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Detailed Chapter 16 हमारा अतीत RBSE Solutions for Class 6 Social Science
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Class 6 Social Science Chapter 16 हमारा अतीत RBSE Solutions PDF
Question 1. प्राचीन जीवन कैसा रही होगा? इसके बारे में सोचें और चर्चा करें। (पृष्ठ सं. 114)
Answer: प्राचीन जीवन आज के समाज से बहुत अलग रहा होगा। खुदाई से मिली चीजों से पता चलता है कि पुराने समय में लोगों के पास आग, खेती करने के तरीके और आने-जाने के आधुनिक साधन नहीं थे। उस समय लोगों का जीवन प्रकृति पर बहुत निर्भर था।
In simple words: पुराना जीवन आज से बहुत अलग था। तब लोगों के पास आग, खेती और आने-जाने के आधुनिक साधन नहीं थे।
🎯 Exam Tip: जब भी प्राचीन जीवन शैली का वर्णन करें, तो उसकी तुलना वर्तमान जीवन से करें और उन प्रमुख चीजों को बताएं जो तब नहीं थीं।
पढ़े एवं बताएँ
Question 1. वंशावली लेखकों का इतिहास लेखन में किस प्रकार योगदान रहा ? (पृष्ठ सं. 115)
Answer: वंशावली लिखने वालों ने इतिहास लिखने में बहुत मदद की है:
1. इन लेखकों ने अलग-अलग परिवारों के जन्म से लेकर मृत्यु तक का पूरा हिसाब अपनी किताबों में संभालकर रखा। इसी से आज का इतिहास लिखा और छापा जा सका। इन रिकॉर्ड्स से हमें पूर्वजों के बारे में अहम जानकारी मिलती है।
2. वंशावली लिखने का उनका तरीका इतिहास को समझने का एक आसान तरीका बन गया है।
In simple words: वंशावली लिखने वालों ने परिवारों का पूरा इतिहास लिखा। इससे आज के इतिहास को समझने में मदद मिली।
🎯 Exam Tip: वंशावली लेखकों की भूमिका बताते समय उनके द्वारा रखे गए रिकॉर्ड्स और इतिहास को समझने में उनकी सरलता पर जोर दें।
आओ करके देखें।
Question 1. आदि मानव ने क्या-क्या सीखा, क्या-क्या खोजा व उसने क्या-क्या आकृतियाँ या उपयोगी चीजें बनाईं ? अपने अध्यापक की सहायता से सूची बनाएँ। (पृष्ठ सं. 116)
Answer: आदि मानव ने बहुत कुछ सीखा, खोजा और बनाया:
**सीखा:** जानवरों को पालना, पौधे उगाना, अनाज पैदा करना, शिकार करना, गुफाओं में रहना।
**खोजा:** ताँबा, जस्ता और सीसा। ये धातुएँ उनके जीवन में बड़े बदलाव लाईं।
**बनाया:** पहिया, पत्थर की चाक से बर्तन, और कपड़े बुनना।
In simple words: आदि मानव ने जानवर पालना, खेती करना सीखा। उन्होंने ताँबा, जस्ता खोजा और पहिया, बर्तन, कपड़े बनाना सीखा।
🎯 Exam Tip: आदि मानव की उपलब्धियों को तीन मुख्य श्रेणियों (सीखा, खोजा, बनाया) में बांटकर याद रखना आसान होता है।
Question 2. सिन्धु-सरस्वती घाटी सभ्यता के नगर नियोजन की प्रमुख विशेषताओं की सूची बनाएँ। (पृष्ठ सं. 119)
Answer: सिन्धु-सरस्वती घाटी सभ्यता के नगर नियोजन की मुख्य बातें ये थीं:
* नगर में घर एक जाल की तरह फैले हुए थे, यानी एक तय योजना से बने थे। यह योजना उनकी शहरीकरण की समझ को दिखाती है।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता में शहर के घर एक जाल की तरह योजनाबद्ध तरीके से बने थे।
🎯 Exam Tip: नगर नियोजन की बात करते समय, 'जाल की तरह फैले हुए' या 'नियोजित' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
प्रश्न एक व दो के सही उत्तर चुनिए
Question 1. सिन्धु घाटी सभ्यता का सबसे पहला उत्खनित स्थान कौन-सा था ?
