UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 Elementry Knowledge of Respiratory System

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 10 Home Science. Our expert-created answers for Class 10 Home Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान UP Board Solutions for Class 10 Home Science

For Class 10 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Home Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान solutions will improve your exam performance.

Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान UP Board Solutions PDF

विस्तृत उतरीय प्रश्न

 

Question 1. श्वसन तन्त्र के कौन-कौन से अंग हैं? नामांकित चित्र सहित स्पष्ट कीजिए ।
या
श्वसन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए। या श्वासोच्छ्वास क्रिया क्या है? श्वासोच्छ्वास क्रिया में भाग लेने वाले अंगों का वर्णन कीजिए ।
या
श्वसन तन्त्र के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।
Answer:
श्वसन तन्त्र का तात्पर्य
जीवित प्राणियों द्वारा बाहर से वायु ग्रहण करना तथा पुनः वायु को छोड़ना श्वसन या श्वासोच्छवास क्रिया कहलाती है। गैसों का आदान-प्रदान करने या कराने वाले अथवा इस कार्य में सहायता करने वाले अंगों को हम श्वसनांग (Respiratory organs) कहते हैं। ये सब श्वसनांग, जो सम्मिलित रूप से श्वसन के लिए कार्य करते हैं, श्वसन तन्त्र (Respiratory system) कहलाते हैं।

मनुष्य के श्वसन तन्त्र के मुख्य अंग
श्वसन क्रिया में भाग लेने वाले मुख्य मानव अंग निम्नलिखित हैं (1) नासागुहा, (2) कण्ठ, (3) श्वासनली तथा (4) फुफ्फुस या फेफड़े

(1) नासागुहा: वायु के आवागमन के लिए नाक में छिद्र होते हैं। इन्हें नासाद्वार या नथुने कहते हैं। इनसे दो मार्ग अन्दर की नाक ओर जाते हैं और ये मार्ग एक परदे ग्रसनी द्वारा एक-दूसरे से पृथक् रहते हैं। घाँटी नासागुहा का निचला आधार तालू, वाकतन्तु की अस्थि होती है, जोकि नासिका को मुँह से पृथक् करती है। श्वासनली नासिका का - ऊपरी भाग श्वसनी बहु-छिद्रास्थि से बना होता है। नासागुहा का मार्ग श्लेष्मिक कला से मढ़ा होता है। नासागुहा की सतह पर छोटे-छोटे रोएँ होते हैं, जोकि वायु में उपस्थित धूल के कणों एवं जीवाणुओं को अन्दर कोशिका जाने से रोकते हैं। श्लेष्मिक कला को चिपकाकर अन्दर प्रवेश करने से रोकता है। दोनों नासाद्वार मिलकर एक नली बनाते हैं, जोकि ग्रसनी में खुलती है।
(2) कण्ठ (लैरिंक्स):
यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर स्थित व कण्ठद्वार पर उपास्थि का बना हुआ एक ढक्कन होता है, जोकि कण्ठच्छद कहलाता है। यह भोजन को श्वासनली में जाने से रोकता है। श्वासनली को बनाने वाले उपास्थि के अधूरे छल्लों में से ऊपरी छल्ला अवटु उपास्थि सामने से चौड़ा तथा उभरा हुआ होता है। इसे पुरुषों के कण्ठ में बाहर से छूकर अनुभव किया जा सकता है। दूसरा छल्ला चारों ओर से पूरा होता है तथा मुद्रिका उपास्थि कहलाता है। दोनों छल्लों के बीच रेशेदार तन्तु भरे रहते हैं।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र मानव श्वसन तन्त्र को दर्शाता है, जिसमें नासिका से लेकर फेफड़ों और डायाफ्राम तक के प्रमुख अंग शामिल हैं। इसमें कण्ठ, ग्रसनी, श्वासनली, श्वसनी और फेफड़ों के भीतर कूपिका व कोशिकाओं जैसी संरचनाएं दिखाई गई हैं, जो वायु के मार्ग और गैस विनिमय को स्पष्ट करती हैं।

(3) श्वासनली: कण्ठ से होकर वायु श्वासनली अथवा वायुनलिका में प्रवेश करती है। इसकी कच्छद गोलाई 2.5 सेण्टीमीटर तथा लम्बाई लगभग 12-13 सेण्टीमीटर होती है। यह नली 'C' के आकार के रेशेदार तन्तुओं से निर्मित छल्लों से बनी होती श्वास नली है, जोकि पीछे की ओर खुले रहते हैं। इनके ऊपर श्लेष्मिक कला मढ़ी होती है। नली के पिछले भाग में भी श्लेष्मिक कला मढ़ी होती है। जब ग्रासनली से गुजरता है तो श्वसनिको ग्रासनली फूलती है और श्वासनली की फुफ्फुसावरण पिछली झिल्ली दब जाती है। इस प्रकार ग्रासनली को फूलने का स्थान मिल जाता है। श्वासनली ग्रीवा से, होकर वक्ष में जाती है। वक्ष में यह दो भागों - श्वसनी या ब्रॉन्कस में विभक्त हो जाती है। प्रत्येक श्वसनी प्रत्येक फेफड़े में प्रवेश करती हैं। दोनों श्वसनी दोनों फेफड़ों में जाकर अनेक शाखाओं तथा उपशाखाओं में बँट जाती हैं। अतिविभाजन के फलस्वरूपं ये सौत्रिक़ तन्तु की केवल सूक्ष्म नलिकाएँ बनकर रह जाती हैं। प्रत्येक सूक्ष्मतर श्वसनिका के अन्त में वायु-कोष होते हैं, जिनका बाहर की वायु से इन श्वसनिकाओं द्वारा सम्पर्क बना रहता है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र श्वसन पथ का प्रदर्शन करता है, जिसमें वायु के प्रवेश से लेकर फेफड़ों तक के मार्ग को दर्शाया गया है। इसमें कण्ठच्छद, ग्रास नली, स्वर यन्त्र, श्वास नली, श्वसनी, श्वसनिका और वायु कोष जैसी प्रमुख संरचनाएं शामिल हैं, जो श्वसन क्रिया के दौरान वायु के संचरण को समझाती हैं।

