RBSE Solutions Class 6 Social Science Chapter 20 प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था

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Detailed Chapter 20 प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था RBSE Solutions for Class 6 Social Science

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Class 6 Social Science Chapter 20 प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था RBSE Solutions PDF

Chapter 20 प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था

पाठ्यपुस्तक गतिविधि आधारित प्रश्न

 

Question 1. प्राचीन भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता है ?
Answer: प्राचीन भारत में बनी वस्तुओं की दूसरे देशों में बहुत माँग थी। जब भारत इन चीजों को बाहर भेजता था, तो बदले में उसे बहुत सारा सोना और चाँदी मिलता था। भारत में हर तरह का अच्छा सामान आसानी से मिल जाता था, इसलिए हमें दूसरे देशों से ज्यादा कुछ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी। इस कारण विदेशों से आया सोना और चाँदी भारत में ही जमा रहता था, जिससे भारत बहुत अमीर बन गया था। यह दिखाता है कि उस समय भारत का व्यापार बहुत मजबूत और लाभदायक था। इसी वजह से प्राचीन भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था।
In simple words: पुराने समय में भारत से बहुत सारी चीजें विदेशों में बेची जाती थीं। बदले में भारत को खूब सोना-चांदी मिलता था। चूंकि हम दूसरों से कम खरीदते थे, तो सारा सोना भारत में ही रुक जाता था। इसलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था।

🎯 Exam Tip: जब भी 'क्यों' वाले प्रश्न का उत्तर दें, तो कारण स्पष्ट रूप से बताएँ और तर्कों को सरल भाषा में क्रमबद्ध करें।

 

Question 2. प्राचीनकाल के कृषि उत्पादों की सूची बनाइए।
Answer: प्राचीन काल के मुख्य कृषि उत्पाद थे: चीनी, नमक, चाय, अफीम, कपास, मसाले, नील, रेशम और गन्ना। ये सभी उत्पाद खेती से मिलते थे और व्यापार में महत्वपूर्ण थे।
In simple words: पुराने समय में खेती से चीनी, नमक, चाय, अफीम, कपास, मसाले, नील, रेशम और गन्ना जैसी चीजें पैदा होती थीं।

🎯 Exam Tip: सूची वाले प्रश्नों में हमेशा सभी महत्वपूर्ण वस्तुओं को शामिल करें और उन्हें स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 3. “भारतीय किसान कुछ मायने में एक औसत अंग्रेज किसान से भी अच्छा है।” यह वाक्य किसने कहा ? उसके कारणों पर चर्चा करें ?
Answer: यह वाक्य डॉ. वॉयलेकर ने 1889 ई. में कहा था। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि भारतीय किसान खेती को अच्छे से समझते थे।
इसके मुख्य कारण ये थे:
• भारतीय किसान बहुत अच्छे तरीके से खेती करते थे और अपनी फसलों से खरपतवार को साफ रखते थे।
• भारतीय किसानों को मिट्टी के बारे में, फसल बोने और काटने के सही समय के बारे में पूरी जानकारी होती थी। इससे उनकी खेती की दक्षता दिखती है।
In simple words: डॉ. वॉयलेकर ने 1889 में कहा था कि भारतीय किसान अंग्रेज किसानों से बेहतर हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि भारतीय किसान खेती को अच्छे से समझते थे, खरपतवार साफ रखते थे और मिट्टी, बुवाई, कटाई की पूरी जानकारी रखते थे।

🎯 Exam Tip: किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के कथन वाले प्रश्नों में, उनका नाम और वर्ष (यदि दिया हो) जरूर बताएँ, और फिर कारणों को स्पष्ट बिंदुओं में समझाएँ।

 

Question 4. सफेद कपड़े का उत्पादन कहाँ पर होता था ?
Answer: सफेद कपड़े का उत्पादन कई जगहों पर होता था। इन स्थानों में लाहौर, सरहिन्द, समाना, पटना, ढाका, कलकत्ता, अहमदाबाद, बुरहानपुर, पेताबोली, मद्रास, पांडिचेरी और नागापटनम प्रमुख थे। ये सभी जगहें कपड़े के बड़े उत्पादन केंद्र थे।
In simple words: सफेद कपड़े लाहौर, सरहिन्द, समाना, पटना, ढाका, कलकत्ता, अहमदाबाद, बुरहानपुर, पेताबोली, मद्रास, पांडिचेरी और नागापटनम में बनते थे।

🎯 Exam Tip: स्थानों की सूची वाले प्रश्नों में, सभी महत्वपूर्ण जगहों के नाम सही ढंग से याद करें और लिखें।

 

Question 6. शिंट्ज (छींट छापेदार सूती कपड़े) के केन्द्र कौन-कौन से हैं ?
Answer: शिंट्ज यानी छींट छापेदार सूती कपड़े बनाने के मुख्य केंद्र समाना, पटना, ढाका, कलकत्ता, पंतन, सिरोंज, बुरहानपुर, पेताबोली और मद्रास थे। इन जगहों पर खास तरह के कपड़े बनाए जाते थे।
In simple words: छींट छापेदार सूती कपड़े बनाने वाले मुख्य केंद्र समाना, पटना, ढाका, कलकत्ता, पंतन, सिरोंज, बुरहानपुर, पेताबोली और मद्रास थे।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक स्थानों के नाम याद रखने के लिए उन्हें एक साथ सूची बनाकर दोहराना उपयोगी होता है।

