UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 Varanasih

Official UP Board Solutions for Class 10 Hindi: Chapter 01 वाराणसी

Access comprehensive textbook solutions for Chapter 01 वाराणसी using the official curriculum guides for Class 10 Hindi. Designed to align with the 2026 27 UP Board standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.

Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 01 वाराणसी

Navigate directly to the solved Hindi textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.

अवतरण का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद

 

Question 1. वाराणसी सुविख्याता प्राचीना नगरी । इयं विमलसलिलतरङ्गायाः गङ्गायाः कूले स्थिता। अस्याः घट्टानां वलयाकृतिः पङक्तिः धवलायां चन्द्रिकायां बहु राजते । अगणिताः पर्यटकाः सुदूरेभ्यः देशेभ्यः नित्यम् अत्र आयान्ति, अस्याः घट्टानांचशोभां विलोक्य इमां बहु प्रशंसन्ति । [2010, 14, 16]
Answer:

शब्दार्थ:
सुविख्याता = बहुत प्रसिद्ध
विमलसलिलतरङ्गायाः = स्वच्छ जल की लहरों से युक्त
कूले = किनारे पर
घट्टानाम् = घाटों की
वलयाकृतिः = घुमावदार आकार वाली
चन्द्रिकायां = चाँदनी में
राजते = सुशोभित होती है
विलोक्य = देखकर

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'वाराणसी' पाठ से लिया गया है। यह अंश उस प्रसिद्ध नगरी वाराणसी के बारे में बताता है।

प्रसंग: इस गद्यांश में वाराणसी की पुरानी पहचान और उसकी जगह के बारे में बताया गया है। वाराणसी गंगा नदी के किनारे बसी एक बहुत ही महत्वपूर्ण नगरी है।

अनुवाद: वाराणसी बहुत प्रसिद्ध और पुरानी नगरी है। यह स्वच्छ जल वाली गंगा नदी के किनारे पर स्थित है। इसके घाटों की घुमावदार पंक्ति सफेद चाँदनी में बहुत सुंदर लगती है। बहुत सारे यात्री दूर-दूर के देशों से हर दिन यहाँ आते हैं, और इसके घाटों की सुंदरता को देखकर इसकी बहुत तारीफ करते हैं। वाराणसी की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व यहाँ आने वाले सभी लोगों को आकर्षित करता है।
In simple words: वाराणसी एक बहुत पुराना और मशहूर शहर है। यह शहर गंगा नदी के किनारे है, जहाँ घाटों की लंबी कतार चाँदनी रात में बहुत खूबसूरत लगती है। हर दिन कई लोग यहाँ आते हैं और इसकी तारीफ करते हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृत गद्यांश के अनुवाद में, पहले कठिन शब्दों के अर्थ समझें, फिर सन्दर्भ और प्रसंग लिखें, और अंत में पूरे गद्यांश का सरल हिन्दी में अनुवाद करें।

 

Question 2. वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे-गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते । अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानं चे वर्धयति । अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः। न केवलं भारतीयाः अपितु वैदेशिकाः गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, निःशुल्कंचविद्यां गृह्णन्ति । अत्र हिन्दूविश्वविद्यालयः, संस्कृतविश्वविद्यालयः, काशीविद्यापीठम् इत्येते त्रयः विश्वविद्यालयाः सन्ति, येषु नवीनानां प्राचीनानां च ज्ञानविज्ञानविषयाणाम् अध्ययनं प्रचलति । [2010, 12, 16]
Answer:

शब्दार्थ:
प्राचीनकालादेव (प्राचीनकालात् + एव) = प्राचीन काल से ही
गेहे-गेहे = घर-घर में
द्योतते = प्रकाशित है
संस्कृतवाग्धारा = संस्कृत वाणी का प्रवाह
वर्द्धयति = बढ़ाता है
मूर्धन्याः = उच्चकोटि के
निरताः = संलग्न रहते हैं
गीर्वाणवाण्याः = देववाणी के, संस्कृत के

