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Detailed Chapter 15 भोजन पकाने, परोसने और संरक्षित करने की बुनियादी विधियाँ UP Board Solutions for Class 10 Home Science
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Class 10 Home Science Chapter 15 भोजन पकाने, परोसने और संरक्षित करने की बुनियादी विधियाँ UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भोजन पकाने के मुख्य उद्देश्य क्या हैं? आप भोजन पकाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखेंगी?
या भोजन पकाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि भोजन के तत्त्व नष्ट न हो सकें ?
या भोजन पकाकर खाना क्यों आवश्यक है ?
या भोजन पकाने के क्या उद्देश्य हैं ? पौष्टिक तत्त्वों की उन पकाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
या पाक-क्रिया के लाभ या उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: भोजन पकाने के मुख्य उद्देश्य
आदि-मानव क्षुधापूर्ति के लिए तत्कालीन भोज्य-पदार्थों का प्राकृतिक रूप में ही उपयोग करता था। उसकी खोजी प्रवृत्ति ने उसे शिकार करने के लिए अस्त्रों, अग्नि तथा नाना प्रकार के भोज्य-पदार्थों का ज्ञान प्राप्त कराया। वह धीरे-धीरे अग्नि का प्रयोग भोजन पकाने में करने लगा। आहार एवं पोषण-विज्ञान के विकास एवं अध्ययन ने आधुनिक मानव को भोजन को पकाने के महत्त्व तथा इसकी वैज्ञानिक विधियों की उपयोगिता की शिक्षा दी है। भोजन पकाने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं
(1) भोज्य-पदार्थों को सुपाच्य बनाना: आहार को ग्रहण करने से पूर्ण लाभ तभी प्राप्त होता है जबकि उसका अच्छी प्रकार से पाचन हो जाए। पाक-क्रिया या भोजन को पकाने का एक मुख्य उद्देश्य भोज्य-पदार्थों को सुपाच्य बनाना होता है। बिना पकाए भोज्य-पदार्थों को यदि ग्रहण किया जाता है, तो इस दशा में उनका पाचन प्राय: असम्भव ही होता है। अतः भोज्य-पदार्थों को सुपाच्य बनाने के उद्देश्य से उन्हें अनिवार्य रूप से पकाया जाता है।
(2) आहार को अधिकाधिक स्वादिष्ट बनाना: पाक-क्रिया का एक उल्लेखनीय उद्देश्य खाद्य सामग्री को अधिकाधिक स्वादिष्ट बनाना भी है। विभिन्न खाद्य-सामग्रियाँ कच्ची अवस्था में स्वादिष्ट नहीं होतीं, बल्कि उनका स्वाद अरुचिकर ही होता है। इन खाद्य-सामग्रियों को यदि सही पाक-क्रिया द्वारा तैयार किया जाता है, तो ये स्वादिष्ट बन जाती हैं तथा रुचिपूर्वक खाई जा सकती हैं।
(3) आकर्षक बनाना: खाद्य-सामग्री को पकाने का एक उद्देश्य उसे आकर्षक बनाना भी होता है। पकने पर आहार का स्वाद अच्छा हो जाता है, उसका रूप आकर्षक हो जाता है तथा उसमें एक प्रकार की मनभावन सुगन्ध उत्पन्न हो जाती है। अनेक खाद्य व्यंजनों को मसालों एवं रंगों से विशेष आकर्षक बना दिया जाता है। उदाहरण के लिए-चावल से जब पुलाव या बिरयानी तैयार की जाती है, तो उसमें एक मनोहारी सुगन्ध उत्पन्न हो जाती है तथा उसका रूप भी आकर्षक हो जाता है।
(4) आहार को विविधता प्रदान करना: पाक-क्रिया का एक उद्देश्य खाद्य-सामग्री को विविधता प्रदान करना भी है। पाक-क्रिया के माध्यम से एक ही खाद्य सामग्री को भिन्न-भिन्न व्यंजनों के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। आहार की विविधता व्यक्ति को अधिक सन्तोष प्रदान करती है। तथा आहार के प्रति रुचि बनी रहती है।
(5) खाद्य-सामग्री को कीटाणुरहित बनाना: विभिन्न शाक-सब्जियों तथा भोज्य-पदार्थों पर नाना प्रकार के फफूद एवं जीवाणु होते हैं। वर्षा ऋतु में तो इनकी संख्या अत्यधिक होती है। बिना पके भोज्य-पदार्थों का सेवन करने से ये कीटाणु शरीर में प्रवेश करके अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण बन सकते हैं। भोज्य-पदार्थों को पकाते समय उच्च ताप पर ये कीटाणु लगभग समूल नष्ट हो जाते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि भोज्य-पदार्थों को पकाने का एक उद्देश्य आहार को कीटाणुरहित बनाना भी होता है। जीव जगत से प्राप्त भोज्य सामग्री (दूध, मांस-मछली एवं अण्डे) में कीटाणुओं की अधिक आशंका रही है अतः इन्हे आहार के रूप में ग्रहण करने से पूर्व उच्च ताप पर पकाना अति आवश्यक होता है।
(6) आहार का संरक्षण: खाद्य-सामग्री को पकाने का एक उद्देश्य उसे अधिक समय तक सुरक्षित रखना भी है। कच्ची खाद्य-सामग्री शीघ्र ही सड़ने लगती है, परन्तु समुचित पाक-क्रिया द्वारा तैयार खाद्य-सामग्री बहुत समय तक सुरक्षित रह सकती है। उदाहरण के लिए-अचार, मुरब्बे, जैम, सॉस आदि के रूप में खाद्य सामग्री को बहुत अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी प्रकार कच्चा दूध शीघ्र ही फट जाता है, परन्तु यदि उसे पका लिया जाए, तो काफी समय तक ठीक हालत में रखा जा सकता है।
भोजन पकाते समय ध्यान देने योग्य बातें
भोजन पकाने से जहाँ एक ओर अनेक ल हैं, वहीं दूसरी ओर लापरवाही व असावधानीपूर्वक भोजन पकाने से अनेक हानियाँ भी सम्भव हैं। उदाहरण के लिए-गलत विधि से भोजन पकाने पर उसके पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अतः भोजन पकाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए
(1) स्वच्छ एवं कीटाणुरहित भोजन:
भोजन पकाते समय स्वच्छता का सर्वाधिक ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए ध्यान रखें कि
(क) गन्दे बर्तनों में कीटाणु उपस्थित रहते हैं; अतः भोजन सदैव स्वच्छ बर्तनों में पकाना चाहिए।
(ख) भोजन बनाने में प्रयुक्त पीतल के बर्तन कलई किए हुए होने चाहिए, अन्यथा भोजन के विषैला होने का भय रहता है।
(ग) भोजन बनाते समय गृहिणी के नाखून साफ-स्वच्छ होने चाहिए, क्योंकि नाखूनों की गन्दगी में अनेक कीटाणु होते हैं, जोकि अनेक रोगों को कारण बन सकते हैं।
(घ) खाना पकाते समय गृहिणी को अपने बाल बँधे व कसे हुए रखने चाहिए, ताकि उनके भोजन में गिरने की सम्भावना ही न रहे।
(ङ) रसोईघर में बर्तन पोंछते समय स्वच्छ कपड़ा प्रयुक्त करना चाहिए।
(2) स्वादिष्ट एवं पोषक तत्वों से युक्त भोजन: भोजन पकाने का मुख्य उद्देश्य स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन तैयार करना होता है; अतः
(क) भोजन को पकाते समय बर्तन को खुला नहीं रखना चाहिए। खुला रहने से भोजन वायु के सम्पर्क में आता है, जिससे इसमें कीटाणुओं व धूल गिरने की सम्भावना बनी रहती है तथा भोजन की सुगन्ध भी कम हो जाती है।
(ख) निश्चित अवधि से अधिक देर तक पकाने से भोजन का स्वाद नष्ट हो जाता है तथा उसके पोषकतत्त्वों के नष्ट होने की भी सम्भावना रहती है। अतः खाद्य-सामग्री को केवल उतने ही समय तक पकाना चाहिए जितना आवश्यक हो।।
(ग) भोजन को बार-बार गर्म करने से उसके पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
(घ) खाने का सोडा विटामिन 'बी' को नष्ट करता है; अतः इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
(ङ) चावल व शाक-सब्जियों को पकाते समय उनमें अधिक पानी नहीं डालना चाहिए। इनके पानी में पोषक तत्त्व होते हैं; अतः इसे फेंकना नहीं चाहिए।
(च) आवश्यकता से अधिक मसालों का उपयोग करने से भोजन का स्वाभाविक स्वाद नष्ट हो जाता है तथा स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
(छ) सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर ही काटना चाहिए। छीलने एवं काटने के बाद नहीं। धोना चाहिए। इससे कुछ पोषक तत्त्व पानी में बह जाते हैं।
In simple words: भोजन पकाने का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों को सुपाच्य, स्वादिष्ट, आकर्षक, और कीटाणुरहित बनाना तथा उन्हें लम्बे समय तक सुरक्षित रखना है। भोजन पकाते समय स्वच्छता, सही तापमान पर पकाना, और पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने का ध्यान रखना चाहिए ताकि भोजन पौष्टिक बना रहे।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में भोजन पकाने के उद्देश्यों और सावधानियों दोनों को समझाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें बहुआयामी जानकारी पूछी गई है। प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2. जल, भाप, चिकनाई तथा वायु के माध्यम से की जाने वाली पाक-क्रिया की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए ।
या भोजन बनाने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? भोजन बनाने की सर्वोत्तम विधि का वर्णन कीजिए ।
या भोजन पकाने की विभिन्न विधियों का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
या भोजन के पोषक तत्वों की सुरक्षा को ध्यान रखते हुए भोजन पकाने की विधियाँ लिखिए।
या भोजन पकाना क्यों आवश्यक है? भोजन पकाने की प्रमुख विधियाँ कौन-कौन सी हैं? स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम विधि कौन-सी है? वर्णन कीजिए ।
या भोजन पकाने की मुख्य विधियों का वर्णन कीजिए। इनके गुण व दोष लिखिए।
या जल के माध्यम से भोजन पकाने की दो विधियों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
या भाप से पकाया गया भोजन पौष्टिक और सुपाच्य क्यों होता है?
