UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 20 Natural and Artificial Respiration

NCERT Solutions for Class 10 Home Science: Chapter 20 प्राकृतिक और कृत्रिम श्वसन

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Practice Class 10 Home Science Solutions: Chapter 20 प्राकृतिक और कृत्रिम श्वसन

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कृत्रिम श्वसन का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसके लिए अपनाई जाने वाली मुख्य विधियों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।
या
कृत्रिम श्वसन किसे कहते हैं? यह कब और कितने प्रकार से दी जाती है?
या
कृत्रिम श्वसन के लिए अपनाई जाने वाली शेफर्स सिल्वेस्टर तथा लाबार्ड विधियों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।
या
प्राकृतिक और कृत्रिम श्वसन से क्या तात्पर्य है ? कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता कब होती है? कृत्रिम श्वसन की किसी एक विधि का वर्णन कीजिए।
या
डूबने पर किस कृत्रिम विधि का प्रयोग करते हैं ? इस विधि का वर्णन कीजिए।
या
कृत्रिम श्वसन किसे कहते हैं ? शेफर्स विधि क्या है ?
या
कृत्रिम श्वसन से आप क्या समझते हैं ? किसी एक कृत्रिम श्वसन विधि का वर्णन कीजिए।
या
लाबार्ड विधि क्या है?
Answer:

प्राकृतिक श्वसन का अर्थ

प्राकृतिक श्वसन की क्रिया मनुष्य के शरीर में सदैव तथा प्रति क्षण होती रहती है। यह स्वतः एक अनैच्छिक क्रिया के रूप में होती रहती है। यह स्वतः ही पसलियों तथा तन्तु पट की क्रिया पर निर्भर करती है और व्यक्ति की स्वयं मांसपेशियों द्वारा सम्पादित होने वाली क्रिया है। यह प्राकृतिक रूप से होने के कारण सदैव एक ही विधि के द्वारा होने वाली क्रिया है।

कृत्रिम श्वसन का अर्थ

किसी कारणवश यदि फेफड़ों में स्वच्छ एवं ताजा वायु का आना-जाना कम या बन्द हो जाए, तो दुम घुटने की स्थिति आ सकती है। ऐसे में शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन की आवश्यकता पूर्ति न हो पाने के कारण व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। इस स्थिति में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जीवन रक्षा के लिए उसके फेफड़ों में किसी कृत्रिम-विधि द्वारा स्वच्छ तथा ताजी ऑक्सीजन युक्त वायु को भरा जाना अनिवार्य हो जाता है। इस क्रिया को ही प्राथमिक चिकित्सा की भाषा में कृत्रिम श्वसन-क्रिया कहा जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि किसी अन्य व्यक्ति के प्रयासों द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की श्वसन-क्रिया को चलाना ही कृत्रिम श्वसन-क्रिया है। कृत्रिम श्वसन की क्रिया प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति अथवा चिकित्सक की इच्छा एवं प्रयासों पर निर्भर करती है।

कृत्रिम श्वसन की विधियाँ

कृत्रिम श्वसन-क्रिया के लिए सामान्य रूप से तीन विधियों को अपनाया जाता है, जिनका विवरण अग्रलिखित है

(1) शेफर्स विधि (Shaffer's Method):