सन्दर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'वाराणसी' पाठ से लिया गया है।

प्रसंग: इस गद्यांश में वाराणसी की शिक्षा के महत्व और वहाँ के विश्वविद्यालयों का वर्णन किया गया है। यहाँ ज्ञान की प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है।

अनुवाद: वाराणसी में पुराने समय से ही हर घर में विद्या की अद्भुत रोशनी फैलती रही है। आज भी यहाँ संस्कृत भाषा की धारा लगातार बहती रहती है, और लोगों का ज्ञान बढ़ता रहता है। यहाँ पर कई बड़े विद्वान वैदिक साहित्य को पढ़ाने और पढ़ने में लगे हुए हैं। केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी लोग भी संस्कृत भाषा सीखने के लिए यहाँ आते हैं और मुफ्त में शिक्षा पाते हैं। यहाँ हिन्दू विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ- ये तीन विश्वविद्यालय हैं, जहाँ नए और पुराने ज्ञान-विज्ञान के विषयों का अध्ययन चलता रहता है। यह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जहाँ प्राचीन ज्ञान को आधुनिक रूप में भी पढ़ाया जाता है।
In simple words: वाराणसी में बहुत पुराने समय से पढ़ाई होती रही है। आज भी यहाँ संस्कृत का ज्ञान बढ़ता है, और कई बड़े विद्वान इसे पढ़ाते हैं। विदेशी लोग भी यहाँ मुफ्त में संस्कृत सीखने आते हैं। यहाँ तीन बड़े विश्वविद्यालय भी हैं जहाँ पुराना और नया ज्ञान पढ़ाया जाता है।

🎯 Exam Tip: शिक्षा से संबंधित गद्यांशों में मुख्य बातों पर ध्यान दें, जैसे शिक्षा का स्रोत, शिक्षण की भाषा, और प्रमुख शैक्षणिक संस्थान।

 

Question 3. एषा नगरी भारतीयसंस्कृतेः संस्कृतभाषायाश्च केन्द्रस्थली अस्ति । इत एव संस्कृतवाङ्मयस्य संस्कृतेश्च आलोकः सर्वत्र प्रसृतः । मुगलयुवराजः दाराशिकोहः अत्रागत्य भारतीय-दर्शन-शास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् । स तेषां ज्ञानेन तथा प्रभावितः अभवत्, यत् तेन उपनिषदाम् अनुवादः पारसी-भाषायां कारितः । [2014, 16, 18]
Answer:

शब्दार्थ:
इत एव = यहीं से
संस्कृतेश्च = संस्कृति का
आलोकः = प्रकाश
प्रसृतः = फैला
कारितः = कराया

सन्दर्भ-प्रसंग: पूर्ववत्। (यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'वाराणसी' पाठ से लिया गया है। प्रसंग: इस गद्यांश में वाराणसी को भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का केंद्र बताया गया है, और दाराशिकोह के यहाँ के अध्ययन का वर्णन किया गया है।)

अनुवाद: यह नगरी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का मुख्य केंद्र है। यहीं से संस्कृत साहित्य और संस्कृति का ज्ञान सब जगह फैला है। मुगल युवराज दाराशिकोह यहाँ आकर भारतीय दर्शन-शास्त्रों को पढ़ा। वह उनके ज्ञान से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों का फारसी भाषा में अनुवाद कराया। यह दर्शाता है कि वाराणसी प्राचीनकाल से ही ज्ञान का एक बड़ा स्रोत रही है।
In simple words: वाराणसी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का मुख्य केंद्र है। यहीं से संस्कृत का ज्ञान सब जगह फैला। मुगल शहजादे दाराशिकोह ने यहाँ दर्शनशास्त्र पढ़ा और इतना प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद करवाया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक प्रसंगों वाले गद्यांशों में व्यक्तियों और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से लिखें, जैसे दाराशिकोह का उपनिषदों का अनुवाद।

 

