RBSE Solutions Class 9 Social Science Chapter 7 राजस्थान के गौरव

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Detailed Chapter 7 राजस्थान के गौरव RBSE Solutions for Class 9 Social Science

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Class 9 Social Science Chapter 7 राजस्थान के गौरव RBSE Solutions PDF

Chapter 7 राजस्थान के गौरव

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. बापा रावल कहाँ के शासक थे?
(अ) चित्तौड़गढ़
(ब) उदयपुर
(स) मारवाड़
(द) अजमेर
Answer: (अ) चित्तौड़गढ़
In simple words: बापा रावल चित्तौड़गढ़ के राजा थे, जहाँ उन्होंने शासन किया और अपनी पहचान बनाई। इस क्षेत्र का इतिहास उनकी वीरता से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में शासक का नाम और उसके शासन क्षेत्र को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है, ताकि सटीक उत्तर दे सकें।

 

Question 2. तराइन का द्वितीय युद्ध कब हुआ?
(अ) 1186
(ब) 1191
(स) 1192
(द) 1194.
Answer: (स) 1192
In simple words: तराइन का दूसरा युद्ध 1192 में हुआ था। यह युद्ध भारतीय इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक युद्धों की तिथियाँ और उनके परिणाम हमेशा याद रखें क्योंकि ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 3. महाराणा सांगा व बाबर के मध्य युद्ध किस स्थान पर लड़ा गया?
(अ) पानीपत
(ब) खातोली
(स) खानवा
(द) तराइन
Answer: (स) खानवा
In simple words: महाराणा सांगा और बाबर के बीच खानवा नामक जगह पर लड़ाई हुई थी। यह युद्ध दोनों के बीच की बड़ी जंग थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण लड़ाइयों और उनसे जुड़े स्थानों के नाम को विशेष रूप से याद रखें।

 

Question 5. पाबूजी की घोड़ी का नाम क्या था?
(अ) केसर कालवी
(ब) काली घोड़ी
(स) नीली घोड़ी
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) केसर कालवी
In simple words: पाबूजी की घोड़ी का नाम केसर कालवी था। यह घोड़ी उनकी वीरता और कहानियों का एक अहम हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं से जुड़े विशेष नामों और वस्तुओं को याद करना अक्सर मददगार होता है।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वीर दुर्गादास ने अपना अंतिम समय कहाँ व्यतीत किया?
Answer: वीर दुर्गादास ने अपना अंतिम समय उदयपुर में बिताया। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया था।
In simple words: वीर दुर्गादास अपने जीवन के आखिरी दिन उदयपुर में रहे।

🎯 Exam Tip: महान व्यक्तित्वों के महत्वपूर्ण जीवन पड़ावों, खासकर उनके अंतिम विश्राम स्थलों को याद रखें।

 

Question 2. महाराणा साँगा का राज्याभिषेक कब हुआ?
Answer: महाराणा सांगा का राज्याभिषेक वर्ष 1509 ई. में हुआ था। इसके बाद उन्होंने मेवाड़ की कमान संभाली।
In simple words: महाराणा सांगा 1509 ईस्वी में राजा बने।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के राज्याभिषेक की तारीखें और उनके द्वारा शुरू किए गए महत्वपूर्ण कार्य याद रखें।

 

Question 3. रामदेव के दो प्रमुखों के नाम बताओ।
Answer: रामदेव जी के दो प्रमुख शिष्य माला और तंदूरा थे। ये दोनों उनके मुख्य अनुयायी थे।
In simple words: रामदेव के दो खास लोग माला और तंदूरा थे।

🎯 Exam Tip: संतों और धार्मिक गुरुओं के प्रमुख अनुयायियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।

 

Question 4. अमृता देवी कहाँ की रहने वाली थी?
Answer: अमृता देवी जोधपुर के खेजड़ली गाँव की निवासी थीं। उन्होंने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
In simple words: अमृता देवी जोधपुर के खेजड़ली गाँव में रहती थी।

🎯 Exam Tip: सामाजिक आंदोलन से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों और उनके मूल स्थानों को याद रखें।

 

Question 6. आचार्य भिक्षु ने कौन-सा पंथ चलाया?
Answer: आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना की। यह जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण पंथ है।
In simple words: आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ नामक पंथ शुरू किया।

🎯 Exam Tip: धार्मिक गुरुओं और उनके द्वारा स्थापित पंथों के नामों को सही से याद रखें।

 

Question 7. मानगढ़ धाम किस जिले में स्थित है?
Answer: मानगढ़ धाम बाँसवाड़ा जिले में स्थित है। यह आदिवासी समुदाय के लिए एक पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है।
In simple words: मानगढ़ धाम बाँसवाड़ा जिले में है।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के जिले या राज्य को याद रखें, खासकर जब वे किसी विशेष घटना से जुड़े हों।

 

Question 8. महाराजा सूरजमल कहाँ के शासक थे?
Answer: महाराजा सूरजमल भरतपुर रियासत के शासक थे। उन्हें जाटों का प्लेटो भी कहा जाता है, क्योंकि वे बहुत बुद्धिमान थे।
In simple words: महाराजा सूरजमल भरतपुर रियासत के राजा थे।

🎯 Exam Tip: शासकों और उनके शासन क्षेत्रों के नामों को याद रखना परीक्षाओं में मदद करता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कालीबाई के बलिदान के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: कालीबाई डूंगरपुर की एक 13 साल की भील लड़की थी, जो रास्तापाल के स्कूल में पढ़ती थी। जब डूंगरपुर के शासक ने अंग्रेजों के दबाव में स्कूलों को बंद करने का फैसला किया, तो रास्तापाल के स्कूल में पुलिस भेजी गई। अध्यापक नानाभाई खांट ने स्कूल बंद करने से मना कर दिया, जिससे पुलिस की पिटाई में उनकी मौत हो गई।
नानाभाई की मौत के बाद, दूसरे अध्यापक सेंगाभाई भील ने पढ़ाना जारी रखा, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़कर ट्रक से बांधकर घसीटना शुरू कर दिया। कालीबाई यह देखकर सह नहीं पाई और उसने रस्सी काटकर अपने अध्यापक को पुलिस से आजाद कराया। इससे पुलिस गुस्सा हो गई। जैसे ही कालीबाई अपने अध्यापक सेंगाभाई को उठाने झुकी, पुलिस ने उसकी पीठ में गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका बलिदान शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
In simple words: कालीबाई एक 13 साल की भील लड़की थी जिसने अपने अध्यापक को बचाने के लिए अपने प्राण दे दिए। जब पुलिस ने अध्यापक को ट्रक से घसीटना चाहा, तो कालीबाई ने रस्सी काट दी और पुलिस की गोली लगने से शहीद हो गई।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में घटना का क्रम, मुख्य पात्रों के नाम और बलिदान के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 3. देवनारायण की फड़ क्या है?
Answer: देवनारायणजी राजस्थान के प्रमुख लोक देवताओं में से एक हैं। उनका जन्म 911 ईस्वी में मालासेरी में हुआ था, और वे गायों की रक्षा का संदेश देते थे। उनकी पूजा भोपाओं द्वारा की जाती है, जो फड़ के माध्यम से उनकी कहानियाँ गाकर सुनाते हैं। फड़ एक लपेटे हुए कपड़े पर देवनारायणजी की चित्रित कहानी होती है, जिसमें 335 गीत और लगभग 1200 पृष्ठों का संग्रह है। इसमें करीब 15,000 पंक्तियाँ हैं जो भोपाओं को कंठस्थ याद रहती हैं। देवनारायणजी की फड़ राजस्थान की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय फड़ है। यह कला रूप हमें लोककथाओं और वीरता की कहानियों से जोड़ता है।
In simple words: देवनारायण की फड़ एक बड़ा चित्र वाला कपड़ा है जिस पर देवनारायणजी की कहानी बनी होती है। भोपा लोग इसे गाकर सुनाते हैं, और यह राजस्थान की बहुत खास और मशहूर फड़ है।