(अ) मोहनजोदड़ो
(ब) हड़प्पा
(स) कालीबंगा
(द) लोथल।
Answer: (ब) हड़प्पा
In simple words: सिन्धु घाटी सभ्यता की सबसे पहली खोजी गई जगह हड़प्पा थी।
🎯 Exam Tip: सिन्धु घाटी सभ्यता के पहले खोजे गए स्थल का नाम हमेशा याद रखें, यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 2. सिन्धु सभ्यता ईसा से कितने वर्ष पुरानी मानी जाती
(अ) 2000 वर्ष
(ब) 5000 वर्ष
(स) 2500 वर्ष
(द) 4000 वर्ष
Answer: (स) 2500 वर्ष
In simple words: सिन्धु सभ्यता ईसा मसीह के जन्म से लगभग 2500 साल पुरानी मानी जाती है।
🎯 Exam Tip: सभ्यता की अनुमानित आयु को 'ईसा पूर्व' या 'वर्तमान से' के संदर्भ में याद रखें।
Question 3. इतिहास को जानने के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?
Answer: इतिहास को जानने के मुख्य साधन ये हैं:
* **पुरातात्विक स्रोत:** पुरानी जगहों की खुदाई से मिली चीजें, जैसे बर्तन, इमारतें।
* **साहित्यिक स्रोत:** किताबों और लेखों में लिखी हुई बातें।
* **वंशावलियाँ:** परिवारों के इतिहास का रिकॉर्ड।
* **पुरालेख एवं विदेशी यात्रियों के वर्णन:** पुराने शिलालेख और दूसरे देशों से आए लोगों द्वारा लिखी गई यात्राएँ। ये स्रोत हमें बीते हुए समय की जानकारी देते हैं।
In simple words: इतिहास जानने के लिए खुदाई से मिली चीजें, पुरानी किताबें, वंशावलियाँ और यात्रियों के लेख मुख्य स्रोत हैं।
🎯 Exam Tip: इतिहास के स्रोतों को याद करते समय, प्रत्येक श्रेणी का एक या दो उदाहरण भी याद रखें।
Question 4. आदिमानव का जीवन कैसा था ?
Answer: आदि मानव अपने जीवन में मुख्य रूप से आरी, चाकू, कुल्हाड़ी, हथौड़ा और बसूला जैसे औजारों का इस्तेमाल करते थे। इन औजारों की मदद से वे शिकार करते थे और अन्य काम करते थे। उनका जीवन शिकार और संग्रह पर आधारित था।
In simple words: आदि मानव के जीवन में मुख्य औजार आरी, चाकू, कुल्हाड़ी, हथौड़ा और बसूला थे।
🎯 Exam Tip: आदिमानव के जीवन का वर्णन करते समय उनके मुख्य औजारों और जीवनशैली के मूल सिद्धांतों पर ध्यान दें।
Question 6. क्या कारण था कि प्राचीन सभ्यताएँ नदी किनारे मैदानों में पनपीं ?
Answer: प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के पास के मैदानों में इसलिए फली-फूलीं, क्योंकि:
* वहाँ खूब पानी मिल जाता था।
* ज़मीन बहुत उपजाऊ थी, जिससे खेती आसान थी।
* नदियों के किनारे की ज़मीन समतल (प्लेन) थी।
* नदी के पास कई तरह के जीव-जंतु भी आसानी से मिल जाते थे, जो भोजन का स्रोत थे। इन सभी कारणों ने बस्तियों को बसाने में मदद की।
In simple words: पुरानी सभ्यताएँ नदी के पास इसलिए बसीं क्योंकि वहाँ पानी, उपजाऊ ज़मीन, समतल जगह और जीव-जंतु आसानी से मिल जाते थे।
🎯 Exam Tip: नदी किनारे सभ्यताओं के पनपने के कारणों में हमेशा पानी, उपजाऊ भूमि, समतल क्षेत्र और खाद्य संसाधनों का उल्लेख करें।
Question 7. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के प्रमुख स्थल कौन-से हैं?