या तलने की किन्हीं दो विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: भोजन पकाना
भोजन को स्वादिष्ट, कीटाणुरहित व सुपाच्य बनाने की दृष्टि से भोजन को पकाने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है। आहार को अधिक समय तक संरक्षित रखने के लिए भी उसे पकाकर रखना जरूरी है। कच्ची खाद्य-सामग्री जल्दी ही सड़ने या गलने लगती है।
भोजन पकाने की विभिन्न विधियाँ
सभ्यता एवं आहार सम्बन्धी ज्ञान के विकास के साथ-साथ मनुष्य ने पाक-क्रिया अर्थात् भोज्यपदार्थों को पकाने की विभिन्न विधियों को भी खोज लिया है। अब भिन्न-भिन्न भोज्य पदार्थों से भिन्नभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इसके लिए भिन्न-भिन्न विधियों को भी अपनाया जाता है। यह सत्य है कि भोजन पकाने की प्रत्येक विधि में ताप की आवश्यकता होती है। ताप प्रत्येक पाक-क्रिया का एक आवश्यक कारक होता है, परन्तु पाक-क्रिया में ताप के अतिरिक्त एक अन्य कारक भी आवश्यक होता है। यह कारक होता है-पाक-क्रिया का माध्यम अर्थात् खाद्य-सामग्री को किस माध्यम से पकाया जाता है। यह माध्यम जल, वाष्प, चिकनाई (तेल या घी) तथा वायु में से कोई भी एक हो सकता है। इन माध्यमों के आधार पर ही पाक-क्रिया की विभिन्न विधियों का निर्धारण होता है। इस प्रकार भोज्य सामग्री को पकाने की विधियों को मुख्य रूप से निम्नलिखित चार वर्गों में विभक्त किया जाता है
1. जल के माध्यम से पकाना,
2. वाष्प के माध्यम से पकाना,
3. चिकनाई के माध्यम से पकाना तथा
4. वायु के माध्यम से पकाना। पाक-क्रिया की इन चारों विधियों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है
(1) जल के माध्यम से पकाना: इस विधि में गर्म जल में भोजन को पकाया जाता है। इसे दो प्रकार से पकाया जा सकता है--
(क) उबालकर पकाना:
यह भोजन पकाने की अत्यन्त प्राचीन एवं सरल विधि है। पकाये जाने वाले भोज्य-पदार्थों को किसी भगोने अथवा डेगची में पानी डालकर चूल्हे अथवा अँगीठी पर चढ़ा दिया जाता है। उबलने पर पानी का ताप लगभग 100° सेण्टीग्रेड रहता है। कुछ समय बाद भोजन पकाना और परोसना तथा तत्त्वों की सुरक्षा 211 भोज्य पदार्थ भली प्रकार गल जाते हैं। इस विधि द्वारा प्रायः दालें व चावल तथा आलू, अरवी व इसी प्रकार की अन्य सब्जियाँ पकाई जाती हैं। सब्जियों को छिलके सहित उबालकर पानी फेंक देने से इनके पोषक तत्त्व नष्ट नहीं होते, परन्तु चावल पकाते समय पानी का कम प्रयोग करना चाहिए तथा पकने के बाद पानी को फेंकना नहीं चाहिए क्योंकि इसमें पोषक तत्त्व विद्यमान रहते हैं। उबालकर पकाया गया भोजन हल्का, सुपाच्य व गुणवत्तापूर्ण होता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भोजन को उबालने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें खाद्य पदार्थ को पानी के साथ एक बर्तन में उच्च तापमान पर रखकर पकाया जाता है। यह विधि दालों, चावल और सब्जियों को पकाने में उपयोग की जाती है जिससे वे नरम और सुपाच्य हो जाते हैं।
(ख) धीमी आँच पर पकाना: इसमें भोज्य-पदार्थों को मसालों सहित थोड़े पानी में डालकर मन्द आँच (लगभग 82° सेण्टीग्रेड) पर पकाया जाता है साबुत दाल, सब्जियाँ व मांस आदि पकाने की यह एक उत्तम विधि है। जिनमें भोजन के पोषक तत्त्व नष्ट नहीं होते तथा भोजन भी सुपाच्य एवं स्वादिष्ट बनती है।
(2) वाष्प के माध्यम से पकाना: भोजन पकाने की यह एक आधुनिक विधि है जिसमें भोजन के अधिकांश पौष्टिक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं। भाप द्वारा भोजन पकाने के लिए प्रेशर कुकर नामक उपकरण का प्रयोग किया जाता है। यह भगोने के आकार का होता है जिसमें थोड़े से पानी के साथ भोज्य-पदार्थ डालकर वायु अवरोधक ढक्कन लगा दिया जाता है। इसे अँगीठी अथवा गैस बर्नर पर रखने से पानी गर्म होकर भाप में परिवर्तित हो जाता है। भाप के दबाव व ताप के द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में भोजन पक जाता है। विभिन्न प्रकार की दालें, सब्जियाँ व मांस आदि पकाने की यह सर्वोत्तम विधि है। इस विधि में ईंधन व समय की बचत होती है, भोजन के पोषक तत्त्व नष्ट नहीं होते तथा भोजन स्वादिष्ट एवं सुपाच्य बनता है।
(3) चिकनाई के माध्यम से पकाना: इस विधि में भोजन पकाने के लिए तेल व घी को माध्यम के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। तेल अथवा घी में भोज्य पदार्थों को पकाने की विधि को तलना कहते हैं। भोज्य-पदार्थों को तलने की निम्नलिखित तीन विधियाँ प्रचलित हैं।
(क) उथली विधि:
इस विधि में चौड़ी व उथली कड़ाही अथवा तवे को प्रयोग में लाया जाता है। कड़ाही में थोड़ा तेल अथवा घी डालकर उसे आग पर चढ़ा दिया जाता है। घी अथवा तेल के अच्छी तरह गर्म हो जाने पर इसमें भोज्य पदार्थों को तला जाता है। आलू की टिकिया, कटलेट्स, पराँठे, चीले, आमलेट इत्यादि इसी विधि से बनाए जाते हैं। कई बार इस विधि से मसाला डोसा जैसे व्यंजन तलने के लिए कड़ाही के स्थान पर सपाट तवे का प्रयोग किया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भोजन को उथली विधि से तलने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जहाँ एक चौड़ी कड़ाही में कम मात्रा में तेल या घी का उपयोग करके खाद्य पदार्थों को तला जाता है। इस विधि का उपयोग आलू की टिकिया, परांठे और आमलेट जैसे व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भोजन को गहरी विधि से तलने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें एक गहरी कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में तेल या घी का उपयोग करके खाद्य पदार्थों को पूरी तरह से डुबोकर तला जाता है। इस विधि से पूड़ी, कचौड़ी और समोसे जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
(ख) गहरी विधि: इस विधि में गहरी कड़ाही प्रयोग में लाई जाती है। कड़ाही में तेल अथवा घी पर्याप्त मात्रा में डालकर उसे खौलने तक गर्म (लगभग 175°सेण्टीग्रेड ताप) किया जाता है। अब भोज्य-पदार्थों को इसमें अच्छी प्रकार तला जाता है। इस विधि से प्रायः सभी प्रकार के पकवान; जैसे-पूड़ी-कचौड़ी, समोसे, पकौड़ियाँ तथा विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ इत्यादि बनाए जाते हैं। तलने की विधि द्वारा भोजन (पकवान) पकाने की विधि अत्यन्त प्राचीन है। इसकी अपनी लोकप्रियता अलग ही प्रकार की है। इस विधि से भोजन स्वादिष्ट तो बनता है, परन्तु गरिष्ठ होने के कारण सुपाच्य नहीं होता।
(ग) शुष्क विधि: इस विधि द्वारा केवल कुछ विशेष प्रकार की खाद्य सामग्री को ही पकाया जा सकता है। कुछ खाद्य-सामग्री ऐसी होती है जिनमें से ताप पाकर स्वतः ही चिकनाई निकलती है। उदाहरण के लिए-चर्बीयुक्त सूअर का मांस या बेकन आदि। इन खाद्य-सामग्रियों को तलने के लिए अतिरिक्त चिकनाई की आवश्यकता नहीं होती।
ध्यान रखने योग्य बातें: चिकनाई के माध्यम से भोजन पकाने या तलने के समय कुछ बातों को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखना चाहिए। कड़ाही में घी या तेल डालकर तब तक गर्म करना चाहिए, जब तक उसमें से कुछ-कुछ धुआँ-सा न उठने लगे तब उसमें तलने वाली सामग्री डालनी चाहिए। इस सामग्री को हिलाते तथा उलटते-पलटते रहना चाहिए। समुचित ढंग से पक जाने पर सामग्री को निकाल लेना चाहिए। निकालकर कुछ समय तक उसे पोनी में ही रखना चाहिए, जिससे कि फालतू घी या तेल निकल जाए। तलते समय सामग्री के छोटे-छोटे टुकड़े टूट-टूटकर घी में गिरते रहते हैं। इन्हें मुख्य सामग्री के साथ-साथ निकालते रहना चाहिए अन्यथा ये जल कर अप्रिय गन्ध छोड़ देते हैं। इसके अतिरिक्त तलते समय इस बात की विशेष सावधानी रखनी चाहिए कि गर्म घी या तेल में पानी के छींटे न पड़े। इससे गर्म घी छिटक कर, तलने वाले के शरीर पर पड़ सकता है।
(4) वायु के माध्यम से पकाना: वायु अग्नि प्रज्वलित करती है तथा अग्नि के सम्पर्क में आकर स्वयं भी गर्म हो जाती है। वायु का यह गुण ही भोजन पकाने की इस विधि का आधार है। वायु द्वारा भोजन पकाने की प्रचलित विधियाँ निम्नलिखित हैं
(क) भूनना (रोस्टिंग): इस विधि के अन्तर्गत बालू या राख को गर्म करके उसमें सम्बन्धित वस्तु को भून कर पकाया जाता है। इस विधि से बैंगन आदि का भुर्ता बनाया जा सकता है। आलू, शंकरकन्द, मक्का, बाजरा या चने आदि भूने जा सकते हैं। इस प्रकार से भूनी हुई वस्तुएँ काफी स्वादिष्ट व पाचक होती हैं। किसी प्रकार की चिकनाई आदि का प्रयोग न होने के कारण ये सामग्री सुपाच्य होती है।
(ख) सेंकना:
सामान्य रूप से भूनना एवं सेंकना एक ही समझा जाता है, परन्तु वास्तव में इन दोनों क्रियाओं में पर्याप्त अन्तर है। सेंकने की क्रिया के अन्तर्गत सम्बन्धित खाद्य-सामग्री को आग के सम्पर्क में लाया जाता है। सामान्य रूप से धुआँरहित, जलते हुए अंगारों पर वस्तुओं को सेंका जाता है। भुट्टे, कबाब आदि इसी विधि से सेंके जाते हैं।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र भोजन को सेंकने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें खाद्य पदार्थों को सीधे आग या गर्म अंगारों के सम्पर्क में लाकर पकाया जाता है। यह विधि भुट्टे और कबाब जैसी चीजों को पकाने के लिए इस्तेमाल होती है, जिससे वे बाहरी तौर पर करारे और अन्दर से नरम होते हैं।
(ग) तन्दूर अथवा भट्टी में पकाना (बेकिंग): रोटी, डबलरोटी, बन व बिस्कुट आदि इस विधि द्वारा ही पकाये जाते हैं। चित्र 15.4-सेंकना मिट्टी का बना हुआ तन्दूर रोटी सेंकने के लिए तथा ओवन अथवा विशिष्ट भट्टी में बिस्कुट, डबल रोटी, बन, पेस्टी, नानखताई आदि पकाए जाते हैं।
पाक-क्रिया की सर्वोत्तम विधि
भाप देकर भोजन पकाने की कुकर्स की विधि बहुत अच्छी है। इस रीति से भोजन पकाने में पौष्टिक तत्त्व नष्ट नहीं होने पाते तथा हल्के व सरलता से पचने योग्य हो जाते हैं। इस रीति से कार्य करने में समय कम लगता है। जलने का भय नहीं रहता और ईंधन भी कम मात्रा में व्यय होता है। अतः मितव्ययिता तथा समय की बचत-सभी दृष्टियों से यह विधि श्रेष्ठ है।
In simple words: भोजन पकाने की विभिन्न विधियाँ जल (उबालना, धीमी आँच पर), वाष्प (प्रेशर कुकर), चिकनाई (उथली, गहरी, शुष्क तलना), और वायु (भूनना, सेंकना, बेकिंग) के माध्यम से होती हैं। वाष्प से पकाना सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि यह पौष्टिक तत्वों को सुरक्षित रखता है, ऊर्जा बचाता है और भोजन को सुपाच्य बनाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विधियों का वर्णन करते समय प्रत्येक विधि का माध्यम (जल, भाप, चिकनाई, वायु), उसके उदाहरण और पौष्टिक तत्वों पर प्रभाव को स्पष्ट करें। सर्वोत्तम विधि के गुण विशेष रूप से उजागर करें।
Question 3. भोजन परोसने की शैलियों का वर्णन करते हुए अपनी दृष्टि में उपयुक्त शैली का उल्लेख कीजिए।
या भोजन परोसने की विभिन्न शैलियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। आवश्यक हो तो चित्र भी बनाइए ।
या “भोजन परोसना एक-कला है।” स्पष्ट कीजिए । भोजन परोसने की देशी, विदेशी विधियों के बारे में भी लिखिए।
या भोजन परोसने की देशी व विदेशी शैली में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
या भोजन परोसना एक कला है। क्यों ?