 

Question 7. सिल्क का उत्पादन भारत में कहाँ-कहाँ पर होता था ?
Answer: सिल्क का उत्पादन भारत में मुख्य रूप से बनारस, पंतन और अहमदाबाद में होता था। ये स्थान सिल्क के कपड़ों के लिए जाने जाते थे।
In simple words: भारत में सिल्क मुख्य रूप से बनारस, पंतन और अहमदाबाद में बनता था।

🎯 Exam Tip: उत्पादन केंद्रों से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य स्थानों को सटीक रूप से बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. प्राचीन काल में भारत विदेशों से माल का आयात बहुत ही कम करता था। क्यों ?
Answer: प्राचीन काल में भारत विदेशों से बहुत कम सामान खरीदता था। इसका मुख्य कारण यह था कि दूसरे देश उस समय उद्योग के मामले में उतने विकसित नहीं थे। साथ ही, भारत के पास अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन थे। इस आत्मनिर्भरता ने आयात को कम रखा।
In simple words: पुराने समय में भारत विदेशों से कम सामान खरीदता था। क्योंकि दूसरे देश औद्योगिक रूप से पिछड़े थे और भारत के पास अपनी सारी चीजें थीं।

🎯 Exam Tip: 'क्यों' वाले प्रश्नों में हमेशा स्पष्ट और सीधे कारण बताएं, जो मुख्य बिंदु पर केंद्रित हों।

 

Question 9. ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जिसमें प्राचीन काल में भारत की वस्तुओं की विदेशी बाजारों में माँग रहती थी।
Answer: प्राचीन काल में भारतीय वस्तुओं की विदेशी बाजारों में बहुत माँग थी। इनमें मलमल, छट, जरी के वस्त्र, लोहे व इस्पात की वस्तुएँ, तम्बाकू, नील, शॉल, रेशम व रेशमी वस्त्र और गरम मसाले शामिल थे। ये चीजें भारत के व्यापार को मजबूत बनाती थीं।
In simple words: पुराने समय में विदेशों में भारतीय मलमल, छट, जरी के कपड़े, लोहे का सामान, तम्बाकू, नील, शॉल, रेशम के कपड़े और गरम मसाले बहुत पसंद किए जाते थे।

🎯 Exam Tip: सूची वाले प्रश्नों में सभी महत्वपूर्ण वस्तुओं को याद रखें और उन्हें स्पष्ट रूप से लिखें, ताकि कोई भी मुख्य बिंदु न छूटे।

 

Question 10. भारत को शेष विश्व से जोड़ने वाले जल व थल के व्यापारिक मार्ग कौन-कौन से थे ?
Answer: भारत को बाकी दुनिया से जोड़ने वाले कुछ जल और थल व्यापारिक मार्ग इस प्रकार थे:
जलमार्ग:
• सूरत बंदरगाह (जो गुजरात में है) के रास्ते भारत फारस की खाड़ी और लाल सागर से जुड़ा था।
• मछलीपट्टनम (कोरोमंडल तट पर) और हुगली (बंगाल में) के माध्यम से भारत दक्षिण-पूर्वी एशियाई बंदरगाहों से जुड़ा था। ये बंदरगाह समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण थे।
• भारत हिंद महासागर और अरब महासागर के रास्ते अरब देशों से भी जुड़ा था।
In simple words: भारत को दुनिया से जोड़ने वाले समुद्री मार्ग सूरत, मछलीपट्टनम और हुगली जैसे बंदरगाहों से फारस की खाड़ी, लाल सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया और अरब देशों तक जाते थे।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक मार्गों वाले प्रश्नों में, जलमार्गों और थलमार्गों को अलग-अलग बताना और मुख्य स्थानों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 11. प्राचीन काल में भारतीय वस्तुओं की विदेशों में माँग बहुत अधिक रहती थी। ऐसे देश कौन-कौन से थे ?
Answer: प्राचीन काल में भारतीय वस्तुओं की माँग कई विदेशी देशों में बहुत अधिक थी। ऐसे मुख्य देश मलक्का, कैंटन, मस्कट और अलेक्सांद्रिया थे। ये सभी देश भारत के साथ व्यापार करते थे।
In simple words: पुराने समय में भारतीय चीजों को खरीदने वाले देश मलक्का, कैंटन, मस्कट और अलेक्सांद्रिया थे।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक साझेदार देशों के नाम सटीक रूप से याद करें और उनका उल्लेख करें।

 

