RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 7 Social Science. Our expert-created answers for Class 7 Social Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल RBSE Solutions for Class 7 Social Science

For Class 7 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 7 Social Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल solutions will improve your exam performance.

Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल RBSE Solutions PDF

18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल

पाठ्यगत प्रश्न एवं उनके उत्तर

 

प्रश्न 1. मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के जीवन चरित्र और उनके द्वारा निर्मित नौ-चौकी पर जानकारी संकलित कीजिए।
Answer: महाराणा राजसिंह का जन्म 24 सितंबर 1629 ई. को हुआ था। वे कलाप्रेमी, दानी, धर्मनिष्ठ, मानवतावादी और वीर शासक थे। उनके शासनकाल में मेवाड़ ने स्थापत्य कला में एक सुनहरा युग देखा। उन्होंने सोने-चांदी और रत्नों के तुलादान करवाए तथा योग्य व्यक्तियों को सम्मानित किया। राजसमंद झील के किनारे नौ-चौकी पाल पर 25 बड़ी शिलाओं पर 5 सर्गों का 'राज प्रशस्ति' महाकाव्य खुदवाया, जो भारत का सबसे बड़ा शिलालेख और पत्थरों पर खुदा हुआ ग्रंथ है। इसकी रचना तैलंग जातीय रणछोड़ भट्ट ने की थी। उन्होंने राजसमंद झील के पास 'राजनगर' नामक कस्बा भी बसाया। राजसिंह का सबसे महत्वपूर्ण काम नौ-चौकी का निर्माण था, जिसमें करोड़ों रुपये लगे थे। यह झील आज भी मेवाड़ के गौरव का प्रतीक है।
In simple words: महाराणा राजसिंह कला और धर्म को मानने वाले राजा थे। उन्होंने राजसमंद झील के पास नौ-चौकी और एक बड़ा शिलालेख बनवाया, जिसमें बहुत पैसा लगा था।

🎯 Exam Tip: राजसिंह के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों जैसे राजप्रशस्ति, राजसमंद झील और नौ-चौकी के निर्माण का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 2. राजस्थान के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों एवं इमारतों और उनसे संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में लिखिए।
Answer: राजस्थान के ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं:
1. **अजमेर:** इसकी स्थापना अजयराज ने की थी। यहाँ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की प्रसिद्ध दरगाह है। यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
2. **आमेर:** यह कछवाहों की प्रारंभिक राजधानी थी। यहाँ विश्वप्रसिद्ध शीशमहल स्थित है, जो अपनी कला के लिए जाना जाता है।
3. **भरतपुर:** इसे राजस्थान का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस नगर की स्थापना महाराजा सूरजमल ने की थी।
4. **कालीबंगा:** यह हनुमानगढ़ जिले में स्थित है। यहाँ सिंधु घाटी सभ्यता के प्राचीन अवशेष मिले हैं, जो इतिहास को समझने में मदद करते हैं।
5. **अलवर:** इसकी स्थापना राव प्रताप सिंह ने की थी। अलवर के पास पांडुपोल नामक स्थान पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था।
6. **जैसलमेर:** यह नगर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। पाकिस्तान की सीमा पर होने के कारण इसका सामरिक महत्व भी बहुत अधिक है।
7. **पुष्कर:** ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर पुष्कर में स्थित है। यह हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है।
8. **उदयपुर:** महाराणा उदयसिंह द्वारा स्थापित इस नगर को 'झीलों की नगरी' कहा जाता है।
9. **आबू:** यह अरावली की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित है। 11वीं शताब्दी में विमलशाह ने यहाँ आदिनाथ और नेमिनाथ के मंदिर बनवाए।
10. **चित्तौड़:** यह मेवाड़, उदयपुर की प्राचीन राजधानी और ऐतिहासिक नगर है। यहाँ सिसोदिया वंश ने लंबे समय तक शासन किया था।
11. **हल्दीघाटी:** मेवाड़ की प्रसिद्ध रणस्थली है। यहाँ 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें प्रताप विजयी रहे।
In simple words: राजस्थान में कई पुरानी जगहें हैं। अजमेर में दरगाह, आमेर में शीशमहल, भरतपुर में सूरजमल का किला है। कालीबंगा में सिंधु सभ्यता के निशान हैं। जैसलमेर अपने किलों और सीमा के महत्व के लिए जाना जाता है। पुष्कर में ब्रह्मा जी का मंदिर है और उदयपुर को झीलों का शहर कहते हैं। आबू में पुराने मंदिर हैं, चित्तौड़ पुरानी राजधानी है और हल्दीघाटी में प्रताप ने मुगलों से लड़ाई जीती थी।

