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Detailed Chapter 14 स्वास्थ्य, रोग एवं योग RBSE Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 14 स्वास्थ्य, रोग एवं योग RBSE Solutions PDF
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. क्याशियोकोर रोग किस भोजन की कमी से होने वाला रोग है?
(अ) कार्बोहायड्रेट
(ब) प्रोटीन
(स) वसा
(द) खनिज लवण
Answer: (ब) प्रोटीन
In simple words: क्वाशियोरकोर एक बीमारी है जो बच्चों में तब होती है जब उन्हें अपने खाने में पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता है. प्रोटीन शरीर के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है.
Question 2. निम्न में से जन्मजात रोग नहीं है-
(अ) कुष्ठ रोग
(ब) टिटेनस
(स) मलीया
(द) कोई नहीं।
Answer: (द) कोई नहीं।
In simple words: जन्मजात रोग वे होते हैं जो जन्म के समय से ही मौजूद होते हैं. दिए गए विकल्पों में से, कुष्ठ रोग, टिटेनस और मलेरिया ये सभी जन्म के बाद होने वाले रोग हैं, इसलिए इनमें से कोई भी जन्मजात रोग नहीं है.
🎯 Exam Tip: जन्मजात (जन्म से मौजूद) और उपार्जित (जन्म के बाद होने वाले) रोगों के बीच अंतर को समझें.
Question 3. भोजन का वह घटक जिससे शरीर को सर्वाधिक ऊर्जा प्राप्ति होती है।
(अ) वसा
(ब) कार्बोहायड्रेट
(स) प्रोटीन
(द) कोई नहीं।
Answer: (ब) कार्बोहायड्रेट
In simple words: कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं, जैसे एक गाड़ी को चलने के लिए ईंधन चाहिए होता है. वे हमें सबसे ज़्यादा ऊर्जा देते हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य घटकों और उनके कार्यों को जानें, खासकर ऊर्जा प्रदान करने वाले घटकों को.
Question 6. योग द्वारा व्यक्ति में कौन-सा लक्षण निर्मित होता है –
(अ) स्वाध्याय
(ब) सकारात्मक दृष्टिकोण
(स) अनुशासन
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: योग करने से व्यक्ति में अच्छे गुण आते हैं, जैसे खुद पढ़ना, अच्छा सोचना और अनुशासित रहना. यह सभी गुण योग से बढ़ते हैं.
🎯 Exam Tip: योग के समग्र लाभों को याद रखें, क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 7. सन्तुलित भोजन के घटक व मुख्य स्रोत क्या हैं ?
Answer: सन्तुलित भोजन के मुख्य घटक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज लवण हैं. इनके मुख्य स्रोत इस प्रकार हैं-
कार्बोहाइड्रेट – चावल, शक्कर
प्रोटीन – दालें, दूध, पनीर
खनिज – दूध, सब्ज़ियाँIn simple words: एक सन्तुलित भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज होते हैं. हमें चावल, दूध, दालें और सब्ज़ियों जैसे खाद्य पदार्थों से ये सब मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न पोषक तत्वों और उनके खाद्य स्रोतों की एक सूची तैयार करें ताकि याद रखने में आसानी हो.
Question 8. विटामिन शरीर के लिए आवश्यक तत्व हैं। समझाइए। शरीर के लिए आवश्यक विटामिनों के नाम बताइए।
Answer: विटामिन हमारे पोषण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये उपापचय (मेटाबॉलिज्म) में मुख्य योगदान देते हैं. ये तत्व शरीर के विकास और परिवर्धन में भी सहायक होते हैं.
शरीर के लिए आवश्यक विटामिन हैं – A, B कॉम्प्लेक्स, C, D, E, K.In simple words: विटामिन शरीर के लिए बहुत ज़रूरी हैं. वे शरीर को बढ़ने, विकसित होने और ठीक से काम करने में मदद करते हैं. विटामिन A, B, C, D, E, K कुछ ज़रूरी विटामिन हैं.
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विटामिन का नाम और उसके मुख्य कार्य को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 10. वायरस जनित किन्हीं दो रोगों के नाम बताइए।
Answer: वायरस से होने वाले दो रोग खसरा और एड्स हैं.In simple words: खसरा और एड्स ऐसी बीमारियाँ हैं जो छोटे-छोटे वायरस के कारण होती हैं.
🎯 Exam Tip: सामान्य वायरस जनित रोगों के नाम और उनके रोकथाम के तरीके जानना उपयोगी है.
Question 11. डेंगू रोग के लक्षण व उपचार क्या है ?
Answer: डेंगू रोग के लक्षण इस प्रकार हैं: बुखार आना, ठण्ड लगना, माँसपेशी व जोड़ों में दर्द, कमजोरी महसूस करना, भूख न लगना, चक्कर आना, रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना और नब्ज का कमजोर चलना.
इसका उपचार माइकोफेनोलिक एसिड और रिबाबिरिन का उपयोग करके डेंगू वायरस की वृद्धि को रोका जा सकता है.In simple words: डेंगू में तेज़ बुखार, बदन दर्द और कमजोरी होती है. इसमें प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं. कुछ दवाएँ वायरस को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं. मच्छरों से बचाव सबसे ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: डेंगू के लक्षणों को पहचानना और शुरुआती उपचार के लिए त्वरित चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 12. फास्ट फूड से शरीर पर होने वाले प्रभाव को समझाइए।
Answer: फास्ट फूड का नियमित सेवन करने से शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं. इनमें से कुछ प्रमुख प्रभाव निम्न हैं-
1. मोटापा (शरीर में अत्यधिक चर्बी का जमना)
2. हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप)
3. दिल का दौरा (एक गंभीर हृदय रोग)
4. गुर्दे का रोग (किडनी के कार्य में समस्याएँ)
5. गठिया (जोड़ों का एक प्रकार का दर्द)
6. मधुमेह (उच्च रक्त शर्करा स्तर).In simple words: ज़्यादा फास्ट फूड खाने से मोटापा बढ़ सकता है, रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल, गुर्दे और शुगर से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं.
🎯 Exam Tip: फास्ट फूड के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के महत्व पर जोर दें.
Question 13. कुपोषण किसे कहते हैं ? इसके कारण व इससे होने वाले किन्हीं दो रोगों का नाम दीजिए।
Answer: सन्तुलित आहार न मिलने के कारण कुपोषण या हीनताजन्य रोग होता है. यह एक या एक से अधिक पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है.
कुपोषण के कारण:
7. नवजात शिशुओं और बढ़ते बच्चों की पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी का अभाव और उदासीनता.
8. भोजन पकाने के सही तरीकों का ज्ञान न होना.
कुपोषण से होने वाले रोग:
1. क्वाशियोरकोर
2. घेघा.In simple words: कुपोषण तब होता है जब शरीर को सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलते हैं. यह बच्चों की पोषण की ज़रूरतों को न समझने या खाना बनाने के सही तरीके न जानने से होता है. इससे क्वाशियोरकोर और घेघा जैसे रोग हो सकते हैं.
🎯 Exam Tip: कुपोषण के कारणों और उससे होने वाले रोगों को उदाहरण सहित याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 14. सन्तुलित भोजन किसे कहते हैं ? खनिज लवण की सन्तुलित भोजन में क्या भूमिका है तथा इसकी कमी से होने वाले रोगों का वर्णन कीजिए।
Answer: सन्तुलित भोजन: वह भोजन जिसमें सभी ज़रूरी पोषक तत्व (जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, जल और खनिज लवण) सही मात्रा में मौजूद हों, उसे सन्तुलित भोजन कहते हैं.