(4) फुफ्फुस अथवा फेफड़े: ये श्वसन तन्त्र को सबसे महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इनकी संख्या दो होती है और ये वक्ष गुहा में दाएँ और बाएँ स्थित होते हैं। फेफड़े ही रक्त के शुद्धिकरण का कार्य करते हैं तथा गैसों के आदान-प्रदान का कार्य करते हैं।
In simple words: श्वसन तंत्र में नासागुहा, कण्ठ, श्वासनली और फेफड़े मुख्य अंग होते हैं, जो हवा को अंदर लेकर ऑक्सीजन का आदान-प्रदान करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। नासागुहा हवा को फ़िल्टर करती है, कण्ठ हवा को श्वासनली में भेजता है, और फेफड़ों में गैसों का विनिमय होता है।

🎯 Exam Tip: नामांकित चित्र के साथ अंगों का स्पष्टीकरण करने पर अच्छे अंक मिलते हैं। प्रत्येक अंग के कार्य और उसकी संरचना को सटीक रूप से वर्णित करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. फेफड़ों की रचना एवं कार्य चित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
या
फेफड़ों में रक्त की शुद्धि किस प्रकार होती है? विस्तारपूर्वक समझाइए ।
या
फेफड़ों के कार्य लिखिए।
Answer:
फेफड़ों की रचना
श्वसन तन्त्र के मुख्यतम अंग फेफड़े कहलाते हैं। मनुष्य के शरीर में दो फेफड़े होते हैं, जोकि वक्षगुहा में दाएँ और बाएँ स्थित होते हैं। इनकी संरचना अत्यन्त कोमल, लचीली, स्पंजी तथा गहरे गुलाबी-भूरे रंग की होती है। इसके चारों ओर एक पतली झिल्ली का आवरण होता है। इसके भीतर लसदार तरल भरा होता है। इस आवरण को फुफ्फुसीय आवरण अथवा प्लूरी कहते हैं तथा गुहा को रम्फुसीय गुहा कहते हैं। ये सब रचनाएँ फेफड़ों की सुरक्षा करती हैं। दायाँ फेफड़ा बाएँ की अपेक्षा बड़ा होता है तथा दो अधूरी खाँचों के द्वारा तीन पिण्डों में बँटा रहता है। बाएँ फेफड़े में एक अधूरी खाँच होती है तथा यह दो पिण्डों में बँटा होता है। फेफड़ों में मधुमक्खी के छत्ते की तरह असंख्य वायुकोष होते हैं। ये बहुत उपनलिकाएँ महीन होते हैं तथा एक वयस्क मनुष्य में इन वायुकोषों की संख्या लगभग 15 करोड़ तक होती है।


ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र श्वसन अंग फेफड़ों की आंतरिक संरचना को दर्शाता है, जिसमें स्वर यन्त्र, वायुनली, श्वसनी और उपनलिकाएं प्रमुख रूप से दिख रही हैं। यह फेफड़ों के भीतर वायु के मार्ग और गैस विनिमय के लिए महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति को स्पष्ट करता है, जिससे छात्र श्वसन क्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।

प्रत्येक वायुकोष, एक बहुत महीन संरचना होते हुए भी एक ऐसी छोटी नली से सम्बन्धित होता है जिसमें और भी कई वायुकोष खुलते हैं। यह स्थान वास्तव में एक छोटी-सी नली का” उपनली सिरा है जिसमें कि ऐसे अनेक स्थान खुलते हैं। ये नलिकाएँ श्वसनिकाओं की अतिसूक्ष्म नलिकाओं में बार-बार विभाजित होने से बनी अन्तिम नलिकाएँ हैं। अनेक नलिकाएँ एक ही श्वसनिका सम्बन्धित होती हैं। दोनों फेफड़ों से निकलने वाली सभी श्वसनिकाएँ मिलकरं श्वासनली बनाती हैं। इस प्रकार हर बार श्वास लेने से इन छोटे-छोटे वायुकोषों में नयी वायु आती है और पुरानी वायु निकल जाती है।

