Download RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 20 भक्ति व सूफी आंदोलन
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गतिविधि
Question 1. इस पाठ में यथास्थान उत्तर भारत के कुछ भक्त सन्तों के पद दिए गए हैं। उन्हें पढ़ें और समझने की कोशिश करें कि उनमें क्या कहा गया है। सभी सन्तों ने किन बातों पर जोर दिया हैं? इन्हें समझने के लिए अपने घर के बड़ों एवं गुरुजी की मदद ले सकते हैं। (पृष्ठ 164)
Answer: इस पाठ में उत्तर भारत के कुछ खास भक्त संतों के पद दिए गए हैं। इन पदों को ध्यान से पढ़ना और समझना है कि उनमें क्या संदेश दिया गया है। सभी संतों ने जिन मुख्य बातों पर जोर दिया है, उन्हें समझना जरूरी है। इसके लिए आप अपने घर के बड़ों और अपने शिक्षकों की मदद ले सकते हैं। इन संतों के विचारों से हमें जीवन जीने की अच्छी सीख मिलती है।
In simple words: पाठ में दिए गए संतों के पद पढ़कर समझें कि उन्होंने क्या कहा है और किन बातों पर जोर दिया है। इसमें बड़ों और शिक्षकों की मदद ले सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले संदर्भ को अच्छे से समझें और फिर संबंधित जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त करें।
कबीर दास जी के अनुसार
Question. गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लार्गे पाँव। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।।
Answer: कबीरदास जी कहते हैं कि अगर गुरु और ईश्वर दोनों एक साथ मेरे सामने खड़े हों, तो मैं सबसे पहले गुरु के चरणों को छूऊंगा। ऐसा इसलिए क्योंकि गुरु ने ही मुझे ईश्वर (गोविन्द) की पहचान कराई है। इस तरह कबीरदास जी गुरु को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि वे हमें सही रास्ता दिखाते हैं।
In simple words: कबीर कहते हैं कि गुरु और भगवान साथ खड़े हों तो गुरु को पहले प्रणाम करो, क्योंकि गुरु ने ही भगवान तक पहुँचने का रास्ता बताया है।
🎯 Exam Tip: गुरु की महिमा को बताते हुए इस दोहे का अर्थ स्पष्ट करें और कबीर के विचारों को हाइलाइट करें।
रैदास के अनुसार
Question. ऐसा चाहो राज़ में, जहाँ मिलै सबन को अन्न। छोट-बड़ों सब सम बसे, रविदास रहै प्रसन्न ।।
Answer: संत रविदास के अनुसार, राज्य ऐसा होना चाहिए जहाँ कोई भी भूखा न रहे, यानी सभी को भरपेट भोजन मिले। वहाँ छोटे-बड़े सब बराबर से रहें और सभी को समान अधिकार मिलें। ऐसी स्थिति ही सुख और समृद्धि वाली होती है, जहाँ सभी खुश रहें। रैदास जाति और ऊँच-नीच में विश्वास नहीं करते थे, वे सभी मनुष्यों को समान मानते थे।
In simple words: संत रविदास चाहते थे कि राज्य ऐसा हो जहाँ सभी को खाना मिले और सब लोग बराबर रहें, जिससे वे खुश रह सकें।
🎯 Exam Tip: रैदास के सामाजिक समानता और भूख मुक्त समाज के विचारों को स्पष्ट करें।
मीराबाई के अनुसार
Question. मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई ।।
Answer: मीराबाई के अनुसार इस दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण के अलावा उनका कोई नहीं है। श्रीकृष्ण ही उनके एकमात्र सहारे हैं। मीरा मानती थीं कि जिसके सिर पर मोर पंखों का मुकुट होता है, वही उनके पति हैं, यानी श्रीकृष्ण ही उनके जीवनसाथी हैं। मीराबाई भगवान श्रीकृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थीं और उनका प्रेम अद्वितीय था।
In simple words: मीराबाई कहती हैं कि उनके लिए श्रीकृष्ण ही सब कुछ हैं और मोर मुकुट वाले श्रीकृष्ण ही उनके पति हैं।
🎯 Exam Tip: मीराबाई की अनन्य भक्ति और श्रीकृष्ण के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करें।
Question 2. कावा फिरि कासी भया, रामहि भया रहीम्। मोट चुन मैदा भयो, बैठि कवीरा जीम् ।। इसी तरह विद्यार्थी अन्य पदों का संकलन करें।