🎯 Exam Tip: फड़ की परिभाषा, उसमें शामिल तत्वों की संख्या (गीत, पृष्ठ, पंक्तियाँ), और उसकी लोकप्रियता के कारण को स्पष्ट करें।

 

Question 4. मीराँबाई के प्रारम्भिक जीवन के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: मीराँबाई का जन्म 1498 ईस्वी में मेड़ता (नागौर) के राठौड़ वंश के राव दूदा के पुत्र रतन सिंह के घर, ग्राम कुड़की में हुआ था। उनके बचपन का नाम पैमल था, और वे बचपन से ही कृष्ण भक्त थीं। 1519 ईस्वी में उनका विवाह मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ। विवाह के 7 साल बाद उनके पति भोजराज का देहांत हो गया, जिससे मीराँबाई का मन दुनिया से हट गया। उन्होंने अपना घर-परिवार छोड़कर कृष्ण भक्ति के लिए वृंदावन चली गईं। उन्होंने अपना आखिरी समय द्वारिका के रणछोड़ जी के मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन-कीर्तन करते हुए बिताया। उनकी भक्ति आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।
In simple words: मीराँबाई का जन्म 1498 में कुड़की गाँव में हुआ था और वे बचपन से ही कृष्ण को मानती थीं। पति के निधन के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और अपना जीवन कृष्ण की भक्ति में लगा दिया।

🎯 Exam Tip: मीराँबाई के जन्मस्थान, परिवार, विवाह और उनके भक्ति मार्ग को अपनाने के कारणों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 5. पन्नाधाय के बलिदान को समझाइए।
Answer: पन्नाधाय अपने बलिदान और स्वामिभक्ति के लिए न केवल मेवाड़ में, बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। 1536 ईस्वी में मेवाड़ के शासक विक्रमादित्य की हत्या करके उनकी दासी पुत्र बनवीर ने सिंहासन पर अधिकार कर लिया। बनवीर राजकुमार उदयसिंह को भी मारकर पूरी तरह से राजा बनना चाहता था। पन्नाधाय उदयसिंह की धाय माँ थीं। जब बनवीर महल में उदयसिंह को मारने आया, तो पन्नाधाय ने उदयसिंह को हटाकर अपने बेटे चंदन को राजसी कपड़े पहनाकर उदयसिंह के पलंग पर सुला दिया।
बनवीर ने चंदन को उदयसिंह समझकर मार डाला। पन्नाधाय उदयसिंह को लेकर देवलिया के जागीरदार रामसिंह के पास पहुँची और वहाँ से सुरक्षित स्थान कुम्भलगढ़ ले गई। 1537 ईस्वी में उदयसिंह का कुम्भलगढ़ में राज्याभिषेक किया गया। इस प्रकार, उन्होंने अपने बेटे का बलिदान देकर मेवाड़ के भविष्य को सुरक्षित किया।
In simple words: पन्नाधाय ने मेवाड़ के राजकुमार उदयसिंह को बचाने के लिए अपने बेटे चंदन का बलिदान दे दिया। जब बनवीर उदयसिंह को मारने आया, तो पन्नाधाय ने अपने बेटे को उदयसिंह की जगह सुला दिया और असली उदयसिंह को बचा लिया।

🎯 Exam Tip: इस कहानी में बलिदान के क्रम, मुख्य किरदारों (पन्नाधाय, बनवीर, उदयसिंह) और घटना के परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 7. जसनाथजी के सामाजिक सुधार को बताइए।
Answer: जसनाथजी राजस्थान के एक खास समाज सुधारक थे। उनका जन्म 1539 में कतरियासर (बीकानेर) में हुआ था। उन्होंने 12 साल की उम्र में ही संन्यास ले लिया और गोरख मालिया में कठिन तपस्या की। जसनाथजी ने समाज में फैली पुरानी रीतियों और धार्मिक दिखावे का विरोध किया। उन्होंने भगवान की निराकार भक्ति पर जोर दिया और जातिवाद को गलत बताया। उन्होंने संयम और अच्छे व्यवहार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए गुरु का होना बहुत जरूरी है, और प्रेम, भक्ति और तालमेल से समाज को आगे बढ़ाना चाहिए। उनके द्वारा बनाए गए पंथ को जसनाथी सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है, जो आज भी उनके आदर्शों का पालन करता है।
In simple words: जसनाथजी एक समाज सुधारक थे जिन्होंने पुरानी रीतियों का विरोध किया। उन्होंने निराकार भगवान की भक्ति, जातिवाद का खंडन और गुरु की आवश्यकता पर जोर दिया।

🎯 Exam Tip: जसनाथजी के मुख्य सामाजिक सुधारों को बिंदुवार या स्पष्ट वाक्यों में लिखें, जैसे रूढ़ियों का विरोध और गुरु के महत्व पर जोर।

 

Question 8. विश्नोई का शाब्दिक अर्थ क्या है?
Answer: विश्नोई शब्द का मतलब 20 + 9 अंकों से है। संत जाम्भेश्वर (जाम्भोजी) ने 1485 ईस्वी में कार्तिक कृष्ण अष्टमी को बीकानेर के सम्भराथल में विश्नोई पंथ की स्थापना की। जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 सिद्धांतों का पालन करने का उपदेश दिया। ये 20 + 9 सिद्धांत ही विश्नोई पंथ के नियम माने जाते हैं। यह विश्नोई नाम (बीस-नौ) अंकों में (20 - 9) के आधार पर ही दिया गया है, जो उनके अनुयायियों के जीवन का आधार बना।
In simple words: विश्नोई शब्द का मतलब 'बीस और नौ' है, जिसका अर्थ 29 सिद्धांतों से है। संत जाम्भोजी ने अपने शिष्यों को इन 29 नियमों का पालन करने को कहा था।

