RBSE Solutions Class 8 Social Science Chapter 23 ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन व्यवस्था

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Detailed Chapter 23 ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन व्यवस्था RBSE Solutions for Class 8 Social Science

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Class 8 Social Science Chapter 23 ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन व्यवस्था RBSE Solutions PDF

Chapter 23 ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन व्यवस्था

प्रश्न एक का सही उत्तर कोष्ठक में लिखें प्रश्न

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

 

Question 1. भारत के प्रथम वायसराय थे
(अ) लाई कैनिंग
(ब) लार्ड डलहौजी
(स) सर जान लारेन्स
(द) लार्ड मेयो
Answer: (अ) लाई कैनिंग
In simple words: भारत के पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग थे, जिन्होंने 1857 के विद्रोह के बाद यह पद संभाला था। उन्होंने देश में ब्रिटिश शासन को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🎯 Exam Tip: वायसराय और गवर्नर-जनरल के बीच के अंतर को याद रखें; वायसराय ब्रिटिश क्राउन का सीधा प्रतिनिधि था।

 

Question 2. संघीय न्यायालय की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई?
Answer: संघीय न्यायालय की स्थापना 1935 के भारत शासन अधिनियम के तहत की गई। यह अधिनियम भारत में एक संघीय प्रणाली स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
In simple words: संघीय न्यायालय 1935 के भारत सरकार अधिनियम के अनुसार बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: भारत सरकार अधिनियम 1935 भारतीय संवैधानिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, जिसके कई प्रावधान आज भी हमारे संविधान में देखे जा सकते हैं।

 

Question 3. कृषि का वाणिज्यीकरण किसे कहा जाता है?
Answer: ब्रिटिश सरकार ने अपने आर्थिक फायदे के लिए भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण किया। इसका मतलब था कि किसान अब कुछ खास फसलें अपने खाने के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश बाजारों में बेचने के लिए उगाते थे। इसी को कृषि का वाणिज्यीकरण कहते हैं, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता था।
In simple words: जब किसान फसलें अपने खाने के लिए नहीं, बल्कि बाजारों में बेचने के लिए उगाते थे, तो इसे कृषि का वाणिज्यीकरण कहते हैं। अंग्रेजों ने ऐसा अपने फायदे के लिए करवाया था।

🎯 Exam Tip: वाणिज्यीकरण ने भारतीय किसानों को पारंपरिक आत्मनिर्भरता से बदलकर बाजार पर निर्भर बना दिया था, जिससे अक्सर उन्हें नुकसान होता था।

 

Question 4. लॉर्ड मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता क्यों कहा जाता है ?
Answer: 1909 के भारत परिषद् अधिनियम के द्वारा मुसलमानों के लिए अलग मतदान और अलग चुनाव क्षेत्रों की व्यवस्था की गई। इस व्यवस्था को 'फूट डालो और राज करो' की नीति का एक हिस्सा माना जाता था। इस प्रणाली को बनाने वाले भारत सचिव मार्ले और गवर्नर लॉर्ड मिन्टो थे, इसीलिए उन्हें साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहा जाता है।
In simple words: लॉर्ड मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहते हैं क्योंकि 1909 के अधिनियम से मुसलमानों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र बनाए गए थे।

🎯 Exam Tip: साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति ने भारत में धार्मिक आधार पर विभाजन को बढ़ावा दिया, जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम हुए।

 

Question 6. शिक्षा एवं समाज सुधार के जरिए अंग्रेजों द्वारा समाज को अपने पक्ष में डालने का उद्देश्य क्या था?
Answer: अंग्रेजों का शुरू में अंग्रेजी शिक्षा लागू करने का उद्देश्य कम वेतन पर भारतीय कर्मचारियों की व्यवस्था करना, ईसाई धर्म का प्रचार करना और प्रशासनिक कामों में भारतीयों की मदद लेना था। वे चाहते थे कि भारतीय पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति को समझें और उनकी अच्छाइयों को अपनाएं, ताकि वे सरकार के समर्थक बन सकें। इस प्रकार वे भारतीय समाज को अपने पक्ष में करना चाहते थे।
In simple words: अंग्रेज शिक्षा और समाज सुधार के जरिए भारतीयों को अपने पक्ष में लाना चाहते थे। वे चाहते थे कि भारतीय पश्चिमी सोच को अपनाएं और उनका समर्थन करें।

🎯 Exam Tip: अंग्रेजों का 'सभ्य बनाने का मिशन' वास्तव में अपने शासन को मजबूत करने और भारतीयों को पश्चिमी विचारों के प्रति झुकाव पैदा करने का एक तरीका था।

 

Question 7. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: बर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 में ब्रिटिश सरकार ने पास किया था। इस एक्ट के तहत भारतीय भाषाओं के अखबारों पर सख्त पाबंदी लगा दी गई। इसमें जिला मजिस्ट्रेट को यह अधिकार था कि वह किसी भी भारतीय भाषा के अखबार के मालिक से यह लिखवा ले कि वे सरकार विरोधी कुछ भी नहीं छापेंगे। यह एक बहुत खतरनाक कानून था जिसने भारतीय भाषाओं के अखबारों की आजादी छीन ली थी, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हुआ।
In simple words: बर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 में आया था। इसने भारतीय अखबारों पर पाबंदी लगाई ताकि वे सरकार के खिलाफ कुछ न छाप सकें।

🎯 Exam Tip: वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट ने भारतीय राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाले विचारों को दबाने की कोशिश की, लेकिन इससे लोगों में और असंतोष बढ़ा।

 