Answer: इस दोहे में कबीरदास जी बताते हैं कि जब उन्होंने धार्मिक भेदभाव को छोड़ा, तो उनके लिए 'काबा' (इस्लाम का पवित्र स्थल) ही 'काशी' (हिंदुओं का पवित्र स्थल) बन गया और 'राम' ही 'रहीम' हो गए। मोटे आटे से मैदा बन गया, यानी भेद मिट गए, और कबीर बैठकर भोजन कर रहे हैं। यह दोहा धार्मिक एकता और समानता का संदेश देता है, जहाँ सभी धर्मों के बीच के भेद समाप्त हो जाते हैं। इस तरह के अन्य पदों को विद्यार्थी स्वयं इकट्ठा कर सकते हैं।
In simple words: कबीर कहते हैं कि जब मन से भेदभाव हटा तो काबा और काशी एक हो गए, राम और रहीम एक हो गए। यह हमें धार्मिक एकता सिखाता है।
🎯 Exam Tip: कबीर के इस दोहे में धार्मिक समानता और एकता के संदेश को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Question 3. भक्ति एवं सूफी आंदोलन के चित्रों का संकलन करें एवं लय के साथ गाने का अभ्यास करें। (पृष्ठ 169)
Answer: भक्ति और सूफी आंदोलन के प्रमुख कवियों में कबीर और अमीर खुसरो शामिल थे। विद्यार्थी इनके चित्र इकट्ठा कर सकते हैं। साथ ही, भक्ति आंदोलन के गीतों को संगीत और लय के साथ गाने का अभ्यास भी स्वयं करें। यह अभ्यास इन आंदोलनों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
In simple words: भक्ति और सूफी आंदोलन के कवियों (जैसे कबीर, अमीर खुसरो) के चित्र जमा करें और इन आंदोलनों के गीत गाने का अभ्यास करें।
🎯 Exam Tip: यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। इसमें केवल यह बताया जा सकता है कि इसमें किन कवियों के चित्र संकलित किए जा सकते हैं और छात्रों को गाने का अभ्यास करने के लिए कहा जा सकता है।
Question 4. अपने क्षेत्र के आस-पास के प्रसिद्ध पूजा स्थलों यथा मदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरिजाघरों आदि की सूची बनाएँ और उनके बारे में जानकारी एकत्र करें। (पृष्ठ 169)
Answer: मैं भरतपुर जिले का निवासी हूँ। यहाँ कई ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर एवं मस्जिदें हैं, जिनका वर्णन यहाँ दिया गया है। इन स्थलों से हमें क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पता चलता है।
1. **लक्ष्मण मंदिर-** यह मंदिर भरतपुर शहर में है। इसका निर्माण महाराजा बलदेव सिंह ने करवाया था। यह पूरे भारत में भगवान लक्ष्मण का एकमात्र मंदिर माना जाता है।
2. **गंगा मंदिर-** भरतपुर शहर में स्थित इस मंदिर की नींव महाराजा बलवंत सिंह ने सन् 15-16 में रखी थी। इसके 90 साल बाद महाराजा विजेंद्र सिंह ने 12 फरवरी 1937 को इसमें गंगाजी की मूर्ति स्थापित करवाई।
3. **ऊण मंदिर-** यह मंदिर बयाना के किले में स्थित है, जिसकी स्थापना सिर ने करवाई थी। इस मंदिर के बड़े-बड़े लाल पत्थरों के खंभों पर जड़ाई की गई है। इसका जीर्णोद्धार 935 ई. में लक्ष्मण सेन की रानी चित्रलेखा और उनकी बेटी मंगला राज ने करवाया था।
4. **हनुमान मंदिर-** यह रुदावल में स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जयंती पर मेला लगता है।
5. **जामा मस्जिद-** भरतपुर शहर में स्थित इस मस्जिद का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने शुरू करवाया था। इस मस्जिद का प्रवेश द्वार फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे के नक्शे पर बनाया गया है और इसकी इमारत का निर्माण दिल्ली की जामा मस्जिद के आधार पर किया गया है।
In simple words: भरतपुर में कई प्रसिद्ध मंदिर और मस्जिद हैं। इनमें लक्ष्मण मंदिर, गंगा मंदिर, ऊण मंदिर, हनुमान मंदिर और जामा मस्जिद शामिल हैं, सभी का अपना खास इतिहास है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय धार्मिक स्थलों का नाम और उनकी ऐतिहासिक जानकारी को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. ननकाना साहिब किस सन्त का जन्म स्थान है?