खनिज लवण की भूमिका: लोहा, जिंक, आयोडीन, नमक और कैल्शियम फॉस्फेट जैसे कई धातुएँ और लवण हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं. कैल्शियम लवण (Ca3PO4) हमारी हड्डियों और दाँतों को मज़बूत बनाते हैं और रक्त जमने में मदद करते हैं. सोडियम और पोटैशियम लवण कोशिकाओं और ऊतक द्रव्यों में परासरणी सन्तुलन बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं. प्रोटीन और हीमोग्लोबिन बनाने के लिए लोहे की आवश्यकता होती है.
खनिज लवण की कमी से होने वाले रोग: एनीमिया, ओस्टियोपोरोसिस, घेघा और सूखा रोग.In simple words: सन्तुलित भोजन में सभी ज़रूरी पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं. खनिज लवण जैसे लोहा और कैल्शियम हमारे शरीर को मज़बूत बनाते हैं, हड्डियों और दाँतों को ठीक रखते हैं. अगर शरीर में खनिज लवण कम हो जाएँ, तो एनीमिया या कमजोर हड्डियों जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं.
🎯 Exam Tip: सन्तुलित भोजन के घटकों, खनिज लवणों की भूमिका और उनकी कमी से होने वाले रोगों को विस्तार से समझें.
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 15. रोग कितने प्रकार के होते हैं ? संक्रामक व असंक्रामक रोगों में सउदाहरण अन्तर स्पष्ट कीजिए। रोगों की उत्पत्ति के कारकों को भी समझाइए।
Answer: रोगों के प्रकार: रोगों को उनकी प्रकृति और कारणों के आधार पर निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है-
1. जन्मजात रोग (जो जन्म से ही मौजूद होते हैं)
2. उपार्जित रोग (जो जन्म के बाद विकसित होते हैं)
संक्रामक और असंक्रामक रोगों में अन्तर:
संक्रामक रोग: ये रोग वायु, जल, भोजन, कीटों या शारीरिक सम्पर्क से एक बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकते हैं.
उदाहरणार्थ – हैजा, मलेरिया, फ्लू, क्षय रोग, रेबीज, चेचक, एड्स आदि.
असंक्रामक रोग: ये रोग बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते हैं.
उदाहरणार्थ – चेंगा, एनीमिया (अरक्तता), रतौंधी, डायबिटीज आदि.
रोगों के कारक (Causative Agents of Diseases):
| रोग का नाम | कारक जीव का नाम |
|---|---|
| 1. हैजा | विब्रियो कॉलेरी |
| 2. मलेरिया | प्लाज्मोडियम वाइवैक्स |
| 3. क्षयरोग | माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस |
| 4. टाइफाइड | साल्मोनेला टाइफी |
| 5. रेबीज | रेबीज वायरस |
| 6. फ्लू (इन्फ्लुएंजा) | मिक्सोवाइरस इन्फ्लुएंजाई |
| 7. डिप्थीरिया | कोर्निबैक्टीरियम डिप्थीरियाई |
| 8. न्यूमोनिया | स्ट्रेप्टोकोसे न्यूमोनी |
| 9. टिटेनस | क्लोस्ट्रीडियम टिटेनाई |
| 10. पीलिया | लेप्टोस्पाइरा |
| 11. कुष्ठ रोग | माइकोबैक्टीरियम लेप्री |
| 12. प्लेग | पास्चुरेला पेस्टीस |
🎯 Exam Tip: रोगों के विभिन्न वर्गीकरणों को स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखें और रोगों के कारक जीवों पर विशेष ध्यान दें.
Question 16. योग क्या है ? कुछ महत्वपूर्ण योगों के नाम देते हुए योग के स्वास्थ्य पर प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
Answer: योग: 'योग' शब्द संस्कृत के धातु 'युज' से लिया गया है, जिसका अर्थ है “जोड़ना या गठबन्धन करना.” योग का मतलब है व्यक्ति की आत्मा का ब्रह्माण्ड की शक्ति, यानी ईश्वर के साथ जुड़ना. महर्षि पतंजलि के अनुसार, योग मन की वृत्तियों को रोकना है, जिससे मन में स्थिरता आती है. महात्मा गाँधी के अनुसार, योग शरीर, मन, इच्छा और विचारों की सभी शक्तियों का एक साथ आना है.
महत्वपूर्ण योगों के नाम:
1. यम
2. नियम
3. आसन
4. प्राणायाम
5. प्रत्याहार
6. धारणा
7. ध्यान
8. समाधि.
योग का स्वास्थ्य पर प्रभाव:
1. योग से ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह शरीर में लगातार बना रहता है, जिससे गठिया, सूजन और प्लेटलेट्स की कमी जैसे कई रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है.
2. योग व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है.
3. योग व्यक्ति के अंदरूनी अवसाद को कम करता है, जिससे गलत सोच कम होती है.
4. नियमित रूप से योग करने से बुढ़ापे में भी शारीरिक सन्तुलन बना रहता है.
5. योग या प्राणायाम तंत्रिका तंत्र की उत्तेजना को शांत करता है, जिससे आज के तनावपूर्ण जीवन से राहत मिलती है.
6. योग प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर रोगों से बेहतर ढंग से लड़ पाता है.
7. योग शरीर के अंदरूनी अंगों को पर्याप्त व्यायाम देता है, जिससे व्यक्ति अच्छा स्वास्थ्य और लम्बी उम्र पाता है.
8. योग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
9. योग से शरीर अधिक लचीला बनता है.
10. मन को शांत करने और इंद्रियों को काबू में रखने के लिए योगासन शारीरिक और मानसिक शक्तियों को विकसित करते हैं.
11. विभिन्न योगासन शरीर में रक्त को शुद्ध करते हैं.
12. योग से एकाग्रता बढ़ती है.In simple words: योग शरीर और मन को जोड़ने की एक विधि है. यह हमें शांत, मज़बूत और स्वस्थ महसूस कराता है. यम, नियम, आसन और ध्यान इसके ज़रूरी हिस्से हैं. योग से रक्त प्रवाह सुधरता है, मन शांत होता है, शरीर लचीला बनता है और बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है.
🎯 Exam Tip: योग की परिभाषा, उसके प्रकार और स्वास्थ्य लाभों को विस्तृत रूप से समझें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण और अक्सर पूछा जाने वाला विषय है.
पतंजलि का जीवन परिचय
पतंजलि को योग का जनक माना जाता है. उन्होंने अष्टांग योग की शिक्षा दी. अष्टांग योग जीवन जीने का एक पूरा तरीका बताता है, जिसमें संयम, सत्य, अहिंसा, स्वाध्याय, सन्तोष, अनुशासन, ध्यान, एकाग्रता, भावना नियन्त्रण और समर्पण शामिल हैं. पतंजलि ने सिखाया कि ये सभी चीजें सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं. उन्होंने मनुष्यों को योग के लाभ देने का फैसला किया. पतंजलि के अनुसार, 'योगश्चित्त वृत्ति निरोध:' का अर्थ है मन की वृत्तियों को रोकना, जिससे मन में स्थिरता आती है. पतंजलि द्वारा बताए गए अष्टांग योग में यम, नियम (व्यक्तिगत अनुशासन), आसन, प्राणायाम (साँस का नियन्त्रण व नियमन), प्रत्याहार (इन्द्रियों पर अनुशासन), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (साधना) और समाधि (आत्म अनुभूति) शामिल हैं.
