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Detailed Chapter 9 चतुर्भुज RBSE Solutions for Class 9 Mathematics
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Class 9 Mathematics Chapter 9 चतुर्भुज RBSE Solutions PDF
Question 1. एक चतुर्भुज के कोण 3 : 5 : 9 : 13 के अनुपात में हैं। इस चतुर्भुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए।
Answer: चतुर्भुज के कोणों का अनुपात 3 : 5 : 9 : 13 दिया गया है।
इन अनुपातों का योग है: \( 3 + 5 + 9 + 13 = 30 \)
हम जानते हैं कि किसी भी चतुर्भुज के सभी आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
अब, प्रत्येक कोण का मान इस प्रकार ज्ञात करेंगे:
पहला कोण \( = \frac { 3 }{ 30 } \times 360^\circ = 3 \times 12^\circ = 36^\circ \)
दूसरा कोण \( = \frac { 5 }{ 30 } \times 360^\circ = 5 \times 12^\circ = 60^\circ \)
तीसरा कोण \( = \frac { 9 }{ 30 } \times 360^\circ = 9 \times 12^\circ = 108^\circ \)
चौथा कोण \( = \frac { 13 }{ 30 } \times 360^\circ = 13 \times 12^\circ = 156^\circ \)
अतः, चतुर्भुज के कोण 36°, 60°, 108°, और 156° हैं। यह एक महत्वपूर्ण ज्यामितीय गुण है जो सभी चतुर्भुजों पर लागू होता है।
In simple words: पहले सभी अनुपातों को जोड़ें। फिर, प्रत्येक अनुपात को कुल योग से भाग देकर और 360° से गुणा करके प्रत्येक कोण का मान ज्ञात करें, क्योंकि चतुर्भुज के सभी कोणों का योग 360° होता है।
🎯 Exam Tip: अनुपात वाले प्रश्नों में, पहले अनुपातों का योग ज्ञात करें और फिर कुल मान (यहां 360°) को उस योग से विभाजित करके प्रत्येक हिस्से का मान निकालें।
Question 2. एक समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु O पर प्रतिच्छेद करते हैं जो OA = 3 सेमी और OD = 2 सेमी है तो AC और BD की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
विकर्ण AC और BD एक दूसरे को बिन्दु O पर काटते हैं।
OA = 3 सेमी
OD = 2 सेमी
समान्तर चतुर्भुज का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि इसके विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। "समद्विभाजित करना" का अर्थ है कि वे एक दूसरे को दो बराबर भागों में बांटते हैं।
इसका मतलब है कि O, AC का मध्यबिन्दु है और O, BD का भी मध्यबिन्दु है।
अतः, AC की लम्बाई \( = 2 \times OA \)
\( = 2 \times 3 \)
\( = 6 \) सेमी
और, BD की लम्बाई \( = 2 \times OD \)
\( = 2 \times 2 \)
\( = 4 \) सेमी
इसलिए, विकर्ण AC की लम्बाई 6 सेमी और विकर्ण BD की लम्बाई 4 सेमी है। एक समांतर चतुर्भुज के विकर्णों का यह गुण अक्सर ज्यामितीय समस्याओं में उपयोगी होता है।
In simple words: समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को बीच से काटते हैं। इसलिए, विकर्ण AC की लम्बाई OA का दुगुना होगी, और विकर्ण BD की लम्बाई OD का दुगुना होगी। दिए गए मानों को गुणा करके लम्बाई ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: समान्तर चतुर्भुज के गुणों को हमेशा याद रखें, खासकर यह कि इसके विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। यह कई ज्यामितीय प्रश्नों को हल करने की कुंजी है।
Question 4. क्या कोण 110°, 80°, 70° और 95° किसी चतुर्भुज के कोण हो सकते हैं।
Answer: हम जानते हैं कि किसी भी चतुर्भुज के चारों आंतरिक कोणों का योग हमेशा 360° होता है। यह चतुर्भुज का एक मौलिक गुण है।
दिए गए कोणों का योग ज्ञात करते हैं:
कोणों का योग \( = 110^\circ + 80^\circ + 70^\circ + 95^\circ \)
\( = 355^\circ \)
