RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 21 लोक संस्कृति

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Question 1. राजस्थान के अन्य महत्वपूर्ण लोक शक्तिपीठों से संबंधित कथानक, प्रसंगों का संकलन कीजिए।
Answer: राजस्थान के अन्य महत्वपूर्ण लोक शक्ति पीठ इस प्रकार हैं:
1. जालौर की सुंधा माता: यह प्रसिद्ध मंदिर अरावली की पहाड़ियों में 1220 मीटर की ऊंचाई पर सुंधा पहाड़ पर स्थित है। यहां बड़े पत्थर के टुकड़े पर माँ चामुंडा की प्रतिमा स्थापित है। ऐसा माना जाता है कि सुधा पर्वत पर देवी सती का सिर गिरा था, जिसके कारण उन्हें अघटेश्वरी नाम से भी जाना जाता है।
2. ज्वाला माता का मंदिर: यह जयपुर से 45 किलोमीटर पश्चिम में द्रढांड क्षेत्र के प्राचीन कस्बे जोबनेर में स्थित है। देवी सती का जानु भाग (घुटना) जोबनेर पर्वत पर गिरा था, इसलिए उन्हें वाला देवी के नाम से जाना जाता है।
3. मणिदेविका शक्तिपीठ: यह पुष्कर में स्थित एक ग्रह मंदिर है और इसे गायत्री के नाम से भी जाना जाता है। यहां देवी सती की कलाइयाँ गिरी थीं।
4. विराट की अंबिका शक्तिपीठ: यह जयपुर के विराटग्राम में स्थित है, जहां माता की दक्षिण पादांगुलियां गिरी थीं। यह मंदिर अंबिका शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध है। इन शक्तिपीठों का महत्व भक्तों के लिए बहुत अधिक है, जो इन स्थानों पर आकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
In simple words: राजस्थान में कई महत्वपूर्ण शक्तिपीठ हैं, जैसे सुंधा माता, ज्वाला माता, मणिदेविका और अंबिका शक्तिपीठ। हर शक्तिपीठ से एक कहानी जुड़ी है कि कैसे देवी सती के शरीर के अंग वहां गिरे थे, जिससे वह स्थान पवित्र हो गया।

🎯 Exam Tip: लोक शक्तिपीठों के वर्णन में हमेशा स्थान, संबंधित देवी का नाम और उसके पीछे की पौराणिक कहानी या मान्यता को स्पष्ट रूप से शामिल करें।

 

Question 2. आपके अंचल में प्रचलित और कौन-कौन से लोकवाद्य हैं? इनके चित्रों सहित इन वाद्यों की जानकारी संकलित कीजिए।
Answer: हमारे क्षेत्र में निम्नलिखित लोकवाद्य प्रचलित हैं, जो यहाँ की सांस्कृतिक पहचान हैं:
1. नगाड़ा: यह भैंस की खाल से बना हुआ एक ताल वाद्य यंत्र है। इसे लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है और इसका उपयोग उत्सवों और लोकनाट्यों में किया जाता है।
2. मंजीरा: यह पीतल और कांसे का बना एक गोलाकार वाद्य यंत्र है। इसका उपयोग भजन-कीर्तन और धार्मिक संगीत में लय देने के लिए होता है।
3. पूंगी: प्रचलित परंपरा के अनुसार, इस वाद्य को बजाकर सर्प काटे हुए व्यक्ति का इलाज किया जाता है। यह कालबेलिया समुदाय का एक प्रमुख वाद्य यंत्र है। ये वाद्य यंत्र न केवल मनोरंजन का साधन हैं बल्कि क्षेत्रीय परंपराओं और विश्वासों का भी हिस्सा हैं।
In simple words: हमारे इलाके में नगाड़ा, मंजीरा और पूंगी जैसे लोक वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं। नगाड़ा खाल से बना होता है, मंजीरा पीतल से और पूंगी सांप के काटने का इलाज करने के लिए बजाई जाती है।

🎯 Exam Tip: लोक वाद्यों का वर्णन करते समय उनकी बनावट (किससे बने हैं), बजाने का तरीका और उनके उपयोग (किस अवसर पर या किस समुदाय द्वारा बजाए जाते हैं) को जरूर बताएं।

 

