति के अनुसार स्नान या स्पंज कराने की विधियों का सटीक वर्णन, सावधानियाँ और लाभ लिखना मूल्यांकन के मुख्य बिन्दु होते हैं।

 

Question 2. ठण्डी सेंक कब दी जाती है? ठण्डी सेंक देने की विधियाँ बताइए ।
या
बर्फ की थैली क्या है? बर्फ की थैली का प्रयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए ?
या
बर्फ की टोपी का प्रयोग कब, क्यों और कैसे करते हैं? इससे किस प्रकार के रोगी को आराम मिलता है? समझाइए ।

Answer: ठण्डी सेंक व उसकी विधियाँ
तीव्र ज्वर की अवस्था में शरीर के तापमान को सामान्य स्तर पर लाने के दृष्टिकोण से ठण्डी सेंक का अत्यधिक महत्त्व है। इसके लिए ठण्डी पट्टियों एवं बर्फ की थैली का प्रयोग निम्नलिखित रूप से किया जाता है
(1) ठण्डा स्पंज: इसके लिए सामान्य रूप से ठण्डे पानी जिसका तापक्रम 10-12° सेण्टीग्रेड होता है, का प्रयोग किया जाता है। पट्टियों अथवा तौलिए को इस पानी में भिगोकर व निचोड़कर लगभग 20 मिनट तक रोगी का स्पंज किया जाता है। स्पंज करते समय रोगी की नाड़ी तथा तापमान का विशेष ध्यान रखा जाता है।
(2) ठण्डी पट्टीः इस विधि में रोगी के शरीर के चारों ओर ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ा हुआ कपड़ा लपेट दिया जाता है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार रोगी को इस अवस्था में 15 से 30 मिनट तक रखा जाता है। इसके बाद शीघ्र ही रोगी के शरीर को सुखाकर तथा उसे स्वच्छ कपड़े पहनाकर बिस्तर पर लिटा दिया जाता है। ठण्डी पट्टी के प्रयोग के पहले और बाद में शरीर का तापमान नोट कर लेना आवश्यक है।
(3) बर्फ की थैली:
इस थैली में बर्फ भरकर तथा उसका मुँह बन्द कर उसके अन्दर की हवा बाहर निकाल दी जाती है। थैली में बर्फ को लगभग आधा भरकर उसमें एक चम्मच नमक मिला देने से बर्फ अधिक देर में पिघलती है। थैली के बीच में लिण्ट का टुकड़ा रख देने पर यह नमी को सोखता रहता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र बर्फ की टोपी या आइस कैप को दर्शाता है। इसका उपयोग शरीर के प्रभावित हिस्से पर ठण्डक पहुँचाने और सूजन या दर्द को कम करने के लिए किया जाता है, जैसे कि तीव्र ज्वर या रक्तस्राव की स्थिति में।
इससे ठण्ड से उत्पन्न हुई सनसनी कम हो जाती है। बर्फ के पूरी तरह से पिघलने के पूर्व ही थैली की बर्फ बदल दी जाती है। बर्फ की थैली का प्रयोग प्रायः माथे व सिर में ठण्डक पहुँचाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग आवश्यकतानुसार ही करना चाहिए, क्योंकि इसका अधिक समय तक प्रयोग स्नायुओं को हानि पहुँचा सकता है। कुछ दशाओं में शरीर से होने वाले रक्त स्राव को रोकने के लिए बर्फ की टोपी या थैली का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: ठण्डी सेंक तीव्र बुखार को कम करने, शरीर के तापमान को सामान्य करने और सूजन व दर्द घटाने के लिए दी जाती है। इसमें ठण्डे पानी से स्पंज करना, ठण्डी पट्टी लगाना या बर्फ की थैली का उपयोग करना शामिल है, खासकर सिर या प्रभावित हिस्से पर।

🎯 Exam Tip: ठण्डी सेंक के उद्देश्य, विधियों (स्पंज, पट्टी, बर्फ की थैली) और प्रयोग में रखी जाने वाली सावधानियों का उल्लेख करना महत्त्वपूर्ण है।

 