चूँकि इन कोणों का योग 355° है, जो 360° के बराबर नहीं है, अतः ये कोण किसी चतुर्भुज के कोण नहीं हो सकते हैं। यदि योग 360° से कम या ज्यादा होता है, तो वह एक वैध चतुर्भुज नहीं हो सकता।
In simple words: सभी दिए गए कोणों को जोड़ें। यदि उनका योग 360° आता है, तो वे चतुर्भुज के कोण हो सकते हैं। यदि नहीं, तो वे नहीं हो सकते, क्योंकि एक चतुर्भुज के कोणों का कुल योग हमेशा 360° होता है।
🎯 Exam Tip: चतुर्भुज के कोणों का योग 360° होता है। इस नियम का उपयोग करके यह जांचें कि क्या कोणों का दिया गया सेट एक वैध चतुर्भुज बना सकता है।
Question 5. क्या किसी चतुर्भुज के सभी कोण अधिककोण हो सकते हैं? अपने उत्तर के लिए कारण दीजिए।
Answer: नहीं, किसी चतुर्भुज के सभी कोण अधिककोण नहीं हो सकते हैं। अधिककोण वह कोण होता है जो 90° से अधिक और 180° से कम होता है।
आइए हम यह मान लें कि चतुर्भुज के सभी चार कोण अधिककोण हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक कोण 90° से अधिक होगा।
उदाहरण के लिए, यदि हम मान लें कि प्रत्येक कोण 91° है (जो एक अधिककोण है क्योंकि यह 90° से अधिक और 180° से कम है):
चारों कोणों का योग \( = 91^\circ + 91^\circ + 91^\circ + 91^\circ \)
\( = 4 \times 91^\circ \)
\( = 364^\circ \)
जैसा कि हमने प्रश्न 4 में देखा, किसी भी चतुर्भुज के सभी आंतरिक कोणों का योग हमेशा 360° होता है।
यहां, हमारे द्वारा माने गए अधिककोणों का योग 364° है, जो 360° से अधिक है। इसलिए, यह संभव नहीं है कि किसी चतुर्भुज के सभी कोण अधिककोण हों।
In simple words: नहीं, चतुर्भुज के सभी कोण अधिककोण नहीं हो सकते। यदि हर कोण 90° से बड़ा होगा, तो चार कोणों का कुल योग 360° से ज्यादा हो जाएगा, जबकि यह हमेशा 360° होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: अधिककोण की परिभाषा (90° और 180° के बीच) और चतुर्भुज के कोणों के योग के नियम (360°) को ध्यान में रखें। इससे ऐसे प्रश्नों को हल करना आसान हो जाता है।
Question 6. एक चतुर्भुज का एक कोण 108° है तथा अन्य तीनों कोण बराबर हैं। तीनों बराबर कोणों में से प्रत्येक को ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें दिया गया है कि चतुर्भुज का एक कोण 108° है।
अन्य तीनों कोण बराबर हैं। मान लीजिए कि प्रत्येक बराबर कोण \( x \) डिग्री है।
हम जानते हैं कि किसी भी चतुर्भुज के सभी आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
तो, हम समीकरण बना सकते हैं:
\( 108^\circ + x + x + x = 360^\circ \)
\( 108^\circ + 3x = 360^\circ \)
अब, \( 108^\circ \) को समीकरण के दूसरी तरफ ले जाएं:
\( 3x = 360^\circ - 108^\circ \)
\( 3x = 252^\circ \)
अब, \( x \) का मान ज्ञात करने के लिए 252 को 3 से भाग दें:
\( x = \frac { 252^\circ }{ 3 } \)
\( x = 84^\circ \)
इसलिए, अन्य तीनों बराबर कोणों में से प्रत्येक का मान 84° है। यह सरल बीजगणित का उपयोग करके ज्यामितीय समस्याओं को हल करने का एक अच्छा उदाहरण है।
In simple words: एक कोण दिया गया है। बाकी तीन कोणों को 'x' मानें। सभी कोणों को जोड़कर 360° के बराबर रखें और 'x' का मान ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, अज्ञात कोणों को एक चर (जैसे \( x \)) से दर्शाएं और चतुर्भुज के कोणों के योग के नियम (360°) का उपयोग करके समीकरण बनाएं, फिर उसे हल करें।
Question 7. समलम्ब ABCD में, \( \angle A = \angle B = 45^\circ \) तथा AB||CD है। इस समलम्ब चतुर्भुज के अन्य कोणों (∠C और ∠D) को ज्ञात कीजिए।