Question 8. पील कमीशन की रिपोर्ट पर सेना विभाग में क्या परिवर्तन किये गए?
Answer: पील कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर सेना विभाग में ये बदलाव किए गए:
1. भारतीय सैनिकों की तुलना में यूरोपियन सैनिकों का अनुपात बढ़ा दिया गया। इससे भारतीय सैनिकों की शक्ति कम की गई।
2. 'फूट डालो और राज करो' की नीति का पालन करते हुए सेना के रेजिमेंटों को जाति, समुदाय और धर्म के आधार पर बांट दिया गया। यह विभाजन ब्रिटिश शासन को मजबूत करने के लिए किया गया था।
In simple words: पील कमीशन की रिपोर्ट ने सेना में यूरोपियन सैनिकों की संख्या बढ़ाई और भारतीय सैनिकों को जाति-धर्म के आधार पर बांट दिया।

🎯 Exam Tip: पील कमीशन की सिफारिशों ने 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सेना में भारतीय नियंत्रण को कम करने और "फूट डालो और राज करो" की नीति को लागू करने में मदद की।

 

Question 9. ब्रिटिश सरकार द्वारा राजस्थान की रियासतों में 'अभिभावक परिषद्' का गठन क्यों किया गया?
Answer: ब्रिटिश सरकार द्वारा राजस्थान की रियासतों में 'अभिभावक परिषद्' का गठन तब किया गया जब कोई राजकुमार नाबालिग होता था और राजा नहीं बन पाता था। इस परिषद का अध्यक्ष पॉलिटिकल एजेंट होता था, जिससे रियासतों का शासन सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ जाता था। इस तरह ब्रिटिश सरकार अप्रत्यक्ष रूप से रियासतों पर अपना प्रभाव बनाए रखती थी।
In simple words: ब्रिटिश सरकार ने राजस्थान में 'अभिभावक परिषद्' इसलिए बनाई ताकि नाबालिग राजाओं के समय रियासतों पर सीधा नियंत्रण रखा जा सके।

🎯 Exam Tip: अभिभावक परिषद् ब्रिटिश रेजिडेंट को रियासतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और ब्रिटिश हितों को बढ़ावा देने का एक कानूनी तरीका देती थी।

(पृष्ठ संख्या 156)

 

Question 1. ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन के समय ऐसे कौनसे परिवर्तन किये गए, जो आज भी चल रहे हैं? पता कीजिए।
Answer: ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन के समय किए गए परिवर्तन जो आज भी चल रहे हैं, वे निम्नलिखित हैं:
1. भारत में संघात्मक सरकार की स्थापना की गई, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्ति का बंटवारा हुआ।
2. एक संघीय न्यायालय की स्थापना हुई, जिसकी जगह आज सर्वोच्च न्यायालय है।
3. केंद्रीय विधान मंडल में दो सदनों की व्यवस्था की गई, जो आज के लोकसभा और राज्यसभा की तरह है।
4. विषयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया - संघ सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची, यह प्रणाली आज भी लागू है।
5. डाक विभाग की स्थापना और रेलवे लाइनों का निर्माण हुआ, जो आज भी देश की जीवनरेखा हैं।
6. सार्वजनिक निर्माण विभाग और लोक सेवा विभाग की स्थापना की गई।
7. आधुनिक शिक्षा का विस्तार किया गया, अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया, और उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई।
8. कानून बनाकर सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या वध और दास-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को अवैध घोषित किया गया।
9. जिलों का जिलाधीशों द्वारा शासित होना, जहाँ जिलाधीश अपने जिले का मालिक होता था और न्याय, शांति व्यवस्था का कार्य करता था।
10. भारत में पुरातत्व विभाग की स्थापना की गई, जो आज भी हमारी ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा करता है।
In simple words: ब्रिटिश शासन के दौरान कई बदलाव हुए, जैसे संघीय सरकार, न्यायपालिका, द्वि-सदनीय विधायिका और रेलवे, जो आज भी भारत में मौजूद हैं। सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाए गए।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिशकालीन प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे ने आधुनिक भारतीय प्रशासन की नींव रखी, लेकिन इसमें भारतीयों के लिए समान अधिकार और प्रतिनिधित्व का अभाव था।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न बहुविकल्पात्मक

 

Question 1. किसे भारत में साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहा जाता है?
(अ) डलहौजी
(ब) हेस्टिंग्ज
(स) कार्नवालिस
(द) मार्ले-मिन्टो
Answer: (द) मार्ले-मिन्टो
In simple words: लॉर्ड मार्ले और लॉर्ड मिन्टो को भारत में साम्प्रदायिक चुनाव प्रणाली शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: 1909 के मार्ले-मिन्टो सुधारों ने भारत में धार्मिक आधार पर राजनीतिक विभाजन की शुरुआत की।

 

Question 3. प्रान्तों में द्वैध शासन लागू किया गया
(अ) 1929
(ब) 1861
(स) 1919
(द) 192
Answer: (स) 1919
In simple words: द्वैध शासन प्रणाली 1919 में प्रांतीय स्तर पर लागू की गई थी।

🎯 Exam Tip: द्वैध शासन मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों का एक हिस्सा था, जिसने प्रांतीय सरकारों में कुछ जिम्मेदारियों को भारतीयों को दिया, लेकिन महत्वपूर्ण विभाग अंग्रेजों के पास रहे।

 

Question 4. किस अधिनियम को मार्ले-मिन्टो सुधार के नाम से जाना जाता है?
(अ) 1861 को भारतीय परिषद् अधिनियम
(ब) 1892 का भारत परिषद् अधिनियम
(स) 1913 का अधिनियम
(द) 1909 को भारत परिषद् अधिनियम
Answer: (द) 1909 को भारत परिषद् अधिनियम
In simple words: 1909 का भारत परिषद् अधिनियम ही मार्ले-मिन्टो सुधार के नाम से जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: इस अधिनियम का नाम तत्कालीन भारत सचिव लॉर्ड मार्ले और वायसराय लॉर्ड मिन्टो के नाम पर रखा गया था।

