UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 7 Chhandogya Upanishad Shashthodhyayah

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Class 10 Hindi Chapter 7 छान्दोग्य उपनिषद् षष्ठोध्यायः UP Board Solutions PDF

अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

 

Question 1. ॥ ॐ ॥ श्वेतकेतुहरुणेय आस तं ह पितोवाच श्वेतकेतो वस ब्रह्मचर्यं न वै सोम्यास्मत्कुलीनोऽननूच्य ब्रह्मबन्धुरिव भवतीति ॥ 1 ॥
Answer: आरुणि के पुत्र श्वेतकेतु थे। उनके पिता ने उनसे कहा, "हे श्वेतकेतु! तुम गुरुकुल में ब्रह्मचर्य का पालन करो। क्योंकि हमारे कुल में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हुआ जो बिना वेदों का अध्ययन किए केवल नाम का ब्राह्मण (ब्रह्मबन्धु) हो। एक सच्चा ब्राह्मण अपने आचरण से ही पहचाना जाता है।" इसका अर्थ यह है कि ब्राह्मण होकर भी जो व्यक्ति ब्राह्मण के योग्य आचरण नहीं करता, उसे गुरुकुल जाकर शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।
In simple words: श्वेतकेतु नाम के एक लड़के से उसके पिता ने कहा कि उसे ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में कोई भी बिना पढ़े-लिखे ब्राह्मण नहीं रहा है, मतलब सबने शिक्षा ली है।

🎯 Exam Tip: जब संस्कृत श्लोक का अनुवाद करें, तो पहले प्रत्येक पद का अर्थ समझें और फिर पूरे वाक्य का सरल भाषा में भावार्थ लिखें।

 

Question 2. स ह द्वादशवर्ष उपेत्य चतुर्विंशतिवर्षः सर्वान्चेदानधीत्य महामना अनूचानमानी स्तब्ध एयाय तं ह पितोवाच ॥2॥
Answer: श्वेतकेतु बारह साल की उम्र में गुरुकुल गए। उन्होंने चौबीस साल की उम्र तक सारे वेदों का अध्ययन किया। जब वह लौटा, तो वह खुद को बहुत ज्ञानी, स्वाभिमानी और अहंकार से भरा हुआ मान रहा था। वह शांत और स्तब्ध होकर अपने पिता के पास आया। यह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण चरण है जहाँ ज्ञान के साथ विनम्रता भी सीखनी होती है।
In simple words: श्वेतकेतु ने बारह साल से चौबीस साल तक पढ़ाई की और सारे वेद सीख लिए। जब वह वापस आया, तो उसे लगा कि वह बहुत ज्ञानी है और उसमें थोड़ा घमंड भी आ गया था।

🎯 Exam Tip: श्लोकों के प्रसंग को समझते हुए पात्रों की मनःस्थिति का वर्णन करना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 3. श्वेतकेतो यन्नु सोम्येदं महामना अनूचानमानी स्तब्धोऽस्युत तमादेशमप्राक्ष्यः येनाश्रुतं श्रुतं भवत्यमतं मतमविज्ञातं विज्ञातमिति कथं नु भगवः स आदेशो भवतीति ॥3॥
Answer: पिता ने श्वेतकेतु से पूछा, "हे सोम्य (प्यारे पुत्र)! तुम जो इतने शांत, ज्ञानी और घमंडी होकर आए हो, क्या तुमने वह विद्या पूछी, जिससे जो अनसुना है वह भी सुन लिया जाए, जो अनिश्चित है वह निश्चित हो जाए और जो अज्ञात है वह ज्ञात हो जाए?" श्वेतकेतु ने पूछा, "भगवान! वह कौन-सी आज्ञा है?" यह प्रश्न शिक्षा की गहराई और वास्तविक ज्ञान की खोज को दर्शाता है।
In simple words: पिता ने श्वेतकेतु से पूछा कि उसने कौन-सी ऐसी बात सीखी है जिससे बिना सुनी बात भी सुन ली जाती है, और अनजान बात भी समझ आ जाती है। श्वेतकेतु ने पूछा कि वह कौन-सी विद्या है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत प्रश्नों के अनुवाद में, क्रिया और कर्म के सही संबंधों पर ध्यान दें ताकि अर्थ स्पष्ट रहे।