Question 4. इयं नगरी विविधधर्माणां सङ्गमस्थली । महात्मा बुद्धः, तीर्थङ्करः पाश्र्वनाथः, शङ्कराचार्य, कबीरः, गोस्वामी तुलसीदासः अन्ये च बहवः महात्मानः अत्रागत्य स्वीयान् विचारान् प्रासारयन् । ने केवलं दर्शने, साहित्ये, धर्मे, अपितु कलाक्षेत्रेऽपि इयं नगरी विविधानां कलानां, शिल्पानां च कृते लोके विश्रुता । अत्रत्याः कौशेयशाटिकाः देशे-देशे सर्वत्र स्पृह्यन्ते ।।
अत्रत्याः प्रस्तरमूर्तयः प्रथिताः । इयं निजां प्राचीनपरम्पराम् इदानीमपि परिपालयति–तथैव गीयते कविभिः [2010, 11, 13, 15, 17]

Answer:

शब्दार्थ:
सङ्गमस्थली = मिलने का स्थान
अत्रागत्य (अत्र + आगत्य) = यहाँ आकर
स्वीयान् = अपने
प्रासारयन् = फैलाया
कृते = के लिए
विश्रुता = प्रसिद्ध
अत्रत्याः = यहाँ की
कौशेयशाटिकाः = रेशमी साड़ियाँ
स्पृह्यन्ते = पसन्द की जाती हैं
प्रस्तरमूर्तयः = पत्थर की मूर्तियाँ
प्रथिताः = प्रसिद्ध

सन्दर्भ-प्रसंग: पूर्ववत्। (यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड' के 'वाराणसी' पाठ से लिया गया है। प्रसंग: इस गद्यांश में वाराणसी को विभिन्न धर्मों और कलाओं का संगम स्थल बताया गया है।)

अनुवाद: यह नगरी कई धर्मों के मिलने का स्थान रही है। महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर पार्श्वनाथ, शंकराचार्य, कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और कई दूसरे बड़े महात्माओं ने यहाँ आकर अपने विचार फैलाए, यानी अपने विचारों का प्रचार किया। यह नगरी सिर्फ दर्शन, साहित्य और धर्म में ही नहीं, बल्कि कला के क्षेत्र में भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की रेशमी साड़ियाँ देश-विदेश में सभी जगह पसंद की जाती हैं। यहाँ की पत्थर की मूर्तियाँ भी मशहूर हैं। यह नगरी अपनी पुरानी परंपरा को आज भी बनाए रखती है। कवि भी इसी तरह गाते हैं। यह शहर अपनी विरासत को आज भी संभाल कर रखा हुआ है।
In simple words: वाराणसी अलग-अलग धर्मों का मिलन स्थल है। बुद्ध, पार्श्वनाथ, कबीर जैसे कई बड़े संतों ने यहाँ आकर अपने विचार बांटे। यह शहर कला और शिल्प के लिए भी मशहूर है। यहाँ की रेशमी साड़ियाँ और पत्थर की मूर्तियाँ बहुत प्रसिद्ध हैं।

🎯 Exam Tip: वाराणसी की बहुमुखी प्रतिभा पर आधारित प्रश्नों में उसके धार्मिक, साहित्यिक, कलात्मक और शिल्पगत महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 5. मरणं मङ्गलं यत्र विभूतिश्च विभूषणम् ।
कौपीनं यत्र कौशेयं सा काशी केन मीयते ॥ [2014, 15]

Answer:

शब्दार्थ:
विभूतिः = भस्म
विभूषणम् = आभूषण है
कौपीनं = लँगोटी
कौशेयं = रेशमी वस्त्र
मीयते = मापी जा सकती है

सन्दर्भ: यह श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के 'संस्कृत-खण्ड के वाराणसी' पाठ से लिया गया है।

प्रसंग: इस श्लोक में वाराणसी की पवित्र पहचान का वर्णन किया गया है। यह बताता है कि वाराणसी कितनी खास है।