 

Question 5. किस अधिनियम द्वारा भारत में सर्वप्रथम संघात्मक सरकार की स्थापना की गई?
(अ) 1861 का अधिनियम
(ब) 19 का अधिनियम
(स) 1935 का अधिनियम
(द) 1919 का अधिनियम
Answer: (स) 1935 का अधिनियम
In simple words: भारत में पहली बार एक संघात्मक सरकार बनाने का विचार 1935 के अधिनियम से आया।

🎯 Exam Tip: 1935 का अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे लंबा अधिनियम था, जिसने भारत के संघीय ढांचे की नींव रखी।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

 

Question 1. मार्ले तथा मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहा जाता है।
Answer: सत्य
In simple words: यह बात सच है कि मार्ले और मिन्टो को साम्प्रदायिक चुनाव प्रणाली शुरू करने वाला माना जाता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे सत्य/असत्य प्रश्नों में, ऐतिहासिक तथ्यों की सटीक जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

 

Question 2. 1919 के भारत सरकार अधिनियम के द्वारा प्रान्तों में द्वैध शासन की स्थापना की गई।
Answer: सत्य
In simple words: यह कथन सही है कि 1919 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था शुरू की थी।

🎯 Exam Tip: मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों का परिणाम द्वैध शासन प्रणाली था, जहाँ विषय आरक्षित और हस्तांतरित श्रेणियों में विभाजित थे।

 

Question 3. 1919 के भारत सरकार के अधिनियम के द्वारा एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई।
Answer: असत्य
In simple words: यह बात गलत है, संघीय न्यायालय की स्थापना 1935 के अधिनियम के तहत हुई थी, न कि 1919 के।

🎯 Exam Tip: विभिन्न अधिनियमों के प्रमुख प्रावधानों को याद रखना महत्वपूर्ण है ताकि ऐसे सत्य/असत्य प्रश्नों का सही उत्तर दिया जा सके।

 

Question 4. 1935 के अधिनियम के द्वारा विषयों को दो श्रेणियों में बाँटा गया।
Answer: असत्य
In simple words: यह कथन गलत है, 1935 के अधिनियम में विषयों को तीन श्रेणियों (संघ, राज्य, समवर्ती) में बांटा गया था।

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान में आज भी तीन सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) की व्यवस्था 1935 के अधिनियम से ली गई है।

 

Question 5. राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा का आरम्भ अजमेर क्षेत्र से हुआ।
Answer: सत्य
In simple words: यह बात सही है कि राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत अजमेर से हुई थी।

🎯 Exam Tip: अजमेर ब्रिटिश प्रशासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र था, इसलिए शैक्षिक सुधारों की शुरुआत अक्सर यहीं से होती थी।

 

Question. स्तंभ 'अ' को स्तंभ 'ब' से मिलाइये:
स्तम्भ 'अ'
1. मेयो कॉलेज
2. शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त
3. चार्ल्स वुड डिस्पैच
4. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट
5. भारत में सर्वप्रथम संघात्मक सरकार
6. जिलों का शासन
स्तम्भ 'ब'
1. बीकानेर
2. अजमेर
3. 1878
4. 1854
5. जिलाधीश
6. 1935 के अधिनियम द्वारा
Answer:
1. मेयो कॉलेज - 2. अजमेर
2. शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त - 5. जिलाधीश
3. चार्ल्स वुड डिस्पैच - 4. 1854
4. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट - 3. 1878
5. भारत में सर्वप्रथम संघात्मक सरकार - 6. 1935 के अधिनियम द्वारा
6. जिलों का शासन - 5. जिलाधीश
In simple words: ऊपर दिए गए स्तंभों को उनके सही मिलान के साथ दिखाया गया है। यह मिलान ऐतिहासिक घटनाओं और संस्थाओं को उनके संबंधित स्थानों, वर्षों या अवधारणाओं से जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ों को मिलाएं जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों को खत्म करने की विधि का उपयोग करें।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 1861 के भारत परिषद् अधिनियम की दो विशेषताएँ बताइये।
Answer: 1861 के भारत परिषद् अधिनियम की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. गवर्नर की कार्यकारिणी परिषद् के साधारण सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 कर दी गई। इससे प्रशासन में अधिक लोगों को शामिल किया जा सका।
2. गवर्नर जनरल को कार्यपालिका को सुचारु रूप से चलाने के लिए नियम और आदेश बनाने के अधिकार दिए गए। यह उसे शासन में अधिक लचीलापन देता था।
In simple words: 1861 के अधिनियम ने गवर्नर की परिषद् में सदस्यों की संख्या बढ़ाई और उसे कानून बनाने के लिए नियम बनाने के अधिकार दिए।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम भारतीय प्रतिनिधियों को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में पहला कदम था, भले ही उनकी शक्तियाँ सीमित थीं।

 

Question 2. 1892 के भारत परिषद् अधिनियम का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रावधान क्या था?
Answer: 1892 के भारत परिषद् अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान चुनाव पद्धति की शुरुआत करना था। हालांकि, निर्वाचन की यह पद्धति पूरी तरह से अप्रत्यक्ष थी, लेकिन इसने भारत में चुनावी प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त किया।
In simple words: 1892 के अधिनियम का सबसे खास बात यह थी कि इसने अप्रत्यक्ष चुनाव का तरीका शुरू किया।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम भारतीयों को विधान परिषदों में सवाल पूछने और बजट पर चर्चा करने का अधिकार देकर उनकी राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाया।

 