Answer: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के मुख्य स्थल ये हैं:
मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कोटदीजी और चन्हूदड़ो (ये सभी पाकिस्तान में हैं)।
रोपड़ (पंजाब में)।
लोथल और धोलावीरा (ये गुजरात में हैं)।
कालीबंगा (राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में है)। ये सभी स्थल उस समय की विकसित संस्कृति को दर्शाते हैं।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के मुख्य स्थल मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कोटदीजी, चन्हूदड़ो, रोपड़, लोथल, धोलावीरा और कालीबंगा हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख स्थलों के नाम और वे किस राज्य या देश में स्थित हैं, यह भी याद रखें।
Question 8. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के नगर नियोजन पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता की नगर योजना बहुत अच्छी थी। शहर को दो हिस्सों में बांटा गया था - एक ऊँचा दुर्ग (किला) और एक निचला शहर। शहर के घर एक जाल की तरह बने थे। सड़कें एक-दूसरे को 90 डिग्री के कोण पर काटती थीं, जिससे शहर आयताकार टुकड़ों में बंट जाता था। खुदाई में बड़े सभा भवन, चौराहे और स्नानघर भी मिले हैं, जो दिखाते हैं कि शहर कितनी योजना के साथ बनाए गए थे।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का नगर नियोजन बहुत योजनाबद्ध था, जिसमें शहर दुर्ग और निचले शहर में बंटा था, सड़कें सीधी थीं और सार्वजनिक इमारतें भी थीं।
🎯 Exam Tip: नगर नियोजन की विशेषताओं में दुर्ग-निचला शहर विभाजन, ग्रिड पैटर्न सड़कें और सार्वजनिक संरचनाओं का उल्लेख करें।
Question 9. सरस्वती-सिन्धु सभ्यता की समकालीन विश्व संस्कृतियों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के समय की दुनिया में कुछ और संस्कृतियाँ भी थीं:
1. **मिस्र की नील नदी घाटी सभ्यता:** यह सभ्यता अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी मिस्र इलाके में नील नदी के दोनों किनारों पर विकसित हुई। यह एक और बड़ी प्राचीन सभ्यता थी जो नदियों के पास ही विकसित हुई।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता के समय मिस्र की नील नदी घाटी सभ्यता भी अफ्रीका में नील नदी के किनारे विकसित हुई थी।
🎯 Exam Tip: समकालीन सभ्यताओं का उल्लेख करते समय उनके स्थान और नदी से संबंध को भी बताएं।
Question 10. राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थल कौन-कौन से हैं ? वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान के मुख्य पुराने पुरातात्विक स्थल ये हैं:
1. **कालीबंगा:** यह हनुमानगढ़ जिले में है और घग्घर नदी के किनारे पर स्थित है।
2. **आहाड़:** यह उदयपुर के पास बेड़च नदी के किनारे एक बस्ती थी, जिसे 'ताँबे के शहर' के नाम से जाना जाता था।
3. **गिलूण्ड:** यह उदयपुर से करीब 95 किमी उत्तर-पूर्व में, राजसमंद जिले में स्थित एक पुराना स्थल है।
4. **बागौर:** यह भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के किनारे बसा हुआ है।
5. **बालाथल:** यह उदयपुर से 42 किमी पूर्व में, बल्लभनगर के पास एक गाँव में स्थित है।
6. **नोह:** यह भरतपुर शहर से 5 किमी दूर स्थित है।
7. **चन्द्रावती:** यह आबू-सिरोही में, आबूरोड के पास पहाड़ों के नीचे स्थित है।
8. **पछमता:** यह उदयपुर से 100 किमी दूर, राजसमंद जिले के पछमता गाँव में स्थित है।
9. **गणेश्वर:** यह सीकर जिले में काँतली नदी के तट पर पाया जाता है।
10. **बैराठ:** यह जयपुर जिले में स्थित है। इन स्थलों से राजस्थान के प्राचीन इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
In simple words: राजस्थान के मुख्य पुरातात्विक स्थल कालीबंगा, आहाड़, गिलूण्ड, बागौर, बालाथल, नोह, चन्द्रावती, पछमता, गणेश्वर और बैराठ हैं, जो अलग-अलग जिलों में नदियों के पास स्थित हैं।
🎯 Exam Tip: राजस्थान के पुरातात्विक स्थलों को याद करते समय, उनके जिले और किसी विशेष पहचान (जैसे 'ताम्र नगरी' या नदी का किनारा) को भी याद रखें।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question (i) साहित्यिक स्रोत हैं
(अ) मुद्राएँ
(ब) शिलालेख
(स) भवन
(द) कथाएँ।
Answer: (द) कथाएँ।
In simple words: कहानियाँ साहित्यिक स्रोतों का एक हिस्सा होती हैं, जो हमें इतिहास के बारे में बताती हैं।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक स्रोतों में लिखित सामग्री आती है, जबकि पुरातात्विक स्रोतों में भौतिक अवशेष शामिल होते हैं।
Question (ii) मनुष्य ने सर्वप्रथम किस धातु की खोज की थी ?
