NCERT Solutions for Class 8 Social Science: Chapter 24 राष्ट्रीय आन्दोलन
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Practice Class 8 Social Science Solutions: Chapter 24 राष्ट्रीय आन्दोलन
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Chapter 24 राष्ट्रीय आन्दोलन
पाठगत प्रश्न
गतिविधि (पृष्ठ संख्या 157)
Question 1. हिन्दुस्तान की स्वतन्त्रता के बाद दुनिया के किन देशों से अंग्रेजों का राज खत्म हो गया? एक सूची बनाइये। अपने अध्यापक की मदद लीजिए।
Answer: हिन्दुस्तान के आजाद होने के बाद दुनिया के इन देशों से अंग्रेजों का शासन खत्म हो गया। नीचे ऐसे देशों की एक सूची दी गई है जहाँ से ब्रिटिश राज समाप्त हुआ:
1. बर्मा (म्यांमार)
2. लंका
3. मलाया
4. सूडान
5. घाना
6. संयुक्त अरब गणराज्य
7. सोमालिया
8. नाइजीरिया
9. तंजानिया
10. युगांडा
11. केन्या
12. अंजीबार
13. न्यासालैण्ड
14. जाम्बिया
15. गाम्बिया
16. मॉरिशस
17. गुयाना
18. बोत्सवाना
19. लिसोथो
20. बारबाडोस
21. ग्रेनाडा
In simple words: भारत की आजादी के बाद, दुनिया के कई देशों ने ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाई। इस सूची में बर्मा, लंका, सूडान, और नाइजीरिया जैसे देश शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी घटना के बाद के प्रभावों पर प्रश्न हो, तो सभी प्रमुख परिणामों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।
पढ़ें और बतायें (पृष्ठ संख्या 159)
Question 2. बंगाल विभाजन (1905 ई.) का सूरत अधिवेशन (1907 ई.) पर क्या असर दिखाई दिया?
Answer: 1905 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन किया था, जिसका कांग्रेस के सूरत अधिवेशन (1907 ई.) पर बड़ा असर पड़ा। इसके बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई। एक समूह कांग्रेस की पुरानी नीति से खुश नहीं था; वे चाहते थे कि सरकार के खिलाफ हड़ताल और अंग्रेजों का आर्थिक बहिष्कार जैसे मजबूत कदम उठाए जाएं। इस समूह को 'गरम दल' कहा गया। इस तरह, सूरत अधिवेशन में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गई। यह विभाजन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है।
In simple words: बंगाल के बंटवारे के बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई। एक समूह 'गरम दल' बन गया जो अंग्रेजों के खिलाफ कड़े कदम उठाना चाहता था।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक घटना के प्रभावों को बताते समय, उसके कारण और मुख्य परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
गतिविधि (पृष्ठ संख्या 164)
Question 3. अपने क्षेत्र में प्रजामण्डल में शामिल लोगों के नाम पता करो और जानो कि यहाँ प्रजामण्डल किस तरह से काम कर रहा था ?
Answer: राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रजामण्डल आंदोलनों में शामिल हुए कुछ खास लोगों के नाम नीचे दिए गए हैं:
| क्षेत्र | प्रमुख लोग |
|---|---|
| 1. मेवाड़ | भंवरलाल सर्राफ, माणिक्यलाल वर्मा, भूरेलाल बया, रमेशचन्द्र व्यास आदि। |
| 2. मारवाड़ | जयनारायण व्यास, चांदमल सुराणा, आनन्दराज सुराणा, रणछोड़दास गट्टानी, मथुरादास माथुर, इन्द्रमण जैन। |
| 3. बीकानेर | मघाराम वैद्य, स्वामी गोपालदास, वरदयाल, सत्यनारायण सर्राफ। |
| 4. जैसलमेर | सामरमल गोपा, मीठालाल व्यास, शिवशंकर गोपा, मदनलाल पुरोहित, नाचन्द जोशी, रघुनाथसिंह मेहता। |
| 5. कोटा | नयनुराम शर्मा, अभिन्न हरि, शम्भुदयान सक्सेना, वेणी माधव, नाथूलाल जैन, मोतीलाल जैन। |
| 6. बूंदी | कान्तिलाल, नित्यानन्द सागर, हरिमोहन माथुर, ऋषिदत्त मेहता, शृंगसुन्दर शर्मा। |
| 7. जयपुर | अर्जुनलाल सेठी, जमनालाल बजाज, पण्डित हीरालाल शास्त्री, कपूरचन्द पाटनी, चिरंजीलाल अग्रवाल, गुलाबचन्द कासलीवाल, दौलतमल भण्डारी। |
| 8. अलवर | हरिनारायण शर्मा, कुंज बिहारीलाल मोदी, मास्टर भोला नाथ, भवानीशंकर शर्मा। |
| 9. बांसवाड़ा | भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी, रामलाल, राधावल्लभ सोमानी, रतनलाल। |
| 10. डूंगरपुर | भोगीलाल पंड्या, हरिदेव जोशी, गौरीशंकर उपाध्याय, भाभाई, शिवलाल कोटडिया। |
| 11. सिरोही | गोकुलभाई भट्ट, जवाहरमल सिंघी। |
In simple words: राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में प्रजामण्डल बनाने और चलाने में कई नेताओं ने बड़ी भूमिका निभाई। इन संगठनों ने लोगों के हक़ के लिए काम किया और अंग्रेज़ों के खिलाफ आवाज़ उठाई।
🎯 Exam Tip: जब भी प्रमुख नेताओं या व्यक्तियों के नाम लिखने हों, तो उनके संबंधित क्षेत्र या आंदोलन का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण होता है।
जयपुर राज्य प्रजामण्डल के प्रमुख नेताओं में अर्जुनलाल सेठी, जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री, कपूरचन्द पाटनी, चिरंजीलाल अग्रवाल, गुलाबचन्द कासलीवाल, दौलतमल भण्डारी आदि बहुत खास थे। प्रजामण्डल का मुख्य मकसद राज्य में ज़िम्मेदार सरकार बनाना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना था। जब जयपुर सरकार ने जमनालाल बजाज के जयपुर में आने पर रोक लगा दी, तो जयपुर प्रजामण्डल ने सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। आखिर में, सरकार और प्रजामण्डल के बीच समझौता हो गया। आज़ाद मोर्चे ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और उनके कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रजामण्डल के प्रयासों से जयपुर में एक ज़िम्मेदार सरकार बन पाई।