Question 3. 1909 के अधिनियम के जन्मदाता कौन थे?
Answer: 1909 के अधिनियम के जन्मदाता भारत सचिव मार्ले तथा गवर्नर जनरल लॉर्ड मिन्टो थे। इसे मार्ले-मिन्टो सुधारों के नाम से भी जाना जाता है। इन सुधारों का उद्देश्य भारतीयों को प्रशासन में थोड़ा और शामिल करना था।
In simple words: 1909 के अधिनियम को भारत सचिव मार्ले और गवर्नर जनरल लॉर्ड मिन्टो ने बनाया था।

🎯 Exam Tip: मार्ले-मिन्टो सुधारों ने साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति की शुरुआत की, जिसने भारत में धार्मिक आधार पर विभाजन को मजबूत किया।

 

Question 5. 1919 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा विषयों को किस प्रकार बाँटा गया?
Answer: 1919 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा विषयों को दो मुख्य सूचियों में बांटा गया था:
1. केंद्रीय सूची: इसके मुख्य विषय विदेशी मामले, रक्षा, डाक, तार, सार्वजनिक ऋण आदि थे। ये विषय केंद्र सरकार के नियंत्रण में रहते थे।
2. प्रांतीय सूची: इसके मुख्य विषय स्थानीय स्वशासन, शिक्षा, चिकित्सा, भूमि कर, अकाल सहायता और कृषि व्यवस्था आदि थे। इन विषयों पर प्रांतीय सरकारें कानून बना सकती थीं।
In simple words: 1919 के अधिनियम ने विषयों को केंद्रीय और प्रांतीय सूची में बांटा। केंद्रीय सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय थे, जबकि प्रांतीय सूची में स्थानीय महत्व के विषय थे।

🎯 Exam Tip: यह विभाजन द्वैध शासन प्रणाली का आधार बना, जिससे प्रांतों में कुछ विषयों पर भारतीय मंत्रियों को सीमित अधिकार मिले।

 

Question 6. किस अधिनियम के द्वारा बर्मा को ब्रिटिश भारत से पृथक् कर दिया गया?
Answer: बर्मा को 1935 के भारत सरकार अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश भारत से अलग कर दिया गया। यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव था, जिसने भारत और बर्मा के बीच कानूनी और राजनीतिक संबंध को समाप्त कर दिया।
In simple words: 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग कर दिया।

🎯 Exam Tip: 1935 का अधिनियम ब्रिटिश भारत के कई क्षेत्रों के प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा था, जिसमें बर्मा को अलग करना भी शामिल था।

 

Question 7. 1935 के भारत सरकार अधिनियम की दो विशेषताएँ बताइये
Answer: 1935 के भारत सरकार अधिनियम की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत में सबसे पहले एक संघात्मक सरकार की स्थापना की गई, जिससे विभिन्न प्रांतों और रियासतों को एक साथ लाने की कोशिश की गई।
2. इस अधिनियम के द्वारा एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई, जो विभिन्न इकाइयों के बीच विवादों को हल करने का काम करता था। यह आज के सर्वोच्च न्यायालय की नींव थी।
In simple words: 1935 के अधिनियम ने भारत में एक संघात्मक सरकार बनाई और एक संघीय न्यायालय की स्थापना की।

🎯 Exam Tip: 1935 के अधिनियम के कई प्रावधानों को स्वतंत्र भारत के संविधान में सीधे तौर पर शामिल किया गया है, जो इसकी दूरगामी प्रासंगिकता को दर्शाता है।

 

Question 8. किसे भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा गया था?
Answer: 1854 के चार्ल्स वुड डिस्पैच को भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा गया था। इस डिस्पैच ने भारत में शिक्षा प्रणाली के विकास के लिए एक व्यापक योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा का पुनर्गठन शामिल था।
In simple words: 1854 के चार्ल्स वुड डिस्पैच को भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वुड डिस्पैच ने अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं दोनों के माध्यम से शिक्षा पर जोर दिया और शिक्षा के माध्यम से पश्चिमी ज्ञान के प्रसार का लक्ष्य रखा।

 

Question 9. चार्ल्स वुड डिस्पैच क्या था?
Answer: 1854 का चार्ल्स वुड डिस्पैच एक शिक्षा नीति दस्तावेज था, जिसके तहत उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रखा गया और साथ ही देशी भाषाओं को भी बढ़ावा दिया गया। इसका उद्देश्य भारत में शिक्षा के लिए एक संगठित प्रणाली स्थापित करना था, जिसमें प्राथमिक, माध्यमिक और विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षा के प्रावधान शामिल थे।
In simple words: चार्ल्स वुड डिस्पैच 1854 की एक शिक्षा योजना थी, जिसमें अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया गया और देशी भाषाओं को भी समर्थन दिया गया।

🎯 Exam Tip: वुड डिस्पैच ने भारत में आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नींव रखी, जिसमें शिक्षा विभाग की स्थापना और विश्वविद्यालयों की स्थापना की सिफारिशें शामिल थीं।

 

Question 10. सर जॉन सर्जेट योजना से आप क्या समझते हैं?
Answer: सर जॉन सर्जेट योजना 1944 में तैयार की गई थी। इस योजना के तहत भारत में प्राथमिक विद्यालय, उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित करने का प्रावधान था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में युद्ध के बाद की शिक्षा जरूरतों को पूरा करना और साक्षरता दर में सुधार करना था।
In simple words: सर जॉन सर्जेट योजना 1944 की एक शिक्षा योजना थी, जिसका मकसद प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल खोलना था।

🎯 Exam Tip: सर्जेट योजना ने स्वतंत्र भारत के शिक्षा नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया, खासकर सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य के लिए।

 