Question 3. आपके क्षेत्र में किए जाने वाले लोकनृत्य और नृत्य के दौरान गाए जाने वाले गीतों की सचित्र जानकारी संकलित कीजिए।
Answer: हमारे क्षेत्र में चंग नृत्य मुख्य रूप से होली के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य के दौरान गाए जाने वाले गीतों का विषय भी होली से संबंधित होता है। यह नृत्य सामुदायिक एकता और उल्लास को दर्शाता है। यह एक सामूहिक नृत्य है जिसमें लोग घेरा बनाकर या समूह में नाचते हैं।
In simple words: हमारे क्षेत्र में होली पर चंग नृत्य किया जाता है। इस नृत्य में होली से जुड़े गीत गाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी लोकनृत्य का वर्णन करते समय उसके आयोजन का अवसर, उसमें गाए जाने वाले गीतों का विषय और नृत्य की प्रमुख विशेषताएँ बतानी चाहिए।

 

Question 4. राजस्थान की लोक देवियों के संबंध में प्रचलित आख्यानों, जनमान्यताओं, जनश्रुतियों को सूचीबद्ध कीजिए।
Answer: राजस्थान की लोक देवियों के संबंध में कई प्रचलित मान्यताएँ और कहानियाँ हैं, जो लोगों की आस्था का केंद्र हैं:
1. महामाया माता: इन्हें बच्चों की रक्षक लोक देवी माना जाता है। इनके बारे में स्त्रियों की यह मान्यता है कि इनकी उपासना करने से प्रसव बिना किसी परेशानी के पूरा होता है और बच्चा स्वस्थ व खुश रहता है। यह एक महत्वपूर्ण विश्वास है जो माताओं को सांत्वना देता है।
2. बड़ली माता: इनके संबंध में यह मान्यता है कि जो व्यक्ति इन्हें तांती (धागा) बाँधता है, उसकी बीमारी ठीक हो जाती है। यह स्थानीय उपचार और विश्वास का एक उदाहरण है।
In simple words: राजस्थान में महामाया माता को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है, जिनकी पूजा से सुरक्षित प्रसव होता है। बड़ली माता के बारे में यह माना जाता है कि उन्हें तांती बाँधने से बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: लोक देवियों के वर्णन में उनकी मुख्य भूमिका (जैसे बाल रक्षक), उनसे जुड़ी विशिष्ट मान्यता (जैसे तांती बाँधना) और लोगों के विश्वास को उजागर करें।

 

Question 5. राजस्थान के लोक देवताओं के चित्रों का संकलन कीजिए।
Answer: राजस्थान के लोक देवता स्थानीय संस्कृति और जनमानस का अभिन्न अंग हैं। इनके चित्र स्थानीय घरों और मंदिरों में देखे जा सकते हैं। प्रमुख लोक देवता इस प्रकार हैं:
* गोगाजी
* तेजाजी
* रामदेव जी
* पाबूजी
इन सभी देवताओं को राजस्थान के लोग बहुत सम्मान देते हैं और इनकी कहानियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं।
In simple words: राजस्थान के कुछ खास लोक देवता हैं गोगाजी, तेजाजी, रामदेव जी और पाबूजी। लोग इनकी बहुत इज्जत करते हैं और इनकी कहानियाँ सुनते हैं।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के नाम याद रखें और उनसे जुड़ी सामान्य जानकारियाँ भी जानें, जैसे उनके मुख्य कार्य या पहचान।

 

Question 2. 'तरतई' शब्द का क्या अर्थ है?
Answer: 'तरतई' शब्द 'त्रितयी' का बिगड़ा हुआ रूप है। इसका अर्थ 'त्रित्व' यानी 'तीन' से युक्त होता है। यह शब्द किसी तीन चीजों के समूह या तीन के गुण को दर्शाता है।
In simple words: 'तरतई' शब्द का मतलब 'तीन' से जुड़ा हुआ है। यह 'त्रितयी' का एक पुराना रूप है।

🎯 Exam Tip: ऐसे शब्दों का अर्थ बताते समय मूल शब्द और उसके सरल अर्थ दोनों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. कैला देवी के मेले में कौनसा विशेष नृत्य किया जाता है?
Answer: कैला देवी के मेले में 'लांगुरिया' नामक विशेष नृत्य किया जाता है। यह नृत्य भक्तों द्वारा देवी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है और यह मेले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लांगुरिया नृत्य के साथ लांगुरिया गीत भी गाए जाते हैं।
In simple words: कैला देवी के मेले में एक खास नाच होता है, जिसका नाम 'लांगुरिया' नृत्य है।

🎯 Exam Tip: मेले या धार्मिक आयोजनों से जुड़े विशिष्ट नृत्यों के नाम और उनकी विशेषता को याद रखें।