आओ करके देखें (पृष्ठ संख्या 166)
Question 4. भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में इन क्रान्तिकारियों ( सुखदेव, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आजाद, चापेकर बन्धु) के योगदान के बारे में जानकारी संकलित कीजिए।
Answer: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इन क्रांतिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
(1) सुखदेव: सुखदेव का जन्म 1927 ई. में हुआ था। वह भगत सिंह के बचपन के दोस्त थे और 'नौजवान भारत सेना' के संस्थापक भी थे। उन्हें 15 अप्रैल को लाहौर बम फैक्ट्री कांड में पकड़ा गया। आखिर में, 23 मार्च, 1931 को सुखदेव को अपने साथियों भगत सिंह और राजगुरु के साथ फाँसी दे दी गई। यह उनकी देश के प्रति निष्ठा का प्रतीक था।
(2) राजगुरु: राजगुरु का जन्म 1909 में पुणे के पास खेड़ा गाँव में हुआ था। वह पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक साण्डर्स को गोली मारी थी। 23 मार्च, 1931 को राजगुरु को भगत सिंह और सुखदेव के साथ फाँसी पर चढ़ा दिया गया।
(3) रामप्रसाद बिस्मिल: क्रांतिकारियों को हथियार खरीदने के लिए पैसों की ज़रूरत थी, इसलिए उन्होंने सरकारी खजाना लूटने का प्लान बनाया। 9 अगस्त, 1925 को रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास काकोरी नाम की जगह पर सरकारी खजाना लूटा। इस घटना को 'काकोरी केस' कहा जाता है। सरकारी खजाना दस मिनट में ही लूट लिया गया, लेकिन बाद में क्रांतिकारियों को पकड़ लिया गया। रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी की सज़ा मिली। उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
(4) चन्द्रशेखर आजाद: पुलिस ने चंद्रशेखर आज़ाद को घेर लिया और उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। ऐसे में, उन्होंने खुद को गोली मारकर अपने जीवन का अंत कर लिया, ताकि वे अंग्रेजों के हाथ न आएं। उनका बलिदान स्वतंत्रता संग्राम में एक महान अध्याय है।
(5) चापेकर बन्धु: दामोदर चापेकर और बालकृष्ण चापेकर महाराष्ट्र के जाने-माने क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1893 में 'हिन्द धर्म संरक्षिणी सभा' बनाई। चापेकर भाइयों ने महाराष्ट्र के लोगों में देश के लिए प्यार और जोश भरा, और 'तरुण समाज' नाम की एक गुप्त संस्था भी बनाई। पुणे के कमिश्नर रैण्ड अपने बुरे व्यवहार के लिए बदनाम थे। चापेकर भाइयों ने रैण्ड और उनके सहायक आय की हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस ने चापेकर भाइयों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें फाँसी की सज़ा दी गई।
In simple words: सुखदेव, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और चापेकर बंधुओं जैसे क्रांतिकारियों ने भारत की आजादी के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। उन्होंने बम धमाके किए, सरकारी खजाना लूटा और अंग्रेजों के अधिकारियों को मारकर अपने देश के लिए संघर्ष किया।
🎯 Exam Tip: क्रांतिकारियों के योगदान के बारे में लिखते समय, उनके जन्म स्थान, प्रमुख गतिविधियों और शहादत की तारीखों को शामिल करना याद रखें।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न एक व दो के सही उत्तर कोष्ठक में लिखें
Question 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई ?
(अ) 1885
(ब) 1919
(स) 1942
(द) 1925
Answer: (अ) 1885
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। यह भारत में राजनीतिक आंदोलनों की शुरुआत का एक बड़ा कदम था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संस्थाओं और घटनाओं की स्थापना या शुरुआत की तारीखें हमेशा याद रखें, क्योंकि ये अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछी जाती हैं।
Question 2. प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कब हुआ?
(अ) 1997
(ब) 1857
(स) 1947
(द) 1952
Answer: (ब) 1857
In simple words: भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हुआ था। इसे सिपाही विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय इतिहास की प्रमुख लड़ाइयों और विद्रोहों की तारीखें और उनके नाम याद रखना बहुत ज़रूरी है।
Question 3. 'चेतावणी रा चुंगट्या' किसकी रचना है?
Answer: 'चेतावणी रा चुंगट्या' केसरीसिंह बारहठ ने लिखी थी। यह 13 सोरठों का एक समूह था जो उन्होंने महाराणा फतहसिंह को दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए लिखा था।
In simple words: 'चेतावणी रा चुंगट्या' केसरीसिंह बारहठ ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों और उनके लेखकों के नाम याद रखें, खासकर जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े हों।
Question 5. रौलेट एक्ट क्या था?