नागार्जुन का जीवन परिचय
नागार्जुन एक महान रसायनज्ञ थे. उनका जन्म सातवीं-आठवीं शताब्दी में गुजरात के सोमनाथ के पास दैहिक नामक जगह पर हुआ था. नागार्जुन ने 'रस रत्नाकर' और 'रसेन्द्र मंगल' जैसे प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे. 'रस रत्नाकर' में धातुओं के शुद्धिकरण और उनके गुणों का वर्णन है. इसमें पारे और उसके विशेष गुणों का उल्लेख है, साथ ही पारे की रासायनिक क्रियाओं का भी वर्णन है. 'रस रत्नाकर' में पारे के यौगिक बनाने के तरीके और धातु कर्म के स्तर का सर्वेक्षण किया गया है. इसमें चाँदी, सोना, टिन जैसी धातुओं को शुद्ध करने के तरीके भी बताए गए हैं. नागार्जुन ने संजीवनी और अन्य पदार्थ बनाने के लिए पशुओं, वनस्पति तत्वों, अम्ल और खनिजों का भी इस्तेमाल किया. उन्होंने कई धातुओं को घोलने के लिए वनस्पति से बने तेजाबों का सुझाव दिया. नागार्जुन ने अपनी पुस्तक में आसवन, ऊर्ध्वपातन और द्रवण जैसी महत्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रियाओं का वर्णन किया है. उन्होंने कई धातुओं से सोना या सोने जैसी पीली चमक वाली धातुएँ बनाने के तरीके भी बताए हैं. भारत में नागार्जुन को धातुवाद का प्रवर्तक माना जाता है. उन्होंने 'सुश्रुत संहिता' का सम्पादन भी किया और उसमें 'उत्तर तंत्र' नामक एक नया अध्याय जोड़ा. नागार्जुन ने आयुर्वेद के 'आरोग्य मंजरी, योगसार, योगाष्टक' जैसे ग्रंथ भी लिखे हैं.
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
वस्तुनिष्ठ
Question 2. सामान्यतः कार्बोहाइड्रेट हमारे आहार में निहित कुल भोजन ऊर्जा का कितने अंश प्रदान करते हैं ?
(अ) 60% से 80% अंश
(ब) 40% से 50% तक
(स) 90% से 100% अंश
(द) 20% से 40% तक।
Answer: (अ) 60% से 80% अंश
In simple words: कार्बोहाइड्रेट हमारे खाने का एक बड़ा हिस्सा होते हैं और हमें ज़्यादातर ऊर्जा उन्हीं से मिलती है. आमतौर पर, वे भोजन से मिलने वाली कुल ऊर्जा का 60% से 80% तक देते हैं.
🎯 Exam Tip: पोषक तत्वों के प्रतिशत योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संतुलित आहार के महत्व को दर्शाता है.
Question 3. किस खाद्य पदार्थ में फॉस्फोरस नहीं पाया जाता है-
(अ) दूध में
(ब) अण्डा में
(स) हरी पत्तेदार सब्जियों में
(द) दही में।
Answer: (ब) अण्डा में
In simple words: फॉस्फोरस दूध, हरी सब्ज़ियों और दही जैसे कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, लेकिन अंडे में यह पोषक तत्व नहीं होता है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्रमुख खनिजों और पोषक तत्वों की सूची को याद करें.
Question 4. प्रोटीन के स्रोत हैं-
(अ) मूंगफली
(ब) बीन्स
(स) अन्न
(द) उपरोक्त सभी।
Answer: (द) उपरोक्त सभी।
In simple words: मूंगफली, बीन्स और अनाज जैसे सभी विकल्प प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. प्रोटीन शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए बहुत ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के विभिन्न स्रोतों को जानना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से शाकाहारी विकल्पों को.
Question 6. कौन-सा विटामिन जल में घुलनशील है-
(अ) A
(ब) D
(स) B
(द) K.
Answer: (स) B
In simple words: विटामिन B पानी में आसानी से घुल जाता है. इसका मतलब है कि हमारा शरीर इसे लंबे समय तक जमा करके नहीं रख पाता है, इसलिए हमें इसे नियमित रूप से खाने से लेना पड़ता है.
🎯 Exam Tip: जल में घुलनशील (विटामिन B और C) और वसा में घुलनशील (विटामिन A, D, E, K) विटामिनों को अलग-अलग याद रखें.
Question 7. मानव को स्वस्थ रहने हेतु किशोरावस्था में लगभग कितने कैलोरी की आवश्यकता होती है-
(अ) 1800-2600 कैलोरी
(ब) 2200-2600 कैलोरी
(स) 2000-3200 कैलोरी
(द) 3200-4000 कैलोरी।
Answer: (अ) 1800-2600 कैलोरी
In simple words: किशोरों को स्वस्थ रहने के लिए हर दिन लगभग 1800 से 2600 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह उन्हें बढ़ने और सक्रिय रहने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: आयु वर्ग के अनुसार कैलोरी की आवश्यकताएँ भिन्न होती हैं; किशोरावस्था की ज़रूरतों पर विशेष ध्यान दें.
Question 8. मानव के लिए विटामिन C की दैनिक कितनी मात्रा आवश्यक है-
(अ) 20 mg
(ब) 40 mg
(स) 60 mg
(द) 80 mg.
Answer: (ब) 40 mg
In simple words: स्वस्थ रहने के लिए हमें हर दिन लगभग 40 मिलीग्राम विटामिन C की ज़रूरत होती है. यह हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विटामिन की दैनिक अनुशंसित मात्रा को याद रखना आवश्यक है.
Question 11. डीपीटी का टीका किससे सुरक्षा प्रदान नहीं करता-
(अ) डिप्थीरिया
(ब) काली खाँसी
(स) हैजा
(द) टिटेनस
Answer: (स) हैजा
In simple words: डीपीटी का टीका डिप्थीरिया, काली खाँसी और टिटेनस से बचाता है, लेकिन यह हैजा से सुरक्षा नहीं देता है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न टीकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा और वे किन रोगों से बचाते हैं, इसकी जानकारी रखें.
Question 12. पीलिया रोग का रोगजनक है-
(अ) लेप्टोस्पाइरा जीवाणु
(ब) माइकोबैक्टीरियम लेपी
(स) साल्मोनेला टायफी
(द) पैरामिक्सो वायरस
Answer: (अ) लेप्टोस्पाइरा जीवाणु
In simple words: पीलिया रोग लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बैक्टीरिया एक प्रकार का सर्पिल जीवाणु है जो पीलिया का गंभीर रूप पैदा कर सकता है.
🎯 Exam Tip: सामान्य रोगों के कारक जीवों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस) और उनके संबंधित रोगों को याद रखें.
Question 13. लेप्रोमीन टेस्ट किस बीमारी के लिए किया जाता है-
(अ) मस्तिष्क ज्वर
(ब) प्लेग
(स) खसरा
(द) कुष्ठ रोग
Answer: (द) कुष्ठ रोग
In simple words: लेप्रोमीन टेस्ट कुष्ठ रोग का पता लगाने के लिए किया जाता है. यह डॉक्टरों को इस त्वचा रोग की जाँच करने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न रोगों के निदान के लिए उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट परीक्षणों के बारे में जानें.
Question 15. अष्टांग योग का पथ किसने दिया-
(अ) नागार्जुन
(ब) बाबा रामदेव
(स) पतंजलि
(द) स्वामी दयानन्द
Answer: (स) पतंजलि
In simple words: अष्टांग योग का तरीका महर्षि पतंजलि ने सिखाया था. उन्होंने इस प्राचीन अभ्यास के नियम बनाए.
🎯 Exam Tip: योग के प्रमुख प्रणेताओं और उनकी मुख्य शिक्षाओं को याद रखना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है.
