RBSE Solutions Class 6 Social Science Chapter 17 वैदिक सभ्यता एवं सामाजिक विज्ञानि

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पाठगत गतिविधि आधारित प्रश्न

 

Question 1. वैदिक संस्कृति का ज्ञान हमें कहाँ से प्राप्त होता है? (पृष्ठ सं. 122)
Answer: वैदिक संस्कृति का ज्ञान हमें वेदों तथा वैदिक साहित्य से प्राप्त होता है। यह ज्ञान हमें प्राचीन भारत की जीवन शैली और सोच को समझने में मदद करता है।
In simple words: हमें वैदिक संस्कृति के बारे में वेदों और वैदिक किताबों से पता चलता है।

🎯 Exam Tip: वैदिक संस्कृति से जुड़े प्रश्नों में हमेशा 'वेद' और 'वैदिक साहित्य' जैसे प्रमुख शब्दों का उल्लेख करें।

 

Question 2. वैदिक काल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? (पृष्ठ सं. 122)
Answer: वैदिक काल को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है: पूर्व वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल। यह विभाजन उस समय की सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाता है।
In simple words: वैदिक काल को दो बड़े हिस्सों में बाँटा गया है: पहला पूर्व वैदिक काल और दूसरा उत्तर वैदिक काल।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल के विभाजन के लिए 'पूर्व वैदिक काल' और 'उत्तर वैदिक काल' शब्दों का सही उपयोग करें।

 

Question 3. 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का क्या अर्थ है? (पृष्ठ सं. 122)
Answer: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का अर्थ है कि पूरी पृथ्वी के सभी प्राणी एक ही परिवार का हिस्सा हैं। यह एक बहुत ही उदार और सभी को साथ लेकर चलने वाली सोच है।
In simple words: इसका मतलब है कि पूरी दुनिया एक परिवार जैसी है।

🎯 Exam Tip: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का अर्थ बताते समय 'पूरी पृथ्वी', 'प्राणिमात्र' और 'एक ही परिवार' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को शामिल करें।

 

Question 4. अपने गुरुजी से पूछ कर बतायें निम्न प्राचीन स्थानों के वर्तमान नाम क्या हैं? (पृष्ठ सं. 123)
Answer: प्राचीन स्थानों के वर्तमान नाम इस प्रकार हैं:

स्थलों के प्राचीन नामस्थलों के वर्तमान नाम
(i) इन्द्रप्रस्थदिल्ली
(ii) पाटलीपुत्रपटना
(iii) मिथिलाभागलपुर (बिहार)
(iv) कौशलअवध (लखनऊ)

प्राचीन नाम और उनके आधुनिक नाम जानने से इतिहास को वर्तमान भूगोल से जोड़ना आसान हो जाता है।
In simple words: पुराने समय के इन शहरों के अब नए नाम हैं जैसे इन्द्रप्रस्थ अब दिल्ली है और पाटलीपुत्र अब पटना है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में हमेशा प्राचीन और वर्तमान नामों को स्पष्ट रूप से और सही ढंग से मिलाएं।

 

संयुक्त परिवार प्रथा की निम्नांकित विशेषताएँ

  • परिवार की सम्पत्ति तथा सदस्यों की सुरक्षा।
  • आजीविका में सम्मिलित योगदान।

 

Question 6. वैदिक काल में शिक्षा का माध्यम क्या था?
Answer: वैदिक काल में शिक्षा का मुख्य माध्यम संस्कृत भाषा थी। संस्कृत को देवताओं की भाषा माना जाता था और इसमें ही सभी वेद और धार्मिक ग्रंथ लिखे गए थे।
In simple words: वैदिक काल में लोग संस्कृत भाषा में पढ़ाई करते थे।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल में शिक्षा के माध्यम से जुड़े प्रश्न में 'संस्कृत' शब्द का उपयोग अनिवार्य है।

 

Question 7. वैदिक काल की प्रमुख विदुषी स्त्रियों के नाम बताइए। (पृष्ठ सं. 125)
Answer: वैदिक काल की कुछ प्रमुख विदुषी स्त्रियों के नाम घोषा, अपाला, लोपामुद्रा एवं श्रद्धा आदि थे। इन स्त्रियों ने शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
In simple words: घोषा, अपाला, लोपामुद्रा और श्रद्धा वैदिक काल की कुछ बहुत पढ़ी-लिखी महिलाएँ थीं।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल की विदुषी स्त्रियों के नाम बताते समय कम से कम दो-तीन नाम सही ढंग से लिखें।

 

Question 8. वैदिक काल में व्यक्ति के लिए कितने संस्कारों का विधान था? (पृष्ठ सं. 125)
Answer: वैदिक काल में व्यक्ति के पूरे जीवन के लिए 16 संस्कारों का विधान था। ये संस्कार जन्म से मृत्यु तक के विभिन्न चरणों को दर्शाते थे।
In simple words: वैदिक काल में हर व्यक्ति के लिए 16 नियम या संस्कार बनाए गए थे, जो जन्म से मृत्यु तक निभाए जाते थे।

🎯 Exam Tip: संस्कारों की संख्या के लिए हमेशा '16' लिखें, क्योंकि यह एक निश्चित संख्या है।

 

Question 9. हमारे देश में कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्थाएँ कौन-कौन सी हैं? सूची बनाएँ। (पृष्ठ सं. 126)
Answer: हमारे देश में कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्थाएँ निम्नलिखित हैं:

  • संसद (केन्द्रीय स्तर पर)
  • विधान सभा (राज्य स्तर पर)।

ये संस्थाएँ देश और राज्यों के लिए नियम और कानून बनाती हैं, जिससे व्यवस्था बनी रहती है।
In simple words: हमारे देश में कानून संसद (पूरे देश के लिए) और विधान सभाएँ (राज्यों के लिए) बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: कानून बनाने वाली संस्थाओं के नाम के साथ उनके स्तर (केन्द्रीय या राज्य) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. वैदिक सभ्यता और संस्कृति के कौन-कौन से रीति-रिवाज, प्रथाएँ व संस्कार आज भी प्रचलन में हैं? इनकी सूची बनाइए। (पृष्ठ सं. 128)
Answer: वैदिक सभ्यता और संस्कृति के कई रीति-रिवाज, प्रथाएँ और संस्कार आज भी हमारे समाज में देखे जा सकते हैं। इनमें विवाह संस्कार, जन्म से संबंधित रीति-रिवाज, मृत्यु के बाद के संस्कार और परिवार की संयुक्त प्रथा शामिल हैं। यह दर्शाता है कि प्राचीन ज्ञान आज भी प्रासंगिक है।
In simple words: वैदिक काल के कई नियम, जैसे शादी-ब्याह के तरीके और परिवारों का साथ रहना, आज भी हमारे समाज में माने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक समाज में प्रचलन में वैदिक प्रथाओं को सूचीबद्ध करते समय कम से कम दो-तीन स्पष्ट उदाहरण दें।