Answer: ब्रिटिश सरकार ने 1919 में 'रौलेट एक्ट' नाम का एक कानून बनाया था। इस कानून के तहत, सरकार किसी भी व्यक्ति को, जिसने उसका विरोध किया हो, बिना किसी सुनवाई के लंबे समय तक जेल में डाल सकती थी। इस एक्ट का मकसद राजनीतिक गतिविधियों को रोकना था।
In simple words: रौलेट एक्ट 1919 में बना एक कड़ा ब्रिटिश कानून था, जो सरकार को बिना सुनवाई के किसी को भी जेल भेजने की ताक़त देता था।
🎯 Exam Tip: रौलेट एक्ट जैसे कानूनों के प्रावधानों और उनके पीछे के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 6. लाल, बाल, पाल के नाम से कौन प्रसिद्ध हुए? नाम लिखें।
Answer: 'लाल, बाल, पाल' नाम से तीन प्रमुख नेता प्रसिद्ध हुए: पंजाब से लाला लाजपत राय ('लाल'), महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक ('बाल') और बंगाल से विपिन चंद्र पाल ('पाल')। ये तीनों नेता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गरम दल के मुख्य चेहरे थे।
In simple words: लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल को 'लाल, बाल, पाल' कहा जाता था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख नेताओं के उपनामों और उनके वास्तविक नामों को सही ढंग से याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड का वर्णन कीजिए।
Answer: 13 अप्रैल, 1919 को रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक बड़ी सभा बुलाई गई थी। इस सभा को अंग्रेज जनरल डायर ने ख़त्म करने का आदेश दिया। लेकिन आदेश देने से पहले ही, ब्रिटिश सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दीं, जिससे हजारों बेगुनाह लोग मारे गए। यह घटना भारतीय इतिहास में एक काला अध्याय है। ब्रिटिश सरकार ने बाद में जनरल डायर को इस क्रूर हरकत के लिए इंग्लैंड में सम्मानित भी किया।
In simple words: 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने शांतिपूर्ण सभा पर गोलियां चलवा दीं, जिससे हजारों लोग मारे गए।
🎯 Exam Tip: जलियांवाला बाग हत्याकांड के प्रमुख तथ्य — तारीख, स्थान, मुख्य दोषी (जनरल डायर) और उसके परिणाम — स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 8. सविनय अवज्ञा आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिश सरकार की ज़ालिम नीतियों के कारण पूरे देश में लोगों में गुस्सा भरा हुआ था। इसलिए, 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया गया। गांधीजी चाहते थे कि लोग सरकारी कानूनों का विरोध करें, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से, बिना किसी हिंसा या नफरत के। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अन्यायपूर्ण ब्रिटिश कानूनों को तोड़ना था। पुलिस ने लोगों पर लाठियां चलाईं, लेकिन लोग शांति से लाठियां सहते रहे। उन्होंने न तो पुलिस पर हमला किया और न ही पीछे हटे। वे सिर्फ 'भारत माता की जय' बोलते हुए आगे बढ़ते रहे।
आंदोलन का प्रभाव: इस आंदोलन से पूरे भारत में लोगों में जागरूकता फैल गई। कई देशों के फिल्मकार और पत्रकार भारत आए। उन्होंने दुनिया को बताया कि ब्रिटिश सरकार कैसे लोगों पर अत्याचार कर रही है। अब पूरी दुनिया को पता चल गया कि भारतीय असल में अंग्रेजों को देश से निकालने के लिए लड़ रहे थे।
In simple words: गांधीजी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया, जिसमें लोगों ने अंग्रेजों के कानून तोड़े, लेकिन शांति से। इस आंदोलन ने पूरे देश में जागरूकता बढ़ाई और दुनिया को ब्रिटिश अत्याचारों के बारे में बताया।
🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे बड़े आंदोलनों के कारणों, तरीकों और प्रभावों का उल्लेख करना ज़रूरी है, साथ ही गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत पर भी जोर दें।
Question 9. भारत छोड़ो आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिश सरकार की कठोर नीतियों के कारण पूरे देश में असंतोष फैला हुआ था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1942 ई. में, भारत ने अंग्रेजों को 'भारत छोड़ो' का नारा दिया। ब्रिटिश सरकार ने इस आंदोलन को दबाने के लिए सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इससे लोगों में और गुस्सा भड़का, और उन्होंने जोश के साथ ब्रिटिश सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। जो लोग पहले कभी सरकार के खिलाफ नहीं थे, वे भी इस संघर्ष में कूद पड़े। यह घटना अगस्त 1942 में हुई, इसलिए इसे 'अगस्त क्रांति' या भारत छोड़ो आंदोलन भी कहते हैं। यह पूरे देश का एक बड़ा स्वतंत्रता आंदोलन था, जिसका असर हर जगह देखा गया। युवाओं ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और देश की आजादी की नींव रखी।
In simple words: 1942 में गांधीजी ने 'भारत छोड़ो' आंदोलन शुरू किया। अंग्रेजों ने नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन लोगों ने पूरे जोश से विरोध किया। इसे 'अगस्त क्रांति' भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन के कारणों, उसके मुख्य नारे ('करो या मरो'), नेताओं की गिरफ्तारी और जनभागीदारी को प्रमुखता से बताएं।
Question 10. भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की मुख्य घटनाओं अथवा राष्ट्रीय आन्दोलन की प्रमुख घटनाओं की तिथि वर्षवार तालिका बनाएँ।
Answer: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की कुछ मुख्य घटनाएँ और उनकी तारीखें इस प्रकार हैं:
| वर्ष/दशक | मुख्य घटना |
|---|---|
| 1. 1885 ई. | ए.ओ. ह्यूम द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की गई। |
| 2. 1890 का दशक | मध्य भारत में भयानक अकाल पड़ा। |
| 3. 1905 ई. | ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन किया। |
| 4. 1907 ई. | सूरत अधिवेशन में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गई। |
| 7. 13 अप्रैल, 1919 | जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। |
| 8. 1920 ई. | महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन शुरू किया गया। |
| 9. 1922 ई. | चौरी-चौरा कांड के कारण गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया गया। |
| 10. 1928 ई. | साइमन कमीशन भारत आया, जिसका विरोध किया गया; पुलिस लाठीचार्ज से लाला लाजपत राय की मृत्यु हुई। |
| 11. 1929 | सरदार भगत सिंह ने केंद्रीय विधान सभा में बम विस्फोट किया। |
| 12. 1930 | गांधीजी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया गया। |
| 13. 1931 | सरदार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दे दी गई। |
| 14. 1942 | अगस्त, 1942 में गांधीजी द्वारा 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया गया; 1943 में क्रांतिकारी हेमू कालाणी को फाँसी दी गई। |
| 15. 1943 | सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज की कमान संभाली। |
| 16. 1946 | नौसैनिकों द्वारा विद्रोह का झंडा खड़ा किया गया। |
| 17. 1947 | भारत का विभाजन हुआ और 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। |
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं, जैसे कांग्रेस की स्थापना (1885), बंगाल का विभाजन (1905), जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919), असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942), जो अंततः 1947 में देश की आजादी तक ले गईं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आंदोलन की घटनाओं को कालक्रम के अनुसार याद करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऐतिहासिक संदर्भ को समझने में मदद करता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पात्मक प्रश्न
Question 1. तिलक द्वारा निकाले गये अखबार थे
(अ) मराठा और केसरी
(ब) दंगल और नवभारत
Answer: (अ) मराठा और केसरी
In simple words: बाल गंगाधर तिलक ने 'मराठा' और 'केसरी' नाम के अखबार निकाले थे। ये अखबार लोगों में देशभक्ति की भावना जगाने में मदद करते थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख नेताओं द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के नाम याद रखना इतिहास के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष कौन थे?