या भोजन परोसने की कौन-सी विधियाँ हैं? भारतीय ढंग से भोजन परोसने की विधि लिखिए।
Answer: भोजन परोसना
पौष्टिक भोजन तैयार करना गृहिणी का एक महत्त्वपूर्ण दायित्व है, परन्तु परिवार के सदस्यों एवं अतिथियों की भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न करना भी गृहिणी का उतना ही महत्त्वपूर्ण दायित्व है। अतः भोजन परोसना पौष्टिक व स्वादिष्ट भोजन तैयार करने के समान ही महत्त्व रखता है। इसके लिए गृहिणी को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
1. भोजन परोसने वाले का व्यवहार विनम्र, मनोहारी तथा कुशल होना चाहिए।
2. भोजन परोसने का स्थान व बर्तन स्वच्छ होने चाहिए।
3. भोज्य-पदार्थों को विधि के अनुसार उपयुक्त स्थान पर ही रखना चाहिए।
4. भोजन परोसने के स्थान अथवा मेज पर फूलदान व अन्य अनेक प्रकार की कलात्मक सजावट करने से भोजन के आकर्षण में कई गुना वृद्धि हो जाती है। । उपर्युक्त वर्णन से स्पष्ट हो जाता है कि भोजन परोसना एक कला है, जो कि भोजन के प्रति रुचि एवं आकर्षण में वृद्धि करती है।
भोजन परोसने की विभिन्न शैलियाँ (विधियाँ)
प्रायः भोजन परोसने की तीन निम्नलिखित शैलियाँ (विधियाँ) प्रचलित हैं (क) देशी शैली, (ख) विदेशी अथवा पाश्चात्य शैली तथा (ग) बुफे शैली ।
(क) देशी शैली : यह अति प्राचीन भारतीय शैली है जिसमें भोजन ग्रहण करने वालों के लिए भूमि पर आसन बिछाए जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अलग थाली में भोजन परोसा जाता है। थाली में शुष्क भोज्य-पदार्थ तथा कटोरियों में तरल भोज्य-पदार्थ परोसे जाते हैं। प्रारम्भ में थोड़ी मात्रा में भोजन परोसा जाता है तथा फिर भोजन ग्रहण करने वाले की आवश्यकतानुसार और भोजन परोसा जाता है।
विशेषताएँ: देशी शैली में भोजन परोसने की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. भोजन परोसते समय प्रत्येक खाद्य-पदार्थ के लिए अलग-अलग चम्मच, चमचा व कल्छी आदि होने चाहिए।
2. प्रथम बार कम भोजन परोसना चाहिए तथा फिर खाने वालों से पूछ-पूछ कर विभिन्न खाद्य पदार्थ परोसने चाहिए। इससे भोजन व्यर्थ नहीं जाता।
3. तरल पदार्थों को कटोरियों में ही परोसना चाहिए।
4. थाली में चपातियाँ, पूड़ी व चावल आदि अलग-अलग परोसे जाने चाहिए।
5. भोजन का स्थान व बर्तन स्वच्छ होने चाहिए।
6. भोजन परोसने से पूर्व गृहिणी को स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिए।
(ख) विदेशी अथवा पाश्चात्य शैली: यह शैली परम्परागत शैली से सर्वथा विपरीत है। इस शैली में भोजन एक विशिष्ट मेज (डाइनिंग टेबल) पर परोसा जाता है तथा खाने वाले कुर्सियों (डाइनिंग चेयर्स) पर बैठते हैं। इस शैली में भोजन एक ही बार में परोस दिया जाता है। इस शैली की अन्य विशिष्ट बातें हैं
1. मेज के केन्द्र में प्लेट में चपातियाँ, एक विशिष्ट रचना की प्लेट (राइस प्लेट) में चावल तथा डोंगों में सब्जियाँ प्रायः एक ही बार में परोस दी जाती हैं।
2. प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक बड़ी प्लेट, एक छोटी प्लेट, छुरी, काँटा तथा चम्मच रखी जाती है।
3. तरल पदार्थों के लिए बाउल प्रयुक्त किए जाते हैं। बाउल को प्लेट के दाईं ओर रखना चाहिए ।
4. छुरी, प्लेट के दाईं ओर तथा उसकी धार प्लेट की ओर होनी चाहिए। काँटा प्लेट के बाईं ओर रखा जाना चाहिए।
5. मेज पर आवश्यकतानुसार मसालेदानियाँ, अचार वे मुरब्बे आदि केन्द्रीय भाग में रखे जा सकते हैं।
6. प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस विधि में गिलास में सजाकर एक नेपकिन भी रखा जाता है।
(ग) बुफे शैली: भोजन करने वालों की संख्या अधिक होने पर प्रायः इस शैली को प्रयोग में लाया जाता है। सामाजिक आयोजनों, विवाह आदि बड़ी दावतों के लिए यह एक सर्वोत्तम आदर्श विधि है। इस विधि में. एक बड़े हॉल अथवा पंडाल में एक ओर लम्बी मेजें लगा दी जाती हैं। इन्हें विधिपूर्वक सजाया जाता है। मेजों पर निश्चित दूरियों पर प्लेटें, छुरियाँ, काँटे व चम्मच आदि सेट कर रख दिए जाते हैं। प्रत्येक सेट के पास में डोंगों में सब्जियाँ तथा अलग-अलग प्लेट में चपातियाँ, पूड़ियाँ, चावल आदि रख दिए जाते हैं। पंडाल के एक कोने में जल की व्यवस्था कर दी जाती है। बुफे शैली में भोजन औपचारिक, अर्द्ध-औपचारिक तथा अनौपचारिक विधि से परोसा जाता है। औपचारिक ढंग में अतिथि स्वयं खाना परोसकर एक ओर खड़े होकर खाते हैं। अर्द्ध-औपचारिक विधि में मेजबान अपने मित्रों अथवा रिश्तेदारों के सहयोग से अतिथियों को भोजन परोसता है। अनौपचारिक विधि में वेटर अतिथियों को भोजन परोसते हैं।
विशेषताएँ: इस प्रकार इस शैली में
(1) अतिथि खड़े होकर भोजन करते हैं।
(2) अतिथियों की संख्या अधिक होती है।
(3) मेजों की एक लम्बी कतार की व्यवस्था में भोजन प्रायः एक से अ सेटों में सजाकर एक साथ परोसा जाता है।
(4) सामान्यतः अतिथि अपने लिए स्वयं ही भोजन परोसते हैं।
In simple words: भोजन परोसने की तीन मुख्य शैलियाँ हैं: देशी (ज़मीन पर आसन, अलग थाली, कम मात्रा में परोसना), विदेशी/पाश्चात्य (डाइनिंग टेबल, एक ही बार में पूरा परोसना, कटलरी का उपयोग) और बुफे (बड़े आयोजनों के लिए, मेहमान स्वयं खाना परोसते हैं)। गृहिणी को भोजन परोसते समय विनम्रता, स्वच्छता और आकर्षक प्रस्तुति का ध्यान रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: तीनों शैलियों की मुख्य विशेषताओं और उनके उपयोग के अवसरों को स्पष्ट रूप से समझाएँ। परोसने की प्रक्रिया में स्वच्छता और व्यवस्था के महत्व पर जोर दें।
Question 4. खाद्य-पदार्थों के संरक्षण से आप क्या समझते हैं? खाद्य-पदार्थों के संरक्षण के कतिपय उपायों का उल्लेख कीजिए।
Answer: खाद्य-पदार्थों का संरक्षण व उसके लाभ
खाद्य-पदार्थों को एक लम्बी अवधि तक फफूदी एवं जीवाणुओं से सुरक्षित रखने की विधियों को खाद्य-पदार्थों का संरक्षण कहते हैं। इससे होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं
1. प्रायः गृहिणियाँ फसल के समय पूरे वर्ष के लिए सस्ता अनाज खरीदकर रख लेती हैं। यदि यह अनाज संग्रह काल में सुरक्षित रहे, तो गृहिणी को धन की पर्याप्त बचत होती है तथा उसे अनाज खरीदने के लिए बार-बार बाजार जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
2. मौसम की सब्जियों को यदि सुरक्षित रूप से संगृहीत कर लिया जाए, तो उन्हें विपरीत मौसम में उपयोग में लाया जा सकता है।
3. महँगे भोज्य-पदार्थों के शेष बचकर व्यर्थ होने पर पर्याप्त आर्थिक हानि होती है जिसका निराकरण खाद्य-संरक्षण के उपाय अपनाकर किया जा सकता है।
संरक्षण की विधियाँ
प्रमुख खाद्य-पदार्थों के संरक्षण की प्रचलित विधियाँ निम्नलिखित हैं
(1) स्वच्छता से संग्रह करके: प्रायः गन्दे स्थानों व बर्तन आदि में फफूदी व जीवाणुओं की उपस्थिति की सम्भावना अधिक रहती है; अतः भोज्य पदार्थों का संग्रह स्वच्छ स्थान एवं स्वच्छ बर्तनों में करना चाहिए।
(2) सुखाकर: नमी व सीलन में फफूदी व जीवाणु आसानी से पनपते हैं। अतः खाद्य-पदार्थों को शुष्क स्थान में रखना चाहिए। कुछ खाद्य-पदार्थ; जैसे- आलू, मेथी, गाजर, पोदीना, मटर, चना, फल व मेवे आदि; शुष्क अवस्था में हर प्रकार से सुरक्षित रहते हैं। मटर, चना, गोभी आदि को तो सामान्यतः शुष्कीकरण या निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन) द्वारा पूर्णरूप से जलरहित कर डिब्बों आदि में बन्द कर संगृहीत कर लिया जाता है तथा विपरीत मौसम में इन सब्जियों का आनन्द लिया जाता है।
(3) उबालकर: अनेक खाद्य-पदार्थों को उबालकर जीवाणुरहित कर लिया जाता है। अब इन्हें वायुरोधक डिब्बों में भरकर काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
(4) चाशनी में रखकर: अनेक फलों को शक्कर की चाशनी में पकाकर मुरब्बों के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।
(5) अचार, सॉस आदि बनाकर: प्रायः सभी घरों में आम, गोभी, गाजर, मिर्च आदि का अचार डाला जाता है, जो कि एक लम्बी अवधि तक सुरक्षित रहता है। इसका कारण है नमक व सरसों के तेल का प्रयोग जो फफूदी व जीवाणुओं से अचार को सुरक्षित रखते हैं। टमाटर की चटनी व सॉस को सुरक्षित रखने के लिए इनमें उपयुक्त मात्रा में सोडियम बेन्जोएट तथा साइट्रिक अम्ल मिलाना सर्वोत्तम रहता है।
(6) ठण्डा रखकर: आलू व अन्य अनेक प्रकार की सब्जियों को शीतगृह में सुरक्षित रखना एक लोकप्रिय व्यापारिक विधि है। इस विधि का प्रयोग घरों में रेफ्रिजेरेटर के रूप में किया जाता है। रेफ्रिजेरेटर में विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ, भोज्य सामग्री, दूध, अण्डे व मांस आदि को काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
(7) विकिरण विधि द्वारा: अनेक खाद्य-पदार्थों को विकिरण उपचार द्वारा जीवाणुरहित कर सुरक्षित रखा जाता है।
(8) अनाजों के संरक्षण की विधि: अनाजों को प्रायः शुष्क स्थानों पर टंकियों में भरकर रखा जाता है। विभिन्न कीटनाशकों का प्रयोग कर इन्हें घुन जैसे हानिकारक कीड़ों से सुरक्षित रखा जाता है। अनाज को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न विधियों द्वारा इसे चूहों से बचाना चाहिए।
(9) दूध को सुरक्षित रखने की विधि: कम ताप पर दूध प्रायः सुरक्षित रहता है। अधिक समय तक दूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चुरीकरण की विधि अपनाई जाती है। इसमें दूध को 65° सेण्टीग्रेड ताप पर आधा घण्टा रखकर उसे किसी बोतल अथवा बन्द बर्तन में शीतल स्थान पर रख दिया जाता है।
(10) अण्डा, मांस व मछली को सुरक्षित रखना: अण्डे को अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए कम तापक्रम ही एकमात्र उपाय है। मांस को मक्खियों से बचाना चाहिए। इसे सुरक्षित रखने के लिए बर्फ के तापक्रम पर रखना चाहिए। मछली को सुरक्षित रखना कठिन कार्य है। कम ताप पर भी मछली केवल कुछ समय तक ही सुरक्षित रहती है। व्यापारिक स्तर पर मछलियों को शुष्क अवस्था में डिब्बों में बन्द कर सुरक्षित रखा जाता है।
In simple words: खाद्य-पदार्थों के संरक्षण का अर्थ है उन्हें फफूंदी और जीवाणुओं से लम्बी अवधि तक बचाकर रखना ताकि वे खराब न हों। इसके लाभों में धन की बचत, मौसमी सब्जियों का उपयोग और खाद्य हानि से बचाव शामिल हैं। संरक्षण की मुख्य विधियों में स्वच्छता, सुखाना, उबालना, चाशनी में रखना, अचार बनाना, ठण्डा रखना, विकिरण उपचार, तथा अनाजों और दूध का विशेष संरक्षण शामिल है।
🎯 Exam Tip: खाद्य-संरक्षण के लाभों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाएँ। विभिन्न संरक्षण विधियों का उल्लेख करते हुए उनके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों (जैसे नमी हटाना, जीवाणु नष्ट करना) को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 5. भोजन में मिलावट से क्या अभिप्राय है? शुद्ध भोजन को किन पदार्थों की मिलावट से अशुद्ध किया जाता है?