 

Question. वैदिक साहित्य की चयनित कहानियों का बाल सभा में मंचन करें। (पृष्ठ सं, 128)
Answer: वैदिक साहित्य की कुछ कहानियाँ इस प्रकार हैं, जिनका बाल सभा में मंचन किया जा सकता है:

कहानी 1. रघुवंश की कथा
प्राचीन काल में सूर्यवंश नाम का एक बहुत प्रसिद्ध वंश था। यह वंश अपने वचनों को पूरा करने के लिए जाना जाता था। इसी वंश में राजा रघु हुए। बाद में इसी वंश को रघुकुल कहा जाने लगा, जिसमें राजा दशरथ भी हुए। उनके चार पुत्रों में से एक भगवान राम थे, जिन्हें मर्यादापुरुषोत्तम कहा जाता है। उन्होंने सत्य की रक्षा के लिए अपने परिवार को भी छोड़ दिया था। अपने राज में उन्होंने कई बुरे लोगों का अंत किया था।

कहानी 2. भरत का जन्म
प्राचीन काल में दुष्यंत नाम के एक बहुत शक्तिशाली राजा थे। वे बहुत वीर और पराक्रमी थे। देवताओं और राक्षसों के युद्ध में राजा इंद्र ने उन्हें देवताओं की मदद के लिए स्वर्ग लोक बुलाया था। वहाँ उन्होंने देवताओं की तरफ से युद्ध में भाग लिया। स्वर्ग लोक से लौटते समय उन्होंने धरती पर शकुंतला नाम की एक महिला को देखा और उनसे प्रेम करने लगे।
बाद में उन दोनों का गंधर्व विवाह हुआ, जिससे भरत नाम का एक पुत्र हुआ। यही भरत आगे चलकर एक महान सम्राट बने। इन्हीं के नाम पर हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा। ये कहानियाँ बच्चों को प्राचीन मूल्यों और वीरता से परिचित कराती हैं।
In simple words: बच्चों को रघुवंश के राम और राजा दुष्यंत व शकुंतला के पुत्र भरत की कहानियाँ सुनाई जा सकती हैं। इन कहानियों में सच्चाई और वीरता के पाठ हैं।
🎯 Exam Tip: कहानियों को संक्षेप में और सरल भाषा में प्रस्तुत करें ताकि बच्चे आसानी से समझ सकें और मंचन के लिए प्रेरणा मिल सके।

 

पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न एक व दो के सही उत्तर कोष्ठक में लिखिए

 

Question 1. वेदों की संख्या है
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच।
Answer: (स) चार
In simple words: वेदों की कुल संख्या चार है।

🎯 Exam Tip: वेदों की सही संख्या 'चार' है, इसे याद रखें।

 

Question 2. सरस्वती नदी का प्राचीन नाम है
(अ) विपाषा
(ब) सिन्धु
(स) गोमती
Answer: सरस्वती नदी का एक प्राचीन नाम 'दृषद्वती' था, जो विकल्पों में नहीं दिया गया है। दिए गए विकल्पों में से कोई भी सरस्वती का प्राचीन नाम नहीं है। हालाँकि, सरस्वती एक महत्वपूर्ण वैदिक नदी थी जिसका उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
In simple words: दिए गए विकल्पों में सरस्वती नदी का कोई प्राचीन नाम नहीं है।

🎯 Exam Tip: सरस्वती नदी के प्राचीन नाम 'दृषद्वती' को याद रखें और विकल्पों को ध्यान से देखें।

 

Question 3. वेद कालीन दो राजनीतिक संस्थाओं के नाम बताइए।
Answer: वैदिक काल की दो महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्थाएँ क्रमशः सभा और समिति थीं। ये संस्थाएँ राजा को सलाह देती थीं और उस पर नियंत्रण रखती थीं, जिससे शासन व्यवस्था सुचारु रूप से चलती थी।
In simple words: वैदिक काल में, सभा और समिति नाम की दो सभाएँ थीं जो राजा को सलाह देती थीं।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल की राजनीतिक संस्थाओं के लिए 'सभा' और 'समिति' इन दो शब्दों को याद रखना बहुत ज़रूरी है।

 

Question 4. वैदिक काल में परिवार प्रथा कैसी थी?
Answer: वैदिक काल में परिवार प्रथा मुख्य रूप से संयुक्त थी। इसका मतलब है कि कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ एक ही घर में रहते थे। यह व्यवस्था आपसी सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देती थी।
In simple words: वैदिक काल में परिवार बड़े और जुड़े हुए थे, जहाँ सब मिलकर रहते थे।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल की परिवार प्रथा का वर्णन करते समय 'संयुक्त परिवार प्रथा' शब्द का उपयोग करें।

 

Question 5. 'पणि' एवं 'निष्क' का क्या अर्थ है?
Answer: वैदिक काल में 'पणि' व्यापारी वर्ग को कहा जाता था और 'निष्क' सोने के सिक्के को कहते थे, जिसका उपयोग व्यापार में मुद्रा के रूप में होता था। ये उस समय की आर्थिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से थे।
In simple words: 'पणि' व्यापारी होते थे और 'निष्क' सोने के सिक्के होते थे, जो चीजों को खरीदने-बेचने में काम आते थे।

🎯 Exam Tip: 'पणि' का अर्थ 'व्यापारी' और 'निष्क' का अर्थ 'स्वर्ण मुद्रा' है, इन्हें स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 6. वेदों के नाम बताइए। इनमें सबसे प्राचीन वेद कौन-सा है?
Answer: वेदों के नाम क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद हैं। इन सभी वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद है। यह मानव सभ्यता के सबसे पुराने लिखित ग्रंथों में से एक है।
In simple words: वेदों के नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं। इनमें ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है।

🎯 Exam Tip: चारों वेदों के नाम और उनमें से सबसे प्राचीन वेद (ऋग्वेद) का नाम सही क्रम में याद रखें।

 

Question 7. वैदिक कालीन शिल्पकला पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: वैदिक कालीन शिल्पकला काफी विकसित थी। इस दौरान कपड़े बुनना, चमड़ा रंगना, सुंदर आभूषण बनाना, बैलगाड़ियाँ, लकड़ी के तख्त, चारपाइयाँ और नावें बनाना जैसे काम मुख्य रूप से किए जाते थे। उस समय लोहार, सुनार, कुम्हार और वैद्य जैसे शिल्पकार समाज के महत्वपूर्ण सदस्य थे।
In simple words: वैदिक काल में लोग कपड़े बुनते थे, चमड़ा रंगते थे, गहने बनाते थे और बैलगाड़ी-नाव जैसी चीजें भी बनाते थे।