Question 3. गर्म सेक से क्या लाभ होता है? गर्म सेंक की विधियाँ लिखिए।
या
गर्म पानी की बोतल के प्रयोग की विधि लिखिए।
या
सेंक से आप क्या समझते हैं? गर्म सेंक की विभिन्न विधियाँ लिखिए।
या
सेंक क्या है? इसका प्ररण कब और क्यों करते हैं?
या
गर्म पानी की थैली की उपयोगिता लिखिए।

Answer: गर्म सेंक व उसकी विधियाँ
गर्म पानी की बोतल द्वारा सेंक अथवा शुष्क गर्म सेंक वात रोग, पेट, गले, दाँत आदि के दर्द तथा क्षय रोग में लाभप्रद रहती है। गर्म सेंक की प्रचलित विधियाँ निम्नलिखित हैं
(1) गर्म पानी की सेकः
इस विधि में एक तौलिया, मलमल के टुकड़े, चिलमची व गर्म पानी की केतली आदि की आवश्यकता पड़ती है। कपड़े को तौलिये में लपेटकर चिलमची के ऊपर रख देते हैं और तौलिये पर गर्म पानी डालते हैं। अब तौलिये को दोनों सिरों से पकड़कर निचोड़ते हैं। अब मलमल के कपड़े को निकालकर हाथ पर रखकर उसकी गर्माहट का अनुमान लगाते हैं। अब इस कपड़े से किसी भी अंग की सिकाई की जा सकती है। यह सेंक रोगी को 10-15 मिनट तक दी जा सकती है। सेंक देते समय रोगी की हवा से रक्षा करना अति आवश्यक है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र गर्म पानी की बोतल को दर्शाता है। इसका उपयोग शरीर के प्रभावित हिस्से पर गर्माहट पहुँचाने, दर्द को कम करने, मांसपेशियों को आराम देने और रक्त संचार को बढ़ाने के लिए किया जाता है, जैसे कि वात रोग या पेट दर्द में।
(2) शुष्क सेंक देना: यह निम्नलिखित विधियों द्वारा दी जा सकती है
(अ) गर्म पानी की बोतल द्वारा: यह रबर की एक थैली होती है। सूजन आने, या पीड़ा होने पर गर्म पानी की बोतल द्वारा सिकाई करना प्रायः लाभदायक रहता है। बोतल में गर्म पानी भरकर उसकी हवा निकालकर उसका मुँह बन्द कर देते हैं। पानी अधिक गर्म होने पर बोतल के चारों ओर तौलिया लपेटकर सिकाई की जाती है। गर्म पानी की बोतल से सिकाई करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. गर्म पानी से बोतल का केवल दो-तिहाई भाग ही भरा जाना चाहिए।
2. थैली का मुँह डाट द्वारा कसकर बन्द किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके खुल जाने से रोगी के जल जाने का भय रहता है।
3. थैली के चारों ओर फलालेन का कपड़ा लपेट देने से यह अधिक समय तक गर्म बनी रहती है।
4. किसी अंग पर बोतल को अधिक देर तक न रखकर इसे खिसकाते रहना चाहिए ।
(ब) रेत की थैली द्वारा: रेत को ट्रे में रखकर आग पर गर्म किया जाता है। अब इसे थैली में भरकर किसी भी अंग की सिकाई की जा सकती है। रेत में गर्मी अधिक देर तक टिकती है; अतः इसका प्रयोग सूजन व दर्द दूर करने के लिए अधिक लाभकारी है।
(स) सामान्य शुष्क सेंकः इस विधि में रूई यो तह किए कपड़े आदि को किसी तवे पर सीधे गर्म कर रोगी के पीड़ित अंगों की सिकाई की जाती है।
In simple words: गर्म सेंक शरीर के किसी अंग में दर्द, सूजन या अकड़न को कम करने के लिए दी जाती है। यह वात रोग, पेट दर्द, गले के दर्द और चोटों में लाभकारी होती है, जिसमें गर्म पानी, रेत या गर्म कपड़े का उपयोग करके प्रभावित क्षेत्र को गर्माहट दी जाती है।

🎯 Exam Tip: गर्म सेंक के लाभों, विभिन्न विधियों (जैसे गर्म पानी की बोतल, रेत की थैली, शुष्क सेंक) और प्रत्येक विधि के लिए आवश्यक सावधानियों का स्पष्टीकरण उच्च अंक दिलाएगा।

 

Question 4. टिप्पणी लिखिए-बफारा या भाप लेना।
या
बफारा कब, कैसे और क्यों लेना चाहिए ? इससे किस प्रकार के रोगी को आराम मिलता है?