फेफड़ों के कार्य
फेफड़ों का मुख्य कार्य अशुद्ध रक्त का शोधन करना है। श्वसन क्रिया में फेफड़े उनमें प्रवेश करने वाली वायु से ऑक्सीजन सोखते हैं तथा इसमें रक्त से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को छोड़ते हैं। इस प्रकार गैसीय विनिमय द्वारा फेफड़ों में रक्त का शुद्धिकरण होता है; जिसकी विस्तृत विवरण निम्नलिखित है वायुकोष अत्यन्त छोटे स्थान होते हैं जिनकी भित्ति बहुत महीन होती है।
वायुकोषों की भित्तियों के बाहर रुधिर की अत्यन्त पतली-पतली नलियों (केशिकाओं) का जाल बिछा होता है। इन केशिकाओं में हृदय से अशुद्ध रुधिर आता है तथा शुद्धिकरण के पश्चात् वापस हृदय को चला जाता है। इन केशिकाओं के रुधिर तथा वायुकोषों में उपस्थित वायु के बीच गैसों का आदान-प्रदान होता है। रुधिर में लाल रक्त कणिकाएँ होती हैं। रुधिर का लाल रंग हीमोग्लोबिन नामक विशिष्ट पदार्थ की उपस्थिति के कारण होता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन का उत्तम स्वीकारक होता है। यह ऑक्सीजन को तत्काल ग्रहण कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बना लेता है। इसी समय रुधिर के तरल पदार्थ प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) वायुकोषों में उपस्थित वायु में, कार्बन डाइऑक्साइड की कमी होने के कारण स्वयं ही आ जाती है। इस प्रकार रुधिर में वायु से ऑक्सीजन तथा वायु में रुधिर से कार्बन डाइऑक्साइड गैस का आदान-प्रदान होता है। इसके बाद, ऑक्सीजनयुक्त रक्त फेफड़ों से शिराओं के द्वारा हृदय में पहुँचता है जहाँ से यह शरीर के विभिन्न अंगों को वितरित हो जाता है।
In simple words: फेफड़े वक्षगुहा में स्थित कोमल और स्पंजी अंग होते हैं, जो रक्त को शुद्ध करने और ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करने का मुख्य कार्य करते हैं। इनकी रचना वायुकोषों से होती है, जहाँ रक्त केशिकाओं और वायु के बीच गैसों का विनिमय होता है।

🎯 Exam Tip: फेफड़ों की संरचना और कार्यप्रणाली का विस्तृत वर्णन, विशेष रूप से गैसीय विनिमय की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने से उच्च अंक प्राप्त होते हैं। चित्र के साथ स्पष्टीकरण अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 3. मनुष्य के शरीर में श्वसन-क्रिया किस प्रकार होती है? विस्तारपूर्वक समझाइए ।
या
श्वसन-क्रिया से आप क्या समझती हैं?
या
श्वसन की हमारे जीवन में क्या उपयोगिता है?
या
रक्त की शुद्धि और श्वसन-क्रिया में क्या सम्बन्ध है?
या
प्रःश्वसन और निःश्वसन से आप क्या समझती हैं?
Answer:
श्वसन की क्रिया-विधि
मनुष्य के प्रमुख श्वसनांग फेफड़े होते हैं, जो कि वक्ष गुहा में फुफ्फुसीय गुहा के अन्दर स्थित होते हैं। वक्षगुहा का निर्माण पसलियों के द्वारा होता है। वक्षगुहा का पिछला भाग अर्थात् पैर की ओर का भाग तन्तुपट (डायाफ्राम) का बना होता है। श्वसन के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धि फेफड़ों में होने वाले वात-विनिमय पर निर्भर करती है जो रुधिर तथा वायु के बीच में होता है। इसके लिए वक्षीय गुहा की पसलियाँ तथा उनकी मांसपेशियाँ व तन्तुपट इस प्रकार प्रक्रिया करते हैं कि वायुमण्डल की वायु स्वतः ही वायुमार्ग से होकर फेफड़ों में प्रवेश कर जाती है। यह प्रक्रिया श्वसन-क्रिया कहलाती है।

श्वसन-क्रिया की दो उपक्रियाएँ हैं (1) प्रः श्वसन तथा (2) निःश्वसन
(1) प्रःश्वसन (Inspiration): इस उपक्रिया में वायुमण्डल की वायु को वायुमार्ग द्वारा फेफड़ों तक पहुँचाया जाता है। फेफड़ों के फूलने पर इनके वायुकोषों में वायु का दबाव कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वायुमण्डल की वायु नासामार्ग, श्वसन नली, ग्रसनी तथा एपीग्लॉटिस से होती हुई फेफड़ों तक पहुँच जाती है। फेफड़ों के फूलने के लिए वक्षगुहा का बढ़ना आवश्यक है, जिसके लिए तन्तुपट नीचे की ओर जाता है तथा पसलियाँ फैलकर थोड़ा पाश्र्व तथा नीचे की ओर हो जाती हैं। इस क्रिया में वक्षगुहा बाहर की ओर गुम्बद के समान फूल जाती है। पसलियों के बीच में उपस्थित मांसपेशियों के संकुचन एवं फैलने के कारण पसलियों के फैलने की क्रिया सम्पन्न होती है। इस समय उरोस्थि भी ऊपर की ओर उठ जाती है। इस प्रकार वक्षगुहा का आयतन बढ़ने से फेफड़े कूल जाते हैं। तथा प्रःश्वसन की क्रिया सम्पन्न होती है।
(2) निःश्वसन (Expiration): प्रःश्वसन के कारण फेफड़ों में अधिकतम मात्रा में वायु भरी होती है। सभी पेशियाँ शिथिल होकर पूर्व स्थिति की ओर आने लगती हैं। तन्तुपट को पेशियाँ शिथिल होकर तन्तुपट को वक्षगुहा में उभार देती हैं तथा पसलियों के मध्य उपस्थित मांसपेशियाँ शिथिल होकर पसलियों को यथास्थान ले आती हैं। उरोस्थि भी अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती है। इन सबका परिणाम यह होता है कि फूला हुआ सीना पिचक जाता है। जिससे फेफड़ों के अन्दर भरी बाय द दबा बढ़ जाता है और वह एपीग्लॉटिस, ग्रसनी, श्वसन नली तथा नासिका मार्ग से होकर नास द्रिों द्वारा शोर के बाहर निकल जाती है। यह क्रिया निःश्वसन अथवा उच्छ्वसन कहलाती है।