Question 16. अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था-
(अ) 21 जून 2015 को
(ब) 21 मई 2015 को
(स) 22 जून 2015 को
(द) 21 अप्रैल 2015 को
Answer: (अ) 21 जून 2015 को
In simple words: पहला अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था. यह योग के लाभों को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए एक ख़ास दिन है.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों और उनके महत्व को जानना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है.
सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न
Question. निम्न को सुमेलित कीजिए-
कॉलम I कॉलम II
विटामिन मुख्य रोग
1. विटामिन A (a) हेमरेज
2. विटामिन B (b) बन्ध्यता व पक्षाघात
3. विटामिन C (c) रिकेट्स
4. विटामिन D (d) स्कर्वी
5. विटामिन E (e) बेरी-बेरी
6. विटामिन K (f) रतौंधी
Answer:
| कॉलम I (विटामिन) | कॉलम II (मुख्य रोग) |
|---|---|
| 1. विटामिन A | (f) रतौंधी |
| 2. विटामिन B | (e) बेरी-बेरी |
| 3. विटामिन C | (d) स्कर्वी |
| 4. विटामिन D | (c) रिकेट्स |
| 5. विटामिन E | (b) बन्ध्यता व पक्षाघात |
| 6. विटामिन K | (a) हेमरेज |
🎯 Exam Tip: विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोगों के बीच सही मिलान को ध्यान से याद करें, यह अक्सर मिलान वाले प्रश्नों में आता है.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. WHO के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा क्या है ?
Answer: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों या कमजोरियों का न होना नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह कुशल होने की स्थिति है.In simple words: WHO कहता है कि स्वस्थ होने का मतलब सिर्फ बीमार न होना नहीं है, बल्कि शरीर, मन और समाज के हिसाब से पूरी तरह ठीक महसूस करना है.
🎯 Exam Tip: WHO की स्वास्थ्य परिभाषा को सटीक रूप से याद करें, क्योंकि यह एक मौलिक अवधारणा है.
Question 2. प्रोटीन के प्रमुख स्रोत बताइए।
Answer: प्रोटीन के प्रमुख स्रोत अण्डे, माँस, मछली, पनीर, चीज़, मूंगफली, दालें, मटर और सोयाबीन हैं.In simple words: प्रोटीन हमें अण्डे, माँस, मछली, पनीर, मूंगफली, दालें, मटर और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थों से मिलता है.
🎯 Exam Tip: प्रोटीन शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण है; इसके विविध स्रोतों को जानना आवश्यक है.
Question 3. विटामिन A, C व D का रासायनिक नाम क्या है ?
Answer: विटामिन A का रासायनिक नाम रेटिनॉल है.
विटामिन C का रासायनिक नाम एस्कार्बिक अम्ल है.
विटामिन D का रासायनिक नाम कैल्सीफेरोल है.In simple words: विटामिन A को रेटिनॉल, विटामिन C को एस्कार्बिक अम्ल और विटामिन D को कैल्सीफेरोल कहते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रमुख विटामिनों के रासायनिक नाम याद रखना वैज्ञानिक शब्दावली और उनके कार्यों को समझने में मदद करता है.
Question 4. बन्ध्यता और हेमरेज किस विटामिन की कमी से होते हैं ?
Answer: बन्ध्यता (बाँझपन) विटामिन E की कमी से होता है.
हेमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव) विटामिन K की कमी से होता है.In simple words: विटामिन E की कमी से बन्ध्यता हो सकती है, और विटामिन K की कमी से खून ज़्यादा बह सकता है (हेमरेज).
🎯 Exam Tip: विशिष्ट विटामिन की कमी से होने वाले रोगों के नाम याद रखें, खासकर जो प्रजनन और रक्तस्राव से संबंधित हैं.
Question 5. चोट लगने पर किसका इंजेक्शन लगवाया जाता है ?
Answer: चोट लगने पर A.T.S. (एंटी-टिटेनस सीरम) का इंजेक्शन लगवाया जाता है.In simple words: चोट लगने पर हमें एटीएस का इंजेक्शन लगता है. यह हमें टिटेनस नाम की गंभीर बीमारी से बचाता है.
🎯 Exam Tip: आपातकालीन स्थिति में लगाए जाने वाले टीकों और उनके उद्देश्यों को जानना महत्वपूर्ण है.
Question 8. गाउट रोग किस प्रकार का होता है ?
Answer: गाउट रोग एक प्रकार का गठिया है जहाँ यूरिक अम्ल के क्रिस्टल हड्डियों के जोड़ों में जमा हो जाते हैं, जिससे उन जोड़ों में बहुत दर्द होता है.In simple words: गाउट एक दर्दनाक बीमारी है जो तब होती है जब जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द होता है.
🎯 Exam Tip: गाउट के कारण और लक्षणों को समझें, विशेष रूप से यूरिक अम्ल के जमाव से संबंधित जानकारी पर ध्यान दें.
Question 9. तीव्र रोग व दीर्घकालिक रोग का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer: खाँसी-जुकाम तीव्र रोग (अचानक शुरू होने वाला और कम समय तक चलने वाला) का उदाहरण है, और क्षयरोग (टी.बी.) दीर्घकालिक रोग (धीरे-धीरे विकसित होने वाला और लंबे समय तक चलने वाला) का उदाहरण है.In simple words: खाँसी-जुकाम एक छोटी बीमारी है जो जल्दी ठीक हो जाती है, जबकि टी.बी. एक लंबी बीमारी है जो लंबे समय तक चलती है.
🎯 Exam Tip: तीव्र और दीर्घकालिक रोगों के बीच के अंतर को स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 10. संक्रामक रोग किसे कहते हैं ?
Answer: वे रोग जिनके तत्काल कारण सूक्ष्म जीव (रोगाणु) होते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं. ये सूक्ष्म जीव एक व्यक्ति से दूसरे में या समुदाय में रोग फैलाते हैं.In simple words: संक्रामक रोग वे हैं जो छोटे कीटाणुओं (जैसे बैक्टीरिया या वायरस) के कारण होते हैं और एक से दूसरे में फैल सकते हैं.
🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों की परिभाषा और उनके फैलने के तरीकों को समझना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 11. कैंसर रोग का क्या कारण है ?
Answer: कैंसर रोग का मुख्य कारण कैंसरकारी पदार्थ जिन्हें कार्सिनोजन कहते हैं, और आनुवंशिक असामान्यताएँ (जीन में बदलाव) हैं.In simple words: कैंसर कुछ खास हानिकारक चीज़ों (कार्सिनोजन) और हमारे शरीर के अंदर जीन में गड़बड़ी के कारण होता है.
🎯 Exam Tip: कैंसर के मुख्य कारणों को पहचानना और निवारक उपायों को जानना महत्वपूर्ण है.
Question 12. उच्च रक्त चाप का क्या कारण है ?
Answer: उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का मुख्य कारण ज़्यादा वज़न होना और नियमित व्यायाम न करना है.In simple words: अगर किसी का वज़न ज़्यादा हो या वह व्यायाम न करे, तो उसे उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या हो सकती है.
🎯 Exam Tip: उच्च रक्तचाप के जोखिम कारकों और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से इसे प्रबंधित करने के तरीकों पर ध्यान दें.
Question 13. पेप्टिक व्रण का क्या कारण है ?
Answer: पेप्टिक व्रण (पेट या आँत में अल्सर) का कारण हेलीकोबैक्टर पायलोरी (Helicobacter pylori) नामक बैक्टीरिया है.In simple words: पेट के अल्सर अक्सर हेलीकोबैक्टर पायलोरी नाम के बैक्टीरिया के कारण होते हैं.