🎯 Exam Tip: हर ऐतिहासिक स्थल का नाम, उसकी स्थापना करने वाले का नाम (यदि उल्लेख हो), और उससे जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना या विशेषता जरूर लिखें।

पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न एक व दो के सही उत्तर चुनकर लिखिए

 

प्रश्न 1. महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम था
(अ) लीलण
(ब) चेतक
(स) केसर
(द) ऐटक
Answer: (ब) चेतक
In simple words: महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े मुख्य तथ्यों और नामों को हमेशा याद रखें।

 

प्रश्न 2. सेना का हरावल दस्ता होता है
(अ) सेना का अग्रिम भाग
(ब) सेना के मध्य का भाग
(स) सेना के पीछे का भाग
(द) सम्पूर्ण सेना।
Answer: (अ) सेना का अग्रिम भाग
In simple words: हरावल दस्ता सेना का सबसे आगे वाला हिस्सा होता है।

🎯 Exam Tip: सेना की अलग-अलग टुकड़ियों के नामों और उनके कार्यों को समझें।

 

प्रश्न 3. महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताइए?
Answer: महाराणा प्रताप एक महान योद्धा और अपनी प्रजा के लिए एक प्रेरणा थे। उनके व्यक्तित्व ने मेवाड़ के हर व्यक्ति को अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाला सैनिक बना दिया। महाराणा प्रताप ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बहुत प्रयास किए। उनके प्रयासों के कारण ही मेवाड़ को दोबारा जौहर जैसी भयानक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनकी प्रेरणा आज भी हमें कर्तव्य और बलिदान का पाठ पढ़ाती है।
In simple words: महाराणा प्रताप एक बड़े योद्धा और आदर्श राजा थे। उन्होंने अपनी धरती की आजादी के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया और महिलाओं का सम्मान किया।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की विशेषताओं को बताते समय उनके प्रमुख गुणों और कार्यों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 5. महाराजा सूरजमल ने राजस्थान के किस शहर की स्थापना की थी?
Answer: महाराजा सूरजमल ने राजस्थान के भरतपुर शहर की स्थापना की थी।
In simple words: महाराजा सूरजमल ने भरतपुर शहर बसाया था।

🎯 Exam Tip: शहरों के संस्थापक और उनके महत्वपूर्ण योगदानों को याद रखें।

 

प्रश्न 6. दुर्गादास राठौड़ का अंतिम समय कहाँ व्यतीत हुआ?
Answer: दुर्गादास राठौड़ का अंतिम समय उज्जैन (मध्य प्रदेश) में व्यतीत हुआ था।
In simple words: दुर्गादास राठौड़ ने अपना आखिरी समय उज्जैन में बिताया।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों के जीवन के अंतिम पड़ाव या महत्वपूर्ण स्थानों को याद रखें।

 

प्रश्न 7. महाराणा प्रताप को अधीन करने के लिए अकबर के कूटनीतिक प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
Answer: अकबर मेवाड़ में 1567-1568 ई. में हुए संघर्ष की भयंकर स्थिति को जानता था। इसलिए उसने महाराणा प्रताप से सीधे युद्ध करना सही नहीं समझा। प्रताप को अपने अधीन करने के लिए अकबर ने कई कूटनीतिक प्रयास किए। उसने एक-एक करके चार शांति दूतों को महाराणा प्रताप के पास भेजा। हालांकि, अकबर अपने प्रयासों में सफल नहीं हो सका क्योंकि महाराणा प्रताप ने उसकी चाल को समझ लिया और सभी दूतों को वापस भेज दिया। इससे अकबर को समझ आ गया कि प्रताप किसी भी कीमत पर झुकने वाले नहीं हैं।
In simple words: अकबर ने महाराणा प्रताप को हराने के लिए सीधे युद्ध नहीं किया, बल्कि चार बार शांति दूत भेजे। लेकिन प्रताप ने उनकी बात नहीं मानी और उन्हें वापस भेज दिया।