फेफड़ों में गैसीय विनिमय
प्रःश्वसन व निःश्वसन उपक्रियाओं के द्वारा फेफड़ों व बाहरी वायुमण्डल के बीच वायु का आना-जाना ही श्वसन-क्रिया है, जोकि जीवित मनुष्यों में निरन्तर होती रहती है। फेफड़ों में अनेक छोटे-छोटे वायुकोष होते हैं जिनकी भित्तियों के बाहर पतली रुधिर केशिकाओं का जाल बिछा होता है। इनमें उपस्थित लाल रक्त कणिकाएँ शुद्ध वायु से ऑक्सीजन सोख लेती हैं तथा रुधिर की प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साईड वायु में मुक्त हो जाती है।

श्वसन-क्रिया का महत्त्व जीवित रहने के लिए श्वसन-क्रिया अत्यावश्यक है। हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं के लिए ईंधन के रूप में भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन में ऊर्जा रासायनिक पदार्थों में बँधी होती है। इस ऊर्जा को मुक्त करने के लिए कोशिकाओं में ऑक्सीकरण क्रिया होती है, जिसके लिऐ ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यह ऑक्सीजन रुधिर से उपलब्ध होती है। रुधिर में ऑक्सीजन की आवश्यक आपूर्ति फेफड़ों में श्वसन-क्रिया के द्वारा होती है। इस प्रकार शरीर में होने वाली ऑक्सीकरण क्रियाएँ श्वसन-क्रिया पर निर्भर करती हैं। ऑक्सीजन का एक और महत्त्वपूर्ण कार्य शरीर में आवश्यक ताप को नियमित बनाए रखना है। श्वसन-क्रिया के दौरान फेफड़ों में रक्त का शुद्धिकरण होता है, जिसमें रक्त का हीमोग्लोबिन वायु से ऑक्सीजन सोखता है तथा अशुद्ध रक्त की प्लाज्मा से कार्बन डाइऑक्साइड वायु में मुक्त होती है। इस प्रकार श्वसन-क्रिया के परिणामस्वरूप शरीर को अनावश्यक एवं हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड से मुक्ति मिलती है।
In simple words: श्वसन क्रिया में वायु का अंदर लेना (प्रःश्वसन) और बाहर छोड़ना (निःश्वसन) शामिल है, जो फेफड़ों में गैसों के आदान-प्रदान द्वारा होता है। यह कोशिकाओं को ऊर्जा उत्पादन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करती है और कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकालती है, जिससे रक्त का शुद्धिकरण होता है।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रिया की विधि, प्रःश्वसन और निःश्वसन की प्रक्रियाओं का स्पष्ट वर्णन, तथा गैस विनिमय और श्वसन के महत्व को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है। रक्त शुद्धिकरण से इसका संबंध अवश्य बताएं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. मुँह की अपेक्षा नाक से श्वास लेने के क्या लाभ हैं?
Answer: नाक श्वसन तन्त्र का प्रवेश द्वार है। हम नाक तथा मुंह दोनों मार्गों से श्वास ग्रहण कर सकते हैं परन्तु नाक से ही श्वास ग्रहण करना उचित माना जाता है। नाक से श्वास लेने के लाभ निम्नलिखित हैं
1. नाक में उपस्थित बाल वायु में उपस्थित धूल के कणों व अन्य इस प्रकार की गन्दगी को . रोकते हैं जिसके कारण फेफड़ों तक पहुँचने वाली वायु गन्दगी रहित हो जाती है।
2. नाक से प्रवेश करने वाली वायु नाक तथा श्वसन नली आदि की रक्त केशिकाओं द्वारा गर्म की जाती है। अतः फेफड़ों को गर्म वायु उपलब्ध होती है। अधिक ठण्ड वायु फेफड़ों के लिए हानिकारक होती है।
3. सम्पूर्ण वायु नलिका की भित्ति श्लेष्मिक कला से मढ़ी होती है, जो कि वायु में उपस्थित जीवाणुओं एवं धूल-कणों को रोक लेती है। इस प्रकार फेफड़ों तक पहुँचने वाली वायु अनेक प्रकार के हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त होती है।
In simple words: नाक से श्वास लेने से हवा फ़िल्टर होती है, गर्म होती है और उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु व धूल के कण रुक जाते हैं, जिससे फेफड़ों तक शुद्ध और सुरक्षित हवा पहुँचती है।

🎯 Exam Tip: नाक से श्वास लेने के तीन प्रमुख लाभ- वायु का शुद्धीकरण, गर्माहट और जीवाणु रहित होना- को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।

 

Question 2. प्रःश्वसन व निःश्वसन की वायु में क्या अन्तर है?
Answer: प्रःश्वसन (शरीर में प्रवेश करने वाली) वायु शुद्ध तथा निःश्वसन (शरीर से बाहर निकलने वाली) वायु अशुद्ध होती है। दोनों प्रकार की वायु के रासायनिक संगठन में निम्नलिखित अन्तर हैं

क्र० सं०गैसप्रःश्वसन वायु % मात्रानिःश्वसन वायु % मात्रा
1.नाइट्रोजन79.1479.14
2.ऑक्सीजन20.9616.04
3.कार्बन डाइऑक्साइड0.044.41
4.जलवाष्पऋतु अनुसार कम अथवा अधिकसंतृप्त

In simple words: प्रःश्वसन वह वायु है जो हम अंदर लेते हैं, जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जबकि निःश्वसन वह वायु है जिसे हम बाहर छोड़ते हैं, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है। नाइट्रोजन की मात्रा दोनों में लगभग समान रहती है।

🎯 Exam Tip: प्रःश्वसन और निःश्वसन वायु में गैसों के प्रतिशत अंतर को सारणीबद्ध रूप में दर्शाना उत्तर को अधिक स्पष्ट बनाता है और बेहतर अंक दिलाता है।