इस विधि में जिस व्यक्ति को कृत्रिम श्वसन देना हात हे सर्वप्रथम उसके वस्त्र उतार दिये जाते हैं। यदि यह सम्भव न हो तो कम-से-कम उसके वक्षस्थल के वस्त्र उतार देने चाहिए। यदि किसी कारणवश यह भी सम्भव नै हो, तो उन्हें इतना ढीला कर दिया जाना चाहिए कि वक्षीय कटहरे पर किसी प्रकार का दबाव न रहे। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी चाहिए
1. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पेट को आधार मानकर लिटाना चाहिए तथा मुँह को एक ओर कर देना चाहिए। टाँगों आदि को पूरी तरह फैलाकर रखना चाहिए।
2. नाक, मुँह इत्यादि को अच्छी तरह साफ कर देना चाहिए, ताकि श्वास भली-भाँति आ सके । प्राथमिक चिकित्सा या उपचार करने वाले व्यक्ति को रोगी के एक ओर उसके पार्श्व में, कमर के पास अपने घुटने भूमि पर टिकाकर, पैरों को थोड़ा-सा रोगी की टाँगों के साथ कोण बनाते हुए, बैठ जाना चाहिए। इसके बाद रोगी की पीठ पर अपने दोनों हाथों को फैलाकर इस प्रकार रखना चाहिए कि दोनों हाथों के अँगूठे रीढ़ की हड्डी के ऊपर समान्तर रूप में सिर की ओर मिलाकर रखें। ध्यान रखना चाहिए कि इस समय उँगलियाँ फैली हुई, अँगूठे के लगभग 90° के कोण पर रोगी की कमर पर रहें। चिकित्सक को अपने हाथ रोगी की पसलियों के पीछे रखने चाहिए ।
3. अब दोनों हाथों को पूरी तरह जमाते हुए, बिना कोहनी को मोड़े, चिकित्सक को आगे की ओर झुकना चाहिए । इस समय चिकित्सक को वजन घुटने तथा हाथ पर रहेगा। इससे रोगी के पेट पर दबाव पड़ेगा तथा इस क्रिया से वक्षीय गुहा फैल जाएगी और फेफड़ों में उपस्थित वायु दबाव के कारण बाहर निकल जाएगी। यदि रोगी के फेफड़ों में पानी भर गया है, तो वह भी इस क्रिया से बाहर निकल जाएगा।
4. चिकित्सक को अपना हाथ यथा-स्थान रखकर धीरे-धीरे झुकाव कम करना चाहिए, यहाँ तक कि बिल्कुल दबाव न रहे। इस क्रिया से वक्षीय गुहा पूर्व-स्थिति में आ जाएगी और फेफड़ों में वायु का दबाव कम होने से वायुमण्डल की वायु स्वतः ही अन्दर आ जाएगी ।
5. इस प्रकार दबाव डालने और हटाने की प्रक्रिया को 1 मिनट में 12 से 13 बार शनैः शनैः मिक रूप से दोहराते रहना चाहिए। निश्चय ही क्रिया को सावधानीपूर्वक एक बराबर समय देकर तथा धीरे-धीरे करें । स्वतः प्राकृतिक श्वसन, अपनी सामान्य स्थिति में होने लगेगा।

सावधानियाँ:


1. वक्ष पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए; जैसे-कपड़ा इत्यादि का कसाव आदि ।
2. गर्दन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए।
3. नाक, मुंह आदि भली-भाँति साफ कर लिये जाने चाहिए। दबाव डालने और दबाव कम करने की क्रिया लगातार और एक बराबर क्रम से होनी चाहिए।
4. प्राकृतिक श्वसन प्रारम्भ हो जाने पर भी कुछ समय तक रोगी को देखते रहना चाहिए, ताकि फिर से उसका दम न घुटने लगे ।

(2) सिल्वेस्टर विधि (Silvester's Method):

कृत्रिम श्वास देने की इस विधि में रोगी को किसी समतल स्थान पर सीधा लिटाया जाता है। उसके वस्त्रों को ढीला करके, गर्दन के पीछे कन्धों के बीच में कोई तकिया इत्यादि लगाया जाता है, ताकि सिर पीछे को नीचा हो जाए। इस विधि से रोगी को श्वसन कराने के लिए दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र सिल्वेस्टर विधि द्वारा दो व्यक्तियों की सहायता से कृत्रिम श्वसन देने की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें एक व्यक्ति रोगी के सिर की ओर बैठकर उसके हाथों को नियंत्रित करता है, जबकि दूसरा व्यक्ति रोगी की जीभ को बाहर खींचकर वायुमार्ग को खुला रखता है। पहला व्यक्ति रोगी के हाथों को छाती की ओर ले जाकर दबाव डालता है और फिर उन्हें वापस खींचकर श्वसन क्रिया को उत्तेजित करता है।

सावधानियाँ:


1. रोगी की जीभ को कसकर पकड़ना चाहिए ।
2. जिस क्रम से चिकित्सक ऊपर उठे, उसी क्रम से नीचे बैठे अर्थात् दबाव डालने और दबाव कम करने की प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए ।
3. रोगी को किसी समतल स्थान पर लिटाना चाहिए तथा उसके वस्त्र इत्यादि ढीले कर देने चाहिए, ताकि वक्ष पर किसी प्रकार का दबाव न रहे।