(अ) ताँबा
(ब) लोहा
(स) जस्ता
(द) सीसा
Answer: (अ) ताँबा
In simple words: मनुष्य ने सबसे पहले ताँबा धातु की खोज की थी, जिसका उपयोग औजार और बर्तन बनाने के लिए किया गया।
🎯 Exam Tip: ताँबा ही वह पहली धातु थी जिसे मानव ने उपयोग करना सीखा, जिससे कांस्य युग की शुरुआत हुई।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Question (iv) धोलावीरा स्थित है
(अ) पंजाब
(ब) गुजरात
(स) उत्तर प्रदेश
(द) राजस्थान।
Answer: (ब) गुजरात
In simple words: धोलावीरा एक महत्वपूर्ण प्राचीन स्थल है जो गुजरात राज्य में स्थित है।
🎯 Exam Tip: धोलावीरा सिन्धु घाटी सभ्यता का एक बड़ा और प्रसिद्ध शहर था, जो अपनी जल प्रबंधन प्रणाली के लिए जाना जाता है।
Question (v) वैदिक संस्कृति का जन्म किस नदी के किनारे हुआ था ?
(अ) सिन्धु नदी
(ब) सरस्वती नदी
(स) रावी नदी
(द) गंगा नदी।
Answer: (ब) सरस्वती नदी
In simple words: वैदिक संस्कृति का उदय मुख्य रूप से सरस्वती नदी के किनारों पर हुआ था, जहाँ लोग बसे और अपनी सभ्यता विकसित की।
🎯 Exam Tip: सरस्वती नदी को वेदों में पवित्र और महत्वपूर्ण नदी के रूप में वर्णित किया गया है, जो वैदिक सभ्यता का केंद्र थी।
Question. स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए।
(i) स्तम्भ 'अ' स्तम्भ 'ब'
(i) पुरातात्विक स्रोत (अ) कहानियाँ
(ii) साहित्यिक स्रोत (ब) शिलालेख
(iii) विदेशी यात्री (स) लगभग 40 लाख वर्ष पूर्व
(iv) मनुष्य की उत्पत्ति (द) ह्वेनसांग
Answer: मिलान इस प्रकार है:
(i) पुरातात्विक स्रोत - (ब) शिलालेख
(ii) साहित्यिक स्रोत - (अ) कहानियाँ
(iii) विदेशी यात्री - (द) ह्वेनसांग
(iv) मनुष्य की उत्पत्ति - (स) लगभग 40 लाख वर्ष पूर्व। ये मिलान हमें इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करते हैं।
In simple words: पुरातात्विक स्रोत शिलालेख हैं, साहित्यिक स्रोत कहानियाँ हैं, ह्वेनसांग एक विदेशी यात्री था, और मनुष्य की उत्पत्ति लगभग 40 लाख साल पहले हुई।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, एक-एक करके सही जोड़े को पहचानें और फिर अंतिम उत्तर की पुष्टि करें।
रिक्त स्थान भरिए
Question. रिक्त स्थान भरिए
1. कालीबंगा ......... में स्थित है।
2. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता वर्तमान से .........पुरानी है।
3. प्राचीन साहित्य में ......... नदी को सिन्धु नदी । की माँ कहा जाता है।
4. हड़प्पा के दुर्ग में सबसे अच्छी इमारतें ......... की र्थी।
5. आहाड़ एवं गिलण्ड स्थलों की सभ्यता ......... संस्कृति के नाम से जानी जाती है।
Answer:
1. कालीबंगा **राजस्थान** में स्थित है।
2. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता वर्तमान से **4500 वर्ष** पुरानी है।
3. प्राचीन साहित्य में **सरस्वती** नदी को सिन्धु नदी की माँ कहा जाता है।
4. हड़प्पा के दुर्ग में सबसे अच्छी इमारतें **धान्यागारों** की थीं।
5. आहाड़ एवं गिलूण्ड स्थलों की सभ्यता **आहाड़** संस्कृति के नाम से जानी जाती है।
In simple words: कालीबंगा राजस्थान में है, सिन्धु-सरस्वती सभ्यता 4500 साल पुरानी है। प्राचीन साहित्य में सरस्वती नदी को महत्वपूर्ण माना जाता है। हड़प्पा में अच्छे धान्यागार (अनाज भंडार) थे। आहाड़ और गिलूण्ड की सभ्यता को आहाड़ संस्कृति भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, संबंधित तथ्य को सटीक रूप से याद करें और उसे दिए गए संदर्भ में सही ढंग से फिट करें।
अति लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. शिलालेख किसे कहते हैं ?