🎯 Exam Tip: शिल्पकला का वर्णन करते समय विभिन्न प्रकार के शिल्पों (जैसे बुनाई, आभूषण, लकड़ी का काम) का उल्लेख करें।

 

Question 8. वैदिक संस्कृति की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: वैदिक संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

  • संयुक्त परिवार प्रथा
  • शिक्षा एवं नारी का सम्मान
  • संस्कारों को प्रधानता
  • वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना
  • वर्ण एवं आश्रम व्यवस्था।

ये विशेषताएँ वैदिक समाज की सामाजिक संरचना और मूल्यों को दर्शाती हैं।
In simple words: वैदिक संस्कृति में बड़े परिवार, औरतों का सम्मान, बहुत सारे संस्कार, पूरी दुनिया को एक परिवार मानना और आश्रम-वर्ण की व्यवस्था जैसी खास बातें थीं।
🎯 Exam Tip: वैदिक संस्कृति की विशेषताओं को बिंदुवार लिखें और हर विशेषता को एक-दो शब्दों में स्पष्ट करें।

 

Question 9. वैदिक काल की शिक्षा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: वैदिक काल में शिक्षा गुरुकुल प्रणाली पर आधारित थी, जहाँ छात्र गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान, नैतिकता और चरित्र निर्माण था। संस्कृत शिक्षा का माध्यम थी और वेदों का अध्ययन प्रमुख था।
In simple words: वैदिक काल में बच्चे गुरु के घर रहकर पढ़ते थे, जहाँ उन्हें वेद और अच्छी बातें संस्कृत में सिखाई जाती थीं।

🎯 Exam Tip: वैदिक शिक्षा का वर्णन करते समय 'गुरुकुल', 'संस्कृत' और 'वेदों का अध्ययन' जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 10. वेदकालीन आश्रम व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
Answer: वेदकालीन आश्रम व्यवस्था में व्यक्ति के जीवन को चार मुख्य भागों में बाँटा गया था: ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। ब्रह्मचर्य आश्रम यज्ञोपवीत संस्कार से 25 वर्ष तक होता था, जिसमें शिक्षा प्राप्त की जाती थी। गृहस्थ आश्रम 25-50 वर्ष तक होता था, जहाँ व्यक्ति परिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाता था। वानप्रस्थ आश्रम 50-75 वर्ष तक था, जिसमें व्यक्ति वन में रहकर ध्यान करता था, और संन्यास आश्रम 75-100 वर्ष की आयु तक होता था, जहाँ व्यक्ति संसार त्याग कर मोक्ष की ओर बढ़ता था। यह व्यवस्था जीवन के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित करती थी।
In simple words: वैदिक काल में जीवन को चार हिस्सों में बाँटा गया था - पढ़ाई (ब्रह्मचर्य), परिवार (गृहस्थ), वन में रहना (वानप्रस्थ) और सब कुछ त्याग देना (संन्यास)।

🎯 Exam Tip: आश्रम व्यवस्था के चारों आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) के नाम और उनकी अनुमानित आयु सीमा को सही ढंग से लिखें।

 

Question 11. वेद कालीन व्यापार पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: वैदिक काल में व्यापार वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था, जहाँ चीज़ों के बदले चीज़ें दी जाती थीं। विदेशी व्यापार जल और स्थल दोनों मार्गों से होता था। 'पणि' नामक व्यापारी वर्ग सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ऊँटों, छकड़ों और घोड़ों का उपयोग करता था। इस समय 'निष्क' नामक स्वर्ण मुद्रा का प्रयोग भी व्यापार के लिए किया जाता था।
In simple words: वैदिक काल में लोग सामान के बदले सामान लेते थे और सोने के सिक्के (निष्क) का भी इस्तेमाल करते थे। व्यापारी ऊँटों और घोड़ों से सामान ढोते थे।

🎯 Exam Tip: वैदिक व्यापार का वर्णन करते समय 'वस्तु-विनिमय', 'पणि' और 'निष्क' जैसे शब्दों का उपयोग करें।

 

Question 12. वेद के भाग कौन-कौन से हैं?
Answer: वेद के मुख्य भाग क्रमशः संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद हैं। ये सभी भाग वेदों के ज्ञान को गहराई से समझने में मदद करते हैं और विभिन्न दार्शनिक विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
In simple words: वेद के मुख्य हिस्से हैं संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद।

🎯 Exam Tip: वेद के भागों को सही क्रम में और स्पष्ट रूप से लिखें।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question. (i) गायत्री मंत्र किस वेद से सम्बन्धित है?
(अ) ऋग्वेद
(ब) यजुर्वेद
(स) सामवेद
(द) अथर्ववेद
Answer: (अ) ऋग्वेद
In simple words: गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है।

🎯 Exam Tip: गायत्री मंत्र का संबंध हमेशा ऋग्वेद से होता है, इसे याद रखें।

 

Question. (ii) वानप्रस्थ आश्रम की समयावधि थी
(अ) यज्ञोपवीत से 25 वर्ष
(ब) 25-50 वर्ष
(स) 50-75 वर्ष
(द) 75-100 वर्ष
Answer: (स) 50-75 वर्ष
In simple words: वानप्रस्थ आश्रम का समय 50 से 75 साल तक होता था।

🎯 Exam Tip: वानप्रस्थ आश्रम की अवधि 50 से 75 वर्ष तक होती है, इसे सही से याद रखें।

 

Question. (iii) वैदिक वर्ण व्यवस्था आधारित थी-
(अ) कर्म एवं श्रम पर
(ब) जाति पर
(स) जन्म पर
(द) कोई नहीं।
Answer: (अ) कर्म एवं श्रम पर
In simple words: वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था व्यक्ति के काम और मेहनत पर आधारित थी।

🎯 Exam Tip: वैदिक वर्ण व्यवस्था जन्म के बजाय 'कर्म और श्रम' पर आधारित थी, यह महत्वपूर्ण बिंदु है।

 

Question. (iv) ग्राम के अधिकारी को कहा जाता था
(अ) विशपति
(ब) राजन
(स) ग्रामणी
(द) कोई नहीं
Answer: (स) ग्रामणी
In simple words: गाँव के मुखिया को ग्रामणी कहते थे।

🎯 Exam Tip: ग्राम के अधिकारी के लिए 'ग्रामणी' शब्द का उपयोग सही है।

 

Question. (v) खिल्ये भूमि से तात्पर्य था
(अ) उर्वरा
(ब) निष्क
(स) पणि
(द) बंजर।
Answer: (द) बंजर।
In simple words: 'खिल्ये भूमि' का मतलब बंजर ज़मीन था।