Question 12. शक्ति पृथक्करण सिद्धांत से आप क्या समझते हैं?
Answer: शक्ति पृथक्करण सिद्धांत का मतलब है कि सरकार की शक्तियों को अलग-अलग संस्थाओं में बांट दिया जाए, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई एक संस्था बहुत ताकतवर होकर गैर-कानूनी काम न कर सके और शासन में संतुलन बना रहे।
In simple words: शक्ति पृथक्करण सिद्धांत कहता है कि सरकार की ताकत को अलग-अलग हिस्सों में बांट देना चाहिए ताकि कोई एक हिस्सा बहुत शक्तिशाली न हो जाए।

🎯 Exam Tip: यह सिद्धांत लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने और नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करने में मदद करता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 1892 के भारत परिषद् अधिनियम से आप क्या समझते हैं?
Answer: 1892 का भारत परिषद् अधिनियम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद संवैधानिक सुधारों की बढ़ती मांग के जवाब में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
1. इस अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान चुनाव पद्धति की शुरुआत करना था, भले ही वह अप्रत्यक्ष थी।
2. निर्वाचन की पद्धति अप्रत्यक्ष थी और निर्वाचित सदस्यों को मनोनीत सदस्यों का दर्जा दिया जाता था, जो उनके अधिकारों को सीमित करता था।
3. इस अधिनियम द्वारा केंद्रीय तथा प्रांतीय विधान परिषदों को सदस्य संख्या में वृद्धि की गई, जिससे भारतीयों की भागीदारी बढ़ी।
In simple words: 1892 का भारत परिषद् अधिनियम कांग्रेस की मांग पर आया था। इसने अप्रत्यक्ष चुनाव और परिषदों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम भारतीयों को प्रशासन में शामिल करने का एक शुरुआती प्रयास था, लेकिन इसने वास्तविक शक्ति ब्रिटिश सरकार के पास ही रखी।

 

Question 2. 1909 के भारत परिषद् अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
Answer: 1909 को भारत परिषद् अधिनियम मार्ले-मिन्टो सुधारों के नाम से जाना जाता है, जिसके जन्मदाता भारत सचिव मार्ले और गवर्नर जनरल लॉर्ड मिन्टो थे। इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
1. इस अधिनियम द्वारा मुसलमानों के लिए अलग मतदान और अलग चुनाव क्षेत्रों की स्थापना की गई। इसी कारण मार्ले तथा मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहा जाता है।
2. भारत में शासन करने के लिए अंग्रेजों ने 'फूट डालो राज करो' की नीति अपनाई, जिससे विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच विभाजन पैदा किया गया।
In simple words: 1909 के अधिनियम को मार्ले-मिन्टो सुधार कहते हैं। इसने मुसलमानों के लिए अलग चुनाव शुरू किए और 'फूट डालो राज करो' की नीति अपनाई।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम भारत में धार्मिक आधार पर राजनीतिक विभाजन को संस्थागत बनाने वाला पहला बड़ा कदम था, जिसके दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम हुए।

 

Question 3. इल्बर्ट बिल सम्बन्धी विवाद क्या था? बतलाइये।
Answer: इल्बर्ट बिल सम्बन्धी विवाद 1883 में हुआ था। इस बिल के तहत भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय लोगों के मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार दिया जाना था, जो पहले केवल यूरोपीय न्यायाधीशों के पास था। इस बिल का यूरोपीय समुदाय ने जोरदार विरोध किया, क्योंकि वे भारतीय न्यायाधीशों के सामने पेश नहीं होना चाहते थे। इस विवाद ने नस्लीय भेदभाव और भारतीयों के प्रति ब्रिटिश मानसिकता को उजागर किया।
In simple words: इल्बर्ट बिल विवाद 1883 में हुआ था, जब भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय लोगों के मुकदमों की सुनवाई का अधिकार देने का प्रस्ताव आया, जिसका यूरोपीय लोगों ने विरोध किया।

🎯 Exam Tip: इल्बर्ट बिल विवाद ने भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत किया और उन्हें ब्रिटिश सरकार के नस्लीय पूर्वाग्रहों के प्रति अधिक जागरूक किया।

 

Question 5. अंग्रेजों ने भारत में फूट डालो राज करो' नीति को किस प्रकार क्रियान्वित किया?
Answer: अंग्रेजों ने भारत में 'फूट डालो राज करो' नीति को कई तरीकों से लागू किया:
1. अंग्रेजों ने 1858 के अधिनियम के बाद सेना के रेजिमेंटों को जाति, समुदाय और धर्म के आधार पर बांट दिया, जिससे भारतीय सैनिकों के बीच एकता कम हो गई।
2. 1909 के अधिनियम द्वारा मुसलमानों के लिए अलग मतदान और अलग चुनाव क्षेत्र बनाकर इस नीति को आगे बढ़ाया गया।
3. 1919 और 1935 के अधिनियमों में भी इस नीति का और विस्तार किया गया, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच राजनीतिक विभाजन गहरा हुआ।
In simple words: अंग्रेजों ने 'फूट डालो राज करो' नीति को सेना को बांटकर और मुसलमानों के लिए अलग चुनाव करवाकर लागू किया।

🎯 Exam Tip: यह नीति ब्रिटिश साम्राज्य को मजबूत करने का एक शक्तिशाली साधन थी, जिसने भारतीय समाज को कमजोर किया और दीर्घकालिक विभाजनकारी प्रभाव छोड़े।

 