Answer: बफारा लेनाः
बारा लेना, भाप से सिकाई करने का एक तरीका है। गले के रोग; जैसेगले का दर्द व टॉन्सिल्सः शरीर के रोग; जैसे- गठिया बाय आदि; में बफारा लेना लाभप्रद रहता है। इसके लिए अग्रलिखित विधियाँ अपनायी जाती हैं
1. यदि बफारे में कोई औषधि मिलानी है, तो इसे खौलते जल में डाल दिया जाता है अन्यथा सादा बफारा ही लिया जाता है।
2. किसी छोटे मुँह के बर्तन में खौलता जल डालकर उसे किसी ऊँची मेज अथवा स्टूल पर रख बफारा लिया जाता है।
3. सिर पर एक बड़ा तौलिया डाल दिया जाता है। यह रोगी के सिर के साथ बर्तन इत्यादि को भी ढक लेता है।
4. अब धीरे-धीरे श्वास लेने पर भाप श्वसन नली में प्रवेश करती रहती है तथा सेंक देती रहती है।
5. इसी प्रकार अन्य अंगों यहाँ तक कि पूरे शरीर को भी बफारा दिया जा सकता है।
मुँह पर बफारा लेने के पश्चात् अथवा अन्य किसी अंग पर बफारा लेने के बाद मुंह अथवा अन्य अंग को कुछ समय तक ढककर रखना चाहिए जिससे कि इसे हवा न लगने पाए ।
In simple words: बफारा लेना या भाप लेना एक तरीका है जिसमें गर्म भाप का उपयोग करके गले के दर्द, टॉन्सिल्स, गठिया या श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। इसमें खौलते पानी से निकली भाप को सीधे प्रभावित अंग पर लगाया जाता है, जिसे औषधियुक्त या सादा लिया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: बफारा लेने के उद्देश्य, इसे कब और कैसे प्रयोग किया जाता है, तथा इससे मिलने वाले आराम का सटीक वर्णन आवश्यक है।

 

Question 5. पुल्टिस किस काम आती है? पुल्टिस कितने प्रकार की होती है?
या
पुल्टिस क्या है ? दो प्रकार की पुल्टिस बनाने की विधि लिखिए।
या
पुल्टिस का प्रयोग कब और क्यों करते हैं? दो प्रकार की पुल्टिस बनाने की विधियों का वर्णन कीजिए।