🎯 Exam Tip: 'खिल्ये भूमि' का अर्थ 'बंजर' होता है, इसे याद रखें।

 

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

 

Question. (i) ........ हमारी संस्कृति की धरोहर हैं।
Answer: वेद हमारी संस्कृति की धरोहर हैं। वेदों में प्राचीन ज्ञान और परंपराएँ समाहित हैं।
In simple words: वेद हमारी संस्कृति की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण विरासत हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृति की धरोहर के रूप में 'वेद' शब्द का उपयोग करें।

 

Question. (ii) चिकित्सा विधि एवं रोगों से सम्बन्धित ज्ञान .. में संकलित है।
Answer: चिकित्सा विधि एवं रोगों से सम्बन्धित ज्ञान अथर्ववेद में संकलित है। अथर्ववेद में जादू-टोना और औषधियों के बारे में भी जानकारी मिलती है।
In simple words: बीमारियों और इलाज के तरीके अथर्ववेद में बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: चिकित्सा संबंधी ज्ञान के लिए 'अथर्ववेद' का उल्लेख करें।

 

Question. (iii) नामक इकाई का अधिकारी विशपति था।
Answer: 'विश' नामक इकाई का अधिकारी विशपति था। विश कई ग्रामों से मिलकर बनी एक बड़ी प्रशासनिक इकाई थी।
In simple words: 'विश' नाम की इकाई के मुखिया को विशपति कहते थे।

🎯 Exam Tip: 'विशपति' के साथ 'विश' शब्द का संबंध स्पष्ट करें।

 

Question. (iv) वैदिक काल में राजा को परामर्श देने के लिए ......एवं......... नामक दो संस्थाएँ।
Answer: वैदिक काल में राजा को परामर्श देने के लिए सभा एवं समिति नामक दो संस्थाएँ थीं। ये दोनों संस्थाएँ राजा के फैसलों पर नियंत्रण रखती थीं।
In simple words: वैदिक काल में सभा और समिति राजा को सलाह देती थीं।

🎯 Exam Tip: राजा को परामर्श देने वाली संस्थाओं के रूप में 'सभा' और 'समिति' का उल्लेख करें।

 

Question. (v) आर्यों के जीवन में........ नामक पशु का विशेष महत्व था।
Answer: आर्यों के जीवन में गाय नामक पशु का विशेष महत्व था। गायों को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था।
In simple words: आर्यों के लिए गाय बहुत खास पशु था।

🎯 Exam Tip: आर्यों के जीवन में महत्वपूर्ण पशु के लिए 'गाय' का उल्लेख करें।

 

स्तम्भ अ और स्तम्भ ब को सुमेलित कीजिए।

 

Question. स्तम्भ अ और स्तम्भ ब को सुमेलित कीजिए।
स्तम्भ अ
(i) ब्रह्मचर्य
(ii) गृहस्थ
(iii) वानप्रस्थ
(iv) संन्यास

स्तम्भ ब
(अ) 75-100 वर्ष
(ब) 25-50 वर्ष
(स) 50-75 वर्ष
(द) यज्ञोपवीत से 25 वर्ष
Answer:
(i) (द) ब्रह्मचर्य आश्रम यज्ञोपवीत संस्कार से 25 वर्ष तक होता था, जिसमें विद्याध्ययन किया जाता था।
(ii) (ब) गृहस्थ आश्रम 25-50 वर्ष तक होता था, जिसमें पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाई जाती थीं।
(iii) (स) वानप्रस्थ आश्रम 50-75 वर्ष तक होता था, जहाँ व्यक्ति वन में जाकर तपस्या करता था।
(iv) (अ) संन्यास आश्रम 75-100 वर्ष तक होता था, जिसमें व्यक्ति संसार का त्याग कर मोक्ष प्राप्त करने का प्रयास करता था।
In simple words: ब्रह्मचर्य 25 साल तक, गृहस्थ 25-50 साल तक, वानप्रस्थ 50-75 साल तक और संन्यास 75-100 साल तक के लिए होते थे।

🎯 Exam Tip: आश्रमों और उनकी समयावधि को सही ढंग से मिलाएं और प्रत्येक आश्रम के मुख्य उद्देश्य को भी याद रखें।

 

Question. ऋग्वैदिक नदियों के प्राचीन एवं नवीन नामों को सुमेलित कीजिए।
स्तम्भ अ
(ऋग्वैदिक नदियों के प्राचीन नाम)
(i) कुभा
(ii) गोमती
(iii) वितस्ता
(iv) परुष्णी

स्तम्भ ब
(ऋग्वैदिक नदियों का नवीन नाम)
(अ) रावी
(ब) काबुल
(स) झेलम
(द) गोमल
Answer:
(i) (ब) कुभा नदी का नवीन नाम काबुल है।
(ii) (द) गोमती नदी का नवीन नाम गोमल है।
(iii) (स) वितस्ता नदी का नवीन नाम झेलम है।
(iv) (अ) परुष्णी नदी का नवीन नाम रावी है।
In simple words: पुरानी कुभा अब काबुल, गोमती अब गोमल, वितस्ता अब झेलम और परुष्णी अब रावी है।

🎯 Exam Tip: प्राचीन और नवीन नदियों के नामों का सही मिलान करने के लिए उन्हें याद रखें।

 

अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वेदों से तात्कालिक लोगों के विषय में क्या-क्या जानकारियाँ प्राप्त होती हैं?
Answer: वेदों से हमें उस समय के लोगों के रहन-सहन, जीवन शैली, समाज की व्यवस्था, परिवार के नियम और उनके व्यवसाय के बारे में बहुत सारी जानकारी मिलती है। यह हमें प्राचीन भारतीय समाज की एक पूरी तस्वीर देता है।
In simple words: वेदों से हमें पता चलता है कि पुराने समय में लोग कैसे रहते थे, उनका समाज कैसा था और वे क्या काम करते थे।

🎯 Exam Tip: वेदों से प्राप्त जानकारियों में रहन-सहन, समाज व्यवस्था, परिवार और व्यवसाय जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 2. उत्तर वैदिक काल की सभ्यता किसे कहते हैं?
Answer: उत्तर वैदिक काल की सभ्यता उस समय को कहते हैं जब वेदों की रचना हुई और उनसे सत्य तथा ज्ञान हमें प्राप्त हुआ। यह सारा ज्ञान इन वेदों में समाया हुआ है। ये वेद भारत के सबसे पुराने और आर्यों की प्राचीन रचनाएँ हैं। यह काल भारतीय इतिहास में ज्ञान और संस्कृति के विकास का महत्वपूर्ण चरण था।
In simple words: उत्तर वैदिक काल की सभ्यता उस समय को कहते हैं जब वेद लिखे गए और जिनसे हमें बहुत सारा ज्ञान मिला।