(अ) कबीर
(ब) नानक
(स) दादू दयाल
(द) रामानन्द
Answer: (ब) नानक
In simple words: गुरु नानक देव का जन्म ननकाना साहिब में हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख संतों के जन्म स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 2. चैतन्य महाप्रभु का सम्बन्ध कहाँ से था?
(अ) बगाल
(ब) राजस्थान
(स) गुजरात
(द) महाराष्ट्र
Answer: (अ) बगाल
In simple words: चैतन्य महाप्रभु बंगाल से संबंध रखते थे।
🎯 Exam Tip: संतों और उनके संबंधित क्षेत्रों को याद रखें, खासकर जब यह एक प्रसिद्ध धार्मिक व्यक्ति के बारे में हो।
Question 2. स्तम्भ'अ' को स्तम्भ'ब' से सुमेलित करें
स्तम्भ'अ'
1. कबीर
2. मीराबाई
3. गुरुनानक
4. चैतन्य महाप्रभु
स्तम्भ'ब'
(a) बंगाल
(b) तलवंडी
(c) मेड़ता
(d) बनारस
Answer:
1. कबीर - (d) बनारस
2. मीराबाई - (c) मेड़ता
3. गुरुनानक - (b) तलवंडी
4. चैतन्य महाप्रभु - (a) बंगाल
In simple words: संतों को उनके जन्म या कार्यस्थलों से सही ढंग से मिलाएं: कबीर बनारस से, मीराबाई मेड़ता से, गुरुनानक तलवंडी से और चैतन्य महाप्रभु बंगाल से संबंधित थे।
🎯 Exam Tip: संतों के जन्मस्थान या उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र को सही ढंग से याद करें, यह मिलान वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. भक्ति में किस पर अधिक जोर दिया जाता है?
Answer: भक्ति में मुख्य रूप से ईश्वर की उपासना पर अधिक जोर दिया जाता है। यह व्यक्तिगत श्रद्धा और प्रेम के माध्यम से भगवान से जुड़ने का एक तरीका है। इसमें बाहरी आडंबरों से ज्यादा आंतरिक भावनाओं को महत्व दिया जाता है।
In simple words: भक्ति में भगवान की पूजा और उन पर विश्वास करने को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन का मुख्य सिद्धांत ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण है; इसे अपने उत्तर में स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 5. भक्ति आन्दोलन के संतों के उपदेशों की भाषा कैसी थी?
Answer: भक्ति आंदोलन के संतों के उपदेशों की भाषा बहुत सीधी, सरल और आम बोलचाल वाली थी। उन्होंने लोगों से सीधे जुड़ने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, ताकि उनके संदेश हर किसी तक आसानी से पहुँच सकें। इस कारण आम लोग भी उनके विचारों को समझ पाते थे।
In simple words: भक्ति आंदोलन के संतों ने सरल और आम बोलचाल की भाषा में उपदेश दिए।
🎯 Exam Tip: भक्ति संतों की भाषा की मुख्य विशेषता उसकी सरलता और लोकप्रयता थी; इस बात पर जोर दें।
Question 6. मीराबाई का संक्षेप में परिचय दीजिए।
Answer: भक्त शिरोमणि मीराबाई का जन्म 16वीं सदी में मेड़ता में हुआ था। वह अपने पिता की इकलौती बेटी थीं और उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान कृष्ण की भक्ति को समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने गीतों में महिलाओं की जागृति की बातें भी कही हैं। उनका विवाह एक राजघराने में हुआ था, लेकिन विवाह के सात साल बाद ही उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद उनके ससुर और पिता का भी देहांत हो गया, जिसके बाद मीराबाई पूरी तरह से कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं।
In simple words: मीराबाई का जन्म मेड़ता में 16वीं सदी में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन कृष्ण भक्ति को समर्पित किया और महिलाओं की जागृति की बात कही। पति के देहांत के बाद वे पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूब गईं।
🎯 Exam Tip: मीराबाई के जीवन, उनकी भक्ति और महिला जागृति के संदेश को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 7. कबीर की प्रमुख शिक्षाएँ बताइए।
Answer: कबीर एक महान संत होने के साथ-साथ एक बड़े समाज सुधारक भी थे। उनकी शिक्षाएँ उस समय के समाज को हिला देने वाली थीं। उनकी प्रमुख शिक्षाएँ थीं: ईश्वर की सच्ची भक्ति का संदेश देना, जातीय असमानता का विरोध करना, कर्म की श्रेष्ठता पर जोर देना और बाहरी आडंबरों का विरोध करना। कबीर की शिक्षाओं ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बहुत जोर दिया, जिससे समाज में सद्भाव बढ़ा।
In simple words: कबीर की मुख्य शिक्षाएं सच्ची भक्ति, जातिवाद का विरोध, कर्म को महत्व देना और हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर देना थीं।
🎯 Exam Tip: कबीर की शिक्षाओं के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट और संक्षेप में लिखें, खासकर उनके सामाजिक सुधारों पर जोर दें।
Question 8. सूफी व भक्ति संतों के उपदेशों में क्या समानताएँ थी?