 

Question 4. शहनाई वाद्य यंत्र किससे बनाया जाता है?
Answer: शहनाई वाद्य यंत्र शीशम या सागवान की लकड़ी से बनाया जाता है। इसके ऊपरी सिरे पर एक 'तूंती' लगाई जाती है, जो ताड़ के पत्ते से बनी होती है। यह एक सुंदर और मधुर ध्वनि उत्पन्न करने वाला वाद्य यंत्र है।
In simple words: शहनाई शीशम या सागवान की लकड़ी से बनती है। इसके ऊपर ताड़ के पत्ते से बनी एक छोटी सी तूंती लगी होती है।

🎯 Exam Tip: वाद्य यंत्रों की बनावट में प्रयुक्त सामग्री और उनके विशिष्ट भागों (जैसे तूंती) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. राजस्थान में प्रचलित लोक वाद्य यंत्रों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: राजस्थान में प्रचलित लोक वाद्य यंत्रों को मुख्य रूप से उनके बजाने के तरीके के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
(क) फूँक से बजने वाले वाद्य यंत्र:
1. तुरही
2. अलगोजा
3. पूंगी
4. शहनाई
(ग) तार लगे हुए वाद्य यंत्र:
1. रावणहत्था
2. जन्तर
3. सारंगी
4. तंदूरा
(घ) चमड़ा लगे हुए वाद्य यंत्र:
1. भपंग
2. चंग
3. मादल
4. इकतारा
5. नगाड़ा
यह वर्गीकरण हमें राजस्थान के संगीत की विविधता को समझने में मदद करता है।
In simple words: राजस्थान के वाद्य यंत्रों को तीन मुख्य तरीकों से बांटा जा सकता है: फूँक कर बजाए जाने वाले (जैसे तुरही, शहनाई), तार वाले (जैसे रावणहत्था, सारंगी) और चमड़े से बने हुए (जैसे नगाड़ा, चंग)।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण करते समय प्रत्येक श्रेणी के लिए कम से कम 2-3 उदाहरण देना सुनिश्चित करें। यह दर्शाता है कि आपको विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों की अच्छी समझ है।

 

Question 6. राजस्थान में लोक संस्कृति के संरक्षक संस्थान कौन-कौन से हैं?
Answer: राजस्थान में लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण संस्थान सक्रिय हैं, जो यहाँ की समृद्ध विरासत को बनाए रखने का काम करते हैं। इनमें से प्रमुख संस्थान निम्नलिखित हैं:
* राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर
* राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर
* जयपुर कथक केंद्र, जयपुर
* भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर
* रवींद्र मंच, जयपुर
* पश्चिम सांस्कृतिक केंद्र (शिल्प ग्राम), उदयपुर
* जवाहर कला केंद्र, जयपुर
* राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
ये सभी संस्थान कला, संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने का कार्य करते हैं।
In simple words: राजस्थान की संस्कृति को बचाने वाले कई संस्थान हैं, जैसे राजस्थान संगीत संस्थान और अकादमी, जयपुर कथक केंद्र और भारतीय लोक कला मंडल।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में प्रमुख संस्थानों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके शहर के साथ।

 

Question 7. राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठों का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान में कई प्रमुख शक्तिपीठ हैं जो लोगों की गहरी आस्था का केंद्र हैं। इनमें से कुछ प्रमुख शक्तिपीठ इस प्रकार हैं:
1. कैला देवी: यह शक्तिपीठ करौली में स्थित है। कैला देवी को महालक्ष्मी का अवतार माना जाता है और वे करौली के यदुवंशी राजपरिवार की कुल देवी हैं। आज भी इनके चमत्कारों के बारे में कई कहानियाँ प्रचलित हैं।
2. जमवाय माता: यह शक्तिपीठ जयपुर में स्थित है। इस शक्तिपीठ का पुराना नाम जामवंती है। ऐसी मान्यता है कि इनकी परिक्रमा करने से बहुत लाभ मिलता है।
5. त्रिपुरा सुंदरी: यह शक्तिपीठ बाँसवाड़ा में स्थित है। राजस्थान के बाँसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में यह तीर्थ स्थल "तरतई माता" के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में, 'तराई' शब्द 'त्रितयों' का बिगड़ा हुआ रूप है, जिसका अर्थ 'तीन' होता है। देवी को महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी जाना जाता है। प्रत्येक शक्तिपीठ की अपनी अनूठी कहानी और महत्व है, जो भक्तों को आकर्षित करता है।
In simple words: राजस्थान में मुख्य शक्तिपीठ कैला देवी (करौली), जमवाय माता (जयपुर) और त्रिपुरा सुंदरी (बाँसवाड़ा) हैं। हर देवी से जुड़ी खास कहानियाँ और मान्यताएँ हैं, जो उन्हें बहुत पूजनीय बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: शक्तिपीठों का वर्णन करते समय उनका स्थान, देवी का नाम, उनसे जुड़ी प्रमुख मान्यता या कहानी और कोई अन्य विशेष तथ्य अवश्य बताएँ।

