RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः

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Detailed Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit

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Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 वस्तुनिष्ठप्रश्नाः

 

Question 1. 'सार्थम् प्रवसतो मित्रम्' इत्यत्र 'सार्थम्' इति पदस्य कोऽर्थः?
(क) विद्वान्।
(ख) धनवान्
(ग) सहयात्री
(घ) भार्या
Answer: (ग) सहयात्री
In simple words: यहाँ 'सार्थम्' शब्द का अर्थ है 'सहयात्री', यानी यात्रा में साथ चलने वाला मित्र। यह बताता है कि यात्रा के दौरान साथी ही सबसे बड़ा मित्र होता है।

🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सबसे सटीक अर्थ वाले विकल्प का चयन करें। संस्कृत के एक शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं, इसलिए संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. कः शत्रुर्दुर्जयः पुंसाम्?
(क) अहङ्कारः
Answer: (क) अहङ्कारः
In simple words: पुरुषों का सबसे कठिन शत्रु अहंकार है। अहंकार व्यक्ति को अंदर से कमजोर करता है और उसे सही निर्णय लेने से रोकता है।

🎯 Exam Tip: नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्नों में, सबसे उपयुक्त मानवीय गुण या दोष का चयन करें, जो सामान्यतः शास्त्रों में वर्णित होते हैं।

 

Question 3. गगनाद्-उच्चतर कः?
(क) माता
(ख) पिता
(ग) मित्रम्
(घ) वायुः
Answer: (ख) पिता
In simple words: आकाश से भी ऊँचा पिता होता है। पिता अपने बच्चों के लिए बहुत त्याग करते हैं और उन्हें ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे तुलनात्मक प्रश्नों में, दिए गए विकल्पों में से सबसे श्रेष्ठ या सबसे बड़ा तत्व चुनें, जैसा कि पारंपरिक ज्ञान या नैतिक शिक्षा में बताया गया हो।

 

Question 4. पैशुन्य' किम् उच्यते?
(क) अहंकारः
(ख) क्रोधः
(ग) परदूषणम्
(घ) दम्भः
Answer: (ग) परदूषणम्
In simple words: पैशुन्य का अर्थ है दूसरों की बुराई करना या चुगलखोरी करना। यह एक ऐसी आदत है जो संबंधों को खराब करती है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत शब्दों के अर्थ बताते समय, उस शब्द का सबसे सामान्य और सटीक हिंदी अर्थ चुनें, जो संदर्भ में फिट बैठता हो।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्नाः

 

Question 1. प्रवसतां कि मित्रम् ?
Answer: प्रवसतां मित्रं सार्थः अस्ति। यात्रा में साथ चलने वाला साथी ही सच्चा मित्र होता है। वह मुश्किल समय में सहायता करता है।
In simple words: यात्रा करने वाले का मित्र उसका सहयात्री होता है।

🎯 Exam Tip: लघुत्तरात्मक प्रश्नों में, सीधे प्रश्न का उत्तर दें और एक संक्षिप्त वाक्य में उसका महत्व बताएं।

 

Question 2. असाधुः कीदृशः स्मृतः ?
Answer: असाधुः निर्दयः स्मृतः। जो व्यक्ति निर्दयी होता है, उसे असाधु या दुष्ट माना जाता है। ऐसे लोग दूसरों के प्रति सहानुभूति नहीं रखते।
In simple words: निर्दयी व्यक्ति को असाधु कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: नैतिक गुणों या अवगुणों से संबंधित प्रश्नों में, सटीक संस्कृत शब्द का हिंदी अर्थ बताते हुए, उस गुण/अवगुण का सार समझाएँ।

 

Question 3. आतुरस्य किं मित्रम् ?
Answer: आतुरस्य भिषक् मित्रम्। रोगी व्यक्ति का मित्र वैद्य या चिकित्सक होता है। वैद्य रोगी को ठीक करके जीवन देता है।
In simple words: बीमार व्यक्ति का मित्र डॉक्टर (वैद्य) होता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, व्यक्ति की विशेष परिस्थिति में कौन सहायक होता है, इसका सटीक उत्तर दें।

 