Question 12. विभिन्न पुस्तकों में रोमांचकारी समुद्री यात्राओं को पढ़ेएवं ऐसी घटनाओं का संकलन करें। अपने अध्यापक एवं अभिभावक से इस कार्य में मदद प्राप्त करें।
Answer: कई किताबों में समुद्री रोमांचकारी यात्राओं का जिक्र मिलता है। इनमें गुलीवर की विचित्र यात्रा और लिलिपुट वासियों की कहानी शामिल है। वास्को-डि-गामा की भारतीय द्वीप और वेस्टइंडीज की खोज, समुद्र की चुनौतियाँ और क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज से पहले का उनका सफर भी रोमांचक कहानियों से भरा था। ये सभी कहानियाँ समुद्री खोज और साहस को दर्शाती हैं।
In simple words: गुलीवर की यात्रा, वास्को-डि-गामा की भारत खोज और क्रिस्टोफर कोलंबस की अमेरिका खोज जैसी कहानियों में रोमांचक समुद्री यात्राओं का वर्णन मिलता है।

🎯 Exam Tip: रचनात्मक प्रश्नों में, दिए गए विषय से संबंधित प्रसिद्ध उदाहरणों का उल्लेख करके अपने उत्तर को और अधिक प्रभावशाली बनाएँ।

पढ़े एवं बताएँ

 

Question 1. उत्तरापथ व दक्षिणापथ किसे कहते हैं ?
Answer: उत्तरापथ और दक्षिणापथ भारत के पुराने देशी व्यापार के दो मुख्य मार्ग थे। उत्तरापथ भारत के उत्तरी हिस्सों को जोड़ता था, जबकि दक्षिणापथ दक्षिणी हिस्सों को जोड़ता था। ये मार्ग देश के भीतर सामान लाने-ले जाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे।
In simple words: उत्तरापथ उत्तरी भारत को जोड़ता था और दक्षिणापथ दक्षिणी भारत को। ये भारत के अंदर व्यापार के मुख्य रास्ते थे।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक मार्गों को परिभाषित करते समय उनकी दिशा और व्यापारिक महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 2. देशी व विदेशी व्यापार में क्या अन्तर है ?
Answer: देशी व्यापार वह कारोबार है जो किसी एक देश की सीमाओं के भीतर किया जाता है। इसमें देश के ही लोग आपस में सामान खरीदते और बेचते हैं। वहीं, विदेशी व्यापार वह कारोबार है जो एक देश से दूसरे देश के बीच होता है। इसमें एक देश की चीजें दूसरे देश में जाती हैं और दूसरे देश की चीजें पहले देश में आती हैं।
In simple words: देशी व्यापार देश के अंदर होता है, जबकि विदेशी व्यापार एक देश से दूसरे देश के बीच होता है।

🎯 Exam Tip: अंतर वाले प्रश्नों में, दोनों पक्षों की परिभाषा और उनके बीच का मुख्य भेद स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 3. एशिया के बल्ख तक पहुँचने के लिए मार्ग कहाँ से होकर जाता था ?
Answer: एशिया के बल्ख तक पहुँचने के लिए मार्ग अफगानिस्तान से होकर काबुल जाता था। यह एक महत्वपूर्ण थलमार्ग था, जिसका उपयोग व्यापार और यात्रा के लिए किया जाता था।
In simple words: एशिया के बल्ख तक जाने के लिए अफगानिस्तान से काबुल होकर गुजरना पड़ता था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक मार्गों के संबंध में प्रमुख शहरों और देशों के नाम सही ढंग से याद करें।

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

 

Question 1. (3) भारतीय सामग्री के प्रयोग के कारण रोमन साम्राज्य से सोना बाहर की ओर जा रहा है।
Answer: (3) प्लिनी ने यह बात कही थी।
In simple words: प्लिनी ने बताया था कि भारतीय चीजों के इस्तेमाल से रोमन साम्राज्य से सोना बाहर जा रहा था।

🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, कथन के लेखक या स्रोत को सटीक रूप से बताएँ।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें। (कोष्ठक में दिए शब्दों की सहायता से) (गेहूँ, पानी का जहाज, हाथी दांत व सोना, सोना व चाँदी, ईसवाल (उदयपुर)।)
(1) यहाँ का बहुत-सा माल विदेशों में निर्यात किया जाता था तथा निर्यात के बदले मुद्रा के रूप में........लिया जाता था।
(2)............की खेती यहाँ पर इंग्लैण्ड व यूरोप से कई शताब्दी पूर्व प्रारम्भ की थी।
(3)............बनाने की कला में भारत यूरोप से आगे था।
(4)............में मौर्यकालीन लौह प्रगलन भट्टियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
(5) ईथोपिया (अफ्रीका) से............भारत आता था।
Answer:
(1) सोना व चाँदी
(2) गेहूँ
(3) पानी का जहाज
(4) ईसवाल (उदयपुर)
(5) हाथी दांत व सोना
In simple words: दिए गए शब्दों से खाली स्थान भरे गए हैं, जैसे भारत से सोना-चांदी मिलती थी, गेहूं की खेती शुरू हुई, जहाज बनाने में हम आगे थे, ईसवाल में भट्ठियों के अवशेष मिले, और इथियोपिया से हाथी दांत व सोना आता था।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में, दिए गए विकल्पों का ध्यानपूर्वक उपयोग करें और सही शब्द को सटीक जगह पर भरें।

 