(3) लाबार्ड विधि (Labard's Method):

शेफर्स और सिल्वेस्टर विधियों द्वारा श्वास देना यदि सम्भव न हो, तो इस विधि का प्रयोग किया जाता है; जैसे-वक्ष-स्थल की कोई हड्डी इत्यादि टूटने पर डॉक्टर के आने तक इस विधि द्वारा रोगी को ऑक्सीजन उपलब्ध कराकर जीवित रखा जा सकता है। यह विधि निम्नलिखित है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र लाबार्ड विधि द्वारा कृत्रिम श्वसन देने की स्थिति को दर्शाता है। इसमें दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को एक करवट पर लिटाया जाता है और प्राथमिक उपचारक उसके समीप बैठकर रोगी की नाक, मुँह आदि को साफ करता है। रोगी की जीभ को पकड़कर बाहर खींचकर कुछ समय के लिए छोड़ा जाता है ताकि वायुमार्ग खुला रहे, और यह क्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक प्राकृतिक श्वसन प्रारम्भ न हो जाए।
In simple words: कृत्रिम श्वसन वह क्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के साँस लेने में दिक्कत होने पर बाहरी तरीके से उसके फेफड़ों में हवा भरी जाती है, ताकि वह जीवित रह सके। यह तब आवश्यक होता है जब प्राकृतिक श्वसन रुक जाता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में कृत्रिम श्वसन की परिभाषा, आवश्यकता और प्रमुख विधियों का विस्तृत वर्णन करना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक विधि के चरण और सावधानियों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्राकृतिक और कृत्रिम श्वसन-क्रिया में क्या अन्तर है?
या
प्राकृतिक श्वसन और कृत्रिम श्वसने के बारे में लिखिए ।
Answer:

प्राकृतिक तथा कृत्रिम श्वसन-क्रिया में अन्तर

क्र०सं०प्राकृतिक श्वसन-क्रियाकृत्रिम श्वसन-क्रिया
1.यह क्रिया सदैव तथा प्रति क्षण आजीवन होती रहती है।यह क्रिया प्राकृतिक श्वसन में विघ्न पड़ने पर ही की जाती है तथा सीमित समय के लिए ही होती है।
2.यह स्वतः एक अनैच्छिक क्रिया के रूप में होती रहती है।यह आवश्यकता पड़ने पर दूसरे व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करती है।
3.यह स्वतः ही पसलियों तथा तन्तु पट की क्रिया पर निर्भर करती है और व्यक्ति की स्वयं मांसपेशियों द्वारा सम्पादित होने वाली क्रिया है।यह सदैव अन्य व्यक्तियों के द्वारा कराई जाने वाली क्रिया है तथा दूसरे व्यक्तियों को इसमें श्रम करना होता है। उन्हीं के द्वारा यह क्रिया सम्पादित होती है।
4.यह सदैव एक ही विधि के द्वारा होने वाली क्रिया है।यह रोगी की स्थिति एवं आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग विधियों से की जाने वाली क्रिया है।

In simple words: प्राकृतिक श्वसन अपने आप होने वाली सांस लेने की प्रक्रिया है, जबकि कृत्रिम श्वसन किसी व्यक्ति को बाहरी मदद से सांस दिलाने की क्रिया है जब वह खुद सांस नहीं ले पाता।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और कृत्रिम श्वसन के बीच के अंतर को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें। तालिका का उपयोग करने से उत्तर अधिक व्यवस्थित और समझने में आसान हो जाता है।

 

Question 2. दम घुटने के कारण तथा उपचार बताइए ।
Answer: दम घुटने के कारण श्वसन-क्रिया में व्यवधान उत्पन्न होने पर दम घुटने लगता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. पानी में डूबने पर श्वसन मार्ग में जल घुस जाने के कारण दम घुट सकता है।
2. किसी विषैली गैस के श्वसन मार्ग तथा फेफड़ों में भर जाना भी दम घुटने का कारण बन सकता है।
3. किसी वस्तु के नासा मार्ग में अटक जाने पर भी दम घुटने की स्थिति बन जाती है।
4. गले में सूजन या अन्य किसी रोग के कारण भी दम घुटने की स्थिति बन जाती है।
5. श्वास नली पर अधिक दबाव पड़ने पर जैसे कि फाँसी लगने पर दम घुट जाता है।
6. श्वास नियन्त्रण केन्द्र पर किसी विषैले या हानिकारक प्रभाव पड़ने पर भी दम घुटने लगता है। उदाहरण-विष खाना, बिजली का झटका लगना आदि ।