🎯 Exam Tip: कूटनीतिक प्रयासों का उल्लेख करते समय यह भी बताएं कि वे सफल क्यों नहीं हुए।

 

प्रश्न 8. दुर्गादास राठौड़ ने किस प्रकार मारवाड़ के उत्तराधिकारी अजीत सिंह की रक्षा की?
Answer: दुर्गादास राठौड़ ने बड़ी बहादुरी और समझदारी से मारवाड़ के उत्तराधिकारी अजीत सिंह की रक्षा की। जब औरंगजेब ने अजीत सिंह को इस्लाम धर्म अपनाने की शर्त पर मारवाड़ का राज्य देने की बात कही, तो दुर्गादास राठौड़ ने इसे स्वीकार नहीं किया क्योंकि यह बहुत अपमानजनक था। दुर्गादास जानते थे कि अजीत सिंह को दिल्ली में रखना सुरक्षित नहीं है, इसलिए उन्होंने उसे दिल्ली से बाहर सिरोही भेज दिया। जब औरंगजेब को यह पता चला, तो उसने अपनी सेना भेजी, लेकिन दुर्गादास के नेतृत्व में राठौड़ सेना ने मुगल सेना को परेशान किया। जब औरंगजेब ने शहजादे अकबर को इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भेजा, तो वह भी असफल रहा। दुर्गादास ने चतुराई से अकबर को उसके पिता औरंगजेब के खिलाफ भड़का दिया। राजनीतिक तौर पर दुर्गादास का यह कार्य बहुत सफल रहा। इस तरह दुर्गादास राठौड़ ने अजीत सिंह की रक्षा के लिए राठौड़-सिसोदिया गठबंधन बनाया। यह एक महान उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने राजा की रक्षा के लिए सब कुछ किया।
In simple words: दुर्गादास राठौड़ ने बहुत चालाकी से अजीत सिंह की जान बचाई। उन्होंने औरंगजेब की शर्त नहीं मानी, अजीत सिंह को दिल्ली से बाहर भेजा, और मुगल सेना को हराया। उन्होंने अकबर को औरंगजेब के खिलाफ भी भड़काया, जिससे अजीत सिंह सुरक्षित रहे।

🎯 Exam Tip: दुर्गादास के प्रयासों में उनकी बहादुरी, कूटनीति और अजीत सिंह की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का स्पष्ट वर्णन करें।

 

प्रश्न 10. अमरसिंह राठौड़ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: अमरसिंह राठौड़ का जन्म 12 दिसंबर 1613 ई. को हुआ था। वह जोधपुर के शासक गजसिंह के सबसे बड़े पुत्र थे। उन्हें गजसिंह का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन एक षड्यंत्र के कारण यह पद सवंत सिंह को मिला। अमरसिंह ने इस निर्णय का विरोध नहीं किया। साहसी और स्वाभिमानी होने के कारण शाहजहाँ भी अमरसिंह के व्यक्तित्व से परिचित था। इसलिए शाहजहाँ कठिन अभियानों के लिए हमेशा अमरसिंह को ही भेजता था। अमरसिंह अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करते थे। उन्होंने एक बार बादशाह शाहजहाँ के सामने ही चालबाज सलावत खाँ को मार डाला। इससे डरे हुए शाहजहाँ को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। अमरसिंह का जीवन उच्च आदर्शों और साहसी कार्यों से भरा हुआ था। उनकी बहादुरी की कहानियाँ आज भी कही जाती हैं।
In simple words: अमरसिंह राठौड़ बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे। उन्हें धोखा देकर राजा नहीं बनाया गया, लेकिन उन्होंने विरोध नहीं किया। शाहजहाँ भी उनसे डरते थे। उन्होंने बादशाह के सामने एक अधिकारी को मार डाला और उनका जीवन वीरता से भरा था।