Question 3. प्राचीन काल में भारत से कौन-कौन सी वस्तुएँ निर्यात की जाती थीं ?
Answer: प्राचीन काल में भारत से कई वस्तुएँ दूसरे देशों में भेजी जाती थीं। इनमें मलमल, छींट, जरी के वस्त्र, लोहे व इस्पात की वस्तुएँ, तम्बाकू, नील, शॉल, रेशम व रेशमी वस्त्र और गरम मसाले शामिल थे। ये सभी वस्तुएँ भारतीय व्यापार का मुख्य आधार थीं।
In simple words: भारत पुराने समय में मलमल, छींट, जरी के कपड़े, लोहे का सामान, तम्बाकू, नील, शॉल, रेशम के कपड़े और गरम मसाले दूसरे देशों को बेचता था।

🎯 Exam Tip: निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की सूची याद रखें और उन्हें क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. देशी व विदेशी व्यापार किसे कहते हैं ? प्राचीन काल में भारत का कौन-कौन से देशों से विदेशी व्यापार होता था ?
Answer: देशी व्यापार का मतलब है ऐसा कारोबार जो एक ही देश की सीमाओं के अंदर होता है। वहीं, विदेशी व्यापार वह कारोबार है जो एक देश से दूसरे देश के बीच किया जाता है। प्राचीन काल में भारत का विदेशी व्यापार मुख्य रूप से बेबीलोन, मिस्र, जावा, सुमात्रा और रोम जैसे देशों के साथ होता था। यह व्यापार भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
In simple words: देशी व्यापार देश के भीतर होता है और विदेशी व्यापार अलग-अलग देशों के बीच होता है। पुराने समय में भारत, बेबीलोन, मिस्र, जावा, सुमात्रा और रोम जैसे देशों के साथ व्यापार करता था।

🎯 Exam Tip: परिभाषा वाले प्रश्नों में सटीक शब्दावली का उपयोग करें और उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 6. दक्षिणा पथ के आने वाले मार्ग कौन-कौन से हैं ?
Answer: दक्षिणापथ के अंतर्गत आने वाले मार्ग कई महत्वपूर्ण स्थानों से गुजरते थे। इनमें पैठण, महेश्वर (जो मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे है), उज्जैन, गोनाद्धा (गोंडों का प्रदेश), भिलसा, कोसम, साकेत (अयोध्या), श्रावस्ती, सेताण्या, कपिलवस्तु, पावापुरी, भोग्नगारा, वैशाली और राजगृह शामिल हैं। ये सभी मार्ग दक्षिणी भारत के व्यापार और यात्रा के लिए केंद्रीय बिंदु थे।
In simple words: दक्षिणापथ के मुख्य मार्ग पैठण, महेश्वर, उज्जैन, गोनाद्धा, भिलसा, कोसम, साकेत, श्रावस्ती, सेताण्या, कपिलवस्तु, पावापुरी, भोग्नगारा, वैशाली और राजगृह से होकर गुजरते थे।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक मार्गों के प्रमुख स्थानों को सटीक रूप से याद करें और उन्हें क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 7. भारत के मानचित्र पर उत्तरापथ एवं दक्षिणापथ को चिन्हित करें ?
Answer: भारत के मानचित्र में उत्तरापथ और दक्षिणापथ मार्ग निम्नानुसार दिखाए गए हैं। ये मार्ग प्राचीन भारत में व्यापार और संचार के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे। भारत उत्तरापथ मार्ग दक्षिणापथ मार्ग
In simple words: मानचित्र में भारत के उत्तर और दक्षिण में व्यापार के मुख्य मार्ग दिखाए गए हैं। उत्तरापथ उत्तरी भाग में और दक्षिणापथ दक्षिणी भाग में स्थित था।

🎯 Exam Tip: मानचित्र वाले प्रश्नों में, प्रमुख मार्गों और स्थानों को स्पष्ट रूप से लेबल करना सुनिश्चित करें।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question (ii) खेती करने की तकनीक विश्व ने किससे सीखी थी ?
(a) इंग्लैण्ड से
(b) अफ्रीका से
(c) भारत से
(d) सुमात्रा से
Answer: (c) भारत से
In simple words: दुनिया भर में खेती की आधुनिक तकनीकें भारत से ही सीखी गई थीं।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और सबसे सटीक उत्तर चुनें।

 

Question (iii) मलमल की साड़ियाँ किस स्थान की विश्व प्रसिद्ध र्थी ?
(a) बनारस
(b) मथुरा
(c) पंजाब
(d) ढाका
Answer: (d) ढाका
In simple words: ढाका की मलमल की साड़ियाँ दुनिया भर में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर थीं।

🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध उत्पादों और उनके उत्पादन स्थानों को हमेशा याद रखें।

 

Question (iv) भारत द्वारा विदेशों को तांबा किस स्थान से निर्यात किया जाता था ?
(a) खेतड़ी (राजस्थान)
(b) पंजाब
(c) मेवाड़ (राजस्थान)
(d) मध्य भारत
Answer: (a) खेतड़ी (राजस्थान)
In simple words: भारत से तांबे का निर्यात मुख्य रूप से राजस्थान के खेतड़ी से किया जाता था।