 

Question 3. स्वस्थ श्वसन के लिए हमें क्या करना चाहिए?
Answer: स्वस्थ श्वसन के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं
1. हमें सदैव नाक से श्वास लेना चाहिए। इससे शुद्ध एवं गर्म वायु फेफड़ों को उपलब्ध होती है।
2. अधिक शुद्ध वायु को अन्दर लेने के लिए हमें अधिकतम प्रःश्वसन करना चाहिए तथा अधिक गैसीय-विनिमय के लिए फेफड़ों में थोड़ा प्रःश्वसन वायु को रोकना चाहिए।
3. प्रत्येक दिन अनेक बार कुछ देर तक लम्बी-लम्बी श्वासे लेनी चाहिए। ये फेफड़ों के लिए स्वास्थ्यप्रद रहती हैं।
4. आवासीय व्यवस्था के आस-पास हरे-भरे पेड़-पौधे लगाने चाहिए। इससे हमें अधिक ऑक्सीजनयुक्त शुद्ध वायु प्राप्त होती है।
In simple words: स्वस्थ श्वसन के लिए नाक से सांस लेना, गहरी सांसें लेना और स्वच्छ व हरे-भरे वातावरण में रहना महत्वपूर्ण है, ताकि फेफड़ों को शुद्ध और पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके।

🎯 Exam Tip: स्वस्थ श्वसन के लिए व्यावहारिक और सरल सुझावों को बिंदुओं में लिखें, खासकर नाक से श्वास लेने और पर्यावरण की स्वच्छता पर जोर दें।

 

Question 4. श्वास क्रिया की दर से क्या अभिप्राय है?
Answer: श्वसन-क्रिया सामान्यतः एक अनैच्छिक क्रिया है। एक सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्ति में यह क्रिया 15-18 बार प्रति मिनट की दर से होती है। शिशु अवस्था में इसकी दर काफी अधिक (25-40 बार प्रति मिनट तक) होती है। यदि समय का आकलन किया जाए तो प्रत्येक वयस्क व्यक्ति प्रति 4 सेकण्ड में यह क्रिया एक बार करता है। इसमें 1.5 सेकण्ड प्रःश्वसन के लिए तथा 2.5 सेकण्ड निःश्वसन के लिए होता है। श्वसन क्रिया की इस दर को आवश्यकतानुसार नियमित तथा संचालित करने का दायित्व मस्तिष्क में स्थित एक जोड़े श्वास केन्द्र का होता है। ये केन्द्र श्वसन-क्रिया से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की पेशियों, पसलियों तथा तन्तुपट आदि के संकुचन एवं शिथिलन पर नियन्त्रण बनाए रखते हैं।
दौड़ने, भागने, व्यायाम करने, खेलने-कूदने अथवा अन्य शारीरिक कार्य करने पर श्वास-दर बढ़ जाती है। ज्वर आदि की स्थिति में भी श्वास-दर में वृद्धि हो जाती है। इसका कारण है-उपर्युक्त दशाओं में अधिक ऊर्जा की खपत होने के कारण अधिक एवं अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता। श्वसन-क्रिया पूर्णरूप से अनैच्छिक क्रिया है, परन्तु उसे व्यायाम, योगाभ्यास आदि के द्वारा आंशिक रूप से ऐच्छिक बनाया जा सकता है।
In simple words: श्वास क्रिया की दर वह संख्या है जितनी बार एक व्यक्ति एक मिनट में सांस लेता है, जो आमतौर पर 15-18 बार होती है। शारीरिक गतिविधि या बीमारियों में यह दर बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: श्वास दर की परिभाषा, सामान्य दर, विभिन्न परिस्थितियों में बदलाव और इसके अनैच्छिक नियंत्रण पर स्पष्ट जानकारी दें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. श्वसन तन्त्र से क्या आशय है?
Answer: श्वसन-क्रिया में भाग लेने वाले विभिन्न अंगों की व्यवस्था को श्वसन-तन्त्र कहा जाता है।
In simple words: श्वसन तंत्र उन सभी अंगों का समूह है जो मिलकर सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं, जिससे शरीर को ऑक्सीजन मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।

🎯 Exam Tip: श्वसन तंत्र की परिभाषा में मुख्य क्रिया "श्वसन" और "अंगों की व्यवस्था" को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. श्वसन तन्त्र के किन्हीं तीन मुख्य अंगों के नाम लिखिए।
Answer: श्वसन तन्त्र के तीन मुख्य अंग हैं नासिका, श्वासनली तथा फेफड़े।
In simple words: श्वसन तंत्र के मुख्य अंगों में नाक, श्वासनली और फेफड़े शामिल हैं, जो हवा के प्रवेश, मार्ग और गैस विनिमय के लिए जिम्मेदार हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसन तंत्र के मुख्य अंगों के नाम याद रखें, जैसे नासिका, श्वासनली और फेफड़े, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 3. श्वसन-क्रिया में कौन-सी गैसों का आदान-प्रदान होता है?
Answer: श्वसन-क्रिया में ऑक्सीज़न तथा कार्बन डाइऑक्साइड नामक गैसों का आदान-प्रदान होता है। ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड विसर्जित की जाती हैं।
In simple words: श्वसन क्रिया में शरीर ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है, जिससे गैसों का आदान-प्रदान होता है।

🎯 Exam Tip: श्वसन में शामिल मुख्य गैसें- ऑक्सीजन (ग्रहण) और कार्बन डाइऑक्साइड (विसर्जित) - को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

 