Answer: सूफी और भक्ति संतों के उपदेशों में यह समानता थी कि वे दोनों अपनी बातें सरल और आम बोलचाल की भाषा में कहते थे। उनकी सबसे खास बात यह थी कि वे अपने संदेश काव्य के माध्यम से देते थे। दोनों संतों ने लोगों को सीधे और सरल तरीके से प्रेम और शांति से रहने के लिए प्रेरित किया। इन आंदोलनों का उद्देश्य लोगों को धार्मिक सद्भाव सिखाना था।
In simple words: सूफी और भक्ति संतों ने सरल भाषा में और कविताओं के जरिए उपदेश दिए, जिससे लोगों को प्रेम और शांति से रहना सिखाया।
🎯 Exam Tip: सूफी और भक्ति संतों की उपदेश देने की शैली (सरल भाषा, काव्य) और उनके मुख्य संदेश (प्रेम, शांति) को समानता के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 9. गुरुनानक के उपदेशों को लिखिए।
Answer: गुरुनानक ने अपने उपदेशों से अंधविश्वासों और समाज की गलत धारणाओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया। गुरुनानक के अनुसार, सच्चा सामंजस्य तब होता है जब हम ईश्वर की मौलिक एकता और उसके प्रभाव से मानव की एकता को पहचानते हैं। उनके उपदेशों का ही यह प्रभाव था कि आगे चलकर भारत में एक नए 'सिख मत' का उदय हुआ।
In simple words: गुरुनानक ने अंधविश्वासों को दूर किया, हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया और बताया कि सभी मनुष्य एक ईश्वर की संतान हैं। उनके उपदेशों से सिख धर्म बना।
🎯 Exam Tip: गुरुनानक के प्रमुख उपदेशों जैसे अंधविश्वास का विरोध, एकता पर जोर और सिख धर्म की स्थापना में उनके योगदान को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 11. समर्थ गुरु रामदास के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: समर्थ गुरु रामदास महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे। वे हमेशा 'रामनाम' का जाप करते रहते थे। स्वामी रामदास का शरीर बहुत बलवान था क्योंकि वे हर दिन लगभग 1200 सूर्य नमस्कार करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों के जरिए समाज में जागरूकता लाने के लिए एक संगठन बनाया। उन्होंने पूरे भारत में, कश्मीर से कन्याकुमारी तक, 1100 मठ और अखाड़ों का निर्माण किया। समर्थ गुरु रामदास भक्ति और शक्ति के प्रतीक हनुमान जी के उपासक थे और वे छत्रपति शिवाजी के गुरु भी थे।
In simple words: समर्थ गुरु रामदास महाराष्ट्र के एक शक्तिशाली संत थे, जो रामनाम जपते थे, हनुमान भक्त थे, 1100 मठ बनाए और छत्रपति शिवाजी के गुरु थे।
🎯 Exam Tip: समर्थ गुरु रामदास के महाराष्ट्र में योगदान, उनके शारीरिक अभ्यास, संगठन कौशल और छत्रपति शिवाजी के साथ उनके संबंध को प्रमुखता से बताएं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. दक्षिण भारत के नयनार संत थे
(अ) विष्णु भक्त
(ब) शिव भक्त
(स) राम भक्त
(द) हनुमान भक्त
Answer: (ब) शिव भक्त
In simple words: दक्षिण भारत में नयनार संत शिव भगवान के भक्त थे।
🎯 Exam Tip: नयनार और अलवार संतों के बीच के अंतर को याद रखें, नयनार शिव भक्त थे जबकि अलवार विष्णु भक्त।
Question 2. गुरुनानक का जन्म निम्नलिखित में किस सन में हुआ था?
(अ) 1467 ई.
(ब) 1468 ई.
(स) 1469 ई.
(द) 1470 ई.
Answer: (स) 1469 ई.
In simple words: गुरुनानक देव का जन्म साल 1469 में हुआ था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संतों की जन्म तिथियों को याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी होता है।
Question 3. संत ज्ञानेश्वर का जन्म हुआ?