🎯 Exam Tip: "विश्नोई" शब्द का शाब्दिक अर्थ और जाम्भोजी द्वारा स्थापित 29 नियमों के संबंध को स्पष्ट करें।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. सन्त दादू को समाज सुधारक के रूप में योगदान बताइए।
Answer: दादूदयाल मध्यकाल के भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे। उनका जन्म 1601 ईस्वी में अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ था, और उनका शुरुआती नाम महाबलि था। अपनी पत्नी के निधन के बाद, उन्होंने संन्यास ले लिया। आमेर के शासक भगवानदास के जरिये उनकी मुलाकात मुगल बादशाह अकबर से आगरा के पास फतेहपुर सीकरी में हुई थी। इसके बाद, उन्होंने भक्ति का प्रचार शुरू किया और राजस्थान में जयपुर के पास नारायणा में रहने लगे। 1603 ईस्वी में उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया। दादूदयाल मानते थे कि धन-दौलत (माया) ही आत्मा और परमात्मा के बीच दूरी पैदा करती है। उनके अनुसार, एक सच्चे भक्त के लिए ईश्वर को पाने के लिए गुरु का होना बहुत जरूरी है। अच्छी संगति, ईश्वर को याद करना, अहंकार छोड़ना, संयम और बिना डर के भक्ति करना ही ईश्वर को पाने के अच्छे तरीके हैं। उन्होंने अपने उपदेश आसान हिंदी मिली-जुली सधुक्कड़ी भाषा में दिए थे। उन्हें राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है, क्योंकि उनके विचार बहुत सरल और गहरे थे।
In simple words: दादूदयाल एक महान संत थे जिन्होंने समाज सुधार का काम किया। उन्होंने ईश्वर की भक्ति, गुरु का महत्व और माया के त्याग पर जोर दिया। वे कहते थे कि अच्छी संगत और संयम से ही ईश्वर को पाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: संत दादूदयाल के जन्म, शिक्षा, प्रमुख सिद्धांतों (जैसे गुरु का महत्व, माया का त्याग) और सामाजिक सुधारों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 2. पृथ्वीराज चौहान की उपलब्धियाँ बताइए।
Answer: पृथ्वीराज चौहान अजमेर के चौहान वंश के आखिरी प्रतापी शासक थे। उनका जन्म 1223 ईस्वी में गुजरात की तत्कालीन राजधानी अन्हिलपाटन में हुआ था। 1177 ईस्वी में, अपने पिता सोमेश्वर देव की मृत्यु के बाद, मात्र 11 साल की उम्र में उन्होंने अजमेर का सिंहासन संभाला। उनकी माता कर्पूरी देवी ने शुरुआत में उनके राज्य को कुशलता से चलाया। उन्होंने ऊँचे पदों पर योग्य और विश्वसनीय अधिकारियों को नियुक्त किया और फिर अपनी जीत की नीति को लागू करने का फैसला किया।
पृथ्वीराज चौहान की जीत की नीति में तीन मुख्य बातें थीं: पहला, अपने रिश्तेदारों के विरोध से मुक्ति पाना; दूसरा, साम्राज्य का विस्तार करना या पड़ोस के राज्यों पर कब्जा करना; और तीसरा, विदेशी दुश्मनों को हराना। जयानक, विद्यापति, बागीश्वर, जनार्दन, चंदबरदाई जैसे प्रसिद्ध विद्वान उनके दरबार में थे। जयानक ने 'पृथ्वीराज विजय' लिखी और चंदबरदाई ने 'पृथ्वीराज रासो' नामक ग्रंथ लिखा। इन रचनाओं ने उनके शासनकाल की घटनाओं को दर्ज किया।
1. नागार्जुन और भण्डानकों का दमन: जब पृथ्वीराज चौहान राजा बने, तो उनके चचेरे भाई नागार्जुन ने विद्रोह कर गुड़गाँव पर कब्जा कर लिया। पृथ्वीराज ने सेना भेजकर नागार्जुन को हरा दिया और विद्रोह को सफलतापूर्वक दबा दिया। 1182 ईस्वी में, पृथ्वीराज ने भरतपुर-मथुरा क्षेत्र में भण्डानकों के विद्रोह को भी खत्म किया।
2. महोबा के चंदेलों पर जीत: अपनी जीत की नीति के तहत, पृथ्वीराज चौहान ने 1182 ईस्वी में महोबा के चंदेल शासक परमाल देव को हराकर उन्हें संधि करने पर मजबूर किया। उन्होंने कई गाँव अपने राज्य में मिला लिए।
3. चालुक्यों पर जीत: 1184 ईस्वी के आसपास, गुजरात के चालुक्य शासक भीमदेव द्वितीय के प्रधानमंत्री जगदेव प्रतिहार और पृथ्वीराज की सेना के बीच नागौर में युद्ध हुआ। बाद में दोनों के बीच संधि हो गई और चौहानों की चालुक्यों से पुरानी दुश्मनी खत्म हुई।
4. तुर्की आक्रमणों का मुकाबला: पृथ्वीराज चौहान के समय में, भारत के उत्तर-पश्चिम में गौर प्रदेश पर शहाबुद्दीन मोहम्मद गौरी का शासन था। 1191 ईस्वी में, मोहम्मद गौरी ने बड़ी सेना के साथ पृथ्वीराज पर हमला किया। वर्तमान करनाल (हरियाणा) के पास तराइन के मैदान में दोनों सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें मोहम्मद गौरी की बड़ी हार हुई। लेकिन 1192 ईस्वी में, वह फिर से हमला करने आया।
In simple words: पृथ्वीराज चौहान 11 साल की उम्र में अजमेर के राजा बने। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और पड़ोस के राजाओं को हराया, और विदेशी दुश्मनों से मुकाबला किया। उन्होंने नागार्जुन, भण्डानकों, महोबा के चंदेलों और चालुक्यों को हराया। मोहम्मद गौरी को पहले तराइन के युद्ध में हराया था। उनके दरबार में कई विद्वान थे।

🎯 Exam Tip: पृथ्वीराज चौहान की उपलब्धियों को उनके शुरुआती जीवन, विजय नीति के मुख्य पहलू और प्रमुख लड़ाइयों (जैसे तराइन) के साथ क्रमवार समझाएं।

 