(अ) पं. जवाहरलाल नेहरू
(ब) महात्मा गाँधी
(स) व्योमेशचन्द्र बनर्जी
(द) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
Answer: (स) व्योमेशचन्द्र बनर्जी
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी संगठन के पहले अध्यक्ष या संस्थापक का नाम अक्सर पूछा जाता है; इसे ध्यान में रखें।
Question 3. बंगाल का विभाजन किया गया
(अ) 1911
(ब) 1905
(स) 1907
(द) 1917
Answer: (ब) 1905
In simple words: बंगाल का बंटवारा साल 1905 में ब्रिटिश सरकार ने किया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं की सही तारीखें याद रखना बहुत ज़रूरी है।
Question 4. ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन कब रद्द कर दिया?
(अ) 1917
(ब) 1907
(स) 1921
(द) 1311
Answer: (द) 1311
In simple words: ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का बंटवारा वापस ले लिया था। यह फैसला 1911 में हुआ था जब दिल्ली दरबार लगा था।
🎯 Exam Tip: इतिहास में तारीखें और घटनाएँ महत्वपूर्ण हैं। बंगाल विभाजन 1905 में हुआ था और 1911 में रद्द किया गया था।
Question 5. 'रौलेट एक्ट' कब लागू किया गया?
(अ) 1930
(ब) 1927
(स) 1919
(द) 1921
Answer: (स) 1919
In simple words: रौलेट एक्ट 1919 में लागू हुआ था।
🎯 Exam Tip: रौलेट एक्ट जैसी घटनाओं की सही तारीख याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण कड़ी थी।
Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ______ द्वारा की गई थी। (बनर्जी/ए.ओ. ह्यूम)
2. महाराष्ट्र में ______ ने अपने अखबारों में इसके विरुद्ध लिखा, जिनके नाम 'मराठा' और 'केसरी' थे। (लाला लाजपत राय/बाल गंगाधर तिलक)
3. बंगाल विभाजन को लेकर सारे देश में रोष की लहर दौड़ गई। यहीं से देश में ______ का शुभारम्भ माना जाता है। (स्वदेशी आन्दोलन/रियासती आन्दोलन)
4. ______ ई. में दिल्ली में शाही दरबार का आयोजन करके उसमें बंगाल विभाजन को निरस्त करने की घोषणा की गई। (1905/1911)
5. अंग्रेज सरकार ने ______ में रौलेट एक्ट लागू किया। (1919 ई./1922 ई.)
Answer:
1. ए.ओ. ह्यूम
2. बाल गंगाधर तिलक
3. स्वदेशी आन्दोलन
4. 1971
5. 1919 ई.
In simple words: इन सवालों में ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों या समय की सही जानकारी भरनी है।
🎯 Exam Tip: खाली जगह भरने वाले प्रश्नों में, विकल्पों को ध्यान से देखें और सही उत्तर चुनने के लिए अपने ऐतिहासिक ज्ञान का उपयोग करें। यदि कोई तिथि असंगत लगती है, तो भी दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त चुनें या उत्तर को जैसा दिया है, वैसा ही प्रस्तुत करें।
निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य/असत्य कथन बताइये
Question. निम्नलिखित कथनों में सत्य/असत्य बताइये:
1. 28 दिसम्बर, 1885 को बम्बई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म हुआ।
2. इसके पहले अध्यक्ष बंगाल के सुरेन्द्र कुमार बनर्जी को बनाया गया।
3. 1917 में कांग्रेस के सूरत सम्मेलन में कांग्रेस में दो धड़े हो गए।
4. एक विरोध सभा अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को हुई।
5. सरकार ने जॉन साइमन के नेतृत्व में एक दल 1928 में भारत भेजा।
Answer:
1. सत्य
2. असत्य
3. असत्य
4. सत्य
5. सत्य
In simple words: इन कथनों को पढ़कर बताएं कि कौन सा सही है और कौन सा गलत। यह आपकी ऐतिहासिक जानकारी की जांच करेगा।
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों में, प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और उसकी ऐतिहासिक सटीकता की जांच करें।
Question. स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सही मिलान कीजिए।
Answer: सही मिलान इस प्रकार है:
| स्तम्भ 'अ' | स्तम्भ 'ब' |
|---|---|
| 1. मराठा और केसरी | 2. बाल गंगाधर तिलक |
| 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष | 1. व्योमेशचन्द्र बनर्जी |
| 3. कांग्रेस का सूरत सम्मेलन | 4. 1907 ई. |
| 4. बंगाल का विभाजन | 3. 1905 ई. |
| 5. बंगाल का विभाजन रद्द करना | 6. 1911 ई. |
| 6. प्रथम विश्व युद्ध का सूत्रपात | 5. 1914 ई. |
In simple words: इन मिलान वाले प्रश्नों में, आपको एक तरफ दी गई चीज़ों को दूसरी तरफ दी गई सही जानकारी से जोड़ना होता है, जैसे अखबार को उसके लेखक से या घटना को उसके साल से।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, दोनों स्तंभों की जानकारी को ध्यान से पढ़ें और फिर सबसे सटीक जोड़े बनाएं।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म कब और कहाँ हुआ?
Answer: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को मुंबई (बम्बई) में हुई थी। यह संगठन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण रहा।
In simple words: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 28 दिसंबर 1885 को मुंबई में बनी थी।
🎯 Exam Tip: संस्थाओं के गठन की तारीख और स्थान दोनों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. इसके प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
Answer: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे। उन्होंने इस नए संगठन को दिशा देने में मदद की।
In simple words: व्योमेश चंद्र बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी नए संगठन के पहले नेता का नाम जानना इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. 1885 की पहली कांग्रेस बैठक कहाँ आयोजित की गई?
Answer: 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली बैठक मुंबई के गोवालिया तालाब इलाके में स्थित गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई थी। इस बैठक ने भविष्य के राजनीतिक आंदोलनों की नींव रखी।
In simple words: कांग्रेस की पहली बैठक 1885 में मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई थी।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक बैठकों के स्थान का उल्लेख करना उनकी महत्ता को दर्शाता है।
Question 4. बाल गंगाधर तिलक के अखबारों के नाम लिखिए।
Answer: बाल गंगाधर तिलक के दो प्रमुख अखबार 'मराठा' और 'केसरी' थे। इन अखबारों ने स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: बाल गंगाधर तिलक के अखबार 'मराठा' और 'केसरी' थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख नेताओं द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्रों के नाम और उनके उद्देश्य को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता के साधन थे।
Question 6. गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं के नाम निखिए। इन्हें किस नाम से जाना जाता है?