 

Question 4. यथा सोम्यैकेन मृत्पिण्डेन सर्वं मृन्मयं विज्ञातं स्याद्वाचारम्भणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेत्येव सत्यम् ॥4॥
Answer: पिता आरुणि ने श्वेतकेतु से कहा, "हे प्यारे पुत्र! जैसे मिट्टी के एक ढेले को जानने से मिट्टी से बनी सभी चीज़ों को जाना जा सकता है। नाम और रूप भले ही अलग हों, लेकिन असली सच्चाई तो यही है कि वे सब मिट्टी ही हैं। इसी प्रकार, सभी वस्तुओं का मूल तत्व एक ही होता है।" यह उदाहरण समझाता है कि अनेकता में भी एकता का सिद्धांत कैसे काम करता है।
In simple words: पिता ने कहा कि जैसे एक मिट्टी के ढेर को समझ लेने से मिट्टी से बनी सारी चीजें समझ में आ जाती हैं, वैसे ही एक मूल चीज को जानने से सब कुछ जाना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: उपमाओं और दृष्टांतों का उपयोग करते समय, यह स्पष्ट करें कि किस चीज़ की तुलना किससे की जा रही है और इसका क्या अर्थ है।

 

Question 5. यथा सोम्यैकेन लोहमणिना सर्वं लोहमयं विज्ञातं स्याद्वाचारम्भणं विकारो नामधेयं लोहमित्येव सत्यम् ॥5॥
Answer: पिता आरुणि ने श्वेतकेतु से कहा, "हे प्यारे पुत्र! जैसे एक लोहे के टुकड़े या चुम्बक को जानने से लोहे से बनी सभी चीज़ों को जाना जा सकता है। उनके नाम और रूप अलग-अलग हो सकते हैं, पर असलियत यह है कि वे सब लोहा ही हैं। इसी तरह, सृष्टि की हर वस्तु का मूल एक ही है।" यह उदाहरण सिखाता है कि चीज़ों के बाहरी स्वरूप से परे उनके मूल स्वभाव को पहचानना चाहिए।
In simple words: पिता ने श्वेतकेतु को समझाया कि जैसे एक लोहे के टुकड़े को जानने से लोहे की बनी हर चीज के बारे में पता चल जाता है, ठीक वैसे ही एक ही मूल चीज़ को समझने से सब कुछ समझ आ जाता है।

🎯 Exam Tip: जब उदाहरणों से समझाएं, तो उदाहरण को मूल विचार से स्पष्ट रूप से जोड़ें ताकि सीखने वाला आसानी से समझ सके।

 

Question 6. यथा सोम्यैकेन नखनिकृन्तनेन सर्वं काष्णायसं विज्ञातं स्याद्वाचारम्भणं विकारो नामधेयं कृष्णायसमित्येव सत्यमेवं सोम्य स आदेशो भवतीति ॥6॥
Answer: पिता आरुणि ने आगे कहा, "हे प्यारे पुत्र! जैसे एक नाखून काटने वाले यंत्र (नेलकटर) को जानने से तांबे या कांसे की बनी सभी चीज़ों को जाना जा सकता है। उनके नाम अलग हो सकते हैं, पर मूल में वे कांसे या तांबे से ही बनी होती हैं। इसी तरह, वह ज्ञान है जिससे तुम एक ही मूल को जानकर सब कुछ जान सकते हो।" यह एक और उदाहरण है जो मूल और उसके रूपांतरणों के बीच के संबंध को स्पष्ट करता है।
In simple words: पिता ने बताया कि जैसे एक नेलकटर को देखकर कांसे से बनी सारी चीजें समझ आ जाती हैं, वैसे ही एक खास ज्ञान से सब कुछ समझा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: बार-बार दिए गए उदाहरणों का उद्देश्य एक ही सिद्धांत को अलग-अलग संदर्भों में समझाना होता है; यह दर्शाएं कि आप उस मूल सिद्धांत को समझ गए हैं।

 