या मिलावटी खाद्य-पदार्थों से क्या हानियाँ होती हैं? मिलावटी पदार्थों से बचने के उपाय बताइए ।
Answer: भोजन में मिलावट का अर्थ
खाद्य-पदार्थों में मिलावट का अर्थ है “शुद्ध भोज्य पदार्थों में अन्य सस्ते खाने या न खाने योग्य पदार्थों को मिलाकर उनके गुणों में कमी करना या उन्हें हानिकारक बनाना ।” आजकल अधिकांश वस्तुएँ मिलावटयुक्त ही मिल रही हैं। दूध में पानी तथा अनाजों, मसालों में कुछ रासायनिक या वनस्पति पद के छिलके, धूल-गर्द मिलना साधारण-सी बात है। अब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि भोज्य पदार्थों में इतनी मिलावट का कारण क्या है? इसका एक स्पष्ट कारण विक्रेता द्वारा धन-लाभ को प्राथमिकता दिया जाना है। मुख्य वस्तुओं के ही दाम पर असली पदार्थों के समान रूप-गुण वाली सस्ती या खराब वस्तुएँ बेचने के लिए उन्हें मुख्य पदार्थों के साथ मिलाकर बेचा जाता है, अज्ञानतावश लोग उन वस्तुओं को खरीद लेते हैं, जिससे उसके धन एवं स्वास्थ्य दोनों की हानि होती है। अतः मिलावटी वस्तुओं से बहुत सावधान रहना चाहिए। मिलावटी वस्तुओं को लोग बड़ी चालाकी से बेचते हैं। फिलहाल तो ब्राण्डेड पैक वस्तुएँ भी बाजार में मिलावटी उपलब्ध हैं। अतः इससे बचने के लिए आपको इस बात का भी ज्ञान होना चाहिए कि किन-किन वस्तुओं में प्रायः मिलावट की जाती है।
विभिन्न भोज्य-पदार्थों में मिलावट:
व्यापारी भिन्न-भिन्न खाद्य-पदार्थों में निम्न प्रकार की सस्ती व हानिकारक वस्तुओं की मिलावट करते हैं
1. अनाज: सस्ते व सड़े-गले अनाज, कंकड़, मिट्टी तथा टूटे हुए अनाज ।
2. आटा, मैदा: पुराना सड़ा आटा या मैदा कभी-कभी खड़िया मिट्टी ।
3. घी: वनस्पति घी, चर्बी ।
4. दूध: पानी, अरारोट, अन्य पशुओं का दूध मिलाना अथवा उसमें से वसा निकाल लेना। अब तो यूरिया, रिफाइण्ड तेल आदि से सिन्थेटिक दूध भी तैयार किया जाने लगा है, जिसे दूध में मिलाकर बेचा जा रहा है।
5. तेल: अखाद्य-पदार्थों; जैसे-अरण्डी आदि का तेल मिलाना।
6. टमाटर की चटनी (Sauce) में कद्दू या अन्य सड़ी सब्जी का प्रयोग ।
7. काली मिर्च: पपीते के बीज ।
8. लौंग: तेल निकाल कर सुकड़ी हुई छोटी-छोटी लौग मिलाना।
9. जीरा: जीरे के पौधे का बीज, कंकड़, मिट्टी या सीके मिलाना।
10. पिसा धनिया: धनिये की भूसी, राँगा हुआ लकड़ी का बुरादा, घोड़े की सूखी हुई लीद ।
11. पिसी लाल मिर्च: गेरु, लाल ईंट का चूरा, सूखी लाले बेर के छिलके का बुरादा ।
12. पिसी हल्दी: पीली मिट्टी या रंगा हुआ अरारोट ।
13. पिसी खटाई: पीली आम की गुठली ।
14. चाय: प्रयोग की हुई चाय की पत्ती, पुरानी या खराब पत्तियाँ, चाय की पत्ती का चूरा तथा मिट्टी ।
15. मिठाइयाँ: मैदा, अरारोट, मिलावटी खोया व वर्जित रंग।
16. शर्बत: चीनी के बजाय सैक्रीन (एक रासायनिक मीठा पदार्थ) ।
17. शहद: गुड़ की चाशनी ।।
18. केसर: पीली रँगी मुँज या भुट्टे के रंगे हुए छोटे-छोटे रेशे ।
इस प्रकार उपर्युक्त तरीकों से अनाजों व मसालों में मिलावट करके अपनी अशुद्ध वस्तुओं को बेचकर लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है।
मिलावटी खाद्य-पदार्थों से हानियाँ
मिलावटी खाद्य-पदार्थों के सेवन से निम्नलिखित हानियाँ होने की प्रबल सम्भावना होती है
1. मिलावटी खाद्य पदार्थों का प्रयोग करते रहने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है।
2. मिलावटी व अशुद्ध भोजन से हैजा, पेचिश, गले की खराबियाँ आदि रोग हो सकते हैं।
3. खाने वाले रंग कैंसर का. कारण भी बन जाते हैं।
4. ऐसे भोजन से कभी-कभी 'फुड प्वायजनिंग' से लोगों की मृत्यु तक होती देखी जाती है।
5. मिलावटी वस्तुएँ खरीदने से क्रेता को निश्चित रूप से आर्थिक लाभ के स्थान पर हानि होती है।
मिलावट से बचाव के उपाय
मिलावट से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय काम में लाए जाते हैं
1. बाजार के पिसे मसालों की अपेक्षा घर में पिसे मसाले प्रयुक्त कीजिए अथवा चक्की पर पिसवा लीजिए।
2. सदैव कम्पनी संस्तुत विश्वसनीय दुकान से ही स्टैण्डर्ड कम्पनी का माल खरीदिए।
3. दूध को अपने सामने ही दुहकर लीजिए अथवा विश्वसनीय डेरी से खरीदिए ।
In simple words: भोजन में मिलावट का अर्थ है शुद्ध खाद्य पदार्थों में सस्ते या हानिकारक पदार्थों को मिलाना, जिससे उनके गुण कम हो जाते हैं या वे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बन जाते हैं। मिलावट के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, हैजा, पेचिश, कैंसर और फूड पॉइजनिंग जैसे रोग हो सकते हैं, और आर्थिक नुकसान भी होता है। इससे बचने के लिए घर में पीसे मसाले उपयोग करें, विश्वसनीय ब्रांड खरीदें और दूध सामने ही दुहवाएं।
🎯 Exam Tip: मिलावट की परिभाषा, मिलाए जाने वाले सामान्य पदार्थों के उदाहरण और उनसे होने वाली हानियों को विस्तृत रूप से लिखें। बचाव के उपायों को व्यावहारिक बिंदुओं में समझाएँ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. पाक-क्रिया का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्राकृतिक अवस्था में उपलब्ध खाद्य-सामग्री को आहार के रूप में ग्रहण करने के लिए कृत्रिम रूप से तैयार करने की व्यवस्थित क्रिया को ही पाक-क्रिया कहते हैं। पाक-क्रिया के अन्तर्गत प्राकृतिक अवस्था में उपलब्ध खाद्य-सामग्री को जल, ताप, चिकनाई तथा भाप एवं वायु आदि द्वारा ऐसा रूप दिया जाता है जो इस सामग्री को अधिक स्वादिष्ट, नर्म एवं सुपाच्य बना देता है। जब हम किसी सब्जी को लेकर उसे धोते, छीलते एवं काटते हैं या उबालते एवं छोंकते हैं, तब इन समस्त क्रियाओं को सम्मिलित रूप से पाक-क्रिया ही कहा जाता है। इसी प्रकार से जब हमें गेहूं को पीसते, आटा गूंथते तथा रोटी बेलकर उसे तवे पर सेंकते हैं, तो ये समस्त क्रियाएँ भी पाक-क्रिया की ही उप-क्रियाएँ होती हैं। इस प्रकार पाक-क्रिया अपने आप में एक विस्तृत एवं व्यवस्थित क्रिया है। विभिन्न प्रकार के बर्तनों के निर्माण से भी पाक-क्रिया के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रेशर कुकर है।
In simple words: पाक-क्रिया खाद्य पदार्थों को प्राकृतिक अवस्था से बदलकर स्वादिष्ट, नरम और सुपाच्य बनाने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। इसमें धोना, काटना, उबालना, तलना और सेंकना जैसी सभी क्रियाएँ शामिल हैं, जो भोजन को खाने योग्य बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: पाक-क्रिया की परिभाषा को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालें।
Question 2. तलने के लाभ एवं हानियाँ लिखिए ।
Answer: तलने के लाभ-तलकर भोजन पकाने के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं
1. तलकर पकाया गया भोजन अधिक स्वादिष्ट एवं रुचिकर होता है।
2. तले हुए भोजन में एक प्रकार की मनमोहक सुगन्ध एवं आकर्षक रंग आ जाता है, जिसका खाने वाले पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
3. तलकर पकाया गया भोजन खा लेने के बाद काफी समय तक पुनः भूख नहीं लगती।
तलने की हानियाँ: तलकर भोजन बनाने से निम्नलिखित हानियाँ होती हैं
1. चिकनाई के माध्यम से तलकर पकाया गया भोजन गरिष्ठ हो जाता है तथा शीघ्र नहीं पचता।
2. तल कर पकाए गए भोजन के विटामिन तथा कुछ पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
3. अधिक तला हुआ भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इससे पेट व गले में जलन हो सकती है।
In simple words: तलकर भोजन बनाने से खाना स्वादिष्ट और आकर्षक बनता है, साथ ही जल्दी भूख नहीं लगती। हालांकि, इसके नुकसान भी हैं क्योंकि तला हुआ भोजन गरिष्ठ होता है, पचने में मुश्किल होता है, पोषक तत्व नष्ट करता है और पेट व गले में जलन जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है।
🎯 Exam Tip: तलने के लाभ और हानियों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें, जिससे दोनों पहलुओं का संतुलन दिखाई दे। स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. पाक-क्रियाओं का पौष्टिक तत्त्वों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
या प्रोटीन पर पाक-क्रिया का क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रोटीन पर पकाने का प्रभाव: जन्तुजन्य प्रोटीन पकाने पर प्रायः कठोर हो जाने के कारण सुपाच्य नहीं रहती। वनस्पतिजन्य प्रोटीन पकाने पर कोशा-भित्तियों से बाहर आ जाती है; अतः अधिक सुपाच्य हो जाती है। भोज्य-पदार्थों को तलकर पकाने से उनमें उपस्थित प्रोटीन अत्यधिक कड़ी तथा अपाच्य हो जाती है; अतः प्रोटीनयुक्त भोज्य-पदार्थों को तलना नहीं चाहिए ।
विटामिन पर पकाने का प्रभाव: विटामिन 'ए' व 'डी' अत्यधिक उच्च ताप पर नष्ट हो जाते हैं, परन्तु भोज्य-पदार्थों को सामान्य विधि के अनुसार पकाने पर इन विटामिनों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। विटामिन 'बी' पर भी ताप का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, परन्तु जल में विलेय होने के कारण भोज्य-पदार्थों को अधिक पकाने पर इसका कुछ भाग जल के साथ ही नष्ट हो जाता है। सब्जी का हरा रंग बनाये रखने के लिए प्रयुक्त सोडा बाइकार्बोनेट विटामिन 'बी' को नष्ट कर देता है। इसलिए हरी सब्जियों को पकाते समय खाने के सोडे का प्रयोग नहीं करना चाहिए। विटामिन 'सी' भी जल में घुलनशील होता है तथा उच्च ताप पर यह नष्ट हो जाता है।
In simple words: पाक-क्रिया से प्रोटीन जन्तुजन्य होने पर कठोर हो सकता है, लेकिन वनस्पतिजन्य प्रोटीन सुपाच्य हो जाता है। विटामिन 'ए', 'डी' और 'सी' उच्च ताप पर या पानी में घुलनशील होने के कारण नष्ट हो सकते हैं, जबकि विटामिन 'बी' सामान्य ताप पर ज्यादा प्रभावित नहीं होता, पर सोडा बाइकार्बोनेट से नष्ट हो सकता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन और विभिन्न विटामिनों पर पकाने के प्रभावों को अलग-अलग समझाएँ। किन परिस्थितियों में पोषक तत्व नष्ट होते हैं, इसका स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 4. तरकारियों को छीलने से क्या हानि होती है?