Question 6. ब्रिटिशकालीन शिक्षा के प्रभाव से सामाजिक व्यवस्था में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
Answer: ब्रिटिशकालीन शिक्षा के प्रभाव से सामाजिक व्यवस्था में हुए प्रमुख परिवर्तन निम्नलिखित थे:
1. अंग्रेजी शिक्षा लागू करके ईसाई धर्म का प्रचार किया गया, जिससे कुछ भारतीयों में धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहन मिला।
2. अंग्रेजी पढ़कर लोग पश्चिमी सभ्यता, संस्कृति और राजनीति को समझने लगे और उसे अपनाने लगे, जिससे भारतीय समाज में एक नया शिक्षित वर्ग उभरा।
3. अंग्रेजों द्वारा भारतीय धर्मों और रीति-रिवाजों की आलोचना किए जाने पर शिक्षित वर्ग ने इसका तर्कपूर्ण विरोध करना शुरू किया, जिससे सामाजिक चेतना बढ़ी।
4. ब्रिटिश शिक्षा के प्रभाव से भारतीय समाज की दोषपूर्ण प्रथाओं को समझा गया तथा कानून बनाकर सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या वध और दास प्रथा आदि को अवैध घोषित किया गया, जिससे सामाजिक सुधारों को बल मिला।
In simple words: ब्रिटिश शिक्षा से ईसाई धर्म का प्रचार हुआ, लोग पश्चिमी संस्कृति समझने लगे, समाज में कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई गई और कई सामाजिक सुधार हुए।

🎯 Exam Tip: अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीय बुद्धिजीवियों को पश्चिमी विचारों से परिचित कराया, जिससे भारतीय राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार आंदोलनों को नई दिशा मिली।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. ब्रिटिशकालीन शासन व्यवस्था में शिक्षा एवं सामाजिक व्यवस्था में क्या परिवर्तन हुए ? वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिशकालीन शासन व्यवस्था में शिक्षा एवं सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इन परिवर्तनों ने भारतीय समाज और उसकी सोच को गहराई से प्रभावित किया।

ब्रिटिशकालीन शासन व्यवस्था में शिक्षा में हुए परिवर्तन-

1. अंग्रेजी शिक्षा लागू करके ईसाई धर्म का प्रचार किया गया, क्योंकि ब्रिटिश मिशनरियों ने शिक्षा को धर्म प्रचार का माध्यम बनाया।
2. लोग अंग्रेजी पढ़कर पश्चिमी सभ्यता तथा संस्कृति और राजनीति को समझने लगे और उसे ग्रहण करने लगे, जिससे एक नया शिक्षित वर्ग उत्पन्न हुआ।
3. अंग्रेजों द्वारा भारतीय धर्मों तथा रीति-रिवाजों की आलोचना की जाती थी, जिस पर शिक्षित वर्ग उनको तर्कपूर्ण विरोध करता था। यह भारतीयों में आत्म-सम्मान की भावना को बढ़ावा देने लगा।
4. कानून बनाकर सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या वध, दास प्रथा आदि को अवैध घोषित किया गया, जिससे सामाजिक सुधारों को कानूनी समर्थन मिला।

ब्रिटिशकालीन शासन व्यवस्था में सामाजिक व्यवस्था में हुए परिवर्तन-

1. अंग्रेजी शिक्षा लागू करके ईसाई धर्म का प्रचार किया गया, जिससे भारतीय समाज में धर्म परिवर्तन की प्रवृत्ति बढ़ी।
2. लोग अंग्रेजी पढ़कर पश्चिमी सभ्यता एवं संस्कृति और राजनीति को समझने लगे तथा उसे ग्रहण करने लगे, जिसने भारतीय समाज के पारंपरिक मूल्यों पर प्रभाव डाला।
3. अंग्रेजों द्वारा भारतीय धर्मो तथा रीति-रिवाजों की आलोचना की जाती थी। इस पर शिक्षित वर्ग उसको तर्कपूर्ण विरोध करता था, जिससे सामाजिक जागृति आई।
4. कानून बनाकर सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या वध, दास प्रथा आदि को अवैध घोषित किया गया, जिसने भारतीय समाज को आधुनिकता की ओर बढ़ाया और मानवीय गरिमा को स्थापित किया।
In simple words: ब्रिटिश शासन में अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीय समाज को बदला। इससे ईसाई धर्म का प्रचार हुआ, पश्चिमी विचारों का प्रभाव बढ़ा और सामाजिक कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा को खत्म करने के लिए कानून बने।

🎯 Exam Tip: इस तरह के दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में, शिक्षा और सामाजिक सुधारों के बीच के संबंध को स्पष्ट करना और दोनों क्षेत्रों में हुए परिवर्तनों का संतुलित विवरण देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. 1935 के भारत शासन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान लिखिए।
Answer: 1935 के भारत शासन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
(1) इस अधिनियम द्वारा भारत में सबसे पहले एक संघात्मक सरकार की स्थापना की गई, जिसमें प्रांत और रियासतें शामिल थीं।
(2) प्रांतों में लागू द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया और इसके बजाय केंद्र में द्वैध शासन को लागू कर दिया गया, जिससे केंद्र सरकार के अधिकार बढ़ गए।
(3) इस अधिनियम के द्वारा एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई, जो आज के सर्वोच्च न्यायालय की नींव थी।
(4) इस अधिनियम के अंतर्गत बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग कर दिया गया, जिससे दोनों क्षेत्रों का प्रशासनिक ढांचा अलग हो गया।
(5) केंद्रीय सरकार की कार्यकारिणी पर गवर्नर जनरल का नियंत्रण था, जिससे ब्रिटिश सत्ता कायम रही।
(6) केंद्रीय विधान मंडल के दो सदन थे, जो इस प्रकार थे:
1. राज्यसभा- इसे उच्च सदन कहा गया। यह एक स्थायी संस्था थी। राज्यसभा में कुल 260 सदस्य थे, जिनमें से 104 सदस्य देशी रियासतों से और शेष 156 ब्रिटिश प्रांतों के थे। एक तिहाई सदस्य हर तीन साल में अवकाश ग्रहण करते थे और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते थे।
2. संघीय सभा- इसे निम्न सदन कहा जाता था। इस सभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता था। इसे समय से पहले भी भंग किया जा सकता था। इसकी सदस्य संख्या 375 निर्धारित की गई, जिनमें से 125 स्थान देशी रियासतों को और शेष 250 स्थानों में से 246 स्थान साम्प्रदायिक व अन्य वर्गों को तथा चार स्थान प्रांतीय थे जो व्यापार, उद्योग तथा श्रम को दिए गए।
(7) इस अधिनियम के विषयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया:
1. संघ सूची: इसमें सेना, विदेशी विभाग, डाक, तार, रेल, संघ लोक सेवा, संचार, बीमा आदि जैसे राष्ट्रीय महत्व के 59 विषय थे।
2. प्रांतीय सूची: इसमें स्थानीय स्वशासन, कानून और व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, नहरे, शिक्षा, चिकित्सा, भूमि कर, अकाल सहायता और कृषि व्यवस्था आदि जैसे 54 विषय थे।
3. समवर्ती सूची: इसमें 36 विषय रखे गए थे, जिन पर केंद्र और प्रांत दोनों कानून बना सकते थे।
In simple words: 1935 के अधिनियम ने भारत में संघीय सरकार, संघीय न्यायालय, और केंद्र में द्वैध शासन की शुरुआत की। इसने विषयों को संघ, प्रांतीय और समवर्ती सूची में बांटा और बर्मा को अलग कर दिया।