🎯 Exam Tip: पेप्टिक व्रण के मुख्य कारण और इसके उपचार के सामान्य तरीकों को जानें.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 15. पेष्टिक व्रण का उपचार किस दवा से होता है ?
Answer: पेप्टिक व्रण (गैस्ट्रिक अल्सर) का उपचार एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करती हैं, जिससे घाव ठीक हो पाता है।
In simple words: पेप्टिक अल्सर का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से होता है, जो पेट के घाव करने वाले बैक्टीरिया को मार देती हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि पेप्टिक व्रण के उपचार में एंटीबायोटिक्स के साथ-साथ पेट में एसिड कम करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं, जिससे उपचार अधिक प्रभावी हो सके।
Question 16. प्रोटोजोआ से होने वाले दो रोगों का नाम लिखिए।
Answer: प्रोटोजोआ से होने वाले दो रोग मलेरिया और कालाजार हैं। प्रोटोजोआ एक प्रकार के सूक्ष्मजीव होते हैं जो विभिन्न बीमारियों का कारण बनते हैं।
In simple words: प्रोटोजोआ से मलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटोजोआ एककोशिकीय जीव होते हैं और अक्सर मच्छरों या मक्खियों जैसे वाहकों द्वारा फैलाए जाते हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण महत्वपूर्ण है।
Question 17. ट्रिपैनोसोमा किस रोग का कारक है ?
Answer: ट्रिपैनोसोमा निद्रा रोग (African Trypanosomiasis) का कारक है। यह परजीवी एक मक्खी (त्सेत्से मक्खी) द्वारा फैलता है।
In simple words: ट्रिपैनोसोमा परजीवी 'निद्रा रोग' फैलाता है।
🎯 Exam Tip: निद्रा रोग एक गंभीर बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, इसलिए शीघ्र निदान और उपचार महत्वपूर्ण है।
Question 18. गोलकृमि (एस्कैरिस लम्ब्रीकॉइड्स) कहाँ पाया जाता है?
Answer: गोलकृमि (एस्कैरिस लम्ब्रीकॉइड्स) मनुष्य की छोटी आँत में पाया जाता है। यह एक प्रकार का परजीवी कृमि है जो संक्रमित भोजन या पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
In simple words: गोलकृमि (एस्कैरिस) इंसानों की छोटी आँत में रहता है।
🎯 Exam Tip: साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल का सेवन एस्कैरिस संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक है।
Question 19. पेनिसिलिन एंटीबायोटिक का कार्य बताइए।
Answer: पेनिसिलिन एंटीबायोटिक बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया को रोक देता है। इससे बैक्टीरिया अपनी कोशिका भित्ति नहीं बना पाते और मर जाते हैं। मनुष्यों पर पेनिसिलिन का कोई बुरा प्रभाव नहीं होता क्योंकि हमारी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
In simple words: पेनिसिलिन बैक्टीरिया को उनकी दीवार बनाने से रोककर उन्हें मार देता है, लेकिन यह इंसानों को नुकसान नहीं पहुँचाता है।
🎯 Exam Tip: पेनिसिलिन पहली खोजी गई एंटीबायोटिक थी और इसने चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी, जिससे कई बैक्टीरियल संक्रमणों का इलाज संभव हो पाया।
Question 20. सामान्य खाँसी-जुकाम पर एंटीबायोटिक क्यों प्रभाव नहीं दिखा पाते हैं ?
Answer: सामान्य खाँसी-जुकाम वायरस के कारण होता है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया को मारने या उनकी वृद्धि को रोकने में प्रभावी होते हैं, जबकि वायरस पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, एंटीबायोटिक सर्दी-जुकाम पर काम नहीं करते हैं।
In simple words: सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है, और एंटीबायोटिक सिर्फ बैक्टीरिया पर काम करते हैं, वायरस पर नहीं, इसलिए ये सर्दी-जुकाम में मदद नहीं करते।
🎯 Exam Tip: सर्दी-जुकाम के लिए एंटीबायोटिक का अनावश्यक उपयोग बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकता है, जिससे भविष्य में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो सकता है।
Question 21. संचारी रोग किन्हें कहते हैं ?
Answer: संचारी रोग वे होते हैं जो किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर से सीधे संपर्क, वायु, जल, भोजन या वाहक (जैसे मच्छर) के माध्यम से एक स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं। इन रोगों को अक्सर संक्रामक रोग भी कहा जाता है।
In simple words: संचारी रोग वो बीमारियाँ हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में या जानवरों से इंसानों में फैल सकती हैं, जैसे कि सर्दी-जुकाम या मलेरिया।
🎯 Exam Tip: संचारी रोगों से बचाव के लिए स्वच्छता, टीकाकरण और वाहक नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण हैं।
Question 23. जापानी बुखार (एन्सेफेलाइटिस) किस अंग को प्रभावित करता है ?
Answer: जापानी बुखार (एन्सेफेलाइटिस) मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यह एक वायरस के कारण होने वाला गंभीर संक्रमण है जो दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है।
In simple words: जापानी बुखार दिमाग पर असर करता है।
🎯 Exam Tip: जापानी बुखार एक गंभीर बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
Question 24. शोथ किसे कहते हैं ?
Answer: शोथ का अर्थ सूजन है। यह शरीर की एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जिसके चार मुख्य लक्षण होते हैं: लालिमा, उभार (सूजन), ताप में वृद्धि (गर्मी) और द्रव का जमा होना। यह शरीर को चोट या संक्रमण से बचाने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
In simple words: शोथ का मतलब है सूजन, जिसमें शरीर का वह हिस्सा लाल, सूजा हुआ, गर्म हो जाता है और उसमें पानी भर जाता है; यह शरीर की रक्षा करने का तरीका है।
🎯 Exam Tip: शोथ आमतौर पर संक्रमण, चोट या एलर्जी जैसी समस्याओं का संकेत होता है, और यह शरीर की हीलिंग प्रक्रिया का हिस्सा है।
Question 25. HIV-AIDS से व्यक्ति की मृत्यु प्रायः क्यों हो जाती है ?
Answer: HIV-AIDS संक्रमण से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और काम करना बंद कर देता है। इससे व्यक्ति छोटे-छोटे संक्रमणों से भी नहीं लड़ पाता, जिससे अंततः ये संक्रमण ही HIV-AIDS के रोगी की मृत्यु का कारण बन जाते हैं। शरीर अपनी रक्षा करने की क्षमता खो देता है।
In simple words: HIV-AIDS शरीर की रोग से लड़ने की शक्ति को खत्म कर देता है, जिससे छोटे-छोटे संक्रमण भी जानलेवा बन जाते हैं और मरीज की मौत हो जाती है।
🎯 Exam Tip: HIV-AIDS से बचाव के लिए जागरूकता, सुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुइयों से बचना अत्यंत आवश्यक है।
Question 26. संक्रामक रोगों के उपचार के दो उपाय बताइए।
Answer: संक्रामक रोगों के उपचार के दो मुख्य उपाय हैं: 1. रोग के प्रभावों को कम करना, जैसे दर्द या बुखार को नियंत्रित करना। 2. रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव (कारक) को मार देना, जैसे एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाओं का उपयोग करके।
In simple words: संक्रामक बीमारियों के इलाज के दो तरीके हैं: बीमारी के लक्षणों को कम करना और बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं को मारना।
🎯 Exam Tip: प्रभावी उपचार के लिए हमेशा सही दवा का चयन करना और उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना महत्वपूर्ण है।
Question 27. पेनिसिलिन प्रतिजैविक की खोज किसने की थी ?