 

Question 8. राजस्थान के प्रमुख वाद्य यंत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान के प्रमुख वाद्य यंत्र यहाँ की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये वाद्य यंत्र विभिन्न अवसरों पर बजाए जाते हैं:
1. रावणहत्था: यह वायलिन की तरह बजाया जाने वाला तार वाला वाद्य यंत्र है। इसको बजाते समय इसके तार घरू के तार की तरह आवाज करते हैं।
2. अलगोजा: यह फूँक मारकर बजाया जाने वाला एक वाद्य यंत्र है। यह बाँसुरी की तरह ही बजाया जाता है।
3. शहनाई: यह शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों पर बजाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वाद्य यंत्र है। फूँक मारने पर इसमें से बहुत मधुर आवाज निकलती है।
4. पूंगी: यह कालबेलियों का प्रमुख वाद्य है और अलगोजे की ही तरह बजाया जाता है।
5. नगाड़ा: यह लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। लोकनाट्यों में इसे शहनाई के साथ बजाया जाता है।
6. ढोल: यह राजस्थानी लोकवाद्यों में एक खास स्थान रखता है। वादक इसे अपने गले में डालकर लकड़ी के डंडों से बजाता है।
7. मादल: यह मिट्टी का बना वाद्य है और इसका आकार ढोल जैसा होता है।
8. इकतारा: यह एक हाथ से बजाया जाने वाला तार वाला वाद्य है। यह मीराबाई का बहुत प्रिय वाद्य यंत्र था।
9. भपंग: यह अलवर क्षेत्र में, खासकर मेव लोगों में काफी लोकप्रिय है।
10. सारंगी: यह सागवान, केर और रोहिड़ा की लकड़ी से बनाई जाती है। राजस्थान में सारंगी कई रूपों में दिखती है, जैसे कमायचा, सुरिन्दा और चिकारा।
11. तंदूरा: इसमें चार तार होते हैं, इसलिए इसे 'चौतारा' भी कहते हैं। यह लकड़ी का बना होता है।
12. जंतर: यह वीणा की तरह का वाद्य है। इसे बजाने वाला इसे गले में लटकाकर खड़े-खड़े ही बजाता है। इसके अलावा चंग, खंजरी, मोरचंग, चिकारा, तुरही, खड़ताल, मंजीरा, झांझ और यांकिग्रा भी राजस्थान के प्रमुख वाद्य यंत्र हैं। ये सभी वाद्य यंत्र राजस्थानी संगीत को विशेष पहचान देते हैं।
In simple words: राजस्थान में कई तरह के वाद्य यंत्र हैं जैसे रावणहत्था (वायलिन जैसा), अलगोजा (बाँसुरी जैसा), शहनाई (शादी में बजने वाला), पूंगी (कालबेलियों का), नगाड़ा (डंडों से बजने वाला), ढोल, इकतारा (मीराबाई का), सारंगी और तंदूरा।