Question 3. बाबर व राणा सांगा के मध्य संघर्ष के कारण व परिणाम बताइए।
Answer: बाबर और राणा सांगा के बीच संघर्ष के मुख्य कारण और परिणाम नीचे दिए गए हैं:
बाबर और राणा सांगा के मध्य संघर्ष के कारण:
1. सांगा पर संधि तोड़ने का आरोप: बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में लिखा कि राणा सांगा ने काबुल में दूत भेजकर दिल्ली पर हमला करने को कहा था, और कहा था कि वह आगरा पर हमला करेगा, लेकिन वह नहीं आया। इस प्रकार, बाबर ने सांगा पर संधि तोड़ने का आरोप लगाकर युद्ध का बहाना ढूंढा।
2. महत्वाकांक्षाओं में टकराव: मेवाड़ के राणा सांगा का प्रभाव बढ़ाने की इच्छा थी। उन्हें 'हिंदूपति' कहा जाता था और उन्होंने तीन दुश्मनों को युद्ध में हराया था। दूसरी ओर, बाबर भी पूरे भारत पर अपना अधिकार करना चाहता था। इसलिए, दोनों के बीच युद्ध होना तय था।
3. राजपूत-अफगान दोस्ती: पानीपत के युद्ध में अफगान हार गए थे, लेकिन कुछ अफगान अपनी सुरक्षा के लिए राणा के पास चले गए। इनमें इब्राहिम लोदी का छोटा भाई और हसन खाँ मेवाती मुख्य थे। ये अफगान सरदार, राणा सांगा के साथ मिलकर बाबर को भारत से निकालने की योजना बना रहे थे, जो बाबर के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
4. राणा का सल्तनत के क्षेत्रों पर प्रभाव: राणा सांगा ने पानीपत के युद्ध के समय दिल्ली सल्तनत के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था, जो मुगल बादशाह बाबर के लिए सीधी चुनौती थी।
5. बयाना दुर्ग का महत्व: बयाना का किला राजस्थान के प्रवेश द्वार पर था। राणा सांगा इस पर कब्जा करना चाहते थे, और बाबर भी अपने राज्य की सुरक्षा के लिए इसे चाहते थे। बाबर ने बयाना दुर्ग पर कब्जा कर लिया था। 16 फरवरी, 1527 ईस्वी को राणा सांगा ने बाबर की सेना को हराकर बयाना दुर्ग पर फिर से कब्जा कर लिया। बाबर ने अपनी हार का बदला लेने के लिए सांगा पर फिर से हमला करने के लिए कूच किया।
परिणाम:
17 मार्च, 1527 ईस्वी को खानवा के मैदान में दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध में महाराणा सांगा के झंडे के नीचे लगभग सभी राजपूत राजा थे। इस युद्ध में राणा सांगा की हार हुई। राणा सांगा को घायल अवस्था में भरोसेमंद सेनाधिकारियों के साथ बसवा (दौसा) ले जाया गया। 30 जनवरी 1528 को उनकी मृत्यु हो गई। खानवा युद्ध के बाद, भारत में मुगलों का राज स्थायी हो गया और बाबर पूरे भारत का बादशाह बन गया। इससे राजपूतों के हाथ से सत्ता निकलकर मुगलों के हाथ में आ गई, जो करीब 200 साल से ज्यादा समय तक उनके पास रही। यह युद्ध भारत के इतिहास की दिशा बदल दी।
In simple words: बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध के कई कारण थे, जैसे बाबर का सांगा पर संधि तोड़ने का आरोप लगाना, दोनों की सत्ता बढ़ाने की इच्छा, अफगानों का सांगा से मिलना और बयाना दुर्ग पर कब्जा। इस युद्ध में सांगा की हार हुई, और भारत में मुगलों का राज मजबूत हो गया।

🎯 Exam Tip: संघर्ष के कारणों और परिणामों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं, और मुख्य घटनाओं और तिथियों को याद रखें।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 2. निम्न में से किस राजपूत शासक ने दिग्विजय नीति का अनुसरण किया
(अ) राणा सांगा
(ब) पृथ्वीराज चौहान
(स) बप्पा रावल
(द) सवाई राम सिंह
Answer: (ब) पृथ्वीराज चौहान
In simple words: पृथ्वीराज चौहान ने जीत हासिल करने की नीति अपनाई, जिसमें उन्होंने कई राज्यों पर कब्जा किया।

🎯 Exam Tip: राजपूत शासकों की प्रमुख नीतियों और उनके कार्यों को याद रखें।

 

Question 3. महाराणा सांगा कहाँ के शासक थे ?
(अ) मेवाड़ के
(ब) जयपुर के
(स) दिल्ली के
(द) माण्डू के
Answer: (अ) मेवाड़ के
In simple words: महाराणा सांगा मेवाड़ के राजा थे।

🎯 Exam Tip: शासकों और उनके संबंधित क्षेत्रों को याद करना परीक्षाओं में महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 4. पन्नाधाय मेवाड़ के किस राजकुमार की धात्री माँ थी ?
(अ) उदय सिंह की
(ब) संग्राम सिंह की
(स) प्रताप की
(द) उपर्युक्त सभी की।
Answer: (अ) उदय सिंह की
In simple words: पन्नाधाय राजकुमार उदय सिंह की धाय माँ थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक संबंधों और प्रमुख व्यक्तित्वों से जुड़ी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 6. "खेजड़ी वृक्ष की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से अपने प्राणों की बलि देना विश्व की अनूठी घटना है।” यह घटना किस स्थान से सम्बन्धित है ?
(अ) खेजड़ली से
(ब) उदयपुर से
(स) खरनाल से
(द) मानगढ़ पहाड़ी से।
Answer: (अ) खेजड़ली से
In simple words: खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए लोगों ने जिस जगह पर अपनी जान दी, वह खेजड़ली गाँव से जुड़ी है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके स्थानों को याद रखें।

 

Question 7. गोविंद गुरु ने कौन-से पंथ की स्थापना की?
(अ) भगत पंथ
(ब) बिश्नोई पंथ
(स) दादू पंथ
(द) इनमें से कोई नही।
Answer: (अ) भगत पंथ
In simple words: गोविंद गुरु ने भगत पंथ नामक एक समुदाय बनाया था।

🎯 Exam Tip: धार्मिक गुरुओं और उनके द्वारा स्थापित पंथों के नामों को सही ढंग से याद करें।

 

Question 8. रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक थे
(अ) दादूदयाल
(ब) जसनाथ जी
(स) रामचरण जी
(द) आचार्य भिक्षु
Answer: (स) रामचरण जी
In simple words: रामचरण जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सम्प्रदायों के संस्थापकों के नाम याद रखना परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. पृथ्वीराज चौहान एवं मोहम्मद गौरी के मध्य कौन-से दो प्रसिद्ध युद्ध हुए थे?
Answer: पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच दो प्रसिद्ध युद्ध हुए थे:
1. तराइन का पहला युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ था।
2. तराइन का दूसरा युद्ध 1192 ईस्वी में हुआ था।
ये युद्ध भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण थे।
In simple words: पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी ने दो बार तराइन में लड़ाई की, पहला युद्ध 1191 में और दूसरा 1192 में।