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज है जिसमें AB || CD है, और \( \angle A = 45^\circ \), \( \angle B = 45^\circ \) है। समलम्ब चतुर्भुज एक ऐसा चतुर्भुज होता है जिसमें भुजाओं का केवल एक युग्म समांतर होता है।
चूँकि AB || CD है और AD एक तिर्यक रेखा है, तो समांतर रेखाओं के एक ही ओर बने अंतःकोणों का योग 180° होता है।
तो, \( \angle A + \angle D = 180^\circ \)
\( 45^\circ + \angle D = 180^\circ \)
\( \angle D = 180^\circ - 45^\circ \)
\( \angle D = 135^\circ \)
इसी प्रकार, चूँकि AB || CD है और BC एक तिर्यक रेखा है, तो
\( \angle B + \angle C = 180^\circ \)
\( 45^\circ + \angle C = 180^\circ \)
\( \angle C = 180^\circ - 45^\circ \)
\( \angle C = 135^\circ \)
अतः, समलम्ब चतुर्भुज के अन्य कोण \( \angle C = 135^\circ \) और \( \angle D = 135^\circ \) हैं।
In simple words: समलम्ब चतुर्भुज में, समांतर भुजाओं को काटने वाली रेखाओं के एक ही तरफ के कोणों का योग 180° होता है। इस नियम का उपयोग करके, दिए गए कोणों की मदद से बचे हुए कोणों का मान ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखाओं से बनने वाले अंतःकोणों और संगत कोणों के गुणों को हमेशा याद रखें। यह समलम्ब चतुर्भुज जैसे प्रश्नों में बहुत उपयोगी होता है।
Question 8. एक समांतर चतुर्भुज के एक अधिककोण के शीर्ष से खींचे गए उस समांतर चतुर्भुज के दो शीर्षलंबों के बीच का कोण 60° है। इस समांतर चतुर्भुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए।
Answer:
माना कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। अधिककोण के शीर्ष D से भुजा AB पर लम्ब DM खींचा गया है (यानी DM ⊥ AB) और शीर्ष B से भुजा AD पर लम्ब BN खींचा गया है (यानी BN ⊥ AD)। DM और BN जिस बिंदु पर प्रतिच्छेद करते हैं उसे P माना गया है।
हमें दिया गया है कि इन दोनों शीर्षलंबों के बीच का कोण 60° है, जिसका अर्थ है \( \angle MPN = 60^\circ \)।
चूँकि \( \angle MPN \) और \( \angle NPD \) शीर्षलंबों के प्रतिच्छेदन से बने हैं, तो \( \angle NPD = \angle MPN = 60^\circ \) (शीर्षाभिमुख कोण)।
अब चतुर्भुज AMPN को देखें (यहां M भुजा AB पर है और N भुजा AD पर है, P इनके प्रतिच्छेदन पर है)।
\( \angle AMP = 90^\circ \) (चूँकि DM ⊥ AB)
\( \angle ANP = 90^\circ \) (चूँकि BN ⊥ AD)
चतुर्भुज AMPN के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
\( \angle A + \angle AMP + \angle MPN + \angle ANP = 360^\circ \)
\( \angle A + 90^\circ + 60^\circ + 90^\circ = 360^\circ \)
\( \angle A + 240^\circ = 360^\circ \)
\( \angle A = 360^\circ - 240^\circ \)
\( \angle A = 120^\circ \)
समान्तर चतुर्भुज में, सम्मुख कोण बराबर होते हैं, और आसन्न कोणों का योग 180° होता है।
तो, \( \angle C = \angle A = 120^\circ \)
और \( \angle B + \angle A = 180^\circ \)
\( \angle B + 120^\circ = 180^\circ \)
\( \angle B = 180^\circ - 120^\circ \)
\( \angle B = 60^\circ \)
इसी प्रकार, \( \angle D = \angle B = 60^\circ \)
अतः, समांतर चतुर्भुज के कोण हैं: 120°, 60°, 120°, 60°। शीर्षाभिमुख कोण वे कोण होते हैं जो दो प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनते हैं और एक दूसरे के विपरीत होते हैं, और वे हमेशा बराबर होते हैं।
In simple words: शीर्षलंबों के बीच के कोण से एक छोटे चतुर्भुज (AMPN) के कोणों का उपयोग करके \( \angle A \) ज्ञात करें। फिर, समांतर चतुर्भुज के गुणों (सम्मुख कोण बराबर होते हैं, आसन्न कोणों का योग 180° होता है) का उपयोग करके बाकी कोणों को ज्ञात करें।