दम घुटने के उपचारः

दम घुटने के उपचार निम्ननिखित हैं।
1. दुर्घटना के कारण को दूर करना।
2. यदि डूबने के कारण पेट में पानी भर गया हो तो उसे निकाल देना चाहिए।
3. यदि कोई वस्तु श्वसन मार्ग में रुकावट उत्पन्न कर रही है तो उसे निकाल देना चाहिए।
4. किसी उपयुक्त विधि द्वारा पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम श्वसने देना चाहिए।
In simple words: दम घुटने का मतलब है जब सांस लेने में रुकावट आती है, जिससे ऑक्सीजन शरीर तक नहीं पहुँच पाती। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे पानी में डूबना या विषैली गैस। इसका उपचार कारण को हटाकर कृत्रिम श्वसन देना है।

🎯 Exam Tip: दम घुटने के विभिन्न कारणों और उनके तत्काल उपचारों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें। कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता को उजागर करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. कृत्रिम श्वसन-क्रिया की हमारे जीवन में कब और क्यों आवश्यकता होती है?
Answer: विभिन्न परिस्थितियों में जबकि किसी व्यक्ति का दम घुट रहा हो अथवा अचानक श्वसन-क्रिया रुक जाए (रेस्पिरेटरी अरेस्ट) तो कृत्रिम श्वसन कराना अति आवश्यक होता है। इन परिस्थितियों के कारण सामान्यतः निम्नलिखित होते हैं
1. वक्ष-स्थल की हड्डी अथवा हड्डियों का टूट जाना।
2. पानी में डूबने के कारण श्वसन मार्ग में जल का प्रवेश कर जाना।
3. किसी विषैली गैस को श्वसन मार्ग एवं फेफड़ों में भर जाना ।
4. श्वास नली पर अत्यधिक दबाव पड़ना।
In simple words: कृत्रिम श्वसन की जरूरत तब पड़ती है जब कोई व्यक्ति खुद से सांस नहीं ले पा रहा होता है, जैसे किसी दुर्घटना, जहर या डूबने के कारण, जिससे उसके फेफड़ों में हवा का आना-जाना रुक जाता है।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता को विभिन्न आपातकालीन स्थितियों से जोड़कर समझाएं। उन मुख्य कारणों को सूचीबद्ध करें जो इस क्रिया को आवश्यक बनाते हैं।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता कब होती है?
Answer: किसी कारण विशेष से यदि व्यक्ति के फेफड़े कार्य करना बन्द कर दें, तो व्यक्ति की प्राकृतिक श्वसन-क्रिया अवरुद्ध होने लगती है तथा दम घुटने लगता है। इस स्थिति में तत्काल कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता होती है।
In simple words: कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता तब होती है जब कोई व्यक्ति किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से साँस नहीं ले पाता और उसका दम घुटने लगता है, ताकि उसे तत्काल जीवन बचाया जा सके।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर सीधा और सटीक होना चाहिए। मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें कि कब तत्काल कृत्रिम श्वसन आवश्यक हो जाता है।

 

Question 2. कृत्रिम श्वसन की कितनी विधियाँ हैं?
Answer: कृत्रिम श्वसन की निम्नलिखित तीन विधियाँ हैं
1. शेफर्स विधि,
2. सिल्वेस्टर विधि तथा
3. लाबार्ड विधि ।
In simple words: कृत्रिम श्वसन के तीन मुख्य तरीके हैं - शेफर्स विधि, सिल्वेस्टर विधि और लाबार्ड विधि, जिनका उपयोग स्थिति के अनुसार किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम श्वसन की प्रमुख विधियों के नाम सही वर्तनी के साथ सूचीबद्ध करें।