अनुवाद: जहाँ पर मरना कल्याणकारी माना जाता है, जहाँ (शरीर पर लगाने वाली) भस्म ही आभूषण है, और जहाँ लँगोटी ही रेशमी वस्त्र के समान है, उस काशी की तुलना किससे की जा सकती है? यानी उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। वाराणसी की महिमा इतनी अनोखी है कि उसकी तुलना किसी और स्थान से संभव नहीं है।
In simple words: जहाँ मरना भी शुभ माना जाता है, राख भी गहना है, और लँगोटी भी रेशमी कपड़े जैसी है, उस काशी की बराबरी कौन कर सकता है? कोई नहीं।

🎯 Exam Tip: श्लोक के अनुवाद में, एक-एक शब्द के अर्थ को समझकर पूरे श्लोक का भाव स्पष्ट करें, और उसकी विशिष्टता पर जोर दें।

 

अतिलघु-उतरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर

 

Question 1. वाराणसी नगरी कुत्र स्थिता अस्ति ? [2010, 11]
Answer: वाराणसी नगरी गङ्गायाः तटे स्थिता अस्ति ।
In simple words: वाराणसी शहर गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है।

🎯 Exam Tip: स्थानों से संबंधित प्रश्नों में, सटीक स्थान का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, जैसे "गंगायाः तटे" (गंगा के किनारे)।

 

Question 2. वैदेशिकाः पर्यटकाः कस्याः शोभाम् अवलोक्य वाराणसी प्रशंसन्ति ? । [2012]
Answer: वैदेशिकाः पर्यटकाः गङ्गायाः घट्टानां शोभां विलोक्य वाराणसी प्रशंसन्ति ।
In simple words: विदेशी यात्री गंगा के घाटों की सुंदरता देखकर वाराणसी की तारीफ करते हैं।

🎯 Exam Tip: "कस्याः" जैसे प्रश्नों में, उत्तर में सही विभक्ति (षष्ठी एकवचन) का प्रयोग करें, जैसे "गङ्गायाः घट्टानां" (गंगा के घाटों की)।

 

Question 3. वैदेशिकाः किमर्थम् (केन हेतुना) वाराणसीम् आगच्छन्ति ?
Answer: वैदेशिकाः संस्कृतस्य अध्ययनाय वाराणसीम् आगच्छन्ति ।
In simple words: विदेशी लोग संस्कृत पढ़ने के लिए वाराणसी आते हैं।

🎯 Exam Tip: "किमर्थम्" (किसलिए) या "केन हेतुना" (किस कारण से) के प्रश्नों में, हमेशा उद्देश्य को चतुर्थी विभक्ति में व्यक्त करें, जैसे "अध्ययनाय" (अध्ययन के लिए)।

 

Question 4. वाराणस्यां कति विश्वविद्यालयाः सन्ति ? के च ते ? या वाराणस्य कति विश्वविद्यालयः सन्ति ? [2010]
Answer: वाराणस्यां हिन्दू विश्वविद्यालयः, संस्कृत विश्वविद्यालयः, काशीविद्यापीठम् इति एते त्रयः विश्वविद्यालयः सन्ति।
In simple words: वाराणसी में तीन विश्वविद्यालय हैं: हिन्दू विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ।

🎯 Exam Tip: संख्याओं और नामों से जुड़े प्रश्नों में, सभी सही नामों और सही संख्या का उल्लेख करें।

 

Question 5. वाराणसी कस्याः भाषायाः केन्द्रम् अस्ति ? [2015]
या
वाराणसी नगरी कस्य केन्द्रस्थली अस्ति ?
या
वाराणसी कस्य केन्द्रस्थलम् अस्ति ?
या
वाराणसी नगरी केषां संगमस्थली अस्ति? [2016]

Answer: वाराणसी भारतीयसंस्कृतेः संस्कृतभाषायाश्च केन्द्रम् अस्ति ।
In simple words: वाराणसी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का केंद्र है।

🎯 Exam Tip: जब एक ही प्रश्न को अलग-अलग तरीकों से पूछा जाए, तो सुनिश्चित करें कि आपका उत्तर सभी संभावित रूपों को कवर करे।