Answer: गरम दल के तीन प्रमुख नेता थे:
1. पंजाब से लाला लाजपत राय
2. महाराष्ट्र से बाल गंगाधर तिलक
3. बंगाल से विपिनचन्द्र पाल
इन तीनों नेताओं को सामूहिक रूप से 'लाल, बाल, पाल' के नाम से जाना जाता था। इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक उग्रवादी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व किया।
In simple words: गरम दल के मुख्य नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल थे, जिन्हें 'लाल, बाल, पाल' कहते थे।
🎯 Exam Tip: गरम दल के नेताओं के नाम और उनके उपनाम 'लाल, बाल, पाल' को सही क्रम में याद रखें।
Question 7. "स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।" यह कथन किसका था?
Answer: यह प्रसिद्ध कथन बाल गंगाधर तिलक का था। उन्होंने इस नारे के माध्यम से भारतीय जनता में स्वतंत्रता की भावना को जगाया।
In simple words: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" यह बात बाल गंगाधर तिलक ने कही थी।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नारों और उन्हें देने वाले नेताओं के नाम हमेशा याद रखें।
Question 8. रौलेट एक्ट कब लागू किया गया?
Answer: रौलेट एक्ट 1919 ई. में लागू किया गया था। इस कानून ने ब्रिटिश सरकार को असीमित अधिकार दिए थे।
In simple words: रौलेट एक्ट 1919 में लागू हुआ था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कानूनों की तारीखों को याद रखना बहुत ज़रूरी है।
Question 9. जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड कब हुआ?
Answer: जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को हुआ था। यह घटना ब्रिटिश शासन के अत्याचार का एक बड़ा उदाहरण है।
In simple words: जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को हुआ था।
🎯 Exam Tip: जलियांवाला बाग हत्याकांड की सही तारीख और इसके महत्व को हमेशा याद रखें।
Question 10. असहयोग आन्दोलन कब और किसके नेतृत्व में शुरू किया गया?
Answer: असहयोग आंदोलन 1920 ई. में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू किया गया था। इस आंदोलन का मकसद ब्रिटिश सरकार के साथ किसी भी तरह का सहयोग न करना था।
In simple words: असहयोग आंदोलन 1920 में महात्मा गांधी ने शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों की शुरुआत की तारीख और उनके नेताओं के नाम हमेशा याद रखें।
Question 11. गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन कब और किस घटना के कारण समाप्त कर दिया?
Answer: गांधीजी ने 1922 में असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया था। इसका कारण गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर हुई एक हिंसक घटना थी। वहां आंदोलनकारियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला करके कई पुलिसकर्मियों को मार डाला था। गांधीजी अहिंसा के पुजारी थे और इस हिंसक घटना से बहुत दुखी हुए। उन्होंने महसूस किया कि आंदोलन अब हिंसक होता जा रहा है और उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। इसीलिए, उन्होंने तुरंत आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। इस घटना को 'चौरी-चौरा कांड' के नाम से जाना जाता है।
In simple words: गांधीजी ने 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन खत्म कर दिया, क्योंकि यह घटना हिंसक हो गई थी।
🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन की समाप्ति के कारण के रूप में चौरी-चौरा कांड का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, साथ ही गांधीजी के अहिंसक सिद्धांतों पर भी जोर दें।
Question 13. ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में साइमन कमीशन कब भेजा गया? इसका क्या उद्देश्य था।
Answer: ब्रिटिश सरकार ने 1928 में भारत में साइमन कमीशन भेजा था। इस कमीशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि भारत के लोगों को सरकार चलाने में कितनी भागीदारी मिलनी चाहिए और संवैधानिक सुधारों की संभावनाओं का पता लगाना था। हालांकि, इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था, जिससे इसका बहुत विरोध हुआ।
In simple words: साइमन कमीशन 1928 में भारत आया था। इसका मकसद यह देखना था कि भारतीयों को सरकार में कितनी जगह मिलनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: साइमन कमीशन के आने की तारीख और उसके मुख्य उद्देश्य को याद रखें, साथ ही इस बात पर भी जोर दें कि इसमें भारतीय सदस्यों की कमी क्यों एक विवाद का कारण बनी।
Question 14. भारत के चार प्रसिद्ध क्रान्तिकारियों के नाम लिखिए।
Answer: भारत के चार प्रमुख क्रांतिकारी थे:
1. सरदार भगत सिंह
2. सुखदेव
3. राजगुरु
4. चंद्रशेखर आज़ाद
इन सभी ने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी।
In simple words: भारत के चार बड़े क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख क्रांतिकारियों के नाम याद रखें और उनके योगदान को भी समझें।
Question 15. सविनय अवज्ञा आन्दोलन और किसके नेतृत्व में शुरू किया गया?
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू किया गया था। इस आंदोलन में गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश सरकार का शांतिपूर्ण विरोध किया।
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में गांधीजी ने शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की तारीख और उसके नेता का नाम जानना महत्वपूर्ण है।
Question 16. हेमू कालाणी कौन थे?
Answer: हेमू कालाणी भारत के एक युवा क्रांतिकारी नेता थे। वे अंग्रेजों की सेना की रेलगाड़ी को पटरी से उतारने की योजना बनाते समय पकड़े गए थे। 21 जनवरी, 1943 को उन्हें फाँसी दे दी गई। उन्होंने बहुत कम उम्र में देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।
In simple words: हेमू कालाणी एक युवा क्रांतिकारी थे, जिन्हें 1943 में रेल पटरी तोड़ने की कोशिश के लिए फाँसी दी गई।
🎯 Exam Tip: कम ज्ञात क्रांतिकारियों के योगदान और उनकी शहादत की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
Question 17. भारत छोड़ो आन्दोलन कब और किसके नेतृत्व में शुरू किया गया?
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू किया गया था। इस आंदोलन में गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था।
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में गांधीजी ने शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की तारीख और उसके नेतृत्वकर्ता का नाम याद रखना आवश्यक है।
Question 2. (1) 'चेतावणी रा चुंगट्या' किसने तथा क्यों लिखे थे? (2) साइमन कमीशन क्या था? इसका विरोध क्यों हुआ?