Question 7. न वै नूनं भगवन्तस्त एतदवेदिषुर्यध्दद्येतदवेदिष्यन्कथं मे नावक्ष्यन्निति भगवांस्त्वेव मे तदबीविति तथा सोम्येति होवाच ॥7॥
Answer: जब पिता ने यह सब समझाया, तो श्वेतकेतु ने कहा, "हे पूजनीय पिताजी! मेरे पिछले गुरुओं को यह ज्ञान नहीं था। यदि उन्हें यह ज्ञान होता तो वे मुझे अवश्य बताते। आप ही मेरे सच्चे गुरु हैं, जिन्होंने मुझे यह आत्मज्ञान दिया।" यह दिखाता है कि श्वेतकेतु को अपने पिता के ज्ञान पर कितना विश्वास हो गया था।
In simple words: पिता की बातें सुनकर श्वेतकेतु ने कहा कि उनके पिछले गुरुओं को यह ज्ञान नहीं था, नहीं तो वे उसे जरूर बताते। उसने कहा कि उसके पिता ही उसके असली गुरु हैं, जिन्होंने उसे सही ज्ञान दिया है।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित श्लोकों में, पात्रों के भावों और प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करना महत्वपूर्ण होता है।

अतिलघु-उत्तरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर

 

Question 1. श्वेतकेतुः कस्य पुत्रः आसीत्? या श्वेतकेतुः कः आसीत?
Answer: श्वेतकेतुः आरुणेयपुत्रः आसीत् ।
In simple words: श्वेतकेतु आरुणि के पुत्र थे।

🎯 Exam Tip: अतिलघु-उत्तरीय प्रश्नों में सीधा और संक्षिप्त उत्तर दें, जो प्रश्न का सटीक जवाब हो।

 

Question 2. कः द्वादशवर्षम् उपेत्य चतुर्विंशतिवर्षः वेदानधीत्य आगतः?
Answer: श्वेतकेतुः द्वादशवर्षम् उपेत्य चतुर्विंशतिवर्षः वेदानधीत्य आगतः।
In simple words: श्वेतकेतु बारह वर्ष की आयु में गुरुकुल जाकर चौबीस वर्ष तक वेदों का अध्ययन करके वापस आया।

🎯 Exam Tip: संस्कृत में उत्तर देते समय, प्रश्न में प्रयुक्त शब्दों का सही प्रयोग करें ताकि व्याकरणिक शुद्धता बनी रहे।

 

Question 3. श्वेतकेतुः कतिवर्षाणि सर्वान् वेदान् अपठत्?
Answer: श्वेतकेतुः द्वादशवर्षाणि सर्वान् वेदान् अपठत् ।
In simple words: श्वेतकेतु ने बारह वर्षों तक सभी वेदों का अध्ययन किया।

🎯 Exam Tip: संख्या-संबंधी प्रश्नों में, उत्तर में सही संख्या और इकाई (जैसे 'वर्षाणि') का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 4. अनूचानमानी कः अभवत्?
Answer: अनूचानमानी श्वेतकेतुः अभवत् ।
In simple words: श्वेतकेतु स्वयं को बहुत ज्ञानी मानने वाला बन गया था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के नामों का सही उपयोग करें और उनके गुणों का वर्णन स्पष्ट रूप से करें।

 

Question 5. मृत्पिण्डेन किं विज्ञातम्?
Answer: मृत्पिण्डेन सर्वं मृण्मयं विज्ञातम् ।
In simple words: मिट्टी के एक ढेले को जानने से मिट्टी से बनी सभी चीज़ें ज्ञात हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न मूल और उसके रूपांतरणों के बीच के संबंध को समझने के लिए है।

 

Question 6. कुत्र लोहमयं विज्ञातम्?
Answer: लोहमणिनी लोहमयं विज्ञातम् ।
In simple words: लोहे के एक टुकड़े को जानने से लोहे से बनी सभी चीज़ें ज्ञात हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, उदाहरण के मुख्य तत्व को पहचानना और उत्तर में उसका सही उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. कः आरुणिं गुरुरूपेण स्वीकरोति?
Answer: श्वेतकेतुः आरुणिं गुरुरूपेण स्वीकरोति ।
In simple words: श्वेतकेतु आरुणि को अपने गुरु के रूप में स्वीकार करता है।