Question 4. मानव शरीर के लिए ऑक्सीजन क्यों आवश्यक है?
Answer: रक्त को शुद्ध करने के लिए तथा खाद्य-पदार्थों के ऑक्सीकरण के माध्यम से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आक्सीजन आवश्यक होती है।
In simple words: ऑक्सीजन शरीर के रक्त को शुद्ध करती है और भोजन से ऊर्जा बनाने के लिए ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में मदद करती है, जो जीवन के लिए अनिवार्य है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन की आवश्यकता के दो मुख्य कारण- रक्त शुद्धिकरण और ऊर्जा उत्पादन - को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 5. नाक में बाल क्यों होते हैं?
Answer: नाक में विद्यमान बाल वायु में मिले हुए धूल कणों वे बैक्टीरिया आदि को रोक लेते हैं तथा श्वसन तन्त्र में साफ वायु ही प्रवेश कर पाती है।
In simple words: नाक के बाल हवा में मौजूद धूल और बैक्टीरिया को छानकर श्वसन तंत्र में साफ हवा भेजने का काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: नाक के बालों का मुख्य कार्य- वायु को छानना और शुद्ध करना - स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 6. गैसीय-विनिमय का वास्तविक स्थान कौन-सा है?
Answer: श्वसन-क्रिया में गैसीय-विनिमय फेफड़ों की रुधिर केशिकाओं में होता है।
In simple words: गैसों का आदान-प्रदान (ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना) फेफड़ों में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं, जिन्हें रुधिर केशिकाएँ कहते हैं, में होता है।

🎯 Exam Tip: गैसीय विनिमय का सही स्थान 'फेफड़ों की रुधिर केशिकाएँ' है, इसे याद रखें।

 

Question 7. फेफड़ों में अशुद्ध रक्त शुद्धिकरण के लिए किसके द्वारा आता है?
Answer: हृदय से फुफ्फुस धमनी के माध्यम से अशुद्ध रक्त शुद्धिकरण के लिए फेफड़ों में आता है।
In simple words: अशुद्ध रक्त हृदय से फुफ्फुस धमनी के ज़रिए फेफड़ों तक पहुँचता है, जहाँ उसे शुद्ध किया जाता है।

🎯 Exam Tip: फुफ्फुस धमनी वह महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे अशुद्ध रक्त फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए पहुंचता है, इसे याद रखें।

 

Question 8. प्रःश्वसन से क्या अभिप्राय है?
Answer: प्रःश्वसन द्वारा शुद्ध वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है।
In simple words: प्रःश्वसन का मतलब है सांस अंदर लेना, जिससे शुद्ध हवा (ऑक्सीजन) फेफड़ों तक पहुँचती है।

🎯 Exam Tip: प्रःश्वसन को 'सांस अंदर लेना' और 'शुद्ध वायु का प्रवेश' के रूप में परिभाषित करें।

 

Question 9. तीव्र ज्वर का श्वास-गति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: ज्वर की अवस्था में श्वास-गति बढ़ जाती है।
In simple words: तेज बुखार होने पर व्यक्ति की सांस लेने की गति बढ़ जाती है क्योंकि शरीर को अधिक ऊर्जा और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: ज्वर जैसी शारीरिक तनाव की स्थितियों में श्वास-गति में वृद्धि होती है, यह एक महत्वपूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया है।

 

Question 10. फेफड़ों की रक्षा करने वाली झिल्ली का नाम क्या है?
Answer: फेफड़े चारों ओर से फुफ्फुसीय आवरण नामक झिल्ली में सुरक्षित रहते हैं।
In simple words: फेफड़े एक सुरक्षात्मक झिल्ली से ढके होते हैं, जिसे फुफ्फुसीय आवरण कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: फेफड़ों की सुरक्षात्मक झिल्ली का नाम 'फुफ्फुसीय आवरण' (pleura) है, इसे याद रखें।

 

Question 11. सामान्य अवस्था में फेफड़ों में कितनी वायु होती है?
Answer: सामान्य अवस्था में फेफड़ों में लगभग 2.5 लीटर वायु सदैव भरी होती है। फेफड़ों में प्रःश्वसन की अधिकतम अवस्था में लगभग 6 लीटर तक वायु भरी हो सकती है। यह फेफड़ों की कुल सामर्थ्य कहलाती है।
In simple words: सामान्यतः फेफड़ों में लगभग 2.5 लीटर हवा हमेशा रहती है, लेकिन पूरी सांस लेने पर यह क्षमता बढ़कर लगभग 6 लीटर तक हो सकती है।

🎯 Exam Tip: सामान्य वायु मात्रा (2.5 लीटर) और अधिकतम क्षमता (6 लीटर) दोनों को उल्लेख करें, क्योंकि ये महत्वपूर्ण संख्यात्मक मान हैं।

 

Question 12. श्वसन-क्रिया की क्यों आवश्यकता है?
Answer: कोशाओं में होने वाली ऑक्सीकरण क्रियाओं के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराना तथा रुधिर से कार्बन डाइऑक्साइड को विसर्जित करने के लिए श्वसन-क्रिया अति आवश्यक है।
In simple words: श्वसन क्रिया शरीर के लिए इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह कोशिकाओं को ऊर्जा बनाने के लिए ऑक्सीजन देती है और हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालती है।

🎯 Exam Tip: श्वसन की आवश्यकता के दो मुख्य कारण- ऑक्सीजन की आपूर्ति और कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन - पर जोर दें।

 

Question 13. वक्षीय गुहा के फूलने व पिचकने से क्या लाभ हैं?
Answer: वक्षीय गुहा के फूलने व पिचकने से फेफड़ों को फूलने व पिचकने के लिए स्थान मिलता है।
In simple words: वक्षीय गुहा के फूलने और पिचकने से फेफड़ों को सांस लेते और छोड़ते समय फैलने और सिकुड़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।