🎯 Exam Tip: उत्तर वैदिक काल को वेदों की रचना और ज्ञान प्राप्ति से जोड़कर लिखें।

 

Question 4. किस वेद में देवताओं की स्तुति सम्बन्धी मंत्रों का संकलन किया गया है?
Answer: सामवेद में देवताओं की स्तुति सम्बन्धी मंत्रों का संकलन किया गया है। सामवेद को भारतीय संगीत का मूल स्रोत भी माना जाता है, क्योंकि इसमें मंत्रों को लय और ताल के साथ गाने की विधि बताई गई है।
In simple words: सामवेद में भगवान की स्तुति के गीत और मंत्र हैं।

🎯 Exam Tip: देवताओं की स्तुति से संबंधित मंत्रों के लिए 'सामवेद' का उल्लेख करें, और यह भी बताएं कि यह संगीत से जुड़ा है।

 

Question 5. 'यत्र नार्यऽस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' का क्या अर्थ है?
Answer: 'यत्र नार्यऽस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' का अर्थ है कि जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं। यह सूक्ति नारी सम्मान के महत्व को बताती है और समाज में उनकी गरिमा को दर्शाती है।
In simple words: जहाँ औरतों का आदर होता है, वहाँ भगवान भी खुश रहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस सूक्ति का अर्थ बताते समय 'स्त्रियों का सम्मान' और 'देवताओं का निवास' जैसे प्रमुख शब्दों को शामिल करें।

 

Question 6. किस आश्रम को मनुष्य के जीवन का पहला भाग माना जाता है?
Answer: ब्रह्मचर्य आश्रम को मनुष्य के जीवन का पहला भाग माना जाता है। इस आश्रम में व्यक्ति गुरु के पास रहकर विद्या प्राप्त करता है और जीवन के लिए नैतिक मूल्यों को सीखता है।
In simple words: ब्रह्मचर्य आश्रम जीवन का पहला हिस्सा है, जब हम पढ़ाई करते हैं।

🎯 Exam Tip: मनुष्य जीवन के पहले भाग के रूप में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' का उल्लेख करें।

 

Question 7. विवाह किस आश्रम का मुख्य संस्कार है?
Answer: विवाह गृहस्थ आश्रम का मुख्य संस्कार है। गृहस्थ आश्रम में व्यक्ति पारिवारिक जीवन में प्रवेश करता है, संतान उत्पन्न करता है और सामाजिक जिम्मेदारियाँ निभाता है।
In simple words: शादी करना गृहस्थ आश्रम का सबसे खास संस्कार है।

🎯 Exam Tip: विवाह संस्कार को 'गृहस्थ आश्रम' से जोड़कर लिखें।

 

Question 8. गृहस्थों को सलाह देना किस आश्रम की मुख्य विशेषता थी?
Answer: गृहस्थों को सलाह देना वानप्रस्थ आश्रम की मुख्य विशेषता थी। इस आश्रम में व्यक्ति जंगल में रहकर अपने अनुभवों और ज्ञान को समाज के लोगों के साथ साझा करता था।
In simple words: वानप्रस्थ आश्रम की एक खास बात यह थी कि उसमें लोग दूसरों को सलाह देते थे।

🎯 Exam Tip: 'वानप्रस्थ आश्रम' की विशेषता के रूप में 'गृहस्थों को सलाह देना' को प्रमुखता से बताएं।

 

Question 9. आर्यों के राजनीतिक जीवन का मूल आधार क्या था?
Answer: आर्यों के राजनीतिक जीवन का मूल आधार कुटुम्ब (परिवार) था। कई कुटुम्ब मिलकर ग्राम बनाते थे, और कई ग्राम मिलकर 'विश' और 'जन' जैसी बड़ी इकाइयों का निर्माण करते थे।
In simple words: आर्यों के राजनैतिक जीवन की नींव परिवार (कुटुम्ब) था।

🎯 Exam Tip: आर्यों के राजनीतिक जीवन के मूल आधार के लिए 'कुटुम्ब' शब्द का उपयोग करें।

 

Question 11. वैदिक काल में भूमि को कितने भागों में बाँटा गया था?
Answer: वैदिक काल में भूमि को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया था: उर्वरा और खिल्य। उर्वरा भूमि वह थी जो खेती के लिए उपजाऊ थी, जबकि खिल्य भूमि वह थी जो बंजर या अनुत्पादक थी।
In simple words: वैदिक काल में ज़मीन को दो तरह से बाँटा गया था: अच्छी खेती वाली ज़मीन (उर्वरा) और बंजर ज़मीन (खिल्य)।

🎯 Exam Tip: भूमि के प्रकार बताते समय 'उर्वरा' और 'खिल्य' शब्दों का सही अर्थ के साथ उल्लेख करें।

 

Question 12. आर्य किन-किन पशुओं को पालते थे?
Answer: आर्य मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी, भेड़, और घोड़ा जैसे पशुओं को पालते थे। ये पशु उनके जीवन में कृषि, परिवहन और डेयरी उत्पादों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे।
In simple words: आर्य लोग गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और घोड़े जैसे जानवर पालते थे।

🎯 Exam Tip: आर्यों द्वारा पाले जाने वाले प्रमुख पशुओं के नाम सही ढंग से लिखें।

 

Question 13. वैदिक काल में किस स्वर्ण सिक्के को मुद्रा के रूप में प्रयोग किया जाता था?
Answer: वैदिक काल में निष्क नामक स्वर्ण सिक्के को मुद्रा के रूप में प्रयोग किया जाता था। निष्क का उपयोग व्यापारिक लेन-देन और मूल्य के मापन के लिए होता था।
In simple words: वैदिक काल में 'निष्क' नाम के सोने के सिक्के का इस्तेमाल पैसों के तौर पर होता था।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल में स्वर्ण मुद्रा के लिए 'निष्क' शब्द का उपयोग करें।

 

लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वेद क्या हैं? चारों वेदों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: वेद भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण आधार हैं, जिनमें समस्त ज्ञान समाहित है। वेद भारत के सबसे पुराने ग्रंथ हैं और आर्यों की प्राचीन रचनाएँ मानी जाती हैं। चारों वेदों का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है:
(i) ऋग्वेद- यह सबसे प्राचीन वेद है। इसमें देवताओं की स्तुति के मंत्र हैं। वर्तमान में प्रचलित गायत्री मंत्र भी इसी वेद से लिया गया है।
(ii) यजुर्वेद- इसमें यज्ञों में प्रयोग होने वाले श्लोकों और मंत्रों का संकलन है। यह वेद गद्य और पद्य दोनों रूपों में लिखा गया है, जो विभिन्न अनुष्ठानों का मार्गदर्शन करता है।
(iii) सामवेद- इसमें देवताओं की पूजा-स्तुति से संबंधित मंत्रों का संकलन है। सामवेद का कुछ हिस्सा ऋग्वेद से लिया गया है। भारतीय संगीत में स्वरों का उद्भव सामवेद से ही हुआ है, जो इसे संगीत का महत्वपूर्ण स्रोत बनाता है।
(iv) अथर्ववेद- इस वेद का नाम अथर्व ऋषि के नाम पर पड़ा है। इसमें चिकित्सा विधि, रोगों से संबंधित ज्ञान, जादू-टोना और गृहस्थ जीवन के नियम संकलित हैं। यह दैनिक जीवन के व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित है।
In simple words: वेद प्राचीन ज्ञान की किताबें हैं। ऋग्वेद सबसे पुराना है जिसमें देवताओं की स्तुति है। यजुर्वेद में यज्ञ के मंत्र हैं। सामवेद में गाने वाले मंत्र हैं और अथर्ववेद में बीमारियों के इलाज और जादू-टोना के बारे में बताया गया है।

🎯 Exam Tip: चारों वेदों के नाम और प्रत्येक की एक-एक मुख्य विशेषता संक्षेप में बताएं।

 

Question 2. वैदिक धर्म एवं दर्शन पर प्रकाश डालिए।
Answer: वैदिक धर्म प्रकृति की शक्तियों की पूजा पर आधारित था, जैसे इंद्र (वर्षा के देवता), अग्नि (अग्नि के देवता) और सूर्य (सूर्य के देवता)। वैदिक दर्शन में आत्मा, पुनर्जन्म, कर्म और मोक्ष जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। उपनिषद वैदिक दर्शन के मूल ग्रंथ हैं, जो जीवन और ब्रह्मांड के गहरे अर्थों पर विचार करते हैं। यह दर्शन सार्वभौमिक सत्य और ज्ञान की योग्यता रखता है, जो हर मनुष्य के लिए उपयोगी है।
In simple words: वैदिक धर्म में लोग प्रकृति की पूजा करते थे। उनके दर्शन में आत्मा, जन्म-मृत्यु और कर्म के सिद्धांत थे, जो हर किसी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: वैदिक धर्म में प्राकृतिक शक्तियों की पूजा और दर्शन में आत्मा, कर्म, पुनर्जन्म जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करें।

 

Question 3. वैदिककालीन संयुक्त परिवार प्रथा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: वैदिककालीन समाज की मूल इकाई परिवार थी, जिसमें संयुक्त परिवारों को बहुत महत्व दिया जाता था। माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-भतीजा, पुत्र-पौत्र जैसी चार-पाँच पीढ़ियाँ एक साथ एक ही परिवार में रहती थीं। परिवार का मुखिया पिता होता था। संयुक्त परिवार प्रणाली की दो मुख्य बातें थीं: पहला, परिवार की संपत्ति और सदस्यों की सुरक्षा, और दूसरा, आजीविका में सभी का संयुक्त योगदान। परिवार में आजीविका के साधनों पर सबका अधिकार होता था। हालाँकि पुरुष परिवार का मुखिया होता था, लेकिन महिलाओं को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। इस प्रकार वैदिककालीन पारिवारिक जीवन सुखी और शांतिपूर्ण था।
In simple words: वैदिक काल में बड़े परिवार होते थे जहाँ कई लोग साथ रहते थे। पिता मुखिया होता था और सब मिलकर परिवार की सुरक्षा और कमाई में मदद करते थे।

🎯 Exam Tip: संयुक्त परिवार प्रथा का वर्णन करते समय सदस्यों की संख्या (चार-पाँच पीढ़ियाँ), मुखिया (पिता), और मुख्य लाभ (सुरक्षा, आजीविका) पर ध्यान दें।

 

Question 4. वैदिककालीन नारी की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Answer: वैदिक काल में नारियों को समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। परिवार में उन्हें पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे और वे सामाजिक व धार्मिक समारोहों में पुरुषों के साथ भाग लेती थीं। उस समय समाज में पर्दा प्रथा नहीं थी। लड़कियों को पढ़ाने का चलन था, जिसके परिणामस्वरूप घोषा, अपाला, लोपामुद्रा एवं श्रद्धा जैसी विदुषी स्त्रियों ने इस काल में वैदिक ऋचाओं की रचना की थी। इसी समय 'यत्र नार्यऽस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' जैसे प्रमाण वेदों के कई मंत्रों में मिलते हैं, जो नारी सम्मान को दर्शाते हैं।
In simple words: वैदिक काल में महिलाओं को बहुत सम्मान मिलता था। वे पुरुषों के बराबर थीं, पढ़ी-लिखी होती थीं और किसी पर्दे में नहीं रहती थीं।

🎯 Exam Tip: नारी की स्थिति का वर्णन करते समय 'महत्वपूर्ण स्थान', 'समान अधिकार', 'शिक्षा' और 'विदुषी स्त्रियों के नाम' जैसे बिंदुओं पर जोर दें।

 

Question 5. वैदिक कालीन संस्कारों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वैदिक संस्कृति संस्कारों से युक्त रही है, जिसमें व्यक्ति के जन्म, यज्ञोपवीत, विवाह और मृत्यु जैसे अवसरों पर विधि-विधान से अनुष्ठान और संस्कार प्रथा थी। व्यक्ति को जीवन भर में 16 संस्कारों से गुजरना पड़ता था, जो लोगों के जीवन का एक आवश्यक हिस्सा था। अधिकांश संस्कार मंत्रोच्चार और यज्ञ के साथ संपन्न होते थे। इन संस्कारों का महत्व इसी बात से पता चलता है कि इतने समय बाद आज भी ये संस्कार हिन्दू परिवारों द्वारा अपनाए जा रहे हैं।
In simple words: वैदिक काल में जन्म, शादी और मृत्यु जैसे खास समय पर 16 तरह के संस्कार किए जाते थे। ये आज भी कई घरों में माने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कारों की संख्या (16), मुख्य अवसर (जन्म, विवाह, मृत्यु) और उनका वर्तमान में भी प्रचलन जैसे बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 6. 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना क्या है?
Answer: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना यह है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार के समान है, और सभी मनुष्य तथा प्राणी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह एक सार्वभौमिक भाईचारे और एकता का विचार है, जो हमें सभी के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना रखने को सिखाता है।
In simple words: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का मतलब है कि सारी दुनिया और उसमें रहने वाले लोग एक बड़ा परिवार हैं।