(द) महाराष्ट्र में
Answer: (द) महाराष्ट्र में
In simple words: संत ज्ञानेश्वर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध संतों के जन्म स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों के संतों के लिए।
Question 4. समर्थ गुरु स्वामी रामदास द्वारा स्थापित मठों एवं अखाड़ों की संख्या धी
(अ) 1100
(ब) 1150
(स) 1200
(द) 1250
Answer: (अ) 1100
In simple words: समर्थ गुरु रामदास ने कुल 1100 मठ और अखाड़े बनवाए थे।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट संख्यात्मक तथ्यों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 5. मीराबाई के पति का देहान्त हुआ उनके विवाह के
(अ) चार साल बाद
(ब) पाँच साल बाद
(स) छ: साल बाद
(द) सात साल बाद
Answer: (द) सात साल बाद
In simple words: मीराबाई के पति का निधन उनके विवाह के सात साल बाद हो गया था।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं और संबंधित समय-अवधि को सही ढंग से याद करें।
Question 6. भारत में सूफी मत के चिश्ती सिलसिले की शुरुआत की
(अ) बाबा फरीद ने
(ब) ख्वाजा मेइडीन चिश्ती ने
(स) शेख नुरूद्दीन ने
(द) अमीर खुसरों ने
Answer: (ब) ख्वाजा मेइडीन चिश्ती ने
In simple words: भारत में चिश्ती सूफी परंपरा की शुरुआत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी।
🎯 Exam Tip: भारत में सूफी परंपराओं के संस्थापकों को याद रखना मध्यकालीन इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. भारत में सूफी मत के कितने सम्प्रदायों का प्रभाव रहा है?
(अ) तीन
(ब) चार
(स) पाँच
Answer: (कई मुख्य सूफी सम्प्रदायों का प्रभाव रहा है, जिनमें चिश्ती, सुहरावर्दी, कादिरी और नक्शबंदी प्रमुख हैं। विकल्प में से सबसे उपयुक्त चुनें)
(ब) चार
In simple words: भारत में सूफी मत के चार मुख्य संप्रदाय बहुत प्रभावी रहे हैं।
🎯 Exam Tip: भारत में प्रमुख सूफी सम्प्रदायों की संख्या और उनके नामों को याद रखें।
Question 1. अधिकांश भक्त-संत अपनी ..................... के माध्यम से कहते थे।
2. ..................... आते-आते दक्षिण भारत की तरह उत्तर भारत में भी भक्ति परम्परा की धारा बहने लगी।
3. रामानन्द ने ..................... पर जोर देकर राम की भक्ति पर बल दिया।
4. कबीर के अनुसार सभी व्यक्ति जन्म से ..................... है।
Answer:
1. अधिकांश भक्त-संत अपनी **काव्य** के माध्यम से कहते थे।
2. **चौदह सदी** आते-आते दक्षिण भारत की तरह उत्तर भारत में भी भक्ति परम्परा की धारा बहने लगी।
3. रामानन्द ने **एकेश्वरवाद** पर जोर देकर राम की भक्ति पर बल दिया।
4. कबीर के अनुसार सभी व्यक्ति जन्म से **समान** है।
In simple words: भक्त संत काव्य से अपनी बात कहते थे, चौदहवीं सदी तक भक्ति उत्तर भारत में फैली, रामानन्द ने एकेश्वरवाद और राम भक्ति पर जोर दिया, और कबीर मानते थे कि सभी मनुष्य जन्म से समान होते हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, संदर्भ को समझें और सही ऐतिहासिक तथ्यों या अवधारणाओं को भरें।
अति लघुत्तरीय प्रश्न
Question 1. भक्तिधारा की लोकप्रियता दक्षिण भारत में कब देखने को मिली
Answer: भक्तिधारा की लोकप्रियता दक्षिण भारत में सातवीं और नौवीं सदी के बीच देखने को मिली। इस काल में कई संत-कवियों ने अपनी भक्ति और ज्ञान के माध्यम से समाज में बड़ा प्रभाव डाला।
In simple words: भक्ति आंदोलन दक्षिण भारत में सातवीं और नौवीं सदी के बीच मशहूर हुआ।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन के प्रमुख कालखंडों और क्षेत्रों को याद रखें।
Question 2. दक्षिण भारत में अलवार संत किसे कहा जाता था।
Answer: दक्षिण भारत में अलवार संत विष्णु भक्तों को कहा जाता था। ये संत भगवान विष्णु के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम के लिए जाने जाते थे। उन्होंने भक्ति गीतों की रचना की जो आज भी गाए जाते हैं।
In simple words: दक्षिण भारत में विष्णु भगवान के भक्तों को अलवार संत कहते थे।
🎯 Exam Tip: नयनार (शिव भक्त) और अलवार (विष्णु भक्त) के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 3. उत्तर भारत में भक्ति आन्दोलन के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं
Answer: उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक रामानन्द माने जाते हैं। उन्होंने भक्ति के संदेश को उत्तर भारत में फैलाया और समाज के सभी वर्गों के लोगों को इसमें शामिल किया।
In simple words: रामानन्द को उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का जनक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों में भक्ति आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. दक्षिण की मीरा किसे कहा जाता है?