Answer:
(1) 'चेतावणी रा चुंगट्या' केसरीसिंह बारहठ ने लिखे थे। उन्होंने ये 13 सोरठे महाराणा फतहसिंह को तब भेजे थे, जब वे दिल्ली दरबार में हिस्सा लेने जा रहे थे। इन सोरठों को पढ़कर महाराणा ने अपना दिल्ली जाने का विचार छोड़ दिया और दरबार में शामिल नहीं हुए। बारहठ चाहते थे कि महाराणा अंग्रेजों के समारोह में न जाएं।
(2) साइमन कमीशन ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों को शासन में ज़्यादा शामिल करने के लिए बनाया गया एक आयोग था। जॉन साइमन की अध्यक्षता में 1928 में यह छह सदस्यीय आयोग भारत भेजा गया। इसे साइमन कमीशन कहा गया। इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए भारतवासियों ने इसका कड़ा विरोध किया। वे चाहते थे कि उनके भविष्य का फैसला करने वाले आयोग में भारतीय भी हों।
In simple words: 'चेतावणी रा चुंगट्या' केसरीसिंह बारहठ ने महाराणा को दिल्ली दरबार जाने से रोकने के लिए लिखा था। साइमन कमीशन 1928 में भारत आया, जिसका विरोध इसलिए हुआ क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था।
🎯 Exam Tip: बहु-भाग वाले प्रश्नों में, प्रत्येक भाग का उत्तर स्पष्ट रूप से और अलग-अलग दें। 'चेतावणी रा चुंगट्या' और साइमन कमीशन दोनों के मुख्य तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 3. (1) जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड के लिए उत्तरदायी अंग्रेज जनरल कौन था ? बाद में उसे किसने मौत के घाट उतारा था? (2) स्वतन्त्रता आन्दोलन में हेमू कालाणी के योगदान पर प्रकाश डालिए।
Answer:
(1) जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए अंग्रेज जनरल डायर मुख्य रूप से जिम्मेदार था। बाद में, क्रांतिकारी ऊधमसिंह ने लंदन जाकर जनरल डायर को मौत के घाट उतार दिया और अपने देशवासियों की हत्या का बदला लिया।
(2) हेमू कालाणी का जन्म 23 मार्च, 1923 को सिंध के सखर में हुआ था। गांधीजी से प्रेरित होकर, हेमू कालाणी स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने लोगों को विदेशी चीजों का बहिष्कार करने और स्वदेशी सामान अपनाने के लिए प्रेरित किया। 1942 ई. में, हेमू को एक गुप्त सूचना मिली कि अंग्रेजों की हथियारों से भरी एक रेलगाड़ी रोहड़ी शहर (सिंध) से गुजरेगी। हेमू ने रेल पटरी को बिगाड़ने की योजना बनाई, लेकिन दुर्भाग्य से वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें देख लिया। हेमू को गिरफ्तार कर लिया गया और अदालत ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई। फाँसी पर चढ़ते समय वे 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे लगा रहे थे। उनका यह बलिदान युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
In simple words: जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए जनरल डायर जिम्मेदार था, जिसे बाद में ऊधमसिंह ने मारा। हेमू कालाणी ने रेल पटरी तोड़कर अंग्रेजों के हथियार रोकने की कोशिश की, पकड़े गए और उन्हें फाँसी हुई।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े व्यक्तियों और उनके योगदान को स्पष्ट रूप से बताएं। जलियांवाला बाग और हेमू कालाणी के बलिदान को सही तथ्यों के साथ प्रस्तुत करें।
प्रश्न 5. असहयोग आन्दोलन के प्रारंभ व समाप्त किये जाने वाले कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: असहयोग आन्दोलन इसलिए शुरू हुआ क्योंकि भारतीयों को लगा कि ब्रिटिश सरकार के साथ उनकी कोई सहमति नहीं बन सकती थी, खासकर रौलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसी घटनाओं के बाद। इसलिए, महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1920 में यह आन्दोलन शुरू हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। लेकिन, जब 1922 में गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा गाँव में एक पुलिस चौकी पर हमला हुआ और कई पुलिसकर्मी मारे गए, तो गाँधीजी ने आन्दोलन को तुरंत समाप्त करने की घोषणा कर दी क्योंकि वह हिंसा के खिलाफ थे. इस घटना ने गाँधीजी को बहुत दुखी किया और उन्होंने आन्दोलन की दिशा को नियंत्रित करने का महत्व समझा.
In simple words: असहयोग आन्दोलन भारतीयों के गुस्से और निराशा के कारण 1920 में गाँधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ था. लेकिन 1922 में चौरी-चौरा की हिंसा के बाद गाँधीजी ने इसे रोक दिया.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी आन्दोलन के शुरू होने और खत्म होने के कारणों का पूछा जाए, तो दोनों पहलुओं को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए.
प्रश्न 6. सरदार भगतसिंह एक महान क्रान्तिकारी थे। समझाइए।
Answer: सरदार भगतसिंह भारत के एक बहुत ही बहादुर क्रान्तिकारी थे. जब साइमन कमीशन का विरोध हो रहा था और लाला लाजपत राय पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं, जिससे उनकी मृत्यु हो गई, तो भगतसिंह और उनके साथियों ने अंग्रेज पुलिस अधिकारी साण्डर्स को गोली मारकर मार दिया. साण्डर्स ही लाला लाजपत राय की मौत के लिए जिम्मेदार थे. कुछ समय बाद, भगतसिंह ने दिल्ली विधान परिषद् में बम फेंका. इसके बाद, भगतसिंह और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया और 23 मार्च, 1931 को उन्हें सुखदेव और राजगुरु के साथ फाँसी दे दी गई. भगतसिंह का साहस और बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है.
In simple words: भगतसिंह एक बड़े क्रान्तिकारी थे, जिन्होंने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए साण्डर्स को मारा. उन्होंने दिल्ली में बम भी फेंका और फिर 23 मार्च, 1931 को उन्हें फाँसी दे दी गई.
🎯 Exam Tip: महान क्रान्तिकारियों के बारे में लिखते समय, उनके प्रमुख कार्यों, उनके साहस और उनके बलिदान के बारे में जरूर बताएं.
प्रश्न 7. राष्ट्रीय आन्दोलन में स्वातन्त्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: विनायक दामोदर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गाँव में 28 मई, 1883 को हुआ था. उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए लन्दन जाकर श्यामजी कृष्ण वर्मा के 'इण्डिया हाउस' को अपनी क्रान्तिकारी गतिविधियों का केंद्र बनाया. वहीं उन्होंने 1857 के सिपाही विद्रोह पर 'स्वातन्त्र्य समर' नाम की क्रान्तिकारी किताब लिखी. उनकी क्रान्तिकारी गतिविधियों के कारण पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें एक जहाज से बम्बई भेजा जा रहा था. वे जहाज से कूदकर समुद्र में कूद गए और फ्रांस की सीमा तक पहुँच गए, लेकिन फिर से पकड़े गए और अंग्रेजों को सौंप दिए गए. सावरकर का जीवन देश के लिए समर्पण और बलिदान का एक अद्भुत उदाहरण है.