🎯 Exam Tip: वक्षीय गुहा की गति का सीधा संबंध फेफड़ों की कार्यक्षमता और श्वसन प्रक्रिया के लिए आवश्यक स्थान से है।

 

Question 14. मनुष्य में श्वासनली कितनी लम्बी होती है?
Answer: मनुष्य में श्वासनली की लम्बाई 10 से 11 सेण्टीमीटर तक होती है।
In simple words: मानव श्वासनली की लंबाई आमतौर पर 10 से 11 सेंटीमीटर होती है।

🎯 Exam Tip: श्वासनली की औसत लंबाई (10-11 सेण्टीमीटर) एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 15. एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में कितनी बार श्वास लेता है?
Answer: एक स्वस्थ व्यक्ति प्रति मिनट 15-18 बार श्वास लेता है।
In simple words: एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में औसतन 15 से 18 बार सांस लेता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य श्वास दर (15-18 प्रति मिनट) एक मानक माप है, जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 16. व्यायाम से श्वसन-क्रिया पर पड़ने वाले दो प्रभाव लिखिए ।
Answer: व्यायाम से श्वसन की दर बढ़ जाती है तथा व्यक्ति अधिक मात्रा में बाहरी वायु को ग्रहण करती है। इसमें अधिक मात्रा में ऑक्सीजन भी प्राप्त होती है।
In simple words: व्यायाम करने से सांस लेने की गति बढ़ जाती है और शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है।

🎯 Exam Tip: व्यायाम के दौरान बढ़ी हुई श्वसन दर और ऑक्सीजन की बढ़ी हुई आपूर्ति दो मुख्य प्रभावों के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 17. पार्क या उद्यान में साँस को लाभ बताएँ।
Answer: पार्क या उद्यान में साँस लेने से व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में शुद्ध तथा ऑक्सीजन युक्त वायु मिल जाती है। इसका व्यक्ति के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
In simple words: पार्क या उद्यान में सांस लेने से शरीर को शुद्ध और ऑक्सीजन युक्त हवा मिलती है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

🎯 Exam Tip: स्वच्छ वातावरण में सांस लेने के लाभ को 'शुद्ध वायु' और 'स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव' के रूप में समझाएं।

 

Question 18. मुँह से साँस लेना क्यों हानिकारक है ?
Answer: मुँह से साँस लेने से दूषित एवं ठण्डी वायु श्वसन-तन्त्र में पहुंच जाती है। इससे गले एवं श्वसन-तन्त्र के संक्रमण की आशंका रहती है।
In simple words: मुँह से सांस लेने पर हवा फिल्टर नहीं होती और दूषित, ठंडी हवा सीधे श्वसन तंत्र में चली जाती है, जिससे गले और श्वसन तंत्र में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: मुँह से सांस लेने के मुख्य नुकसान- दूषित और ठंडी हवा का प्रवेश तथा संक्रमण का खतरा - पर ध्यान दें।

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. वायु से ऑक्सीजन ग्रहण करने वाला रुधिर में उपस्थित पदार्थ का क्या नाम है?
(क) हीमोग्लोबिन
(ख) प्लाज्मा
(ग) श्वेत रुधिर कणिकाएँ
(घ) सम्पूर्ण रुधिर
Answer: (क) हीमोग्लोबिन
In simple words: रक्त में हीमोग्लोबिन नामक पदार्थ ऑक्सीजन को ग्रहण करता है और उसे पूरे शरीर में पहुंचाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद वह प्रोटीन है जो ऑक्सीजन परिवहन के लिए जिम्मेदार है।

 

Question 2. एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में कितनी बार साँस लेता है?
(क) 25-30 बार
(ख) 15-18 बार
(ग) 5-10 बार
(घ) अनेक बार
Answer: (ख) 15-18 बार
In simple words: एक स्वस्थ व्यक्ति सामान्यतः प्रति मिनट 15 से 18 बार सांस लेता है।

🎯 Exam Tip: स्वस्थ व्यक्ति की सामान्य श्वास दर को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक मानक शारीरिक माप है।

 

Question 3. वायुकोषों के समूह का नाम है
(क) कण्ठ
(ख) फेफड़े
(ग) श्वासनली
(घ) श्वसन तन्त्र
Answer: (ख) फेफड़े
In simple words: वायुकोषों का समूह फेफड़े कहलाता है, जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है।

🎯 Exam Tip: फेफड़े ही वायुकोषों के मुख्य संग्रहक अंग हैं, जहाँ गैसीय विनिमय होता है।

 

Question 4. प्राणवायु कहलाती है
(क) ऑक्सीजन
(ख) कार्बन डाइऑक्साइड
(ग) नाइट्रोजन
(घ) जलवाष्प
Answer: (क) ऑक्सीजन
In simple words: ऑक्सीजन को प्राणवायु कहा जाता है क्योंकि यह जीवन के लिए आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: प्राणवायु का पर्याय ऑक्सीजन है, यह एक मूलभूत वैज्ञानिक तथ्य है।

 

Question 5. अधिक व्यायाम करने से श्वास-गति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(क) कम हो जाती है
(ख) पहले जैसी रहती है
(ग) बढ़ जाती है
(घ) रुक जाती है
Answer: (ग) बढ़ जाती है
In simple words: ज्यादा व्यायाम करने पर शरीर को अधिक ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है, इसलिए सांस लेने की गति बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: शारीरिक गतिविधि बढ़ने पर श्वास गति का बढ़ना शरीर की ऑक्सीजन मांग को पूरा करने की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।