Answer: पुल्टिस का प्रयोग
गर्म सेक को एक रूप या प्रकार पुल्टिस बांधना भी है। पुल्टिस के प्रयोग से गुम चोट व मोच की पीड़ा कम होती है तथा सूजन में लाभ होता है। कई बार फोड़े व फुन्सियों के समय पर न पकने से भयंकर पीड़ा होती है। पुल्टिस का प्रयोग करने पर फोड़े व फुन्सियाँ मुलायम हो जाती हैं, ठीक प्रकार से पक जाती हैं तथा उनके फूटकर पस निकल जाने पर पीड़ा दूर हो जाती है। इस प्रकार पुल्टिस घावों को भरने व फोड़े-फुन्सियों को पकाने के लिए अति उत्तम है।
पुल्टिस के प्रकार
(1) आटे की पुल्टिसः इसके लिए दो चम्मच आटा, दो चम्मच सरसों का तेल तथा दो चम्मच पानी की आवश्यकता होती है। पानी को एक चौड़े बर्तन में उबालकर उसमें आटे व तेल को डाल दिया जाता है। गाढ़ा होने तक इसे चम्मच से चलाते रहते हैं। गाढ़ा होने पर पुल्टिस तैयार हो जाती है। इसका निम्न प्रकार से प्रयोग किया जाता है
1. पुल्टिस लगाए जाने वाले अंग को भली प्रकार साफ कर लेना चाहिए।
2. एक चौड़े कपड़े की पट्टी को समतल स्थान पर फैलाना चाहिए।
3. एक चम्मच द्वारा गर्म पुल्टिस पट्टी के बीच में फैलानी चाहिए।
4. पट्टी का शेष भाग मोड़कर पुल्टिस को ढक देना चाहिए।
5. पुल्टिस के उपयुक्त ताप का अनुमान लगाकर इसे प्रभावित अंग पर बाँध देना चाहिए।
6. ठण्डी पुल्टिस का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
7. एक बार प्रयोग में लाई गई पुल्टिस का दोबारा प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(2) प्याज की पुल्टिसः इसके लिए एक गाँठ प्याज, कुछ नमक व दो चम्मच सरसों के तेल की आवश्यकता होती है। प्याज को सिल पर महीन पीस लिया जाता है। सरसों के तेल को किसी चौड़े बर्तन में गर्म कर लेते हैं। इसमें पिसी हुई प्याज व नमक को मिला दिया जाता है। गाढ़ा होने तक तेल को गर्म करते हुए चम्मच से चलाते रहते हैं। इसके बाद इसे आग से उतारकर आटे की पुल्टिस की तरह रोगी के अंग पर सावधानीपूर्वक बाँध देते हैं। प्याज की पुल्टिस घावों को भरने व फोड़े-फुन्सियों को पकाने में प्रयुक्त की जाती है।
(3) राई की पुल्टिसः इसका प्रयोग प्रायः वयस्कों के लिए किया जाता है। यह बहुत गर्म होती है तथा इससे फोड़े शीघ्र फूट जाते हैं। इसे बनाने के लिए प्रायः एक भाग राई, पाँच भाग अलसी का, आटा तथा दो बड़े चम्मच पानी की आवश्यकता पड़ती है। राई को पीसकर अलसी के आटे में मिला लें। अब उबलते पानी को इस पर धीरे-धीरे डालते हुए चम्मच से मिलाते रहें। गाढ़ा पेस्ट होने पर पुल्टिस तैयार हो जाती है। पुल्टिस को प्रयोग करते समय 5-10 मिनट के बाद पुल्टिस का कोना उठाकर देख लेना चाहिए कि कहीं चमड़ी अधिक लाल तो नहीं हो गई है; यदि आवश्यक समझे तो पुल्टिस को हटा देना चाहिए। राई की पुल्टिस को चार-चार घण्टे बाद लगाना चाहिए। पुल्टिस के ठण्डी होने पर इसे हटाकर घाव को ऊन से ढक देते हैं।
(4) अलसी की पुल्टिस: इसके लिए अलसी का आटा, जैतून का तेल, चिलमची, खौलते हुए पानी की केतली, पुरानी जाली का टुकड़ा, ग्रीस-प्रूफ कागज, रूई, पट्टी, बहुपुच्छ पट्टियाँ, मेज तथा दो गर्म की हुई तश्तरियों की आवश्यकता होती है। खौलते पानी को गर्म की गयी एक तामचीनी की कटोरी में डालकर अलसी के आटे को इसमें धीरे-धीरे मिलाना चाहिए। मिलाते समय इसे चम्मच से हिलाते रहना चाहिए। गाढ़ा पेस्ट बन जाने पर इसे मेज पर रखे लिएट के कपड़े पर एक समान मोटी तह के रूप में बिछा देना चाहिए। लिण्ट के सिरों को अलसी की तह पर मोड़ देना चाहिए। इस पर अब थोड़ा-सा जैतून का तेल डाल देना चाहिए तथा पुल्टिस को दोहरा करके व गर्म तश्तरियों के बीच में रखकर रोगी के बिस्तर के पास ले जाना चाहिए। इस गर्म पुल्टिस को रोगी के प्रभावित अंग पर लगाया जाता है।
(5) रोटी की पुल्टिस: रोटी के टुकड़े को थैली में रखकर उबलते हुए पानी के प्याले में डाल दिया जाता है। लगभग पन्द्रह मिनट पश्चात् थैली को चपटा फैलाकर तथा निचोड़कर घाव पर लगाते हैं।
In simple words: पुल्टिस गर्म सेंक का एक तरीका है जो चोट, मोच, दर्द और सूजन को कम करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह फोड़े-फुन्सियों को पकाने और घावों को भरने में भी सहायक है। आटे, प्याज, राई, अलसी या रोटी जैसी सामग्रियों से पुल्टिस बनाई जाती है और प्रभावित अंग पर लगाई जाती है।