Answer: पेनिसिलिन प्रतिजैविक की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की थी। उन्होंने 1928 में यह महत्वपूर्ण खोज की थी, जिसने चिकित्सा के क्षेत्र में एक क्रांति ला दी।
In simple words: पेनिसिलिन को अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने खोजा था।
🎯 Exam Tip: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग की खोज ने अनगिनत जीवन बचाए हैं और उन्हें चिकित्सा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बनाती है।
Question 30. 'ध्यान' से क्या तात्पर्य है ?
Answer: 'ध्यान' का तात्पर्य है जब कोई व्यक्ति समय और स्थान की सीमाओं से मुक्त होकर अपना मन एक बिंदु पर केंद्रित करता है। यह एक ऐसी साधना है जिसमें मन को शांत और स्थिर किया जाता है।
In simple words: ध्यान का मतलब है अपने मन को किसी एक चीज़ पर लगाना और उसे समय-जगह के बंधनों से आज़ाद करना।
🎯 Exam Tip: ध्यान एकाग्रता बढ़ाता है, तनाव कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
Question 31. जीवन के मूल तत्व कौन-से हैं ?
Answer: जीवन के मूल तत्व विचार, भावनाएँ और क्रियाएँ हैं। ये तीनों मिलकर किसी व्यक्ति के जीवन को आकार देते हैं और उसके अनुभवों को प्रभावित करते हैं।
In simple words: जीवन के मुख्य भाग हैं हमारे विचार, भावनाएँ और हम जो काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: इन तत्वों को समझकर और उन पर नियंत्रण करके व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
Question 32. नागार्जुन द्वारा रचित आयुर्वेद की रचनाएँ बताइए
Answer: नागार्जुन द्वारा रचित आयुर्वेद की प्रमुख रचनाएँ आरोग्य मंजरी, योगसार और योगाष्टक हैं। वे एक महान रसायनज्ञ भी थे और उन्होंने कई आयुर्वेदिक ग्रंथों की रचना की।
In simple words: नागार्जुन ने 'आरोग्य मंजरी', 'योगसार' और 'योगाष्टक' जैसी आयुर्वेदिक किताबें लिखीं।
🎯 Exam Tip: नागार्जुन को धातुवाद का प्रवर्तक माना जाता है, जिन्होंने रसायन विज्ञान और आयुर्वेद में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Question 33. प्राणायाम का क्या उद्देश्य है ?
Answer: प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य शरीर में मौजूद आवश्यक प्राण शक्ति को सक्रिय करना, उसे नियमित करना और संतुलित बनाए रखना है। यह श्वास नियंत्रण के माध्यम से किया जाता है।
In simple words: प्राणायाम का लक्ष्य शरीर की ऊर्जा को बढ़ाना, नियंत्रित करना और उसे संतुलन में लाना है।
🎯 Exam Tip: प्राणायाम मन और शरीर के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करता है, जिससे मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार होता है।
Question 34. आसन किसे कहते हैं ?
Answer: किसी भी आसन में स्थिरता और सुखपूर्वक बैठना ही आसन कहलाता है। यह शरीर को एक विशेष मुद्रा में स्थिर रखने की कला है जो शारीरिक और मानसिक संतुलन प्रदान करती है।
In simple words: आसन का मतलब है किसी भी मुद्रा में आराम से और स्थिर होकर बैठना।
🎯 Exam Tip: आसनों का नियमित अभ्यास शरीर को लचीला बनाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और मन को शांत करता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा लिखिए।
Answer: विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, स्वास्थ्य केवल शारीरिक रोग या विकलांगता की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह किसी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण कुशलता की अवस्था है। इसमें व्यक्ति का समग्र कल्याण शामिल होता है।
In simple words: WHO के अनुसार, स्वस्थ होने का मतलब सिर्फ बीमार न होना नहीं है, बल्कि शरीर, दिमाग और समाज तीनों तरह से पूरी तरह ठीक होना है।
🎯 Exam Tip: यह परिभाषा स्वास्थ्य को एक व्यापक दृष्टिकोण से देखती है, जिसमें शारीरिक के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक पहलू भी शामिल हैं।
Question 2. प्रोटीन के प्रमुख स्रोत बताइए।
Answer: प्रोटीन के प्रमुख स्रोत अण्डे, माँस, मछली, पनीर, चीज़ (पनीर), मूंगफली, दालें, मटर और सोयाबीन हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर की वृद्धि और मरम्मत के लिए आवश्यक प्रोटीन प्रदान करते हैं।
In simple words: प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं अंडे, मांस, मछली, पनीर, मूंगफली, दालें, मटर और सोयाबीन।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोन और एंजाइम के उत्पादन के लिए आवश्यक है, इसलिए संतुलित आहार में पर्याप्त प्रोटीन का सेवन महत्वपूर्ण है।
Question 3. वाहक (Vector) से आप क्या समझते हैं ?
Answer: वाहक (Vector) वे जीव होते हैं जो बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्म जीवों को एक संक्रमित स्थान से दूसरे स्वस्थ स्थान तक ले जाते हैं। उदाहरण के लिए, घरेलू मक्खी हैजा, पेचिश और टाइफाइड के रोगाणुओं को फैलाती है। मादा एनोफिलीज मच्छर मलेरिया का वाहक है, जबकि एडीज मच्छर डेंगू बुखार का वाहक है।
In simple words: वाहक वे जीव होते हैं जो बीमारी पैदा करने वाले कीटाणुओं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं, जैसे मच्छर मलेरिया फैलाते हैं।
🎯 Exam Tip: वाहक जनित रोगों से बचाव के लिए मच्छरों और अन्य कीटों का नियंत्रण, साफ-सफाई और व्यक्तिगत सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 4. प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) किसे कहते हैं ?
Answer: प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) वे पदार्थ हैं जो सूक्ष्मजीवों (जैसे कवक या बैक्टीरिया) द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं और दूसरे सूक्ष्मजीवों (विशेषकर बैक्टीरिया) की वृद्धि को रोकते या उन्हें मार देते हैं। पेनिसिलिन पहला ऐसा प्रतिजैविक था जो मनुष्यों द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया गया था और इसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की थी।
In simple words: एंटीबायोटिक वो दवाएं हैं जो छोटे कीटाणुओं से बनती हैं और दूसरे कीटाणुओं को बढ़ने से रोकती या उन्हें मार देती हैं।
🎯 Exam Tip: एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी होते हैं और वायरल संक्रमणों पर काम नहीं करते हैं।
Question 5. मनुष्यों में असंक्रामक रोग कैसे होते हैं?
Answer: मनुष्यों में असंक्रामक रोग कई कारणों से होते हैं, जैसे आनुवंशिक असामान्यताएँ (जेनेटिक समस्याएँ), दुर्घटनाएँ, पौष्टिक भोजन की कमी और प्रदूषित वातावरण। ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे तौर पर नहीं फैलते हैं।
In simple words: इंसानों में असंक्रामक बीमारियाँ आनुवंशिक समस्याओं, दुर्घटनाओं, खराब खान-पान और प्रदूषण जैसे कारणों से होती हैं।
🎯 Exam Tip: असंक्रामक रोगों से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और सुरक्षित वातावरण महत्वपूर्ण है।
Question 6. संक्रामक रोग फैलने के प्रमुख कारण क्या हैं?