🎯 Exam Tip: अमरसिंह राठौड़ के चरित्र को दर्शाते समय उनके साहस, स्वाभिमान और न्यायप्रियता को प्रमुखता से बताएं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. मुगल साम्राज्य की नींव रखी
(अ) हुमायूँ ने
(ब) बाबर ने
(स) शाहजहाँ ने
(द) अकबर ने
Answer: (ब) बाबर ने
In simple words: मुगल साम्राज्य की शुरुआत बाबर ने की थी।

🎯 Exam Tip: भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना और उसके संस्थापक का नाम याद रखें।

 

प्रश्न 3. हेमचन्द्र को मुगल सेना ने पराजित किया
(अ) 164 ई. में
(ब) 1555 ई. में
(स) 1556 ई. में
(द) 1557 ई. में
Answer: (स) 1556 ई. में
In simple words: हेमचन्द्र को मुगल सेना ने 1556 ई. में हराया था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण युद्धों और उनकी तारीखों को ध्यान से याद करें।

 

प्रश्न 4. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जन्म हुआ
(अ) 9 मई 1540 को
(स) 9 जून 111 को।
(स) 9 मई 1542 को
(द) 9 जुलाई 1543 को
Answer: (अ) 9 मई 1540 को
In simple words: महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक हस्तियों की जन्मतिथि और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण वर्षों को याद रखना जरूरी है।

 

प्रश्न 5. हल्दीघाटी के मैदान में युद्ध प्रारम्भ हुआ
(अ) 18 जून 1576 को
(य) 18 जून 1577 को
(स) 18 जून 1578 को
(द) 18 जून 1579 को
Answer: (अ) 18 जून 1576 को
In simple words: हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं की सटीक तारीखों को याद रखें।

निम्नलिखित रिक्त वाक्यों में सही शब्द भरिए

 

1. मुगल शासकों का सबसे अधिक विरोध **प्रताप** ने किया।
Answer: मुगल शासकों का सबसे अधिक विरोध **प्रताप** ने किया।
In simple words: मुगल शासकों का सबसे ज्यादा विरोध महाराणा प्रताप ने किया।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय सही ऐतिहासिक नामों का प्रयोग करें।

 

2. अकबर ने कूटनीति से समस्या को सुलझाने के लिए महाराणा प्रताप के पास **शिष्टमण्डल** भेजे।
Answer: अकबर ने कूटनीति से समस्या को सुलझाने के लिए महाराणा प्रताप के पास **शिष्टमण्डल** भेजे।
In simple words: अकबर ने महाराणा प्रताप से बात करने के लिए दूत (शिष्टमण्डल) भेजे थे।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े मुख्य शब्दों और अवधारणाओं को समझें।

अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. अकबर ने महाराणा प्रताप के पास शिष्ट मण्डल क्यों भेजे?
Answer: अकबर ने महाराणा प्रताप के पास शिष्टमण्डल इसलिए भेजे ताकि शांतिपूर्ण तरीके से कूटनीति का उपयोग करके समस्याओं को सुलझाया जा सके और महाराणा प्रताप को अपने अधीन किया जा सके। वह सीधे युद्ध से बचना चाहता था।
In simple words: अकबर ने महाराणा प्रताप को शांति से समझाने और अपने साथ मिलाने के लिए दूत भेजे थे।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक कार्य के पीछे के मुख्य कारणों को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 2. महाराणा प्रताप किस युद्ध प्रणाली द्वारा मुगलों को छकाते रहे?
Answer: महाराणा प्रताप छापामार युद्ध प्रणाली (गुरिल्ला युद्ध) द्वारा मुगलों को लगातार परेशान करते रहे। इस तकनीक से उन्होंने छोटी टुकड़ियों का इस्तेमाल करके बड़े दुश्मन को हराया।
In simple words: महाराणा प्रताप मुगलों को परेशान करने के लिए छापामार युद्ध का तरीका अपनाते थे।