Answer: शिलालेख उन लेखों को कहते हैं जो पत्थर या धातु की प्लेटों पर खुदाई करके लिखे जाते हैं। ये प्राचीन समय की महत्वपूर्ण जानकारी के स्रोत होते हैं।
In simple words: शिलालेख वे लेख होते हैं जो पत्थर या धातु पर लिखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: शिलालेखों को इतिहास जानने का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत माना जाता है, क्योंकि वे सीधे उसी काल से संबंधित होते हैं।
Question 2. वंशावली लिखने वाले समुदायों के नाम लिखिए।
Answer: वंशावली लिखने वाले समुदायों के नाम राव (बड़बा), भार, बारोट, जागा, तीर्थ पुरोहित (पण्डे), रानीगंगा, हेलवा और पंजीकार हैं। ये समुदाय पीढ़ियों का हिसाब रखते थे।
In simple words: वंशावली लिखने वाले समुदायों में राव, भार, बारोट, जागा और तीर्थ पुरोहित शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: इन समुदायों के नाम याद रखें, क्योंकि ये भारतीय इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
Question 4. प्रागैतिहासिक काल किसे कहते हैं ?
Answer: प्रागैतिहासिक काल उस समय को कहते हैं जो मनुष्य के धरती पर आने से लेकर लिखने की कला (लिपि) के विकसित होने तक का है। यह समय आज से लगभग दस हज़ार साल पहले तक का माना जाता है। इस काल की जानकारी हमें लिखित स्रोतों से नहीं मिलती है।
In simple words: प्रागैतिहासिक काल वह समय है जब मनुष्य ने लिखना नहीं सीखा था, जो मानव के जन्म से लेकर लगभग दस हज़ार साल पहले तक का है।
🎯 Exam Tip: प्रागैतिहासिक काल की मुख्य पहचान 'लिपि के विकास से पहले' का समय है।
Question 5. प्रागैतिहासिक काल को प्रस्तर (पाषाण) काल क्यों कहा जाता है?
Answer: प्रागैतिहासिक काल को प्रस्तर (पाषाण) काल इसलिए कहते हैं क्योंकि इस समय के लोग पत्थर का इस्तेमाल आग जलाने के लिए करते थे। वे पत्थर के बने बर्तन और औजारों का भी खूब उपयोग करते थे। पत्थरों का उनके जीवन में बहुत महत्व था।
In simple words: प्रागैतिहासिक काल को प्रस्तर काल कहते हैं क्योंकि उस समय लोग पत्थर से आग जलाते थे और पत्थर के औजार-बर्तन इस्तेमाल करते थे।
🎯 Exam Tip: पाषाण काल को 'पत्थर का युग' भी कहते हैं, क्योंकि उस समय मानव जीवन में पत्थर का उपयोग सबसे अधिक था।
Question 6. किस आधार पर सिन्धु-सरस्वती सभ्यता को बहुत अधिक विकसित माना जाता है ?
Answer: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता को बहुत विकसित इसलिए माना जाता है क्योंकि वहाँ से खुदाई में मिले पुराने अवशेष (बची हुई चीजें) बहुत उन्नत थे। इन अवशेषों से पता चलता है कि उनके शहर, कला और जीवनशैली बहुत आधुनिक थी।
In simple words: खुदाई में मिले पुराने अवशेषों के आधार पर सिन्धु-सरस्वती सभ्यता को बहुत विकसित माना जाता है।
🎯 Exam Tip: अवशेषों में मिली नगर योजना, जल निकासी व्यवस्था और कलाकृतियाँ इस सभ्यता की उन्नत स्थिति को दर्शाती हैं।
Question 7. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता किस प्रकार लुप्त हो गई थी ?
Answer: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता शायद बाढ़, किसी बड़ी बीमारी (महामारी), या फिर किसी प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप के कारण खत्म हो गई थी। यह सभ्यता के अचानक खत्म होने के कई संभावित कारणों में से एक है।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता शायद बाढ़, बीमारी या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण खत्म हो गई थी।
🎯 Exam Tip: सिन्धु सभ्यता के अंत के लिए आमतौर पर प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन या बाहरी आक्रमण को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
Question 8. राजस्थान के पूर्व हड़प्पा एवं हड़प्पाकालीन स्थल कौन-कौन से हैं?