Answer: संक्रामक रोग फैलने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में सीधा संपर्क, दूषित जल का सेवन, प्रदूषित वायु में साँस लेना, दूषित भोजन खाना और कीटों या शारीरिक संपर्क द्वारा। ये रोग बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ और कवक जैसे सूक्ष्म जीवों के संक्रमण के कारण होते हैं।
In simple words: संक्रामक रोग बीमार लोगों के संपर्क में आने, गंदे पानी, हवा, भोजन या कीड़े-मकोड़ों से फैलते हैं।
🎯 Exam Tip: इन कारणों को समझकर और उनसे बचकर हम संक्रामक रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोक सकते हैं।
Question 7. संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए आपके विद्यालय में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं?
Answer: संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए विद्यालय में निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी आवश्यक हैं: स्वयं को रोगी साथियों से अलग रखना, उनके साथ उठने-बैठने, खाने-पीने और शारीरिक संपर्क से बचना, सूक्ष्म जीवों से बचने के लिए स्वच्छ जल का उपयोग करना और स्वच्छता तथा पर्यावरण को स्वच्छ रखना।
In simple words: स्कूल में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए हमें बीमार दोस्तों से दूर रहना चाहिए, उनसे चीज़ें नहीं बाँटनी चाहिए, साफ पानी पीना चाहिए और आसपास सफाई रखनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: हाथ धोना, खाँसते या छींकते समय मुँह ढँकना और भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना जैसी आदतें भी संक्रमण को रोकने में मदद करती हैं।
Question 8. प्रतिरक्षीकरण क्या है?
Answer: प्रतिरक्षीकरण एक ऐसी विधि है जिसमें शरीर को एक बार किसी रोग के संपर्क में आने के बाद उस रोग से बचाने की क्षमता विकसित की जाती है। जब कोई रोगाणु पहली बार शरीर पर हमला करता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र उसे पहचान लेता है और उसकी स्मृति बना लेता है। अगली बार उसी या मिलते-जुलते रोगाणु के संपर्क में आने पर प्रतिरक्षा तंत्र पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है। टीके या वैक्सीन इसी सिद्धांत पर आधारित होते हैं, जिनमें मृत या कमजोर रोगाणुओं को शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है ताकि प्रतिरक्षा विकसित हो सके।
In simple words: प्रतिरक्षीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर को किसी बीमारी से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है, ताकि अगली बार वह बीमारी होने पर शरीर जल्दी से उसे खत्म कर सके; टीके इसी तरह काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षीकरण बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाता है और सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 9. आपके पास में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में टीकाकरण के कौन-कौन से कार्यक्रम उपलब्ध हैं ? आपके क्षेत्र में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सम्बन्धी मुख्य समस्या है ?
Answer: हमारे पास के स्वास्थ्य केंद्र में डिप्थीरिया, काली खाँसी, पोलियो, बी.सी.जी. (तपेदिक के लिए) आदि के टीकाकरण कार्यक्रम उपलब्ध हैं। ये कार्यक्रम बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए चलाए जाते हैं। (प्रदान किए गए पाठ में क्षेत्र की विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख नहीं है।)
In simple words: हमारे स्वास्थ्य केंद्र पर डिप्थीरिया, काली खाँसी, पोलियो और टी.बी. जैसे रोगों के टीके उपलब्ध हैं।
🎯 Exam Tip: बच्चों का समय पर टीकाकरण करवाना उन्हें कई जानलेवा बीमारियों से बचाता है और सामुदायिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है।
Question 10. जीवाणु और विषाणु संक्रमणों पर एंटीबायोटिक का प्रभाव भिन्न क्यों होता है, खासकर सर्दी-जुकाम में?
Answer: वायरस की जैविक प्रक्रियाएँ बैक्टीरिया से अलग होती हैं। वायरस पोषक कोशिकाओं के अंदर रहते हैं और उनमें ऐसी कोई विशिष्ट क्रियाविधि नहीं होती जिस पर एंटीबायोटिक काम कर सकें, जैसा कि बैक्टीरिया में होता है। यही कारण है कि कोई भी एंटीबायोटिक वायरस संक्रमण पर प्रभावी नहीं होता। इसलिए, यदि किसी को खाँसी-जुकाम (जो एक वायरल संक्रमण है) है, तो एंटीबायोटिक लेने से रोग की गंभीरता या अवधि कम नहीं होती है।
In simple words: एंटीबायोटिक सिर्फ बैक्टीरिया पर काम करते हैं, क्योंकि वायरस कोशिकाओं के अंदर रहते हैं और अलग तरीके से काम करते हैं। इसलिए, ये वायरस से होने वाले सर्दी-जुकाम पर असर नहीं करते।
🎯 Exam Tip: डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक का उपयोग करने से बचें, क्योंकि यह अनावश्यक हो सकता है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा दे सकता है।
Question 11. योग कितने प्रकार के होते हैं ? समझाइए।
Answer: योग विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
1. कर्म योग - यह कर्म करने का योग है, जिसमें व्यक्ति फल की चिंता किए बिना अपना कार्य करता है।
2. ज्ञान योग - यह ज्ञान और विवेक का योग है, जिसमें व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करता है।
3. दृढ़ योग - यह शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त करने वाला योग है, जिसे हठ योग भी कहते हैं।
4. राज योग - यह मन के जागरण और ज्ञान केंद्रों को जगाने का योग है, जिसमें ध्यान और समाधि शामिल हैं।
5. मंत्र योग - यह ध्वनि कंपन का उपयोग करके मन को स्वतंत्र करने का योग है।
6. लय योग - यह व्यक्तित्व को जानते हुए विलय करने का योग है, जिसमें व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को समझने का प्रयास करता है।
7. भक्ति योग - यह ईश्वर के प्रति सघन भक्ति करने का योग है, जिसमें प्रेम और समर्पण मुख्य होते हैं।
In simple words: योग कई तरह का होता है, जैसे कर्म योग काम करने के लिए, ज्ञान योग सीखने के लिए, और भक्ति योग भगवान की भक्ति के लिए। हर प्रकार से मन और शरीर को स्वस्थ रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: योग के विभिन्न प्रकार व्यक्ति को उसकी प्रकृति और आवश्यकताओं के अनुसार चुनने का अवसर देते हैं, जिससे समग्र कल्याण प्राप्त होता है।
Question 12. अष्टांग योग के अन्तर्गत 'नियम' क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
Answer: अष्टांग योग के अंतर्गत 'नियम' व्यक्तिगत अनुशासन और नैतिक आचरण का पालन करना सिखाता है, जिससे एक अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। इसके पाँच प्रकार हैं:
1. शौच - यह शारीरिक और मानसिक शुद्धता को दर्शाता है। इसमें शरीर की बाहरी और आंतरिक सफाई शामिल है।
2. संतोष - यह अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में खुश और संतुष्ट रहने का भाव है।
3. तप - इसमें मन, वचन और कर्म से सभी इच्छाओं पर विजय पाना और संयम बरतना शामिल है।
4. स्वाध्याय - यह आत्म-ज्ञान की प्राप्ति और विचारों में पवित्रता लाने के लिए शास्त्रों का अध्ययन करना है।
5. ईश्वर-प्रणिधान - इसमें ईश्वर के प्रति भक्ति और अपने सभी सत्कर्मों को ईश्वर को समर्पित करना शामिल है।
In simple words: नियम अष्टांग योग का एक हिस्सा है जो व्यक्तिगत अनुशासन सिखाता है, जैसे साफ-सफाई रखना, संतुष्ट रहना, संयम बरतना, खुद का अध्ययन करना और ईश्वर पर भरोसा रखना।
🎯 Exam Tip: नियमों का पालन करने से व्यक्ति का नैतिक और आध्यात्मिक विकास होता है, जो योग के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है।