Question 5. दम्भः कः परिकीर्तितः?
Answer: दम्भः धर्मो ध्वजोच्छुयः परिकीर्तितः। दम्भ उसे कहते हैं जब कोई व्यक्ति केवल दिखावे के लिए धर्म का झंडा ऊंचा करता है, लेकिन उसके मन में वास्तविक धर्म नहीं होता। यह पाखंड का एक रूप है।
In simple words: दम्भ का अर्थ है धर्म का दिखावा करना।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, संस्कृत शब्द की परिभाषा दें और उसका गहरा अर्थ भी स्पष्ट करें।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्नाः

 

Question 1. यक्ष-युधिष्ठिर' इति संवादं स्वभाषया संस्कृतेन लिखतु।
Answer: पाठ के अनुसार, एक तालाब के पास युधिष्ठिर अपने भाइयों को मृत देखकर चिंतित हो जाते हैं। तभी वे सब वृत्तांत जानकर यक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार होते हैं। यक्ष उनसे अनेक प्रश्न पूछते हैं, जैसे-'बोने वालों में सबसे श्रेष्ठ क्या है? बोने के लिए सबसे अच्छा क्या है? स्थिर रहने वालों में और संतान में सबसे श्रेष्ठ क्या है?' इन सभी प्रश्नों का उत्तर देते हुए युधिष्ठिर कहते हैं कि-बोने वालों में वर्षा श्रेष्ठ है, बोने के लिए बीज श्रेष्ठ है, स्थिर रहने वालों में गायें और संतान में पुत्र श्रेष्ठ है। इसी प्रकार यक्ष अनेक प्रश्न पूछते हैं, और युधिष्ठिर सभी प्रश्नों के उत्तर सच्चाई से देते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर, यक्ष अंत में परीक्षा के लिए उनसे कहते हैं कि 'तुमने मेरे प्रश्नों की सही व्याख्या की है, इसलिए तुम अपने भाइयों में से जिसे एक को चाहते हो, वह जीवित हो जाए।' युधिष्ठिर कहते हैं कि-मेरा मानना है कि 'दयालुता ही सबसे बड़ा धर्म है'। मैं दयालुता का अभ्यास करना चाहता हूँ। इसलिए नकुल जीवित हो जाए। युधिष्ठिर की दयालुता देखकर यक्ष अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उनके सभी भाइयों को जीवनदान देते हैं। यह संवाद जीवन के महत्वपूर्ण दर्शन को प्रकट करता है।
In simple words: युधिष्ठिर अपने मृत भाइयों को देखकर चिंतित हुए। यक्ष ने उनसे कई प्रश्न पूछे। युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धिमत्ता से सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए, जिससे यक्ष प्रसन्न हुए और उनके सभी भाइयों को जीवनदान दिया।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, कहानी का सारांश क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें। महत्वपूर्ण पात्रों और उनके संवादों को उजागर करें।

 

Question 2. यक्षः जलं पीतमानं युधिष्ठिरम् अवदत् किम् अवदत् ?
Answer: यक्ष ने जल पीते हुए युधिष्ठिर से कहा कि 'हे पार्थ! साहस मत करो, यह सरोवर मेरा पूर्वग्रह है।' यक्ष ने युधिष्ठिर से कहा कि 'मेरे प्रश्नों का उत्तर देकर ही जल पियो और इसे ले जाओ।' यह यक्ष का युधिष्ठिर को चेतावनी देने का तरीका था।
In simple words: यक्ष ने युधिष्ठिर से कहा कि यह सरोवर मेरा है और तुम्हें मेरे प्रश्नों का उत्तर दिए बिना जल नहीं पीना चाहिए।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, कौन किससे क्या कहता है और क्यों, यह स्पष्ट रूप से लिखें। संवाद का मुख्य भाव भी समझाएँ।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 व्याकरणात्मक प्रश्नाः

 

Question (क) अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेर्नाम अपि लेख्यम्
Answer:

पदम्सन्धि विच्छेदःसन्धेर्नाम
देवाताथःदवता + आताथःदीर्घसन्धिः
कश्चकः + चविसर्ग-सत्व सन्धिः

In simple words: सन्धि विच्छेद में शब्दों को अलग करके उनका मूल रूप दिखाते हैं, और फिर बताते हैं कि कौन सी सन्धि (जोड़ने का नियम) लगी है।

🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद करते समय, सन्धि के नियमों को ध्यान में रखें और विच्छेदित पदों के अर्थपूर्ण होने का भी ध्यान रखें।

 

Question (ख) निम्नलिखितपदानां समास विग्रहं कृत्वा समास नामोल्लेख करणीयः
Answer:

पदम्विग्रहःनाम
यथाप्रज्ञम्प्रज्ञाम् अनतिक्रम्यअव्ययीभाव
लोकपूजितःलोके पूजितःतत्पुरुषः
परदूषणम्परेषां दूषणम्तत्पुरुषः
महाज्ञानम्महत् अज्ञानम्कर्मधारयः

In simple words: समास विग्रह शब्दों को अलग करके उनका मूल अर्थ दिखाते हैं, और फिर बताते हैं कि वे किस प्रकार के समास से बने हैं।

🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, पद के अर्थ और उसके घटकों के बीच संबंध को समझें। प्रत्येक समास का अपना विशिष्ट विग्रह नियम होता है।

 

Question (ग) निम्नाङ्कितानां प्रकृति-प्रत्ययौ लेख्य-
Answer:

पदम्उपसर्गःप्रकृतिः (धातु)प्रत्ययः
प्रवसतःप्रवस्शतृ
अनुभवन्अनुभूशतृ
प्रोक्तम्प्रवच्क्त
कौन्तेय-कुन्तीअण्

In simple words: प्रकृति-प्रत्यय में शब्द के मूल धातु और उसमें लगे प्रत्यय को अलग करते हैं। उपसर्ग भी शब्द के आगे जुड़ने वाला अंश होता है।

🎯 Exam Tip: प्रकृति और प्रत्यय को अलग करते समय, धातु के रूप और प्रत्यय के अर्थ को ध्यान में रखें। उपसर्ग भी पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question (घ) अधोलिखित पदानां मूलशब्दं विभक्तिश्च दर्शय-
Answer:

पदम्मूलशब्दःविभक्तिः
आतुरस्यआतुरषष्ठी
बुद्ध्याबुद्धितृतीया
मयाअस्मद्तृतीया
तस्मात्तत्पंचमी

In simple words: यहाँ हर शब्द का मूल रूप और वह किस विभक्ति (कारक) में है, यह बताया गया है। इससे शब्द के व्याकरणिक रूप को समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: मूलशब्द और विभक्ति की पहचान करते समय, शब्द के लिंग, वचन और कारक चिह्न पर ध्यान दें।

 

Question (ङ) निम्नलिखितपदेषु मूलधातुं लकारञ्च चिनुत
Answer:

पदम्मूलधातुःलकारः
जननीजनणिनी (प्रत्यय)
आकाशात्आकाशपंचमी विभक्ति (नामपद)
पत्नीपत्नी (प्रत्यय)

In simple words: यह तालिका शब्दों के मूल धातु और उनके लकार (काल) को दर्शाती है। कुछ शब्द धातु से नहीं बल्कि प्रत्यय से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: धातु और लकार की पहचान करते समय, शब्द के रूप परिवर्तन और उसके अर्थ पर ध्यान दें। ध्यान रहे कि सभी शब्द धातु से नहीं बनते।

 

Question (च) निम्नलिखित वाक्यानाम् आधारेण प्रश्ननिर्माणं करोतु
1. पाण्डवाः पञ्च भ्रातरः आसन्।
2. पाण्डवेषु युधिष्ठिरः ज्येष्ठः आसीत्।
3. गृहे भार्या मित्रं भवति।
4. 'महाभारत' शतसाहस्री संहिता इत्यपि कथ्यते।
Answer:
1. पाण्डवाः कति भ्रातरः आसन्?
2. पाण्डवेषु कः ज्येष्ठः आसीत्?
3. गृहे किं मित्रं भवति?
4. 'महाभारत' किम् इत्यपि कथ्यते?
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्यों के आधार पर प्रश्न बनाए गए हैं। प्रश्न निर्माण में मूल वाक्य के मुख्य शब्द को प्रश्नवाचक शब्द से बदला जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित शब्द या जिस शब्द के बारे में प्रश्न पूछा जा रहा है, उसकी विभक्ति और लिंग के अनुसार उचित प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करें।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 8 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. शब्दार्थाः

