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Detailed Chapter 3 वीरः वीरें पूज्यते UP Board Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi Chapter 3 वीरः वीरें पूज्यते UP Board Solutions PDF
अवतरणों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद
Question 1. (स्थानम्-अलक्षेन्द्रस्य सैन्य शिविरम् । अलक्षेन्द्रः आम्भीकश्च आसीनौ वर्तते । वन्दिनं पुरुराजम् अग्रे कृत्वा एकतः प्रविशति यवन-सेनापतिः ।)
सेनापतिः-विजयतां सम्राट्।
पुरुराजः एष भारतवीरोऽपि यवनराजम् अभिवादयते ।
अलक्षेन्द्रः-(साक्षेपम्) अहो ! बन्धनगतः अपि आत्मानं वीर इति मन्यसे पुरुराज ?
पुरुराजः-यवनराज ! सिंहस्तु सिंह एव, वने वा भवेतु पजरे वा ।
अलक्षेन्द्रः-किन्तु पञ्जरस्थः सिंहः न किमपि पराक्रमते ।
पुरुराजः-पराक्रमते, यदि अवसरं लभते । अपि च यवनराज !
बन्धनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः ।।
उभयत्र समो वीरः वीरभावो हि वीरता ।। [2010, 17]
Answer:
**शब्दार्थ:**
अलक्षेन्द्रस्य = सिकन्दर का।
सैन्यशिविरम् = सेना का शिविर।
वन्दिनम् = कैदी को।
अभिवादयते = नमस्कार करता है।
साक्षेपम् = ताना मारते हुए।
बन्धनगतः = कैद किया हुआ।
उभयत्र = दोनों जगह।
**सन्दर्भ:** यह नाट्यांश हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत-खण्ड' में संकलित 'वीरः वीरेण पूज्यते' नामक पाठ से लिया गया है।
**प्रसंग:** इस अंश में सिकंदर और पुरुराज के बीच बातचीत दिखाई गई है, जिससे वीरता की सही परिभाषा स्पष्ट होती है।
**अनुवाद:**
**स्थान:** सिकंदर के सैनिक शिविर में, सिकंदर और आम्भीक बैठे हुए हैं। यूनानी सेनापति बंदी बनाए गए पुरुराज को आगे करके एक तरफ से प्रवेश करता है।
**सेनापति:** महाराज की जय हो!
**पुरुराज:** यह भारतीय वीर (मैं) भी यूनानी राजा को प्रणाम करता है।
**सिकंदर:** (गुस्से से) अरे पुरुराज! तुम बंदी होकर भी खुद को वीर मानते हो?
**पुरुराज:** यूनानी राजा! शेर तो शेर ही होता है, चाहे वह जंगल में रहे या पिंजरे में।
**सिकंदर:** लेकिन पिंजरे में बंद शेर कुछ भी पराक्रम नहीं कर पाता।
**पुरुराज:** यदि उसे मौका मिले तो वह पराक्रम अवश्य करता है। और हे यूनानी राजा!
**श्लोक:** बंधन हो या मृत्यु हो, जीत हो या हार हो, वीर दोनों ही स्थितियों में एक जैसा रहता है। वीर के इसी भाव को ही वीरता कहते हैं। एक सच्चे वीर के लिए, जीवन और मृत्यु, जीत और हार दोनों समान होती हैं, क्योंकि उसका साहस कभी नहीं बदलता।
In simple words: इस पाठ में सिकंदर और पुरुराज की बातचीत दिखाई गई है। पुरुराज बंदी होने पर भी खुद को वीर मानते हैं और कहते हैं कि शेर पिंजरे में भी शेर ही रहता है। वह वीरता की परिभाषा बताते हुए कहते हैं कि एक वीर हर स्थिति में समान रहता है, चाहे वह बंधन में हो, मर जाए, जीते या हारे।
🎯 Exam Tip: When translating dialogues, pay attention to the tone and context of each speaker's lines to convey the true meaning and emotion.