🎯 Exam Tip: 1935 का अधिनियम भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और इसके संघीय प्रावधान, शक्तियों का विभाजन और न्यायिक संरचना आज भी प्रासंगिक हैं।

 

Question 3. ब्रिटिश काल में राजस्थान की रियासतों में न्यायिक व्यवस्था में हुए प्रमुख परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिश काल में राजस्थान की रियासतों में न्यायिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिससे न्याय प्रणाली अधिक संगठित और ब्रिटिश नियंत्रण में आ गई।
(1) देशी रियासतों द्वारा अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था अपनाना- भारत की आजादी से पहले राजस्थान में अजमेर के अलावा 19 देशी रियासतें थीं। इन रियासतों में अंग्रेज रेजिडेंट की निगरानी में ही न्यायिक-शासन चलता था। धीरे-धीरे कई रियासतों ने अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था के कुछ हिस्सों को अपनाना शुरू कर दिया। 1839 में जब जयपुर की राजमाता को अभिभावक पद से हटाया गया, तब ब्रिटिश एजेंट की देखरेख में एक शासन परिषद् बनी। इस समय राज्य में दीवानी और फौजदारी अदालतों की स्थापना की गई। ब्रिटिश एजेंट धर्सबी ने न्याय विभाग को शासन विभाग से अलग कर दिया। जयपुर राज्य में यह व्यवस्था 1852 तक चली। बाद में चार सदस्यों की अपील अदालतों की स्थापना की गई। इसके दो जज अपीलें सुनते थे और दो जज फौजदारी मुकदमे सुनते थे। कुछ समय बाद यह परिषद दो भागों में बंट गई, पहले भाग को 'इजलास' और दूसरे भाग को 'महकमा खास' कहते थे। महकमा खास ही राज्य का मुख्य न्यायालय था।
(2) राजस्थान की सभी रियासतों में ब्रिटिश न्याय व्यवस्था के अनुरूप न्याय व्यवस्था लागू करना- 1930 ई. तक राजस्थान की सभी रियासतों में ब्रिटिश न्याय व्यवस्था के अनुरूप न्याय व्यवस्था लागू की गई। यह घोषणा की गई कि न्याय के सामने सभी व्यक्ति समान माने जाएंगे। जाति, धर्म, वंश, पद और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के आधार पर न्याय करते समय भेदभाव नहीं किया जाएगा। न्याय व्यवस्था के सभी कार्य लिखित रूप से किए जाने लगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ी।
In simple words: ब्रिटिश काल में राजस्थान की रियासतों में न्यायिक व्यवस्था बदली। देशी रियासतों ने अंग्रेजी न्याय प्रणाली अपनाई, अदालतें बनीं और 1930 तक सभी रियासतों में ब्रिटिश न्याय व्यवस्था लागू हो गई, जहाँ न्याय में कोई भेदभाव नहीं होता था।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश न्याय प्रणाली ने भारतीय रियासतों में कानूनी एकरूपता लाने का प्रयास किया, लेकिन यह अक्सर ब्रिटिश हितों की रक्षा के लिए भी इस्तेमाल की जाती थी।

 