 

Question 6. कः मुगलयुवराजः वाराणस्याम् आगत्य भारतीय दर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ?
Answer: मुगलयुवराजः दाराशिकोहः वाराणस्याम् आगत्य भारतीय दर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ।
In simple words: मुगल युवराज दाराशिकोह वाराणसी आकर भारतीय दर्शनशास्त्रों को पढ़ा।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष व्यक्ति से संबंधित प्रश्नों में, व्यक्ति का नाम और उसके प्रमुख कार्य का उल्लेख करें।

 

Question 7. दाराशिकोहः कुत्र गत्वा भारतीयशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ? [2009]
Answer: दाराशिकोहः वाराणस्यां गत्वा भारतीयशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ।
In simple words: दाराशिकोह वाराणसी जाकर भारतीय शास्त्रों को पढ़ा।

🎯 Exam Tip: "कुत्र" (कहाँ) के प्रश्नों में, स्थान का सही नाम सप्तमी विभक्ति में दें, जैसे "वाराणस्यां" (वाराणसी में)।

 

Question 8. दाराशिकोहः कस्यां भाषायाम् उपनिषदाम् अनुवादम् अकारयत् ? [2012, 13]
Answer: दाराशिकोह: पारसीभाषायाम् उपनिषदाम् अनुवादम् अकारयत्।।
In simple words: दाराशिकोह ने उपनिषदों का अनुवाद पारसी भाषा में करवाया।

🎯 Exam Tip: अनुवाद से संबंधित प्रश्नों में, मूल पाठ और अनुवादित भाषा दोनों का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

Question 9. वाराणसी नगरी केषां सङ्गमस्थली अस्ति ? [2009, 12, 16, 17]
या
का नगरी विविधधर्माणां सङ्गमस्थली अस्ति ?
या
वाराणसी कस्य सङ्गमस्थली अस्ति ?

Answer: वाराणसी नगरी विविधधर्माणां सङ्गमस्थली अस्ति ।
In simple words: वाराणसी नगरी कई धर्मों के मिलने की जगह है।

🎯 Exam Tip: "केषां" (किनका) या "कस्य" (किसका) के प्रश्नों में, उत्तर में सही षष्ठी विभक्ति का प्रयोग करें, जैसे "विविधधर्माणां" (विभिन्न धर्मों का)।

 

Question 10. वाराणसी किमर्थं प्रसिद्धा ? [2013]
या
वाराणसी कथं प्रसिद्धा अस्ति ?

Answer: वाराणसी विविधानां शिल्पानां कलानां, संस्कृतभाषायाः संस्कृतेश्च कृते प्रसिद्धा अस्ति ।
In simple words: वाराणसी कई शिल्पों, कलाओं, संस्कृत भाषा और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: "किमर्थं" (किसलिए) या "कथं" (कैसे) के प्रश्नों में, प्रसिद्धि के सभी प्रमुख कारणों का संक्षिप्त और स्पष्ट विवरण दें।

 

Question 11. कुत्र मरणं मङ्गलं भवति ? [2009, 15, 16, 17, 18]
Answer: वाराणस्यां मरणं मङ्गलं भवति ।
In simple words: वाराणसी में मरना शुभ माना जाता है।

🎯 Exam Tip: धार्मिक महत्व वाले स्थानों से संबंधित प्रश्नों में, सटीक स्थान का नाम सप्तमी विभक्ति में दें, जैसे "वाराणस्यां" (वाराणसी में)।

 

Question 12. सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालयः कस्यां नगर्यां विद्यते ? [2017]
Answer: सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालयः वाराणस्यां नगर्यां विद्यते ।
In simple words: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी शहर में है।

🎯 Exam Tip: विश्वविद्यालयों या विशिष्ट संस्थानों से संबंधित प्रश्नों में, संस्थान का नाम और उसके शहर का नाम सही ढंग से लिखें।

 