🎯 Exam Tip: खनिज संसाधनों के निर्यात केंद्र और उनके स्थान से संबंधित प्रश्नों में, सटीक जानकारी प्रस्तुत करें।

 

Question (v) यूरोप में किस भारतीय वस्तु की सर्वाधिक माँग थी ?
(a) पानी के जहाज
(b) सोना
(c) काली मिर्च
(d) घोड़े
Answer: (c) काली मिर्च
In simple words: यूरोप में भारतीय काली मिर्च की बहुत अधिक मांग थी।

🎯 Exam Tip: विदेशी बाजारों में लोकप्रिय भारतीय वस्तुओं की पहचान करें और उनकी मांग के कारणों को समझें।

 

Question 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
(i) प्राचीन काल में भारत.............कहलाता था।
(ii) यूनान में ढाका की मलमल.............नाम से बिकती थी।
(iii) मेवाड़ से.............निर्यात होता था।
(iv) प्राचीनकाल में अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारत के...........उत्पादों का ही दबदबा था।
(v) बंगाल में.............के माध्यम से दक्षिण-पूर्वी एशियाई बन्दरगाहों के साथ खूब व्यापार होता था।
Answer:
(i) सोने की चिड़िया
(ii) गंगेतिका
(iii) जस्ता
(iv) रेशमी, सूती
(v) हुगली
In simple words: पुराने समय में भारत को सोने की चिड़िया कहते थे। ढाका की मलमल गंगेतिका नाम से बिकती थी। मेवाड़ से जस्ता निर्यात होता था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के रेशमी और सूती उत्पादों का दबदबा था। बंगाल में हुगली के माध्यम से दक्षिण-पूर्वी एशियाई बंदरगाहों के साथ खूब व्यापार होता था।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरने वाले प्रश्नों में, संदर्भ को समझकर सटीक शब्द का चुनाव करें।

 

Question. स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए

स्तम्भ 'अ'स्तम्भ 'ब'
(i) सफेद कपड़े(अ) सिरोंज
(ii) चेक और धारीदार कपड़े(ब) बनारस
(iii) शिंट्ज (छींट छापेदार सूती कपड़े)(स) लाहौर
(iv) सिल्क (रेशम)(द) नागापटनम
Answer:
(i) (द) नागापटनम (सफेद कपड़े नागापटनम में बनते थे)
(ii) (स) लाहौर (चेक और धारीदार कपड़े लाहौर में बनते थे)
(iii) (अ) सिरोंज (शिंट्ज सिरोंज में बनता था)
(iv) (ब) बनारस (सिल्क बनारस में बनता था)
In simple words: इस प्रश्न में अलग-अलग प्रकार के कपड़ों को उनके उत्पादन वाले शहरों से मिलाया गया है। जैसे सफेद कपड़े नागापटनम में, चेक और धारीदार कपड़े लाहौर में, शिंट्ज सिरोंज में और सिल्क बनारस में बनते थे।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, हर आइटम को उसके सही जोड़े से ध्यानपूर्वक मिलाएँ।

अतिलघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्राचीन भारत में लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या था ?
Answer: प्राचीन भारत में लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और उससे संबंधित काम थे। खेती करना और उससे जुड़े अन्य काम उस समय के समाज की अर्थव्यवस्था का आधार थे।
In simple words: पुराने समय में लोगों का मुख्य काम खेती करना और उससे जुड़े काम थे।

🎯 Exam Tip: किसी भी काल के मुख्य व्यवसाय से संबंधित प्रश्नों में, सबसे प्रमुख गतिविधि को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 2. भारत में अंग्रेजों को किस क्षेत्र के विकास ने आश्चर्यचकित किया था ?
Answer: भारत में अंग्रेजों को कृषि क्षेत्र के विकास ने बहुत हैरान किया था। उन्होंने भारतीय कृषि की उन्नत तकनीकों और उत्पादकता को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया था।
In simple words: अंग्रेजों को भारत के खेती के तरीके और उसके विकास से बहुत हैरानी हुई थी।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट ऐतिहासिक घटनाओं या टिप्पणियों से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य बिंदु को सीधे बताएं।

 

Question 3. भारतीय कपड़ों की माँग किन-किन देशों में थी?
Answer: भारतीय कपड़ों की माँग दक्षिण-पूर्वी एशिया (जैसे जावा व सुमात्रा) और पश्चिम एवं मध्य एशिया के देशों में बहुत थी। इन क्षेत्रों में भारतीय कपड़े अपनी गुणवत्ता और सुंदरता के लिए बहुत पसंद किए जाते थे।
In simple words: भारतीय कपड़ों की मांग दक्षिण-पूर्वी एशिया और पश्चिम व मध्य एशिया के देशों में बहुत ज्यादा थी।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक संबंधों और मांग वाले देशों के नाम सटीक रूप से याद करें।

 

Question 4. “भारतीयों को अनादि काल से लोहे को गलाने की कला का ज्ञान रहा है।” यह वाक्य किसने कहा था ?
Answer: यह वाक्य 'विल्सन' ने कहा था। उन्होंने भारतीय शिल्प और धातु कर्म के ज्ञान की प्रशंसा की थी।
In simple words: 'विल्सन' ने कहा था कि भारतीय लोग बहुत पुराने समय से लोहा गलाने का काम जानते थे।

🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, कथन के लेखक या स्रोत को सटीक रूप से बताएँ।

 

Question 5. मिस्र द्वारा भारत से कपड़ा आयात किया जाता था। इस बात की पुष्टि किससे होती है ?
Answer: मिस्र द्वारा भारत से कपड़ा आयात किए जाने की पुष्टि इस बात से होती है कि मिस्र में मिली 'मम्मीज' पर मिस्रवासियों द्वारा भारतीय मलमल लपेटा गया था। यह दर्शाता है कि भारतीय कपड़े मिस्र में उपयोग होते थे।
In simple words: यह बात मिस्र की 'मम्मीज' पर लपेटे गए भारतीय मलमल से पता चलती है कि मिस्र भारत से कपड़ा खरीदता था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि के स्रोत को स्पष्ट रूप से बताएँ और उसके महत्व को समझाएँ।

 

Question 6. किन स्थानों से व्यापारी नावों में सामान लादकर ताम्रलिप्ति (बंगाल) ले जाते थे ?
Answer: व्यापारी चम्पा और मिथिला नामक स्थानों से नावों में सामान भरकर ताम्रलिप्ति (बंगाल) ले जाते थे। ताम्रलिप्ति एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था जो समुद्री व्यापार के लिए उपयोग होता था।
In simple words: व्यापारी चम्पा और मिथिला से नावों में सामान लादकर बंगाल के ताम्रलिप्ति बंदरगाह तक जाते थे।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक मार्गों पर स्थित प्रमुख स्थानों के नाम और उनके महत्व को याद करें।

 

Question 8. विदेशी व्यापारियों द्वारा समुद्री मार्ग की खोज के बाद किन पाश्चात्य कम्पनियों ने भारत के साथ व्यापार किया था ?
Answer: समुद्री मार्ग की खोज के बाद, फ्रांस, डच और ब्रिटिश कंपनियों जैसी पश्चिमी कंपनियों ने भारत के साथ व्यापार करना शुरू किया था। इन कंपनियों ने भारत से मसालों और अन्य वस्तुओं का व्यापार करके लाभ कमाया।
In simple words: समुद्री रास्ता मिलने के बाद, फ्रांस, डच और ब्रिटिश कंपनियों ने भारत के साथ व्यापार किया था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यापारिक कंपनियों और उनके देशों के नाम याद रखें।

 

Question 9. दिल्ली का लौह स्तम्भ किसका प्रमाण है?
Answer: दिल्ली के महरौली में कुतुबमीनार के पास खड़ा लौह स्तम्भ प्राचीन भारतीय लौह इस्पात उद्योग की अच्छी गुणवत्ता का प्रमाण है। यह स्तंभ इतने सालों बाद भी जंग नहीं लगा है, जो इसकी उन्नत धातु कला को दर्शाता है।
In simple words: दिल्ली का लौह स्तम्भ दिखाता है कि पुराने भारत में लोहे का काम बहुत अच्छा होता था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक स्मारकों और उनकी विशेष विशेषताओं को याद रखें, जो किसी विशिष्ट ज्ञान या तकनीक को दर्शाते हैं।

लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारत पहले सोने की चिड़िया था फिर पिछड़ कैसे गया ?
Answer: भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था क्योंकि यहाँ अपार धन-संपत्ति थी। हालांकि, बाद में यह पिछड़ गया क्योंकि विभिन्न हमलावरों ने इसे जमकर लूटा। विशेष रूप से अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया, जिससे भारत बहुत गरीब हो गया। यह उपनिवेशवाद का एक बड़ा उदाहरण है।
In simple words: भारत पहले बहुत अमीर था, इसलिए उसे सोने की चिड़िया कहते थे। लेकिन हमलावरों और खासकर अंग्रेजों ने इसे बहुत लूटा और इसकी अर्थव्यवस्था खराब कर दी, जिससे यह पिछड़ गया।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक गिरावट के कारणों को बताते समय, प्रमुख घटनाओं और कारकों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. कुटीर तथा बड़े उद्योग किन स्थानों पर स्थापित किए जाते थे ? उनके क्या कार्य थे ?
Answer: कुटीर उद्योग आमतौर पर गाँवों में स्थापित किए जाते थे, जबकि बड़े उद्योग शहरों में लगाए जाते थे। कुटीर उद्योगों का मुख्य काम स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करना होता था। वे छोटे पैमाने पर चीजें बनाते थे। इसके विपरीत, बड़े उद्योगों का काम बड़े बाजारों की माँग को पूरा करना था और वे ज्यादा उत्पादन करते थे।
In simple words: कुटीर उद्योग गाँवों में होते थे और स्थानीय जरूरतें पूरी करते थे। बड़े उद्योग शहरों में होते थे और बड़े बाजारों की मांग पूरी करते थे।