🎯 Exam Tip: जब भी शीर्षलंब या कोण दिए हों, तो छोटे चतुर्भुजों या त्रिभुजों पर ध्यान केंद्रित करें। शीर्षाभिमुख कोण और समांतर चतुर्भुज के गुणों का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 9. समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC पर बिन्दु E और F इस प्रकार स्थित हैं कि AE = CF है। दर्शाइए कि BFDE एक समांतर चतुर्भुज है।
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, और विकर्ण AC पर बिन्दु E और F इस प्रकार स्थित हैं कि AE = CF है।
हमें BFDE को एक समान्तर चतुर्भुज सिद्ध करना है।
दिया है: AE = CF
दोनों तरफ EF जोड़ने पर:
\( AE + EF = CF + EF \)
\( AF = CE \) ... (1)
चूँकि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, तो AB || CD और AC एक तिर्यक रेखा है।
इसलिए, \( \angle BAC = \angle DCA \) (एकान्तर कोण)
या हम इसे \( \angle BAF = \angle DCE \) भी कह सकते हैं ... (2)
अब, त्रिभुज \( \triangle ABF \) और \( \triangle CDE \) में:
1. \( AB = CD \) (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं)
2. \( \angle BAF = \angle DCE \) (समीकरण (2) से)
3. \( AF = CE \) (समीकरण (1) से)
तो, SAS सर्वांगसमता नियम से, \( \triangle ABF \cong \triangle CDE \)। सर्वांगसमता का अर्थ है कि त्रिभुज आकार और माप में बिल्कुल समान हैं।
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (CPCT) से:
\( BF = DE \)
और \( \angle AFB = \angle CED \)
ये कोण ( \( \angle AFB \) और \( \angle CED \) ) भी एकान्तर कोण हैं। यदि एकान्तर कोण बराबर होते हैं, तो रेखाएँ समांतर होती हैं।
इसलिए, DE || FB
चूँकि चतुर्भुज BFDE में सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (BF और DE) बराबर और समांतर दोनों हैं, तो यह एक समान्तर चतुर्भुज है। एक चतुर्भुज को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करने का यह एक सामान्य तरीका है।
इति सिद्धम्।
In simple words: पहले सिद्ध करें कि \( AF = CE \)। फिर, दो त्रिभुजों (ABF और CDE) को सर्वांगसम सिद्ध करें। सर्वांगसमता से, आप दिखा सकते हैं कि \( BF = DE \) और \( BF || DE \)। यदि एक चतुर्भुज में भुजाओं का एक युग्म बराबर और समांतर हो, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
🎯 Exam Tip: ज्यामितीय सिद्धियों में, सर्वांगसम त्रिभुजों की पहचान करना और CPCT का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। समांतर चतुर्भुज की परिभाषा के लिए एक युग्म भुजाओं का बराबर और समांतर होना पर्याप्त है।
Question 10. समान्तर चतुर्भुज ABCD में, AQ तथा CP क्रमशः \( \angle A \) तथा \( \angle C \) के अर्धक हैं। दर्शाइए कि APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
AQ, \( \angle A \) का अर्धक है और CP, \( \angle C \) का अर्धक है।
समान्तर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते हैं, इसलिए:
\( \angle A = \angle C \)
अब, दोनों पक्षों को \( \frac {1}{2} \) से गुणा करने पर:
\( \frac {1}{2} \angle A = \frac {1}{2} \angle C \)
चूँकि AQ, \( \angle A \) का अर्धक है और CP, \( \angle C \) का अर्धक है, तो:
\( \angle 1 = \angle 2 \) ... (1) (यहाँ \( \angle 1 = \angle QAB \) और \( \angle 2 = \angle PCD \))
चूँकि AB || CD है और CP एक तिर्यक रेखा है, तो एकान्तर कोण बराबर होते हैं:
\( \angle 3 = \angle 2 \) ... (2) (यहाँ \( \angle 3 = \angle APC \))
समीकरण (1) और (2) से, हम देखते हैं कि:
\( \angle 1 = \angle 3 \)
यहाँ, \( \angle 1 \) और \( \angle 3 \) रेखा AB और रेखा PC को तिर्यक रेखा AP द्वारा काटने पर बनने वाले संगत कोण हैं। यदि संगत कोण बराबर हों, तो रेखाएँ समांतर होती हैं।
\( \implies AQ || PC \)
इसके अलावा, APCQ में, AP || QC है क्योंकि AB || DC है और P और Q इन भुजाओं पर स्थित हैं।
चूँकि चतुर्भुज APCQ में भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं (AQ || PC और AP || QC), अतः APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है। कोणों का अर्धक एक रेखा को दो बराबर कोणों में बांटता है, जो ज्यामितीय सिद्धियों में बहुत उपयोगी होता है।
इति सिद्धम्।
In simple words: समांतर चतुर्भुज में सम्मुख कोण बराबर होते हैं। कोण अर्धकों का उपयोग करके दिखाएं कि \( \angle 1 = \angle 2 \)। फिर, समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखाओं के गुणों का उपयोग करके दिखाएं कि \( \angle 3 = \angle 2 \)। इससे \( \angle 1 = \angle 3 \) सिद्ध होगा, जिसका अर्थ है AQ || PC। चूंकि AP || QC भी है, तो APCQ एक समांतर चतुर्भुज है।
🎯 Exam Tip: समांतर चतुर्भुज के गुणों (जैसे सम्मुख कोण बराबर होना) और समांतर रेखाओं के गुणों (जैसे एकान्तर और संगत कोण बराबर होना) का सही ढंग से उपयोग करें। कोण अर्धकों का उपयोग अक्सर समांतर रेखाएं सिद्ध करने में होता है।
Question 11. समान्तर चतुर्भुज हैं। सिद्ध कीजिए कि CDFE समान्तर चतुर्भुज हैं।
Answer: हम मान लेते हैं कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है और AFEB भी एक समान्तर चतुर्भुज है, जैसा कि अक्सर ऐसे प्रश्नों में सन्दर्भ दिया जाता है।
चूँकि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, तो इसकी सम्मुख भुजाएँ समांतर और बराबर होंगी:
AB || CD ... (1)
AB = CD ... (2)
चूँकि AFEB एक समान्तर चतुर्भुज है, तो इसकी सम्मुख भुजाएँ भी समांतर और बराबर होंगी:
AB || FE ... (3)
AB = FE ... (4)
समीकरण (1) और (3) से, चूँकि AB, CD और FE दोनों के समांतर है, तो CD || FE होगा।
समीकरण (2) और (4) से, चूँकि AB, CD और FE दोनों के बराबर है, तो CD = FE होगा।
अतः, चतुर्भुज CDFE में, सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (CD और FE) समांतर और बराबर है।
प्रमेय 9.8 के अनुसार, यदि किसी चतुर्भुज में सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर और समांतर हो, तो वह एक समान्तर चतुर्भुज होता है।
इसलिए, CDFE एक समान्तर चतुर्भुज है। यह एक महत्वपूर्ण प्रमेय है जो चतुर्भुज के प्रकारों को पहचानने में मदद करता है।
इति सिद्धम्।
In simple words: अगर ABCD और AFEB दोनों समांतर चतुर्भुज हैं, तो इसका मतलब है कि AB, CD और FE के समांतर और बराबर है। इसलिए, CD और FE भी आपस में समांतर और बराबर होंगे। अगर चतुर्भुज CDFE में एक जोड़ी भुजाएं समांतर और बराबर हैं, तो वह भी एक समांतर चतुर्भुज होगा।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एक चतुर्भुज को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करने के लिए, आपको केवल सम्मुख भुजाओं के एक युग्म को बराबर और समांतर दिखाने की आवश्यकता है, न कि दोनों युग्मों को।
Question 12. ABCD एक समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण BD पर A और C से डाले गये लम्ब क्रमशः AP और CQ हैं। सिद्ध कीजिए कि AP = CQ
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। विकर्ण BD पर शीर्ष A से लम्ब AP और शीर्ष C से लम्ब CQ डाले गए हैं।
हमें सिद्ध करना है कि AP = CQ।