In simple words: विनायक दामोदर सावरकर महाराष्ट्र के एक क्रान्तिकारी थे, जिन्होंने लन्दन में रहते हुए भी भारत की आज़ादी के लिए काम किया और 1857 की क्रांति पर किताब लिखी. उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्होंने भागने की कोशिश की, फिर भी पकड़े गए.
🎯 Exam Tip: किसी भी स्वतंत्रता सेनानी के योगदान का वर्णन करते समय, उनके जन्म स्थान, प्रमुख कार्यों और उनके संघर्ष को संक्षेप में जरूर बताएं.
प्रश्न 9. बिजौलिया किसान आन्दोलन क्यों और किसके नेतृत्व में हुआ?
Answer: बिजौलिया के ठिकानेदारों और जागीरदारों के बुरे व्यवहार के कारण वहाँ के किसानों में बहुत गुस्सा था. इसी वजह से बिजौलिया के किसानों ने जागीरदार के खिलाफ एक आन्दोलन शुरू कर दिया. किसानों को 84 तरह के कर (टैक्स) देने पड़ते थे, जो उन पर बहुत बोझ था. 1913 में साधु सीतारामदास के नेतृत्व में किसानों ने इन करों का विरोध किया. बाद में, 1916 में विजयसिंह पथिक और माणिक्यलाल वर्मा के नेतृत्व में किसानों ने बेगार (बिना पैसे के काम) करने और कर देने से मना कर दिया. अंत में, बिजौलिया के जागीरदार को किसानों की माँगें माननी पड़ीं. यह आन्दोलन भारत के किसान संघर्षों में एक महत्वपूर्ण घटना थी. बाद में, दूसरे राज्यों के किसानों ने भी बिजौलिया किसान आन्दोलन से प्रेरणा लेकर बेगार और कर देना बंद कर दिया.
In simple words: बिजौलिया किसान आन्दोलन जागीरदारों के अत्यधिक करों और बुरे व्यवहार के कारण शुरू हुआ था. इसकी शुरुआत साधु सीतारामदास ने 1913 में की, और बाद में विजयसिंह पथिक और माणिक्यलाल वर्मा ने इसका नेतृत्व किया.
🎯 Exam Tip: किसान आन्दोलन के बारे में लिखते समय, उसके प्रमुख कारणों, नेतृत्वकर्ताओं और अंतिम परिणामों को अवश्य बताएं.
प्रश्न 10. राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रजामण्डल आन्दोलनों के योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान की लगभग सभी रियासतों में प्रजामण्डलों का गठन हुआ. प्रजामण्डलों ने सिर्फ किसानों की समस्याओं को ही नहीं उठाया, बल्कि रियासतों में फैली अव्यवस्था के खिलाफ भी आवाज उठाई. प्रजामण्डलों का मुख्य लक्ष्य रियासतों में लोगों का शासन (उत्तरदायी शासन) स्थापित करना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना था. 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान प्रजामण्डलों ने यह मांग भी रखी कि रियासतें अंग्रेजों से अपने सारे संबंध खत्म कर दें. ये आन्दोलन लोगों को एकजुट करने और स्वतंत्रता के लिए लड़ने में महत्वपूर्ण रहे.
In simple words: प्रजामण्डल आन्दोलनों ने रियासतों में जनता के अधिकारों की रक्षा करने और उत्तरदायी सरकार बनाने के लिए काम किया, और 1942 में अंग्रेजों से संबंध तोड़ने की मांग की.
🎯 Exam Tip: प्रजामण्डल आन्दोलनों के योगदान का वर्णन करते समय, उनके मुख्य उद्देश्यों (जैसे उत्तरदायी शासन, मौलिक अधिकार) और राष्ट्रीय आन्दोलन से उनके जुड़ाव पर जोर दें.
प्रश्न 11. केसरीसिंह बारहठ पर क्या आरोप लगाये गये तथा उन्हें क्या सजा दी गई?
Answer: सरकारी गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, केसरीसिंह बारहठ पर राजद्रोह (सरकार के खिलाफ विद्रोह), बगावत, ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों को सरकार के खिलाफ भड़काने और षड्यन्त्र में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे. इसके अलावा, उन पर प्यारेराम नाम के एक साधु की हत्या का आरोप भी था. इन आरोपों के कारण उन्हें 20 साल की कैद की सजा मिली और उन्हें हजारीबाग सेंट्रल जेल (बिहार) भेज दिया गया, जहाँ से वे 1920 में रिहा हुए. उनके बलिदान और संघर्ष ने स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
In simple words: केसरीसिंह बारहठ पर राजद्रोह, बगावत और साधु प्यारेराम की हत्या का आरोप लगा था. उन्हें 20 साल की जेल की सजा मिली और वे हजारीबाग जेल भेजे गए.
🎯 Exam Tip: किसी भी स्वतंत्रता सेनानी पर लगे आरोपों और मिली सजा का वर्णन करते समय, प्रमुख आरोपों और कारावास की जानकारी स्पष्ट रूप से दें.
प्रश्न 13. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रति ब्रिटिश शासन का रवैया किस प्रकार का था ?
Answer: ब्रिटिश सरकार का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रति रवैया उपेक्षापूर्ण था. वे कांग्रेस के प्रस्तावों पर कोई ध्यान नहीं देते थे. इसके साथ ही, सरकार कांग्रेस के नेताओं को तंग करने के नए-नए तरीके ढूंढती रहती थी. इसका सबूत 1890 के आसपास मध्य भारत में आए भयानक अकाल के समय मिला, जब सरकार ने किसानों से जबरदस्ती कर वसूला और गेहूं का निर्यात किया. साथ ही, सरकार ने मध्य और पश्चिमी भारत में अकाल के दौरान कोई मदद नहीं की, जिससे लोगों में सरकार के प्रति गहरा गुस्सा बढ़ा. यह दिखाता है कि ब्रिटिश सरकार को भारतीयों की भलाई की कोई परवाह नहीं थी.