🎯 Exam Tip: इन युद्धों की सही तारीखों को याद रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 3. तराइन के द्वितीय युद्ध में किसकी विजय हुई?
Answer: तराइन के दूसरे युद्ध में मोहम्मद गौरी की जीत हुई थी। यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
In simple words: तराइन के दूसरे युद्ध में मोहम्मद गौरी जीता था।

🎯 Exam Tip: युद्धों के विजेताओं को याद रखना ऐतिहासिक घटनाओं को समझने में मदद करता है।

 

Question 4. पृथ्वीराज चौहान के किन्हीं दो दरबारी साहित्यकारों के नाम लिखिए।
Answer: पृथ्वीराज चौहान के दरबार में दो प्रमुख साहित्यकार थे:
1. चन्दबरदाई, जिन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' लिखी।
2. जयानक, जिन्होंने 'पृथ्वीराज विजय' लिखी।
इन साहित्यकारों ने उनके शासनकाल और वीरता का वर्णन किया।
In simple words: पृथ्वीराज चौहान के दरबार में चन्दबरदाई और जयानक नाम के दो कवि थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के दरबार में रहने वाले साहित्यकारों और उनकी रचनाओं को याद करें।

 

Question 5. खानवा का युद्ध कब व किसके मध्य हुआ था?
Answer: खानवा का युद्ध 1527 ईस्वी में हुआ था। यह युद्ध बाबर और राणा सांगा के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध ने मुग़ल साम्राज्य की नींव मजबूत की।
In simple words: खानवा का युद्ध 1527 में बाबर और राणा सांगा के बीच हुआ था।

🎯 Exam Tip: युद्ध की तारीख और उसमें शामिल प्रमुख पक्षों को हमेशा याद रखें।

 

Question 6. अंतिम हिंदू सम्राट कौन था जिसके नेतृत्व में सभी राजपूत शासक विदेशी आक्रान्ताओं से मुकाबला करने के लिए एकत्रित हुए थे?
Answer: महाराणा सांगा वह अंतिम हिंदू सम्राट थे, जिनके नेतृत्व में सभी राजपूत शासक विदेशी आक्रमणकारियों का सामना करने के लिए एकजुट हुए थे। उन्होंने अपनी वीरता से राजपूतों को एक साथ जोड़ा।
In simple words: महाराणा सांगा आखिरी हिंदू राजा थे जिन्होंने सभी राजपूतों को विदेशी दुश्मनों से लड़ने के लिए एक साथ बुलाया था।

🎯 Exam Tip: ऐसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक आंकड़ों और उनके नेतृत्व की भूमिका को याद रखें।

 

Question 7. मीराँबाई का जन्म स्थान बताइए।
Answer: मीराँबाई का जन्म स्थान मेड़ता (नागौर) जिले का कुड़की ग्राम था। यहीं पर उनके जीवन की शुरुआत हुई।
In simple words: मीराँबाई का जन्म नागौर के कुड़की गाँव में हुआ था।

🎯 Exam Tip: भक्ति संतों के जन्म स्थानों को याद रखना उनकी जीवनी को समझने में मदद करता है।

 

Question 9. अपनी प्रतिभा के बल पर किसने स्वामिभक्ति की मिसाल स्थापित की थी?
Answer: अपनी प्रतिभा के बल पर वीर दुर्गादास राठौड़ ने स्वामिभक्ति की अद्भुत मिसाल कायम की थी। उन्होंने अपने स्वामी के लिए कई बलिदान दिए।
In simple words: वीर दुर्गादास राठौड़ ने अपनी वफादारी और क्षमता से स्वामीभक्ति का उदाहरण पेश किया।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तियों और उनके विशिष्ट गुणों या योगदानों को याद रखें।

 

Question 10. किस शासक के नेतृत्व में मारवाड़ के राठौड़ों ने अपूर्व शक्ति अर्जित की थी?
Answer: राव मालदेव के नेतृत्व में मारवाड़ के राठौड़ों ने बहुत अधिक शक्ति हासिल की थी। उनके शासनकाल में मारवाड़ बहुत मजबूत हुआ।
In simple words: राव मालदेव के राज में मारवाड़ के राठौड़ बहुत ताकतवर बने।

🎯 Exam Tip: किसी क्षेत्र विशेष की शक्ति वृद्धि में प्रमुख शासकों के योगदान को याद रखें।

 

Question 11. किस युद्ध की समाप्ति पर शेरशाह को यह कहने को मजबूर होना पड़ा कि-“एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता?"
Answer: सुमेल युद्ध की समाप्ति पर शेरशाह सूरी को यह कहना पड़ा था कि "एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता।" यह युद्ध बहुत मुश्किल से जीता गया था।
In simple words: सुमेल युद्ध के बाद शेरशाह सूरी ने कहा था कि वह एक मुट्ठी बाजरे के लिए अपना राज खो देता।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक कथन किस युद्ध या घटना से संबंधित है, इसे हमेशा याद रखें।

 

Question 12. मालदेव के सेनापतियों का नाम बताइए।
Answer: मालदेव के प्रमुख सेनापति जैता और कुंपा थे। ये दोनों अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे।
In simple words: मालदेव के सेनापति जैता और कुंपा थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के महत्वपूर्ण सेनापतियों या सहयोगियों के नाम याद रखें।

 

Question 13. वृक्षों की रक्षार्थ किसने अपने प्राणों की आहुति दी थी?
Answer: वृक्षों की रक्षा के लिए अमृता देवी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उन्होंने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए यह महान कार्य किया।
In simple words: अमृता देवी ने पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दी थी।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और उनमें शामिल व्यक्तियों को याद रखें।

 

Question 14. अमृता देवी ने किस वृक्ष को काटने का विरोध किया था?
Answer: अमृता देवी ने खेजड़ी वृक्ष को काटने का विरोध किया था। यह वृक्ष राजस्थान में बहुत पवित्र माना जाता है।
In simple words: अमृता देवी ने खेजड़ी के पेड़ को कटने से रोका था।

🎯 Exam Tip: पर्यावरणीय आंदोलनों से जुड़े विशिष्ट तत्वों (जैसे वृक्ष का नाम) को याद रखें।

 

Question 15. 'जाट जाति का प्लेटो' किसे कहा जाता है?
Answer: 'जाट जाति का प्लेटो' महाराजा सूरजमल को कहा जाता है। वे अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते थे।
In simple words: महाराजा सूरजमल को 'जाट जाति का प्लेटो' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यक्तित्वों को दिए गए उपनामों और उनके महत्व को याद रखें।

 

Question 17. राजस्थान के लोक देवताओं के नाम लिखिए।
Answer: राजस्थान के कुछ प्रमुख लोक देवता इस प्रकार हैं:
1. तेजाजी
2. गोगाजी
3. पाबू जी
4. रामदेवजी
5. देवनारायणजी
ये सभी राजस्थान के लोगों द्वारा पूजे जाते हैं।
In simple words: राजस्थान के मुख्य लोक देवताओं में तेजाजी, गोगाजी, पाबूजी, रामदेवजी और देवनारायणजी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: राजस्थान के प्रमुख लोक देवताओं के नामों को सूचीबद्ध करते समय उनकी पहचान और महत्व को भी ध्यान में रखें।