उपपत्ति: त्रिभुज \( \triangle APB \) और \( \triangle CQD \) पर विचार करें।
1. \( AB = CD \) (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं)
2. \( \angle APB = \angle CQD = 90^\circ \) (चूँकि AP और CQ लम्ब हैं)
3. चूँकि AB || CD है और BD एक तिर्यक रेखा है, तो एकान्तर कोण बराबर होंगे:
\( \angle ABD = \angle CDB \)
हम इसे \( \angle ABP = \angle CDQ \) भी लिख सकते हैं।
अब, \( \triangle APB \) और \( \triangle CQD \) में:
\( \angle APB = \angle CQD \) (प्रत्येक 90°)
\( \angle ABP = \angle CDQ \) (एकान्तर कोण)
\( AB = CD \) (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)
अतः, AAS (कोण-कोण-भुजा) सर्वांगसमता नियम से, \( \triangle APB \cong \triangle CQD \)।
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (CPCT) से, \( AP = CQ \)।
इति सिद्धम्। यह सिद्ध करता है कि समांतर चतुर्भुज में विकर्ण पर डाले गए लंबों की लंबाई बराबर होती है।
In simple words: दो त्रिभुजों (APB और CQD) को सर्वांगसम सिद्ध करें। इसके लिए, समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं (AB=CD), लंब कोणों (90°) और एकान्तर कोणों (∠ABP=∠CDQ) का उपयोग करें। एक बार त्रिभुज सर्वांगसम हो जाएं, तो उनकी संगत भुजाएं (AP और CQ) बराबर होंगी।
🎯 Exam Tip: ज्यामितीय सिद्धियों में, सर्वांगसम त्रिभुजों की पहचान करना और AAS (कोण-कोण-भुजा) जैसे सर्वांगसमता नियमों को लागू करना महत्वपूर्ण है। हमेशा सुनिश्चित करें कि आप संगत भागों को सही ढंग से मिलाते हैं।
Question 13. चित्र में, ABCD एक चतुर्भुज है। जिसमें AB || DC और AD = BC तो सिद्ध कीजिए कि \( \angle A = \angle B \)
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें AB || DC और AD = BC है। हमें सिद्ध करना है कि \( \angle A = \angle B \)।
**रचना:** AB को आगे बढ़ाएँ और बिन्दु C से AD के समांतर एक रेखा CE खींचें जो बढ़ाई गई रेखा AB को बिन्दु E पर मिलती है।
**उपपत्ति:**
चूँकि AB || DC (दिया है) और CE || AD (रचना से), तो चतुर्भुज AECD एक समान्तर चतुर्भुज है।
समान्तर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए:
\( AD = CE \) ... (1)
हमें दिया गया है कि \( AD = BC \) ... (2)
समीकरण (1) और (2) से, हम पाते हैं:
\( BC = CE \)
अब, \( \triangle BCE \) में, चूँकि \( BC = CE \) है, तो बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण भी बराबर होंगे:
\( \angle CBE = \angle CEB \) ... (3)
चूँकि AECD एक समान्तर चतुर्भुज है और AE एक तिर्यक रेखा है, तो संगत कोणों का योग 180° होता है (या क्रमागत अंतःकोणों का योग 180° होता है):
\( \angle A + \angle E = 180^\circ \) ... (4)
रेखा BE पर \( \angle B \) और \( \angle CBE \) एक रैखिक युग्म बनाते हैं, इसलिए उनका योग 180° होता है:
\( \angle B + \angle CBE = 180^\circ \) ... (5)
समीकरण (3) को समीकरण (5) में प्रतिस्थापित करने पर:
\( \angle B + \angle CEB = 180^\circ \) ... (6)
समीकरण (4) और (6) की तुलना करने पर, हम पाते हैं:
\( \angle A + \angle E = \angle B + \angle CEB \)
चूँकि \( \angle E = \angle CEB \) (समीकरण (3) से), तो
\( \angle A = \angle B \)
इति सिद्धम्। यह समलंब चतुर्भुज का एक महत्वपूर्ण गुण है, जिसे समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज भी कहते हैं, जिसमें आधार कोण हमेशा बराबर होते हैं।