Question 2. आम्भिराज:-सम्राट् ! वाचाल ऐष हन्तव्यः ।
सेनापतिः- आदिशतु सम्राट् ।
अलक्षेन्द्रः-अथ मम मैत्रीसन्धेः अस्वीकरणे तव किम् अभिमतम् आसीत् पुरुराज ।
पुरुराजः-स्वराजस्य रक्षा, राष्ट्रद्रोहाच्च मुक्ति ।।
अलक्षेन्द्रः-मैत्रीकरणेऽपि राष्ट्रदोहः ?
पुरुराजः-आम् । राष्ट्रदोहः । यवनराज ! एकम् इदं भारतं राष्ट्र, बहूनि चात्र राज्यानि, बहवश्च शासकाः । त्वं मैत्रीसन्धिना तान् विभज्य भारतं जेतुम् इच्छसि । आम्भीकः चास्य प्रत्यक्षं प्रमाणम् ।।
अलक्षेन्द्रः-भारतम् एकं राष्ट्रम् इति तव वचनं विरुद्धम् । इह तावत् राजानः जनाः च परस्परं द्रुह्यन्ति ।
पुरुराजः-तत् सर्वम् अस्माकम् आन्तरिकः विषयः । बाह्यशक्तेः तत्र हस्तक्षेपः असह्यः । यवनराज ! पृथग्धर्माः पृथग्भाषाभूषाः अपि वयं सवें भारतीयाः, विशालम् अस्माकं राष्ट्रम् । तथाहि-
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।।
वर्ष तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥ | [2010, 12, 15]
Answer:
**शब्दार्थ:**
वाचालः = बातूनी।
हन्तव्यः = मारने योग्य है।
अस्वीकरणे = अस्वीकार करने पर।
मैत्रीसन्धेः = मित्रता की संधि।
अभिमतम् = विचार।
मुक्तिः = छुटकारा।
विभज्य = बाँटकर।
जेतुम् इच्छसि = जीतने की इच्छा करते हो।
विरुद्धं = विपरीत।
द्रुह्यन्ति = द्रोह करते हैं।
हस्तक्षेपः = दखल।
भारतीयः = भारतवासी।
**सन्दर्भ:** पूर्ववत्।
**प्रसंग:** इस नाट्यांश में भारत की एकता और अखंडता पर प्रकाश डाला गया है।
**अनुवाद:**
**आम्भिराज:** महाराज! यह बातूनी (पुरुराज) मारने लायक है।
**सेनापति:** महाराज आज्ञा दें।
**सिकंदर:** तो पुरुराज, मेरी मित्रता की संधि को अस्वीकार करने का तुम्हारा क्या मतलब था?
**पुरुराज:** अपने राज्य की रक्षा करना और राष्ट्रद्रोह से मुक्ति पाना।
**सिकंदर:** मित्रता करने में भी राष्ट्रद्रोह?
**पुरुराज:** हाँ! राष्ट्रद्रोह। यूनानी राजा! यह भारत एक राष्ट्र है और यहाँ कई राज्य और कई शासक हैं। तुम मित्रतापूर्ण संधि के बहाने उन्हें बांटकर भारत को जीतना चाहते हो। आम्भीक इसका सीधा प्रमाण है।
**सिकंदर:** भारत एक राष्ट्र है, यह तुम्हारा कहना गलत है। यहाँ तो राजा और प्रजा आपस में एक-दूसरे से नफरत करते हैं।
**पुरुराज:** वह सब हमारा अंदरूनी मामला है। उसमें बाहरी शक्ति का दखल बर्दाश्त नहीं है। यूनानी राजा! अलग-अलग धर्म, अलग-अलग भाषा और अलग-अलग वेशभूषा होने पर भी हम सभी भारतीय हैं। हमारा राष्ट्र बहुत विशाल है। जैसा कि कहा गया है:
"जो देश समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में स्थित है, वह भारतवर्ष है, और उसकी संतानें भारतवासी कहलाती हैं।" भारतभूमि का यह वर्णन उसकी प्राचीनता और गौरव को दर्शाता है।
In simple words: आम्भिराज पुरुराज को बातूनी कहकर मारने की सलाह देते हैं। सिकंदर पूछता है कि पुरुराज ने उसकी मित्रता क्यों नहीं स्वीकार की। पुरुराज कहते हैं कि यह अपने राज्य की रक्षा और राष्ट्रद्रोह से बचने के लिए था। वह बताते हैं कि भारत एक राष्ट्र है, भले ही उसमें कई राज्य हों, और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। वह भारत की भौगोलिक स्थिति का वर्णन करते हुए उसकी एकता पर जोर देते हैं।
🎯 Exam Tip: Focus on the main arguments of each character. पुरुराज's emphasis on India's unity despite diversity is a key point to remember.