 

Question 3. कृत्रिम श्वसन-क्रिया कराने की दर क्या होनी चाहिए?
Answer: कृत्रिम श्वसन कराते समय श्वसन-क्रिया की दर प्रति मिनट 12 से 13 बार तक होनी चाहिए।
In simple words: कृत्रिम श्वसन देते समय, सांस दिलाने की दर प्रति मिनट 12 से 13 बार होनी चाहिए, जिससे प्राकृतिक श्वसन दर की नकल हो सके।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रिया की सही दर का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रभावी पुनर्जीवन के लिए आवश्यक है।

 

Question 4. डूबे हुए व्यक्ति के साथ सर्वप्रथम क्या करना चाहिए?
Answer: सर्वप्रथम डूबे हुए व्यक्ति का पेट एवं फेफड़ों में भरा हुआ पानी बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए।
In simple words: डूबे हुए व्यक्ति को सबसे पहले उसके पेट और फेफड़ों से पानी निकालने का प्रयास करना चाहिए, ताकि श्वसन मार्ग साफ हो सके।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक उपचार के चरणों को सही क्रम में बताना महत्वपूर्ण है, जिसमें जल निकासी सबसे पहला कदम है।

 

Question 5. लाबार्ड विधि कब प्रयोग में लानी चाहिए?
Answer: वक्षःस्थल की कोई हड्डी टूटने पर कृत्रिम श्वसन के लिए लाबार्ड विधि अपनानी चाहिए।
In simple words: लाबार्ड विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब वक्ष-स्थल की हड्डी टूटी हो और अन्य विधियाँ अनुपयोगी हों, ताकि रोगी को ऑक्सीजन मिल सके।

🎯 Exam Tip: लाबार्ड विधि की विशिष्ट उपयोगिता (जैसे वक्ष-स्थल की हड्डी टूटने पर) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 6. लाबार्ड विधि का प्रयोग करते समय आप क्या सावधानी रखेंगी?
Answer: लाबार्ड विधि में विशेष रूप से यह ध्यान रखा जाता है कि रोगी की जीभ दाँतों के बीच में आकर कट न जाए।
In simple words: लाबार्ड विधि का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि रोगी की जीभ दाँतों के बीच में न आए और कटे नहीं, जिससे श्वसन मार्ग बाधित न हो।

🎯 Exam Tip: लाबार्ड विधि की एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण सावधानी पर ध्यान दें, विशेषकर जीभ के प्रबंधन पर।

 

Question 7. सिल्वेस्टर विधि में रोगी को किस प्रकार लिटाया जाता है?
Answer: सिल्वेस्टर विधि में रोगी को किसी समतल स्थान पर सीधा लिटाया जाता है।
In simple words: सिल्वेस्टर विधि में रोगी को एक समतल सतह पर सीधा पीठ के बल लिटाया जाता है, जिससे श्वसन क्रिया को आसानी से नियंत्रित किया जा सके।

🎯 Exam Tip: सिल्वेस्टर विधि में रोगी की सही स्थिति (सीधा, पीठ के बल) का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 8. शेफर्स विधि में रोगी को किस आसन पर लिटाया जाता है?
Answer: शेफर्स विधि में रोगी के पेट को आधार मानकर लिटाना चाहिए। रोगी के मुँह को एक ओर कर उसके हाथों व टाँगों को पूरी तरह फैला देना चाहिए।
In simple words: शेफर्स विधि में रोगी को पेट के बल लिटाया जाता है और उसके मुँह को एक तरफ करके हाथों व टाँगों को फैला दिया जाता है, जिससे श्वसन क्रिया आसान हो।

🎯 Exam Tip: शेफर्स विधि में रोगी की सही स्थिति (पेट के बल) और शारीरिक मुद्रा का वर्णन करें।

 

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्पों का चुनाव कीजिए

 

Question 1. शेफर्स विधि द्वारा कृत्रिम श्वसन कराते समय रोगी को लिटाना चाहिए
(क) कमर के बल
(ख) पीठ के बल
(ग) पेट के बल
(घ) किसी भी प्रकार से
Answer: (ग) पेट के बल
In simple words: शेफर्स विधि में रोगी को पेट के बल लिटाकर कृत्रिम श्वसन दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक विधि में रोगी को लिटाने की सही स्थिति याद रखें।