Question 13. दाराशिकोहः किमर्थम् अत्रागतः ?
Answer: मुगलयुवराजः दाराशिकोहः भारतीय दर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनाय अत्र आगच्छत् ।
In simple words: मुगल युवराज दाराशिकोह भारतीय दर्शनशास्त्रों को पढ़ने के लिए यहाँ आया था।

🎯 Exam Tip: "किमर्थम्" (किसलिए) वाले प्रश्नों में, उद्देश्य को चतुर्थी विभक्ति में बताएं, जैसे "अध्ययनाय" (पढ़ने के लिए)।

 

Question 14. दाराशिकोहः वाराणसी आगत्य किमकरोत् ?
Answer: दाराशिकोहः वाराणसीं आगत्य भारतीय दर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ।
In simple words: दाराशिकोह वाराणसी आकर भारतीय दर्शनशास्त्रों को पढ़ा।

🎯 Exam Tip: "किमकरोत्" (क्या किया) के प्रश्नों में, व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 15. वाराणस्याः कानि वस्तूनि प्रसिद्धाः सन्ति ? [2010]
Answer: वाराणस्याः कौशेयशाटिकाः प्रस्तरमूर्तयः च प्रसिद्धाः सन्ति ।
In simple words: वाराणसी की रेशमी साड़ियाँ और पत्थर की मूर्तियाँ प्रसिद्ध हैं।

🎯 Exam Tip: "कानि" (कौन सी) के प्रश्नों में, सभी महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध वस्तुओं या विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।

 

Question 16. वाराणसी नगरी कस्याः कूले स्थिता ? [2009, 11, 12, 15]
Answer: वाराणसी नगरी गङ्गायाः कूले स्थिता।
In simple words: वाराणसी शहर गंगा नदी के किनारे बसा है।

🎯 Exam Tip: "कस्याः कूले" (किसके किनारे) के प्रश्नों में, नदी का नाम षष्ठी विभक्ति में दें, जैसे "गङ्गायाः" (गंगा के)।

 

Question 17. वाराणसी नगरी केषां कृते लोके विश्रुता अस्ति ?
Answer: न केवलं दर्शने, साहित्ये, धमें अपितु कलाक्षेत्रेऽपि विविधानां कलानां शिल्पानां च कृते वाराणसी नगरी लोके विश्रुता ।
In simple words: वाराणसी सिर्फ दर्शन, साहित्य और धर्म के लिए ही नहीं, बल्कि कला क्षेत्र में भी कई तरह की कलाओं और शिल्पों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: जब प्रसिद्धि के कई कारण हों, तो उन्हें व्यवस्थित रूप से लिखें, जैसे "न केवलम्... अपितु..." (न केवल... बल्कि...)।

 

Question 18. कस्याः शोभां विलोक्य पर्यटकाः बहु प्रशंसन्ति ?
Answer: गङ्गायाः घट्टना शोभां विलोक्य पर्यटकाः बहु प्रशंसन्ति ।
In simple words: पर्यटक गंगा के घाटों की सुंदरता देखकर बहुत प्रशंसा करते हैं।

🎯 Exam Tip: "कस्याः शोभां" (किसकी शोभा) के प्रश्नों में, उत्तर में सही षष्ठी विभक्ति का प्रयोग करें, जैसे "गङ्गायाः घट्टानां" (गंगा के घाटों की)।

 

Question 19. वाराणस्यां गेहे-गेहे किं द्योतते ? [2010]
Answer: वाराणस्यां गेहे-गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते ।
In simple words: वाराणसी में हर घर में विद्या की दिव्य रोशनी प्रकाशित होती है।

🎯 Exam Tip: "किं द्योतते" (क्या प्रकाशित होता है) जैसे प्रश्नों में, मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें, जैसे "विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः" (विद्या की दिव्य ज्योति)।

 