 

Question: अधोलिखितशब्दानाम् हिन्द्याम् अर्थः लिखत
Answer:

शब्दःअर्थः
तायम्जल
वार्यमाणारोके जाते हुए
हरस्वले जाओ
कामयेचाहता हूँ
आवपताम्कृषि करने वालों को
खात्आकाश से
वातात्वायु से
आतुरस्यरोगी का
पैशुन्यम्चुगलखोरी
भिषज्औषधी
दैवम्भाग्य
आनृशंस्यम्दया तथा समता भाव को

In simple words: यह तालिका महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों और उनके हिंदी अर्थों को दर्शाती है। ये शब्द पाठ को समझने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: शब्दार्थ याद करते समय, प्रत्येक शब्द के मूल अर्थ और उसके विभिन्न उपयोगों को समझें। इससे पाठ को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।

2. प्रश्ननिर्माणम्प्रश्नः

 

Question: रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
1. सः हतान् भ्रातृन् ददर्श।
2. तोयं गाहमानः सः अन्तरिक्षात् शुश्रुवे।
3. पार्थः! साहसं मां कार्षीः।
4. अहं तव पूर्वपरिग्रहं न कामये।
5. निवपता बीजं वरम्।
6. प्रसवतां पुत्रः वरम्।
7. माता गुरुतरा भूमेः।
8. मनः वातात् शीघ्रतरम्।
9. चिन्ता तृणात् बहुतरी।
10. प्रवसतः सार्थः मित्रम्।
11. दानं मित्रं मरिष्यतः।
12. क्रोधः सुदुर्जयः शत्रुः।
13. लोपः अनन्तकः व्याधिः।
14. सर्वभूतहितः साधुः स्मृतः।
15. दैवं दोनफलं प्रोक्तम्।
16. पैशुन्यं परदूषणम्।
17. मे त्वया प्रश्नाः व्याख्याताः।
18. आनृशंस्यः परो धर्मः।
Answer:
1. सः कान् ददर्श?
2. तोयं गाहमानः सः कस्मात् शुश्रुवे?
3. पार्थः! किम् मा कार्षीः?
4. अहं तव किम् न कामये?
5. निवपता किं वरम्?
6. केषां पुत्रः वरम्?
7. का गुरुतरा भूमेः?
8. मनः कस्मात् शीघ्रतरम्?
9. का तृणात् बहुतरी?
10. प्रवसतः कः मित्रम्?
11. किं मित्रं मरिष्यतः?
12. क्रोधः कीदृशः शत्रुः?
13. कः अनन्तकः व्याधिः?
14. कः साधुः स्मृतः?
15. दैवं किम् प्रोक्तम्?
16. पैशुन्यं किम्?
17. मे त्वया के व्याख्याताः?
18. कः परो धर्मः?
19. अहं किं चिकीर्षामि?
20. ते के जीवन्तु?
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर उचित प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करके प्रश्न बनाए गए हैं। प्रश्न निर्माण करने से वाक्य का अर्थ स्पष्ट होता है और व्याकरणिक समझ बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, मूल वाक्य के व्याकरणिक संरचना (विभक्ति, लिंग, वचन) को बनाए रखते हुए सही प्रश्नवाचक शब्द का उपयोग करें। यह सुनिश्चित करें कि निर्मित प्रश्न का उत्तर मूल वाक्य हो।

3. भावार्थलेखनम्

 