एड्स से बचाव
HIV से बचाव के लिए एड्स रोग की जानकारी आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं –
1. रुधिर लेने के समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि रुधिर HIV मुक्त हो।
2. इंजेक्शन की सुई का प्रयोग एक बार ही करना चाहिए।
3. लैंगिक सम्बन्ध स्थापित करने में सावधानी बरतनी चाहिए। सम्भोग के समय कॉण्डोम (Condom) का प्रयोग करना चाहिए।
4. जीन प्रौद्योगिकी (Gene technology) द्वारा रोग की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका टीका (Vaccine) अभी तैयार नहीं हो सका है।
5. जनसाधारण का ध्यान आकर्षित करने के लिए हर वर्ष 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाया जाता है।
उपचार - एड्स की जाँच ELISA विधि द्वारा की जाती है। एड्स का अभी तक कोई प्रभावी उपचार नहीं है। इसलिए एड्स की जानकारी ही बचाव का उपाय है।
Question 2. मलेरिया के कारक, संवाहक, लक्षण तथा नियन्त्रण के उपायों का विवरण लिखिए।
Answer: मलेरिया के कारक, संवाहक और लक्षण इस प्रकार हैं:
कारक: मलेरिया रोग परजीवी प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम (Plasmodium) के कारण होता है। इसके चार प्रकार होते हैं: 1. प्लाज्मोडियम वाइवैक्स, 2. प्लाज्मोडियम ओवेल, 3. प्लाज्मोडियम मलेरी, 4. प्लाज्मोडियम फैल्सीफेरम।
संवाहक: यह रोग मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में पहुँचता है। रोनाल्ड रॉस (1887) ने इसकी पुष्टि की थी।
लक्षण: इस रोग में सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और तीव्र बुखार होता है। मलेरिया बुखार के तीन चरण होते हैं: (a) शीत चरण - इसमें ठंड और कंपकंपी महसूस होती है। (b) उष्ण चरण - इसमें तेज बुखार होता है, श्वास और हृदय की गति बढ़ जाती है। (c) स्वेदन चरण - अत्यधिक पसीना आता है और शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है। मलेरिया के बाद यकृत और प्लीहा का आकार बढ़ सकता है।
नियंत्रण के उपाय: मच्छरों को पनपने से रोकना, मच्छरदानी का उपयोग करना और मच्छर भगाने वाले रसायनों का प्रयोग करना।
In simple words: मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है, जिसे मादा एनोफिलीज मच्छर फैलाता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और कंपकंपी शामिल हैं। मच्छरों को नियंत्रित करके इसे रोका जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मच्छर प्रजनन स्थलों को खत्म करना, मच्छरदानी का उपयोग करना और एंटी-मलेरिया दवाओं का सेवन महत्वपूर्ण है।
Question 3. डेंगू (Dengue) बुखार क्या है ? इसके लक्षण तथा प्रकार बताइए। इसके उपचार के लिए आप क्या करेंगे ?
Answer: डेंगू बुखार एक वायरल रोग है जो डेंगू वायरस के कारण होता है और एडीज इजिप्टी मादा मच्छर के काटने से फैलता है।
लक्षण: इसमें तेज बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, चक्कर आना, रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना और नब्ज कमजोर चलना शामिल है। अत्यधिक तेज बुखार से मृत्यु की संभावना भी हो सकती है।
प्रकार: डेंगू बुखार तीन प्रकार का होता है:
(1) क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार - यह आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है और इसमें रोगी की मृत्यु नहीं होती।
(2) डेंगू हेमरेजिक बुखार (DHF) - इसमें शरीर के विभिन्न अंगों से रक्तस्राव होता है, और रक्त कणिकाएँ आकार में बड़ी हो जाती हैं। यह अधिक गंभीर होता है।
(3) डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) - यह प्राणघातक रोग है जिसमें नाड़ी की गति तेज हो जाती है और रक्तचाप खतरनाक स्तर तक गिर जाता है।
उपचार: डेंगू बुखार के उपचार में माइकोफेनोलिक एसिड और रिबाबिरिन जैसे एंटीवायरल दवाओं का प्रयोग करने से डेंगू विषाणु की वृद्धि रुक जाती है। मच्छरों के नियंत्रण के लिए तालाबों और टंकियों में गंबूजिया मछली डालना प्रभावी है। डेंगू के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है।
In simple words: डेंगू बुखार एक वायरस से होता है जिसे एडीज मच्छर फैलाता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, शरीर में दर्द और कमजोरी शामिल हैं। इसके गंभीर प्रकार जानलेवा भी हो सकते हैं। इसका कोई विशेष इलाज या वैक्सीन नहीं है, लेकिन मच्छरों को नियंत्रित करके इसे रोका जा सकता है।
🎯 Exam Tip: डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचें, पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी का उपयोग करें। अगर तेज बुखार या शरीर में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
Question 4. योगासनों के गुण और लाभ बताइए।
Answer: योगासनों के गुण और लाभ इस प्रकार हैं:
गुण: योगासन सहज, साध्य और सभी के लिए सुलभ होते हैं, जिनमें कोई विशेष उपकरण या सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में मांसपेशियों को तानने और सिकोड़ने के साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करने वाली क्रियाएँ भी होती हैं, जिससे शरीर की थकान मिटती है और शक्ति वापस मिलती है। यह मन और शरीर को तरोताजा करता है, खोई हुई शक्ति की पूर्ति करता है और आध्यात्मिक लाभ भी देता है।
लाभ:
1. योगासनों से भीतरी ग्रंथियाँ बेहतर काम करती हैं और युवावस्था बनाए रखने में मदद करती हैं।
2. योगासनों द्वारा पेट की अच्छी तरह सफाई होती है और पाचन अंग मजबूत होते हैं, जिससे पाचन संबंधी गड़बड़ियाँ नहीं होतीं।
3. योगासन मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं, जिससे मोटापा कम होता है और दुबले-पतले व्यक्ति भी स्वस्थ और मजबूत बनते हैं।
In simple words: योगासन आसान और सबके लिए उपलब्ध हैं। ये हमारे शरीर के अंदरूनी अंगों को अच्छे से काम करने में मदद करते हैं, पाचन को सुधारते हैं और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: नियमित योगासन से शारीरिक लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
Question 5. एक सारणी बनाइए और उसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और खनिज के पोषक तत्वों को लिखिए।
Answer:
| पोषक तत्व | प्रमुख खाद्य पदार्थ |
|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | चावल, इडली, रोटी (गेहूँ, ज्वार, बाजरा), पूरी, कसावा, सामान्य शक्कर, शहद, गुड़, डबलरोटी, भूमिगत कंद (आलू, शकरकंद), मीठे रसीले फल |
| वसा | मक्खन, मूँगफली, घी, वनस्पति तेल (सरसों, मूँगफली), गिरी, माँस से प्राप्त जंतु वसा |
| प्रोटीन | अण्डे, माँस, मछली, दूध, पनीर, चीज़, मूँगफली, दालें, मटर, सोयाबीन |
| खनिज | कैल्शियम: दूध, दही, हरी सब्जियाँ, रागी। लोहा: कलेजी, अण्डा, माँस, मटर, सूखे मेवे, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, गुड़। फास्फोरस: दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियाँ। सल्फर: अण्डे की जर्दी, हरी पत्तेदार सब्जियाँ। आयोडीन: समुद्री भोजन। |
In simple words: यह तालिका हमें दिखाती है कि कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और खनिज जैसे जरूरी पोषक तत्व हमें किन-किन खाद्य पदार्थों से मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: संतुलित आहार के लिए इन सभी पोषक तत्वों को सही मात्रा में लेना आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक पोषक तत्व शरीर के विशिष्ट कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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