Answer: राजस्थान में पूर्व हड़प्पा और हड़प्पाकाल के मुख्य स्थल करनपुरा, बिजनौर और तरखान वाला डेरा हैं। ये जगहें हमें हड़प्पा से पहले और हड़प्पा काल के जीवन को समझने में मदद करती हैं।
In simple words: राजस्थान में पूर्व हड़प्पा और हड़प्पाकाल के मुख्य स्थल करनपुरा, बिजनौर और तरखान वाला डेरा हैं।
🎯 Exam Tip: इन स्थलों के नाम याद रखें क्योंकि ये राजस्थान में हड़प्पा सभ्यता के विस्तार को दिखाते हैं।
Question 9. राजस्थान में पूर्व हड़प्पा एवं हड़प्पाकालीन कितने पुरास्थल प्राप्त हुए हैं? इनमें से कितने स्थलों का उत्खनन हो चुका है ?
Answer: राजस्थान में पूर्व हड़प्पा और हड़प्पाकालीन समय के कुल 100 पुराने स्थल मिले हैं। इनमें से अब तक 6 स्थलों की खुदाई की जा चुकी है। इन खुदाईयों से हमें बहुत सी ऐतिहासिक जानकारी मिलती है।
In simple words: राजस्थान में पूर्व हड़प्पा और हड़प्पाकाल के 100 पुरास्थल मिले हैं, जिनमें से 6 की खुदाई हो चुकी है।
🎯 Exam Tip: संख्यात्मक तथ्यों को सटीक रूप से याद रखें, जैसे कुल स्थलों की संख्या और उत्खनित स्थलों की संख्या।
लघूत्तरीय प्रश्न
Question 2. पुरातात्विक एवं साहित्यिक स्रोत किसे कहते हैं ?
Answer: **पुरातात्विक स्रोत:** ये वे पुरानी चीज़ें हैं जिन्हें पुरातत्वविदों ने ज़मीन से खोदकर निकाला है। पुराने ज़माने की इमारतें, स्मारक, किले, सिक्के और शिलालेख, ये सभी पुरातात्विक स्रोत कहलाते हैं। इनसे हमें इतिहास की ठोस जानकारी मिलती है।
**साहित्यिक स्रोत:** ये वे स्रोत हैं जो किसी भी भाषा में लिखे हुए मिलते हैं। कहानियाँ, कथाएँ और किसी भी भाषा या लिपि में लिखी गई किताबें साहित्यिक स्रोत कहलाती हैं। इनसे हमें उस समय के विचारों और जीवन के बारे में पता चलता है।
In simple words: पुरातात्विक स्रोत खुदाई से मिली पुरानी इमारतें, सिक्के आदि हैं। साहित्यिक स्रोत किसी भी भाषा में लिखी हुई कहानियाँ और किताबें हैं।
🎯 Exam Tip: पुरातात्विक स्रोत भौतिक होते हैं, जबकि साहित्यिक स्रोत लिखित सामग्री होते हैं। दोनों ही इतिहास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 3. वंशावलियाँ क्या हैं ?
Answer: वंशावलियाँ एक खास तरह की लिखने की परंपरा है, जैसे भाषा, कला और साहित्य होते हैं। ये इतिहास जानने का एक आसान तरीका हैं। इनमें किसी भी परिवार के जन्म से लेकर मृत्यु तक का पूरा रिकॉर्ड लिखा जाता है। ये हमें पीढ़ियों के बारे में जानकारी देती हैं।
In simple words: वंशावलियाँ एक लेखन परंपरा हैं जिनमें किसी परिवार के जन्म से मृत्यु तक का पूरा इतिहास लिखा होता है, जिससे हमें इतिहास समझने में मदद मिलती है।
🎯 Exam Tip: वंशावलियाँ परिवार के इतिहास और सामाजिक संरचना को समझने में सहायक होती हैं।
Question 4. पुरा-ऐतिहासिक कालीन (प्रागैतिहासिक) मानव के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
Answer: पुरा-ऐतिहासिक काल का मानव घुमक्कड़ जीवन जीता था, यानी एक जगह टिक कर नहीं रहता था। वह छोटे-छोटे समूहों में अपने मुखिया या नेता के साथ रहता था और जंगलों में भोजन ढूंढता फिरता था। शिकार करना, खाना खाना और गुफाओं में रहना ही उसकी रोज़ की ज़िंदगी थी। वह आग का इस्तेमाल जंगली जानवरों से अपनी रक्षा के लिए करता था और पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े काट कर धारदार हथियार व औजार बनाता था।
In simple words: पुरा-ऐतिहासिक मानव घूमते रहते थे, शिकार करते थे, गुफाओं में रहते थे, और जानवरों से बचने व औजार बनाने के लिए आग और पत्थरों का इस्तेमाल करते थे।
🎯 Exam Tip: पुरा-ऐतिहासिक मानव के जीवन में शिकार, गुफाओं में निवास और पत्थर के औजारों का महत्व था।
Question 5. मानव के स्थायी जीवन का आरम्भ कैसे हुआ था ?