अनुवादक

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
Answer:
(क) वाराणसी गंगा के पवित्र तट पर बसी है।
संस्कृतानुवाद: वाराणसी गङ्गायाः पावनतटे स्थिता अस्ति।
(ख) यहाँ गंगा के किनारे सुन्दर-सुन्दर घाट हैं।
संस्कृतानुवाद: अत्र गङ्गायाः तटे रम्याः घट्टाः सन्ति।
(ग) अनेक पर्यटक दूर देशों से यहाँ आते हैं।
संस्कृतानुवाद: अनेकाः पर्यटकाः सुदूरेभ्यः देशेभ्यः अत्र आगच्छन्ति।
(घ) वाराणसी में संस्कृत के अध्ययन के लिए बहुत सुविधाएँ हैं।
संस्कृतानुवाद: वाराणस्यां संस्कृतस्य अध्ययनाय बहवः सुविघाः सन्ति।
(ङ) दारा ने भी यहाँ आकर संस्कृत का अध्ययन किया था।
संस्कृतानुवाद: दारा अपि अत्र आगत्य संस्कृतस्य अध्ययनम् अकरोत्।
(च) दारा दर्शन-ग्रन्थों से बहुत प्रभावित हुआ था।
संस्कृतानुवाद: दारा दर्शनग्रन्थैः अतिप्रभावितः अभवत्।
(छ) वाराणसी विविध धर्मों की संगमस्थली है।
संस्कृतानुवाद: वाराणसी विविध धर्माणां सङ्गमस्थली अस्ति।
(ज) काशी किस भाषा का केन्द्र है?
संस्कृतानुवाद: काशी कस्याः भाषायाः केन्द्रम् अस्ति ?
(झ) वाराणसी में मरण मंगलकारी होता है।
संस्कृतानुवाद: वाराणस्यां मरणं मङ्गलं भवति।
In simple words: हिन्दी वाक्यों को संस्कृत में बदलते समय, हर शब्द का सही रूप और व्याकरण के नियमों का ध्यान रखना पड़ता है। वाक्य के अर्थ को बिना बदले, क्रिया और कारक को सही ढंग से प्रयोग करना जरूरी है।

🎯 Exam Tip: अनुवाद करते समय, हिन्दी वाक्य के हर शब्द के संस्कृत पर्यायवाची और सही विभक्ति, वचन, और लकार का ध्यान रखें। क्रिया और कारक का सही मेल होना चाहिए।

 

व्याकरणात्मक

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों में काले छपे शब्दों की विभक्ति और उसके प्रयोग का कारण बताइए
(क) अगणिताः पर्यटकाः सुदूरेभ्यः देशेभ्यः नित्यम् अत्र आयान्ति ।
(ख) वैदेशिका: गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति ।
(ग) महात्मानः अत्रागत्य स्वीयान् विचारान् प्रासारयन् ।
(घ) धर्मे, अपितु कलाक्षेत्रेऽपि इयं नगरी विविधानां कालानां कृते लोके विश्रुता ।

Answer:
(क) पर्यटक अपने देशों से अलग होकर आते हैं। अलग होने के अर्थ में पञ्चमी विभक्ति होती है।
(ख) "हेतु" (कारण) के अर्थ में चतुर्थी विभक्ति होती है।
(ग) कर्म कारक में द्वितीया विभक्ति होती है।
(घ) आधार में सप्तमी विभक्ति होती है।
In simple words: संस्कृत में शब्दों की विभक्ति यह बताती है कि वे वाक्य में क्या काम कर रहे हैं। जैसे, अगर कोई चीज़ किसी से अलग हो रही है, तो वहाँ पंचमी विभक्ति लगती है; कारण बताने के लिए चतुर्थी; कर्म के लिए द्वितीया; और आधार के लिए सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

🎯 Exam Tip: विभक्ति और उसके प्रयोग के कारण को स्पष्ट करने के लिए, संबंधित कारक नियम या सूत्र का उल्लेख करें। उदाहरण के साथ समझाना प्रभावी होता है।

 

Question 2. निम्नलिखित क्रिया-रूपों में धातु. लकार, वचन तथा पुरुष बताइए-
आयान्ति, वर्द्धयति, गृह्णन्ति, अकरोत्, स्पृह्यन्ते, परिपालयति, आगच्छन्ति, प्रवहति ।