Question 4. ब्रिटिश काल में राजस्थान की रियासतों में हुए प्रमुख प्रशासनिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिश काल में राजस्थान की रियासतों में हुए प्रमुख प्रशासनिक परिवर्तन इस प्रकार थे:
(1) 1858 ई. के पश्चात् ब्रिटिश सरकार के अधीनस्थ शासकों का नाममात्र का शासक रहना- 1858 के बाद ब्रिटिश सरकार के अधीन शासक केवल नाममात्र के शासक रह गए। वे कंपनी सरकार के सेवक बनकर काम करते थे। शासक पड़ोसी राजा के साथ भी स्वतंत्र रूप से व्यवहार नहीं कर सकते थे। ब्रिटिश सरकार उन्हें विदेश यात्रा पर जाने के लिए भी मजबूर कर सकती थी, जैसे अलवर के शासक को इंग्लैंड जाने के लिए बाध्य किया गया। देशी रियासतों के शासकों को वैवाहिक संबंधों में भी ब्रिटिश सरकार की अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे उनकी स्वायत्तता कम हो गई।
(2) अभिभावक परिषद् का गठन – जब कोई राजकुमार नाबालिग होता था, तो ब्रिटिश सरकार पॉलिटिकल एजेंट की अध्यक्षता में 'अभिभावक परिषद' का गठन करती थी। इसके माध्यम से रियासत का शासन प्रबंधन ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ जाता था, जिससे रियासती मामलों में ब्रिटिश हस्तक्षेप बढ़ जाता था।
(4) जिलों का शासन- ब्रिटिश काल में परगनों को जिलों में बदल दिया गया और जिलाधीशों द्वारा जिले शासित होने लगे। अब जिलाधीश अपने जिले का पूर्ण रूप से मालिक हो गया। उसके अधीन नाजिम, तहसीलदार, न्यायिक तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी आदि कार्य करने लगे। इनका संबंध मुख्य रूप से लगान वसूली और किसानों की भूमि संबंधी समस्याओं का निपटारा करना होता था। न्याय का कार्य जिला मजिस्ट्रेट और शांति व्यवस्था का कार्य पुलिस अधिकारी करने लगे, जिससे प्रशासन और न्याय का विकेंद्रीकरण हुआ।
In simple words: ब्रिटिश काल में राजा नाममात्र के शासक रह गए थे और उन्हें ब्रिटिश सरकार की अनुमति से काम करना पड़ता था। नाबालिग राजकुमारों के लिए अभिभावक परिषद् बनाई गई और जिलों का शासन जिलाधीशों के हाथ में आ गया, जिससे प्रशासन पर ब्रिटिश नियंत्रण मजबूत हुआ।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश प्रशासनिक परिवर्तनों ने स्थानीय शासन में ब्रिटिश नियंत्रण को मजबूत किया और देशी राजाओं की शक्ति को धीरे-धीरे कम कर दिया।

 

Question 5. 1861 के भारत परिषद् अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
Answer: 1861 के भारत परिषद् अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. इस अधिनियम द्वारा गवर्नर की कार्यकारिणी परिषद् के साधारण सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 कर दी गई, जिससे अधिक विशेषज्ञता लाई जा सके।
2. गवर्नर जनरल को कार्यपालिका को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियम तथा आदेश बनाने के अधिकार दिए गए, जिससे प्रशासन में लचीलापन आया।
3. विधान परिषद् को अब संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए कानून और नियम बनाने की शक्ति प्रदान की गई, जिससे विधायी प्रक्रिया में केंद्रीकरण आया।
4. किसी भी बिल को कानून बनाने के लिए गवर्नर जनरल की स्वीकृति लेनी आवश्यक थी, जिससे उसकी सर्वोच्चता बनी रही।
5. विधान परिषद् द्वारा पारित कोई विधेयक सपरिषद् भारत सचिव से विचार-विमर्श करने पर इंग्लैंड का सम्राट इसे रद्द कर सकता था, जिससे अंतिम निर्णय ब्रिटिश सरकार के हाथ में रहा।
6. गवर्नर जनरल को विशेषाधिकार दिया गया, जिससे वह कुछ मामलों में परिषद् की सलाह के बिना भी कार्य कर सकता था।
7. गवर्नर किसी प्रांतीय सरकार द्वारा बनाए गए कानून को संशोधित या रद्द कर सकता था, जिससे केंद्र का प्रांतीय सरकारों पर नियंत्रण बना रहा।
In simple words: 1861 के अधिनियम ने गवर्नर की कार्यकारी परिषद् के सदस्यों की संख्या बढ़ाई, गवर्नर जनरल को कानून बनाने और प्रांतों पर नियंत्रण रखने के अधिकार दिए, और ब्रिटिश सम्राट को कानूनों को रद्द करने की शक्ति दी।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम भारतीयों को विधान परिषदों में शामिल करने की शुरुआत थी, लेकिन गवर्नर जनरल की शक्तियां अभी भी बहुत अधिक थीं।

 

Question 6. 1919 के भारत सरकार अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए
Answer: 1919 के भारत सरकार अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(1) 1919 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था लागू की गई, जिससे प्रांतों में आंशिक उत्तरदायी सरकार की स्थापना हुई। इसमें कुछ विषयों को भारतीयों को दिया गया, जबकि महत्वपूर्ण विषय अंग्रेजों के पास रहे।
(2) इस अधिनियम को लागू कर ब्रिटिश सरकार यह चाहती थी कि भारत के एक प्रभावशाली वर्ग को अपना समर्थक बना लिया जाए, ताकि उनके शासन को वैधता मिल सके।
(3) भारत सचिव को भारत सरकार से जो वेतन मिलता था, इस अधिनियम द्वारा अब वह अंग्रेजी कोष से मिलना निश्चित किया गया, जिससे भारतीय राजस्व पर बोझ कम हुआ।
(4) इस अधिनियम द्वारा विषयों को निम्नांकित रूप से केंद्र तथा प्रांतों में बांटा गया:
1. केंद्रीय सूची के मुख्य विषय विदेशी मामले, रक्षा, डाक, तार, सार्वजनिक ऋण आदि थे, जो केंद्र सरकार के अधीन थे।
2. प्रांतीय सूची में स्थानीय स्वशासन, शिक्षा, चिकित्सा, भूमि कर, अकाल सहायता, कृषि व्यवस्था आदि थे, जो प्रांतीय सरकारों के अधीन थे।
In simple words: 1919 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन शुरू किया, ताकि भारतीयों को प्रशासन में थोड़ा हिस्सा मिले और ब्रिटिश समर्थक वर्ग बन सके। इसने विषयों को केंद्रीय और प्रांतीय सूचियों में भी बांटा।

🎯 Exam Tip: इस अधिनियम को मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहते हैं, और यह भारतीय संवैधानिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने भविष्य के स्वशासन की नींव रखी।

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