Answer: मानव का स्थायी जीवन इस तरह शुरू हुआ:
* समय के साथ, मानव ने जानवरों को पालना, पौधे उगाना और अनाज उगाना सीख लिया। इससे उन्हें भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ा।
* लोगों ने एक ही जगह पर झोंपड़ियाँ बनाकर रहना शुरू कर दिया, जिससे उनका घूमना-फिरना बंद हो गया।
* मानव ने धातु, बर्तन, पहिया और कपड़ा बुनने जैसी चीज़ें बनाना सीख लिया। इससे उनकी ज़रूरतें एक ही जगह पर पूरी होने लगीं और वे एक स्थिर जीवन जीने लगे।
In simple words: मानव ने जानवर पालना, खेती करना सीखा, फिर एक जगह झोंपड़ी बनाकर रहना शुरू किया। उन्होंने धातु के औजार, बर्तन, पहिया और कपड़े बनाना भी सीखा, जिससे उनका जीवन स्थिर हो गया।
🎯 Exam Tip: स्थायी जीवन की शुरुआत में कृषि, पशुपालन, बस्तियों का निर्माण और नए अविष्कार (जैसे पहिया) मुख्य कारक थे।
Question 7. हड़प्पाकालीन भवन योजना का वर्णन कीजिए।
Answer: हड़प्पाकाल में घरों की योजना बहुत अच्छी थी। यहाँ के घरों में मोटी ईंटों की दीवारें, खिड़कियाँ और दरवाज़े मिलते हैं। घरों में तेल रखने के बड़े मटके, रसोई के पास नालियाँ और जानवरों के रहने की जगह भी होती थी। कुछ घरों में कुएँ भी थे और स्नानघर भी मिले हैं। इन खंडहरों से पता चलता है कि लोग अपनी ज़रूरत के हिसाब से खुले, चौड़े और बड़े घर बनाते थे।
In simple words: हड़प्पा के घरों की योजना अच्छी थी, जिनमें मोटी दीवारें, खिड़कियाँ, दरवाज़े, रसोई में नालियाँ, कुएँ और स्नानघर होते थे।
🎯 Exam Tip: हड़प्पाकालीन भवन योजना में ईंटों का उपयोग, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे स्नानघरों पर ध्यान दें।
Question 8. पछमता (राजसमंद) नामक पुरास्थल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: पछमता (राजसमंद) नामक पुरानी जगह उदयपुर से 100 किलोमीटर दूर पछमता गाँव में है। यह मेवाड़ के आहाड़-बनास संस्कृति का एक खास स्थल है। यहाँ से डिज़ाइन वाले जार, सीप की चूड़ियाँ, मिट्टी के मनके, शंख, लेपिस लेजूली जैसे गहने, नीले रंग के कीमती पत्थर, कई तरह के मिट्टी के बर्तन और दो भट्ठियाँ या चूल्हे मिले हैं। ये चीजें उस समय के लोगों की कला और जीवनशैली को बताती हैं।
In simple words: पछमता पुरास्थल राजसमंद में है, जो आहाड़-बनास संस्कृति का हिस्सा है। यहाँ से डिज़ाइन वाले जार, गहने, कीमती पत्थर, मिट्टी के बर्तन और भट्ठियाँ मिली हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी पुरास्थल का वर्णन करते समय उसकी भौगोलिक स्थिति, संबंधित संस्कृति और वहाँ से मिली प्रमुख वस्तुओं का उल्लेख करें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: मानव ने खेती, पशुपालन और गाँव बनाना सीख लिया था। जब उन्होंने अपनी ज़रूरत से ज़्यादा चीज़ें पैदा करना शुरू किया, तो वे उन्हें दूसरों को देने लगे और उनसे अपनी ज़रूरत की चीज़ें लेने लगे। इसी से धीरे-धीरे व्यापार शुरू हुआ और शहर बसने लगे। इस तरह सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का विकास हुआ।
यह सभ्यता सबसे पहले 1922 ईस्वी में पंजाब के हड़प्पा और फिर सिन्धु के मोहनजोदड़ो की खुदाई से सामने आई। बाद में और भी कई जगहें खोजी गईं। यह सभ्यता सिंध, बलूचिस्तान, पूर्वी और पश्चिमी पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तरी राजस्थान तक फैली हुई थी, जिसका भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा था। यह सभ्यता ईसा मसीह के जन्म से 2500 साल पहले और आज से 4500 साल पुरानी मानी जाती है। इस सभ्यता की सबसे खास बात इसकी विकसित नगर निर्माण योजना थी। खुदाई में सभा भवन, बाज़ार, चौराहे और स्नानघर जैसी सार्वजनिक इमारतें मिली हैं।