Answer:

क्रिया-रूपधातुलकारवचनपुरुष
आयान्तिआ + यालट्बहुवचनप्रथम
वर्द्धयतिवृध्लट्एकवचनप्रथम
गृह्णन्तिग्रहलट्बहुवचनप्रथम
अकरोत्कृलङ्एकवचनप्रथम
स्पृह्यन्तेस्पृहलट्बहुवचनप्रथम
परिपालयतिपरि + पाल्लट्एकवचनप्रथम
आगच्छन्तिआ + गम्लट्बहुवचनप्रथम
प्रवहतिप्र + वहलट्एकवचनप्रथम
In simple words: क्रिया-रूपों को समझने के लिए, हमें उनकी मूल धातु, समय (लकार), संख्या (वचन) और कार्य करने वाले व्यक्ति (पुरुष) को जानना जरूरी है। यह हमें सही क्रिया रूप बनाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: क्रिया-रूपों का विश्लेषण करते समय, धातु, लकार, वचन और पुरुष को क्रमबद्ध तरीके से पहचानें। उपसर्गों को मूल धातु से अलग करना न भूलें।

 

Question 3. निम्नलिखित शब्दों के विभक्ति व वचन बताइए-
इयम्, गङ्गायाः, देशेभ्यः, अध्ययनम्, स्वीयान्, विचारान्।।

Answer:

शब्द-रूपशब्दविभक्तिवचन
इयम्इदम्प्रथमाएकवचन
गङ्गायाःगङ्गाषष्ठीएकवचन
देशेभ्यःदेशचतुर्थी/पञ्चमीबहुवचन
अध्ययनम्अध्ययनप्रथमा/द्वितीयाएकवचन
स्वीयान्स्वीयद्वितीयाबहुवचन
विचारान्विचारद्वितीयाबहुवचन
In simple words: शब्दों की विभक्ति और वचन जानने से वाक्य में उनके सही उपयोग का पता चलता है। यह बताता है कि एक शब्द का वाक्य में क्या रिश्ता है और वह कितने लोगों या चीज़ों के बारे में बात कर रहा है।

🎯 Exam Tip: शब्द-रूपों को पहचानते समय, लिंग, मूल शब्द और उनके अंत (अकारान्त, इकारान्त आदि) पर ध्यान दें, क्योंकि इनसे विभक्ति और वचन निर्धारित होते हैं।

 

Question 4. निम्नलिखित शब्दों की सन्धि कीजिए और सन्धि का नाम लिखिए-
वलय + आकृतिः, इति + एते, अत्र + आगत्य, विभूतिः -+ च ।।

Answer:
वलय + आकृतिः = वलयाकृतिः (दीर्घ सन्धि)
इति + एते = इत्येते (यण सन्धि)
अत्र + आगत्य = अत्रागत्य (दीर्घ सन्धि)
विभूतिः + च = विभूतिश्च (श्चुत्व सन्धि)
In simple words: संधि का मतलब है दो अक्षरों या शब्दों को जोड़ना, जिससे एक नया शब्द बनता है और उसकी आवाज़ भी बदल जाती है। संधि से शब्द छोटे और बोलने में आसान हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संधि विच्छेद और संधि करते समय, संधि के मुख्य नियमों (जैसे दीर्घ, यण, वृद्धि, गुण, अयादि) को याद रखें। ध्यान दें कि कौन से अक्षर मिलकर बदल रहे हैं।

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 01 वाराणसी

Accessing Chapter 01 वाराणसी Solutions

Access structured UP Board textbook solutions for Chapter 01 वाराणसी. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 10 Hindi, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.

Concept-Driven Answers for Class 10 Hindi

Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 10 Hindi text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.

Maximizing Study Efficiency

Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 10 Hindi.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Hindi are as per latest UP Board curriculum.

Are the Hindi UP Board solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Hindi. You can access UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi UP Board solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 10 Hindi Chapter 1 वाराणसी in printable PDF format for offline study on any device.