Question 3. अलक्षेन्द्रः-अथ मे भारतविजयः दुष्करः ।
पुरुराजः-न केवलं दुष्करः असम्भवोऽपि ।।
अलक्षेन्द्रः- (सरोषम्) दुर्विनीत, किं न जानासि, इदानीं विश्वविजयिनः अलक्षेन्द्रस्य अग्रे वर्तसे ?
पुरुराजः-जानामि, किन्तु सत्यं तु सत्यम् एव यवनराज ! भारतीयाः वयं गीतायाः सन्देशं न विस्मरामः ।
अलक्षेन्द्रः-कस्तावत् गीतायाः सन्देशः ? पुरुराजः-श्रूयताम्-
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् ।।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥ [2009, 13, 16]
Answer:
**शब्दार्थ:**
दुष्करः = कठिन है।
सरोषम् = क्रोधसहित।
दुर्विनीत = दुष्ट।
न विस्मरामः = नहीं भूलते हैं।
हतो = मारे जाने पर।
प्राप्स्यसि = प्राप्त करोगे।
जित्वा = जीतकर।
भोक्ष्यसे = भोगोगे।
निराशीर्निर्ममो (निराशी: + निर्ममो) = बिना किसी इच्छा और मोह के।
**सन्दर्भ:** पूर्ववत्।
**प्रसंग:** इस नाट्यांश में पुरुराज की निडरता और सिकंदर को दिए गए गीता के ज्ञान का वर्णन है।
**अनुवाद:**
**सिकंदर:** तो क्या मेरी भारत विजय मुश्किल है?
**पुरुराज:** सिर्फ मुश्किल ही नहीं, असंभव भी है।
**सिकंदर:** (गुस्से से) दुष्ट! क्या तुम्हें नहीं पता कि तुम इस समय विश्वविजेता सिकंदर के सामने खड़े हो?
**पुरुराज:** मैं जानता हूँ, लेकिन यूनानी राजा, सत्य तो सत्य ही रहता है! हम भारतीय गीता के संदेश को कभी नहीं भूलते हैं।
**सिकंदर:** तो तुम्हारी गीता का संदेश क्या है?
**पुरुराज:** सुनो-
"यदि युद्ध में मारे गए तो स्वर्ग मिलेगा, और यदि जीत गए तो पृथ्वी (राज्य) का भोग करोगे। इसलिए तुम इच्छाओं से रहित, मोह से रहित और चिंता मुक्त होकर युद्ध करो।" गीता का यह उपदेश हमें निडर होकर कर्तव्य पालन सिखाता है।
In simple words: सिकंदर को लगता है कि भारत को जीतना मुश्किल है। पुरुराज उसे बताते हैं कि यह सिर्फ मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव भी है। जब सिकंदर गुस्सा होता है, पुरुराज उसे गीता का संदेश सुनाते हैं। गीता कहती है कि युद्ध में मरने पर स्वर्ग मिलता है और जीतने पर धरती का राज्य मिलता है, इसलिए बिना किसी इच्छा या मोह के युद्ध करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: Memorize the shloka from the Bhagavad Gita and its meaning, as it is a central theme and often asked in exams.