🎯 Exam Tip: वाद्य यंत्रों का वर्णन करते समय उनके प्रकार (तार, फूँक, चमड़ा), बनावट और उनके उपयोग से संबंधित विशिष्ट जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान में कई प्रमुख लोक नृत्य हैं जो यहाँ की संस्कृति और उत्सवों का हिस्सा हैं:
1. अग्नि नृत्य: यह नृत्य रात के समय जलते हुए अंगारों पर किया जाता है। नर्तक अंगारों से ऐसे खेलते हैं जैसे वे फूल हों।
2. चमरसिया नृत्य: इस नृत्य में एक बड़े नगाड़े का उपयोग होता है। नृत्य के साथ होली के गीत और रसिया भी गाए जाते हैं।
3. घूमर नृत्य: यह पूरे राजस्थान में बहुत लोकप्रिय है। यह नृत्य शुभ अवसरों और त्योहारों पर किया जाता है, खासकर महिलाओं द्वारा।
7. कालबेलिया नृत्य: इस नृत्य को हाल ही में यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध किया गया है। यह राजस्थान में सपेरा जाति का एक प्रसिद्ध नृत्य है।
8. गैर नृत्य: होली के दिनों में मेवाड़ और बाड़मेर में इस नृत्य की धूम रहती है। इस नृत्य में नर्तक गोल घेरे में नाचते हैं।
9. गीदड़ नृत्य: इस नृत्य में अलग-अलग तरह के स्वांग (रूप) भरे जाते हैं, जिसमें दूल्हा-दुल्हन, सेठ-सेठनी, साधु और शिकारी के स्वांग खास हैं।
10. चंग नृत्य: यह एक ऐसा नृत्य है जिसमें केवल पुरुष भाग लेते हैं। इसमें हर पुरुष के हाथ में एक चंग होता है।
11. डांडिया नृत्य: इस नृत्य में नर्तक आपस में डांडिया टकराते हुए घेरे में नृत्य करते हैं। इसमें शहनाई और नगाड़ा भी बजाया जाता है।
12. ढोल नृत्य: यह नृत्य अक्सर विवाह के अवसर पर किया जाता है। यह जालोर का एक प्रसिद्ध नृत्य है।
ये सभी नृत्य राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
In simple words: राजस्थान में अग्नि नृत्य (अंगारों पर), चमरसिया नृत्य (नगाड़े के साथ), घूमर (महिलाओं द्वारा), कालबेलिया (सपेरा जाति का), गैर (होली पर), गीदड़ (स्वांग के साथ), चंग (पुरुषों द्वारा), डांडिया (डांडिया टकराकर) और ढोल नृत्य (शादी में) जैसे कई लोक नृत्य प्रसिद्ध हैं।

🎯 Exam Tip: लोक नृत्यों का वर्णन करते समय उनके मुख्य कलाकार (पुरुष/महिला/जाति), आयोजन का अवसर, प्रयुक्त वाद्य यंत्र और कोई विशेष वेशभूषा या क्रिया बताएँ।

 

Question 1. कैला देवी के सामने स्थित हनुमान मन्दिर को स्थानीय लोग कहते हैं
(अ) देलवाड़ा
(ब) बाड़ौली
(स) लांगुरिया
(द) आभानेरी
Answer: (स) लांगुरिया
In simple words: कैला देवी मंदिर के सामने वाले हनुमान मंदिर को वहाँ के लोग लांगुरिया कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस तरह के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प को पूरी तरह से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक सीधा तथ्य है।

 

Question 2. जमवाय माता का पौराणिक नाम हैं
(अ) यामिनी
(ब) दामिनी
(स) यशवंत
(द) जामवंत
Answer: (द) जामवंत
In simple words: जमवाय माता का पुराना नाम जामवंत है।

🎯 Exam Tip: देवियों और देवताओं के पौराणिक या प्राचीन नामों को याद करना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. महिषासुरमर्दिनी के रूप में जानी जाती है
(अ) जीण माता
Answer: (अ) जीण माता
In simple words: जीण माता को महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: देवी के विभिन्न रूपों और उनसे जुड़े नामों को याद रखें, क्योंकि यह उनकी पहचान का हिस्सा है।

 

Question 4. मीराबाई बजाती थीं
(अ) भपंग
(ब) इकतारा
(स) सारंगी
(द) तंदुरा
Answer: (ब) इकतारा
In simple words: मीराबाई इकतारा नाम का वाद्य यंत्र बजाती थीं।

🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध व्यक्तियों और उनसे जुड़े वाद्य यंत्रों या कला रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. सामान्यतः विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य
(अ) अग्नि नृत्य
(ब) डांडिया नृत्य
(स) ढोल नृत्य
(द) चंग नृत्य
Answer: (स) ढोल नृत्य
In simple words: आमतौर पर शादियों में ढोल नृत्य किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विशेष अवसरों (जैसे विवाह, होली) पर किए जाने वाले नृत्यों के नाम याद रखें।

 