 

Question 6. रुधिर की शुद्धि किस अंग में होती है?
(क) पाचन तन्त्र
(ख) फुफ्फुस
(ग) हृदय
(घ) त्वचा
Answer: (ख) फुफ्फुस
In simple words: रक्त का शुद्धिकरण फेफड़ों (फुफ्फुस) में होता है, जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है और ऑक्सीजन रक्त में मिल जाती है।

🎯 Exam Tip: फेफड़े (फुफ्फुस) ही रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर ऑक्सीजन जोड़ने का कार्य करते हैं, जिससे रक्त शुद्ध होता है।

 

Question 7. फुफ्फुसीय धमनी कौन-सा रक्त ले जाती है?
(क) शुद्ध रक्त
(ख) अशुद्ध रक्त
(ग) पाचन रस
(घ) जठर रस
Answer: (ख) अशुद्ध रक्त
In simple words: फुफ्फुसीय धमनी हृदय से फेफड़ों तक अशुद्ध रक्त ले जाती है ताकि उसे शुद्ध किया जा सके।

🎯 Exam Tip: फुफ्फुसीय धमनी एक अपवाद है जो अशुद्ध रक्त ले जाती है, जबकि अन्य धमनियाँ शुद्ध रक्त ले जाती हैं।

 

Question 8. मनुष्य के शरीर में फेफड़ों की संख्या कितनी होती है?
(क) चार
(ख) एक
(ग) दो
(घ) अनेक
Answer: (ग) दो
In simple words: मनुष्य के शरीर में दो फेफड़े होते हैं, एक दाएँ और एक बाएँ वक्षीय गुहा में।

🎯 Exam Tip: मानव शरीर में फेफड़ों की संख्या हमेशा दो होती है, यह एक बुनियादी शारीरिक तथ्य है।

 

Question 9. श्वसन-क्रिया का प्रमुख अंग कौन-सा है?
(क) फेफड़े
(ख) आमाशय
(ग) खोपड़ी
(घ) नासिका
Answer: (क) फेफड़े
In simple words: फेफड़े श्वसन क्रिया के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं क्योंकि यहीं पर गैसों का मुख्य आदान-प्रदान होता है।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रिया का केंद्रीय और सबसे महत्वपूर्ण अंग फेफड़े हैं, जहाँ गैस विनिमय होता है।

 

Question 10. श्वसन-क्रिया में रक्त का शुद्धिकरण कौन-सी गैस द्वारा होता है?
(क) नाइट्रोजन
(ख) हाइड्रोजन
(ग) कार्बन डाइऑक्साइड
(घ) ऑक्सीजन
Answer: (घ) ऑक्सीजन
In simple words: रक्त का शुद्धिकरण ऑक्सीजन द्वारा होता है, जब यह रक्त में मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन वह गैस है जो रक्त के शुद्धिकरण में सीधे तौर पर मदद करती है, अशुद्ध रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को प्रतिस्थापित करती है।

 

Question 11. ऑक्सीजन द्वारा रक्त का शुद्धिकरण कहाँ होता है?
(क) यकृत में
(ख) वृक्क में
(ग) फेफड़ों में
(घ) श्वास प्रणाली में
Answer: (ग) फेफड़ों में
In simple words: ऑक्सीजन द्वारा रक्त का शुद्धिकरण फेफड़ों में होता है, जहाँ अशुद्ध रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करता है।

🎯 Exam Tip: रक्त शुद्धिकरण की मुख्य साइट फेफड़े हैं, जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विनिमय होता है।

 

Question 12. श्वसन-क्रिया है
(क) ऐच्छिक क्रिया
(ख) अनैच्छिक क्रिया
(ग) अनावश्यक क्रिया
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) अनैच्छिक क्रिया
In simple words: श्वसन क्रिया एक अनैच्छिक प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि यह हमारे नियंत्रण के बिना स्वतः ही होती रहती है।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रिया को मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित एक अनैच्छिक क्रिया के रूप में पहचानना महत्वपूर्ण है, हालांकि इसे कुछ हद तक स्वेच्छा से प्रभावित किया जा सकता है।

 

Question 13. कौन-सा अंग श्वसन-तन्त्र का भाग नहीं होता है?
(क) नाक
(ख) फेफड़े
(ग) यकृत/हाथ
(घ) श्वास-नली
Answer: (ग) यकृत/हाथ
In simple words: यकृत (लीवर) और हाथ श्वसन तंत्र का हिस्सा नहीं हैं; यकृत पाचन और चयापचय में शामिल है, जबकि हाथ गति और स्पर्श के लिए हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसन तंत्र के अंगों को जानें और पहचानें कि यकृत और हाथ जैसे अंग अन्य शारीरिक प्रणालियों से संबंधित हैं।

 

Question 14. वायुकोष पाये जाते हैं
(क) श्वास नली में
(ख) हृदय में
(ग) फेफड़ों में
(घ) वृक्क में
Answer: (ग) फेफड़ों में
In simple words: वायुकोष, जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है, फेफड़ों के अंदर पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: वायुकोष (एल्वियोली) फेफड़ों की कार्यात्मक इकाइयाँ हैं और उनका स्थान फेफड़ों में ही होता है।

UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Home Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Home Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Home Science Class 10 Solved Papers

Using our Home Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Home Science are as per latest UP Board curriculum.

Are the Home Science UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Home Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Home Science. You can access UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Home Science UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Home Science Chapter 19 श्वसन प्रणाली का प्रारंभिक ज्ञान in printable PDF format for offline study on any device.