 

Question 18. लोक देवता तेजाजी का जन्म स्थान बताइए।
Answer: लोक देवता तेजाजी का जन्म खरनालिये (नागौर) में हुआ था। यह स्थान उनके भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण pilgrimage स्थल है।
In simple words: लोक देवता तेजाजी का जन्म नागौर के खरनालिये गाँव में हुआ था।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के जन्म स्थानों को याद रखना उनकी कहानियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

 

Question 19. सामाजिक समरसता का संदेश किस लोक देवता ने दिया था?
Answer: सामाजिक समरसता का संदेश लोक देवता रामदेवजी ने दिया था। उन्होंने सभी जातियों और धर्मों के लोगों को एक साथ रहने की सीख दी।
In simple words: रामदेवजी ने लोगों को मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया था।

🎯 Exam Tip: सामाजिक सुधार से जुड़े लोक देवताओं और उनके मुख्य संदेशों को याद रखें।

 

Question 20. 'रामदेव बाबा री आण' क्या है?
Answer: बाबा रामदेव के मंदिरों में उनके नाम की कसम खाई जाती है, जिसे 'रामदेव बाबा री आण' कहा जाता है। यह उनके प्रति गहरे विश्वास को दर्शाता है।
In simple words: 'रामदेव बाबा री आण' का मतलब है बाबा रामदेव के नाम की कसम खाना।

🎯 Exam Tip: धार्मिक प्रथाओं और उनसे जुड़े विशिष्ट शब्दों के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 21. रामदेवजी का मेला कब व कहाँ लगता है?
Answer: रामदेवजी का मेला रामदेवरा (रुणेचा) में हर साल भाद्रपद शुक्ल द्वितीय से दशमी तक एक बड़े मेले के रूप में लगता है। इस मेले में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
In simple words: रामदेवजी का बड़ा मेला हर साल रामदेवरा (रुणेचा) में भाद्रपद महीने में लगता है।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के मेलों के स्थान और समय को सही ढंग से याद करें।

 

Question 23. राजस्थान की फड़ों में सर्वाधिक लोकप्रिय फड़ कौन-सी है? अथवा राजस्थान की सबसे बड़ी फड़ कौन-से लोक देवता की है?
Answer: राजस्थान की फड़ों में देवनारायणजी की फड़ सबसे अधिक लोकप्रिय है। यह राजस्थान की सबसे बड़ी फड़ भी है, जिसमें लोक देवता देवनारायणजी के जीवन और चमत्कारों का वर्णन किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है।
In simple words: राजस्थान की सबसे मशहूर और बड़ी फड़ देवनारायणजी की है।

🎯 Exam Tip: जब भी "अथवा" के साथ प्रश्न आए, तो दोनों हिस्सों को मिलाकर पूरा प्रश्न लिखें और उत्तर दें।

 

Question 24. संत पीपाजी का जन्म कब व कहाँ हुआ था?
Answer: संत पीपाजी का जन्म विक्रम संवत 1417 की चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को गागरोन दुर्ग में हुआ था। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संतों में से एक थे और उन्होंने समाज में समानता का संदेश दिया।
In simple words: संत पीपाजी का जन्म विक्रम संवत 1417 की चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को गागरोन दुर्ग में हुआ था।

🎯 Exam Tip: संतों और ऐतिहासिक व्यक्तियों के जन्मस्थान और तिथि को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 25. विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे?
Answer: विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक संत जाम्भोजी थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को पर्यावरण संरक्षण और नैतिकता पर आधारित 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया।
In simple words: जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख धार्मिक सम्प्रदायों के संस्थापकों के नाम और उनके मुख्य उपदेशों को याद रखें।

 

Question 26. जसनाथजी का जन्म कब व कहाँ हुआ था?
Answer: जसनाथजी का जन्म विक्रम संवत 1539 में बीकानेर के कतरियासर गाँव में हुआ था। उन्होंने जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की और योग साधना पर जोर दिया।
In simple words: जसनाथजी का जन्म विक्रम संवत 1539 में बीकानेर के कतरियासर गाँव में हुआ था।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के जन्म स्थान और समय को सही ढंग से लिखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 27. जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना किसने की?
Answer: जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना जसनाथ जी ने की थी। यह सम्प्रदाय 36 नियमों का पालन करता है और प्रकृति तथा पशुओं के प्रति दया पर जोर देता है।
In simple words: जसनाथ जी ने जसनाथी सम्प्रदाय की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सम्प्रदायों के संस्थापकों को याद रखें; यह सीधे प्रश्न के रूप में आ सकता है।

 

Question 28. राजस्थान का कबीर किसे कहा जाता है?
Answer: संत दादूदयाल को राजस्थान का कबीर कहा जाता है। उन्होंने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया और सभी धर्मों के लोगों के बीच सद्भाव स्थापित करने की कोशिश की।
In simple words: संत दादूदयाल को राजस्थान का कबीर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उपनामों से जुड़े व्यक्तियों को याद रखें, जैसे "राजस्थान का कबीर" संत दादूदयाल के लिए।

 

Question 29. आचार्य भिक्षु का सम्बन्ध किस धर्म से था?
Answer: आचार्य भिक्षु का सम्बन्ध जैन धर्म से था। उन्होंने जैन परम्परा में तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना की और उसके सिद्धांतों को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाया।
In simple words: आचार्य भिक्षु जैन धर्म से जुड़े हुए थे।

🎯 Exam Tip: धार्मिक नेताओं और उनके द्वारा स्थापित सम्प्रदायों या धर्मों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. गिरि-सुमेल के युद्ध के बारे में आप क्या जानते हैं? बताइए।
Answer: गिरि-सुमेल का युद्ध 1544 ईस्वी में दिल्ली के शासक शेरशाह सूरी और राव मालदेव के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध जैतारण के पास हुआ था, जिसमें शेरशाह सूरी को बहुत मुश्किल से जीत मिली थी। युद्ध के बाद शेरशाह सूरी ने कहा था, "मैं एक मुट्ठी बाजरे के लिए हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता।" इस युद्ध में राव मालदेव के वीर सेनापति जैता और कूपा शहीद हो गए, और शेरशाह ने जोधपुर के किले पर कब्जा कर लिया।
In simple words: गिरि-सुमेल का युद्ध 1544 ईस्वी में शेरशाह सूरी और राव मालदेव के बीच हुआ था। शेरशाह सूरी मुश्किल से जीता और उसने कहा कि एक मुट्ठी बाजरे के लिए वह हिन्दुस्तान खो देता। इस युद्ध के बाद शेरशाह ने जोधपुर पर कब्जा कर लिया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक युद्धों में शामिल प्रमुख व्यक्तियों, युद्ध का वर्ष, स्थान और उसके महत्वपूर्ण परिणामों को याद रखें, साथ ही किसी भी प्रसिद्ध कथन को।