🎯 Exam Tip: पुल्टिस के विभिन्न प्रकारों (जैसे आटे, प्याज, राई, अलसी, रोटी की पुल्टिस), उनके बनाने की विधि और उपयोगिता का विवरण देना मूल्यांकन में महत्त्वपूर्ण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. राई का पलस्तर कैसे बनता है? इसका क्या उपयोग है?
Answer: राई का पलस्तर बनाने के लिए आटे व राई की कुचलन को समान मात्रा में लेकर गर्म पानी में लेई के समान बना लिया जाता है। इसे किसी कपड़े या कागज के टुकड़े पर समान रूप से फैलाकर तह के रूप में बिछा दिया जाता है। इसे सूजन वाले भाग पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।
In simple words: राई का पलस्तर राई और आटे को गर्म पानी के साथ मिलाकर बनाया जाता है और इसे सूजन वाले हिस्से पर लगाने से सूजन कम होती है।

🎯 Exam Tip: राई के पलस्तर की सामग्री, बनाने की विधि और मुख्य उपयोग (सूजन कम करना) का उल्लेख करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. सामान्य दशाओं में स्पंज का उद्देश्य क्या होता है?
Answer: सामान्य दशाओं में स्पंज का उद्देश्य शरीर की सफाई होती है। जब रोगी को स्नान कराना सम्भव न हो, तब स्पंज किया जाता है।
In simple words: स्पंज का मुख्य उद्देश्य रोगी के शरीर की सफाई करना है, खासकर जब वे स्नान करने में असमर्थ हों।

🎯 Exam Tip: स्पंज के प्राथमिक उद्देश्य (शरीर की सफाई) और उपयोग की स्थिति (जब स्नान सम्भव न हो) को स्पष्ट करें।

 

Question 2. स्पंज करने से क्या लाभ हैं?
Answer: सामान्य रूप से स्पंज द्वारा शरीर की सफाई की जाती है। यदि तीव्र ज्वर हो, तो ठण्डे पानी से स्पंज करके ज्वर को नियन्त्रित किया जाता है।
In simple words: स्पंज से शरीर साफ रहता है और तीव्र बुखार होने पर ठण्डे पानी के स्पंज से शरीर का तापमान नियंत्रित होता है।

🎯 Exam Tip: स्पंज के दो मुख्य लाभों- शारीरिक स्वच्छता और बुखार नियंत्रण- पर ध्यान दें।

 

Question 3. गर्म सेंक क्या है? यह कब दी जाती है? इसकी क्या उपयोगिता है?
Answer: शरीर के किसी कष्ट के निवारण के लिए सम्बन्धित अंग को ताप प्रदान करना ही गर्म सेंक कहलाता है। वात रोग, पेट दर्द, गले में दर्द तथा दाँत में दर्द के निवारण में गर्म सेक उपयोगी होता है। इसके अतिरिक्त गुम चोट, मोच, सूजन तथा फोड़े-फुन्सी को पकाने में भी गर्म सेंक उपयोगी है।
In simple words: गर्म सेंक शरीर के किसी अंग को गर्मी पहुँचाकर दर्द, सूजन या अकड़न को कम करने के लिए दी जाती है, जैसे वात रोग, पेट दर्द या चोट लगने पर।

🎯 Exam Tip: गर्म सेंक की परिभाषा, इसके उपयोग का समय और विभिन्न चिकित्सीय उपयोगिताएँ बताएँ।

 

Question 4. गर्म सेंक की विभिन्न विधियाँ बताइए ।
या
गर्म सेंक की दो विधियों का नाम लिखिए।

Answer: गर्म सेंक की मुख्य विधियाँ हैं-शुष्क गर्म सेंक, पुल्टिस बाँधना, गर्म पानी की बोतल का प्रयोग करना, बफारा लेना तथा गरारे करना ।
In simple words: गर्म सेंक की मुख्य विधियों में शुष्क सेंक, पुल्टिस, गर्म पानी की बोतल, बफारा और गरारे शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: गर्म सेंक की प्रमुख विधियों को सूचीबद्ध करना ही पर्याप्त है।