In simple words: AD के समांतर एक रेखा CE खींचें। इससे AECD एक समांतर चतुर्भुज बन जाएगा। फिर, त्रिभुज BCE में BC = CE दिखाएं, जिससे \( \angle CBE = \angle CEB \) होगा। अब, कोणों के रैखिक युग्म और समांतर चतुर्भुज के गुणों का उपयोग करके \( \angle A = \angle B \) सिद्ध करें।
🎯 Exam Tip: समलंब चतुर्भुज वाले प्रश्नों में, अतिरिक्त रेखाओं का निर्माण (जैसे यहां CE || AD) अक्सर एक समांतर चतुर्भुज या त्रिभुज बनाने में मदद करता है, जिससे सिद्ध करना आसान हो जाता है। रैखिक युग्म और समांतर चतुर्भुज के गुणों को सही ढंग से लागू करें।
Question 14. दिए गए चित्र में, ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। P और Q क्रमशः सम्मुख भुजाओं AB और CD के मध्य बिन्दु हैं। सिद्ध कीजिए कि PRQS एक समान्तर चतुर्भुज है।
Answer:
हमें दिया गया है कि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। P भुजा AB का मध्य बिन्दु है और Q भुजा CD का मध्य बिन्दु है। हमें सिद्ध करना है कि PRQS एक समान्तर चतुर्भुज है, जहाँ S रेखाखंड AQ और DP का प्रतिच्छेदन बिन्दु है, और R रेखाखंड CQ और BP का प्रतिच्छेदन बिन्दु है।
**उपपत्ति:**
चूँकि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, तो \( AB || CD \) और \( AB = CD \)।
P भुजा AB का मध्य बिन्दु है, तो \( AP = PB = \frac {1}{2} AB \)।
Q भुजा CD का मध्य बिन्दु है, तो \( CQ = QD = \frac {1}{2} CD \)।
क्योंकि \( AB = CD \), तो \( \frac {1}{2} AB = \frac {1}{2} CD \)।
\( \implies AP = CQ \)
अब, चतुर्भुज APCQ पर विचार करें:
\( AP || CQ \) (चूँकि AB || CD है)
\( AP = CQ \) (जैसा कि ऊपर सिद्ध किया गया है)
चूँकि APCQ में सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (AP और CQ) बराबर और समांतर है, अतः APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
\( \implies AQ || PC \)
इस समांतरता का अर्थ है कि रेखाखंड AQ और PC भी समांतर होंगे। इसलिए, रेखाखंड SQ, रेखाखंड PR के समांतर होगा:
\( SQ || PR \) ... (1)
इसी प्रकार, चतुर्भुज PBQD पर विचार करें:
\( PB || DQ \) (चूँकि AB || CD है)
\( PB = DQ \) (जैसा कि \( \frac {1}{2} AB = \frac {1}{2} CD \) से सिद्ध होता है)
चूँकि PBQD में सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (PB और DQ) बराबर और समांतर है, अतः PBQD एक समान्तर चतुर्भुज है।
\( \implies PD || BQ \)
इस समांतरता का अर्थ है कि रेखाखंड PD और BQ भी समांतर होंगे। इसलिए, रेखाखंड SP, रेखाखंड QR के समांतर होगा:
\( SP || QR \) ... (2)
समीकरण (1) और (2) से, चतुर्भुज PRQS में सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं (SQ || PR और SP || QR)।
अतः, PRQS एक समान्तर चतुर्भुज है। यह एक मानक ज्यामितीय प्रमेय है जो मध्यबिंदुओं और समांतर रेखाओं के बीच के संबंधों को दर्शाता है।
इति सिद्धम्।
In simple words: पहले यह सिद्ध करें कि APCQ एक समांतर चतुर्भुज है, जिससे \( AQ || PC \) सिद्ध होगा, यानी \( SQ || PR \)। फिर, PBQD को एक समांतर चतुर्भुज सिद्ध करें, जिससे \( PD || BQ \) सिद्ध होगा, यानी \( SP || QR \)। चूंकि PRQS में सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, तो PRQS एक समांतर चतुर्भुज है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले छोटे चतुर्भुजों (जैसे APCQ और PBQD) को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करें, ताकि उनकी समांतर भुजाओं का उपयोग मुख्य चतुर्भुज (PRQS) की समांतरता सिद्ध करने के लिए किया जा सके। मध्यबिन्दु प्रमेय अक्सर इसमें सहायक होता है।
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