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए
1. बीकानेर से लगभग ____ किमी दूर देशनोक में माँ करणीमाता का मन्दिर स्थित है।
2. त्रिपुरा सुन्दरी माता बाँसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में ____ के नाम से जानी जाती हैं।
3. ____ तानपुरे से मिलता-जुलता वाद्य हैं।
4. ____ नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है।
Answer:
1. बीकानेर से लगभग 30 किमी दूर देशनोक में माँ करणीमाता का मन्दिर स्थित है।
2. त्रिपुरा सुन्दरी माता बाँसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में तरतई माता के नाम से जानी जाती हैं।
3. तंदूरा तानपुरे से मिलता-जुलता वाद्य हैं।
4. गवरी नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है।
In simple words: करणीमाता का मंदिर बीकानेर से 30 किमी दूर है। त्रिपुरा सुंदरी को तरतई माता भी कहते हैं। तंदूरा एक वाद्य यंत्र है जो तानपुरे जैसा लगता है। गवरी नृत्य केवल पुरुष करते हैं।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के संदर्भ को ध्यान से पढ़ें और सबसे सटीक शब्द चुनें जो जानकारी को सही ढंग से पूरा करता हो।

 

Question 1. कैला देवी किसके अवतार के रूप में मानी जाती है?
Answer: कैला देवी को महालक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है। वह धन और समृद्धि की देवी हैं, जिनकी पूजा राजस्थान में बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है।
In simple words: कैला देवी को महालक्ष्मी का रूप माना जाता है।

🎯 Exam Tip: देवियों के विभिन्न अवतारों या रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. पूंगी किसका प्रमुख वाद्य यंत्र है?
Answer: पूंगी कालबेलियों का प्रमुख वाद्य यंत्र है। कालबेलिया समुदाय इस वाद्य यंत्र का उपयोग अपने नृत्यों और संगीत में करता है, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: पूंगी कालबेलिया जाति का खास वाद्य यंत्र है।

🎯 Exam Tip: लोक वाद्यों का वर्णन करते समय यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वे किस समुदाय से जुड़े हैं।

 

Question 4. कौन-सा समाज माँ त्रिपुरा सुंदरी की कुलदेवी के रूप में उपासना करता है?
Answer: पांचाल समाज माँ त्रिपुरा सुंदरी की कुलदेवी के रूप में उपासना करता है। यह देवी उनकी आस्था और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
In simple words: पांचाल समाज माँ त्रिपुरा सुंदरी को अपनी कुलदेवी मानता है और उनकी पूजा करता है।

🎯 Exam Tip: कुलदेवियों और उनसे जुड़े समाजों के बारे में जानकारी याद रखना सहायक होता है।

 

Question 5. गीदड़ राजस्थान के किस क्षेत्र का लोकप्रिय नृत्य
Answer: गीदड़ शेखावाटी क्षेत्र का लोकप्रिय नृत्य है। यह नृत्य विशेष रूप से होली के अवसर पर किया जाता है और इसमें कई तरह के स्वांग भरे जाते हैं।
In simple words: गीदड़ नृत्य शेखावाटी इलाके में बहुत पसंद किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लोक नृत्यों को उनके विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़कर याद रखें।

 

Question 6. ढोल नृत्य किस क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है।
Answer: ढोल नृत्य जालोर का प्रसिद्ध नृत्य है। यह नृत्य मुख्य रूप से विवाह जैसे शुभ अवसरों पर किया जाता है।
In simple words: ढोल नृत्य जालोर क्षेत्र का मशहूर नृत्य है।

🎯 Exam Tip: नृत्यों के क्षेत्रीय संबंध को याद रखना उनकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 1. जमवाय माता के मन्दिर के निर्माण के सम्बन्ध में जनश्रुति का उल्लेख कीजिए।
Answer: जमवाय माता के मंदिर के निर्माण से जुड़ी एक कहानी है। बताया जाता है कि कछवाहा शासक दूलहराय अपने दुश्मनों से हार गए थे। हारने के बाद उन्होंने देवी की पूजा की। जमवाय माता खुश हुईं और उन्होंने दूलहराय को दर्शन दिए। देवी माँ के आशीर्वाद से दूलहराय ने अपने दुश्मनों पर फिर से हमला किया और जीत हासिल की। इस जीत के बाद, दूलहराय ने जमवाय माता का मंदिर बनवाया। यह कहानी उनकी गहरी आस्था और देवी के प्रति कृतज्ञता को दर्शाती है।
In simple words: राजा दूलहराय युद्ध में हार गए, तो उन्होंने जमवाय माता की पूजा की। देवी ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया, जिससे वे युद्ध जीत गए। जीत के बाद, राजा ने जमवाय माता का मंदिर बनवाया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक या पौराणिक घटनाओं का वर्णन करते समय प्रमुख पात्रों, घटना के कारण और उसके परिणाम को स्पष्ट रूप से बताएँ।

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Social Science Class 7 Curriculum Solutions: Chapter 21 लोक संस्कृति

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