Answer: पाक-क्रिया के लिए तरकारियों को छीला तथा काटा भी जाता है। तरकारियों के छिलकों में विटामिन व खनिज लवण पाए जाते हैं। अतः तरकारियों को छीलने से इन पोषक तत्त्वों की हानि होती है, जिनसे बचने के लिए
1. तरकारियों को भली प्रकार धोकर छिलकायुक्त ही काटकर पकाना चाहिए । इससे छिलके में उपस्थित पोषक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं।
2. मोटे छिलके वाली तरकारियों के छिलके अधिक गहरे नहीं छीलने चाहिए, क्योंकि पोषक तत्त्वों की छिलकों के साथ ही निकल जाने की सम्भावना रहती है।
In simple words: तरकारियों को छीलने से उनके छिलकों में मौजूद विटामिन और खनिज लवण नष्ट हो जाते हैं। इस हानि से बचने के लिए सब्जियों को अच्छी तरह धोकर छिलके सहित काटना चाहिए या मोटे छिलके वाली सब्जियों को ज्यादा गहरा नहीं छीलना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सब्जियों के छिलकों के महत्व और पोषक तत्वों के नुकसान से बचने के उपायों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 5. पाक-क्रिया का वसा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: साधारणतः पाक-क्रिया का वसा पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता, परन्तु अधिक ताप पर निरन्तर गर्म करने से वसा का एक नया यौगिक बन जाता है, जिसे एक्रोलीन कहा जाता है। इस यौगिक की एक विशेष गन्ध होती है; अतः इस अवस्था में वसायुक्त भोजन में एक तीखी गन्ध आने लगती है। यह एक्रोलीन नामक यौगिक खाने योग्य नहीं होता। अतः इससे युक्त आहार ग्रहण करने से हानि हो। सकती है। यदि वसायुक्त भोजन को बार-बार गर्म किया जाए तो वह सरलता से पचने योग्य नहीं रह जाता। वसा अधिक ताप के प्रभाव से ग्लिसरॉल तथा स्निग्ध के रूप में विघटित भी हो जाती है।
In simple words: पाक-क्रिया के दौरान अत्यधिक या बार-बार गर्म करने से वसा एक हानिकारक यौगिक 'एक्रोलीन' में बदल जाती है, जिससे भोजन का स्वाद खराब हो जाता है और वह अपाच्य हो जाता है। यह वसा को ग्लिसरॉल और स्निग्ध में भी विघटित कर सकती है।
🎯 Exam Tip: वसा पर अत्यधिक ताप के प्रभावों को स्पष्ट करें और एक्रोलीन के निर्माण व उसके हानिकारक प्रभावों को उजागर करें।
Question 6. पाक-क्रिया का कार्बोहाइड्रेट्स पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: पाक-क्रिया का कार्बोहाइड्रेट्स पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ता है। हम भोजन में सामान्य रूप से स्टार्च एवं शर्करा के रूप में कार्बोहाइड्रेट्स ग्रहण करते हैं। स्टार्च को जब पकाया जाता है तो वे पककर मुलायम हो जाते हैं तथा कुछ फूल जाते हैं। इस अवस्था में इनका पाचन सरल हो जाता है। यदि स्टार्च को क्वथनांक तक उबाला जाए तो इसका सेल्यूलोज वाला भाग फट जाता है। यदि इस प्रकार से पकते हुए स्टार्च में कुछ मात्रा में ठण्डा पानी मिला दिया जाए तो स्टार्च के कण अलग-अलग हो जाते हैं तथा भोज्य-पदार्थ लेई के समान हो जाता है। इससे भिन्न, यदि स्टार्च को जलरहित ही शुष्क विधि से पकाया जाए, तो स्टार्च का रंग हल्का बादामी हो जाता है। यदि कुछ अधिक ताप पर स्टार्च को गर्म किया जाए, तो उसका रंग काला हो जाता है। ताप पाकर यह स्टार्च डैक्स्ट्रीन का रूप ग्रहण कर लेता है। इस रूप में स्टार्च अधिक सुपाच्य हो जाता है। इसी प्रकार, यदि शर्करा को शुष्क अवस्था में गर्म किया जाए, तो उसका रंग भूरा हो जाता है। परन्तु यदि शर्करा को जल के साथ गर्म किया जाए, तो वह घुल जाती है तथा एक प्रकार से शर्बत का रूप ग्रहण कर लेती है।
In simple words: पाक-क्रिया स्टार्च को मुलायम और सुपाच्य बनाती है; उबालने पर उसका सेल्यूलोज फट सकता है और शुष्क ताप पर हल्का बादामी या काला हो सकता है, जिससे वह डैक्स्ट्रीन में बदल जाता है। शर्करा शुष्क ताप पर भूरी हो जाती है, जबकि जल के साथ गर्म करने पर घुल कर शरबत बन जाती है।
🎯 Exam Tip: स्टार्च और शर्करा पर ताप और जल के अलग-अलग प्रभावों को स्पष्ट करें। डैक्स्ट्रीन जैसे परिवर्तनों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. पाक-क्रिया का खनिज-लवणों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: पाक-क्रिया का खनिज-लवण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जब विभिन्न खाद्य-सामग्रियों को जल के साथ पकाया जाता है, तो विभिन्न खनिज-लवण जल में आ जाते हैं। इस अवस्था में यदि पकी हुई खाद्य-सामग्री में से अतिरिक्त पानी बहा दिया जाए तो विभिन्न खनिज लवणों के नष्ट हो जाने की सम्भावना रहती है। अतः इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खाद्य-सामग्री को केवल उतने ही जल में उबाला जाए जितना पकाने में प्रयुक्त हो जाए। इसके अतिरिक्त इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि सब्जियों को पकाने से पूर्व अधिक समय तक काटकर नहीं रखना चाहिए। सब्जियों को काटने एवं छीलने से पहले ही अच्छी तरह से धो लेना। चाहिए। छीलकर एवं काटकर धोने से बहुत-से खनिज-लवण नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि यदि खाद्य सामग्री को सावधानीपूर्वक पकाया जाए, तो खनिज लवणों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।
In simple words: पाक-क्रिया के दौरान खनिज-लवण पानी में घुल सकते हैं, और यदि अतिरिक्त पानी फेंक दिया जाए, तो वे नष्ट हो जाते हैं। इससे बचने के लिए, सब्जियों को केवल आवश्यक पानी में उबालें, उन्हें ज्यादा देर तक काटकर न रखें, और काटने व छीलने से पहले अच्छी तरह धो लें, ताकि खनिज-लवण सुरक्षित रहें।
🎯 Exam Tip: खनिज-लवणों के नुकसान के मुख्य कारणों (पानी में घुलना, अत्यधिक काटना/छीलना) पर ध्यान केंद्रित करें और उनसे बचने के लिए व्यावहारिक सुझाव दें।
Question 8. घर में अनाजों की सुरक्षा आप कैसे करेंगी?
Answer: घर में अनाजों की सुरक्षा: के लिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
1. खुले हुए अनाज को समय-समय पर सुखाना चाहिए।
2. अनाजों को घुन, सुरसुरी आदि से बचाने के लिए उसमें कोई दवा; जैसे-गोलियाँ आदि; रखनी चाहिए।
3. अनाजों को सीलबन्द बर्तनों में रखना चाहिए विशेषकर धातु के बने ड्रम आदि इस कार्य के लिए अधिक उपयुक्त रहते हैं।
4. अनाजों में जल की मात्रा कम-से-कम रहनी चाहिए, ताकि उन पर फफूद, घुन आदि न लग सकें। इसके लिए उन्हें पूर्णतः सूखा हुआ रखना चाहिए।
In simple words: अनाजों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समय-समय पर सुखाना, घुन और सुरसुरी से बचाने के लिए दवाइयों का प्रयोग करना, सीलबंद धातु के बर्तनों में रखना और नमी से दूर पूरी तरह सूखा रखना आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: अनाजों के संरक्षण के प्रत्येक उपाय को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से लिखें, विशेषकर नमी और कीटों से बचाव पर जोर दें।
Question 9. सब्जियों का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है? सब्जियों को काटते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Answer: सब्जियाँ हमारे भोजन का अनिवार्य अंग मानी जाती हैं। सब्जियों को सुरक्षात्मक खाद्यसामग्री माना जाता है। सब्जियाँ विभिन्न विटामिन्स एवं खनिज लवणों की उत्तम स्रोत होती हैं। ये विटामिन एवं खनिज-लवण हमारे स्वास्थ्य में विशेष रूप से सहायक होते हैं। सब्जियों में रेशों की भरपूर मात्रा होती है; अतः सब्जियाँ कब्ज-निवारक होती हैं। सब्जियाँ मल-विसर्जन में सहायक होती हैं। सब्जियाँ शरीर में अम्ल एवं क्षार के सन्तुलन को बनाये रखने में सहायक होती हैं। सब्जियाँ भूख बढ़ाती हैं। सब्जियों के समावेश से हमारा भोजन अधिक रुचिकर एवं विविधतापूर्ण बनता है। सब्जियों को काटते एवं पकाते समय कुछ बातों को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखना चाहिए
1. सब्जियों को सदैव अच्छी तरह से धोकर एवं साफ करके ही छीलना या काटना चाहिए। यदि आवश्यक न हो तो सब्जियों का छिलका नहीं उतारना चाहिए ।
2. सब्जियों को छीलने एवं काटने के उपरान्त बिल्कुल नहीं धोना चाहिए।
3. सब्जियों को सदैव ढककर पकाना चाहिए।
4. सब्जियों को केवल उतने ही जल में पकाना चाहिए जितना जल उन्हें गलाने के लिए आवश्यक हो ।
5. सब्जियों को अधिक भूनना या तलना नहीं चाहिए। तैयार सब्जियों को बार-बार गरम भी नहीं करना चाहिए।
In simple words: सब्जियाँ विटामिन्स, खनिज लवण और रेशे का उत्तम स्रोत हैं, जो स्वास्थ्य, पाचन और शरीर के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्हें काटते और पकाते समय, अच्छी तरह धोकर छिलके सहित काटना, काटने के बाद न धोना, ढककर पकाना, कम पानी में पकाना और बार-बार गर्म न करना चाहिए ताकि उनके पोषक तत्व सुरक्षित रहें।
🎯 Exam Tip: सब्जियों के महत्व को उनके पोषक तत्वों और शारीरिक कार्यों के संदर्भ में समझाएँ। काटने और पकाने के दौरान पोषक तत्वों के संरक्षण हेतु आवश्यक सावधानियों को बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
Question 10. भोजन पकाने से पहले, पकाते समय और परोसते समय किस प्रकार की स्वच्छता रखनी चाहिए और क्यों ?