Question: अधोलिखितपद्यांशानाम् हिन्दीभाषया भावार्थं लिखत
(i) वर्षमावपतां श्रेष्ठम्।
(ii) माता गुरुतरी भूमेः।
(iii) दानं मित्रं मरिष्यतः।
(iv) सर्वभूतहितः साधुरसाधुर्निदयः स्मृतः।
(v) आनृशंस्य परो धर्मः।
Answer:
(i) वर्षमावपता श्रेष्ठम्।
भावार्थ- यह पद्यांश 'यक्ष-युधिष्ठिरयोः संवादः' पाठ से लिया गया है। वन में प्यास से व्याकुल नकुल जब जल लाने के लिए एक तालाब पर जाता है और पानी पीने को तैयार होता है, तब यक्ष वहाँ आकर अपने प्रश्नों का उत्तर दिए बिना पानी पीने से रोकता है। यक्ष के प्रश्न 'खेती करने वालों के लिए सबसे अच्छा क्या है?' के उत्तर में युधिष्ठिर कहते हैं कि वर्षा ही सर्वश्रेष्ठ है। किसान का परिश्रम वर्षा के बिना सफल नहीं होता। इसलिए वर्षा ही उसके लिए सबसे अधिक लाभदायक है।
(ii) माता गुरुतरी भूमेः।
भावार्थ- 'यक्ष-युधिष्ठिरयोः संवादः' पाठ के इस पद्यांश में यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्न 'पृथ्वी से भी भारी कौन है?' के उत्तर में युधिष्ठिर ने कहा है कि माता का स्थान पृथ्वी से भी ऊँचा है। संसार में माता का स्थान सबसे आदरणीय है। संतान को जन्म देने और उसका पालन-पोषण करने में माता जो कष्ट सहती है, उसका बदला किसी भी तरह नहीं चुकाया जा सकता है।
(iii) दानं मित्रं मरिष्यतः।
भावार्थ- 'यक्ष-युधिष्ठिरयोः संवादः' पाठ के इस पद्यांश में यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्न 'मरने वाले का मित्र कौन है?' के उत्तर में युधिष्ठिर ने कहा है कि "मरने वाले का मित्र दान है।" इसका अर्थ है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के द्वारा किया गया दान ही उसका सहायक होता है। धन-दौलत और परिवार के लोग मृत्यु के बाद साथ नहीं जाते, न ही उनसे कोई लाभ मिलता है। केवल दिया हुआ दान ही परलोक में काम आता है। इसलिए दान को सच्चा मित्र बताया गया है।
(iv) सर्वभूतहितः साधुरसाधुर्निदयः स्मृतः।
भावार्थ- 'यक्ष-युधिष्ठिरयोः संवादः' पाठ के इस पद्यांश में यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्न 'साधु कौन है और असाधु कौन है?' के उत्तर में युधिष्ठिर ने कहा है कि सभी प्राणियों का हित चाहने वाला व्यक्ति साधु माना जाता है और निर्दयी व्यक्ति असाधु माना जाता है। इस कथन के द्वारा साधु और असाधु के लक्षण बताए गए हैं। साधु वह है जो परोपकार में लगा रहता है, लेकिन जो प्राणियों के प्रति दयाभाव नहीं रखता, उसे असाधु (दुर्जन) माना जाता है।
(v) आनृशंस्य परो धर्मः।
भावार्थ- 'यक्ष-युधिष्ठिरयोः संवादः' पाठ के इस पद्यांश में यक्ष के अनेक प्रश्नों का युधिष्ठिर अपनी बुद्धिमत्ता से उत्तर देते हैं, जिससे यक्ष अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं। अंत में, यक्ष युधिष्ठिर की परीक्षा लेने के लिए कहते हैं कि "मैं तुमसे प्रसन्न हूँ, इसलिए तुम जिसे चाहते हो वह एक भाई जीवित हो जाए।" इस पर युधिष्ठिर कहते हैं कि 'दया और समता का भाव ही सबसे बड़ा धर्म है।' इसलिए नकुल जीवित हो जाए। इसका अर्थ है कि प्राणियों का यही धर्म है कि वे सभी में समानता और दया का भाव रखें, इसी से सबका कल्याण होता है। युधिष्ठिर के इस भाव के कारण यक्ष उनके सभी भाइयों को जीवित कर देते हैं।
In simple words: यहाँ श्लोकों के भावार्थ बताए गए हैं। ये बताते हैं कि वर्षा खेती के लिए श्रेष्ठ है, माता पृथ्वी से भी महान हैं, दान मरने वाले का मित्र है, सभी प्राणियों का हित करने वाला साधु है, और दयालुता ही सबसे बड़ा धर्म है।

🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, पद्यांश के मूल अर्थ को सरल हिंदी में समझाएँ। पाठ के संदर्भ को भी स्पष्ट करें और उसमें निहित नैतिक शिक्षा या ज्ञान को उजागर करें।