Answer: दक्षिण की मीरा भक्त कवयित्री अंडाल को कहा जाता है। उन्होंने भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति व्यक्त की और उनके गीत आज भी दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। उनकी भक्ति मीराबाई से मिलती-जुलती थी, इसलिए उन्हें यह उपाधि मिली।
In simple words: भक्त कवयित्री अंडाल को दक्षिण की मीरा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: धार्मिक इतिहास में प्रसिद्ध नामों और उनके विशेषणों को याद रखें।
Question 5. कबीर का जन्म किस परिवार में हुआ था?
Answer: कबीर का जन्म एक जुलाहा परिवार में हुआ था। उन्हें नीरू और नीमा नाम के एक मुस्लिम जुलाहा दंपति ने पाला था, जिन्होंने उन्हें एक तालाब के किनारे पाया था।
In simple words: कबीर का जन्म एक जुलाहा परिवार में हुआ था।
🎯 Exam Tip: संतों के जन्म और पालन-पोषण से जुड़ी जानकारी को याद रखना उनके जीवन को समझने में मदद करता है।
Question 7. समर्थ गुरु रामदास किसके उपासक थे?
Answer: समर्थ गुरु रामदास भक्ति और शांति के प्रतीक भगवान हनुमान जी के उपासक थे। वे हनुमान जी को शक्ति और समर्पण का प्रतीक मानते थे।
In simple words: समर्थ गुरु रामदास हनुमान जी के भक्त थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख संतों के आराध्य देवों को याद रखें।
Question 8. भारत के वॉचत वर्ग का पहला कवि किसे कहीं जाता है?
Answer: भारत के वंचित वर्ग का पहला कवि चोखामेला को कहा जाता है। वे महाराष्ट्र के एक दलित संत थे जिन्होंने अपने भजनों के माध्यम से समाज में समानता और भक्ति का संदेश दिया।
In simple words: चोखामेला को भारत के वंचित वर्ग का पहला कवि माना जाता है।
🎯 Exam Tip: समाज के वंचित वर्गों से संबंधित प्रमुख संतों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. मीराबाई के लगभग कितने पद हैं?
Answer: मीराबाई के लगभग 250 पद हैं। ये पद उनकी कृष्ण भक्ति और आध्यात्मिक अनुभवों को दर्शाते हैं। उनके ये भजन आज भी पूरे भारत में गाए जाते हैं।
In simple words: मीराबाई के लगभग 250 भजन हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख कवियों के रचनाओं की संख्या या उनकी प्रसिद्ध कृतियों को याद रखना उपयोगी है।
Question 10. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती कब भारत आए?
Answer: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती सन् 1192 ई. के पूर्व भारत आए। वे चिश्ती सिलसिले के एक महान सूफी संत थे और उन्होंने भारत में सूफी मत को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती साल 1192 से पहले भारत आए थे।
🎯 Exam Tip: भारत में सूफी संतों के आगमन की तिथि और उनके महत्व को याद रखें।
Question 11. सन्त मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहाँ स्थित है? यह किस नाम से जानी जाती है?