🎯 Exam Tip: संबंधों पर आधारित प्रश्नों में, कौन किसे स्वीकार करता है, यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

अनुवादात्मक

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए:
Answer:

हिन्दी वाक्यसंस्कृतानुवाद
(क) वाणी ने उससे कहा।वाणी तम् अकथयत्।
(ख) उसने एक वर्ष तक प्रवास किया।सः वर्षमेकपर्यन्तं प्रवासमकरोत्।
(ग) वाणी ने लौटकर पूछा।प्रत्यागच्छन् वाणी अपृच्छत्।
(घ) तुम मेरे बिना कैसे जीवित रहोगे?त्वं मया विना कथं जीविष्ये?
(ङ) गूँगे लोग बिना बोले ही प्रतिक्रिया करते हैं।मूकजनाः वाण्या विना हि प्रतिक्रिया कुर्वन्ति।
(च) नेत्र ने उत्क्रमण किया।नेत्रः उत्क्रमणमकरोत्।
(छ) वे कान से सुनते और मन से चिन्तन करते हुए जीवित रहते हैं।ते कर्णाभ्यां श्रुवन् तनसा चिन्तनं कुर्वन् जीवन्ति ।

In simple words: यह तालिका हिंदी वाक्यों को संस्कृत में कैसे अनुवाद किया जाता है, यह दर्शाती है। इससे हमें दोनों भाषाओं की संरचना और शब्दावली को समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: अनुवाद करते समय, क्रिया के काल, वचन और लिंग का विशेष ध्यान रखें, और सही कारक चिह्नों का प्रयोग करें।

व्याकरणत्मक

 

Question 1. निम्नलिखित संधि पदों का संधि-विच्छेद कीजिए-
Answer:

पदसन्धि + विच्छेद
श्वेतकेतुर्हारुणेयश्वेतकेतुः + आरुणेय
पितोवाचपिता + उवाच
श्वेतकेतो वसश्वेतकेतुः + वस
सोम्यास्मत्सोम्य + अस्मत्
कुलीनोऽननूच्यकुलीनः + अननूच्य
भवतीतिभवति + इति
सोम्येदम्सोम्य + इदम्
स्तब्धोऽस्युतस्तब्धः + अस्युत
तमादेशम्तम् + आदेशम्
येनाश्रुतम्येन + अश्रुतम्
मृन्मयम्मृत् + मयम्
विकारो नामधेयम्विकारः + नामधेयम्
लोहमित्येवलोहम् + इति + एव
सत्यमेवम्सत्यम् + एवम्
भगवन्तस्तभगवन्तः + त

In simple words: यह तालिका संस्कृत शब्दों के संधि-विच्छेद को दिखाती है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि शब्द कैसे जुड़ते हैं और टूटते हैं। यह संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: संधि-विच्छेद करते समय, नियमों को ध्यान में रखें (जैसे स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि) और सुनिश्चित करें कि विच्छेद के बाद बनने वाले दोनों शब्द अर्थपूर्ण हों।

 

Question 2. निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग अथवा प्रत्यय अलग कीजिए
Answer:

शब्दउपसर्ग/प्रत्यय
अननूच्यअन् + अनुच्य
ब्रह्मबन्धुःब्रहम + बन्धुः
उपेत्यउप + इत्य
अधीत्यअधि + इत् + ल्यप्
महामनामहान् + मन् + आप्
स्तब्धस्त् + अब्ध
प्राक्ष्यःप्र + अक्ष्यः
विज्ञातम्वि + ज्ञातम्
लोहमित्यलोहम् + इति + ल्यप्

In simple words: यह तालिका संस्कृत शब्दों से उपसर्ग और प्रत्यय को अलग करना सिखाती है। उपसर्ग वे अक्षर या शब्द होते हैं जो मूल शब्द के आगे लगते हैं, और प्रत्यय वे होते हैं जो पीछे लगते हैं, जिससे शब्द का अर्थ बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय को पहचानते समय, मूल शब्द के अर्थ पर ध्यान दें। उपसर्ग हमेशा शब्द के आरंभ में और प्रत्यय हमेशा शब्द के अंत में जुड़ते हैं।

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