4. अन्वयलेखनम्

 

Question: अधोलिखितश्लोकानां अन्वयं लिखत

(5) पाठ्यपुस्तकाधारितं भाषिककार्यम्

(क) कर्तृकियोपदचयनम्

 

Question: अधोलिखितवाक्येषु कर्तृक्रियापदयोः चयनं कुरुत
(i) स ददर्श हतान् भ्रातृन्।
(ii) गाहमानश्च तत् तोयमन्तरिक्षात् स शुश्रुवे।
(iii) प्रश्नानुक्त्वा तु कौन्तेय! ततः पिब हरस्व चे।
(iv) न चाहं कामये यक्ष तव पूर्वपरिग्रहम्।
(v) उच्छ सन् न स जीवति।
(vi) त्वमेकं भ्रातृणां यमिच्छसि।
(vii) अहम् आनृशंस्यं चिकीर्षामि।
(viii) नकुलो यक्ष ! जीवतु।
(ix) ते भ्रातरः सर्वे जीवन्तु।
(x) सः बुद्ध्या विचिन्तयामास।
Answer:

कर्तृपदम्क्रियापदम्
(i)सःददर्श
(ii)सःशुश्रुवे
(iii)कौन्तेय !पिब, हरस्व
(iv)अहम्कामये
(v)सःजीवति
(vi)त्वम्इच्छसि
(vii)अहम्चिकीर्षामि
(viii)नकुलःजीवतु
(ix)ते सर्वे भ्रातरःजीवन्तु
(x)सःविचिन्तयामास

In simple words: इन वाक्यों में कर्ता (क्रिया करने वाला) और क्रिया (कार्य) को अलग-अलग दिखाया गया है। इससे वाक्य की संरचना को समझने में आसानी होती है।

🎯 Exam Tip: कर्ता और क्रिया की पहचान करते समय, वाक्य के अर्थ और क्रिया के पुरुष, वचन और लिंग पर ध्यान दें।

(ख) विशेषणविशेष्यचयनम्

 

Question (i) "स ददर्श हतान् भ्रातृन्' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: हतान्
In simple words: यहाँ 'हतान्' शब्द विशेषण है, क्योंकि यह 'भाइयों' की विशेषता बता रहा है कि वे मृत थे।

🎯 Exam Tip: विशेषण वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। इसे पहचानते समय 'कैसा/कैसी/कितना' प्रश्न पूछें।

 

Question (iii) "कः शत्रुर्दुर्जयः पुंसाम्' इत्यत्र विशेषणपदं किम्?
Answer: दुर्जयः।
In simple words: यहाँ 'दुर्जयः' शब्द विशेषण है, क्योंकि यह 'शत्रु' की विशेषता बता रहा है कि वह कैसा है - 'जीतना कठिन' (दुर्जय)।

🎯 Exam Tip: विशेषण और विशेष्य की पहचान के लिए, यह देखें कि कौन सा शब्द किसकी विशेषता बता रहा है।

 

Question (iv) "सर्वभूतहितः साधुः स्मृतः' इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: साधुः।
In simple words: यहाँ 'साधुः' शब्द विशेष्य है, क्योंकि इसकी विशेषता 'सर्वभूतहितः' शब्द बता रहा है।

🎯 Exam Tip: विशेष्य वह शब्द होता है जिसकी विशेषता बताई जाती है। विशेष्य अक्सर संज्ञा या सर्वनाम होता है।

 

Question (v) “आनृशंस्य परो धर्म:'-इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: धर्मः।
In simple words: यहाँ 'धर्मः' शब्द विशेष्य है, क्योंकि इसकी विशेषता 'परो' (सर्वोच्च) और 'आनृशंस्य' (दयालुता) बता रहे हैं।

🎯 Exam Tip: विशेष्य को खोजने के लिए, उस शब्द को देखें जिसे विशेषण द्वारा वर्णित किया जा रहा है।

 

Question (vi) “तस्मात् ते भ्रातरः सर्वे जीवन्तु'-इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: भ्रातरः।
In simple words: यहाँ 'भ्रातरः' शब्द विशेष्य है, क्योंकि 'ते' (वे) और 'सर्वे' (सभी) शब्द उसकी विशेषता बता रहे हैं।