 

Question 2. अमृता देवी के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: अमृता देवी विश्नोई जोधपुर के खेजड़ली गाँव की रहने वाली थीं। जब जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के कहने पर खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे थे, तो अमृता देवी ने अपनी तीन बेटियों के साथ इसका विरोध किया। उन्होंने पेड़ों को बचाने के लिए खुद को उनसे लिपटा लिया। महाराजा के सैनिकों ने विरोध करने पर अमृता देवी और उनकी बेटियों का सिर धड़ से अलग कर दिया। यह घटना पेड़ों और पर्यावरण के प्रति उनके गहरे प्रेम और बलिदान को दर्शाती है, और जिस दिन यह हुआ था उसे 'काला मंगलवार' कहा जाता है।
In simple words: अमृता देवी विश्नोई ने खेजड़ी गाँव में पेड़ों को काटने का विरोध किया था। पेड़ों को बचाने के लिए उन्होंने और उनकी तीन बेटियों ने अपनी जान दे दी। यह घटना 'काला मंगलवार' कहलाती है।

🎯 Exam Tip: खेजड़ली आंदोलन और अमृता देवी के बलिदान जैसे पर्यावरण संबंधी आंदोलनों की महत्वपूर्ण घटनाओं, कारणों और परिणामों को याद रखें।

 

Question 3. जाम्भोजी के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: संत जाम्भोजी विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक थे और एक महान समाज सुधारक भी। उनका जन्म 1451 ईस्वी में नागौर जिले के पीपासर गाँव में एक पंवार राजपूत परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम लोहटजी और हांसा देवी था। वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और बचपन से ही गायें चराते थे। माता-पिता के निधन के बाद, उन्होंने घर छोड़ दिया और बीकानेर के सम्भराथल नामक स्थान पर रहकर सत्संग और हरि चर्चा में समय बिताया। विक्रम संवत 1542 में कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उन्होंने सम्भराथल में विश्नोई पंथ की स्थापना की, अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया। ये 29 सिद्धांत ही विश्नोई पंथ के नियम माने जाते हैं। जाम्भोजी एक समन्वयवादी, उदार विचारक, मानव धर्म के पोषक, पर्यावरण के संरक्षक और हिन्दू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे। उन्होंने 1485 ईस्वी में पड़े अकाल के दौरान पीड़ितों की उदारतापूर्वक सहायता की थी। उन्होंने विक्रम संवत 1593 में अपने शरीर का त्याग किया और उन्हें मुकाम गाँव में समाधि दी गई, जहाँ हर साल फाल्गुन और आषाढ़ अमावस्या को मेले लगते हैं।
In simple words: जाम्भोजी ने विश्नोई पंथ शुरू किया और लोगों को 29 नियम सिखाए। उन्होंने शांति, दया, पर्यावरण और हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया। उन्होंने अकाल में लोगों की मदद की और पेड़ों व जानवरों को बचाने की शिक्षा दी।

🎯 Exam Tip: समाज सुधारकों के वर्णन में उनके जीवन परिचय, उनके द्वारा स्थापित पंथ, मुख्य सिद्धांत और सामाजिक योगदान को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 4. गोविन्द गुरु द्वारा आदिवासी भील समाज के कल्याण एवं जन-जागृति के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: गोविन्द गुरु ने आदिवासी भील समाज के कल्याण और लोगों को जागरूक करने के लिए बहुत काम किया। उन्होंने 'सम्प सभा' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य भीलों को संगठित करना और उनमें सुधार लाना था। उन्होंने भीलों को शराब और अन्य बुरी आदतों से दूर रहने, साफ-सफाई रखने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। गोविन्द गुरु ने भील समुदाय में सामाजिक एकता और धार्मिक जागृति लाने का प्रयास किया, जिससे बड़ी संख्या में भील उनके अनुयायी बन गए।
In simple words: गोविन्द गुरु ने भील समाज के लिए बहुत काम किया। उन्होंने 'सम्प सभा' बनाई ताकि भील लोग अपनी समस्याओं को समझें और बुरी आदतों को छोड़ें। उन्होंने भीलों को जागरूक और एकजूट करने की कोशिश की।