🎯 Exam Tip: महाराणा प्रताप की युद्ध रणनीति का सही नाम बताएं।

 

प्रश्न 3. महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ बनी हुई है?
Answer: महाराणा प्रताप की समाधि चावंड के निकट बाडोली गाँव में बनी हुई है।
In simple words: महाराणा प्रताप की समाधि बाडोली गाँव में, चावंड के पास है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तियों के अंतिम विश्राम स्थल को याद रखें।

 

प्रश्न 4. महाराणा प्रताप ने किन महत्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना करवाई?
Answer: महाराणा प्रताप ने 'विश्व वल्लभ' और 'व्यवहार आदर्श' नामक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना करवाई थी। यह उनकी कला और ज्ञान के प्रति रुचि को दर्शाता है।
In simple words: महाराणा प्रताप ने 'विश्व वल्लभ' और 'व्यवहार आदर्श' नाम की किताबें लिखवाईं।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक शासकों के साहित्यिक योगदानों को भी याद रखें।

 

प्रश्न 5. अमर सिंह राठौड़ किस शासक के पुत्र थे?
Answer: अमर सिंह राठौड़ जोधपुर के शासक गजसिंह के पुत्र थे।
In simple words: अमर सिंह राठौड़ के पिता का नाम गजसिंह था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के पारिवारिक संबंधों को याद रखना भी महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 6. औरंगजेब ने जजिया कर पुनः कब लगाया?
Answer: औरंगजेब ने जजिया कर पुनः 1679 ई. में लगाया था। यह एक धार्मिक कर था।
In simple words: औरंगजेब ने 1679 ई. में दोबारा जजिया कर लगाया था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण करों और उनके लागू होने की तारीखों को याद रखें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. बाबर की मृत्यु के बाद दिल्ली की सत्ता के लिए हुए संघर्ष का संक्षिप्त परिचय दीजिए?
Answer: बाबर ने अपनी रणनीतिक समझ और साहस से दिल्ली में मुगल साम्राज्य की नींव रखी, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद उसका बेटा हुमायूँ शेरशाह सूरी से हार गया। इसके बाद दिल्ली पर शेरशाह सूरी का राज हो गया। शेरशाह सूरी के परिवार के अन्य शासक ज्यादा समय तक राज नहीं कर पाए और हेमचन्द्र ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। फिर 1556 ई. में मुगल सेना ने हेमचन्द्र को हराकर दिल्ली की सत्ता पर फिर से कब्जा कर लिया। इसके बाद लंबे समय तक दिल्ली पर मुगलों का शासन रहा, जिसमें अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब जैसे शासक हुए। सत्ता के लिए यह संघर्ष भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
In simple words: बाबर की मौत के बाद, दिल्ली पर राज करने के लिए हुमायूँ और शेरशाह सूरी के बीच लड़ाई हुई। शेरशाह जीता, फिर हेमचन्द्र ने राज किया, और आखिर में मुगलों ने फिर से दिल्ली पर कब्जा कर लिया।

🎯 Exam Tip: उत्तराधिकार के संघर्ष में शामिल मुख्य शासकों और महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 2. हल्दीघाटी के युद्ध के क्या परिणाम निकले?
Answer: 18 जून 1576 को शुरू हुए हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना महाराणा प्रताप से हार गई। महाराणा प्रताप की इस जीत से आम लोगों का प्रताप के नेतृत्व में विश्वास और बढ़ गया। इस युद्ध ने मुगलों को उनकी ताकत का एहसास करा दिया और उनके इस भ्रम को तोड़ दिया कि मुगल सेना सबसे शक्तिशाली है। हल्दीघाटी की हार से परेशान होकर अकबर ने युद्ध के जिम्मेदार मान सिंह और आसफ खाँ को मुगल दरबार में आने से रोक दिया। यह युद्ध भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
In simple words: हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर की सेना को हरा दिया। इस जीत से लोगों का विश्वास बढ़ा और मुगलों का घमंड टूट गया। अकबर ने हार के लिए जिम्मेदार सेनापतियों को सजा दी।