Answer: भोजन पकाने से पहले हमें देखना चाहिए कि जिस बर्तन में भोजन पकाया जाना है वह अच्छी तरह साफ है या नहीं। अगर किसी प्रकार की गन्दगी उसे बर्तन में लगी हुई हो तो उसे अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। भोजन पकाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि भोजन आवश्यकता से अधिक न गल जाए क्योंकि भोजन पकाते समय अगर अधिक गल जाता है तो उसके पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार भोजन परोसते समय हमारे हाथ एवं बर्तन अच्छी तरह साफ होने चाहिए।
In simple words: भोजन पकाने से पहले बर्तनों की स्वच्छता, पकाते समय भोजन को अधिक न गलाने और परोसते समय हाथ व बर्तनों की साफ-सफाई अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि भोजन स्वच्छ, पौष्टिक और सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: भोजन के तीनों चरणों (पकाने से पहले, पकाते समय, परोसते समय) में स्वच्छता के महत्व को तार्किक कारणों के साथ समझाएँ।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. खाद्य सामग्री को क्यों पकाया जाता है?
या भोजन पकाने के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
Answer: खाद्य-सामग्री को स्वादिष्ट, सुपाच्य एवं रोगाणुमुक्त बनाने हेतु तथा विविधता प्रदान करने के लिए पकाया जाता है।
In simple words: भोजन को मुख्य रूप से इसलिए पकाया जाता है ताकि वह स्वादिष्ट, आसानी से पचने योग्य और कीटाणु-मुक्त हो जाए, साथ ही भोजन में विभिन्नता भी लाई जा सके।
🎯 Exam Tip: भोजन पकाने के प्रमुख उद्देश्यों को संक्षिप्त और स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
Question 2. भोजन पकाने की विधियों के नाम लिखिए।
Answer: उबालना, तलना, वाष्प द्वारा पकाना तथा भूनना एवं सेंकना भोजन पकाने की मुख्य विधियाँ हैं।
In simple words: भोजन पकाने की मुख्य विधियों में उबालना, तलना, भाप से पकाना, भूनना और सेंकना शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: भोजन पकाने की सभी प्रमुख विधियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. भोजन को उबालने से अच्छा भाप द्वारा पकाना होता है क्यों? दो कारण लिखिए ।
यो भोजन पकाने की कौन-सी विधि सर्वोत्तम है और क्यों?
Answer: भोजन पकाने की सर्वोत्तम विधि उसे भाप द्वारा पकाना होती है। इसके दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
1. भोजन सुपाच्य तथा स्वादिष्ट रहता है।
2. भोजन के पोषक तत्त्व नष्ट नहीं होते ।
In simple words: भाप द्वारा भोजन पकाना सर्वोत्तम विधि है क्योंकि इससे भोजन सुपाच्य, स्वादिष्ट रहता है और उसके पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
🎯 Exam Tip: भाप द्वारा पकाने को सर्वोत्तम विधि क्यों माना जाता है, इसके दो मुख्य लाभों पर प्रकाश डालें।
Question 4. भोजन को बार-बार गर्म करने से क्या हानि होती है?
Answer: बार-बार गर्म करने से भोजन के पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
In simple words: भोजन को बार-बार गर्म करने से उसमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं और भोजन अपनी पौष्टिकता खो देता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर संक्षिप्त और सीधा है, पोषक तत्वों के नुकसान पर जोर दें।
Question 5. धीमी आग पर भोजन पकाने से क्या लाभ हैं?
Answer: धीमी आग पर पकाए गए भोजन के पोषक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं।
In simple words: धीमी आग पर भोजन पकाने से उसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, जिससे भोजन की पौष्टिकता बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: धीमी आग पर पकाने के मुख्य लाभ (पोषक तत्वों का संरक्षण) को स्पष्ट करें।
Question 6. भाप के दबाव से भोजन कैसे पकता है?
Answer: भाप के दबाव के कारण प्रेशर कुकर में उष्णता का घनत्व बढ़ जाने के कारण भोजन कम समय में ही भली-भाँति पक जाता है।
In simple words: भाप के दबाव से प्रेशर कुकर में गर्मी का घनत्व बढ़ जाता है, जिससे भोजन कम समय में पूरी तरह पक जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रेशर कुकर में भाप के दबाव और उच्च तापमान के कारण भोजन जल्दी पकने की प्रक्रिया को समझाएँ।
Question 7. भूनने व सेंकने में क्या अन्तर है?
Answer: भूनते समय भोज्य वस्तु आग के प्रत्यक्ष सम्पर्क में नहीं आती, जबकि सेंकने में उसे सीधे अंगारों अथवा विद्युत सलाखों के ऊपर सेंका जाता है।
In simple words: भूनने में भोजन सीधे आग के संपर्क में नहीं आता, जबकि सेंकने में उसे सीधे अंगारों या विद्युत ताप पर पकाया जाता है।
🎯 Exam Tip: भूनने और सेंकने के बीच के मुख्य अंतर (सीधा आग का संपर्क) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 8. भाप द्वारा भोजन पकाने से क्या लाभ हैं?
Answer: भाप द्वारा भोजन पकाने से उसके अधिकांश पौष्टिक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं।
In simple words: भाप द्वारा भोजन पकाने का मुख्य लाभ यह है कि इस विधि से भोजन के अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
🎯 Exam Tip: भाप द्वारा भोजन पकाने के सबसे महत्वपूर्ण लाभ (पोषक तत्वों का संरक्षण) पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 9. तले हुए भोजन का अधिक सेवन करने से क्या हानि है?
Answer: तला हुआ भोजन गरिष्ठ एवं कुपाच्य होता है। अतः अधिक सेवन करने पर अपच एवं कब्ज़ उत्पन्न करता है।
In simple words: तले हुए भोजन का अधिक सेवन करने से वह गरिष्ठ और अपाच्य हो जाता है, जिससे अपच और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: तले हुए भोजन के अधिक सेवन से होने वाली दो प्रमुख हानियों (अपच और कब्ज) को बताएं।
Question 10. दूध को पकाने से क्या लाभ है?
Answer: पकाए जाने पर दूध रोगाणुमुक्त तथा सुपाच्य हो जाता है।
In simple words: दूध को पकाने से वह हानिकारक रोगाणुओं से मुक्त हो जाता है और पचने में भी आसान हो जाता है, जिससे वह उपभोग के लिए सुरक्षित बन जाता है।
🎯 Exam Tip: दूध को पकाने के दो मुख्य लाभ (रोगाणुमुक्ति और सुपाच्यता) को स्पष्ट करें।
Question 11. मक्खन को गर्म करने से क्या हानि सम्भव है?
Answer: गर्म करने पर मक्खन में प्राकृतिक रूप से उपस्थित विटामिन 'ए' नष्ट हो जाता है।
In simple words: मक्खन को गर्म करने से उसमें प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला विटामिन 'ए' नष्ट हो सकता है।
🎯 Exam Tip: मक्खन को गर्म करने से होने वाली प्रमुख हानि (विटामिन 'ए' का नुकसान) को संक्षिप्त में बताएं।
Question 12. गृहिणी के लिए हाथ व नाखून स्वच्छ रखना क्यों आवश्यक है?
Answer: हाथ वे नाखूनों की गन्दगी में रोगाणु उपस्थित रहते हैं, जो कि भोजन पकाते एवं परोसते समय भोजन में मिल सकते हैं। अतः प्रत्येक गृहिणी को अपने हाथ व नाखून अच्छी तरह साफ रखने चाहिए ।
In simple words: घर में खाना बनाने वाले व्यक्ति को अपने हाथ और नाखून हमेशा साफ रखने चाहिए ताकि भोजन में गंदगी और कीटाणु न मिलें, जिससे खाना स्वस्थ और सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: स्वच्छता भोजन तैयार करने और परोसने का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो भोजन को दूषित होने से बचाता है।
Question 13. आलू को बिना छीले पकाने से क्या लाभ हैं?
Answer: आलू के छिलके के कारण उसका विटामिन 'सी' सुरक्षित रहता है।
In simple words: आलू को छिलके सहित पकाने से उसमें मौजूद विटामिन 'सी' नष्ट नहीं होता, जिससे हमें अधिक पोषण मिलता है।
🎯 Exam Tip: सब्जियों के पोषक तत्वों को संरक्षित करने के तरीके याद रखें, जैसे छिलके सहित पकाना।
Question 14. हरी शाक-सब्जियों को काटने से पूर्व धोना चाहिए। क्यों?
Answer: यदि सब्जियों को छीलकर एवं काटकर धोया जाता है, तो उनके कुछ विटामिन एवं खनिज-लवण पानी में बह जाते हैं। अतः इन खनिज तत्त्वों की सुरक्षा के लिए सब्जियों को छीलने एवं काटने से पहले उन्हें धो लेना चाहिए।
In simple words: सब्जियों को काटने या छीलने से पहले धोना चाहिए, क्योंकि काटने के बाद धोने से उनके कई पोषक तत्व पानी के साथ बह जाते हैं।
🎯 Exam Tip: सब्जियों को धोने का सही तरीका पोषक तत्वों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
Question 15. कच्चा भोजन खाने से क्या हानि हो सकती है?
Answer: कच्चा भोजन खाने से खाद्य-पदार्थों के साथ आये हुए रोगों के जीवाणु शरीर में पहुँचेंगे ।
In simple words: कच्चा भोजन खाने से हानिकारक जीवाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे बीमारियाँ हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: भोजन को पकाकर खाने के लाभों को समझना खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
Question 16. खाद्य-सामग्री को पकाते समय ढककर रखना क्यों आवश्यक होता है?
Answer: खाद्य सामग्री के पोषक तत्त्वों एवं सुगन्ध को नष्ट होने से बचाने के लिए तथा शीघ्र पकाने के लिए उसे ढककर रखना आवश्यक होता है।
In simple words: खाना पकाते समय बर्तन को ढककर रखने से भोजन के पोषक तत्व और उसकी खुशबू बरकरार रहती है, और खाना जल्दी भी पक जाता है।
🎯 Exam Tip: भोजन को ढककर पकाने से पोषक तत्वों का नुकसान कम होता है और ऊर्जा की बचत होती है।
Question 17. भोजन पकाने की प्रक्रिया में पौष्टिक तत्त्वों की सुरक्षा के उपाय लिखिए।
Answer: भोजन पकाने की प्रक्रिया में पौष्टिक तत्त्वों की सुरक्षा हेतु उपाय अग्रलिखित हैं
(1) भोजन पकाते समय बर्तन को खुला न रखें। बर्तन खुला रखने पर भोजन वायु के सम्पर्क में आने से कीटाणु व धूल का प्रवेश होता है।
(2) भोजन देर तक न पकाएँ। इससे भोजन के पौष्टिक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
(3) आवश्यकता से अधिक मसालों का प्रयोग कदापि न करें।
In simple words: भोजन के पोषक तत्वों को बचाने के लिए उसे ढककर पकाएँ, ज़्यादा देर तक न पकाएँ और कम मसालों का उपयोग करें।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों की सुरक्षा के लिए सही पाक-क्रिया विधियों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
Question 18. गहरी चिकनाई और उथली चिकनाई में तलने की विधियों के बारे में लिखिए।
Answer:तलने की गहरी चिकनाई विधिः इस विधि में गहरी कड़ाही प्रयोग में लाई जाती है और काफी मात्रा में घी या तेल में भोज्य-पदार्थ को डालकर तला जाता है; जैसे-पूड़ी-कचौरी, पकौड़ी, समोसे आदि ।
तलने की उथली चिकनाई विधिः इस विधि में चौड़ी व उथली कंड़ाहीं या तवा प्रयोग में लाया जाता है जिसमें थोड़ी-सी ही चिकनाई डालकर तला जाता है; जैसे-पराँठे, आलू की टिकिया, आमलेट, चीले आदि ।
In simple words: गहरी चिकनाई में तलना मतलब ज़्यादा तेल या घी में पूरी तरह डुबोकर पकाना (जैसे पूड़ी), जबकि उथली चिकनाई में तलना मतलब कम तेल या घी में आंशिक रूप से पकाना (जैसे पराँठे)।
🎯 Exam Tip: तलने की विभिन्न विधियों को उनके उपयोग और खाद्य पदार्थों के उदाहरणों के साथ समझना महत्वपूर्ण है।
Question 19. भोजन परोसने की दो मुख्य शैलियाँ कौन-सी हैं?