🎯 Exam Tip: उद्योगों के प्रकार और उनके स्थानों के साथ-साथ उनके मुख्य कार्यों को भी स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 3. भारत के जहाज उद्योग पर दो वाक्य लिखिए।
Answer: भारत का जहाज निर्माण उद्योग बहुत उन्नत था। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत तक, जहाज बनाने के मामले में भारत इंग्लैंड से भी आगे था। भारतीय जहाज न केवल अच्छी गुणवत्ता के थे, बल्कि वे बड़ी मात्रा में सामान ले जाने की क्षमता के कारण भी बहुत बेहतर थे।
In simple words: उन्नीसवीं सदी तक भारत का जहाज उद्योग इंग्लैंड से भी आगे था। भारतीय जहाज अच्छी गुणवत्ता के और ज्यादा सामान ले जाने वाले थे।

🎯 Exam Tip: किसी उद्योग के महत्व और स्थिति पर लिखते समय, उसकी मुख्य विशेषताओं और तुलनात्मक लाभों को उजागर करें।

 

Question 5. भारतीय कृषि की स्थिति पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer: प्राचीन भारत में खेती लोगों का मुख्य काम था। माना जाता है कि खेती की तकनीक विश्व ने भारत से ही सीखी थी। भारतीय किसानों ने गेहूं की खेती इंग्लैंड और यूरोप से कई सौ साल पहले शुरू की थी। विदेशी विद्वानों ने भी भारतीय किसानों की खेती की योग्यता की बहुत तारीफ की है। भारत की खेती दूसरे देशों की तुलना में बहुत आगे थी। लोगों को खाने के लिए अनाज और उद्योगों के लिए कच्चा माल खेती से पर्याप्त मात्रा में मिलता था। भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशों में भी अच्छी माँग थी।
In simple words: पुराने भारत में खेती लोगों का मुख्य काम था, जो बहुत उन्नत थी। भारतीय किसानों को खेती की अच्छी जानकारी थी और उनके उत्पादों की विदेशों में भी बहुत मांग थी।

🎯 Exam Tip: टिप्पणी लिखते समय, विषय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से कवर करें।

 

Question 6. प्राचीन भारतीय धातु उद्योग के बारे में बताइए।
Answer: प्राचीन भारतीय धातु उद्योग बहुत ही विकसित था। पीतल, तांबे और कांसे की वस्तुएँ हर जगह बनाई जाती थीं। इस समय सोना-चांदी के आभूषण बनाने का कलापूर्ण काम भी एक मुख्य व्यवसाय था। दिल्ली के महरौली में कुतुबमीनार के परिसर में खड़ा लौह स्तम्भ लगभग 1500 साल पहले बना था। यह भारतीय धातु (लोहा) उद्योग का एक बेहतरीन उदाहरण है, क्योंकि इतने सालों बाद भी इसमें जंग नहीं लगी है।
In simple words: पुराने भारत में धातु का काम बहुत उन्नत था। पीतल, तांबा, कांसे और सोने-चांदी के आभूषण बनते थे। दिल्ली का लौह स्तम्भ इसका बेहतरीन उदाहरण है, जो हजारों साल बाद भी जंग नहीं लगा है।

🎯 Exam Tip: किसी उद्योग की विशेषताओं को बताते समय, उसके मुख्य उत्पादों और ऐतिहासिक महत्व को उदाहरणों के साथ समझाएँ।

 

Question 7. भारत के पूर्वी, पश्चिमी तथा दक्षिणी बन्दरगाहों से निर्यात होने वाली वस्तुओं की सूची बनाइए।
Answer: भारत के पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी बंदरगाहों से निर्यात होने वाली वस्तुओं की सूची इस प्रकार है:
• पूर्वी बंदरगाह: यहाँ से मलमल, मोती, हाथीदाँत और तेज पत्ता निर्यात होता था।
• पश्चिमी बंदरगाह: यहाँ से काली मिर्च, रेशम के कपड़े, आभूषण, हाथीदाँत, तेज पत्ता और मूल्यवान पत्थर निर्यात होते थे।
• दक्षिणी बंदरगाह: यहाँ से मलमल, मोती और अर्द्ध मूल्यवान पत्थर निर्यात किए जाते थे।
In simple words: भारत के पूर्वी बंदरगाहों से मलमल, मोती, हाथीदाँत और तेज पत्ता; पश्चिमी बंदरगाहों से काली मिर्च, रेशम के कपड़े, आभूषण, हाथीदाँत, तेज पत्ता और कीमती पत्थर; और दक्षिणी बंदरगाहों से मलमल, मोती और कीमती पत्थर बाहर भेजे जाते थे।

🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय निर्यात सूची वाले प्रश्नों में, प्रत्येक क्षेत्र से निर्यात होने वाली वस्तुओं को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।

 