🎯 Exam Tip: हल्दीघाटी युद्ध के मुख्य परिणामों जैसे महाराणा प्रताप की जीत और मुगल सेना पर प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 3. महाराणा द्वारा किए गए जनहित के कार्यों का विश्लेषण कीजिए?
Answer: महाराणा प्रताप ने मानव अधिकारों और महिलाओं की सुरक्षा व संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम किए। उनके प्रयासों के कारण ही मेवाड़ को भविष्य में जौहर जैसी प्रथा का सामना नहीं करना पड़ा। अकाल से जूझने वाली प्रजा और शासकों के लिए महाराणा प्रताप ने जल बचाने और कम खर्च में जलाशय बनाने की तकनीक दी। महाराणा प्रताप का जीवन हमें हमेशा अच्छे काम करने और देश सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। वे सिर्फ योद्धा ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी और जनसेवी शासक भी थे।
In simple words: महाराणा प्रताप ने लोगों और महिलाओं की रक्षा के लिए काम किया। उन्होंने पानी बचाने के तरीके सिखाए और मेवाड़ को जौहर जैसी प्रथा से बचाया।

🎯 Exam Tip: महाराणा प्रताप के जनहित कार्यों में महिला सुरक्षा, जल संरक्षण और प्रजा कल्याण जैसे बिंदुओं को शामिल करें।

 

प्रश्न 4. राठौड़ सिसोदिया गठबंधन क्यों हुआ? संक्षेप में समझाइए।
Answer: राठौड़-सिसोदिया गठबंधन का मुख्य कारण अजीत सिंह की सुरक्षा था। जब संघर्ष बहुत बढ़ गया, तो अजीत सिंह के संरक्षक दुर्गादास ने मेवाड़ के महाराणा राजसिंह से अजीत सिंह को शरण देने का अनुरोध किया। महाराणा ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और अजीत सिंह को संरक्षण दिया। इतना ही नहीं, महाराणा ने राठौड़ों को पूरी सहायता देने का वचन भी दिया। इस तरह मेवाड़ और मारवाड़ के बीच राठौड़-सिसोदिया गठबंधन हुआ। यह गठबंधन दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसने मुगलों के खिलाफ उनकी स्थिति मजबूत की।
In simple words: अजीत सिंह की जान बचाने के लिए दुर्गादास राठौड़ ने महाराणा राजसिंह से मदद मांगी। महाराणा ने अजीत सिंह को शरण दी और राठौड़ों की मदद करने का वादा किया, जिससे राठौड़-सिसोदिया गठबंधन बना।

🎯 Exam Tip: गठबंधन के पीछे के मुख्य कारण (अजीत सिंह की सुरक्षा) और इसमें शामिल प्रमुख व्यक्तियों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 6. महाराजा सूरजमल द्वारा किए गए राजनीतिक कार्यों की समीक्षा कीजिए?
Answer: महाराजा सूरजमल भरतपुर के एक बहुत लोकप्रिय शासक थे। उन्होंने ही भरतपुर शहर की स्थापना की थी। जयपुर के महाराजा जयसिंह की मृत्यु के बाद हुए उत्तराधिकार युद्ध में सूरजमल के सहयोग से ही ईश्वरी सिंह विजयी हुए और उन्हें जयपुर की गद्दी मिली। सूरजमल ने फिरोजशाह कोटला पर कब्जा करने के साथ-साथ गाजियाबाद, रोहतक, झज्जर, आगरा, धौलपुर, मैनपुरी, हाथरस, बनारस आदि जगहों पर भी अधिकार कर लिया। महाराजा सूरजमल राजनीतिक रूप से बहुत समझदार व्यक्ति थे। इसलिए 1761 ई. में पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमदशाह अब्दाली से हारने के बाद बचे हुए मराठा सैनिकों के भोजन, इलाज और कपड़ों का इंतजाम भी महाराजा सूरजमल ने ही किया था। यह उनकी दूरदर्शिता और सामरिक कौशल को दर्शाता है।
In simple words: महाराजा सूरजमल भरतपुर के शासक थे। उन्होंने भरतपुर शहर बसाया, जयपुर के राजा बनने में मदद की, और कई जगहों पर राज किया। वे बहुत समझदार थे और उन्होंने पानीपत की लड़ाई के बाद मराठा सैनिकों की मदद भी की।