 

Question 5. गरारा करने के लिए पानी में क्या विशेषताएँ होनी च.हिए?
Answer: गरारा करने का पानी गर्म होना चाहिए तथा इसमें नमक या फिटकरी अथवा लाल दवा मिलाना प्रभावकारी रहता है।
In simple words: गरारा करने के लिए पानी गर्म होना चाहिए और उसमें नमक, फिटकरी या लाल दवा जैसी चीजें मिली हों तो अधिक प्रभावी होता है।

🎯 Exam Tip: गरारे के पानी के आवश्यक गुणों (गर्म होना) और उसमें मिलाई जाने वाली सहायक सामग्री का उल्लेख करें।

 

Question 6. गरारा करने से क्या लाभ हैं?
Answer: गरारा करने से गले में दर्द;-टॉन्सिल्स व जुकाम में लाभ होता है।
In simple words: गरारा करने से गले का दर्द, टॉन्सिल्स और जुकाम जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

🎯 Exam Tip: गरारा करने के प्राथमिक लाभों- गले के दर्द, टॉन्सिल्स और जुकाम में राहत- को बताएँ।

 

Question 7. जलन में आराम पहुँचाने वाली औषधियाँ कौन-सी है।
Answer: जलन दूर करने में प्रयुक्त होने वाली सामान्य औषधियाँ हैं
1. आयोडीन,
2. राई का पत्ता,
3. राई का पलस्तर तथा
4. मरहम
In simple words: जलन में आराम देने वाली सामान्य औषधियाँ आयोडीन, राई का पत्ता, राई का पलस्तर और मरहम हैं।

🎯 Exam Tip: जलन में उपयोग होने वाली कुछ प्रमुख औषधियों के नाम बताएँ।

 

Question 8. पुल्टिस की उपयोगिता लिखिए। या पुल्टिस का प्रयोग कब किया जाता है?
Answer: शरीर के किसी अंग को गरम सेंक देने के लिए पुल्टिस का प्रयोग किया जाता है। पुल्टिस बाँधने से दर्द में आराम मिलता है, सूजन घटती है तथा फोड़े-फुन्सी शीघ्र पक जाते हैं एवं मवाद निकल जाती है।
In simple words: पुल्टिस का उपयोग शरीर के किसी अंग को गर्म सेंक देने के लिए किया जाता है, जिससे दर्द में आराम मिलता है, सूजन कम होती है और फोड़े-फुन्सियों को पकने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: पुल्टिस के मुख्य उपयोग- दर्द निवारण, सूजन घटाना और फोड़े-फुन्सी पकाना- पर प्रकाश डालें।

 

Question 9. पुल्टिस बनाने के लिए सामान्यतः किन-किन वस्तुओं को उपयोग में लाया जाता है?
Answer: पुल्टिस बनाने के लिए प्रायः आटा, अलसी, राई, प्याज, सरसों का तेल, नमक व गर्म पानी इत्यादि वस्तुएँ काम में लाई जाती हैं।
In simple words: पुल्टिस बनाने के लिए आमतौर पर आटा, अलसी, राई, प्याज, सरसों का तेल, नमक और गर्म पानी जैसी सामग्री का इस्तेमाल होता है।

🎯 Exam Tip: पुल्टिस बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामान्य सामग्रियों की सूची प्रदान करें।

 

Question 10. बफारे का प्रयोग कब किया जाता है?
Answer: बफारे का प्रयोग प्रायः गले में सूजन, दर्द, टॉन्सिल्स व श्वास मार्ग में बलगम जमा होने तथा गठिया आदि रोग में किया जाता है।
In simple words: बफारे का उपयोग गले में सूजन, दर्द, टॉन्सिल्स, श्वसन मार्ग में बलगम और गठिया जैसी समस्याओं में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बफारे के उपयोग के मुख्य संकेत (गले की समस्याएँ, बलगम, गठिया) को बताएँ।

 

Question 11. बर्फ की टोपी व गर्म पानी की बोतल किस पदार्थ की बनी होती हैं?
Answer: ये दोनों वस्तुएँ प्रायः रबर की बनी होती हैं।
In simple words: बर्फ की टोपी और गर्म पानी की बोतलें आमतौर पर रबर से बनी होती हैं।