🎯 Exam Tip: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को 'पूरी पृथ्वी एक परिवार' और 'सार्वभौमिक भाईचारा' जैसे शब्दों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 7. वैदिककालीन वर्ण व्यवस्था पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: वैदिककालीन वर्ण व्यवस्था कर्म और श्रम के सिद्धांत पर आधारित थी, न कि जन्म पर। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपने काम के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र हो सकता था। वर्ण व्यवस्था व्यवसाय से जुड़ी थी, और यह जन्मजात नहीं थी। व्यक्ति अपनी ज़रूरत के हिसाब से अपना व्यवसाय बदल सकता था, जिससे उसका वर्ण भी बदल जाता था। इन वर्गों में खान-पान, शादी-संबंधों पर कोई प्रतिबंध नहीं था, और छुआछूत जैसी प्रथा भी नहीं थी। ऋग्वेद में एक जगह पर एक व्यक्ति कहता है कि "मैं मंत्र बनाने वाला हूँ, मेरे पिता वैद्य हैं और मेरी माता पत्थर की चक्की से अन्न पीसने वाली महिला है।" इससे यह साफ होता है कि वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था काम के आधार पर थी।
In simple words: वैदिक काल में लोग अपने काम के आधार पर बँटे हुए थे, जन्म के आधार पर नहीं। वे अपना काम बदल भी सकते थे और छुआछूत जैसी कोई बात नहीं थी।

🎯 Exam Tip: वैदिक वर्ण व्यवस्था को 'कर्म एवं श्रम पर आधारित' और 'जन्मजात नहीं' जैसे बिंदुओं के साथ समझाएं।

 

Question 8. ऋग्वैदिक राजनीतिक संगठन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऋग्वैदिक राजनीतिक संगठन का मूल आधार कुटुम्ब (परिवार) था। कई कुटुम्बों को मिलाकर एक ग्राम बनता था, जिसका अधिकारी 'ग्रामणी' कहलाता था। कई ग्रामों को मिलाकर 'विश' नामक बड़ी इकाई बनती थी, जिसका अधिकारी 'विशपति' होता था। कई विशों को मिलाकर 'जन' नामक इकाई बनती थी, जिसका अधिकारी 'राजन्' या 'शासक' कहलाता था। ऋग्वैदिक काल में सभी जनों का राजनीतिक संगठन एक जैसा ही था, जो स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर था।
In simple words: ऋग्वैदिक काल में सबसे छोटी इकाई परिवार थी। कई परिवार मिलकर गाँव बनाते थे, जिनका मुखिया 'ग्रामणी' होता था। कई गाँव मिलकर 'विश' बनाते थे, जिसके मुखिया 'विशपति' होते थे।

🎯 Exam Tip: ऋग्वैदिक राजनीतिक संगठन में कुटुम्ब, ग्राम, विश और जन जैसी इकाइयों और उनके अधिकारियों के नाम (ग्रामणी, विशपति, राजन्) का क्रमबद्ध उल्लेख करें।

 

Question 9. ऋग्वैदिक कालीन राजा और उसके कार्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer: ऋग्वैदिक कालीन राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था। उसका पद आमतौर पर वंशानुगत था, लेकिन कभी-कभी जनता नए राजा का चुनाव भी करती थी। राज्य की सभी शक्तियाँ राजा के हाथों में केंद्रित थीं। राजा राज्य के कर्मचारियों और अधिकारियों को नियुक्त करता था, उन्हें पदोन्नत करता था और पद से हटा भी सकता था। राजा का निर्णय अंतिम माना जाता था, लेकिन वह मनमानी नहीं करता था, बल्कि अपनी मंत्रिपरिषद से सलाह-मशविरा करके ही नीतियाँ बनाता था।
In simple words: ऋग्वैदिक काल में राजा सबसे बड़ा अधिकारी होता था। वह लोगों को काम पर रखता था और सभी फैसले मंत्रियों की सलाह से लेता था। कभी-कभी लोग खुद ही राजा चुनते थे।

🎯 Exam Tip: राजा के पद (सर्वोच्च, वंशानुगत/निर्वाचित), शक्तियाँ और कार्य (नियुक्ति, निर्णय, मंत्रिपरिषद से सलाह) जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 10. वैदिककालीन सभा एवं समिति पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: वैदिककालीन सभा एवं समिति राजा पर नियंत्रण रखने और उसे परामर्श देने के लिए बनाई गई महत्वपूर्ण संस्थाएँ थीं। 'सभा' राज्य के मुख्य पदाधिकारियों और विद्वानों की बैठक थी, जहाँ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती थी। जबकि 'समिति' जनता के सदस्यों का संगठन थी, जिसमें आम लोग शामिल होते थे। इन दोनों संस्थाओं का काम राजा को सही रास्ते पर रखना और शासन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना था।
In simple words: वैदिक काल में सभा और समिति नाम की दो खास संस्थाएँ थीं। सभा बड़े लोगों और विद्वानों की थी, जबकि समिति आम जनता की सभा थी। ये राजा को सलाह देती थीं।

🎯 Exam Tip: सभा और समिति के कार्यों और उनकी संरचना (पदाधिकारी बनाम जनता) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बताएं।

 

Question 11. वैदिककालीन कृषि व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
Answer: वैदिककालीन कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर थी, लेकिन वर्षा की कमी होने पर कुएँ और नहरें भी सिंचाई के साधन के रूप में उपयोग किए जाते थे। इस समय जौ, गेहूँ, चावल आदि फसलें उगाई जाती थीं। खेती का काम हल और बैल से किया जाता था, और अच्छी फसल के लिए खाद का प्रयोग भी होता था। हर गाँव में दो तरह की ज़मीन होती थी: उर्वरा (उपजाऊ) और खिल्य (बंजर)। उर्वरा भूमि पर फसलें उगाई जाती थीं।
In simple words: वैदिक काल में खेती बारिश पर निर्भर थी, लेकिन कुएँ-नहरों से भी पानी देते थे। जौ, गेहूँ, चावल उगाते थे। बैल और हल से खेती होती थी, और खाद भी डालते थे। ज़मीन उपजाऊ (उर्वरा) और बंजर (खिल्य) होती थी।

🎯 Exam Tip: कृषि व्यवस्था में सिंचाई के साधन (वर्षा, कुएँ, नहरें), प्रमुख फसलें, खेती के उपकरण (हल, बैल) और भूमि के प्रकार (उर्वरा, खिल्य) को शामिल करें।

 

Question 12. ऋग्वैदिक कालीन नदियों की सूची बनाइए।
Answer: ऋग्वैदिक कालीन नदियों की सूची उनके प्राचीन और वर्तमान नामों के साथ निम्नानुसार है:

प्राचीन नामवर्तमान नाम
1. कुभाकाबुल
2. कुर्मुदाकुरुम
3. गोमतीगोमल
4. सुवस्तुस्वात
5. सिन्धुसिन्ध
6. वितस्ताझेलम
7. असिक्नीचिनाब
8. परुष्णीरावी
9. विपाशाव्यास
10. षतुद्रीसतलज
11. द्वषद्वतीसरस्वती