Answer: भोजन परोसने की दो मुख्य शैलियाँ हैं
(1) देशी शैली तथा
(2) विदेशी या परम्परागत शैली।
In simple words: भोजन परोसने की दो मुख्य शैलियाँ हैं – देशी शैली (पारंपरिक भारतीय तरीका) और विदेशी या पाश्चात्य शैली (पश्चिमी तरीका)।
🎯 Exam Tip: भोजन परोसने की शैलियाँ सांस्कृतिक प्राथमिकताओं और भोजन के प्रकार के आधार पर भिन्न होती हैं।
Question 20. जल में घुलनशील विटामिनों के नाम लिखिए ।
Answer: जल में घुलनशील विटामिन हैं-विटामिन 'बी' कॉम्प्लेक्स, विटामिन 'सी' तथा विटामिन 'पी।
In simple words: जल में घुलनशील विटामिन वे हैं जो पानी में घुल जाते हैं, जैसे विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और विटामिन पी।
🎯 Exam Tip: जल में घुलनशील विटामिनों के नाम और उनके स्रोत याद रखना जीव विज्ञान और पोषण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 21. वसा में घुलनशील विटामिनों के नाम लिखिए।
Answer: जल में घुलनशील विटामिन हैं विटामिन 'ए', विटामिन 'डी', विटामिन 'ई' तथा विटामिन 'के' ।
In simple words: वसा में घुलनशील विटामिन वे होते हैं जो वसा या तेल में घुलते हैं, जैसे विटामिन ए, डी, ई और के।
🎯 Exam Tip: वसा में घुलनशील विटामिनों के नाम और उनके कार्य अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 22. किन-किन फलों में विटामिन 'सी' प्रचुर मात्रा में पाया जाता है?
Answer: समस्त खट्टे फलों अर्थात् नींबू, नारंगी, सन्तरा, अमरूद, अनन्नास तथा तरबूज में विटामिन 'सी' प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
In simple words: विटामिन सी खट्टे फलों में भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जैसे नींबू, नारंगी, संतरा, अमरूद और तरबूज।
🎯 Exam Tip: विटामिन सी के प्रमुख स्रोतों को याद रखना पोषण संबंधी ज्ञान के लिए फायदेमंद है।
Question 23. कच्ची सब्जियों के खाने से शरीर को कौन-से पोषक तत्त्व अधिक मात्रा में मिलेंगे ?
Answer: कच्ची सब्जियों के खाने से शरीर को खनिज, विटामिन्स आदि पोषक तत्त्व प्राप्त होते हैं।
In simple words: कच्ची सब्जियां खाने से शरीर को सीधे तौर पर अधिक खनिज और विटामिन्स मिलते हैं, क्योंकि पकाने से कुछ पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि पकाने की प्रक्रिया कुछ पोषक तत्वों को कैसे प्रभावित करती है।
Question 24. शरीर के लिए भोजन क्यों आवश्यक है?
Answer: जीवित प्राणियों के लिए भोजन ग्रहण करना अनिवार्य है। शरीर की वृद्धि एवं विकास के लिए, ऊर्जा प्राप्त करने के लिए, रोगों से मुकाबला करने की शक्ति प्राप्त करने के लिए तथा नियमित रूप से भूख शान्त करने के लिए भोजन ग्रहण करना आवश्यक है।
In simple words: भोजन शरीर के विकास, ऊर्जा पाने, बीमारियों से लड़ने और भूख मिटाने के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह हमें जीवित रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व देता है।
🎯 Exam Tip: भोजन के मूलभूत कार्यों और शरीर के लिए इसके महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
Question 25. भोजन में कौन-से आवश्यक पोषक तत्त्व पाये जाते हैं?
Answer: भोजन के आवश्यक पोषक तत्त्व हैं-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज तथा जल ।
In simple words: भोजन में मुख्य पोषक तत्व प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज और पानी होते हैं, जो शरीर के सही कामकाज के लिए ज़रूरी हैं।
🎯 Exam Tip: शरीर के लिए आवश्यक सभी प्रमुख पोषक तत्वों के नाम सूचीबद्ध करें।
Question 26. पौष्टिक भोजन से क्या तात्पर्य है?
Answer: जो भोजन हमारे शरीर को पुष्ट कर रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है, पौष्टिक भोजन कहलाता है।
In simple words: पौष्टिक भोजन वह होता है जो शरीर को ताकत देता है और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: पौष्टिक भोजन की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Question 27. हमारे शरीर में विटामिन 'सी' के दो कार्य लिखिए।
Answer:
(1) रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
(2) दाँतों तथा मसूड़ों को स्वस्थ रखता है।
In simple words: विटामिन 'सी' शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और हमारे दाँतों व मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन सी के प्रमुख कार्यों को याद रखना पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित प्रश्नों में सहायक होता है।
Question 1. पाक-क्रिया द्वारा खाद्य सामग्री बन जाती है (क) अपाच्य (ख) सुपाच्य (ग) कुपाच्य (घ) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
Answer: (ख) सुपाच्य
In simple words: खाना पकाने से भोजन आसानी से पच जाता है, क्योंकि पकने की प्रक्रिया से खाद्य पदार्थ नरम हो जाते हैं और शरीर के लिए उन्हें तोड़ना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का मुख्य बिंदु भोजन पकाने के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक को उजागर करता है: पाचन क्षमता में सुधार।
Question 2. भोजन बनाने की सर्वोत्तम विधि है (क) उबालना (ख) भूनना (ग) तलना (घ) सिझाना (स्टयू करना)
Answer: (क) उबालना
In simple words: भोजन को उबालना एक बेहतरीन तरीका है क्योंकि यह पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करता है और भोजन को आसानी से पचने योग्य बनाता है।
🎯 Exam Tip: भोजन पकाने की विभिन्न विधियों के लाभ और हानि पर ध्यान दें।
Question 3. दूध को गर्म करने से नष्ट होते हैं
या
दूध को उबालने पर निम्नलिखित में से क्या नष्ट हो जाते हैं? (क) उसके पोषक तत्त्वे (ख) उसके कीटाणु (ग) उसका स्वाद (घ) कुछ भी नहीं
Answer: (ख) उसके कीटाणु
In simple words: दूध को उबालने से उसमें मौजूद हानिकारक कीटाणु मर जाते हैं, जिससे दूध पीने के लिए सुरक्षित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: दूध उबालने का मुख्य उद्देश्य उसे कीटाणु-रहित बनाना है, जिससे वह उपभोग के लिए सुरक्षित हो सके।
Question 4. दूध बैक्टीरिया रहित हो जाता है (क) गर्म करने पर (ख) ठण्डा करने पर (ग) उबालने पर (घ) पानी मिलाने पर
Answer: (ग) उबालने पर
In simple words: दूध को उबालने से उसमें मौजूद सभी बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे यह पीने के लिए सुरक्षित और शुद्ध हो जाता है।
🎯 Exam Tip: खाद्य सुरक्षा के लिए जीवाणुओं को नष्ट करने के महत्व को समझें।
Question 5. सब्जियों को लोहे की कड़ाही में पकाने से (क) लौह तत्त्व की प्राप्ति होती है । (ख) विषैलापन आ जाता है। (ग) स्वाद नष्ट हो जाता है। (घ) पौष्टिक तत्त्वों की प्राप्ति होती है।
Answer: (क) लौह तत्त्व की प्राप्ति होती है
In simple words: लोहे की कड़ाही में सब्जियां पकाने से भोजन में कुछ लौह तत्व शामिल हो जाते हैं, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: खाना पकाने के बर्तनों का भोजन के पोषक तत्वों पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान दें।
Question 6. डबलरोटी व बिस्कुट बनाने की विधि कहलाती है (क) ग्रिलिंग (ख) रोस्टिंग (ग) बेकिंग (घ) टोस्टिंग
Answer: (ग) बेकिंग
In simple words: डबलरोटी और बिस्कुट को ओवन में सूखे ताप का उपयोग करके पकाने की प्रक्रिया को बेकिंग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पाक-क्रिया विधियों के विशिष्ट नामों और उनके उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. भोजन को पकाने से नष्ट न होने वाला विटामिन कौन-सा है? (क) 'बी' (ख) 'सी' (ग) “के (घ) 'ए'
Answer: (ग) 'के'
In simple words: विटामिन 'के' आमतौर पर भोजन पकाने से नष्ट नहीं होता है, जबकि अन्य विटामिन (जैसे 'सी' और 'बी' कॉम्प्लेक्स) गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों की ताप संवेदनशीलता को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 8. सब्जियों को कब धोना चाहिए ? (क) काटने के बाद (ख) छीलने के बाद (ग) छीलने से पहले (घ) कभी भी
Answer: (ग) छीलने से पहले
In simple words: सब्जियों को छीलने या काटने से पहले धोना चाहिए, ताकि पोषक तत्व पानी में न घुलें और गंदगी हट जाए।
🎯 Exam Tip: सब्जियों को धोने का सही समय पोषक तत्वों को संरक्षित करने में मदद करता है।
Question 9. सब्जी को बार-बार गर्म करने से नष्ट हो जाता है, उसका (क) थायमीन (ख) एस्कॉर्बिक एसिड (ग) रिबोफ्लेविन (घ) निकोटिनिक एसिड
Answer: (ख) एस्कॉर्बिक एसिड
In simple words: सब्जी को बार-बार गर्म करने से उसमें मौजूद एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) नष्ट हो जाता है, जिससे उसका पोषण मूल्य कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: कुछ विटामिन गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, और बार-बार गर्म करने से वे नष्ट हो सकते हैं।
Question 10. बेकिंग पाउडर अथवा खाने का सोडा मिलाकर पकाने से तरकारियों का नष्ट होने वाला पोषक तत्त्व है (क) विटामिन 'बी' (ख) प्रोटीन (ग) कार्बोज (घ) खनिज-लवण
Answer: (क) विटामिन 'बी'
In simple words: बेकिंग पाउडर या खाने का सोडा मिलाकर सब्जियां पकाने से उनमें मौजूद विटामिन 'बी' नष्ट हो जाता है।
🎯 Exam Tip: खाना पकाने में रसायनों के उपयोग से पोषक तत्वों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति सचेत रहें।
Question 11. भोजन पकाने में किसका प्रयोग हानिकारक होता है? (क) घी (ख) मसाले (ग) सोडा (घ) इनमें से किसी को नहीं
Answer: (ग) सोडा
In simple words: भोजन पकाने में सोडा का अत्यधिक उपयोग हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह कुछ पोषक तत्वों को नष्ट कर सकता है।
🎯 Exam Tip: कुछ खाद्य योजक पोषक तत्वों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उनका संयमित उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 12. भोजन परोसने की किस शैली में खड़े-खड़े भोजन किया जाता है? (क) पाश्चात्य शैली (ख) भारतीय शैली (ग) बुफे शैली (घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) बुफे शैली
In simple words: बुफे शैली में मेहमान आमतौर पर खड़े होकर अपना भोजन खुद परोसते हैं, जो बड़ी पार्टियों या सामाजिक आयोजनों के लिए उपयुक्त होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न भोजन परोसने की शैलियों और उनके विशिष्ट गुणों को याद रखें।
Question 13. भोजन को स्वास्थ्यवर्द्धक बनाने के लिए गृहिणी को विशेष जानकारी होनी चाहिए (क) भोजन को पकाने की (ख) भोजन को तलने की (ग) भोजन में पाए जाने वाले तत्त्वों की (घ) भोजन परोसने की
Answer: (ग) भोजन में पाए जाने वाले तत्त्वों की
In simple words: भोजन को स्वस्थ बनाने के लिए गृहिणी को उसमें मौजूद पोषक तत्वों के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए ताकि वह सही तरीके से खाना पका सके और परोस सके।
🎯 Exam Tip: भोजन के पोषण मूल्य को समझना स्वस्थ आहार के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 14. किस प्रकार भोजन पकाने से पोषक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं ? (क) उबालकर (ख) भूनकर (ग) तलकर (घ) भाप द्वारा