🎯 Exam Tip: बर्फ की टोपी और गर्म पानी की बोतल के निर्माण सामग्री (रबर) का उल्लेख करें।

 

Question 12. ठण्डी सेंक कब दी जाती है?
या
ठण्डी सेंक कब दी जाती है? ठण्डी सेंक देने की विधियाँ भी बताइए ।

Answer: (1) तीव्र ज्वर की अवस्था में शरीर का तापमान सामान्य करने के ध्येय से । (2) आन्तरिक रक्तस्राव को रोकने के लिए तथा माथे व सिर को ठण्डक पहुँचाने के लिए। ठण्डी सेंक देने की विधियाँ-ठण्डा स्पंज, ठण्डी पट्टी और बर्फ की थैली ।
In simple words: ठण्डी सेंक तीव्र बुखार में शरीर का तापमान सामान्य करने, आंतरिक रक्तस्राव को रोकने और सिर या माथे पर ठण्डक पहुँचाने के लिए दी जाती है, जिसकी विधियों में ठण्डा स्पंज, ठण्डी पट्टी और बर्फ की थैली शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: ठण्डी सेंक के उपयोग के कारण (बुखार, रक्तस्राव, ठण्डक) और इसकी विधियों को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 13. बर्फ की टोपी का प्रयोग कब किया जाता है?
Answer: तीव्र ज्वर की अवस्था में रुधिर का बहाव रोकने के लिए तथा सिर में चोट लगने के समय बर्फ की टोपी का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: बर्फ की टोपी का उपयोग तीव्र बुखार में और सिर में चोट लगने पर खून के बहाव को रोकने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बर्फ की टोपी के दो मुख्य उपयोग- तीव्र ज्वर और रक्तस्राव नियंत्रण- को हाइलाइट करें।

 

Question 14. रिंग कुशन क्या है? इसकी उपयोगिता लिखिए।
या
रिंग कुशन का प्रयोग कब करते हैं?
या
रिंग कुशन का प्रयोग कब और कैसे करते हैं?

Answer: रिंग कुशन का प्रयोग शैय्याघाव की दशा में करते हैं। घाव वाले स्थान पर हवा भरकर रिंग कुशन रखते हैं। इससे घाव को बिस्तर की रगड़ नहीं लगती तथा वह धीरे-धीरे ठीक हो जाता है।
In simple words: रिंग कुशन एक हवा भरा तकिया होता है जिसका उपयोग शैय्याघाव (बेडसोर) वाले मरीजों के लिए किया जाता है, ताकि प्रभावित क्षेत्र को बिस्तर के दबाव और रगड़ से बचाकर घाव को ठीक होने में मदद मिले।

🎯 Exam Tip: रिंग कुशन की परिभाषा, इसका उपयोग (शैय्याघाव) और कार्यप्रणाली (दबाव कम करना) का वर्णन करें।

 

Question 15. ठण्डी और गर्म सेंक में अन्तर लिखिए।
Answer: ठण्डी सेंक मुख्य रूप से रक्त-स्राव को रोकने, सूजन एवं दर्द को घटाने तथा तेज बुखार को कम करने में दी जाती है। जबकि गर्म सेंक वात रोग, पेट, गले, दाँत आदि के दर्द तथा रोग में दी जाती है। ठण्डी सेंक में बर्फ की थैली जबकि गर्म सेंक में रबड़ की बोतल में गर्म पानी का प्रयोग किया जाता है।
In simple words: ठण्डी सेंक का उपयोग रक्तस्राव रोकने, सूजन घटाने और बुखार कम करने के लिए किया जाता है (जैसे बर्फ की थैली), जबकि गर्म सेंक दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और वात रोग जैसी स्थितियों में आराम पहुँचाने के लिए होती है (जैसे गर्म पानी की बोतल)।

🎯 Exam Tip: ठण्डी और गर्म सेंक के प्रमुख उपयोगों और प्रयोग की सामग्रियों के बीच अन्तर स्पष्ट करें।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

 