 

Question 2. डूबे हुए व्यक्ति को कृत्रिम श्वसन दिलाने के लिए कौन-सी विधि उत्तम रहती है?
(क) शेफर्स विधि
(ख) सिल्वेस्टर विधि
(ग) लाबार्ड विधि
(घ) मुँह-से-मुँह के द्वारा
Answer: (क) शेफर्स विधि
In simple words: डूबे हुए व्यक्ति के फेफड़ों से पानी निकालने और श्वसन दिलाने के लिए शेफर्स विधि आमतौर पर उत्तम मानी जाती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न आपातकालीन स्थितियों के लिए उपयुक्त कृत्रिम श्वसन विधियों को जानें।

 

Question 3. सिल्वेस्टर विधि से कृत्रिम श्वसन देने के लिए कितने व्यक्तियों की आवश्यकता होती है?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
Answer: (ख) दो
In simple words: सिल्वेस्टर विधि में प्रभावी रूप से कृत्रिम श्वसन देने के लिए कम से कम दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक विधि में आवश्यक व्यक्तियों की संख्या को ध्यान में रखें।

 

Question 4. सिल्वेस्टर विधि में रोगी को लिटाया जाता है
(क) पेट के बल
(ख) उल्टा
(ग) पीठ के बल
(घ) किसी भी प्रकार से
Answer: (ग) पीठ के बल
In simple words: सिल्वेस्टर विधि में रोगी को पीठ के बल सीधा लिटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कृत्रिम श्वसन विधियों में रोगी की शारीरिक स्थिति का सही ज्ञान महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. कृत्रिम विधि से साँस कब दिलाई जाती है?
(क) जेल में डूबने पर
(ख) फाँसी लगाने पर
(ग) दम घुटने पर
(घ) तीनों अवस्थाओं में
Answer: (घ) तीनों अवस्थाओं में
In simple words: कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता तब होती है जब व्यक्ति पानी में डूबने, फाँसी लगने या किसी अन्य कारण से दम घुटने लगता है।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता से जुड़ी सभी संभावित स्थितियों को समझें।

 

Question 6. कृत्रिम श्वसन की क्रिया प्रारम्भ करने से पूर्व साफ कर लेने चाहिए
(क) आँखें
(ख) कान
(ग) नाक तथा मुँह
(घ) हाथ-पैर
Answer: (ग) नाक तथा मुँह
In simple words: कृत्रिम श्वसन शुरू करने से पहले रोगी के नाक और मुँह को साफ करना बहुत जरूरी है ताकि वायुमार्ग में कोई रुकावट न रहे।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक उपचार के पूर्व-आवश्यक कदमों पर ध्यान दें, विशेषकर वायुमार्ग को साफ रखने पर।

 

Question 7. कृत्रिम श्वसन की सबसे असुविधाजनक विधि है
(क) सिल्वेस्टर विधि
(ख) शेफर्स विधि
(ग) लाबार्ड विधि
(घ) कोई भी नहीं
Answer: (ग) लाबार्ड विधि
In simple words: लाबार्ड विधि को अक्सर सबसे असुविधाजनक माना जाता है क्योंकि इसमें रोगी की जीभ को संभालना पड़ता है और यह अधिक सावधानी की मांग करती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न विधियों की विशेषताओं और उनकी सीमाओं को जानें।

 

Question 8. सिल्वेस्टर विधि का प्रयोग होता है।
(क) डूबने पर
(ख) मूर्च्छित होने पर
(ग) अस्थिभंग में
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (घ) इनमें से कोई नहीं
In simple words: सिल्वेस्टर विधि का उपयोग विभिन्न स्थितियों में किया जा सकता है, लेकिन दिए गए विकल्पों में से कोई भी एक विशिष्ट उपयोग नहीं दर्शाता है जो इसे अन्य विधियों से अलग करे, इसलिए 'इनमें से कोई नहीं' सही है।

🎯 Exam Tip: सिल्वेस्टर विधि के प्रयोग की सामान्य परिस्थितियों को समझें, विशेषकर जब रोगी पीठ के बल लिटाया जा सके।

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