Answer: (घ) भाप द्वारा
In simple words: भाप द्वारा भोजन पकाने से पोषक तत्व सबसे ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं क्योंकि इसमें भोजन सीधे पानी के संपर्क में नहीं आता और कम तापमान पर पकता है।
🎯 Exam Tip: भाप से पकाना एक स्वस्थ पाक-क्रिया विधि है क्योंकि यह पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करती है।
Question 15. विटामिन 'डी' का स्रोत है (क) दालें (ख) सूर्य किरणें (ग) खट्टे फल (घ) सब्जियाँ
Answer: (ख) सूर्य किरणें
In simple words: सूर्य की किरणें विटामिन 'डी' का मुख्य प्राकृतिक स्रोत हैं, क्योंकि हमारी त्वचा धूप के संपर्क में आने पर इसे बनाती है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'डी' के प्राकृतिक स्रोतों को जानना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 16. स्कर्वी रोग किस विटामिन की कमी से होता है? (क) विटामिन 'ए' (ख) विटामिन 'डी' (ग) विटामिन 'सी' (घ) विटामिन 'बी'
Answer: (ग) विटामिन 'सी'
In simple words: स्कर्वी रोग विटामिन 'सी' की कमी से होता है, इसलिए इसे रोकने के लिए खट्टे फल और सब्जियां खाना महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विटामिनों की कमी से होने वाले रोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 17. दूध में किस विटामिन का अभाव रहता है? (क) 'ए' (ख) 'डी' (ग) ‘सी' (घ) 'के'
Answer: (ग) ‘सी'
In simple words: दूध में प्राकृतिक रूप से विटामिन 'सी' का अभाव होता है, जबकि यह विटामिन 'ए' और 'डी' का अच्छा स्रोत है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले और अनुपस्थित विटामिनों को जानना आवश्यक है।
Question 18. विटामिन डी की कमी से बच्चों में कौन-सा रोग हो जाता है ? (क) खुजली (ख) पेचिस (ग) रतौंधी (घ) रिकेट्स
Answer: (घ) रिकेट्स
In simple words: बच्चों में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो जाती है, जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग और उनके प्रभावों पर ध्यान दें।
Question 19. खट्टे फलों में कौन-सा विटामिन अधिक मात्रा में पाया जाता है? (क) विटामिन 'ए' (ख) विटामिन 'बी' (ग) विटामिन 'सी' (घ) विटामिन 'डी'
Answer: (ग) विटामिन 'सी'
In simple words: खट्टे फलों में विटामिन 'सी' प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: विटामिन सी के प्रमुख स्रोतों को याद रखें।
Question 20. प्रोटीन का मुख्य स्रोत है (क) चावल (ख) चीनी (ग) दूध (घ) अंगूर
Answer: (ग) दूध
In simple words: दूध प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के अच्छे स्रोतों की पहचान करना पोषण संबंधी ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 21. रतौंधी किस विटामिन की कमी से होता है ? (क) विटामिन 'ए' (ख) विटामिन 'बी' (ग) विटामिन 'सी' । (घ) विटामिन 'डी'
Answer: (क) विटामिन 'ए'
In simple words: रतौंधी (रात में कम दिखना) विटामिन 'ए' की कमी से होता है, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ए' की कमी से होने वाले रोगों को याद रखें, विशेषकर रतौंधी।
Question 22. विटामिन का कौन-सा समूह वसा में घुलनशील है ? (क) ए, बी, सी, डी (ख) ए, बी, ई, के (ग) ए, सी, ई, के (घ) ए, डी, ई, के
Answer: (घ) ए, डी, ई, के
In simple words: विटामिन ए, डी, ई और के वसा में घुलनशील विटामिन हैं, जिनका शरीर में वसा के साथ अवशोषण होता है।
🎯 Exam Tip: जल और वसा में घुलनशील विटामिनों के समूहों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 23. भोजन पकाने में समय की बचत होती है (क) तलकर (ख) उबालकर (ग) प्रेशर कुकरे द्वारा (घ) भूनकर
Answer: (ग) प्रेशर कुकरे द्वारा
In simple words: प्रेशर कुकर का उपयोग करके भोजन पकाने से समय की बहुत बचत होती है, क्योंकि यह उच्च दबाव और तापमान पर भोजन को तेज़ी से पकाता है।
🎯 Exam Tip: प्रेशर कुकर एक कुशल खाना पकाने का उपकरण है जो समय और ऊर्जा बचाता है।
Question 24. विटामिन 'ए' को उत्तम स्रोत है (क) दाल (ख) दूध (ग) खट्टे फल (घ) पीली और हरी सब्जियाँ
Answer: (घ) पीली और हरी सब्जियाँ
In simple words: पीली और हरी सब्जियां विटामिन 'ए' का उत्कृष्ट स्रोत हैं, जो हमारी आँखों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ए' के प्रमुख स्रोतों को जानना आवश्यक है।
Question 25. भोज्य पदार्थों में ऊर्जा का प्रमुख साधन है (क) प्रोटीन (ख) विटामिन (ग) कार्बोहाइड्रेट (घ) खनिज लवण
Answer: (ग) कार्बोहाइड्रेट
In simple words: कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं, जो दैनिक गतिविधियों के लिए आवश्यक शक्ति प्रदान करते हैं।
🎯 Exam Tip: शरीर में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत की पहचान करें।
Question 26. लौह तत्त्व की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है? (क) बेरी-बेरी (ख) एनीमिया (ग) मरास्मस (घ) तपेदिक
Answer: (ख) एनीमिया
In simple words: लौह तत्व की कमी से एनीमिया (खून की कमी) रोग हो जाता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है।
🎯 Exam Tip: लौह तत्व की कमी से होने वाले रोग और उसके लक्षणों पर ध्यान दें।
Question 27. भोजन पकाने की विधि है (क) उबालना (ख) तलनी (ग) भाप द्वारा (घ) ये सभी
Answer: (घ) ये सभी
In simple words: उबालना, तलना और भाप द्वारा पकाना सभी भोजन पकाने की विभिन्न विधियाँ हैं जिनका उपयोग अलग-अलग खाद्य पदार्थों को तैयार करने में होता है।
🎯 Exam Tip: भोजन पकाने की विभिन्न सामान्य विधियों को जानें।
Question 28. जल में घुलनशील विटामिन हैं (क) विटामिन A, B, C (ख) विटामिन B, C (ग) विटामिन A, D. (घ) विटामिन E, K
Answer: (ख) विटामिन B, C
In simple words: विटामिन बी और सी पानी में घुलनशील विटामिन हैं, जो शरीर में संग्रहीत नहीं होते और मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल में घुलनशील विटामिनों के प्रमुख नामों को याद रखें।
Question 29. वसा में कौन-सा विटामिन घुलनशील नहीं है? (क) विटामिन-ए (ख) विटामिन-ई (ग) विटामिन-बी (घ) विटामिन-के
Answer: (ग) विटामिन-बी
In simple words: विटामिन-बी वसा में घुलनशील नहीं है; यह जल में घुलनशील विटामिनों के समूह का हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: विटामिनों की घुलनशीलता के प्रकारों को याद रखना वर्गीकरण में मदद करता है।
Question 30. शरीर-निर्माण में सहायक है (क) प्रोटीन (ख) वसा (ग) विटामिन (घ) कार्बोहाइड्रेट
Answer: (क) प्रोटीन
In simple words: प्रोटीन शरीर के ऊतकों के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक है, इसलिए इसे शरीर-निर्माण पोषक तत्व कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के प्राथमिक कार्य को याद रखना पोषण विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 31. प्रोटीन पाया जाता है (क) मिठाई में (ख) दालों/सोयाबीन में (ग) सन्तरा में (घ) आलू में
Answer: (ख) दालों/सोयाबीन में
In simple words: दालें और सोयाबीन प्रोटीन के उत्कृष्ट स्रोत हैं, जो शरीर के विकास और मरम्मत के लिए आवश्यक हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के विभिन्न स्रोतों को जानना संतुलित आहार के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 32. प्रोटीन का मुख्य कार्य है (क) शरीर की वृद्धि तथा विकास (ख) ऊर्जा प्रदान करना (ग) अस्थि-निर्माण करना (घ) हृदय गति सामान्य रखना
Answer: (क) शरीर की वृद्धि तथा विकास
In simple words: प्रोटीन का मुख्य कार्य शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों की वृद्धि और मरम्मत करना है, जिससे समग्र शारीरिक विकास होता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के सबसे महत्वपूर्ण जैविक कार्य को पहचानें।
Question 33. प्रोटीन की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है? (क) बेरी-बेरी (ख) एनीमिया (ग) मरास्मस (घ) तपेदिक
Answer: (ग) मरास्मस
In simple words: प्रोटीन की गंभीर कमी से बच्चों में मरास्मस नामक रोग हो जाता है, जिसमें मांसपेशियों और वसा का गंभीर नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 34. खाना खाने से पहले हाथ धोने चाहिए (क) राख से (ख) अपमार्जक से (ग) पानी से (घ) साबुन एवं पानी से
Answer: (घ) साबुन एवं पानी से
In simple words: खाना खाने से पहले साबुन और पानी से हाथ धोने चाहिए ताकि कीटाणु हट जाएं और बीमारी का खतरा कम हो।
🎯 Exam Tip: भोजन से पहले हाथ धोने के सही तरीके और उसके महत्व को जानें।
Question 35. किस प्रकार के भोज्य पदार्थ हमें रोगों से बचाते हैं? (क) बिस्कुट (ख) चावल (ग) ताजे मौसमी फल एवं हरी सब्जियाँ (घ) चीनी
Answer: (ग) ताजे मौसमी फल एवं हरी सब्जियाँ
In simple words: ताजे मौसमी फल और हरी सब्जियां हमें बीमारियों से बचाते हैं क्योंकि इनमें भरपूर विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थों को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 36. सूर्य की रोशनी हमें देती है (क) विटामिन 'सी' (ख) विटामिन 'डी' (ग) विटामिन 'ए' (घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) विटामिन 'डी'
In simple words: सूर्य की रोशनी हमारी त्वचा को विटामिन 'डी' बनाने में मदद करती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'डी' के प्राकृतिक स्रोतों में सूर्य का प्रकाश सबसे महत्वपूर्ण है।
Question 37. विटामिन 'सी' का सबसे अच्छा स्रोत है (क) मूंग दाल (ख) आँवला (ग) दही (घ) चावल
Answer: (ख) आँवला
In simple words: आंवला विटामिन 'सी' का एक बहुत ही अच्छा और प्राकृतिक स्रोत है, जो प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'सी' के सबसे समृद्ध स्रोतों को याद रखें।
Question 38. गाजर, पपीता और आम से मिलता है (क) कैल्सियम (ख) प्रोटीन (ग) विटामिन 'ए' (घ) लौह तत्त्व
Answer: (ग) विटामिन 'ए'
In simple words: गाजर, पपीता और आम विटामिन 'ए' के अच्छे स्रोत हैं, जो आँखों के स्वास्थ्य, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: विटामिन 'ए' के प्रमुख स्रोतों को याद रखें।
Question 39. किसके प्रयोग से तुरन्त ऊर्जा मिलती है? (क) विटामिन (ख) प्रोटीन (ग) ग्लूकोज (घ) खनिज लवण
Answer: (ग) ग्लूकोज
In simple words: ग्लूकोज शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है क्योंकि यह सीधे रक्तप्रवाह में अवशोषित होकर कोशिकाओं को ईंधन देता है।
🎯 Exam Tip: शरीर में ऊर्जा के त्वरित स्रोत के रूप में ग्लूकोज के महत्व को जानें।
Question 40. खाद्य-पदार्थों का संरक्षण किया जा सकता है (क) सुखाकर (ख) चाशनी में रखकर (ग) तेल व नमक द्वारा (घ) इन सभी के द्वारा
Answer: (घ) इन सभी के द्वारा
In simple words: खाद्य पदार्थों को सुखाकर, चाशनी में रखकर, या तेल और नमक का उपयोग करके संरक्षित किया जा सकता है ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों।
🎯 Exam Tip: खाद्य संरक्षण की विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक विधियों को समझना महत्वपूर्ण है।
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