ये नदियाँ ऋग्वैदिक काल के भौगोलिक क्षेत्र और उस समय की बस्तियों को समझने में मदद करती हैं।
In simple words: ऋग्वेद में जिन नदियों के पुराने नाम हैं, उनके अब नए नाम हैं, जैसे कुभा अब काबुल है और वितस्ता अब झेलम है।
🎯 Exam Tip: ऋग्वैदिक नदियों के प्राचीन और वर्तमान नामों को सही ढंग से याद करें, खासकर जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वैदिककालीन आश्रम व्यवस्था का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: वैदिककालीन आश्रम व्यवस्था में व्यक्ति के जीवन को चार मुख्य चरणों में विभाजित किया गया था, प्रत्येक का अपना उद्देश्य और अवधि थी। यह व्यवस्था मानव जीवन को व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण बनाती थी:
(i) ब्रह्मचर्य आश्रम- ब्रह्मचर्य आश्रम मनुष्य के जीवन का पहला भाग माना जाता है। यह यज्ञोपवीत संस्कार से शुरू होकर लगभग 25 वर्ष की आयु तक चलता था। इसमें अविवाहित रहते हुए छात्र गुरुकुल में रहकर विद्या अध्ययन करते थे। ब्रह्मचर्य आश्रम में जो कुछ भी सीखा जाता था, वह जीवन के अन्य आश्रमों के लिए नींव का काम करता था।
(ii) गृहस्थ आश्रम- यह आश्रम 25-50 वर्ष की आयु तक चलता था। इसमें व्यक्ति विवाह करके पारिवारिक जीवन में प्रवेश करता था। वह अपनी जिम्मेदारियाँ निभाता था, संतान उत्पन्न करता था और समाज में योगदान देता था। यह आश्रम सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का आधार था।
(iii) वानप्रस्थ आश्रम- वानप्रस्थ आश्रम को 50-75 वर्ष की आयु तक माना गया था। इस आश्रम में व्यक्ति परिवार के दायित्वों से मुक्त होकर गाँव के पास जंगल में अपना जीवन व्यतीत करता था। यहाँ रहकर वह गृहस्थ जीवन में प्राप्त अनुभवों को समाज के कल्याण के लिए सोचता और उन्हें सलाह देता था। गृहस्थों को सलाह देना इस आश्रम की मुख्य विशेषता थी।
(iv) संन्यास आश्रम- संन्यास आश्रम को 75-100 वर्ष की आयु तक माना गया है। इस काल में व्यक्ति अपना पूरा जीवन परमपिता (भगवान) को समर्पित कर देता था। वह समाज को ही अपना आराध्य मानकर जीवन के बाकी 25 वर्ष समाज की सेवा के लिए समर्पित करता था। इस आश्रम में व्यक्ति एक जगह पर नहीं रहता था, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर घूमकर लोगों को अच्छे आचरण की शिक्षा देता था।
In simple words: वैदिक काल में जीवन को चार हिस्सों (आश्रमों) में बाँटा गया था: ब्रह्मचर्य (पढ़ाई, 25 साल तक), गृहस्थ (परिवार, 25-50 साल), वानप्रस्थ (जंगल में रहकर समाज को सलाह देना, 50-75 साल) और संन्यास (सब कुछ त्याग कर समाज सेवा, 75-100 साल)।

🎯 Exam Tip: चारों आश्रमों के नाम, उनकी समयावधि और प्रत्येक आश्रम की मुख्य गतिविधियों का विस्तार से वर्णन करें।

 

Question 2. वेदकालीन आर्थिक जीवन का वर्णन कीजिए।
Answer: वेदकालीन आर्थिक जीवन काफी उन्नत था। उस समय आर्यों (लोगों) की आजीविका के मुख्य साधन कृषि, पशुपालन एवं व्यापार थे, जिनका वर्णन निम्नलिखित है:
(i) कृषि- आर्यों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। वे जौ, गेहूँ, धान आदि फसलें उगाते थे। इस समय कृषि वर्षा, कुएँ एवं नहरों पर निर्भर थी। खेती का काम बैल और हल से किया जाता था। अच्छी फसल के लिए खाद का प्रयोग किया जाता था। हर गाँव में दो प्रकार की भूमि-उर्वरा (उपजाऊ) एवं खिल्य (बंजर) होती थी। उर्वरा भूमि पर फसलें उगाई जाती थीं। ऐसी भूमि पर किसी न किसी का अधिकार होता था, लेकिन बंजर भूमि पर पूरे गाँव का अधिकार होता था, जहाँ ग्रामीण अपने पशु चराते थे।
(ii) पशुपालन- आर्यों का दूसरा महत्वपूर्ण व्यवसाय पशुपालन था। वे गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और घोड़ा जैसे पशुओं को पालते थे। गायों को धन का प्रतीक माना जाता था और वे आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।
(iii) शिल्प- आर्यों ने शिल्पकला में काफी उन्नति की थी। वे अच्छे कपड़े बुनते थे, चमड़ा रंगते थे और आभूषण बनाने की कला में निपुण थे। बढ़ई लोग हल, बैलगाड़ियाँ, तख्त, चारपाइयाँ और नावें बनाने में माहिर थे। इस समय वैद्य भी थे, जो चिकित्सा का काम करते थे। कुछ लोग लोहार, सुनार और कुम्हार का काम भी करते थे। किसी भी शिल्प को नीचा नहीं समझा जाता था, और शिल्पकार समाज में आदरणीय थे।
(iv) व्यापार- वैदिक काल में व्यापारी वर्ग को 'पणि' कहा जाता था। इस समय विदेशी व्यापार जल और स्थल दोनों मार्गों से होता था। व्यापार के लिए वस्तु-विनिमय प्रणाली का प्रयोग किया जाता था, और वस्तुएँ ऊँटों, छकड़ों एवं घोड़ों के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जाती थीं। इस समय 'निष्क' नामक स्वर्ण मुद्रा का प्रयोग करने का विवरण भी ऋग्वेद में मिलता है।
In simple words: वैदिक काल में लोग खेती, पशु पालना और व्यापार करते थे। वे जौ, गेहूँ उगाते थे और गाय, भैंस जैसे जानवर पालते थे। चीजों के बदले चीजें खरीदते-बेचते थे और 'निष्क' नाम के सोने के सिक्के भी इस्तेमाल करते थे।

🎯 Exam Tip: वैदिककालीन आर्थिक जीवन का वर्णन करते समय कृषि, पशुपालन, शिल्प और व्यापार-इन चार मुख्य क्षेत्रों का विस्तार से उल्लेख करें।

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