🎯 Exam Tip: महाराजा सूरजमल के मुख्य राजनीतिक कार्यों में भरतपुर की स्थापना, उत्तराधिकार युद्ध में भूमिका और अन्य क्षेत्रों पर अधिकार को शामिल करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न. 'रचनाधर्मियों ने अमरसिंह राठौड़ के त्याग से आकर्षित होकर अनेक प्रेरणादायक काव्यों की रचना की' ऐसा करने के पीछे कारणों का विस्तार से वर्णन कीजिए?
Answer: रचनाकर्मी अमरसिंह राठौड़ के त्याग और व्यक्तित्व से इसलिए प्रभावित हुए क्योंकि अमरसिंह गंभीर और साहसी व्यक्ति थे। अमरसिंह के त्याग और व्यक्तित्व को हम नीचे दिए गए बिंदुओं से समझ सकते हैं:
1. अमरसिंह महाराजा गजसिंह के स्वाभाविक उत्तराधिकारी थे, लेकिन एक षड्यंत्र के कारण वह शासक नहीं बन सके। इसके बावजूद उन्होंने इस निर्णय का विरोध नहीं किया। यह बात उनकी महानता को दिखाती है।
2. अमरसिंह की वीरता, योग्यता और समझ से तत्कालीन मुगल बादशाह शाहजहाँ भली-भांति परिचित थे। इसलिए जब कठिन सैन्य अभियानों की बात आती थी, तो वह उसे ही भेजते थे। यह बात अमर सिंह की वीरता को दिखाती है।
3. अमरसिंह स्वाभिमानी होने के साथ-साथ स्वाभिमानी व्यक्तियों की रक्षा भी करते थे। इसलिए उन्होंने बादशाह की चिंता किए बिना केसरीसिंह को 30 हजार का पट्टा और नागौर की सुरक्षा का जिम्मा सौंप दिया। यह बात अमरसिंह की स्वतंत्र विचारधारा की प्रतीक है।
4. अमरसिंह ने अपने स्वाभिमान पर कभी आँच नहीं आने दी। इसीलिए कुछ गलत घटनाओं के होने पर उन्होंने मुगल कोष में जमा कराए जाने वाले कर को देने से साफ मना कर दिया।
5. मुगल बादशाह के सामने उन्होंने सलावत खाँ को मौत के घाट उतार दिया, जिससे उनकी बहादुरी साबित होती है। इस घटना से पूरे दरबार में भय छा गया था।
उपरोक्त कारणों से प्रभावित होकर ही रचनाधर्मियों ने अमर सिंह से संबंधित काव्यों की रचना की। उनके जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान और साहस नहीं छोड़ना चाहिए।
In simple words: रचनाकारों ने अमरसिंह राठौड़ की कहानियां इसलिए लिखीं क्योंकि वे बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे। उन्हें राजा नहीं बनाया गया, पर उन्होंने विरोध नहीं किया। शाहजहाँ भी उनकी बहादुरी से डरते थे। उन्होंने हमेशा अपनी आत्म-सम्मान की रक्षा की, मुगलों का कर देने से मना किया और बादशाह के सामने सलावत खाँ को मार डाला। इन्हीं बातों से प्रेरणा पाकर उनकी गाथाएं लिखी गईं।

🎯 Exam Tip: अमरसिंह राठौड़ के त्याग, स्वाभिमान, बहादुरी और न्यायप्रियता को प्रमुख बिंदुओं के रूप में बताएं और उदाहरणों से स्पष्ट करें।

Free study material for Social Science

RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 7 Social Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 7 Social Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 7 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Social Science Class 7 Solved Papers

Using our Social Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 7 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Social Science are as per latest RBSE curriculum.

Are the Social Science RBSE solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Social Science. You can access RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Social Science RBSE solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 18 राजस्थान के राजवंश एवं मुगल in printable PDF format for offline study on any device.