Question 8. अठारहवीं सदी के आखिरी समय में भारत के मुख्य बुनाई केन्द्र कौन-से थे ?
Answer: अठारहवीं सदी के आखिरी समय में भारत के मुख्य बुनाई केंद्र कई जगहों पर थे। इनमें लाहौर, पंजाब, सरहिंद, समाना, आगरा, अवध, दिल्ली, जयपुर, सांगानेर, सिंध, पतन, अहमदाबाद, सूरत, सिरोंज, बुरहानपुर, बनारस, पटना, ढाका, कलकत्ता, मछलीपट्टनम, पेताबोली, पुलिकट, मद्रास, पांडिचेरी, नागापट्टनम, तंजौर, मदुरै, कालीकट, गोवा, गोलकुंडा और बम्बई शामिल थे। ये सभी जगहें कपड़े के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण थीं।
In simple words: अठारहवीं सदी के अंत में भारत के मुख्य बुनाई केंद्र लाहौर, पंजाब, सरहिंद, समाना, आगरा, अवध, दिल्ली, जयपुर, सांगानेर, सिंध, पतन, अहमदाबाद, सूरत, सिरोंज, बुरहानपुर, बनारस, पटना, ढाका, कलकत्ता, मछलीपट्टनम, पेताबोली, पुलिकट, मद्रास, पांडिचेरी, नागापट्टनम, तंजौर, मदुरै, कालीकट, गोवा, गोलकुंडा और बम्बई थे।

🎯 Exam Tip: बुनाई केंद्रों जैसे औद्योगिक स्थानों की लंबी सूची को याद करने के लिए उन्हें क्षेत्रों के अनुसार वर्गीकृत कर सकते हैं।

 

Question 10. प्राचीन विदेशी व्यापारिक मार्गो स्थिति पर प्रकाश डालिए।
Answer: प्राचीन विदेशी व्यापारिक मार्ग कई महत्वपूर्ण रास्तों से होकर गुजरते थे।
• आर्मेनियन और फारसी व्यापारी पंजाब से अफगानिस्तान, पूर्वी फारस और मध्य एशिया के रास्ते भारत के साथ व्यापार करते थे।
• गुजरात के तट पर स्थित सूरत बंदरगाह के ज़रिए भारत फारस की खाड़ी और लाल सागर से जुड़ा हुआ था।
• कोरोमंडल तट पर मछलीपट्टनम और बंगाल में हुगली के माध्यम से भारत दक्षिण-पूर्वी एशियाई बंदरगाहों के साथ व्यापार करता था।
• भारत मुख्य रूप से भू-मार्ग तथा हिंद महासागर और अरब सागर के समुद्री मार्ग से अरब देशों के साथ व्यापार करता था। ये मार्ग भारत को विश्व व्यापार से जोड़ते थे।
In simple words: पुराने समय में भारत के विदेशी व्यापार मार्ग पंजाब से अफगानिस्तान होते हुए मध्य एशिया तक जाते थे। सूरत बंदरगाह से फारस की खाड़ी और लाल सागर तक, मछलीपट्टनम और हुगली से दक्षिण-पूर्वी एशिया तक, और हिंद व अरब सागर से अरब देशों तक व्यापार होता था।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक मार्गों को स्पष्ट करते समय, उनके प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के साथ-साथ बीच के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी शामिल करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारतीय वस्त्र उद्योग पर लेख लिखिए।
Answer: सन् 1750 ई. के आसपास, भारतीय वस्त्र उद्योग दुनिया भर में कपड़ा उत्पादन में सबसे आगे था। भारतीय कपड़े अपनी उच्च गुणवत्ता और बारीक कारीगरी के लिए विश्व में प्रसिद्ध थे। दक्षिण-पूर्वी एशिया (जैसे जावा व सुमात्रा) और पश्चिम एवं मध्य एशिया में इन कपड़ों की बहुत माँग थी। विशेषकर ढाका की मलमल की साड़ी और कपास व रेशम के महीन कपड़े पूरी दुनिया में पसंद किए जाते थे। बंगाल से बने सूती कपड़े यूरोपीय कंपनियों द्वारा भारी मात्रा में दूसरे देशों में भेजे जाते थे।
बंगाल सूती व रेशमी वस्त्र उद्योगों का मुख्य केंद्र था। इसके अलावा, लखनऊ, अहमदाबाद, नागपुर और मथुरा भी सूती उद्योगों के महत्वपूर्ण केंद्र थे। अंग्रेजों के भारत आने से पहले, भारत का वस्त्र उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत उन्नत था। भारत विश्व के कई देशों के साथ 2000 साल ईसा पूर्व से भी व्यापार करता रहा है। मिस्र में मम्मीज पर भारतीय मलमल का लपेटा जाना और यूनान में इसे 'गंगेतिका' के नाम से बेचना, इस बात का प्रमाण है कि उस समय भारतीय वस्त्र उद्योग अपने चरम पर था।
In simple words: 1750 के आसपास भारतीय कपड़े का उद्योग दुनिया में सबसे अच्छा था। हमारे कपड़े बहुत अच्छी गुणवत्ता के होते थे और उनकी बहुत मांग थी, खासकर ढाका की मलमल की। बंगाल मुख्य केंद्र था, और लखनऊ, अहमदाबाद जैसे शहर भी महत्वपूर्ण थे। मिस्र की मम्मी पर भारतीय कपड़ा मिलना दिखाता है कि हमारा उद्योग कितना पुराना और उन्नत था।

🎯 Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में, विषय के इतिहास, महत्व, मुख्य विशेषताओं और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

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