🎯 Exam Tip: विशेष्य हमेशा विशेषण के लिंग, वचन और विभक्ति का पालन करता है।

(ग) सर्वनाम-संज्ञा-प्रयोगः

 

Question: अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोगं कृत्वा वाक्यं पुनःलिखत
1. स ददर्श हतान् भ्रातृन्।
2. गाहमानश्च तत् तोयमन्तरिक्षात् स शुश्रुवे।
3. बलात् तोयं जिहीर्षन्तस्ततो वै मृदिता मया।
4. मा साहसं कार्षीः मम पूर्वपरिग्रहः।
5. प्रश्नान् प्रतिवक्ष्यामि पृच्छ माम्।
6. व्याख्याता मे त्वया प्रश्नाः।
7. आनृशंस्य परोधर्मः परमार्थाच्च मे मतम्।

Question: अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानां सर्वनामपदानि लिखत
Answer:
1. इमे
2. सः
3. ततः
4. तत्
5. सर्वे।
In simple words: यह उत्तर रेखांकित शब्दों के लिए सही सर्वनाम पद बताता है। सर्वनाम शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होते हैं।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम पद का चयन करते समय, मूल संज्ञा के लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार उचित सर्वनाम का प्रयोग करें।

(घ) समानविलोमपदचयनम्

 

Question: अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां पर्यायबोधकपदानि लिखत
1. स ददर्श हतान् भ्रातृन्।
2. युगान्ते समनुप्राप्ते शक्रप्रतिमगौरवम्।
3. गाहमानश्च तत् तोयम्।
4. पार्थ! मा साहसं कार्षीः।
5. गावः प्रतिष्ठमानानाम् वरम्।
6. माता गुरुतरा भूमेः।
7. खात् पितोच्चतरस्तथा।
8. भार्या मित्रं गृहे सतः।

 

Question: अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विलोमपदानि लिखत
Answer:
1. शत्रुः
2. असाधुः
3. अदैवम्
4. अधर्मः
5. कातराः
6. पुत्री
7. पिता
8. जीवितस्य।
In simple words: यह उत्तर रेखांकित शब्दों के लिए विलोम शब्द (उल्टे अर्थ वाले शब्द) बताता है। विलोम शब्द से किसी शब्द का विपरीत अर्थ समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, दिए गए शब्द के सटीक विपरीत अर्थ वाले शब्द का चयन करें। शब्द के लिंग और वचन का ध्यान रखें।

(ङ) कः कस्मै कथयति

 

Question: अधोलिखितवाक्यानि कः कस्मै कथयति
(i) बलात् तोयं जिहीर्षन्तस्ततो वै मृदिता मया।
(ii) मा साहसं कार्षीः मम पूर्वपरिग्रहः।
(iii) प्रश्नानुक्त्वा पिब हरस्व च।
(iv) तस्मात् ते भ्रातरः सर्वे जीवन्तु।
Answer:

कः (कौन)कस्मै कथयति (किससे कहता है)
(i)यक्षःयुधिष्ठिराय
(ii)यक्षःयुधिष्ठिराय
(iii)यक्षःयुधिष्ठिराय
(iv)युधिष्ठिरःयक्षाय
(v)युधिष्ठिरःयक्षाय
(vi)यक्षःयुधिष्ठिराय
(vii)युधिष्ठिरःयक्षाय
(viii)यक्षःयुधिष्ठिराय
(ix)युधिष्ठिरःयक्षाय
(x)यक्षःयुधिष्ठिराय

In simple words: यह तालिका बताती है कि कहानी में कौन सा व्यक्ति कौन सी बात किससे कहता है। यह संवादों को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, वक्ता (कहने वाला) और श्रोता (सुनने वाला) की सही पहचान करें। संवाद का संदर्भ भी महत्वपूर्ण होता है।

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RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः

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Detailed Explanations for Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Sanskrit chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Sanskrit Class 12 Solved Papers

Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sanskrit are as per latest RBSE curriculum.

Are the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sanskrit. You can access RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 8 यक्ष-युधिष्ठिरयो संवादः in printable PDF format for offline study on any device.