Answer: संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में स्थित है। यह दरगाह 'अजमेर शरीफ' के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
In simple words: संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में है और इसे 'अजमेर शरीफ' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख धार्मिक स्थलों के स्थान और उनके लोकप्रिय नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. भक्ति आन्दोलन की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
Answer: मध्यकाल में शुरू हुए भक्ति आंदोलन की मुख्य विशेषता यह थी कि इस आंदोलन के संतों ने समाज में स्थापित जाति भेद, ऊँच-नीच, और बाहरी आडंबरों का विरोध किया। उन्होंने भगवान के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण पर जोर दिया। भक्ति आंदोलन ने सभी लोगों को समान माना और कहा कि भगवान की भक्ति हर व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। यह आंदोलन सभी धर्मों के बीच एकता को बढ़ावा देने में सफल रहा।
In simple words: भक्ति आंदोलन ने जातिवाद और आडंबरों का विरोध किया, भगवान के प्रति प्रेम पर जोर दिया और सभी लोगों को समान बताया।
🎯 Exam Tip: भक्ति आंदोलन की प्रमुख विशेषताओं जैसे जातिवाद का विरोध, व्यक्तिगत भक्ति और सामाजिक समानता को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 3. दक्षिण भारत के प्रमुख जयनार एवं अलवार संतों का नामोल्लेख कीजिए।
Answer: दक्षिण भारत में प्रमुख नयनार संत अप्पार, संबंदर, सुंदरार और मणियसागर थे। वहीं, प्रमुख अलवार संत पेरियअलवार, अंडाल, नम्मालवार और तोंडरप्पिोडी अलवार थे। वास्तव में, दक्षिण भारत में शिव भक्तों को नयनार कहा जाता था, जबकि विष्णु भक्तों को अलवार कहा जाता था। ये घुमक्कड़ साधु थे जो गाँव-गाँव जाकर देवी-देवताओं की प्रशंसा में सुंदर कविताएँ रचते थे।
In simple words: दक्षिण भारत में नयनार संत (शिव भक्त) अप्पार, संबंदर आदि थे, और अलवार संत (विष्णु भक्त) पेरियअलवार, अंडाल आदि थे।
🎯 Exam Tip: नयनार और अलवार संतों के नामों को अलग-अलग याद रखें और यह भी स्पष्ट करें कि वे क्रमशः किन देवताओं के भक्त थे।
Question 4. महाराष्ट्र के पंढरपुर स्थान की विशेषताएँ बताइए।
Answer: महाराष्ट्र में पंढरपुर स्थान का नाम स्थानीय देवता विठ्ठल से जुड़ा है। विठ्ठल को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। आज भी हर साल हजारों लोग पैदल चलकर पंढरपुर जाते हैं। यहाँ भक्त विठ्ठल की पूजा करते हैं। मध्यकाल से लेकर आज तक पंढरपुर का धार्मिक अस्तित्व लगातार बना हुआ है और यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
In simple words: पंढरपुर महाराष्ट्र में विठ्ठल भगवान का एक पवित्र स्थान है, जहाँ आज भी हजारों भक्त हर साल पैदल यात्रा करते हैं।
🎯 Exam Tip: पंढरपुर के धार्मिक महत्व, उसके आराध्य देवता और उसकी ऐतिहासिक निरंतरता को बताएं।
Question 6. राजस्थान में भक्ति की स्थिति क्या रही है। संक्षेप में समझाइए।
Answer: राजस्थान में शुरुआती समय में ब्रह्मा और सूर्य की पूजा बहुत लोकप्रिय थी। बाद में विष्णु के अवतारों जैसे राम और कृष्ण की पूजा भी काफी प्रचलित हुई। यहाँ शिव, शक्ति, गणेश, भैरव, कुबेर, हनुमान, कार्तिकेय और सरस्वती आदि देवी-देवताओं की भी पूजा होती है। राजस्थान में जैन धर्म का भी बहुत प्रचार-प्रसार हुआ है। राजस्थान के राजपूत शासक हिन्दू धर्म को मानने वाले थे, लेकिन वे शक्ति की भक्ति भी करते थे। वास्तव में, राजस्थान एक धार्मिक सहिष्णुता वाला राज्य रहा है, जहाँ सभी धर्मों के लोग बराबरी से और शांति के साथ रहे हैं।
In simple words: राजस्थान में पहले ब्रह्मा-सूर्य की पूजा होती थी, फिर राम-कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की भी। जैन धर्म भी फैला और यह राज्य हमेशा धार्मिक सहिष्णुता वाला रहा है।