Question 1. तीव्र ज्वर की अवस्था में रोगी को लाभप्रद रहती है (क) ठण्डी सेक (ख) गर्म सेक (ग) बफारा (घ) पुल्टिस
Answer: (क) ठण्डी सेक
In simple words: तीव्र बुखार में रोगी के शरीर का तापमान कम करने के लिए ठण्डी सेंक फायदेमंद होती है।

🎯 Exam Tip: तीव्र ज्वर में शरीर का तापमान घटाने के लिए ठण्डी सेंक ही उपयुक्त होती है।

 

Question 2. बर्फ की टोपी का प्रयोग किया जाता है (क) तीव्र ज्वर में (ख) तीव्र दर्द में (ग) अधिक रक्त दाब में (घ) चाहे जब
Answer: (क) तीव्र ज्वर में
In simple words: बर्फ की टोपी का उपयोग तीव्र बुखार में शरीर को ठंडा करने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बर्फ की टोपी का मुख्य उपयोग तीव्र ज्वर और स्थानीय रक्तस्राव को नियंत्रित करना है।

 

Question 3. बर्फ की टोपी में बर्फ को अधिक समय तक न पिघलने देने के लिए प्रयोग करते हैं (क) नमक (ख) सिरका (ग) कपड़ा (घ) लाल दवा
Answer: (क) नमक
In simple words: बर्फ की टोपी में थोड़ा नमक मिलाने से बर्फ देर तक नहीं पिघलती है।

🎯 Exam Tip: बर्फ को देर तक जमाए रखने के लिए नमक एक सामान्य और प्रभावी उपाय है।

 

Question 4. सेंक करने से क्या लाभ होता है? (क) ज्वर घटता है (ख) सूजन घटती है (ग) ठण्डक पहुँचती है (घ) कोई लाभ नहीं होता
Answer: (ख) सूजन घटती है
In simple words: सेंक, चाहे गर्म हो या ठण्डी, सूजन को कम करने में सहायक होती है।

🎯 Exam Tip: सेंक का एक प्रमुख और सार्वभौमिक लाभ सूजन को कम करना है।

 

Question 5. आन्तरिक रक्तस्राव में रोगी को क्या देते हैं? (क) गर्म सेंक (ख) ठण्डी सेंक (ग) बफारा (घ) ये तीनों
Answer: (ख) ठण्डी सेंक
In simple words: आंतरिक रक्तस्राव को रोकने के लिए ठण्डी सेंक का प्रयोग किया जाता है क्योंकि ठण्ड रक्त वाहिकाओं को संकुचित करती है।

🎯 Exam Tip: आन्तरिक रक्तस्राव में ठण्डी सेंक ही उपयुक्त है क्योंकि यह रक्तवाहिकाओं को संकुचित कर रक्तस्राव कम करती है।

 

Question 6. पुल्टिस लगाने से क्या लाभ होता है? (क) दर्द को कम करता है (ख) सूजन बढ़ाता है (ग) ठण्डक पहुँचाता है (घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) दर्द को कम करता है
In simple words: पुल्टिस लगाने से दर्द में राहत मिलती है और यह सूजन को भी कम करने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: पुल्टिस का प्राथमिक लाभ दर्द निवारण है, साथ ही यह सूजन भी घटाती है।

 

Question 7. गुम चोट का दर्द कम करने के लिए बाँधी जाती है (क) पट्टी (ख) पुल्टिस (ग) ठण्डी पट्टी (घ) मोटा कपड़ा
Answer: (ख) पुल्टिस
In simple words: गुम चोट के दर्द को कम करने के लिए पुल्टिस बाँधना प्रभावी होता है।

🎯 Exam Tip: गुम चोट और मोच में दर्द तथा सूजन कम करने के लिए पुल्टिस का प्रयोग किया जाता है।

 

Question 8. गर्म सेंक किन अवस्थाओं में दी जाती है ? (क) तीव्र दर्द में (ख) तीव्र ज्वर में (ग) स्पंज करते समय (घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) तीव्र दर्द में
In simple words: गर्म सेंक मुख्य रूप से तीव्र दर्द को कम करने और मांसपेशियों को आराम देने के लिए दी जाती है।

🎯 Exam Tip: गर्म सेंक का मुख्य उपयोग दर्द, सूजन और अकड़न को दूर करना है।

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