🎯 Exam Tip: आदिवासी समुदायों के उत्थान में योगदान देने वाले नेताओं और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं के बारे में जानकारी हमेशा महत्वपूर्ण होती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. लोक देवता गोगाजी का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: लोक देवता गोगाजी राजस्थान के पाँच प्रमुख लोक देवताओं में से एक हैं। उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में चूरू जिले के ददेरवा गाँव में हुआ था। उनके पिता जेहवर सिंह और माता बाइल थीं। अपने पिता के वीरगति प्राप्त करने के बाद, वे ददेरवा के शासक बने और उनका विवाह केमलदे से हुआ। गोगाजी ने दिल्ली के बादशाह से युद्ध किया था। एक पारिवारिक विवाद के बाद, गोगाजी ने जीवित समाधि ले ली थी। उनकी याद में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी को ददेरवा, राजगढ़, चूरू और रतनगढ़ जैसे कई इलाकों में मेले लगते हैं। इस दिन गोगाजी को एक भाले वाले योद्धा के रूप में या साँप के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनकी मूर्तियाँ अक्सर पत्थर पर साँप के रूप में बनी होती हैं और गाँवों में खेजड़ी के पेड़ के नीचे स्थापित की जाती हैं। गोगाजी के मंदिर को गोगामेडी कहा जाता है, जो इन्द्रमानगढ़ किले में है। उन्हें साँप का देवता माना जाता है, और लोगों का मानना है कि जो उन्हें मानते हैं, उन्हें साँप नहीं काटता। ग्रामीण क्षेत्रों में गोगाजी की बहुत मान्यता है; किसान हल चलाने से पहले गोगा राखी बाँधते हैं। गोगाजी के भक्त ढोल-नगाड़े बजाते हुए नृत्य करते हैं और रात भर जागरण करते हैं। खीर, पूआ, लापसी और नारियल का भोग लगाया जाता है। राजस्थान के अलावा, गोगाजी को गुजरात, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी पूजा जाता है।
In simple words: गोगाजी राजस्थान के एक प्रमुख लोक देवता हैं, जिनका जन्म चूरू जिले के ददेरवा गाँव में हुआ था। उन्हें साँप का देवता माना जाता है और खेजड़ी के पेड़ के नीचे उनकी पूजा होती है। वे एक योद्धा थे जिन्होंने जीवित समाधि ली थी, और भाद्रपद कृष्ण नवमी को उनके मेले लगते हैं।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के विस्तृत वर्णन में उनके जन्म, परिवार, प्रमुख कार्य, बलिदान, पूजा स्थल और पूजा विधि के सभी पहलुओं को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. राजस्थान के प्रमुख लोक देवताओं के नामों का उल्लेख करते हुए बाबा रामदेवजी का विस्तार से वर्णन कीजिए। अथवा लोक देवता रामदेवजी के कार्यों एवं उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान में कई प्रसिद्ध लोक देवता हुए हैं, जैसे वीर तेजाजी, देवनारायणजी, पाबूजी, गोगाजी, रामदेवजी, हरभूजी और मेहाजी मल्लीनाथजी। इन सभी में, लोक देवता रामदेवजी का विशेष स्थान है। उनका जन्म विक्रम संवत 1409 में पोकरण के एक गाँव में हुआ था। रामदेवजी एक वीर योद्धा, सिद्ध पुरुष और कर्तव्यनिष्ठ संत थे, जिन्होंने आम जनता और गायों की रक्षा की। उन्होंने सामाजिक समरसता, हिन्दू-मुस्लिम एकता, सभी जीवों के प्रति दया, परोपकार, गुरु महिमा और मानव सम्मान को बहुत महत्व दिया। उन्होंने जाति प्रथा, ऊँच-नीच के भेदभाव और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने निम्न वर्ग के लोगों को गले लगाया और अछूत माने जाने वाले लोगों के साथ बैठकर भोजन किया। उन्होंने डालीबाई को अपनी बहन के रूप में पाला। रामदेवजी ने धार्मिक आडंबरों का विरोध किया और सरल भक्ति पर जोर दिया। राजस्थान के अलावा, मध्यप्रदेश और गुजरात में भी उनकी पूजा की जाती है। गाँवों में उनके पूजा स्थलों को 'थान' कहा जाता है, जहाँ खेजड़ी वृक्ष के नीचे उनके पदचिन्ह (पगलिये) स्थापित किए जाते हैं। सफेद कपड़े पर लाल पगलियों वाली ध्वजा फहराई जाती है। उनके मंदिरों को 'देवल' या 'देवरा' कहते हैं। बाबा रामदेव के नाम की शपथ भी ली जाती है, जिसे 'रामदेव बाबा री आण' कहा जाता है। रात में 'जम्मा जागरण' और लोकगीतों के माध्यम से उनकी स्तुति की जाती है। उनकी समाधि रामदेवरा (रुणेचा) में है, जहाँ हर साल भाद्रपद शुक्ल द्वितीय से दशमी तक एक विशाल मेला लगता है। मुसलमान भी उन्हें 'रामसा पीर' के नाम से पूजते हैं।
In simple words: रामदेवजी राजस्थान के एक प्रमुख लोक देवता हैं, जिन्होंने सामाजिक समानता और हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया। वे गायों और आम लोगों के रक्षक थे। उनकी पूजा रामदेवरा में होती है और उन्हें 'रामसा पीर' भी कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों में, दिए गए विषय पर सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें उनके जीवन, कार्य, शिक्षाएँ और प्रभाव शामिल हों।

 

Question 3. एक समाज सुधारक के रूप में संत जाम्भोजी का वर्णन कीजिए।
Answer: संत जाम्भोजी विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक थे और एक महान समाज सुधारक भी। उनका जन्म 1451 ईस्वी में नागौर जिले के पीपासर गाँव में एक पंवार राजपूत परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम लोहटजी और हांसा देवी था। वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और बचपन से ही गायें चराते थे। माता-पिता के निधन के बाद, उन्होंने घर छोड़ दिया और बीकानेर के सम्भराथल नामक स्थान पर रहकर सत्संग और हरि चर्चा में समय बिताया। विक्रम संवत 1542 में कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उन्होंने सम्भराथल में विश्नोई पंथ की स्थापना की, अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया। ये 29 सिद्धांत ही विश्नोई पंथ के नियम माने जाते हैं। जाम्भोजी एक समन्वयवादी, उदार विचारक, मानव धर्म के पोषक, पर्यावरण के संरक्षक और हिन्दू-मुस्लिम एकता के समर्थक थे। उन्होंने 1485 ईस्वी में पड़े अकाल के दौरान पीड़ितों की उदारतापूर्वक सहायता की थी। उन्होंने विक्रम संवत 1593 में अपने शरीर का त्याग किया और उन्हें मुकाम गाँव में समाधि दी गई, जहाँ हर साल फाल्गुन और आषाढ़ अमावस्या को मेले लगते हैं।
In simple words: जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की और समाज सुधार के लिए 29 नियम बताए। उन्होंने पर्यावरण, मानव धर्म, शांति और हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया। उन्होंने अकाल के समय लोगों की मदद की और अपने उपदेशों से समाज को सही राह दिखाई।

🎯 Exam Tip: समाज सुधारकों के वर्णन में उनके जीवन परिचय, उनके द्वारा स्थापित पंथ, मुख्य सिद्धांत और सामाजिक योगदान को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 4. आचार्य भिक्षु का समाज सुधारक के रूप में योगदान बताइए।
Answer: आचार्य भिक्षु जैन परम्परा के एक महान संत और समाज सुधारक थे। उनका जन्म विक्रम संवत 1783 (2 जुलाई, 1726 ईस्वी) को मारवाड़ के कंटालिया गाँव में हुआ था। लगभग 25 वर्ष की आयु में वे जैन आचार्य रघुनाथ जी के शिष्य बन गए और 8 साल तक अपने गुरु के साथ रहे। आचार्य भिक्षु ने जैन धर्म के सिद्धांतों को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए स्थानीय भाषा का उपयोग किया और राजस्थानी भाषा में साहित्य भी लिखा। उन्होंने तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना की। उन्होंने आचार्य के रूप में कई जगहों पर अपने उपदेशों से लोगों को प्रभावित किया और अपने विचारों का प्रचार किया। वे आचार-विचार की शुद्धता के बड़े समर्थक थे। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और सांप्रदायिक सद्भाव पर जोर दिया, साथ ही यह भी कहा कि धर्म की बातें आम आदमी को समझ में आनी चाहिए ताकि वे मोक्ष के मार्ग पर चल सकें। 2 सितम्बर, 1803 ईस्वी को पाली जिले के सिरियारी में उनका देहांत हो गया।
In simple words: आचार्य भिक्षु जैन धर्म के संत थे जिन्होंने तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना की। उन्होंने जैन सिद्धांतों को आम भाषा में फैलाया, धार्मिक एकता पर जोर दिया और बताया कि धर्म को समझना सबके लिए आसान होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: समाज सुधारकों के योगदान का वर्णन करते समय उनके दार्शनिक विचार, सामाजिक शिक्षाएँ और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं को स्पष्ट रूप से लिखें।

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