🎯 Exam Tip: राजस्थान में भक्ति आंदोलन के विभिन्न चरणों, प्रमुख देवताओं की पूजा और धार्मिक सहिष्णुता के बारे में जानकारी दें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सूफी मत की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मध्यकाल में सूफी संत वे कहलाते थे जो 'सफ' यानी सफेद ऊन के कपड़े पहनते थे। इन संतों ने भी इस्लाम के एकेश्वरवाद का पालन किया। ये ऐसे लोग थे जिन्होंने मुस्लिम धार्मिक विद्वानों द्वारा स्थापित इस्लामिक परंपराओं की जटिलताओं और आचार संहिता का विरोध किया। इन संतों ने धर्म के बाहरी आडंबर को छोड़कर भक्ति और सभी मनुष्यों के प्रति दया तथा प्रेम भाव पर बहुत जोर दिया। सूफी संतों ने ईश्वर को प्रेम के माध्यम से जानने पर जोर दिया, न कि कठोर नियमों से।
In simple words: सूफी संत सादे कपड़े पहनते थे, एकेश्वरवाद मानते थे, धर्म के दिखावे का विरोध करते थे और भगवान के प्रति प्रेम व दया पर जोर देते थे।
🎯 Exam Tip: सूफी मत की प्रमुख विशेषताओं जैसे सादगी, एकेश्वरवाद, बाहरी आडंबरों का विरोध और प्रेम व दया पर जोर को स्पष्ट करें।
Question 2. निम्नलिखित पर तथ्यपरक टिप्पणी लिखिए।
(क) सूफी सिलसिले।
(ख) भक्त कवयित्री अंडाल और मीराबाई।
Answer:
(क) **सूफी सिलसिले-** सूफी मत या विचारधारा में 'सिलसिला' वह व्यवस्था थी जिसमें 'उस्ताद' (गुरु) पीढ़ी दर पीढ़ी 'शागिर्दों' (शिष्यों) को ज्ञान देते थे। सूफी विचारधारा में कई सिलसिले मौजूद थे। हर सिलसिले का काम करने का तरीका अलग-अलग होता था। अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन औलिया वर्तमान समय में भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके काव्य आज भी काफी प्रचलित हैं और लोग इन्हें सम्मान देते हैं।
(ख) **भक्त कवयित्री अंडाल और मीराबाई-** भक्त संतों में अलवार स्त्री भक्त अंडाल का महत्वपूर्ण स्थान है, जिन्हें दक्षिण की मीरा भी कहा जाता है। अंडाल द्वारा रचित 'थिरूपवाई' की रचना आज भी दक्षिण में गाई जाती है। राजस्थान के भक्त संतों में मीराबाई का नाम बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्ति को समर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण की मूर्ति के आगे नृत्य करते हुए ही मीराबाई ने अपने शरीर का त्याग किया। अंडाल और मीराबाई दोनों ने अपने जीवन को भक्ति के माध्यम से अमर कर दिया।
In simple words: (क) सूफी सिलसिले में गुरु-शिष्य परंपरा से ज्ञान दिया जाता था, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती इसके प्रमुख संत थे। (ख) अंडाल को दक्षिण की मीरा कहते हैं और मीराबाई ने कृष्ण भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
🎯 Exam Tip: सूफी सिलसिले की गुरु-शिष्य परंपरा और प्रमुख संतों को बताएं। अंडाल और मीराबाई की भक्ति, उनके योगदान और उन्हें दी गई उपाधियों को स्पष्ट करें।
Question 3. दादू दयाल और चोखामेला की शिक्षाओं पर प्रकाश डालिए।
Answer:
**दादू दयाल की शिक्षाएँ-** दादू दयाल निर्गुण उपासना के समर्थक संत थे। उन्होंने ईश्वर की भक्ति को समाज सेवा और मानवतावादी नजरिए से जोड़ा। उन्होंने अहंकार से दूर रहकर विनम्रता से भगवान के प्रति समर्पित रहने की शिक्षा दी है। दादू दयाल ने मानवता और सेवा को ही ईश्वर प्राप्ति का साधन बताया। उनकी शिक्षाएँ 'दादू दयाल री वाणी' और 'दाद दयाल रा दहा' में इकट्ठा की गई हैं।
**चोखामेला की शिक्षाएँ–** चोखामेला ने जाति-पाति के भेद को मिटाने पर बहुत जोर दिया। बचपन से ही उनमें भगवान की भक्ति का रस लेने की इच्छा थी। बाद में वे पंढरपुर के प्रसिद्ध संत नामदेव के शिष्य बने। महाराष्ट्र में जिन संतों ने जाति-पाति का भाव मिटाकर भगवान की भक्ति की, उनमें चोखामेला का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उनके जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि भक्ति के लिए कोई भी भेद मायने नहीं रखता।
In simple words: दादू दयाल ने निर्गुण भक्ति, मानवता और अहंकार त्यागने की शिक्षा दी। चोखामेला ने जाति-पाति मिटाने पर जोर दिया और भगवान की भक्ति को सबसे ऊपर रखा।
🎯 Exam Tip: दादू दयाल और चोखामेला दोनों की शिक्षाओं के मुख्य बिंदुओं को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर उनके सामाजिक सुधारों पर जोर दें।
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