Question 4. अलक्षेन्द्रः-(किमपि विचिन्त्य) अलं तव गीतया । पुरुराज ! त्वम् अस्माकं बन्दी वर्तसे । ब्रूहि कथं त्वयि वर्तितव्यम् ? ।
पुरुराजः-यथैकेन वीरेण वीरं प्रति ।
अलक्षेन्द्रः-(पुरोः वीरभावेन हर्षितः) साधु वीर ! साधु ! नूनं वीरः असि । धन्यः त्वं, धन्या ते मातृभूमिः । (सेनापतिम् उद्दिश्य) सेनापते !
सेनापतिः- सम्राट ! अलक्षेन्द्रः वीरस्य पुरुराजस्य बन्धनानि मोचय । सेनापतिः-यत् सम्राट् आज्ञापयति ।।
अलक्षेन्द्रः-(एकेन हस्तेन पुरोः द्वितीयेन च आम्भीकस्य हस्तं गृहीत्वा) वीर पुरुराज ! सखे आम्भीक ! इतः परं वयं सर्वे समानमित्राणि, इदानीं मैत्रीमहोत्सवं सम्पादयामः।. ( सर्वे निर्गच्छन्ति)
Answer:
**शब्दार्थ:**
वर्तितव्यम् = व्यवहार करना चाहिए।
युध्यस्व = युद्ध करो।
विगतज्वरः = चिंता रहित होकर।
साधु = धन्य।
मोचयः = खोल दो।
निर्गच्छन्ति = बाहर निकल जाते हैं।
**सन्दर्भ:** पूर्ववत्।
**प्रसंग:** इस नाट्यांश में यह संदेश दिया गया है कि शत्रुता होने पर भी एक वीर को दूसरे वीर के साथ वीरतापूर्ण व्यवहार ही करना चाहिए।
**अनुवाद:**
**सिकंदर:** (कुछ सोचकर) बस, तुम्हारी गीता बहुत हुई। पुरुराज! तुम हमारे कैदी हो। बताओ, तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए?
**पुरुराज:** जैसा एक वीर दूसरे वीर के साथ करता है।
**सिकंदर:** (पुरुराज की वीरता से खुश होकर) शाबाश वीर! शाबाश! सच में तुम वीर हो। तुम धन्य हो, तुम्हारी मातृभूमि धन्य है। (सेनापति को लक्ष्य करके) सेनापति!
**सेनापति:** महाराज! सिकंदर-वीर पुरुराज के बंधन खोल दें।
**सेनापति:** जैसा महाराज आज्ञा दें।
**सिकंदर:** (एक हाथ से पुरुराज का और दूसरे हाथ से आम्भीक का हाथ पकड़कर) वीर पुरुराज! मित्र आम्भीक! अब हम सब बराबर के मित्र हैं। अब मित्रता का उत्सव मनाते हैं। (सब बाहर निकल जाते हैं।) इस घटना से सिकंदर के वीर हृदय की उदारता और पुरुराज के प्रति उसके सम्मान का पता चलता है।
In simple words: सिकंदर पुरुराज से पूछता है कि कैदी होने के नाते उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए। पुरुराज निडर होकर जवाब देते हैं कि जैसा एक वीर दूसरे वीर से करता है। पुरुराज की वीरता से प्रभावित होकर, सिकंदर उसे मुक्त करने का आदेश देता है और फिर पुरुराज तथा आम्भीक दोनों को मित्र बनाकर मित्रता का उत्सव मनाता है।
🎯 Exam Tip: This passage highlights the respect between two brave warriors. Focus on how Alexander's attitude changes from initial contempt to admiration for Pururaj's valor.
अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर
Question 1. अलक्षेन्द्रः कः आसीत् ? [2010, 13, 16, 18]
Answer: अलक्षेन्द्रः यवनराजः आसीत् ।
In simple words: सिकंदर यूनानी राजा था।
🎯 Exam Tip: Remember to state Alexander's identity simply and clearly for direct questions.