In simple words: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता खेती और व्यापार से विकसित हुई थी। यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में खोजी गई थी, जो सिंध से राजस्थान तक फैली थी। यह 4500 साल पुरानी थी और अपनी अच्छी नगर योजना के लिए जानी जाती थी, जहाँ सभा भवन और स्नानघर मिले हैं।
🎯 Exam Tip: सिन्धु-सरस्वती सभ्यता का विस्तृत वर्णन करते समय उसके विकास के कारण, प्रमुख स्थलों, भौगोलिक विस्तार, समय अवधि और मुख्य विशेषताओं (जैसे नगर नियोजन) को शामिल करें।
Question 2. राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों से क्या-क्या पुरा ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं ? विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान के मुख्य पुरातात्विक स्थलों से ये ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं:
1. **कालीबंगा:** 1961 ई. में यहाँ दो टीलों की खुदाई हुई, जहाँ से मिली चीज़ें हड़प्पा संस्कृति से मिलती-जुलती हैं।
2. **आहाड़:** यह 'ताँबे के शहर' के नाम से मशहूर है। यहाँ से पत्थर, ताँबे और मिट्टी के बर्तनों के पुराने अवशेष मिले हैं।
3. **गिलूण्ड:** यहाँ से भी आहाड़ की तरह पत्थर, ताँबे और मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं।
4. **बागौर:** एक टीले की खुदाई से पत्थर और ताँबे के पुराने उपकरण व अन्य अवशेष मिले हैं।
5. **बालाथल:** यहाँ से ताँबे और पत्थर के बने बर्तन, मूर्तियाँ और दूसरे ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए हैं।
6. **नोह:** यहाँ से ताँबे और हड्डियों के औजार, लोहे की कुल्हाड़ी मिली है, जो ताँबे के युग के माने जाते हैं।
7. **चन्द्रावती:** यहाँ से मिले अवशेष मानव जीवन के रहने के तरीके और उनकी ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं को बताते हैं। यहाँ किले के अवशेष और अनाज रखने के गोदाम भी मिले हैं। यह परमार वंश की राजधानी थी।
8. **पछमता:** यहाँ से कलात्मक वस्तुएँ मिली हैं, जैसे नक्काशी वाले जार, सीप की चूड़ियाँ, मिट्टी के मनके, शंख, लेपिस लेजूली (एक तरह का कीमती पत्थर जो अफगानिस्तान में मिलता है), नीले रंग के कीमती पत्थर, मिट्टी के बर्तन और दो भट्ठियाँ या चूल्हे।
9. **गणेश्वर:** यहाँ से ताँबे और पत्थर के समय की बहुत सारी चीज़ें मिली हैं।
10. **बैराठ:** यह महाभारत के मत्स्य जनपद की राजधानी था। यहाँ से सम्राट अशोक के शिलालेख भी मिले हैं। इन अवशेषों से राजस्थान के समृद्ध अतीत का पता चलता है।
In simple words: राजस्थान के पुरातात्विक स्थलों जैसे कालीबंगा, आहाड़, गिलूण्ड, बागौर, बालाथल, नोह, चन्द्रावती, पछमता, गणेश्वर और बैराठ से हड़प्पा जैसी वस्तुएँ, पत्थर, ताँबे और मिट्टी के बर्तन, औजार, गहने, किले, गोदाम और अशोक के शिलालेख मिले हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक पुरातात्विक स्थल से प्राप्त प्रमुख अवशेषों को बिंदुवार याद करें, क्योंकि यह उस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।
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