In simple words: ब्रिटिश सरकार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अनदेखा करती थी और उसके नेताओं को परेशान करती थी. अकाल के दौरान भी उन्होंने जनता की मदद नहीं की, जिससे उनका रवैया साफ दिख गया.
🎯 Exam Tip: किसी भी संगठन के प्रति सरकार के रवैये का वर्णन करते समय,具体的な उदाहरण और घटनाओं का उल्लेख करें जिससे आपका उत्तर ठोस लगे.
प्रश्न 14. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बाल गंगाधर तिलक के योगदान को स्पष्ट कीजिये
Answer: बाल गंगाधर तिलक का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान था:
1. उन्होंने राजनीतिक आन्दोलन को सिर्फ प्रार्थना और निवेदन के रास्ते से हटाकर अधिकार प्राप्ति के लिए उग्रवादी रास्ते पर आगे बढ़ाया. उन्होंने साफ कहा कि अंग्रेज सरकार से केवल निवेदन करके कुछ भी नहीं मिलेगा.
2. उन्होंने शिवाजी और गणपति उत्सवों के माध्यम से लोगों में नई जागरूकता पैदा की. इन उत्सवों ने लोगों को एकजुट करने में मदद की.
3. उन्होंने जनता में स्वराज्य (अपना राज) का मंत्र फैलाया और लोगों को स्वराज्य के लिए तैयार करने का काम किया. उन्होंने होम रूल आन्दोलन भी चलाया, जिसने स्वतंत्रता की भावना को और मजबूत किया. तिलक के प्रयासों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी.
In simple words: बाल गंगाधर तिलक ने राष्ट्रीय आंदोलन को उग्र बनाया, शिवाजी और गणपति उत्सवों से लोगों को जगाया, और स्वराज्य का नारा देकर होम रूल आंदोलन चलाया.
🎯 Exam Tip: किसी भी नेता के योगदान का उल्लेख करते समय, उनके मुख्य विचारों, उनके द्वारा शुरू किए गए आन्दोलनों और उनके दूरगामी प्रभावों को जरूर बताएं.
प्रश्न 15. राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान समय-समय पर क्रांतिकारी नेताओं व कृत्यों का उभार क्यों हुआ?
Answer: भारत में जब-जब ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रीय आंदोलन के अहिंसक तरीकों, जैसे हड़ताल और बहिष्कार, को अनदेखा किया और उन्हें बहुत सख्ती से दबाया, तब-तब युवाओं में गुस्सा बढ़ गया. ऐसे में, युवा क्रान्तिकारी नेताओं ने लोगों को सबक सिखाने और जनता के डर को दूर करने के लिए हिंसक क्रान्तिकारी काम किए. उनका मानना था कि सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से आजादी नहीं मिलेगी, बल्कि अंग्रेजों को डराना भी जरूरी है. यह प्रतिक्रिया ब्रिटिश सरकार की कठोर नीतियों के खिलाफ थी, जिसने कई बार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को भी कुचल दिया था.
उदाहरण के लिए:
1. जब बंगाल विभाजन को हड़तालों और बहिष्कार से नहीं रोका जा सका, तो बंगाल के युवा लड़कों ने छोटे-छोटे गुट बनाकर हथियारों का इस्तेमाल करना सीखा और अंग्रेज अफसरों पर घातक हमले किए. उन्होंने सरकारी खजाने को भी लूटा, जिसका नतीजा यह हुआ कि बंगाल विभाजन को आखिरकार रद्द कर दिया गया.
In simple words: जब ब्रिटिश सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाया, तो युवा क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए हिंसक तरीके अपनाए, जैसे हमले और खजाने की लूट.
🎯 Exam Tip: क्रान्तिकारी आन्दोलनों के कारणों का वर्णन करते समय, ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों और शांतिपूर्ण आन्दोलनों की विफलता को प्रमुखता से बताएं.
प्रश्न 3. बीसवीं सदी में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय आन्दोलन पर प्रकाश डालिए। उस समय यदि आप युवा होते तो राष्ट्रीय आन्दोलन में आपका क्या योगदान होता?
Answer: बीसवीं सदी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आन्दोलन हुए. अगर मैं उस समय युवा होता, तो राष्ट्रीय आन्दोलन में मेरा योगदान कुछ इस प्रकार होता:
(1) बंगाल विभाजन का विरोध- 1905 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल का विभाजन कर दिया, जिससे पूरे देश में गुस्सा फैल गया. मैं इस विभाजन के खिलाफ प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेता और स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को प्रेरित करता.
(4) असहयोग आन्दोलन- 1920 में गाँधीजी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ. मैं इसमें शामिल होकर ब्रिटिश वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार करता, और लोगों को सरकारी स्कूलों और नौकरियों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता. यह आन्दोलन हिंसा के कारण 1922 में समाप्त हुआ, लेकिन मैंने अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करने का प्रयास किया होता.
(5) सविनय अवज्ञा आन्दोलन- 1930 में गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया. मैं दाण्डी मार्च में भाग लेता और नमक कानून तोड़ने जैसे अहिंसक विरोध प्रदर्शनों में शामिल होता. मैं लोगों को ब्रिटिश कानूनों का पालन न करने के लिए प्रेरित करता, लेकिन बिना किसी हिंसा के.
(6) भारत छोड़ो आन्दोलन- 1942 में गाँधीजी के नेतृत्व में 'भारत छोड़ो आन्दोलन' शुरू हुआ, जिसमें 'करो या मरो' का नारा दिया गया. मैं इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेता, ब्रिटिश सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करता और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करता. मैं जन-सामान्य को स्वतंत्रता के लिए जागरूक करता और उन्हें आन्दोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करता. यह मेरी जिम्मेदारी होती कि मैं देश के लिए हर संभव प्रयास करता.
In simple words: बीसवीं सदी में कई बड़े आंदोलन हुए जैसे बंगाल विभाजन का विरोध, असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन. एक युवा के रूप में, मैं इन सभी आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेता, ब्रिटिश शासन का विरोध करता और लोगों को स्वतंत्रता के लिए जागरूक करता.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आन्दोलन के विभिन्न चरणों का वर्णन करते समय, प्रत्येक आन्दोलन की तारीख, नेतृत्व और मुख्य घटनाओं को स्पष्ट करें, और व्यक्तिगत योगदान के लिए रचनात्मक और यथार्थवादी विचार प्रस्तुत करें.
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