Question 2. पुरुराजः कः आसीत् ? [2011, 12, 17]
Answer: पुरुराजः एकः भारतवीरः आसीत् ।
In simple words: पुरुराज एक भारतीय वीर राजा था।
🎯 Exam Tip: Always identify characters with their key roles or qualities as given in the text.
Question 3. पुरुराजः आत्मानं कीदृशं दर्शयति ?
Answer: पुरुराजः आत्मानं वीरं दर्शयति ।।
In simple words: पुरुराज खुद को एक वीर के रूप में प्रस्तुत करता है।
🎯 Exam Tip: Focus on how a character perceives themselves, especially when faced with adversity.
Question 4. पुरुराजः केन सह युद्धम् अकरोत् ? [2011, 12, 13, 14, 15, 17]
Answer: पुरुराजः अलक्षेन्द्रेण सह युद्धम् अकरोत् ।
In simple words: पुरुराज ने सिकंदर के साथ युद्ध किया था।
🎯 Exam Tip: Directly answer the "who" and "with whom" for battle-related questions.
Question 5. अलक्षेन्द्रः पुरुराजस्य केन भावेन हर्षितः अभवत् ? [2014, 18]
Answer: अलक्षेन्द्रः पुरुराजस्य वीरभावेन हर्षितः अभवत् ।
In simple words: सिकंदर पुरुराज की वीरता के भाव से प्रसन्न हुआ।
🎯 Exam Tip: Identify the specific quality or action that leads to another character's reaction.
Question 6. अलक्षेन्द्रः पुरुराजेन सह कथं मैत्री इच्छति ?
Answer: अलक्षेन्द्रः भारतीय नृपैः सह मैत्री कृत्वा भारतं विभज्य जेतुम् इच्छति ।
In simple words: सिकंदर भारतीय राजाओं के साथ दोस्ती करके भारत को बांटकर जीतना चाहता था।
🎯 Exam Tip: Always explain the underlying motive when discussing diplomatic relations or alliances.
Question 7. पुरुराजः आत्मना सह अलक्षेन्द्रं कथं व्यवहर्तुं कथयति ?
Answer: यथा वीरः वीरेण सह व्यवहरति आत्मना सह तथैव व्यवहर्तुं पुरुराजः कथयति।
In simple words: पुरुराज सिकंदर से कहते हैं कि वह उसके साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा एक वीर दूसरे वीर के साथ करता है।
🎯 Exam Tip: This question tests your understanding of the core message of mutual respect among warriors.
Question 8. गीतायाः कः सन्देशः ? [2011, 14, 16]
या
पुरुराजः गीतायाः कः सन्देशम् अकथयत् ?
Answer: “युद्धे जयस्य पराजयस्य वा चिन्तां त्यक्त्वा युद्धं करणीयम् । युद्धे मरणेन स्वर्गप्राप्तिः जयेन च राज्यं प्राप्तिः भवति” इति गीतायाः सन्देशं पुरुराजः अकथयत्।
In simple words: पुरुराज ने बताया कि गीता का संदेश है कि जीत या हार की चिंता छोड़कर युद्ध करना चाहिए। युद्ध में मरने पर स्वर्ग मिलता है और जीतने पर राज्य मिलता है।
🎯 Exam Tip: This is a very important question. Remember the key phrases about performing duty without attachment to results and the outcome of victory or death.
Question 9. वीरः केन पूज्यते ? [2009, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18]
या
कः वीरेण पूज्यते ?
Answer: वीरः वीरेण पूज्यते ।
In simple words: एक वीर की पूजा दूसरे वीर द्वारा की जाती है।
🎯 Exam Tip: This is the central theme of the chapter. Make sure you know this phrase and its meaning perfectly.
Question 10. किं जित्वा भोक्ष्यसे महीम् ? [2016]
Answer: युद्धं जित्वा भोक्ष्यसे महीम् ।
In simple words: युद्ध जीतकर धरती का राज्य भोगते हैं।
🎯 Exam Tip: This refers to the reward for victory in battle, as per the Gita's message. Connect it to the larger context.
Question 11. अलक्षेन्द्रः राज्ञा पुरुणा सह कीदृशं व्यवहारम् अकरोत् ?
Answer: अलक्षेन्द्रः राज्ञा पुरुणा सह मित्रवत् व्यवहारम् अकरोत् ।
In simple words: सिकंदर ने राजा पुरु के साथ मित्र जैसा व्यवहार किया।
🎯 Exam Tip: Highlight the change in Alexander's behavior, showing his eventual respect and friendship.
Question 12. अलक्षेन्द्र पुरु किं प्रश्नम् अपृच्छत् ?
Answer: कस्तावद् गीतायाः सन्देशः? इति अलक्षेन्द्रः पुरु अपृच्छत् ।।
In simple words: सिकंदर ने पुरुराज से पूछा, "गीता का संदेश क्या है?"
🎯 Exam Tip: Identify the specific question Alexander posed regarding the Gita's teachings.
Question 13. भारतविजयः न केवलं दुष्करः असम्भवोऽपि, कस्य उक्तिः ?
Answer: भारतविजयः न केवलं दुष्करः असम्भवोऽपि', इति. पुरुराजस्य उक्तिः।
In simple words: "भारत को जीतना केवल कठिन नहीं, असंभव भी है" - यह बात पुरुराज ने कही थी।
🎯 Exam Tip: Attributing famous quotes or strong statements to the correct character is crucial.
Question 14. 'भारतम् एकं राष्ट्रम् इति' कस्य उक्तिः ? [2009, 18]
Answer: भारतम् एकं राष्ट्रम् इति अलक्षेन्द्रस्य उक्तिः
In simple words: "भारत एक राष्ट्र है" - यह बात सिकंदर ने कही थी।
🎯 Exam Tip: Pay close attention to who says what, as some statements might seem contradictory to a character's initial stance.
Question 15. अलक्षेन्द्रः सेनापतिं किम् आदिशत् ? [2010]
Answer: अलक्षेन्द्रः सेनापतिम् आदिशत् यत् “वीरस्य पुरुराजस्य बन्धनानि मोचय ।”
In simple words: सिकंदर ने सेनापति को आदेश दिया कि "वीर पुरुराज के बंधन खोल दो।"
🎯 Exam Tip: Remember the specific command given by Alexander, as it marks a turning point in the play.
अनुवादात्मक
Question 1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए
Answer:
| हिन्दी वाक्य | संस्कृतानुवाद |
|---|---|
| (क) तुम अपने को वीर कहते हो। | त्वम् आत्मनं वीरं कथयसि। |
| (ख) अपने राष्ट्र की रक्षा करना हमारा धर्म है। | स्वराष्ट्र-रक्षणम् अस्माकं धर्मः अस्ति। |
| (ग) तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए ? | त्वया सह कीदृशः व्यवहारः करणीयः ? |
| (घ) जैसा व्यवहार एक वीर दूसरे वीर के साथ करता है। | यादृशः व्यवहारम् एकः वीरः अन्येन वीरेण सह करोति । |
| (ङ) एक वीर दूसरे वीर का सम्मान करता है। | एकः वीरः अन्यस्य वीरस्य सम्मानं करोति। |
| (च) अलग-अलग वेशभूषा होने पर भी हम सब एक हैं। | पृथक्-पृथक् वेशभूषाः अपि वयं सर्वे अभिन्नाः स्मः। |
In simple words: संस्कृत में अनुवाद करते समय, आपको हर शब्द के सही रूप (विभक्ति, वचन) और क्रिया के सही काल और पुरुष का ध्यान रखना चाहिए। इससे वाक्य का अर्थ सही निकलता है।
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the correct cases (विभक्ति), numbers (वचन), and verb conjugations (लकार, पुरुष) to ensure accurate Sanskrit translation.
व्याकरणात्मक
Question 1. 'कृ' धातु में 'क्त्वा' प्रत्यय जोड़ने पर 'कृत्वा' शब्द बनता है। इसी प्रकार निम्नलिखित को जोड़कर शब्द-रचना कीजिए-
लभ् + क्त्वा, हन् + क्त्वा, जि + क्त्वा, ग्रह् + क्त्वा, गम् + क्त्वा ।
Answer:
| धातु + क्त्वा | शब्द | धातु + क्त्वा | शब्द |
|---|---|---|---|
| लभ् + क्त्वा | लब्ध्वा | हन् + क्त्वा | हत्वा |
| जि + क्त्वा | जीत्वा | ग्रह् + क्त्वा | गृहीत्वा |
| गम् + क्त्वा | गत्वा |
In simple words: 'क्त्वा' प्रत्यय का उपयोग किसी कार्य को करके दूसरे कार्य के होने को दर्शाने के लिए किया जाता है। जब यह धातु के साथ जुड़ता है, तो यह 'करके' या 'होकर' का अर्थ देता है।
🎯 Exam Tip: Practice the formation of 'क्त्वा' प्रत्यय with various roots. Pay attention to any phonetic changes that occur when the suffix is added to different types of verbs.
Question 2. निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त विभक्ति और वचन बताइए-
पञ्जरे, बन्धनम्, अस्वीकरणे, जनाः, सर्वे, गीतायाः, आत्मानम्, वने, तव, राजानः, समुद्रस्य, मे।
Answer:
| शब्द-रूप | शब्द | विभक्ति | वचन |
|---|---|---|---|
| पञ्जरे | पञ्जर | सप्तमी | एकवचन |
| बन्धनम् | बन्धन | द्वितीया | एकवचन |
| अस्वीकरणे | अस्वीकरण | सप्तमी | एकवचन |
| जनाः | जन | प्रथमा | बहुवचन |
| सर्वे | सर्व | प्रथमा | बहुवचन |
| गीतायाः | गीता | षष्ठी | एकवचन |
| आत्मानम् | आत्मन् | द्वितीया | एकवचन |
| वने | वन | सप्तमी | एकवचन |
| तव | युष्मद् | षष्ठी | एकवचन |
| राजानः | राजन् | प्रथमा | एकवचन |
| समुद्रस्य | समुद्र | षष्ठी | एकवचन |
| मे | अस्मद् | चतुर्थी/षष्ठी | एकवचन |
In simple words: संस्कृत में हर संज्ञा शब्द की अलग-अलग स्थितियों के अनुसार विभक्ति (कारक) और वचन (संख्या) बदलते हैं। इन्हें पहचानना वाक्य के सही अर्थ को समझने के लिए जरूरी है।
🎯 Exam Tip: Thoroughly learn the declension tables (शब्द-रूप) for common nouns, pronouns, and adjectives. Understanding the stem and suffix changes is key to identifying correct vibhakti and vachan.
Question 3. निम्नलिखित शब्दों के धातु, लकार, पुरुष व वचन लिखिए-
भवतु, इच्छसि, लभते, द्रुह्यन्ति ।
Answer:
| धातु-रूप | धातु | लकार | पुरुष | वचन |
|---|---|---|---|---|
| भवतु | भू | लोट् | प्रथम | एकवचन |
| इच्छसि | इष् | लट् | मध्यम | एकवचन |
| लभते | लभ् | लट् | प्रथम | एकवचन |
| द्रुह्यन्ति | द्रुह | लट् | प्रथम | बहुवचन |
In simple words: क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। लकार (काल), पुरुष (कर्ता) और वचन (संख्या) धातु के रूप को बदलते हैं। इन्हें पहचानना संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: Memorize the conjugations (धातु-रूप) for different tenses (लकार) and persons (पुरुष) for common verbs. Pay attention to how atmanepadi and parasmaipadi verbs differ.
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